ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद ने जारी किये दिशानिर्देश

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• कोविड-19 महामारी के दौरान राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद द्वारा जारी किया गया दूसरा दिशानिर्देश
• एड्स कण्ट्रोल सोसाइटीज एवं स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल को दिशानिर्देश अनुपालन करने के निर्देश
• स्वैच्छिक रक्तदान के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए दी गयी जानकारी
• रक्तदाताओं को संक्रमण को लेकर जागरूक करने के निर्देश
भागलपुर, 8 जुलाई
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने कई आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है। सरकार इस चुनौती का मुकाबला करते हुए धीरे-धीरे जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर दिशानिर्देश जारी किया गया है।
कोविड-19 महामारी के दौर में राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद द्वारा जारी किया गया यह दूसरा दिशानिर्देश है। ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर पहला दिशानिर्देश 25 मार्च को ही जारी किया गया था। कोविड-19 के नए साक्ष्यों एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रदान किये गए इनपुट के मद्देनजर राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद ने ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर दूसरा दिशानिर्देश जारी किया है। साथ ही कोरोना महामारी के बढ़ते प्रसार को ध्यान में रखते हुए सभी राज्यों के एड्स कण्ट्रोल सोसाइटीज एवं स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल को दिशानिर्देशों के अनुपालन करते हुए ब्लड सेंटर में खून की उपलबध्ता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के माध्यम से संक्रमण प्रसार के खतरे को कई रिसर्च संस्थाओं ने नाकारा:
दिशानिर्देश में बताया गया है कि कोरियन रेड क्रॉस ब्लड सर्विसेज ने रक्तदाता द्वारा दी गयी ब्लड कॉम्पोनेट्स में कोरोना संक्रमण की पहचान नहीं कर सकी। यद्यपि ऐसे रक्तदाताओं के शुरूआती सैंपल नेगेटिव थे। वहीं, चीन के एक अध्ययन में 500 रक्तदाताओं में 4 रक्तदाता कोरोना संक्रमित मिले हैं। लेकिन पिछले दो दशक से 2 कोरोनावायरस ( SARS एवं MERS-CoV) का ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के माध्यम से प्रसार होने की कोई पुष्टि नहीं हुयी है। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ ब्लड बैंक्स एवं सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल जैसे रिसर्च संस्थाओं ने बताया है कि ब्लड कलेक्शन इकाईयों को कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर अतिरिक्त कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। अभी तक भारत में ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जिससे ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के जरिए कोविड-19 प्रसार की पुष्टि की जा सके।
स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करना जरुरी:
राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के ब्लड सेल के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. एन.के. गुप्ता ने बताया कि कोरोना महामारी की स्थिति में रक्त अधिकोषों में खून की कमी न हो इसके लिए सभी स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजकों ( गैर-सरकारी संस्थान) एवं विशेषकर युवाओं से अपील है कि स्वैच्छिक रक्तदान शिविर या रक्त अधिकोष में स्वयं रक्तदान करें एवं दूसरों को भी प्रेरित करें।
पर्याप्त मात्रा में खून का स्टॉक जरुरी:
दिशानिर्देश के अनुसार ब्लड केन्द्रों का परिचालन स्वैच्छिक रक्तदान पर ही निर्भर करता है। थेलेसेमिया, गंभीर एक्सीडेंट, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों को आपातकाल स्थिति में खून की निरंतर जरूरत होती है। गंभीर रोगों में ब्लड की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त मात्रा में खून का स्टॉक होना जरुरी है। इसके लिए सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए ब्लड कलेक्शन एवं स्वैच्छिक रक्तदान को जारी रखने की जरूरत है।
रक्तदान के दौरान इन बातों का ख्याल रखने के निर्देश:
• ऐसे रक्तदाता जो कोविड-19 से संक्रमित हो, किसी संक्रमित के संपर्क में रहा हो एवं कोविड-19 प्रभावित क्षेत्र की ट्रेवल हिस्ट्री रही हो, उन्हें रक्तदान से रोकना
• रक्तदान के लिए मास लेवल पर शिविर का आयोजन नहीं करना
• नियमित रूप से रक्त अधिकोष में छोटे-छोटे ( 5-10 यूनिट) का इन-हाउस कैंप का आयोजन किया जाना
• रक्तदान साईट पर स्वास्थ्यकर्मियों एवं रक्तदाताओं द्वारा सामजिक दूरी का पालन करना
• उपयोग किये हुए ग्लव्स, मास्क, कैप्स एवं अन्य मेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निस्तारण
• स्वास्थ्यकर्मियों एवं रक्तदाताओं द्वारा हाथों की पानी एवं साबुन से साफ़ करना या अल्कोहल बेस्ड हैण्ड सेनेटाईजर का इस्तेमाल करना
स्वैच्छिक रक्तदान के लिए उठाये जाने वाले कदम:
कोरोना संक्रमण काल स्वैच्छिक रक्तदान की चुनौतियों को कम करने के लिए दिशानिर्देश में जानकारी दी गयी है। रक्तदाता की सहूलियत के लिए राज्य के अनुज्ञप्ति प्राप्त रक्त अधिकोष /स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल द्वारा चिन्हित लाइसेंस्ड ब्लड सेंटर द्वारा डोनर अपॉइंटमेंट लेटर निर्गत करने की बात कही गयी है। साथ ही आउटडोर ब्लड डोनेशन के लिए समन्वय स्थापित कर ब्लड मोबाइल वैन एवं ब्लड ट्रांसपोर्टेशन वैन का आदेश प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए स्वैच्छिक रक्तदान संस्थाओं को शामिल कर उनसे सहयोग प्राप्त करने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही कोरोना संक्रमणकाल में ब्लड ट्रांसफ्यूज़न को लेकर समुदाय में फैली किसी भी तरह की भ्रांति को दूर करने के लिए रक्तदाताओं को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी

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• कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र लिखकर दी जानकारी

• 27 जून से 10 जुलाई तक चलेगा दंपति संपर्क पखवाड़ा

• संक्रमण काल में परिवार नियोजन की तैयारी शुरू, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का होगा आयोजन

 

 

लखिसराॅय, 7 जुलाई:

विगत 10 वर्षों से 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है। यद्यपि देश कोरोना संक्रमण के बीच में हैं, लेकिन प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रावधान न सिर्फ़ अनचाहे गर्भधारण को रोकने के लिए बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य कल्याण में भी महत्व रखता है। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर इस प्रतिकूल परिदृश्य में पूरे माह जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा को प्रखंड स्तर तक जारी रखने को लेकर अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, ने 26 जून को पत्र के माध्यम से निर्देशित किया था। इसको लेकर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, मनोज कुमार ने 3 जुलाई को सभी जिला पदाधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निदेशक/ अधीकक्षक एवं सभी जिलों के सिविल सर्जन को इस संबंध में पत्र लिखकर जानकारी दी है। इस वर्ष के जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का थीम “आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी” रखी गयी है।

 

दो चरणों में होगा आयोजन:

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन दो चरणों में किया जायेगा। दंपति संपर्क पखवाड़ा 10 जुलाई तक चलेगा एवं 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन होगा। सभी आयोजनों का संपादन कोविड-19 महामारी में दिए गए दिशानिर्देशों के अनुरूप होगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र में उल्लेख किया है कि जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा संचालन के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी से तथा आशा का ऑनलाइन उन्मुखीकरण किया जाए ताकि वह जनसंख्या स्थिरीकरण की जरूरत सही उम्र में शादी, पहले बच्चे की देरी तथा बच्चों में सही अंतराल के बारे में आमजन के मध्य चर्चा कर मां और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर कर सकें। फ्लेक्स एवं पोस्टर के माध्यम से भी प्रचारित करने के विषय में निर्देश दिए गए हैं।

 

सेवा प्रदायगी में संक्रमण रोकथाम पर सतर्कता:

पत्र में पखवाड़े के दौरान परिवार नियोजन सेवाओं के तहत प्रदान की जाने वाली आईयूसीडी(कॉपर टी), गर्भनिरोधक सुई, महिला एवं पुरुष नसबंदी आदि की सेवा प्रदान करने में विशेष रुप से सोशल डिस्टेंसिंग तथा इनफेक्शन प्रीवेंशन कंट्रोल का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। पखवाड़ा को सफल बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को उपयोग करते हुए क्षेत्रीय सांसद, विधायक, पंचायती राज संस्था के सदस्य, शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य कर्मियों एवं सिविल सोसायटी के सदस्य का सहयोग लेने की भी बात कही गयी है। साथ ही प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

दंपति सम्पर्क पखवाड़े में आयोजित होने वाली गतिविधियाँ:

दंपति संपर्क पखवाडा का आयोजन 27 जून से 10 जुलाई तक होगा। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए पखवाड़े को सफल बनाने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य संबंधित विभाग जैसे आईसीडीएस, समाज कल्याण विभाग, पंचायती राज विभाग, जीविका, महादलित विकास मिशन के जिलास्तरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनसे नियमित सहयोग प्राप्त हो सके। प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को पखवाड़ा के आयोजन संबंधी सूचना एवं उनके  क्षमतावर्धन के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के आयोजन कराने की भी सलाह दी गयी है। इस दौरान योग्य दंपतियों से संपर्क कर उनका पूर्व पंजीयन कराने पर जोर देने की बात कही गयी है। पंजीयन के दौरान अस्थायी सेवा यथा माला एन, छाया, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली अथवा कंडोम तत्काल उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है। आशा एवं एएनएम को इच्छुक लाभार्थियों को महिला एवं पुरुष नसबंदी की सेवा प्रदान करने के लिए उनका पंजीयन कराने के साथ उन्हें निर्धारित दिन पर आमंत्रित करने एवं योग्य इच्छुक दंपतियों को परिवार नियोजन की अस्थायी सेवा( कॉपर टी, अंतरा इंजेक्शन इत्यादि) प्रदान करने के लिए उनकी पहचान करने के साथ नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर सेवा सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

 

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े में परामर्श के साथ मिलेगी परिवार नियोजन की सुविधा:

