कोरोना के साथ बारिश के मौसम में बढ़ी डायरिया की संभावना, रहें सावधान 

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सही प्रबंधन डायरिया से करेगी बचाव
लखीसराय,18अगस्त 2020: कोरोना संक्रमण के बीच बरसात के मौसम में डायरिया का खतरा बढ़ गया है.  इसलिए कोरोना के साथ इससे बचने के लिए हमें अधिक सावधान रहने की जरूरत है। विशेषकर नवजातों एवं बच्चों में डायरिया का खतरा अधिक होता है एवं इनकी उचित देखभाल भी समान रूप से जरुरी होती है. इससे बचाव के लिए डायरिया की रोकथाम एवं इसके प्रबंधन के प्रति सजगता से हमें अस्पताल जाने से निजात मिल सकती है। दरअसल बदलते मौसम में डायरिया का प्रकोप फैलने की प्रबल संभावना हो जाती है, जिससे कोई भी ग्रसित हो सकता है. डायरिया के कारण अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन)होने से समस्याएँ बढ़ जाती है और उचित प्रबंधन के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। शिशु मृत्यु दर के कारणों में डायरिया भी एक प्रमुख कारण है।इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर बच्चों को डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से सुरक्षित किया जा सकता है।
डायरिया से बचाव के लिए बच्चों का रखें विशेष ख्याल:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया डायरिया से बचाव के लिए नवजात बच्चों का विशेष ख्याल रखें। उन्हें नियमित रूप से छः माह तक सिर्फ स्तनपान कराऐ।इससे डायरिया जैसी बीमारी से शिशु का बचाव होता है। डायरिया के लक्षण का पता चलते ही तुरंत ससमय चिकित्सकों से दिखाएँ। चिकित्सा परामर्श के अनुरूप उचित इलाज कराऐ।साथ ही घर एवं आसपास के परिसर की साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और भोजन बनाने और खाने समय साफ-सफाई रखने के अलावा शुद्ध जल का सेवन अनिवार्य है। ओआरएस एवं जिंक घोल निर्जलीकरण से वचाव करता है।हमेशा ओआरस एवं जिंक की गोली घर पर जरुर रखें।
शरीर में पानी की नहीं होने दें कमी:
बारिश के मौसम में डायरिया का खतरा सबसे अधिक रहता है। दस्त के कारण पानी के साथ जरूरी एल्क्ट्रोलाइट्स (सोडियम,पोटैशियम,क्लोराइड एवं बाईकार्बोनेट)का तेजी से ह्रास होता है। बच्चों में इसकी कमी को दूर करने के लिए ओरल रीहाइड्रेशन सलूलन(ओआरएस) एवं जिंक घोल दिया जाता है।विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार बच्चों में 24 घंटे के दौरान तीन या उससे अधिक बार पानी जैसा दस्त आना डायरिया है।शरीर में पानी की कमी से यह बीमारी होती है। इसलिए बच्चों को इससे बचाने के लिए सजग रहना चाहिए।इस बात का ध्यान देते रहना चाहिए कि बच्चों में पानी की कमी नहीं हो।यदि संभव हो तो ओआरएस का घोल नियमित तौर पर बच्चे को देना चाहिए

