कोरोना मरीज की मौत होने पर सावधानीपूर्वक करें शव का अंतिम संस्कार

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मौत के पांच घंटे के बाद शव से कोरोना वायरस का असर होने लगता है खत्म

परेशानी होने पर स्वास्थ्य विभाग से करें संपर्क, मृतक के परिजनों की होगी मदद

भागलपुर, 3 जुलाई

कोरोना से मरीज की मौत के बाद शव का अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को घबराने की जरूरत नहीं है. इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग चौकस है. दुर्भाग्यवश अगर किसी कोरोना मरीज की मौत हो जाती है तो परिजन सावधानीपूर्वक तरीके से उसका अंतिम संस्कार कर सकते हैं। ऐसा करने में किसी तरह के संक्रमण का खतरा नहीं है.

डीपीएम डॉक्टर फैजान अशर्फी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे  मामले को लेकर चौकस है. विभाग लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि अगर कोरोना से किसी की मौत हो जाती है तो सावधानीपूर्वक उनका अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए. परिवार के लोगों को ज्यादा घबराना नहीं चाहिए. मौत के पांच घंटे के बाद कोरोना वायरस का असर खत्म होने लगता है. इसलिए सावधानीपूर्वक अंतिम संस्कार कर देना चाहिए. अगर इस तरह के मामलों में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई मदद के लिए आता है तो उसकी मदद की जाएगी.

 

शवों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर दिए गए हैं निर्देश: कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार की चुनौतियों को कम करने एवं संक्रमितों को बेहतर उपचार प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है. साथ ही कोविड-19 संक्रमितों की मौत होने पर उनके शवों के सुरक्षित प्रबंधन एवं निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा दिशानिर्देश भी जारी किया गया है. इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी खालिद अरशद ने 21 मार्च को ही चिकित्सा महाविद्यालयों के अधीक्षकों , आईजीआईएमएस, एम्स, पटना एवं सभी सीविल सर्जन को पत्र लिखकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा शव प्रबंधन को लेकर जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन करने के निर्देश दिए थे.

शव प्रबन्धन में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को सावधानी बरतने की सलाह: दिशानिर्देश के अनुसार शव प्रबंधन में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को स्टैण्डर्ड इन्फेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल प्रोटोकॉल अनुपालन करने की सलाह दी गयी है. जिसमें उनके द्वारा हाथों की सफाई एवं पर्सनल प्रोटेक्टिव एक़ुइप्मेन्ट( वाटर रेसिस्टेंट एप्रन, ग्लव्स, मास्क एवं आईवियर) इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है. साथ ही शव प्रबंधन में इस्तेमाल हुयी किसी भी प्रकार के एक़ुइप्मेन्ट एवं डिवाइस को डिसइन्फेक्ट करने के भी निर्देश दिए गए हैं.

 

आईसोलेशन रूम या क्षेत्र से शव निकालने में बरतें सावधानी: कोरोना संक्रमित की मृत्यु के बाद उन्हें आईसोलेशन रूम या क्षेत्र से निकालने के दौरान एवं बाद में सतर्कता बरतने के विषय में भी विस्तार से सलाह दी गयी है. मरीज के शरीर में लगी ट्यूब व कैथटर को सावधानी पूर्वक हटाया जाना है. शव के किसी हिस्से में हुए जख्म या खून के रिसाव को ढंकना है. उस हिस्से को एक प्रतिशत हाइपोक्लोराइट की मदद से कीटाणुरहित व ड्रेसिंग कर शव को प्लास्टिक बैग में रखा जाना है और ध्यान रखना है शरीर से तरल पदार्थ का रिसाव बाहर न हो. संक्रमित के इलाज के दौरान इस्तेमाल सभी चीजों को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुसार ही नष्ट करना है.

 

सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कर परिजन ले सकते हैं शव: दिशानिर्देश में कोविड-19 संक्रमित मृतक के शव को उनके परिजनों के हवाले करने के निर्देश दिए गए हैं. शव को  विशेष रूप से तैयार किये गये प्लास्टिक बैग में रख कर ही शव को उनके परिजन को देने के निर्देश दिए गए हैं. यह बताया गया है कि परिजन कोविड-19 के सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ शव का दर्शन कर सकते हैं. लेकिन शव को नहलाना चूमना व गले लगाना आदि पर रोक है. शव पर किसी प्रकार का लेप नहीं लगाना है. शवदाह गृह या कब्रिस्तान में भी अंतिम संस्कार कार्य में लगे लोगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह हाथ धोने , मास्क व दस्तानों का इस्तेमाल करने एवं परस्पर दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही शव के अंतिम संस्कार में अधिक भीड़-भाड़ नहीं करने की बात भी कही गयी है. इसके लिए परिजनों व अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यों को संपादित करने वालों को ही मृतक की अंतिम यात्रा में शामिल होने की सलाह दी गयी है. शव के अंतिम संस्कार के बाद इस कार्य में लगे परिजनों एवं लोगों को साबुन एवं पानी से हाथ धोने, मास्क का इस्तेमाल करने, परस्पर दूरी बनाए रखने एवं व्यक्तिगत साफ़-सफाई के नियमों का पूरी तरह पालन करने अपील भी की गयी है.

