मायागंज अस्पताल में प्लाजमा थेरेपी से इलाज शुरू

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जिले की पहली 60 वर्षीय कोरोना संक्रमित महिला को चढ़ाया गया प्लाज्मा
जिले का पहला प्लाज्मा दानकर्ता बना ब्लड बैंक का टेक्निशियन
भागलपुर, 10 सितंबर
मायागंज अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज को वरदान माने जा रहे प्लाज्मा थेरेपी का आगाज गुरुवार से हो गया. जिले का पहला प्लाज्मा डोनर बनने का गौरव ब्लड बैंक के टेक्निशियन को मिला. मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भगत ने बताया कि आईसीयू में डॉ. बिनय कुमार की यूनिट में भर्ती 60 वर्षीय महिला को कोरोना चढ़ाने के लिए चिह्नित किया गया. उसे रात में सफलतापूर्वक प्लाज्मा चढ़ा दिया गया.
ब्लड बैंक में आधे घंटे में ही निकाल लिया गया प्लाज्मा: ब्लड बैंक में तैनात रहे टेक्निशियन शानू को कुछ सप्ताह पहले कोरोना हुआ था. उसका एंटीबॉडी स्तर बेहतर था और वह प्लाज्मा डोनेट के लिए तैयार था. दोपहर करीब 12 बजे ब्लड बैंक में लगाये गये प्लाज्मा-प्लेटलेट्स अफेरेसिस मशीन के जरिये उसके शरीर से सिर्फ 400 एमएल प्लाज्मा निकाला गया. ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. रेखा झा ने बताया कि चूंकि इस प्लाज्मा को 24 घंटे के अंदर किसी कोरोना संक्रमित को चढ़ाया जाना जरूरी था, ताकि कोरोना संक्रमित को यह प्लाज्मा चढ़ाने के बाद उसके शरीर में कोरोना के खिलाफ तेजी से एंटीबॉडी बन सके. शुक्रवार को तीन और लोग प्लाज्मा दान करने के लिए ब्लड बैंक में आएंगे.
एक व्यक्ति 15 दिन में तीन बार कर सकता है प्लाज्मा दान:
ब्लड बैंक की चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिव्या सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण से उबर चुका व्यक्ति 48 घंटे के अंतराल में दो बार व 15 दिन बाद तीसरी बार प्लाज्मा दान कर सकता है. प्लाज्मा दान करने वाले व्यक्ति को सरकार की तरफ से पांच हजार रूपये प्रति यूनिट की दर से प्रोत्साहन राशि दिया जायेगा, जो कि उसके खाते में सीधे राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा ट्रांसफर किया जायेगा.
अबतक 70 से अधिक लोगों ने प्लाज्मा दान करने की दी सहमति: घंटाघर स्थित कोविड केयर सेंटर में तैनात डॉ. अमित कुमार शर्मा बताते हैं कि स्वस्थ हुए लोगों में से अब तक कुल 70 से अधिक लोगों ने अपने-अपने प्लाज्मा दान करने की सहमति प्रदान की है. इन लोगों के नाम, पता व मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज किया जा चुका है, ताकि प्लाज्मा की जरूरत पड़ने पर इन लोगों को जेएलएनएमसीएच के ब्लड बैंक तक पहुंचाकर प्लाज्मा दान कराया जा सके.
एक व्यक्ति के प्लाज्मा से बचेगी चार कोरोना मरीजों की जान: प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज बहुत ही कारगर साबित हो रहा है. अभी पटना के एम्स व आईजीआईएमएस में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना इलाज चल रहा है. कोरोना डेडिकेटेड मायागंज अस्पताल के नोडल प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए एक व्यक्ति द्वारा दिये गये प्लाज्मा दान से चार कोरोना मरीजों की जान बचायी जा सकेगी. कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए लोगों में कोरोना संक्रमण के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित हो चुकी होती है. उसी एंटीबॉडी को प्लाज्मा के जरिये कोरोना मरीजों को चढ़ाया जायेगा, ताकि वे कोरोना से जल्दी ठीक हो सकेंगे. अगर इस थेरेपी का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हुआ तो जिले में हर रोज कम से कम 25 यूनिट प्लाज्मा की जरूरत होगी.

