जिले में खुलने वाले हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर का शीघ्र पूरा होगा निर्माण कार्य

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-राज्य स्वास्थ समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी ने सीएस को दिए निर्देश
-युद्ध स्तर पर होगा  निर्माण  कार्य
जमुई, 20अगस्त, 2020
जिले में खुलने वाले हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर का निर्माण सहित अन्य कागजी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाएगी। इसको लेकर राज्य स्वास्थ समिति के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ ऐके शाही ने पत्र जारी कर जिले के सीएस को आवश्यक निर्देश दिए हैं, जिसमें कहा है कि उक्त सेंटर निर्माण एवं कागजी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के लिए जिले के सभी सेंटरों का लगातार अपने स्तर से मानिटिरिंग करें और इसके दौरान पाए जाने वाली कमी को शीघ्र दूर करने के लिए आवश्यक पहल करें।
 दरअसल लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार का यह एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसका मूल्यांकन एवं अनुश्रवण रिपोर्ट भी ससमय विभाग को उपलब्ध कराने है।
शीघ्र पूर्ण होगा हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर की प्रक्रिया
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ विजेंद्र सत्यार्थी ने बताया कि जिले में खुलने वाले सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर की कागजी प्रक्रिया समेत अन्य कार्य शीघ्र पूर्ण होंगे। इसको लेकर आवश्यक पहल एवं लगातार मानिटिरिंग की जा रही है।
केंद्रीय टीम भी करेंगे भ्रमण
जिले हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर चालू होने के बाद स्वास्थ विभाग भारत सरकार केंद्रीय टीम जिले के सभी सेंटरों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान सेंटर की हर गतिविधि एवं सरकार के मानक का मानिटिरिंग की जाएगी।
-पीएचसी के तरह ही हर सुविधाओं से लैस होगा वेलनेस सेंटर, 24 घंटे मिलेगी सेवा
जिले में खुलने वाले हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर पीएचसी के तरह ही लोगों हर सुविधाओं का लाभ मिलेगा और 24 घंटे चिकित्सक व स्वास्थ कर्मी तैनात रहेंगे। सेंटर पर सर्टिफिकेट इन कोम्युनिटी हेल्थ(ब्रीज कोर्स)का प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। ऐसे चिकित्सकों को विभाग द्वारा पूर्व में ही छः माह का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों को लगे टीके

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रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए लगाए जाते हैं टीके
ग‌र्भवती और धात्री महिलाओं को भी दी गयी जानकारी
बांका,  20 अगस्त:
बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सरकार टीकाकरण अभियान चलाती है. हर सप्ताह के बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों व सामुदायिक भवन पर बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीके लगाये जाते हैं, लेकिन इस बार गुरुवार को भी बौसी प्रखंड के दलिया गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीके दिए गए.
  दलिया गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 22 पर 3 बच्चों और 13 गर्भवती महिलाओं को गुरुवार को टीके लगाए गए. एएनएम पूनम कुमारी ने बताया इस दौरान बच्चों को बीसीजी, डीपीटी, पेंटा 1, पेंटा 2, पेंटा 3 के टीके लगाये गये. स्वच्छ भारत मिशन के तहत महिलाओं  एवं बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया गया. टीका लगवाने आई पूजा कुमारी ने कहा कि बुधवार को वह नहीं हीं आ सकी थी. जब एएनएम ने यह संदेश भिजवाया कि गुरुवार को भी टीके लगाए जाएंगे तो वह यहां आ गयी. इस दौरान हमलोगों को बीमारी से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई. वहीं रूपा कुमारी ने बताया कि उन्हें बुधवार को भी आने के लिए कहा गया था, लेकिन नहीं आ सके थे. आंगनबाड़ी केंद्र के लोगों ने आकर बताया तो टीका लगवाने आ गए. वहीं डॉली कुमारी ने बताया कि उन्हें जब जानकारी मिली कि आज टीकाकरण होना है तो वह सब काम छोड़कर टीका लगवाने के लिए आई.
इसलिए जरूरी है टीकाकरण:
टीकाकरण का तत्काल लाभ है व्यक्ति की प्रतिरक्षा. यह किसी रोग के खिलाफ दीर्घकालिक, कभी-कभी जीवन भर सुरक्षा प्रदान करता है. शुरुआती बाल्यावस्था प्रतिरक्षा अनुसूची में अनुशंसित टीके बच्चों को खसरा, चेचक, न्यूमोकोकल रोग और अन्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. बच्चे ज्यों-ज्यों बड़े होते जाते हैं, अतिरिक्त टीके उन्हें उन रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं जो किशोरों और वयस्कों को प्रभावित करते हैं. साथ ही उन रोगों से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं जो दूसरे क्षेत्रों में यात्रा करने के दौरान उत्पन्न हो सकते हैं.
टीके से बच्चों की होती है सुरक्षा: टीका एक जीवनरक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है. टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें.  कई जानलेवा रोगों की रोकथाम में टीकाकरण एक प्रभावी प्रक्रिया  है.
नियमित टीकाकरण से कई तरह की बीमारियों से होता है बचाव:
 शिशुओं व गर्भवती महिलाओं को नियमित प्ररिराक्षण  कई तरह की बीमारियों से बचाता है. साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके. बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है

