जांच में तेजी लाकर वायरस को मात देने की तैयारी

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– कोविड-19 की जांच में तेजी लाने के लिए जिलावार लक्ष्य निर्धारित
– स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने जारी किया निर्देश
– आरटी-पीसीआर एवं ट्रू-नेट के तहत होगी कोविड-19 जांच
– पूल जांच कार्यक्रम को भी बढ़ावा देने का है निर्देश

बांका, 2 सितंबर
जांच में तेजी लाकर कोरोना वायरस को मात देने की तैयारी की जा रही है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर लगा है। जांच में कैसे तेजी लाएं और वायरस से लोगों को बचाएं इसपर काम किया जा रहा है। इसके लिए हर दिन कोई न कोई नया आदेश जारी किया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने फिर नया आदेश जारी किया है।

डीएम और सिविल सर्जन को आदेश:
स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं, जिसमें हर हाल में जांच का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए आरटी-पीसीआर एवं ट्रू-नेट के तहत जांच की गति में तेजी लाने को कहा है। साथ ही जांच अभियान का लगातार अपने स्तर से निगरानी करने का भी निर्देश दिया गया है। जिससे हर हाल में जल्द से जल्द और निर्धारित तिथि तक लक्ष्य पूरा किया जा सके।

जांच में तेजी के साथ मॉनिटरिंग तेज:
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर महतो ने बताया कि जांच में तेजी लाने के लिए सभी पीएचसी प्रभारी एवं प्रबंधक को आवश्यक निर्देश दिया गया है। इसके लिए हर आवश्यक पहल करने का निर्देश देकर मॉनिटरिंग की जा रही है। सिविल सर्जन का कहना है कि वह खुद जांच की मॉनिटरिंग टीम के साथ कर रहे हैं।

200 लोगों की प्रतिदिन होगी जांच :
जिले में प्रतिदिन 200 लोगों की कोविड-19 जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें आरटी-पीसीआर के तहत 150 लोगों और ट्रू-नेट के तहत 50 लोगों की जाँच की जाएगी।

अब हर दिन भेजी जाएगी रिपोर्ट :
जिले में प्रतिदिन होने वाली जांच की पूरी रिपोर्ट अब हर दिन विभाग को भेजी जाएगी। ताकि आवश्यकतानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके। दरअसल मिशन एक ही है कि हरहाल में निर्धारित तिथि तक लक्ष्य पूरा करना है। इस कारण से आदेश दिया गया है कि हर दिन शाम को रिपोर्ट विभाग को हर हाल में देना है।

वर्चुअल बैठक में कृमि मुक्ति के लिए बनी रणनीति

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– सघन दस्त नियंत्रण पखवारा एवं विटामिन ए की खुराक वितरण अभियान के लिए पदाधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

लखीसराय, 2 सितंबर।
सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने की कवायद में स्वास्थ्य विभाग लगा हुआ है। कोविड 19 के दौर में भी हरेक व्यक्ति चिकित्सा सेवा मिलने से वंचित न रह जाए यह सरकार की प्राथमिकता में है। विशेष रूप से बालक और बालिका के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर आंगनबाड़ी तक कार्यकर्ताओं को लगातार जागरूक और निर्देशित भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में सघन दस्त नियंत्रण पखवारा एवं विटामिन ए की खुराक वितरण अभियान को लेकर भी बड़ी योजना पर काम किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर बुधवार को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वर्चुअल एवं डिजिटल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को प्रशिक्षण राज्य स्तरीय पदाधिकारियों द्वारा दिया गया।

बच्चों को दी जाएगी विटामिन ए की खुराक:
वर्चुअल एवं डिजिटल माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में जिले में चल रही स्वास्थ्य सेवाओं पर वृस्तार से चर्चा हुई। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विटामिन ए की खुराक के वितरण अभियान के तहत जिले के नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को छमाही विटामिन ए की खुराक दी जाएगी। अभियान के तहत जिला, प्रखंड एवं ग्रामीण स्तर पर विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

