कोरोना वायरस से निपटने के लिए पड़ोसी से करें चर्चा

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• घर के सदस्यों को कोरोना से बचाव के तरीके बताएं
बांका, 13 अगस्त
कोरोना के बढ़ते प्रभाव मद्देनजर लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए घर से लेकर, स्कूल-कॉलेज व ऑफिस में सफाई रखने और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। ऐसे दौर में जरुरी है कि लोग बचाव की शुरुआत अपने घर से ही करें.
सबसे पहले अपने घर को वायरस से निपटने के लिए तैयार करें। बच्चों को सकारात्मक रखें और उन्हें कोरोना का संक्रमण फैलने के बारे में सावधानी से बताएं। कोरोना से बचाव के लिए आप अपने परिजनों, रिश्तेदारों और मित्रों को जीवनशैली से जुड़ी सावधानियों के बारे में बताएं।
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं जब तक कोरोना का टीका बाजार में नहीं आ जाता है, तब तक इससे बचाव के लिए घरेलु उपाय कारगर हो सकते हैं. घर में साफ-सफाई पर ध्यान दें। घर से निकलते वक्त मास्क लगाएं और कोशिश करें कि घर से कम से कम निकलना पड़े। बहुत जरूरत पड़ने पर ही घर से निकलें। बाहर से घर आने पर हैंड सेनिटाइजर का प्रयोग जरूर करें।
पड़ोसियों के साथ मिलकर योजना बनाएं:
पड़ोसियों के साथ मिलकर कोरोना से जुड़ी आपातकालीन स्थिति की योजना बनाएं। कोरोना से संक्रमण या बीमारी की स्थिति में संपर्क करने वाले लोगों की सूची बनाएं और साथ के लोगों के साथ साझा करें। अगले कुछ समय तक बीमार लोगों से मिलने से परहेज करें। यदि आप खुद बीमार हैं तो डॉक्टर से मिलने के अलावा बाहर निकलने या अन्य जगहों पर जाने से बचें। सर्दी-खांसी और जुकाम होने पर टिश्यू का इस्तेमाल करें, परिजनों के साथ भी कम बैठने की कोशिश करें।
घर के सामान की रोज सफाई करें:
आपके घर पर जिन चीजों का इस्तेमाल रोज हो रहा है और हर व्यक्ति उसका उपयोग करता है, उनकी रोज सफाई करें। कुर्सी, मेज, स्विच, दरवाजे और हैंडल को घर के सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, इन्हें रोज साफ करें। कोरोना वायरस से बचाव के लिए पानी और साबुन का इस्तेमाल करते हुए हाथों को 20 सेकेंड तक रगड़कर साफ करें। खाने के पहले और बाद, शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोएं। ऐसे हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें जो अल्कोहल बेस्ड हो.
बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत:
अभी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे में सर्दी, बुखार होना आम बात है। यदि आपके बच्चे को सर्दी-खांसी या जुकाम है तो उसे किसी दूसरे बच्चे के संपर्क में नहीं आने दें। बच्चों को सफाई के प्रति जागरूक करें। उसके भोजन पर नजर रखें। हमेश गर्म खाना दें और पानी को उबालकर। अगर इसके बावजूद सुधार नहीं होता है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
इन बातों का रखें ख्याल:
1. मुंह बिना ढके न छीकें। खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में दिक्कत जैसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। डॉक्टर्स से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
3. अगर आप कोरोना वायरस का शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं. यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।

