जांच की रफ्तार बढ़ाकर कोरोना को मात

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– हर दिन 2400 से अधिक लोगों की हो रही जांच
– संक्रमण को मात देने के लिए कोरोना को तोड़ी जा रही चेन
बांका, 08 सितंबर
कोरोना वायरस के संक्रमण को मात देने के लिए स्वास्थ्य विभाग युद्धस्तर पर लगा है. जांच में कैसे तेजी लाएं और वायरस से लोगों को किस तरह से बचाएं इसपर काम किया जा रहा है. अब प्रतिदिन 2400 से अधिक लोगों की कोरोना जांच हो रही है. शहर से लेकर गांव तक शिविर लगाकर जांच की जा रही है. जिलाधिकारी और सिविल सर्जन जांच की निगरानी करयाया रहे हैं। जिले में हर दिन जांच की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी जा रही है.
जांच में तेजी के साथ मॉनिटरिंग तेज:
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर महतो ने बताया कि जांच में तेजी लाने के लिए सभी पीएचसी प्रभारी एवं प्रबंधक को आवश्यक निर्देश दिया गया है. इसके लिए हर आवश्यक पहल करने का निर्देश देकर मॉनिटरिंग की जा रही है. सिविल सर्जन का कहना है कि वह खुद जांच की मॉनिटरिंग टीम के साथ कर रहे हैं.
कोरोना जांच के लिए गांवों में माइकिंग:
कोरोना जांच के लिए लोगों से आगे आने की अपील की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य गांव- गांव घूमकर माइकिंग कर लोगों से जांच के लिए आने को कह रही है. टीम के सदस्य लोगों को बता रहे हैं कि जांच कराने के क्या फायदे हैं. जांच कराने से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है.
सरकार की गाइडलाइन का हो रहा पालन:
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कोरोना जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रही है. जांच करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना किट पहनकर जांच कर रहे हैं, साथ ही जांच के दौरान सामाजिक दूरी का भी पालन कर रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी के अलावा जो लोग वहां पर मौजूद रहते हैं, सभी लोग ग्लव्स और मास्क पहने रहते हैं. इससे दूसरों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा. इसलिए बेहिचक जांच के लिए आगे आएं वहां किसी तरह का कोई खतरा नहीं है.
इन बातों का रखें ख्याल
1. खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें.
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. चिकित्सक से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें.
3. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी.
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक को बार-बार न छूएं यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें.
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें

लोग रहेंगे जागरूक तो संक्रमण का प्रभाव होगा कम

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– बदलनी होगी ऐसी मानसिकता जो बताती है कि संकमण अब कम प्रभावी है
– किसी भी शोध में यह बात नहीं आई है कि संक्रमण काल खत्म हो रहा है
– सुरक्षा के मानकों को अपनाने और जागरूकता से ही रह सकते हैं सुरक्षित
मुंगेर,, 8 सितम्बर।
जिले में अनलॉक के बाद जनजीवन सामान्य हो रहा है। लोग अपने कार्यक्षेत्र की ओर लौट रहे हैं। सड़कों व बाजारों में भी रौनक लौट चुकी है। हालांकि संक्रमण के प्रभाव में आने वालों की संख्या भी रोजाना बढ़ रही है। वैक्सीन पर काम चल ही रहा है, ऐसे में सतर्कता और सुरक्षा के नियम ही बचाव का एकमात्र रास्ता है। इधर, अनलॉक के बाद लोगों की मानसिकता भी थोड़ी-थोड़ी बदली-बदली सी नजर आ रही है। दफ्तरों आदि में तो लोग सतर्कता बरत रहे हैं, लेकिन बाजार और सड़कों पर इसका अभाव देखने को मिल रहा है। लोग मास्क तो पहन रहे हैं, लेकिन शारीरिक दूरी की कमी है। वहीं भीड़ भी लगातार बढ़ने लगी है। बाजार और सड़कों पर लोग बेवजह घूमते भी नजर आ जा रहे हैं। शायद वे संक्रमण को हल्के में ले रहे हैं, या यह समझ रहे हैं कि वे इसके प्रभाव में नहीं आएंगे। इनकी लापरवाही सवाल खड़ा करती है कि अगर ऐसी मानसिकता जारी रही तो संक्रमण को फैलने से रोकना काफी कठीन होगा। लोगों को ध्यान रखना होगा कि अबतक के किसी भी शोध से यह बात निकल कर नहीं आई है कि संक्रमण काल या इसका प्रभाव खत्म हो गया है। हां यह जरूर देखने को मिला है कि जहां भी नियमों का सही से पालन और पूरी सतर्कता बरती गई है वहां इसका प्रभाव काफी हद तक कम हो गया है।
जो नहीं समझ रहे हैं उन्हें हमें समझाना होगा, घबराने की जरूरत नहीं है:
मुंगेर की स्थानीय निवासी श्वेता कुमारी कहती हैं कि कोविड-19 को हराना है तो देश के सभी नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। संक्रमण के इस दौर में खराब होती स्थिति से डरने और घबराने की जरूरत नहीं है। अगर हम सुरक्षा के बताए गए नियमों का बेहतर रूप से पालन करेंगे और अपने साथ दूसरों का ख्याल रखेंगे तो महामारी से अवश्य ही मुक्त हो जाएंगे। इस समय हम सभी लोगों का यही कर्तव्य है कि हम पूरी सुरक्षा, गंभीरता, योग्यता, क्षमता और सतर्कता के साथ इस चुनौती का डटकर सामना करें। जो नियमों को नहीं मान रहें हैं, उन्हें जागरूक करते हुए इसका क्या असर होगा, यह बताएं। बेहद जरूरी है कि स्वयं का बचाव करने के साथ अपने आसपास के लोगों को भी संक्रमण से मुक्त रखने के लिए अपने स्तर पर हर संभव प्रयास करें।
घर के सदस्यों की भूमिका हो जाती है महत्वपूर्ण:
युवा अमन कहते हैं कि ऐसे वक्त में जब संक्रमण लगातार पांव पसार रहा है, और लोग ज्यादा संख्या में घर से बाहर निकल रहे हैं, सावधानी ही एकमात्र सुरक्षा का उपाय है। हम अपने स्तर पर तो सुरक्षा बरत सकते हैं, लेकिन अगर अगले ने इसकी अनदेखी की है तो संक्रमण का प्रभाव तो बना ही रहेगा। आज जरूरत इस बात की है कि स्थिति और लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए परिवार के लोग आगे आकर पहल करें। घर के हरेक सदस्य को नियमों का पालन करने को कहा जाए। संभव हो इसकी जानकारी भी लेते रहें। समाज का एक-एक परिवार ऐसा करेगा तो निश्चय ही इसका साकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। लोगों की अवधारणा की संक्रमण का खतरा कम हो गया है, या वे उसके प्रभाव में नहीं आएंगे, कही से भी सही नहीं है। जागरूकता ही एकमात्र उपाय है जो न केवल नियमों का पालन कराता है, बल्कि खतरों से भी लोगों को दूर रखता है।
अभी ये सावधानी बरतनी है बेहद जरूरी:
– सकारात्मक सोच रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें, लोगों को भी समझाएं।
– आवश्यक पड़ने पर ही घर से निकलें, इस दौरान पूरी सतर्कता बरतें।
– घर से बाहर 6 मीटर की शारीरिक दूरी अपनाएं, मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सामाजिक जगहों पर भीड़ लगाने व एक दूसरे के संपर्क में आने से बचें।
– अच्छी नींद और भोजन लें साथ ही योगा और व्यायाम से इम्यूनिटी बढ़ाएं।
– खादृय प्रदार्थों को अच्छे से साफ कर ही प्रयोग में लाएं।

