अस्पतालों में “मेय आई हेल्प यू बूथ” की होगी स्थापना, मरीजों के परिजनों के लिये होगा वेटिंग हॉल

0
कोविड 19 उपचाराधीन मरीजों के चिकित्सकीय सुविधा संबंधित जानकारी प्रदान करने की दिशा में पहल
• 24×7 घंटे क्रियाशील रहेगा मे आई हेल्प यू बूथ
जमुई  , 11  अगस्त: कोविड 19 की जांच एवं इस से ग्रसित मरीज़ों के उपचार के लिए संबंधित अस्पताल में उनके भर्ती होने, समुचित चिकित्सिया  सुविधा संबंधित जानकारी प्रदान करने, मरीज़ों के उपचार की अन्य जटिलताओं को दूर कर मरीज़ हित में व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए सभी अस्पतालों, कोविड केयर सेंटर, डेडीकेटेड कोविड केयर सेंटर  एंव डेडीकेटेड कोविड हॉस्पिटल में रिसेप्शन या मेय आई हेल्प यू बूथ की स्थापना कर संचालित किया जाना है.  राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा निर्देश दिया है.
कोरोनावायरस के संक्रमण के प्रसार की  रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग  युद्ध स्तर पर काम कर रहा है.  कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में स्वास्थ्य विभाग की ओर से  एक नई पहल की गई है. जारी पत्र में कहा गया है कि प्रतिनियुक्त कर्मियों का यह दायित्व होगा कि वे अस्पताल में आने वाले मरीजों की भर्ती सरल तरीके से कर समुचित उपचार करें.  मेय आई हेल्प यू बूथ की मदद से अस्पताल में भर्ती होने की प्रक्रिया को पूर्ण करने में मरीज के परिजनों को किसी प्रकार की जटिलता अथवा असुविधा महसूस नहीं हो.
मरीजों के परिजनों के बैठने की सुविधा:
जारी पत्र में निर्देश दिया गया है कि अस्पतालों में मेय आई हेल्प यू बूथ के साथ-साथ मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए सुव्यवस्थित वेटिंग हॉल की व्यवस्था किया जाए। अस्पताल परिसर में सीसीटीवी का अधिष्ठापन किया जाए जिसका कंट्रोल एवं सेंट्रल मॉनिटर रिसेप्शन काउंटर पर लगा हुआ हो. मेय आई हेल्प यू बूथ पर प्रतिनियुक्त कर्मी संबंधित मरीज से वार्ता कर उनके स्वास्थ संबंधित जानकारी व स्थिति से परिजनों को अवगत कराएंगे.
इंटरकॉम के माध्यम से मरीजों से होगी वार्ता:
अस्पतालों के रिसेप्शन काउंटर पर एक दूरभाष यंत्र युक्त मोबाइल की व्यवस्था की जाएगी. अस्पताल के अंदर चिकित्सक एवं संबंधित पाराचिकित्सा कर्मियों आदि से वार्ता कर मरीज के परिजनों को मरीज की स्थिति से अवगत कराने के लिए इंटरकॉम की व्यवस्था की जाएगी. आवश्यक मरीज के परिजन को इंटरकॉम के माध्यम से मरीज से वार्ता भी कराया जाएगा. इस व्यवस्था से मरीज के परिजन को अनावश्यक रुप से वार्ड में जाने की आवश्यकता नहीं होगी. साथ ही मरीज को किसी प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उनके परिजन द्वारा इस काउंटर पर जमा करा दिया जाएगा और प्रतिनियुक्त कर्मी द्वारा संबंधित मरीज तक उसे पहुंचाने की व्यवस्था होगी.
उच्च स्तरीय संस्थान में रेफर किए जाने की औपचारिकता भी होगी पूरी:
मरीज को बेहतर चिकित्सा के लिए उच्च स्तरीय संस्थान में रेफर किए जाने की स्थिति में को पूर्ण करवाते हुए जिला से संबद्ध उच्चस्तरीय संस्थान के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। ताकि मरीजों के भर्ती होने में कोई कठिनाई ना हो पाए. रेफर की स्थिति में मरीज़ को एंबुलेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराई जाएगी.
हेल्प बूथ संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की:
अस्पताल के मे आई हेल्प यू बूथ को 24 घंटे के रूप में संचालित करने का दायित्व जिला प्रशासन का होगा एवं इसके लिए जिला स्तरीय आवश्यक कर्मियों की प्रतिनियुक्ति जिला पदाधिकारी के अवसर से की जाएगी. इस डेस्क पर जिला के विभिन्न विभागों के कर्मियों प्रतिनियुक्त किया जाएगा. डेस्क पर तैनात कर्मियों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक  सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी.
3 दिनों के अंदर व्यवस्था शुरू करने का निर्देश:
सभी अस्पतालों में 3 दिनों के अंदर मेय आई हेल्प यू बूथ की स्थापना करने का निर्देश दिया गया है. इसकी स्थापना में होने वाले व्यय के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर से बजट का आवंटन किया जाएगा परंतु तत्काल आकस्मिकता की स्थिति में इस पर होने वाले व्यय का वहन एनएचएम के कोविड-19 निधि से करने और विभागीय आवंटन प्राप्त होते ही इस राशि की प्रतिपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं.