सघन दस्त नियंत्रण पखवारा को बनाया जाएगा सफल:
बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विभाग प्रमुखता से कार्य कर रहा है। खासकर दस्त की समस्या को लेकर। प्रशिक्षण में जिले में दस्त से होने वाली शिशु मृत्यु दर को शून्य स्तर तक लाने के उद्देश्य से सघन दस्त नियंत्रण पखवारा के आयोजन पर चर्चा की गई। बताया गया कि अभियान के दौरान सफाई व्यवस्था के अभाव वाले इलाकों को चिन्हित करते हुए जागरूकता अभियान चलाया जाए। संबंधित इलाके के कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में भ्रमण कर माइक्रो प्लान तैयार करें। इसमें पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सूची बनायी जाए, साथ ही पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के घरों में प्रति बच्चा एक-एक ओआरएस पैकेट का वितरण किया जाए।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में काफी कुछ सिखने को मिलता है:
लखीसराय के जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं को काफी कुछ नई चीजें सिखने को मिलती हैं। बाद में योजना पर बेहतर रूप से कार्य भी हो पाता है। बुधवार को सघन दस्त नियंत्रण पखवारा एवं विटामिन ए की खुराक वितरण अभियान को लेकर जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को प्रशिक्षित मिला है। कार्यक्रम में विस्तारित रूप से योजना की सफलता हेतु कार्य योजना बनाने पर बल दिया गया।

आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम को दी जाएगी जानकारी:
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरांत जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को बताया गया कि कार्यक्रमों की सफलता के लिए वे प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी प्रखंड से नीचे के कार्यकर्ताओं जैसे आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम को देंगे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय, जिला एवं प्रखंड स्तर से स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, आईसीडीएस विभाग, जीविका एवं सहयोगी संस्थान के अधिकारियों ने भाग लिया।

कोविड-19 के बीच बढ़ी डेंगू की संभावना, रहें सावधान

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-साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल, लोगों को भी करें जागरूक

-सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित इलाज

लखीसराय, 1 सितंबर 2020
कोविड-19 के दौर में डेंगू का भी संभावना बढ़ गई है। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है। इसके लिए रहन-सहन में बदलाव के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की दरकार है। दरअसल कोरोना और डेंगू के शुरुआती लक्षण बुखार से ही शुरू होते हैं और दोनों का कई लक्षण एक-दुसरे से समान है। जिसके कारण लोगों की बीमारी की पहचान करने में भी भारी परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है। इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाँच कराने की जरूरत है। लोगों को कोविड-19 के दौर में डेंगू को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि इसको लेकर सजग रहना चाहिए।

लक्षण दिखते ही तुरंत कराऐ इलाज

जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत जाँच कराना चाहिए और चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज कराना चाहिए। ताकि लोगों की परेशानियाँ नहीं बढ़े और ससमय इलाज शुरू हो सकें।

साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल

डेंगू से बचाव को लेकर खुद के साथ-साथ घरों एवं आसपास क्षेत्रों का साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। जैसे की शौचालय एवं उसके आसपास की जगह, किचन, बेडरूम आदि जगहों के साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। क्योंकि यह बीमारी मच्छर काटने से होता है और गंदे जगह पर मच्छर के पनपने की संभावना अधिक हो जाती है। इसलिए इससे बचाव के लिए खुद के साथ-साथ दूसरों को भी जागरूक करें। जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव होगा।

कोविड-19 और डेंगू की ये है पहचान

कोविड-19 एवं डेंगू, दोनों बीमारियों में कई लक्षण आम होने के बावजूद इसमें कुछ अंतर भी हैं। डेंगू के बुखार में उल्टी, सूजन, रैशेज होते हैं। अगर डेंगू ने गंभीर रूप ले लिया हो तो इसमें बार-बार उल्टी आना, सांस तेज चलना, पेट में दर्द रहना, मसूड़ों से खून निकलना, कमजोरी, उल्टी में खून आने के लक्षण मिलते हैं। जबकि कोविड-19 होने पर उल्टी की जगह रोगी को दस्त लगते हैं। कोरोना के शुरुआत में बुखार, बलगम वाली खांसी, सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां आती हैं। हालांकि, समय के साथ-साथ इसमें अन्य लक्षण भी शामिल कर दिए गए हैं। इसमें स्वाद का पता न चलना, सुगंध न आना , स्किन पर रैशेज आदि शामिल हैं। हालांकि कोरोना के कुछ ऐसे मामले में भी सामने आए हैं जिसमे रोगी में काफी लंबे समय तक कोई लक्षण ही सामने नहीं आते हैं।
इसलिए दोनों बीमारियाँ का तुरंत इलाज शुरू कराना बेहद जरूरी है।

