सैंपल संग्रहण कार्य में तेजी लाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर, दिए निर्देश

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– स्वास्थ्य विभाग के सचिव एवं जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी ने पत्र जारी कर कार्य में तेजी लाने का दिए निर्देश
-नियमित सैंपल संग्रहण से ही कोविड-19 संक्रमण फैलने पर लगेगी रोक
मुंगेर,05 अगस्त,2020
कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण पर रोकथाम के लिए सरकार एवं विभाग के तमाम पदाधिकारी पूरी तरह से सजग एवं गंभीर है। इसके लिए हर दिन नई-नई उपाय किए जा रहें हैं। ताकि हर हाल में कोरोना के संक्रमण पर रोकथाम हो। मसलन एक ही मिशन है कोरोना को हराना। सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जिले के सभी अस्पतालों में हो रहे कोविड-19 सैंपल संग्रहण जाँच कार्य में तेजी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग एवं गंभीर है। इसको लेकर स्वास्थ विभाग सचिव तथा जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी ने पत्र जारी कर अपने अधीनस्थ पदाधिकारी एवं कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए। जिसमें कहा गया है कि सैंपल संग्रहण कार्य में तेजी लाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के साथ गाँव-गाँव जाकर लोगों को जाँच कराने के लिए जागरूक करें एवं उन्हें जाँच के दौरान उपलब्ध व्यवस्था की जानकारी दें। ताकि सैंपल संग्रहण कार्य की गति और तेज हो सके एवं लोग उत्साह के साथ जाँच के लिए अपने नजदीकी सरकारी जाँच केंद्र पर आ सके।
कार्य में तेजी लाने को लेकर दिए गए हैं निर्देश
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि सैंपल संग्रहण कार्य में तेजी लाने को लेकर मैं जिले के सभी अस्पतालों में हो रहें जाँच का निगरानी करता हूँ एवं हर दिन शाम में दिनभर के कार्यों का अपडेट लेता हूँ। साथ कार्य में तेजी लाने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
उचित शारीरिक दूरी  का बनाऐ रखें ख्याल
सैंपल संग्रहण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ उचित शारीरिक दूरी  भी बनाऐ रखने का विशेष ख्याल रखें। ताकि जाँच के लिए आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े एवं लोग उत्साह के साथ जाँच केंद्र पर आकर अपना जाँच कराऐ।
कोविड-19 से बचाव की दें जानकारी
जाँच कराने आने वाले लोगों को जाँच के पश्चात कोविड-19 से बचाव को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दें एवं मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करने, भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने एवं अपने आसपास के लोगों भी जागरूक करने के लिए प्रेरित करें।
कार्य में तेजी लाने को लेकर गाँव-गाँव चलाऐ जागरूकता अभियान
कोविड-19 के रोकथाम के लिए हो रहे सैंपल संग्रहण के अपने-अपने क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों जागरूक करने का भी पत्र में निर्देश दिया गया है। इसके लिए आशा, ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मियों की टीम बनाकर जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है । ताकि हो रहे जाँच की अधिक से अधिक लोगों को जानकारी मिल सकें  एवं जाँच कार्य में तेजी आ सके।