 

परिजन कर सकते हैं जरूरी विधि-विधान: गाइडलाइन में कहा गया है कि अंतिम संस्कार के दौरान वैसी गतिविधियां जिनमें शव के संपर्क में आने की जरूरत नहीं हो, जैसे पवित्र जल का छिड़काव, मंत्रोच्चार या ऐसे अन्य कार्य किए जा सकते हैं. शव को जलाने के बाद उसके राख से किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं है. इसलिए इसे जमा किया जा सकता है.

 

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आयोजित होगा साप्ताहिक वेलनेस कार्यक्रम

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• जारी कैलेंडर के मुताबिक गतिविधियों का होगा आयोजन

• कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति ने जारी किये दिशानिर्देश

• सम्पूर्ण स्वास्थ और पोषण पर आधारित होंगी गतिविधियाँ

 

भागलपुर/ 3 जुलाई: सभी के लिए सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लक्ष्य को साकार करने में स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर प्रयासरत है. इसी क्रम में चयनित स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है. इन सेंटरों के क्षेत्र के लोगों के सम्पूर्ण स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रख कर साप्ताहिक वेलनेस कार्यक्रम आयोजित करने की रूपरेखा विभाग द्वारा जारी की गयी है. इसको लेकर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति मनोज कुमार ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जरुरी दिशानिर्देश जारी किया है. पत्र में बताया गया है कि प्रत्येक सप्ताह एक वेलनेस कार्यक्रम आयोजित किया जाना है. साथ ही सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर पब्लिक हेल्थ कैलेंडर के अनुसार लोगों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं.

 

थीम सम्बंधित कार्यक्रम होंगे आयोजित:

 

पत्र के माध्यम से बताया गया है कि पब्लिक हेल्थ डे की थीम से संबंधित जागरूकता के लिए कार्यक्रम जुलाई से दिसंबर माह तक आयोजित किये जाएंगे. इन 6 माह में कैलेंडर के मुताबिक निर्देशित कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया जाना है. पूरे वर्ष में कम से कम 27 वेलनेस कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया जाना है. पत्र में आगे बताया गया है कि आयोजित की गयी गतिविधियों को हेल्थ एंड वेलनेस पोर्टल पर अपलोड करना है. इसके आयोजन की संख्या जिलावार रैंकिंग को प्रभावित करेगा.

 

आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों में पोषण और सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर रहेगा ध्यान:

 

समुदाय में व्याप्त पोषण समस्या जैसे एनीमिया, गर्भावस्था के दौरान पोषण, कृमि मुक्ति कार्यक्रम आदि पर ख़ास ध्यान देने का निर्देश जारी किया गया है.   एक स्वस्थ समाज के निर्माण की नीव एक स्वस्थ और पोषित शिशु के जन्म के साथ राखी जाती है. इसमें गर्भवती माताओं के पोषण को ध्यान में रखकर गतिविधियाँ आयोजित करने की बात कही गयी है. साथ ही एनीमिया प्रबंधन पर भी कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का प्रावधान किया गया है. किशोरी पोषण के लिए समुदाय में चर्चा इसका एक अभिन्न अंग होगा, जहाँ चिकित्सक और एएनएम हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जनमानस से चर्चा करेंगे. राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस, 11 अप्रैल पर मातृत्व स्वास्थ्य पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयूजन किया जाना है. उसी तरह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने के लिए पदयात्रा का कार्यक्रम रखने की बात कही गयी है. स्तनपान और टीकाकरण के फायदों पर भी कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे.

 

कैंसर, टीबी एवं एचआईवी पर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से होगा गतिविधियों का आयोजन:

 

समुदाय में कैंसर, टीबी एवं एचआईवी जैसे रोगों पर जनमानस में जागरूकता फैलाने की जरुरत को समझते हुए गतिविधि कैलेंडर में कई कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिए गए हैं. इसके लिए कैंसर स्क्रीनिंग कैंप का आयोजन और स्तन कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए पदयात्रा का आयोजन जैसे कार्यक्रम आयोजित करने के  निर्देश दिए गए हैं. विश्व टीबी उन्मूलन दिवस(24 मार्च पर परिचर्चा का आयोजन किया जाना है. विश्व एड्स दिवस(1 दिसंबर) के मौके पर वार्ता का आयोजन कराने का निर्देश दिया गया है. कोरोना काल में लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर ख़ास ध्यान देने की जरुरत है और इसके लिए योग एवं मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता फैलाने हेतु पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना है.

गर्भवती महिलाओं में एनीमिया खतरनाक, जच्चा बच्चा की जान को रहता है खतरा

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स्टिल बर्थ की वजहों में से एक है एनीमिया, बढ़ जाती है प्रसव संबंधी जटिलता

 

लखीसराय, 3 जुलाई: कोरोना संकटकाल ने दूसरी आवश्यक स्वास्थ्य मुद्दों से हमारा ध्यान खींचा है. लेकिन इस समय में संक्रमण से बचाव के साथ साथ हमें अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी से सजग रहना है. इनमें गर्भवती महिलाओं से जुड़ी समस्याएं व जटिलताएं शामिल हैं जिसका ससमय प्रबंधन आवश्यक है. इनमें से एक है जो एनीमिया गर्भवती महिलाओं की प्रमुख व आम समस्या है.

