पोषण माह की सफलता के लिए बेलदौर में सफाई अभियान
पोषण से ही बच्चे हो पाएंगे तंदुरुस्त
– छह माह तक केवल मां का दूध, फिर दें अल्प ठोस आहार
– मसले हुए फल और सब्जियां निश्चित मात्रा और समय पर दें
– पाचन तंत्र होगा मजबूत, होगा शारीरिक विकास
– पोषण माह में मां व शिशु के खानपान पर दिया जा रहा है जोर
लखीसराय, 14 सितम्बर
एक शिशु के संपूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास में उसके पोषण आहार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। जन्म के पहले छह माह में शिशु के लिए तो मां का दूध अमृत होता है। मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व जैसे पानी, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स, वसा, कैलोरी शिशु को न केवल बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। साथ ही बच्चे की पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। इसलिए मां के दूध को शिशु का प्रथम टीका कहा गया है। जो छह माह तक के बच्चे के लिए बेहद जरूरी है। वहीं छह माह के बाद बच्चे के सतत विकास के लिए ऊपरी आहार की जरूरत पड़ती है। लेकिन इस दौरान यह ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उसे कैसा आहार दें। पोषण माह (एक से 30 सितम्बर) के दौरान इस पर विशेष ध्यान देते हुए जिले में जागरूकता कार्यक्रमों और गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है।
– मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार, ठोस आहार देती है मजबूती
आईसीडीएस की कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि जिले में पोषण माह में मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बच्चे के लिए मां के दूध के साथ पोषण से भरे आहार के बारे में लोगों को जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि घर और परिवार के सदस्यों को बताया जा रहा है कि छह माह के बाद शिशु को मां के दूध के अलावा ठोस और ऊपरी आहार देना शुरू कर देना चाहिए। इस दौरान शुरू किया गया बेहतर पोषण आहार शिशु को स्वस्थ, मजबूत और खुशहाल बनाता है। हालांकि इस दौरान भोजन की मात्रा कितनी होनी चाहिए और बच्चे को क्या खिलाना है यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस वक्त मां और अभिभावक को सावधानी से यह फैसला लेना होता है कि उन्हें अपने शिशु के लिए कैसा ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू करना चाहिए, जो उसके पाचन शक्ति और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखें।
– मसली हुई सब्जियां और फल देकर देखें बच्चे की प्रतिक्रिया
कुमारी अनुपमा सिन्हा के अनुसार छह माह बाद बच्चे को स्तनपान कराने के साथ धीरे–धीरे तरल ठोस खाद्य पदार्थ देना चाहिए। बच्चे के पाचन में परेशानी न हो और उसे ग्रहण कर लें इसलिए उसे धीरे–धीरे मसले हुए फल और सब्जियां देना शुरू करें। बच्चा जैसे–जैसे दिलचस्पी लेना शुरू करे ठोस खाद्य पदार्थ देना शुरू करें। हर सप्ताह में वृद्धि के अनुसार शिशु को रोजाना एक नए प्रकार का आहार देना आरंभ करें। अनाज के बाद जहां तक संभव हो बच्चे को मसली हुई सब्जियां और फल देकर देखें कि वह किस तरह की प्रतिक्रिया देता है। यदि बच्चे ने ठोस खाद्य पदार्थों पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है, तो सुनिश्चित करें कि बच्चे को विभिन्न प्रकार के ठोस खाद्य पदार्थों (जैसे, मसला हुआ, नर्म या पका हुआ और सादा आहार) का स्वाद मिलता रहे। शिशु की बढ़ती शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए, मसली हुई सब्जियां और फल लगातार दिए जा सकते हैं।
– यह है बच्चे की आहार प्रणाली
– बच्चे के छह माह के होने के बाद से उसे हल्का ऊपरी आहार देना शुरू करें।
