महामारी में महेंद्र बने गरीबों के मसीहा

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–  2 लाख से अधिक रुपये गरीबों पर किए खर्च
–  घर-घर पहुंचाया खाने का पैकेट
– गरीब एवं लाचार लोगों की सेवा में हमेशा रहते हैं तत्पर
नवादा:
” कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों”. दुष्यन्त कुमार की ये पंक्तियां हौसलों को असीमित उड़ान देती है। कुछ ऐसे ही सोच के साथ नवादा के मिर्जापुर निवासी महेंद्र कुमार  कोरोना महामारी के दौरान गरीब एवं लाचार लोगों की सेवा करने में जुटे हैं। महामारी के दौरान जहाँ लोग घर से निकलने में कतरा रहे हैं, वहीं महेंद्र सेवा भाव की नई मिसाल कायम कर रहे हैं। महेंद्र ने अभी तक अपने निजी आय से गरीबों पर 2 लाख से अधिक रुपये की राशि खर्च की है। चाहे घर-घर जाकर लोगों को खाने का पैकेट देना हो या महामारी के कारण अन्य परेशानियों में लोगों की मदद करनी हो, सभी मौके पर वे लोगों की सेवा कर रहे हैं। यही वजह है कि कुछ लोग उन्हें मसीहा का तमगा देने लगे हैं।
500 से अधिक लोगों की है मदद:
कोरोना के कारण कई लोगों की रोजगार छीन गयी,जिसके कारण उनके सामने अपने पेट भरने की भी चुनौतियाँ खड़ी हुई। ऐसी स्थिति में महेंद्र  कोरोना से बेखौफ होकर ऐसे लोगों की सेवा करने के लिए सामने आए। उन्होंने अभी तक अपने आस-पास क्षेत्र में 500 से अधिक लोगों की मदद की। उन्होंने लोगों को खाने का पैकेट, कच्चे अनाज एवं बच्चों के लिए दूध की भी व्यवस्था की।
दूसरों की मदद करने में मिलता है सुकून:
महेंद्र कुमार कहते हैं कि अभी का दौर सभी के लिए मुश्किलों भरा है। लेकिन विषेषकर ऐसे लोग अधिक समस्या में है जो गरीब एवं लाचार है। उनके सामने संक्रमण से बचने से अधिक अपने पेट भरने की चुनौतियों है। वह बताते हैं कि इस भयावह स्थिती का अंदाजा उन्हें बहुत पहले हो गया था। इसलिए उन्होंने गरीब एवं लाचार लोगों की सहायता करने की ठानी। वह कहते हैं कि उन्हें भी कोरोना से डर लगता है, लेकिन जब वह गरीब एवं असहाय लोगों की सेवा करने के लिए घर से निकलते हैं तो उनका डर स्वयं खत्म हो जाता है। महेंद्र ने बताया कि लोगों की सेवा करने से उन्हें एक सुकून मिलता है, जिसमें  मानवता एवं निःस्वार्थ भाव से सेवा करने की खुश्बू होती है। यही उनके लिए प्रेरणा का निरंतर स्रोत भी बनती रही है।
आध्यात्मिक सोच ने आसान की राह:
महेंद्र बताते हैं कि विगत कुछ सालों से उन्हें अध्यात्म एवं धर्म की वास्तविक परिभाषा का आभास हुआ था। इससे उन्हें मानसिक संबल प्राप्त हुआ एवं उन्होंने  लोगों की सेवा करने के साथ मंदिरों की भी साफ-सफ़ाई करना भी शुरू किया। वह बताते हैं कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य सिर्फ़ भगवान की सेवा तक ही सीमित नहीं, अपितु लोगों की सेवा एवं असहायों की मदद करने के बाद ही पूर्ण होता है।

विश्व जनसंख्या दिवस विशेष -परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की शुरूआत विश्व जनसंख्या दिवस के साथ

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-जिला में 24.6 प्रतिशत विवाहित महिलाएं करती हैं परिवार नियोजन

‘‘कोरोना महामारी के दौर में महिलाओं और बालिकाओं की सेहत और अधिकारों की सुरक्षा’’ इस वर्ष की थीम

भागलपुर , 10 जुलाई:  11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस है. कोविड 19 आपदा के दौरान प्रजनन व मातृत्व स्वास्थ्य की देखभाल व अनचाहे गर्भधारण की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गाइडलाइन के नियमों का पालन कर कई गतिविधियों का संचालन किया गया है. जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर आयोजित गतिविधियों के तहत आशा व आंगनबाड़ी सेविका दंपति से संपर्क कर उन्हें परिवार नियोजन की जानकारी दे रही हैं. इसके साथ ही नसबंदी व बंध्याकरण कराने के लिए उनका पंजीयन भी कराया जा रहा है. इस दिशा में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा सिविल सर्जन को निर्देश जारी कर इस माह दो चरणों में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत दंपति संपर्क पखवाड़ा व परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा आयोजित करने की बात कही गयी है. दूसरे चरण में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की शुरूआत विश्व जनसंख्या दिवस के साथ ही हो रही है. यह पखवाड़ा 31 जुलाई तक आयोजित होगी. इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस की थीम ” कोरोना महामारी के दौर में महिलाओं और बालिकाओं की सेहत और अधिकारों की सुरक्षा’’ है.

