कोरोना संक्रमण की रोकथाम समाज के सभी लोगों की जिम्मेदारी: डॉ अशोक

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कोविड 19 से बचाव के उचित व्यवहार विषय पर वेबीनार का हुआ आयोजन
वेबीनार को डीआईओ, एसीएमओ व आइसीडीएस डीपीओ ने किया संबोधित
कोविड 19 उचित व्यवहार पर स्वास्थ्य अधिकारियों व मीडियकर्मियों ने की चर्चा
सतर्कता और सुरक्षित व्यवहार से संक्रमण की रोकथाम पर दिया गया बल
लखीसराय, 27 अगस्त: वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौर में समाज के सभी वर्गों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की रो​कथाम की दिशा में हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन आम लोगों के सहयोग बिना संक्रमण के प्रसार पर लगाम लगाना संभव नहीं है। संक्रमण की रोकथाम के लिए समाज के हरेक वर्ग की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है, इस बात को सभी को समझना होगा. इस वक्त लोगों की सजगता और जागरूकता की सबसे ज्यादा जरूरत है। मीडिया की भूमिका भी ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण है। उक्त बातें गुरुवार को जिला स्वास्थ्य विभाग और  सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च  (सीफार) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘कोविड 19 से बचाव के उचित व्यवहार’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन मीडिया कार्यशाला में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉक्टर अशोक कुमार भारती ने कही। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड 19 को देखते हुए बेहतर चिकित्सीय व्यवस्था मुहैया कराने की कवायद जारी है। आरोग्य केंद्रों में सुचारू रूप से सेवाएं दी जा रही हैं, साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना सहित अन्य जांच की सुविधा उपलब्ध है। कार्यशाला में जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ मीडिया और सीफार की टीम ने ई-संवाद किया।
​मास्क और सैनिटाइजर को बना लें जिंदगी का अहम हिस्सा:
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर देवेन्द्र चौधरी ने संक्रमण काल में मास्क और सैनिटाइजर की उपयोगिता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि घर और बाहर दोनों जगह लोग मास्क का प्रयोग करें। मास्क व हाथों की स्वच्छता का विशेष ख्याल रखें। घर से बाहर निकलने के दौरान मास्क और सेनिटाइजर साथ रखें. समय-समय पर हाथों को सैनेटाइज्ड करते रहें। वैसे कर्मी और मजदूर जिनके पास इन सुविधाओं का अभाव है, उन्हें उनकी संस्था द्वारा इसकी व्यवस्था करायी जाये। उन्होंने कहा जिस व्यक्ति में भी संक्रमण के लक्षण नजर आए उन्हें तुरंत जाकर कोविड 19 की जांच करा लेनी चाहिए।
अन्नप्राशन और गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कराई जा रही है:
वेबीनार में आइसीडीएस जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कोरोना के कारण आगंनबाड़ी बंद होने के कारण सेविकाएं घर-घर जाकर अन्नप्राशन व गोदभराई जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कर रहीं है. ये कार्यक्रम कोविड 19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया जा रहा है. संक्रमण के विभिन्न पहलुओं पर अभिभवकों को जागरूक किया गया है. माताओं को कोरोना काल मेंस्वयं व बच्चे को संक्रमण से बचाये रखने की जानकारी दी गयी है। उन्होंने जिले में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना व मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत संबधित सभी लाभाथियों का पंजीकरण और उसका लाभ देना सुनिश्चित कराये जाने संंबंधी जानकारी भी दी.
समाज का साथ और युवाओं का जागरूक होना जरूरी:
कोरोना को मात देने वाले सूर्यगढ़ा पीएचसी के स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया इस महामारी से समाज के पूर्ण सहयोग से ही संक्रमण की रोकथाम की जा सकती है. उन्होंने संक्रमण की रोकथाम में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके जागरूक होकर दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की। उन्होंने बताया लोगों तक सही जानकारी पहुंचे इसके लिए एक सोशल मीडिया ग्रूप भी बना रखा है. इस ग्रूप से लोग जुड़ कर अपने विचार भी रख रहे हैं.
लोगों की समस्या को भी समझना है जरूरी:
सीफार बिहार के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी रणविजय कुमार ने वेबीनार के दौरान कोविड 19 के दौरान उचित व्यवहार पर आवश्यक जानकारियों के साथ चिकित्सकों के साथ चर्चा किया. इस मौके पर सीफार की कार्यपालक निदेशक अखिला शिवदास ने कहा संक्रमण की रोकथाम के लिए उचित व्यवहार को अपनाया जाना बहुत जरूरी है. इसके लिए स्वास्थ्य ​​विभाग, मीडिया व अन्य सहयोगी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है. लोगों को निरंतर जागरूक करने के साथ साथ उनके विचार को जानने समझने के लिए भी काम करना होगा तभी वास्तिवक रूप से समस्या निष्पादन की समझ बेहतर हो सकेगी.
टीकाकरण के लक्ष्य पर दिया जा रहा है ध्यान:
यूनिसेफ एसएमसी, लखीसराय के मोहम्मद नैयर उल आजम ने बताया कि जिले में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कोविड 19 के दौर में भी बच्चों को अन्य बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण के लक्ष्य पर जोर दिया जा रहा है। जो क्षेत्र कंटेनमेंट जोन से बाहर आ गए हैं वहां 14 दिनों के बाद टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सीफार बिहार के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी रणविजय कुमार ने वेबिनार का संचालन करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में कोरोना रोकथाम के उचित व्यवहार पर कार्य करना बेहद जरूरी है, जिसमें  समुदाय की भागीदारी मील का पत्थर साबित हो सकती है।
इस मौके पर अपर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी रंजीत कुमार, सीफ़ार मुंगेर डिवीजन के डिवीजनल कॉर्डिनेटर श्याम त्रिपुरारी सहित अन्य डिवीजन के डिवीजनल कॉर्डिनेटर व मीडिया कर्मी मौजूद थे।