घरेलू उपाय कर कोरोना से करें अपना बचाव

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• घर के सदस्यों को कोरोना से बचाव के तरीके बताएं
• कोरोना वायरस से निपटने के लिए पड़ोसी से करें चर्चा
भागलपुर, 13 अगस्त
कोरोना के बढ़ते प्रभाव मद्देनजर लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए घर से लेकर, स्कूल-कॉलेज व ऑफिस में सफाई रखने और सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। ऐसे दौर में जरुरी है कि लोग बचाव की शुरुआत अपने घर से ही करें.
सबसे पहले अपने घर को वायरस से निपटने के लिए तैयार करें। बच्चों को सकारात्मक रखें और उन्हें कोरोना का संक्रमण फैलने के बारे में सावधानी से बताएं। कोरोना से बचाव के लिए आप अपने परिजनों, रिश्तेदारों और मित्रों को जीवनशैली से जुड़ी सावधानियों के बारे में बताएं।
नारायणपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विजयेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं जब तक कोरोना का टीका बाजार में नहीं आ जाता है, तब तक इससे बचाव के लिए घरेलु उपाय कारगर हो सकते हैं. घर में साफ-सफाई पर ध्यान दें। घर से निकलते वक्त मास्क लगाएं और कोशिश करें कि घर से कम से कम निकलना पड़े। बहुत जरूरत पड़ने पर ही घर से निकलें। बाहर से घर आने पर हैंड सेनिटाइजर का प्रयोग जरूर करें।
पड़ोसियों के साथ मिलकर योजना बनाएं:
पड़ोसियों के साथ मिलकर कोरोना से जुड़ी आपातकालीन स्थिति की योजना बनाएं। कोरोना से संक्रमण या बीमारी की स्थिति में संपर्क करने वाले लोगों की सूची बनाएं और साथ के लोगों के साथ साझा करें। अगले कुछ समय तक बीमार लोगों से मिलने से परहेज करें। यदि आप खुद बीमार हैं तो डॉक्टर से मिलने के अलावा बाहर निकलने या अन्य जगहों पर जाने से बचें। सर्दी-खांसी और जुकाम होने पर टिश्यू का इस्तेमाल करें, परिजनों के साथ भी कम बैठने की कोशिश करें।
घर के सामान की रोज सफाई करें:
आपके घर पर जिन चीजों का इस्तेमाल रोज हो रहा है और हर व्यक्ति उसका उपयोग करता है, उनकी रोज सफाई करें। कुर्सी, मेज, स्विच, दरवाजे और हैंडल को घर के सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, इन्हें रोज साफ करें। कोरोना वायरस से बचाव के लिए पानी और साबुन का इस्तेमाल करते हुए हाथों को 20 सेकेंड तक रगड़कर साफ करें। खाने के पहले और बाद, शौचालय के इस्तेमाल के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोएं। ऐसे हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें जो अल्कोहल बेस्ड हो.
बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत:
अभी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे में सर्दी, बुखार होना आम बात है। यदि आपके बच्चे को सर्दी-खांसी या जुकाम है तो उसे किसी दूसरे बच्चे के संपर्क में नहीं आने दें। बच्चों को सफाई के प्रति जागरूक करें। उसके भोजन पर नजर रखें। हमेश गर्म खाना दें और पानी को उबालकर। अगर इसके बावजूद सुधार नहीं होता है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
इन बातों का रखें ख्याल:
1. मुंह बिना ढके न छीकें। खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में दिक्कत जैसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। डॉक्टर्स से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
3. अगर आप कोरोना वायरस का शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं. यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ नियमित टीकाकरण 

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टीकाकरण के दौरान सामाजिक दूरी का रखा गया ख्याल
बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर दिया गया जोर
बांका, 12 अगस्त
कोरोना काल में भी बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के बेहतर संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ आईसीडीएस भी सहयोग कर रहा है। इसी क्रम में बुधवार को नियमित टीकाकरण का आयोजन सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ अतरिक्त केंद्रों पर किया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर आई हुयी गर्भवती और धात्री महिलाओं को स्तनपान की आवश्यकता और महत्व के बारे में जानकारी दी गयी।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि नियमित टीकाकरण का आयोजन आंगनबाड़ी एवं अतिरिक्त केन्द्रों पर किया गया। टीकाकरण कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गर्भवती माताओं को कोरोना संक्रमण से बचाव व टीकाकरण की जरूरत और महत्व के बारे में लोगों को जागरूक किया। आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ अतिरिक्त केंद्रों पर भी आशा व एएनम ने लाभार्थी अथवा उसके अभिभावकों में भी बुखार, सर्दी-खांसी के लक्षण की भी जांच की। इसके साथ ही व्यक्तिगत दूरी, मुंह को ढककर रखने व नियमित 40 सेकेंड तक हाथ धोने आदि की भी जानकारी दी गयी।
छह माह तक नियमित स्तनपान का बताया महत्व: डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया प्रारंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो सकता है। इसलिए 0 से 6 माह के बच्चे को सिर्फ स्तनपान और 6 माह के बाद शिशुओं को स्तनपान के साथ पौष्टिक ऊपरी आहार देना चाहिए। 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से बचाया जा सकता है।
टीके से बच्चों की होती है सुरक्षा: डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि टीका एक जीवनरक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें। बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है।
नियमित टीकाकरण कई तरह की बीमारियों से होता है बचाव: डॉ. चौधरी ने बताया शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के रूटीन इम्यूनाइजेशन, उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है। साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके।  बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है।

