गांव में दिख रहा जागरुकता का असर, कोरोना को मात दे रहे ग्रामीण

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– शहरों की तरह गांव में लोग दिखा रहे हैं समझदारी, कर रहे कोरोना से बचाव का उपाय
– अधिक से अधिक जांच कराने पर दिया जा रहा है विशेष जोर, किया जा रहा है जांच के लिए जागरुक

बांका, 04 सितंबर
कोरोना को मात देने में गांव के लोग भी शहर वालों से पीछे नहीं हैं। बल्कि यह कहें कि गांव के लोग कुछ ज्यादा ही समझदारी दिखा रहे हैं। एक दसरे से दूरी बनाकर संक्रमण को मात देने की बात हो या फिर जांच कराने की। हर मामले में ग्रामीण क्षेत्र के लोग समझदारी दिखा रहे हैं। कोविड 19 से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान चला रहा है और इसका असर भी दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे हैं, जबकि शहरी क्षेत्र के लोगों में अभी और सुधार लाने की जरुरत है। स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता कार्यक्रम और ग्रामीणों की तत्परता का ही असर है कि कोरोना का चक्र गांव में शहरों की अपेक्षा जल्दी टूट जाता है।

– समझदारी से टूटेगा कोरोना का चक्र
कटोरिया रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग ज्यादा समझदारी से काम ले रहे हैं। गांव में समूह बनाकर नहीं बैठते हैं, साथ ही भीड़-भाड़ से बच रहे हैं। जबकि शहरी क्षेत्र में तमाम जागरूकता के बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं। यही कारण है कि शहरी क्षेत्र में कोरोना के मरीज अधिक पाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में अभी तक संक्रमण के मामले काफी कम हैं।

– गांव के लोगों की मजबूत है प्रतिरोधक क्षमता
डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि गांव के लोग शारीरिक तौर पर ज्यादा मजबूत होते हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी शहरी क्षेत्र के लोगों के मुकाबले अधिक होती है, साथ ही गांव में जगह की भी कमी नहीं रहती है। इस वजह से भीड़ नहीं लगती है। गांव के लोगों में कोरोना का प्रसार कम होने का यह भी एक बड़ा कारण है। डॉ विनोद कुमार कहते हैं कि गांव के लोगों का आहार भी काफी संतुलित होता है। तेल मसाले से युक्त ज्यादा भोजन नहीं करते, जबकि शहरी क्षेत्र में बाहरी खाने का प्रचलन अधिक है। इस वजह से शहरी क्षेत्र के लोगों की प्रतिरोधक क्षमता गांव के लोगों के मुकाबले कमजोर होती है, साथ ही गांव के लोग हरी सब्जी, दूध और प्रोटीन युक्त भोजन का भी अधिक सेवन करते हैं।

– शहरी क्षेत्र में लगातार चल रहा है जागरूकता कार्यक्रम
बांका शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग के लोग शहरी क्षेत्र में लगातार अपना अभियान चला रहे हैं। लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। हालांकि यह बात भी सही है कि लोगों को अभी और जागरूक होने की जरूरत है, तभी हम कोरोना पर पूरी तरीके से काबू पा सकेंगे।

– आम जन से भागीदारी बढ़ाने की अपील
डॉ चौधरी कहते हैं कि शहर से लेकर गांव तक स्वास्थ्य विभाग शिविर लगा रहा है। वहां जाकर लोगों को बेधड़क जांच करानी चाहिए, साथ में आसपास के लोगों को भी जांच के लिए प्रेरित करना चाहिए। जांच का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि लोगों को पता चल जाता है कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। इस हिसाब से लोग अपना बचाव कर लेते हैं।

चार दिवसीय ई प्रशिक्षण के दूसरे दिन पोषण माह को सफल बनाने पर दिया गया जोर

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• पोषण का है पहला मंत्र, जन्म के बाद स्तनपान
• वेबिनार के माध्यम से सुरक्षित स्तनपान के लिए किया गया प्रशिक्षित
• आईसीडीएस के वेबिनार में दूसरे दिन सुरक्षित स्तनपान के साथ पोषण गार्डेन पर मंथन
• मां का पहला दूध शिशु को देता है कुपोषण से लड़ने की शक्ति
जमुई, 03 सितंबर
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान कुपोषण को मात देने के लिए ई प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। वेबिनार के माध्यम से चल रहे ई प्रशिक्षण के दूसरे दिन गुरुवार को समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ने कुपोषण को मात देने के लिए सबसे जरुरी सुरक्षित स्तनपान को बताया.
नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने वेबिनार सिरीज के सत्र में लोगों को स्तनपान के प्रति जागरुक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्तनपान से मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहते हैं। कोरोना काल में भी स्तनपान को मुहिम चलाने पर जोर देने की बात कही.

सुरक्षित स्तनपान मृत्यु दर में लाएगा कमी:
अलाईव एंड थ्राईव की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षित स्तनपान से शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए ई प्रशिक्षण में उन्होंने कई उपाय सुझाए. उन्होंने बताया कि स्तनपान से डायरिया को भी रोका जा सकता है। सुरक्षित स्तनपान से मां के अंदर आने वाले मोटापा को भी कम किया जा सकता है. साथ ही साथ डायबटीज के साथ स्तन कैंसर की आशंका को भी कमी लायी जा सकती है। उन्होंने बताया कि बच्चों के जन्म के 1 घंटे के भीतर बच्चों के लिए मां का दूध अमृत समान होता है. छह माह तक उन्हें न तो पानी देना है और न ही अन्य कोई तरल पदार्थ देना है। ऐसे करने से बच्चों को डायरिया के खतरे से बचाया जा सकता है. साथ ही कुपोषण और नाटापन की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