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन 11 जुलाई से 31 जुलाई तक किया जाना है। इस दौरान गर्भनिरोधक के बास्केट ऑफ चॉइस पर इच्छुक दंपतियों को परामर्श दिया जाएगा। इसके लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परामर्श पंजीयन केंद्र स्थापित करते हुए परिवार कल्याण परामर्शी, दक्ष स्टाफ नर्स/ एएनएम द्वारा परामर्श दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ओपीडी, एएनसी सेवा केंद्र, प्रसव कक्ष एवं टीकाकरण केंद्र पर भी कॉन्ट्रासेप्टिव डिस्प्ले ट्रे एवं प्रचार प्रसार सामग्रियों के माध्यम से परामर्श करते हुए इच्छुक लाभार्थी को परिवार नियोजन सेवा प्राप्त करने में सहयोग देने की बात भी कही गयी है। परामर्श पंजीयन केंद्र पूरे पखवाड़े के दौरान एवं आगे भी अस्थाई रूप से कार्य करेगा। इस दौरान मांग एवं खपत के अनुसार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक मात्रा में गर्भनिरोधक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी एवं कंटेंटमेंट जोन के बाहर क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए गर्भनिरोधक का वितरण किया जाएगा।

 

इन गतिविधियों पर होगा विशेष जोर:

जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े के दौरान गर्भनिरोधक की मांग पर प्रत्येक लाभार्थी को 2 माह तक का अतिरिक्त इच्छित गर्भनिरोधक सामग्री उपलब्ध कराया जाएगा ताकि लाभार्थी को बार-बार गर्भनिरोधक प्राप्त करने हेतु केंद्र नहीं आना पड़े। कंडोम बॉक्स में नियमित रूप से कंडोम भरा जाएगा एवं प्रत्येक दिन नियमित अंतराल पर कीटाणु रहित डिसइन्फेक्ट किया जाएगा। अंतरा एवं आयुसीडी(कॉपर-टी) की सेवा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर सहित स्वास्थ्य उप केंद्र तक स्वास्थ्य कार्यों में सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही परिवार नियोजन ऑपरेशन हेतु शल्य कक्ष को पूरी तरह से इनफेक्शन प्रीवेंशन कंट्रोल गाइडलाइन के अनुसार तैयार किया जाएगा।

 

संक्रमण काल में परिवार नियोजन की तैयारी शुरू, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का होगा आयोजन

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• कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र लिखकर दी जानकारी
• 27 जून से 10 जुलाई तक चलेगा दंपति संपर्क पखवाड़ा
• “आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी” होगी थीम
   भागलपुर , 7 जुलाई विगत 10 वर्षों से 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है। यद्यपि देश कोरोना संक्रमण के बीच में हैं, लेकिन प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रावधान न सिर्फ़ अनचाहे गर्भधारण को रोकने के लिए बल्कि मातृ और शिशु स्वास्थ्य कल्याण में भी महत्व रखता है। इसलिए विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर इस प्रतिकूल परिदृश्य में पूरे माह जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा को प्रखंड स्तर तक जारी रखने को लेकर अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, ने 26 जून को पत्र के माध्यम से निर्देशित किया था।  इसको लेकर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, मनोज कुमार ने 3 जुलाई को सभी जिला पदाधिकारी, चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के निदेशक/ अधीकक्षक एवं सभी जिलों के सिविल सर्जन को इस संबंध में पत्र लिखकर जानकारी दी है। इस वर्ष के जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का थीम “आपदा में भी परिवार नियोजन की तैयारी सक्षम राष्ट्र और परिवार की पूरी जिम्मेदारी” रखी गयी है।
दो चरणों में होगा आयोजन:
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन दो चरणों में किया जायेगा। दंपति संपर्क पखवाड़ा 10 जुलाई तक चलेगा एवं 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन होगा। सभी आयोजनों का संपादन कोविड-19 महामारी में दिए गए दिशानिर्देशों के अनुरूप होगा। राज्य स्वास्थ्य समिति ने पत्र में उल्लेख किया है कि जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा संचालन के संबंध में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी से तथा आशा का ऑनलाइन उन्मुखीकरण किया जाए ताकि वह जनसंख्या स्थिरीकरण की जरूरत सही उम्र में शादी, पहले बच्चे की देरी तथा बच्चों में सही अंतराल के बारे में आमजन के मध्य चर्चा कर मां और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर कर सकें। फ्लेक्स एवं पोस्टर के माध्यम से भी प्रचारित करने के विषय में निर्देश दिए गए हैं।
सेवा प्रदायगी में संक्रमण रोकथाम पर सतर्कता:
पत्र में पखवाड़े के दौरान परिवार नियोजन सेवाओं के तहत प्रदान की जाने वाली आईयूसीडी(कॉपर टी), गर्भनिरोधक सुई, महिला एवं पुरुष नसबंदी आदि की सेवा प्रदान करने में विशेष रुप से सोशल डिस्टेंसिंग तथा इनफेक्शन प्रीवेंशन कंट्रोल का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। पखवाड़ा को सफल बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को उपयोग करते हुए क्षेत्रीय सांसद, विधायक, पंचायती राज संस्था के सदस्य, शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य कर्मियों एवं सिविल सोसायटी के सदस्य का सहयोग लेने की भी बात कही गयी है। साथ ही प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
दंपति सम्पर्क पखवाड़े में आयोजित होने वाली गतिविधियाँ:
दंपति संपर्क पखवाडा का आयोजन 27 जून से 10 जुलाई तक होगा। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए पखवाड़े को सफल बनाने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य संबंधित विभाग जैसे आईसीडीएस, समाज कल्याण विभाग, पंचायती राज विभाग, जीविका, महादलित विकास मिशन के जिलास्तरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनसे नियमित सहयोग प्राप्त हो सके। प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को पखवाड़ा के आयोजन संबंधी सूचना एवं उनके  क्षमतावर्धन के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के आयोजन कराने की भी सलाह दी गयी है। इस दौरान योग्य दंपतियों से संपर्क कर उनका पूर्व पंजीयन कराने पर जोर देने की बात कही गयी है। पंजीयन के दौरान अस्थायी सेवा यथा माला एन, छाया, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली अथवा कंडोम तत्काल उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है। आशा एवं एएनएम को इच्छुक लाभार्थियों को महिला एवं पुरुष नसबंदी की सेवा प्रदान करने के लिए उनका पंजीयन कराने के साथ उन्हें निर्धारित दिन पर आमंत्रित करने एवं योग्य इच्छुक दंपतियों को परिवार नियोजन की अस्थायी सेवा( कॉपर टी, अंतरा इंजेक्शन इत्यादि) प्रदान करने के लिए उनकी पहचान करने के साथ नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर सेवा सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े में परामर्श के साथ मिलेगी परिवार नियोजन की सुविधा:
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन 11 जुलाई से 31 जुलाई तक किया जाना है। इस दौरान गर्भनिरोधक के बास्केट ऑफ चॉइस पर इच्छुक दंपतियों को परामर्श दिया जाएगा। इसके लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परामर्श पंजीयन केंद्र स्थापित करते हुए परिवार कल्याण परामर्शी, दक्ष स्टाफ नर्स/ एएनएम द्वारा परामर्श दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ओपीडी, एएनसी सेवा केंद्र, प्रसव कक्ष एवं टीकाकरण केंद्र पर भी कॉन्ट्रासेप्टिव डिस्प्ले ट्रे एवं प्रचार प्रसार सामग्रियों के माध्यम से परामर्श करते हुए इच्छुक लाभार्थी को परिवार नियोजन सेवा प्राप्त करने में सहयोग देने की बात भी कही गयी है। परामर्श पंजीयन केंद्र पूरे पखवाड़े के दौरान एवं आगे भी अस्थाई रूप से कार्य करेगा। इस दौरान मांग एवं खपत के अनुसार सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक मात्रा में गर्भनिरोधक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी एवं कंटेंटमेंट जोन के बाहर क्षेत्रों में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए गर्भनिरोधक का वितरण किया जाएगा।
इन गतिविधियों पर होगा विशेष जोर:
जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े के दौरान गर्भनिरोधक की मांग पर प्रत्येक लाभार्थी को 2 माह तक का अतिरिक्त इच्छित गर्भनिरोधक सामग्री उपलब्ध कराया जाएगा ताकि लाभार्थी को बार-बार गर्भनिरोधक प्राप्त करने हेतु केंद्र नहीं आना पड़े। कंडोम बॉक्स में नियमित रूप से कंडोम भरा जाएगा एवं प्रत्येक दिन नियमित अंतराल पर कीटाणु रहित डिसइन्फेक्ट किया जाएगा। अंतरा एवं आयुसीडी(कॉपर-टी) की सेवा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर सहित स्वास्थ्य उप केंद्र तक स्वास्थ्य कार्यों में सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही परिवार नियोजन ऑपरेशन हेतु शल्य कक्ष को पूरी तरह से इनफेक्शन प्रीवेंशन कंट्रोल गाइडलाइन के अनुसार तैयार किया जाएगा।

