वेबिनार के जरिए कोरोना संक्रमितों के अंतिम संस्कार के अधिकार पर हुई चर्चा

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– भारत के नागरिकों के नाम खुला खत और अपील

– बीमारी को लेकर लोगों के बीच बनी धारणा को बदलने की भी जरूरत

-देश भर के विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी।

भागलपुर-

कोविड-19 महामारी के दौर में हमारे सामने ऐसी कई घटनाएं आ रही हैं जिनमें लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई भी नहीं कर पा रहे हैं. कोरोना संक्रमण और उससे हुई मौत को झेल रहे परिवारों पर यह दोहरा और अनावश्यक आघात है. किसी प्रियजन की मौत के बाद सबसे पहली जिम्मेदारी उन्हें अंतिम विदाई सम्मानजनक तरीके से देने की होती है. शोक की प्रक्रिया इस अंतिम संस्कार वाले क्षण से ही शुरू होती है.

पिछले तीन महीने में कई ऐसे मामले देखने को मिले हैं जिनमें कोरोना संक्रमित लोग अपने अंतिम समय में अपने मां-बाप, बच्चे या जीवनसाथी का साथ नहीं दे पा सके. कोरोना संक्रमण के भय के कारण परिवार के लोगों को इनसे दूरी बनानी पड़ी. कोरोना के संक्रामक प्रवृत्ति और अस्पतालों की निर्देश के कारण बहुत सारे लोग चाहकर भी अपने प्रियजनों के अंतिम समय में उनके साथ नहीं रह सके.

वैज्ञानिकों के विस्तृत निर्देश के बावजूद कि कोरोना के मरीजों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया जा सकता है, इस बारे में कई भ्रामक जानकारियां फैली हुई हैं. यह दुखद है कि इन्हीं भ्रामक जानकारियों के कारण परिवार के लोग कोरोना के शिकार लोगों का अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहे हैं. कई रिपोर्टों में बताया गया कि कोरोना संक्रमण के भय से परिवार के लोग मृतकों का अंतिम संस्कार नहीं कर रहे हैं जिस कारण सरकारी अधिकारी या अन्य बाहरी लोगों के द्वारा उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

आज जब हम महामारी के दौर से गुजर रहे हैं तब विज्ञान और वैज्ञानिक समझ निश्चित रूप से हमसे अपील करेगी कि हम सामाजिक दूरी का पालन करें और अपने बीमार परिजनों के पास मास्क आदि सुरक्षा प्रबंधों के बिना न जाएं. लेकिन, इसके साथ-साथ हमें इस बीमारी को लेकर लोगों के बीच बनी धारणा को बदलने की भी जरूरत है. हमें एक वृहत अभियान के तहत इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैलानी होगी. आज हमें भय, गलतफहमी और भ्रामक जानकारियों के बीच बारीक अंतर पहचानने के लिए विज्ञान की ओर देखना ही होगा.

हर एक व्यक्ति को अधिकार है कि सम्मानजनक तरीके से अपने परिजनों से विदा ले. हमारे लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि मृतकों का अंतिम संस्कार परिजनों द्वारा किए जाने में कोई ख़तरा नहीं है. उन्हें दफ़नाने या उनका दाह संस्कार करने से कोरोना का संक्रमण नहीं फैलता है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मृतकों को दफनाने के संबंध में 15 मार्च को एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया था. इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि मृतक के परिजन अंतिम बार अपने प्रियजन का दर्शन कर सकते हैं. इसमें वैसे सभी धार्मिक कार्यों की भी अनुमति दी गई थी, जिन्हें बिना शारीरिक संपर्क के पूरा किया जा सकता है.

वास्तव में ऐसा कोई वैज्ञानिक या तार्किक कारण नहीं है जो सामाजिक दूरी और सुरक्षा निर्देशों का पालन कर रहे लोगों को अपने प्रियजनों को अंतिम संस्कार करने से रोकता हो. सामाजिक दूरी का पालन करते हुए लोग अपनी मान्यता के अनुसार अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार खुद से कर सकते हैं, इसके लिए कोई रोक नहीं है. बस हमें यहां ध्यान रखना होगा कि अंतिम संस्कार के इस कार्यक्रम में ज्यादा लोग उपस्थित नहीं हों और सामाजिक दूरी का सख्ती से पालन हो. सिर्फ और सिर्फ बहुत करीबी लोग ही इसमें शरीक हों और सभी लोग उचित तरीके से मास्क लगाए हों. वृद्ध लोगों और बच्चों को ऐसे कार्यक्रम से दूर रखा जाए और अगर धार्मिक मान्यता के अनुसार खाने-पीने का इंतजाम करना है तो सबके लिए अलग बर्तन रखे जाएं और ऐसे कार्यक्रम का आयोजन किसी खुली जगह पर कराया जाए.

