अब कोरोना जाँच के लिए अस्पतालों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर

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-जिले के सभी पीएचसी में वीटीएम एवं ऐंटीजन किट से जाँच शुरू
मुंगेर-
कोविड-19 महामारी के दौर में भी सरकार लोगों को बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर पुरी तरह सजग है एवं  लोगों को किसी प्रकार का परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े,इसके विशेष ख्याल रख रही है।कोरोना जाँच कराने में आ रही परेशानियाँ को देखते हुए सरकार ने सभी पीएचसी में जाँच की सुविधा उपलब्ध कराकर ऐसे मरीजों की सभी समस्याएँ को दुर कर दी है।ताकि मरीजों को अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़े।एवं लोग उत्साह के साथ कोरोना जाँच करा सके।सरकार के निर्देशानुसार मंगलवार को जिले के सभी पीएचसी में ऐंटीजन किट के माध्यम से जाँच शुरू कर जाँच कार्य में गति दी गई।यह जाँच पीएचसी के चिकित्सकों के नेतृत्व में प्रशिक्षण प्राप्त लैब टेक्नीशियन के द्वारा किया जा रहा है।इस दौरान सरकार के सभी गाइलाइन का पालन किया जा रहा है।जिला सिविल सर्जन डॉ के पुरोषत्तम ने बताया कि जिले के सभी पीएचसी में वीटीएम एवं ऐंटीजन किट से कोरोना जाँच किया जा रहा है।एवं जाँच कराने आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो।इसके लिए सभी पीएचसी प्रभारी को मरीजों का विशेष ख्याल रखने के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े।एवं मरीज उत्साह के साथ जाँच कराने के लिए पीएचसी आए।जिले के सभी पीएचसी में जाँच प्रक्रिया को तेज करने के 10625 उपलब्ध कराऐ गये है।एवं हर दिन जिले के सभी पीएचसी में कुल कितने लोगों की जाँच की गई।इसका रिपोर्ट राज्य स्वास्थ समिति उपलब्ध कराया जाएगा।
सोशल-डिस्टेंसिंग के पालन का रखा जा रहा है ख्याल:
जाँच के दौरान सोशल-डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा रखा जा रहा है।ताकि जाँच में आने वाले कोई भी व्यक्ति संक्रमित नहीं हो।इसके लिए सभी पीएचसी के पीएचसी प्रबंधन पुरी तरह सजग है।
जाँच के बाद पीएचसी कर्मी लोगों को कर रहे हैं जागरूक
जाँच कराऐ आए लोगों का जाँच के बाद पीएचसी निगेटिव एवं पाॅजीटिव पाए जाने वाले लोगों को कोविड-19 से बचाव को लेकर आवश्यक जानकारियाँ देते हुए जागरूक भी कर रहे हैं।ताकि कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण पर काबू हो सके।एवं लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो।
मास्क का अनिवार्य रूप से करें उपयोग
जाँच में आए सभी मरीजों को स्वस्थ कर्मी द्वारा मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किए जा रहें हैं।साथ ही सोशल-डिस्टेंसिंग का पालन करने,भीड़-भाड़ वाले जगह से बचने एवं दुसरो को भी जागरूक करने को कहा गया।
चिकित्सा परामर्श का पालन करें संक्रमित मरीज
जाँच के दौरान पाॅजिटिव पाए जाने वाले मरीजों से चिकित्सा परामर्श का पालन करने का स्वास्थ कर्मियों द्वारा अपील किया गया।जैसे कि अलग कमरे में रहना,बेहतर मास्क का उपयोग करना, रहने वाले कमरे आवश्यकतानुसार लगातार सेनेटाइज करना,परिवार के सदस्यों से भी अलग रहने,समय पर दी गई दवाई को खाने आदि की जानकारी दी गई।