 

एनीमिया के दुष्प्रभाव को जानना जरूरी:

खून में आयरन यानि लौह तत्व की कमी एनीमिया कहलाता है. रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाने पर शरीर में ऑक्सीज़न का प्रवाह बाधित होता है. गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, प्रसव के दौरान या इसके बाद कई जटिलताओं व जोखिम को जन्म देता है. जैसे समय से पूर्व प्रसव का दर्द, जन्म के समय शिशु का वजन कम होना, कमजोर शिशु, मृत शिशु का जन्म व विकलांगता तथा नवजात की मृत्यु जैसे खतरे बढ़ जाते हैं. इसके साथ ही गर्भावस्था में संक्रमण का भी खतरा रहता है. परजीवी संक्रमण जैसे मलेरिया, डेंगू या हुक वर्म आदि के कारण भी शरीर में खून की भारी कमी हो जाती है. इसलिए बीमारियों से बचाव करना भी गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है.

 

पौष्टिक आहार व आयरन गोली हैं कारगर:

सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया गर्भवती महिला का हर माह प्रसव पूर्व जांच आवश्यक है. ताकि एनीमिया का पता लगाया जा सके. एनीमिया के हल्के प्रभाव को पौष्टिक आहार से पूरा किया जा सकता है. जबकि गंभीर एनीमिया के लिए दवाईयों का इस्तेमाल होता है. गंभीर एनीमिया का तुरंत उपचार जरूरी है. अन्यथा जोखिम बहुत अधिक होता है. गंभीर एनीमिया थैलीसिमिया, सिकल सेल, आंत के संक्रमण व दूसरी अन्य बीमारियों की भी वजह बनता है. पालक, हरी सब्जी व मछली, दूध व अंडा आदि का नियमित सेवन शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाता है. गर्भावस्था में बहुत अधिक चाय व कॉफी के सेवन से बचना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को अच्छी नींद लेनी चाहिए. गुड़ और चना का सेवन काफी लाभप्रद होता है. इसके साथ चुकंदर, सूखे मेवे व मौसमी फल जरूर लें.

 

ये लक्षण दिखें तो रहें सर्तक:

• थकान व कमजोरी का एहसास

• सांस फूलना

• ह्रदय धड़कन तेज होना

• सिरदर्द व चिड़चिड़ापन

• होंठ का सूखना व फीकापन

• भूख कम होना

• पैरों में दर्द व ऐंठन

 

सुरक्षित मातृत्व योजना का लें लाभ:

सभी गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव पूर्व जांच आवश्यक है. प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती माताओं की प्रत्येक माह 9 तारीख को प्रसव पूर्व जांच प्रत्येक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर की जाती है. यहां होने वाले सभी जांच निशुल्क: होते हैं. साथ ही गर्भवती को आवश्यक आयरन व फॉलिक एसिड की गोली दी जाती है. उनके खानपान को लेकर परामर्श दिया जाता है. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की भी मदद ली जा सकती है. जिसके तहत पहली बार बन रही गर्भवती महिलाओं को समय पर टीकाकरण के लिए खाते में 6000 रुपये भेजे जाते हैं. इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र की आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं से संपर्क कर सकते हैं.

 

एनडीआईएम में एमबीए का 22 वां दीक्षांत समारोह का आयोजन

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-कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने छात्रों को बधाई दिया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की कामना की

-इस मौके पर पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल और मंहिद्रा एंड मंहिद्रा ग्रुप के एमडी व सीईओ डॉ पवन गोयनका उपस्थित थे।

नईदिल्ली- –

 

एनडीआईएम में 22 वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर मुख्य अतिथि के रूप में ऑनलाइन छात्रों को संबोधित किया। इस मौके पर पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल, महिंद्रा एंड महिंद्रा के एमडी और सीईओ पवन गोयनका ने भी छात्रों को संबोधित किया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर सबसे पहले एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल ने कालेज का विस्तृत ब्योरा दिया। जिसमें उन्होंने अब तक संस्थान द्वारा प्राप्त किए गए उपलब्धियों पर भी चर्चा की एवं पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को भी दर्शाया। इस मौके पर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने संबोधित करते हुए कहा कि आज शिक्षा भी बदल चुका है। और इसे ग्रहण करने के तरीके भी बदले हैं। आज छात्रों के ज्यादा चुनौतियों को सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में युवा को ही आगे का रास्ता भी निकालना है। देश अब आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है जिसके लिए युवाओं की भूमिका ज्यादा महत्तपूर्ण हो जाता है।