कोरोना वायरस के संक्रमण से रहें सतर्क, लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत

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-हवा में भी फैल रहा है कोरोना संक्रमण,हो जाएं सावधान

-खुद भी बरतें सावधानी और लोगों को भी करें जागरूक

-कोरोना से डरें नहीं,सावधानी बरतकर दें बीमारी को मात

-व्यक्तिगत स्वच्छता एवं बातचीत के दौरान रखें शारीरिक-दूरी का ख्याल

लखीसराय,12अगस्त,2020

कोरोना वायरस का बढ़ते संक्रमण अब शहर से चलकर गाँव की ओर पहुँच चुका है।जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र में भी रहने वाले बड़ी संख्या में लोग संक्रमित होने लगे हैं।दरअसल गाँव में रहने वाले लोग यह सोच कर बेपरवाह हैं कि यह वायरस का संक्रमण सिर्फ शहर में है।जबकि संक्रमण हवा में फैल रहा है।इसलिए यह शहर से लेकर गाँव तक किसी भी लोगों को अपने दायरे में ले सकते हैं।ऐसे में हमें सावधानी बरतने एवं स्वास्थ विभाग के आवश्यक गाइलाइन व निर्देशों का पालन करने की बेहद जरूरी है ताकि इस संक्रमण के बढ़ते जाल को तोड़ा जा सके।हालाँकि इसके लिए पंचायत स्तर पर पंचायत प्रतिनिधि भी अभियान चलाकर लोगों को बचाव से संबंधित आवश्यक जानकारी दे रहे हैं और लोगों को जागरूक कर रहें हैं ताकि लोगों को संक्रमण के दायरे से बचाया जा सके।हमें कोरोना वायरस से घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि  कुछ आवश्यक सावधानियाँ बरत कर इस वैश्विक महामारी को मात दें सकते हैं।

पंचायत के लोगों को जागरूक कर रहें हैं मुखिया प्रतिनिधि:

टोड़लपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि पप्पू यादव अपने पंचायत के विभिन्न गाँवो में अभियान चलाकर लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देकर जागरूक कर रहें हैं।मुखिया प्रतिनिधि ने बताया कि वह  जिले में संक्रमण की शिकायत आने के बाद से ही लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि उनका पंचायत संक्रमण के दायरे से बाहर रहें।इसके घर-घर जाकर लोगों को बचाव की उपाय का पालन करने के लिए वह  प्रेरित कर रहे हैं और पंचायत में मास्क एवं साबुन का भी लगातार लोगों के बीच वितरण करा रहे हैं एवं लोगों से मास्क व साबुन का उपयोग करने का अपील भी कर रहे हैं।

वहीं वार्ड प्रतिनिधि संजीव कुमार ने बताया हर लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। वह इसके लिए लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।उन्होंने कहा  जन-जन के सहयोग से कोरोना को मात दे सकते  हैं।इसके लिए उन्होंने हर लोगों से आवश्यक सावधानियाँ बरतने का अपील किया है।साथ ही बचाव को लेकर लोगों के बीच अपने वार्ड में मास्क व साबुन का घर-घर वितरण करा चुके हैं।इस दौरान लोगों को मास्क का उपयोग करने एवं साबुन से हाथ धोने के जागरूक भी किया गया।

इन बातों का रखें ख्याल:

व्यक्तिगत स्वच्छता और किसी से बातचीत के दौरान शारीरिक-दूरी का रखें ख्याल

नियमित रूप से शौचालय का उपयोग एवं शौचालय का करें साफ-सफाई

दिन में कई बार अच्छी तरह हाथ धोएँ

सार्वजनिक जगहों पर न थूकें

पीने वाली पानी को साफ जगह पर और सुरक्षित रूप से रखें

हमेशा मास्क का उपयोग करें और पर्याप्त दूरी बनाऐ रखें

लोगों से हाथ मिलाने से बचें

अपनी ऑख,नाक,और मुँह को न छुएं

अनावश्यक यात्रा ना करें

समूह में ना बैठे,बड़े समारोह में भाग ना लें

सामूहिक भीड़-भीड़ वाले जगह पर ना जाएं

कंगारू मदर केयर को अपनाऐ,इससे शिशु के स्वस्थ शरीर का होता है निर्माण

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-माँ की धड़कन सुनकर शिशु को राहत का होता है एहसास,मिलता है आराम
-शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से शिशु में होती है गर्माहट
लखीसराय,12अगस्त,2020
समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु ना सिर्फ  कम वजन के होते हैं, बल्कि ऐसे शिशु जन्म लेने बाद कई तरह के समस्याओं से घिर जाते हैं।इस स्थिति में लापरवाही करना तो और मुश्किल बढ़ा देती है।खासकर इस कोविड-19 के दौर में तो और ऐसे शिशु कई समस्याओं से घिर जाते हैं।ऐसे में इस तरह के शिशुओं का विशेष ख़्याल रखना जरूरी है। इस तरह के बच्चे के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर तरीके को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है,जिससे शिशु का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण:
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया  कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास का निर्माण करने में काफी सहयोग करता है।बच्चा जब अपने माँ के नजदीक रहता है तो वह खुद तनावमुक्त महसूस करता है।जिससे बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण होता है।यह बिना खर्च सबसे अच्छा उपाय है।
क्या कंगारू मदर केयर,इसका उपयोग किस तरह होता है:
कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है,जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है।इससे शिशु का वजन बढ़ता है।स्तपान बेहतर होता है।बच्चे का तापमान सही रहता है और वह इन्फेक्शन से दूर रहता है।बच्चे और माँ के बीच रिश्ता मजबूत होता है।इसमें शिशु को माँ के सीने पर सीधी पाॅजिशन में  चिपकाकर रखा जाता है।इस स्थिति में माँ का छाती पूरी तरह खुली होनी चाहिए ताकि माँ की शरीर का गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सके।इससे शिशु का तापमान सही रहता है। इसे माँ के अलावा शिशु के परिवार के अन्य महिला व पुरुष भी उपयोग कर सकते है।सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर का सुविधा देने वाले स्वस्थ हों।
इन बातों का रखें ख़्याल:
– बच्चे को साफ़ हाथों से ही छुएं
– यदि माँ  बुखार, सर्दी या खाँसी से पीड़ित हो तो शिशु को कंगारू मदर केयर नहीं दें
– घर का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति नवजात को कंगारू मदर केयर प्रदान कर सकते हैं।