कोरोना टेस्ट में तेजी लाने को लेकर पीएचसी स्तर पर हो रहा है जाँच 

0
-संक्रमित मरीज़ो की हो रही है पहचान
रेपिड एंजिन  किट के साथ भीटीएम एवं भीएलएम से  हो रही जाँच
लखीसराय,10 अगस्त
जिले के  हर पीएचसी में कोरोना जाँच के लिए ऐंटीजन किट एवं भीटीएम एवं भीएलएम  उपलब्ध कराने के बाद स्वास्थ्य विभाग जाँच कार्य में तेजी लाने को लेकर आवश्यक रणनीति कार्य में जुट गई है। ताकि तय समय-सीमा के अंदर अधिक से अधिक लोगों का जाँच हो सके। इसको लेकर अपर उपाध्यक्ष सह सहायक अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने सभी प्राथमिक स्वास्थ केंद्र के प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।  एक पीएचसी में एक दिन में कितने लोगों की जाँच की जाएगी इसका संख्या भी निर्धारित की गई। साथ ही जाँच में पॉज़िटिव पाए जाने वाले मरीज को  होमक्वारेंटाइन में रहने की अनुमति आवयशक निर्देश के साथ ही दी जाती है । साथ ही उन्हें होमक्वारेंटाइन कराने के लिए आवश्यक पहल करने को भी कहा जाता है। यह निर्देश भी दिया गया है कि अगर किसी व्यक्ति में कोरोना का लक्षण हैं। किन्तु उनका एंटीजन किट से जाँच में रिपोर्ट निगेटिव आती है तो ऐसे लोगों के जाँच के सैंपल लेकर जाँच केंद्र भेजना है और कन्फर्मेशन के लिए उनका आरटी-पीसीआर टेस्ट भी किया जाना है।
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय  ने बताया जिले के सभी पीएचसी में  आवश्यक निर्देश एवं गाइलाइन का पालन करते हुए लोगों का कोरोना जाँच किया जा रहा है एवं कार्य में तेजी लाने को लेकर आवश्यक पहल की जा रही है ।साथ ही जाँच कराने आए लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े, इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। ताकि पीएचसी में जाँच कराने में लोगों को किसी प्रकार का संदेह नहीं हो। वहीं लोग भी जाँच कराने के लिए पीएचसी आ रहें हैं।
पीएचसी  स्तर पर हुआ लक्ष्य निर्धारित :
डॉ. आत्मनन्द राय  ने बताया जाँच कार्य में तेजी लाने को लेकर जिले के सभी पीएचसी में एक दिन जाँच होने वालों लोगों की संख्या निर्धारित की गई है। हर पीएचसी स्तर पर रेपिड एंजिन किट से जाँच तो हो ही रही है । उसके साथ भीटीएम एवं भीएलएम के द्वारा भी जाँच की जा रही है जिसका प्रबंधन पीएचसीको करना है।
जाँच के दौरान शारीरिक दूरी  का रखा जाएगा ख्याल :
डॉ. आत्मनन्द राय  ने बताया जाँच के दौरान पीएचसी में शारीरिक दूरी  का पूर्ण रूप से ध्यान रखा जाएगा। ताकि कोई भी व्यक्ति किसी से संक्रमित नहीं हों। इसको लेकर भी पीएचसी में प्रबंधन सारी तैयारियाँ पूरी कर चुकी है। साथ ही  पॉज़िटिव मरीजों को आवश्यक चिकित्सा परामर्श के साथ होमक्वारेंटाइन किया जाएगा।

कंटेनमेंट जोन को कोरोना मुक्त करने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