तीन दिवसीय राज्य स्तरीय वेबिनार में कृषि पोषण एवं पोषण वाटिका पर खास चर्चा

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•‘अपनी क्यारी,अपनी थाली’ होगा पोषण वाटिका का मूल मंत्र
• पोषण वाटिका पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला प्रशिक्षण
• 19 अगस्त तक चलेगा वेबिनार
• बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर देगा पोषण वाटिका पर तकनीकी सहयोग
लखीसराय17,अगस्त:
बिहार में कुपोषण की समस्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है।वर्तमान में कोरोना संक्रमण के कारण आंगनबाड़ी केन्द्र बंद है,लेकिन इसके वाबजूद भी पोषण सेवाओं को सुचारू रूप से चलाया जा रहा है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर आईसीडीएस की सेवाओं को प्रदान कर रही है. इस लिहाज से भी सामुदायिक पोषण को सुनिश्चित करना अत्यंत जरुरी हो गया है. इस कड़ी में पोषण वाटिका का विषय महत्वपूर्ण एवं प्रसांगिक भी है. यद्यपि, पोषण वाटिका की सोच पहले भी रही है. उक्त बातें अतुल प्रसाद, अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग ने कृषि पोषण पर राज्य स्तरीय तीन दिवसीय वेबिनार सह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सोमवार को आयोजित पोषण वाटिका पर प्रशिक्षण के दौरान कही.
अतुल प्रसाद, अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग ने बताया कि पहले चरण में फ़िलहाल राज्य के 4 जिलों में पोषण वाटिका का निर्माण किया गया है. जबकि दूसरे चरण में जिन आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपना भवन होगा वहां पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा. बिहार में सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपने भवन एवं पोषण वाटिका के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण पोषण वाटिका की परिकल्पना को साकार करने में चुनौतियाँ रही हैं. साथ ही पोषण वाटिका के क्रियान्वयन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी उठाने की समस्या भी इसकी सफलता में बाधक रही है. इसकी सफलता के लिए यह जरुरी है कि पोषण वाटिका को जन-आन्दोलन के रूप में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी को भी बढाया जाए. जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपनी जमीन नहीं हैं, वहाँ आम लोगों को चिन्हित कर उनके घर में पोषण वाटिका की शुरुआत करने की दिशा में लोगों को प्रेरित किया जाए. यह एक अच्छी पहल होगी,जिससे इस अभियान को जन-आन्दोलन के रूप में तब्दील करने में सहयोग मिलेगा.
‘अपनी, क्यारी अपनी थाली’ से बेहतर होगा पोषण:
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि कुपोषण, एनीमिया एवं अल्पवजन से समुदाय को बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में पोषण अभियान की शुरुआत की गयी है. बिहार में पोषण की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में चिंताजनक है. लेकिन पोषण अभियान के तहत पिछले वर्ष सितम्बर माह में आयोजित पोषण माह में बिहार ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश भर में दूसरा स्थान हासिल किया था. इस दौरान राज्य भर में लगभग 6 करोड़ लोग इस अभियान से जुड़े थे।पोषण अभियान के तहत इनोवेशन पर भी बल दिया गया है।इस दिशा में राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों से सहयोग लेकर पोषण वाटिका पर कार्य को आगे बढाया जा रहा है।‘अपनी क्यारी, अपनी थाली’ का मुख्य उद्देश्य पोषण वाटिका के सहयोग से गर्भवतियों एवं बच्चों के पोषण में सुधार करना है, जिसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे. पोषण अभियान का लक्ष्य प्रतिवर्ष दुबलापन एवं नाटापन में 2% की कमी एवं एनीमिया में 3% की कमी लानी है, जिसमें पोषण वाटिका काफी सहयोगी साबित होगा।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय करेगा तकनीकी सहयोग:
वेबिनार का उद्घाटन करते हुए डॉ. अजय कुमार सिंह, कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने  कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में पोषण वाटिका के निर्माण में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी. डॉ. आरके सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने बताया कि अभी तक पोषण वाटिका के कारण गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों द्वारा पोषक सब्जियों एवं फलों के दैनिक सेवन में बढ़ोतरी हुयी जो कुपोषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. इससे स्वच्छता, साफ़ पानी के सेवन, डायरिया के दौरान देखभाल एवं एनीमिया प्रबंधन पर भी जागरूकता बढ़ाने में सफलता मिली है।
इस दौरान विश्व बैंक के राज्य तकनीकी विशेषज्ञ मन्त्रेश्वर झा ने पोषण अभियान एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत के ऊपर डॉ. मनोज कुमार, परामर्शी पोषण एवं स्वास्थ्य, राज्य सरकार के विषय में जानकारी दी. साथ ही ऊषा कुमारी, विभागाध्यक्ष, खाद्य एवं पोषण विभाग, सामुदायिक महाविद्यालय एवं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर ने आहार विविधिता के द्वारा घर में तैयार भोजन से कुपोषित बच्चों का प्रबन्धन एवं डॉ. कुमारी शारदा, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़ ने पोषण वाटिका के महत्व एवं प्रकार पर प्रकाश डाला. साथ ही डॉ. अनीता कुमारी, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, खगड़िया ने पोषण वाटिका के संरचना एवं रेखांकन पर प्रकाश डाला.
पोषण व्यवहार में बदलाव जरुरी:
यूनीसेफ के पोषण विशेषज्ञ आरएन परही ने बताया कि राज्य में लोग कुपोषण की स्थिति से जीवन के विभिन्न आयु में सामना करते हैं, लेकिन विशेषकर 5 साल के अंदर के बच्चों  में कुपोषण की स्थिति राज्य में अधिक है. राज्य में पांच साल से कम आयु के 42% बच्चे नाटेपन के शिकार हैं, जिसके लिए ठोस एवं सम्मलित प्रयास की जरूरत है. उन्होंने बताया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसे विटामिन ए, बी, बी12, आयरन एवं जिंक विशेषकर बचपन एवं किशोरावस्था में अधिक होती है. आईसीडीएस एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर की पार्टनरशिप आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका की शुरुआत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे 6 माह से 23 माह तक के बच्चों में संपूरक आहार की शुरुआत करने के व्यवहार में भी साकारात्मक परिवर्तन आएगा. साथ ही पोषण वाटिका की शुरुआत आहार की विवधिता को जन-आन्दोलन के रूप लेने की दिशा में भी प्रभावी साबित होगा. साथ ही इससे राज्य की कुपोषण दर में भी कमी आएगी।
वेबिनार में शवेंद्र पांड्या, प्रोग्राम मैनेजर, यूनिसेफ बिहार के साथ डॉक्टर अंजनी कुमार,अटारी एवं राज्य भर के डीपीओ, आईसीडीएस, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सीडीपीओ सहित आईसीडीएस के अन्य कर्मी शामिल हुए।

