कोरोना मरीजों को मानसिक रूप से किया जा रहा मजबूत

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होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को दिया जा रहा किट
घर में रहने के दौरान कैसे रहना है, इसका दिया जा रहा टिप्स
बांका, 1 अगस्त
जिले में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ उसका इलाज भी बेहतर तरीके से किया जा रहा है। शहरी पीएचसी के लकड़ीकोला स्थित केंद्र में न सिर्फ कोरोना के मरीजों को दवा की किट उपलब्ध कराई जा रही है, बल्कि उसे मानसिक रूप से भी तैयार किया जा रहा है। मरीजों को बताया जा रहा है कि ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। 10 दिन के अंदर आप ठीक हो जाएंगे।
लकड़ीकोला में जांच के बाद पॉजिटिव आए मरीजों से पूछा जा रहा है कि आपके घर में सेल्फ आइसोलेशन की सुविधा है या नहीं। अगर मरीज के घर में आइसोलेशन की सुविधा नहीं है तो उसे वहीं पर कोविड केयर सेंटर में भर्ती कर लिया जा रहा है। जिस मरीज के पास घर में होम आइसोलेशन की सुविधा है उसे जांच किट उपलब्ध कराई जा रही है। साथ में घर में रहने के दौरान नियमों का पालन करने कहा जा रहा है। शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि मरीजों को इलाज के साथ-साथ मानसिक रूप से मजबूत करने की जरूरत है। जांच के बाद जिस मरीज में कोरोना होने की पुष्टि होती है, उसे केंद्र पर तैनात डॉक्टर जरूरी सलाह देते हैं। उन्हें घर पर रहने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी की सलाह तो दी ही जाती है। साथ ही उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने को कहा जाता है। उन्हें अबतक ठीक हुए अधिकतर मरीजों का हवाला दिया जाता है। समझाया जाता है कि सावधानीपूर्वक रहने से 10 दिनों के अंदर आसानी से मरीज ठीक हो जाते हैं।
हमेशा मास्क का करें इश्तेमाल
डॉ. चौधरी कहते हैं कि मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने के दौरान हमेशा मास्क का इस्तेमाल करने और 8 घंटे उपयोग के बाद उसे फेंक देने की सलाह दी जाती है। अगर मास्क गीला या गंदा हो जाता है, तो उसको तुरंत बदलने कहा जाता है। ऐसा करने से मरीज तो सुरक्षित रहेंगे ही, घर के अन्य सदस्य भी सुरक्षित रहेंगे। इसलिए घर पर रहते वक्त मास्क का इश्तेमाल हर हाल में करें।
एक ही कमरे में रहें
होम आइसोलेशन के दौरान मरीजों को अपने कमरे में ही रहने कहा जा रहा है और घर के दूसरे कमरों में नहीं जाने को कहा जा रहा है। साथ ही दरवाजे, टेबल जैसी चीजों को छूने से बचने कहा जा रहा है, जिससे घर के अन्य सदस्यों के कोरोना की चपेट में आने का खतरा नहीं रहे। कोरोना मरीज अपने कमरे की खिड़कियां हमेशा खुली रखने कहा जा रहा है और अलग टॉयलेट का इस्तेमाल करने भी कहा जा रहा है। घर के दूसरे सदस्यों से अपनी निजी वस्तुओं यानी कपड़े, बर्तन समेत अन्य चीजों को साझा नहीं करने की सलाह दी जा रही है।
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का सेवन करें
कोरोना मरीज को होम आइसोलेशन के दौरान डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा को नियमित रूप से लेने के लिए कहा जा रहा है। अगर मरीज किसी अन्य बीमारी की दवाएं लेते हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेने कहा जा रहा है। कोरोना मरीजों को रिकवरी पीरियड के दौरान धूम्रपान नहीं करने की सलाह दी जा रही है। साथ ही भरपूर आराम करने और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने की सलाह दी जा रही है।
परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें
अगर होम आइसोलेशन के दौरान कोरोना मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है या फिर छाती में लगातार दर्द व दबाव होता है तो  उसे तत्काल डॉक्टर से संपर्क करने के लिए कहा जाता है। मानसिक भ्रम होने या फिर होठों व चेहरों के नीले पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मी से तत्काल संपर्क करने के लिए कहा जा रहा है। साथ ही कोरोना मरीज की देखरेख करने वाले को भी पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

