कंटेनमेंट जोन को कोरोना मुक्त बनाने में जुटा स्वास्थ विभाग

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-कोविड-19 जाँच की तेज की रफ्तार, 100 लोगों का एक दिन में हो रही जाँच
-गाँव-गाँव लगा रहे हैं कोविड-19 जाँच शिविर
लखीसराय, 25अगस्त, 2020
जिले के कंटेनमेंट क्षेत्र को कोरोना मुक्त बनाने में स्वास्थ्य विभाग पूरी मुस्तैदी से जुट गया है। इसके लिए प्रतिदिन 100 लोगों के सैंपल कंटेनमेंट जोन से लिए जा रहे हैं एवं तिथि निर्धारित कर गाँव-गाँव जाकर कोविड-19 जाँच शिविर लगाए जा रहे हैं। जहाँ हर जरूरतमंद लोगों का पूरी सुरक्षा के साथ जाँच किया जा रहा है। जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि विभाग की ओर से कंटेनमेंट जोन में अभियान तेज करने को कहा गया है। इसी के तहत प्रतिदिन 100 लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके लिए एक टीम बनाई गई है, जिसमें डॉक्टर और अन्य कर्मी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य प्रतिदिन कंटेनमेंट जोन के एक क्षेत्र में शिविर लगाकर 100 लोगों के सैंपल लेते हैं। जिसकी रिपोर्ट निगेटिव रहती है, उन्हें  घर भेज दिया जाता है और जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव रहती है, उसे कोविड केयर सेंटर में भर्ती कर दिया जाता है। वहीं गंभीर मरीज को आईसीयू में भर्ती किया जाता है।
होम आइसोलेशन में जाने वाले को दिया जाता है किट
जांच के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को होम आइसोलेशन भेजते वक्त स्वास्थ्य विभाग का किट उपलब्ध कराया जाता है। किट में दवा दी जाती है, जिसका सेवन मरीज को घर में रहते हुए करना होता है। साथ ही होम आइसोलेशन में बरती जाने वाली सावधानी से भी मरीज को आगाह किया जाता है। किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीज को डॉक्टर से संपर्क करने के लिए कहा जाता है।
जांच बढ़ने से कोरोना मरीजों की पहचान हुई आसान
जिले में कोरोना की जांच बढ़ने से इसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी। जांच के बाद लोगों को पता चल जाएगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। संक्रमितों की पहचान होने से संक्रमण प्रसार पर रोक भी लग सकेगा। वहीं चिह्नित मरीज भी होम आइसोलेशन में रहकर खुद को स्वस्थ कर पाएंगे।
सरकारी गाइडलाइन का किया जा रहा पालन
जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोरोना मरीजों की जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लब्स के साथ पीपीई कीट पहनकर ही मरीजों की जांच कर रहे हैं।  इसे लेकर पूरी व्यवस्था की गई है। इलाज के दौरान मरीज तो सामाजिक दूरी का पालन कर ही रहे हैं। साथ में स्वास्थ्य कर्मी भी इसका ध्यान रख रहे हैं।
 इन बातों का रखें ख्याल:
-मुंह ढके बिना न छीकें। खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
-अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में दिक्कत जैसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। डॉक्टर्स से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
-अगर आप कोरोना वायरस का शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
-अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं. यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
-सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।

गर्भवती महिलाओं को भयभीत न हो कर कोविड-19 संक्रमण के सुरक्षा नियमों को अपनाने की है जरूरत

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– सकारात्मक सोच गर्भवती व गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए है जरूरी
– व्यक्तिगत साफ सफाई व श्वसन स्वच्छता का रखना है अधिक ध्यान
बांका, 25 अगस्त
कोविड 19 का व्यापक असर गर्भवती महिलाओं पर भी हुआ है. कोरोना संक्रमण का शिकार गर्भवती महिलाएं भी हुईं हैं. इस वजह से गर्भवती महिलाओं के मन में कोरोना वायरस को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. जैसे कि क्या गर्भावस्था में कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है या अगर मां को कोरोना वायरस है तो क्या होने वाला बच्चा भी इसका शिकार हो सकता है.
इस संबंध में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को कोरोना से उतना ही खतरा है जितना कि आमलोगों को. गर्भवती महिलाओं को भयभीत न हो कर सुरक्षा के नियमों को अपनाने की जरूरत है. उनकी सकारात्मक सोच उनके व गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. साथ ही इस दौरान उन्हें विशेष रूप से व्यक्तिगत साफ-सफाई व श्वसन स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए.
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की जरूरत:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि यदि गर्भवती महिला कोविड 19 उपचाराधीन हैं तो उन्हें इस रोग से बचाव के प्रति गंभीर होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की जरूरत है. कोविड-19 उपचाराधीन गर्भवती को यदि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, श्वसन रोग या अन्य कोई गंभीर रोग नहीं है तो उनमें रोग का असर बहुत अधिक नहीं होता है. डॉ. चौधरी कहते हैं कि गर्भवस्था के पहले या दूसरे माह के दौरान संक्रमण की पुष्टि होने पर सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए आवश्यक टीकाकरण, पौष्टिक खानपान व प्रसव पूर्व आवश्यक जांच को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर टेलीकंसल्टेशन लिया जा सकता है.
नवजात में वायरस का खतरा नहीं:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि गर्भवती महिलाएं गर्भस्थ शिशु के कोरोना संक्रमण को लेकर बहुत अधिक चितिंत नहीं हो. अभी तक मेडिकल रिसर्च द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की गयी है. साथ ही मां के दूध में भी ये वायरस नहीं पाया गया है. इसलिए बच्चों को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. बच्चे को छूने से पहले और बाद में हाथों को साबुन से 40 सेंकेंड तक अवश्य धोंये. ऐसी महिलाओं द्वारा अपने शिशुओं को स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. स्तनपान कराने के दौरान वे मास्क लगायें. शिशु के सामने खांसने और छींकने से बचें. विशेष परिस्थिति में स्तनपान के लिए स्तन से दूध निकाल कर कटोरी चम्मच की मदद से शिशु को दिया जा सकता है. इसके लिए किसी अभ्यस्त स्वस्थ्य महिला का सहयोग लिया जाना चाहिए.
गर्भवती महिलाएं ऐसे रहें सावधान:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए गर्भवती महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. बीमार या बाहर से आए लोगों से दूरी रखना चाहिए. घर पर ही रहें, भीड़ वाली जगहों पर नहीं जाना चाहिए. श्वसन से जुड़ी स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए. समय-समय पर हाथ धोते रहना चाहिए. गंदे हाथों से चेहरे को बिल्कुल नहीं छूना चाहिए. सावधान रहना चाहिए लेकिन घबराना नहीं चाहिए घबराने से तनाव बढ़ता है जो कि गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं है.