पोषण माह की सफलता को लेकर जिला मुख्यालय से निकाला  गया जागरूकता रथ

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-जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रथ को किया रवाना
-गाँव-गाँव जाएगा जागरूकता रथ, दिया जाएगा पोषण संदेश
खगड़िया, 08 सितम्बर, 2020
पोषण माह को सफल बनाने एवं जन-जन तक पोषण का संदेश पहुँचाने के लिए मंगलवार को जिला मुख्यालय परिसर स्थित बाल बिकास परियोजना कार्यालय से जागरूकता रथ निकाला  गया। जिसे जिलाधिकारी डॉ. आलोक रंजन घोष ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उक्त रथ गाँव-गाँव जाकर लोगों को पोषण का संदेश देगा और माइकिंग व ऑडियो पोषण गीत से लोगों को जागरूक करेगा। दरअसल, इस रथ का उद्देश्य ही लोगों को सही पोषण के लिए जागरूक करना है। ताकि कुपोषण मुक्त समाज का निर्माण हो सकें। पोषण माह का मुख्य उद्देश्य देश के बच्चों, किशोरों एवं महिलाओं को कुपोषण मुक्त, स्वस्थ और मजबूत बनाना है। यह काम विभिन्न सरकारी विभागों के रूपांतरण से होगा। इसमें समाज कल्याण, स्वास्थ्य, पेयजल स्वच्छता, पंचायत राज आदि विभाग मिलकर काम करेंगे। पूरे सितंबर माह प्रतिदिन सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों, प्रखंडों व जिलास्तर पर गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। जबकि पोषण जागरूकता रथ ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण के महत्व के बारे में बताएगा।
बच्चे के विकास के लिए सही पोषण जरूरी
इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ आलोक रंजन घोष ने कहा कि बच्चे के विकास के लिए सही पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान। गर्भावस्था व जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष में मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं. नवजात बच्चों के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देना बहुत महत्वपूर्ण होता है. उन्होंने बताया शिशुओं को छः महीने तक सिर्फ़ मां का दूध ही देना चाहिए इसके अलावे एक बूंद पानी भी नही देना होता हैं तथा दो साल तक स्तनपान के साथ पूरक आहार करना चाहिए.
गर्भावस्था में सही पोषण जरूरी
वहीं आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीना सिंह ने कहा कि गर्भावस्था में मां को अच्छे पोषण की जरूरत होती है। इस दौरान सही पोषण बच्चे के विकास और मां के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी है। माताओं को ध्यान रखना चाहिए कि उनके पोषण में विटामिन और मिनरल्स की कमी न हो। गर्भावस्था के दौरान सही डायट चार्ट बनाना और उसका पालन करना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान आप जो भी आहार लेती हैं, उससे न केवल आपके शरीर को पोषण मिलता है, बल्कि आपके पेट में पल रहे बच्चे का भी विकास होता है। साथ ही  उन्होंने बताया,  कुपोषण को दूर करने के लिए पोषण के पांच सूत्र तैयार किये गये हैं। पहला सुनहरा 1000 दिन, डायरिया प्रबंधन, पौष्टिक आहार, स्वच्छता एंव साफ-सफाई, एनिमिया प्रबंधन शामिल है। इन पांच सूत्रों से कुपोषण पर लगाम लगाया जायेगा।
जन-जन तक पहुंचाई जाएगी पोषण का संदेश
वहीं एनएनएम के जिला समन्वयक अंम्बुज कुमार ने कहा कि रथ समेत अन्य माध्यमों से पोषण का संदेश जन-जन तक पहुंचाई जाएगी। ताकि हर हाल में कुपोषणमुक्त समाज का निर्माण हो सकें।
जागरूकता रथ देगा ये जानाकरी
-जन्म के छह माह तक सिर्फ माँ का दूध पिलायें
-छह माह के बाद बच्चों को स्तनपान के साथ पूरक आहार दें
-गर्भवती होने पर आंगनबाड़ी केंद्र पर रजिस्टेशन करायें
-बच्चों को खाना खिलाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें
-गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार का सेवन करें
-गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोली जरूरी लेनी चाहिए

पोषण के लिए दौड़ी जागरुकता की गाड़ी

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– गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण के बारे में दी गई जानकारी
– मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 117 में पोषण परामर्श केंद्र का हुआ शुभारंभ

बांका, 08 सितंबर
पोषण मह में जिले में जागरुकता की गाड़ी तेज दौड़ रही है। अभियान की रफ्तार में गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण के बारे में जानकारी दी जा रही है। सोमवार को सदर प्रखंड के बाद मंगलवार को मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 117 में पोषण परामर्श केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस दौरान गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण को लेकर जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि गर्भधारण के बाद किस तरह का पोषण लेना चाहिए, इससे ना सिर्फ उनका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि बच्चे भी स्वस्थ रहेंगे।