जीविका से जुड़कर पति को परिवार चलाने में रोजी खातून कर रही मदद

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• जीविका से जुड़ने के बाद व्यवसाय शुरू करने में मिली मदद
• प्रत्येक महीने 4000 से 5000 रूपये की होती है आमदनी
भागलपुर, 1 अगस्त
महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान ही उनके सश्क्तीकरण की बुनियाद होती है. जीविका भी कुछ ऐसे ही उद्देश्यों के साथ महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. जीविका से जुड़ने के बाद नारायणपुर प्रखंड की सिंहपुर पूर्व पंचायत के नवटोलिया गांव की रोजी खातून एजाज अली के जीवन में आयी बदलाव इसका बेहतर उदाहरण है. रोजी खातून एजाज अली की शादी के बच्चे हुए तो परिवार का खर्च भी बढ़ गया. उनके पति मजदूरी करते हैं जिससे घर चलाने में दिक्कत होने लगी. रोजी को जीविका द्वारा संचालित महिला स्वयं सहायता समूहों की जानकारी मिली एवं वह दीदी समूह मक्का ग्राम संगठन हिमालय से जुड़ गई.
नवजात को पालने में मिली मदद:
रोजी खातून जिस समय जीविका से जुड़ी उस समय वह 9 महीने की गर्भवती थी. पहले दो बच्चे के लालन-पालन के दौरान वह परेशान रहती थी. बच्चे बार-बार बीमार पड़ते थे, लेकिन जीविका से जुड़ने के बाद रोजी खातून को तीसरे बच्चे के लालन-पालन में इसका फायदा मिला. रोजी ने 6 महीने तक स्तनपान कराया. इस दौरान वह पौष्टिक आहार का सेवन करती रही. बच्चे की उम्र जब 6 माह हुई तो वह पास के आंगनबाड़ी केंद्र पर अन्नप्राशन कराने गई. अन्नप्राशन कराने के बाद भी वह 6 माह तक स्तनपान कराती रही. साथ में उसे पौष्टिक आहार भी दे रही है. इस तरह से रोजी खातून को जीविका से जुड़ने पर आर्थिक फायदा तो पहुंचा ही. साथ ही बच्चों के लालन-पालन में भी मदद मिली.
आर्थिक स्थिति में आयी सुधार:
समूह से जुड़ने के बाद रोजी को आर्थिक रूप से संबल मिलना शुरू हुआ. जीविका द्वारा प्राप्त आर्थिक सहयोग से वह अपना छोटा- मोटा व्यवसाय करने लगी. अब हर महीने वह 4000  से 5000 रूपये तक की कमाई कर  रही हैं. इस पैसे से वह पति को घर चलाने में मदद करती है और परिवार भी खुशहाल रहता है. रोजी कहती है सिर्फ पति  की मजदूरी से घर तो चला लेते लेकिन बच्चे खुशी से नहीं रह पाते. उनका ठीक से भरण-पोषण नहीं हो पाता. पढ़ाई लिखाई भी नहीं करवा पाते. इसलिए उन्होंने जीविका है जुड़ने का निर्णय लिया. उन्होंने बताया कि जीविका के सहयोग से वह हल्दी लहसुन का व्यवसाय करती है. इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने 4000  से 5000 रूपये तक की कमाई हो जाती है. वह बताती हैं इस अतिरिक्त आय से वह अपने पति को आर्थिक रूप से मदद करने में सक्षम हो रही हैं एवं अब उनका घर बेहतर तरीके से चल रहा है. साथ ही अब वह अपने बच्चे को पहले के मुकाबले ज्यादा अच्छी तरह से पालन-पोषण भी कर पा रही हैं.
जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर है नवटोलिया:
रोजी खातून  का गांव नवटोलिया जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर है और प्रखंड मुख्यालय से 5 किलोमीटर. यहां रोजगार के साधन नहीं है. ऐसे में जीविका से जुड़ना रोजी के लिए  किसी संजीवनी की तरह है. पति एजाज अली कहते हैं इलाके में व्यवसाय नहीं है. इस वजह से जीविका रोजी के लिए किससे वरदान से कम नहीं है. उनके के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था. सिर्फ मजदूरी करते थे. रोजी जब से जीविका से जुड़ी है  घर की कमाई बढ़ गई है एवं इससे बच्चे का परवरिश बेहतर तरीके से हो रहा है.
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने की कोशिश:
जीविका के नारायणपुर ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर पीएन विहंगम ने बताया इस इलाके में लोगों को मुश्किल से रोजगार मिलता है. यहां के अधिकतर परिवार के सदस्य कमाने के लिए बाहर जाते हैं.ऐसे में वे लोग इस इलाके में महिलाओं को समूह से जोड़कर रोजगार मुहैया कराने का काम कर रहे हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति थोड़ी मजबूत हो रही है और रोजगार भी मिल रहा है. दरअसल इलाके में साधन की कमी है. इस वजह से दूसरे रोजगार पनप नहीं रहे है. ऐसे में जीविका की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. यही कारण है कि रोजी जैसे महि लाओं को ढूंढकर जीविका से जोड़ने का काम कर रहे हैं