कोविड-19 के दौर में सुरक्षा के साथ हो रहा है टीकाकरण

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-टीकाकरण के लिए गर्भवती महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं स्वास्थ कर्मी
लखीसराय,30 जुलाई,2020
कोविड-19 महामारी के दौर में भी सरकार हर लोगों के सुरक्षा को लेकर पुरी तरह सजग है।ताकि किसी भी लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझना ना पड़े।इसके लिए सभी ऑगनबाड़ी केंद्र व अन्य जगहों पर शिशु व गर्भवती महिलाओं का होने वाले टीकाकरण अभियान में गति देने के लिए कोरोना से बचाव का ख्याल रखते हुए पूरी सतर्कता के साथ टीकाकरण अभियान को तेज कर दी गई है,जिसे सफल बनाने को लेकर एएनएम,आशा,ऑगनबाड़ी सेविका समेत अन्य स्वास्थ व इनसे जुड़े कर्मी द्वारा जिले भर में पूरे उत्साह व सुरक्षा के साथ गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है।ताकि इस अभियान से एक भी गर्भतवती वंचित ना हो एवं शत-प्रतिशत महिलाओं व शिशु का ससमय टीकाकरण हो।
ससमय टीकाकरण कराने के लिए गर्भवती महिलाओं को की जा रही है जागरूक :
ससमय टीकाकरण कराने को लेकर स्वास्थ कर्मियों द्वारा जागरूकता अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों को जागरूक किया जा रहा है एवं घर-घर जाकर ऐसे महिलाओं को टीकाकरण के लिए केंद्र पर आने को लेकर प्रेरित भी किया जा रहा है।दरअसल गर्भवती महिलाओं द्वारा ससमय टीकाकरण नहीं कराने से जच्चा-बच्चा दोनों पर भारी पड़ सकता है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया  0 से 05 वर्ष के बच्चे व गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण कराने को लेकर एएनएम एवं आशा को जरूरी निर्देश दिए गए हैं एवं गर्भवती महिलाओं को जाँच के लिए अस्पताल लाना भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।ताकि सुरक्षित प्रसव के साथ-साथ जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रह सके।
सोशल डिस्टेंसिंग का रखा जा रहा है ख्याल :
टीकाकरण के दौरान सोशल-डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा है, ताकि टीकाकरण के लिए आने वाले गर्भवती महिलाओं व शिशु को किसी प्रकार का परेशानियाँ नहीं हो।इसके अलावे स्वास्थ कर्मियों को लगातार सेनेटाइजर एवं मास्क का उपयोग समेत कोविड-19 से वचाव को लेकर अन्य एहतियात बरत रहे हैं।साथ ही आने वाले महिलाओं को भी उक्त सभी वचाव के तरीके का पालन करा रहे हैं।
कोरोना वायरस से बचाव को लेकर दी जा रही है जानकारी
टीकाकरण के दौरान स्वास्थ कर्मी द्वारा गर्भवती महिलाओं को कोरोना वायरस से वचाव को लेकर आवश्यक जानकारियाँ भी दी जा रही है, जिसमें महिलाओं को मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग,भीड़-भाड़ वाले जगह से बचने,साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने,लगातार हाथ धोने या सेनेटाइज करने,सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने आदि की जानकारी देकर पालन करने के लिए प्रेरित की जा रही है।
इस तरह बरती जा रही है सतर्कता
टीकाकरण के दौरान संक्रमण से पूरी तरह सतर्कता भी बरती जा रही है।कर्मी फेस मास्क,लगातार सेनेटाइजर का उपयोग,सोशल डिस्टेंसिंग ख्याल रखते हुए अन्य वचाव से संबंधित उपायों का पालन कर रहे हैं।