सही पोषण रोगों से बचाव करने में सहायक, मौसमी बीमारियों से रहें सतर्क 

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• साफ़-सफाई का रखें विशेष ख्याल
• रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों को करें आहार में शामिल
लखीसराय, 24 अगस्त, 2020
कोविड-19 के साथ लगातार बदल रहें मौसम के कारण मौसमी बीमारियों की भी संभावना बढ़ गई है। इसलिए कोरोना के साथ इससे बचने के उपायों पर भी ध्यान देने की जरूरत है. इस दौरान किशोर व युवा को भी अपने पोषण का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। सही पोषण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होती है, जो मौसमी बीमारियाँ से हमें सुरक्षा प्रदान करती है. साथ ही संतुलित दिनचर्या भी मौसमी रोगों से बचाव में प्रभावी होती है.
पौष्टिक आहार का करें सेवन:
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया बदलते मौसम में कई तरह के मौसमी बीमारियाँ की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें एलर्जी, सर्दी-खाँसी एवं  बुखार सहित कई मच्छर जनित रोग भी शामिल है. इसलिए इससे बचाव के लिए हरी सब्जी, दाल, साग एवं अन्य पौष्टिक आहार का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। बच्चों के सही पोषण का उनके माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों को विशेष ख्याल रखना चाहिए और ससमय उन्हें तजा और पौष्टिक खाना खिलाना चाहिए. साथ ही मच्छरजनित रोग जैसे डेंगू, चिकनगुनिया एवं मलेरिया से बचाव के लिए घर में मच्छरदानी का प्रयोग करें. घर के अंदर पानी जमा नहीं होने दें. घर के आस-पास भी साफ़-सफाई पर ध्यान दें ताकि मच्छरो के पनपने से रोका जा सके.
विटामिन एवं प्रोटीन का भी रखें ख्याल:
मौसमी बीमारी से बचाव के लिए हर दिन समय पर खाना खाएं और पर्याप्त मात्रा में उचित व शुद्ध पानी का सेवन करें। हरी सब्जियों के साथ मौसमी फ़ल के सेवन से शरीर में विटामिन की जरूरत पूरी होती है. साथ ही दाल, सोयाबीन एवं मूंगफली के सेवन से शरीर में प्रोटीन की मात्रा भी संतुलित होती है. इससे रोगों से लड़ने में सहायता मिलती है.
डायरिया से बच्चों को बचाएं:
बरसात के मौसम में डायरिया का भी खतरा बढ़ जाता है.विशेषकर बच्चों में डायरिया खतरनाक भी साबित हो सकता है. इसके लिए घर में शुद्ध पान का सेवन करें. नवजात बच्चों को 6 माह तक केवल स्तनपान करायें. बाहर से पानी भी नहीं दें, नहीं तो बच्चे में संक्रमण फ़ैल सकता है. नियमित स्तनपान नवजात शिशुओं को डायरिया से बचाव करता है.  घर में ओआरएस का पैकेट रखें एवं डायरिया होने पर बच्चे को दिन में कई बार ओआरएस का घोल पिलायें.
इन चीजों से करें परहेज :
• -तली हुई वस्तुओं व देर तक रखे भोजन से परहेज करना चाहिए।
• -बाजार में बिकने वाले कटे फलों, दूषित आइसक्रीम व चाट से दूरी बनाए रखें।
• -संक्रमण वाली जगहों या जहां पर पर साफ -सफाई नहीं हो वहा खाना खाने से बचना चाहिए।
• -घर के आसपास गंदगी जमा नहीं होने दें।
• -संक्रमण वाले स्थानों से दूर रहें।
• -बासी खाना तथा गंदा पानी न पीएं।
• -खुले में बेचे जाने वाले व असुरक्षित तरीके से परोसे भोजन लेने में सावधानी बरतनी चाहिए।