कोरोना काल में अस्थमा के रोगी रहें सतर्क

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-बारिश और बाढ़ के मौसम में अस्थमा के अटैक की रहती है आशंका
-खाने पीने में बरतें सावधानी, सफाई का रखें विशेष ख्याल
भागलपुर, 6 जुलाई:
कोरोना काल में अस्थमा के मरीज को  सतर्क रहने की जरूरत है. अस्थमा के रोगी अगर सावधान नहीं रहे तो कोरोना की चपेट में आ सकते हैं. ऊपर से बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है. साथ ही बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगा है. ऐसे में अस्थमा के रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि ऐसे समय में अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है. थोड़ी से सावधानी बरतने पर इसका मुकाबला किया जा सकता है.
निजी चिकित्सक डॉ. विनय कुमार झा कहते हैं कि इस मौसम में बढ़ी हई उमस के कारण फंगस में बढ़ोत्तरी हो जाती है. इससे अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ती है. बारिश के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी हो जाती है तो अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसानदेह है. साथ ही मानसून के कुछ वायरल इंफेक्शन भी बढ़ जाते है. इससे भी अस्थमा की समस्या बढ़ती है.
दवा का नियमित सेवन करें:
डॉ. विनय कुमार झा कहते हैं कि अस्थमा के रोगियों को दवा का नियमित सेवन करना चाहिए. अधिकांश अस्थमा के पीड़ित मरीज दवाएं लेते हैं. अस्थमा से पीड़ित नियमित रूप से दवा लेते रहे तो खतरा कम होगी. डॉक्टर ने अगर नियमित दवा खाने के लिए कहा है तो लापरवाही न बरतें और इस पर अमल करें. दवा का एक भी डोज छूटे नहीं. इस बात का ध्यान रखें.
खुली और ताजी हवा में रहे:
 अस्थमा के मरीज को खुली और ताजी हवा में ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहिए और भरपूर रोशनी भी लेनी चाहिए. ऐसे रोगियों को ताजे और स्वच्छ पानी का भी भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए. अस्थमा के रोगियों को हल्का भोजन करना चाहिए. क्योंकि भारी भोजन के सेवन से सांस लेने में परेशानी हो सकती है. अस्थमा के मरीजों को भोजन धीरे-धीरे एवं खूब चबाकर करना चाहिए. ऐसे मरीज दिन में आठ से दस ग्लास पानी अवश्य सेवन करें. डॉक्टर की सलाह लेकर अस्थमा के रोगी को शरीर में एसिड पैदा करने वाली चीजें जैसे कार्बोहाइड्रेटष फैट्स और प्रोटीन का इस्तेमाल कम मात्रा में करने की आवश्यकता है.
खाने में हल्की चीजों का करें इस्तेमाल:
 अस्थमा के रोगियों को खाने में हल्की चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए. दोपहर और रात के खाने में कच्ची सब्जियां और टमाटर, गाजर और सलाद का इस्तेमाल करें. अस्थमा के रोगियों को तनाव से बचने का प्रयास करना चाहिए. इन  सभी के कारण अस्थमा अटैक आने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इनके लिए इन्हेलर का भी बेहतर विकल्प है.
  इन बातों का भी रखें ध्यान
-नम और उमस भरे क्षेत्र को नियमित रूप से  सुखाते रहे
-बाथरूम की नियमित रूप से सफाई करें
-एक्जॉस्ट फैन का उपयोग करें और घर में नमी न होने दे
-भीगे कपड़े से फर्श की सफाई करें
-रोजाना सांस लेने की कोई वर्जिश करें
-मोटी तकिया रखकर सोएं। इससे भी आपको अस्थमा की समस्या से राहत मिलगी।