हम यह खुला पत्र अपने देश के नागरिकों के नाम लिख रहे हैं. हमारा उद्देश्य है कि कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में हमारे भाई-बहन वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सहारा लें. इस पत्र के माध्यम से हम उन सभी परिवारों के साथ संवेदना भी जताना चाहते हैं जिन्होंने किसी अपने को खोया है. शोक के इस समय में हम उन परिवारों के साथ कदम से कदम से मिलाकर खड़े हैं और हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि विज्ञान ने कभी नहीं कहा है कि अंतिम संस्कार से पहले अपने मृत प्रियजन को ना देखें. साथ ही अगर वे शारीरिक संपर्क में आने बिना कोई अंतिम धार्मिक कार्य या अंत्येष्टि करना चाहते हैं तो इसके लिए भी कोई रोक-टोक नहीं है.

इस खास वेबिनार में दिल्ली के विशेषज्ञ टीम राजमोहन गांधी, रोमिला थापर, गीता हरिहरन,विक्रम पटेल,शाह आलम खान, सुजाता राव,केशव देसीराजू,वंदना प्रसाद,मैथ्यू वर्गीज़,दिनेश मोहन,रीतुप्रियॉ, विकास बाजपेयी,इमराना कदीर, सैयदा हमीद,जॉन दयाल, नवशरण सिंह, नताशा बधवार,राधिका अल्काजी,रीता मनचन्दा,तपन बोस, अरमान अल्काजी,अनवर-उल-हक, हर्षमंदर ने मीडियाकर्मियों से इस मुद्दे पर राय रखी एवं समुदाय में इसको लेकर अधिक से अधिक जागरूकता फ़ैलाने की बात कही।

एनडीआईएम में एमबीए का 22 वां दीक्षांत समारोह का आयोजन

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-कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने छात्रों को बधाई दिया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की कामना की

-इस मौके पर पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल और मंहिद्रा एंड मंहिद्रा ग्रुप के एमडी व सीईओ डॉ पवन गोयनका उपस्थित थे।

नईदिल्ली- –

एनडीआईएम में 22 वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर मुख्य अतिथि के रूप में ऑनलाइन छात्रों को संबोधित किया। इस मौके पर पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल, महिंद्रा एंड महिंद्रा के एमडी और सीईओ पवन गोयनका ने भी छात्रों को संबोधित किया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर सबसे पहले एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल ने कालेज का विस्तृत ब्योरा दिया। जिसमें उन्होंने अब तक संस्थान द्वारा प्राप्त किए गए उपलब्धियों पर भी चर्चा की एवं पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को भी दर्शाया। इस मौके पर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने संबोधित करते हुए कहा कि आज शिक्षा भी बदल चुका है। और इसे ग्रहण करने के तरीके भी बदले हैं। आज छात्रों के ज्यादा चुनौतियों को सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में युवा को ही आगे का रास्ता भी निकालना है। देश अब आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है जिसके लिए युवाओं की भूमिका ज्यादा महत्तपूर्ण हो जाता है।

इस मौके पर पीरामल ग्रुप के चेयरमैन अजय पीरामल ने कहा कि देश में कई चुनौतियां है और उद्योग जगत में कई तरह की चुनौतियां आई हैं लेकिन देश का उद्योग इन सबसे निपटने को तैयार है। छात्रों को वैश्विक स्तर पर नित्य प्रतिदिन चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। बिजनेस में ऐसी चुनौतियां आएंगी। लेकिन हमें आगे बढ़ना है।

छात्रों को संबोधित करते हुए महिंद्रा एंड मंहिद्रा के एमडी एवं सीईओ डॉ पवन गोयनका ने कहा कि अब स्वदेश का महत्व ज्यादा बढ़ गया है। हमें बाजार भी तलाशना है और अपने उत्पाद को आगे भी बढ़ाना है। आज जो भी छात्र यहां से जा रहे हैं उनपर ही देश का भविष्य है। खासकर एनडीआईएम को हम बधाई देते हैं जो नित्य नए ऊंचाईयों को छू रहा है।

अंत में एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि आज एमबीए के 22 दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ है हमारे सामने अब विशेष चुनौतियां आई हैं जिसको लेकर हमसब मिलकर निपट लेंगे। खास तौर पर देश का नेतृत्व ऐसे हाथों में है जो चुनौतियां से बेहतर रूप से निपटने के लिए जाने जाते हैं। हम सब उनके साथ हैं.