भागलपुर में अगले सप्ताह से दोगुनी होगी कोरोना जांच

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जिले के पीएचसी पर रैपिड किट से जांच की तैयारी
अब मेडिकल कॉलेज में भी होगी कोरोना जांच
भागलपुर, 30 जुलाई
कोरोना के बढ़ते मरीजों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने इलाज को लेकर तैयारी तेज कर दी है। अब जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रैपिड किट से जांच की तैयारी की जा रही है। ऐसा होने पर जिले में एक दिन में लगभग 600 लोगों की जांच होने लगेगी। अभी एक दिन लगभग 300 लोगों की कोरोना जांच हो रही है। चिह्नित मरीजों का इलाज भी जल्द शुरू हो जाएगा।
सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने बताया कि अभी सदर अस्पताल और जिले के सभी अनुमंडल अस्पतालों में जांच हो रही है। कुछ रेफरल अस्पतालों व कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कोरोना के सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच में तेजी लाने के उद्देश्य से अगले सप्ताह से हर पीएचसी केंद्रों पर जांच शुरू हो जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में आरटीपीसीआर मशीन से जांच शुरू:
सिविल सर्जन ने बताया जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज परिसर में दो सप्ताह से बनकर तैयार कोरोना लैब को भी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से मंजूरी मिल गई है। अब मायागंज अस्पताल की कोरोना लैब में जहां दो ट्रूनॉट मशीन व रैपिड एंटीजन किट से कोरोना जांच की जायेगी तो मेडिकल कॉलेज में तैयार लैब में आरटीपीसीआर मशीन से जांच होगी। गुरुवार को 20 लोगों की ट्रायल के तौर पर जांच भी हुई। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार सिन्हा ने कहा कि अभी आठ दिनों तक हर रोज 20 से 25 लोगों के सैंपल की कोरोना जांच होगी। इसके बाद हर रोज 300 सैंपल की कोरोना जांच की जायेगी।
जांच बढ़ने से कोरोना के संक्रमण को रोकने में मिलेगी मदद:
सिविल सर्जन विजय कुमार सिंह ने कहा कि जिले में कोरोना की जांच बढ़ने से इसके संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी। जांच के बाद लोगों को पता चल जाएगा कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं। संक्रमितों की पहचान होने से लोग उससे दूरी बनाकर अपना बचाव कर सकेंगे। वहीं चिह्नित मरीज भी होम आइसोलेशन में रहकर खुद को स्वस्थ कर पाएंगे। मरीज के गंभीर होने पर उसे कोविड केयर सेंटर या फिर मायागंज अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।
सरकारी गाइडलाइन का किया जाएगा पालन:
जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोरोना मरीजों की जांच के दौरान सरकारी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लब्स के साथ पीपीई किट पहनकर ही मरीजों की जांच करेंगे। इस दौरान हर दो मीटर की दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। इसे लेकर पूरी व्यवस्था की गई है। इलाज क दौरान मरीज तो सामाजिक दूरी का पालन करेंगे ही, साथ ही स्वास्थ्यकर्मी भी इसका ध्यान करेंगे।

अब मरीजों को अस्पताल जाने के लिए ससमय मिलेगी एम्बुलेंस सेवा

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जिले में रखें जाएंगे किराये के अतिरिक्त निजी एम्बुलेंस
• राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को दिए हैं निर्देश
मुंगेर,29 जुलाई 2020:
कोरोना माहमारी के इस दौर भी सरकार को लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ सेवा सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर पूरी तरह सजग एवं कटिबद्ध है एवं लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ नहीं हो इसके लिए हर संभव प्रयास भी कर रही है. इसी कड़ी में सरकार ने लोगों को ससमय अस्पताल पहुँचाने के लिए जिले में किराये  के निजी एम्बुलेंस रखने का निर्णय लिया है।इसको लेकर राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने जिले के जिलाधिकारी एवं जिला सिविल सर्जन पदाधिकारी को पत्र भेजकर कर इसे सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है, ताकि मरीजों को ससमय ऐंम्बुलेंस सेवा उपलब्ध हो सके एवं समय पर अस्पताल पहुँचने में कोई परेशानियाँ नहीं हो।
मरीजों की परेशानियाँ दूर करने के लिए लिया गया यह निर्णय:
पत्र में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों में ऐंम्बुलेंस का उपयोग कोविड-19 के मरीजों के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसके कारण आम मरीजों को स्वास्थ संस्थानों में आने-जाने के लिए 102 एम्बुलेंस सेवा प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. मरीजों के इन्हीं परेशानियों को देखते हुए जिलों में किराये के एम्बुलेंस उपलब्ध कराये जायेंगे.
किराये के एम्बुलेंस के दर हुए तय:
पत्र में बताया गया है कि किराये पर रखने एम्बुलेंस के लिए कोई निर्धारित दर नहीं रहने के कारण जिलों में निजी स्तर से ऐंम्बुलेंस रखने में कठिनाइयाँ होने की सूचना प्राप्त हो रही है।जिसे निदेशक प्रमुख की अध्यक्षता में बैठक दुर करते हुए भाड़े का निर्धारित की गई।पत्र में अलग-अलग वाहनों का अलग दर निर्धारित की गई है।
दो माह तक रखें जाएंगे किराये के निजी  ऐंम्बुलेंस
भाड़े रखे जाने वाली ऐंम्बुलेंस अगले दो माह तक के लिए रखें जाएंगे, जो मरीजों को आवश्यकता अनुसार सुविधा उपलब्ध कराएँगे। एम्बुलेंस में दवा कंज्यूमेबल एवं उपकरण,बीएलएसए के लिए 102 ऐंम्बुलेंस के अनुबंध में अंतर्निहित एनेक्सर ए एवं बी के अनुसार रखें जाएंगे।