अन्नप्राशान के बाद वाला आहार बनता है सेहत का आधार
केयर इंडिया के टीम लीडर एक्सपर्ट डॉ देवजी पाटिल ने स्तनपान के महत्व को बताने के साथ अन्नप्राशन के बाद आहार को शिशु के जीवन का आधार बताया। डॉ देवजी ने कहा कि छह माह के बाद उपरी आहार का शिशु के बेहतर स्वास्थ्य में अहम योगदान होता है। उम्र के हिसाब से बच्चों को आहार दिया जाता है। इस दौरान ही अगर आहार देने में कोई चूक हो जाती है तो बच्चों में नाटापन के साथ कुपोषण का खतरा होता है। छह से लेकर 11 माह तक बच्चों को विशेष रूप से देखना होता है। आहार के मामले में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए जिससे उनकी सेहत पर इसका पगतिकूल प्रभाव पड़े। अगर बच्चों का पोषण सही ढंग से किया गया तो उनकी सेहत अच्छी होती है और वह मानसिक के साथ शारीरिक रूप सक भी पूरी तरह से स्वस्थ्य होते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए वरदान होगी पोषण वाटिका:
किशनगंज कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ हेमंत कुमार सिंह ने वेबिनार के दौरान बताया कि पोषण वाटिका रोग लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी असरदार साबित होगी. इससे पोषण तत्वों की कोई कमी नहीं होगी और घर में ही सभी पोषण तत्व वाली शुद्ध ताजी सब्जी वह फल की आपूर्ति हो जाएगी। उन्होंने पोषण वाटिका को बढ़ावा देकर लोगों में इम्युनिटी बढ़ाने पर बहुत जोर दिया। पोषण वाटिका का चयन कैसे करें, धूप तथा पानी का प्रबंध कैसे करें एवं जैविक खाद का इस्तेमाल कर कैसे सब्जी और फल को पोषक बनाएं इसपर विशेष रूप से जोर दिया।
भोजन में विविधिता पर जोर
राज्य पोषण विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज कुमार ने आहार विविधता के बारे में बताया। डॉ मनोज ने बताया कि पोषण से ही शिशु के शारीरिक भविष्य का आधार बनता है। पोषण को लेकर कहीं से कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जागरुकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में जैसे मां का पहला दूध जरुरी है उसी तरह से ही छह माह के बाद का संपूरक आहार भी आवश्यक है। अगर बच्चे को सही पोषण मिलता गया तो वह न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक व्याधियों से भी दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि भोजन में विविधिता होने से जरुरी पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है. आहार में विविधता के ही कारण शारीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत पूरी होती है.

सवाल-जवाब में विशेषज्ञों ने दिए जवाब
वेबिनार के दौरान सवाल-जवाब का भी सेशन रखा गया था। इसमें पोषण से लेकर इम्युनिटी गार्डेन पर प्रश्नों का जवाब दिया गया। दीपक ने सवाल किया कि एक बच्चे को मां का दूध कितनी उम्र तक दिया जा सकता है. जवाब में डॉ अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि दो साल के बाद बच्चे के शरीर की डिमांड काफी बढ़ जाती है. इस कारण मां के दूध के बजाए ठोस आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी क्रम में सीमा तिवारी ने पूछा कि बच्चे दूध पीने के बाद उल्टी क्यों कर देते हैं. जवाब में डॉ अनुपम ने कहा कि मां का दूध बच्चे के लिएअमृत के समान है। अगर बच्चा उल्टी करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि मां के दूध में कमी है, इसका कारण कुछ और हो सकता है। समाधान के लिए चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। अमरजीत ने पोषण वाटिका के बारे में सवाल किया कि पोषण वाली सब्जी व फलों का चुनाव कैसे करें। डॉ हेमंत ने बताया कि सीजन के हिसाब से फल और सब्जियां उगाएं, उन्होंने जैविक खाद तैयार करने की भी बारीकी से जानकारी दी।
वेबिनार के दूसरे दिन के सत्र का समापन करते हुए नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने कहा कि यह काफी अहम कार्यक्रम है, जिसमें हर दिन नई-नई जानकारी मिल रही है। उन्होंने डीपीओ, सीडीपीओ के साथ फील्ड में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ऐसे अभियान सफल हो रहे हैं। कार्यक्रम की सफलता को लेकर भी उनका आभार जताया।

आंगनबाड़ी सेविका द्वारा घर घर जाकर दूध का किया जा रहा वितरण

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– माता पिता को कुपोषण के प्रति कर रही जागरूक
– पोषण माह के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक
– बच्चों के बेहतर विकास के लिए सही पोषण जरूरी

भागलपुर, 3 सितंबर

सही पोषण हर किसी के लिए जरूरी होता है. बच्चों के लिए पोषण का महत्व और बढ़ जाता है. इसी को देखते हुए कोरोना काल में भी बच्चों के पोषण पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है. घर- घर जाकर आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा सुधा दूध के पैकेट का वितरण किया जा रहा है.
आईसीडीएस की डीपीओ अर्चना कुमारी ने बताया, कोरोना काल में भी बच्चों के बेहतर पोषण पर ध्यान दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने से सेविका द्वारा घर- घर जाकर सुधा दूध पाउडर का वितरण किया जा रहा है. दूध पाउडर में मौजूद पोषक तत्व बच्चों को कुपोषण मुक्त एवं सेहतमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है. बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए दूध का वितरण किया जा रहा है.

सही पोषण मिलने से बच्चों की बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता: डीपीओ अर्चना कुमारी ने बताया, बच्चों को सही तरीके से पोषण मिलने से उसका ठीक तरीके से विकास होता है. साथ ही उसमें बीमारियों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित होती है इससे बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर रहता है इसलिए बच्चों के लिए सही पोषण जरूरी है.