31 जुलाई तक लें परिवार नियोजन सेवा का लाभ:

परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का आयोजन 11 जुलाई से 31 जुलाई होना है. पखवाड़े के दौरान कॉपर टी, गर्भनिरोधक सुई, महिला एवं पुरुष नसबंदी आदि की सेवा प्रदान किया जाना है. योग्य दंपतियों को उनकी इच्छानुसार अस्थायी सेवा यथा माला एन, छाया, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली अथवा कंडोम तत्काल उपलब्ध कराना है. साथ ही उनकी मांग के अनुसार 2 माह तक का उनकी पसंद वाले गर्भनिरोधक सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी. नसबंदी अथवा बंध्याकरण कराने वालों का पंजीयन कर यह सेवा उन्हें उपलब्ध करानी है.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन:

सिविल सर्जन डॉ  विजय कुमार सिंह बताया स्वास्थ्य केंद्रों की आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं को ग्रामीण व शहरी सभी महिलाओं के बीच जाकर परिवार नियोजन सेवा की जानकारी देने के लिए कहा गया है. सामुदायिक स्तर तक परिवार नियोजन साधनों की उपलब्धता को सुनिश्चित कराना मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य व लैंगिक समानता के लिए जरूरी है. कोविड 19 महामारी के बीच प्रजनन व मातृ स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए उद्देश्य से जुलाई माह में जिला में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन कर चिन्हित लाभार्थियों को परिवार नियोजन की सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी.

जिला में परिवार नियोजन की स्थिति:

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 की रिपोर्ट के मुताबिक जिला में 15 से 49 वर्ष आयु समूह की 24.6 प्रतिशत विवाहित महिलाएं परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल करती हैं. 22.9  फीसदी महिलाएं आधुनिक परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल करती हैं. महिला बंध्याकरण का प्रतिशत 20.7  प्रतिशत है

विश्व जनसंख्या दिवस विशेष – जिला में 34.7 प्रतिशत विवाहित महिलाएं करती हैं परिवार नियोजन

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पुरुषों में कंडोम का इस्तेमाल 1.1 प्रतिशत, कंडोम की बढ़ा गयी है उपलब्धता
परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की शुरूआत विश्व जनसंख्या दिवस के साथ
‘‘कोरोना महामारी के दौर में महिलाओं और बालिकाओं की सेहत और अधिकारों की सुरक्षा’’ इस वर्ष की थीम
लखीसराय , 10 जुलाई:  11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस है. कोविड 19 आपदा के दौरान प्रजनन व मातृत्व स्वास्थ्य की देखभाल व अनचाहे गर्भधारण की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गाइडलाइन के नियमों का पालन कर कई गतिविधियों का संचालन किया गया है. जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर आयोजित गतिविधियों के तहत आशा व आंगनबाड़ी सेविका दंपति से संपर्क कर उन्हें परिवार नियोजन की जानकारी दे रही हैं. इसके साथ ही नसबंदी व बंध्याकरण कराने के लिए उनका पंजीयन भी कराया जा रहा है. इस दिशा में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा सिविल सर्जन को निर्देश जारी कर इस माह दो चरणों में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत दंपति संपर्क पखवाड़ा व परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा आयोजित करने की बात कही गयी है. दूसरे चरण में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की शुरूआत विश्व जनसंख्या दिवस के साथ ही हो रही है. यह पखवाड़ा 31 जुलाई तक आयोजित होगी. इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस की थीम ” कोरोना महामारी के दौर में महिलाओं और बालिकाओं की सेहत और अधिकारों की सुरक्षा’’ है.
जिला में परिवार नियोजन की स्थिति:
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 4 की रिपोर्ट के मुताबिक जिला में 15 से 49 वर्ष आयु समूह की 34.7 प्रतिशत विवाहित महिलाएं परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल करती हैं. 34.4 फीसदी महिलाएं आधुनिक परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल करती हैं. महिला बंध्याकरण का प्रतिशत 30.4 प्रतिशत है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुरुष नसबंदी को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर योजनाओं के माध्यम से पुरुषों को नसबंदी के लिए प्रोत्साहित भी किया गया है. जिला 1.0  फीसदी महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों और 1 .1 प्रतिशत पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि पूर्व की तुलना में विगत वर्षों में परिवार नियोजन में सुधार आया है और इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दंपति से संपर्क कर उन्हें आधुनिक विकल्पों जैसे अंतरा इंजेक्शन, छाया व माला एन गोली व कंडोम की सुविधा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से उपलब्ध कराया गया है.
31 जुलाई तक लें परिवार नियोजन सेवा का लाभ:
परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का आयोजन 11 जुलाई से 31 जुलाई होना है. पखवाड़े के दौरान कॉपर टी, गर्भनिरोधक सुई, महिला एवं पुरुष नसबंदी आदि की सेवा प्रदान किया जाना है. योग्य दंपतियों को उनकी इच्छानुसार अस्थायी सेवा यथा माला एन, छाया, आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली अथवा कंडोम तत्काल उपलब्ध कराना है. साथ ही उनकी मांग के अनुसार 2 माह तक का उनकी पसंद वाले गर्भनिरोधक सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी. नसबंदी अथवा बंध्याकरण कराने वालों का पंजीयन कर यह सेवा उन्हें उपलब्ध करानी है.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन:
सिविल सर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया स्वास्थ्य केंद्रों की आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं को ग्रामीण व शहरी सभी महिलाओं के बीच जाकर परिवार नियोजन सेवा की जानकारी देने के लिए कहा गया है. सामुदायिक स्तर तक परिवार नियोजन साधनों की उपलब्धता को सुनिश्चित कराना मां और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य व लैंगिक समानता के लिए जरूरी है. कोविड 19 महामारी के बीच प्रजनन व मातृ स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए उद्देश्य से जुलाई माह में जिला में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन कर चिन्हित लाभार्थियों को परिवार नियोजन की सुविधाएं मुहैया करायी जायेंगी.