निजी एंबुलेंस से आने पर स्वास्थ्य विभाग कर रहा राशि का भुगतान

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एईएस व जेई प्रभावित मरीजों को दी जा रही निशुल्क: एंबुलेंस सेवा

 

11 सबसे अधिक प्रभावित जिलों में वर्तमान में 406 एंबुलेंस हैं मौजूद

 

केयर इंडिया ने किया 861 इमरजेंसी मेडिकल टेक्निीशियन को प्रशिक्षित

 

बेगूसराय, 30 जून:

राज्य में एईएस(एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) व जेई(जापानी इंसेफलाइटिस) की रोकथाम के मद्देनजर लोगों को निशुल्क: 102 एंबुलेंस की सुविधाएं दी जा रही है. राज्य स्वास्थ्य समिति ने प्रभावित रोगियों को एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने को लेकर सभी सिविल सर्जन, जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक को अपनी निगरानी में इस हालात पर नजर रखने के लिए भी कहा है.

 

11 जिलों में कुल 406 एंबुलेंस कराये गये हैं उपलब्ध:

राज्य के 11 सबसे अधिक एईएस व जेई से प्रभावित जिलों में रोगियों को कई सुविधाएं के साथ एंबुलेंस सेवा भी दी जा रही है.  इन 11 जिलों में वर्तमान में कुल 406 एंबुलेंस मौजूद हैं. इनमें कुल 336 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 24 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस हैं. इसके अलावा मई माह में कुल 46 नये बीएलएस एंबुलेंस इन सभी जिलों को उपलब्ध कराया गया है. कुल 20 एंबुलेंस को बैकअप के तौर पर रखा गया है जो किसी भी आपात स्थिति में इस्तेमाल करने हैं.

 

निजी एंबुलेंस के दैनिक भाड़ा हैं निर्धारित:

सभी 11 जिलों को एईस मरीजों के परिवहन के लिए निजी एंबुलेंस का दैनिक भाड़ा निर्धारित कर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त एंबुलेंस रखा गया है एईएस पीड़ित मरीजों को निजी एंबुलेंस या प्राइवेट वाहन की व्यवस्था कर अस्पताल पहुंचने पर निर्धारित दर पर भाड़े के एवज में राशि का भुगतान करना है. इसके लिए 0 से 20 किलोमीटर पर 400 सौ रूपये, 21 से 40 किलोमीटर के लिए 600 रुपये व 41 से 60 किलोमीटर पर 800 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. 61 किलोमीटर से अधिक होने पर अधिकतम 1000 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. मरीजों के परिजनों को राशि का भुगतान नकद किया जा रहा है.

 

केयर इंडिया द्वारा 861 इएमटी को मिला प्रशिक्षण:

इन सभी 11 जिलों में 102 एंबुलेंस के लिए प्रतिनियुक्त किये गये इमरजेंसी मेडिकल टेक्निीशियन  के प्रशिक्षण के लिए 102 एंबुलेंस पर कार्यरत इएमटी की सूची सेवा प्रदाता से प्राप्त कर स्टेट रिसोर्स यूनिट केयर पटना को उपलब्ध करायी गयी है.  कुल 861 इएमटी को प्रशिक्षण दिया गया है.

विभिन्न जिलों में एंबुलेंस की यह है स्थिति:

मुजफ्फरपुर जिले में 102 एंबुलेंस को किसी भी हालत में आॅफ रोड नहीं रहने का निर्देश दिया गया है. यदि किसी कारण से एंबुलेंस आॅफ रोड है तो तत्काल दूसरे एंबुलेंस की व्यवस्था की जानी है. सभी 102 एंबुलेंस में आवश्यक उपकरण व एसी क्रियाशील हों और आवश्यक दवाएं मौजूद हों यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित स्वास्थ्य पदाधिकारियों की है.  यहां वर्तमान में 55 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 4 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 34 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 17 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 3 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

पूर्वी चंपारण जिला में वर्तमान में 44 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 1 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 34 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 9 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 1 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

दरभंगा जिला में वर्तमान में 44 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 38 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 3 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 3 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

सारण जिला में वर्तमान में 37 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 33 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 2 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

समस्तीपुर जिला में वर्तमान में 39 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 34 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 3 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

 

पश्चिम चंपारण जिला में वर्तमान में 36 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 29 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 5 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 2 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

गोपालगंज जिला में वर्तमान में 25 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 21 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 1 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

सीवान जिला में वर्तमान में 31 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 27 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 1 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.