गाँव-गाँव जाँच शिविर लगाकर की जा  रही है कोविड-19 जाँच

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– जाँच की गति में तेजी लाने के लिए शिविर का हो रहा है आयोजन
– शिविर के दौरान हर आवश्यक सुरक्षा का रखा जाता है ख्याल
लखीसराय, 20 अगस्त, 2020
कोविड-19 संक्रमण पर रोकथाम लगाने एवं जाँच की गति में तेजी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के प्रत्येक गाँव में कोविड-19 जाँच शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिससे जाँच की गति में तेजी आने के साथ-साथ जाँच के लिए इच्छुक व्यक्ति को जाँच कराने में आसानी हो रही है और लोग पूरी उत्साह के साथ कोविड-19 जाँच करा रहें हैं। जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि इसके लिए मेडिकल टीम गठित कर गाँव जाकर शिविर का आयोजन किया जा रहा है और लोगों को जाँच के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
आवश्यकतानुसार शिविर का हो रहा है आयोजन
सिविल सर्जन डॉ. आत्मानंद राय ने बताया शिविर का आयोजन आवश्यकतानुसार उस गाँव में किया जा रहा है, जहाँ मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वहाँ के लोगों को पीएचसी या अस्पताल आने में काफी दूरी तय करनी पड़ती है।
शिविर आयोजन के पूर्व घर-घर जाकर लोगों को जानकारी देती है आशा
जिस गाँव में शिविर आयोजन होना है उस गाँव स्थानीय पीएचसी या अस्पताल प्रबंधन पहले सूची समेत अन्य आवश्यक कार्य पूरी करते हैं। फिर उस गाँव की आशा को जानकारी दी जाती है। जिसके बाद आशा अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को होने वाले कोविड-19 जाँच शिविर की जानकारी देती हैं और लोगों को जाँच कराने के लिए प्रेरित भी करती हैं।
शिविर के दौरान हर आवश्यक सुरक्षा का रखा जाता है ख्याल
कोविड-19 जाँच शिविर संचालन के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर हर बातों का ख्याल रखा जाता है। शिविर में जाँच के लिए पहुँचे मेडिकल टीम खुद के साथ-साथ दूसरों का भी सुरक्षा का ख्याल रखते हैं। इस दौरान मास्क तथा उचित शारीरिक दूरी का पालन किया जा रहा है । लोगों को जाँच कराने के प्रेरित किया जाता है और बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जाती है ताकि लोग संक्रमण के दायरे से बाहर रह सकें।
चार सदस्यीय गठित टीम करते हैं जाँच
शिविर में जाँच के लिए संबंधित पीएचसी या अस्पताल प्रबंधन द्वारा चार सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। जिसमें चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन, एएनएम और स्थानीय आशा को शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रखण्ड मैनेजर शिविर की मानिटिरिंग कर व्यवस्था का ख्याल रखते हैं।

आपदा के समय मंदिर, मस्जिद, चर्च एवं  गुरुद्वारे से सूचना दी जाए कि क्या करें और क्या न करें:  श्री व्यास 