– कुपोषण भगाने का दिया मंत्र
डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि गर्भवती और धात्री महिलाओं को कुपोषण से दूर भगाने के लिए पूरी जानकारी दी जा रही है। इन लोगों को पोषण के बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि सही पोषण के क्या-क्या फायदे हैं, साथ ही लोगों को स्वच्छता के बारे में भी जागरुक किया जा रहा है। डीपीओ ने कुपोषण कैसे खत्म करना है, इसकी सलाह भी दी साथ ही कुपोषण को खत्म करने में स्वच्छता की भूमिका पर भी चर्चा की है। लोगों को समझाया गया कि हाथ साफ रखने से कितना फायदा होता है। इस दौरान कोरोना काल में कुपोषण को कैसे खत्म करना है, इसकी भी जानकारी दी गई।

– जागरूकता रथ को किया रवाना
डीपीओ रिफत अंसारी ने ई-रिक्शा जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पूरे महीने ई-रिक्शा से घूम-घूमकर लोगों को पोषण के बारे में जागरूक किया जाएगा। गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी जाएगी साथ में मांस मछली का अधिक सेवन करने की सलाह दी जाएगी। जो महिलाएं मांसाहार का सेवन नहीं करती हैं, उन्हें अधिक से अधिक दूध का सेवन करने की जानकारी दी जाएगी।

– बच्चों के विकास के लिए सही पोषण आवश्यक
डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि बच्चों के विकास के लिए सही पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान। गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे बच्चे का सही ढंग से विकास होता है। जन्म के बाद भी बच्चे को दो साल तक केवल पौष्टिक आहार ही देना चाहिए। गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चे के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है।

स्थानीय बैरवा महासभा गठन समारोह संपन्न

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नई दिल्ली, 07 सितम्बर 2020। आज दक्षिण दिल्ली में मदनगीर के कृष्णा मंदिर स्थित बैरवा भवन में अखिल भारतीय बैरवा महासभा (पंजी एस 277 सन 1946) संबंधित प्रांतीय बैरवा महासभा द्वारा अंबेडकर नगर स्थानीय बैरवा महासभा एवं देवली स्थानीय बैरवा महासभा का गठन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में अंबेडकर नगर से एडवोकेट अरुण कुमार लवली को अध्यक्ष व युवा समाजसेवी दिलीप देवतवाल को महामंत्री सर्वसम्मित से नियुक्त किया गया। इसके साथ ही देवली विधानसभा से ओमप्रकाश माली को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। नवनियुक्त अध्यक्ष व महामंत्री को समाज के गणमान्य लोगों द्वारा सम्मानित किया गया। सभी नवनियुक्त पदाधिकािरयों ने समाज हित के लिए कार्य करने का संकल्प लिया और सभी आदरणीय बैरवा बंधुओं का आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर प्रांतीय बैरवा महासभा के अध्यक्ष मोहनचंद कुण्डारा, महामंत्री चंद्रपाल बैरवा, उपाध्यक्ष राजकुमार गोठवाल, अतिरिक्त महामंत्री धर्मपाल आर्य, प्रवक्ता हेमराज भीटलवाल, मीडिया प्रभारी हजारीलाल बैरवा सहित अंबेडकर नगर के कर्मठ, जुझारू एवं युवा बैरवा साथियों ने गठन समारोह में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

घर-घर भ्रमण कर सेविकाओं द्वारा किया गया गोदभराई कार्यक्रम का आयोजन

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– जिले के परवत्ता और गोगरी प्रखंडों में मनाया गया गोदभराई उत्सव