कुपोषण की दर में कमी लाने के लिए उठाया गया है यह कदम: डीपीओ अर्चना कुमारी ने बताया, ग्रामीण इलाकों में कुपोषण की दर में कमी लाने के लिए 03 से छह साल के बच्चों को 200 ग्राम दूध देने का प्रावधान है. बच्चों में प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. आंगनबाड़ी सेविका प्रत्येक बच्चे को 18 ग्राम दूध पाउडर 150 मिलीलीटर शुद्व पेयजल में घोलकर पिला रही हैं.

स्वस्थ शरीर में ही होता है स्वस्थ मस्तिष्क का निवास: डीपीओ अर्चना कुमारी ने बताया स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है, इसीलिए बेहतर समाज के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि हमारी इस पीढ़ी को अच्छा पोषण मिले और वह सुरक्षित रहे. सभी माताओं का यह दायित्व है कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए साफ सफाई बरती जाए, नियमित रूप से खाने से पहले व खाने के बाद अच्छी तरह से हाथ धोया जाए, शौचालय करने के बाद हाथ पैर धोया जाय. कुपोषण की समस्या तभी दूर हो सकती है जब बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया जाएगा.

पोषण माह के तहत लोगों को किया जा रहा जागरूक: डीपीओ अर्चना कुमारी ने बताया सितंबर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है. इस दौरान पोषण के प्रति बच्चों के माता-पिता व परिजनों को जागरूक किया जायेगा. साथ ही पोषण के सभी सेवाओं को समुदायस्तर तक पहुँचाया जाएगा. इस दौरान घर- घर जाकर बच्चे के माता- पिता को पोषण के बारे में जानकारी दी जाएगी एवं बच्चों को पौष्टिक आहार देने के लिए प्रेरित किया जाएगा. पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य एनीमिया, बौनापन एवं दुबलापन में कमी लाना है. इस लिहाज से पूरे माह एनीमिया, बौनापन एवं दुबलापन से ग्रसित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण सुविधा प्रदान की जाएगी

बाजार और दुकान में हम रहेंगे सतर्क तो समाज रहेगा सुरक्षित

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– शारीरिक दूरी, मास्क और सैनिटाइजर को बनाए जीवन का अहम हिस्सा
– बाजार, दुकान में न करें हड़बड़ी में खरीदारी, अपनी बारी का करें इंतजार
– जरूरत को देखते हुए मिली है छूट, संक्रमण खत्म नहीं हुआ है यह समझें
– आम लोगों की सतर्कता और जागरूकता से ही समाज रहेगा संक्रमण से मुक्त

मुंगेर, 03 सितम्बर।

हवेली-खड़गपुर से मुंगेर व्यापार के सिलसिले में आने वाले व्यवसायी पंकज कुमार सिंह की दिनचर्या इन दिनों बदली हुई है। वह बताते हैं कि वह आयुष भारत के प्रोडक्ट के लिए कार्य करते हैं। कार्य के लिए यात्रा करना तो जरूरी है, लेकिन इस दौरान सुरक्षा और सतर्कता बरतना भी बेहद आवश्यक है। घर से बाहर जब वह निकलते हैं तो इस बात का सबसे ज्यादा ख्याल रखते हैं कि इस दौरान लोगों से प्रर्याप्त शारीरिक दूरी रखें। वह हर वक्त अपने साथ सैनिटाइजर रखते हैं। स्वयं तो हाथ साफ रखते ही हैं, मिलने वाले लोगों से भी इसके बारे में पूछते हैं और सैनिटाइजर ऑफर करते हैं। साथ ही लोगों से स्वच्छता और उनके द्वारा अपनाए जाने वाले सुरक्षा और सतर्कता के उपायों के बारे में भी पूछते हैं। इससे न केवल उनके आसपास के लोग जागरूक रहते हैं, बल्कि एक माहौल भी बनता है जो संक्रमण के खतरे से उनको और समाज को दूर रखता है। साथ ही वह बताते हैं कि इस वक्त बाजार खासकर दुकानों में भीड़ बढ़ने लगी है, इससे बचना होगा। दुकानदारों को अब ज्यादा सजगता बरतने की जरूरत है। लोग हड़बड़ी और जल्द खरीदारी करने में सुरक्षा के नियमों को ताक पर रख दे रहे हैं, उन्हें समझाना होगा। यह काम वही कर सकते हैं, दूसरा कोई नहीं।

समाज के हरेक वर्ग और व्यक्ति की सजगता जरूरी:
वहीं मुंगेर के युवा व्यवसायी प्रशांत कुमार मिश्रा कहते हैं कि लोगों की सुरक्षा उनके स्वयं के हाथों में है। बाजार और दुकान रोजमर्रा के कामों के लिए आना आवश्यक है। अब अनलॉक के दौरान यहां लोगों की संख्या भी पहले की तरह सामान्य होने लगी है। व्यापार ने गति पकड़ी है। हालांकि संक्रमण खत्म नहीं हुआ है, इसलिए दुकानों में जहां सैनिटाइजर रखना आवश्यक है, वहीं मास्क पहनना और शारीरिक दूरी बरतना दुकानदार और ग्राहक दोनों के लिए जरूरी है। इसमें अनदेखी से दोनों के साथ उनका परिवार और समाज प्रभावित हो सकता है। हालांकि पहले की तुलना में आज लोग सतर्कता बरत रहे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर ऐसा नहीं है। सबको समझना होगा की समाज के हरेक वर्ग और व्यक्ति की सजगता से ही संक्रमण पर रोक लगाना संभव हो पाएगा।

बाजार और दुकान में इसलिए जरूरी है सतर्कता:
कोविड 19 का प्रभाव अभी कम नहीं हुआ है। रोजाना कई नए मामले निकल कर आ रहे हैं। वहीं अभी बारिश का भी मौसम है, इसमें अक्सर साफ-सफाई बनाए रखना एक चुनौती होता है। इधर, लोग घर से मास्क पहन कर तो निकलते हैं, लेकिन बात करने या बाजार, दुकान आदि में सामान लेने के दौरान उसे नाक और मुंह से निचे कर लेते हैं। ऐसे में अपनी पूर्ण सुरक्षा के लिए शारीरिक दूरी और सतर्कता सबसे कड़ा कदम साबित हो सकता है।