सदर अस्पताल में 50 बेड का कोविड केयर सेंटर आज से होगा शुरू

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कोरोना के गंभीर मरीजों का यहां पर होगा इलाज
ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भी यहां पर है सुविधा
बांका, 29 जुलाई
कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारी तेज कर दी है। इसे लेकर बांका सदर अस्पताल में 50 बेड का कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। जहां पर आज से कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज हो सकेगा। अभी कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन सेंटर लकड़ीकोला में है, जहां पर 200 कोरोना मरीजों के इलाज की व्यवस्था है। वहां इलाज कराने वाले मरीजों की स्थिति गंभीर होने के बाद उन्हें इलाज के लिए यहां भेजा जाएगा।
 शहरी पीएचसी के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने यह कदम उठाया है। यहां पर कोरोना के गंभीर मरीजों का अत्याधुनिक तरीके से इलाज किया जाएगा। इसे लेकर सारी व्यवस्था की गई है। आज से यहां पर कोरोना के गंभीर मरीजों का इलाज शुरू हो जाएगा।
हर बेड पर मरीज को ऑक्सीजन की मिलेगी सुविधा:
डॉ. चौधरी कहते हैं कि सदर अस्पताल स्थित कोविड केयर सेंटर को अत्याधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है। यहां इलाज कराने वाले मरीजों को कोई कमी नहीं हो, इसलिए हर तरह की व्यवस्था की गई है। कोविड केयर सेंटर के हर बेड को ऑक्सीजन सिलेंडर से जोड़ा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा सके।
चार वेंटिलेटर मशीन भी उपलब्ध:
जिले के गंभीर कोरोना मरीजों के इलाज के लिए राज्य सरकार ने चार वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध कराई है। ये मशीनें कोविड केयर सेंटर में ही रखी गयी हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर पर रखकर मरीजों का इलाज किया जा सके।
सरकारी गाइडलाइन का किया जाएगा पालन:
मरीजों के इलाज के दौरान सरकार की हर गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मी मास्क और ग्लब्स के साथ पीपीई कीट पहनकर ही मरीजों का इलाज करेंगे। इसे लेकर पूरी व्यवस्था की गई है। इलाज क दौरान मरीज तो सामाजिक दूरी का पालन करेंगे ही, साथ ही स्वास्थ्यकर्मी भी इसका ध्यान करेंगे।