– शुरू में नरम खिचड़ी, दाल-चावल व हरी सब्जियां जैसे मसला हुआ आहार दें।
– 7 से 8 माह तक के बच्चों को दो कटोरी, 9-11 महीने के बच्चों को तीन कटोरी और 12 से 24 माह तक के बच्चों 4-5 कटोरी अच्छी तरह से कतरा व मसला हुआ आहार दें।
– इन लक्षणों से पता चलेगा कि बच्चा भूखा है या नहीं
न केवल आहार देना, बल्कि इसका पता लगाना कि बच्चा भूखा है या उसका पेट भर गया है भी बेहद जरूरी होता है। कुछ लक्षणों से हम इसका पता लगा सकते हैं। जैसे अधिक भूख लगने पर बच्चा रोने लगेगा। वहीं बच्चे का मुंह को खुला रखना, उंगलियों और मुट्ठी इत्यादि को चूसने से पता चलता है कि बच्चा और अधिक खाना चाहता है या भूखा है। वहीं जब बच्चा पर्याप्त खा चुका होगा तो वह अपना मुंह बंद कर लेगा या सिर दूसरी ओर घुमा लेगा। साथ ही पेट भरने पर बार-बार भोजन देने पर लेने से इनकार भी करेगा।
सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
जिले के 12 प्रखंडों के कालाजार प्रभावित गांव में जल्द होना है छिड़काव
सदर अस्पताल के साथ कहलगांव और नवगछिया के अनुमंडल अस्पताल में दिया गया प्रशिक्षण
भागलपुर, 14 सितंबर
कालाजार से मुक्ति के लिए सिंथेटिक पायराथायराइड के छिड़काव को लेकर सोमवार को स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया. इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को छिड़काव के तरीके बताए गए. साथ ही उन्हें बताया गया कि जिले के कौन-कौन से गांवों में कालाजार के लक्षण वाले मरीज चिन्हित हुए हैं.
सदर अस्पताल, नवगछिया और कहलगांव के अनुमंडल अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों को केयर इंडिया व डॉक्टरों की टीम ने प्रशिक्षण दिया. मालूम हो कि जिले के 12 प्रखंडों में कालाजार रोगियों की पहचान के लिए सर्वे का काम 2 सितंबर को पूरा हो गया था. 1 सप्ताह तक चले सर्वे में सिर्फ पीरपैंती प्रखंड में चार उपचाराधीन मरीज की पहचान हुई थी. जांच के दौरान सन्हौला प्रखंड में भी कुछ लक्षण वाले व्यक्ति पाए गए थे, लेकिन जांच में कालाजार की पुष्टि नहीं हुई. 25 अगस्त से आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कालाजार मरीजों की पहचान के लिए सर्वे का कार्य कर रही थी. अब उम्मीद है कि सितंबर महीने के आखिर में स्वास्थ्यकर्मी गांवों में नली, नालों व घरों की दीवार पर सिंथेटिक पाइराथाइराइड का छिड़काव का काम करेंगे. इसे लेकर ही स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण दिया गया.
कालाजार की रोकथाम को लेकर विभाग अलर्ट: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. प्रभावित प्रखंडों में छिड़काव का काम जल्द ही किया जाएगा. उन्होंने बताया कि जिले के 12 प्रखंडों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वे का काम किया था. इस काम में केयर इंडिया की टीम ने भी सहयोग किया. जिले के 4 प्रखंड कालाजार से मुक्त है, इसलिए वहां छिड़काव का काम नहीं होगा. केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों को छिड़काव के तरीके बताए गए. उन्हें चिन्हित गांव की जानकारी दी गई.
घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:
डॉ पटेल ने बताया अब दवा का छिड़काव किया जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें. यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं. कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई.
कालाजार की ऐसे करें पहचान: डॉ पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज .को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते है. उन्होंने बताया कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए तथा रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए.