कोरोना काल में बच्चों को टीका लगवाना नहीं भूलें

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जन्म लेते ही बीसीजी का टीका लगा तो बच्चा रहेगा कोरोना से सुरक्षित
पेंटा वैलेंट के तीनों डोज दिलाने से बच्चे कई बीमारियों से रहेंगे सुरक्षित
बांका, 17 अगस्त
कोरोना संक्रमण के बीच अपने बच्चों को टीका लगवाना नहीं भूलें। डॉक्टरों का मानना है कि अगर लोग अपने-अपने बच्चों को टीका लगवाना अभी से शुरू कर देंगे तो सर्दी के दिनों में बच्चों को होने वाली कई जानलेवा बीमारियों से बच्चों को बचा सकेंगे।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी का कहना है कि निमोनिया से बचाव के लिए लगने वाले पीसीवी के तीनों डोज, काली खांसी, कुक्कुर खांसी व टिटनेस से बचाव के लिए पेंटा वैलेंट बच्चों को दिला दें तो उन्हें ठंड के दिनों में ये बीमारियां नहीं होंगी।
टीका लगने से कोरोना से हो जाएगा सुरक्षित: डॉ. चौधरी कहते हैं कि अगर जन्म लेने वाले बच्चे को बीसीजी का टीका लग जाता है तो वह कोरोना से पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। जिन बच्चों को जन्म लेते ही बीसीजी का टीका लगा था उनमें कोरोना संक्रमण की दर 0.02 प्रतिशत रही। बीसीजी का टीका लगने के बाद बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता में तेजी से विकास होता है।
टीके से बच्चों की होती है सुरक्षा: डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि टीका एक जीवनरक्षक है जो बच्चे का रक्षा कवच बनकर उसके जीवन की सुरक्षा करता है। टीका बच्चे के शरीर को संक्रामक रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है, ताकि नवजात शिशु को कोई भी संक्रामक रोग छू न सकें। बच्चों को टीका लगवाने की यह क्रिया वैक्सीनेशन कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिये यह प्रक्रिया सबसे सस्ती और सबसे प्रभावी है।
नियमित टीकाकरण कई तरह की बीमारियों से होता है बचाव: डॉ. चौधरी ने बताया शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के रूटीन इम्यूनाइजेशन, उन्हें कई तरह की बीमारियों से बचाता है। साथ ही टीकाकरण से बच्चों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाता है ताकि उनके रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो सके।  बीमारियां जैसे खसरा, टिटनेस, पोलियो, क्षय रोग, गलाघोंटू, काली खांसी व हेपेटाइटिस बी आदि बीमारियों से यह बच्चों की सुरक्षा करता है।
छह माह तक नियमित स्तनपान का है महत्व: डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया प्रारंभिक अवस्था में उचित पोषण नहीं मिलने से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो सकता है। इसलिए 0 से 6 माह के बच्चे को सिर्फ स्तनपान और 6 माह के बाद शिशुओं को स्तनपान के साथ पौष्टिक ऊपरी आहार देना चाहिए। 6 माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे से बचाया जा सकता है।

जिले में खुलेंगे तीन नये हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर

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सिविल सर्जन ने दिए प्रशासनिक स्वीकृति, लोगों में खुशी
पीएचसी के ही तर्ज पर लोगों को मिलेंगी बेहतर स्वास्थ सेवाएं
लखीसराय,17अगस्त,2020:
अब  लोगों को आसानी के साथ  बेहतर स्वास्थ सेवाएं मिलेंगी। इसको लेकर जिले के  सूर्यगढ़ा पीएचसी के अधीनस्थ तीन हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर खोले जाएंगे। इसके लिए जिला सिविल सर्जन  ने पत्र जारी कर प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस ख़बर से सूर्यगढ़ा पीएचसी प्रबंधन के साथ इलाके के लोगों में खुशी का माहौल है।
लोगों को इलाज के लिए पीएचसी का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर
सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया वेलनेस सेंटर खुलने बाद लोगों को इलाज के पीएचसी जाने की ज़रुरत नहीं होगी। वेलनेस सेंटर में पीएचसी के ही तरह लोगों का समुचित इलाज होगा एवं हर सुविधाओं का लोग लाभ ले सकेंगे। प्रसव से लेकर हर तरह के प्राथमिक उपचार की सुविधा मिलेगी।
एक अतिरिक्त स्वास्थ केंद्र व दो उप केंद्र को बनाया जाएगा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
 सूर्यगढ़ा पीएचसी के अधीनस्थ संचालित अतिरिक्त स्वास्थ उप केंद्र किरणपुर एवं रामपुर व रसलपुर स्वास्थ उप केंद्र को कर हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर में अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ विभाग द्वारा सभी प्रशासनिक तैयारी पुरी कर ली गई है।एवं जल्द से जल्द विकसित करने को लेकर प्रशासनिक स्वीकृति पर भी मुहर लग चुकी है।
-पीएचसी के तरह ही हर सुविधाओं से लैस होगा तीनों वेलनेस सेंटर,24 घंटे मिलेगी सेवा
सूर्यगढ़ा पीएचसी के अधीनस्थ खुलने वाले तीनों हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर पीएचसी के तरह ही लोगों हर सुविधाओं का लाभ मिलेगा।और 24 घंटे चिकित्सक व स्वास्थ कर्मी तैनात रहेंगे।तीनों सेंटर पर सर्टिफिकेट इन कॉम्यूनिटी हेल्थ( ब्रिज कोर्स)  प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। ऐसे चिकित्सकों को विभाग द्वारा पूर्व में ही छः माह का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