 

एईएस व जेई प्रभावित मरीजों को दी जा रही निशुल्क: एंबुलेंस सेवा

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निजी एंबुलेंस से आने पर स्वास्थ्य विभाग कर रहा राशि का भुगतान
11 सबसे अधिक प्रभावित जिलों में वर्तमान में 406 एंबुलेंस हैं मौजूद
केयर इंडिया ने किया 861 इमरजेंसी मेडिकल टेक्निीशियन को प्रशिक्षित
पटना, 30 जून: राज्य में एईएस(एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) व जेई(जापानी इंसेफलाइटिस) की रोकथाम के मद्देनजर लोगों को निशुल्क: 102 एंबुलेंस की सुविधाएं दी जा रही है. राज्य स्वास्थ्य समिति ने प्रभावित रोगियों को एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने को लेकर सभी सिविल सर्जन, जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक को अपनी निगरानी में इस हालात पर नजर रखने के लिए भी कहा है.
11 जिलों में कुल 406 एंबुलेंस कराये गये हैं उपलब्ध:
राज्य के 11 सबसे अधिक एईएस व जेई से प्रभावित जिलों में रोगियों को कई सुविधाएं के साथ एंबुलेंस सेवा भी दी जा रही है.  इन 11 जिलों में वर्तमान में कुल 406 एंबुलेंस मौजूद हैं. इनमें कुल 336 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 24 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस हैं. इसके अलावा मई माह में कुल 46 नये बीएलएस एंबुलेंस इन सभी जिलों को उपलब्ध कराया गया है. कुल 20 एंबुलेंस को बैकअप के तौर पर रखा गया है जो किसी भी आपात स्थिति में इस्तेमाल करने हैं.
निजी एंबुलेंस के दैनिक भाड़ा हैं निर्धारित:
सभी 11 जिलों को एईस मरीजों के परिवहन के लिए निजी एंबुलेंस का दैनिक भाड़ा निर्धारित कर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त एंबुलेंस रखा गया है एईएस पीड़ित मरीजों को निजी एंबुलेंस या प्राइवेट वाहन की व्यवस्था कर अस्पताल पहुंचने पर निर्धारित दर पर भाड़े के एवज में राशि का भुगतान करना है. इसके लिए 0 से 20 किलोमीटर पर 400 सौ रूपये, 21 से 40 किलोमीटर के लिए 600 रुपये व 41 से 60 किलोमीटर पर 800 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. 61 किलोमीटर से अधिक होने पर अधिकतम 1000 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. मरीजों के परिजनों को राशि का भुगतान नकद किया जा रहा है.
केयर इंडिया द्वारा 861 इएमटी को मिला प्रशिक्षण:
इन सभी 11 जिलों में 102 एंबुलेंस के लिए प्रतिनियुक्त किये गये इमरजेंसी मेडिकल टेक्निीशियन  के प्रशिक्षण के लिए 102 एंबुलेंस पर कार्यरत इएमटी की सूची सेवा प्रदाता से प्राप्त कर स्टेट रिसोर्स यूनिट केयर पटना को उपलब्ध करायी गयी है.  कुल 861 इएमटी को प्रशिक्षण दिया गया है.
विभिन्न जिलों में एंबुलेंस की यह है स्थिति:
मुजफ्फरपुर जिले में 102 एंबुलेंस को किसी भी हालत में आॅफ रोड नहीं रहने का निर्देश दिया गया है. यदि किसी कारण से एंबुलेंस आॅफ रोड है तो तत्काल दूसरे एंबुलेंस की व्यवस्था की जानी है. सभी 102 एंबुलेंस में आवश्यक उपकरण व एसी क्रियाशील हों और आवश्यक दवाएं मौजूद हों यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित स्वास्थ्य पदाधिकारियों की है.  यहां वर्तमान में 55 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 4 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 34 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 17 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 3 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
पूर्वी चंपारण जिला में वर्तमान में 44 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 1 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 34 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 9 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 1 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
दरभंगा जिला में वर्तमान में 44 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 38 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 3 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 3 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
सारण जिला में वर्तमान में 37 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 33 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 2 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
समस्तीपुर जिला में वर्तमान में 39 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 34 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 3 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
पश्चिम चंपारण जिला में वर्तमान में 36 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 29 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 5 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 2 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
गोपालगंज जिला में वर्तमान में 25 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 21 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 1 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे.
सीवान जिला में वर्तमान में 31 एंबुलेंस मौजूद हैं. इसमें पूर्व से 2 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस व 27 बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस मौजूद है. वहीं मई माह में 2 नये बेसिक लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस दिये गये है. साथ ही 1 बैकअप बीएलएस एंबुलेंस उपलब्ध हैं जो किसी आपात स्थिति में काम करेंगे

कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए बरती जा रही सतर्कता

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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कर्मी लगाए रहते हैं मास्क और ग्लव्स
इलाज को आने वाले मरीजों से मास्क पहनने की अपील
भागलपुर, 30 जून
कोरोना को लेकर जिले में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. मायागंज  व सदर अस्पताल में तो एहतियात बरती ही जा रही है, साथ ही जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी इसे लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है. यहां पर आने वाले मरीजों को मास्क पहनने की सलाह दी जा रही है. साथ ही वहां पर तैनात कर्मी ड्यूटी के दौरान हमेशा मास्क और ग्लब्स लगाए रहते हैं. समय-समय पर सैनिटाइजर का प्रयोग करते हैं.
 शाहकुंड में बरती जा रही विशेष सावधानी: दरियापुर और शाहकुंड   प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना के संदिग्ध मरीजों को लेकर तो सावधानी  भर्ती ही जा रही है. साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी विशेष ख्याल रखने को कहा जा रहा है. प्रभारी डॉ जयप्रकाश सिंह का कहना है कि सावधानी से ही हम कोरोना को मात दे सकते हैं. इसलिए लोगों को चाहिए कि हमेशा मास्क पहने और सैनिटाइजर का प्रयोग करें. उन्होंने कहा कि दरियापुर और शाहकुंड में संदिग्ध मरीजों के सैंपलिंग के लिए अलग से व्यवस्था की गई है. वहां पर तो विशेष सावधानी रहती हैं. ओपीडी में इलाज कराने वाले मरीजों को भी मास्क लगाने की सलाह दी जाती है. साथ ही सैनिटाइजर का इस्तेमाल समय-समय पर करने के लिए कहा जाता है. यहां पर किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं है.
 नाथनगर में मरीजों को भी उपलब्ध कराया जा रहा है मास्क: नाथनगर  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों एवं परिजनों को भी मास्क दिया जा रहा है. यहां पर भी संदिग्ध मरीजों के सैंपल के लिए अलग से व्यवस्था की गई है. वही ओपीडी में कार्यरत कर्मी मास्क और ग्लब्स लगाए रहते हैं. प्रभारी डॉक्टर अंजना कुमारी ने कहा कि हमलोग लोगों से भी अपील कर रहे हैं कि स्वच्छता का ख्याल रखें. साथ ही घर से बाहर निकलते वक्त मास्क पहने. घर के आसपास स्वच्छता का ख्याल रखें. कोरोना के मरीज या फिर संदिग्ध के आसपास पूरी तरीके से  मास्क और कवर लगाकर रहे.
 सबौर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में
मरीजों का रखा जा रहा विशेष ख्याल: यहां आने वाले मरीजों को  मास्क और सैनिटाइजर दिया जाता है. उसके बाद अंदर आने की इजाजत है. पीएचसी प्रभारी डॉक्टर सुभ्रा वर्मा का कहना है कि कोरोना के संक्रमण की रोकथाम को लेकर पर्याप्त व्यवस्था की गई है. यहां कार्यरत कर्मी तो एहतियात बरत ही रहे हैं. यहां पर आने वाले मरीजों को भी सतर्क रहने के लिए कहा जाता है. उनका कहना है कि यहां कोरोना के संदिग्ध मरीजों के लिए और ओपीडी में इलाज कराने वालों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है. इसलिए यहां पर कोरोना के संक्रमण का किसी तरह का खतरा नहीं है.
इन जगहों पर मास्क जरूर लगाएं:
• जब आप यात्रा कर रहे हों या किसी सार्वजनिक स्थल पर जा रहे हों.
• जब आप किसी ऑफिस के कमरे में अन्य व्यक्ति के साथ बैठे हों.
• यदि सर्दी, जुकाम हो तो बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगायें
इन बातों का रखें खास ध्यान:
• छींकते या खांसने समय रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें.
• बहुत अधिक इस्तेमाल होने वाले सतहों जैसे दरवाजे का हैंडल या ऐसी अन्य जगहों की नियमित सफाई जरूरी है.
• खुले में या सार्वजनिक जगहों पर जहां तहां नहीं थूंके. ऐसा करना दंडनीय अपराध भी है.
• बिना किसी उद्देश्य या औचित्य के यात्रा करने से बचें. बहुत जरूरी हो तभी यात्रा करें.
कोविड 19 संक्रमित या उसके परिवार वालों के साथ भेदभाव न कर सहाभूति से पेश आयें.
अपने स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करने के लिए आरोग्य सेतु एप्प का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कोविड 19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110007 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बात कर मनोचिकित्सक से आवश्यक लें