डेंगू का घरेलू उपचार

गिलोय जूस: डेंगू के बुखार से बचने के लिए गिलोय जूस को कारगार माना गया है। गिलोय जूस मेटाबोलिज्म बेहतर करने के साथ-साथ इम्युनिटी भी स्ट्रांग करता है। स्ट्रांग इम्युनिटी डेंगू के बुखार से लड़ने में शरीर की मदद करती है। इससे प्लेटलेट काउंट बढ़ता है और रोगी को बेहतर लगता है। एक गिलास पानी में दो छोटे गिलोय के तनों को उबाल लें और इस पानी को गुनगुना होने पर पी लें। इसका दिन में दो बार से अधिक न सेवन करें।

घर- घर जाकर पोषण के प्रति कर रही जागरूक

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करहरिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 148 में कार्यरत सेविका प्रधान सुमन लता की कहानी
बच्चों की माताओं को लोगों को कुपोषण को लेकर कर रही जागरूक

बांका, 31 अगस्त
कोरोना काल में हर किसी की चुनौतियां बढ़ गई हैं. स्वास्थ्य विभाग से लेकर आंगनबाड़ी तक में काम करने वाली सेविका सहायिका तक अपनी जिम्मेदारी बढ़-चढ़कर निभा रही हैं. करहरिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या -148 में कार्यरत सेविका सुमन लता को ही देख लीजिए. कोरोना से पहले ये 160 बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी उठा रही थी. कोरोना काल शुरू हुआ तो घर-घर जाकर बच्चों में पोषण के लिए जागरूक कर रही हैं. आंगनबाड़ी केंद्र अभी बंद है तो बच्चों के घर-घर जाकर उनके परिजनों को पोषण के प्रति ध्यान रखने को कह रही हैं. उन्हें समझा रही हैं कि इस उम्र में बच्चों का किस तरीके से देखभाल करनी चाहिए. कुमारी सुमनलता कहती हैं कि हमारी आंगनबाड़ी केंद्र में जितने भी बच्चे हैं सभी के घरों में जाकर उनके परिजनों को उचित देखभाल की सलाह दे रही हैं. उन्हें बता रही हूं कि कोरोना काल में अपनी सुरक्षा के साथ बच्चों की देखभाल किस तरीके से कर सकती हैं. सुमन लता कहती हैं कि इन छोटे-छोटे बच्चों को देखभाल करते-करते इन पर हमारा लगाव बढ़ गया है.

पोषण अभियान को जनआंदोलन में कर रही हैं तब्दील: सेविका सुमनलता कुपोषण के खिलाफ जंग को आसान बनाने की दिशा में नियमित रूप से गृह भ्रमण कर कुपोषित बच्चों की पहचान करने के साथ माताओं, बच्चों और स्थानीय लोगों को जागरूक करने में वह महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं. सुमनलता कहती है कि केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया पोषण अभियान का मुख्य लक्ष्य पोषण पर जनभागीदारी बढ़ाकर इसे जनांदोलन में तब्दील करना है. पोषण पर जन-भागीदारी को सुनिश्चित करने के साथ कुपोषण स्तर में कमी लानी है. इनके प्रयास का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है. पोषण को लेकर ना सिर्फ जागरूकता बढ़ाना है बल्कि लोगों के व्यवहार में भी बदलाव लाना है.

माताओं को बता रहे स्तनपान के महत्व: सेविका सुमनलता पोषण अभियान के दौरान माताओं को स्तनपान के महत्व को भी बता रही हैं जिससे आज इलाके की महिलाओं में जागरूकता आई है. बच्चों को संपूर्ण आहार के बारे में भी जानकारी दे रही हैं. जिससे की बच्चे कुपोषण के शिकार न हो.