प्रशासन कर रही है जागरूक, आप भी दें सहयोग:
लोग घर से बाहर शारीरिक दूरी और सुरक्षा के नियमों का पालन करें इसके लिए स्थानीय प्रशासन बड़े स्तर पर जागरूकता को लेकर कवायद कर रही है। सभी प्रतिष्ठानों में सैनिटाइजर की व्यवस्था हो, दुकानदार मास्क लगाएं और ग्राहकों से उचित दूरी रखें, इसका महत्व उन्हें बताया जा रहा है। वहीं बाजार, दुकान और सड़कों पर लोगों और वाहनों की भीड़ न लगे इसपर निगरानी रखी जा रही है। हालांकि यह सिर्फ प्रशासन का काम नहीं है, इसमें समुदाय और आम नागरिकों का सहयोग मिलना बेहद जरूरी है। सबको ध्यान में रखना होगा कि बचाव और सुरक्षा के उपाय तबतक कारगर नहीं हैं जबतक सबका सहयोग सरकार को नहीं मिलता। इसलिए संक्रमण को हराने के लिए सबको साथ आना होगा।

बिहार नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय द्वारा बाजार जाने के लिए प्रसारित नियम:
– बाजार जाने के पहले अपने नाक-मुंह को अच्छी तरह मास्क या कपड़े से ढकें।
– बाहर निकलने के लिए अलग चप्पल का इस्तेमाल करें।
– सामान लाने के लिए थैला साथ रखें।
– 70 प्रतिशत अल्कोहल वाला छोटा सैनिटाइजर साथ ले लें और इसका बाहरी चीजों को छूने पर इसका प्रयोग करें।
– बाहर अनावश्यक रूप से किसी भी वस्तु को न छुएं।
– बाजार में हरेक व्यक्ति से पर्याप्त 2 गज की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
– एटीएम जाना हो तो दरवाजे के हैंडल, कीबोर्ड को पहले सैनिटाइज करें।
– एटीएम कार्ड और समय-समय पर अपने हाथों को सैनिटाइज करें।
– बाजार से लाए गए फल-सब्जी को अच्छे से साफ कर ही प्रयोग में लाए।

मां का पहला दूध शिशु को देता है कुपोषण से लड़ने की शक्ति

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• पोषण का है पहला मंत्र, जन्म के बाद स्तनपान
• वेबिनार के माध्यम से सुरक्षित स्तनपान के लिए किया गया प्रशिक्षित
• आईसीडीएस के वेबिनार में दूसरे दिन सुरक्षित स्तनपान के साथ पोषण गार्डेन पर मंथन
• चार दिवसीय ई प्रशिक्षण के दूसरे दिन पोषण माह को सफल बनाने पर दिया गया जोर

बांका, 03 सितंबर
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान कुपोषण को मात देने के लिए ई प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। वेबिनार के माध्यम से चल रहे ई प्रशिक्षण के दूसरे दिन गुरुवार को समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ने कुपोषण को मात देने के लिए सबसे जरुरी सुरक्षित स्तनपान को बताया.
नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने वेबिनार सिरीज के सत्र में लोगों को स्तनपान के प्रति जागरुक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित स्तनपान से मां और शिशु दोनों सुरक्षित रहते हैं। कोरोना काल में भी स्तनपान को मुहिम चलाने पर जोर देने की बात कही.

सुरक्षित स्तनपान मृत्यु दर में लाएगा कमी:
अलाईव एंड थ्राईव की वरीय कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षित स्तनपान से शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए ई प्रशिक्षण में उन्होंने कई उपाय सुझाए. उन्होंने बताया कि स्तनपान से डायरिया को भी रोका जा सकता है। सुरक्षित स्तनपान से मां के अंदर आने वाले मोटापा को भी कम किया जा सकता है. साथ ही साथ डायबटीज के साथ स्तन कैंसर की आशंका को भी कमी लायी जा सकती है। उन्होंने बताया कि बच्चों के जन्म के 1 घंटे के भीतर बच्चों के लिए मां का दूध अमृत समान होता है. छह माह तक उन्हें न तो पानी देना है और न ही अन्य कोई तरल पदार्थ देना है। ऐसे करने से बच्चों को डायरिया के खतरे से बचाया जा सकता है. साथ ही कुपोषण और नाटापन की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

