कोरोना काल में लोगों की सोच बदल रहे युवा, समझा रहे संक्रमण का खतरा 

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– भविष्य की सुरक्षा के लिए अवसर देने वालों को आगे आने की हो रही है अपील
– मास्क और सैनिटाइजर के उपयोग को लेकर क्षेत्र के  युवा लोगों को कर रहे हैं जागरुक
 मुंगेर, 05 सितम्बर
कोरोना काल में युवा जागरुकता की अलख जगा रहे हैं। मास्क और सैनिटाइजर के उपयोग से लेकर लोगों को शारीारिक दूरी का भी पाठ बढ़ा रहे हैं। यह ऐसे युवा हैं जो बाहर रहकर पढ़ाई या नौकरी करते हैं लेकिन कोरोना काल में घर में हैं। युवाओं का यह प्रयास रंग ला रहा है। हालांकि मास्क और सैनिटाइजर के इस्तेमाल के साथ शारीरिक दूरी को लेकर प्रशासन भी अभियान चला रहा है जिसमें युवाओं का प्रयास काफी असर कर रहा है। स्थानीय स्तर पर की जा रही इस पहल से लोगों में बदलाव देखने को मिल रहा है। युवा वर्ग का कहना है कि लोग अब गंभीर हो गए हैं। संक्रमण से बचने के सावधानियां बरत रहे हैं।
– लोगों की जरूरतें पूरी होनी जरूरी :
बैंगलोर में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर आकाशदीप लॉकडाउन के बाद से अपने गृह जिले मुंगेर में रह रहे हैं। आकाशदीप बताते हैं कि कोविड-19 के दौर में काफी बदलाव हुए हैं। मध्य और गरीब तबके पर संक्रमण काल ने गहरा प्रभाव छोड़ा है। इस वक्त हमें उन अभिभावकों की बातें सुननी होगी जो अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर न मिल पाने से फ़िक्रमंद हैं। कोरोना काल में भी हमे समाधान खोजना होगा, क्योंकि जीवन में कोरोना एक बड़ी चुनौती लेकर आया है। हालांकि लोगों में बड़ा बदलाव आया है और हर कोई अब जागुरकता की बात कर रहा है। संक्रमण से बचने को लेकर लोगों में सतर्कता देखी जा रही है।
– युवाओं की अपील, बढ़ाए मदद के हाथ
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, भोपाल से शोध कर रहे युवा अमित कुमार का लगाव शुरू से ही सामाजिक कार्यों में रहा है। स्नातक और स्नातकोत्तर की शिक्षा लेने के दौरान वे सूबे के कई जिलों में भ्रमण कर चुके हैं। वे बताते हैं कि राज्य के युवाओं की प्रतिभा किसी से छुपी नहीं है। ​चाहे कृषि, शिक्षा, विज्ञान या अन्य क्षेत्र हो यहां के लोगों ने अपनी क्षमता का लोहा हर जगह मनवाया है। अब लॉकडाउन के बाद कई सारी समस्याएं आ गई हैं, हालांकि इससे भी हम जल्द उबर जाएंगे। इसके लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम कर रही है। इससे सुधार भी तेजी से नजर आ रहा है। आम नागरिकों का समाज के साथ समन्वय भी देखने को मिल रहा है। अमित कहते हैं कि संक्रमण के शुरुआत में बचाव के उपाय और इसके प्रसार में युवाओं ने अहम भूमिका निभाई है। अब स्थिति धीर-धीरे सामान्य हो जाएगी। अनलॉक में लोग अपने काम पर सावधानी के साथ लौट रहे हैं। सुरक्षा के जो दिशा निर्देश मिले हैं उसपर अमल करते हुए लोगों को काम करने की अपील युवा वर्ग कर रहा है।
– कोरोना काल में रोजगार के अवसर को लेकर भी कर रहे जागरुक
कोरोना काल में रोजगार के अवसर को लेकर भी क्षेत्र के लोगों को युवा जागरुक कर रहे हैं। सरकारी की योजनाओं के साथ रोजगार के अन्य अवसरों के में उन्हें बताया जा रहा है। वह लोगों को स्वरोजगार शुरू करने के लिए केंद्र और राज्य सराकरें अनुदान के बारे में बता रहे हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की योजनाओं को बढ़ावा दिए जाने की भी बात बता रहे हैं।मनरेगा के तहत किसानों और मजदूरों को काम उपलब्ध कराए जाने की भी जानकारी दे रहे हैं। स्थिति सामान्य होने पर कामगारों को वापस काम पर बुलाने की भी जानकारी दी जा रही है। युवाओं का कहना है कि वह क्षेत्र में है तो अपने समय का लोगों को जागरुक कर उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों को जागरुक कर उन्हें न सिर्फ कोरोना के संक्रमण से बचाने का प्रयास किया जा रहा है बल्कि रोजगार को लेकर जानकरी देकर अन्हें जागरुक किया जा रहा है।