– सीडीपीओ व महिला पर्यवेक्षिका ने की मानिटिरिंग

– पोषण माह के तहत कार्यक्रम का हुआ आयोजन, पोषण के महत्व पर हुई विशेष चर्चा

खगड़िया, 07 सितम्बर, 2020
जिले में 1 से 30 सितंबर तक पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। पोषण अभियान के तहत कुपोषण को मिटाने के लिए कई गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को जिले के परवत्ता और गोगरी प्रखंडों में सेविका द्वारा अपने-अपने पोषक क्षेत्र में गृह भ्रमण कर गोदभराई उत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें गर्भवती महिलाओं के घर जाकर गोदभराई की रस्म की गयी। साथ हीं पोषण से संबंधित जानकारी विस्तारपूर्वक लाभार्थियों को दी गयी। इसके साथ ही कोविड-19 से बचाव के लिए जारी गाइडलाइंस का पालन किया गया।
परवत्ता प्रखंड के परवत्ता पंचायत में संचालित केंद्र संख्या 42 की सेविका गीता कुमारी ने बताया, लाभार्थियों के घर जाकर गोदभराई उत्सव मनाया गया और मंगल गीतों के साथ गर्भवती महिला को उपहार के रूप में पोषण की पोटली दी गई है। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली, पोषाहार व फल आदि शामिल थे। महिलाओं को उपहार स्वरुप पोषण की थाली भेंट की गयी, जिसमें सतरंगी व अनेक प्रकार के पौष्टिक भोज्य पदार्थ शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर और टीका लगाकर महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई। सभी महिलाओं को अच्छे सेहत के लिए पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही साथ स्तनपान सप्ताह को लेकर भी महिलाओं को जागरूक किया गया। 6 माह तक नवजात शिशुओं सिर्फ स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया गया। इस मौके पर महिला पर्यवेक्षिका अंजू सिन्हा भी मौजूद थी।

स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे को दे सकती है जन्म:-

परवत्ता बाल बिकास परियोजना कार्यालय के सीडीपीओ कामिनी कुमारी ने कहा कि गोद भराई रस्म में सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ा उसे तिलक लगा कर उनके गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य की कामना की गई। साथ ही गर्भवतियों की गोद में पोषण संबंधी पुष्टाहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध, अंडा डाल सेवन करने का तरीका बताया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी गई। जिसमें बताया गया कि गर्भवती महिला कुछ सावधानी और समय से पुष्टाहार का सेवन करें तो बिना किसी अड़चन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

पोषण के पांच सूत्रों से लगेगा कुपोषण पर लगाम

कुपोषण पर लगाम लगाने के लिए पोषण अभियान के तहत पांच सूत्र की जानकारी दी गई। जिसमें पहले सुनहरे 1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। जिसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म से दो साल तक की उम्र तक की अवधि शामिल है। इस दौरान बेहतर स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा एवं तनाव मुक्त माहौल तथा सही देखभाल बच्चों के पूर्ण विकास में सहयोगी होता है।

पौष्टिक आहार के महत्ता की दी गई जानकारी

शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।

एनीमिया प्रबंधन की दी गई जानकारी

गर्भवती माता, किशोरियां व बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए। 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को भी प्रति सप्ताह आयरन की एक नीली गोली का सेवन करनी चाहिए। छह माह से पांच साल तक के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक-एक मिलीलीटर आयरन सिरप देनी चाहिए।

डायरिया प्रबंधन की दी गई जानकारी

शिशुओं में डायरिया शिशु मृत्यु का कारण भी है। छह माह तक के बच्चों के लिए केवल स्तनपान (ऊपर से कुछ भी नहीं) डायरिया से बचाव करता है। साफ-सफाई एवं स्वच्छ भोजन डायरिया से बचाव करता है। डायरिया होने पर लगातार ओआरएस का घोल एवं 14 दिन तक जिक देना चाहिए।

स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर दिया गया बल

साफ पानी एवं ताजा भोजन संक्रामक रोगों से बचाव करता है। खाना खाने से पूर्व एवं बाद में तथा शौच जाने के बाद में साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोना चाहिए। घर में तथा घर के आस-पास सफाई रखनी चाहिए। इससे कई रोगों से बचा जा सकता है।

आज ग्लोबल बाजार के ग्लोबल चैन को समझना आवश्यक- हेलेन ई विलियम, डीन, पेपरडाइन यूनिवर्सिटी, यूएसए

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नईदिल्ली-

न्यू देहली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में छात्रों को संबोधित करते हुए पेपरडाइन यूनिवर्सिटी यूएसए की डीन हेलेन ई विलियम ने कहा कि आज ग्लोबल बाजार तेजी से बदला है जिसे समझना आवश्यक है। आज जिस तरह से लोगों को आवश्यकताएं में बदलाव आया है ऐसे में कई तरह के बदलाव की जरूरत है।

हेलेन ई विलियम ने कहा कि आज पूरा विश्व एक प्लेटफार्म पर है आवश्यकताएं लगभग सभी की एक जैसी है। लेकिन मैनेजमेंट यह करना है कि कैसे सभी को वस्तुएं सस्ती दरों में उपलब्ध हो जाए। इसके लिए ग्लोबल सप्लाय को बेहतरीन तरीके से समझने की आवश्यकता है।