बच्चे को कराएं स्तनपान, बनी रहेगी मुस्कान

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छ्ह माह तक दें केवल माँ का दूध, निमोनिया-डायरिया न आएगा पास
जन्म के पहले घंटे के भीतर का स्तनपान, बनेगा जीवन का वरदान
लखीसराय/ 10 सितंबर: बच्चे के सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए माँ का दूध (स्तनपान) बहुत ही जरूरी होता है। माँ के दूध में शिशु की आवश्यकतानुसार पानी होता है, इसलिए छ्ह माह तक के बच्चे को ऊपर से पानी देने की भी जरूरत नहीं होती है। इसलिए बच्चे की मुस्कान बनाए रखने के लिए छ्ह माह तक केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए। इसके अलावा स्तनपान बच्चे में भावनात्मक लगाव पैदा करने के साथ ही सुरक्षा का बोध भी कराता है।
शुरूआती स्तनपान जरुरी: स्त्रीरोग विशेषज्ञ, सदर असपताल की डॉ. रूपा ने बताया, माँ के दूध की महत्ता को समझते हुए स्वास्थ्यकर्मियों का भी पूरा ज़ोर रहता है कि लेबर रूम में कार्यरत चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स द्वारा जन्म के तुरंत बाद बच्चे को माँ की छाती पर रखकर स्तानपान की शुरुआत लेबर रूम के अंदर करायी जाए। नवजात को माँ का पहला दूध मिलने के बाद ही उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया जाता है। इसके अलावा माँ को स्तनपान की पोजीशन, बच्चे का स्तन से जुड़ाव और माँ के दूध निकालने की विधि को समझाने में भी नर्स द्वारा पूरा सहयोग किया जाता है ताकि कोई भी बच्चा अमृत समान माँ के दूध से वंचित न रह जाये। यदि बच्चे को जन्म के पहले घंटे के अंदर माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाया जाये तो ऐसे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
6 माह तक केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया से होता है बचाव: डॉ. रूपा ने बताया, बच्चे को छ्ह माह तक लगातार केवल माँ का दूध दिया जाना चाहिए और उसके साथ किसी अन्य पदार्थ जैसे पानी, घुट्टी, शहद, गाय अथवा भैंस का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि वह बच्चे के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए सम्पूर्ण आहार के रूप में  काम करता है। बच्चे को हर डेढ़ से दो घंटे में भूख लगती है। इसलिए बच्चे को जितना अधिक बार संभव हो सके माँ का दूध पिलाते रहना चाहिए। माँ का शुरुआती दूध थोड़ा कम होता है लेकिन वह बच्चे के लिए पूर्ण होता है। अधिकतर महिलाएं यह सोचती हैं कि उनका दूध बच्चे के लिए पूरा नहीं पड़ रहा है और वह बाहरी दूध देना शुरू कर देती हैं जो कि एक भ्रांति के सिवाय और कुछ नहीं है। माँ के दूध में भरपूर पानी और पोषक तत्व होते हैं इसलिए बच्चे को बाहर का कुछ भी नहीं देना चाहिए। बाहर की चीज खिलाने से बच्चे में संक्रमण का खतरा बना रहता है। उन्होंने बताया छ्ह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से भी बचाव होता है। साथ ही स्तनपान माँ को स्तन कैंसर से भी बचाता है।

पोषण परामर्श केंद्र पर लोगों को मिल रही पोषण संबंधित जानकारी 

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– जिले के सभी प्रखंडों में खुल चुका है पोषण परामर्श केंद्र
– बच्चों-महिलाओं को अच्छे पोषण के लिए किया जा रहा जागरूक
बांका, 10 सितंबर
सितंबर को पोषण महीने के रूप में मनाया जा रहा है. इसे लेकर जिले भर में कार्यक्रम हो रहे हैं. सेविका और सहायिका घर-घर जाकर लोगों को सही पोषण और स्वच्छता को लेकर जागरूक कर रही हैं. वहीं सदर प्रखण्ड समेत सभी प्रखंडों में पोषण परामर्श केंद्र पर आने वाले लोगों को अच्छे पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है. गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जा रही है. बच्चों के लिए भी अच्छे पोषण की जानकारी दी जा रही है.
डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में पोषण परामर्श केंद्र खुल चुके हैं. वहां पर आने वाले लोगों को कोरोना से बचने के उपायों सहित गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक पोषण की जानकारी दी गयी है. गर्भवतियों तथा धात्री महिलाओं के खाने में चना, गुड़, दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध व मांस मछली आदि संतुलित आहार के रूप में लेने के फायदों के बारे में कहा जा रहा है. साथ ही 6 माह तक बच्चे को केवल स्तनपान  तथा 6 माह के बाद स्तनपान के साथ पूरक आहार कराने की सलाह दी जा रही है. इसके साथ ही सम्पूर्ण टीकाकरण के महत्व को भी बताया जा रहा है.
जिले भर में दौड़ रहा है जागरूकता रथ: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि पोषण को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता रथ जिले भर में दौड़ रहा है. हर प्रखंड के अधिक से अधिक गांवों में लोगों से संपर्क कर पोषण के बारे में जागरूक किया जा रहा है. वहीं शहर और गांवों में दीवारों पर भी अच्छे पोषण की जानकारी लिखी गई है, ताकि उधर से गुजरने वाले लोग जागरूक हो सकें.
मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के बारे में भी किया जा रहा जागरूक: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि पोषण परामर्श केंद्र में आने वाले सभी लोगों को मुख्यमंत्री कन्या उत्थान के योजना के बारे में बताया जा रहा है. उन्होंने बताया, कन्या शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना शुरू की गई हैं। इसके अंतर्गत दो वर्ष तक के आयु के सभी कन्या शिशु का संपूर्ण टीकाकरण कराये जाने पर उनके अभिभावकों को दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया हैं। कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के बारे में भी लोग हो रहे जागरूक: पोषण परामर्श केंद्र पर आने वाले लोगों को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के बारे में भी बताया जा रहा है. उन्हें गर्भधारण से लेकर टीकाकरण तक में मिलने वाली सहायता राशि के बारे में बताया जा रहा है. लोगों को यह जानकारी दी जा रही है. डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत धात्री महिलाओं व नवजात की देखभाल के लिए लाभुक को आर्थिक मदद दी जाती है. योजना के तहत गर्भवती महिला व स्तनपान कराने वाली माताओं को 5000 रुपये सहायता राशि उनके खाता में सीधा ट्रांसफर किया जाता है. इस योजना का उद्देश्य मां और बच्चे की देखभाल, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, पोषण व्यवहारों का पालन करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में दिया जाता है