0
प्रतिदिन 100 लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं कंटेनमेंट जोन से
सोमवार को डारा पंचायत के जगई गांव से लिए गए सैंपल
बांका,  10 अगस्त:
स्वास्थ्य विभाग जिले के कंटेनमेंट क्षेत्र को कोरोना मुक्त करने में पूरी मुस्तैदी से जुट गया है. इसके तहत प्रतिदिन 100 लोगों के सैंपल कंटेनमेंट जोन से लिए जा रहे हैं. सोमवार को डारा पंचायत के जगाई गांव में 100 लोगों के सैंपल लिए गए. हालांकि किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई. सभी लोग निगेटिव थे. लेकिन शनिवार और रविवार को हीरमोती में भी 100-100 लोगों के सैंपल लिए गए थे. वहां जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई उसे लकड़ीकोला स्थित कोविड केयर सेंटर में इलाज के लिए भर्ती किया गया. शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर सुनील कुमार चौधरी ने कहा कि हमलोगों को विभाग की ओर से कंटेनमेंट जोन में अभियान तेज करने को कहा गया है. इसी के तहत प्रतिदिन 100 लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं. इसके लिए एक टीम बनाई गई है,जिसमें डॉक्टर और अन्य कर्मी शामिल है. स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्य प्रतिदिन कंटेनमेंट जोन के एक क्षेत्र में शिविर लगाकर 100 लोगों के सैंपल लेते हैं. जिसकी रिपोर्ट निगेटिव रहती है, उसे घर भेज दिया जाता है और जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव रहती है, उसे लकड़ीकोला स्थित कोविड केयर सेंटर में भर्ती कर दिया जाता है. वहीं गंभीर मरीज को सदर अस्पताल स्थित आईसीयू में भर्ती किया जाता है.
होम आइसोलेशन में जाने वाले को दिया जाता है किट: जांच के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को होम आइसोलेशन भेजते वक्त स्वास्थ्य विभाग का किट उपलब्ध कराया जाता है. किट में दवा दी जाती है, जिसका सेवन मरीज को घर में रहते हुए करना होता है. साथ ही होम आइसोलेशन में बरती जाने वाली सावधानी से भी मरीज को आगाह किया जाता है. किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीज को डॉक्टर से संपर्क करने के लिए कहा जाता है.
जांच बढ़ने से कोरोना के संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद: डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में कोरोना की जांच बढ़ने से इसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी. जांच के बाद लोगों को पता चल जाएगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं. संक्रमितों की पहचान होने से लोग उससे दूरी बनाकर अपना बचाव कर सकेंगे. वहीं चिह्नित मरीज भी होम आइसोलेशन में रहकर खुद को स्वस्थ कर पाएंगे. मरीज के गंभीर होने पर उसे कोविड केयर सेंटर या फिर सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया जाएगा.
सरकारी गाइडलाइन का किया जा रहा पालन: जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोरोना मरीजों की जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है. स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लब्स के साथ पीपीई कीट पहनकर ही मरीजों की जांच कर रहे हैं. इस दौरान हर दो मीटर की दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया है. इसे लेकर पूरी व्यवस्था की गई है. इलाज के दौरान मरीज तो सामाजिक दूरी का पालन कर ही रहे हैं. साथ में स्वास्थ्य कर्मी भी इसका ध्यान रख रहे हैं.
 इन बातों का रखें ख्याल:
1. मुंह ढके बिना न छीकें। खांसी या छींक आने के दौरान अपने मुंह को टिशू पेपर से कवर करें और उसे तुरंत किसी बंद डस्टबिन में फेंक दें।
2. अगर आपको बुखार, खांसी और सांस में लेने में दिक्कत जैसी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर्स से संपर्क करें। डॉक्टर्स से सलाह लेते वक्त मुंह को मास्क या कपड़े से अच्छे से ढकें।
3. अगर आप कोरोना वायरस का शिकार हैं तो अपना ध्यान रखने के साथ-साथ किसी भी व्यक्ति के नजदीक न जाएं। इससे बढ़ते खतरे को रोकने में आसानी होगी।
4. अपने हाथों से आंख, मुंह या नाक पर बार-बार हाथ न लगाएं. यदि ऐसा करते भी हैं तो साबुन या सेनिटाइजर से हाथों को अच्छी तरह साफ करें।
5. सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें. राह चलते यूं ही सकड़ों पर न थूकें।