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• वेबिनार के माध्यम से धर्मगुरुओं ने लोगों से की अपील
• बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण ने आपदा से निपटने पर की चर्चा
• बाढ़ और आपदा से निपटने में सहयोग करने की कही गयी बात
• हजी सनाउल्लाह प्रमुख ईदारे शरिया एवं ब्रह्मकुमारी  वी. के. ज्योती ने भी दिए संदेश
भागलपुर, 20 अगस्त:
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, यूनिसेफ और बीआईएफसी (बिहार इंटर फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन) ने बिहार में बाढ़ और आपदा से निपटने में धर्मगुरुओ की भूमिका पर एक वेबिनार का आयोजन किया. बाढ़ और आपदा के दौरान ख़ासतौर  से बच्चों एवं महिलाओ तक जानकारी और मदद पहुँचाने की जरूरत पर बल दिया गया.
वेबिनार की शुरुआत में यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने बीआईएफसी के बारे में संक्षिप्त रूप से बताते हुए कहा कि बीआईएफसी सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि देश का एक अनूठा मंच है जहाँ सभी धर्मों के प्रतिनिधि एक साथ बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यरत हैं और जागरूकता फैलाते हैं। आगे उन्होंने कहा कि “बीआईएफसी के चार सिद्धांत है – स्वैच्छिक मंच, सर्व धर्म सम-भाव धर्मगुरुओं के द्वारा नेतृत्व,  अधिकार आधारित कार्यशैली और वंचित समाज का उत्थान।
धर्मों के प्रतिनिधि लोगों को जागरूक करने में करें मदद:
बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी ने वेबिनार को संबोधित करते हुए एक उदाहरण दिया कि जिस प्रकार मोतिहारी जिले के गांवों में गर्मी के मौसम में मंदिर और मस्जिद से लोगों से अपील की जाती हैं कि रात के आठ बजे तक खाना बना लें, रात में दिया जलाकर न सोएं आदि। जन जागरुकता फैलाने में धर्मगुरुओं का योगदान महत्वपूर्ण होता है। इसी प्रकार इस समय हम सभी कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं। इसके बारे में सभी धर्मों के प्रतिनिधि लोगों को जागरूक करने में मदद करे।
महामारी में सतर्कता जरुरी:
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली के पूर्व सदस्य मुज़्फ्फर अहमद ने कहा कि पोलियो के भारत से उन्मूलन में धर्मगुरुओं ने अहम भूमिका निभाई थी। आपदा से कम से जान – माल की क्षति हो इसके लिए धर्मगुरु आपदा पूर्व तैयारियों के लिए जरूर अपील करें। इस कोरोना वायरस महामारी में लोगों से अपील करें कि मास्क का उपयोग करें और शारीरिक दूरी बनाएं रखें।क्योंकि लोग न सिर्फ इनकी बातों को सुनते हैं बल्कि उसका पालन भी करते हैं।
इन्सान की मदद करना हमारा फर्ज़  है:
इदारे शरिया के हाजी सनाउल्लाह ने कहा कि “बिहार का एक हिस्सा बाढ़ग्रस्त होता है और दूसरा सूखाग्रस्त”। इस वर्ष भी राज्य का एक बड़ा क्षेत्र बाढ़ से ग्रसित है राहत पहुंचाने में हम धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करते हैं। हम सभी इंसान हैं और इंसानियत को आगे ले जाना ही हमारा कर्तव्य है। उन्होंने अपील करते हुए कहा ‘‘आप अपने ज़ानिब से जो मदद होती है वह करें. वहां न देखें कि हिन्दु मुस्लिम ईसाई कौन है. इन्सान हैं,.इन्सान की औलाद हैं और इन्सान की मदद करना हमारा फर्ज़ है’’.
आपदा का असर बच्चों के मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है:
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पटना की बी के ज्योति ने कहा  “धर्मगुरुओं का कार्य केवल धार्मिक प्रचार प्रसार तक सिमित न रहे। उन्हें समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए व समाज के कमज़ोर तत्वों के उत्थान हेतु कार्यों में मदद करनी चाहिए।”  आपदा के समय इनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आपदा का असर बच्चों के मन मस्तिष्क पर भी पड़ता है। उन्हें उनकी मनःस्थिति से निकाल उम्मीद जगाना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने में मदद मिलेगा. इससे पूर्व सब धर्म गुरु अलग-अलग थे मगर इस मंच से ( बिहार इंटर-फेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन) साथ आ गये  हैं.
जमात इस्लामी ए हिंद के मोहम्मद शहजाद ने कहा कि “बाढ़ प्रभावित इलाकों में हमारी संस्था लोगों तक राशन किट, दवा, मच्छरदानी और दूसरी जरूरी वस्तुएं पहुंचा रही है।”
आपदा के प्रभाव को कम किया जा सकता है:
यूनिसेफ के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ बंकू बिहारी सरकार ने कहा कि “प्राकृतिक आपदाओं से हम जीत नहीं सकते। हम बस इसके प्रभावों को कम कर सकते हैं। इसके लिए हमें आपदा पूर्व तैयारियां करनी चाहिए।”
बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के डॉ पल्लव ने “बाढ़ के दौरान बच्चों की शिक्षा, सुरक्षित शनिवार” पर एक प्रस्तुतिकरण दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित शनिवार का उद्देश्य बच्चों में आपदा प्रबंधन की संस्कृति विकसित करना है। बच्चों के बीच मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाता है जिससे आपदा से लड़ने के लिए उनका कौशल विकसित होता है।
यूनिसेफ के आपदा प्रबंधन सलाहकार घनश्याम मिश्र ने “आपदा में बाल सुरक्षा” पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि “आपदा के समय लोग दिनचर्या में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि बच्चे उपेक्षित हो जाते हैं। और इसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते है। इसलिए राहत शिविरों में बच्चों का पंजीकरण किया जाना चाहिए जिससे कि बच्चों की रक्षा की जा सके। आगे उन्होंने बाढ़ के तात्कालिक प्रभाव जैसे कचरा, गंदगी, बीमारी आदि का जिक्र किया। उन्होंने साफ पानी और इसकी गुणवत्ता जांच करने के तरीकों की जानकारी भी साझा की।
“मॉनसून के दौरान डूबने से होने वाली मौत” विषय पर प्रस्तुतिकरण देते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण के डॉ जीवन ने कहा कि 2016 में राज्य भर में आपदा से 254 मौतें हुई थी जिनमें से 251 लोगों की मौत पानी में डूबकर हुई थी। नाव से यात्रा करते समय इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि नाव पंजीकृत हो, नाव ओवरलोडेड न हो और न ही उस पर कोई जानवार सवार हो। यदि बारिश हो रही हो तो नाव की यात्रा न करें।
वज्रपात पर प्रस्तुतिकरण देते हुए बिहार राज्य आपदा प्रबंधत प्राधिकरण की डॉ मधुबाला ने कहा कि “इस वर्ष राज्य में वज्रपात से अभी तक 400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लोग इस बात का ध्यान रखे कि बारिश में बिजली के खंभे के पास खड़े न हो, लोहे की डंडी वाले छाता का उपयोग न करें। यदि संभव हो तो किसी घर में शरण लें या पैर के नीचे बोरा रखें और कानों पर हाथ रख नीचे बैठ जाएं।”
राज्य आपदा अनुक्रिया बल के सेकेंड इन कमांड श्री के के झा ने “सर्प दंश प्रबंधन” पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि भारत में हर साल लगभग 45,000 लोगों की मौत सर्प दंश के कारण होती है। इसमें से 50 फीसदी मौतें जहर नहीं बल्कि घबराहट की वजह से होती है। सांप काटने की दशा में पहले यह पहचान करना चाहिए कि सांप जहरीला है  या नहीं। यह जानने का तरीका सर्प दांत के निशानों की संख्या है। यदि दांत के निशान दो है तभी सांप जहरीला है.
इस वेबिनार में सेवा केंद्र के फादर अमल राज, गायत्रीपीठ से नीलम सिन्हा और चंद्र भूषण, शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटी के दलजीत सिंह तथा अनिसुर रहमान ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन बिहार राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण की डॉ मधुबाला ने किया। यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया
इस वेबिनार में कुल 98 लोगों ने भाग लिया जिसमें, बीआईएफसी से जुड़े धर्मगुरु  आध्यात्मिक   और धार्मिक संगठनो के कार्यकर्ता , बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और यूनिसेफ़ , विकसार्थ शामिल थे