कोरोना टेस्ट में तेजी लाने को लेकर पीएचसी स्तर पर हुआ लक्ष्य निर्धारित

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-संक्रमित मरीज़ो से शपथ-पत्र लेकर किया जाएगा होमक्वारेंटाइन
लखीसराय,29 जुलाई,2020
जिले के  पीएचसी में कोरोना जाँच के लिए ऐंटीजन किट उपलब्ध कराने के बाद स्वास्थ्य विभाग जाँच कार्य में तेजी लाने को लेकर आवश्यक रणनीति कार्य में जुट गई है। ताकि तय समय-सीमा के अंदर अधिक से अधिक लोगों का जाँच हो सके। इसको लेकर अपर उपाध्यक्ष सह सहायक अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने पत्र जारी कर जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ केंद्र के प्रभारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं।  एक पीएचसी में एक दिन में कितने लोगों की जाँच की जाएगी इसका संख्या भी निर्धारित की गई। साथ ही जाँच में पॉज़िटिव पाए जाने वाले ऐसे मरीज जो होमक्वारेंटाइन में रह सकते हैं, उन मरीजों से शपथ-पत्र के साथ आवश्यक दवाई देकर उन्हें होमक्वारेंटाइन कराने के लिए आवश्यक पहल करने को कहा गया है। साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है अगर किसी व्यक्ति में कोरोना का लक्षण हैं। किन्तु उनका एंटीजन किट से जाँच में रिपोर्ट निगेटिव आती है तो ऐसे लोगों का  जाँच के सैंपल लेकर जाँच केंद्र भेजना है और कन्फर्मेशन के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट  किया जाएगा।
जिला सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय  ने बताया जिले के सभी पीएचसी में  आवश्यक निर्देश एवं गाइलाइन का पालन करते हुए लोगों का कोरोना जाँच किया जा रहा है एवं कार्य में तेजी लाने को लेकर आवश्यक पहल की जा रही है साथ ही जाँच कराने आए लोगों को किसी प्रकार की परेशानियाँ का सामना नही करना पड़े इसका विशेष ख्याल रखा जा रहा है। ताकि पीएचसी में जाँच कराने में लोगों को किसी प्रकार का हिचक नहीं हो। वहीं लोग भी पुरे उत्साह के साथ जाँच कराने के लिए पीएचसी आ रहें हैं।
पीएचसी  स्तर पर हुआ लक्ष्य निर्धारित :
डॉ. आत्मनन्द राय  ने बताया जाँच कार्य में तेजी लाने को लेकर जिले के सभी पीएचसी में एक दिन जाँच होने वालों लोगों की संख्या निर्धारित की गई है। जो सभी पीएचसी प्रबंधन को पूरा करना है। इसके लिए सूर्यगढ़ा पीएचसी में 35, पिपड़िया  में 15, बड़हिया में 25, हलसी में 20, रामगढ़ में 15 एवं मानपुर में 15 लोगों का एक दिन कोरोना जाँच करना है। शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के लिए जिले के सभी पीएचसी के पदाधिकारी एवं कर्मी पूरे उत्साह के साथ अपने कार्यों में जुटे हुए हैं।
जाँच के दौरान शारीरिक दूरी  का रखा जाएगा ख्याल :
डॉ. आत्मनन्द राय  ने बताया जाँच के दौरान पीएचसी में शारीरिक दूरी  का पूर्ण रूप से ध्यान रखा जाएगा। ताकि कोई भी व्यक्ति किसी से संक्रमित नहीं हों। इसको लेकर भी पीएचसी में प्रबंधन सारी तैयारियाँ पूरी कर चुकी है। साथ ही बताया पॉज़िटिव मरीजों को आवश्यक चिकित्सा परामर्श के साथ होमक्वारेंटाइन किया जाएगा।