वीडियो कांफ्रेंसिंग कर स्वास्थ्यकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

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क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल 19 विषय पर बढ़ायी गयी समझ
राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश का किया गया अनुपालन
लखीसराय, 30 जून: जिला में कोविड 19 को लेकर स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण कार्य मंगलवार को किया गया. यह प्रशिक्षण वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से विभिन्न कोविड केयर सेंटर व डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर पर तैनात सभी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ व पारामेडिकल स्टाफ को दिया गया है. प्रशिक्षण के बाद इन सभी स्वास्थ्यकर्मियों को यह सुनिश्चित भी करना होगा कि सभी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ व पारामेडिकल अपडेट गाइडलाइंस का पालन करते हुए प्रोटोकॉल के अनुसार रोगियों का इलाज कर रहे हैं.
सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने बताया राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार के निर्देश पर क्लिनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल 19 तथा कंटेंटमेंट तथा वल्नेरेबल ग्रूप के समुचित प्रबंधन आदि विषयों पर वीडियो काफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षिण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. कोविड 19 के रोगियों की ससमय खतरों की पहचान कर समुचित उपचार करने के उद्देश्य से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना व इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पटना के विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण देने का काम किया गया है. प्रशिक्षण के बाद यह भी सुनिश्चित किया जाने के लिए कहा गया है कि 7 जुलाई 2020 तक डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर व कोविड केयर सेंटर के सभी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं पारामेडिकल अद्यतन गाईडलाइन में प्रशिक्षित होकर रोगियों का प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार करें.
उन्होंने बताया प्रशिक्षण में डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर के नोडल  ऑफिसरों ने भाग लिया और विषय की समझ बढ़ाया.
बूढ़े बुजर्ग लोगों को है अधिक खतरा:
कोविड 19 संक्रमण का खतरा उनलोगों को अधिक है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. इनमें बुजुर्ग व गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा घर लौटने वाले प्रवासियों पर भी नजर रखने के साथ उनके परिजनों व सगे संबंधियों की भी लिस्टिंग की गयी है. राज्य स्वास्थ्य समिति ने कोविड 19 के तहत गंभीर रूप से बीमार, वृद्ध, बच्चे व गर्भवती महिलाओं की विशेष मॉनिटरिंग के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिये हैं. ऐसे व्यक्तियों में कोविड 19 के संक्रमण की संभावना अधिक होने के कारण उनकी विशेष मॉनिटरिंग किये जाने की जरूरत पर बल दिया गया है. साथ ही लोगों को उचित चिकित्सीय सलाह टेली मेडिसिन के माध्यम से प्राप्त करने के लिए 801011213 पर फोन कर जानकारी देने के लिए उत्प्रेरित करने के लिए भी कहा गया है

बच्चों में विटामिन ए और पोषण की कमी बनता है खसरा संक्रमण की वजह

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रोग से जा सकती है आंखों की रोशनी, होती सकती है मौत

 

कुपोषण के कारण शिशु को है खसरा संक्रमण का खतरा

 

खसरा की रोकथाम का प्रभावी तरीका है एमएमआर टीकाकरण

 

स्वास्थ्य विभाग ने जिला में पुन: बहाल किये टीकाकरण कार्यक्रम

 

जमुई , 30  जून: कोरोना संक्रमण के इस संकटकाल में गंभीर संक्रामक रोगों की जानकारी होना आवश्यक है. विशेषकर बच्चों के रोग प्रतिरोधी क्षमता को अधिक ध्यान में रखना जरूरी होता है ताकि भविष्य में उनका शरीर किसी भी रोग से सामना कर सके. संक्रामक बीमारियों में खसरा एक गंभीर और घातक बीमारी है जो बच्चों की मौत का कारण भी बनती है. ऐसे में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर उनकी सुरक्षा की जा सकती है और इसका प्रभावी तरीका टीकाकरण है.