बदलते मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर रहें सतर्क

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आंत और सांस में तकलीफ की मिल रहीं शिकायतें
सदर अस्पताल में एक सप्ताह में 600 बच्चों का हुआ इलाज
भागलपुर, 5 अगस्त
कोरोना काल और बदलते मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। इस मौसम में सतर्कता नहीं बरतने पर सर्दी, बुखार समेत कई बीमारियों की चपेट में बच्चे आ सकते हैं। अभी के मौसम में बच्चों में आंत और सांस में तकलीफ की भी शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे मौसम में विशेषकर बच्चों के खान-पान में भी अभिभावकों को सावधान रहना चाहिए।
सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कुंदन शर्मा कहते हैं कि बदलते मौसम में बच्चों को आंत व सांस की तकलीफ बढ़ जाती है। पिछले एक सप्ताह के दौरान ओपीडी में छह सौ से अधिक बच्चे सर्दी-खांस, बुखार, निमोनिया, टाइफाइड, कै-दस्त, गैस्टिक, जोंडिस की शिकायत लेकर इलाज कराने पहुंच चुके हैं। इसमें 20 प्रतिशत की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ऐसे मौसम में सावधान रहने की जरूरत है। खासकर परिजन को बच्चों की देखभाल करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
बच्चों के खान-पान में बरतें सावधानी
डॉ. शर्मा कहते हैं बारिश के मौसम में खान-पान के कारण बच्चे ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं। बोतल बंद पानी से बच्चों में संक्रमण का खतरा बढ़ता है। इसलिए उसे घर का पानी और ताजा खाना खिलायें। फ्रिज में रखा खाना एक दिन के बाद नहीं खिलाना चाहिए। प्लास्टिक में रखे दूध के प्रोडक्ट से बच्चों से दूर रखना चाहिए।
मां के दूध से बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता
मां का दूध काफी लाभदायक है। डॉ. शर्मा ने बताया कि मां के दूध से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। नियमित स्तनपान कराने से बच्चों में निमोनिया व डायरिया जैसी गम्भीर रोगों के होने की सम्भावना कम होती है। स्तनपान शिशुओं को श्वसन संक्रमण सम्बधी होने वाले खतरों से भी बचाव करने में सहायक होता है। इसलिए बच्चों को पहले 6 माह सिर्फ और सिर्फ मां का स्तनपान ही करना चाहिए।
हाथ धोकर बच्चे को लें गोद
बच्चे को बीमारियों से बचाने और उसके रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए सबसे जरूरी है कि उसे किसी भी तरह के संक्रमण की चपेट में नहीं आने दें। इसलिए जरूरी है कि बच्चे को हाथ धोकर लें गोद। बच्चे के होठों या गालों को न चूमें। किसी का जूठा ना खिलाएं। कपड़े और खिलौने को साफ जगह पर रखें। साथ ही गर्मी के कारण घमोची से बचाने के लिए बच्चों को सूती का कपड़ा पहनाएं। साथ ही उनके शरीर को साफ कपड़ा से पोछें, ताकि पसीना चमड़ी में चिपका नहीं रहे।
नींद की कमी नहीं होने दें
स्वस्थ रहने के लिए नींद किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरी है। नींद पूरी नहीं होने से लोग तमाम बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। यदि बच्चे की नींद पूरी न हो तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है। इससे वह जल्द ही बीमारियों की चपेट में आने लगता है।  इसलिए जरूरी है कि बच्चे की नींद पूरी हो। नवजात को एक दिन में 18 घंटे तो छोटे बच्चों को 12 से 13 घंटे नींद की आवश्यकता होती है।

विश्व स्तनपान सप्ताह: कुपोषण और संक्रामक बीमारियों से नवजात को सुरक्षित रखता है स्तनपान

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• 6 माह तक सिर्फ स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया से 11% एवं निमोनिया से 15% तक कम मृत्यु की होती है संभावना
• शिशु जन्म के 1 घन्टे के भीतर शिशुओं को स् तनपान कराने से नवजात मृत्यु दर में 20% की लायी जा सकती है कमी
• सावधानी बरतकर संक्रमित माताएं भी करा सकती हैं शिशु को स्तनपान
 बांका, 5 अगस्त: कोरोना आपदा के बीच नवजात  शिशुओं के पोषण को ध्यान में रखते हुए 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाना है. स्तनपान का मुख्य उद्देश्य नवजात एवं शिशुओं में बेहतर पोषण को सुनिश्चित कराना है. साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर उन्हें संक्रामक रोगों के प्रति सुरक्षित करना है. ​स्तनपान सप्ताह के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं सहित अस्पतालों के स्टाफ नर्स, एएनएम, आरएमएनसीएच प्लस ए काउंसलर, ममता, चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मी को प्रसूताओं व धात्री महिलाओं को नियमित स्तनपान के फायदों के बारे में बताने के लिए कहा है.
स्तनपान एवं संपूरक आहार देता है बेहतर स्वास्थ्य:
बाल स्वास्थ्य के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. विजय प्रकाश राय ने बताया विश्व स्तनपान सप्ताह 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जा रहा है. इस दौरान नवजात के लिए स्तनपान की जरूरत पर जागरूकता लाने का काम किया गया है. शिशु जन्म के 1 घन्टे के भीतर शिशुओं को स्तनपान कराने से नवजात शिशु मृत्यु दर में 20% की कमी लायी जा सकती है. वहीँ 6 माह तक सिर्फ स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया से 11% एवं निमोनिया से 15% तक कम मृत्यु की संभावना होती है. 6 माह तक शिशुओं को सिर्फ स्तनपान कराना चाहिए एवं 6 माह के बाद शिशु को संपूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए. साथ ही शिशु के बेहतर विकास के लिए कम से कम 2 साल तक शिशु को स्तनपान कराना जारी रखना चाहिए. संपूरक आहार से बच्चे का उपयुक्त शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है तथा बच्चा कुपोषणजनित कई तरह के बीमारियों से बचा रहता है. इसलिए यह जरुरी है कि कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सक के साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मी नवजात शिशुओं के स्तनपान एवं शिशुओं के संपूरक आहार की जरूरत के विषय में आम-जनता को जागरूक एवं जानकारी प्रदान करें.
1 घंटे के भीतर स्तनपान एवं 6 माह तक केवल स्तनपान जरुरी:
• शिशु जन्म के 1 घन्टे के भीतर स्तनपान कराना जरुरी होता है. माँ का दूध शिशु को कई तरह के संक्रमण से बचाव करता है
• माँ के दूध में एंटीबॉडी होते हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं
• स्वास्थ्य संस्था में या किसी स्वास्थ्य कर्मी के द्वारा दूध की बोतलें, निप्पल या डमीज को बढ़ावा न दें
माँ में बुखार, खाँसी या सांस लेने में कोई तकलीफ़ जैसे लक्षण दिखने पर
• तुरंत चिकित्सक से सलाह लें
• बच्चे के संपर्क में आने पर मास्क पहनें. खांसते या छींकते समय मुँह को रुमाल या टिश्यू पेपर से ढकें
• छींकने या खांसने के बाद, दूध पिलाने से पहले एवं बाद हाथों को पानी एवं साबुन से 40 सेकंड तक धोएं
• किसी भी तरह के सतह को छूने के बाद हाथों को पानी एवं साबुन से 40 सेकंड तक धोएं या अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें
माँ यदि स्तनपान नहीं करा सकती हैं तो ये करें:
• अपना दूध कटोरे में निकाल लें. इसके लिए हाथों को साबुन या अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर से 40 सेकंड तक साफ़ करें. जिस कटोरी में दूध निकालें उसे अच्छी तरह गर्म पानी एवं साबुन से धो लें
• अपना निकला हुआ दूध पिलाने से पहले भी मास्क का इस्तेमाल करें. साथ ही चम्मच को भी अच्छी तरह साफ़ कर लें
यदि माँ कोविड 19 से संक्रमित है या उसकी संभावना है:
• कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बच्चे को 1 जन्म के पहले घंटे एवं 6 माह तक केवल माँ का ही दूध पिलायें
• शिशु को संक्रमित माता से 6 फीट की दूरी पर रखा जाए जबतक कि माँ का टेस्ट दो बार नेगेटिव न आ जाए
• शिशु की देखरेख एवं स्किन टू स्किन संपर्क के लिए घर की किसी स्वस्थ महिला का सहयोग लिया जा सकता है
6 महीने पूरे होने के बाद बच्चे को दें संपूरक आहार:
शिशु के 6 महीने पूरे होने के बाद उनके बेहतर मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए स्तनपान के साथ  संपूरक आहार की जरूरत होती है. 6 माह के बाद स्तनपान के साथ संपूरक आहार शिशुओं को देना चाहिए. साथ ही शिशु को 2 साल तक स्तनपान करवाना जारी रखना चाहिए. इसके लिए बच्चे को अलग से कटोरी में खाना खिलाना चाहिए. खाना बनाने, खिलाने या कहने से पहले 40 सेकंड तक पानी एवं साबुन से हाथ धोना जरुरी है. 6 महीने के बच्चे को 2-3 चम्मच खाना दिन में 2 से 3 बार. 6 से 9 महीने के बच्चे को आधा कटोरी खाना दिन में 2 से 3 बार. 9 से 12 महीने  के बच्चे को आधा कटोरी खाना दिन में 2 से 3 बार. 1 से 2 साल तक के बच्चे को 1 कटोरी खाना दिन में 3 से 4 बार देना जरुरी है

एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्तनपान के लिए कर रहीं जागरूक

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माता-पिता को घर-घर जाकर स्तनपान के गिना रहीं फायदे
1 से 7 अगस्त तक जिले में मनाया जा रहा स्तनपान सप्ताह
 भागलपुर, 4 अगस्त
एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम स्वस्थ दुनिया के लिए स्तनपान का समर्थन है। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए इस बार एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से अधिक से अधिक माताओं को स्तनपान कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है। माता-पिता को यह जानकारी दी जा रही है कि बच्चे के लिए मां का दूध कितना जरूरी है।
  सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि यह अभियान सात अगस्त तक चलेगा। कोरोना को देखते हुए इस बार नवजात के माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, और एएनएम घर-घर जाकर माता-पिता को स्तनपान की महत्वता के बारे बता रही हैं। यह अभियान आईसीडीएस के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से बनायी गयी टीम के माध्यम से चलाया जा रहा है।
मां का दूध होता है संपूर्ण आहार
सिविल सर्जन ने बताया मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार होता है। शिशु के जन्म लेने के 1 घंटे के अंदर ही शिशु को स्तनपान अवश्य कराना चाहिए। मां को  शिशु को छह माह तक केवल स्तनपान कराना चाहिए। इस अवधि में शिशु को मां के दूध के अलावा और कुछ नहीं दिया जाना चाहिए।
मां का शिशु से भावनात्मक रिश्ता होता है मजबूत
 सिविल सर्जन ने बताया  शिशु को स्तनपान कराए जाने से मां को भी कई प्रकार के लाभ मिलते हैं। स्तनपान कराते वक्त मां का शरीर करीब 500 कैलोरी तक खर्च करता है, जिस वजह से प्राकृतिक तरीके से वजन कम होता है। इसके अलावा स्तनपान से ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर के खतरे भी कम होते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि स्तनपान से मां और शिशु के बीच भावनात्मक रिश्ता भी मजबूत होता है।
बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता का होता है विकास
मां के दूध से बच्चों को कई तरह के फायदे होते हैं। सबसे पहले तो यह तेजी और आसानी से पचता है। यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जो कि भविष्य में उसे कई तरह के संक्रमणों से सुरक्षित करता है। यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह किफ़ायती और संक्रमण मुक्त होता है।
इसलिए मनाया जाता है स्तनपान दिवस
 सिविल सर्जन ने बताया  बदलती जीवनशैली और कामकाज में महिलाएं इतनी व्यस्त रहती हैं कि उन्हें अपने बच्चे को स्तनपान करवाने का समय ही नहीं मिलता। स्तनपान संबंधी जानकारी और इसके फायदे समझाने के लिए ये सप्ताह मनाया जाता है। यह सप्ताह केवल घरों में ही नहीं, बल्कि कार्यालयों में भी इस प्रकार की जागरूकता फैलाई जाती है जिससे कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो।