कृषि पोषण एवं पोषण वाटिका पर तीन दिवसीय राज्य स्तरीय वेबिनार का हुआ आयोजन

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• ‘अपनी क्यारी, अपनी थाली’ होगा पोषण वाटिका का मूल मंत्र
• पोषण वाटिका पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला प्रशिक्षण
• 19 अगस्त तक चलेगा वेबिनार
• बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर देगा पोषण वाटिका पर तकनीकी सहयोग
 भागलपुर, 17 अगस्त: बिहार में कुपोषण की समस्या अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है. वर्तमान में कोरोना संक्रमण के कारण आंगनबाड़ी केन्द्र बंद है, लेकिन इसके वाबजूद भी पोषण सेवाओं को सुचारू रूप से चलाया जा रहा है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर आईसीडीएस की सेवाओं को प्रदान कर रही है. इस लिहाज से भी सामुदायिक पोषण को सुनिश्चित करना अत्यंत जरुरी हो गया है. इस कड़ी में पोषण वाटिका का विषय महत्वपूर्ण एवं प्रसांगिक भी है. यद्यपि, पोषण वाटिका की सोच पहले भी रही है. उक्त बातें अतुल प्रसाद, अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग ने कृषि पोषण पर राज्य स्तरीय तीन दिवसीय वेबिनार सह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सोमवार को आयोजित पोषण वाटिका पर प्रशिक्षण के दौरान कही.
अतुल प्रसाद, अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग ने बताया कि पहले चरण में फ़िलहाल राज्य के 4 जिलों में पोषण वाटिका का निर्माण किया गया है. जबकि दूसरे चरण में जिन आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपना भवन होगा वहां पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा. बिहार में सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपने भवन एवं पोषण वाटिका के लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण पोषण वाटिका की परिकल्पना को साकार करने में चुनौतियाँ रही हैं. साथ ही पोषण वाटिका के क्रियान्वयन की सम्पूर्ण जिम्मेदारी उठाने की समस्या भी इसकी सफलता में बाधक रही है. इसकी सफलता के लिए यह जरुरी है कि पोषण वाटिका को जन-आन्दोलन के रूप में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी को भी बढाया जाए. जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केन्द्रों के पास अपनी जमीन नहीं हैं, वहाँ आम लोगों को चिन्हित कर उनके घर में पोषण वाटिका की शुरुआत करने की दिशा में लोगों को प्रेरित किया जाए. यह एक अच्छी पहल होगी, जिससे इस अभियान को जन-आन्दोलन के रूप में तब्दील करने में सहयोग मिलेगा.
‘अपनी, क्यारी अपनी थाली’ से बेहतर होगा पोषण:
आईसीडीएस के निदेशक अलोक कुमार ने बताया कि कुपोषण, एनीमिया एवं अल्पवजन से समुदाय को बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्यों में पोषण अभियान की शुरुआत की गयी है. बिहार में पोषण की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में चिंताजनक है. लेकिन पोषण अभियान के तहत पिछले वर्ष सितम्बर माह में आयोजित पोषण माह में बिहार ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश भर में दूसरा स्थान हासिल किया था. इस दौरान राज्य भर में लगभग 6 करोड़ लोग इस अभियान से जुड़े थे. पोषण अभियान के तहत इनोवेशन पर भी बल दिया गया है. इस दिशा में राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों से सहयोग लेकर पोषण वाटिका पर कार्य को आगे बढाया जा रहा है. ‘अपनी क्यारी, अपनी थाली’ का मुख्य उद्देश्य पोषण वाटिका के सहयोग से गर्भवतियों एवं बच्चों के पोषण में सुधार करना है, जिसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे. पोषण अभियान का लक्ष्य प्रतिवर्ष दुबलापन एवं नाटापन में 2% की कमी एवं एनीमिया में 3% की कमी लानी है, जिसमें पोषण वाटिका काफी सहयोगी साबित होगा.
बिहार कृषि विश्वविद्यालय करेगा तकनीकी सहयोग:
वेबिनार का उद्घाटन करते हुए डॉ. अजय कुमार सिंह, कुलपति बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने  कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में पोषण वाटिका के निर्माण में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी. डॉ. आरके सोहाने, निदेशक प्रसार शिक्षा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने बताया कि अभी तक पोषण वाटिका के कारण गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों द्वारा पोषक सब्जियों एवं फलों के दैनिक सेवन में बढ़ोतरी हुयी जो कुपोषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. इससे स्वच्छता, साफ़ पानी के सेवन, डायरिया के दौरान देखभाल एवं एनीमिया प्रबंधन पर भी जागरूकता बढ़ाने में सफलता मिली है.
इस दौरान विश्व बैंक के राज्य तकनीकी विशेषज्ञ मन्त्रेश्वर झा ने पोषण अभियान एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत के ऊपर डॉ. मनोज कुमार, परामर्शी पोषण एवं स्वास्थ्य, राज्य सरकार के विषय में जानकारी दी. साथ ही ऊषा कुमारी, विभागाध्यक्ष, खाद्य एवं पोषण विभाग, सामुदायिक महाविद्यालय एवं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर ने आहार विविधिता के द्वारा घर में तैयार भोजन से कुपोषित बच्चों का प्रबन्धन एवं डॉ. कुमारी शारदा, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, बाढ़ ने पोषण वाटिका के महत्व एवं प्रकार पर प्रकाश डाला. साथ ही डॉ. अनीता कुमारी, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, खगड़िया ने पोषण वाटिका के संरचना एवं रेखांकन पर प्रकाश डाला.
पोषण व्यवहार में बदलाव जरुरी:
यूनीसेफ के पोषण विशेषज्ञ आरएन परही ने बताया कि राज्य में लोग कुपोषण की स्थिति से जीवन के विभिन्न आयु में सामना करते हैं, लेकिन विशेषकर 5 साल के अंदर के बच्चों  में कुपोषण की स्थिति राज्य में अधिक है. राज्य में पांच साल से कम आयु के 42% बच्चे नाटेपन के शिकार हैं, जिसके लिए ठोस एवं सम्मलित प्रयास की जरूरत है. उन्होंने बताया कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसे विटामिन ए, बी, बी12, आयरन एवं जिंक विशेषकर बचपन एवं किशोरावस्था में अधिक होती है. आईसीडीएस एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर की पार्टनरशिप आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका की शुरुआत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे 6 माह से 23 माह तक के बच्चों में संपूरक आहार की शुरुआत करने के व्यवहार में भी साकारात्मक परिवर्तन आएगा. साथ ही पोषण वाटिका की शुरुआत आहार की विवधिता को जन-आन्दोलन के रूप लेने की दिशा में भी प्रभावी साबित होगा. साथ ही इससे राज्य की कुपोषण दर में भी कमी आएगी.
वेबिनार में शवेंद्र पांड्या, प्रोग्राम मैनेजर, यूनिसेफ बिहार के साथ डॉक्टर अंजनी कुमार, निदेशक, अटारी एवं राज्य भर के डीपीओ, आईसीडीएस, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सीडीपीओ सहित आईसीडीएस के अन्य कर्मी शामिल हुए