इस मौके पर पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल ने कहा कि देश में कई चुनौतियां है और उद्योग जगत में कई तरह की चुनौतियां आई हैं लेकिन देश का उद्योग इन सबसे निपटने को तैयार है। छात्रों को वैश्विक स्तर पर नित्य प्रतिदिन चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। बिजनेस में ऐसी चुनौतियां आएंगी। लेकिन हमें आगे बढ़ना है।

छात्रों को संबोधित करते हुए महिंद्रा एंड मंहिद्रा के एमडी एवं सीईओ डॉ पवन गोयनका ने कहा कि अब स्वदेश का महत्व ज्यादा बढ़ गया है। हमें बाजार भी तलाशना है और अपने उत्पाद को आगे भी बढ़ाना है। आज जो भी छात्र यहां से जा रहे हैं उनपर ही देश का भविष्य है। खासकर एनडीआईएम को हम बधाई देते हैं जो नित्य नए ऊंचाईयों को छू रहा है।

अंत में एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि आज एमबीए के 22 दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ है हमारे सामने अब विशेष चुनौतियां आई हैं जिसको लेकर हमसब मिलकर निपट लेंगे। खास तौर पर देश का नेतृत्व ऐसे हाथों में है जो चुनौतियां से बेहतर रूप से निपटने के लिए जाने जाते हैं। हम सब उनके साथ हैं.

 

शिशु के लिए डीपीटी व बीसीजी का टीकाकरण अतिआवश्यक: डॉ अशोक

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• ससटेनेंबल डेवलपमेंट गोल्स में शामिल हैं शिशुओं का पूर्ण टीकाकरण
• बच्चों के टीकाकरण की सभी सुविधाएं स्वास्थ्यकेंद्रों पर भी हैं उपलब्ध
• बूस्टर खुराक का भी माता पिता रखें ख्याल, नहीं करें इन्हें नजरअंदाज
• जिला में 12 से 23 माह के 59.1% बच्चे पूर्ण प्रतिरक्षित
लखीसराय, 2 जूलाई: राज्य में टीकाकरण कवरेज 80% से अधिक होने के कारण शिशु मृत्यु दर एवं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है. सैंपल सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में बिहार की शिशु मृत्यु दर 35 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 32 हो गयी. वहीं नवजात में प्रति एक हजार होने वाली मृत्यु दर 28 घटकर 25 हो गयी. अंडर 5 साल के शिशु की होने वाली मृत्यु 41 से कम होकर 37 हो गया है. इसकी वजह बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम टीकाकरण है. इसको ध्यान में रखते हुए जिला में नियमित टीकाकरण का काम पुन: बहाल किया गया है. आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद से लाभार्थी के घर घर जाकर टीकाकरण का काम किया जा रहा है. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग 5 साल से कम उम्र वाले उन सभी बच्चों को चिन्हित कर रहा है जिन्हें प्रतिरक्षित किया जाना है.
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक भारती ने बताया टीकाकरण से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उन्हें पूरे जीवनकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है. डीपीटी, बीसीजी व एएमआर महत्वपूर्ण टीकाकरण है. डीपीटी की पहली खुराक 16 से 24 माह की उम्र में दी जाती है. इसकी बूस्टर खुराक पांच से छह साल की उम्र में दी जाती है. इस एक टीका से तीन बीमारियों डीपथेरिया, टेटनस व काली खांसी की रोकथाम की जाती है. एमआर(मीजिल्स-रूबेला) टीकाकरण शिशुओं को खसरा, मम्प्स और रूबेला जैसे रोगों व बीसीजी का टीका टीबी से बचाव करता है.
सभी स्वास्थ्यकेंद्रों पर मौजूद हैं टीकाकरण की सुविधाएं:
डॉ. भारती ने बताया माता-पिता अपने बच्चों का ससमय टीकाकरण करायें. टीका के बूस्टर खुराक को भी नजरअंदाज नहीं करें. सभी प्राथमिक व सदर अस्पताल सहित स्वास्थ्यकेंद्रों पर टीकाकरण की सुविधांए मौजूद है. इसकी आवश्यक जानकारी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से भी प्राप्त कर सकते हैं. टीकाकरण के प्रतिशत को बढ़ाया जाना आवश्यक है ताकि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर को कम कर सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके.
12 से 23 माह के 59.1% शिशु पूर्ण प्रतिरक्षित:
राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस 4) की रिपोर्ट के मुताबिक जिला में 12 से 23 माह के 59.1% बच्चों का पूर्ण प्रतिरक्षित हैं. इन्हें पोलियो व डीपीटी की तीन खुराक सहित बीसीजी, मिजल्स का टीकाकरण देकर पूर्ण प्रतिरक्षित किया गया है. वहीं इसी आयु समूह के 80.1% बच्चों को डीपीटी की तीन खुराक व 89.3 फीसदी बच्चों को बीसीजी का टीकाकरण कर प्रतिरक्षित किया गया है. 75.3% बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन दिया गया है.