अन्नप्राशान के बाद वाला आहार बनता है सेहत का आधार
केयर इंडिया के टीम लीडर एक्सपर्ट डॉ देवजी पाटिल ने स्तनपान के महत्व को बताने के साथ अन्नप्राशन के बाद आहार को शिशु के जीवन का आधार बताया। डॉ देवजी ने कहा कि छह माह के बाद उपरी आहार का शिशु के बेहतर स्वास्थ्य में अहम योगदान होता है। उम्र के हिसाब से बच्चों को आहार दिया जाता है। इस दौरान ही अगर आहार देने में कोई चूक हो जाती है तो बच्चों में नाटापन के साथ कुपोषण का खतरा होता है। छह से लेकर 11 माह तक बच्चों को विशेष रूप से देखना होता है। आहार के मामले में कोई लापरवाही नहीं करनी चाहिए जिससे उनकी सेहत पर इसका पगतिकूल प्रभाव पड़े। अगर बच्चों का पोषण सही ढंग से किया गया तो उनकी सेहत अच्छी होती है और वह मानसिक के साथ शारीरिक रूप सक भी पूरी तरह से स्वस्थ्य होते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए वरदान होगी पोषण वाटिका:
किशनगंज कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ हेमंत कुमार सिंह ने वेबिनार के दौरान बताया कि पोषण वाटिका रोग लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी असरदार साबित होगी. इससे पोषण तत्वों की कोई कमी नहीं होगी और घर में ही सभी पोषण तत्व वाली शुद्ध ताजी सब्जी वह फल की आपूर्ति हो जाएगी। उन्होंने पोषण वाटिका को बढ़ावा देकर लोगों में इम्युनिटी बढ़ाने पर बहुत जोर दिया। पोषण वाटिका का चयन कैसे करें, धूप तथा पानी का प्रबंध कैसे करें एवं जैविक खाद का इस्तेमाल कर कैसे सब्जी और फल को पोषक बनाएं इसपर विशेष रूप से जोर दिया।
भोजन में विविधिता पर जोर
राज्य पोषण विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज कुमार ने आहार विविधता के बारे में बताया। डॉ मनोज ने बताया कि पोषण से ही शिशु के शारीरिक भविष्य का आधार बनता है। पोषण को लेकर कहीं से कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जागरुकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में जैसे मां का पहला दूध जरुरी है उसी तरह से ही छह माह के बाद का संपूरक आहार भी आवश्यक है। अगर बच्चे को सही पोषण मिलता गया तो वह न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक व्याधियों से भी दूर होते हैं। उन्होंने बताया कि भोजन में विविधिता होने से जरुरी पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है. आहार में विविधता के ही कारण शारीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत पूरी होती है.

सवाल-जवाब में विशेषज्ञों ने दिए जवाब
वेबिनार के दौरान सवाल-जवाब का भी सेशन रखा गया था। इसमें पोषण से लेकर इम्युनिटी गार्डेन पर प्रश्नों का जवाब दिया गया। दीपक ने सवाल किया कि एक बच्चे को मां का दूध कितनी उम्र तक दिया जा सकता है. जवाब में डॉ अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि दो साल के बाद बच्चे के शरीर की डिमांड काफी बढ़ जाती है. इस कारण मां के दूध के बजाए ठोस आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी क्रम में सीमा तिवारी ने पूछा कि बच्चे दूध पीने के बाद उल्टी क्यों कर देते हैं. जवाब में डॉ अनुपम ने कहा कि मां का दूध बच्चे के लिएअमृत के समान है। अगर बच्चा उल्टी करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि मां के दूध में कमी है, इसका कारण कुछ और हो सकता है। समाधान के लिए चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। अमरजीत ने पोषण वाटिका के बारे में सवाल किया कि पोषण वाली सब्जी व फलों का चुनाव कैसे करें। डॉ हेमंत ने बताया कि सीजन के हिसाब से फल और सब्जियां उगाएं, उन्होंने जैविक खाद तैयार करने की भी बारीकी से जानकारी दी।
वेबिनार के दूसरे दिन के सत्र का समापन करते हुए नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने कहा कि यह काफी अहम कार्यक्रम है, जिसमें हर दिन नई-नई जानकारी मिल रही है। उन्होंने डीपीओ, सीडीपीओ के साथ फील्ड में काम करने वाले कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ऐसे अभियान सफल हो रहे हैं। कार्यक्रम की सफलता को लेकर भी उनका आभार जताया।

कोरोना वीर से नहीं बनाए सामाजिक दूरी

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– कोरोनावीर को लेकर जागरुक कर रहा स्वास्थ्य विभाग
– कोरोना को मात देने वालों को दोबारा संक्रमित होने का खतरा कम

बांका, 3 सितंबर
जिले में रिकवरी रेट बढ़ने के साथ ही कोरोना को मात देकर घर आने वालों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। ऐसे लोगों को कोरोना वीर की संज्ञा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग इन दिनों इन वीरों का मान बढ़ाने में लगा है और जागरुकता फैलाकर ऐसे लोगों से सामाजिक दूरी नहीं बनाने की अपील कर रहा है। कोरोना को हराने वाले एक नजीर हैं और विभाग इसे नजीर के रूप में ही लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहा है। हालांकि कुछ भ्रांतियां हैं जिस कारण से लोग ऐसे योद्धाओं से शारीरिक दूरी बना रहे हैं। इस दूरी को दूर करने के लिए विभाग लगातर जागरुकता का प्रयास कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना को मात देने के बाद ऐसे मरीजों को दोबारा कोरोना होने का खतरा सामान्य लोगों की अपेक्षा काफी कम रहता है।

– बचाव जरुरी लेकिन सामाजिक दूरी नहीं
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि यह बात सही है कि कोरोना संक्रमित से फैलता है। इसलिए इससे बचाव भी जरूरी है, लेकिन कोरोना को मात दे चुके लोगों से भेदभाव ठीक नहीं है। साथ ही कोरोना पीड़ित मरीजों से सिर्फ शारीरिक दूरी बना कर रखें, सामाजिक नहीं। अब ज्यादातर लोग कोरोना की चपेट में आने के बाद होम आइसोलेशन में ही रह रहे हैं। इस वजह से लोगों को यह बात भी आसानी से पता चल जा रही है कि कौन कोरोना पीड़ित है और कौन नहीं। इसलिए इस समय ना सिर्फ कोरोना मरीजों को मानसिक तौर पर समर्थन करने की जरूरत है, बल्कि उनकी उचित देखभाल भी होनी चाहिए। इसके लिए ना सिर्फ कोरोना मरीज के परिजन, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी जागरूकता का काम करना चाहिए।

– नकारात्मक सोच को नहीं होने दें हावी
कोरोना पीड़ित मरीज या फिर कोरोना को मात दे चुके लोगों के प्रति मन में नकारात्मक सोच नहीं रखना चाहिए। इससे उन्हें फिर से सामाजिक जीवन में वापसी करने में मदद मिलेगी। अक्सर देखा जाता है कि कराना को मात दे चुके लोगों से लोग समाज में दूरी बनाकर रखते हैं। ऐसा करना ठीक नहीं। अगर आप सकारात्मक सोच रखेंगे तो कोरोना से आपका भी बचाव होगा।