कोरोना काल में बारिश में भीगने से बचें, रहें सावधान

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• सर्दी, खांसी और बुखार नहीं हो, इसके लिए करें परहेज
• भोजन करने में बरतें सावधानी,  गर्म भोजन ही करें
 भागलपुर, 29 जुलाई:
बारिश का मौसम अभी चल रहा है। कई जगहों पर बाढ़ आ गई है और कुछ जगहों पर आने का खतरा है। ऊपर से कोरोना काल चल रहा है, ऐसे में कई बीमारियों को लेकर सचेत रहने की जरूरत है। खासकर बारिश में भीगने से बचें, सतर्क नहीं रहने पर लोग भीषण बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ विजेंद्र कुमार विद्यार्थी कहते हैं बारिश के मौसम में लोगों को संभलकर रहना चाहिए। अभी वैसे ही कोरोना का दौर चल रहा है। इस मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार होना आम बात है। कोरोना के भी यही सब लक्षण हैं। अगर कोई इन बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं, तो वह कोरोना के चपेट में भी आ सकते हैं। इसलिए सावधान रहें।
घर के आसपास पानी नहीं जमने दें:
घर के आसपास पानी इकट्ठा नहीं होने दें। कूलर के पानी को बदलते रहें। बारिश के मौसम का सबसे गंभीर बीमार डेंगू है। यह मच्छऱ के काटने से होता है। इसमें शरीर तोड़ देने वाला बुखार आता है। इसके साथ ही शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं। खून में प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। अगर इसका तुरंत उपचार न किया जाए तो जान जा सकती है।
मच्छरदानी का करें इस्तेमाल:
बारिश के मौसम में रात में मच्छरदानी लगाना नहीं भूलें। संभव हो तो मच्छर रोधी क्रीम लगाकर सोएं। मच्छर के काटने से मलेरिया, डेंगू एवं चिकनगुनिया जैसे रोग होते हैं. बरसात के पानी में अक्सर यह मच्छर पैदा होता है। इस मौसम में बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर सलाह लेनी चाहिए।
वायरल फीवर से बचकर रहें:
इस मौसम में सर्दी-गर्मी के साथ संक्रमण से होने वाला बुखार भी इस मौसम में खूब आता है। वैसे तो यह बुखार तीन से दिन दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन डॉ़क्टर से जरूर मिलना चाहिए। अगर ठीक से इलाज नहीं हो तो वायरल फीवर भी काफी खतरनाक हो जाता है। इसलिए इससे बचकर रहें।
बाहर खाने सें करें परहेज, पानी को उबालकर पीएं:
बारिश के मौसम में बाहर खाने से परहेज करें। साथ ही पानी को उबालकर पीएं। इस मौसम में पीलिया जौसी खतरनाक बीमारी का भी खतरा रहता है। यह बहुत ही खतरनाक रोग है। यह बीमारी गंदा पानी और संक्रमित भोजन से होती है। इसमें आखें, नाखून और यहां तक कि मूत्र भी पीला निकलता है। इसके साथ ही शरीर में पीलापन के लक्षण आते हैं।
डायरिया से बचकर रहें:
यह बीमारी भी संक्रमण से होता है। इसमें रोगी को पेट में दर्द और उल्टियां होती हैं। इस वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए रोगी को बार-बार ओआरएस पीना चाहिए। जरूरत पड़ने पर ग्लूकोज भी चढ़ाया जाता है। इस दौरान हल्का खाना जैसे खिचड़ी ही सबसे उपयुक्त होती है। डॉक्टर की सलाह पर दवा जरूर लें।

आरबीएसके की टीम कोरोना से बचाव को लेकर लोगों को कर रही जागरूक

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संक्रमण के खतरे के बावजूद पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई है टीम
लोगों को सरकार की गाइलाइन का पालन करने को कर  रहे प्रेरित
लखीसराय, 28 जुलाई :
जिले में कोरोना के संक्रमण से बचाव को लेकर आरबीएसके की टीम लोगों को जागरूक कर रही है। कोविड-19 से बचाव से संबंधित कार्य को टीम के सदस्य उत्साह और लगन के साथ कर रहे हैं। टीम के सदस्य बचाव को लेकर लोगों को आवश्यक जानकारियां भी दे रहे हैं। साथ ही लोगों को सरकार की गाइलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं।
  आरबीएसके के नोडल पदाधिकारी डॉ. शिवशंकर कुमार ने बताया उनकी  टीम कोविड-19 से वचाव के संक्रमण की शिकायत मिलने के बाद से ही बढ़-चढ़कर कार्य कर रही है। पूर्व में भी प्रवासी मजदूरों एवं संक्रमित मरीजों के गांव में डोर-टू-डोर हुई स्क्रेनिंग का भी कम कर चुकी है। वर्तमान में आइसोलेशन एवं क्वारेंटाइन सेंटर में कार्य कर रहे हैं। साथ ही लगातार बचाव के लिए लोगों को जागरूक कर रही है।
होम आइसोलेशन को लेकर कर रही मॉनेटरिंग:
आरबीएसके की टीम आइसोलेशन एवं क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे संक्रमित मरीजों की लगातार सेंटर जाकर मरीजों की स्थिति की मॉनिटिरिंग कर रही है। साथ ही कोरोना मरीजों को आवश्यक सलाह के साथ-साथ चिकित्सा परामर्श भी दे रही है। इसके लिए अलग-अलग जगहों की एएनएम व डॉक्टर की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो लगातार बचाव की दिशा में कार्य कर रही है।
गांव-गांव जाकर लोगों को कर चुके हैं जागरूक:
आरबीएसके की टीम गांव-गांव जाकर कोविड-19 को लेकर लोगों को जागरूक कर चुकी है। इस दौरान सरकार द्वारा जारी की गई गाइलाइन की जानकारी देते हुए लोगों को पालन करने के लिए प्रेरित कर रही है। बचाव को लेकर अनिवार्य रूप से मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दे चुकी है। साथ ही भीड़ से खुद को बचने एवं दूसरे को भी बचने के लिए जानकारी दे रही है।
जिले के अलग-अलग हिस्से में कई टीम कर रही जांच :
इसे लेकर आरबीएसके की अलग-अलग हिस्से में बंटकर कई हिस्से में कार्य कर चुकी है। वर्तमान दौर में कार्य करने में टीम के सदस्य जुटे हुए हैं। कार्य में गति लाने के लिए टीम के हर सदस्य पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य में दिन-रात एककर जुटे हुए हैं।