पोषण माह का हुआ वर्चुअल शुभारंभ, पूरे माह घर-घर जगाई जाएगी पोषण की अलख

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• अतिकुपोषित बच्चों की पहचान एवं उनके रेफ़रल पर होगा ज़ोर
• पोषण वाटिका निर्माण को दी जाएगी गति
• पोषण जागरूकता रथ किया गया रवाना
• ग्रह भ्रमण से समुदाय स्तर पर कुपोषण प्रबंधन को लेकर फैलाई जाएगी जागरूकता
• उचित पोषण व्यवहार को जनांदोलन बनाने की होगी क़वायद

पटना-

वर्ष 2018 के सितंबर माह से प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की गयी थी। देश भर से कुपोषण खत्म करने की दिशा मे शुरूआत किये गए राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत ही तृतीय पोषण माह आयोजित किया गया है। यद्यपि, कोरोना संक्रमण के कारण पोषण माह का आयोजन चुनौतिपूर्ण है, लेकिन सभी सहयोगी विभागों के समन्वय से इसे आसान बनाया जा सकता है। उक्त बातें सामाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, राम सेवक सिंह ने बुधवार को आईसीडीएस द्वारा आयोजित पोषण माह कार्यक्रम के वर्चुअल शुभारम्भ के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कुपोषण को दूर करने के लिए पोषण गतिविधियों जैसे अन्नप्राशन, गोदभराई एवं टेक होम राशन वितरण से समुदाय में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
सामाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, राम सेवक सिंह ने बताया कि पोषण से जुड़ी गतिविधियों के आयोजनों को पंचायत स्तर पर आयोजित करने से आम लोगों के बीच पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी एवं पोषण उद्देश्यों को हासिल करने में सफ़लता भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि शौचालय के इस्तेमाल एवं साफ़-सफ़ाई की जरूरत पर विभिन्न जागरूकता माध्यमों से समुदाय में जानकारी देने से सकारात्मक बदलाव भी समाज में देखने को मिल रहे हैं। इसलिए यह जरुरी है कि पोषण माह के दौरान राज्य एवं भारत सरकार द्वारा संचालित किये जा रहे पोषण कार्यक्रमों के उद्देश्य के विषय में समुदाय को जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि समुदाय को पोषण सन्देश सरल भाषा में दें ताकि लोग इसे समझ सके और उसका अनुपालन कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण मंत्रालय, अतुल प्रसाद ने बताया कि पोषण माह का यह तीसरा साल है। इसलिए विगत दो बार के पोषण माह से कई चीजें सीखने को मिली है, जिसे इस बार के पोषण में क्रियान्वित करने की जरूरत है। उन्होंने पोषण अभियान के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए 3 लक्षित समूहों पर ध्यान देने की बात कही, जिसमें 16 से 18 साल की स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियाँ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थी एवं जन्म से लेकर 2 साल तक के बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य पर फोकस करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि एक तरफ बिहार के लिए कुपोषण एक चुनौती है, वहीँ दूसरी तरफ यह एक अवसर भी है। उन्होंने आईसीडीएस के सभी कर्मियों को मिशन मोड एवं रिजल्ट ओरिएंटेड मोड पर कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने लोकल खाद्य व्यंजनों की चार्ट बनाकर लाभर्थियों को देने की बात भी कही। साथ ही स्वच्छता पर समुदाय को जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया, ताकि बच्चे लगातार डायरिया जैसे रोग से ग्रसित होकर कुपोषित न हो जाए। इसके लिए उन्होंने समुदाय के व्यवहार परिवर्तन पर कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दो साल पहले जन्म लिए बच्चे एवं नए जन्म लेने वाले बच्चों की बेहतर निगरानी से उन्हें कुपोषण के दंश से बचाया जा सकता है।

जन-भागीदारी बढ़ने से पोषण माह का उद्देश्य होगा पूरा:

आईसीडीएस के निदेशक आलोक कुमार ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि पोषण माह का आयोजन किसी एक विभाग का कार्य नहीं है बल्कि इसे सफ़ल बनाने के लिए कई विभाग एवं गैर-सरकारी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान या पोषण माह की सफ़लता जन-भागीदारी सुनिश्चित करने एवं इस अभियान को जनांदोलन में तब्दील करने पर निर्भर करती है। इस पोषण माह के दौरान 3 उद्देश्यों की पूर्ति पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें अतिकुपोषित बच्चों की पहचान एवं उनका रेफ़रल, पोषण वाटिका का निर्माण एवं गृह भ्रमण के माध्यम से अभिभावकों को पोषण पर सलाह शामिल होंगे। उन्होंने पोषण माह के दौरान पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना एवं अर्ली चाइल्ड डेवलपमेंट एंड एजुकेशन के माध्यम से भी जन-जागरूकता की बात कही।

अन्य विशेषज्ञों ने भी दी जानकारी:
कार्यक्रम के दौरान कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, के कुलपति अजय कुमार सिंह ने पोषण वाटिका, किचन गार्डन की उपयोगिता सहित बायो-फोर्टीफीकेशन एवं टिश्यू कल्चर से आलू पौधे का निर्माण के बारे में जानकरी दी।
एडीजी, आरओबी बिहार,सूचना एवं प्रसार मंत्रालय भारत सरकार के एसके मालवीय ने किसी मुहिम को जनांदोलन बनाने के लिए जरुरी पाँच अव्यवों की जानकारी दी।
डॉ। देवजी पाटिल, टीम लीड, पोषण, केयर इण्डिया, ने बच्चों के अनुपूरक आहार में भोजन विविधिता एवं बिहार में इसकी वर्तमान परिस्थिति पर विस्तार से चर्चा की। वहीं यूनिसेफ के प्रोग्राम मैनेजर शिवेंद्र पांड्या ने पोषण माह के दौरान होने वाली गतिविधियों की जानकारी के साथ कुपोषण की स्थिति से लोगों को अवगत कराया।
पोषण अभियान की नोडल पदाधिकारी श्वेता सहाय ने पोषण अभियान के उद्देश्यों के साथ पोषण माह की प्रासंगिकता पर जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन पोषण विशेषज्ञ डॉ। मनोज कुमार ने किया।