आंगनबाड़ी सेविका द्वारा घर घर जाकर दूध का किया जा रहा वितरण

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आंगनबाड़ी सेविका द्वारा घर घर जाकर दूध का किया जा रहा वितरण
– माता पिता को कुपोषण के प्रति कर रही जागरूक
– पोषण माह के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक
– बच्चों के बेहतर विकास के लिए सही पोषण जरूरी
 बांका, 5 सितंबर
सही पोषण हर किसी के लिए जरूरी होता है. बच्चों के लिए पोषण का महत्व और बढ़ जाता है. इसी को देखते हुए कोरोना काल में भी बच्चों के पोषण पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है. घर- घर जाकर आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा सुधा दूध के पैकेट का वितरण किया जा रहा है.
आईसीडीएस की डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया, कोरोना काल में भी बच्चों के बेहतर पोषण पर ध्यान दिया जा रहा है. कोरोना संक्रमण के कारण आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने से सेविका द्वारा घर- घर जाकर सुधा दूध पाउडर का वितरण किया जा रहा है. दूध पाउडर में मौजूद पोषक तत्व बच्चों को कुपोषण मुक्त एवं सेहतमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है. बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए दूध का वितरण किया जा रहा है.
सही पोषण मिलने से बच्चों की बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया, बच्चों को सही तरीके से पोषण मिलने से उसका ठीक तरीके से विकास होता है. साथ ही उसमें बीमारियों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होती है इससे बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर रहता है इसलिए बच्चों के लिए सही पोषण जरूरी है.
कुपोषण की दर में कमी लाने के लिए उठाया गया है यह कदम: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया, ग्रामीण इलाकों में कुपोषण की दर में कमी लाने के लिए 03 से छह साल के बच्चों को 200 ग्राम दूध देने का प्रावधान है. बच्चों में प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. आंगनबाड़ी सेविका प्रत्येक बच्चे को 18 ग्राम दूध पाउडर 150 मिलीलीटर शुद्व पेयजल में घोलकर पिला रही हैं.
स्वस्थ शरीर में ही होता है स्वस्थ मस्तिष्क का निवास: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है, इसीलिए बेहतर समाज के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि हमारी इस पीढ़ी को अच्छा पोषण मिले और वह सुरक्षित रहे. सभी माताओं का यह दायित्व है कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए साफ सफाई बरती जाए, नियमित रूप से खाने से पहले व खाने के बाद अच्छी तरह से हाथ धोया जाए, शौचालय करने के बाद हाथ पैर धोया जाय. कुपोषण की समस्या तभी दूर हो सकती है जब बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया जाएगा.
पोषण माह के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक: डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. इस दौरान पोषण के प्रति बच्चों के माता-पिता व परिजनों को जागरूक किया जायेगा. साथ ही पोषण के सभी सेवाओं को समुदायस्तर तक पहुँचाया जाएगा. इस दौरान घर- घर जाकर बच्चे के माता- पिता को पोषण के बारे में जानकारी दी जाएगी एवं बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए प्रेरित किया जाएगा. पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य एनीमिया, बौनापन एवं दुबलापन में कमी लाना है. इस लिहाज से पूरे माह एनीमिया, बौनापन एवं दुबलापन से ग्रसित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण सुविधा प्रदान की जाएगी

पोषण माह की सफलता को लेकर जिले में किया गया पोषण परामर्श केंद्र का स्थापना

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• जिलाधिकारी ने किया उदघाटन

• कुपोषणमुक्त समाज निर्माण को लेकर लोगों को किया जाएगा जागरूक

खगड़िया, 05 सितम्बर, 2020
कुपोषणमुक्त समाज का निर्माण के लिए पूर्व की भाँति भी इस माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा और लोगों को जागरूक करने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिले मुख्यालय परिसर स्थित आईसीडीएस कार्यालय के सामने पोषण परामर्श केंद्र का स्थापना किया गया है। जिसका उदघाटन जिलाधिकारी डॉ आलोक रंजन घोष ने फीता काटकर किया।

स्वस्थ शरीर से ही स्वस्थ मानसिकता का होता है निर्माण

इस मौके पर जिलाधिकारी डॉ आलोक रंजन घोष ने कहा कि स्वस्थ शरीर से ही स्वस्थ मानसिकता का निर्माण होता है और बच्चों का स्वस्थ सेहत का भी निर्माण होता है। इसीलिए बेहतर समाज के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि इस पीढ़ी को अच्छा पोषण मिले और वह सुरक्षित रहे। सभी माताओं का यह दायित्व है कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए साफ सफाई पर ध्यान दें , नियमित रूप से खाने से पहले व खाने के बाद अच्छी तरह से हाथ धोया जाए एवं शौचालय करने के बाद हाथ पैर धोया जाय। कुपोषण की समस्या तभी दूर हो सकती है जब बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया जाएगा।

पोषणमाह को सफल बनाने के लिए मौजूद पदाधिकारियों व कर्मियों ने ली शपथ

उदघाटन के मौके पर मौजूद सभी पदाधिकारियों व कर्मियों ने पोषण माह को सफल बनाने के लिए शपथ लिए और हर हाल में कुपोषणमुक्त समाज निर्माण का संदेश दिया। साथ ही समाज के हर लोगों को जागरूक करने के लिए आवश्यक योजना बनाई
उचित पोषण से बच्चों की बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता

आईसीडीएस के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी नीना सिंह ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए उचित पोषण की बेहद आवश्यक होती है, इससे बच्चों का प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इसी के मद्देनजर ऑगनबाड़ी केंद्र का संचालन बंद रहने के बाबजूद सेविका द्वारा घर-घर जाकर दूध पैकेट का वितरण किया जा रहा है।

जागरूकता के लिए चलाया जा रहा अभियान

राष्ट्रीय पोषण मिशन के जिला समन्वयक अंम्बुज कुमार ने बताया कि पोषण माह को सफल बनाने के ऑटो, ई रिक्सा समेत अन्य वाहनों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान समाज के हर लोगों तक पोषण का संदेश पहुँचाया जा रहा है। ताकि कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण हो सकें। वर्ष 2020 राष्ट्रीय पोषण माह का थीम “किचन गार्डन को बढ़ावा देने के लिए गंभीर तीव्र कुपोषण (सैम) और वृक्षारोपण के साथ बच्चों की पहचान और ट्रैकिंग रखी गई है।