लबाइक मोबाइल लैब के जरिए हर दिन सैकड़ों लोगों की हो रही स्वास्थ्य जांच

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जांच के बाद मरीज को पटना एम्स के डॉक्टर दे रहे चिकित्सकीय सलाह
अब तक लगभग 1000 मरीजों ने इस सेवा का उठाया लाभ
भागलपुर, 19 अगस्त
शहर के विभिन्न वार्डों में मोबाइल मेडिकल लैब- लबाइक से प्रतिदिन लोगों की 76 प्रकार की जांच की जा रही है. जांच के बाद टेलीमेडिसिन सेवा के जरिए पटना एम्स के चिकित्सकों द्वारा इलाज भी किया जा रहा है. प्रतिदिन सैकड़ों लोग इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं. सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि इसका मकसद लोगों के घर तक स्वास्थ सेवा पहुंचाना है. कोरोना काल में लोग घरों से कम निकल रहे हैं. ऐसे में यह सेवा लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है. अभी तक 8 दिनों में लगभग एक हजार मरीजों की जांच हो चुकी है.
हर व्यक्ति का बनेगा हेल्थ प्रोफाइल:  सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा  कि कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवा को लोगों के घर तक पहुंचाने की तैयारी चल रही है. इस क्रम में अब घर-घर जाकर हर व्यक्ति का हेल्थ प्रोफाइल एवं आईडी बनाया जाएगा. साथ ही घर घर जाकर एंटीजन किट से जांच जल्द शुरू होगी. हेल्थ प्रोफाइल में व्यक्ति के स्वास्थ्य की सभी जानकारी मौजूद रहेगी. व्यक्ति को कौन सी बीमारी है, क्या इलाज चल रहा है, इसकी जानकारी हेल्थ प्रोफाइल में रहेगी.
हर दिन सैकड़ों लोगों की हो रही जांच: सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि शहर के विभिन्न वार्डों में घूम घूम कर लबाइक मोबाइल लैब के जरिए प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की ब्लड व अन्य जांच की जा रही है, जिसके बाद टेलीमेडिसिन के जरिये पटना एम्स के चिकित्सकों द्वारा परामर्श तथा इलाज किया जा रहा है. जिनको सघन स्वास्थ्य चिकित्सा की आवश्यकता होती है उन्हें संबंधित अस्पताल या अन्य बड़े अस्पताल जिसमें पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस या एम्स में चिकित्सा के लिए अनुशंसित किया जाता है, ताकि बेहतर इलाज संभव हो सके।
लबाइक मोबाइल लैब की संख्या जल्द होगी 4: अभी शहर में दो लबाइक मोबाइल लैब द्वारा जांच की जा रही है जिसे जल्द ही बढ़ाकर चार कर दिया जाएगा. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों का कम समय में स्वास्थ्य जांच हो सके. इसके साथ ही ह्रदय रोग, डायबिटीज, उदर रोग, किडनी आदि कई परेशानियों के लिए अलग से चिकित्सा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है.
चंपानगर में सैकड़ों लोगों की स्वास्थ्य जांच:  बुधवार को चंपानगर के नरगा चौक पर लबाइक मोबाइल लैब से सैकड़ों लोगों की जांच की गई. जांच में जिस व्यक्ति को जो बीमारी निकली उसका पटना एम्स के डॉक्टरों ने मोबाइल से चिकित्सकीय सलाह दी. गंभीर मरीजों को संबंधित अस्पताल रेफर कर दिया गया.