कोरोना काल में पूरी सतर्कता के साथ रहें अस्थमा के रोगी

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-बारिश और बाढ़ के मौसम में अस्थमा के अटैक की रहती है आशंका
-खाने पीने में बरतें सावधानी,साफ-सफाई का रखें विशेष ख्याल
लखीसराय,01 अगस्त,2020
कोरोना काल में अस्थमा के मरीज को पुरी तरह सतर्कता के साथ रहने की जरूरत है।क्योंकि सावधान नहीं रहने पर कोरोना के चपेट आने की प्रबल संभावना बनी रहती है।कोरोना महामारी दौर के अलावे बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है। साथ ही बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है।ऐसे में अस्थमा के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।क्योंकि ऐसे समय में अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है।थोड़ी से सावधानी बरतने पर इसका मुकाबला किया जा सकता है।
अस्थमा मरीजों को सतर्कता जरूरी
सीएस डॉ आत्मानंद राय बताते हैं कि इस मौसम में बढ़ी हुई उमस के कारण फंगस में बढ़ोत्तरी हो जाती है।इससे अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ती है।बारिश के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी हो जाती है।जो अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसानदेह है।साथ ही मानसून के कुछ वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते है।इससे भी अस्थमा की समस्या बढ़ती है।
दवा का नियमित सेवन करें
अस्थमा के रोगियों को दवा का नियमित सेवन करना चाहिए।अधिकांश अस्थमा के पीड़ित मरीज दवाएं लेते हैं।अस्थमा से पीड़ित नियमित रूप से दवा लेते रहे तो खतरा कम होगी।डॉक्टर ने अगर नियमित दवा खाने के लिए कहा है तो लापरवाही न बरतें और इस पर अमल करें।दवा का एक भी डोज छूटे नहीं।इस बात का ध्यान रखें.
खुली और ताजी हवा में रहे
अस्थमा के मरीज को खुली और ताजी हवा में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहिए और भरपूर रोशनी भी लेनी चाहिए।ऐसे रोगियों को ताजे और स्वच्छ पानी क भी भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए।अस्थमा के रोगियों को हल्का भोजन करना चाहिए।क्योंकि भारी भोजन के सेवन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है।अस्थमा के मरीजों को भोजन धीरे-धीरे एवं खूब चबाकर करना चाहिए।ऐसे मरीज दिन में आठ से दस ग्लास पानी अवश्य सेवन करें।डॉक्टर की सलाह लेकर अस्थमा के रोगी को शरीर में एसिड पैदा करने वाली चीजें जैसे कार्बोहाइड्रेटष फैट्स और प्रोटीन का इस्तेमाल कम मात्रा में करने की आवश्यकता है।
खाने में हल्की चीजों का करें इस्तेमाल:
अस्थमा के रोगियों को खाने में हल्की चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए।दोपहर और रात के खाने में कच्ची सब्जियां और टमाटर,गाजर और सलाद का इस्तेमाल करें।अस्थमा के रोगियों को तनाव से बचने का प्रयास करना चाहिए।इन सभी के कारण अस्थमा अटैक आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।इनके लिए इन्हेलर का भी बेहतर विकल्प है।
  इन बातों का भी रखें ध्यान
-नम और उमस भरे क्षेत्र को नियमित रूप से  सुखाते रहे
-बाथरूम की नियमित रूप से सफाई करें
-एक्जॉस्ट फैन का उपयोग करें और घर में नमी न होने दे
-भीगे कपड़े से फर्श की सफाई करें
-रोजाना सांस लेने की कोई वर्जिश करें
-मोटी तकिया रखकर सोएं। इससे भी आपको अस्थमा की समस्या से राहत मिलगी।

चुनौतियों के बीच भी जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी दे रहे अनवरत सेवा