कोरोना ने किया व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन

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बिना मास्क लगाए लोग घरों से निकलने से कर रहें परहेज
बाहर से घर आने के बाद सेनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे
भागलपुर, 12 अगस्त
तिलकामांझी के सुरखीकल के रहने वाले राकेश कुमार झा घर से निकलते वक्त मास्क पहनना नहीं भूलते हैं। वापस आने पर हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल जरूर करते हैं। इतना ही नहीं, घर के आसपास के रहने वाले लोगों को भी मास्क पहनने और हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। उन्हें इस काम में मोहल्ले के अन्य लोगों का भी सहयोग मिल रहा है।
  यह बदलाव मोहल्ले के लोगों में कोरोना ने ला दिया है। अभी कुछ महीने की ही बात है। ये लोग बेफिक्र होकर घूमा करते थे। न सेनिटाइजर का इस्तेमाल करते थे और न ही मास्क लगाते थे। आखिर ये बदलाव कैसे आया? राकेश कहते हैं जिस तरह कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, उसमें लोगों को खुद भी सजग रहना होगा। सिर्फ सरकार के भरोसे हम कोरोना को नहीं हरा सकेंगे, बल्कि सरकार को हमलोग सहयोग कर कोरोना की प्रति लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है। शुरुआत में लोग इसकी गंभीरता को नहीं समझ सके थे। इसी वजह से सतर्कता नहीं बरत रहे थे, लेकिन जैसे ही मोहल्ले के कुछ लोगों की मौत हुई और संक्रमितों की संख्या बढ़ी, इसके बाद वे लोग सतर्क हो गए हैं।
मोहल्ले के लोगों को भी कर रहे सजग: यह कहानी सिर्फ राकेश की ही नहीं है। उन्हीं के मोहल्ले के रहने वाले मिहिर मिश्रा की दिनचर्या काफी बदल गई है। वह आसपास के रहनेवालों को मास्क और सेनिटाइजेशन के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही सामाजिक दूरी का भी पाठ पढ़ा रहे हैं। मिहिर कहते हैं कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अब काफी बड़ी होती जा रही है। इसमें लोगों का सहयोग बहुत आवश्यक है। यही कारण है कि वह
 अब खुद के साथ लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं।
कोरोना के साथ जीने की डालनी होगी आदत: मिहिर के पड़ोस में रहने वाले पंकज कुमार तो घर के सामने से जाने वालों को मास्क पहनने की ताकीद करना नहीं भूलते हैं। झुंड में जा रहे लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने की अपील जरूर करते हैं। पंकज कहते हैं कि अब सबको  कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी। चार महीने से ज्यादा समय बीत गए, लेकिन अबतक इस पर लगाम नहीं लग सकी है। इसलिए हमलोगों को न सिर्फ खुद सतर्क रहना चाहिए, बल्कि पड़ोस के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करना चाहिए।
मास्क लगाए लोगों को नहीं आने देते हैं दुकान: इसी मोहल्ले के सोनाजी साइफर कैफे चलाते हैं। बिना मास्क के किसी को भी वह अपनी दुकान में नहीं घुसने देते हैं। साथ ही दुकान में घुसते के साथ ही उसे हैंड सेनिटाइजर देना नहीं भूलते हैं। सोनाजी कहते हैं दुकान में बहुत तरह के लोग आते हैं। कौन-कहां से आता है, यह पता नहीं रहता है। इसलिए दुकान में घुसने से पहले वह लोगों को हैंड सेनिटाइज करने के लिए कहते हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सभी की जिम्मेदारी बनती है। इसलिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
मोहल्ले वाले सराहनीय काम कर रहे हैं: डीपीएम डॉ. फैजान अशर्फी कहते हैं कि इस तरह से लोगों का जागरूक होना बहुत ही सराहनीय कदम है। अगर समाज के लोगों का इस तरह से सहयोग मिलेगा तो कोरोना को हम जरूर हराकर ही दम लेंगे। अभी कोरोना को जागरूकता से ही हम मात दे सकते हैं।

भागलपुर के निजी अस्पतालों में भी होगी कोरोना जांच

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जिले के दो निजी अस्पतालों को मिली अनुमति
विभाग जांच के रेट को जल्द करेगा निर्धारित
भागलपुर, 11 अगस्त
जिले के दो निजी अस्पतालों में भी अब कोरोना की जांच होगी। स्वास्थ्य विभाग ने इसे हरी झंडी दे दी है। इससे कोरोना की जांच में और तेजी आएगी, जिससे कोरोना की चेन को तोड़ने में विभाग को मदद मिलेगी। अभी जिले में प्रतिदिन तीन हजार लोगों की जांच हो रही है। निजी अस्पतालों में भी जांच होने से इसकी संख्या में और बढ़ोतरी होगी।
सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि जिले में कोरोना की जांच में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एक सप्ताह पहले तक एक हजार लोगों की जांच होती थी, जो अब बढ़कर तीन हजार के पार जा चुकी है। जिले के सभी 22 सरकारी अस्पतालों में अभी रोज 100 से अधिक लोगों की कोरोना जांच हो रही है। जांच के बाद आधे घंटे के पहले ही रिपोर्ट आ जा रही है। पॉजिटिव आने वाले इच्छुक मरीजों को घर में सुविधा रहने पर होम आइसोलेशन में भेजा जा रहा है। इस दौरान उन्हें एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग का किट भी मुहैया कराया जा रहा है। वहीं सामान्य मरीजों को घंटाघर स्थित कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को आईसीयू में या फिर मायागंज अस्पताल भेजा रहा है।
ग्लोकल और सिटी अस्पताल को मिली जांच की अनुमति: स्वास्थ्य विभाग ने जिले के ग्लोकल अस्पताल और सिटी अस्पताल को कोरोना जांच की अनुमति दी है। सिविल सर्जन ने बताया कि दोनों ही अस्पतालों को किट की व्यवस्था खुद करनी होगी तथा जांच रेट जल्द ही निर्धारित कर दिया जाएगा। इसके बाद मरीज इन दोनों अस्पतालों में जाकर अपनी जांच करा सकेंगे।
पहले एक लैब को भी मिल चुकी है अनुमति: जिले में कोरोना जांच के लिए एक निजी लैब (विम्टा लैब) को अनुमति मिल चुकी है। रेट का निर्धारण होने के बाद वहां पर जल्द ही कोरोना मरीजों की जांच शुरू हो जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि अगर कोई निजी जांच घर में जांच कराना चाहे तो वह वहां भी जाकर जांच करा सकेगा। साथ ही सरकारी अस्पतालों में तो जांच की सुविधा पहले से ही है।
सरकारी गाइडलाइन का करना होगा पालन: निजी अस्पतालों और जांच घरों में कोरोना मरीजों के सैंपल लेने के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पालन करना होगा। जांच कराने के लिए आने वाले लोगों और टेक्नीशियन या फिर अस्पताल के अन्य कर्मियों को दो गज की दूरी का पालन करना होगा। साथ ही सभी लोगों को मास्क और ग्लब्स भी अनिवार्य रूप से पहनना होगा। अस्पतालों व जांच घरों में साफ सफाई का भी पूरा ध्यान रखना होगा।