जिले के सभी प्रखण्ड में गोदभराई रस्म का हुआ आयोजन

0
 शारीरिक दूरी का रखा गया खास ख्याल
गर्भावस्था में अच्छे पोषण पर दी गयी जानकारी
आखिरी दिनों में बेहतर पोषण शिशु के स्वस्थ के लिए जरुरी
लखीसराय  / 10 अगस्त : कोरोना संकट के बीच  जिले के सभी प्रखंड में गोदभराई की रस्म का आयोजन किया गया. इस बिधिवत रस्म का शुभारंभ जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आईसीडएस, कुमारी अनुपमा सिन्हा ने हलसी प्रखण्ड के आंगनवाड़ी संख्या 13 तथा 5 में लाभार्थी के घर जा कर की. इस दौरान सात से नौ महीने की गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गयी. गर्भवती महिलाओं व बच्चों के देखभाल को लेकर कई जानकारी भी दी गयी.  गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन की जरूरत सहित कोरोना के लक्षण व उससे बचाव के बारे में जानकारी दी गयी.
उत्सवी माहौल में की गयी गोदभराई : शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं को लाल चुनरी ओढा कर एवं माथे पर लाल टीका लगा कार्यक्रम की शुरुआत हुई. महिलाओं को विभिन्न व्यंजनों में शामिल सतरंगी फल, सूखे मेवे भी भेंट की गयी. इस दौरान पोषक आहार में फल और मेवे का वितरण हुआ. साथ ही गर्भावस्था के दौरान पोषक आहार सेवन के विषय में गर्भवतियों को भी जागरूक किया गया.
गर्भावस्था में अच्छे पोषण पर दी गयी जानकारी: जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आईसीडएस कुमारी अनुपमा सिन्हा ने बताया, गर्भवती महिलाओ को गर्भावस्था मे खान-पान का हमेशा ध्यान रखना चाहिये. रोज हरे साग –सब्जी , मूँग का दाल एवं अगर महिला मांसाहारी हो तो अंडे के साथ मछ्ली का प्रयोग सप्ताह मे दो से तीन बार जरूर करना चाहिये. इस दौरान वसा की भी जरूरत होती है. इसके लिए महिलाओं को चिकनाई पूर्ण खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए. सुरक्षित प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में ही प्रसव कराना चाहिए. इसके लिए गाँव की आशा से नियमित सलाह भी गर्भवती महिलाओं को लेते रहना चाहिए ताकि गर्भ के आखिरी दिनों में किसी संभावित जटिलता से बचा जा सके.
आखिरी महीनों में जरुरी है बेहतर पोषण: गर्भ के आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है.इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा होना जरुरी होता है. इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाडी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को साप्ताहिक पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है. इसके साथ महिलाएं अपने घर में आसानी से उपलब्ध भोज्य पदार्थों के सेवन से भी अपने पोषण का ख्याल आसानी से रख सकती हैं. हरी साग-सब्जी, सतरंगी फल, दाल, सूखे मेवे एवं दूध के सेवन से आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति आसानी से की जा सकती है.
गरभती महिलाओं को कोरोना से बचाव की दी गयी जानकारी: लखीसराय सदर की बाल –विकास पदाधिकारी आभा कुमारी ने बताया  कोविड -19 के संक्रमण से बचाव करते हुए इस कार्यक्रम का आयोजन पूरे जिला मे किया गया है. कार्यकर्म में शामिल हुई महिलाओं को गोदभराई के साथ –साथ कोविड -19 से बचाव एवं जागरूकता के बारे में भी बताया गया। कार्यकर्म में आई हुई महिलाओं को 40 सकेंड तक हाथ –सफाई के साथ बाहर निकालने पर मास्क का उपयोग तथा 6 फीट की दूरी का हमेशा पालन करने के लिए भी बताया गया ।

जिले में अब फुटकर दुकानदारों की भी होगी कोरोना जांच

0
• स्वास्थ्य विभाग की टीम घूम घूमकर दुकानदारों की करेगी जांच
• अगले सप्ताह से कॉरपोरेट हाउस के कर्मियों की भी होगी जांच
भागलपुर,  10 अगस्त:
कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने की तैयारी में पूरी मुस्तैदी से जुट गया है. जिले में जांच की संख्या प्रतिदिन 3000 से अधिक करने के बाद अब शहर के फुटकर दुकानदारों की कोरोना जांच शुरू होने वाली है. स्वास्थ्य विभाग का यह कदम कोरोना की चेन तोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकता है. सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने बताया कोरोना की चेन तोड़ने के लिए अब शहर के चौक- चौराहों पर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम फुटकर और फुटपाथी दुकानदारों की जांच करेगी. इससे कोरोना की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही कॉरपोरेट ऑफिस में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम जाकर कर्मियों की कोरोना जांच करने वाली है. यह प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगी.
जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की बनेगी टीम: शहर के फुटकर और फुटपाथी दुकानदारों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग टीम बनाने जा रहा है. इसमें डॉक्टर व टेक्नीशियन शामिल रहेंगे जो शहर के चौक- चौराहों पर घूमघूम कर दुकानदारों का सैंपल लेकर एंटीजन किट से जांच करेंगे और आधे घंटे के अंदर रिपोर्ट दे देंगे.
रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कोविड केयर सेंटर में किया जाएगा भर्ती: स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा फुटकर दुकानदारों की कोरोना जांच के बाद  रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर संबंधित व्यक्ति को घंटाघर स्थित कोविड केयर सेंटर में भर्ती किया जाएगा. अगर उस व्यक्ति के पास घर में होम आइसोलेशन की सुविधा है तो उसे घर में रहने की इजाजत दी जाएगी. लेकिन इस दौरान उसे होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. वहीं गंभीर मरीजों को कोवीड केयर सेंटर में बने आईसीयू में भर्ती किया जाएगा.
होम आइसोलेशन में जाने वाले को दिया जाएगा किट:  जांच के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को होम आइसोलेशन में भेजते वक्त स्वास्थ्य विभाग का किट उपलब्ध कराया जाएगा. किट में दवा दी जाएगी, जिसका सेवन मरीज को घर में रहते हुए करना होता है. साथ ही होम आइसोलेशन में बरती जाने वाली सावधानी से भी मरीज को आगाह किया जाएगा. किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीज को डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जाएगी.
जांच बढ़ने से कोरोना के संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद: डीपीएम डॉ. फैजान अशर्फी ने बताया जिले में कोरोना की जांच बढ़ने से इसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी. जांच के बाद लोगों को पता चल जाएगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं. संक्रमितों की पहचान होने से लोग उससे दूरी बनाकर अपना बचाव कर सकेंगे. वहीं चिह्नित मरीज भी होम आइसोलेशन में रहकर खुद को स्वस्थ कर पाएंगे. मरीज के गंभीर होने पर उन्हें कोविड केयर सेंटर या फिर सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया जाएगा.