*जल्द ही विरोधियों को मंसूबों पर पानी फेर बेनकाब करेगी रितिका आयल कंपनी*
मशहूर वेजिटेबल आयल कंपनी ‘स्कूटर’ के ब्रांड व लोगो का अवैध फायदा उठाने के प्रकरण में रितिका वेजिटेबल आयल कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को बेबुनियाद और विरोधियों द्वारा कंपनी की छवि ख़राब करनी की साजिश बताया। रितिका कंपनी का कहना है कि ‘स्कूटर’ का एगमार्क लाइसेंस उन्ही के पास है और वो इसे प्रयोग करने के पूरी तरह से हकदार हैं। कंपनी के लिए हमेशा से ग्राहकों की संतुष्टि और ब्रांड की गरिमा सर्वोपरि हैं। जिससे किसी भी प्रकार का समझौता नहीं हुआ। कंपनी के विरोधियों ने ईर्ष्या भावना के मद्देनजर ऐसे आधारहीन आरोप लगाए और अब जिलाधिकारी व सिविल सर्जन के पास शिकायत का हवाला देकर ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही है। कंपनी के मुताबिक उसके पास ‘स्कूटर’ ब्रांड का एगमार्क है और इसका अवैध उपयोग एक अफवाह मात्र है। कंपनी ने अपने विरोधियों द्वारा की जा रही साजिशों के खिलाफ जल्द ही जरुरी क़ानूनी कार्यवाही करेगी।
गौरतलब है कि दीपक वेजप्रो द्वारा रितिका वेजिटेबल आयल कंपनी पर प्रसिद्ध वेजिटेबल आयल ब्रांड ‘स्कूटर’ का लोगो लगाकर अवैध तरीके से मार्केट में तेल बेचने के आरोप लगाए गए। इसी प्रकरण में रितिका वेजिटेबल आयल कंपनी के चेयरमैन बाबू लाल डाटा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और विरोधियों को जवाब देते हुए कहा कि, ‘हम पिछले 40 सालों से अपने ब्रांड के साथ मार्केट में बरक़रार हैं और जिन लोगों के पास एगमार्क नहीं हैं वे गलत मंशा से हमारी छवि को धूमिल करना चाहते हैं। हम ऐसी नापाक और ओछी हरकतों की घोर निंदा करते हैं और यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारे खिलाफ साजिश रचने वालों के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे। जल्दी ही सभी लोगों के सामने उनकी इन हरकतों का पर्दाफाश होगा।
सबको जानकारी में रहना चाहिए की स्कूटर मार्क कच्ची घानी तेल पिछले 40 सालों से बनाते आ रहे हैं और मार्केट में इसकी अपनी पहचान और वैल्यू है। साथ ही एक उच्च गुणवत्ता का आधार है। हमारे सारे उत्पाद जिसमें रितिका ब्लेंडेड ऑयल भी है, जो भारत के कई राज्यों में बिकता है, जिसको भारत सरकार की एगमार्क संस्था ने प्रमाणित किया है। यह खाने योग्य गुणवत्ता के आधार पर परिपक्व एवं सुरक्षित है जिससे किसी भी तरह की कोई शिकायत नहीं हो सकती है। हमारे विश्वास के साथ इसको अपने ग्राहक के पास लेकर जाते हैं जिससे उनको बेहतर गुणवत्ता का तेल उपयोग के लिए मिले। इसको किसी भी आधार पर कोई भी व्यक्ति बेबुनियाद रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा तो हम इसको बर्दाश्त नहीं करेंगे और ग्राहक को अच्छी से अच्छी सर्विस देने के लिए हम जो भी कदम उठाएंगे।
इसके अतिरिक्त बाबू लाल डाटा मस्टर्ड आयल प्रोडूसर ऑफ़ इंडिया और सेंट्रल आर्गेनाईजेशन फॉर आयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड के भी चेयरमैन हैं।
कोरोना की जांच में भागलपुर ने किया टॉप
– जिले में अब तक 2.3 लाख लोगों की हो चुकी है कोरोना जांच
– जिले में कोरोना मरीजों की संख्या में भी धीरे-धीरे आ रही कमी
भागलपुर, 11 सितंबर
जिले में कोरोना की चेन तोड़ने को लेकर स्वास्थ्य विभाग का प्रयास अब रंग लाने लगा है. भागलपुर में 2.3 लाख लोगों की जांच के साथ प्रदेश में यह सबसे आगे है. ज्यादा जांच होने का कुछ फायदा भी दिख रहा है और कोरोना मरीजों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होने लगी है. पहले जहां 100 से लेकर 200 मरीज प्रतिदिन कोरोना के मिलते थे, वहीं अब यह आंकड़ा कुछ दिनों से 2 अंकों में आ गया है. हालांकि इसके बावजूद लोगों को कोरोना को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है. क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है.