कोरोना मरीजों की देखभाल में लगी रहती है डॉक्टरों की टीम

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जेएलएनएमसीएच में मरीजों के लिए लगातार बढ़ाई जा रहीं सुविधाएं
पड़ोस के जिलों समेत दूसरे राज्यों के मरीज भी स्वस्थ होकर जा रहे
भागलपुर, 14 अगस्त
मायागंज स्थित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (जेएलएनएमसीएच ) में गंभीर से गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा है। यहां पर सिर्फ जिले के ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों समेत दूसरे राज्यों से भी रेफर होने के बाद कोरोना मरीज इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। और यहां से स्वस्थ होकर जा रहे हैं। पूर्वी बिहार के सबसे बड़े अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज में डॉक्टर दिन-रात लगे हुए हैं। नोडल प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम कोरोना मरीजों के इलाज में लगी रहती है।
 अस्पताल के दो दर्जन से अधिक डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अबतक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। यहां तक कि अस्पताल के अधीक्षक भी कोरोना की चपेट में आ गए थे, इसके बावजूद यहां के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपना कर्तव्य निभाने में पीछे नहीं हट रहे हैं। अस्पताल स्थित आइसोलेशन वार्ड के प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा कहते हैं कि कोरोना के शुरुआती दौर से ही वे लोग काफी सजग होकर काम कर रहे हैं। पूर्वी बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल होने के नाते यहां पर काफी जिलों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसलिए वे लोग  शुरुआत से ही सजग थे। सबसे पहले यहां पर 100 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया। बाद में पूरा अस्पताल को ही कोरोना अस्पताल घोषित कर दिया गया। इस अस्पताल का रिकवरी रेट भी बहुत अच्छा है। वहीं अस्पताल अधीक्षक अशोक कुमार भगत कहते हैं कि कोरोना मरीजों के इलाज पर अस्पताल प्रशासन का पूरा ध्यान रहता है। डॉ. हेमशंकर शर्मा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम लगी रहती है। समय के साथ अस्पताल में सुविधाओं को भी बढ़ाया जा रहा है। कई गंभीर मरीज यहां से स्वस्थ होकर गए हैं।
सामान्य मरीजों का भी हो रहा इलाज: कोरोना के साथ अब यहां पर सामान्य मरीजों का भी इलाज रहा है। इसके लिए आईसीयू में बेड भी बढ़ाए गए। शुरुआत में शासन के स्तर से सिर्फ कोरोना मरीजों का ही इलाज हो रहा था। दुबारा जब आदेश मिला तो यहां पर सामान्य मरीजों का इलाज भी फिर से शुरू हो गया। सीनियर डॉक्टर के साथ जूनियर भी अपनी भूमिका बढ़-चढ़कर निभा रहे हैं।
झारखंड समेत 15 जिलों से आते हैं मरीज: जेएलएनएमसीएच में भागलपुर और आसपास के जिलों समेत कोशी और  सीमांचल से भी मरीज यहां पर आते हैं। साथ ही झारखंड के गोड्डा, साहेबगंज से भी बड़ी संख्या में भी मरीज यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। पास के किसी जिले में इतनी सुविधाओं वाला सरकारी या निजी अस्पताल नहीं है, इस वजह से भी यहां पर इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की भीड़ बढ़ती है। यही कारण है कि अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था को दुरस्त रखना पड़ता है, ताकि मरीजों को उत्तम सुविधाएं मिले और वे स्वस्थ हों।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है जेएलएनएमसीएच: यहां पर मरीजों की भीड़ बढ़ने का एक यह भी कारण है कि यहां जांच और इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं  उपलब्ध हैं। कई आधुनिक फीचर के साथ उपकरण लगाए गए हैं। अस्पताल लेटेस्ट उपकरणों से लैस है। यहां पर लगभग हर तरह की जांच मरीजों को कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ के जरिए तथा विभिन्न प्रकार के उपकरणों की सहायता से रोगियों का इलाज किया जाता है। इस अस्पताल में मरीज को बचाने के लिए हर संभव साजो सामान उपलब्ध है जिससे मरीजों को काफी लाभ हो रहा हैं। वहीं अस्पताल को कीटाणुरहित के लिए हर तरह की तैयारी की गई है जिससे मरीजों को कोई असुविधा नहीं होती है। जेएलएनएमलीएच जैसी सुविधाओं वाला आस-पास अस्पताल नहीं है।