कालाजार उन्मूलन को लेकर 25 से होगा सर्वे

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– सदर प्रखंड के शासन गांव में चलेगा अभियान
– आशा कार्यकर्ता घर- घर जाकर करेंगी सर्वे
 बांका, 24 अगस्त
कोविड-19 के साथ-साथ कालाजार की रोकथाम व इसके सौ फीसदी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है. वैसे तो बांका जिला कालाजार मुक्त है, लेकिन सदर प्रखंड के शासन गांव में कुछ लोगों में कालाजार के लक्षण होने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिली है. इसे लेकर विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसके तहत  25 अगस्त से आशा कार्यकर्ता गांव के घर-घर में जाकर लोगों का स्वास्थ्य सर्वे कार्य करेंगी. साथ ही इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी गांव में नली, नालों व घरों की दीवार पर सिंथेटिक पाइराथाइराइड का छिड़काव भी करेंगे.
घर के पास जलजमाव नहीं होने दें: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि प्रभावित प्रखंड के गांव में एक सप्ताह तक अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के दौरान गांव के हर एक घरों में छिड़काव भी किया जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि बीमारी से बचाव के लिए घर के आसपास जलजमाव नहीं होने दें. यदि जलजमाव की स्थिति है तो उसमें किरासन तेल डालें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं. साथ ही बच्चों को पूरा कपड़ा पहनाने व शरीर पर मच्छर रोधी क्रीम लगाने के लिए भी कहा है. कालाजार के खतरे को देखते हुए अपने घरों की भीतरी दीवारों और बथानों में कीटनाशक का छिड़काव करने व आसपास के हिस्से को सूखा व स्वच्छ रखने के लिए कहा है.
केयर की टीम कर रही सहयोग: केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने कहा कि बांका जिले में  कालाजार के मामले बहुत ही कम मिले हैं. जिला को लगभग कालाजार मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन अभी सदर प्रखंड के शासन गांव में कुछ लोगों में संक्रमण की सूचना मिली है, इसे लेकर हमलोगों ने यह तैयारी की है. जिसके लिए प्रभावित प्रखंड के गांव में अभियान चलाया जाएगा. इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी घर घर जाकर लोगों में की स्वास्थ्य जांच करेंगे. अगर किसी को बुखार या अन्य बीमारी है तो उसे सूची बद्ध किया जाएगा  तथा आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
कालाजार की ऐसे करें पहचान: कालाजार एक वेक्टर जनित रोग है. कालाजार के इलाज में लापरवाही से मरीज की जान भी जा सकती है. यह बीमारी लिश्मैनिया डोनोवानी परजीवी के कारण होता है. कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली बीमारी है. यदि व्यक्ति को दो सप्ताह से बुखार, और तिल्ली और जिगर बढ़ गया हो तो यह कालाजार के लक्षण हो सकते हैं. साथ ही मरीज को भूख न लगने, कमजोरी और वजन में कमी की शिकायत होती है. यदि इलाज में देरी होता है तो हाथ, पैर व पेट की त्वचा काली हो जाती है. बाल व त्वचा के परत भी सूख का झड़ते हैं. कालाजार के लक्षणों के दिखने पर रोगी को तुरंत किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए

आज से प्रतिदिन 600 लोगों की होगी कोरोना जांच

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जेएलएनएमसीएच में एक अतिरिक्त मशीन की गयी इंस्टॉल
जांच बढ़ने से कोरोना की रोकथाम में मिलेगी मदद
भागलपुर, 21 अगस्त
कोरोना के संक्रमण की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है. इस दिशा में विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. शनिवार से जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में अब प्रतिदिन 600 लोगों की जांच होगी. प्राचार्य डॉक्टर हेमंत कुमार सिन्हा ने बताया कि जांच में तेजी लाने के उद्देश्य से आरटीपीसीआर मशीन को ठीक करा लिया गया है. वहीं पुरानी मशीन को भी इंस्टॉल करा लिया गया है. लैब में पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती कर दी गई है. एक ही अस्पताल में प्रतिदिन इतनी संख्या में लोगों की जांच होने से कोरोना की रोकथाम में मदद मिलेगी.
जिले में युद्धस्तर पर चल रही है जांच: सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, रेफरल अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित जिले के सभी 22 सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन 4000 लोगों की जांच हो रही है. स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव घूमकर लोगों की कोरोना जांच के लिए सैंपल ले रहे है. कंटेनमेंट जोन में शिविर लगाकर लोगों की कोरोना जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं. साथ ही स्वास्थ्यकर्मी एंटीजन किट से सैंपल की आधे घंटे में जांच कर लोगों को रिपोर्ट दे दे रहे हैं.
जांच बढ़ने से कोरोना के संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद: सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि जिले में कोरोना की जांच बढ़ने से संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी. जांच के बाद लोगों को पता चल जाएगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं. वहीं चिह्नित मरीज भी होम आइसोलेशन में रहकर खुद को स्वस्थ कर पाएंगे. मरीज के गंभीर होने पर उसे कोविड केयर सेंटर या फिर मायागंज अस्पताल में भर्ती किया जाएगा.
सरकारी गाइडलाइन का किया जा रहा है पालन: जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है. स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लब्स के साथ पीपीई किट पहनकर ही लोगों की जांच कर रहे हैं. जांच के दौरान स्वास्थ्य कर्मी एक दूसरे से 6 मीटर की दूरी का ध्यान रख रहे हैं इसे लेकर पूरी व्यवस्था की गई है.
इन बातों का रखें ख्याल:
व्यक्तिगत स्वच्छता और किसी से बातचीत के दौरान 6 फीट की शारीरिक दूरी का रखें ख्याल
नियमित रूप से शौचालय का उपयोग और साफ-सफाई करें
दिन में कई बार अच्छी तरह हाथ साफ करें
सार्वजनिक जगहों पर न थूकें
 पानी को साफ जगह पर और सुरक्षित रूप से रखें
हमेशा मास्क का उपयोग करें
लोगों से हाथ मिलाने से बचें
अपनी आंख, नाक,और मुंह को न छुएं
अनावश्यक यात्रा ना करें
समूह में ना बैठे तथा बड़े समारोह में भाग ना लें
सामूहिक भीड़-भीड़ वाले जगह पर ना जाएं