कोरोना के दौर में भी स्तनपान को बढ़ावा देने पर दिया जा रहा है बल  

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-स्तनपान के लिए महिलाओं को कर रहे हैं जागरूक, दे रहे हैं आवश्यक जानकारी
-घर-घर जाकर ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मी कर रहे हैं जागरूक
जमुई, 27 अगस्त, 2020
कोरोना महामारी के दौर भी सुरक्षा के साथ स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस के संयुक्त सहयोग से व्यापक पैमाने पर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। इस दौरान महिलाओं को स्तनपान से होने वाले लाभ और महत्ता की विस्तार से जानकारी भी दी जा रही है। यह अभियान बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके लिए एएनएम, आशा एवं ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मी इसे सफल बनाने को लेकर घर-घर जाकर  लोगों जागरूक कर रहें हैं, ताकि शत-प्रतिशत लोगों को इसकी जानकारी मिल सके एवं लोग शामिल होकर लाभ ले सकें।
बच्चों के सर्वांगीण बिकास के लिए बेहद जरूरी है स्तनपान
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है। क्योंकि माँ के दूध से बच्चों को उसके शरीर के अनुकुल प्रर्याप्त उर्जा मिलती है और जन्म के बाद छः माह तक नवजात शिशु को स्तनपान कराने से शिशु का स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है। बच्चों को 6 माह तक स्तनपान के अलावा बाहर से पानी भी नहीं देना चाहिए। इससे शिशुओं में  डायरिया व निमोनिया से होने वाले मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुणा तक कम हो जाती है। साथ ही स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन एवं ओवरी कैंसर होने का खतरा कम रहता है। जिससे स्वस्थ माँ मजबूत बच्चा का निर्माण होता है। उन्होंने लोगों से बच्चे जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ स्तनपान कराने का अपील किया है।
संक्रमित माताऐं भी करा सकती है स्तनपान
अगर कोई महिलाएँ कोरोना से संक्रमित हो चुकी हैं और वह उपचाराधीन हैं तो ऐसी महिलाएँ भी अपने शिशु को स्तनपान करा सकती हैं। किन्तु इस दौरान उन्हें अपने हाथों की अच्छी तरह सफाई करनी होंगी और स्तनपान के दौरान मास्क का भी अनिवार्य रूप से उपयोग करना होगा। इससे माँ का संक्रमण बच्चे के शरीर तक नहीं पहुँच पाएगा। इसके अलावे इस बात का भी ध्यान रखना है कि माँ अपने बच्चों को स्तनपान कराने में सक्षम हैं या नहीं, क्योंकि बीमारी के कारण कमजोर होने पर स्तनपान कराने में माँ खुद को सक्षम महसूस नहीं कर पाती है।
टीकाकरण के दौरान भी किया जाता है जागरूक
ऑगनबाड़ी केंद्र पर होने वाले बच्चों एवं महिलाओं का नियमित टीकाकरण के दौरान भी स्तनपान को लेकर जागरूक किया जाता है। और विस्तार पूर्वक इसकी जानकारी दी जाती है। इसके अलावा गृह भेंट कार्यक्रम के दौरान भी सेविका द्वारा महिलाओं को स्तनपान के लिए जागरूक किया जाता है।

