स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, ने शवों के निस्तारण के लिए दिशा निर्देश
कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र में रखने की कवायद शुरू
कुपोषित बच्चों की व्यापकता दर को 4 प्रतिशत लाने का लक्ष्य
लखीसराय, 25 जून: जिला में अब एक बार फिर से कुपोषित बच्चों को पोषण पुर्नवास केंद्र में भरती कराया जा सकेगा. कोरोना संक्रमण के कारण पोषण पुर्नवास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराने का काम बंद था. लेकिन अब स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए कुपोषित बच्चों से जुड़ी सभी सुविधाएं को पुन: बहाल किया जायेगा. इसे लेकर सिविल सर्जन ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आइसीडीएस सहित सभी प्रभारी चिकित्सा प्रभारियों व प्रभारी जिला सामुदायिक उत्प्ररेकों, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरकों व राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम की टीम को आवश्यक निर्देश पत्र के माध्यम से दिये हैं. इन अधिकारियों से पत्र के माध्यम से कहा गया है कि पोषण पुर्नवास केंद्र में बच्चों को भर्ती कराने के लिए अपने स्तर से सभी आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रेरित किया जाये.
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकरी डॉ देवेंद्र चौधरी ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत पांच वर्ष के अतिगंभीर कुपोषित वैसे शिशु जिनमें चिकित्सीय जटिलता पायी जाती है उन शिशुओं के उपचार के लिए पोषण पुर्नवास केंद्र की स्थापना राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालाओं व जिलों में की गयी है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंभीर रूप से कुपोषित बचचों की व्यापकता दर 7 प्रतिशत है जिसे 4 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. पोषण पुर्नवास केंद्र पर भर्ती कुपोषित बच्चे एवं उनके माता पिता को साथ रख कर स्वास्थ्य पोषण स्वच्छता तथा हाथ धोने की विधि के संबंध में प्रशिक्षित किया जाता है.
केंद्र में देखभाल के साथ मिलती है राशि:
पोषण पुर्नवास केंद्र पर रहने के दौरान कुपोषित बच्चों को 70 रुपये व माता को 125 रुपये प्रतिदिन भोजन के लिए दिये जाते हैं. साथ ही उन्हें भत्ता के रूप में 275 रुपये तथा बच्चों को प्रतिदिन पोषण पुर्नवास केंद्र लाने के लिए 100 रुपये आवागमन भत्ता के रूप में दिया जाता है
मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में गंभीर रोगों का हो रहा इलाज
कोविड-19 संक्रमितों के शवों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर दिए गए निर्देश
• राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी ने पत्र जारी कर दिए निर्देश
• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, ने जारी किया था दिशानिर्देश
• शवों से संक्रमण फ़ैलने के ख़तरे के मद्देनजर बरती जा रही है सावधानी
भागलपुर , 25 जून: कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार की चुनौतियों को कम करने एवं संक्रमितों को बेहतर उपचार प्रदान करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है. साथ ही कोविड-19 संक्रमितों की मौत होने पर उनके शवों के सुरक्षित प्रबंधन एवं निस्तारण को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा दिशानिर्देश भी जारी किया गया है. इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के प्रशासी पदाधिकारी खालिद अरशद ने 21 मार्च को ही चिकित्सा महाविद्यालयों के अधीक्षकों , आईजीआईएमएस, एम्स, पटना एवं सभी सीविल सर्जन को पत्र लिखकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा शव प्रबंधन को लेकर जारी दिशानिर्देशों के अनुपालन करने के निर्देश दिए थे.
शव प्रबन्धन में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को सावधानी बरतने की सलाह:
दिशानिर्देश के अनुसार शव प्रबंधन में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को स्टैण्डर्ड इन्फेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल प्रोटोकॉल अनुपालन करने की सलाह दी गयी है. जिसमें उनके द्वारा हाथों की सफाई एवं पर्सनल प्रोटेक्टिव एक़ुइप्मेन्ट( वाटर रेसिस्टेंट एप्रन, ग्लव्स, मास्क एवं आईवियर) इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है. साथ ही शव प्रबंधन में इस्तेमाल हुयी किसी भी प्रकार के एक़ुइप्मेन्ट एवं डिवाइस को डिसइन्फेक्ट करने के भी निर्देश दिए गए हैं.
आईसोलेशन रूम या क्षेत्र से शव निकालने में बरतें सावधानी:
कोरोना संक्रमित की मृत्यु के बाद उन्हें आईसोलेशन रूम या क्षेत्र से निकालने के दौरान एवं बाद में सतर्कता बरतने के विषय में भी विस्तार से सलाह दी गयी है. मरीज के शरीर में लगी ट्यूब व कैथटर को सावधानी पूर्वक हटाया जाना है. शव के किसी हिस्से में हुए जख्म या खून के रिसाव को ढंकना है. उस हिस्से को एक प्रतिशत हाइपोक्लोराइट की मदद से कीटाणुरहित व ड्रेसिंग कर शव को प्लास्टिक बैग में रखा जाना है और ध्यान रखना है शरीर से तरल पदार्थ का रिसाव बाहर न हो. संक्रमित के इलाज के दौरान इस्तेमाल सभी चीजों को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुसार ही नष्ट करना है.
सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कर परिजन ले सकते हैं शव:
दिशानिर्देश में कोविड-19 संक्रमित मृतक के शव को उनके परिजनों के हवाले करने के निर्देश दिए गए हैं. शव को विशेष रूप से तैयार किये गये प्लास्टिक बैग में रख कर ही शव को उनके परिजन को देने के निर्देश दिए गए हैं. यह बताया गया है कि परिजन कोविड-19 के सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ शव का दर्शन कर सकते हैं. लेकिन शव को नहलाना चूमना व गले लगाना आदि पर रोक है. शव पर किसी प्रकार का लेप नहीं लगाना है. शवदाह गृह या कब्रिस्तान में भी अंतिम संस्कार कार्य में लगे लोगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह हाथ धोने , मास्क व दस्तानों का इस्तेमाल करने एवं परस्पर दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही शव के अंतिम संस्कार में अधिक भीड़-भाड़ नहीं करने की बात भी कही गयी है. इसके लिए परिजनों व अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यों को संपादित करने वालों को ही मृतक की अंतिम यात्रा में शामिल होने की सलाह दी गयी है. शव के अंतिम संस्कार के बाद इस कार्य में लगे परिजनों एवं लोगों को साबुन एवं पानी से हाथ धोने, मास्क का इस्तेमाल करने, परस्पर दूरी बनाए रखने एवं व्यक्तिगत साफ़-सफाई के नियमों का पूरी तरह पालन करने अपील भी की गयी है.
परिजन कर सकते हैं जरूरी विधि-विधान:
गाइडलाइन में कहा गया है कि अंतिम संस्कार के दौरान वैसी गतिविधियां जिनमें शव के संपर्क में आने की जरूरत नहीं हो, जैसे पवित्र जल का छिड़काव, मंत्रोच्चार या ऐसे अन्य कार्य किए जा सकते हैं. शव को जलाने के बाद उसके राख से किसी प्रकार के संक्रमण का खतरा नहीं है. इसलिए इसे जमा किया जा सकता है
लॉकडाउन 4.0: दिल्ली में कल से नयी गाइडलाइंस होगी जारी, जाने क्या खुलेगा क्या बंद रहेगा
Lockdown 4.0 guidlines in Delhi : केंद्र सरकार ने #Lockdown 4.0 के तहत राज्य सरकार को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन का विवरण तैयार करने का अधिकार दिया है। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कल दिल्लीवालों के लिए गाइडलाइंस जारी करेंगे।
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा हमने हेल्थकेयर सिस्टम को तैयार करने के लिए लॉकडाउन का उपयोग किया है. अब प्रतिबंधों को कुछ हद तक कम कर करने का समय है। सीएम ने कहा अर्थव्यवस्था खुलने के बाद Covid -19 के मामलों में वृद्धि होगी तो हम इससे निपट लेंगे।

Delhi govt will prepare the detailed plan for Delhi based on the Centre’s guidelines and announce it tomorrow https://t.co/eBfrLKUpP9
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) May 17, 2020
केंद्र सरकार ने #coronavirus के संक्रमण को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन को 31 मई तक और बढ़ा दिया है। गृह मंत्रालय ने कहा है कि Covid -19 मरीजों की संख्या के हिसाब से सरकार की ओर से तय रेड, ऑरेंज, ग्रीन जोन की लिस्ट अब राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश तैयार करेंगे। इन्हें अब इस बाबत फैसला लेने का अधिकार होगा। गृह मंत्रालय के इन दिशानिर्देशों के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उनकी सरकार दिल्लीवासियों के लिए सोमवार को गाइडलाइंस जारी करेगी।
Ministry of Home Affairs (MHA) issues guidelines on measures to be taken by Ministries/Departments of Government of India, State Governments/UT Governments & State/UT authorities for containment of COVID19. #LockDown4 will remain in effect till 31st May 2020. pic.twitter.com/10WnwnWfte
— ANI (@ANI) May 17, 2020
- कोरोना हॉटस्पॉट एरिया में सख्ती जारी रहेगी
- मेट्रो पर पाबंदी रहेगी, स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे व स्कूल और जिम को भी खोलने की इजाजत नहीं दी गई है.
गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश
गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के मुताबिक चिकित्सा में सहयोग करने वाले होटल के अलावा सभी होटल और रेस्तरां बंद रहेंगे. हालांकि होम डिलिवरी की सुविधा दी जा सकती है. 31 मई तक देशभर में जिम, सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, स्विमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थियटर, बार और सभागार बंद रहेंगे. साथ ही लॉकडाउन 4.0 में भी मेट्रो और रेल सेवा बंद रहेगी. सामान्य हवाई सेवा भी नहीं संचालित होगी. स्कूल, कॉलेज और कोचिंग भी बंद रहेंगी.
क्या-क्या खुलेगा?
गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश के मुताबिक लॉकडाउन चार में मॉल और कॉम्पलेक्स को खोलने की इजाजत नहीं दी गई है, लेकिन दुकानों को खोलने पर राज्य सरकारें अपने स्तर पर फैसला कर सकती हैं. इंटरस्टेट बस सेवा खुलेंगी, पान गुटका बिकेगा, शर्तों के साथ मिठाई की दुकान खुलेंगी, शादी समारोह में 50 लोगों के शामिल होने की की इजाजत दी गई है. स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स को बिना दर्शकों के खोलने की अनुमति दी गई है.
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम बिना दर्शकों के साथ खोले जाएंगे. रेस्त्रा-मिठाई की दुकानें खुलेंगी, लेकिन सिर्फ होम डिलिवरी की अनुमति होगी. स्टैंड अलोन दुकान खोलने की भी अनुमति दी गई है. दुकान पर 5 लोग से ज्यादा काम नहीं कर सकेंगे.
बसों की आवाजाही पर राज्य करेंगे फैसला
कोरोना लॉकडाउन 4.0 के दौरान राज्यों की परस्पर सहमति से अंतरराज्यीय यात्री वाहनों, बस सेवाओं की आवाजाही को अनुमति दी जा सकती है. इंटर स्टेट बस सर्विस राज्य सरकारें स्थिति के मुताबिक शुरू कर सकती हैं. यानी राज्य आपस में बातचीत करके इस पर फैसला कर सकते हैं. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने यहां कोरोना वायरस संक्रमण के हालात को देखते हुए रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन बनाने का अधिकार दे दिया गया है.
साथ ही स्कूल-कॉलेज बंद भी बंद रहेंगे. नई गाइडलाइन के मुताबिक, रेड, ऑरेंज, ग्रीन जोन अब राज्य सरकारें तय करेंगी. सभी तरह के पूजा स्थल बंद रहेंगे और ईद भी इस बार लॉकडाउन में मनाई जाएगी.
कोरोना काल में सेवा करने वालों को सम्मानित करेगी पत्रकारों संगठन एनयूजेआई
कोरोना काल के नायकों का सम्मान करेगी एनयूजे-आई, गठित की चयन समिति’
जाने-माने पत्रकार आलोक मेहता की अध्यक्षता में गठित समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी के के मित्तल, हॉकी खिलाड़ी अशोक ध्यानचंद, डा. आरएस टोंक, उप्र सरकार के अधिकारी रहे टीएस राणा, वकील अश्विनी दुबे और प्रेस काउंसिल सदस्य आनंद राणा शामिल

मई 16, 2020 नई दिल्ली। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया ने कोरोना काल में उल्लेखनीय कार्य करने वाली संस्थाओं और व्यक्तिओं को कोरोना काल के नायक सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की है. कोरोना महामारी के बीच फ्रंटलाइन वारियर्स बनकर कार्य कर रहे प्रोफेशनलस, आम लोगों और संस्थाओं का इस सम्मान हेतु चयन करने के लिए एक सात सदस्यीय चयन समिति का गठन किया है। समिति के अध्यक्ष जाने-माने पत्रकार और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डा.आलोक मेहता होंगे। समिति में असम के पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर आईएएस श्री कमलकांति मित्तल, राममनोहर लोहिया अस्पताल के पूर्व मुख्य मेडिकल अधीक्षक और स्वयंसेवी संस्था चैपाल के अध्यक्ष डा. आर एस टोंक, भारत के पूर्व हॉकी ओलंपियन और वर्ल्ड कप चैंपियन टीम के खिलाड़ी श्री अशोक ध्यानचंद, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सूचना निदेशक श्री टी एस राणा, सुप्रीम कोर्ट के वकील और पर्यावरणविद श्री अश्विनी दुबे और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एवं पत्रकार श्री आनंद राणा शामिल हैं।
जंतर मंतर रोड स्थित एनयूजे-आई मुख्यालय में शनिवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेस में एनयूजे-आई के अध्यक्ष रास बिहारी, दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (डीजेए) के अध्यक्ष राकेश थपलियाल और महासचिव केपी मलिक ने बताया कि कोरोना महामारी के प्रकोप के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्तियों ने गरीबों को भोजन, राशन, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई। राजनीतिक दलों के नेताओं, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और पत्रकारों ने इस संकटकाल में जरूरतमंद लोगों की मदद में विशेष भूमिका निभाई है। कुछ लोग संक्रमित भी हुए। दुर्भाग्य से कोरोना से संक्रमित होने के कारण कई कोरोना योद्धाओं की मौत हो गई। पूरे देश में एनयूजे और सम्बंधित राज्य इकाइयों की तरफ से कोरोना काल के नायकों का सम्मान किया जाएगा। प्रेस कांफ्रेस का प्रसारण वेबनार के माध्यम से भी किया गया।
कोरोना नायकों का सम्मान, चयन समिति की घोषणा, आलोक मेहता अध्यक्ष। @alokmehtaeditor @journoras @anand_rana @arvindh94 #NUJIndia pic.twitter.com/6wUGxNSLSu
— NUJ(India) (@NUJIndia) May 16, 2020
प्रेस कांफ्रेस को एनयूजे-आई महासचिव श्री प्रसन्ना मोहंती और अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। एनयूज-आई के कोषाध्यक्ष डा अरविन्द सिंह उत्तर प्रदेश, उपाध्यक्ष प्रदीप तिवारी मध्य प्रदेश, एमडीवीएसआर पुन्नम राजू आंध्र प्रदेश, सैयद जुनैद जम्मू-कश्मीर, भूपेन गोस्वामी असम, रामचंद्र कन्नोजिया उत्तराखंड, सचिव कमलकांत उपमन्यु उत्तर प्रदेश, पंकज सोनी राजस्थान, कथा करी कंधास्वामी तमिलनाडु और प्रशांत चक्रवती त्रिपुरा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जंतर मंतर कार्यालय में डीजेए के पदाधिकारी मौजूद थे।

श्री राकेश थपलियाल और श्री मलिक ने बताया कि एनयूजे अध्यक्ष रास बिहारी ने चयन समिति के सदस्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। चयन समिति के अध्यक्ष डा.आलोक मेहता नवभारत टाइम्स, दैनिक हिन्दुस्तान सहित कई समाचारपत्रों में संपादक रहे। नईदुनिया, आउलटलुक और गर्वनेंस नाऊ में मुख्य संपादक रहे। पदमश्री से सम्मानित श्री मेहता ने 50 से ज्यादा किताबे लिखी हैं। 1983 बैच के आईएएस अधिकारी श्री मित्तल ने असम सरकार के महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभाला और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। डा. आर एस टोंक चिकित्सा जगत की जानी-मानी हस्ती हैं। स्वास्थ्य जगत में काम करने वाली चैपाल संस्था के माध्यम से देशभर में दो हजार से ज्यादा स्वास्थ्य शिविरों
का आयोजन किया। पर्यावरण, नशाबंदी, महिला सशक्तीकरण और गांवों में स्वच्छता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी दुबे जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता और पर्यावरणविद हैं। प्रमुख टीवी चैनलों पर कानूनी और अन्य मुद्दों पर हिस्सा लेतें हैं। टी एस राणा ने उत्तर प्रदेश सूचना केंद्र प्रभारी रहते हुए कई मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया। प्रेस कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के सदस्य आनंद राणा 20 साल से ज्यादा समय से पत्रकारिता में हैं। हरिभूमि दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं और गांव, किसान से लेकर राजनैतिक मुद्दों पर प्रमुख रूप लिखते रहने के साथ ही पत्रकारों की समस्याओं पर बेबाकी से बोलते रहे हैं.
श्री रास बिहारी ने बताया कि चयन समिति को ईमेल- nujindia@gmail.com पर कोरोना के बीच जनसेवा और मदद में जुटी संस्थाओं और व्यक्तियों की जानकारी भेजी जा सकती है. जानकारी 30 मई, 2020 तक भेज सकते हैं। जानकारी भेजने के लिए संस्था-व्यक्ति का नाम, पूरा पता, फोटो, मोबाइल नंबर और कार्य का विवरण फोटो सहित भेजना होगा। एनयूजे-आई के पदाधिकारियों और संबंधित राज्य इकाइयों के माध्यम से भी जानकारी भेज सकती है। इसकी पूरी जानकारी एनयूजे-आई की वेबसाइट www.nujindia.com पर उपलब्ध हैं। प्राप्त जानकारी के आधार पर सम्मान हेतु व्यक्तियों स्थाओं का चयन किया जाएगा
एनयूजे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य- प्रमोद गोस्वामी,शिवमनोहर पांडे, विवेक जैन, अनिल द्विवेदी, मो. इरफान,दीपक सिंह,संतोष भगवन, भरत सिंह सभी उत्तर प्रदेश, तपस धर, प्रसन्ता दास, कल्याण पंडित, सोमेश्वर बोराल, अशोक सेनगुप्ता सभी पश्चिम बंगाल, प्रकाश पानिग्रही,लोकनाथ सिंह, आचार्य विश्वरंजन, अक्षय साहू सभी ओडिशा, जोगिन्द्र आर्य, श्रीराम जोशी, रणवीर सिंह, सीमा किरण, उषा पाहवा सभी दिल्ली, दालिम फुकन, सुदीप शर्मा, शिवा कुमार, स्वर्ण दिवेकर, संजना गांधी शिवाजी राव, सभी महाराष्ट्र, इंद्राणी सरकार तेलंगाना और खिलावन चंद्राकर मध्य प्रदेश के माध्यम से भी जानकारी भेज सकते हैं।
एनयूजेआई से संबंधित राज्य इकाइयों के अध्यक्ष और महासचिव दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन- राकेश थपलियाल अध्यक्ष,के पी मलिक महासचिव, उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन- रतन दीक्षित अध्यक्ष, अशोक अग्निहोत्री महासचिव, एनयूजे उत्तराखंड- ब्रह्म दत्त शर्मा अध्यक्ष, आर सी कन्नोजिया महासचिव, हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स- रानेश राणा अध्यक्ष, किशोर ठाकुर महासचिव, हरियाणा मीडिया एसोसिएशन- बलराम शर्मा संयोजक, विपुल कुमार सहसंयोजक, जम्मू कश्मीर यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स- सैयद जुनेद अध्यक्ष, सयैद यूसुफ बुखारी महासचिव, एनयूजे महाराष्ट्र- शीतल करकेदकर अध्यक्ष, सीमा बोइर महासचिव, छतीसगढ़ यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स- मनोज व्यास अध्यक्ष, प्रभुल्ल ठाकुर महासचिव, जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑउ राजस्थान- राकेश शर्मा अध्यक्ष, संजय सैनी महासचिव, जर्नलिस्ट्स यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश- खिलावन चंद्राकर अध्यक्ष, ओडिसा यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स- प्रसन्ना मोहंती अध्यक्ष, अशोक नंदा महासचिव, एनयूजे तमिलनाडु-एस मुरूगनंदम अध्यक्ष, एम कृष्णावेनी महासचिव, झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स- रजत गुप्ता अध्यक्ष महासचिव, शिवकुमार अग्रवाल महासचिव, वेस्ट बंगाल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स- प्रज्ञानंद चैधरी अध्यक्ष, दीपक राय महासचिव, जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ असम-धीरेन्द्र नाथ चक्रवर्ती अध्यक्ष, दालिम फूकन, महासचिव, त्रिपुरा वर्किंग जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन- प्रशांत चक्रवती महासचिव, एनयूजे बिहार- संयोजक रंजीत तिवारी, जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश- खिलावन चन्द्राकर अध्यक्ष, जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ कर्नाटक- प्रकाश महाजन शैटटार, गुजरात जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन- भवेश आचार्य संयोजक, तेलांगाना मीडिया जर्नलिस्ट्स यूनियन – ए सुर्यप्रकाश रेड्डी को भी संबंधित राज्य में जानकारी भेजी जा सकती है।
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आई) ने किया मद्रास हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत
वरिष्ठ पत्रकार आनंद राणा प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया के सदस्य नियुक्त
भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 4,213 मामले
भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 4,213 मामले सामने आने के साथ ही सरकार ने सोमवार को कहा कि कुछ खास जगहों पर अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में मामले देखे गए हैं और नियंत्रण प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, ताकि देश सामुदायिक प्रसार के चरण में न पहुंचे।

भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। हर रोज पॉजिटिव मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। इस बारे में एक स्वास्थ्य मंत्रालय सचिव लव अग्रवाल से एक सवाल किया गया कि क्या भारत में कोरोना वायरस का कम्युनिकेशन ट्रांसमिशन हो गया है। उनका जो जवाब आया वो उसने सबको चौंका दिया। लव अग्रवाल ने कहा कि कुछ स्थानों पर ही कोरोना का संक्रमण ज्यादा देखने को मिल रहा है। हमें इस पर नियंत्रण करना होगा कि वायरस का कम्युनिकेशन ट्रांसमिशन न होने पाए। दरअसल, भारत में अभी कोरोना अपने दूसरे चरण में हैं। अगर ये तीसरे चरण में पहुंच गया तो इसको रोकना बेहद मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि तीसरे चरण में पहुंचने की स्थिति तब आती है जब इसका सामुदायिक प्रसार हो जाए।
भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 4,213 मामले सामने आने के साथ ही सरकार ने सोमवार को कहा कि कुछ खास जगहों पर अपेक्षाकृत बड़ी संख्या में मामले देखे गए हैं और नियंत्रण प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, ताकि देश सामुदायिक प्रसार के चरण में न पहुंचे। यह पूछे जाने पर कि क्या बीमारी का सामुदायिक प्रसार हुआ है, स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘यहां (देश में)’ कुछ क्षेत्रों के बारे में पता चला है और कुछ मामलों में कुछ खास जगहों पर बड़ी संख्या में मामले भी सामने आए हैं।’
कम्युनिकेशन ट्रांसमिशन
उन्होंने कहा, ‘और इस परिप्रेक्ष्य में, यदि आपको याद हो तो एम्स निदेशक (डॉ. रणदीप गुलेरिया) ने कहा था कि यदि इन्हें उचित रूप से नियंत्रित नहीं किया गया तो प्रसार की दर अधिक हो जाएगी। इसलिए, हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि अब हम नियंत्रण प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करें और सुनिश्चित करें कि हम सामुदायिक प्रसार के चरण में न पहुंचें।’ अग्रवाल ने कहा कि पिछले 24 घंटे में सोमवार सुबह आठ बजे तक कोविड-19 के 4,213 मामले सामने आए हैं और 97 लोगों की मौत हुई है। इसके साथ ही संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 67,152 और मृतकों की संख्या 2,206 हो गई है।
कैसे होगी आवाजाही
यह पूछे जाने पर कि मंगलवार से शुरू हो रहीं वातानुकूलित ट्रेनों में क्या केंद्रीकृत वातानुकूलन का इस्तेमाल किया जा सकता है और क्या इससे विषाणु के प्रसार का खतरा नहीं होगा, अग्रवाल ने कहा, ‘केंद्रीकृत वातानुकूलन का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल करते समय हवा के प्रवाह पर नजर रखनी होगी।’ उन्होंने कहा, ‘यह ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा कि यदि हवा में मौजूद कणों से संबंधित कोई समस्या उत्पन्न होती है तो सावधानी के तौर पर हम केंद्रीकृत वातानुकूलन के इस्तेमाल के बिना यात्रा कर सकते हैं।’ कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में बीमारी के अत्यंत कम स्तर वाले रोगियों को अस्पताल से छुट्टी दिए जाने से संबंधित संशोधित नीति के बारे में अग्रवाल ने कहा कि संशोधित नीति कहती है कि ऐसे रोगियों को छुट्टी मिलने के बाद सात दिन तक घर में पृथक-वास में रहना होगा।
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर वैज्ञानिकों की सराहना की
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज देश के उन सभी वैज्ञानिकों की सराहना की जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग दूसरों के जीवन में सकारात्मक अंतर लाने के लिए कर रहे हैं।
श्री मोदी राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर ट्वीट कर रहे थे।
On National Technology Day, our nation salutes all those who are leveraging technology to bring a positive difference in the lives of others. We remember the exceptional achievement of our scientists on this day in 1998. It was a landmark moment in India’s history.
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2020
The tests in Pokhran in 1998 also showed the difference a strong political leadership can make.
Here is what I had said about Pokhran, India’s scientists and Atal Ji’s remarkable leadership during one of the #MannKiBaat programmes. pic.twitter.com/UuJR1tLtrL
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2020
उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर, हमारा देश उन सभी को सलाम करता है जो दूसरों के जीवन में सकारात्मक अंतर लाने के लिए प्रौद्योगिकी का फायदा उठा रहे हैं। हम 1998 में इस दिन अपने वैज्ञानिकों की असाधारण उपलब्धि को याद करते हैं। यह भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था।”
11 मई 1998 को पोखरण परीक्षण का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि परमाणु परीक्षण तब एक मजबूत राजनीतिक नेतृत्व के कारण ही संभव थे। प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात के एक कार्यक्रम के दौरान परीक्षणों पर अपने उद्धरण को साझा किया था।
Today, technology is helping many in the efforts to make the world free from COVID-19. I salute all those at the forefront of research and innovation on ways to defeat Coronavirus. May we keep harnessing technology in order to create a healthier and better planet.
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2020
उन्होंने कहा, “1998 में पोखरण में हुए परीक्षणों ने यह साबित किया कि मजबूत राजनीतिक नेतृत्व बड़े बदलाव कर सकता है।यहाँ मैंने ‘#मन की बात’ के एक कार्यक्रम के दौरान भारत के वैज्ञानिकों और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के असाधारण नेतृत्व का उल्लेख किया था।
श्री मोदी ने आगे ट्वीट किया, “आजप्रौद्योगिकीदुनिया को कोविड-19 से मुक्त कराने के प्रयासों में अनेक लोगों की मदद कर रही है। मैं उन सभी को सलाम करता हूं जो कोरोना वायरस को पराजित करने के तरीकों पर अनुसंधान और नवीन अविष्कार करने में सबसे आगे हैं ताकि हम एक स्वस्थ्य और बेहतर ग्रह बना सकें।”
भारत का मटका किंग रतन खत्री का मुंबई में निधन
मटका किंग के नाम से मशहूर खत्री को 1962 में मुंबई में शुरू हुए जुआ के एक प्रकार मटका को बदलने का श्रेय जाता है. इसके बाद मटका देश में भर में सट्टेबाजी का एक बड़ा रैकेट बन गया और कई दशकों तक उस पर मटका किंग कहे जाने वाले रतन खत्री का राज रहा.
मुंबई. भारत में सट्टेबाजी के दिग्गज माने जाने वाले ‘मटका किंग’ (Matka King) के नाम से मशहूर रतन खत्री (Ratan Khatri) का मुंबई में निधन हो गया. वह 88 साल के थे. परिवार के सूत्रों ने जानकारी दी कि वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और उन्होंने मुंबई सेंट्रल (Mumbai Central) स्थित नवजीवन सोसाइटी में अपने घर में अंतिम सांस ली. सिंधी परिवार से आने वाले खत्री बंटवारे के समय अपनी युवावस्था में पाकिस्तान (Pakistan) के कराची (Karachi) से मुंबई आए थे.
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मटका को बदलने का जाता है श्रेय
मटका किंग के नाम से मशहूर खत्री को मटका (1962 में मुंबई में शुरू हुए जुआ के एक प्रकार मटका) को बदलने का श्रेय जाता है. इसके बाद मटका देश में भर में सट्टेबाजी का एक बड़ा रैकेट बन गया और कई दशकों तक उस पर मटका किंग कहे जाने वाले रतन खत्री का राज रहा. हालांकि भारत में किसी भी तरह का जुआ गैरकानूनी है लेकिन इसके बावजूद मुंबई में बड़े पैमाने पर मटका का कारोबार चलता रहा.
मटका में न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज (New York Cotton Exchange) में सूत के खुलने और बंद होने के दामों पर सट्टेबाजी की जाती थी. 1960 के दशक में ये मुंबई के समाज के हर वर्ग के बीच लोकप्रिय था.
खत्री ने शुरुआत में कल्याणजी भगत (Kalyanji Bhagat) के साथ मिलकर काम किया था. खत्री ने भगत के साथ वर्ली मटका (Worli Matka) के मैनेजर के तौर पर काम किया. बाद में इन दोनों के रास्ते अलग हो गए. तब रतन खत्री ने ‘रतन मटका’ की शुरुआत की.
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एक करोड़ तक पहुंचता था कारोबार
मटका जिसमें कि काफी सारी पर्चियां पड़ी होती थीं, उसी से ये सट्टेबाजी होती थी. इसका हर दिन का कारोबार एक करोड़ तक पहुंचता था.
सट्टेबाजी, मटका या लॉटरी नंबर गेम के तौर पर काफी प्रचलित हैं. ये सभी खेल मुंबई में अंग्रेजों के जमाने से खेले जा रहे हैं. ऐसा कहा जाता है कि मटका की लोकप्रियता के चलते उस समय न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज मार्केट खोलने और बंद करने के पैसे लिया करता था. 1960 के दशक में मटका ने मुंबई के युवाओं का ध्यान अपनी ओर खूब खींचा और ये उनके बीच काफी लोकप्रिय भी रहा. पिछले कई दशकों में कई लोगों को मटका की लत लग गई थी. खत्री के जाने के मटका और सट्टा बाजार में हलचल मच गई.
Bois Locker Room: सनसनीखेज खुलासा, लड़की ने खुद बनाया था गैंगरेप का प्लान
देश को हिलाकर रख देने वाले बॉयज लॉकर रूम मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। सोशल मीडिया पर स्नैपचैट के वायरल हुए स्क्रीनशॉट में गैंगरेप की बात लड़का नहीं, बल्कि एक लड़की कर रही थी। वह फर्जी आईडी सिद्धार्थ से दूसरे लड़के से चैटिंग कर रही थी। दक्षिण दिल्ली की यह लड़की नाबालिग है।
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने पहचान के बाद इस लड़की से पूछताछ की है। लड़की का कहना है कि वह जिस लड़के से चैटिंग कर रही थी, उसका चरित्र और गैंगरेप की बात पर उसकी प्रतिक्रिया जानना चाहती थी। वह मजे के लिए ऐसा कर रही थी। इस चैटिंग का बॉयज लॉकर रूम से कोई लेना-देना नहीं है।
साइबर सेल के डीसीपी अन्येश रॉय ने रविवार को आधिकारिक बयान भेजकर कहा था कि बॉयज लॉकर रूम व स्नैपचैट का वायरल स्क्रीनशॉट अलग-अलग हैं। दोनों का कोई लेना-देना नहीं है। स्क्रीनशॉट मार्च महीने का है और बॉयज लॉकर रूम अप्रैल महीने के पहले सप्ताह में बना था। बॉयज लॉकर रूम मामला सोशल मीडिया पर सामने आया तो स्नैपचैट के स्क्रीनशॉट को इससे जोड़ दिया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर कहा जाने लगा था कि बॉयज लॉकर रूम से लड़कियों को गैंगरेप की धमकी दी जा रही है।
‘अमर उजाला’ ने इस बात का शनिवार को ही खुलासा कर दिया था। दिल्ली पुलिस बॉयज लॉकर रूम के ग्रुप एडमिन को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। एक नाबालिग को पाबंद किया गया है। साइबर सेल ने इस मामले में लॉकर रूम के कई और लड़कों की पहचान कर ली है। अब पहचाने गए लॉकर रूम से जुड़े छात्रों की संख्या 24 से ज्यादा हो गई है। सभी से पूछताछ की गई है। इनमें से कुछ नाबालिग हैं। इनमें से ज्यादातर का कहना है कि उन्होंने लॉकर रूम ग्रुप में न तो कोई चैटिंग की और न ही फोटो शेयर की थी। सभी के मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।
#BoisLockerRoom की जांच में पता चला कि लड़की ने सिद्धार्थ नाम के लड़के के नाम से फर्जी ID बनाई, #SexualAssault की बात की, जबकि लड़के ने खुद इस बात की जानकारी बाकी लड़कों और जिस के बारे में बात हुयी उसे दी।लड़की ने शिकायत इसलिये नहीं की क्योंकि फर्जी ID से बात वहीं कर रही थी।👇🏼 pic.twitter.com/13zvYKoh4J
— Jitender Sharma (@capt_ivane) May 10, 2020
लड़की ने खुद बनाया था गैंगरेप का प्लान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्नैपचैट के स्क्रीन शॉट मामले में पता लगा है कि यह लड़की दूसरी लड़कियों के साथ गैंगरेप की बात कर रही थी। लड़की फर्जी आईडी से जिस लड़के के साथ गैंगरेप का प्लान बनाने की चैटिंग कर रही थी, वह लड़का भी नाबालिग है। लड़की के ऐसी बात करने के बाद उस लड़के ने फर्जी आईडी सिद्धार्थ से चैटिंग करना बंद कर दिया था। इस लड़के ने ही इस चैटिंग का स्क्रीनशॉट लेकर दूसरे ग्रुप में शेयर कर दिया था। पुलिस ने फिलहाल इस लड़की और लड़के के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।