हेलेन ई विलियम ने कहा कि ग्लोबल सप्लाय चेन की विशेषता यह है कि सभी वस्तुएं बड़े ही आराम से एक जगह से दूसरे जगह पहुंच रही हैं। लेकिन क्या यह सप्लाय सही तरीके से कार्य कर रहा है। क्या इसमें और नयेपन लाने की जरूरत है इसके लिए छात्रों को इनोवेशन करने की जरूरत है। आज के बाजार में और विगत कुछ वर्षों के बाजार में काफी बदलाव आ गया है। एडवरटाइजिंग से सब कुछ बदल गया है जिसके कारण आज सप्लाय चेन में भी बदलाव आ गया है और बेहतर तरीके से सप्लाय को सुगम बनाने की जरूरत है। हेलेन ई विलियम ने एनडीआईएम के छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान काफी अद्य़तन जानकारी रखता है जिससे छात्रों को फायदा मिल रहा है।

पोषण से कुपोषण को मात देगा परामर्श केंद्र 

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– बांका सदर प्रखंड में पोषण परामर्श केंद्र का शुभारंभ
– सही पोषण को लेकर चलाया जाएगा विशेष अभियान
बांका, 07 सितंबर
पोषण माह में कुपोषण को मात देने के लिए सोमवार को बांका सदर प्रखंड में पोषण परामर्श केंद्र का शुभारंभ किया गया है। इस दौरान डीपीओ रिफत अंसारी ने कहा कि सही पोषण से ही कुपोषण को खत्म किया जा सकता है। बच्चों के विकास के लिए कुपोषण को खत्म करना बहुत जरूरी है। सही पोषण मिलने से बच्चे स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जी सकेंगे। इसके लिए  माताओं को गर्भावस्था से ही ध्यान देना जरूरी है। गर्भावस्था के समय से ही सही पोषण लेने से बच्चे स्वस्थ  पैदा होते हैं। इसलिए गर्भवती व धात्री माताएं सही पोषण का ध्यान रखें।
– कुपोषण को मात देने का दिया टिप्स
कुपोषण दूर भगाने के लिए क्या करना चाहिए, इसकी भी जानकारी होनी चाहिए। इसे लेकर लोगों को जागरुक करने का काम किया गया। इसके साथ ही लोगों को स्वच्छता के बारे में भी जागरुक किया गया। कुपोषण कैसे खत्म करना है, इसकी सलाह भी दी गई, साथ ही कुपोषण को खत्म करने में स्वच्छता की क्या भूमिका है इसकी भी जानकारी दी गई। लोगों को समझाया गया कि हाथ साफ रखने से कितना फायदा होता है। इस दौरान कोरोना काल में कुपोषण को कैसे खत्म करना है, इसकी भी जानकारी दी गई।
– बच्चों के विकास के लिए सही पोषण आवश्यक
डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि बच्चों के विकास के लिए सही पोषण बहुत महत्वपूर्ण है। खासकर शुरुआती वर्षों के दौरान। गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन लेना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे बच्चे का सही ढंग से विकास होता है। जन्म के बाद भी बच्चे को दो साल तक केवल पौष्टिक आहार ही देना चाहिए।  गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती वर्ष मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चे के संपूर्ण विकास को सुनिश्चित करने के लिए विटामिन, कैल्शियम, आयरन, वसा और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार देना बहुत महत्वपूर्ण है।
– सही पोषण देता है रोग से लड़ने की क्षमता
बच्चे को रोगमुक्त और स्वस्थ जीवन जीने के लिए पोषक तत्व महत्वपूर्ण है। पर्याप्त पोषण की कमी से, शारीरिक के साथ-साथ कई तरह के विकार हो सकते हैं। कुपोषण और भूख एक समान नहीं है, हालांकि दोनों संबंधित हो सकते हैं। भूख तब लगती है जब पेट खाली होता है, जबकि कुपोषण पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी के कारण होता है।
– गर्भावस्था में सही पोषण जरूरी
गर्भावस्था में मां को अच्छे पोषण की जरूरत होती है इस दौरान सही पोषण बच्चे के विकास और मां के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जरूरी है। माताओं को ध्यान रखना चाहिए कि उनके पोषण में विटामिन और मिनरल्स की कमी न हो। गर्भावस्था के दौरान सही डायट चार्ट बनाना और उसका पालन करना भी बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान माताएं जो भी आहार लेती हैं, उससे न केवल उनके शरीर को पोषण मिलता है, बल्कि पेट में पल रहे बच्चे का भी विकास होता है।
– भरपेट भोजन के बजाय बार-बार खाएं
महिलाओं को जागरुक करते हुए डीपीओ रिफत अंसारी ने बताया कि दिन में दो से तीन बार भरपेट खाने के बजाए कम मात्रा में बार-बार खाएं। इससे पाचन की समस्या भी नहीं होगी। इसके अलावा नियमित रूप से थोड़ा बहुत व्यायाम करना चाहिए इससे शरीर स्वस्थ रहेगा और बच्चा भी सेहतमंद होगा।