सुरक्षित रहकर मनाएं जन्माष्टमी का त्यौहार , धर्मगुरुओं ने की अपील

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• हर बच्चे को मिले स्वस्थ, सुरक्षित जीवन का अधिकार
• संक्रमण से बचाव के लिए साफ़-सफाई पर दें ध्यान
• त्यौहार में भी कोरोना रोकथाम के नियमों का करें पालन
• बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन (बीआईएफसी ) के धर्मगुरुओं ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं को दी बधाई एवं सुरक्षित तरीक़े से उत्सव मनाने के लिए की अपील
पटना, 11 अगस्त 2020: कोरोना संक्रमण काल ने न सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाला है बल्कि कई धार्मिक त्यौहारों में भी खलल डाली है. भगवान् श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे भारत में बहुत उल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार यह त्यौहार ऐसे दौर में आया है, जब पूरी दुनियां कोविड-19 वायरस के चपेट में है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर बिहार सरकार ने 16 अगस्त तक लॉक डाउन  की घोषणा की है और भारत सरकार के गृह मंत्रालय की अधिसूचना में भी 16 अगस्त तक सभी मंदिरों को आम जनता के लिए बंद रखने का भी निर्देश दिया है |
धर्म गुरुओं ने की अपील:
बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन (बीआईएफसी) बिहार के सभी प्रमुख धार्मिक तथा अध्यात्मिक संगठनों का स्वैच्छिक मंच है। बीआईएफसी सदस्य गायत्री परिवार के डा. अशोक कुमार, आत्म कल्याण केंद्र से आचार्य सुदर्शन जी महाराज और ब्रह्मकुमारी इस्वरीय विश्वविद्यालय से राजयोगिनी संगीता बहन, बी के ज्योति बहन ने लोंगों से अपील करते हुए  कहा  है कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी लोग घरो में ही मनाए और संक्रमण से सबको बचाएँ। साथ ही मंदिर के बाहर व अंदर बिल्कुल भीड़ न लगाए; मास्क पहन कर ही घर से बाहर निकले । दही हांडी जैसी सामूहिक गतिविधियों का आयोजन नहीं करें. उन्होंने इस त्योहार पर बिहार के हर बच्चे और बच्ची के स्वस्थ , सुरक्षित जीवन और ख़ुशियों भरे बचपन की कामना भी की. उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण का जन्मोत्सव सभी को हर्ष और उल्लास से भर देता है एवं श्री कृष्ण की बाल-लीला के विभिन्न प्रसंग भाव-विभोर करने वाले होते हैं.
धर्म-गुरुओँ ने माता और शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए दिया संदेश :
• बच्चों को जन्म के पहले घंटे और छः महीने तक सिर्फ माँ का ही दूध पिलायें
• गर्भवती माँ और छोटे बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण कराएँ
• संक्रमण से बचने के लिए साफ़ सफ़ाई पर अत्यधिक ध्यान दें
• शिशु को साफ़ हाथों से छुएँ
• शिशुओं की सफाई करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं
एकजुटता संक्रमण से लड़ने का कारगर हथियार:
यूनीसेफ  बिहार की संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने बताया कि बिहार इंटर्फ़ेथ फ़ोरम बच्चों के अधिकारों व खुशहाली के लिए संकल्पित है. साथ ही  हमें बहुत ख़ुशी है कि सभी धर्म और आध्यात्मिक संगठन एक जुट हो कर  बच्चों व महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा व सहभागिता के लिए अपने समुदायों को प्रेरित कर रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान लोगों को लगातार सुरक्षित रहने के लिए अपील कर रहें है। साथ ही भय, चिंता, कलंक, भेद-भाव और अंध-विश्वास मिटाने के लिए लोगों को समझा रहें हैं. उन्होंने कृष्ण जन्मोत्सव सुरक्षित तरीके से, शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए त्यौहार मनाने की अपील की. मास्क लगाकर और साबुन से बार-बार हाथ धोकर ही हर कार्य करने को संक्रमण से बचने का बहुत प्रभावित तरीका बताया.
चाइल्ड लाइन के टोल फ्री नंबर या 104 पर करें संपर्क:
इस बार लोग घर में रहकर भगवान की भजन-कीर्तन करें। इस महामारी को दूर करने की प्रार्थना करें और लोगों में ईश्वरीय शक्ति, आत्मबल, आशा और सद्भाव का संचार करें। जरूरतमंदो, ख़ासतौर से बच्चे, बूढ़े, वंचित समुदायों का विशेष ध्यान रखें । किसी भी जानकर के लिए सरकार की हेल्प लाइन 104 या चाइल्ड लाइन नंबर 1098 पर सम्पर्क करें. सुरक्षित रहकर त्यौहार मनाएं, स्वयं भी सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित बनायें.