कृषि पोषण पर आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय वेबिनार का हुआ समापन

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• आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सीखे पोषण वाटिका निर्माण के गुर
• पोषण वाटिका के प्रति सामाजिक जागरूकता पर दिया गया बल
• पोषण वाटिका निर्माण के तकनीकी पहलुओं पर हुयी चर्चा
• पोषण के महत्व के साथ आहार विविधिता पर भी दी गयी जानकारी
 बांका/ 19, अगस्त: आहार विविधता को बढ़ावा देकर दैनिक भोजन की थाली में सूक्ष्म पोषक तत्वों का समावेश करना कुपोषण को कम करने में कारगर साबित होगी। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पोषण वाटिका की स्थापना की दिशा में आईसीडीएस,समाज कल्याण विभाग के द्वारा पहल की जा रही है। पोषण वाटिका की संकल्पना की समझ विकसित करने हेतु बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर के साथ आईसीडीएस निदेशालय के द्वारा आंगनवाड़ी सेविका आयोजित एवं पदाधिकारी के लिए तीन दिवसीय वेबिनार का समापन हुआ। इस तीन दिवसीय वेबिनार में पोषण वाटिका के निर्माण, संचालन एवं उसके तकनीकी पहलुओं की जानकारी के साथ खाध्य विवधता के महत्व एवं पोषक तत्व के बारे में भी विस्तृत रूप वैज्ञानिकों के द्वारा जानकारी दी गई।
घर एवं आस-पास में भी पोषण वाटिका का हो निर्माण:
समापन समारोह में निदेशक-आईसीडीएस आलोक कुमार  के द्वारा सैद्धांतिक प्रशिक्षण के बाद व्यवहारिक प्रशिक्षण आयोजन किए जाने पर विचार किया गया।  उन्होंने कहा इस तीन दिवसीय सेमिनार के उपरांत आंगनवाड़ी सेविका सर्वप्रथम अपने घर व अपने आस-पास विज्ञान केंद्र के सहयोग से वाटिका के निर्माण की निर्माण किए जाने की जरूरत है, ताकि उनके और उनके परिवार के लिए ऑर्गेनिक एवं ताजे फल सब्जियों की कमी दूर हो व परिवार स्वस्थ रह सके. आंगनबाड़ी सेविका स्वयं इसके महत्व से अवगत होने के बाद ही समाज में भी इसके महत्व के बारे में सभी को बता पाएगी। उन्होंने कहा यह प्रशिक्षण सिर्फ आंगनवाड़ी केंद्र के लाभार्थी के लिए ही नहीं बल्कि आंगनवाड़ी के सेविका के स्वयं अपने परिवार को पोषण युक्त आहार उपलब्ध की कमी भी दूर कर सकेगी. इसके लिए वे पोषित समाज के निर्माण का कार्य सर्वप्रथम अपने घर से ही शुरू कर सकती हैं।
‘अपनी क्यारी, अपनी थाली’ के सपने को करना है साकार:
डॉ. आर. के. सुहाने, प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर ने समापन सम्बोधन मे कहा कि राज्य में पोषण वाटिका के निर्माण हेतु आईसीडीएस निदेशालय, समाज कल्याण विभाग के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार करेगी एवं क्रमवार  निर्माण की दिशा में आवश्यक तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।  उन्होंने कहा माननीय मुख्यमंत्री जी का भी यह आह्वान है कि देश के प्रत्येक थाली में बिहार का एक वयंजन हो, इस कार्य में पोषण वाटिका का निर्माण “अपनी क्यारी अपनी थाली” एक समेकित सफल प्रयास साबित होगी।
श्वेता सहाय नोडल पदाधिकारी पोषण अभियान के द्वारा तीन दिवसीय कृषि पोषण पर सेमिनार एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं को कृषि पोषण पर जागरूकता के लिए यह कार्यक्रम एक सफल प्रयास बताया गया।  उनके द्वारा सभी संबंधित पदाधिकारी एवं आयोजन समिति को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
डॉक्टर कुमारी शरदा वरीय वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़, पटना के द्वारा आयोजन सचिव के तौर पर आयोजन समिति के सभी सदस्य को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ सीमा कुमारी, डॉ मृणाल वर्मा ,डॉ ज्योति कुमारी, डॉ अभिषेक कुमार, डॉ मनोज कुमार, ईश्वर चंद्र एवं आईसीडीएस निदेशालय व बिहार कृषि विश्वविद्यालय का काफी सहयोग रहा।