जागरूकता बढ़ी तो लोग होम आइसोलेशन को दे रहे तरजीह

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लकड़ीकोला स्थित कोविड केयर सेंटर में सिर्फ 3 मरीज हैं भर्ती
14 दिनों तक सावधानी से रहने पर होम आइसोलेशन में मरीज हो रहे स्वस्थ
बांका, 21 अगस्त
कोरोना को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रम का असर अब दिखने लगा है. जागरूकता कार्यक्रम से लोगों में यह विश्वास पनपा है कि घर में रहते हुए हम कोरोना को मात दे सकते हैं. यही कारण है कि लोग अब लकड़ीकोला स्थित कोविड केयर सेंटर में भर्ती होने के बजाय होम आइसोलेशन में रहना पसंद कर रहे हैं. जागरूकता का एक फायदा यह भी हुआ है कि पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मरीज भी कम मिल रहे हैं. सदर अस्पताल के मैनेजर अमरेश कुमार कहते हैं कि होम आइसोलेशन में जाने वाले मरीजों को एक किट दिया जाता है जिसमें दवा, मास्क सहित मरीजों के लिए जरूरी सामान होते हैं. साथ में टेलीफोन से बीच-बीच में मरीजों की सेहत के बारे में जानकारी भी ली जाती है. अगर मरीज होम आइसोलेशन में भी सतर्कता से रहें तो आसानी से ठीक हो सकते हैं.
हालांकि 14 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहने के दौरान कोरोना उपचाराधीन व्यक्ति को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी. बांका शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि निश्चित तौर पर जागरूकता कार्यक्रम का असर लोगों पर पड़ रहा है. अब बाजार में भी लोग मास्क पहने देखे जा रहे हैं. शारीरिक दूरी का भी लोग पालन कर रहे हैं. लोगों में कोरोना को हराने के प्रति विश्वास बढ़ा है. यही वजह है कि लोग होम आइसोलेशन को तरजीह दे रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. होम आइसोलेशन के दौरान घर में उपचाराधीन व्यक्ति के लिए अलग हवादार कमरा और टॉयलेट होना अनिवार्य है. अगर ऐसा नहीं हैं, तो आप इसकी जानकारी अपने डॉक्टर को जरूर दें, ताकि अस्पताल में कोविड केयर सेंटर में आपके लिए व्यवस्था की जा सके. कोरोना उपचाराधीन व्यक्ति की देखभाल के लिए एक व्यक्ति का होना बेहद जरूरी है. अगर परिवार का कोई सदस्य या बुजुर्ग जिनकी उम्र 55 साल से ज्यादा है या घर में कोई गर्भवती महिला या फिर गंभीर बीमारी से जूझ रहा कोई मरीज है, तो उपचाराधीन व्यक्ति के ठीक होने तक उनको किसी रिश्तेदार के घर ठहराने की व्यवस्था करें.
हमेशा मास्क का इस्तेमाल करें:
होम आइसोलेशन में रहने के दौरान हमेशा मास्क का इस्तेमाल करें और 8 घंटे उपयोग के बाद सही से निस्तारण कर दें. अगर मास्क गीला या गंदा हो जाता है, तो उसको तुरंत बदल दें. ऐसा करने से आप तो सुरक्षित रहेगे ही. घर के अन्य सदस्य भी सुरक्षित रहेंगे. इसलिए घर पर रहते वक्त भी मास्क का इस्तेमाल हर हाल में करें.
एक ही कमरे में रहें: होम आइसोलेशन के दौरान अपने कमरे में ही रहें और घर के दूसरे कमरों में न जाएं. साथ ही दरवाजे, टेबल जैसी चीजों को छूने से बचें, जिससे घर के अन्य सदस्यों के संक्रमण की चपेट में आने का खतरा न रहे. कोरोना मरीज अपने कमरे की खिड़कियां हमेशा खुली रखें और अलग टॉयलेट का इस्तेमाल करें. अपने हाथों को साबुन से कम से कम 40 सेकंड तक अच्छे से धोएं या सेनिटाइजर से साफ करते रहें. घर के दूसरे सदस्यों से अपनी निजी वस्तुओं यानि कपड़े, बर्तन समेत अन्य चीजों को साझा न करें.
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का सेवन करें: उपचाराधीन व्यक्ति होम आइसोलेशन के दौरान डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा को नियमित रूप से लेते रहें. अगर आप किसी अन्य बीमारी की दवाएं लेते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें. उपचाराधीन व्यक्ति  रिकवरी पीरियड के दौरान धूम्रपान न करें. साथ ही भरपूर आराम करें और शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें. इसके लिए सूप, जूस और पानी आदि लेते रहें. भोजन के साथ फलों का सेवन करें.
टीवी देखकर समय गुजारें: होम आइसोलेशन के दौरान उपचाराधीन व्यक्ति मोबाइल और अन्य ऑनलाइन माध्यम से अपने परिजनों और करीबियों से बातचीत करते रहें. इस दौरान टीवी देखकर और कंप्यूटर में काम करके भी समय गुजारा जा सकता है. इससे मन भी लगेगा और मानसिक तौर पर भी स्वस्थ रहेंगे.
परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें: अगर होम आइसोलेशन के दौरान उपचाराधीन व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है या फिर छाती में लगातार दर्द व दबाव होता है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें. मानसिक भ्रम होने या फिर होठों व चेहरों के नीले पड़ने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें. साथ ही कोरोना मरीज की देखरेख करने वाले को भी पूरी सावधानी बरतनी चाहिए