पोषण माह को सफल बनाने में जुटे पदाधिकारी, तेज की गयी गतिविधियां

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– आईसीडीएस द्वारा जारी किया गया आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का कैलेंडर
– पूरा सितम्बर मनाया जाएगा पोषण माह, विभिन्न कार्यक्रम का होगा आयोजन
लखीसराय, 07 सितम्बर, 2020
सरकार के निर्देशानुसार पूर्व की भाँति इस वर्ष भी कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर पूरे सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा। जिसकी सफलता को लेकर आईसीडीएस के पदाधिकारी आवश्यक तैयारियाँ में जुट गए हैं और गतिविधियाँ तेज कर दी है। ताकि हर हाल में कार्यक्रम का सफल संचालन हो सकें और समाज के हर लोगों को कार्यक्रम की जानकारी मिल सकें। जिससे लोग पोषण की महत्व समझ सकें और सरकार का मंशा फलीभूत हो सकें। इस कार्यक्रम के तहत जिला, परियोजना स्तर व गांव-गांव में अवस्थित आंगनबाड़ी केन्द्रों के पोषक क्षेत्र में माह के प्रत्येक दिन विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। जिसको लेकर आईसीडीएस ने आयोजित होने वाले विभिन्न निर्धारित कार्यक्रम का कैलेंडर जारी किया है। साथ ही कार्यक्रम का सफल संचालन के लिए संबंधित पदाधिकारियों व कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। सरकार ने इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का थीम “किचन गार्डन को बढ़ावा देने के लिए अति गंभीर कुपोषण व वृक्षारोपण के साथ बच्चों की पहचान और ट्रैकिंग कर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजना’ निर्धारित किया है।
मासिक, साप्ताहिक व दैनिक कैलेंडर के तहत आयोजित होंगे कार्यक्रम
आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि विभाग ने कार्यक्रम को कई चरणों में विभाजित किया है। जिसमें मासिक, साप्ताहिक व दैनिक कैलेंडर के तहत कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस क्रम में पहले सप्ताह में आभासी वेविनार श्रृंख्ला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें माहवारी स्वच्छता, स्तनपान, पोषण वाटिका, कोरोना से संबंधित जागरूकता संदेश, अन्य मुद्दों पर आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं व सहायिकाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षित किया जा रहा है। दूसरे चरण में पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना व संचालक का निर्देश दिया गया है। तीसरे चरण में जिला, परियोजना स्तर व पोषण क्षेत्रों में पोषण संबंधित संदेशों की माइकिंग कराई जाएगी। इसी प्रकार कुल 11 चरणों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है। सबसे जरूरी बात यह है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविकाएं सभी लाभार्थियों की एक समेकित व्हाट्स एप ग्रुप बनाएंगी। जिसमें पोषण से संबंधित संदेशों को शेयर करेंगी। ऐसे में पोषण का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा और इसे जन आंदोलन के रूप में बदला जा सकेगा। जिन लाभार्थियों के पास एंड्रायड मोबाइल नहीं है, वो गृह भ्रमण कर लाभुकों को सारी जानकारियों से अवगत कराएंगी।
पोषण माह को बनाना है सफल, जन-जन तक पहुँचाया जाएगा संदेश
सरकार का लक्ष्य है कि इस बार पोषण माह को हर हाल में सफल बनाना है। इस क्रम में शहरी व ग्रामीण इलाकों के आम लोगों तक पोषण के संबंध में जानकारी देने के लिए पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना व संचालन, ई-रिक्शा, टेम्पो द्वारा पोषण संदेशों का प्रचार-प्रसार, सघन अनुश्रवण कार्यक्रम इत्यादि गतिविधियां चलाई जाएंगी। साथ ही पोषण माह के सफल संचालन के लिए अन्य विभागों का सहयोग मिलेगा। जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पीएचईडी इत्यादि के साथ-साथ राष्ट्रीय पोषण अभियान के लिए जिला में कार्यरत जिला समन्वयक, जिला परियोजना सहायक, स्वास्थ्य भारत प्रेरक, पिरामल फाउंडेशन, केयर इंडिया व यूनिसेफ भी शामिल है।