कोरोना का बढ़ रहा खतरा, घर में सतर्क रहें

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-घर पर रहकर जिम्मेदारी निभाएं और प्रशासन का करें सहयोग
-लगातार बढ़ रहे मामले को ले कर फिर से लगाना पड़ा लॉकडाउन
भागलपुर, 9 जुलाई:
जिले में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दो दिनों में जिले में 100 से ज्यादा नए मरीज मिले हैं। जिला प्रशासन को फिर से सात दिनों के लिए लॉकडाउन लगाना पड़ा है। ऐसे में लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रशासन का सहयोग करे। बस इसके लिए कुछ सावधानी बरतने की जरूरत है।
डीपीएम डॉ. फैजान अशर्फी कहते हैं कि सतर्क होकर हम कोरोना को मात दे सकते हैं। लोगों को घरों से कम निकलना चाहिए। बहुत जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर जाना चाहिए, वह भी मास्क लगाकर। कोरोना का खतरा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। अब हवा से भी कोरोना फैलने की बात कही जा रही है। ऐसे में सतर्कता ही इसका सबसे सटीक बचाव है। सर्दी, खांसी, बुखार या किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तत्काल डॉक्टर से लोगों को संपर्क करना चाहिए। सदर अस्पताल के फ्लू कॉर्नर और कोविड केयर सेंटर में कोरोना के इलाज की पूरी व्यवस्था है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
खानपान के रखें विशेष ख्याल:
डॉ. अशर्फी कहते हैं कि घर पर रहते हुए खान-पान को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। खासकर तेल-मसाला युक्त भोजन करने से बचें। घर पर रहने के दौरान लोग फिजिकल वर्क नहीं कर पाते हैं। इसलिए इस तरह के भोजन करने से से दूसरी बीमारी, जैसे- बीपी, शुगर व कॉलेस्ट्रॉल का भी खतरा रहता है। इसलिए हरी सब्जी का खाने में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। साथ ही घर पर रहते हुए कुछ फिजिकल काम भी करें, ताकि फिटनस बनी रहे। इससे शरीर का इम्युन सिस्टम भी बढ़ेगा, जिससे कोरोना के साथ अन्य दूसरी बीमारी भी नहीं होगा।
खुद डॉक्टर नहीं बनें:
अभी के माहौल में बीमार पड़ने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें। अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। बुखार-खांसी और सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। बीमार पड़ने पर खुद डॉक्टर नहीं बनें। किसी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। डॉक्टर आपका पूरा विश्लेषण कर आपको सलाह देते हैं, इसलिए उनकी सलाह को नजरअंदाज नहीं करें।
अस्पताल में सतर्क रहें:
डीपीएम फैजान अशर्फी कहते हैं कि अगर आपका कोई करीबी अस्पताल में भर्ती है और आपको उसके पास रहना है तो खुद को अच्छी तरह से ढक लें। मास्क लगाएं और सेनिटाइजर से लगातार हाथ साफ करते रहें। अस्पताल के स्टाफ का निर्देश मानें और मरीज से पांच फीट की दूरी से मिलें।
सार्वजनिक वाहनों का न करें उपयोग
लॉकडाउन में ट्रेन, बस, मेट्रो आदि सब बंद हैं। फिर भी बेहद जरूरी हो तो भी सार्वजनिक वाहनों का उपयोग न के बराबर करें। आपको यह नहीं पता रहता है कि आपकी सीट कब कौन बैठा हो, इसलिए बहुत जरूरी होने पर ही घरों से निकलें। अगर निकलें तो सार्वजनिक वाहनों से परहेज करें।
इन बातों का रखें ख्याल
सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से छह फीट की दूरी बनायें
घर में बने उपयोग किये जाने वाले मास्क का प्रयोग करें
अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें
हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ करें
तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, न ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें
अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई कर इसे कीटाणु रहित करें