जिला से लेकर गाँव स्तर पर कार्यक्रम का होगा आयोजन

सही पोषण की जानकारी हर घर तक पहुँचे इसके लिए जिला से लेकर गाँव स्तर पर पूरे माह तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रथम सप्ताह में घर-घर क्यारी, पोषण थाली अभियान का शुभारंभ सह पौधा रोपण, जननी सेवा, गोदभराई दिवस, पोषण नारों का दीवार लेखन के साथ-साथ ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (भीएचएसएनडी) का आयोजन किया जाएगा। दूसरे सप्ताह में भी इन गतिविधियों के अलावा बच्चों के प्रति उत्तरदायी व्यवहार के लिए ‘सजग’ कार्यक्रम, तीसरे सप्ताह में शिशु देखभाल, अन्नप्राशन दिवस एवं चौथे व पांचवे सप्ताह में वृद्धि निगरानी द्वारा अतिकुपोषित बच्चों की पहचान, 3-6 वर्ष के बच्चों के साथ केंद्र में चित्रांकन प्रतियोगिता का संचालन जैसे कार्यक्रमों का संचालन करवाया जाएगा।

विभिन्न विभागों द्वारा मिलेगा सहयोग

पोषण माह के सफल संचालन के लिए समेकित बाल विकास परियोजना (आईसीडीएस) विभाग को अन्य विभागों व लोगों का भी सहयोग मिलेगा। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, जीविका, पीएचईडी इत्यादि के साथ-साथ राष्ट्रीय पोषण अभियान के लिए जिला में कार्यरत जिला समन्वयक, जिला परियोजना सहायक, स्वास्थ्य भारत प्रेरक, पिरामल फाउंडेशन, केयर इंडिया व यूनिसेफ द्वारा भी आवश्यक सहयोग लिया जाएगा।

इस मौके पर वरीय उप समाहर्ता शत्रुंजय मिश्रा, आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीना सिंह, एनएनएम के जिला समन्वयक अंम्बुज कुमार, सीडीपीओ कामिनी कुमारी समेत जिले के विभिन्न बाल बिकास परियोजना कार्यालय के सीडीपीओ, महिला सुपरभाइजर समेत अन्य पदाधिकारी व कर्मी उपस्थित थे।

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के गोल्डन कार्ड अब बनेंगे पंचायत स्तर पर

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-कार्यपालक सहायक को कार्ड बनाने की सौंपी जाएगी जिम्मेदारी, अन्य कर्मी भी करेंगें सहयोग

-कोविड-19 के सभी मानकों का रखा जाएगा ख्याल

-स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सचिव ने पत्र जारी कर दिए निर्देश

लखीसराय, 05 सितम्बर, 2020
सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग लोगों को बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर पूरी तरह संकल्पित और कटिबद्ध हैं। इसी कड़ी में कोविड-19 के कारण बंद किए गए आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड का कार्य फिर से शुरू करवाने का निर्णय लिया गया है और इसे जल्द से शुरू कराने के लिए आवश्यक तैयारियाँ भी शुरू कर दी गई है। कार्य में तेजी लाने एवं जल्द से जल्द अधिक से अधिक लोगों का कार्ड बनाने को लेकर पंचायत स्तर पर कार्ड बनाया जाएगा। ताकि हर लोगों आसानी के साथ अपना कार्ड बनवा सकें। इसको लेकर स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने पत्र जारी कर जिलाधिकारी एवं जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं और हार हाल में तेजी के साथ कार्ड बनाने के लिए हर आवश्यक पहल करने को कहा है।

पंचायत स्तर पर तैनात कार्यपालक सहायक बनाएँगे गोल्डन कार्ड :

गोल्डन कार्ड बनाने के कार्य में तेजी लाने को लेकर पंचायत स्तर पर तैनात कार्यपालक सहायक को कार्ड बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो अपने-अपने क्षेत्र के लोगों का सुविधाजनक तरीके से गोल्डन कार्ड बनाएँगे। ताकि निर्धारित तिथि तक कार्ड बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकें।

शीघ्र शुरू होगा गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मनंद राय ने बताया कि जिले के सभी जगहों पर गोल्डन कार्ड बनाने का कार्य शीघ्र शुरू होगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियाँ की जा रही है और संबंधित पदाधिकारियों को शीघ्र कार्य शुरू कराने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

क्या है योजना: वर्ष 2011 के सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना में चिन्हित गरीब परिवारों को इस योजना का पात्र बनाया गया है. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लाभार्थी परिवार पैनल में शामिल सरकारी या निजी अस्पतालों में प्रति वर्ष 5 लाख रूपये तक कैशलेस ईलाज करा सकते हैं. योजना का लाभ उठाने के लिए उम्र की बाध्यता एवं परिवार के आकार को लेकर कोई बंदिश नहीं है. योजना को संचालित करने वाली नेशनल हेल्थ एजेंसी ने एक वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. इसके जरिये लाभार्थी यह जान सकते हैं कि उनका नाम लिस्ट में शामिल है या नहीं. लिस्ट में नाम जांचने के लिए mera.pmjay.gov.in वेबसाइट देख सकते हैं या हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल कर जानकारी ली जा सकती है.

जनप्रतिनिधि भी करेंगे सहयोग

गोल्डन कार्ड बनवाने से एक भी लोग वंचित नहीं रहे। इसके पंचायत स्तरीय जनप्रतिनिधि मुखिया, वार्ड सदस्य समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी सहयोग करेंगे। साथ ही कार्ड बनाने को लेकर जागरूक करेंगे।

आशा भी घर-घर जाकर लोगों को करेंगी जागरूक

स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता भी अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और कार्ड बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही कार्ड बनने के बाद इलाज में होने वाले सरकारी मदद की भी जानकारी देंगे।

कोविड-19 के सभी मानकों का रखा जाएगा ख्याल

गोल्डन कार्ड बनाने के दौरान कर्मी कोविड-19 के सभी मानकों का ख्याल रखेंगे और पालन करेंगे। जैसे कि मास्क व गलैप्स का उपयोग, शारीरिक-दूरी का पालन, सेनेटाइजर का उपयोग समेत कोविड-19 से बचाव के लिए हर आवश्यक निर्देशों का पालन करेंगे।

गोल्डन कार्ड से कोविड-19 का भी होगा मुफ्त इलाज

गोल्डन कार्ड से कोविड-19 का भी समुचित रूप से मुफ्त इलाज होगा। शेष पूर्व की भाँति सभी सुविधाओं का भी लाभ दिया जाएगा। इसलिए एक भी लोग कार्ड बनवाने से वंचित नहीं रहें इसका कर्मियों द्वारा ख्याल रखा जाएगा। इसके लिए गाँव में जागरूकता अभियान की तरह लोगों को कार्ड बनाने के लिए जागरूक किया जाएगा।

व्यवहार में बदलाव से टूटेगा कोरोना का चेन

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– समाज का नजरिया बदलकर कोरोना को मात देने पर बात
– आईसीडीएस के वेबिनार सिरीज में शुक्रवार को सामाजिक व्यवहार में बदलाव पर मंथन
– फ्रंट लाइन पर काम करने वालों को बताया गया कैसे लाएं कोरोना के प्रति लोगों के व्यवहार में परिवर्तन

भागलपुर, 04 सितंबर
सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान कुपोषण को मात देने के साथ-साथ कोरोना काल में सामाजिक व्यवहार परिवर्तन को लेकर भी बड़ा प्रयास किया जा रहा है। वेबिनार के माध्यम से चल रहे वेबिनार के तीसरे दिन शुक्रवार को समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ने सामाजिक व्यवहार परिवर्तन पर मंथन किया। नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने वेबिनार में कोरोना काल में मानसिक तनाव और इससे होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फील्ड वर्कर समाज में लोगों की सोंच और सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन का प्रयास करें तो बड़ा बदलाव आ सकता है। इसके बाद एक-एक कर एक्सपर्ट ने सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाने को लेकर कई उपाए बताए।

आधारहीन और बिना तथ्य वाली जानकारी बढ़ा रही भेदभाव
यूनिसेफ की एक्सपर्ट मोना सिन्हा ने बताया कि कोरोना काल में आधारहीन जानकारियों से मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर पड़ रहा है। मनोवैज्ञानिक प्रभाव दिमाग पर पड़ने समाज में नकारात्मकता बढ़ गई है। यह एक बड़ी चुनौती है और इससे निकलने के लिए सामाजिक व्यवहार परिवर्तन लाना बहुत जरुरी है। कोरोना से लड़ाई लड़ने वाले हों या फिर कोरोना को मात देकर अस्पताल से घर आने वाले हों, उनके साथ समाज का व्यवहार अच्छा होना चाहिए। कोरोना काल के छह माह में बहुत सारी गलत भावनाओं का विकास होने का बड़ा कारण आधारहीन तथ्यों पर आसानी से आंख बंदकर विश्वास कर लेना है। इस कारण से भेदभाव के मामले बढ़े हैं।

कोरोना काल में भेदभाव बड़ी चुनौती:
यूनिसेफ के विशेषज्ञ सुधाकर ने कोरोना काल में सबसे बड़ी चुनौती कोरोना संक्रमितों के प्रति भेदभाव को बताया। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अभद्रता के मामलों के साथ सुसाइड के मामलों को भेदभाव से जोड़कर बताया। उनका कहना है कि समाज में लोगों के व्यवहार में ऐसा परिवर्तन हो गया है कि वह सामाजिक भेदभाव का सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा तब होता है जब इंसान गलत जानकारी और अफवाहों के चक्कर में चारो तरफ से मानिसक समस्या से घिर जाता है, तब बचाव में वह भेदभाव को ही अपनी ढाल बना लेता है। हालांकि पहले से अब स्थितियां काफी बेहतर हुई हैं और अब जागरुकता का भी असर दिख रहा है. लेकिन अभी भी सामाजिक व्यवहार में बदलाव की बड़ी जरुरत है। फ्रंट लाइन वर्कर की चुनौतियों के बारे में बताते हुए एक्सपर्ट सुधाकर ने कहा कि अगर हम कुछ बदलाव लाएं तो इससे आसानी से निपटा जा सकता है। उन्होंने सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन के कई मूल मंत्र बताए, जिसके सहारे कोरोना काल में बेहतर काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गलत सूचनाओं के भंडार को तोड़ने के लिए फील्ड में काम करने वालों को तथ्यों के आधार पर अपनी बात लोगों के बीच रखनी होगी। सुरक्षा को लेकर उन्होंने फ्रंट लाइन वर्करों को कहा जब भी किसी घर जाएं हाथ साफ कर लें, लोगों से बात करने के लिए खुले मैदान को चुने, फोन से बातकर लोगों को पॉजिटिव विचारों की तरफ ले जाएं।

चुनौतियों में आएगा निखार:

यूनिसेफ की डॉ प्रमिला और डॉक्टर कौल ने सामाजिक व्यवहार में बदलाव के साथ सुरक्षा व बचाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि फील्ड में काम करने वाली फ्रंट लाइन वर्करों को सुरक्षा का ख्याल रखते हुए अभियान को सफल बनाना है। उनका कहना है कि उनकी सफाई और काम करने का तरीका देखकर लोगों में भी बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भ्रांतियों के कारण बहुत सारी समस्या आई जिससे फ्रंट लाइन वर्करों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब जागरुकता के कारण काफी बदलाव आया है। इस बदलाव से कोरोना को लेकर भी गांव से लेकर शहर तक लोगों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सरकार और स्वास्थ्य संगठनों द्वारा गाइडलाइन का पालन हो रहा है जिससे अब सामाजिक व्यवहार में भी परिवर्तन दिखने लगा है। कोरोना को मात देने वाले और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार नहीं होना चाहिए, ऐसे लोग तो योद्धा हैं जो कोरोना को मात दे चुके हैं। ऐसे लोगों के प्लाज्मा से अन्य कोरोना रोगियों को ठीक किया जा रहा है। कोरोना काल में जागरुकता से ही सामाजिक भेदभाव के मामलों को खत्म किया जा सकता है और इसके लिए हर स्तर पर सरकार प्रयास कर रही है। कोरोना में लोगों से भेदभाव और भारी पड़ता है, इसलिए इससे बचना होगा।