होम आइसोलेशन में आवासित मरीजों का होगा भौतिक सत्यापन

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-राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
-एक सप्ताह में होगा सत्यापन, टीम गठित करने का दिया निर्देश
लखीसराय,19 अगस्त: स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना संक्रमण के बढ़ते असर को रोकने के लिए विभिन्न स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं. कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम रैंडम सैंपलिंग का भी काम कर रही है. इस सभी कार्यों के साथ अब स्वास्थ्य विभाग की टीम होम आइसोलेशन में आवासित मरीजों का भौतिक स्त्यापन का काम भी करेगी. इसे लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने जिला पदाधिकारी व सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिये हैं.
सभी पीएचसी प्रभारी को दिए गए हैं निर्देश
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि भौतिक सत्यापन के लिए प्रखंड स्तर पर सत्यापन टीम गठित करने के लिए सभी पीएचसी प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं और शीघ्र इसे सुनिश्चित कराने को कहा गया है। कार्यपालक निदेशक ने अधिकारियों को पत्र के माध्यम से भेजे निर्देश में इस बात पर जोर दिया है कि होम आइसोलेशन में आवासित मरीजों का पता और मोबाइल नंबर आदि में त्रृटि होने के कारण मरीजों के स्वास्थ्य अनुश्रवण कार्यों में कठिनाई हो रही है. स्टेपवन के माध्यम से हो रहे अनुश्रवण कार्य अपर्याप्त या सही जानकारी नहीं होने के कारण प्रभावित हुआ है. इसलिए होम आइसोलेशन में आवासित सभी मरीजों का भौतिक सत्यापन किया जाना आवश्यक है. इसके लिए सत्यापन दल गठित किये जाने के लिए कहा गया है.
दल में होंगे बीएचएम, बीसीएम आरबीएसके अधिकारी:
सत्यापन दल में आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम कर्मियों सहित प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक व प्रखंड सामुदायिक उत्प्ररेक आदि को शामिल किया जायेगा. सत्यापन दल द्वारा मरीजों का नाम, पता, मोबाइल नंबर, जांच का प्रकार, जांच परिणाम की तिथि, पॉजिटिव या निगेटिव, वितरित किये गये दवाओं आदि सभी का सत्यापन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. होम आइसोलेशन में आवासित मरीजों के सत्यापन का कार्य एक सप्ताह के अंदर अनिवार्य रूप से पूरा कर लिये जाने के निर्देश दिये गये हैं.
बिना देरी वेब पोर्टल पर सही जानकारी करना है अपडेट:
सत्यापन के दौरान अगर किसी मरीज से जुड़ी सूचना गलत पायी जाती हे तो मरीज से संबंधित सही सूचना सत्यापन दल से प्राप्त करते हुए बिहार कोविड वेब पोर्टल पर बिना देरी सुधार करते हुए अपडेट करना है. ताकि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के स्वास्थ्य का अनुश्रवण बिना किसी बाधा के किया जा सके. इस संबंध में सभी आवश्यक जानकारी राज्य डाटा सेंटर को ईमेल से उपलब्ध कराना के लिए कहा गया है.