– मास्क लगाएं और घरों से कम निकलें
कोरोना से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कि घर से कम निकले। अगर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। इस तरह का व्यवहार करने से कोरोना से बचाव आसान होगा। सावधानी ही कोरोना से बचाव हो सकता है और यही इसका सबसे कारगर हथियार भी है, इसलिए व्यवहार में यही परिवर्तन लाकर बचाव करें व सुरक्षित रहें।

– इन बातों का रखें ख्याल:
1. छींकते और खांसते समय मुंह पर कपड़ा लगाएं।
2. खांसते छींकते समय मुंह पर लगाए गए टिशू पेपर को तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
3. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में तकलीफ है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
4. डॉक्टर से सलाह लेते समय मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छी तरह से ढकें रहें।
5. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ दूसरों को भी बचाएं।
6. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं, यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
7. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें, राह चलते यूं ही सकड़ पर न थूकें।

सुरक्षित प्रसव लगाएगा मातृ-शिशु मृत्यु दर पर लगाम

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– शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए सुरक्षित प्रसव एवं उचित स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर
– सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव से पूर्व चार बार जांच कराना है जरुरी
– प्रसव पूर्व जांच से गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य की जानकारी

लखीसराय, 03 सितम्बर
सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। योजनाबद्ध तरीके से काम करते हुए इस पर अंकुश लगाया जा रहा है। सुरक्षित प्रसव को लेकर जागरुक्ता अभिशन चलाया जा रहा है और फील्ड वर्करों को इसके लिए विशेष मिशन के तहत लगाया जा रहा है। मातृ शिशु मृत्यु दर पर लगाम लगाने के लिए सरकार सुरक्षति प्रसव को लेकर कई योजनाएं चला रही है। सुरक्षित प्रसव के ऑकड़ों में वृद्धि लाकर मातृ शिशु मृत्यु दर पर विराम लगाने पर मंथन किया जा रहा है। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के सफल संचालन के लिए जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहें हैं, जिसका साकारात्मक असर भी दिख दिख रहा है। जागरुकता अभियान चलाए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं जागरुक होकर मुहिम को सफल बनाने में लगी हैं।

– जागरुकता को लेकर चल रही मुहिम
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ विभाग से जुड़ी एएनएम और आशा अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं। डॉ देवेन्द्र चौधरी का कहना है कि गर्भावस्था में शिशु के बेहतर विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

– सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जांच है जरूरी
सुरक्षित मातृत्व के लिए प्रसव पूर्व जांच कराना जरूरी होता है। माह की हर नौ तारीख को पीएचस एवं अन्य सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मुफ्त जांच की जाती है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आदि कार्यक्रम के माध्यम से एनेमिक गर्भवती महिलाओं की जांच की जा रही है, साथ ही सामुदायिक स्तर पर गर्भवती महिलाओं को बेहतर खान-पान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही अधिक से अधिक गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराने पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए सभी एएनएम एवं आशाओं का क्षमता वर्धन भी किया गया है, साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को भी इसको लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व चारो जांच माता एवं उसके गर्भस्थ शिशु की स्थिति स्पष्ट करती है और संभावित जटिलताओं का पता चलता है। लक्षणों के मुताबिक जरुरी चिकित्सीय प्रबंधन किया जाता है ताकि माता और उसके शिशु दोनों स्वस्थ रहें।

– प्रसव पूर्व तैयारी है जरुरी
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी का कहना है कि सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देनी चाहिए और प्रसव तिथि नजदीक आने के पूर्व जरुरी तैयारी कर लेनी चाहिए। इसमें लाभार्थी एवं उसके परिवार के सदस्य एएनएम एवं नजदीकी आंगनवाड़ी की सहायता लेकर जरुरी इंतजाम कर सकते हैं और सुरक्षित प्रसव के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा जिला अस्पताल जा सकते हैं।

जिले में कालाजार रोगियों की पहचान के लिए सर्वे का काम हुआ पूरा

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पीरपैंती प्रखंड में सिर्फ चार उपचाराधीन कालाजार मरीजों की हुई पहचान

उपचाराधीन व्यक्तियों की होगी जांच और गांव में जल्द किया जाएगा छिड़काव

भागलपुर, 3 सितंबर

जिले के 13 प्रखंडों में कालाजार रोगियों की पहचान के लिए सर्वे का काम बुधवार को पूरा हो गया. 1 सप्ताह तक चले सर्वे में सिर्फ पीरपैंती प्रखंड में चार उपचाराधीन मरीज की पहचान हुई है, जिनकी जांच की जानी है. इस दौरान सनौला प्रखंड में भी कुछ लक्षण वाले व्यक्ति पाए गए थे, लेकिन जांच में कालाजार की पुष्टि नहीं हुई. मालूम हो कि 25 अगस्त से आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कालाजार मरीजों की पहचान के लिए सर्वे का कार्य कर रही थी. अब स्वास्थ्यकर्मी गांवों में नली, नालों व घरों की दीवार पर सिंथेटिक पाइराथाइराइड का छिड़काव का काम करेंगे.
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुंदन भाई पटेल ने बताया कि कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. प्रभावित प्रखंडों में माइक्रोप्लान के तहत फिर से सर्वे का काम किया गया. उन्होंने बताया जिले के 12 प्रखंडों में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सर्वे का काम किया. इस काम में केयर इंडिया की टीम ने भी सहयोग किया है. जिले के 4 प्रखंड कालाजार से मुक्त है, इसलिए वहां सर्वे का काम नहीं गया.