कोविड-19 का रोकथाम के लिए हर स्तर पर बचाव जरूरी 

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-बचाव से संबंधित एहतियात बरतने से ही हारेगा कोरोना
-खुद के साथ लोगों को भी दें जानकारी,करें जागरूक
लखीसराय,14अगस्त,2020
कोविड-19 पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा लगातार लोगों जागरूक किया ही जा रहा है जिससे पहले की तुलना से बहुत बदलाव भी होते दिख रहे हैं। लोग कोविड-19 पर रोकथाम के लिए अग्रसर हैं।किन्तु ऐसे में हर स्तर से कोविड-19 के खिलाफ जंग बेहद जरूरी है।इसके लिए हर लोगों को बचाव से संबंधित आवश्यक पहल का अनुकरण भी करना की जरूरत हैं एवं खुद के साथ दूसरों को भी एहतियात बरतने के लिए जागरूक करने की जरूरत है.
संक्रमण से रोकथाम की बता रहे उपाय:
लखीसराय पीएचसी के स्वास्थ प्रबंधक मनीष कुमार अपने क्षेत्र को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और वह नियमित तौर पर लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं. इसके लिए वह अपने क्षेत्र में संचालित अतिरिक्त स्वास्थ उपकेंद्र,ऑगनबाड़ी केंद्र एवं उपकेंद्र समेत अन्य जगह लगातार जा रहें हैं एवं वहाँ अपने क्षेत्राधिकार के कार्यों के साथ अपने कर्मियों आशा,एएनएम के साथ-साथ ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मियों से कोरोना से बचाव की टिप्स दे रहे हैं। उन्होंने बताया वह सभी को अपने-अपने क्षेत्र के लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित कर रहें हैं ताकि कोरोना मुक्त समाज का निर्माण हो सके।इसके लिए वह कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल, लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखने एवं निरंतर अंतराल पर लोगों को एहतियात बरतने की जानकारी दे रहे हैं।
मेडिकल स्टोर कर्मी भी दवाई के साथ लोगों को दे बचाव की जानकारी:
आनंद मेडिकल स्टोर कर्मी विवेक कुमार दुकान के संचालन के दौरान कोविड-19 से बचाव के लिए खुद तो मास्क,ग्लैप्स, सेनेटाइजर आदि का उपयोग कर ही रहें। साथ ही वह दवाई लेने आने वाले ग्राहकों को दवाई के साथ-साथ कोरोना से बचाव के उपाय की भी जानकारी दे रहे हैं।वह बताते हैं उनकी संक्रमण से सुरक्षा बाकी लोगों के सुरक्षित रहने पर भी निर्भर करती है. इसलिए वह अपने दुकान पर आने वाले ग्राहकों को भी बचाव की जानकारी देकर उनसे एहतियात बरतने की अपील करते हैं. वह कहते हैं कि यह संक्रमण हमारी छोटी सी भूल से भी फ़ैल सकता है. इसलिए लोगों को हर-हाल में मास्क, शारीरिक दूरी एवं हाथों की साफ़-सफाई का ध्यान रखना जरुरी है.
साकारात्मक सोच और बुलंद हौसले से जीत सकते हैं कोरोना से जंग:
कोरोना से जंग जीत चूके सूर्यगढ़ा पीएचसी के चिकित्सक सह कोरोना योद्धा डॉ दिवाकर कुमार बताते हैं कि जब वह कोरोना से संक्रमित हुए तो वह बिना घबराए और उत्साह के साथ अपना इलाज करवाया।उपचार के दौरान उन्होंने महसूस किया कि दवाई के साथ साकारात्मक सोच और बुलंद हौसले ने उन्हें कोरोना से जंग जीतने में मदद की. उनकी सकारात्मक सोच का नतीजा था कि वह आज बिल्कुल स्वस्थ हैं. उन्होंने अन्य लोगों से भी अपील किया कि लोग कोरोना से घबराऐ नहीं,बल्कि डटकर साकारात्मक सोच और बुलंद हौसले के साथ इलाज कराऐ. साथ ही कोरोना से बचाव का पूरा ध्यान रखें. याद रखें आपकी सतर्कता सिर्फ आपको एवं आपके परिवार ओ ही संक्रमण से दूर नहीं रखेगी बल्कि पूरा जिला भी संक्रमण से बचा रहेगा