लाभार्थियों के घर पर हुआ अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन

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– आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने कार्यक्रम का किया शुभारंभ
– 6 माह पूरा करने वाले बच्चों को हुआ अन्नप्राशन
– 6 माह के बाद अनुपूरक आहार के महत्व की विस्तार से दी गई जानकारी
लखीसराय,19अगस्त,2020
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के समय में भी बच्चे के पोषण का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इसको लेकर समेकित बाल बिकास परियोजना(आईसीडीएस) विभाग के कर्मी से पदाधिकारी तक पूरी सजग है। बुधवार को जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह के निर्देश पर जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्र की सेविका अपने-अपने पोषक क्षेत्र में गृहभेंट कर यानी लाभार्थी घर पहुँचकर अन्नप्रासन कार्यक्रम का आयोजन किया। जहाँ छः माह का उम्र पूरा कर चुके बच्चे को पहली बार खीर खिलाया और बच्चे की माँ को बच्चे का स्वस्थ शरीर को लेकर 6 माह के बाद अनुपूरक आहार के महत्व की विस्तार से जानकारी दी गई।
आईसीडीएस विभाग की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने रामगढ़ चौक बाल बिकास परियोजना कार्यालय के अंतर्गत ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 53 एवं 96 के पोषक क्षेत्र अंतर्गत एक-एक लाभार्थी के घर पहुँचकर अन्नप्राशन कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जहाँ केंद्र संख्या 53 के लाभार्थी अनीता देवी के पुत्र प्रियांशु कुमार एवं 96 सामुदायिक भवन तांती टोला रामनगर माया देवी के पुत्र पियुष कुमार को अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन कराया गया। इस मौके पर रामगढ़ चौक बाल बिकास परियोजना कार्यालय के महिला पर्यवेक्षिका अर्चना कुमारी समेत दोनों केंद्र की सेविका सरोजनी कुमारी एवं सुधा कुमारी आदि मौजूद थे।
अनुपूरक आहार के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया कि इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया कि 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए अनुपूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। इसके साथ ही  बच्चों को कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं। साथ ही अभिभावकों को आहार विविधिता के बारे में भी बताया गया। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों की पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।
कोविड-19 से बचाव को लेकर भी दी गई  आवश्यक जानकारी
इस दौरान मौजूद ऑगनबाड़ी सेविका एवं बच्चे के अभिभावकों को कोविड-19 से बचाव को लेकर भी आवश्यक जानकारी दी गई। जिसमें बताया गया कि मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और शारीरिक-दूरी बनाऐ रखें। इसके अलावे बचाव से संबंधित अन्य जानकारियाँ दी गई।
इन बातों का रखें ख्याल:
6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें
स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें
शिशु को मल्टिंग आहार(अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर)दें
माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है
शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं

सदर अस्पताल जाने वाले हर व्यक्ति का हो रहा कोरोना टेस्ट

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 संक्रमण की रोकथाम को लेकर अस्पताल प्रशासन ने उठाया कदम
अस्पताल में सामान्य मरीजों के इलाज से पहले हो रहा कोरोना टेस्ट
बांका, 18 अगस्त
कोरोना के संक्रमण की रोकथाम को लेकर सदर अस्पताल प्रशासन गंभीर है. इसे लेकर लगातार नए नए कदम उठाए जा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से सदर अस्पताल में आने वाले हर व्यक्ति की कोरोना जांच की जा रही है. जांच में पॉजिटिव पाए जाने के बाद व्यक्ति को होम आइसोलेशन में भेज दिया जाता है या फिर लकड़ीकोला स्थित कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया जाता है.
अस्पताल मैनेजर अमरेश कुमार का कहना है कि कोरोना की रोकथाम को लेकर सदर अस्पताल प्रशासन लगातार नए-नए कदम उठा रहा है. कोरोना मरीजों की जांच में तेजी के साथ अब अस्पताल आने वाले हर व्यक्ति की कोरोना जांच की जा रही है. सिर्फ 3 साल से छोटे बच्चे की जांच नहीं की जाती है. इसे लेकर परिजनों को सतर्क रहने कहा जाता है. बच्चों में कोरोना के संक्रमण का खतरा कम रहता है.अस्पताल आने वाले समान मरीजों की पहले जांच होती है. उसके बाद अगर वह निगेटिव पाए जाते हैं तो उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से इलाज किया जाता है.
जांच में तेजी लाने के लिए झोंकी ताकत: कोरोना मरीजों की जांच में तेजी लाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है. अभी प्रतिदिन 3 हजार से अधिक कोरोना टेस्ट हो रहे है. जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व अन्य सरकारी अस्पतालों में जांच के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि अभी लगभग 300 लोगों की टेस्ट से हमारे यहां प्रतिदिन होती है. शहरी क्षेत्र के कंटेनमेंट जोन में कोरोना मरीजों की लगातार जांच की जा रही है. शिविर लगाकर डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मियों की टीम तैनात रहती है. वहां आने वाले लोगों का सैंपल लेकर आधे घंटे से पहले रिपोर्ट दे दी जाती है.
सभी तरह के मरीजों का हो रहा इलाज: सिविल सर्जन सुधीर महतो ने बताया, सदर अस्पताल में आने वाले हर तरह के मरीजों के लिए बेहतर इलाज की व्यवस्था है। यहां पर तैनात डॉक्टर हमेशा मरीजों के इलाज के लिए तैनात रहते हैं। मरीजों को इलाज कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसका पूरा ध्यान अस्पताल प्रबंधन रख रहा है। कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए अलग व्यवस्था की गई है। वहीं सामान्य मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था है। कोरोना का संक्रमण नहीं फैले, इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। यही वजह है कि आने वाले हर व्यक्ति का कोरोना टेस्ट हो रहा है. अस्पताल के कर्मी पूरी सावधानी बरतते हुए मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
शारीरिक दूरी का रखा जा रहा ख्याल: सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों से शारीरिक दूरी का पालन करवाया जा रहा है। दो लोगों के बीच दो गज की दूरी हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है। बाहर से आने वाले मरीजों को देखने से पहले विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां आने वाले मरीजों को मास्क और सेनिटाइजर भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह मास्क और ग्लब्स पहनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
गर्भवती महिलाओं व शिशुओं को लेकर बरती जा रही सतर्कता: अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं के इलाज को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनके इलाज को लेकर सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। अस्पताल की नर्स व एएनएम पूरी तरह से सुरक्षित होकर गर्भवती महिलाओं की जांच करते हैं। डॉक्टर भी सावधानीपूर्वक इनका इलाज करते हैं।