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लखीसराय/01अगस्त,2020:
कोविड-19 का प्रभाव जिले में भी तेजी से बढ़ रहा है. शहरों के बाद यह गाँवों में भी दस्तक देने लगा है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात अपनी सेवा देने में जुटे हुए है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती इन्हीं स्वास्थ्य कर्मियों में एक हैं, जो इस महामारी के दौर में एक तरफ़ टीकाकरण जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवा को सुनिश्चित करने में अपना योगदान दे रहे हैं तो दूसरी तरफ कोरोना की रोकथाम में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं. कोरोना संक्रमितों के उपचार के लिए जिले में बनाये गए आईसोलेशन सेंटर का नियमित दौरा करना हो या कोरोना संक्रमितों का हाल चाल लेना हो, वह अपनी सेवा पूरी निष्ठा से दे रहे हैं.
बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने में कर रहे सहयोग:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया संक्रमण काल में संक्रमितों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के मकसद की दिशा में वह निरंतर सहयोग कर रहे हैं. आइसोलेशन सेंटर में रह कर अपना इलाज करवा रहें रोगियों को सुविधाओं के साथ मानसिक संबल की जरूरत है. इसलिए वह लोगों से मिलते हैं एवं उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं. उन्होंने बताया वह निजी तौर पर आईसोलेशन सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लेते हैं एवं किसी भी तरह की कमी महसूस करने पर वह स्वयं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराते हैं.
स्वास्थ्य कर्मियों का बढ़ा रहें हैं उत्साह:
डॉ. भारती कोविड-19 के दौर में बिना किसी संकोच के मरीजों की सेवा में उत्साह के साथ लगे हुए हैं साथ ही वह  स्वास्थ कर्मियों से मिलकर उनका एवं उनके परिवार का हाल-चाल भी लेते हैं. वह परिवार के अन्य सदस्यों की तरह उनसे बातचीत कर उनका हौसला भी बढ़ा रहें हैं। डॉ. भारती बताते हैं वह डयूटी के दौरान होने वाली परेशानियों से अवगत हैं. इसलिए वह स्वास्थ्य कर्मियों से मिलकर उनकी समस्याओं को जानते हैं एवं हर संभव प्रयास कर उनकी परेशानियों को दूर करते हैं.
हर गतिविधि पर रखते हैं नजर:
डॉ भारती हर दिन शाम में मोबाइल पर बात कर एवं व्हाट्सऐप के माध्यम से जिले के सभी पीएचसी का कार्यों का अपडेट लेते हैं एवं आवश्यकता अनुसार आवश्यक निर्देश देते हैं, ताकि बेहतर से बेहतर पैमाने पर कार्य हो सके एवं मरीजों को बेहतर से बेहतर सुविधा मिल सके।
नियमित टीकाकरण का भी कर रहे निगरानी:
डॉ. भारती कोविड-19 से संबंधित कार्य के साथ बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का होने वाले नियमित टीकाकरण अभियान को गति देने के लिए टीकाकरण की स्थिति का भी निगरानी कर रहे हैं एवं हर गतिविधि की जानकारी ले रहे हैं।टीकाकरण कार्य में शामिल एएनएम समेत अन्य कर्मियों को इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देते हैं एवं टीकाकरण के दौरान मास्क का अनिवार्य रूप से पालन करने,सोशल-डिस्टेसिंग बनाऐ रखने,सेनेटाइज करने, साबुन से 30 सेकेंड तक हाथ की अच्छी तरह से सफाई करने अन्य उपायों की जानकारी देकर अपनाने के लिए प्रेरित कर रहें हैं।
किसी तरह की लापरवाही हो सकती है भारी:
डॉ. भारती कहते हैं कि कोरोना संक्रमण अभी के दौर में एक गंभीर समस्या है। इससे सामान्य लोग ही नहीं चिकित्साकर्मी तक संक्रमित हो रहे हैं।इसलिए इसे गंभीरता से लेना होगा।यह संक्रमण किसी को भी हो सकता है,यदि इससे बचाव के सटीक उपाय नहीं अपनाए गए।उन्होंने लोगों से घर से निकलने के वक़्त हर हाल में मास्क पहनने की अपील की।साथ ही लोगों से सोसल-डिस्टेंस बनाये रखने की भी जरूरत पर बल दिया।

बरसात के मौसम में घेरलु उपाय कर खुद का करें बचाव

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बारिश के मौसम में फ्लू का खतरा रहता है ज्यादा

थोड़ी सी सावधानी बरतकर खुद का कर सकते हैं बचाव

बांका, 31 जुलाई

बारिश के मौसम में फ्लू के मामले बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है। कोरोना काल में फ्लू से बचकर रहना ही बेहतर है। ऐसे मौसम में घेरलु उपचार भी बहुत कारगर है। वायरल और फ्लू से बचने के कई देसी उपाय हैं, जिसे अपनाकर हम सुरक्षित रह सकते हैं।

बांका अरबन पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि बारिश के मौसम में सावधान नहीं रहने से कई तरह की बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। इस मौसम में अनावश्यक भीगने से बचें। साथ ही घरेलु नुस्खे को अपनाने से भी कई बीमारियों से बचा जा सकता है।  रोज सुबह-सुबह काढ़ा का सेवन करें। साथ ही रात में सोते वक्त दूध में हल्दी डालकर पीएं। गर्म भोजन करें। इससे कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे।

गुनगुने पानी का सेवन करें:

बारिश में प्यास कम लगती है और इसके चलते लोग पानी के बजाय चाय-कॉफी ज्यादा पीने लगते हैं। इससे नुकसान होता है। शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। आप जो पानी पी रहे हैं, वह साफ हो इस बात का विशेष ख्याल रखें। मौसमी बीमारियों या फ्लू से बचने के लिए दिन में कई बार गुनगुने पानी का ही सेवन करना चाहिए। इससे इससे गले में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस के खत्म हो जाती है। इसका सेवन करने से फ्लू और वायरल से बच सकते हैं।

घर में बना आयुर्वेदिक काढ़ा जरूर पीएं:_

आयुर्वेदिक काढ़ा कई तरह की औषधियों को मिलाकर बनाया जाता है। यह शरीर के इम्युन सिस्टम को मजबूत करता है। शरीर किसी भी तरह की बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है। इसलिए अजवाइऩ, पुदीना, अदरक, काली मिर्च से तैयार किया गया काढ़ा जरूर पीएं। यदि आप घर पर काढ़ा तैयार नहीं कर सकते तो इन दिनों बाजार में भी तैयार काढ़ा मसाला पैकेट मिलने लगे हैं, जिन्हें गर्म करके पीया जा सकता है।

रात में सोते समय हल्दी वाला दूध पीए:

हल्दी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मौसमी बीमारियों से बचने के लिए रात में सोते समय हल्दी का दूध जरूर पीएं। बच्चों को तो खासकर यह काढ़ा पिलाएं। मौसमी बीमारियों का प्रकोप बच्चों पर ज्यादा होता है। उनका इम्युन सिस्टम बड़ों की तुलना में ज्यादा कमजोर होता है। इसलिए बड़ों के साथ बच्चों को भी जरूर काढ़ा पिलाएं।

नई शिक्षा नीति में क्रिएटिविटी पर ज्यादा जोर – रविश रोशन, डायरेक्टर सीईजीआर

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नईदिल्ली-

सेंटर फोर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च के डायरेक्टर रविश रोशन ने सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति को मंजूरी देने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे निश्चिततौर पर क्रिएटिविटी पर ज्यादा जोर होगा। ज्यादा एजुकेशन प्रायोगिक होगा।

रविश रोशन ने कहा कि सरकार की नई शिक्षा नीति से शिक्षा का समग्र रूप से विकास होगा। सरकार ने हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा आठ क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई कोर्स लागू करने की बात कही है इससे अपने देश की भाषा का विकास होगा। वहीं सरकार ने वर्चअल लैब के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बात कही है इससे काफी फायदा होगा।

सीईजीआर के डायरेक्टर ने कहा कि सरकार ने कई रेगुलेटरी को मिलाने की बात कही है इससे तालमेल के साथ काम होगा। 34 वर्षों के बाद शिक्षा नीति में बदलाव हो रहा है इससे कई तरह के महत्वपूर्ण बदलाव भी होगा।

aरविश रोशन ने कहा कि सरकार ने विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में आने की छूट दी है इससे जो विदेश में छात्र एजुकेशन के लिए जा रहे थे उन्हें अब यह देश में ही ड़िग्री भी मिल सकेगी। और देश के विश्वविद्यालय बाहर भी जा सकेंगे। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। सीईजीआर नई शिक्षा नीति लाने के लिए सरकार के फैसले का स्वागत करती है।

शिक्षा का समग्र विकास होगा- वीएम बंसल, चेयरमैन, एनडीआईएम

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नईदिल्ली-

न्यू देहली इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन वीएम बंसल ने कहा कि सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति को मंजूरी देने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे निश्चिततौर पर क्रिएटिविटी पर ज्यादा जोर होगा। ज्यादा एजुकेशन प्रायोगिक होगा।

वीएम बंसल ने कहा कि सरकार की नई शिक्षा नीति से शिक्षा का समग्र रूप से विकास होगा। सरकार ने हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा आठ क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई कोर्स लागू करने की बात कही है इससे अपने देश की भाषा का विकास होगा। वहीं सरकार ने वर्चअल लैब के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बात कही है इससे काफी फायदा होगा। वीएम बंसल ने कहा कि सरकार ने कई रेगुलेटरी को मिलाने की बात कही है इससे तालमेल के साथ काम होगा। 34 वर्षों के बाद शिक्षा नीति में बदलाव हो रहा है इससे कई तरह के महत्वपूर्ण बदलाव भी होगा।

rवीएम बंसल ने कहा कि सरकार ने विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में आने की छूट दी है इससे जो विदेश में छात्र एजुकेशन के लिए जा रहे थे उन्हें अब यह देश में ही ड़िग्री भी मिल सकेगी। और देश के विश्वविद्यालय बाहर भी जा सकेंगे। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। एनडीआईएम नई शिक्षा नीति लाने के लिए सरकार के फैसले का स्वागत करती है।

सोशल-डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए मनाएं ईद-अल-अज़हा का त्यौहार