कोविड-19 के दौर में भी जिले में संस्थागत प्रसव का हो रहा है सफल संचालन

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-संस्थागत प्रसव से होने वाले लाभ की जानकारी देकर कर रहे हैं प्रेरित
-जिले के सदर अस्पताल में हुए 720 संस्थागत प्रसव
लखीसराय,04 अगस्त 2020:
कोविड-19 के दौर में भी संस्थागत प्रसव के लिए जिले की  एएनएम व आशा गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक कर रहें हैं।एवं इससे होने वाले लाभ की जानकारी देकर महिलाओं को सरकारी स्वास्थ संस्थान आने के लिए प्रेरित कर रहें हैं।दरअसल कोविड-19 को लेकर संस्थागत प्रसव में आ रही असुविधाओं को दूर करते हुए  इस कोरोना काल में  स्वासाथ विभाग ने संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता  दी है । ताकि महिलाएँ संस्थागत प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ संस्थान आए एवं प्रसव में किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो।इसको लेकर विभाग पदाधिकारी भी लगातार दिशा-निर्देश जारी कर रहें हैं। लोगों के बीच फैलायी जा रही जागरूकता अभियान में तेजी लाने के लिए स्वास्थ कर्मियों को आवश्यक निर्देश भी दिये जा रहे हैं ताकि संस्थागत प्रसव का सुदृढ़ संचालन होता रहे ।
संस्थागत प्रसव है सुरक्षित प्रसव
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया कि सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव जरूरी है।इसलिए संस्थागत प्रसव को हमेशा प्राथमिकता देना चाहिए।इस कोरोना काल में सरकार का गाइलाइन का पालन करते हुए प्रशिक्षित एएनएम द्वारा सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया जा रहा है।इसके लिए एएनएम व आशा अपने क्षेत्र में  घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे है।ताकि प्रसव के दौरान महिलाओं को किसी प्रकार का सामना नही करना पड़े एवं  जच्चा व बच्चे दोनों सुरक्षित रहें।
करोना संकर्मण से बचाव करते हुए जिले के सदर अस्पताल में मार्च से जुलाई के बीच  720 संस्थागत प्रसव कराये गए जिसमें लखीसराय सदर एवं ग्रामीण के साथ चानन की गर्भवती महिलाएं शामिल हैं।  वही बड़हीया में  अप्रैल से लेकर जुलाई तक 568 संस्थागत प्रसव कराए गये हैं ।
प्रसव के दौरान अस्पतालों में इन सुरक्षा का रखा जाता है ख्याल
प्रसव के दौरान अस्पतालों में प्रसव कराने वाली एएनएम गल्व्स ,मास्क,फेस कवर का उपयोग करती है।एवं प्रसव के पूर्व एवं बाद लेवर वार्ड को सुरक्षा के लिहाज से पुरी तरह सेनेटाइज किया जाता है।एवं पीड़िता को भी स्वास्थ कर्मियों द्वारा वचाव को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी जाती है।
सोशल-डिस्टेंसिग का रखा जाता ख्याल
प्रसव के दौरान अस्पतालों में अस्पताल कर्मी सोशल-डिस्टेंसिंग का विशेष रूप से ख्याल रखती है।एवं प्रसव के लिए आई प्रसूता को भी इसके लिए जागरूक करती है।एवं भीड़-भाड़ वाले जगह से पर परहेज करने की जानकारी दी जाती है।ताकि इस महामारी के दौर में किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो।
साफ-सफाई पर दिया जाता विशेष बल
प्रसव के दौरान प्रसव कराने वाले स्वास्थ कर्मी लेबर रूम से लेकर महिला वार्ड समेत अस्पताल के अन्य परिसर में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखते हैं।एवं प्रसव कराने आई महिलाओं को घर में भी साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने के लिए प्रेरित करते हैं।जैसे कि साबुन से अच्छी तरह अपने हाथों को धोकर एवं मास्क पहनकर ही नवजात शिशु को स्तनपान कराने,घरों की लगातार साफ-सफाई करने,हर दिन उपयोग होने वाली विछावन को साफ करने समेत अन्य जानकारियाँ दी जाती है।
कोरोना से वचाव की दी जाती है जानकारी
प्रसव के पूर्व एवं बाद स्थास्थ कर्मी प्रसूता को कोरोना से वचाव को लेकर नियमित रूप से मास्क पहनने,मास्क के उपरी परत को नहीं छूने,मास्क की हर दिन साफ-सफाई करने,साफ कपड़े व विछावन का उपयोग करने आदि की जानकारी दी जाती है।ताकि महिलाएँ घर जाने के बाद भी कोरोना से सुरक्षित रह सके।