कोरोना काल में सावधानी के साथ हो रहा है सैलून दुकान का संचालन 

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• बिना मास्क वाले को नहीं दे रहे हैं हेयर कटिंग या सेविंग की सेवा
• खुद बरत रहे हैं एहतियात और ग्राहकों को भी कर रहे हैं जागरूक
लखीसराय,18अगस्त 2020: कोरोना काल में सरकारी निर्देश का पालन करते हुए सैलून दुकान का भी सावधानी व सुरक्षा के साथ धीरे-धीरे संचालन शुरू हो रहा है।इस दौरान सैलून दुकानदार खुद व आने वाले ग्राहकों का हरसंभव पूरी सुरक्षा का ख्याल रख रहे हैं।यही नहीं बिना मास्क पहन आने वाले ग्राहकों को सेवा देने से दुकानदार साफ मना कर रहे है और खुद के साथ दूसरों की भी सुरक्षा का ख्याल रखने का अपील कर रहे हैं ताकि संक्रमण के दायरे से दूर रह सकें।
शारीरिक-दूरी का भी रखते हैं विशेष ख्याल
सूर्यगढ़ा के सैलून दुकान संचालक प्रमोद कुमार ने बताया बाल कटिंग और दाढ़ी बनाने के दौरान सैलून में शारीरिक दूरी का ख्याल रखा जाता है।इसके अलावा सुरक्षा से संबंधित अन्य बचाव का पालन करते हुए लोगों को सेवा देते हैं।साथ ही वह लोगों से भी सरकार के निर्देश का पालन करने का अपील करते हैं। बिना मास्क पहने ग्राहकों को सेवा नहीं देते हैं। साथ ही किसी भी ग्राहक का बाल काटने या दाढ़ी बनाने के पहले एवं बाद सैलून कर्मी एवं ग्राहक के हाथ को सेनेटाइज कराते हैं जिससे संक्रमण प्रसार की संभावना को खत्म किया जा सके. उन्होंने बताया सैलून में इस्तेमाल होने वाली सीट, तौलिया, कंघी सहित अन्य औजारों को भी नियमित तौर पर सेनेटाइज किया जाता है. वह इस बात को भली-भांति समझते हैं कि उनकी एक छोटी से चूक संक्रमण को निमंत्रण दे सकती है.
सब्जी विक्रेता भी पूरी सतर्कता के साथ बेच रहें सब्जी
लखीसराय के सब्जी विक्रेता मोहम्मद राजा पूरी सतर्कता के साथ एवं सरकार के निर्देश का पालन करते हुए सब्जी बेचते हैं। वह बताते हैं कि इस दौरान ग्राहकों से दुकान पर भीड़ नहीं लगाने की वह अपील करते हैं।साथ ही सभी ग्राहकों को थैला लेकर आने का अपील करते हैं।ताकि संक्रमण का संभावना उत्पन्न नहीं हो. वह खुद भी मास्क व गल्पैस का उपयोग करते हैं।साथ ही ग्राहकों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। सब्जी बेचने के दौरान वह सेनेटाइज का लगातार उपयोग करते हैं।