आंगनबाड़ी केंद्र में 160 बच्चों की करती हैं देखभाल: कुमारी सुमनलता करती हैं करहरिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 148 के 160 बच्चें की देखभाल से लेकर उसे पढ़ाई के प्रति जागरूक भी करती हैं. बच्चों को बताती हैं कि किस तरह से पढ़ाई करना चाहिए ताकि आगे आसानी हो. इस काम में उनका सहायिका भी सहयोग करती हैं. सुमन के कार्य से लोगों में जागरूकता आई है.

स्थानीय लोग भी कर रहे तारीफ: करहरिया मोहल्ले के स्थानीय लोग बताते हैं कि जिस प्रकार से सुमनलता ने अपने पोषक क्षेत्र में काम किया है इससे इस इलाके में काफी जागरूकता आई है. बच्चे स्वस्थ हैं और परिवार में प्यार भी बढ़ा है.
बहरहाल, सेविका सुमनलता अपने क्षेत्र में कुपोषण को खत्म करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, उनका कहना है कि इस कार्य में सबका सहयोग चाहिए. इस मुहिम में आम महिलाओं सहित समाज के सभी लोगों का सहयोग चाहिए तभी यह मुहिम सफल होगी. आज जिस प्रकार से महिला जागरूक हुई हैं इससे यह तय है कि इस क्षेत्र में कुपोषण से मुक्ति मिल जाएगी

जांच से टूटेगी कोरोना की चेन

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– अधिक से अधिक जांच पर दिया जा रहा है जोर
– स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव लगा रही चक्कर

भागलपुर, 1 सितंबर
कोरोना की चेन तोड़ने के लिए अब जांच को हथियार बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव- गांव जाकर लोगों को जांच के लिए जागरूक कर रही है। मायागंज अस्पताल के कोरोना वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ हेमशंकर शर्मा का कहना है कि इसपर विशेष जोर दिया जा रहा है।

गांव-गांव घूमकर कर रहे जागरूक:
नोडल प्रभारी डॉक्टर हेमशंकर शर्मा का कहना है कि
स्वास्थ्य विभाग कोरोना को लेकर पूरी तरह से अलर्ट है। टीम गांव- गांव घूम रही है और लोगों जानकारी ले रही है। स्वास्थ्य विभाग यह अपील कर रहा है कि गांव में घूम रही टीम के सामने जाकर लोग अपनी समस्या बताएं। अधिक से अधिक जांच कराने को लेकर भी लोगों से अपील की जा रही है, जिससे कोरोना की चेन तोड़ी जा सके। अगर समय से संक्रमण का पता चल जाएगा तो इसका प्रसार आसानी से रोका जा सकेगा। लोगों को जागरुक किया जा रहा है कि वह अपनी जिम्मेदारी समझें और जांच के लिए आगे आएं।

प्रतिदिन 4000 लोगों की होगी जांच:
सिविल सर्जन डॉक्टर विजय कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार काम कर रहा है। अब तो जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है, अभी तक जिले में प्रतिदिन 2800 लोगों की जांच होती थी लेकिन अब अब एक दिन में 4000 लोगों की जांच होगी। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को इस सम्बंध में निर्देश भी जारी कर दिया गया है।

कोरोना जांच के लिए गांवों में की जा रही माइकिंग: कोरोना जांच के लिए लोगों से आगे आने की अपील की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य गांव- गांव घूमकर माइकिंग कर लोगों से जांच के लिए आने को कह रहे हैं। टीम के सदस्य लोगों को बता रहे हैं कि जांच कराने के क्या फायदे हैं। जांच कराने से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है.

सरकार की गाइड लाइन का हो रहा पालन:
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कोरोना जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं। जांच करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना किट पहनकर जांच कर रहे हैं, साथ ही जांच के दौरान सामाजिक दूरी का भी पालन कर रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी के अलावा जो लोग वहां पर मौजूद रहते हैं, सभी लोग ग्लव्स और मास्क पहने रहते हैं। इससे दूसरों में कोरोना का संक्रमण नहीं होगा। इसलिए बेहिचक जांच के लिए आगे आएं वहां किसी तरह का कोई खतरा नहीं है।

इन बातों का रखें ख्याल
1. खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में समस्या है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। चिकित्सक से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
3. अगर आप कोरोना वायरस के शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक को बार-बार न छूएं यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।