 

लाल चकते व सूखी खांसी को नहीं करें नजरअंदाज:

खसरा रोग को मीजल्स भी कहते हैं. यह रूबेला वायरस के कारण होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक खसरा रोग संक्रमित व्यक्ति के खांसी या छींक के साथ निकलने वाली बूंदों में मौजूद  वायरस हवा में फैल जाता है और यह दूसरे को प्रभावित करता है. इसके लक्षण दिखने में 14 दिन लग जाते हैं. संक्रमण के कारण मरीज को खांसी व बुखार के साथ शरीर पर खुजली वाले लाल चकत्ते हो जाते हैं. ये चकते पहले कानों के पीछे, गर्दन व सिर पर उभरते हैं. मरीज न्यूमोनिया व गंभीर डायरिया से पीड़ित हो जाता है. और इलाज नहीं मिल पाने के कारण उसकी मौत हो जाती है. लक्षणों की पहचान इस प्रकार की जा सकती है.

 

• सूखी खांसी

• गले में खराश

• बहती नाक

• आंखों में सूजन

• त्वचा पर चकते

 

विटामिन ए की कमी व कुपोषण संक्रमण की वजह:

खसरा कई शारीरिक जटिलताओं जैसे अंधापन, मेनेनजाइटिस या मस्तिष्क में सूजन सहित ब्रेन डैमज का कारण बनता है. इस संक्रमण का एक बड़ा कारण पोषण की कमी है. कुपोषित बच्चों में संक्रामक बीमारियां जल्द धावा बोल शरीर को बीमार कर देती हैं. विटामिन ए की कमी के साथ कमजोर रोग प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चों को यह बहुत अधिक जल्द प्रभावित करती है.

 

एमएमआर का टीका बच्चों को जरूर लगवायें:

स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को पुन: बहाल किया गया है. एमएमआर टीकाकरण में खसरा के टीके को मंप्स और रुबेला के टीके के साथ ही लगाया जाता है. ये टीकाकरण शिशु के एक साल की उम्र होने के साथ कर दिया जाना जरूरी है. संक्रमण को लेकर एक धारणा यह भी है कि इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, लेकिन ये सब मिथ्याएं हैं और समय पर इलाज नहीं होने से बच्चे की मौत हो जाती है. खसरा संक्रमण की रोकथाम के लिए एमएमआर टीकाकरण ही प्रभावी है. टीकाकरण नौ माह व डेढ़ साल पर किये जाते हैं. इसके साथ ही शिशु को विटामिन ए की खुराक भी दी जाती है

 

सभी जिलों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का लक्ष्य हासिल करने के लिए जारी किये गए निर्देश

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• कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जारी किये निर्देश
• सभी प्रस्तावित सेंटर को शीघ्र कार्यान्वित करने का दिया गया निर्देश
•  भागलपुर जिला ने लक्ष्य के सापेक्ष में हासिल किया है 30 प्रतिशत  से कम सफलता
भागलपुर/ 29 जून- राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है. गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को जनमानस तक पहुंचाने के क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने चयनित प्राथमिक एवं उप-प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है. इसके लिए जिलावार लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी क्रम में कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार सरकार ने सभी सिविल सर्जन को जिलों में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को ससमय कार्यान्वित करने के लिए पत्र द्वारा निर्देश जारी किये हैं. पत्र के माध्यम से बताया गया है कि वित्तीय वर्ष- 2019-20 में कुल 2792 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्वास्थ्य उपकेन्द्र तथा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके सापेक्ष में मात्र 862 सेंटर विकसित होने के बाद कार्यान्वित हैं. बाकी केन्द्रों को अक्टूबर 2020 तक विकसित करने का निर्देश दिया गया है.
वित्तीय वर्ष 2020-21 में 2408 स्वास्थ्य उपकेन्द्र एवं 10 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को विकसित करने का लक्ष्य:
पत्र के माध्यम से बताया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में 2408 स्वास्थ्य उपकेन्द्र एवं 10 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को विकसित करने का लक्ष्य अनुमोदित है. इस प्रकार वित्तीय वर्ष- 2019-20 में बाकि बचे को मिलकर कुल 4348 केन्द्रों को 15 फरवरी 2021 तक विकसित कर कार्यान्वित करने की योजना है और इसके लिए पत्र द्वारा निर्देश जारी किये गए हैं.
 भागलपुर में है 62 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कार्यान्वित करने का लक्ष्य:
वित्तीय वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 में जिला में 54 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 50 स्वास्थ्य उपकेन्द्र को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित कर कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया था. इसके सापेक्ष्य में 25 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 6 स्वास्थ्य उपकेन्द्र हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित कर संचालित किये गए हैं जो की लक्ष्य के करीब 30 प्रतिशत  से कम है है. वर्ष 2020-21 के लिए 160 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित कर कार्यान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है

लखीसराय जिले में कोविड -19 की प्रखण्ड स्तरीय जाँच की हुई शुरुआत

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लखीसराय पीएचसी के लोगों की सदर में ही होगी जाँच

नहीं प्रभावित होगी सदर की मूलभूत स्वास्थ्य  सुविधा

 

लखीसराय: 29 जून। जिले में कोविड-19 जांच की शुरुआत सदर अस्पताल के साथ अब हर पीएचसी में कर दी गयी है । इस सुविधा के बहाल होने से सदर अस्पताल के मूल स्वास्थ्य सेवा में आ रही कमी को कम करने की कवायद है।

जिला सिविलसर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया कि  सदर अस्पताल के साथ पीएचसी स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हुई है। पर अब इस कमी को दूर कर लिया गया है। क्योकि कोविड -19 की जाँच सदर अस्पताल के साथ हर पीएचसी मे भी की जा रही है। लखीसराय पीएचसी के लोगों की जाँच सदर में होगी और बाकी सभी पीएचसी के लोगों की जाँच उनके सबंधित पीएचसी केंद्र पर ही होगी। उन्होने बताया इस सुबिधा को शुरू करने का मात्र उदेश्य ये है कि स्वास्थ्य बिभाग की मूलभूत सुबिधा;  मातृ स्वास्थ्य सेवाएं, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं , परिवार नियोजन सेवाएं ,पोषण-स्वास्थ्य सेवाएं, एम्बुलेंस सेवाएं एवं आपूर्ति सेवाएं के सुचारू रूप क्रियान्वयन करने में आसनी हो।

 

पीसीआर के लिए ही जाएगी सैंपल एम्स पटना

सिविलसर्जन डॉ आत्मनन्द राय ने बताया पीएचसी स्तर से सैंपल जिला सदर को  भेजा जाएगा। वहाँ  कोविड-19  ट्रूनेट जांच मशीन से संक्रमित की प्रारम्भिक जांच होगी। इस जाँच में जिन लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आएगी, उन्हें पूरी तरह से ठीक माना जाएगा। लेकिन जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी, उस केस को पॉलीमर चेन रिएक्शन के तहत कन्फर्म करने के लिए फिर से सैम्पल को पटना के एम्स में  भेजा जाएगा । वहाँ से रिपोर्ट आने के बाद उसका इलाज किया जाएगा।

 

ट्रूनेट के सफल संचालन के लिए दिया गया है  प्रशिक्षण:

जिला सदर अस्पताल में टूनेट मशीन को संचालित करने लिए तथा सैंपल कलेक्शन के लिए एक्सरे टैक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया गया है।  साथ ही पीएचसी स्तर पर भी  सैंपल कलेक्शन के लिए टैक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही जिले में कोविड -19 के सर्वे के लिए आशा एवं आशा फेसिलेटर को भी ट्रेंड किया जा रहा है ताकि इस महामारी से हो रही जंग जल्द से जल्द जीती जा सके ।

हम सबको अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाना होगा-आदेश गुप्ता

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नई दिल्ली, 28 जून-
कोरोना से बचाव हेतु आज घंटाघर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  आदेश गुप्ता ने जरूरतमंद लोगों को काढ़े के पैकेट, सेनिटाइजर, फेस शील्ड तथा मास्क बांटे। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली भाजपा ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष  गौरव खारी ने किया। इस अवसर पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर श्री जयप्रकाश, जिलाध्यक्ष  अरविंद गर्ग, केशवपुरम जोन चेयरमैन श्री जोगीराम जैन, ओबीसी मोर्चा चांदनी चैक जिलाध्यक्ष श्री जितेंद्र चैधरी व ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता उपस्थित थे।
इस अवसर पर  आदेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ता फ्रंटलाइन पर काम करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पिछले कई दिनों से आमजन की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और दिनचर्या में बदलाव करके बीमारी को मात देने के लिए निरंतर काढ़े के पैकट का वितरण किया जा रहा है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों की अनुपालन करने के साथ-साथ हम सबको अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाना होगा। काढ़े के सेवन से इम्यून मजबूत होगा और साथ ही शरीर कोरोना से लड़ने में बेहतर रूप से सक्षम हो पाएगा। प्रतिदिन योगासन, प्राणायम और गर्म पानी पीने की आदत को जीवनशैली में शामिल करें। समय-समय पर हाथ को अच्छे से धोते रहें, सेनिटाइजर का उपयोग करें। बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग जरूर करें।