गर्भनिरोधक साधनों से 44 प्रतिशत तक मातृ मृत्यु दर में कमी संभव

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जिला में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने ​इस दिशा में हो रहे प्रयास
लखीसराय / 9 जुलाई: स्वास्थ्य विभाग द्वारा मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. मातृ मृत्यु दर में कमी सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देकर ही लाया जा सकता है. सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने में चार स्तंभों की मुख्य भूमिका में प्रसवपूर्व जाँच, सुरक्षित प्रसव एवं प्रसव उपरांत देखभाल के अलावा गर्भनिरोधक साधन भी एक प्रमुख स्तंभ के रूप में शामिल है.
गर्भनिरोधक साधनों से 44 प्रतिशत तक मातृ मृत्यु दर में कमी संभव:
लैंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार गर्भनिरोधक साधनों के इस्तेमाल से मातृ मृत्यु दर में 44 प्रतिशत तक कमी लायी जा सकती है. डिपार्टमेंट ऑफ़ पापुलेशन, फैमिली एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ ऑफ़ पब्लिक हेल्थ जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी के हालिया रिपोर्ट में इस बात की चर्चा है कि प्रत्येक वर्ष कुल मातृ मृत्यु दर में 13 प्रतिशत असुरक्षित गर्भपात की भूमिका होती है. 19 वर्ष से कम आयु की महिलाओं में गर्भधारण को को रोक कर मातृ मृत्यु दर में 34 प्रतिशत तक की कमी लायी जा सकती है. गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से प्रति वर्ष लगभग 23 करोड़ नए जन्मों में कमी होगी.
बिहार का प्रजनन दर 3.2 से 2.1 करने का लक्ष्य:
सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.2 है. मिशन विकास परिवार के तहत वर्ष 2025 तक बिहार के प्रजनन दर को 2.1 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यह लक्ष्य नवीन गर्भनिरोधक साधन अंतरा एवं छाया, सारथी वैन से परिवार नियोजन पर जागरूकता, नवदंपति के लिए नयी पहेली किट एवं सामुदायिक जागरूकता के लिए सास-बहू सम्मेलन जैसी नवीन गतिविधियों आदि ये प्राप्त किया जा सकता है.
अनमेट नीड में कमी जरुरी:.
 अनमेट नीड वह स्थिति होती है जिसमें दो बच्चों में अंतराल एवं शादी के बाद पहले बच्चे के जन्म में अंतराल रखने की सोच के बाद भी महिलाएं परिवार नियोजन साधनों का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकासशील देशों में 21 करोड़ से अधिक महिलाएं अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं लेकिन उनकी पहुंच गर्भनिरोधक साधनों तक नहीं है. परिवार नियोजन के प्रति पुरुषों की उदासीनता, सटीक गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी नहीं होना,परिवार के सदस्यों या अन्य नजदीकी लोगों द्वारा गर्भनिरोधक का विरोध, साधनों के साइड इफैक्ट को लेकर भ्रांतियाँ ,परिवार नियोजन के प्रति सामाजिक एवं पारिवारिक प्रथाएँ एवं मांग के अनुरूप साधनों की आपूर्ति में कमी अनमेट नीड’ के कारण होते हैं.
इन कारणों के लिए हो गर्भनिरोध का इस्तेमाल:
-मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी
-प्रजनन संबंधित स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाव
-अनचाहे गर्भ से मुक्ति
-एचआईवी-एड्स संक्रमण से बचाव
-किशोरावस्था गर्भधारण में कमी
जनसंख्या स्थिरीकरण में सहायक

ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद ने जारी किये दिशानिर्देश

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• कोविड-19 महामारी के दौरान राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद द्वारा जारी किया गया दूसरा दिशानिर्देश

• एड्स कण्ट्रोल सोसाइटीज एवं स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल को दिशानिर्देश अनुपालन करने के निर्देश

• स्वैच्छिक रक्तदान के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए दी गयी जानकारी

• रक्तदाताओं को संक्रमण को लेकर जागरूक करने के निर्देश

जमुई

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों ने कई आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है। सरकार इस चुनौती का मुकाबला करते हुए धीरे-धीरे जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करने की दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर दिशानिर्देश जारी किया गया है।

कोविड-19 महामारी के दौर में राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद द्वारा जारी किया गया यह दूसरा दिशानिर्देश है। ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर पहला दिशानिर्देश 25 मार्च को ही जारी किया गया था। कोविड-19 के नए साक्ष्यों एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रदान किये गए इनपुट के मद्देनजर राष्ट्रीय रक्त संचार परिषद ने ब्लड ट्रांसफ्यूज़न सेवाओं को लेकर दूसरा दिशानिर्देश जारी किया है। साथ ही कोरोना महामारी के बढ़ते प्रसार को ध्यान में रखते हुए सभी राज्यों के एड्स कण्ट्रोल सोसाइटीज एवं स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल को दिशानिर्देशों के अनुपालन करते हुए ब्लड सेंटर में खून की उपलबध्ता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के माध्यम से संक्रमण प्रसार के खतरे को कई रिसर्च संस्थाओं ने नाकारा:

दिशानिर्देश में बताया गया है कि कोरियन रेड क्रॉस ब्लड सर्विसेज ने रक्तदाता द्वारा दी गयी ब्लड कॉम्पोनेट्स में कोरोना संक्रमण की पहचान नहीं कर सकी। यद्यपि ऐसे रक्तदाताओं के शुरूआती सैंपल नेगेटिव थे। वहीं, चीन के एक अध्ययन में 500 रक्तदाताओं में 4 रक्तदाता कोरोना संक्रमित मिले हैं। लेकिन पिछले दो दशक से 2 कोरोनावायरस ( SARS एवं MERS-CoV) का ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के माध्यम से प्रसार होने की कोई पुष्टि नहीं हुयी है। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ ब्लड बैंक्स एवं सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल जैसे रिसर्च संस्थाओं ने बताया है कि ब्लड कलेक्शन इकाईयों को कोरोना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर अतिरिक्त कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। अभी तक भारत में ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है जिससे ब्लड ट्रांसफ्यूज़न के जरिए कोविड-19 प्रसार की पुष्टि की जा सके।

स्वैच्छिक रक्तदान को प्रोत्साहित करना जरुरी:

राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के ब्लड सेल के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. एन.के. गुप्ता ने बताया कि कोरोना महामारी की स्थिति में रक्त अधिकोषों में खून की कमी न हो इसके लिए सभी स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजकों ( गैर-सरकारी संस्थान) एवं विशेषकर युवाओं से अपील है कि स्वैच्छिक रक्तदान शिविर या रक्त अधिकोष में स्वयं रक्तदान करें एवं दूसरों को भी प्रेरित करें।

पर्याप्त मात्रा में खून का स्टॉक जरुरी:

दिशानिर्देश के अनुसार ब्लड केन्द्रों का परिचालन स्वैच्छिक रक्तदान पर ही निर्भर करता है। थेलेसेमिया, गंभीर एक्सीडेंट, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर रूप से बीमार लोगों को आपातकाल स्थिति में खून की निरंतर जरूरत होती है। गंभीर रोगों में ब्लड की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त मात्रा में खून का स्टॉक होना जरुरी है। इसके लिए सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए ब्लड कलेक्शन एवं स्वैच्छिक रक्तदान को जारी रखने की जरूरत है।