घर-घर घूम रहीं आशा, हो रही कालाजार के मरीजों की पहचान

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– होम-टू-होम सर्वे को लेकर दिख रही तेज़ी
– जिले के 4 प्रखंडों के 12 गांव में कालाजार को लेकर चल रहा सर्वे
– सदर प्रखंड के शासन गांव में डब्ल्यूएचओ की टीम ने किया निरीक्षण
बांका, 27 अगस्त
जिले के 4 प्रखंडों के 12 गांव में कालाजार रोगियों की पहचान के लिए आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। सदर प्रखंड के शासन गांव में भी सर्वे का काम चल रहा है, गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम ने निरीक्षण किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम को लीड कर रहे डॉक्टर शांतनु घोष ने सर्वे कर रही आशा कार्यकर्ताओं से सर्वे करने का तरीका पूछा। इससे संतुष्ट हो जाने के बाद डॉक्टर शांतनु घोष ने  गांव के तीन-चार स्थानीय लोगों से स्वास्थ्य विभाग के काम की जानकारी ली। वह स्वास्थ्य विभाग के कार्य से संतुष्ट दिखे
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि सुबह 11:00 बजे डॉक्टर शांतनु घोष के नेतृत्व में डब्ल्यूएचओ की टीम आई। टीम के सदस्यों को शासन गांव ले जाया गया और उन्हें सर्वे कार्य कर रही आशा कार्यकर्ताओं से मिलवाया गया। जहां पर उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं व अन्य लोगों से जानकारी लेकर सर्वे कार्य पर संतुष्टि जताई। टीम ने आशा कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि अगर किसी व्यक्ति में कालाजार का लक्षण दिखाई दे तो उसे तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाएं। मालूम हो कि 25 अगस्त से आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर कालाजार मरीजों की पहचान के लिए सर्वे का कार्य कर रही हैं।
2 सितंबर तक चलेगा सर्वे का काम:
जिला वेक्टर डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ बीके यादव ने बताया कि 25 अगस्त से सर्वे का कार्य चल रहा है जो 2 सितंबर तक चलेगा।  इस दौरान अगर कोई व्यक्ति कालाजार से पीड़ित पाया जाता है तो  नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाकर उसका इलाज कराया जाएगा। दूसरी तरफ सर्वे कार्य समाप्त हो जाने के बाद जिले के इन 12 गांव में छिड़काव करवाया जाएगा।
तैयार हो रहा डाटा:
कालाजार रोगियों की पहचान के लिए सर्वे कर रही टीम में एक आशा कार्यकर्ता और एक आशा फैसिलिटेटर है। इन लोगों को एक फॉर्मेट उपलब्ध कराया गया है। जिसे गांव वालों से जानकारी लेकर भरना है। व्यक्ति का नाम, गांव का नाम, पंचायत का नाम और अगर उस व्यक्ति में कोई बीमारी का लक्षण है तो उसे भी फार्म में दर्ज करना है।
घर के पास जलजमाव नहीं होने दें:
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि सर्वे के बाद गांव के हर एक घरों में दवा का छिड़काव भी किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें। यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी लगाएं, साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनाने व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं।
कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने की अपील की गई गई।
कालाजार की ऐसे करें पहचान:
कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है। कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है। यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है। कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है। यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार, और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है। यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है। बाल व त्वचा के परत भी सूख कर झड़ते है। कालाजार के संभावित  लक्षण दिखने पर रोगी को तुरंत किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।

कोरोना की तरह टीबी भी है संक्रामक बीमारी, इसलिए रहें सावधान 

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-लगातार खाँसी रहने पर तुरंत कराऐ जाँच, अस्पताल में मुफ्त होती है जाँच
-मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि
लखीसराय, 25 अगस्त, 2020
कोरोना के तरह ही टीबी भी एक संक्रामक बीमारी है. दोनों बीमारियाँ के लक्षणों में समानता भी होती है,जिसके कारण बीमारी का सही पता लगाने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में पूर्व से टीबी जैसी बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए यह दौर विशेष सतर्कता बरतने का है क्योंकि इन मरीजों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है। जिससे उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा अन्य मरीजों से बढ़ सकता है। सबसे जरूरी है कि मरीज की दवा का क्रम न टूटे। कोरोना में लगातार तेज बुखार और खांसी आती है। टीबी का लक्षण थकावट, आम बुखार, वजन गिरना, भूख न लगना एवं  रात में पसीना आना आदि है।
लक्षण का महसूस होते ही कराऐ जाँच
टीबी के नोडल पदाधिकारी डॉ सुरेश शरण  ने बताया कि  टीबी के लक्षण महसूस होते ही, ऐसे मरीजों को बिना देर किए अपनी जाँच करवानी चाहिए। पीएचसी से जिले के अन्य अस्पतालों में टीबी की मुफ्त जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषण आहार के लिए प्रति माह 500 रुपये की सहायता राशि भी दी जाती है।
अनावश्यक यात्रा ना करें:
टीबी पीड़ित मरीज अनावश्यक यात्रा से बचें। एवं घर से निकलने पर सेनेटाइजर साथ लेकर चलें। भीड़-भीड़ वाले जगह पर बिलकुल नहीं जाएं। धूलकण से बचाव के लिए हर आवश्यक पहल करें।
बचाव के उपाय:
-1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करे।
-मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
-मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
-मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहे। साथ ही एसी से परहेज करे।
-पौष्टिक खाना खाए, एक्सरसाइज व योग करे।
-बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
-भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
ये हैं टीबी के लक्षण:
-भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
-बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।
-हलका बुखार रहना, हरारत रहना।
-खांसी आती रहना, खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
-गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
-गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
-महिलाओं को टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
-पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
-टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