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लखीसराय-
इस वर्ष बकरीद या ईद-अल-अज़हा ऐसे दौर में आया है, जब पूरी दुनियां कोविड-19 वायरस के चपेट में है। इस माहौल को देखते हुए विश्व के विभिन्न स्वास्थ्य संगठन एवं सरकार भी सुरक्षित तरीके से पर्व मनाने को लेकर दिशानिर्देश जारी कर रही हैं। इसी कड़ी में बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन  (बी.आई.ऍफ़.सी.) ने भी इस त्यौहार को सुरक्षित रूप से मनाने के लिए दिशानिर्देश जारी की है. बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन अलग-अलग धर्मगुरुओं को एक साथ लाकर इस दिशा में पहले से कार्य भी करती रही है.
सुरक्षित रहकर मनाएं त्यौहार:
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने एक तरफ सरकार के सामने चुनौती पेश की है तो दूसरी तरफ़ लोगों के सामान्य जीवन शैली को भी बहुत प्रभावित किया है. ऐसी स्थिति में बकरीद या ईद-अल-अज़हा को सुरक्षित रूप से मनाने की जरूरत अधिक हो गयी है. इसको लेकर हज़रत सैयद शाह शमीमुद्दीन अहमद मुनेमी (खानका मुनेमिया) हाजी एस एम् सनाउल्लाह (इदारे शरिया) मौलाना अनिसुर रहमान (आल इंडिया मिल्ली काउन्सिल ) मो रिजवान अहमद (जमाते इस्लामी हिंद ) और अन्य बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन  के सदस्यों ने बक़रीद की मुबारकबाद देते हुए जनता से सुरक्षित तारीके से , शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए त्यौहार मनाने की अपील की है. साथ ही कोरोना संक्रमण प्रसार के मद्देनजर सबों ने इस बात पर जोर दिया है कि आम समुदाय साबुन से बार-बार हाथ धोकर और मास्क पहन ही कोई भी कार्य करें तथा ये बातें अपने बच्चों को भी सिखाएं.
संक्रमण का प्रसार मनुष्यों के साथ पशुओं में भी होने की संभावना:
बी.आई.ऍफ़.सी. के धर्मगुरुओं ने इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि कोविड1-9 का प्रसार मुख्य रूप से मनुष्य से मनुष्यों में होता है. लेकिन इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि इसका प्रसार मनुष्यों से पशुओं में भी हो सकता है, ख़ासतौर से कोविड से संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से. इस बीमारी से होने वाले घातक स्वास्थ्य परिणाम, असमय मृत्यु, अनावश्यक खर्च ओर परेशानी से बचने के लिए उन्होंने सलाह दी है. साथ ही ईद-अल-  अज़हा पर जानवरों की परंपरागत कुर्बानी देते समय कुछ बातों का अधिक ध्यान रखने की अपील भी की है. उन्होंने बताया है कि पूर्व की हिदायतों को अमल में लाते हुए घर पर कुर्बानी देने से परहेज़ करें.
कुर्बानी के दौरान एहतियात बरतें:
भीड़भाड़ से संक्रमण की तेजी से फैलने  का ख़तरा रहता है. इसलिए भीड़ कम से कम लगायें. जैसा  की कुर्बानी के मामले में हमेशा हिदायत की जाती है, हाथ और औजारों की साफ़-सफाई सुनिश्चित करें और साबुन से अच्छे से हाथ धोएं एवं उन्हें स्ट्रेलाईज भी करें. बीमार लग रहे जानवरों की कुर्बानी भी ठीक नहीं है.  अगर पशु बीमार लग रहे हों, तो उनकी कुर्बानी ना दें. इसके अलावा पशुओं की खरीद के मसले पर भी उन्होंने ध्यान दिलाया की जानवरों को विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदें.
मांस के बंटवारे के वक्त भी सावधानी बरतना जरुरी:
आस-पास की  मस्जिद या दुसरे किसी संगठन की सहायता लें ताकि आस—पड़ोस में अनावश्यक भीड़ भाड़ ना हो. हाथों की सफाई, मास्क पहन, शारीरिक दूरी बनाये रखने का पूरे क्रम (कुर्बानी के दौरान, उचित हिस्से करने, फ्रिज इत्यादि में सुरक्षित रखने ओर बांटने) में पूरा पूरा ध्यान रखें. मीट को साफ़ कर, ऊँचे तापमान पर देर तक पकाने के बाद ही, साबुन से हाथ धोकर खाएँ.
थोड़ी से सावधानी सुरक्षा में होगा कारगर:
उलेमाओं ने बिहार इंटरफेथफोरम (बी.आई.एफ़.सी.) के मंच के जरिये कहा कि थोड़ी सी सावधानियों के जरिये हम  खुद भी सुरक्षित रहेंगे ओर दूसरों को बीमारी से बचाते हुए त्यौहार मनाएंगे. बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और वंचित परिवारों की विशेष देखभाल करे. सभी की ख़ुशहाली के लिए घर पर ही नमाज़ पढ़े एवं दुआ करे और आपसी सौहार्द बनाए रखें.
बीआईएफ़सी को मिल रहा यूनिसेफ़ का तकनीकी सहयोग:
बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन (बी.आई.एफ़.सी) धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं और संगठनों का एक स्वैच्छिक मंच है, जो बच्चों और महिलाओं के अधिकारों और उनके हित के लिए निरंतर कार्य कर रही है. यूनिसेफ विकाराथ ट्रस्ट से समन्वय स्थापित कर बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है