प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान द्वारा फैलाई जाएगी जागरूकता

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• पृथ्वी प्रोजेक्ट से मिलेगा प्लास्टिक कचरे से छुटकारा

• पटना नगर निगम, यूएनडीपी और एचसीसीबी का है संयुक्त प्रयास

• प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में मिलेगी मदद

 

जमुई 2 जुलाई-

प्लास्टिक अपशिष्ट से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से हर कोई वाकिफ है. इसके बावजूद हमारे दिनचर्या में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल निरंतर बढ़ता जा रहा है. प्लास्टिक स्वयं को नष्ट नहीं कर पाता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है. लोग प्लास्टिक को मिट्टी में दबा देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है. केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समुदाय में प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने और कम करने के लिए समय समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है. इसी क्रम में पटना नगर निगम, यूएनडीपी और एचसीसीबी की संयुक्त साझेदारी में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम एक नवीन पहल है जो प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और जोखिमों को कम करने की दिशा में कार्य कर रही है.

 

“प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान की हुई शुरुआत:

यूएनडीपी ने प्लास्टिक कचरा पुनःचक्रण को बढ़ावा देने के लिए पटना नगर निगम एवं एचसीसीबी के साथ साझेदारी में “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान, 2020 को शुरू किया है. यह साझेदारी सर्कुलर इकोनोमी की और बढ़ने के लिए सभी प्लास्टिक के संग्रह, पृथकरण और पुनःचक्रण के माध्यम से भारत में स्थायी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को प्रोत्साहित कर रही है. यह भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम,2016 तथा वैश्विक सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप है.

 

“प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” स्टालों की होगी स्थापना:

इस अभियान के तहत सार्वजानिक आयोजनों में यूएनडीपी पटना नगर निगम के सहयोग से “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” स्टालों की स्थापना करेगा. पटना के विभिन्न जगहों पर 10 जुलाई से “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान को शुरू करने की योजना है. इस अभियान के तहत अभी तक यूएनडीपी ने 11.7 मेट्रिक टन प्लास्टिक एकत्र किया है.

 

इतने प्लास्टिक लाने पर मिलेगा थैला:

 

प्लास्टिक अपशिष्ट रीसाइक्लिंग के मद्देनजर प्लास्टिक लाने में थैला दिया जा रहा है, जिसमें 10 पीईटी बोतलें, कई परतों वाले प्लास्टिक के 20 उत्पाद, 10 मिश्रित प्लास्टिक उत्पाद, विभिन्न प्रकार के 20 छोटे प्लास्टिक उत्पाद या 15 प्लास्टिक थैले के बदले 1 थैला दिया जाएगा.

 

लोगों को मास्क पहनने के लिए किया जायेगा जागरूक:

कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है और केंद्र एवं राज्य सरकार यह सिफारिश कर रही है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें. प्लास्टिक कचरे के बदले मास्क का वितरण कर समुदाय में मास्क का उपयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि घर के बने मास्क किसी को बीमार होने से नहीं बचाते हैं लेकिन वे संक्रमित लोगों द्वारा बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं. विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं हर कोई चेहरे को ढंकने के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य निवारक उपायों को जारी रखें.

 

ये रही हैं उपलब्धियां:

 

पृथ्वी प्रोजेक्ट के तहत अभी तक नागरिकों, दुकानों, सफाई कर्मचारियों आदि द्वारा करीब 11,770 किलो कचरा एकत्र किया गया है. इस अभियान में छह हजार से ज्यादा लोग लगे हैं और 29,950 किलो तक कार्बन एमिशन की बचत हुई है. इस मुहिम से अभी तक 40 से अधिक दुकानें एवं स्ट्रीट वेंडर एवं 29 स्कूल/ कॉलेज ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया. जबकि पटना में 31 दिसम्बर, 2019 से लेकर 17 फरवरी 2020 तक 4 स्थानों पर प्रदर्शनी लगाकर प्लास्टिक कचरे को जमा किया गया है.

 

ये हैं उद्देश्य:

 

• प्लास्टिक अपशिष्ट निष्पादन के बारे में जागरूकता फैलाना और जिम्मेदार प्लास्टिक उपयोग और निष्पादन की आवश्यकता

• नागरिक जुड़ाव और नगरपालिका समर्थन के माध्यम से प्लास्टिक कचरे के नवीन और अनौपचारिक संग्रह्तंत्र किओ मजबूत करना

• समुदाय के अन्दर कचरा बीननेवाले के काम के बारे में जागरूकता फैलाना

• स्टालों के माध्यम से एकत्रित कचरे का प्रबंधन और रीसाइक्लिंग

• एकत्र किये गए कचरे, नगर निगम के प्रतिभागियों आदि के सम्बन्ध में मानी डाटा प्रदान करना

 

पृथ्वी प्रोजेक्ट से मिलेगा प्लास्टिक कचरे से छुटकारा

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• “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान द्वारा फैलाई जाएगी जागरूकता

• पटना नगर निगम, यूएनडीपी और एचसीसीबी का है संयुक्त प्रयास

• प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में मिलेगी मदद

 

पटना/ 2 जुलाई-

प्लास्टिक अपशिष्ट से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से हर कोई वाकिफ है. इसके बावजूद हमारे दिनचर्या में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल निरंतर बढ़ता जा रहा है. प्लास्टिक स्वयं को नष्ट नहीं कर पाता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है. लोग प्लास्टिक को मिट्टी में दबा देते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है. केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समुदाय में प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने और कम करने के लिए समय समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है. इसी क्रम में पटना नगर निगम, यूएनडीपी और एचसीसीबी की संयुक्त साझेदारी में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम एक नवीन पहल है जो प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को होने वाले नुकसान और जोखिमों को कम करने की दिशा में कार्य कर रही है.