सामाजिक व्यवहार को लेकर आसान होगी चुनौती:

राज्य पोषण विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज कुमार ने कहा कि सामाजिक व्यवहार को अपनाने में चुनौती तो आएंगी, लेकिन इसे जागरुकता से आसान किया जा सकता है। उन्होंने फ्रंट लाइन में काम करने वालों को प्रशिक्षण के दौरान बताया कि अगर लोगों तक सही जानकारी तथ्य के साथ पहुंचे तो कोई चुनौती नहीं है। आसानी से ही हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। लोगों में कोरोना को लेकर जागरुकता लानी होगी जिससे वह इसके बारे में आसानी से समझ जाएं। कोरोना जाति धर्म और मजहब से नहीं फैलता है। यह किसी को भी हो सकता है और इस चुनौती के लिए सभी को तैयार रहना होगा। अगर हम पूरी तरह से जागरुक रहें और जांच कराने में आगे आएं और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें तो आसानी से इस जंग को जीता जा सकता है। इस दौरान सवाल जवाब किया गया। जिसमें सामाजिक व्यवहार और इससे आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की गई।
वेबिनार के समापन पर नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने किया उन्होंने वेबिनार सिरीज का महत्व बताते हुए इसमें चौथे दिन शनिवार को भी लोगों से नए विषय के साथ शामिल होने की अपील की है।

गर्भ से ही देखभाल शुरू होने से शिशु को नहीं होती परेशानी

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– नवजात का वजन जन्म के समय 2.5 किलो या इससे ज्यादा रहना चाहिए
– कम वजन वाले शिशु (लो बर्थ वेट) को हो सकती है कई प्रकार की समस्याएं
– गर्भवती की नियमित जांच व बेहतर पोषण-आहार से शिशु का स्वास्थ्य रहता है बेहतर

लखीसराय, 4 सितम्बर।

घर में बच्चे की किलकारी हर किसी को अच्छी लगती है, लेकिन अगर बच्चा स्वस्थ न हो तो सभी परेशान हो जाते हैं। खासकर कमजोर और कम वजन वाले बच्चे को लेकर। नवजात के जन्म से ही हर कोई उसके वजन को लेकर चिंतित रहता है। अगर बच्चा सामान्य और उसका वजन ठीक है तो सब चिंता मुक्त रहते हैं। वहीं अगर बच्चे का वजन कम वजन रहता है तो सभी उसके आगे होने वाली समस्याओं को लेकर चिंतित रहने लगते हैं।
सदर अस्पातल, लखीसराय के स्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रूपा ने बताया, आम तौर पर स्वस्थ्य नवजात का जन्म 37 से 40 सप्ताह के बीच हो जाता है। सामान्य रूप से जन्म के समय एक शिशु का वजन 2.5 किलो से 4 किलो के बीच हो सकता है। हालांकि कुछ का वजन सामान्य से कम हो सकता है। यह महिला के गर्भवती होने से शिशु के जन्म तक उसके पोषण आहार और देखभाल पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया अगर जन्म के समय नवजात का वजन 2.5 किलो से कम रहता है, तो उसे कम वजन की श्रेणी में रखा जाता है। कई मामलों में ऐसी समस्या समय से पूर्व जन्म लिए बच्चों के साथ होती है। क्योंकि ऐसे बच्चे को मां के गर्भ में विकसित होने के लिए उचित पूर्ण सयम नहीं मिल पाता। वहीं उचित पोषण और देखभाल के अभाव वाली महिला के बच्चे के साथ भी यह परेशानी हो सकती है।

कम वजन वाले बच्चों को होती है ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी परेशानी:
डॉक्टर रूपा के अनुसार स्तनपान कराने में परेशानी के साथ कम वजन वाले बच्चे को भविष्य में कई तरह की शारीरिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। खासकर शरीर में वसा की कमी के कारण ऐसे बच्चे के लिए अपने शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखना मुश्किल होता है। ऐसे में ये जल्द संक्रमण वाले रोगों से प्रभावित हो जाते हैं। साथ ही आंखों की रौशनी, पेट की परेशानी सहित कई समस्याएं हो सकती हैं। वहीं जन्म के एक वर्ष के अंदर कम वजन वाले बच्चों में मृत्यु का खतरा भी बना रहता है।

गर्भ से ही बच्चे का ख्याल रखना है बेहतर:
डॉक्टर रूपा के अनुसार न केवल कम वजन बल्कि स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए उसकी देखभाल गर्भ में रहने के दौरान से ही शुरू कर देनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि गर्भवती को पोषक आहार और पूर्ण स्वास्थ्य देखभाल की जाए। साथ ही चिकित्सक से मिलते रहना चाहिए। प्रसव से पूर्व गर्भवती की नियमित रूप से जांच से शिशु के विकास की सही जानकारी मिलती रहती है। चिकित्सक गर्भवती के वजन से अंदाजा लगा सकते हैं कि भ्रूण का विकास सही प्रकार से हो रहा है या नहीं।
स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत:
शिशु के वजन के साथ जन्म के बाद उसे संक्रमण के प्रभाव में आने से बचाने के लिए गर्भवती के स्वास्थ्य और पोषण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। डॉक्टर रूपा कहती हैं कि प्रसव पूर्व गर्भवती की बेहतर देखभाल जन्म से कम वजन शिशुओं की समस्या को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही चिकित्सक से समय-समय पर मां और होने वाले शिशु का स्वास्थ्य जांच आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं के खाने में अंकुरित अनाज के साथ दाल, फल, पत्तेदार सब्जियां, साग, फल, जूस और अनाज को शामिल किया जाना चाहिए।