कटोरिया में कोरोना के खिलाफ अभियान तेज

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-कोरोना प्रभावित क्षेत्र को किया जा रहा है सेनिटाइज
आशा एवं एएनएम लोगों से मास्क पहनने की कर रहीं अपील
बांका, 11 अगस्त
जिले के कटोरिया प्रखंड में कोरोना के बढ़ते मामले के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। कोरोना जांच की संख्या तो बढ़ा ही दी गई है। अब दूसरे विकल्प पर भी विभाग जोर दे रहा है। इसके तहत क्षेत्र के लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान को तेज कर दिया गया है। साथ ही प्रखंड के जिन क्षेत्रों से भी कोरोना के मरीज मिल रहे हैं, वहां पर सेनिटाइजेशन का काम भी युद्धस्तर पर किया जा रहा है।
रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने मंगलवार को बताया  हाल के दिनों में प्रखंड क्षेत्र में कोरोना मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इसे ध्यान में रखते हुए जागरूकता अभियान को तेज किया गया है। साथ ही सेनिटाइजेशन का काम भी जोरों पर है। रेफरल अस्पताल में कोरोना की जांच पहले ही बढ़ा दी गई है। अब प्रतिदिन यहां पर 100 से अधिक लोगों की जांच हो रही है। सभी की रिपोर्ट आधे घंटे से पहले आ जा रही है।
आशा और एएनएम कर रहीं जागरूक: प्रखंड क्षेत्र के लोगों को आशा कार्यकर्ता और अस्पताल में तैनात एएनएम जागरूक कर रही हैं। ये लोग घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं। साथ ही लोगों से घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहनने की अपील कर रही हैं। बहुत जरूरत पड़ने पर ही लोगों से घरों से निकलने को कहा जा रहा है। साथ ही बाहरी सामान- जैसे सब्जी और फल को अच्छी तरह से गर्म पानी में धोकर उसका सेवन करने की लोगों से अपील कर रही हैं।
सामाजिक दूरी का करें पालन: सरकार के तमाम प्रयास के बावजूद लोग बाजारों में भीड़ लगा रहे हैं। इसे लेकर लोगों से हर हाल में सामाजिक दूरी का पालने की अपील की जा रही है। घर में सदस्यों को एक-दूसरे के बीच दो मीटर की दूरी रखने की अपील की जा रही है। आशा और एएनएम लोगों को बता रही हैं कि जागरूकता से ही कोरोना को मात देना संभव है। इसलिए सामाजिक दूरी का पालन हर हाल में करें।
सर्दी खांसी होने पर रेफरल अस्पताल आएं: आशा और एएनएम घर-घर जाकर लोगों से सर्दी और खांसी या फिर कोरोना के कोई भी लक्षण दिखने पर  तत्काल रेफरल अस्पताल आने की अपील कर रही हैं। अभी बारिश का मौसम चल रहा है, इसलिए सर्दी और खांसी होना आम बात है। इसलिए लोगों से अस्पताल आकर इलाज करवाने की अपील की जा रही है। लोगों से खुद ही डॉक्टर नहीं बनने की अपील की जा रही है। साथ ही बारिश में भीगने से बचने की सलाह दी जा रही है।
 इन बातों का रखें ख्याल
1. मुंह ढके बिना न छीकें। खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में दिक्कत जैसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। डॉक्टर्स से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
3. अगर आप कोरोना वायरस का शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं. यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।

