बिहार में एक वर्ष में 9739 नवजातों एवं 12985 अंडर-5 बच्चों की जान बचाने में मिली सफ़लता

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• सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

• नवजात मृत्यु दर में भी 3 अंकों की आयी कमी

• अंडर-5 मृत्यु दर में भी आई 4 अंकों की कमी

• बिहार की शिशु मृत्यु दर 3 अंक घटकर हुयी राष्ट्रीय औसत के बराबर

• राज्य में 60% से अधिक संस्थागत प्रसव सरकारी अस्पतालों में

 

लखीसराय-28,जून:

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने जहाँ राज्य सरकार के सामने चुनौतियाँ पेश की है, वहीँ राज्य के लिए एक अच्छी खबर भी सामने आयी है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि बिहार की शिशु मृत्यु दर 3 अंक घटकर राष्ट्रीय  औसत के बराबर हो गयी है. वर्ष 2017 में बिहार की शिशु मृत्यु दर 35 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 32 हो गयी. इस कमी के बाद बिहार की शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय शिशु मृत्यु दर के बराबर हो गयी है. यह इसलिए भी संभव हो सका है, क्योंकि बिहार की नवजात मृत्यु में भी 3 अंकों की कमी आई है. बिहार की नवजात मृत्यु दर जो वर्ष 2017 में 28 थी, वर्ष 2018 में घटकर 25 हो गयी. अब बिहार की नवजात मृत्यु दर भी देश की नवजात मृत्यु दर(23) के काफ़ी करीब पहुंच गया है. बिहार की नवजात मृत्यु दर पिछले 7 वर्षों से 27-28 के बीच लगभग स्थिर था. लेकिन वर्ष 2018 में आई 3 अंकों की कमी को स्वास्थ्य की दिशा में उल्लेखनीय कामयाबी के तौर पर देखा जा सकता है. बिहार का ग्रामीण नवजात मृत्यु दर (26)  भारत के ग्रामीण नवजात मृत्यु दर  (27) से 1 अंक कम है. इस प्रकार, बिहार को अब इस पैरामीटर पर राष्ट्र को नीचे खींचने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

 

 

अंडर-5 मृत्यु दर में भी आई 4 अंकों की कमी:

 

राज्य के नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी के साथ अंडर-5( 5 वर्ष से पूर्व के बच्चों) मृत्यु दर में भी 4 अंकों की कमी आई है. वर्ष 2017 में अंडर-5 मृत्यु दर 41 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 37 हो गयी. वहीं बिहार की प्रारंभिक नवजात मृत्यु दर में 1 अंक की कमी एवं लेट नवजात मृत्यु दर में 2 अंकों की कमी आई है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2017  की तुलना में वर्ष 2018 के दौरान 9739  नवजात और 12985  अंडर-5  मौतें टालने में कामयाबी मिली है.

 

 

प्रसवकालीन मृत्यु दर में भी आयी 2 अंकों की कमी:

 

 

वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 में राज्य की प्रसवकालीन मृत्यु दर में भी 2 अंकों की कमी आई है. वर्ष 2017 में प्रसवकालीन मृत्यु दर 24 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 22 हो गयी. शिशु मृत्यु दर में लिंग भेद में भी पिछले वर्षों की तुलना में कमी आयी है. वर्ष 2016 में जेंडर का अंतर 15  था, जो वर्ष 2018  में घटकर 5  हो गयी.

 

 

मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा हस्तक्षेप:

 

• फैसिलिटी बेस्ड नवजात देखभाल (एफबीएनसी) कार्यक्रम: इस कार्यक्रम के तहत सभी प्रसव बिंदुओं पर नवजात शिशु देखभाल कॉर्नर (एनबीसीसी) , सभी प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) में नवजात स्थिरीकरण इकाइयां (एनबीएसयू) और जिला अस्पतालों और चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों में विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) को महत्वपूर्ण नवजात और बाल स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए स्थापित किये गए हैं.

 

बीइएमओसी और सीईएमओसी सेवाओं के प्रावधान के लिए नामित स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन किया गया. स्वास्थ्य सुवधाओं में देखभाल की इष्टतम गुणवत्ता की निगरानी और उन्नयन के लिए गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम को लागू किया गया है. राज्य में 60% से अधिक प्रसव सरकारी अस्पतालों में उच्च गुणवत्ता वाले इंट्रानेटल और प्रसवोत्तर देखभाल के साथ हो रहे हैं, जो नवजात मृत्यु दर को कम करने का महत्वपूर्ण तरीका है.

 

राज्य स्वास्य्र समिति, बिहार द्वारा नर्सों एवं एएनएम की क्षमता वर्धन करने के लिए राज्य भर में अमानत( मोबाइल नर्स मेंटरिंग) कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके माध्यम से प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिलाओं एवं नवजात को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहे हैं.

 

• गृह आधारित नवजात देखभाल: आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी के साथ राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार गृह भ्रमण सुनिश्चित कर रहा है एवं आवश्यक नवजात देखभाल के लिए परामर्श प्रदान कर रह है.

 

• कमजोर नवजात देखभाल कार्यक्रम: कमजोर नवजात( कम वजन वाले जन्मे नवजात, समय से पूर्व जन्मे नवजात, बीमार नवजात) पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते हुए कमजोर नवजात देखभाल नामक एक विशेष कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है. इन नवजातों के लिए गृह भ्रमण और टैलीफोनिक ट्रैकिंग के माध्यम से देखभाल का प्रावधान  किया गया है.

 

राज्य में टीकाकरण कवरेज 80% से अधिक:

 

राज्य में टीकाकरण कवरेज 80% से अधिक है, जिससे शिशु मृत्यु दर एवं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु में कमी आई है. राज्य में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, पोषण पुनर्वास केंद्र, इन्फेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग, बाल दस्त रोग नियंत्रण कार्यक्रम, माइक्रोन्यूट्रिन्ट सप्प्लिमेंट( विटामिन ए, आयरन फोलिक एसिड), श्वसन संक्रमण रोग नियंत्रण कार्यक्रम, गंभीर कुपोषण वाले बच्चों का प्रबन्धन जैसे अन्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू किये गए हैं, जो अंडर-5 मृत्यु दर घटाने में बढ़ी भूमिका अदा कर रहे हैं

बिहार की शिशु मृत्यु दर 3 अंक घटकर हुयी राष्ट्रीय औसत के बराबर

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• सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

• नवजात मृत्यु दर में भी 3 अंकों की आयी कमी

• अंडर-5 मृत्यु दर में भी आई 4 अंकों की कमी

• एक वर्ष में 9739 नवजातों एवं 12985 अंडर-5 बच्चों की जान बचाने में मिली सफ़लता

• राज्य में 60% से अधिक संस्थागत प्रसव सरकारी अस्पतालों में

 

पटना/ 28, जून: कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने जहाँ राज्य सरकार के सामने चुनौतियाँ पेश की है, वहीँ राज्य के लिए एक अच्छी खबर भी सामने आयी है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि बिहार की शिशु मृत्यु दर 3 अंक घटकर राष्ट्रीय  औसत के बराबर हो गयी है. वर्ष 2017 में बिहार की शिशु मृत्यु दर 35 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 32 हो गयी. इस कमी के बाद बिहार की शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय शिशु मृत्यु दर के बराबर हो गयी है. यह इसलिए भी संभव हो सका है, क्योंकि बिहार की नवजात मृत्यु में भी 3 अंकों की कमी आई है. बिहार की नवजात मृत्यु दर जो वर्ष 2017 में 28 थी, वर्ष 2018 में घटकर 25 हो गयी. अब बिहार की नवजात मृत्यु दर भी देश की नवजात मृत्यु दर(23) के काफ़ी करीब पहुंच गया है. बिहार की नवजात मृत्यु दर पिछले 7 वर्षों से 27-28 के बीच लगभग स्थिर था. लेकिन वर्ष 2018 में आई 3 अंकों की कमी को स्वास्थ्य की दिशा में उल्लेखनीय कामयाबी के तौर पर देखा जा सकता है. बिहार का ग्रामीण नवजात मृत्यु दर (26)  भारत के ग्रामीण नवजात मृत्यु दर  (27) से 1 अंक कम है. इस प्रकार, बिहार को अब इस पैरामीटर पर राष्ट्र को नीचे खींचने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.

 

 

अंडर-5 मृत्यु दर में भी आई 4 अंकों की कमी:

 

राज्य के नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी के साथ अंडर-5( 5 वर्ष से पूर्व के बच्चों) मृत्यु दर में भी 4 अंकों की कमी आई है. वर्ष 2017 में अंडर-5 मृत्यु दर 41 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 37 हो गयी. वहीं बिहार की प्रारंभिक नवजात मृत्यु दर में 1 अंक की कमी एवं लेट नवजात मृत्यु दर में 2 अंकों की कमी आई है. इन आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2017  की तुलना में वर्ष 2018 के दौरान 9739  नवजात और 12985  अंडर-5  मौतें टालने में कामयाबी मिली है.

 

 

प्रसवकालीन मृत्यु दर में भी आयी 2 अंकों की कमी:

 

 

वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2018 में राज्य की प्रसवकालीन मृत्यु दर में भी 2 अंकों की कमी आई है. वर्ष 2017 में प्रसवकालीन मृत्यु दर 24 थी, जो वर्ष 2018 में घटकर 22 हो गयी. शिशु मृत्यु दर में लिंग भेद में भी पिछले वर्षों की तुलना में कमी आयी है. वर्ष 2016 में जेंडर का अंतर 15  था, जो वर्ष 2018  में घटकर 5  हो गयी.

 

 

मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा हस्तक्षेप:

 

• फैसिलिटी बेस्ड नवजात देखभाल (एफबीएनसी) कार्यक्रम: इस कार्यक्रम के तहत सभी प्रसव बिंदुओं पर नवजात शिशु देखभाल कॉर्नर (एनबीसीसी) , सभी प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) में नवजात स्थिरीकरण इकाइयां (एनबीएसयू) और जिला अस्पतालों और चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों में विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) को महत्वपूर्ण नवजात और बाल स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए स्थापित किये गए हैं.

 

बीइएमओसी और सीईएमओसी सेवाओं के प्रावधान के लिए नामित स्वास्थ्य सुविधाओं का उन्नयन किया गया. स्वास्थ्य सुवधाओं में देखभाल की इष्टतम गुणवत्ता की निगरानी और उन्नयन के लिए गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम को लागू किया गया है. राज्य में 60% से अधिक प्रसव सरकारी अस्पतालों में उच्च गुणवत्ता वाले इंट्रानेटल और प्रसवोत्तर देखभाल के साथ हो रहे हैं, जो नवजात मृत्यु दर को कम करने का महत्वपूर्ण तरीका है.

 

राज्य स्वास्य्र समिति, बिहार द्वारा नर्सों एवं एएनएम की क्षमता वर्धन करने के लिए राज्य भर में अमानत( मोबाइल नर्स मेंटरिंग) कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके माध्यम से प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी गर्भवती महिलाओं एवं नवजात को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रहे हैं.

 

• गृह आधारित नवजात देखभाल: आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी के साथ राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार गृह भ्रमण सुनिश्चित कर रहा है एवं आवश्यक नवजात देखभाल के लिए परामर्श प्रदान कर रह है.

 

• कमजोर नवजात देखभाल कार्यक्रम: कमजोर नवजात( कम वजन वाले जन्मे नवजात, समय से पूर्व जन्मे नवजात, बीमार नवजात) पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते हुए कमजोर नवजात देखभाल नामक एक विशेष कार्यक्रम क्रियान्वित किया जा रहा है. इन नवजातों के लिए गृह भ्रमण और टैलीफोनिक ट्रैकिंग के माध्यम से देखभाल का प्रावधान  किया गया है.

 

राज्य में टीकाकरण कवरेज 80% से अधिक:

 

राज्य में टीकाकरण कवरेज 80% से अधिक है, जिससे शिशु मृत्यु दर एवं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु में कमी आई है. राज्य में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, पोषण पुनर्वास केंद्र, इन्फेंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग, बाल दस्त रोग नियंत्रण कार्यक्रम, माइक्रोन्यूट्रिन्ट सप्प्लिमेंट( विटामिन ए, आयरन फोलिक एसिड), श्वसन संक्रमण रोग नियंत्रण कार्यक्रम, गंभीर कुपोषण वाले बच्चों का प्रबन्धन जैसे अन्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू किये गए हैं, जो अंडर-5 मृत्यु दर घटाने में बढ़ी भूमिका अदा कर रहे हैं

कोरोना काल में भाजपा के कार्यकर्ता जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचा रहे हैं-सिद्धार्थन

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नई दिल्ली, 27 जून। महरौली स्थित अग्रसेन वाटिका में दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने सफाई कर्मचारियों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, आरडब्ल्यूए, गैर सरकारी संस्थाओं और भाजपा के कार्यकर्ता जिन्होंने कोरोना योद्धाओं के रूप में जनसेवा की है, ऐसे 85 कोरोना योद्धाओं को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन व मंच संचालन दिल्ली भाजपा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने किया। इस अवसर पर महरौली जिला अध्यक्ष श्री विजय पंडित, निगम पार्षद एवं दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के स्वास्थ्य सीमित की अध्यक्ष श्रीमती आरती सिंह,, महरौली बाजार एसोसिएशन व आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
श्री आदेश गुप्ता ने कहा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय कहते थे कि राजनीति का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं होता है, समाज के आखिरी व्यक्ति तक सेवा पहुंचाना राजनीति कहलाती है और इस काम में भारतीय जनता पार्टी व हमारी कार्यकर्ता बखूबी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने एक करोड़ परिवारों तक सहायता पहुंचाई है। कोरोना से लड़ने में दिल्ली वालों को मजबूती देने के लिए पार्टी के कार्यकर्ता लगातार इम्युनिटी बढ़ाने वाला काढ़ा, फेस मास्क व हैंड सेनिटाइजर का वितरण कर रहे हैं।
प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सिद्धार्थन ने कहा कि भाजपा कोरोना काल में लगातार कार्यकर्ताओं के सहयोग से दिल्ली भर में काढ़ा, सेनिटाइजर, फेस मास्क के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूर्ण होने की उपब्धियां तथा प्रधानमंत्री का जनता को सम्बोधित पत्र भी बांट रहे हैं। नई दिल्ली जिला के तीन मूर्ति मंडल में जरूरतमंद लोगों को काढ़ा एवं अन्य जरूरत के सामान बांटते हुये उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता लोगों को कोरोना से बचाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर मदद कर रहा है। इस अवसर पर प्रदेश सह कार्यालय मंत्री श्री हुकम सिंह, मंडल अध्यक्ष श्री सतीश चीगल एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

निजी अस्पतालों के मनमाने दाम पर लगाम लगी, बेड की संख्या में भी बढ़ोतरी की गई-आदेश गुप्ता

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नई दिल्ली, 27 जून-

केंद्र में भाजपा सरकार के दूसरे कार्यकाल के ऐतिहासिक और अभूतपूर्व 1 साल पूरे होने पर मोदी सरकार की उपलब्धियों से अवगत कराने के लिए दिल्ली भाजपा अध्यक्ष श्री आदेश गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रोहतास नगर विधानसभा क्षेत्र की दिल्ली जनसंवाद रैली को संबोधित किया। इसी क्रम में दिल्ली भाजपा पूर्व अध्यक्ष व सांसद श्री मनोज तिवारी ने तिमारपुर, पूर्व संगठन महामंत्री महाराष्ट्र श्री रघुनाथ कुलकर्णी ने जंगपुरा और विश्वास नगर, दिल्ली भाजपा पूर्व अध्यक्ष व विधायक श्री विजेंद्र गुप्ता ने संगम विहार, प्रदेश महामंत्री श्री कुलजीत सिंह चहल ने चांदनी चैक विधानसभा क्षेत्रों की दिल्ली जनसंवाद रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया।

 

 

श्री आदेश गुप्ता ने कहा कि दूसरे कार्यकाल के पहले ही साल में मोदी सरकार ने देशवासियों के हित में अकल्पनीय और ऐतिहासिक फैसले लिए। जम्मू एंड कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त किया, नागरिकता संशोधन कानून लागू कर शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी, करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान राम के जन्म स्थल अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, मुस्लिम महिलाओं के सम्मान के लिए उन्हें तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाई। दिल्ली के 1731 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित कर वहां रहने वाले 40 लाख से भी ज्यादा लोगों को घरों का मालिकाना हक दिया। अब मोदी सरकार जहां झुग्गी वहां मकान योजना के तहत झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को पक्का मकान भी देने जा रही है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए ईस्टर्न व वेस्टर्न पैरिफेरल एक्सप्रेस बनवाया, धौला कुलां फ्लाईओवर बनाया, द्वारका एक्सप्रेस का काम शुरू करवाया, मेट्रो के चैथे चरण का काम के लिए भी मंजूरी दे दी है। आयुष्मान भारत योजना, उज्जवला योजना, जन धन योजना, प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना जैसी करीब जनकल्याणकारी योजनाओं से देश के करोड़ों लोगों को लाभ पहुंचा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार ने ने 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए की गरीब कल्याण पैकेज और आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज दिया। ये भारत की तस्वीर और तकदीर को बदलने वाला पैकेज है।

 

दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि आजकल केजरीवाल सरकार अपनी तारीफ करते नहीं थक रही है वह भी उन कामों के लिए जो उसने कभी किया नहीं। मुख्यमंत्री केजरीवाल पिछले 3 महीनों से अपने सरकारी बंगले में आराम फरमा रहे थे। जब दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई और दिल्ली सरकार का हेल्थ मॉडल दिल्ली के लोगों की सुरक्षा करने में विफल रहे केजरीवाल दिखावे के लिए प्रतिदिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दिल्ली के लोगों को झूठा आश्वासन देते रहे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के अस्पतालों से दिल दहलाने वाले दृश्य सामने आ रहे थे।अंततः सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और दिल्ली सरकार को इसे लेकर फटकार भी लगाई। दिल्ली की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए मोदी जी के नेतृत्व में माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने स्वयं दिल्ली के स्वास्थ्य हालातों का जायजा लेना शुरू किया और दिल्ली के लोगों को कोविड-19 के संक्रमण से बचाने के लिए सभी महत्वपूर्ण कदम उठाए। आज मोदी सरकार के प्रयासों से दिल्ली के लिए 500 रेलवे कोच को 8000 कोविड बेड तब्दील किया गया, राधास्वामी व्यास में 10,000 कोविड बेड और अब 10,000 बेड के साथ विश्व का सबसे बड़ा सरदार वल्लभभाई पटेल कोविड केयर अस्पताल भी लगभग तैयार हो चुका है।

 

श्री गुप्ता ने बताया कि 15 जून तक दिल्ली में बेड की संख्या 9179 थी, लेकिन अब 13411, इसी तरह से 15 जून तक मात्र 3 लाख 4 हजार 483 लोगों की टेस्टिंग की गई वहीं 15 जून से लेकर आज तक 1 लाख 54 हजार 673 लोगों की टेस्टिंग की गई है यानी 15 जून से पहले तक प्रतिदिन औसतन 5000 के करीब ही टेस्टिंग की जाती थी, माननीय गृह मंत्री जी के हस्तक्षेप के बाद अब यह टेस्टिंग का आंकड़ा प्रतिदिन 20 हजार के करीब पहुंच गया है। निजी अस्पताल कोरोना के इलाज के लिए 5-15 लाख तक की रकम वसूल रहे थे उनकी प्राइस कैपिंग की गई। माननीय गृह मंत्री जी के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में यह परिवर्तन आया है लेकिन इन कामों के लिए भी खुद की पीठ थपथपा रहे मुख्यमंत्री केजरीवाल से मैं पूछना चाहूंगा कि जो इनफ्रास्ट्रक्चर माननीय गृह मंत्री जी के हस्तक्षेप के बाद तैयार हुआ है वो पिछले 83 दिनों में क्यों नहीं किया गया? 83 दिनों तक केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के लोगों की सुरक्षा के लिए क्या किया? असल में मुख्यमंत्री केजरीवाल खुद को अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त करके अपनी विफलताओं के लिए दूसरों को दोषी ठहराना चाहते हैं लेकिन बात जब क्रेडिट की हो तो वह दूसरों के किए गए काम का क्रेडिट भी खुद ले लेते हैं। दिल्ली की जनता भी केजरीवाल सरकार के दोहरे चरित्र को पहचान चुकी है। आशा है कि अधिकारों की बात करने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल अब अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और दोषारोपण की जगह दिल्ली के लोगों को सुरक्षित करने के लिए काम करेंगे।

मायागंज अस्पताल के स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग को मिलेगा जल्द नया आईसीयू

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मातृत्व मृत्यु दर को कम करने में मिलेगी मदद
एक जुलाई से शुरू होने की उम्मीद
भागलपुर, 27 जून
मायागंज अस्पताल के स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग को अब जल्द ही नया आईसीयू मिलने वाला है। 32 बेड वाले इस आईसीयू में वो सब सुविधाएं होंगी जो कि सामान्य आईसीयू में आज की तारीख में उपलब्ध है। इससे गंभीर महिला मरीजों को न केवल समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा बल्कि जिले में मातृत्व मृत्यु दर में कमी लायी जा सकेगी।
स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग में पहले से ही 100 बेड का महिला वार्ड संचालित है। इसके अलावा 12 बेड का पेइंग वार्ड भी चल रहा है। अब 32 बेड का आईसीयू शुरू हो जाने से एक साथ 144 महिला मरीजों का इलाज किया जा सकेगा। महिला वार्ड के बगल में ही नया आईसीयू तैयार हो रहा है। मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरसी मंडल ने कहा कि वार्ड को न केवल पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है बल्कि बिछाने के लिए नये बेड-गद्दे भी आ चुके हैं, जिन्हें आईसीयू में शनिवार को बिछाया गया। आईसीयू में हर बेड पर कॉर्डियक मानिटर व वार्ड में दस वेंटिलेटर लगाया गया है। अभी बेड टू बेड तक ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। दो दिन के अंदर 32 बेड तक पाइप से ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यवस्था को पूरा कर लिया जायेगा। पूरा प्रयास होगा कि एक जुलाई से इस आईसीयू को जनता को समर्पित कर दिया जाये। मायागंज अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. शीला कुमारी बताती हैं कि आईसीयू के शुरू हो जाने के बाद करीब दस प्रतिशत असमय होने वाली मातृत्व मृत्यु को रोका जा सकेगा।
 झारखंड समेत 15 जिलों से आते हैं मरीज: मायागंज अस्पताल में भागलपुर और आस-पास जिलों समेत कोशी और  सीमांचल के जिलों से भी मरीज यहां पर आते हैं। साथ ही झारखंड के  गोड्डा, साहेबगंज से भी बड़ी संख्या में भी मरीज यहां इलाज कराने के लिए आते हैं। पास के किसी जिले में इतनी सुविधाओं वाला सरकारी या निजी अस्पताल नहीं है इस वजह से भी यहां पर इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की भीड़ बढ़ती है. इस वजह से यहां पर अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था को दुरस्त रखना पड़ता है। ताकि मरीजों को उत्तम सुविधाएं मिले और वे स्वस्थ हों।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है मायागंज अस्पताल: यहां पर मरीजों की भीड़ बढ़ने का एक यह भी कारण है कि यहां जांच और इलाज की अत्याधुनिक सुविधाएं  उपलब्ध हैं। कई आधुनिक फीचर के साथ उपकरण लगाए गए हैं। अस्पताल लेटेस्ट उपकरणों से लैस है। यहां पर लगभग हर तरह की जांच मरीजों को कम कीमत पर उपलब्ध हो जाती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ के जरिए तथा विभिन्न प्रकार के उपकरणों की सहायता से रोगियों का  इलाज किया जाता है। इस अस्पताल में मरीज को बचान के लिए हर संभव साजो सामान उपलब्ध है जिससे मरीजों को काफी लाभ हो रहा हैं। वहीं अस्पताल को कीटाणुरहित के लिए हर तरह की तैयारी की गई है जिससे मरीजों को कोई असुविधा नहीं होती है। मायागंज अस्पताल जैसी इतनी सुविधाओं वाला आस-पास अस्पताल नहीं है।

संक्रमण की रोकथाम संबंधी सावधानियों को नज़रअंदाज़ करना घातक

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स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गाइलाइंस जारी कर की अपील
  15 वचनों का पालन कर कोरोना संक्रमण की करें रोकथाम
जमुई , 26 जून: कोरोना संक्रमण को लेकर  बहुत एहतियात बरते जाने की जरूरत है. सावधानी से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन कर इसकी रोकथाम की जा सकती है. कोविड 19 संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है. कई जगहों में लोग नियमों की अनदेखी कर रहें हैं जो पूरे समुदाय के लिए खतरा है.  इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, ने कोरोना से बचाव के लिए गाइडलाइन की है, जिसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 15 विशेष वचनों या प्रतिज्ञाओं के पालन करने की अपील की गयी है.
सतर्कता कोरोना से बचाव का बेहतर उपाय:
कोरोना के बढ़ते प्रसार के मद्देनजर गाइडलाइन में कोरोना संक्रमण से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है. गाइडलाइन में बिना गले लगे एक दूसरे का अभिवादन करने, शारीरिक दूरी रखने, मास्क लगाने व आंख, नाक और मुंह को गंदे हाथों से नहीं छूने के वचनों के पालन के लिए कहा गया है. इसके अलावा श्वसन संबंधी सफाई व सुरक्षा का पालन करने, नियमित हाथों को धोने, तंबाकू का इस्तेमाल नहीं करने एवं अलग-अलग सतहों को नियमित कीटाणुरहित करने की सलाह दी गयी है.  महामारी के दौरान कोरोना संक्रमितों से भेदभाव एवं कोरोना को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह फ़ैलाने की बातें सामने आयी हैं, इसे ध्यान में रखते हुए गाइडलाइन में कोरोना संक्रमितों से भेदभाव नहीं करने एवं कोविड 19 संक्रमण से जुड़े नकारात्मक व बिना पुष्टि की गयी बातों को सोशल मीडिया के माध्यम से नहीं भेजने की अपील की गयी है. साथ ही कोविड 19 के बारे में विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेने, किसी मदद या जानकारी के लिए टॉल फ्री नंबर 1057 पर फोन करने व तनाव या दबाव आदि को दूर करने के लिए आवश्यक मदद प्राप्त करने जैसी प्रतिज्ञा लेकर उनके पालन करने के लिए कहा गया है.
मास्क लगाने व 2 गज की शारीरिक दूरी रखने पर बल:
गाइडलाइन में घर से बाहर भीड़ वाले स्थानों जैसे डेयरी, अस्पताल या दवाई दूकान या ऐसी ही अन्य जगहों पर कम से कम 6 फीट या 2 गज की शारीरिक दूरी रखने के लिए कहा गया है. कार्यस्थलों पर भी इन नियमों के पालन करने के लिए कहा गया है.  साथ ही मास्क के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है.  मास्क संक्रमण की संभावना या श्वसन संबंधी रोगों की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है. मास्क को पहनने के नियमों की भी चर्चा की गयी है.
सावधानी से करें मास्क का  इस्तेमाल:
गाइडलाइन में मास्क इस्तेमाल को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही गयी है. यह बताया गया है कि मास्क को पहनने के लिए नाक व मुंह पूरी तरह ढंके हों. मास्क और चेहरे के बीच गैप नहीं हो यानी मास्क ढ़ीला नहीं होना चाहिए. मास्क की अगले हिस्से को गंदे हाथों से नहीं छूंएं. मास्क को हटाने में इस प्रकार सावधानी रखें कि वह गंदा नहीं हो. साथ ही प्रत्येक 8 घंटे के बाद मास्क को बदल लें. पुन: इस्तेमाल किये जाने वाले कपड़े के मास्क का इस्तेमाल करें. ऐसे मास्क को अच्छी तरह धो दें. यदि सिंगल यूज वाले सर्जिकल मास्क इस्तेमाल करते हैं तो इसे डस्टबिन में डाल दें. इसका दोबारा इस्तेमाल नहीं करें. मास्क हटाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें. मास्क लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें या अल्कोहल युक्त सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
इन जगहों पर मास्क जरूर लगाएं:
• जब आप यात्रा कर रहे हों या किसी सार्वजनिक स्थल पर जा रहे हों.
• जब आप किसी ऑफिस के कमरे में अन्य व्यक्ति के साथ बैठे हों.
• यदि सर्दी, जुकाम हो तो बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगायें
इन बातों का रखें खास ध्यान:
• छींकते या खांसने समय रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें.
• बहुत अधिक इस्तेमाल होने वाले सतहों जैसे दरवाजे का हैंडल या ऐसी अन्य जगहों की नियमित सफाई जरूरी है.
• खुले में या सार्वजनिक जगहों पर जहां तहां नहीं थूंके. ऐसा करना दंडनीय अपराध भी है.
• बिना किसी उद्देश्य या औचित्य के यात्रा करने से बचें. बहुत जरूरी हो तभी यात्रा करें.
कोविड 19 संक्रमित या उसके परिवार वालों के साथ भेदभाव न कर सहाभूति से पेश आयें.
अपने स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करने के लिए आरोग्य सेतु एप्प का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कोविड 19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110007 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बात कर मनोचिकित्सक से आवश्यक लें

संक्रमित को ध्यान में रखते हुए समझें अपनी ज़िम्मेदारी

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मास्क और सोशल डिस्टेन्सिंग को बनाएँ जरूरत
       यही समय है अपने और समाज को इस बीमारी से बचाने का
लखीसराय : 26 जून / जिले में हर दिन कोविड-19 संक्रमित की संख्या में ईजाफ़ा हो रहा है।  इसलिए जरूरी है कि हम इस माहौल में अपने आप को सुरक्षित रखें, साथ ही हम कोविड-19 से सुरक्षा के हर मापदंडों को अपनाकर उसे अपने दिनचर्या के रूप में ढाल लें। तभी इस लड़ाई में  हम अपने साथ –साथ अपने परिवार और अपने समाज को जीत दिला सकते हैं।  इस बीमारी को भगाने का सबसे कारगर रास्ता सामाजिक दूरी है एवं मास्क का उपयोग बल्कि यूँ कहे कि बाजार मे या फिर किसी चौक – चौराहे पर कम निकले, और यदि जरूरत पड़ने पर निकले भी तो 2 फीट की दूरी अपने से बना कर रहे और मास्क का हमेशा इस्तेमाल करें। यही बात हमे अपने अंदर आत्मसात करने की जरूरत है । जब तक हम इस बात को नहीं समझेंगे तब तक इस बीमारी के चक्रव्यूह को तोड़ नहीं पायेंगे ।
सोशल डिस्टेंसिंग ही है संक्रमण से बचाव रास्ता: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ आत्मानंद राय ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सुरक्षा के आवश्यक उपायों में सोशल डिस्टेंसिंग ही महत्वपूर्ण है।  सोशल डिस्टेंसिंग के साथ घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग किया जाना भी अब अनिवार्य हो गया है।  इसलिए यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि ऐसे समय में जब कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा हो रहा है, भीड़ भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचा जाये।  घर से बाहर जाने के दौरान अपने साथ सेनिटाइजर भी रखें।  साथ ही सुरक्षा के नियमों में बीस सेकेंड से हाथों की नियमित धुलाई आदि भी जरूरी है।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया  जिले  में प्रवासीयों के आगमन से ही संकर्मितों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है इसलिए हमें इस समय सतर्क रहने की अति आवयशक है । क्योंकि कोविड-19 संकर्मण आदमी से आदमी मे फैलने वाली बीमारी है इस कारण इस बीमारी से निजात पाने एवं वाइरल को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिटेन्सिंग एवं मास्क का उपयोग  महत्वपूर्ण कड़ी है । घर –गाँव या शहर हो हर जगह सोशल डिटेन्सिंग का शत – प्रतिशत पालन हो । साथ ही जो लोग बाहर से आ रहे है वो अपनी पहचान न छुपाएँ क्योकि आपकी एक गलती आपके परिवार के साथ पूरे गाँव और मुहल्ले को अनजाने खतरे के चपेट मे ले सकता है ।
कोरोना से ऐसे खुद को सुरक्षित रखें…..
-दिन-भर गर्म पानी का सेवन करें
प्रत्येक दिन लगभग 30 मिनट योग एवं प्राणायाम का अभ्यास करें
-भोजन में हल्दी, जीरा एवं धनिया का प्रयोग अवश्य करें
-सुबह में एक चम्मच च्यवनप्राश जरुर लें
-हर्बल टी का इस्तेमाल करें या तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सूखी अदरख एवं मुन्नका का काढ़ा बनाकर दिन में एक से दो बार लें
-150 मिलीग्राम गर्म दूध में आधी चम्मच हल्दी मिलाकर एक से दो बार सेवन करें

15 वचनों का पालन कर कोरोना संक्रमण की करें रोकथाम

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• स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने गाइलाइंस जारी कर की अपील
• संक्रमण की रोकथाम संबंधी सावधानियों को नज़रअंदाज़ करना घातक
 भागलपुर, 26 जून: कोरोना संक्रमण को लेकर  बहुत एहतियात बरते जाने की जरूरत है. सावधानी से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन कर इसकी रोकथाम की जा सकती है. कोविड 19 संक्रमण के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है. कई जगहों में लोग नियमों की अनदेखी कर रहें हैं जो पूरे समुदाय के लिए खतरा है.  इसको लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, ने कोरोना से बचाव के लिए गाइडलाइन की है, जिसमें कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 15 विशेष वचनों या प्रतिज्ञाओं के पालन करने की अपील की गयी है.
सतर्कता कोरोना से बचाव का बेहतर उपाय:
कोरोना के बढ़ते प्रसार के मद्देनजर गाइडलाइन में कोरोना संक्रमण से बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है. गाइडलाइन में बिना गले लगे एक दूसरे का अभिवादन करने, शारीरिक दूरी रखने, मास्क लगाने व आंख, नाक और मुंह को गंदे हाथों से नहीं छूने के वचनों के पालन के लिए कहा गया है. इसके अलावा श्वसन संबंधी सफाई व सुरक्षा का पालन करने, नियमित हाथों को धोने, तंबाकू का इस्तेमाल नहीं करने एवं अलग-अलग सतहों को नियमित कीटाणुरहित करने की सलाह दी गयी है.  महामारी के दौरान कोरोना संक्रमितों से भेदभाव एवं कोरोना को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह फ़ैलाने की बातें सामने आयी हैं, इसे ध्यान में रखते हुए गाइडलाइन में कोरोना संक्रमितों से भेदभाव नहीं करने एवं कोविड 19 संक्रमण से जुड़े नकारात्मक व बिना पुष्टि की गयी बातों को सोशल मीडिया के माध्यम से नहीं भेजने की अपील की गयी है. साथ ही कोविड 19 के बारे में विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेने, किसी मदद या जानकारी के लिए टॉल फ्री नंबर 1057 पर फोन करने व तनाव या दबाव आदि को दूर करने के लिए आवश्यक मदद प्राप्त करने जैसी प्रतिज्ञा लेकर उनके पालन करने के लिए कहा गया है.
मास्क लगाने व 2 गज की शारीरिक दूरी रखने पर बल:
गाइडलाइन में घर से बाहर भीड़ वाले स्थानों जैसे डेयरी, अस्पताल या दवाई दूकान या ऐसी ही अन्य जगहों पर कम से कम 6 फीट या 2 गज की शारीरिक दूरी रखने के लिए कहा गया है. कार्यस्थलों पर भी इन नियमों के पालन करने के लिए कहा गया है.  साथ ही मास्क के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया गया है.  मास्क संक्रमण की संभावना या श्वसन संबंधी रोगों की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है. मास्क को पहनने के नियमों की भी चर्चा की गयी है.
सावधानी से करें मास्क का  इस्तेमाल:
गाइडलाइन में मास्क इस्तेमाल को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही गयी है. यह बताया गया है कि मास्क को पहनने के लिए नाक व मुंह पूरी तरह ढंके हों. मास्क और चेहरे के बीच गैप नहीं हो यानी मास्क ढ़ीला नहीं होना चाहिए. मास्क की अगले हिस्से को गंदे हाथों से नहीं छूंएं. मास्क को हटाने में इस प्रकार सावधानी रखें कि वह गंदा नहीं हो. साथ ही प्रत्येक 8 घंटे के बाद मास्क को बदल लें. पुन: इस्तेमाल किये जाने वाले कपड़े के मास्क का इस्तेमाल करें. ऐसे मास्क को अच्छी तरह धो दें. यदि सिंगल यूज वाले सर्जिकल मास्क इस्तेमाल करते हैं तो इसे डस्टबिन में डाल दें. इसका दोबारा इस्तेमाल नहीं करें. मास्क हटाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें. मास्क लगाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें या अल्कोहल युक्त सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
इन जगहों पर मास्क जरूर लगाएं:
• जब आप यात्रा कर रहे हों या किसी सार्वजनिक स्थल पर जा रहे हों.
• जब आप किसी ऑफिस के कमरे में अन्य व्यक्ति के साथ बैठे हों.
• यदि सर्दी, जुकाम हो तो बाहर निकलने से पहले मास्क जरूर लगायें
इन बातों का रखें खास ध्यान:
• छींकते या खांसने समय रूमाल या टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें.
• बहुत अधिक इस्तेमाल होने वाले सतहों जैसे दरवाजे का हैंडल या ऐसी अन्य जगहों की नियमित सफाई जरूरी है.
• खुले में या सार्वजनिक जगहों पर जहां तहां नहीं थूंके. ऐसा करना दंडनीय अपराध भी है.
• बिना किसी उद्देश्य या औचित्य के यात्रा करने से बचें. बहुत जरूरी हो तभी यात्रा करें.
कोविड 19 संक्रमित या उसके परिवार वालों के साथ भेदभाव न कर सहाभूति से पेश आयें.
अपने स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग करने के लिए आरोग्य सेतु एप्प का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कोविड 19 को लेकर होने वाली चिंताएं या मानसिक दबाव के लिए 08046110075 फ्री हेल्पलाइन नंबर पर बात कर मनोचिकित्सक से आवश्यक लें

टीके लगने से बच्चों की बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता

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बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाता है सम्पूर्ण टीकाकरण
हर बुधवार और शुक्रवार को  आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है टीकाकरण
बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार चला रही है टीकाकरण
बांका, 26 जून
टीकाकरण बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए  बहुत  आवश्यक है. यह बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है. शिशु मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से अनेक ऐसी बीमारियाँ हैं जिनको नियमित टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है. लेकिन इन सभी टीकों का सही समय पर दिया जाना भी महत्वपूर्ण है ताकि बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सके. टीके के महत्व को बताते हुए कटोरिया रेफरल अस्पताल के प्रभारी डॉ विनोद कुमार का कहना है कि टीके से बच्चों के प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. हर सप्ताह के बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए जाते हैं. टीके का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है. यह बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाता है.  बहुत ही सुरक्षित और प्रभावी तरीके से  डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों द्वारा  सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद ही बच्चों को टीके दिए जाते हैं। उन्होने बताया टीकाकरण ही वह साधन है जिससे हजारों बीमारियों से रक्षा किया जा सकता है. आज टीकाकरण के कारण ही पोलिया जैसे बीमारी का उन्मूलन किया जा सका है.
संक्रमित बीमारियों से करता है बचाव: बच्चों में होने वाले पोलियो, टीबी, खसरा एवं रूबेला , निमोनिया, डायरिया, हैपेटायटीस-बी, गलाघोंटू, काली खांसी, दिमागी बुखार एवं टीटनेस जैसे कई गंभीर रोगों से टीकाकरण बचाव करता है एवं शिशु मृत्यु दर में काफ़ी कमी लाता है.
गलतफहमी से बचने की जरूरत: टीकाकरण का कोई साइड इफेक्ट नहीं है. इस तरह की गलतफहमी से बचने की जरूरत है. आज जो टीके दिलाए जा रहे हैं यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है. किसी भी दवा के साथ इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है. ज्यादातर मामलों में आमतौर पर टीका हल्का होता है. अगर किसी टीके में बुखार आता है तो उसके लिए डॉक्टर सलाह देते हैं.
किसी तरह की एलर्जी हो तो डॉक्टर से साझा करें: सभी बच्चे को टीके लगते हैं कोई दिक्कत नहीं होता है, लेकिन अगर बच्चे को किसी तरह का एलर्जी हो तो मां को चाहिए कि इसके बारे में डॉक्टर को बताएं, ताकि डॉक्टर उस सुविधानुसार उसे टीके लगा सकेंगे.

बिल्डिंग फ्यूचर नेविगेटिंग थ्रू इन्क्लूसिव लीडरशीप पर वेबिनार का आयोजन

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नईदिल्ली-

न्यू देहली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में बिल्डिंग फ्यूचर नेविगेटिंग थ्रू इन्क्लूसिव लीडरशीप पर खास वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें कई कंपनियों ने भाग लिया। खास तौर पर इस वेबिनार में चार देश के बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया और इस विषय पर अपने विचार रखें। इसमें यूनिथिक्स इंटरप्राइजेट प्रोइवेट लिमिटेड के चेयरमैन, श्रीवेदा सतावा प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ, एमवे के अधिकारी, टीसीएस के अधिकारी, फिनो पेमेंट बैंक, इरगो, एसएचएल, इंटरनेशनल और कई केंद्रीय विश्वविद्यालय के वीसी ने भी भाग लिया। इस मौके पर सभी विद्वजन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज एक्सलैट करने की जरूरत है क्योंकि बाजार में प्रतियोगिता है और इस प्रतियोगिता से तभी जीत सकते हैं जब आप अपने को तैयार रखे। इसके लिए युवाओं को आज वैश्विक स्तर पर तैयार रहना होगा। आज देश में कई तरह के समस्याएं भी है जिससे भी ल़ड़ते हुए आगे बढ़ना है और यह काम अच्छे लीडरशीप ही कर सकता है।