कोरोना काल में डेंगू के मरीजों का अलग से होगा इलाज

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• मायागंज अस्पताल में 20 वर्ड का बनेगा डेंगू वार्ड
• वार्ड के लिए नर्स और मैनेजर की बहाली भी की जाएगी
भागलपुर, 26 अगस्त
कोरोना काल में डेंगू मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग सजग है. इसे लेकर मायागंज अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 20 बेड का अलग से वार्ड बनाया जाएगा. अलग से वार्ड बन जाने के बाद डेंगू मरीजों के लिए सहूलियत बढ़ जाएगी.
अस्पताल अधीक्षक डॉ अशोक कुमार भगत ने बताया डेंगू के मामले अब कभी भी आ सकते हैं. इसे लेकर अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से तैयार है. यही वजह है कि अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाने का फैसला किया है. डॉ भगत ने बताया इसके लिए नर्स और हेल्थ मैनेजर की  बहाली की जाएगी. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों व अन्य कर्मियों की तैनाती कर वार्ड में जल्द इलाज शुरू किया जाएगा.
अभी के मौसम में डेंगू का खतरा ज्यादा: डॉ भगत ने कहा कि वैसे तो 25 जून से ही डेंगू को लेकर सतर्कता बरती जाती है, लेकिन जब बारिश का मौसम समाप्त होता है और सर्दी शुरू होने वाली रहती है उस दौरान डेंगू के ज्यादा मामले सामने आते हैं. अगस्त के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्टूबर तक लोगों में डेंगू होने की आशंका अधिक रहती है.
मच्छरदानी का करें इस्तेमाल: डॉ. भगत ने कहा कि घरेलू स्तर पर सावधानी बरतने से भी डेंगू को पांव पसारने से रोका जा सकता है. इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि घर के आसपास पानी को जमने नहीं दें. रात में सोते समय मच्छदानी का प्रयोग करें. डेंगू का मच्छर दिन में काटता है, इसलिए दिन में विशेष तौर पर सतर्क रहें. घर में कूलर के पानी को बार-बार बदलते रहें. साथ ही घर के आसपास कोई ऐसा सामान हो, जिसमें पानी जमा हो जाता है तो उसे तत्काल हटा दें.
कैसे और कब होता है डेंगू: डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है. इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं. ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं. डेंगू बरसात के मौसम और उसके फौरन बाद के महीनों यानी जून-जुलाई से अक्टूबर में सबसे ज्यादा फैलता है. इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं. एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं.
ऐसे फैलता है: डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है. जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता है. खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है. जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीड़ित हो जाता है.
ऐसे बरतें सावधानी:
• अगर मरीज को साधारण डेंगू बुखार है तो उसका इलाज व देखभाल घर पर की जा सकती है
• डॉक्टर की सलाह लेकर दवाई ले सकते हैं
• बिना चिकित्सक की सलाह से दवा लेने पर शरीर से प्लेटलेट्स अचानक कम हो सकते हैं
• अगर बुखार 102 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा है तो मरीज के शरीर पर पानी की पट्टियां रखें
• सामान्य रूप से खाना देना जारी रखें, बुखार की हालत में शरीर को और ज्यादा खाने की जरूरत होती है
• मरीज को आराम करने दें