कोरोना काल में टीबी के प्रति रहें सावधान

0

कोरोना होने पर टीबी मरीज को ज्यादा खतरा

टीबी के मरीज से बात करते वक्त मास्क लगाएं

भागलपुर-

कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। अभी तक जिले में 3200 से भी ज्यादा मरीज मिले हैं। लगभग 1900 मरीज ठीक भी हो चुके हैं और लगभग 1300 इलाजरत हैं। वहीं 45 कोरोना मरीजों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि मौत उन्हीं मरीजों की हो रही है, जो पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित रहे हैं। हाईपरटेंशन, शुगर और टीबी के मरीजों को कोरोना होने पर ज्यादा परेशानी हो रही है। खासकर टीबी के मरीजों को तो विशेष तौर पर सावधान रहने की जरूरत है।

टीबी मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की है जरूरत: निजी चिकित्सक डॉ. विनय कुमार झा कहते हैं कि कोरोना महामारी के दौर में वैसे तो सभी को सतर्कता बरतनी है, लेकिन टीबी (क्षय रोग) के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर उन मरीजों को जो पहले से ही फेफड़े की समस्या से जूझ रहे हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग टीबी के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है।  डॉ. झा कहते हैं कि टीबी भी कोरोना की ही तरह संक्रमण से फैलता है। इसलिए इसके बचाव के लिए भी लोगों को अधिकतर वही तरीका अपनाना चाहिए, जो कोरोना से बचाव के लिए अपना रहे हैं। अभी बारिश का मौसम चल रहा है। ऐसे मौसम में सर्दी, खांसी और जुकाम होना आम बात है। अगर टीबी मरीजों में ये सब लक्षण दिखे और वह कोरोना की चपेट में आ जाए तो भारी पड़ सकती है। ऐसे में टीबी के मरीज तो सतर्क रहें ही। साथ ही आमलोग भी टीबी के प्रति सतर्क रहें।

टीबी के लक्षण:

खांसी के साथ बलगम में खून आना

बुखार

पसीना आना

सांस फूलना

भूख ना लगना

वजन कम होना

मांसपेशियों में क्षति

शारीरिक दूरी का रखें ख्याल: जिस तरह कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए शारीरिक दूरी जरूरी है, उसी तरह से टीबी की रोकथाम के लिए सामाजिक दूरी अपनाना चाहिए। दोनों ही बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए कोरोना और टीबी के मरीजों से सतर्क रहने की जरूरत है।

जागरूकता है जरूरी: टीबी और कोरोना, दोनों ही बीमारी संक्रमण से फैलती है। दोनों के वायरस हवा के जरिये तेजी से फैलते हैं। टीबी या कोरोना के मरीज के छींकने, खांसने या फिर बात करने से संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। ऐसे में जरूरी है कि लोगों को जागरूक किया जाए। लोगों को समझाया जाए कि टीबी और कोरोना के संक्रमित व्यक्ति से सतर्क रहें। नहीं तो आप भी चपेट में आ सकते हैं।

बीसीजी का टीका लगवाएं: भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जरूरी है कि टीबी के मरीज बीसीजी का टीका लगवाएं। टीबी की रोकथाम में इस टीके को कारगर माना गया है। साथ ही टीबी के मरीज मास्क पहनकर रहें। इससे यह बीमारी दूसरों में नहीं फैलेगी। साथ ही डॉक्टर जो दवा खाने का परामर्श देते हैं। उसका सेवन करें। बीच में न छोड़ें। ऐसा करने से आप तो सुरक्षित रहेंगे ही, दूसरे भी सुरक्षित रहेंगे।

अब कोविड-19 जाँच में तेजी लाने के लिए पूल जाँच को दी जाएगी प्राथमिकता

0

-राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक ने दिए निर्देश

-पूल जाँच से कोरोना संक्रमण जांच गति में आएगी तेजी

लखीसराय-

वैश्विक महामारी कोरोना संकटकाल के बीच मरीजों की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग नित्य नए फैसले ले रही है ताकि कोरोना संक्रमण जांच में तेजी आए तथा कोरोना संक्रमण पर काबू पाया जा सके। इसबार पूल जाँच को प्राथमिकता देने का प्लान तैयार की गई है ।ताकि कम समय में अधिक से अधिक लोगों की जाँच हो सकें एवं बढ़ा रहे कोरोना संक्रमण का औसतन रेट पता चल सके। इसको लेकर राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर जिलाधिकारी एवं जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं एवं इसे सुनिश्चित कराने को कहा है।

पूल जाँच से जाँच की गति होगी तेज: जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया, कोरोना जाँच की गति बढ़ाने के लिए पूल जाँच तरीके का सहारा लिया जाता है। दरअसल सामान्य तरीके की जाँच में लोगों को अस्पताल में घंटो लाइन में खड़ा रहकर अपने बारी का इंतजार करना होता था। जिसमें एक व्यक्ति को औसतन 20-30 मिनट का इंतजार करना पड़ता था। किन्तु पूल जाँच से एक ही समय में तीन से पाँच लोगों का जाँच हो पाएगा। इससे लोगों की परेशानी कम होगी एवं घंटो अस्पताल में खड़ा रहकर अपने बारी का इंतजार नहीं करना नहीं करना पड़ेगा। इस जाँच को प्राथमिकता देने से आए दिन उत्पन्न होने वाली किट की समस्या दूर होगी।