गर्भवती महिला में डेंगू के संक्रमण से होती है गर्भपात की संभावना

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• भ्रूण को करता है प्रभावित, समय से पूर्व बच्चे का हो सकता है जन्म

• रोगी के खून में हो जाती है प्लेट्लेट्स की कमी, जा सकती है जान

• मच्छर जनित रोगों में मलेरिया भी घातक, आता है तेज बुखार

लखीसराय , 6 जुलाई: बरसात के मौसम में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के साथ मच्छर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक निर्देश दिए गये हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना संक्रमण सहित  डेंगू, मलेरिया, कालाजार, चिकनगुनिया व जापानी बुखार जैसी मच्छर जनित रोगों के बारे जनजागरूकता बढाई जा रही है. इन बीमारियों की रोकथाम के लिए जिले के सभी अस्पतालों में आवश्यक तैयारी रखने के निर्देश सिविल सर्जन ने दिए हैं.

आसपास की सफाई रख मच्छरों को पनपने से रोकें:

सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से रोग के लक्षणों की जानकारी लोगों को दी जा रही है. उन्होंने कहा है मच्छर जनित रोगों को लेकर बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. अपने घर व आसपास की सफाई रखें. तेज बुखार की स्थिति को  नजरअंदाज नहीं करें. उन्होंने बताया मच्छर जनित रोग जैसे मलेरिया व डेंगू आदि में ठंड के साथ तेज बुखार आने के साथ मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द भी रहता है. डेंगू के कारण खून में मौजूद प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होने लगती है. शरीर पर चकते या दाने उभर आते हैं. उन्होंने बताया मच्छरों से बचने के लिए रात में सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल अवश्य करें. अपने आसपास पनपने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए प्राथमिक स्तर पर घरेलू उपाय भी अपनायें. गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं की विशेष सुरक्षा व ध्यान रखने की जरूरत पर बल दिया है.

गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक है डेंगू व मलेरिया:

सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक गर्भवती महिलाओं में डेंगू व मलेरिया होना जच्चा बच्चा दोनों को खतरनाक है. मलेरिया परजीवी या डेंगू वायरस गर्भवती महिला के भ्रूण तक पहुंच कर उसे गंभीर रूप से प्रभावित करता है. इसके कारण गर्भपात, समय से पूर्व शिशु का जन्म, जन्म के समय कम वजन, जन्मजात संक्रमण या प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत भी हो सकती है. गर्भवती महिलाओं के कमजोर इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण मच्छर जनित रोगों के होने वाले प्रभाव सामान्य महिलाओं की तुलना में तीन गुना अधिक होता है. सीडीसी ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि वे मच्छरों के प्रकोप वाली जगहों पर जाने से बचें. अपने रहने वाली जगहों को साफ सुथरा रखें. रोग के लक्षण मिलने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिलाएं पूरी बाजू और पैरों को ढंकने वाले कपड़े पहनें व शरीर पर रेपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल करें.

इन जरूरी बातों का भी रखें ध्यान:

• कई बार लोग मच्छरदानी न लगाकर गर्भवती महिलाओं या नवजात शिशु के रहने वाले कमरे में धुंआ, मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती आदि का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इससे सांस में काफी मात्रा में कार्बन जाता है. धुंआ करना खतरनाक सांस के लिए खतरनाक है.