क्षेत्र भ्रमण कर लोगों को जागरूक कर रहें अनिल 

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लखीसराय, 21अगस्त, 2020
कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौर में जन-जागरूकता सबसे अहम भूमिका अदा कर रही है. कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों को सफल बनाने में स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका को दरकिनार नहीं किया जा सकता है. ऐसे मुश्किल दौर में लोगों को सेवा देने वाले लोगों की सूची भी काफ़ी लम्बी है. लखीसराय पीएचसी के स्वास्थ प्रबंधक अनिल कुमार भी उन्हीं कोरोना योद्धाओं में एक हैं, जो कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही लोगों को कोरोना के प्रति जागरुक करने की मुहिम चला रहे हैं. वह ना सिर्फ पीएचसी से संबंधित सभी कार्यों का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं,  बल्कि कोविड-19 से संबंधित भी आवश्यक कार्यों में पूरी भी उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। वह क्षेत्रीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कोरोना बचाव के प्रति जागरूक करने के साथ अपने क्षेत्र का भ्रमण कर आमलोंगो को भी बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारी दे रहे हैं।
व्यक्तिगत जानकारी पर देते हैं ध्यान:
जिले में कोरोना संक्रमण की शुरुआत से ही अनिल क्षेत्र भ्रमण कर समुदाय को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे हैं. अनिल कहते हैं कोरोना संक्रमण के शुरूआती दौर में गाँव के लोगों में संक्रमण के प्रति जागरूकता कम थी. कई सामाजिक भ्रांतियों के कारण लोग कोरोना संक्रमण की बात को आसानी से स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. लेकिन वक्त के साथ कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले एवं समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा चलाये जाने वाले जागरूकता अभियान से लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिला. अब लोगों के मन में कोरोना संक्रमण की गंभीरता को लेकर संशय खत्म हो रहा है. लोग यह मानने लगे हैं कि कोरोना एक गंभीर एवं जानलेवा बीमारी है. इसके कारण लोग कोरोना से बचाव के उपायों को भी गौर से सुनने लगे हैं. उन्होंने बतया क्षेत्र भ्रमण के दौरान वह लोगों को शारीरिक-दूरी, मास्क का सही इस्तेमाल एवं हाथों की सफ़ाई जैसे महत्वपूर्ण उपायों पर चर्चा करते हैं. इसके लिए वह कई लोगों को व्यक्तिगत तौर पर भी जानकारी देते हैं.
जिम्मेदारियाँ ने दूर कर दिया भय:
स्वास्थ प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया जब कोविड-19 का दौर शुरू हुआ था तो उस वक्त उन्हें भी क्षेत्र भ्रमण या लोगों से मिलने में भय लगता था. लेकिन एक स्वास्थ्य कर्मी होने के नाते कर्तव्य निर्वहन की जिम्मेदारी ने उनके मन से संक्रमण के भय को खत्म किया. इसके लिए उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचाव के सभी तरीकों का पालन करना शुरू किया, जिससे उन्हें अपनी जिमेम्दारियों को पूरा करने में आत्मबल भी मिला. उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण काल में उन्होंने अन्य जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान दिया, जिसमें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं शामिल थी. कुछ महीनों से दोहरी जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्हें यह एहसास हुआ कि यदि मन के अंदर सेवा भाव हो तो कई चुनौतियाँ आसन हो जाती है.
जिले में कोरोना योद्धा के रूप में हो रही पहचान
स्वास्थ प्रबंधक अनिल द्वारा कोविड-19 में दी जा रही अनवरत सेवा के कारण जिले में उनकी पहचान कोरोना योद्धा के रूप में हो रही है और स्वास्थ विभाग के अलावा अन्य विभागों के पदाधिकारी भी इनके कार्यों की सराहना कर रहे हैं।