जांच में तेजी लेकर वायरस को मात देने की तैयारी

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– कोविड-19 की जांच में तेजी लाने के लिए जिला वार लक्ष्य निर्धारित
– स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने जारी किया निर्देश
– आरटी-पीसीआर ट्रू-नेट के तहत होगी कोविड-19 जांच
– पूल जांच कार्यक्रम को भी बढ़ावा देने का है निर्देश

लखीसराय, 1 सितंबर
जांच में तेजी लाकर कोरोना वायरस को मात देने की तैयारी की जा रही है। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर लगा है। जांच में कैसे तेजी लाएं और वायरस से लोगों को बचाएं इसपर काम किया जा रहा है। इसके लिए हर दिन कोई न कोई नया आदेश जारी किया जा रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने फिर नया आदेश जारी किया है।

डीएम और सिविल सर्जन को आदेश:
स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को पत्र भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं, जिसमें हर हाल में जांच का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए आरटी-पीसीआर एवं ट्रू-नेट के तहत जांच की गति में तेजी लाने को कहा है। साथ ही जांच अभियान का लगातार अपने स्तर से निगरानी करने का भी निर्देश दिया गया है। जिससे हर हाल में जल्द से जल्द और निर्धारित तिथि तक लक्ष्य पूरा किया जा सके।

जांच में तेजी के साथ मॉनिटरिंग तेज:
सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि जांच में तेजी लाने के लिए सभी पीएचसी प्रभारी एवं प्रबंधक को आवश्यक निर्देश दिया गया है। इसके लिए हर आवश्यक पहल करने का निर्देश देकर मॉनिटरिंग की जा रही है। सिविल सर्जन का कहना है कि वह खुद
जांच की मॉनिटरिंग टीम के साथ कर रहे हैं।

200 लोगों की प्रतिदिन होगी जांच :
जिले में प्रतिदिन 200 लोगों की कोविड-19 जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें आरटी-पीसीआर के तहत 150 लोगों और ट्रू-नेट के तहत 50 लोगों की जाँच की जाएगी।

अब हर दिन भेजी जाएगी रिपोर्ट :
जिले में प्रतिदिन होने वाली जांच की पूरी रिपोर्ट अब हर दिन विभाग को भेजी जाएगी। ताकि आवश्यकतानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
दरअसल मिशन एक ही है कि हरहाल में निर्धारित तिथि तक लक्ष्य पूरा करना है। इस कारण से आदेश दिया गया है कि हर दिन शाम को रिपोर्ट विभाग को हर हाल में देना है।

कोरोना काल में डेंगू के प्रति रहें सावधान

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– सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग से है इलाज की व्यवस्था
– घर के आसपास नहीं होने दें पानी का जमाव, डेंगू से होगा आपका बचाव
बांका, 1 सितंबर
बारिश का मौसम लगभग समाप्त होने वाला है और सर्दी शुरू होने वाली है. डेंगू के लिए ऐसा मौसम अनुकूल माना जाता है. ऐसे में जरूरी है कि लोग ना सिर्फ कोरोना के प्रति बल्कि डेंगू को लेकर भी सावधान रहें.  स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर अलर्ट है. सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए अलग से इलाज की व्यवस्था है.
डीपीएम प्रभात कुमार राजू ने कहा कि कोरोना काल में भी अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से इलाज की व्यवस्था है. लोग डेंगू के प्रति सचेत रहें. घर के आसपास पानी का जमाव नहीं होने दें. इससे मच्छर नहीं पनपेगा और आपका डेंगू से बचाव होगा. इसके बावजूद भी अगर आप डेंगू का शिकार हो ही गए तो सदर अस्पताल आ जाइए. यहां पर इलाज की समुचित व्यवस्था है. सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार ने बताया कि यहां पर 6 बेड का अलग से डेंगू मरीजों के लिए वार्ड चल रहा है. जहां पर डेंगू मरीजों का इलाज किया जा रहा है.
अभी के मौसम में डेंगू का खतरा ज्यादा: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि वैसे तो 25 जून से ही डेंगू को लेकर सतर्कता बरती जाती है, लेकिन जब बारिश का मौसम समाप्त होता है और सर्दी शुरू होने वाली रहती है उस दौरान डेंगू के ज्यादा मामले सामने आते हैं. अभी से लेकर अक्टूबर तक लोगों में डेंगू होने की आशंका अधिक रहती है. डॉ. चौधरी ने कहा अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है. डॉक्टर की सलाह लेकर दवाई ले सकते हैं. बिना चिकित्सक की सलाह से दवा लेने पर शरीर से प्लेटलेट्स अचानक कम हो सकते हैं. सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें, बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है.
मच्छरदानी का करें इस्तेमाल: डॉ. चौधरी ने कहा कि घरेलू स्तर पर सावधानी बरतने से भी डेंगू को पांव पसारने से रोका जा सकता है. इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर के आसपास पानी को जमने नहीं दें. रात में सोते समय मच्छदानी का प्रयोग करें. डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, इसलिए दिन में विशेष तौर पर सतर्क रहें. घर में कूलर के पानी को बार-बार बदलते रहें. साथ ही घर के आसपास कोई ऐसा सामान हो, जिसमें पानी जमा हो जाता है तो उसे तत्काल हटा दें.
कैसे और कब होता है डेंगू: डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है. इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं. ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं. डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जून-जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है. इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं. एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं.
ये हैं डेंगू के लक्षण:
ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ना
सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है
बहुत ज्यादा कमजोरी लगना, भूख न लगना और जी मितलाना और मुंह का स्वाद खराब होना
गले में हल्का-सा दर्द होना
शरीर खासकर चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग के रैशेज होना