• मच्छर अंधेरी व नमी वाली जगहों पर अधिक होते हैं. मच्छरों के प्रजनन रोकने के लिए कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है. कमरों में कीटनाशक का छिड़काव कर कमरे को बंद कर बाहर निकल जाये. घर में कूलर आदि का पानी बदल दें. कमरे को अधिक से अधिक सूखा रखें

रोगियों के लिए वरदान बनेगा जय प्रकाश नारायण अस्पताल का ब्लड स्टोरेज यूनिट

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जय प्रकाश नारा​यण परिसर में स्थापित किया गया ब्लड स्टोरेज यूनिट
• सिविल सर्जन ने किया उद्घाटन, रक्त की उपलब्धता होगी आसान
• मौके पर 23 यूनिट रक्त भी किया गया संग्रह
• स्वास्थ्यकर्मियों व केयर इंडिया के अधिकारियों ने किये रक्तदान
गया, 5 जूलाई: जिलावासियों को अब अधिक आसानी से ईलाज के दौरान रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा. स्वास्थ्य विभाग की इस दिशा में लगातार प्रयास के सकारात्मक परिणाम दिखने को मिला है. रक्त की ससमय उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से शहर के जय प्रकाश नारायण अस्पताल में रक्त संग्रह ईकाई की स्थापना की गयी है. रविवार को इस रक्त संग्रह ईकाई का विधिवत उद्धटान सिविल सर्जन डॉ ब्रजेश कुमार सिंह ने किया. उन्होंने बताया रोगियों सहित गर्भवती महिलाओं के प्रसव के दौरान किसी भी आपात स्थिति में उन्हें रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा. रक्त की जरूरत को किसी भी समय मुहैया कराने के प्रयास हर स्तर पर जारी रहेंगे. रक्त संग्रह ईकाई की स्थापना इस अस्पताल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है. उन्होंने इसके लिए सभी स्वास्थ्यकर्मियों के एकजुट काम करने को लेकर उनका उत्साहवर्धन भी किया.
23 यूनिट रक्त किये गये संग्रह:
इस मौके पर कई स्वास्थ्यकर्मियों सहित स्वास्थ्य विभाग को तकनीकी सहयोग देने वाली संस्था केयर इंडिया के अधिकारियों ने भी स्वैच्छिक रक्तदान किया. इस दौरान कुल 23 युनिट रक्त संग्रह किया गया. जिला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से स्थापित इस ईकाई की मदद से किसी भी आपात स्थिति में रक्त की जरूरत को पूरा करने के लिए ये यूनिट काफी मददगार साबित होगा. इस यूनिट में रक्त संग्रह के लिए आवश्यक सभी आधुनिक उपकरण मौजूद हैं. स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले लोग भी यहां आकर रक्तदान कर सकते हैं. मगध मेडिकल अस्पताल को इस ब्लड स्टोरेज यूनिट का मदर ब्लड बैंक बनाया गया है.
इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ ब्रजेश कुमार सिंह, जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलेश कुमार, एनसीडीओ डॉ फिरोज अहमद, मगध मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजय गुप्ता, अस्पताल प्रबंधक संजय कुमार अम्बष्ट, परैया प्रखंड के सामुदायिक उत्प्ररेक राकेश कुमार सहित केयर इंडिया की टीम व अन्य स्वास्थ्यकर्मी आदि मौजूद थे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मांफी मांगें- मुंबई कांग्रेस

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मुंबई-

उत्तर प्रदेश से श्रमिकों का फिर से पलायन जारी है लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार न तो कोई ध्यान दे रही है न ही कोई नीति बनाई है। जिसको लेकर अब महाराष्ट्र कांग्रेस ने कई सवाल किए हैं।

मुंबई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयकांत शुक्ला ने उत्तर प्रदेश सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री अपनी बातों पर अमल करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। जयकांत शुक्ला ने पत्र में लिखा है कि योगी आदित्यनाथ जी आपने कहा था कि बिना प्रदेश सरकार के अनुमति के कोई भी बाहर की कंपनियां कामगारों को नौकरी पर नहीं रखेगी। बिना अनुमति के मुंबई भी वापस नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री जी आपने कहा था कि कामगारों के प्रतिभा के अनुसार उन्हें प्रदेश में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा और उन्हें आत्मनिर्भर बना दिया जाएगा। जयकांत शुक्ला ने पत्र में कहा है कि आपने यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर बना दिया गया है किसी को भी प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत नहीं है। लेकिन आप पूर्ण रूप से गलत साबित हुए हैं। उत्तर प्रदेश के कम से कम अभी डेढ़ लाख कामगार मुंबई वापस आ गए हैं। मुझे बताते हुए खेद हो रहा है कि आपकी ओर से इस बारे में कुछ नहीं किया गया। आपको अपने दिए गए बयान से माफी मांगनी चाहिए।

जयकांत शुक्ला ने यह भी अपने पत्र में जिक्र किया है कि जिस प्रकार से एसएस-एनसीपी-कांग्रेस की सरकार प्रवासी कामगारों को सहायता व मदद कर रही है इसके लिए सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उद्धव ठाकरे को धन्यवाद करना चाहिए। जिस प्रकार से कांग्रेस ने प्रवासी कामगारों को कोरोना संकट के दौरान घर लौटने में सहायता की ओर उन्हें घर पहुंचाया लेकिन आपकी ओर से कुछ भी नहीं किया गया है। आपके अनुयायी आपको लौह पुरुष कहते हैं कि लेकिन आप अपने दिए गए वचनों पर खरे नहीं उतरे हैं इसके लिए आपको माफी मांगनी चाहिए।

एक ऐसा परिवार है जो ₹15 महीने की तनख्वाह पर परिवार का भरण पोषण करता है

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आगरा में एक ऐसा परिवार है जो 15 रुपए महीने की तनख्वाह पर परिवार का भरण पोषण कर रहा है। इस परिवार को पहले तनख्वाह के रूप में 15 सोने की अशर्फियां मिलती थी। इसके बाद परिवार को 15 सोने की गिन्नीया मिलना शुरू हुई। फिर तनख्वाह के तौर पर चांदी के 15 सिक्के मिले और अब इस परिवार को भारतीय मुद्रा में 15 रुपए की तनख्वाह मिल रही है।