प्लाज्मा दान करने के लिए लगातार आगे आ रहे लोग

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मायागंज अस्पताल में प्लाज्मा तकनीक से जल्द शुरू होगा इलाज
चार और स्वस्थ हुए मरीजों ने प्लाज्मा दान करने की दी सहमति
भागलपुर, 14 अगस्त
प्लाज्मा दान करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे जिले में प्लाज्मा तकनीक के जरिये कोरोना मरीजों का इलाज जल्द शुरू होने में मदद मिलेगी। कोरोना मरीज स्वस्थ होने के बाद प्लाज्मा दान करने के लिए अपनी सहमति प्रदान करते हुए कोविड केयर सेंटर में अपना पता और मोबाइल नंबर लिखाकर जा रहे हैं। जब भागलपुर में प्लाज्मा तकनीक से कोरोना मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा तब इन मरीजों से संपर्क कर इन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए बुलाया जाएगा।
शुक्रवार को घंटाघर परिसर में संचालित कोविड केयर सेंटर से डिस्चार्ज हुए 26 लोगों में से चार लोगों ने प्लाज्मा दान करने की सहमति दी। डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए 4 नए लोगों ने आज प्लाज्मा दान करने के लिए सहमति दी है। इन लोगों के नाम, पता और मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया है। जरूरत पड़ने पर इन लोगों को मायागंज अस्पताल के ब्लड बैंक तक पहुंचाया जायेगा, जहां ये लोग अपना-अपना प्लाज्मा दान कर सकेंगे। सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार सिंह कहते हैं कि कोरोना बीमारी से स्वस्थ हुए लोगों से हमलोग अपील कर रहे हैं कि वे लोग प्लाज्मा दान के लिए आगे आएं। इसके अलावा प्रखंड एवं जिला स्तरीय टीम के जरिये स्वस्थ हो चुके कोरोना मरीजों से संपर्क साधा जायेगा, ताकि उन्हें प्लाज्मा दान करने के लिए मोटिवेट किया जा सके। इससे कोरोना मरीजों के इलाज में तेजी आएगी
अबतक 27 लोगों ने प्लाज्मा दान करने की दी सहमति: घंटाघर स्थित कोविड केयर सेंटर में तैनात डॉ. अमित कुमार शर्मा बताते हैं कि स्वस्थ हुए लोगों में से अब तक कुल 27 लोगों ने अपने-अपने प्लाज्मा दान करने की सहमति प्रदान की है। इन लोगों का नाम, पता व मोबाइल नंबर रजिस्टर में दर्ज किया जा चुका है, ताकि प्लाज्मा की जरूरत पड़ने पर इन लोगों को जेएलएनएमसीएच के ब्लड बैंक तक पहुंचाकर प्लाज्मा दान कराया जा सके।
मायागंज अस्पताल में जल्द शुरू होगा इलाज: सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया, मायागंज अस्पताल में प्लाज्मा तकनीक के जरिये जल्द ही कोरोना मरीजों का इलाज शुरू होने वाला है। इसे लेकर मशीन को इंस्टॉल किया जा रहा है। अस्पताल के दो डॉक्टर पटना जाएंगे जहां वह प्लाज्मा तकनीक से कोरोना मरीजों के इलाज की ट्रेनिंग लेंगे। दोनों डॉक्टर जब ट्रेनिंग लेकर पटना से भागलपुर आ जाएंगे, तब यहां पर भी कोरोना मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा।
एक व्यक्ति के प्लाज्मा से बचेगी चार कोरोना मरीजों की जान: प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज बहुत ही कारगर साबित हो रहा है। अभी पटना के एम्स व आईजीआईएमएस में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना इलाज चल रहा है। कोरोना डेडिकेटेड मायागंज अस्पताल के नोडल प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा बताते हैं कि कोरोना बीमारी से स्वस्थ हुए एक व्यक्ति द्वारा दिये गये प्लाज्मा दान से चार कोरोना मरीजों की जान बचायी जा सकेगी। कोरोना से स्वस्थ हुए लोगों में कोरोना के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित हो चुकी होती है। उसी एंटीबॉडी को प्लाज्मा के जरिये कोरोना मरीजों को चढ़ाया जायेगा, ताकि वे कोरोना से जल्दी ठीक हो सकेंगे। अगर इस थेरेपी का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल हुआ तो जिले में हर रोज कम से कम 25 यूनिट प्लाज्मा की जरूरत होगी।