अभी छोड़ें धूम्रपान, नहीं तो ज्यादा सताएगा कोरोना

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आमलोग 10 दिनों में कोरोना की चपेट से आ जा रहे हैं बाहर
धूम्रपान करने वालों को स्वस्थ होने में लग जा रहे 14 दिनों का समय
भागलपुर, 5 सितंबर
सरकार ने बीड़ी, सिगरेट समेत अन्य तंबाकू पदार्थों पर प्रतिबंध लगा रखी है, लेकिन इसके बावजूद लोग सेवन करने से बाज नहीं आ रहे हैं. इससे लोगों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है. अभी कोरोना काल में भी धूम्रपान करने वालों को ज्यादा परेशानी हो रही है. कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के डॉक्टर की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें स्वस्थ होने में ज्यादा समय लग जा रहा है. आमलोग जहां कोरोना की चपेट में आने के बाद 10 दिन में स्वस्थ हो जा रहे हैं, वहीं धूम्रपान करने वाले को स्वस्थ होने में 14 दिन लग जा रहे हैं.
जेएलएनएमसीएच के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजकमल चौधरी ने जिले में अब तक मिले कोरोना के मरीजों पर एक शोध किया है. अब तक जिले में 25 से 55 साल तक के 2883 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं. इनमें से 13% लोगों को स्वस्थ होने में ज्यादा दिन लगे. दरअसल, ये वैसे लोग हैं जो धूम्रपान करते थे. राजकमल चौधरी कहते हैं कि जिले में अब तक मिले कोरोना मरीज की स्टडी करने पर पता चलता है कि धूम्रपान करने वाले लोगों को कोरोना से निजात मिलने में ज्यादा दिन लग जा रहे हैं. सामान्य लोग जो धूम्रपान नहीं करते हैं वह जल्दी स्वस्थ हो जा रहे हैं.
5 साल तक धूम्रपान करने वाले लोगों के फेफड़े पर पड़ रहा असर: डॉक्टर राजकमल चौधरी कहते हैं कि जिन लोगों ने 5 साल तक भी धूम्रपान किया है या फिर 5 साल से धूम्रपान कर रहे हैं उनके फेफड़े पर असर पड़ रहा है. इस वजह से उन्हें कोरोना से स्वस्थ होने में समय लग जा रहा है.  इसलिए जो लोग धूम्रपान कर रहे हैं वह जितना जल्दी हो सके इसे छोड़ दें. इसी में आपके परिवार के लोगों  की भी भलाई है.
धूम्रपान से प्रतिरोधक क्षमता होती है कमजोर: डॉक्टर चौधरी कहते हैं कि धूम्रपान से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिसके चलते कोरोना जैसे वायरस आसानी से ऐसे लोगों को अपनी चपेट में ले लेते हैं. इसके अलावा बीमारी की चपेट में आने पर ऐसे लोगों के इलाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यही कारण है कि धूम्रपान न करने वालों की तुलना में इसका प्रयोग करने वालों को कोरोना का खतरा कई गुना अधिक है.
धूम्रपान पर जुर्माना का है प्रावधान: कोरोना वायरस छींकने, खांसने और थूकने से निकलने वाली बूंदों के जरिये एक दूसरे को संक्रमित करता है. इसीलिए खुले में थूकने पर जुर्माना का प्रावधान है. धूम्रपान से श्वसन प्रणाली, सांस की नली और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचता है. यही कारण है कि फेफड़ों की कोशिकाएं कमजोर होने से संक्रमण से लड़ने की क्षमता अपने आप कम हो जाती है.