 

“प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान की हुई शुरुआत:

यूएनडीपी ने प्लास्टिक कचरा पुनःचक्रण को बढ़ावा देने के लिए पटना नगर निगम एवं एचसीसीबी के साथ साझेदारी में “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान, 2020 को शुरू किया है. यह साझेदारी सर्कुलर इकोनोमी की और बढ़ने के लिए सभी प्लास्टिक के संग्रह, पृथकरण और पुनःचक्रण के माध्यम से भारत में स्थायी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को प्रोत्साहित कर रही है. यह भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम,2016 तथा वैश्विक सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप है.

 

“प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” स्टालों की होगी स्थापना:

इस अभियान के तहत सार्वजानिक आयोजनों में यूएनडीपी पटना नगर निगम के सहयोग से “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” स्टालों की स्थापना करेगा. पटना के विभिन्न जगहों पर 10 जुलाई से “प्लास्टिक लाओ, मुखौटा पाओ” अभियान को शुरू करने की योजना है. इस अभियान के तहत अभी तक यूएनडीपी ने 11.7 मेट्रिक टन प्लास्टिक एकत्र किया है.

 

इतने प्लास्टिक लाने पर मिलेगा थैला: 

 

प्लास्टिक अपशिष्ट रीसाइक्लिंग के मद्देनजर प्लास्टिक लाने में थैला दिया जा रहा है, जिसमें 10 पीईटी बोतलें, कई परतों वाले प्लास्टिक के 20 उत्पाद, 10 मिश्रित प्लास्टिक उत्पाद, विभिन्न प्रकार के 20 छोटे प्लास्टिक उत्पाद या 15 प्लास्टिक थैले के बदले 1 थैला दिया जाएगा.

 

लोगों को मास्क पहनने के लिए किया जायेगा जागरूक:

कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है और केंद्र एवं राज्य सरकार यह सिफारिश कर रही है कि घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें. प्लास्टिक कचरे के बदले मास्क का वितरण कर समुदाय में मास्क का उपयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि घर के बने मास्क किसी को बीमार होने से नहीं बचाते हैं लेकिन वे संक्रमित लोगों द्वारा बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद कर सकते हैं. विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं हर कोई चेहरे को ढंकने के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग और अन्य निवारक उपायों को जारी रखें.

 

ये रही हैं उपलब्धियां:

 

पृथ्वी प्रोजेक्ट के तहत अभी तक नागरिकों, दुकानों, सफाई कर्मचारियों आदि द्वारा करीब 11,770 किलो कचरा एकत्र किया गया है. इस अभियान में छह हजार से ज्यादा लोग लगे हैं और 29,950 किलो तक कार्बन एमिशन की बचत हुई है. इस मुहिम से अभी तक 40 से अधिक दुकानें एवं स्ट्रीट वेंडर एवं 29 स्कूल/ कॉलेज ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया. जबकि पटना में 31 दिसम्बर, 2019 से लेकर 17 फरवरी 2020 तक 4 स्थानों पर प्रदर्शनी लगाकर प्लास्टिक कचरे को जमा किया गया है.

 

ये हैं उद्देश्य:

 

• प्लास्टिक अपशिष्ट निष्पादन के बारे में जागरूकता फैलाना और जिम्मेदार प्लास्टिक उपयोग और निष्पादन की आवश्यकता

• नागरिक जुड़ाव और नगरपालिका समर्थन के माध्यम से प्लास्टिक कचरे के नवीन और अनौपचारिक संग्रह्तंत्र किओ मजबूत करना

• समुदाय के अन्दर कचरा बीननेवाले के काम के बारे में जागरूकता फैलाना

• स्टालों के माध्यम से एकत्रित कचरे का प्रबंधन और रीसाइक्लिंग

• एकत्र किये गए कचरे, नगर निगम के प्रतिभागियों आदि के सम्बन्ध में मानी डाटा प्रदान करना

 

वेबिनार के जरिए कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार के अधिकार पर हुई चर्चा

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विशेषज्ञों ने दिये करोना के प्रति सुझाव

जमुई  / 1 जुलाई- वैश्विक महामारी कोरोनावायरस ने कई संवेदनशील पहलुओं को उजागर किया है. इस महामारी के दौर में हमारे सामने ऐसी कई घटनाएँ आ रहीं हैं जिसमें लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई भी नहीं दे पा रहे हैं. कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत को झेल रहे परिवारों पर यह दोहरा और अनावश्यक आघात है. पिछले कई महीनो में कई ऐसे मामले देखने को मिले हैं जिसमें कोरोना संक्रमित लोग अपने अंतिम समय में अपने माँ-बाप, बच्चे या जीवनसाथी का साथ नहीं पा सके. कोरोना के संक्रामक प्रवृत्ति और अस्पतालों के निर्देश के कारण बहुत सारे लोग चाहकर भी अपने प्रियजनों के अंतिम समय में उनके साथ नहीं रह सके.