रक्तदान के दौरान इन बातों का ख्याल रखने के निर्देश:

• ऐसे रक्तदाता जो कोविड-19 से संक्रमित हो, किसी संक्रमित के संपर्क में रहा हो एवं कोविड-19 प्रभावित क्षेत्र की ट्रेवल हिस्ट्री रही हो, उन्हें रक्तदान से रोकना

• रक्तदान के लिए मास लेवल पर शिविर का आयोजन नहीं करना

• नियमित रूप से रक्त अधिकोष में छोटे-छोटे ( 5-10 यूनिट) का इन-हाउस कैंप का आयोजन किया जाना

• रक्तदान साईट पर स्वास्थ्यकर्मियों एवं रक्तदाताओं द्वारा सामजिक दूरी का पालन करना

• उपयोग किये हुए ग्लव्स, मास्क, कैप्स एवं अन्य मेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निस्तारण

• स्वास्थ्यकर्मियों एवं रक्तदाताओं द्वारा हाथों की पानी एवं साबुन से साफ़ करना या अल्कोहल बेस्ड हैण्ड सेनेटाईजर का इस्तेमाल करना

स्वैच्छिक रक्तदान के लिए उठाये जाने वाले कदम:

कोरोना संक्रमण काल स्वैच्छिक रक्तदान की चुनौतियों को कम करने के लिए दिशानिर्देश में जानकारी दी गयी है। रक्तदाता की सहूलियत के लिए राज्य के अनुज्ञप्ति प्राप्त रक्त अधिकोष /स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूज़न काउंसिल द्वारा चिन्हित लाइसेंस्ड ब्लड सेंटर द्वारा डोनर अपॉइंटमेंट लेटर निर्गत करने की बात कही गयी है। साथ ही आउटडोर ब्लड डोनेशन के लिए समन्वय स्थापित कर ब्लड मोबाइल वैन एवं ब्लड ट्रांसपोर्टेशन वैन का आदेश प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए स्वैच्छिक रक्तदान संस्थाओं को शामिल कर उनसे सहयोग प्राप्त करने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही कोरोना संक्रमणकाल में ब्लड ट्रांसफ्यूज़न को लेकर समुदाय में फैली किसी भी तरह की भ्रांति को दूर करने के लिए रक्तदाताओं को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्वारेंटाइन अवधि पूरा होने के बाद भी रहें सावधान: डॉ देवेंद्र चौधरी

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-घर के सदस्यों से दूरी बना कर रहे

-घर से बाहर निकलने से करें परहेज

लखीसराय –

कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में हर व्यक्ति को कोरोना की रोकथाम के लिए सभी प्रकार के सुरक्षात्मक उपाय अपनाने की जरूरत है। साथ ही  क्वारेंटाइन अवधि पूरा होने के बाद भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रवासी कामगार जो बाहर से आए हैं और अपना क्वारेनटाइन पूरा करने के बाद वह अपने गांव-घऱ पहुंच चुके हैं। उन्हें वहां भी सावधान रहने की जरूरत है। नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी डॉ विजय शंकर विद्यार्थी का कहना है कि ऐसा मान लेना कि खतरा टल गया, यह उनके लिए बहुत बड़ी गलती होगी। जब तक कोरोना बना हुआ है तब तक सतर्क रहने की जरूरी है। इसलिए लोगों से उचित दूरी बनाकर ही इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

 

हमेशा मास्क पहनकर रहे:

जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ देवेंद्र चौधरी  ने बताया क्वारेनटाइन से आए लोगों से अपील  है कि जब भी वे घर में रहे और अपने परिवार के लोगों के बीच बैठे तो मास्क का इस्तेमाल अवश्य करें। बिना मास्क के आसपास के लोगों के साथ बातचीत करना खतरनाक हो सकता है। वह  खतरे में पड़ सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से 6 फीट की दूरी बनाकर रखें। एवं मास्क के उपयोग पर खास ख्याल रखें। घर में पुनः उपयोग किए जाने वाले मास्क का प्रयोग करें।

खाने पीने में बरतें सावधानी:

अभी गर्मी और बरसात के मौसम में सबको बचकर रहने की आवश्यकता है। ऐसे में लोगों को खाने पीने में भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है, जिससे वह मौसमी बीमारियों के शिकार होने से बच सकें। लोग घर में बनी हुई हरी सब्जी का सेवन करें। गर्म खाना खाने की चेष्टा करें। गर्म पानी का सेवन करें। भाफ ले। जहां तक हो सके बाहर के खाने को त्याग करें। कोई भी ऐसी चीजों का सेवन न करें जिससे ही स्वास्थ्य की हानि हो। जिसमें तंबाकूं, खैनी है; इसका प्रयोग तो कभी न करें। खाना खाने और बनाने से पूर्व हाथों को अच्छी तरह साफ करें। इस समय कोई असावधानी आपको महंगी पड़ सकती है। इस बात खास ख्याल रखे की जब भी हाथों की सफाई करें बेहतर तरीके से साबुन से हाथों की सफाई करें। बाहर निकलते समय अल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर का भी उपयोग आवश्यक है। अभी कोरोना का समय में ऐसे में जहां तक हो सके यदि आवश्यक न हो तो यात्रा को टाले। यहां तक कि कोई सामाजिक सामारोह, शादी में शामिल होने से बचे।

लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल से संपर्क करें:

अगर किसी भी प्रकार के कोरोना के लक्षण नजर आए तो बिना कोताही बरते अस्पताल जाएं और डॉक्टर से सलाह अवश्य लें. साथ ही  आसपास कोई इस तरह के लक्षण वाले नजर आ रहा हो तो भी उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दें।

इन बातों का रखे ख्याल :

॰  सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से 6 फीट की दूरी बनायें

• कम से कम दो मास्क रखें. घर में बनाये गये मास्क को समय समय पर धुलते रहें.