– जांच से कोरोना को दे रहे मात
सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले में कोरोना जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है. पहले सिर्फ सदर अस्पताल और मायागंज अस्पताल में लोगों की कोरोना जांच हो रही थी. इसके बाद सभी रेफरल व अनुमंडल अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी कोरोना जांच शुरू की गई. इसके बाद गांव- गांव में शिविर लगाकर लोगों को कोरोना जांच के लिए जागरूक किया गया. इसी का परिणाम है कि जिले में इतनी संख्या में लोगों की कोरोना जांच हो सकी है.
– एक दिन में दस हजार से भी अधिक जांच होने लगी
जिले में अभी एक दिन में दस हजार लोगों की कोरोना जांच हो रही है. सिविल सर्जन और जिलाधिकारी के स्तर पर जांच की निगरानी की जा रही है. गांव-गांव में से शिविर लगाकर एंटीजन किट से लोगों की कोरोना जांच हो रही है. वही सदर अस्पताल व मायागंज अस्पताल में एंटीजन किट के साथ-साथ टू-नॉट मशीन से भी लोगों की कोरोना जांच हो रही है. ज्यादा संख्या में जांच होने पर भी कम मरीज मिलना अच्छा संकेत है। मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ हेमशंकर शर्मा ने कहा कि इतनी संख्या में कोरोना मरीजों की जांच होने पर भी मरीजों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगी है. यह एक तरह से अच्छे संकेत है, लेकिन इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. घरों से निकलने वक्त मास्क जरूर लगाएं. शारीरिक दूरी का पालन करें और भीड़ से बचें, तभी हमलोग मिलकर कोरोना को मात दे पाएंगे.
– कोरोना जांच के लिए गांवों में माइकिंग
कोरोना जांच के लिए लोगों से आगे आने की अपील की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य गांव- गांव घूमकर माइकिंग कर लोगों से जांच के लिए आने को कह रही है. टीम के सदस्य लोगों को बता रहे हैं कि जांच कराने के क्या फायदे हैं. जांच कराने से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है. सरकार की गाइडलाइन का भी पालन हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कोरोना जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रही है. जांच करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना किट पहनकर जांच कर रहे हैं, साथ ही जांच के दौरान सामाजिक दूरी का भी पालन कर रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी के अलावा जो लोग वहां पर मौजूद रहते हैं, सभी लोग ग्लव्स और मास्क पहने रहते हैं. इससे दूसरों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा. इसलिए बेहिचक जांच के लिए आगे आएं वहां किसी तरह का कोई खतरा नहीं है
कोरोना काल में अस्थमा के मरीज रहें सावधान
– अस्थमा के मरीजों का कोविड-19 के संक्रमण का खतरा अधिक
– बारिश और बाढ़ के समय में अस्थमा के अटैक का खतरा होता है अधिक
– साफ-सफाई के साथ रखें सेहत का विशेष ख्याल, खाने-पीने में बरतें सावधानी
मुंगेर, 11 सितम्बर
अस्थमा से पीड़ित मरीजों को कोविड-19 के काल में विशेष सतर्क और सावधान रहने की जरूरत है। थोड़ी सी भी चूक होने पर वह कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। अस्थमा के मरीजों के साथ संक्रमण का खतरा अधिक होता है। कोविड-19 के साथ बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। इसलिए अस्थमा मरीजों को विशेष रूप सावधान रहने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में भी अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है। थोड़ी सी सावधानी बरतने पर इसका मुकाबला भी किया जा सकता है।
– सावधानी से बीमारी को दें मात