सुरक्षित रहकर मनाएं ईद-अल-अज़हा का त्यौहार

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 भागलपुर-
इस वर्ष बकरीद या ईद-अल-अज़हा ऐसे दौर में आया है, जब पूरी दुनियां कोविड-19 वायरस के चपेट में है। इस माहौल को देखते हुए विश्व के विभिन्न स्वास्थ्य संगठन एवं सरकार भी सुरक्षित तरीके से पर्व मनाने को लेकर दिशानिर्देश जारी कर रही हैं। इसी कड़ी में बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन  (बी.आई.ऍफ़.सी.) ने भी इस त्यौहार को सुरक्षित रूप से मनाने के लिए दिशानिर्देश जारी की है. बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन अलग-अलग धर्मगुरुओं को एक साथ लाकर इस दिशा में पहले से कार्य भी करती रही है.
सुरक्षित रहकर मनाएं त्यौहार:
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने एक तरफ सरकार के सामने चुनौती पेश की है तो दूसरी तरफ़ लोगों के सामान्य जीवन शैली को भी बहुत प्रभावित किया है. ऐसी स्थिति में बकरीद या ईद-अल-अज़हा को सुरक्षित रूप से मनाने की जरूरत अधिक हो गयी है. इसको लेकर हज़रत सैयद शाह शमीमुद्दीन अहमद मुनेमी (खानका मुनेमिया) हाजी एस एम् सनाउल्लाह (इदारे शरिया) मौलाना अनिसुर रहमान (आल इंडिया मिल्ली काउन्सिल ) मो रिजवान अहमद (जमाते इस्लामी हिंद ) और अन्य बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन  के सदस्यों ने बक़रीद की मुबारकबाद देते हुए जनता से सुरक्षित तारीके से , शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए त्यौहार मनाने की अपील की है. साथ ही कोरोना संक्रमण प्रसार के मद्देनजर सबों ने इस बात पर जोर दिया है कि आम समुदाय साबुन से बार-बार हाथ धोकर और मास्क पहन ही कोई भी कार्य करें तथा ये बातें अपने बच्चों को भी सिखाएं.
संक्रमण का प्रसार मनुष्यों के साथ पशुओं में भी होने की संभावना:
बी.आई.ऍफ़.सी. के धर्मगुरुओं ने इस बात पर जोर देते हुए कहा है कि कोविड1-9 का प्रसार मुख्य रूप से मनुष्य से मनुष्यों में होता है. लेकिन इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि इसका प्रसार मनुष्यों से पशुओं में भी हो सकता है, ख़ासतौर से कोविड से संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से. इस बीमारी से होने वाले घातक स्वास्थ्य परिणाम, असमय मृत्यु, अनावश्यक खर्च ओर परेशानी से बचने के लिए उन्होंने सलाह दी है. साथ ही ईद-अल-  अज़हा पर जानवरों की परंपरागत कुर्बानी देते समय कुछ बातों का अधिक ध्यान रखने की अपील भी की है. उन्होंने बताया है कि पूर्व की हिदायतों को अमल में लाते हुए घर पर कुर्बानी देने से परहेज़ करें.
कुर्बानी के दौरान एहतियात बरतें:
भीड़भाड़ से संक्रमण की तेजी से फैलने  का ख़तरा रहता है. इसलिए भीड़ कम से कम लगायें. जैसा  की कुर्बानी के मामले में हमेशा हिदायत की जाती है, हाथ और औजारों की साफ़-सफाई सुनिश्चित करें और साबुन से अच्छे से हाथ धोएं एवं उन्हें स्ट्रेलाईज भी करें. बीमार लग रहे जानवरों की कुर्बानी भी ठीक नहीं है.  अगर पशु बीमार लग रहे हों, तो उनकी कुर्बानी ना दें. इसके अलावा पशुओं की खरीद के मसले पर भी उन्होंने ध्यान दिलाया की जानवरों को विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदें.
मांस के बंटवारे के वक्त भी सावधानी बरतना जरुरी:
आस-पास की  मस्जिद या दुसरे किसी संगठन की सहायता लें ताकि आस—पड़ोस में अनावश्यक भीड़ भाड़ ना हो. हाथों की सफाई, मास्क पहन, शारीरिक दूरी बनाये रखने का पूरे क्रम (कुर्बानी के दौरान, उचित हिस्से करने, फ्रिज इत्यादि में सुरक्षित रखने ओर बांटने) में पूरा पूरा ध्यान रखें. मीट को साफ़ कर, ऊँचे तापमान पर देर तक पकाने के बाद ही, साबुन से हाथ धोकर खाएँ.
थोड़ी से सावधानी सुरक्षा में होगा कारगर:
उलेमाओं ने बिहार इंटरफेथफोरम (बी.आई.एफ़.सी.) के मंच के जरिये कहा कि थोड़ी सी सावधानियों के जरिये हम  खुद भी सुरक्षित रहेंगे ओर दूसरों को बीमारी से बचाते हुए त्यौहार मनाएंगे. बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और वंचित परिवारों की विशेष देखभाल करे. सभी की ख़ुशहाली के लिए घर पर ही नमाज़ पढ़े एवं दुआ करे और आपसी सौहार्द बनाए रखें.
बीआईएफ़सी को मिल रहा यूनिसेफ़ का तकनीकी सहयोग:
बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर चिल्ड्रेन (बी.आई.एफ़.सी) धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं और संगठनों का एक स्वैच्छिक मंच है, जो बच्चों और महिलाओं के अधिकारों और उनके हित के लिए निरंतर कार्य कर रही है. यूनिसेफ विकाराथ ट्रस्ट से समन्वय स्थापित कर बिहार इंटरफेथ फोरम फॉर को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है