वृद्धावस्था पेंशन योजना से वंचित वृद्ध अब ना करें चिंता,हर लोगों को मिलेगा लाभ 

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-मुख्यमंत्री वृद्धजन योजना में बीपीएल की नहीं होगी अनिवार्यता
-शेष पूर्व के ही नियमानुसार आवेदन होगा जमा
लखीसराय, 21अगस्त, 2020
वृद्धावस्था पेंशन योजना से वंचित वृद्ध को अब चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि सरकार ने उक्त योजना का लाभ लेने के बीपीएल परिवार का सदस्य होने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। दरअसल पूर्व उक्त योजना का लाभ लेने के बीपीएल परिवार सदस्य होना अनिवार्य था, जिसके कारण अधिकांश वृद्ध सरकार के हर मानक को पूरा करने के बाबजूद सिर्फ बीपीएल परिवार का सदस्य नहीं होने के कारण उक्त योजना का लाभ लेने से वंचित रह जाते थे। ऐसे में वृद्ध लोगों को भारी परेशानियाँ का सामना करना पड़ता था, जिसे देखते हुए सरकार ने बीपीएल की अनिवार्यता समाप्त कर परेशानियाँ को दूर कर दिया।
91239 लाभुकों को मिल रहा है लाभ
लखीसराय के सामाजिक सुरक्षा कोषांग के प्रभारी निदेशक प्रेमलता कुमारी ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न योजनाओं के तहत 91239 लाभुकों को लाभ मिल रहा है और लोगों को ससमय पेंशन राशि उपलब्ध कराने के लिए हमेशा प्रयासरत रहती हूँ। साथ ही राशि उपलब्ध कराने में आ रही परेशानियाँ को भी यथाशीघ्र दूर किया जाता है।
शेष मानक पूर्वानुसार ही रहेगा लागू
शेष नियम पूर्व के नियमानुसार ही लागू रहेगा, जैसे लाभ लेने वाले वृद्ध की उम्र 60 वर्ष हो, उनके पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, पासपोर्ट फोटो आदि कागजात संलग्न कर इंद्रिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना या मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना भरकर अपने स्थानीय ब्लाॅक में संचालित आरटीपीएस काउंटर पर जमा करना होगा।
ऑनलाइन भी भर सकते हैं फार्म
उक्त योजना का फार्म भरने के लिए प्रखंड कार्यालय जाना में दूरी,स्वास्थ समेत अन्य किसी भी प्रकार की परेशानियाँ हो तो ऐसे में चिंता करने की बात नहीं है, क्योंकि सरकार ने ऑनलाइन फार्म भरने की सुविधा उपलब्ध करा रखी है, आप अपने नजदीकी किसी कैफे या अगर घर मोबाइल, लैपटाॅप की सुविधा हो तो अपने घर बैठे भी उक्त सभी कागजात के साथ फार्म भर सकते हैं।
लोगों की सहायता के लिए इन मदों का हो रहा है संचालन
सरकार ने वृद्ध लोगों के अलावे अन्य जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए कई प्रकार के मद से लोगों पेंशन उपलब्ध करा रही है, जैसे कि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वृद्ध लोगों के लिए इंद्रिरा गाँधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, विधवा के लिए इंद्रिरा गाँधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना व लक्ष्मीबाई विधवा पेंशन योजना, विकलांग के लिए बिहार राज्य निःशसकक्ता पेंशन योजना आदि मद का संचालन हो रहा है। संबंधित व्यक्ति नियमानुसार आवेदन भर कर उक्त योजना का लाभ ले सकते हैं।

हजी सनाउल्लाह प्रमुख ईदारे शरिया एवं ब्रह्मकुमारी  वी. के. ज्योती ने दिए आपदा के समय संदेश 