पोषण जागरूकता रथ किया गया रवाना, चार दिनों तक फैलाएगी जागरूकता:
कार्यक्रम समापन के बाद समाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, रामसेवक सिंह ने पटना के पुरानी सचिवालय से पोषण जागरूकता रथ को हरी झंडी देकर रवाना किया। यह रथ पोषण पर जागरूकता फैलाएगी, जिसमें बुधवार को पटना के शहरी इलाकों एवं गुरूवार से पटना के अन्य प्रखंडों में जाकर पोषण पर जागरूक करेगी।

वैश्विक प्रतियोगिता के बीच वित्तीय प्रबंधन ज्यादा महत्वपूर्ण- एच. ई टोन सिन तिन्हा, राजदूत, वियतनाम

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नईदिल्ली-

न्यू देहली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में छात्रों को संबोधित करते हुए वियतनाम के राजदूत एच. ई टोन सिन तिन्हा ने कहा कि आज कोरोना काल में फाइनेंस मैनेजमेंट के पास ज्यादा चैलेंज आ गया है। लगभग सभी कंपनियों के बीच फाइनेंस की समस्या आई हुई है। आज कंपनियों को जहां उत्पाद के लिए वित्तीय प्रबंधन को देखना है वहीं कर्मचारियों के हितों का भी खास ख्याल रखना है ऐसे में डबल चैंलेज है मैनेजमेंट के पास। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन आवश्यक है तभी इस प्रतियोगी बाजार में कोई कंपनी रह सकती है।

एच. ई टोन सिन तिन्हा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वित्त प्रबंधन एक चैलेंज है लेकिन आज समझकर अगर आगे बढ़ा जाए तो कंपनियां को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। वित्त प्रबंधन पर ही कंपनियों को आगे बढ़ाती है। आज वैश्विक चैंलेंज है ऐसे में उत्तम प्रबंधन ही कंपनियों को बचा सकता है।

एच ई टोन सिन तिन्हा ने कहा कि फाइनेंस के छात्रों को अब ज्यादा चैलेंज स्वीकार कर कार्य करने होंगे जिसके लिए वैश्विक स्तर पर ताजा जानकारी आवश्यक है। तभी सफलता हासिल हो सकती है। आज जिस तरह से वैश्विक बाजार में मंदी आई है अब इससे उबरने का भी समय आ गया है। पिछले घाटा को भरने का समय भी आ गया है। लेकिन इसके लिए बेहतर फाइनेंस प्रबंधन ही इस संकट से उबार सकता है।

एच ई टोन सिन तिन्हा ने कहा कि एनडीआईएम बेहतरीन संस्थान है जहां से छात्रों ग्लोबल की जानकारी रखते हैं और यही सफलता का पहला मार्ग है। एनडीआईएम की विशेषता यह है कि यह संस्थान लगातार वैश्विक स्तर पर सेमिनार का आयोजन करता रहा है जिससे छात्रों के व्यक्तितव पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पूरे माह घर-घर जगायी जाएगी पोषण पर अलख, पोषण माह कार्यक्रम का हुआ वर्चुअल शुभारम्भ

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• अतिकुपोषित बच्चों की पहचान एवं उनके रेफ़रल पर होगा ज़ोर
• पोषण वाटिका निर्माण को दी जाएगी गति
• पोषण जागरूकता रथ किया गया रवाना
• ग्रह भ्रमण से समुदाय स्तर पर कुपोषण प्रबंधन को लेकर फैलाई जाएगी जागरूकता
• उचित पोषण व्यवहार को जनांदोलन बनाने की होगी क़वायद