किशोरावस्था में शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए सही पोषण जरूरी

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बेहतर किशोरी स्वास्थ्य, स्वस्थ्य मातृत्व की कुंजी
पोषक तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को करते हैं मजबूत
आयरन व विटामिन महत्वपूर्ण
लखीसराय, 28 जुलाई: शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए किशोरावस्था एक महत्वपूर्ण अवधि मानी जाती है।  कोविड -19 के समय में बढ़ती हुई उम्र के बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति ध्यान देना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य बनता है. इस दौरान संपूर्ण विकास के लिए सही पोषक तत्वों की अहम भूमिका होती है। पोषक तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं और शरीर के सभी अंगों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। खासकर, किशोरावस्था में इस पर विशेष ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि यह वह दौर होता है, जब शरीर में तेजी से बदलाव होते हैं। इस दौरान अच्छा पोषण स्वस्थ्य मातृत्व को सुनिश्चित करने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता विकास में भी सहयोगी होता है.
पोषक तत्वों की सबसे अधिक जरुरत:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत शारीरिक विकास शुरूआती किशोरवस्था में हो जाता है. कुल वजन का लगभग 65 प्रतिशत वजन एवं कुल ऊँचाई का 15 से 20 प्रतिशत किशोरावस्था में ही प्राप्त हो जाता है. इसके अलावा 45 प्रतिशत अस्थि तंत्र का विकास भी इस दौरान ही होता है. इसलिए किशोरावस्था में शेष सभी आयु वर्ग की तुलना में पोषक तत्वों की जरूरत सबसे अधिक होती है. इस दौरान विटामिन ए, विटामिन बी-12, फोलिक एसिड, विटामिन बी-3, विटामिन सी एवं आयोडीन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की अधिक जरूरत होती है. इस दौरान ही पोषक आहार सेवन करने की आदत का विकास होता है जो युवावस्था से लेकर आगे की जिन्दगी पर भी प्रभाव डालता है.
उम्र के अनुसार पोषक तत्वों की जरुरत:
नेशनल एकेडेमी ऑफ़ साइंस नेशनल रिसर्च काउंसिल के अनुसार किशोर एवं किशोरियों में उम्र के हिसाब से पोषक तत्वों की जरूरत होती है. 11 से 14 वर्ष तक आयु-वर्ग की किशोरियों में 2200 किलो-कैलोरी एवं इसी आयु-वर्ग के किशोरों में 2500 किलो-कैलोरी उर्जा की जरुरत होती है. जबकि 15 से 18 वर्ष तक आयु-वर्ग तक की किशोरियों के लिए 2200 किलो-कैलोरी ऊर्जा एवं इसी आयु-वर्ग के किशोरों के लिए 3000 किलो-कैलोरी उर्जा की जरुरत होती है. इसी प्रकार आयरन, कैल्शियम, जिंक, विटामिन सी एवं फोलिक एसिड की मात्रा भी किशोर एवं किशोरियों के उम्र पर निर्भर करती है.
सुरक्षित मातृत्व के लिए  किशोरी पोषण है महत्वपूर्ण:
सदर अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति  रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रूपा ने बताया कि किशोरी पोषण स्वस्थ मातृत्व की कुंजी होती है. किशोरावस्था में बेहतर पोषण से किशोरी में खून की कमी नहीं होती है जिससे भविष्य में माँ बनने के बाद प्रसव के दौरान संभावित जटिलताओं में काफ़ी कमी आ जाती है. किशोरी को साप्ताहिक आयरन फ़ोलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम के तहत दी जाने वाली आयरन फोलिक एसिड की गोली का सेवन करना चाहिए. साथ ही रोज के आहार में आसानी से उपलब्ध पोषक तत्वों को शामिल करने से भी स्वस्थ रहा जा सकता है. इसमें हरी साग-सब्जी, मौसमी फ़ल, गुड एवं भूनी हुई चना, दूध के साथ अंडे एवं मीट को शामिल करना चाहिए. इससे किशोरियों को आहार के जरिये संतुलित पोषण प्राप्त हो सकता है