अब मोबाइल पर मिलेगा कोरोना से वचाव का चिकित्सीय परामर्श

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-जिले में खोले जाएंगे नियंत्रण कक्ष, 24 घंटे तैनात रहेगी चिकित्सकों की टीम
जमुई,04 अगस्त,2020
कोरोना वायरस से वचाव को लेकर लोगों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने को सरकार पूरी तरह सजग एवं कटिबद्ध है। इसको लेकर रोज नई-नई योजना बना रही है। ताकि लोगों को बेहतर से बेहतर से स्वास्थ सेवा मिल सके एवं लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही पड़े। इसी क्रम में लोगों को सुविधा के लिए जिले में जिला नियंत्रण कक्ष खोलने का निर्णय लिया। जिससे अब कोरोना से वचाव को लेकर एक घंटी बजाने पर आवश्यक चिकित्सा परामर्श एवं सलाह मिलेगी ।इसके लिए जिले में नियंत्रण कक्ष की स्थापना की जाएगी। जिसमें परामर्श देने वाले चिकित्सकों की टीम 24 घंटे मौजूद रहेगी । यह सुविधा सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर जिले के जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी व जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं एवं यथाशीघ्र उक्त सुविधा को चालू कराने को कहा है।
चिकित्सा परामर्श के लिए 10 नंबर होंगे जारी
जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी डॉ. विजेन्द्र सत्यार्थी ने बताया कि चिकित्सा परामर्श के लिए 10 अलग-अलग नंबर जारी होंगे। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो।एवं चिकित्सा परामर्श के लिए लंबे समय का इंतजार नहीं करना पड़े।
शीघ्र चालू होगा सुविधा
सिविल सर्जन डॉ. विजेन्द्र सत्यार्थी ने बताया  कि जल्द उक्त सुविधा चालू होगा। इसके लिए कई जरूरी कार्य पूरी कर ली गई है। शेष की जा रही है एवं लोगों को आसानी से बेहतर से बेहतर सुविधा मिले, इसका विशेष ख्याल रखा जाएगा।
वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी होंगे कक्ष प्रभारी
सिविल सर्जन डॉ. विजेन्द्र सत्यार्थी ने बताया जिला नियंत्रण कक्ष का वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी को प्रभारी बनाया जाएगा। जो केंद्र का मोनिट्रिंग एवं अन्य कार्य का देखरेख करेंगे एवं कक्ष से संबंधित हर गतिविधि पर नजर बनाऐ रखेंगे साथ ही जरूरी सुविधाओं का विशेष ख्याल रखेंगे।
मरीजों की परेशानी को किया गया दूर
कोरोना की जाँच एवं अन्य आवश्यक जानकारी के लिए इससे पूर्व मरीजों का अस्पताल जाना पड़ता था। जहाँ एकसाथ लोगों की भीड़ उमड़ने के कारण अस्पताल में असुविधा हो जाती हैं एवं जानकारी के अभाव कई लोग सुविधा नही ले पाते थे। सिविल सर्जन डॉ. विजेन्द्र सत्यार्थी ने बताया मरीजों के इसी समस्या को देखते हुए  सरकार ने यह सुविधा उपलब्ध कराकर लोगों की परेशानी कोदूर किया। ताकि लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी लेने में लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े एवं लोगों को आसानी के साथ घर बैठे सुविधा मिल सके।
आवश्यकतानुसार किराऐ पर रखे जाएंगे ऐम्बुलेंस
आवश्यकतानुसार किराऐ पर अतिरिक्त ऐम्बुलेंस रखें जाएंगे। ताकि जरूरतमंद लोगों को ससमय ऐम्बुलेंस की सुविधा मिल सके एवं लोग समय रहते इलाज के लिए अस्पताल पहुँच सकें। उन्होने बताया गर्भवती एवं गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी।
निजी चिकित्सकों की भी होगी तैनाती
जिला नियंत्रण कक्ष में आवश्यकनुसार निजी चिकित्सकों की भी तैनाती की जाएगी। ताकि मरीजों को समुचित एवं सुदृढ़ चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो। निजी चिकित्सकों को दो हजार रूपया प्रतिदिन मानदेय दिया जाएगा।