सिविल सर्जन डॉ के पुरुषोत्तम ने बताया कि वर्तमान में चल रहे मौसम में बढ़ी हुई उमस के कारण फंगस में बढ़ोत्तरी हो जाती है। इससे अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है। बारिश के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी हो जाती है, जो अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसानदेह है। कुछ वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते है और इससे भी अस्थमा की समस्या बढ़ती है।
– नियमित रूप से दवा का करें सेवन
अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से दवाई का सेवन करना चाहिए। अधिकांश अस्थमा के मरीज दवाई लेते हैं और नियमित दवाई लेने से कई प्रकार का परेशानी उत्पन्न होने की संभावना नहीं के बराबर होती है। डॉक्टर ने अगर नियमित दवा खाने के लिए कहा है तो लापरवाही न बरतें और इस पर अमल करें। दवा का एक भी डोज छूटे नहीं। इस बात का ध्यान रखें।
– खुली और ताजी हवा में रहें
अस्थमा से पीड़ित मरीजों को अधिकांश समय खुली और ताजी हवा में बिताना चाहिए और पर्याप्त रोशनी भी लेनी चाहिए। साथ ही ताजे और शुद्ध पेयजल का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए। हल्का भोजन खाना चाहिए। भारी भोजन के सेवन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। अस्थमा के मरीजों को भोजन धीरे-धीरे एवं खूब चबाकर करना चाहिए। ऐसे मरीज दिन में आठ से दस बार पानी अवश्य सेवन करें। डॉक्टर की सलाह लेकर अस्थमा के रोगी को शरीर में एसिड पैदा करने वाली चीजें जैसे कार्बोहाइड्रेटष फैट्स और प्रोटीन का इस्तेमाल कम मात्रा में करने की आवश्यकता है।
– खाने में हल्की चीजों का करें सेवन
अस्थमा मरीजों को हल्की चीजें का खाने में इस्तेमाल करना चाहिए और दोपहर व रात में खाने के साथ कच्ची सब्जियां और टमाटर, गाजर और सलाद का इस्तेमाल करना चाहिए। अस्थमा के रोगियों को तनाव से बचने का प्रयास करना चाहिए। इन सभी के कारण अस्थमा अटैक आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इनके लिए इन्हेलर का भी बेहतर विकल्प है।
– इन बातों का रखें ध्यान
– नम और उमस भरे क्षेत्र को नियमित रूप से सुखाते रहें
– बाथरूम की नियमित रूप से सफाई करें
– एक्जॉस्ट फैन का उपयोग करें और घर में नमी न होने दे
– भीगे कपड़े से फर्श की सफाई करें
– रोजाना सांस लेने की कोई व्यायाम करें
– मोटी तकिया रखकर सोएं। इससे भी आपको अस्थमा की समस्या से राहत मिलगी।
पोषण माह की सफलता के लिए बेबिनार पर मंथन
– वेबीनार बैठक का होगा आयोजन, दी जाएगी जानकारी
– शनिवार, 12 सितम्बर को अपराहृन तीन बजे से होगी वर्चुअल बैठक
– राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य ने पत्र भेजकर दी यह जानकारी
– एक सितम्बर से पोषण माह के तहत कई गतिविधियों का हो रहा है आयोजन
– बच्चे के जीवन के प्रथम एक हजार दिन पर दिए जाएंगे आवश्यक दिशानिर्देश
लखीसराय, 11 सितम्बर
जिले में एक से 30 सितंबर तक पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार द्वारा इस दौरान चलाए जा रहे कार्यक्रमों की सफलता के लिए उसकी सतत निगरानी के साथ आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में डॉक्टर विजय प्रकाश राय, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य ने जिले के सिविल सर्जन सह सदस्य, जिला स्वास्थ्य समिति को पत्र लिखा है। पत्र में पोषण माह के दौरान किए जाने वाले गतिविधियों से संबंधित वेबीनार के बैठक में भाग लेने के लिए विशेष दिशानिर्देश दिए गए हैं। पत्र में बताया गया है कि जिले में पोषण माह के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