जापान छात्रों को हर संभव मदद करने को तैयार – एच. ई. हिरामस्तु, राजदूत, जापान

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नईदिल्ली-

न्यू देहली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के छात्रों को संबोधित करते हुए जापान के राजदूत एच ई हिरामस्तु ने कहा कि जापान भारत के छात्रों को हर संभव मदद को तैयार है। एच ई हिरामस्तु ने कहा कि भारतीय छात्र प्रतिभाशाली हैं। जापान से भारत का सहयोग मिलता रहा है। जापान ने समय के साथ अपने आप को बदला है जिसके कारण बाजार में अपना वर्चस्व बनाए रखा है।

एच ई हिरामस्तु ने कहा कि जापान की कई कंपनियां भारत में एमओयू साइन किया है जिसका बेहतरीन परिणाम भी सामने आए हैं। दोनों देश के उद्यमियों में तालमेल है जिससे उद्योग को आगे बढने में सहायता हुई है।

जापान के राजदूत ने कहा कि एनडीआईएम में जापान की कंपनियों ने एमओयू साइन किए हैं जिसका प्रभाव भी देखने को मिला है। निश्चिततौर पर जिस तरह से कंपनी ने मानदंड स्थापित किए हैं वह अद्भूत है।

जापान की कंपनियां भारत के छात्रों को ट्रेनिंग देने को तैयार है। छात्रों को ऑन लाइन प्रशिक्षण भी दे रहा है।

एच ई हिरामस्तु ने छात्रों के साथ बेहतर तालमेल का सुझाव भी दिया एवं कहा है कि आने वाले दिनों में वह पूरा सहयोग करेगा। इस मौके पर एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल ने कहा कि आज छात्रों के लिए चैलेंज है ऐसे समय में तालमेल के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

प्रशांत भूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सजा देने के फैसले की निंदा