कोरोना संक्रमित के मृत शरीर से संक्रमण फैलने का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है मौजूद:

वेबिनार में अपने संबोधन में दिल्ली के विशेषज्ञ टीम में शामिल डॉ. वंदना प्रसाद ने बताया कोरोना संक्रमित के मृत शरीर से संक्रमण फैलने का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य सामने नहीं आया है. इस बारे में कई भ्रामक जानकारियां फैली हुई हैं. यह दुखद है कि इन्हीं भ्रामक जानकारियों के कारण परिवार के लोग कोरोना के शिकार लोगों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं. यह हरेक व्यक्ति का अधिकार है कि सम्मानजनक तरीके से अपने परिजनों से विदा ले. मृतकों का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा किये जाने में कोई खतरा नहीं है. उन्हें दफनाने या उनका दाह संस्कार करने से कोरोना का संक्रमण नहीं फैलता है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इसको लेकर एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया था.

समुदाय में है जागरूकता फैलाने की जरुरत:

दिल्ली के विशेषज्ञ टीम में शामिल डॉ. जॉन दयाल ने कहा विज्ञानं और वैज्ञानिक समझ हमसे अपील करती है कि हम सामाजिक दूरी का पालन करें और अपने बीमार परिजनों के पास मास्क आदि सुरक्षा प्रबंधो के बिना न जाएँ. इसके साथ साथ हमें इस बीमारी को लेकर लोगों के बीच बनी धारणा को बदलने की जरुरत है. आज हमें भय, ग़लतफ़हमी और भ्रामक जानकारियों को रोकने के लिए वृहत पैमाने पर समुदाय में जागरूकता फैलानी होगी.

संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन कर हो सकता है अंतिम संस्कार:

दिल्ली के विशेषज्ञ टीम में शामिल डॉ. टी. सुन्दररमण ने बताया सामजिक दूरी का पालन करते हुए लोग अपनी मान्यता के अनुसार अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार खुद से कर सकते हैं. बस यह ध्यान रखना है कि इस कार्यक्रम में ज्यादा लोग शामिल न हों और सामजिक दूरी का सख्ती से पालन हो. सिर्फ करीबी लोग इसमें मास्क लगाकर शामिल हों और वृद्ध लोगों और बच्चों को ऐसे कार्यक्रम से दूर रखा जाए. अगर धार्मिक मान्यता के अनुसार खाने-पीने का इंतजाम करना है तो सबके लिए अलग बर्तन रखे जाएँ और आयोजन किसी खुली जगह पर कराया जाए.

वेबिनार में बिहार और यूपी के कई पत्रकार शामिल हुए और उन्होंने अपनी बात विशेषज्ञों के समक्ष रखी.

आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत के बाद परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू

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• परिवार नियोजन के संसाधन फिर से लोगों को मुहैया कराए जा रहे हैं
• कोरोना वायरस संक्रमण काल में रोक दी गई थी परिवार नियोजन सेवाएं
बांका, 1 जुलाई:
कोरोना काल में प्रभावित हुईं स्वास्थ्य सेवाएं धीरे-धीरे पटरी पर आ रही हैं। आवश्यक सेवाओं के बाद अब परिवार नियोजन सेवाओं को भी बहाल कर दिया गया है। कटोरिया रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया  कोरोना महामारी की रोकथाम में पूरा महकमा लगा हुआ है। साथ ही अब कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शुरू परिवार नियोजन सेवाएं भी शुरू कर दी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले जो परिवार नियोजन के संसाधन मुहैया कराए जा रहे थे, वह फिर से शुरू कर दिए गए हैं। रेफरल अस्पताल के साथ-साथ समस्त सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम की पर्याप्त उपलब्धता है। गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा की भी शुरुआत कर दी गई। इसके अलावा प्रसव पश्चात कॉपर टी (पीपीआईयूसीडी), कॉपर टी (आईयूसीडी) की भी सुविधा सभी प्रसव इकाइयों में शुरू है। उन्होंने बताया परिवार नियोजन सेवाओं का संचालन पहले की ही तरह किया जा रहा है। ऐसी आशा, एएनएम अन्य स्वास्थ्य कर्मियों, जिनकी कोविड-19 के हॉट स्पॉट कंटेनमेंट जोन में ड्यूटी लगाई गई है या जो स्वास्थ्यकर्मी ऐसे क्षेत्र में पहले से ही रहते हैं या जिनमें कोविड-19 के लक्षण परिलक्षित होते हैं, उनकी सेवा इन कार्यों में नहीं ली जा रही है।
आशा घर-घर बांट रहीं परिवार नियोजन का संसाधन:
आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवार नियोजन के साधन पहुंचा रही हैं। आशा कार्यकर्ता महिला-पुरुषों को फैमिली प्लानिंग सम्बन्धी जानकारी देने के साथ घर-घर परिवार नियोजन के संसाधनों का वितरण कर रही हैं। साथ ही वह कोरोना वायरस से बचाव के तरीके भी लोगों को बता रही हैं। जनसंख्या ज्यादा नहीं बढ़े, इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य महकमा पूरी संजीदगी के साथ परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने में जुट गया है। आशा कार्यकर्ता के साथ एएनएम घर-घर जाकर लोगों को कोरोना वायरस से लड़ने के साथ परिवार नियोजन के फायदे बता रही हैं। आशाएं जहां बच्चों में अंतर रखने और अनचाहे गर्भ से बचने के लिए महिलाओं को छाया टेबलेट ले रही हैं, वहीं पुरुषों को कंडोम वितरित किए जा रहे हैं। बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अभी घर आए हैं। परिवार नियोजन के लिहाज से यह समय अत्यधिक जरूरी है। विभाग इस अवधि में प्रवासी लोगों को परिवार नियोजन पर जानकारी देने एवं साधनों के इस्तेमाल की जानकारी दे रहा है। छाया टेबलेट, कंडोम व पंपलेट घरों में बांटी जा रही हैं।
सीमित परिवार की तरफ बना रहे रुझान:
डॉ. विनोद कुमार का कहना है कि वर्तमान में कोरोना संकट से लोग जूझ रहे है. ऐसे में जनसंख्या विस्फोट भी एक ऐसा संकट है जिसके लिए लोगों को जागरूक रहना चाहिए। इस समय लोग परिवार नियोजन सेवाओं से अपना मुंह न मोड़े, और इन्हें अपनाते रहे। कोरोना समस्या के साथ ही पहले से ही चली आ रही जनसंख्या वृद्धि की समस्या को भी समझे, और सीमित परिवार की ओर लोग अग्रसर हों।