– जागरुकता का अभियान
इस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा जागरूकता के साथ गतिविधियां की जा रही हैं। पोषण माह के तहत कार्यक्रमों का आयोजन 30 सितम्बर तक होना है। इसकी सफलता के लिए समय-समय पर दिशा निर्देश भी दिए जाने जरूरी है। इसी के तहत पोषण माह के दौरान हो रही गतिविधियों जैसे अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल एवं प्रबंधन, स्तनपान को बढ़ावा, गृह आधारित नवजात की देखभाल, जीवन के प्रथम एक हजार दिन से संबंधित दिशानिर्देश जिला एवं प्रखंड के साथ साझा करने के लिए शनिवार 12 सितंबर की दोपहर 3 बजे से पांच बजे तक एक राज्य स्तरीय वेबीनार आयोजित होगी।
– बच्चे के जीवन के प्रथम एक हजार दिन पर रहेगा जोर
बैठक में बच्चे के विकास के प्रथम 1000 दिनों के पोषण को किस प्रकार से विभाजित करना है। महिला के गर्भावस्था में आयरन व फोलिक एसिड से भरपूर भोजन और छह माह के शिशु के लिए मां के दूध और सभी पोषक तत्वों की जरूरत और इस दिशा में संचालित कार्यक्रम और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली को लेकर आवश्यक दिशानिर्देश दिए जाएंगे। दरअसर, बच्चों के लिए गर्भावस्था से लेकर दो वर्ष तक का समय उनके सर्वांगीण विकास के लिए सबसे बेहतर अवसर होता है। इस दौरान बच्चों के संपूर्ण स्वास्थ्य, वृद्धि और विकास की आधारशिला तैयार होती है,जो पूरे जीवन बच्चे के काम आती है। लेकिन अक्सर जागरूकता के अभाव और कुपोषण के कारण यह आधारशिला कमजोर हो जाती है। इसलिए पोषण माह पर इसपर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
– वर्चुअल वेबीनार बैठक में इनकी रहेगी उपस्थिति
वर्चुअल वेबीनार बैठक में स्वास्थ्य संस्थान से स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला स्तर से जिला योजना समन्वयक, जिला सामुदायिक उत्प्रेरक एवं प्रखंड स्तर से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक तथा डिलीवरी प्वाइंट के लेबर रूम प्रभारी भाग लेंगे। शनिवार को आयोजित होने वाले वेबीनार बैठक में भाग लेने के लिए राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने संबंधित सभी जिला स्वास्थ सदस्य एवं सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि वह सभी प्रतिभागियों को बैठक में भाग लेने हेतु निर्देशित करेंगे।
– बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण पर बल
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर देवेद्र चौधरी ने बताया कि पोषण माह मनाने का मुख्य उद्देश्य बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना है, जिसका विकास, उत्पादकता, आर्थिक विकास और अंततः राष्ट्रीय विकास पर प्रभाव पड़ता है। पोषण माह के दौरान चल रहे कार्यक्रमों की सफलता के लिए शनिवार को वेबीनार बैठक का आयोजन होना है। राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य का पत्र मिल चुका है। इसमें सबकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं।
– छह माह बाद ऐसा हो बच्चे का ऊपरी आहार
नीना सिंह ने बताया कि लॉकडाउन से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह से 12 माह के बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर बच्चों के लिए 6 माह के बाद ऊपरी आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी जाती थी। अन्नप्राशन कराया जाता था। आंगनबाड़ी के बंद रहने पर सेविका व सहायिका को घर-घर जाकर ऊपरी आहार के विषय में परिजनों को जानकारी देने का कार्य करना है। छह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की जानकारी देनी है। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और फलों को शामिल करने के साथ भोजन बनाने और खिलाने के दौरान स्वच्छता का महत्व भी बताना है।