आंगनबाड़ी केंद्रों पर दिया गया पोषण का मंत्र

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– जिले के सभी केंद्रों पर वीएचएसएनडी का किया गया आयोजन
-पोषण की महत्ता के बारे में दी गई विशेष जानकारी
लखीसराय, 27 अगस्त
पोषण माह के तहत बुधवार को जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर वीएचएसएनडी (ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस) मनाया गया। कार्यक्रम में ऑगनबाड़ी सेविका, महिला पर्यवेक्षिका, आशा व  अन्य कर्मियों के साथ क्षेत्र की गर्भवती, धात्री महिलाएं एवं किशोरियों ने भाग लिया। इस दौरान कोविड-19 को लेकर बचाव से संबंधित जारी निर्देशों का पालन करते हुए लोगों को आवश्यक जानकारी दी गई और पोषण का मूल मंत्र दिया गया।
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कोविड-19 को लेकर सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया गया। कार्यक्रम में आए लोगों को भी इससे बचाव की जानकारी दी गई। कोरोना काल में
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण की भी जानकारी दी गई।
गर्भावस्था के दौरान पोषण पर हो ध्यान:
कार्यक्रम में पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण की विस्तार से जानकारी दी गई। जैसे हरी साग-सब्जी का सेवन, समय पर खाना खाने,समय-समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने एवं चिकित्सा परामर्श का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी बताया कि हर माह की 9 तारीख को स्थानीय पीएचसी में मुफ्त एएनसी जांच की जाती है और जांच के बाद आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है। महिलाओं से अपील की गई कि वह निश्चित रूप से जांच में भाग लें।
मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई की दी गई जानकारी:
कार्यक्रम के दौरान किशोरियों को मासिक धर्म की विस्तार से जानकारी दी गई और मासिक धर्म के पूर्व व बाद में आवश्यक साफ-सफाई के बारे में बताया गया। इसी कर्म में अच्छे किस्म का पैड उपयोग करने एवं उपयोग के बाद पैड को सुरक्षित जगह पर जलाने या जमीन के अंदर फेंकने की जानकारी दी गई। साथ ही मासिक धर्म के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानियां आने पर तुरंत चिकित्सकों से जांच कराने के लिए बताया गया।
बच्चों व किशोरियों को दी गई एल्बेंडाजोल की गोली : केंद्र पर मौजूद किशोरियों एवं बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई एवं इससे होने वाले फायदे के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही तीन माह के अंतराल पर एल्बेंडाजोल की गोली खाने की सलाह दी गई।

जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर हुआ टीकाकरण सत्र का आयोजन

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बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के टीकाकरण है जरूरी
बच्चों और गर्भवती महिलाओं को लगाए गए टीके
भागलपुर, 26 अगस्त
कोरोना काल में भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस की ओर से कई कार्यक्रम चलाये जा रहें है। इसी क्रम में जिले में बुधवार को नियमित टीकाकरण सत्र का आयोजन जिले के लगभग 3000 आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर किया गया। इस दौरान गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीके लगाए गए. साथ ही आंगनवाड़ी केंद्रों पर आई हुयी गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को स्तनपान की आवश्यकता तथा महत्व के बारे में जानकारी दी गयी।  इसके अलावा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में आरटीई पैकेट का वितरण किया गया. आरटीई ( रेडी टू इट) पैकेट के इस्तेमाल एवं इससे होने वाले लाभ की जानकारी दी गई. साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया गया.
गोपालपुर प्रखंड के पचगछिया गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 97 की एएनएम मधुमायकेला मुर्मू ने कहा कि टीकाकरण से पहले गांव के लोगों को इसकी सूचना पहुंचा दी जाती है, ताकि वह सही समय पर आ सके. अभी कोरोना को देखते हुए टीकाकरण के दौरान काफी सावधानी बरती जाती है. आशा फैसिलिटेटर आशा वर्मा ने बताया कि इस केंद्र पर हर बुधवार और शुक्रवार को टीकाकरण अभियान चलाया जाता है. इसमें गांव के बच्चे और गर्भवती व धात्री महिलाएं शामिल होने के लिए आती हैं. आशा ललिता देवी और सेविका कंचन कुमारी ने भी टीकाकरण अभियान में अपना सहयोग दिया.
गोपालपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुधांशु कुमार ने कहा कि बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सरकार टीकाकरण अभियान चलाया जाता है. यही वजह है कि इस अभियान को कोरोना काल में भी जारी रखा गया है. एएनएम, आशा व सेविका सावधानी बरतते हुए बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीके लगा रही हैं. साथ ही इनलोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं.
इसलिए जरूरी है टीकाकरण:
टीकाकरण का तत्काल लाभ है व्यक्ति की प्रतिरक्षा. यह किसी रोग के खिलाफ दीर्घकालिक, कभी-कभी जीवन भर सुरक्षा प्रदान करता है. शुरुआती बाल्यावस्था प्रतिरक्षा अनुसूची में अनुशंसित टीके बच्चों को खसरा, चेचक, न्यूमोकोकल रोग और अन्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. बच्चे ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं, अतिरिक्त टीके उन्हें उन रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं जो किशोरों और वयस्कों को प्रभावित करते हैं. साथ ही उन रोगों से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं जो दूसरे क्षेत्रों में यात्रा करने के दौरान उत्पन्न हो सकते हैं.
टीके से बच्चों की होती है सुरक्षा: टीका एक जीवनरक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है. टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें. बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है. संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है.
नियमित टीकाकरण कई तरह की बीमारियों से होता है बचाव: शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के रूटीन इम्यूनाइजेशन, उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है. साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके. बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है.
टीकाकरण के ये फायदे भी है
-रोग प्रतिरक्षण विकसित होता है और उनकी रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ती है
-टीकाकरण से बच्चों में कई संक्रामक बीमारियों की वक्त रहते रोकथाम हो जाती है
-कुछ टीके गर्भवती महिलाओं को भी लगाए जाते हैं, जिससे उन्हें व होने वाले शिशु को टिटनस व अन्य गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके.