• अपनी आँख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें

• हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ़ करें या आल्कोहल आधारित हैण्ड सैनिटाईजर का इस्तेमाल करें

• तंबाकू, खैनी आदि का प्रयोग नहीं करें, ना ही सार्वजानिक स्थानों पर थूकें

• अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई कर इसे कीटाणु रहित करें

• अनावश्यक यात्रा न करें

कोरोना बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को कर सकता है बाधित, सतर्कता जरुरी

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• निमहांस ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जारी की विस्तृत मार्गदर्शिका
• परिवार के किसी सदस्य के क्वारंटाइन होने पर बच्चे एवं किशोर हो सकते हैं परेशान
• निरंतर असुरक्षा की भावना किशोरों को आत्मघाती बनने पर कर सकता मजबूर
• किशोरों को विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए करें प्रोत्साहित
बेगूसराय –
विगत 4 महीनों से लोगों के मन में कोरोना को लेकर असुरक्षा की भावना में अधिक बढ़ोतरी हुयी है. ऐसा नहीं है कि पहले कोई महामारी नहीं थी. प्लेग, हैजा,स्पेनिश फ्लू, एशियाई फ्लू, सार्स (SARS), मर्स (MERS) एवं इ-बोला (Ebola) जैसी महामारी ने पूर्व में भी वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रभावित किया है. लेकिन कोविड-19 की महामारी बिल्कुल अलग पैमाने पर है. इसने पूरी दुनिया में दहशत पैदा कर दी है. वैश्विक स्तर पर निरंतर किये जा रहे प्रयासों के बाद भी  कोविड-19 का सटीक उपचार उपलब्ध नहीं होने से लोगों के मन में निरंतर डर की भावना बढ़ रही है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से बाधित हो रहा है. इसको लेकर मानसिक स्वास्थ्य पर कार्य करने वाली संस्था निमहांस( नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, बैंगलोर) ने कोरोना संक्रमण काल में लोगों के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में समुदाय के सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शिका जारी की है.
किशोरों की मानसिक स्थिति समझने की जरूरत:
मार्गदर्शिका में बताया गया है कि किशोरावस्था के दौरान होने वाले मानक विकासात्मक परिवर्तनों के बारे में माता-पिता को जागरूक होना चाहिए. किशोरों को बच्चों की तुलना में कोविड-19 संबंधित मुद्दों की बेहतर समझ होती है. कोरोना के कारण किशोरों एवं युवाओं में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितिता में काफी बढ़ोतरी भी हुयी है, जिसके कारण युवाओं में मानसिक अवसाद, निरंतर चिंता एवं गंभीर हालातों में आत्महत्या तक की नौबत आ रही है. इसके लिए यह जरुरी है कि माता-पिता किशोरों की मानसिक स्थिति को समझें एवं संक्रमण के कारण होने वाले चुनौतियों का सामना करने में उनका सहयोग करें. लंबे समय से स्कूल एवं कॉलेज का बंद होना, दोस्तों से संपर्क खोना, परीक्षाओं के बारे में अनिश्चितता और उनके करियर विकल्पों पर प्रभाव एवं युवाओं के सामने अपनी नौकरी बचाने के दबाब के कारण उनमें अकेलापन, उदासी , आक्रामकता और चिड़चिड़ापन की भावनाएँ पैदा हो सकती हैं. ऐसी हालातों में किशोर बोरियत, अकेलेपन और भावनात्मक परिवर्तनों को संभालने के लिए तम्बाकू एवं शराब आदि मादक पदार्थों का उपयोग करना शुरू कर सकते हैं.
किशोरों एवं युवाओं को अवसाद से बचाएं:
माता-पिता को अपने किशोर बच्चों में किसी भी भावनात्मक या व्यवहार परिवर्तन के लिए उत्सुकता से निरीक्षण करना चाहिए. कभी-कभी ये परिवर्तन सूक्ष्म हो सकते हैं. माता-पिता यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. माता-पिता को किशोरों एवं युवाओं की बातों को सुनकर, उनकी कठिनाइयों को स्वीकार कर, उनकी शंकाओं को दूर कर एवं  उन्हें आश्वस्त कर समस्याओं को हल करने में भावनात्मक सहायता करना चाहिए. ऐसे दौर में कोरोना को लेकर कई भ्रामक जानकारियां भी फैलाई जा रही है. इसलिए माता-पिता किशोरों को विश्वसनीय स्रोतों जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, आईसीएमआर. सीडीसी आदि से जानकारी प्राप्त करने के लिए करें प्रोत्साहित करें ताकि उन्हें सही जानकारी प्राप्त हो सके.
बच्चों का भी रखें ख्याल:
कोरोना काल में बच्चे मानसिक अवसाद का आसानी से शिकार हो सकते हैं. परिवार के किसी सदस्य में कोरोना की पुष्टि होना, किसी सदस्य का क्वारंटाइन सेंटर जाना, कोरोना काल में परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने एवं उनकी जरूरत की चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं होने की दशा में बच्चे मानसिक तौर पर अधिक परेशान हो सकते है. इसलिए माता-पिता यह सुनिश्चित करें कि बच्चे महामारी से संबंधित जानकारी के संपर्क में न हों. मीडिया एक्सपोजर को सीमित करें, खासकर अगर डर, विरोध या संक्रमण को लेकर कोई खतरनाक जानकारी हो. बच्चों के सामने अक्सर कोरोना प्रसार पर चर्चा करने से बचें.
दैनिक दिनचर्या पर माता-पिता करें कार्य:
माता-पिता बच्चे के लिए एक नई दिनचर्या का चित्र बनाएं. इस दिनचर्या में शैक्षणिक कार्य, खेल, साथियों के साथ फोन पर बातचीत या प्रौद्योगिकी के अन्य रूपों के साथ परिवार के समय का उपयोग करना शामिल होना चाहिए. बच्चों का भोजन और सोने का समय निर्धारित करें. इस दिनचर्या के हिस्से के रूप में कुछ इनडोर अभ्यास भी करना बेहतर पहल होगी जैसे योग, स्ट्रेच, स्किपिंग, आदि. हालांकि, इस दिनचर्या को अधिक सख्त बनाने की जरुरत नहीं है. समय के साथ इसमें बदलाव करते रहना चाहिए