रजौन पीएचसी में परिवार नियोजन कार्यक्रम पर रहा जोर

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-अब तक 20 महिलाओं का हुआ सफल बंध्याकरण
-जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा में परिवार नियोजन पर फोकस
बांका, 30 जुलाई:
जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर कोरोना के बीच अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। रजौन पीएचसी में ओपीडी सेवा का संचालन बेहतर तरीके से चल रहा है। अस्पताल की बेहतर व्यवस्था को देखकर काफी संख्या में मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में अस्पताल में 20 महिलाओं ने परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी भी करायी है। इलाके में परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति देने के लिए अस्पताल में तैनात डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगातार प्रयास कर रही है।
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन पर बल:
अस्पताल प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया कोरोना को लेकर कुछ दिनों के लिए स्वास्थ्य सेवा रोक दी गई थी, लेकिन निर्देश मिलने के बाद से ओपीडी सेवा को फिर से बहाल कर दी गयी है। अभी जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा चल रहा है, जो 11 जुलाई से शुरू होकर आज शुक्रवार तक चलेगा।  इसलिए अभी परिवार नियोजन कार्यक्रम पर जोर दिया जा रहा है। वहीं ओपीडी में सभी तरह के मरीजों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की टीम मरीजों के इलाज में लगे हुए हैं। साथ ही अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी उनकी हर तरह से देखभाल कर रहे हैं।
गर्भवती महिलाओं व शिशुओं को लेकर बरती जा रही सतर्कता:
डॉ. ब्रजेश कुमार ने बताया अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं के इलाज को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनके इलाज को लेकर सरकार की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। अस्पताल की नर्स व एएनएम पूरी तरह से सुरक्षित होकर गर्भवती महिलाओं की जांच करती हैं। डॉक्टर भी सावधानीपूर्वक इनका इलाज करते हैं।
सामाजिक दूरी का रखा जा रहा ख्याल:
अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों से सामाजिक दूरी का पालन करवाया जा रहा है। दो लोगों के बीच दो मीटर की दूरी हो, इसका ख्याल रखा जा रहा है। बाहर से आने वाले मरीजों को देखने से पहले विशेष सतर्कता बरती जा रही है। यहां आने वाले मरीजों को मास्क और सेनिटाइजर भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी पूरी तरह मास्क और ग्लब्स पहनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
सभी लोगों की हो रही थर्मल स्कैनिंग:
अस्पताल में आने वाले सभी व्यक्ति, चाहे मरीज हो या फिर उसके परिजन, उनकी थर्मल स्कैनिंग की जा रही है। शरीर के तापमान को मापने के बाद  ही इलाज किया जा रहा है। इस दौरान अगर कोई संदिग्ध मरीज दिखता है तो उसे सैंपलिंग के लिए भेज दिया जाता है। स्वास्थ्यकर्मी पूरी मुस्तैदी से अपने मोर्चे पर डटे हुए हैं।