सही देखभाल से शिशु के वजन को ठीक किया जा सकता है:
डॉक्टर रूपा के अनुसार नवजात शिशु के कम वजन को सही आहार व उचित देखभाल के जरिए ठीक किया जा सकता है। न सिर्फ गर्भावस्था के समय, बल्कि जन्म के बाद भी स्तनपान के साथ अगर मां अपने भोजन पर विशेष ध्यान दे तो यह संभव है। इसके साथ ही चिकित्सक से मिलकर बच्चे के स्वास्थ्य के लिए उचित सलाह, जांच और टीकाकरण काफी कारगर साबित होते हैं।

कंगारू मदर केयर है नवजात को बचाने में कारगर:
डॉक्टर रूपा के अनुसार जन्म के समय कम वजन (एक्सट्रीम लो बर्थ वेट) वाले बच्चों को बेहतर देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर बहुत कारगर सिद्ध हुआ है। कंगारू मदर केयर के तहत बच्चे को मां के सीने से चिपका कर रखा जाता है, ताकि मां की शरीर की गर्माहट बच्चे तक पहुंच सके। मां का तापमान शिशु तक पहुंचने से उसका तापमान स्थिर रहता है और उसे बुखार होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। वहीं आशा, आंगनबाड़ी और एनएनएम कार्यकर्ता द्वारा नवजात के सामान्य होने तक उसकी स्वास्थ्य गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।

पोषण अभियान कार्यक्रम से भी मिलेगा बल:
वहीं लखीसराय के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर अशोक कुमार भारती के अनुसार जिले में पोषण अभियान अंतर्गत ‘पोषण माह’ का आयोजन हो रहा है। 30 सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत कई प्रकार की स्वास्थ्य गतिविधियां आयोजित होंगी। इस दौरान भी कुपोषित बच्चों की पहचान, स्तनपान को बढ़ावा और गृह आधारित नवजात की देखभाल योजना पर कार्य होगा। हालांकि इससे पूर्व भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा गर्भवती, माता व नवजात शिशु के देखभाल, कम वजन वाले बच्चों की निगरानी और समस्या होने पर एएनएम को सूचना देने आदि का कार्य किया जाता रहा है।

बच्चे का वजन जन्म से कम हो तो इन बातों का रखें ख्याल:
– स्तनपान पर विशेष ध्यान दें। 6 माह तक केवल स्तनपान कराएं।
– चिकित्सक से बच्चे का नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
– वजन व अन्य चीजों को लेकर बच्चे का विकास के चार्ट बनवा लें।
– छह माह बाद चिकित्सक की सलाह पर ठोस खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें।
– मां के दूध में सभी तरह के पोषक तत्व होते हैं, इसलिए वह भी अपने खानपान का विशेष रूप से ख्याल रखे।

कोरोना काल में मानसिक रूप से मजबूत रहें युवा

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समाज के लोगों का सही-सही जानकारी देने की कोशिश करें

बांका, 4 सितंबर

किसी भी बीमारी से उबरने के लिए मानसिक तौर पर मजबूत होना बहुत जरूरी होता है. कोरोना जैसी महामारी से उबरने के लिए मानसिक तौर पर मजबूत होना बहुत ही जरूरी है. कोरोना को लेकर अब तक जो भी अनुभव रहे हैं उससे यह बात साफ हो जाती है कि जो लोग मानसिक तौर पर मजबूत दिखे वह जल्दी स्वस्थ हो गए और जो लोग मानसिक तौर पर मजबूत नहीं दिखे, उन्हें स्वस्थ होने में वक्त लग गया. यही कारण है कि लोगों को मानसिक तौर पर मजबूत होना बहुत जरूरी है. खासकर युवा वर्ग के लोगों को. युवाओं को ना सिर्फ अपना बचाव करना है, बल्कि उन पर समाज के लोगों को भी जागरूक करने की जिम्मेदारी है.
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि कोरोना महामारी को लेकर लोगों में मानसिक चेतना होना बहुत जरूरी है. कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन ऐसी परिस्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है. हमें यह बात समझनी होगी कि इस बीमारी से 2% से भी कम लोगों की जान जा रही है 98% लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो जा रहे हैं और वापस अपने जिंदगी में लौट आए हैं. इसलिए कोरोना को लेकर मानसिक तौर पर मजबूत रहें और बचाव के लिए सावधानी बरतें.

नकारात्मक सोच को नहीं होने दें हावी: कोरोना पीड़ित मरीज या फिर कोरोना को मात दे चुके लोगों के प्रति युवाओं को मन में नकारात्मक सोच नहीं रखनी चाहिए. इससे उन्हें फिर से सामाजिक जीवन में वापसी करने में मदद मिलेगी. अक्सर देखा जाता है कि कराना को मात दे चुके लोगों से लोग समाज में दूरी बनाकर रखते हैं.
ऐसा करना ठीक नहीं. अगर आप सकारात्मक सोच रखेंगे तो कोरोना से आपका भी बचाव होगा.

मास्क लगाएं और घरों से कम निकलें: कोरोना से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कि घर से कम निकले. अगर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें. इस तरह का व्यवहार करने से कोरोना से बचाव आसान होगा. सावधानी ही कोरोना से बचाव हो सकता है और यही इसका सबसे कारगर हथियार भी है, इसलिए व्यवहार में यही परिवर्तन लाकर बचाव करें व सुरक्षित रहें.

– इन बातों का रखें ख्याल:

1. छींकते और खांसते समय मुंह पर कपड़ा लगाएं.

2. खांसते छींकते समय मुंह पर लगाए गए टिशू पेपर को तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें.

3. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में तकलीफ है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें.

4. डॉक्टर से सलाह लेते समय मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छी तरह से ढकें रहें.

5. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ दूसरों को भी बचाएं.

6. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं, यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें.

7. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, राह चलते यूं ही सकड़ पर न थूकें.