 

15 का आंकड़ा 5 पीढ़ियों से परिवार के साथ है लेकिन अब यह आंकड़ा अब इस परिवार को खलने लगा है क्योंकि 15 रुपए में घर चलाना परिवार के लिए बेहद मुश्किल है। सरकार से हर महीने मिलने वाली तनख्वाह से परिवार के लोग नाखुश हैं और तनख्वाह बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। यूं तो जब तनख्वाह का दिन आता है। तो हर आदमी का चेहरा खिल जाता है। लेकिन यह परिवार ऐसा है जब एएसआई यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग परिवार के पास महीने की तनख्वाह लेकर पहुंचता है। तो सब के चेहरे उतर जाते हैं क्योंकि तनख्वाह के रूप में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इस परिवार को महज 15 रुपए की तनख्वाह देता है।

 

जी हाँ हम बात कर रहे हैं ताजमहल की शाही मस्जिद के इमाम सैय्यद साजिद की। सैय्यद साजिद की 5 पीढ़ियां ताजमहल में स्थित शाही मस्जिद में अकीदतमंदो को नमाज अदा करवाती है। एक के बाद एक परिवार की पीढ़ियां अपने काम को हर दिन बखूबी अंजाम दे रही है। लेकिन मस्जिद के इमाम की तनख्वाह अब तक नहीं बढ़ पाई है। मुद्रा का स्वरूप जरूर बदला है लेकिन अब यह महज 15 रुपये महीने पर आकर रुक गया है और परिवार बेहद परेशान है। ताजमहल के इमाम रहे मोहम्मद सादिक बताते हैं कि उनके दादा परदादा ताजमहल में स्थित मस्जिद के इमाम रहे मुगलिया दौर में उनके पुरखों को तनख्वाह के तौर पर सोने की 15 अशर्फियां मिलती थी।

 

इसके बाद उन्हें 15 सोने की दुनिया मिलने लगी देश आजाद हुआ तो इमान के परिवार को तनख्वाह के तौर पर 15 चांदी के सिक्के मिलने लगे। इसके बाद वर्ष 1966 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने परिवार की तनख्वाह 15 रुपए महीने निर्धारित की जो अब तक बरकरार है। मोहम्मद सादिक ने 18 साल तक 15 रुपए महीने की तनख्वाह पर इमाम की नौकरी की और अब उनका बेटा बुरहान भी ढाई साल से 15 रुपये महीने की नौकरी कर रहा है। मोहम्मद सादिक और बुरहान का कहना है कि वह ताजमहल में स्थित शाही मस्जिद में तीनों टाइम की नमाज अदा करवाने पहुंचते हैं।

 

वह कई बार सरकार से तनख्वाह बढ़ाने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। ताजमहल मस्जिद कमेटी के पदाधिकारी भी इस मामले को लेकर कई बार एएसआई और सरकार से गुहार लगा चुके हैं लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। मीडिया से हुई बातचीत में परिवार ने अपनी बेबसी तो बयां की ही साथ ही यह सवाल भी उठाया कि महंगाई के इस दौर में जब 15 रुपए बेहद कम है तो भला वह अपना घर कैसे चलाएं।

स्वराज इंडिया ने आज से शुरू किया 100 दिवसीय “मिशन जय हिंद”

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राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने की अपने गांव सहारनवास से शुरुआत।

“लॉकडाउन से कोरोना तो लॉक नहीं हुआ गरीब जरूर डाउन हो गया” – योगेन्द्र यादव

स्वराज इंडिया टीम ने कोरोना की सावधानी, राशन व्यवस्था और मनरेगा में भारी कमियां पाई।

“कोरोना संकट से निपटने के लिए पूरे देश में बिना तैयारी के एक झटके से लागू किए गए लॉकडाउन के कारण कोरोना की महामारी तो लॉक नहीं हुई, लेकिन देश के मजदूरों का जीवन जरूर डाउन हो गया। आज इस महामारी में लोग तो हाथ नहीं धो रहे हैं, लेकिन सरकारें जरूर हाथ धो रही है अपनी जिम्मेदारियों से।” यह बात स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने मिशन जय हिंद की शुरुआत करते हुए कही।

आज 4 जुलाई से पूरे देश भर में स्वराज इंडिया की ओर से 100 दिवसीय अभियान की शुरुआत हुई। इस अवसर पर स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने अपने गांव सहारनवास में इस अभियान का श्रीगणेश किया। अभियान का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि अगले 100 दिन तक स्वराज इंडिया के वॉलंटियर्स गांव गांव जाएंगे जनता की बात सुनेंगे, सुनाएंगे उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे और लोग स्वयं इस संकट का मुकाबला कर सके इसके लिए नए साथी जोड़ेंगे।

स्वराज इंडिया के अन्य साथियों के साथ उन्होंने ढाणी सांतो और बहोतवास अहीर गांव का भी दौरा किया और वहां लोगों से मिलकर पिछले तीन महीनों में उनके दुख सुख के बारे में पूछा। उन्होंने पाया कि हालांकि लगभग हर व्यक्ति कोरोना बीमारी के नाम से परिचित है, लेकिन इस बीमारी से बचने के लिए मास्क पहनने, दूरी बनाने और हाथ धोने जैसे जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी बहुत कम है।