डायरिया नियंत्रण, कृमि मुक्ति एवं विटामिन ए अनुपूरण पर संयुक्त रूप से चलेगा पखवाड़ा 

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• राज्य स्तरीय वेबिनार में पखवाड़े के क्रियान्वयन को लेकर हुयी विस्तृत चर्चा
• 16 सितंबर से 29 सितंबर तक चलेगा पखवाड़ा
• अंतर्विभागीय सहयोग से पखवाड़े को सफ़ल करने की अपील
• आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता देंगी पखवाड़े में महत्वपूर्ण योगदान
 भागलपुर/ 25, अगस्त: कोरोना संक्रमण काल में कई स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं. यद्यपि, कोरोना रोकथाम के साथ इन स्वास्थ्य कार्यक्रमों को नियमित करने में राज्य के समस्त स्वास्थ्य कर्मीयों की भूमिका काफ़ी अहम रही है. संक्रमण के कारण स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गति में आयी कमी को पुनः कायम करने के लिहाज से 16 सितंबर से 29 सितंबर तक सघन डायरिया नियंत्रण कार्यक्रम, कृमि मुक्ति कार्यक्रम एवं विटामिन ए अनुपूरण पखवाड़े का संयुक्त रूप से आयोजन किया जा रहा. उक्त बातें राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने मंगलवार को आयोजित राज्य स्तरीय वेबिनार में कही.
कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि बिहार में नवजात मृत्यु दर एवं अंडर-5 (5 साल के कम उम्र के बच्चे) मृत्यु दर में कमी आयी है. लेकिन अभी भी वांछित कमी नहीं हो सकी है. इस दिशा में इन तीनों कार्यक्रमों का एक साथ आयोजन एक सकारात्मक पहल साबित होगा. उन्होंने बताया कि इन तीनों कार्यक्रमों के एक साथ आयोजन करने से अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा बेहतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी. कोरोना संक्रमण काल में आशा द्वारा घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई जा रही है. इन तीनों कार्यक्रमों को एक साथ आयोजित करने से आशा गृह भ्रमण के दौरान ही कार्यक्रम से संबंधित सेवाएं भी प्रदान कर सकेगी. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के मद्देनजर आशाएं एलबेंडाजोल की दवाओं को चूरकर अपने सामने अभिभावक द्वारा खिलाया जाना सुनिश्चित कराएगी.  उन्होंने तीनों कार्यक्रमों में सम्मिलित विभागों एवं सहयोगी संस्थाओं से कार्यक्रम को सफ़ल बनाने की भी अपील की.
पांच साल से कम आयु वर्ग में होने वाले कुल मौतों में 9.2% बच्चों की डायरिया से होती है मौत:
राज्य शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. वीपी राय ने बताया कि पाँच साल से कम आयु वर्ग में होने वाले कुल मौतों में 9.2% बच्चों की मृत्यु डायरिया के कारण हो जाती है. इस लिहाज से 16 सितंबर से 29 सितंबर तक चलने वाला सघन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा काफ़ी महत्वपूर्ण साबित होगा. उन्होंने बताया कि पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य डायरिया से होने वाली मौतों को शून्य करना है. डायरिया से होने वाले सभी मौतों को ओआरएस एवं जिंक की सहायता से रोका जा सकता है. इसलिए पखवाड़े के दौरान ओआरएस एवं जिंक के प्रयोग को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जायेगा. उन्होंने बताया डायरिया से सुरक्षा, इसकी बेहतर रोकथाम एवं ईलाज के जरिए डायरिया से होने वाली मौतों पर लगाम लगायी जा सकती है. उन्होंने डायरिया से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए 6 माह तक केवल स्तनपान, 6 माह के बाद संपूरक आहार की शुरुआत एवं विटामिन ए अनुपूरण को महत्वपूर्ण बताया. वहीं टीकाकरण( मीजिल्स टीका एवं रोटावायरस), साबुन से नियमित हाथ साफ़ करने, शौच के लिए शौचालय का इस्तेमाल करना एवं एचआईवी से सुरक्षा को डायरिया के रोकथाम के लिए उपयोगी बताया. डायरिया के उपचार के लिए उन्होंने ओआरएस एवं जिंक के इस्तेमाल को सबसे प्रभावी बताया. उन्होंने बताया कि सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़े में केयर इण्डिया, पिरामल फाउंडेशन एवं यूनिसेफ द्वारा सहयोग किया जा रहा है. साथ ही आईसीडीएस, शिक्षा विभाग एवं पंचायती राज आदि विभाग भी इसे सफ़ल बनाने में सहयोग करेंगे.
वर्ष 2030 तक अंडर-5 मृत्यु दर को 25 एवं नवजात मृत्यु दर को 12 करने का लक्ष्य:
यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सैय्यद हुबे अली ने बताया एसडीजी( सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल) लक्ष्य के मुताबिक बिहार को वर्ष 2030 तक अंडर-5 (पांच साल से कम आयु के बच्चों) मृत्यु दर को 25 एवं नवजात मृत्यु दर(प्रति 1000 जीवित जन्म) को 12 करने का लक्ष्य प्राप्त है. इस लिहाज से लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य को प्रतिवर्ष 5.9% की कमी लानी होगी, जो अभी फिलाहल राज्य में नहीं है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बच्चों एवं नवजातों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए टीकाकरण, नवजातों में संक्रमण की रोकथाम , स्तनपान को बढ़ावा, बेहतर साफ़-सफाई, विटामिन ए अनुपूरण एवं दस्त नियंत्रण काफी प्रभावी है.
कृमि मुक्ति के लिए 3.8 करोड़ दवाएं हुयी प्राप्त:
वेबिनार के दौरान बताया गया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 16 सितम्बर से 29 सितम्बर तक राज्य के 25 जिलों में 1 साल से 19 साल तक के बच्चों को एलबेंडाजोल की दवा दी जाएगी. इसके लिए एलबेंडाजोल की 3.8 करोड़ दवाएं बीएसएमआईसीएल से प्राप्त हुयी है. साथ ही गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 9 माह से 5 वर्ष तक के उम्र के बच्चों को विटामिन ए सिरप की खुराक पिलाना भी सुनिश्चित करेगी. इसके लिए आशा पहले विटामिन ए सिरप के साथ उपलब्ध चम्मच में खुराक डालने के बाद उक्त लाभार्थी के चम्मच में खुराक डालकर संबंधित परिवार के द्वारा ही चम्मच से बच्चों को अनुपूरण सुनिश्चित कराएगी.

हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को दिया जाएगा मोबाइल ऐप का प्रशिक्षण 

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– विभाग द्वारा लांच किया गया है एचडब्ल्यू- सी मोबाइल एप
-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
-जूम एप के माध्यम से दिया जाएगा ऑनलाइन प्रशिक्षण
लखीसराय, 25 अगस्त, 2020
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत भारत सरकार का अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को ऑनलाइन मोबाइल ऐप का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग द्वारा इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है एवं प्रशिक्षण का सफल संचालन के लिए  विभाग द्वारा एक एप लांच किया गया है। जिसका नाम एचडब्ल्यू- सी मोबाइल एप दिया है। ज़ूम एप के माध्यम से उक्त सेंटर के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को तिथि एवं प्रमंडलवार प्रशिक्षण देने की तैयारी है। ताकि उक्त सेंटर का सभी कार्य पेपर लेस संचालन हो सके। इसको लेकर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ एके शाही ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है। जिसमें कहा है कि एचडब्ल्यू सी मोबाइल ऐप के बारे में सभी चिकित्सा कर्मियों जैसे- चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, एएनएम, स्टाफ नर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रखंड मूल्यांकन एवं अनुश्रवण  सहायकों को इसके विषय में जूम एप के प्लेटफार्म पर ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। जारी पत्र में यह भी कहा गया है कि  विगत दिनों एचडब्लू सी मोबाइल ऐप विकसित किया गया है। जिसको एंड्राइड मोबाइल में डाउनलोड कर सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के पदाधिकारियों एवं कर्मियों द्वारा ही उपयोग किया जाएगा। मुंगेर प्रमंडल में 28 अगस्त को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पेपरलेस कार्य कर रही है एएनएम
हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर तैनात एएनएम अब पेपर लेस कार्य कर रही है। एएनएम को भी तकनीक से लैस किया गया है। एएनएम को एनसीडी(गैर संचारी रोग) एप के बारे में विस्तार से बताया गया है। अगर परिवार में किसी को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, यक्ष्मा (टीबी) या कैंसर हुआ है, तो उस घर के युवकों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है। प्रशिक्षित आशा को एक सी-बैक फॉर्मेट दिया जाता है,  जिसे वह भरती है।
रजिस्टर संभालने से  मुक्ति
स्वास्थ्य योजनाओं की गाँव में क्या-क्या प्रगति हो रही है इसकी एक रिपोर्ट एएनएम बनाती है। इस पूरी रिपोर्ट को एक रजिस्टर में दर्ज कर स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है । ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत अब सारी जानकारी स्क्रीन पर उपलब्ध रहती है। टेबलेट में ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन डाटा दर्ज करने  की सुविधा भी उपलब्ध है।
हर जानकारी टेबलेट में दर्ज
ब्लड प्रेशर, शुगर तथा कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की हेल्थ एंड वैलनेस सेंटरों पर एक फैमिली फोल्डर बनेगी। जन आरोग्य प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटरों में उसके पोषक क्षेत्र के परिवारों की फैमिली फोल्डर तैयार की जाएगी और रखा जायेगा।
आशा बनाती है फैमिली हेल्थ फोल्डर
समुदाय स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं द्वारा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर क्षेत्र के सभी लोगों का सर्वेक्षण किया जाता है। सभी परिवारों के लिए फैमिली हेल्थ फोल्डर विकसित किया जाता है, जिसमें 30 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के सभी स्त्री-पुरुष का सीबैक (कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट) फार्म के जरिए गैर संचारी रोगों हेतु रिस्क असेसमेंट किया जाता है।