पोषण पर ध्यान देकर गर्भवती महिलाएं खुद के साथ बच्चे को भी रखें सुरक्षित

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प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए करें तैयार
खुद की और शिशु की बेहतर सेहत के लिए रहन-सहन पर ध्यान देना है जरूरी
भागलपुर, 28 जुलाई
गर्भावस्था में महिलाओं को काफी संभल कर रहना पड़ता है। खासकर भोजन को लेकर। दरअसल, इससे न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चों पर भी इसका असर पड़ता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पोषण पर खास ध्यान देने की जरूरत है।  इस दौरान खुद और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पोषण को सबसे ऊपर रखने की जरूरत है।
स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा सिंह कहती हैं कि गर्भावस्था में शरीर की बीमारी से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है, इसलिये अपनी और शिशु की सेहत को पक्का करने लिये जरूरी है कि रहन-सहन और पोषण का सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाए। गर्भावस्था में बीमार होने से अच्छा है प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाया जाए। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
पौष्टिक आहार तथा मौसमी फल का करें सेवन
डॉ. प्रतिभा सिंह कहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान तेल और मसालेयुक्त भोजन से परहेज करना चाहिए। इस दौरान महिलाओं में खाने का लालच बढ़ जाता है। हमेशा स्वादिष्ट भोजन करने का मन करता है। इस पर लगाम लगाने की आवश्यकता है। इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा का होना जरूरी है इसलिए खाने में हरी साग-सब्जी, दाले, दूध, मौसमी फल का सेवन बहुत ही फायदेमंद हैं। इसके साथ ही बादाम, किशमिश, खजूर या फिर अखरोट का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है। बादाम और अखरोट में तो विटामिन और मिनरल की खान होते हैं।
खुद के ऊपर तनाव को हावी नहीं होने दें
डॉ. सिंह कहती है तनाव शरीर की बीमारी से लड़ने वाली ताकत को कम करता है। जो बात आपके दिमाग पर असर करती है, वह आपके शरीर पर भी असर करती है। इसलिए तनाव को अपने अंदर नहीं आने दें। हमेशा खुश रहने की कोशिश करें। जब आपको तनाव नहीं होगा तो आपके शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत हमेशा मजबूत बनी रहेगी।
व्यायाम और योग करें
डॉ. सिंह कहती है  गर्भावस्था के समय खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना पड़ता है। इसमें व्यायाम करना बहुत ही फायदेमंद रहता है। प्रसव होने से पहले का योग न केवल गर्भवती महिलाओं को तंदरुस्त रखता है, बल्कि तनाव भी कम करता है। इसके साथ ही गर्भावस्था के समय काम करते रहना भी बहुत फायदेमंद है। इस अवस्था में वजन भी नहीं बढ़ने देना चाहिए। इससे शुगर और ब्लडप्रेशर जैसी बीमारियों से बचाव होता है, जो गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
डॉक्टर की सलाह को मानें
गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर ने विटामिन, फोलिक एसिड, कैल्सियम और शरीर की अन्य जरूरतों को पूरा करने वाले सप्लीमेंट की सलाह देते हैं। इसे लेना न भूलें। डॉ. सिंह कहती है  दरअसल, इस अवस्था में महिलाएं ज्यादातर समय घर के अन्दर ही बिताती हैं। इससे शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती है, इसलिये इसे लेना जरूरी है। हां, डॉक्टर की सलाह के बगैर ना लें।