सर्वे टीम में एक आशा कार्यकर्ता व एक फैसिलिटेटर थी शामिल : केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कालाजार रोगियों की पहचान के लिए सर्वे कर रही टीम में एक आशा कार्यकर्ता और एक आशा फैसिलिटेटर थी. इन लोगों को एक फॉर्मेट उपलब्ध कराया गया था, जिसे गांव वालों से जानकारी लेकर भरना था. व्यक्ति का नाम, गांव का नाम, पंचायत का नाम और अगर उस व्यक्ति में कोई बीमारी का लक्षण है तो उसे भी फार्म में दर्ज करना था.

घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:
डॉ पटेल ने बताया अब दवा का छिड़काव किया जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें. यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनायें व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं. कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई.

कालाजार की ऐसे करें पहचान: डॉ पटेल ने बताया कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज .को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते है. उन्होंने बताया कालाजार के संभावित लक्षण दिखने पर क्षेत्र की आशा से तुरंत संपर्क करना चाहिए तथा रोगी को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए.

चार दिवसीय ई प्रशिक्षण में पोषण पर होगा मंथन

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कुपोषण को मात देगा पोषण का मंत्र

• वेबिनार के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ जंग

जमुई, 02 सितंबर
राष्ट्रीय पोषण माह में समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ने कुपोषण को मात देने के लिए बड़ी पहल की है। कुपोषण के खिलाफ एक बड़ी मुहिम चलाने के लिए वेबिनार के माध्यम से बड़ी रणनीति बनाई जा रही है। बुधवार को पोषण माह गतिविधियों पर वेबिनार का आयोजन किया गयावेबिनार में पोषण माह को लेकर कई अहम योजनाओं पर मंथन किया गया।

पोषण वाटिका एवं कृषि पोषण को बढ़ावा देने की जरूरत:
इस दौरान आईसीडीएस के निदेशक अलोक कुमार ने कहा कि पोषण वाटिका एवं कृषि पोषण जैसे पहल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. साथ ही कुपोषण को खत्म करने के लिए ग्रोथ मॉनिटरिंग जैसे टूल प्रभावी साबित हो सकते हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण काल में आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है. साथ ही इनकी सुरक्षा का ध्यान रखना हमारी जिमेम्दारी भी है.

दिए जायेंगे पोषण के पौधे:

डॉ. आरके सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने बताया कि 17 सितंबर से सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में 40 आंगनबाड़ी सेविकाओं को कृषि पोषण सह पोषण वाटिका पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. साथ ही इन्हें पोषण के पौधे भी दिए जाएंगे.

पोषण माह के गतिविधियों का प्रजेंटेशन :
नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने वेबिनार में पोषण माह की कार्य-योजना पर चर्चा की. इसमे उन्होंने कुपोषण को मात देकर पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने की बात कही. उन्होंने पोषण माह में पोषण का आंकलन और समुदाय आधारित गतिविधियां पर विशेष धयान देने की बात कही । साथ ही शिशु के विकास की मॉनिटरिंग को इस अभियान की प्रमुख कड़ी बताया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा किचेन गार्डेन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर होगा जिससे घर मे ही पोषण तत्व की प्राप्ति हो सके। कृषि में ऐसे चीजों के उपयोग को लेकर भी प्रयास किया जाएगा जो पूरी तरह से पोषण वाले हों।

कोरोना काल मे भी चिन्हित किए जाएंगे बच्चे:

यूनिसेफ की डॉ. शिवानी ने कहा कि पोषण माह में कोरोना का भी खतरा है, लेकिन इस मुहिम में इसका कोई असर नही पड़ेगा। हम पूरी सावधानी से इस मुहिम को सफल बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि अति कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को कोरोना काल मे चिन्हित किया जाएगा।

पोषण में कमी होने पर भेजें पुनर्वास केंद:
वेबिनार के दौरान सेविकाओं के साथ अन्य लोगों ने भी एक्सपर्ट से सवाल किया। सवालों के जवाब में पोषण का मंत्र देते हुए सभी समस्या का समाधान करने का प्रयास किया गया। इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण सवाल लखीसराय के बड़हिया की सेविका पूनम कुमारी ने किया. उन्होंने बताया कि वह क्षेत्र के एक अति कुपोषित बच्चे को पुनर्वास केन्द्र ले गई थीं। बच्चा स्वस्थ होकर घर आ गया लेकिन कुछ दिन बाद ही वह फिर पुनः कुपोषित हो गया। सेविका ने पुछा कि क्या बच्चा दोबारा पुनर्वास केंद्र जा सकता है।वेबिनार में सेविका के इस प्रश्न का जवाब देते हुए यूनिसेफ के न्यूट्रीशियन एक्सपर्ट रवि नारायण परही ने कहा कि अति कुपोषित बच्चे जिनमे जटिलता के लक्षण हों वह दोबारा पुनर्वास केंद्र रेफर किये जा सकते हैं। बाकी कुपोषित बच्चों के लिए समुदाय द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण के मानकों का अनुपालन कर कुपोषण से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमें पोषण तत्व से भरपूर खाद्य सामग्रियों को अपने आहार में शामिल करने की जरूरत है। गृह भ्रमण के दौरान सेविकाएं स्तनपान, अनुपूरक आहार का सेवन करने को लेकर जागरूक करने का अभियान चलाएं जिससे पोषण माह में कुपोषण को मात दिया जा सके।

वेबिनार के दूसरे दिन इन विषयों पर होगी चर्चा:

गुरुवार को वेबिनार के दूसरे दिन सुरक्षित स्तनपान पर जोर दिया जाएगा। इसमे महिलाओं और बच्चों के आहार और हाइजीन पर चर्चा होगी। इसके अलावा पोषण तत्व की गार्डेनिग पर भी चर्चा होगी। वेबिनार के दूसरे दिन के लिए पोषण के माध्यम से कुपोषण को मात देने के लिए कई बिंदु तैयार किए गए हैं।

वेबिनार का संचालन राज्य पोषण विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार ने किया. इस दौरान केयर के देवजी पाटिल, यूनिसेफ के डॉ. पर्मिला, डॉ. कौल, मोना सिन्हा एवं सुधांकर सहित कृषि विज्ञान केंद्र किशनगंज के डॉ. हेमंत भी चर्चा में शामिल हुए.