सदर अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए है बेहतर व्यवस्था

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सामान्य और कोरोना के मरीजों का अलग-अलग चल रहा इलाज
अस्पताल के कर्मी इलाज के दौरान बरत रहे हैं पूरी सावधानी
बांका, 4 अगस्त
कोरोना काल में भी सदर अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए बेहतर व्यवस्था है। यहां पर आने वाले मरीजों के इलाज में डॉक्टर लगे रहते हैं। कोरोना मरीजों की जांच व इलाज की व्यवस्था लकड़ीकोला स्थित कोविड केयर सेंटर में की गयी है तथा गंभीर कोरोना मरीजों के लिए सदर अस्पताल में 50 बेड का आईसीयू चल रहा है।
सिविल सर्जन सुधीर महतो ने बताया, सदर अस्पताल में आने वाले हर तरह के मरीजों के लिए बेहतर इलाज की व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है। यहां पर तैनात डॉक्टर हमेशा मरीजों के इलाज के लिए तैनात रहते हैं। मरीजों को इलाज कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसका पूरा ध्यान अस्पताल प्रबंधन रख रहा है। कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए अलग व्यवस्था की गई है। वहीं सामान्य मरीजों के लिए अलग से व्यवस्था है। कोरोना का संक्रमण नहीं फैले, इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। अस्पताल के कर्मी पूरी सावधानी बरतते हुए मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
शारीरिक दूरी का रखा जा रहा ख्याल:
सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों से शारीरिक दूरी का पालन करवाया जा रहा है। दो लोगों के बीच दो गज की दूरी हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है। बाहर से आने वाले मरीजों को देखने से पहले विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां आने वाले मरीजों को मास्क और सेनिटाइजर भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह मास्क और ग्लब्स पहनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
सभी लोगों की हो रही थर्मल स्कैनिंग:
अस्पताल में आने वाले सभी व्यक्ति, चाहे मरीज हो या फिर उसके परिजन उसकी थर्मल स्कैनिंग की जा रही है। शरीर के तापमान को नापने के बाद  ही इलाज किया जा रहा है। इस दौरान अगर कोई संदिग्ध मरीज दिखता है तो उसे सैंपलिंग के लिए भेज दिया जाता है। स्वास्थ्यकर्मी पूरी मुस्तैदी से अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं।
गर्भवती महिलाओं व शिशुओं को लेकर बरती जा रही सतर्कता:
सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं के इलाज को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनके इलाज को लेकर सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। अस्पताल की नर्स व एएनएम पूरी तरह से सुरक्षित होकर गर्भवती महिलाओं की जांच करते हैं। डॉक्टर भी सावधानीपूर्वक इनका इलाज करते हैं।

बांका में कोरोना जांच ने पकड़ी रफ्तार

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-अब प्रतिदिन 1000 से 1200 लोगों की हो रही जांच
-हर पीएचसी में एक सौ लोगों की एंटीजन कीट से हो रही जांच
बांका,  3 अगस्त:
कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने की तैयारी में पूरी मुस्तैदी से जुट गया है. सोमवार से जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिदिन 100 लोगों की एंटीजन किट से जांच हो रही है. जिले में प्रतिदिन 1000 से 1200 लोगों की जांच की तैयारी है.  डीपीएम प्रभात कुमार राजू ने बताया कि कोरोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए जांच बढ़ाई जा रही है. जांच अधिक होने से संक्रमित लोगों का पता चल पाएगा और उससे फिर लोग दूरी बनाकर रहेंगे. इससे कोरोना की चैन टूटेगी. वहीं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि रविवार तक हम लोग प्रतिदिन 70 लोगों की जांच कर रहे थे, लेकिन सोमवार से 100 लोगों का सैंपल लेने का निर्देश मिला है. उन्होंने बताया सभी सैंपल की जांच एंटीजन किट से हो रही है. इससे जांच का यह फायदा है कि रिपोर्ट आधे घंटे के अंदर आ जाती है जो निगेटिव होता है, वह मानसिक तौर पर फ्री हो जाता है जबकि जो पॉजिटिव रहता है उसका इलाज शुरू हो जाता है. इससे कोरोना का संक्रमण बढ़ने का खतरा कम हो जाता है.
रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कोविड केयर सेंटर में किया जा रहा है भर्ती:
जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, रेफरल और अनुमंडल अस्पताल व सदर अस्पताल में कोरोना सैंपल की जांच के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर संबंधित व्यक्ति को कोविड केयर सेंटर भर्ती किया जाता है. अगर उस व्यक्ति के पास घर में होम आइसोलेशन की सुविधा है तो उसे घर में रहने की इजाजत दी जाती है. लेकिन इस दौरान उसे होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करने के लिए कहा जाता है. वहीं गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल स्थित आईसीयू में भर्ती किया जाता है.
होम आइसोलेशन में जाने वाले को दिया जाता है किट:
जांच के बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को होम आइसोलेशन भेजते वक्त स्वास्थ्य विभाग का किट उपलब्ध कराया जाता है. किट में दवा दी जाती है, जिसका सेवन मरीज को घर में रहते हुए करना होता है. साथ ही होम आइसोलेशन में बरती जाने वाली सावधानी से भी मरीज को आगाह किया जाता है. किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीज को डॉक्टर से संपर्क करने के लिए कहा जाता है.
जांच बढ़ने से कोरोना के संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद:
डीपीएम प्रभात कुमार राजू ने बताया जिले में कोरोना की जांच बढ़ने से इसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी. जांच के बाद लोगों को पता चल जाएगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं. संक्रमितों की पहचान होने से लोग उससे दूरी बनाकर अपना बचाव कर सकेंगे. वहीं चिह्नित मरीज भी होम आइसोलेशन में रहकर खुद को स्वस्थ कर पाएंगे. मरीज के गंभीर होने पर उसे कोविड केयर सेंटर या फिर सदर अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया जाएगा.
सरकारी गाइडलाइन का किया जाएगा पालन:
जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोरोना मरीजों की जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा. स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लब्स के साथ पीपीई कीट पहनकर ही मरीजों की जांच करेंगे. इस दौरान हर दो मीटर की दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया है. इसे लेकर पूरी व्यवस्था की गई है. इलाज के दौरान मरीज तो सामाजिक दूरी का पालन कर ही रहे हैं. साथ में स्वास्थ्य कर्मी भी इसका ध्यान रख रहे हैं.