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• वेबिनार के माध्यम से धर्मगुरुओं ने लोगों से की अपील
• बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण ने आपदा से निपटने पर की चर्चा
• बाढ़ और आपदा से निपटने में सहयोग करने की कही गयी बात
मुंगेर-
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, यूनिसेफ और बीआईएफसी (बिहार इंटर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन) ने बिहार में बाढ़ और आपदा से निपटने में धर्मगुरुओ की भूमिका पर एक वेबिनार का आयोजन किया. बाढ़ और आपदा के दौरान ख़ासतौर  से बच्चों एवं महिलाओ तक जानकारी और मदद पहुँचाने की जरूरत पर बल दिया गया.
वेबिनार की शुरुआत में यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने बीआईएफसी के बारे में संक्षिप्त रूप से बताते हुए कहा कि बीआईएफसी सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि देश का एक अनूठा मंच है जहाँ सभी धर्मों के प्रतिनिधि एक साथ बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यरत हैं और जागरूकता फैलाते हैं। आगे उन्होंने कहा कि “बीआईएफसी के चार सिद्धांत है – स्वैच्छिक मंच, सर्व धर्म सम-भाव धर्मगुरुओं के द्वारा नेतृत्व,  अधिकार आधारित कार्यशैली और वंचित समाज का उत्थान।
धर्मों के प्रतिनिधि लोगों को जागरूक करने में करें मदद:
बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी ने वेबिनार को संबोधित करते हुए एक उदाहरण दिया कि जिस प्रकार मोतिहारी जिले के गांवों में गर्मी के मौसम में मंदिर और मस्जिद से लोगों से अपील की जाती हैं कि रात के आठ बजे तक खाना बना लें, रात में दिया जलाकर न सोएं आदि। जन जागरुकता फैलाने में धर्मगुरुओं का योगदान महत्वपूर्ण होता है। इसी प्रकार इस समय हम सभी कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं। इसके बारे में सभी धर्मों के प्रतिनिधि लोगों को जागरूक करने में मदद करे।
महामारी में सतर्कता जरुरी:
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली के पूर्व सदस्य मुज़्फ्फर अहमद ने कहा कि पोलियो के भारत से उन्मूलन में धर्मगुरुओं ने अहम भूमिका निभाई थी। आपदा से कम से जान – माल की क्षति हो इसके लिए धर्मगुरु आपदा पूर्व तैयारियों के लिए जरूर अपील करें। इस कोरोना वायरस महामारी में लोगों से अपील करें कि मास्क का उपयोग करें और शारीरिक दूरी बनाएं रखें।क्योंकि लोग न सिर्फ इनकी बातों को सुनते हैं बल्कि उसका पालन भी करते हैं।
इन्सान की मदद करना हमारा फर्ज़  है:
इदारे शरिया के हाजी सनाउल्लाह ने कहा कि “बिहार का एक हिस्सा बाढ़ग्रस्त होता है और दूसरा सूखाग्रस्त”। इस वर्ष भी राज्य का एक बड़ा क्षेत्र बाढ़ से ग्रसित है राहत पहुंचाने में हम धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करते हैं। हम सभी इंसान हैं और इंसानियत को आगे ले जाना ही हमारा कर्तव्य है। उन्होंने अपील करते हुए कहा ‘‘आप अपने ज़ानिब से जो मदद होती है वह करें. वहां न देखें कि हिन्दु मुस्लिम ईसाई कौन है. इन्सान हैं,.इन्सान की औलाद हैं और इन्सान की मदद करना हमारा फर्ज़ है’’.
आपदा का असर बच्चों के मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है:
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पटना की बी के ज्योति ने कहा  “धर्मगुरुओं का कार्य केवल धार्मिक प्रचार प्रसार तक सिमित न रहे। उन्हें समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए व समाज के कमज़ोर तत्वों के उत्थान हेतु कार्यों में मदद करनी चाहिए।”  आपदा के समय इनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आपदा का असर बच्चों के मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है। उन्हें उनकी मनःस्थिति से निकाल उम्मीद जगाना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने में मदद मिलेगा. इससे पूर्व सब धर्म गुरु अलग-अलग थे मगर इस मंच से ( बिहार इंटर-फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन) साथ आ गये  हैं.
जमात इस्लामी ए हिंद के मोहम्मद शहजाद ने कहा कि “बाढ़ प्रभावित इलाकों में हमारी संस्था लोगों तक राशन किट, दवा, मच्छरदानी और दूसरी जरूरी वस्तुएं पहुंचा रही है।”
आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है:
यूनिसेफ के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ बंकू बिहारी सरकार ने कहा कि “प्राकृतिक आपदाओं से हम जीत नहीं सकते। हम बस इसके प्रभावों को कम कर सकते हैं। इसके लिए हमें आपदा पूर्व तैयारियां करनी चाहिए।”
बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के डॉ पल्लव ने “बाढ़ के दौरान बच्चों की शिक्षा, सुरक्षित शनिवार” पर एक प्रस्तुतिकरण दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित शनिवार का उद्देश्य बच्चों में आपदा प्रबंधन की संस्कृति विकसित करना है। बच्चों के बीच मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है जिससे आपदा से लड़ने के लिए उनका कौशल विकसित होता है।
यूनिसेफ के आपदा प्रबंधन सलाहकार घनश्याम मिश्र ने “आपदा में बाल सुरक्षा” पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि “आपदा के समय लोग दिनचर्या में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चे उपेक्षित हो जाते हैं। और इसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते है। इसलिए राहत शिविरों में बच्चों का पंजीकरण किया जाना चाहिए जिससे कि बच्चों की रक्षा की जा सके। आगे उन्होंने बाढ़ के तात्कालिक प्रभाव जैसे कचरा, गंदगी, बीमारी आदि का जिक्र किया। उन्होंने साफ पानी और इसकी गुणवत्ता जांच करने के तरीकों की जानकारी भी साझा की।
“मॉनसून के दौरान डूबने से होने वाली मौत” विषय पर प्रस्तुतिकरण देते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के डॉ जीवन ने कहा कि 2016 में राज्य भर में आपदा से 254 मौतें हुई थी जिनमें से 251 लोगों की मौत पानी में डूबकर हुई थी। नाव से यात्रा करते समय इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि नाव पंजीकृत हो, नाव ओवरलोडेड न हो और न ही उस पर कोई जानवार सवार हो। यदि बारिश हो रही हो तो नाव की यात्रा न करें।
वज्रपात पर प्रस्तुतिकरण देते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधत प्राधिकरण की डॉ मधुबाला ने कहा कि “इस वर्ष राज्य में वज्रपात से अभी तक 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लोग इस बात का ध्यान रखे कि बारिश में बिजली के खंभे के पास खड़े न हो, लोहे की डंडी वाले छाता का उपयोग न करें। यदि संभव हो तो किसी घर में शरण लें या पैर के नीचे बोरा रखें और कानों पर हाथ रख नीचे बैठ जाएं।”
राज्य आपदा अनुक्रिया बल के सेकेंड इन कमांड श्री के के झा ने “सर्प दंश प्रबंधन” पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि भारत में हर साल लगभग 45,000 लोगों की मौत सर्प दंश के कारण होती है। इसमें से 50 फीसदी मौतें जहर नहीं बल्कि घबराहट की वजह से होती है। सांप काटने की दशा में पहले यह पहचान करना चाहिए कि सांप जहरीला है  या नहीं। यह जानने का तरीका सर्प दांत के निशानों की संख्या है। यदि दांत के निशान दो है तभी सांप जहरीला है.
इस वेबिनार में सेवा केंद्र के फादर अमल राज, गायत्रीपीठ से नीलम सिन्हा और चंद्र भूषण, शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी के दलजीत सिंह तथा अनिसुर रहमान ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण की डॉ मधुबाला ने किया। यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया
इस वेबिनार में कुल 98 लोगों ने भाग लिया जिसमें, बीआईएफसी से जुड़े धर्मगुरु  आध्यात्मिक   और धार्मिक संगठनो के कार्यकर्ता , बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और यूनिसेफ़ , विकसार्थ शामिल थे