क्या है पूल टेस्टिंग:

जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया, पूल टेस्टिंग यानि एक से ज़्यादा सैंपल को एक साथ लेकर टेस्ट करना और कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाना पूल टेस्टिंग कहलाता है पूल टेस्टिंग का इस्तेमाल कम संक्रमण वाले इलाक़ों में होता है. जहां संक्रमण के ज़्यादा मामले हैं वहां पर अलग-अलग जांच की जाती है पूल टेस्टिंग अधिकतम पांच लोगों की एक साथ जांच की जा सकती है. पूल टेस्टिंग के लिए पहले लोगों के नाक या गले से स्वैब का सैंपल लिया जाता है. फिर उसकी टेस्टिंग के ज़रिए कोविड19 की मौजूदगी का पता लगाया जाता है

एग्रीगेटर मानवता की रक्षा के लिए सदा आगे

0

नईदिल्ली-

एग्रीगेटर दुनिया का पहला एंटी कोरोना टास्क फोर्स एनजीओ है जो हर किसी के पास आसानी से पहुंच बना सकता है। यह ग्रामीण भारत से उत्पन्न सबसे उन्नत अवधारणों में से एक है।

एनजीओं के प्रसिद्ध रणनीतिकार व नीति निर्धारक डॉ कृष्ण झा एसीटीएफ के मुख्य नव प्रवर्तन अधिकारी सचिन खरे, एक्सटर्नल अफेर्यस के चीफ राकेश राय ने पिछले महीने कोरोनो वायरस महामारी के खिलाफ देशव्यापी लड़ाई में सबसे आगे काम किया है और देश भर में हजारों स्वयंसेवकों के साथ राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गतिशील रूप से काम करना जारी रखा है, जो प्रभावित हुए लोगों की मदद करने के लिए समर्पित है।

एसीटीएफ जिनेवा में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय कार्यालय के स्थापना का लक्ष्य विश्व स्तर पर अपनी पहचान बने और अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और राष्ट्र की सेवा करने में मदद करने के लिए नए क्षेत्रों और विस्तार के क्षेत्रों में उतरने की योजना बना रहा है।

अब तकएसीटीएफ ने जरूरतमंद लोगों को भोजन, आपूर्ति और मास्क निःशुल्क वितरित किए हैं और कई अभिनव पहल और अभियान भी चलाए हैं, जिनमें शामिल हैं;

• फंसे हुए मजदूरों को उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए “चलो घर चलो” अभियान।

• किसानों को सरकार या खरीदारों को सीधे उत्पाद बेचने के लिए “बेचो अभियान”।

• एसीटीएफ ने लोगों की जरूरतों और सामाजिक भेद के विचार को ध्यान में रखते हुए, सब्जी बाजार, “स्मार्ट जिग-ज़ैग मंडी” डिज़ाइन किया।

•  एसीटीएफ ने भारत की पहली समर्पित टेलीमेडिसिन हेल्पलाइन भी शुरू की है जहाँ 25,000 से अधिक परिवारों ने पेशेवरों से सहायता प्राप्त की है।

• जो लोग कोरोनोवायरस से उबर चुके हैं उनके लिए प्लाज्मा दान अभियान, प्लाज्मा दान करने में मदद करता है जो वर्तमान में प्लाज्मा थेरेपी के माध्यम से संक्रमण से लड़ रहे हैं।

• जीवन का उपहार- रक्तदान अभियान, ACTF का उद्देश्य सबसे बड़ा रक्तदान अभियान चलाना है। दाता ACTF वेबसाइट पर या सोशल मीडिया के माध्यम से पंजीकरण पूरा कर सकते हैं। डेटा को राज्य और भारत सरकार के साथ साझा किया जाएगा।

• पदयात्रा के दौरान अपना कब्ज़ा खो चुके 122 मिलियन लोगों की नौकरी की खोज को आसान बनाने के लिए “कामाया ऐप” लॉन्च किया गया

• ACTF ने अपनी पशु विंग को भी लॉन्च किया है, ताकि जानवरों की भलाई के लिए आवाज हो और भोजन और चिकित्सीय सहायता प्रदान की जा सके, यह पहचानते हुए कि उपन्यास कोरोनावायरस महामारी के दूरगामी परिणाम और प्रभाव।

• बाढ़ राहत अभियान के लिए 4000 से अधिक स्वयंसेवकों के साथ सामुदायिक रसोई, जो असम और बिहार सरकार को समर्थन प्रदान करता है और भोजन, दवाइयां और आपूर्ति प्रदान करता है।

एंटी कोरोना टास्क फोर्स किसी भी तरह की महामारी के मुकाबले करने के लिए तैयार है। एसीटीएफ मानवता के रक्षा के लिए सदा आगे रहेगा। पृथ्वी जगत पर मनुष्यों, जानवरो, पक्षियों और वनष्पतियों के प्रति दया सहानुभूति विचार रखते हैं। जिसके लिए सदा कार्य करते रहेंगे।