सोशल-डिस्टेंस की बनाऐ रखें कड़ी, कोरोना हैं संक्रामक बीमारी

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-साफ-सफाई एवं रहन-सहन में बदलाव जरूरी,तभी कोरोना से बचेगी जान
जमुई,03 अगस्त,2020
कोविड-19 एक संक्रामक बीमारी है।यानी यह संक्रमित मरीजों के संपर्क(स्पर्श) में आने से होती है।पर घबराऐ नहीं,बस इससे बचने के लिए सोशल-डिस्टेंस की स्वास्थ विभाग द्वारा जारी दो गज की दुरी को ना लांघे।एवं सरकार व स्वास्थ विभाग के अन्य जारी गाइलाइन का पुरी तरह पालन करें।एवं इसके लिए अन्य लोगों को प्रेरित करें।ताकि खुद के साथ अन्य लोग भी सुरक्षित रह सकें।क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही आपकी परेशानी बढ़ा सकती है।एवं कोरोना संबंधित किसी प्रकार के लक्षण का महसूस होते ही तुरंत स्थास्थ केंद्र या अन्य स्वास्थ संस्थान जाऐं।एवं जाँच कराऐ।एवं चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही आगे चिकित्सा उपचार कराऐ।
लक्षण का महसूस होते ही चिकित्सकों से कराऐ जाँच
जिला सिविल सर्जन डॉ विजेन्द्र सत्यार्थी ने बताया कि अगर किसी भी शख्स को बुखार,सूखी खाँसी,साँस लेने में,शरीर में अलग किस्म के दर्द समेत अन्य शारीरिक पीड़ा हो तो वैसे शख्स को तुरंत स्थानीय स्वास्थ केंद्र में जाकर जाँच कराना चाहिए।एवं चिकित्सकों के सलाह अनुसार ही आगे की चिकित्सा उपचार करना चाहिए।ताकि समय रहते बीमारी का सही जानकारी मिल सके।एवं उचित इलाज हो सके।ऐसे मरीजों के जाँच के लिए जिले के सभी स्वास्थ केंद्र एवं अन्य स्वास्थ संस्थान में पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है।
मास्क का अनिवार्य रूप से करें उपयोग
खाँसने या छीकने के दौरान निकले वहाव से कोरोना का संक्रमण फैलता है।इसलिए अनिवार्य रूप से मास्क का उपयोग करें। एवं हर दिन मास्क की अच्छे से साफ-सफाई करें।पहनने के बाद मास्क के उपरी परत को नहीं छुऐ।मास्क खोलने के तत्पश्चात मास्क को सेनेटाइज करें।इसके बाद डिटाॅल पानी के साथ साबुन से धोएँ।
साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल
इस महामारी के रोकथाम के लिए साफ-सफाई एवं पूर्व के रहन-सहन के सापेक्ष रहन-सहन में बदलाव लाना भी जरूरी है।इसलिए साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।जैसे कि लगातार साबुन से 30-40 सेंकेंड तक हाथों की अच्छी तरह साफ करें,ऐसा हर दो घंटे में करना है।सफर या बाहर रहने पर जहाँ साबुन-पानी का अभाव है वहाँ सेनेटाइजर का उपयोग करें,पहनने वाले कपड़े से लेकर सोने वाले विछावन तक लगातार साफ-सफाई करें,घरों में फिनाइल या डिटाॅल पानी का पोछा लगाऐ।अपने आसपास का जगह समेत अन्य साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
भीड़-भाड़ वाले जगह एवं सार्वजनिक यात्रा से बचें
भीड़-भाड़ वाले जगह का हिस्सा बनने से बचें।एवं अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।साथ ही सार्वजनिक यात्रा ना करें।
मौसमी खाद्य पदार्थों का करें सेवन
विटामिन ए,सी और जिंक से भरपूर मौसमी और स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन करें।मौसमी फल में केला,आम,पपीता, अमरूद आदि फलों का भरपूर सेवन करें।
खाना बनाने के पहले और बाद हाथ समेत आसपास के जगहों को करें साफ
खाना बनाने से पहले अपने हाथ व अच्छी तरह से धोएँ।एवं बर्तन समेत आसपास की जगह को भी अच्छी तरह से साफ-सफाई करें।हरी सब्जी को बनाने के पहले नमक-पानी से अच्छी तरह धोएँ।उसके बाद आगे की प्रक्रिया करें।