सही जानकारी ही है डेंगू से बचाव का रास्ता

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साफ़-सफ़ाई के प्रति रहें सतर्क, डेंगू होने का ख़तरा होगा कम

सही प्रबंधन के आभाव में डेंगू हो सकता है जानलेवा

बुखार होने पर चिकित्सकीय सलाह है जरुरी

लखीसराय /1 जुलाई : मच्छर जनित रोगों में डेंगू अति गंभीर रोगों की श्रेणी में आता है. बरसात के मौसम में इस बीमारी का प्रकोप बढ़ जाता है । गर्मी के बाद बारिश के मौसम में डेंगू के मरीजों में बढ़ोतरी होने की संभावना होती है. इसलिए कोरोना के इस काल में कोरोना के साथ –साथ डेंगू से बचाव के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है ।

 

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि आम लोगों के बीच सटीक जानकारी नहीं होने के कारण उनके लिए डेंगू शब्द ही खौफ़ का मुद्दा है. यदि इसके विषय में आम लोगों को पूरी जानकारी दी जाए तो लोगों के मन से डेंगू का भय ख़त्म हो सकता है.

डॉ. कुमार  ने बताया कि ऐडीज नामक मच्छर के काटने से डेंगू बुखार होता है. यह मच्छर साफ़ पानी में पनपता है जो ज़्यादातर दिन में ही काटता है. डेंगू को हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है. 3 से 7 दिन तक लगातार बुखार, तेज सर में दर्द,पैरों के जोड़ों मे तेज दर्द, आँख के पीछे तेज दर्द, चक्कर एवं उल्टी, शरीर पर लाल धब्बे आना एवं कुछ मामलों में आंतरिक एवं बाह्य रक्त स्त्राव होना डेंगू के लक्ष्ण में शामिल है. डेंगू का कोई सटीक ईलाज तो उपलब्ध नहीं है पर कुशल प्रबंधन एवं चिकित्सकों की निगरानी से डेंगू को जानलेवा होने से बचाया जा सकत है. इसलिए जरुरी है कि डेंगू के लक्ष्ण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह ली जाए. डेंगू के लक्ष्ण दिखाई देने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा खाना ख़तरनाक हो सकता है.

 

केवल 1 प्रतिशत डेंगू ही जान लेवा : डेंगू मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं. साधारण डेंगू, डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम. ज़्यादातर लोगों को साधारण डेंगू ही होता है जो कुछ परहेज करने से ठीक हो जाता है. डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम गंभीर श्रेणी मे आते हैं. यदि इनका शीघ्र ईलाज शुरू नहीं किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है. डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम में मरीजों के उपचार के लिए  रक्तचाप एवं शरीर में खून के स्त्राव का निरीक्षण करना जरुरी होता है. राष्ट्रीय वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण विभाग के अनुसार 1 प्रतिशत डेंगू ही जानलेवा है, लेकिन बेहतर प्रबंधन के आभाव में डेंगू 50 प्रतिशत तक ख़तरनाक हो सकता है.

ऐसे करें डेंगू से बचाव

§  आस-पास साफ़-सफाई रखें एवं घर में पानी जमा होने ना दें

§  सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें

§  बच्चों को फुल आस्तीन की कमीज एवं फुल पैंट पहनाए

§  वाटर कूलर या नल के पास पानी जमा नहीं होने दें