अब जगदीशपुर से कुपोषण को मिलेगी मात
– जगदीशपुर में पोषण परामर्श केंद्र का शुभारंभ
– गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण की मिलेगी जानकारी
– स्तनपान के जरिए बच्चों को कुपोषण से बचाने की दी जा रही है सलाह
भागलपुर, 11 सितंबर
अब जगदीशपुर से कुपोषण को मात देने की मुहिम चलेगी। यहां से गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण की जानकारी दी जाएगी। इससे कुपोषण को बड़ी चोट मिलेगी। जगदीशपुर प्रखंड में शुक्रवार को सीडीपीओ रूबी सिंह ने पोषण परामर्श केंद्र का शुभारंभ कर दिया है। इस दौरान मौके पर मौजूद गर्भवती और धात्री महिलाओं को सही पोषण लेने की जानकारी दी गई। सीडीपीओ रूबी सिंह ने कहा कि सही पोषण से ही कुपोषण को खत्म किया जा सकता है। बच्चों के सही विकास के लिए कुपोषण को खत्म करना बहुत जरूरी है। सही पोषण मिलने से बच्चे स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जी सकेंगे। इसके लिए माताओं को गर्भावस्था से ही ध्यान देना जरूरी है। गर्भावस्था के समय से ही सही पोषण लेने से बच्चे स्वस्थ पैदा होते हैं। इसलिए गर्भवती व धात्री माताएं सही पोषण का ध्यान रखें।
– जागरूकता रथ को किया गया रवाना
पोषण परामर्श केंद्र कस सुभरंभ करने के बाद सीडीपीओ रूबी सिंह ने जागरूकता रथ को रवाना किया। उन्होंने कहा कि पूरे माह जागरूकता रथ के जरिए गांव-गांव जाकर लोगों को सही पोषण के बारे में जागरूक किया जाएगा। लोगों को पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाएगी। बच्चों को कुपोषण से बचाने की अपील की जाएगी।
– कुपोषण को मात देने के लिए दिए गए टिप्स
सीडीपीओ रूबी सिंह ने कहा कि कुपोषण दूर भगाने के लिए क्या करना चाहिए, इसकी भी जानकारी होनी चाहिए। इसे लेकर लोगों को जागरूक करने का काम किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान साथ ही लोगों को स्वच्छता के बारे में भी बताया गया। कुपोषण कैसे खत्म करना है, इसकी सलाह भी दी गई, साथ ही कुपोषण को खत्म करने में स्वच्छता की क्या भूमिका है इसकी भी जानकारी दी गई। लोगों को समझाया गया कि हाथ साफ रखने से कितना फायदा होता है। इस दौरान कोरोना काल में कुपोषण को कैसे खत्म करना है, इसकी भी जानकारी दी गई।
– बच्चों के विकास के लिए सही पोषण आवश्यक
सीडीपीओ रूबी सिंह ने बताया कि बच्चों के विकास के लिए सही पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान। गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे बच्चे का सही ढंग से विकास होता है। जन्म के बाद 6 माह तक केवल स्तनपान तथा उसके बाद बच्चे को दो साल तक स्तनपान के साथ पूरक पौष्टिक आहार ही देना चाहिए। गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चे के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है।
– सही पोषण देता है रोग से लड़ने की क्षमता
सीडीपीओ रूबी सिंह ने बताया कि बच्चों को रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन जीने के लिए पोषक तत्व महत्वपूर्ण है। पर्याप्त पोषण की कमी से, शारीरिक के साथ-साथ कई तरह के विकार हो सकते हैं। कुपोषण और भूख एक समान नहीं है, हालांकि दोनों संबंधित हो सकते हैं। भूख तब लगती है जब पेट खाली होता है, जबकि कुपोषण पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है।
संक्रमण से बचाव में सामुदायिक भागीदारी और युवाओं की भूमिका है महत्वपूर्ण