जिले के सभी प्रखंडों में होगा अन्नप्राशन दिवस का आयोजन

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– सेविकाओं द्वारा लाभार्थी के घर भ्रमण कर होगा अन्नप्राशन
 – जिलाधिकारी ने पत्र द्वारा दिये जरूरी निर्देश
 – पूरक पोषाहार पर दी जाएगी जानकारी
 – धात्री माताओं को शिशु कुपोषण एवं कोविड-19 के प्रति किया जाएगा जागरूक
लखीसराय /11 अगस्त : जिले के सभी प्रखंडों में आँगनवाड़ी सेविकाओं द्वारा गृह–भ्रमण कर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन आगामी 19 अगस्त को होगा। इस संबंध में जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने पत्र द्वारा जिले आईसीडीएस विभाग को निर्देश जारी किया है। कोविड -19 के संक्रमण एवं बचाव के मद्देनजर आंगनवाड़ी केन्द्रों पर समुदाय आधारित गतिविधियों का आयोजन बाधित हुआ था, जिसको पुनः आयोजित कराया जा रहा है। पत्र के द्वारा जिलाधिकारी ने कहा है कि कोविड -19 के संक्रमण को देखते हुए सभी आंगनवाड़ी सेविकायें लाभार्थी के घर भ्रमण कर अन्नप्राशन दिवस का आयोजन करें। साथ ही धात्री माताओं को शिशु कुपोषण एवं  कोविड -19  के संक्रमण तथा बचाव के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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जिला कार्यक्रम पाधिकारी आईसीडीएस कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया जिलाधिकारी के निर्देशानुसार आगामी 19 अगस्त को लाभार्थी के घर भ्रमण कर ही अन्नप्रासन दिवस का आयोजन होगा । इस अवसर पर 6 माह से ऊपर के बच्चों को पूरक पोषाहार दिया जाएगा एवं शिशु के 6 माह पूरे होने के बाद उनके बेहतर पोषण के लिए जरुरी पूरक पोषाहार के विषय में जानकारी भी दी जाएगी । इस दौरान अन्य धात्री माताओं को भी पूरक पोषाहार के विषय में एवं साफ़- सफाई के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही धात्री माताओं को उबली हुई सब्जी, दलिया एवं अन्य पूरक आहार के बारे में भी बतया जाएगा ।
6 माह के बाद स्तनपान के साथ दें पूरक आहार:  जिला कार्यक्रम पाधिकारी आईसीडीएस ने बताया कि बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 6 माह तक का सिर्फ स्तनपान एवं इसके बाद स्तनपान के साथ पूरक पोषाहार बहुत जरुरी होता है।  6 माह से 23 माह तक के बच्चों के लिए यह अति आवश्यक है।  इस दौरान शरीर एवं दिमाग का विकास तेजी से होना शुरू होता है. जिसके लिए स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की भी जरूरत होती है।  उन्होंने बताया कि इसके लिए नियमित रूप से धात्री माताओं को इसके विषय में जानकारी दी जाती है एवं पूरक पोषाहार भी वितरित किया जाता है।
ऐसे दें बच्चों को पूरक आहार:  6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल -चावल, दाल  में रोटी मसलकर अर्ध ठोस (चम्मच से गिराने पर सरके, बहे नही) , खूब मसले साग एवं फल  प्रतिदिन दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना एवं  धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नास्ते में देना चाहिए. साथ ही  स्तनपान जारी रखना चाहिए।
पूरक पोषाहार है जरुरी :  जिला कार्यक्रम पाधिकारी आईसीडीएस ने बताया समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बेहतर पोषण के लिए पोषाहार वितरित किया जाता है।  पूरक पोषाहार के विषय में सामुदायिक जागरूकता के आभाव में बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं।  इससे बच्चे की शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास भी अवरुद्ध होता है एवं अति कुपोषित होने से शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी होती है।