विश्व स्तनपान सप्ताह:  स्वस्थ परिवार, स्वस्थ संसार के लिए हर बच्चे को मिले स्तनपान का अधिकार

0
•स्तनपान केवल माँ नहीं बल्कि परिवार, समाज और सरकार की सामूहिक ज़िम्मेदारी
• स्तनपान के बढ़ावा देने से विश्व के 820,000 से अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकती है
भागलपुर/ 7 अगस्त। यह ख़ुशी की बात है की बिहार के शिशु मृत्यु दर में लगातार सुधार हो रहा है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (2018) के हालिया सर्वेक्षण में बिहार में शिशु मृत्यु दर 32 (प्रति हजार जीवित जन्मे बच्चों में) है। लेकिन राज्य में पोषण से संबंधित संकेतकों में सुधार करने की दिशा में अभी एक लंबा रास्ता तय करना है, विशेष रूप से  5 साल से कम उम्र के बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं के लिए. कॉम्प्रेहेंसिवनेशनल न्यूट्रीसनल सर्वे (सी एन एन एस  2016-18 ) के अनुसार भारत में 57% शिशुओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान मिलता है और बिहार में यह आंकड़ा 46 % है।  भारत में 58 % बच्चों को छह माह तक सिर्फ माँ का दूध  दिया जाता है और बिहार में यह आंकड़ा 62.7 % है।
असदुर रहमान, राज्य प्रमुख, यूनिसेफ, बिहार ने बताया कि ये आंकड़े दिखाते है स्तनपान की निरंतरता बनाए रखने में अभी बहुत चुनौतियाँ हैं और परिवारों और माताओं में जागरूकता कमी है। हर कोई यह कहता तो है की माँ का दूध अम्रत  के सामान है पर ज़रा सी कठिनाई होती है —  जैसे माँ को हलकी सी बीमारी, या कहीं बाहर जाना हो,  बच्चा रो रहा हो या बच्चा बीमार हो, तो हम तुरंत माँ का दूध देना बंद कर देते हैं।
कई बार तो माँ और परिवार के मन में स्तनपान से संबंधित पूर्वाग्रह और भ्रांतियों  जैसे माँ के दूध से शिशु का पेट नहीं भरता, गर्मी के दिनों में बच्चे को प्यास लगती है आदि, के कारण स्तनपान नियमित रूप से नहीं कराया जाता है। जबकि स्तनपान के विज्ञान से यह स्पष्ट है की यह एक हार्मोन पर निर्भर होने वाली प्रक्रिया है जिसके लिए माँ को मानसिक रूप से प्रसन्न रहकर, कुशलता से शिशु को स्तनपान कराने से ही अधिक दूध बनने की क्रिया प्रारंभ होती है।
इसके अलावा बाहरी शिशु-खाद्य पदार्थों (डिब्बे का दूध) की आक्रामक एवं आकर्षक मार्केटिंग, के कारण परिवार के सदस्यों पर बोतल से दूध देने का दबाव होता है. यद्यपि भारत में शिशु दुग्ध पदार्थ  विकल्प  अधिनियम लागू है, जो शिशु-दूध फॉर्मूला को स्वास्थ्य सुविधाओं के अंदर और आस-पास में बेचने और बढ़ावा देने को दृढ़ता से प्रतिबंधित करता है, परन्तु इस कानून का कड़ा से पालन आवश्यक है। ब्रैस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ़ इंडिया (बी पी एन आई)  के हाल ही के अध्ययन के अनुसार  माँ के दूध के विकल्पों की भारत में बिक्री 2016 में कुल 26.9% थी और 2021 में अनुमानित 30.7% होगी ।
बिहार में कुपोषण दूर करने के लिए इन्फेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग (आई वाई सी एफ) प्रथाओं को सुदृढ़ करने  के लिए राज्य स्तरीय रिसोर्स सेंटर है।  यूनिसेफ इसमें बिहार सरकार को तकनीकी सहयोग दे रहा है। एक वैश्विक अध्ययन का  अनुमान हैं, स्तनपान को बढ़ावा देने से 5 वर्ष से कम उम्र के विश्व के 820,000 से अधिक बच्चों की जान बचाई जा सकती है ।
माँ के दूध का कोई विकल्प नहीं है:
असदुर रहमान, राज्य प्रमुख, यूनिसेफ, बिहार ने कहा कि माता और पिता, समाज और नीति बनाने वालों  को यह समझना चाहिए की स्तनपान या माँ के दूध का कोई विकल्प नहीं हैं।  माँ का पहला दूध (खिर्सा, कोलोस्ट्रम) को बच्चे का पहला टीका-करण माना जाता है।  यह बच्चे को रोग-प्रतिरोधक क्षमता का शास्त्र  देता है जो उनके पूरे जीवन चक्र  को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। मां के दूध में लेक्टोफोर्मिन, इम्मुनोग्लोबिन जैसे रोगाणु नाशक तत्व होते हैं जो उन्हें पेट के कीड़े, कान के संक्रमण, निमोनिया और मूत्र-पथ के संक्रमण से बचाने में मदद करता है।
स्तनपान से बच्चें की बुधिमत्ता लब्धि बढ़ाने का लाभ भी देता है तथा गैर संचारी रोगों  को रोक देता है। स्तनपान धात्री माताओं के लिए भी लाभदायक है क्योंकि यह स्तन कैंसर और डिम्बग्रंथि के कैंसर की आशंका को कम करता है। स्‍तनपान से माँ व शिशु के बीच भावनात्‍मक रिश्ता भी कायम होता है।
ग़ौरतलब है की स्तनपान से परिवार और समुदाय को आर्थिक रूप से भी फायदा है; एक आकलन के अनुसार स्तनपान को बढ़ाने से विश्व को $302 बिलियन की सालाना अतिरिक्त आय उत्पन्न होती के जो विश्व की सकल राष्ट्रीय आय  का लगभग 0.5 प्रतिशत हैं ।
मौजूदा पोषण अभियान के अंतर्गत  समुदाय-आधारित गतिविधियों जैसे आरोग्य दिवस, अन्नप्राशन दिवस, गोद-भराई, वृद्धि निगरानी के दौरान स्तनपान पर समूह और व्यक्तिगत परामर्श के लिए सबसे अच्छा उपयोग किया जा सकता है।
बेटी हो या बेटा, माँ का दूध हर शिशु का अधिकार है:
 जन्म के प्रथम घंटे में यथाशीघ्र; जन्म से प्रथम छह माह तक सिर्फ माँ का दूध.
• प्रथम घंटे में यथाशीघ्र स्तनपान के साथ जीवन का शुभारम्भ करें और शिशु को उसका प्राकृतिक अधिकार दें।
•जन्म से प्रथम छह माह तक सिर्फ माँ का दूध इसके अतिरिक्त कोई अन्य दूध, खाद्य पदार्थ, यहाँ तक कि पानी भी नहीं पिलाना चाहिए।
•छ: माह पूर्ण होते ही शिशु को माँ के दूध के साथ–साथ घर पर बना हुआ अर्द्धठोस आहार देने से शिशु का शारीरिक और बौद्धिक विकास तेजी से होता है।
• माँ कोरोना से संक्रमित या संदिग्ध है तो भी स्तनपान जारी रख सकती है