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• लोकतांत्रिक जन पहल ने कारगिल चौक पर किया विरोध प्रदर्शन
• सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उठाये गए सवाल
• ‘मुकदमा निराधार, सुप्रीम कोर्ट सजा मुक्त करे’ स्लोगन के साथ किया गया विरोध
पटना/ 31 अगस्त:  प्रशांत भूषण द्वारा अवमानना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सजा सुना दी है. जैसा कि पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशांत भूषण को कोर्ट अवमानना के लिए माफ़ी मांगने की बात कही गयी थी. लेकिन प्रशांत भूषण ने माफ़ी मांगने से साफ़ इंकार कर दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सजा सुनाते हुए 1 रूपये का जुर्माना या 3 महीने का कारावास सहित 3 साल तक वकालत करने पर रोक लगाने की बात कही है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ लोगों में रोष देखा जा रहा है. लोकतांत्रिक जन पहल ने सोमवार को ही पटना के कारगिल चौक पर प्रशांत भूषण को सुनाई गयी सजा के खिलाफ़ विरोध  प्रदर्शन  किया. ‘मुकदमा निराधार, सुप्रीम कोर्ट सजा मुक्त करें’- इस स्लोगन के साथ लोकतांत्रिक जन पहल ने विरोध प्रदर्शन में आवाज को बुलंद किया जिसमें बढ़ी संख्या में महिलाएं सहित लोग शामिल हुए.
देश में पहला अलोकतांत्रिक फैसला:
जाने माने राजनीतिक कार्यकर्ता व राजनैतिक विश्लेषक सत्यनारायण मदन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशांत भूषण को कोर्ट अवमानना के तहत दोषी मानते हुए सजा सुनाई गयी है. लेकिन यह मामला कोर्ट अवमानना का कहीं से नहीं है. भाजपा के एक नेता के 50 लाख के वाहन पर मुख्य न्यायधीश लॉकडाउन की अवधि में बिना हेलमेट के घूम रहे थे जिनकी फोटो सोशल मीडिया में वायरल हुयी थी. इस पर यदि प्रशांत भूषण की यह टिपण्णी आती है कि मुख्य न्यायाधीश को ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए थी, तो उनकी यह सोच प्रासंगिक भी है. उन्होंने बताया कि उन्हें लगता कि प्रशांत भूषण की यह टिपण्णी कहीं से भी कोर्ट का अवमानना नहीं हो सकता. यह कोर्ट के बाहर की गतिविधि है जिसे कोर्ट अवमानना से जोड़ना सरासर गलत होगा. यह मुख्य न्यायधीश के निजी मर्यादा के उल्लंघन के अलावा और कुछ नहीं है. उन्होंने बताया कि देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के द्वारा इस तरह का अलोकतांत्रिक फैसला सुनाया गया है. वहीं बार के सदस्यों द्वारा भी प्रशांत भूषण को किसी तरह की सजा नहीं देने की गुजारिश की गयी थी. लेकिन बार सदस्यों की सोच को दरकिनार करते हुए बेंच के द्वारा दिया गया यह फैसला संविधान के नियमों के गलत इस्तेमाल की तरफ इशारा करता है.
नैसर्गिक प्रक्रिया का भी किया गया उल्लंघन:
लोकतांत्रिक जन पहल ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की निंदा की है और कहा है कि एक रुपए का जुर्माना लगाना और न देने पर तीन महीने की जेल एवं तीन साल तक वकालत पर रोक , यह बेतुका फैसला है। इस फैसले ने न्यायालय के विवेक और विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है। लोजप का मानना है कि यह फैसला हमारे संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ तो है ही , सुनवाई की पूरी प्रक्रिया, न्याय की नैसर्गिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन है। लोकतांत्रिक जन पहल ने कहा है कि प्रशांत  भूषण ने न्यायिक प्रक्रिया में कभी बाधा नहीं पहुंचायी बल्कि वह न्यायिक  दायरे में  रहकर आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के द्वारा निजी तौर पर  मर्यादा का उलंघन किए जाने पर टिप्पणी की थी।
अवमानना की आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाना असंवैधानिक:
कारगिल चौक पर विरोध प्रर्दशन में शामिल लोग नारों की तख्तियां लिए आवाज बुलंद कर रहे थे। तख्तियों पर  लिखा था, अवमानना की आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाना असंवैधानिक, जज के निजी अमर्यादित आचरण की आलोचना अवमानना नहीं, न्यायिक प्रक्रिया का लोकतान्त्रिकरण करो, रिटायर जजों की पुनर्नियुक्ति बंद करो, न्यायपालिका में उच्चस्तरीय भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ, हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों की बहाली मं  आरक्षण लागू करो, न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करो और न्यायपालिका जनता के प्रति जवाबदेह है
प्रर्दशन में शामिल प्रमुख लोगों में कंचन बाला, सुधा वर्गीज, डोरोथी, फ्लोरिन, असृता, आसमां खान , मणिलाल एडवोकेट, शैलेन्द्र प्रताप एडवोकेट,अनुपम प्रियदर्शी, निर्मल नंदी, विनोद रंजन, कृष्ण मुरारी , अशर्फी सदा, अनवारूल होदा, आजमी बारी एडवोकेट, कपिलेश्वर जी, ऋषि आनंद, विवेक, अनूप कुमार सिन्हा, प्रवीण कुमार मधु, प्रो सतीश, एम आजम, जावेद अख्तर, मनोज प्रभावी, राजकुमार और मनहर कृष्ण अतुल, मो आरज़ू और मोनाजिर हसन के नाम उल्लेखनीय हैं।