प्लाज्मा तकनीक से कोरोना मरीजों के इलाज की तैयारी तेज

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इलाज की रूपरेखा तय करने के लिए मंगलवार को बैठक की गई
इलाज शुरू करने को आईसीएमआर से ली जाएगी इजाजत
भागलपुर, 25 अगस्त
कोरोना मरीजों के प्लाज्मा तकनीक से इलाज करने की कवायद तेज हो गई है. इसे लेकर जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक आयोजित की गई. बैठक में इलाज की रूपरेखा तय की गई. कोरोना मरीजों का प्लाज्मा तकनीक से कैसे इलाज हो और उसके लिए कौन-कौन से संसाधन विकसित करने हैं, इस पर भी बैठक में चर्चा हुई. प्लाज्मा तकनीक से कोरोना मरीजों के इलाज में अस्पताल स्थित ब्लड बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण है. इसलिए ब्लड बैंक का अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा. साथ ही प्लाज्मा तकनीक से जल्द इलाज शुरू करने के लिए आईसीएमआर से इजाजत जल्द लेने पर भी सहमति बनी.
जेएलएनएमसीएच के प्राचार्य डॉ. हेमंत सिन्हा ने बताया कि अब जल्द ही अस्पताल में प्लाज्मा तकनीक से कोरोना मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा. इसे लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है. उन्होंने बताया कि जेएलएनएमसीएच में प्लाज्मा तकनीक से इलाज के लिए जरूरी मशीन इंस्टॉल कर दी गई है. साथ ही कर्मियों की तैनाती को लेकर रोस्टर बनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. उम्मीद है कि दो-चार दिनों के अंदर प्लाज्मा तकनीक से कोरोना मरीजों का इलाज होने लगेगा.
अबतक 50 से अधिक लोगों ने प्लाज्मा दान करने की दी सहमति: घंटाघर स्थित कोविड केयर सेंटर में तैनात डॉ. अमित कुमार शर्मा बताते हैं कि स्वस्थ हुए लोगों में से अब तक कुल 50 से अधिक लोगों ने अपने-अपने प्लाज्मा दान करने की सहमति प्रदान की है. इन लोगों के नाम, पता व मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज किया जा चुका है, ताकि प्लाज्मा की जरूरत पड़ने पर इन लोगों को जेएलएनएमसीएच के ब्लड बैंक तक पहुंचाकर प्लाज्मा दान कराया जा सके.
एक व्यक्ति के प्लाज्मा से बचेगी चार कोरोना मरीजों की जान: प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज बहुत ही कारगर साबित हो रहा है. अभी पटना के एम्स व आईजीआईएमएस में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना इलाज चल रहा है. कोरोना डेडिकेटेड मायागंज अस्पताल के नोडल प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा बताते हैं कि कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए एक व्यक्ति द्वारा दिये गये प्लाज्मा दान से चार कोरोना मरीजों की जान बचायी जा सकेगी. कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए लोगों में कोरोना संक्रमण के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित हो चुकी होती है. उसी एंटीबॉडी को प्लाज्मा के जरिये कोरोना मरीजों को चढ़ाया जायेगा, ताकि वे कोरोना से जल्दी ठीक हो सकेंगे. अगर इस थेरेपी का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हुआ तो जिले में हर रोज कम से कम 25 यूनिट प्लाज्मा की जरूरत होगी.