कोरोना के दौर में भी सुरक्षा के साथ जिले में चल रहा विश्व स्तनपान पखवाड़ा

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कोरोना के दौर में भी सुरक्षा के साथ जिले में चल रहा विश्व स्तनपान पखवाड़ा
-स्तनपान के लिए महिलाओं को कर रहे हैं जागरूक,दे रहे हैं आवश्यक जानकारी
लखीसराय,03 अगस्त,2020
कोरोना महामारी के दौर भी सुरक्षा के साथ जिला स्तर से लेकर प्रखंडो स्तर पर हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है,जो 01 अगस्त से शुरू हो चुका है एवं इसका समापन 07 अगस्त को होगा। यह अभियान बच्चों के सर्वांगीण बिकास एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने एवं कुपोषण से बचाने में स्तनपान के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पुरे जोरशोर के साथ बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है।इसके लिए एएनएम,आशा एवं ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मी इसे सफल बनाने को लेकर लोगों जागरूक कर रहें हैं, ताकि शत-प्रतिशत लोगों को इसकी जानकारी मिल सके एवं लोग शामिल होकर लाभ ले सकें।
जन्म के बाद छः माह तक शिशु को कराऐ स्तनपान:
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि जन्म के बाद छः माह तक नवजात शिशु को स्तनपान कराने से शिशु का स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है एवं डायरिया व निमोनिया से होने वाले मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुणा तक कम हो जाती है।साथ ही स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन एवं ओवरी कैंसर होने का खतरा कम रहता है।जिससे स्वस्थ माँ मजबूत बच्चा का निर्माण होता है।उन्होंने लोगों से बच्चे जन्म के बाद छः माह तक सिर्फ स्तनपान कराने का अपील किया है।
वेवीनार के माध्यम से पखवाड़े का सफल  आयोजन को लेकर दिया गया प्रशिक्षण:
जिला एवं प्रखंड स्तरीय पखवाड़ा वेवीनार के माध्यम से आयोजित हो रहा है।इसकी सफलता को लेकर पूर्व में ही इस पखवाड़े में शामिल होने वाले आइसीडीएस,स्वास्थ समेत अन्य विभागों के कर्मियों को एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण पूर्व में ही दिया जा चुका है।ताकि कार्यक्रम का सफल एवं सुदृढ़ रूप से संचालन हो सके।
स्वास्थ कर्मी माताओं को कर रहे हैं जागरूक
स्तनपान अभियान को सफल बनाने के लिए एएनएम,आशा,ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मी गाँव-गाँव व घर-घर जाकर माताओं को स्तनपान के लिए जागरूक कर रहें हैं एवं स्तनपान के महत्व की भी जानकारी दे रहे हैं।साथ ही इस कोरोना काल में सावधानी के साथ स्तनपान कराने की जानकारी भी दे रहे हैं।जिसमें स्तनपान के समय मास्क का उपयोग करने,हाथों को साबुन से अच्छी तरह 30 सेकेंड तक धोने या सेनेटाइजर से सेनेटाइज करने,साफ सूती कपड़े का उपयोग करने आदि की जानकारी दे रहे हैं।
निश्चित होकर कराऐ स्तनपान,इससे नहीं फैलता है कोरोना
स्तनपान के लिए लोगों को जागरूक कर रहें स्वास्थ कर्मी लोगों को यह भी संदेश दे रहे हैं कि निश्चित होकर स्तनपान कराऐ। इससे कोरोना नहीं फैलता है।सिर्फ अगर कोई संक्रमित माँ हैं तो वह स्तनपान के समय मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें,अपने हाथों को अच्छी तरह से करीब 30 सेकेंड तक साबुन से अच्छी तरह साफ करें या सेनेटाइजर से सेनेटाइज करें,साफ सुती कपड़े का उपयोग करें।हालाँकि इस दौरान इस बात का भी ध्यान रखना है कि क्या माँ का शरीर स्तनपान के लिए सक्षम है या नहीं।क्योंकि बीमार माँ का शरीर कमजोर हो जाने पर वह स्तनपान कराने में खुद को सक्षम महसूस नहीं करती है।इसलिए ऐसी स्थिति जब शरीर इसके सक्षम हो तभी स्तनपान कराऐ।