बच्चों की देखभाल कर उनमें शिक्षा की जगा रही अलख

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बच्चों की देखभाल कर उनमें शिक्षा की जगा रही अलख

• पचगछिया गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 44 की सेविका ममता की कहानी
• बच्चों की देखभाल के साथ गांव के लोगों को कोरोना के प्रति भी कर रही जागरूक

भागलपुर, 31 अगस्त
आंगनबाड़ी सेविका का काम पहले से ही चुनौतीपूर्ण है. छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करना और उनमें शिक्षा की अलख जगाना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन इस काम को बहुत जिम्मेदारी से कर रही है गोपालपुर प्रखंड के पचगछिया गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 44 की सेविका ममता कुमारी. कोरोना काल में उनकी चुनौती और भी बढ़ गई है.

जागरूकता की दोहरी जिम्मेदारी कर रही पूरी:

कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सेविका ममता कुमारी को घर- घर जाकर लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी मिली है. सेविका ममता कुमारी सुबह से ही अपने काम में जुट जाती हैं. वह घर- घर जाकर गांव के लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करती हैं. कोरोना से बचाव के लिए लोगों को मास्क पहनने और घरों से कम निकलने की सलाह देती हैं. लोगों को समझाती हैं कि बाहर से घर आने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करें. वह कहती है लोगों को शारीरिक दूरी का पालन करने एवं बाजार या सब्जी मंडी में एक- दूसरे से दूरी बनाकर रहने की सलाह देती हैं.

जागरूकता का दिख रहा है असर:

सेविका ममता कुमारी कहती हैं कि जागरूकता का गांव के लोगों में असर पड़ रहा है. बाहर निकलते वक्त लोग भीड़ लगाने से बच रहे हैं. लोगों ने मास्क पहनना शुरू कर दिया है. सैनिटाइजर का भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो लापरवाही कर रहे हैं, लेकिन वह भी जल्द ही समझ जाएंगे. कोरोना का अतिरिक्त काम मिलने के बारे में वह कहती हैं कि यह विपत्ति का समय है. इस वक्त लोगों को को बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभानी चाहिए. खासकर जब तक कोरोना संक्रमण का खतरा है तब तक तो लोगों को निश्चिंत होकर नहीं बैठना चाहिए.

40 बच्चे हैं आंगनबाड़ी केंद्र में:
पचगछिया स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 44  में 40 बच्चे हैं. इनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी ममता कुमारी उठा रही हैं. साथ ही बच्चों को प्राथमिक तौर पर शिक्षित करने का भी काम कर रही हैं. बच्चों के पोषण से लेकर हर तरह की जिम्मेदारी को वह बखूबी निभा रही हैं. इस काम में सहायिका भी उनका साथ दे रही हैं. ममता कुमारी 2007 से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 44 में अपनी सेवा दे रही हैं. वह बताती हैं कि अब तक सैकड़ों बच्चे यहां से शिक्षित होकर निकल चुके हैं. सारे बच्चे उनका आदर करते हैं. साथ में गांव के लोग भी उनके कार्य से काफी संतुष्ट हैं.

परिवार का भी मिल रहा सहयोग:

ममता कुमारी कहती हैं कि अगर परिवार का सहयोग नहीं मिलता तो वह अपना काम इतनी मजबूती से नहीं कर पाती. बच्चे तो बाहर पढ़ते हैं लेकिन घर पर पति मेरे काम में सहयोग करते हैं. इसी का परिणाम है कि वह अपना काम बेहतर तरीके से कर पा रही हूं. दरअसल, फील्ड में काम करते वक्त मुझे घर के बारे में बहुत ज्यादा चिंता नहीं रहती है. यही कारण है कि वह अपने काम को सही तरीके से अंजाम दे पा रही है