कुपोषण को मात देगा पोषण का मंत्र

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• वेबिनार के माध्यम से कुपोषण के खिलाफ जंग
• चार दिवसीय ई प्रशिक्षण में पोषण पर होगा मंथन

भागलपुर, 02 सितंबर
राष्ट्रीय पोषण माह में समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) ने कुपोषण को मात देने के लिए बड़ी पहल की है। कुपोषण के खिलाफ एक बड़ी मुहिम चलाने के लिए वेबिनार के माध्यम से बड़ी रणनीति बनाई जा रही है। बुधवार को पोषण माह गतिविधियों पर वेबिनार का आयोजन किया गयावेबिनार में पोषण माह को लेकर कई अहम योजनाओं पर मंथन किया गया।

पोषण वाटिका एवं कृषि पोषण को बढ़ावा देने की जरूरत:
इस दौरान आईसीडीएस के निदेशक अलोक कुमार ने कहा कि पोषण वाटिका एवं कृषि पोषण जैसे पहल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. साथ ही कुपोषण को खत्म करने के लिए ग्रोथ मॉनिटरिंग जैसे टूल प्रभावी साबित हो सकते हैं. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण काल में आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहायिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है. साथ ही इनकी सुरक्षा का ध्यान रखना हमारी जिमेम्दारी भी है.

दिए जायेंगे पोषण के पौधे:

डॉ. आरके सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने बताया कि 17 सितंबर से सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में 40 आंगनबाड़ी सेविकाओं को कृषि पोषण सह पोषण वाटिका पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. साथ ही इन्हें पोषण के पौधे भी दिए जाएंगे.

पोषण माह के गतिविधियों का प्रजेंटेशन :
नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान श्वेता सहाय ने वेबिनार में पोषण माह की कार्य-योजना पर चर्चा की. इसमे उन्होंने कुपोषण को मात देकर पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने की बात कही. उन्होंने पोषण माह में पोषण का आंकलन और समुदाय आधारित गतिविधियां पर विशेष धयान देने की बात कही । साथ ही शिशु के विकास की मॉनिटरिंग को इस अभियान की प्रमुख कड़ी बताया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा किचेन गार्डेन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर होगा जिससे घर मे ही पोषण तत्व की प्राप्ति हो सके। कृषि में ऐसे चीजों के उपयोग को लेकर भी प्रयास किया जाएगा जो पूरी तरह से पोषण वाले हों।

कोरोना काल मे भी चिन्हित किए जाएंगे बच्चे:

यूनिसेफ की डॉ. शिवानी ने कहा कि पोषण माह में कोरोना का भी खतरा है, लेकिन इस मुहिम में इसका कोई असर नही पड़ेगा। हम पूरी सावधानी से इस मुहिम को सफल बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि अति कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को कोरोना काल मे चिन्हित किया जाएगा।

पोषण में कमी होने पर भेजें पुनर्वास केंद:
वेबिनार के दौरान सेविकाओं के साथ अन्य लोगों ने भी एक्सपर्ट से सवाल किया। सवालों के जवाब में पोषण का मंत्र देते हुए सभी समस्या का समाधान करने का प्रयास किया गया। इसी क्रम में एक महत्वपूर्ण सवाल लखीसराय के बड़हिया की सेविका पूनम कुमारी ने किया. उन्होंने बताया कि वह क्षेत्र के एक अति कुपोषित बच्चे को पुनर्वास केन्द्र ले गई थीं। बच्चा स्वस्थ होकर घर आ गया लेकिन कुछ दिन बाद ही वह फिर पुनः कुपोषित हो गया। सेविका ने पुछा कि क्या बच्चा दोबारा पुनर्वास केंद्र जा सकता है।वेबिनार में सेविका के इस प्रश्न का जवाब देते हुए यूनिसेफ के न्यूट्रीशियन एक्सपर्ट रवि नारायण परही ने कहा कि अति कुपोषित बच्चे जिनमे जटिलता के लक्षण हों वह दोबारा पुनर्वास केंद्र रेफर किये जा सकते हैं। बाकी कुपोषित बच्चों के लिए समुदाय द्वारा स्वास्थ्य एवं पोषण के मानकों का अनुपालन कर कुपोषण से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमें पोषण तत्व से भरपूर खाद्य सामग्रियों को अपने आहार में शामिल करने की जरूरत है। गृह भ्रमण के दौरान सेविकाएं स्तनपान, अनुपूरक आहार का सेवन करने को लेकर जागरूक करने का अभियान चलाएं जिससे पोषण माह में कुपोषण को मात दिया जा सके।

वेबिनार के दूसरे दिन इन विषयों पर होगी चर्चा:

गुरुवार को वेबिनार के दूसरे दिन सुरक्षित स्तनपान पर जोर दिया जाएगा। इसमे महिलाओं और बच्चों के आहार और हाइजीन पर चर्चा होगी। इसके अलावा पोषण तत्व की गार्डेनिग पर भी चर्चा होगी। वेबिनार के दूसरे दिन के लिए पोषण के माध्यम से कुपोषण को मात देने के लिए कई बिंदु तैयार किए गए हैं।

वेबिनार का संचालन राज्य पोषण विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार ने किया. इस दौरान केयर के देवजी पाटिल, यूनिसेफ के डॉ. पर्मिला, डॉ. कौल, मोना सिन्हा एवं सुधांकर सहित कृषि विज्ञान केंद्र किशनगंज के डॉ. हेमंत भी चर्चा में शामिल हुए