अनलॉक में रखनी होगी ज्यादा सतर्कता, घर से करें शुरुआत

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– परिजन रख रहे हैं ख्याल, सतर्कता के साथ ही बाहर निकलने देते हैं
– मास्क, शारीरिक दूरी और स्वच्छता ही अभी है संक्रमण से बचाव का हथियार
– घर से बाहर रहे तो सैनिटाइजर से हाथों को साफ करते रहें
– अनावश्यक चीजों और हाथ से बार-बार चेहरे को छूने से करें परहेज
मुंगेर, 04 सितम्बर।

वैश्विक महामारी बन चुके कोविड-19 के संक्रमण पर रोकथाम के लिए जब तक वैक्सीन नहीं आ जाता मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी और स्वच्छता को अचूक हथियार के रूप में माना गया है। अब जबकि देश में अनलॉक का दौर शुरू हो चुका है, लोग कार्यस्थलों पर लौट रहे हैं, कई प्रमुख परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, ऐसे में लोगों की सजगता और जागरूकता पर भी बल देने की आवश्यकता बढ़ गई है। जिले के स्थानीय निवासी अमन ने बताया कि लोग कब तक घर में बंद रहेंगे, परीक्षाएं कब तक टाली जाएंगी। अब जब जीवन सामान्य रूप ले रहा है तो जरूरी है कि सतर्कता और सुरक्षा के नियमों का बेहतर रूप से पालन करते हुए सभी कार्य को समान रूप से गति प्रदान किया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सतर्कता और जागरूकता को बल घर से ही मिल सकता है, इसलिए परिवार के सभी सदस्यों को इस ओर ध्यान देना होगा। हम सभी घर से शुरुआत करेंगे तो अपने साथ समाज को भी सुरक्षित रखेंगे।

समाज में सबको निभानी होगी अपनी जिम्मेदारी:
अमन बताते हैं कि कोविड-19 का दौर हरेक व्यक्ति को कुछ न कुछ सीख अवश्य दे जा रहा है। खासकर कामकाजी व युवा वर्ग को इस दौरान काफी कुछ सीखने को मिला है। संक्रमण के बढ़ते क्रम पर नजर रखते हुए इससे बचाव की चर्चा अब ज्यादा होने लगी है। लोग सुरक्षा उपायों को अपनाते हुए अब उपचाराधीन की तरफ मदद का हाथ भी बढ़ा रहे है। युवाओं और स्वयं सहायता समूह द्वारा भी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी लोगों को जागरूक करना है ताकि वे सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए अपने दिनचर्या के कार्यों को अंजाम दें। समाज में हर एक व्यक्ति की एक अलग पहचान और जिम्मेदारी होती है। अगर लोग एक दूसरे का साथ देते हुए और सुरक्षा के मानकों पर चलते हुए चलेंगे तो निश्चय ही संक्रमण काफी हद तक कम किया जा सकता है।

घर-घर में सतर्कता और निगरानी से संक्रमण के प्रसार पर लगाम है संभव:
निखिल लाखमानी बताते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में घर के बड़े-बुजुर्गों और माताओं का दायित्व और जिम्मेदारी एक अलग ही रूप में देखी जा रही है। संक्रमण के प्रभाव में आने से परिवार के सदस्यों का बचाव करने के लिए वे सजग रह रहे हैं। घर में स्वच्छता अपनाने के साथ बाहर जाने से पहले ही इनके द्वारा सतर्क कर दिया जा रहा है। सैनिटाइजर लेकर और मास्क पहनकर ही बाहर निकलने दिया जा रहा है। वहीं सख्त निर्देश है कि बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें और इस दौरान शारीरिक दूरी का ख्याल रखते हुए काम जल्द खत्म कर घर वापस आ जाएं। वह कहते हैं कि घर-घर में ऐसी सतर्कता और निगरानी रखी जाए तो लोग घर से ही संभल जाएंगे और संक्रमण के प्रसार पर रोकथाम संभव हो सकेगी।

सतर्कता को कभी भी नजरअंदाज ना करें:
कार्यस्थल पर लौटने व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों का घर से बाहर निकलना जरूरी है। ऐसे में सभी को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की जरूरत है। दुकान व बाजार के साथ ही हम अक्सर स्वास्थ्य केंद्र, बैंक, डाकघर, आदि में काम जल्द खत्म करने को लेकर कुछ असावधानियां बरतते हैं, इसका पता हमें उस वक्त नहीं चलता। ऐसे में वहीं सक्रमण के प्रभाव में आने का खतरा रहता है। इसलिए जरूरी है कि जब भी हम काम के लिए घर से बाहर निकले सतर्कता को कभी भी नजरअंदाज नहीं करें।

शारीरिक दूरी और मास्क को अपनाकर संक्रमण के प्रभाव में आने से बचें:
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉक्टर किंशुक पाठक कहते हैं कि कुछ सतर्कता बरतकर हम कोविड-19 के संक्रमण के प्रभाव में आने से स्वयं को बचा सकते हैं। मास्क का सही से इस्तेमाल के साथ ही हमें बार-बार चेहरे को छूने से भी बचना होगा। मास्क की उपयोगिता हम ऐसे समझ सकते हैं कि अगर हमने मास्क पहना है तो यह अच्छी बात है, लेकिन अगर अगले व्यक्ति ने नहीं पहना है तो भी यह खतरनाक हो सकता है। आम फ्लू यानि बदलते मौसम में होने वाले सर्दी-जुकाम के लक्षण और कोरोना संक्रमण के लक्षण एक जैसे देखने को मिले हैं। ऐसे में हम शारीरिक दूरी और मास्क को अपनाकर संक्रमण के प्रभाव में आने से बच सकते हैं।

जिले में होगा सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम का आयोजन, केयर इंडिया भी करेगी सहयोग

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-राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
-स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर लोगों को दी जाएगी दवा

लखीसराय, 04 सितम्बर, 2020
सरकार और स्वास्थ्य विभाग लोगों की स्वस्थ सेहत के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं और लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ देने के लिए अग्रसर है। इसको लेकर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। जिसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने जिला सिविल सर्जन को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन के आवश्यक निर्देश दिए हैं। ताकि हर हाल कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन हो सकें और लोगों को बेहतर से बेहतर तरीके से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सकें। साथ ही लोगों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक भी किया जाएगा जिसमे केयर इंडिया से सहयोग लिया जाएगा।

केयर इंडिया के कर्मियों से भी सहयोग लेने का निर्देश
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी पत्र में यह निर्देश दिया है कि कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन के लिए केयर इंडिया के कर्मियों से भी सहयोग लेना सुनिश्चित हो। ताकि कार्यक्रम का ससमय और सफल क्रियान्वयन हो सकें और कार्य की गति में किसी प्रकार का परेशानियाँ उत्पन्न नहीं हो।

सभी पीएचसी प्रभारी को दिए गए हैं निर्देश
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि कार्यक्रम का सफल संचालन को लेकर जिले के सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और हर हाल में कार्यक्रम का सफल संचालन के लिए हर स्तर आवश्यक तैयारी पूरी करने को कहा गया है। ताकि कार्य के दौरान किसी प्रकार की परेशानियाँ बाधा नहीं बने।

घर-घर दस्तक देगी स्वास्थ्य टीम, लोगों को सामने खिलायेंगे दवा
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य टीम घर-घर दस्तक देगी और बीमारी से बचाव के लिए जागरूक करेंगी। साथ ही इस दौरान लोगों को अपने सामने दवा खिलायेंगे और लोगों को जागरूक करेंगे। इस टीम ऑगनबाड़ी सेविका, आशा समेत अन्य कर्मियों को भी शामिल किया जाएगा। जो कार्यक्रम के सफल संचालन के हरस्तर पर कार्य करेगी।

उम्र अनुसार खिलाई जाएगी दवा
उक्त कार्यक्रम के दौरान उम्र अनुसार लोगों को दवा खिलाई जाएगी। 02 से 05 से बच्चों को डीईसी की एक व अल्बेंडाजोल की एक गोली, 06 से 14 वर्ष को डीईसी की दो वर्षों अल्बेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन व अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाएगी।

कोरोना को मात देने के लिए जांच में नहीं करें देरी

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– लक्षण दिखने पर तत्काल कराएं कोविड – 19 की जांच
– बीमारी को नजर अंदाज करना पड़ सकता है जान पर भारी
– कोरोना के नए-नए लक्षण आए दिन तेजी से आ रहे हैं सामने

भागलपुर, 04 सितंबर
कोरोना को मात देने के लिए जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। अगर लक्षण दिखे तो तत्काल जांच करानी चाहिए। जांच में तेजी लाने को स्वास्थ्य विभाग तेजी से काम कर रहा है। जांच से ही कोरोना के चक्र को तोड़ा जा सकता है। इसलिए यदि किसी भी व्यक्ति में कोरोना के कोई लक्षण दिखे तो तत्काल जांच करा लेनी चाहिए। अगर जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो इलाज शुरू कर देना चाहिए। इस मामले में थोड़ी सी चूक भारी पड़ सकती है। कोरोना का चक्र बढ़ सकता है जिससे संपर्क में आने वाले भी परेशान हो जाएंगे। मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ हेमशंकर शर्मा का कहना है कि शुरुआत में ही कोरोना का इलाज हो जाने से लोग जल्द ठीक हो जाते हैं और उन्हें किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है, लेकिन देरी करने पर ऐसा नहीं होता है। इससे मरीज को ठीक होने में काफी समय लग जाता है.

– नए नए लक्षण आ रहे सामने
डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि कोरोना के लक्षण लगातार बदल रहे हैं। पहले सूखी खांसी और बुखार को कोरोना का लक्षण माना जाता था, लेकिन अब इसमें कई और लक्षण जुड़ गए हैं। अब तो यह भी देखा जा रहा है कि कोरोना पीड़ित मरीजों का शुगर भी बढ़ जा रहा है। कोरोना होने से पहले जिस व्यक्ति का शुगर सामान्य था, कोरोना होने के बाद उसका शुगर 550- 600 के पार हो गया, जो कि काफी चिंताजनक है। इसलिए इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतें।

– गांव-गांव घूमकर कर रहे जागरूक
कोरोना वार्ड के नोडल प्रभारी डॉक्टर हेमशंकर शर्मा का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग कोरोना को लेकर पूरी तरह से अलर्ट है। टीम गांव- गांव घूम रही है और लोगों से जानकारी ले रही है। स्वास्थ्य विभाग यह अपील कर रहा है कि गांव में घूम रही टीम के सामने जाकर लोग अपनी समस्या बताएं। अधिक से अधिक जांच कराने को लेकर भी लोगों से अपील की जा रही है, जिससे कोरोना की चेन तोड़ी जा सके। अगर समय से संक्रमण का पता चल जाएगा तो इसका प्रसार आसानी से रोका जा सकेगा। लोगों को जागरुक किया जा रहा है कि वह अपनी जिम्मेदारी समझें और जांच के लिए आगे आएं।

– कोरोना जांच के लिए गांवों में की जा रही माइकिंग
कोरोना की जांच के लिए लोगों से आगे आने की अपील की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव- गांव घूमकर माइकिंग कर लोगों से जांच के लिए आने को कह रही है। टीम के सदस्य लोगों को जांच के फयदे बता रहे हैं। लोगों को समझाया जा रहा है कि जांच से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है और न ही इससे संक्रमण फैलने का खतरा होता है।

– सरकार की गाइडलाइन का हो रहा पालन
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कोरोना जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रही है। जांच करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना किट पहनकर जांच कर रहे हैं, साथ ही जांच के दौरान सामाजिक दूरी का भी पालन कर रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी के अलावा जो लोग वहां पर मौजूद रहते हैं, सभी लोग ग्लब्स और मास्क पहने रहते हैं। इससे दूसरों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा। इसलिए बेहिचक जांच के लिए आगे आएं।

– इन बातों का रखें ख्याल
1. खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
3. चिकित्सक से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
4. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं, इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
5. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक को बार-बार न छूएं यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ कर लें।
6. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।