बाढ़ के खतरे के बीच गांव के लोगों को कोरोना के प्रति कर रहीं जागरूक

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खरीक प्रखंड के राघोपुर गांव की जीविका अंजली देवी
 गांव के लोगों को सफाई के प्रति जागरूक रहने की कर रही अपील
भागलपुर
खरीक प्रखंड के राघोपुर गांव की दूरी गंगा नदी से ज्यादा नहीं है. इस समय बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है गाँव के लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में है, लेकिन इसी गांव की कृष्णा स्वयं सहायता समूह की जीविका दीदी अंजली देवी इस विषम परिस्थिति में भी लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने का काम कर रही हैं. गांव के लोगों को वह भीड़ में नहीं चलने की सलाह दे रही हैं. साथ ही सफाई का ध्यान रखने को कह रही हैं. घर से लोगों को मास्क लगाकर बाहर निकलने की अपील कर रही हैं.
कोरोना काल में एक तरफ जहां लोग संक्रमण से बचने के लिए घरों में रहना पसंद कर रहे हैं, वहीं जीविका दीदी अंजली देवी लोगों को जागरूक करने का काम कर रही है. ऊपर से
लोगों की सोच में आया बदलाव: जीविका दीदी अंजलि बताती हैं कि गांव के लोग पहले सावधानी नहीं बरत रहे थे. एक साथ घूमते दिख जाते थे, लेकिन जब से हमने उनको बताया कि सफाई का ध्यान रखें. एक साथ झुंड में नहीं चलें और मास्क लगाकर घर से निकले. इसके बाद लोगों में बदलाव आया और अब  वे लोग इन बातों का ख्याल रख रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि कोरोना के इस माहौल में क्या आपको इस तरीके से काम करने में भय नहीं होता है, उन्होंने कहा किस बात का भय रहेगा. आखिर गांव के लोगों को बचाने के लिए जागरूक करना है इसलिए थोड़ा रिस्क तो लेना पड़ेगा. अंजलि ने कहा के घर से निकलते वक्त मास्क पहन लेते है. साथ में सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखती हूं. इस वजह से  हमें कोई परेशानी नहीं होती.
बाहर से आए प्रवासी मजदूरों की कर  रही पहचान: जीविका दीदी अंजली देवी लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ गांव में आए प्रवासी मजदूरों की पहचान कर रही हैं. दरअसल बाहर से आए मजदूरों को जीविका के माध्यम से ₹30000 तक का लोन दिया जाएगा. जिसकी मदद से वे अपना छोटा मोटा व्यापार कर आत्मनिर्भर बन पाएंगे. इस काम में भी अंजली देवी अपनी भूमिका निभा रही हैं. वह गांव में आए बाहर से प्रवासी मजदूरों की पहचान कर उन्हें इसके बारे में जागरूक कर उनका आत्मविश्वास बढ़ा रही हैं.
गर्भवती और धात्री महिलाओं की कर रही गिनती:  जीविका के खरीक प्रखंड के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर बलदेव कुमार का कहना है कि ऐसा नहीं है कि कोरोना का काम करने के चलते अंजली देवी ने रूटीन कार्य छोड़ दिया हो। अंजली देवी लगन से अपना काम कर  रही हैं. इनके काम की काफी सराहना होती है. प्रखंड के बेहतर काम करने वाले जीविका में इनकी गिनती होती है. वह कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ आशा कार्यकर्ता के साथ मिलकर गांव की गर्भवती व धात्री महिलाओं की पहचान उन्हें सही पोषण लेने की सलाह देती हैं. साथ ही इस दौरान क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए यह भी उन्हें बताती हैं.
परिवार की जिम्मेदारी का भी बखूबी कर रही निर्वाहन: अंजली देवी के चार बच्चे हैं. पति अभी बेरोजगार हो गए हैं. कोरोना से पहले दिल्ली में रहकर कमाई करते थे, लेकिन कोरोना के चलते वहां से वापस आ गए. इस तरह से घर के छह लोगों की जिम्मेदारी उन पर है और इसका बखूबी निर्वाहन वह कर रही हैं. अंजलि कहती हैं घर में कुछ दूसरे आय के स्रोत है. साथ ही  मैं भी कुछ कमाई कर लेती हूं.  दोनों कमाई से घर परिवार का गुजारा हो जाता है

कोरोना बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को कर सकता है बाधित, सतर्कता जरुरी

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• निमहांस ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जारी की विस्तृत मार्गदर्शिका

• परिवार के किसी सदस्य के क्वारंटाइन होने पर बच्चे एवं किशोर हो सकते हैं परेशान

• निरंतर असुरक्षा की भावना किशोरों को आत्मघाती बनने पर कर सकता मजबूर

• किशोरों को विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए करें प्रोत्साहित
बांका-:

विगत 4 महीनों से लोगों के मन में कोरोना को लेकर असुरक्षा की भावना में अधिक बढ़ोतरी हुयी है. ऐसा नहीं है कि पहले कोई महामारी नहीं थी. प्लेग, हैजा,स्पेनिश फ्लू, एशियाई फ्लू, सार्स (SARS), मर्स (MERS) एवं इ-बोला (Ebola) जैसी महामारी ने पूर्व में भी वैश्विक स्तर पर लोगों को प्रभावित किया है. लेकिन कोविड-19 की महामारी बिल्कुल अलग पैमाने पर है. इसने पूरी दुनिया में दहशत पैदा कर दी है. वैश्विक स्तर पर निरंतर किये जा रहे प्रयासों के बाद भी  कोविड-19 का सटीक उपचार उपलब्ध नहीं होने से लोगों के मन में निरंतर डर की भावना बढ़ रही है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से बाधित हो रहा है. इसको लेकर मानसिक स्वास्थ्य पर कार्य करने वाली संस्था निमहांस( नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, बैंगलोर) ने कोरोना संक्रमण काल में लोगों के बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने की दिशा में समुदाय के सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए मार्गदर्शिका जारी की है.
किशोरों की मानसिक स्थिति समझने की जरूरत: मार्गदर्शिका में बताया गया है कि किशोरावस्था के दौरान होने वाले मानक विकासात्मक परिवर्तनों के बारे में माता-पिता को जागरूक होना चाहिए. किशोरों को बच्चों की तुलना में कोविड-19 संबंधित मुद्दों की बेहतर समझ होती है. कोरोना के कारण किशोरों एवं युवाओं में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितिता में काफी बढ़ोतरी भी हुयी है, जिसके कारण युवाओं में मानसिक अवसाद, निरंतर चिंता एवं गंभीर हालातों में आत्महत्या तक की नौबत आ रही है. इसके लिए यह जरुरी है कि माता-पिता किशोरों की मानसिक स्थिति को समझें एवं संक्रमण के कारण होने वाले चुनौतियों का सामना करने में उनका सहयोग करें. लंबे समय से स्कूल एवं कॉलेज का बंद होना, दोस्तों से संपर्क खोना, परीक्षाओं के बारे में अनिश्चितता और उनके करियर विकल्पों पर प्रभाव एवं युवाओं के सामने अपनी नौकरी बचाने के दबाब के कारण उनमें अकेलापन, उदासी , आक्रामकता और चिड़चिड़ापन की भावनाएँ पैदा हो सकती हैं. ऐसी हालातों में किशोर बोरियत, अकेलेपन और भावनात्मक परिवर्तनों को संभालने के लिए तम्बाकू एवं शराब आदि मादक पदार्थों का उपयोग करना शुरू कर सकते हैं.
किशोरों एवं युवाओं को अवसाद से बचाएं:
माता-पिता को अपने किशोर बच्चों में किसी भी भावनात्मक या व्यवहार परिवर्तन के लिए उत्सुकता से निरीक्षण करना चाहिए. कभी-कभी ये परिवर्तन सूक्ष्म हो सकते हैं. माता-पिता यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. माता-पिता को किशोरों एवं युवाओं की बातों को सुनकर, उनकी कठिनाइयों को स्वीकार कर, उनकी शंकाओं को दूर कर एवं  उन्हें आश्वस्त कर समस्याओं को हल करने में भावनात्मक सहायता करना चाहिए. ऐसे दौर में कोरोना को लेकर कई भ्रामक जानकारियां भी फैलाई जा रही है. इसलिए माता-पिता किशोरों को विश्वसनीय स्रोतों जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, आईसीएमआर. सीडीसी आदि से जानकारी प्राप्त करने के लिए करें प्रोत्साहित करें ताकि उन्हें सही जानकारी प्राप्त हो सके.
बच्चों का भी रखें ख्याल:
कोरोना काल में बच्चे मानसिक अवसाद का आसानी से शिकार हो सकते हैं. परिवार के किसी सदस्य में कोरोना की पुष्टि होना, किसी सदस्य का क्वारंटाइन सेंटर जाना, कोरोना काल में परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने एवं उनकी जरूरत की चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं होने की दशा में बच्चे मानसिक तौर पर अधिक परेशान हो सकते है. इसलिए माता-पिता यह सुनिश्चित करें कि बच्चे महामारी से संबंधित जानकारी के संपर्क में न हों. मीडिया एक्सपोजर को सीमित करें, खासकर अगर डर, विरोध या संक्रमण को लेकर कोई खतरनाक जानकारी हो. बच्चों के सामने अक्सर कोरोना प्रसार पर चर्चा करने से बचें.
दैनिक दिनचर्या पर माता-पिता करें कार्य: माता-पिता बच्चे के लिए एक नई दिनचर्या का चित्र बनाएं. इस दिनचर्या में शैक्षणिक कार्य, खेल, साथियों के साथ फोन पर बातचीत या प्रौद्योगिकी के अन्य रूपों के साथ परिवार के समय का उपयोग करना शामिल होना चाहिए. बच्चों का भोजन और सोने का समय निर्धारित करें. इस दिनचर्या के हिस्से के रूप में कुछ इनडोर अभ्यास भी करना बेहतर पहल होगी जैसे योग, स्ट्रेच, स्किपिंग, आदि. हालांकि, इस दिनचर्या को अधिक सख्त बनाने की जरुरत नहीं है. समय के साथ इसमें बदलाव करते रहना चाहिए