भागलपुर/ 9 सितंबर: वर्ष 2018 के सितंबर माह से प्रधानमंत्री द्वारा पहली बार राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत की गयी थी। देश भर से कुपोषण खत्म करने की दिशा मे शुरूआत किये गए राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत ही तृतीय पोषण माह आयोजित किया गया है। यद्यपि, कोरोना संक्रमण के कारण पोषण माह का आयोजन चुनौतिपूर्ण है, लेकिन सभी सहयोगी विभागों के समन्वय से इसे आसान बनाया जा सकता है। उक्त बातें सामाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, राम सेवक सिंह ने बुधवार को आईसीडीएस द्वारा आयोजित पोषण माह कार्यक्रम के वर्चुअल शुभारम्भ के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कुपोषण को दूर करने के लिए पोषण गतिविधियों जैसे अन्नप्राशन, गोदभराई एवं टेक होम राशन वितरण से समुदाय में पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
सामाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, राम सेवक सिंह ने बताया कि पोषण से जुड़ी गतिविधियों के आयोजनों को पंचायत स्तर पर आयोजित करने से आम लोगों के बीच पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी एवं पोषण उद्देश्यों को हासिल करने में सफ़लता भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि शौचालय के इस्तेमाल एवं साफ़-सफ़ाई की जरूरत पर विभिन्न जागरूकता माध्यमों से समुदाय में जानकारी देने से सकारात्मक बदलाव भी समाज में देखने को मिल रहे हैं। इसलिए यह जरुरी है कि पोषण माह के दौरान राज्य एवं भारत सरकार द्वारा संचालित किये जा रहे पोषण कार्यक्रमों के उद्देश्य के विषय में समुदाय को जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि समुदाय को पोषण सन्देश सरल भाषा में दें ताकि लोग इसे समझ सके और उसका अनुपालन कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण मंत्रालय, अतुल प्रसाद ने बताया कि पोषण माह का यह तीसरा साल है। इसलिए विगत दो बार के पोषण माह से कई चीजें सीखने को मिली है, जिसे इस बार के पोषण में क्रियान्वित करने की जरूरत है। उन्होंने पोषण अभियान के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए 3 लक्षित समूहों पर ध्यान देने की बात कही, जिसमें 16 से 18 साल की स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियाँ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थी एवं जन्म से लेकर 2 साल तक के बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य पर फोकस करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि एक तरफ बिहार के लिए कुपोषण एक चुनौती है, वहीँ दूसरी तरफ यह एक अवसर भी है। उन्होंने आईसीडीएस के सभी कर्मियों को मिशन मोड एवं रिजल्ट ओरिएंटेड मोड पर कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने लोकल खाद्य व्यंजनों की चार्ट बनाकर लाभर्थियों को देने की बात भी कही। साथ ही स्वच्छता पर समुदाय को जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया, ताकि बच्चे लगातार डायरिया जैसे रोग से ग्रसित होकर कुपोषित न हो जाए। इसके लिए उन्होंने समुदाय के व्यवहार परिवर्तन पर कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दो साल पहले जन्म लिए बच्चे एवं नए जन्म लेने वाले बच्चों की बेहतर निगरानी से उन्हें कुपोषण के दंश से बचाया जा सकता है।

जन-भागीदारी बढ़ने से पोषण माह का उद्देश्य होगा पूरा:

आईसीडीएस के निदेशक आलोक कुमार ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि पोषण माह का आयोजन किसी एक विभाग का कार्य नहीं है बल्कि इसे सफ़ल बनाने के लिए कई विभाग एवं गैर-सरकारी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान या पोषण माह की सफ़लता जन-भागीदारी सुनिश्चित करने एवं इस अभियान को जनांदोलन में तब्दील करने पर निर्भर करती है। इस पोषण माह के दौरान 3 उद्देश्यों की पूर्ति पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें अतिकुपोषित बच्चों की पहचान एवं उनका रेफ़रल, पोषण वाटिका का निर्माण एवं गृह भ्रमण के माध्यम से अभिभावकों को पोषण पर सलाह शामिल होंगे। उन्होंने पोषण माह के दौरान पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना एवं अर्ली चाइल्ड डेवलपमेंट एंड एजुकेशन के माध्यम से भी जन-जागरूकता की बात कही।

अन्य विशेषज्ञों ने भी दी जानकारी:
कार्यक्रम के दौरान कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, के कुलपति अजय कुमार सिंह ने पोषण वाटिका, किचन गार्डन की उपयोगिता सहित बायो-फोर्टीफीकेशन एवं टिश्यू कल्चर से आलू पौधे का निर्माण के बारे में जानकरी दी।
एडीजी, आरओबी बिहार,सूचना एवं प्रसार मंत्रालय भारत सरकार के एसके मालवीय ने किसी मुहिम को जनांदोलन बनाने के लिए जरुरी पाँच अव्यवों की जानकारी दी।
डॉ। देवजी पाटिल, टीम लीड, पोषण, केयर इण्डिया, ने बच्चों के अनुपूरक आहार में भोजन विविधिता एवं बिहार में इसकी वर्तमान परिस्थिति पर विस्तार से चर्चा की। वहीं यूनिसेफ के प्रोग्राम मैनेजर शिवेंद्र पांड्या ने पोषण माह के दौरान होने वाली गतिविधियों की जानकारी के साथ कुपोषण की स्थिति से लोगों को अवगत कराया।
पोषण अभियान की नोडल पदाधिकारी श्वेता सहाय ने पोषण अभियान के उद्देश्यों के साथ पोषण माह की प्रासंगिकता पर जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन पोषण विशेषज्ञ डॉ। मनोज कुमार ने किया।

पोषण जागरूकता रथ किया गया रवाना, चार दिनों तक फैलाएगी जागरूकता:
कार्यक्रम समापन के बाद समाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, रामसेवक सिंह ने पटना के पुरानी सचिवालय से पोषण जागरूकता रथ को हरी झंडी देकर रवाना किया। यह रथ पोषण पर जागरूकता फैलाएगी, जिसमें बुधवार को पटना के शहरी इलाकों एवं गुरूवार से पटना के अन्य प्रखंडों में जाकर पोषण पर जागरूक करेगी।

कोरोना से डरिए, जांच से नहीं

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जांच बढ़ने से टूटेगी कोरोना की चेन

स्वच्छता और सतर्कता का रखें ध्यान

भागलपुर, 9 सितंबर

कोरोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर जुटा हुआ है. शहर से लेकर गांव तक जांच के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं. जांच में संक्रमित पाए जाने पर होम आइसोलेशन या फिर कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जा रहा है. इतनी व्यवस्था के बावजूद कुछ लोग जांच के लिए आने से कतरा रहे हैं. कुछ लोग तो बुखार होने पर भी जांच कराने नहीं जा रहे हैं. यह अच्छी बात नहीं है. इस तरह की लापरवाही आपके साथ साथ आपके घरवाले का भी नुकसान हो सकता है. इसलिए जरा सा भी कोरोना के लक्षण दिखाई पड़े तो तत्काल नजदीकी शिविर या फिर सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करा लें.

डीपीएम डॉक्टर फैजान अशरफी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग जांच को लेकर लगातार अभियान चला रहा है. गांव गांव में शिविर लग रहे हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल से लेकर सदर अस्पताल में जांच की व्यवस्था है. मोबाइल वैन के जरिए भी घूम घूम कर जांच की जा रही है. इसलिए जरा सी भी लापरवाही नहीं बरतें. अगर उन्हें लगता है कि उनमें कोरोना के लक्षण हैं तो तत्काल जांच करा लें.

घर पर सुविधा रहने पर ही भेजा जा रहा है होम आइसोलेशन में: जांच में संक्रमित पाए जाने पर उसी व्यक्ति को होम आइसोलेशन में भेजा जा रहा है जिनके घर में इसकी सुविधा है. उस व्यक्ति के घर में अलग से शौचालय और कमरे की व्यवस्था होने पर ही लोगों को हम आइसोलेशन में भेजा जा रहा है. साथ में मरीज को एक किट भी दिया जा रहा है जिसमें दवा के साथ मास्क और अन्य जरूरी सामान रहते हैं.

अन्य मरीजों को कोविड केयर सेंटर में किया जा रहा भर्ती: जांच में जिन मरीजों को घर पर सुविधा नहीं है उसे कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जाता है. जहां पर उसका पूरा ध्यान रखा जाता है. समय पर दवा और भोजन दिया जाता है. जांच में पॉजिटिव पाए जाने पर उसे घर भेजा जाता है.

40 बेड का आईसीयू भी तैयार: जांच के दौरान कोरोना के गंभीर मरीज पाए जाने पर उसे घंटाघर स्थित 40 बेड के आईसीयू में भर्ती किया जाता है. वहां पर हर बेड के साथ ऑक्सीजन कनेक्ट है. स्वास्थ्य विभाग किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है. इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है.

कोरोना जांच के लिए गांवों में माइकिंग: कोरोना जांच के लिए लोगों से आगे आने की अपील की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य गांव- गांव घूमकर माइकिंग कर लोगों से जांच के लिए आने को कह रही है. टीम के सदस्य लोगों को बता रहे हैं कि जांच कराने के क्या फायदे हैं. जांच कराने से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है.

सरकार की गाइडलाइन का हो रहा पालन: स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कोरोना जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रही है. जांच करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना किट पहनकर जांच कर रहे हैं, साथ ही जांच के दौरान सामाजिक दूरी का भी पालन कर रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी के अलावा जो लोग वहां पर मौजूद रहते हैं, सभी लोग ग्लव्स और मास्क पहने रहते हैं. इससे दूसरों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा. इसलिए बेहिचक जांच के लिए आगे आएं वहां किसी तरह का कोई खतरा नहीं है.

इन बातों का रखें ख्याल
1. खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें.
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. चिकित्सक से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें.
3. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी.
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक को बार-बार न छूएं यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें.
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें.

पोषण परामर्श केंद्र से मिलेगा कुपोषण को मात देने का मंत्र

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– जिला महिला हेल्पलाइन सेंटर के परिसर में पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना
– डीएम ने किया लोगों को पोषण के प्रति जागरुक, कहा परामर्श केंद्र से दूर होगा कुपोषण

लखीसराय, 09 सितम्बर
अब पोषण परामर्श केंद्र से कुपोषण को मात देने का मंत्र मिलेगा। यहां से फोन पर भी पोषण से संबंधित जानकारी लेकर लोग कुपोषण का खात्मा कर सकते हैं। बुधवार को जिला महिला हेल्प लाइन सेंटर के प्रांगण में जिला पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना डीएम संजय कुमार सिंह के हाथों की गई। इस दौरान आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपम सिंह सहित जिले के विभिन्न बाल विकास परियोजना कार्यालय की सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिका समेत अन्य पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।

– जन-जन तक पहुंचाएंगे पोषण का संदेश
पोषण माह को सफल बनाने के लिए जन-जन तक कुपोषण के खात्मे का संदेश पहुंचाया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर से हर आवश्यक पहल की जा रही है। मिशन सिर्फ हर हाल में पोषण माह को सफल बनाने का है। इसके लिए बुधवार को जिला महिला हेल्प लाइन सेंटर के प्रांगण में जिला पोषण परामर्श केंद्र का स्थापना के बाद डीएम ने लोगों को जागरुक करते हुए कहा कि कुपोषण को मात देने का संदेश जन-जन तक पहुंचे।

– पोषण जागरुकता से कुपोषण को मात देने का संकल्प
कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारियों व कर्मियों ने लिया संकल्प लिया कि वह लोगों को जागरुक कर कुपोषण को मात देने का अभियान चलाएंगे। पदाधिकारियों व कर्मियों ने शपथ लिया और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का भी संदेश दिया है, साथ ही समाज के हर लोगों को जागरूक करने के लिए आवश्यक योजना बनाई।

– प्रखंड स्तर पर होगा पोषण परामर्श केंद्र
पोषण माह की सफलता को लेकर जिले के सभी प्रखंडों में प्रखंड स्तर पर भी पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना की जाएगी, जिसमें रामगढ़ चौक और सूर्यगढ़ा में हो चुका है। जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा कि पोषण माह की सफलता ही कुपोषणमुक्त समाज निर्माण का प्रतीक है। इसलिए पोषण संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। जब समाज के हर तबके के लोग जागरूक होंगे तभी पोषण माह सफल होगा। जब लोग स्वस्थ रहेंगे तभी उनकी सोच स्वस्थ होगी। इसलिए बेहतर समाज के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि हमारी इस पीढ़ी को अच्छा पोषण मिले और वह सुरक्षित रहे। सभी माताओं का यह दायित्व है कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए साफ सफाई पर ध्यान दें। नियमित रूप से खाने से पहले व खाने के बाद अच्छी तरह से हाथ धोएं, शौचालय जाने के बाद हाथ पैर अच्छी तरह से धोया जाए। कुपोषण की समस्या तभी दूर हो सकती है जब बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया जाएगा।

– सही पोषण से ही बच्चों का मानिसक विकास
आईसीडीएस की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने कहा कि उचित पोषण से ही बच्चों के शरीर का सर्वांगीण विकास होतस है। इसलिए बच्चों के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए उचित पोषण की बेहद आवश्यक होती है। इससे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बच्चों का स्वास्थ्य भी काफी बेहतर रहता है।

– जागरूकता के लिए चलाया जा रहा अभियान
पोषण माह को सफल बनाने के लिए ऑटो, ई रिक्सा समेत अन्य वाहनों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान समाज के हर लोगों तक पोषण का संदेश पहुंचाया जा रहा है, ताकि कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण हो सके। वर्ष 2020 राष्ट्रीय पोषण माह का थीम “किचन गार्डेन को बढ़ावा देने के लिए गंभीर तीव्र कुपोषण (सैम) और वृक्षारोपण के साथ बच्चों की पहचान और ट्रैकिंग रखी गई है।

– शहर से लेकर गांव तक होगा कार्यक्रम
सही पोषण की जानकारी हर घर तक पहुंचे इसके लिए जिला मुख्यालय से लेकर गांव स्तर पर पूरे माह तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें घर-घर क्यारी, पोषण थाली अभियान का शुभारंभ सह पौधा रोपण, जननी सेवा, गोदभराई दिवस, पोषण नारों का दीवार लेखन के साथ-साथ ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (भीएचएसएनडी) का आयोजन किया जाना है। दूसरे सप्ताह में भी इन गतिविधियों के अलावा बच्चों के प्रति उत्तरदायी व्यवहार के लिए ‘सजग’ कार्यक्रम, तीसरे सप्ताह में शिशु देखभाल, अन्नप्राशन दिवस एवं चौथे व पांचवे सप्ताह में निगरानी द्वारा अतिकुपोषित बच्चों की पहचान, 3-6 वर्ष के बच्चों के साथ केंद्र में चित्रांकन प्रतियोगिता का संचालन जैसे कार्यक्रमों का संचालन कराया जाएगा।

– मिलेगा सहयोग, पूरा होगा अभियान
पोषण माह के सफल संचालन के लिए समेकित बाल विकास परियोजना (आईसीडीएस) विभाग को अन्य विभागों व लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, जीविका, पीएचईडी इत्यादि के साथ-साथ राष्ट्रीय पोषण अभियान के लिए जिला में कार्यरत जिला समन्वयक, जिला परियोजना सहायक, स्वास्थ्य भारत प्रेरक, पिरामल फाउंडेशन, केयर इंडिया व यूनिसेफ द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है।

पोषण को लेकर जागरूकता अभियान ने पकड़ी रफ्तार

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शहर से लेकर गांव तक लोगों को बताया जा रहा पोषण का महत्व

दीवारों पर नारे लिखकर लोगों को किया जागरूक

बांका, 9 सितंबर

पोषण को लेकर लगातार जागरूक करने के उद्देश्य से सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. शहर से लेकर गांव तक में लोगों को अच्छे पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है. बुधवार को गांव-गांव में जाकर दीवारों पर सही पोषण-देश रोशन, स्वस्थ बच्चा-देश अच्छा, बच्चों की सफाई का रखें ध्यान, अच्छे मां-बाप की पहचान जैसे नारे दीवारों पर लिखे गए.

डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि जिले में पोषण को लेकर हर स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. गांव में दीवारों पर नारे लिखने का मकसद यह है कि लोग चलते-फिरते फिरते भी इसे पढ़कर समझ सके कि स्वस्थ जीवन के लिए पोषण कितना जरूरी है. जिले में पूरे महीने पोषण को लेकर हर दिन कोई ना कोई कार्यक्रम हर स्तर पर किया जा रहा है, ताकि लोग पोषण के महत्व को समझ सके.

घर- घर जा कर सही पोषण की दी गई सलाह: लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करने के लिए सेविका घर-घर घर जाकर घर के सदस्यों को बता रही हैं कि सही पोषण के क्या-क्या क्या लाभ हैं. साथ ही सही पोषण के लिए किन-किन चीजों का सेवन करना चाहिए. ना सिर्फ बच्चे और बड़े, बल्कि हर उम्र के लोगों को सही पोषण की सलाह दी गई ताकि वह स्वस्थ रह सकें.

गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने की मिली सलाह: आंगनबाड़ी सेविका गांव की गर्भवती और धात्री महिलाओं को घर जाकर पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी. उन्हें बताया गर्भ के वक्त सही पोषण लेने से उनके बच्चे भी स्वस्थ रहेंगे. इसलिए अभी मांस-मछली और प्रोटीन युक्त भोजन का अधिक से अधिक सेवन करें. जो महिला मांस मछली नहीं खाती हैं वह दूध और हरी सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें.

बच्चों के विकास के लिए सही पोषण आवश्यक: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि बच्चों के विकास के लिए सही पोषण बहुत महत्वपूर्ण है. खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान. गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है. इससे बच्चे का सही ढंग से विकास होता है. जन्म के बाद 6 माह तक केवल स्तनपान तथा उसके बाद बच्चे को दो साल तक स्तनपान के साथ पूरक पौष्टिक आहार ही देना चाहिए. गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. बच्चे के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है.

सही पोषण देता है रोग से लड़ने की क्षमता:डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि बच्चों को रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन जीने के लिए पोषक तत्व महत्वपूर्ण है. पर्याप्त पोषण की कमी से, शारीरिक के साथ-साथ कई तरह के विकार हो सकते हैं. कुपोषण और भूख एक समान नहीं है, हालांकि दोनों संबंधित हो सकते हैं. भूख तब लगती है जब पेट खाली होता है, जबकि कुपोषण पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है.

पोषण माह के दौरान आयोजित होने वाले गतिविधियाँ में तेजी लाने के लिए निकाला गया जागरूकता रथ

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-जिला समाहरनालय से निकाला गया रथ

-जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रथ को किया रवाना

-गाँव-गाँव जाएगा रथ, दिया जाएगा पोषण संदेश

लखीसराय, 09 सितम्बर, 2020
पूरे सितम्बर माह मनाये जाने वाले पोषण माह के दौरान आयोजित होने वाली तमाम गतिविधियाँ में तेजी लाने के लिए एवं पोषण माह को सफल बनाने के लिए बुधवार को जिला समाहरनालय परिसर से जागरूकता रथ निकाला गया। जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने रथ को हरी झंडी दिखाकर पूरे जिले के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के लिए रवाना किया। उक्त रथ गाँव-गाँव जाकर लोगों को पोषण का संदेश देंगे और माइकिंग व ऑडियो पोषण गीत से लोगों को जागरूक करेंगे। दरअसल, इस रथ का उद्देश्य ही लोगों को सही पोषण के लिए जागरूक करने के साथ-साथ गर्भावस्था में और बच्चों का ऊपरी आहार, खानपान के प्रति सजग होने, शिशु जनित रोगों से मुक्ति के लिए सही जानकारी उपलब्ध कराना के मकसद से निकाला गया है। ताकि कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण हो सकें। पोषण माह का मुख्य उद्देश्य देश के बच्चों, किशोरों एवं महिलाओं को कुपोषण मुक्त, स्वस्थ और मजबूत बनाना है। यह काम विभिन्न सरकारी विभागों के रूपांतरण से होगा। इसमें समाज कल्याण, स्वास्थ्य, पेयजल स्वच्छता, पंचायत राज आदि विभाग मिलकर काम करेंगे। पूरे सितंबर माह प्रतिदिन सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों, प्रखंडों व जिलास्तर पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जबकि पोषण जागरूकता रथ ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण के महत्व के बारे में बताएगा। कुपोषण को दूर करने के लिए पोषण के पांच सूत्र तैयार किये गये हैं। पहला सुनहरा 1000 दिन, डायरिया प्रबंधन, पौष्टिक आहार, स्वच्छता एंव साफ-सफाई, एनिमिया प्रबंधन शामिल है। इन पांच सूत्रों से कुपोषण पर लगाम लगाया जायेगा।

सही पोषण से ही बच्चों का होगा स्वस्थ शरीर का निर्माण
इस अवसर पर जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा कि सही पोषण से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास और स्वस्थ शरीर का निर्माण होता। इसलिए बच्चों के विकास के लिए सही पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान। गर्भावस्था व जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष में मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं. नवजात बच्चों के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देना बहुत महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने बताया शिशुओं को छः महीने तक सिर्फ़ मां का दूध ही देना चाहिए इसके अलावे एक बूंद पानी भी नही देना होता हैं तथा दो साल तक स्तनपान के साथ पूरक आहार करना चाहिए.

गर्भावस्था में सही पोषण जरूरी

आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने कहा कि गर्भावस्था में मां को अच्छे पोषण की जरूरत होती है। इस दौरान सही पोषण बच्चे के विकास और मां के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी है। माताओं को ध्यान रखना चाहिए कि उनके पोषण में विटामिन और मिनरल्स की कमी न हो। गर्भावस्था के दौरान सही डायट चार्ट बनाना और उसका पालन करना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान आप जो भी आहार लेती हैं, उससे न केवल आपके शरीर को पोषण मिलता है, बल्कि आपके पेट में पल रहे बच्चे का भी विकास होता है।

जागरूकता रथ देगा ये जानाकरी

-जन्म के छह माह तक सिर्फ माँ का दूध पिलायें
-छह माह के बाद बच्चों को स्तनपान के साथ पूरक आहार दें
-गर्भवती होने पर आंगनबाड़ी केंद्र पर रजिस्टेशन करायें
-बच्चों को खाना खिलाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें
-गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का सेवन करें
-गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली जरूरी लेनी चाहिए