– सामाजिक कार्यों में युवाओं की सहभागिता का दिखता है सकारात्मक प्रभाव
– समाज को जागरूक करते हुए, नियमों का पालन कराने में होते हैं सक्षम
– नाकारत्मकता से बचते हुए सकारात्मक पहलुओं को अपनाने पर दे सकते हैं बल
मुंगेर-
वैश्विक महामारी बन चुके कोविड-19 के संक्रमण और इससे उत्पन्न संकट से हर किसी को बचाना एवं बचना आवश्यक है। यह सिर्फ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पहल से संभव नहीं हैं, इसके लिए सामुदायिक भागीदारी की सबसे ज्यादा जरूरत है। लॉकडाउन के बाद अब अनलॉक के चरणों में जरूरत इस बात की बढ़ गई है कि लोग नाकारत्मकता से बचते हुए जीवन में सकारात्मक पहलुओं को अपनाने पर बल दें और जिंदगी पुन: सामान्य रूप से शुरू करें। यह कहना है मुंगेर-जमालपुर रोड स्थित नवाटोली के रहने वाले युवा अमन कुमार रंजन का। अमन लॉकडाउन के बाद से घर में ही रह रहे हैं, सामाजिक कार्यों में इनकी सहभागिता भी रहती है। वह बताते हैं कि लॉकडाउन के प्रथम चरण में उन्होंने युवाओं का एक ग्रुप बनाया और जरूरतमंदों की मदद की। आज जब अनलॉक का चरण शुरू हो गया है, बाजारों और सड़कों पर भीड़ भी देखी जा रही है। वहीं शारीरिक दूरी का पालन कई जगह नहीं होता दिखता। ऐसे में जागरूकता को बल देने की आवश्यकता बढ़ गई है। समुदाय में युवाओं की भागीदारी शुरू से ही सबसे ज्यादा रही है। ऐसे में दोबारा युवाओं को आगे आना होगा और लोगों को समझाना होगा कि कोविड 19 अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी सतर्कता और सुरक्षा के नियमों का पालन करना ही संक्रमण से बचाव का एकमात्र रास्ता है।
पर्व-त्योहार के अवसर पर बढ़ जाती है जिम्मेदारी:
वहीं मुंगेर के स्थानीय निवासी प्रशांत कुमार यादव बताते हैं कि अनलॉक में छूट मिलने के बाद से सड़कों पर चहल पहल काफी बढ़ गई है। अभी कुछ पर्व भी आ जा रहे हैं। ऐसे में खरीदारी व तैयारी आदि को लेकर भी लोग ज्यादा घरों से बाहर निकल रहे हैं। खासकर शाम के वक्त दुकान व बाजार में ज्यादा संख्या में लोग रहते हैं। वह मास्क तो पहन रहे हैं, लेकिन जल्दबाजी में खरीदारी और काम खत्म करने के दौरान शारीरिक दूरी का ख्याल नहीं रख रहे हैं। ऐसे में उन्हें समझाना होगा। इसमें युवा और समुदाय स्तर पर पहल जरूरी है। दुकान और बाजार में जो घेरा बनाकर लेने की कवायद हुई थी, उसे सतत चालू रखा जाए। लोगों से उसे पालन करने को कहा जाए। क्योंकि अभी संक्रमण का प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। समाजिक पहल से लोगों को जागरूक करने का कार्य लगातार किया जाना चाहिए। युवा इसमें अहम भूमिका अदा कर सकते हैं।
अनावश्यक तनाव लेने की जरूरत नहीं:
अमन कुमार रंजन कहते हैं कि समाज को जागरूक करने और अपनी सामाजिक सरोकार का निर्वहन करने में कई स्वयंसेवक आज भी लगे हुए हैं। कुछ व्यक्ति अपने स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहा हैं। इसका प्रभाव देखने को भी मिलता है। अगर कोई घर से बाहर जा रहा होता है तो परिजन इसका ख्याल रख रहे हैं कि उसने मास्क पहना है। समझाया भी जाता है कि बाहर लोगों से उचित दूरी बनाते हुए काम करें। ऐसी बात समुदाय के पहल पर ही संभव हो सकी है। इसे वृहद स्तर पर अपनाने की जरूरत है। जो नियम नहीं मान रहे हैं, उन्हें समझाना होगा। इसके क्या परिणाम हो सकते हैं, उन्हें बताना होगा। तभी संक्रमण को बढ़ने से रोक पाना संभव हो पाएगा। हालांकि कोरोना को लेकर अनावश्यक तनाव लेने की जरूरत नहीं है। हम पहल करेंगे, समाज जागरूक होगा और नियमों का पालन करेगा तो निश्चय ही संक्रमण का प्रभाव दूर हो जाएगा।