सुरक्षित प्रसव  के लिए प्रसव पूर्व जांच है जरूरी

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– गर्भावस्था का रखें  ख्याल
– कम उम्र में गर्भधारण से भी होता है समय से पूर्व प्रसव
– हर महीने की नौ तारीख को सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में होती है मुफ्त जांच
लखीसराय,14 अगस्त,2020
हर महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान ससमय एवं सुरक्षित प्रसव होने की लालसा रहती है। इस दौरान मन में तरह-तरह के सवाल के साथ खुशियाँ भी रहती है। लेकिन इस दौरान थोड़ी सी अनदेखी और लापरवाही बड़ी मुश्किल का सबब बन सकता है। इसलिए गर्भावस्था से पूर्व भी महिलाओं को अपने बेहतर स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत होती है, जिसमे प्रसव पूर्व जांच करना बहुत जरूरी है। सदर अस्पताल की स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा कुमारी बताती है, गर्भावस्था के दौरान 4 प्रसव पूर्व जाँच प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी लाता है। सम्पूर्ण प्रसव पूर्व जाँच के आभाव में उच्च जोख़िम गर्भधारण की पहचान नहीं हो पाती। इससे प्रसव के दौरान जटिलता की संभावना बढ़ जाती है। शिशु गर्भ के दौरान मानसिक, शारीरिक रूप से संबल नहीं हो पाता है।  इसके अलावा ऐसे शिशु में स्तनपान के लिए माँ के स्तनपान के साथ साँस लेने की क्षमता नहीं होती है।जिसके कारण बच्चा कई तरह के समस्याओं से घिर जाता है ।
कम उम्र में गर्भधारण से भी होता है समय पूर्व प्रसव
डॉ रूपा  कुमारी बताती है कि समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। जैसे कि माता का 40 किलोग्राम से कम वजन होना, शरीर में खून की कमी, गर्भावस्था के दौरान या प्रसव पूर्व ब्लडिंग होना, गर्भाशय मुख का बेहद कमजोर होना आदि। इसलिए गर्भावास्था के दौरान प्रसव पूर्व जांच कराना जरूरी है। चिकित्सा परामर्श के अनुसार ही इलाज कराना चाहिए। इसमें कम उम्र में गर्भधारण करना और गर्भावस्था के दौरान उचित खान-पान का सेवन नहीं करने आदि मुख्य कारण हैं। क्योंकि ऐसी स्थिति में महिलाएँ काफी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाता है।
गर्भावस्था का रखें  ख्याल:
डॉ पूजा कुमारी बताती है नवजात का स्वास्थ्य माता के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है. इसलिए माता को गर्भधारण करने से पूर्व ही अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत होना चाहिए. महिलाओं में प्रत्येक माह माहवारी होने से शरीर में खून की कमी होने का ख़तरा बना रहता है. इसके लिए गर्भावस्था से पूर्व आयरन युक्त आहार के साथ आयरन फ़ोलिक एसिड की गोली का सेवन भी जरुरी होता है. गर्भावस्था के दौरान 4 प्रसव पूर्व जाँच एवं टेटनस का टीका सुरक्षित प्रसव के लिए जरुरी होता है.
क्या है प्रसव पूर्व देखभाल: डॉ. पूजा कुमारी बताती है कि प्रसव पूर्व देखभाल का संबंध गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली स्वास्थ्य की जानकारी और नियमित चिकित्सा जांच होता है जिससे कि प्रसव सुरक्षित हो सके। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था से बचने  के लिए प्रसब पूर्ब जाँच (ए एन सी) की जाती  है।  इस दौरान गर्भवती महिला की विभिन्न जांचें जैसे–रक्तचाप, खून की जांच, पेट की जांच इत्यादि की जाती है। उन्होंने बताया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत, सभी सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र हर महीने की नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं की निशुल्क यह चिकित्सा जांच की जाती है
उच्च जोख़िम गर्भधारण के कारण:
• गर्भावस्था में 7 ग्राम से खून का कम होना
• गर्भावस्था में मधुमेह का होना
• एचआईवी पॉजिटिव होना(एडस पीड़ित)
• अत्यधिक वजन का कम या अधिक होना
• पूर्व में सिजेरियन प्रसव का होना
• उच्च रक्तचाप की शिकायत होना
उच्च जोख़िम गर्भधारण के लक्षण :
• पूर्व की गर्भावस्थाओं या प्रसव का इतिहास
• दो या उससे अधिक बार गर्भपात हुआ हो
• बच्चा पेट में मर गया हो या मृत पैदा हुआ हो
• कोई विकृत वाला बच्चा पैदा हुआ हो
• प्रसव के दौरान या बाद में अधिक रक्त स्त्राव हुआ हो
• गर्भवती होने से पहले कोई बीमारी हो
• उच्च रक्तचाप
• दिल या गुर्दे की बीमारी
• टीबी या मिरगी का होना
• पीलिया या लिवर की बीमारी
• हाइपोथायराइड से ग्रसित होना

जिले के सभी अस्पतालों में खोले जाएंगे स्तनपान काॅर्नर,बोतल फीडिंग से मिलेगी मुक्ति 

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-जिला सिविल सर्जन ने सभी अस्पताल व पीएचसी प्रभारी को दिए निर्देश
-अब स्तनपान कराने में महिलाओं को नहीं करना पड़ेगा परेशानी का सामना
लखीसराय,13अगस्त,2020
अब महिलाओं को यात्रा के दौरान अपने शिशु को स्तनपान कराने में भीड़-भाड़ या अन्य किसी प्रकार का परेशानियाँ का सामना नही करना पड़ेगा।और ना ही शिशु को दूध पिलाने के लिए बोतल के साथ यात्रा करनी होगी। क्योंकि इसे दूर करने के लिए बोतल फिडिंग मुक्त जिले निर्माण को लेकर स्वास्थ विभाग आवश्यक तैयारी में जुट गई है।और जिले के सभी अस्पतालों में पीएचसी में स्तनपान काॅर्नर खोलने का निर्णय लिया गया है।इसको लेकर जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ आत्मानंद राय ने जिले के सभी अस्पताल एवं पीएचसी प्रभारी को पत्र जारी कर शीघ्र स्तनपान काॅर्नर खोलने का निर्देश दिए हैं।साथ ही शीघ्र इसे सुनिश्चित कराने को कहा है।
स्तनपान काॅर्नर में महिलाएँ सुरक्षित रूप से कराएँगे स्तनपान
स्तनपान काॅर्नर सुविधा उपलब्ध होने के बाद महिलाएँ अपने शिशु को सुरक्षित रूप से स्तनपान करा सकेंगी एवं पूर्व में होने वाले किसी भी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़ेगा।साथ ही किसी प्रकार का संक्रमण का भय भी नहीं रहेगा।
एक काॅर्नर में एकसाथ कई महिलाएँ करा सकेंगी स्तनपान
एक काॅर्नर में एकसाथ कई महिलाएँ अपने शिशु को स्तनपान करा सकेंगी।इसके लिए काॅर्नर के अंदर स्टाॅल तरह की सुविधा उपलब्ध रहेगी एवं हर स्टाॅल के पूरी तरह बंद रहेंगे।जिसमें अलग-अलग होकर सभी महिलाएँ अपने शिशु को पूरी सुरक्षा के साथ स्तनपान करा सकेंगी।