अब कोविड-19 जाँच में तेजी लाने के लिए पूल जाँच को दी जाएगी प्राथमिकता

0
-राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक ने दिए निर्देश
-पूल जाँच से कोरोना संक्रमण जांच गति में आएगी तेजी
लखीसराय,07अगस्त,2020
वैश्विक महामारी कोरोना संकटकाल के बीच मरीजों की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग नित्य नए फैसले ले रही है ताकि कोरोना संक्रमण जांच में तेजी आए तथा कोरोना संक्रमण पर काबू पाया जा सके। इसबार पूल जाँच को प्राथमिकता देने का प्लान तैयार की गई है ।ताकि कम समय में अधिक से अधिक लोगों की जाँच हो सकें एवं बढ़ा रहे कोरोना संक्रमण का औसतन रेट पता चल सके। इसको लेकर राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर जिलाधिकारी एवं जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं एवं इसे सुनिश्चित कराने को कहा है।
पूल जाँच से जाँच की गति होगी तेज: जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया, कोरोना जाँच की गति बढ़ाने के लिए पूल जाँच तरीके का सहारा लिया जाता है। दरअसल सामान्य तरीके की जाँच में लोगों को अस्पताल में घंटो लाइन में खड़ा रहकर अपने बारी का इंतजार करना होता था। जिसमें एक व्यक्ति को औसतन 20-30 मिनट का इंतजार करना पड़ता था। किन्तु पूल जाँच से एक ही समय में तीन से पाँच लोगों का जाँच हो पाएगा। इससे लोगों की परेशानी कम होगी एवं घंटो अस्पताल में खड़ा रहकर अपने बारी का इंतजार नहीं करना नहीं करना पड़ेगा। इस जाँच को प्राथमिकता देने से आए दिन उत्पन्न होने वाली किट की समस्या दूर होगी।
क्या है पूल टेस्टिंग:
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने बताया, पूल टेस्टिंग यानि एक से ज़्यादा सैंपल को एक साथ लेकर टेस्ट करना और कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाना पूल टेस्टिंग कहलाता है पूल टेस्टिंग का इस्तेमाल कम संक्रमण वाले इलाक़ों में होता है. जहां संक्रमण के ज़्यादा मामले हैं वहां पर अलग-अलग जांच की जाती है पूल टेस्टिंग अधिकतम पांच लोगों की एक साथ जांच की जा सकती है. पूल टेस्टिंग के लिए पहले लोगों के नाक या गले से स्वैब का सैंपल लिया जाता है. फिर उसकी टेस्टिंग के ज़रिए कोविड19 की मौजूदगी का पता लगाया जाता है.