कोरोना को मात देकर अब लोगों को जागरूक करने में जुटे हैं संजीव

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लोगों से कोरोना मरीज के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया नहीं करने की कर रहें है अपील
भागलपुर, 20 अगस्त
खरीक प्रखंड की उस्मानपुर पंचायत के अठनियां गांव के संजीव ने न सिर्फ कोरोना को मात दी है, बल्कि वह अब लोगों को भी भेदभाव के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं. कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार के कारण उपचाराधीन लोगों के साथ भेदभाव के मामलों में भी बढ़ोतरी हुयी है. यही वजह है कि कोरोना को मात देकर लौटे संजीव अब  गांव के लोगों को कोरोना के मरीज से भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं करने की हिदायत दे रहे हैं. इसका असर भी हो रहा है. अब गांव या आसपास के जो लोग कोरोना के शिकार हो रहे हैं, उससे शारीरिक दूरी का ख्याल रखते हुए लोग  मानसिक तौर पर उनका सहयोग कर रहे हैं.
रिश्तेदार भी कर रहे हैं जागरूक:
संजीव के साथ उनके रिश्तेदार भी कोरोना मरीज के प्रति भेदभावपूर्ण रवैया को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. बहनोई विजय मंडल कहते हैं जैसे-जैसे कोरोना काल बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे लोगों की सोच में बदलाव भी देखने को मिल रहा है. पहले लोग कोरोना के नाम से ही डरते थे, लेकिन अब लोग डटकर इसका मुकाबला कर रहे है. उन्होंने बताया वह भी लोगों को कोरोना मरीज से भेदभाव नहीं करने की बात लोगों को बता रहे हैं. कोरोना को हराने में लोगों का उपचाराधीन व्यक्ति के साथ व्यवहार बड़ा मायने रखता है. ऐसी स्थिति में पड़ोसियों के सकारात्मक व्यवहार से, उपचाराधीन व्यक्ति को कोरोना से लड़ने में मानसिक संबल भी मिलता है.  आज संजीव कोरोना को मात देकर घर वापस हो चुके हैं. उनके उपचार के दौरान उनके रिश्तेदारों ने उनका मनोबल बढ़ाने में काफी सहयोग रहा है.
डॉक्टरों ने बढ़ाया हौसला:
मैट्रिक की परीक्षा देकर संजीव रोजगार के सिलसिले में दिल्ली चले गए थे. वहां पहुंचते ही कोरोना संकट शुरू हो गया. इसके बाद उन्हें मजबूर होकर वापस घऱ आना पड़ा. संजीव 25 अप्रैल को दिल्ली से चले और 1 मई को अपने घर पहुंचे. वह 6 दिन तक क्वारंटाइन में रहे. इस दौरान 7 मई को उनका सैंपल लिया गया और 9 मई को रिपोर्ट आई जिसमें कोरोना की पुष्टि हुयी. इसके बाद उनका ईलाज शुरू हुआ एवं संजीव 16 मई को ठीक हो गए. एक बार तो उसके परिजन डर गए. समाज में जिस तरह का माहौल था उससे भय का वातावरण बन गया, लेकिन संजीव के इलाज का जिम्मा जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उठाया. धीरे-धीरे परिजनों का भी हौसला बढ़ने लगा. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मायांगज स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में भर्ती कराया. वहां डॉक्टरों ने उसका हौसला बढ़ाया इसके बाद उन्हें लगने लगा कि वह कोरोना को मात दे सकते हैं.
शुरुआत में हुए थे भयभीत:
संजीव कहते हैं, उन्हें जब पता चला कि वह कोरोना से ग्रसित हो चुके हैं तो वह थोड़ा भयभीत हो गए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम और मायागंज स्थित अस्पताल की व्यवस्था को देखकर उन्हने लगने लगा कि वह अब कोरोना को मात दे सकेंगे. उन्होंने बतया खासकर वहां के डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने जिस तरह से उनका हौसला बढ़ाया वह काबिलेतारीफ है. अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हूं और आगे की यात्रा में बढ़ चुके हैं. अब वह अपने अनुभव लोगों के साथ साझा कर रहे हैं एवं लोगों को मजबूती से कोरोना का सामना करने की बात बता रहे हैं.
आमलोग भी बढ़ाए भागीदारी:
एक बात तो तय है कि कोरोना जैसी महामारी के खिलाफ लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी मुस्तैदी से जुटी है. खासकर मायागंज स्थित अस्पताल में कोरोना उपचार को लेकर सुविधाओं को निरंतर बढ़ाया जा रहा है. यही वजह है कि यहां पर भर्ती होने वाले 90 प्रतिशत कोरोना मरीज अब तक ठीक हो चुके हैं. इस कार्य में समाज के लोगों की एकजुटता भी महत्वपूर्ण है. आम लोगों की जागरूकता, सतर्कता एवं भागीदारी कोरोना को हराने की दिशा में प्रभावी साबित हो सकता है