गांव में गरीब तबके के लोगों से बात कर उन्होंने पाया कि लॉकडाउन की असली गाज मजदूर वर्ग पर गिरी है। कच्ची नौकरी कर रहे लोग दिहाड़ी मजदूर और अपना छोटा मोटा काम धंधा करने वाले मजदूरों पर इन 3 महीनों में आफत आ गई थी। महिलाओं के लिए रसोई चलाना मुश्किल हो गया था। राशन की व्यवस्था कहीं तो अच्छी लेकिन कहीं दोषपूर्ण पाई गई। बेरोजगारी का संकट अब भी इन गांव के गरीब मजदूरों के लिए सबसे बड़ा संकट बनकर खड़ा हुआ है।

इस दौरे और बाकी सब साथियों के अनुभव सुनने के बाद योगेंद्र यादव ने प्रशासन से अनुरोध किया कि वे करो ना बीमारी से बचने के लिए सावधानियों का प्रचार प्रसार करें, राशन की व्यवस्था को दुरुस्त बनाने पर ध्यान दें और मनरेगा का खुले हाथ से इस्तेमाल करें। इस दौरे में सरपंच जगमाल सिंह, श्री धर्म सिंह, श्री बलवंत, श्री रामअवतार और श्री सतपाल शामिल रहे। रविवार को स्वराज इंडिया की टीम रेवाड़ी शहर की गरीब बस्तियों का दौरा करेगी।

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आयोजित होगा साप्ताहिक वेलनेस कार्यक्रम

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• जारी कैलेंडर के मुताबिक गतिविधियों का होगा आयोजन

 

• कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति ने जारी किये दिशानिर्देश

 

• सम्पूर्ण स्वास्थ और पोषण पर आधारित होंगी गतिविधियाँ

 

लखीसराय / 4 जुलाई: सभी के लिए सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लक्ष्य को साकार करने में स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर प्रयासरत है. इसी क्रम में चयनित स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है. इन सेंटरों के क्षेत्र के लोगों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रख कर साप्ताहिक वेलनेस कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा विभाग द्वारा जारी की गयी है. इसको लेकर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति मनोज कुमार ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जरुरी दिशानिर्देश जारी किया है. पत्र में बताया गया है कि प्रत्येक सप्ताह एक वेलनेस कार्यक्रम आयोजित किया जाना है. साथ ही सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर पब्लिक हेल्थ कैलेंडर के अनुसार लोगों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

 

थीम सम्बंधित कार्यक्रम होंगे आयोजित:

 

पत्र के माध्यम से बताया गया है कि पब्लिक हेल्थ डे की थीम से संबंधित जागरूकता के लिए कार्यक्रम जुलाई से दिसंबर माह तक आयोजित किये जाएंगे. इन 6 माह में कैलेंडर के मुताबिक निर्देशित कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया जाना है. पूरे वर्ष में कम से कम 27 वेलनेस कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया जाना है. पत्र में आगे बताया गया है कि आयोजित की गयी गतिविधियों को हेल्थ एंड वेलनेस पोर्टल पर अपलोड करना है. इसके आयोजन की संख्या जिलावार रैंकिंग को प्रभावित करेगा.

 

आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों में पोषण और सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर रहेगा ध्यान:

 

समुदाय में व्याप्त पोषण समस्या जैसे एनीमिया, गर्भावस्था के दौरान पोषण, कृमि मुक्ति कार्यक्रम आदि पर ख़ास ध्यान देने का निर्देश जारी किया गया है.   एक स्वस्थ समाज के निर्माण की नीव एक स्वस्थ और पोषित शिशु के जन्म के साथ राखी जाती है. इसमें गर्भवती माताओं के पोषण को ध्यान में रखकर गतिविधियाँ आयोजित करने की बात कही गयी है. साथ ही एनीमिया प्रबंधन पर भी कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का प्रावधान किया गया है. किशोरी पोषण के लिए समुदाय में चर्चा इसका एक अभिन्न अंग होगा, जहाँ चिकित्सक और एएनएम हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जनमानस से चर्चा करेंगे. राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस, 11 अप्रैल पर मातृत्व स्वास्थ्य पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयूजन किया जाना है. उसी तरह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने के लिए पदयात्रा का कार्यक्रम रखने की बात कही गयी है. स्तनपान और टीकाकरण के फायदों पर भी कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे.

 

कैंसर, टीबी एवं एचआईवी पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से होगा गतिविधियों का आयोजन:

 

समुदाय में कैंसर, टीबी एवं एचआईवी जैसे रोगों पर जनमानस में जागरूकता फैलाने की जरुरत को समझते हुए गतिविधि कैलेंडर में कई कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिए गए हैं. इसके लिए कैंसर स्क्रीनिंग कैंप का आयोजन और स्तन कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए पदयात्रा का आयोजन जैसे कार्यक्रम आयोजित करने के  निर्देश दिए गए हैं. विश्व टीबी उन्मूलन दिवस(24 मार्च पर परिचर्चा का आयोजन किया जाना है. विश्व एड्स दिवस(1 दिसंबर) के मौके पर वार्ता का आयोजन कराने का निर्देश दिया गया है. कोरोना काल में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर ख़ास ध्यान देने की जरुरत है और इसके लिए योग एवं मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने हेतु पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना है