पेट्रोलियम ईंधन लगातार पांचवें दिन महंगा

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नई दिल्ली-

पेट्रोलियम ईंधन लगातार पांचवें दिन महंगा हुआ है। नए साल में इनकी कीमतों में यह छठी वृद्धि है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें लगातार पांचवें दिन बढ़ोतरी के साथ सोमवार को फिर 70 रुपये प्रति लीटर के ऊपर पहुंच गईं। इसी तरह डीजल की दर भी 64 रुपये के पार हो गई है। पेट्रोलियम उत्पादों का खुदरा कारोबार करने वाली सरकारी कंपनियों ने लागत बढ़ने के कारण पेट्रोल के भाव में 38 पैसे और डीजल में 49 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की। दिल्ली में पेट्रोल 70.13 रुपये और डीजल 64.18 प्रति लीटर के भाव पर पहुंच गया है। रविवार को पेट्रोल 49 पैसे और डीजल 59 पैसे महंगा हुआ था। नए साल में राजधानी में पेट्रोल एक रुपये 84 पैसे और डीजल दो रुपये दो पैसे बढ़ चुका है। मुंबई में पेट्रोल और डीजल के भाव 75.77 और 67.18 रुपये लीटर पर पहुंच गये हैं।

18 अक्टूबर के बाद पेट्रोलियम कीमतों में गिरावट का एक लम्बा सिलसिला देखा गया था और कुल मिलाकर पेट्रोल 14.54 रुपये तथा डीजल 13.53 रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ था। इस क्रम में पेट्राल और डीजल राजधानी में क्रमश: 68.29 रुपये और 62.16 रुपये प्रति लीटर पर आ गया था। लेकिन इस वर्ष लगातार पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है जिससे आम जनता परेशान है।

दिल्ली एनसीआर देश का उभरता एजुकेशन हब – एकेडमिक लीडर कॉन्कलेव

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नईदिल्ली-

दिल्ली एनसीआर अब एजुकेशन हब के रूप में उभर रहा है यह बात दिल्ली एनसीआर के एकेडमिक लीडर कॉन्कलेव में उबर कर आई। इस एकेडमिक लीडर कॉन्कलेव का आयोजन देश की अग्रणी थिंक टैंक सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च के द्वारा किया गया। इस एकेडमिक मीट की अध्यक्षता प्रो. एपी मित्तल, प्रेसिंडेट सीईजीआर व मेम्बर सेक्रेट्री एआईसीटीई के द्वारा किया गया। इस अवसर प्रो मित्तल ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में बहुत सारे अच्छे टेक्नीकल कॉलेज हैं जो अपने आप को ग्रोलिरीफाई नहीं कर पाए हैं जिनसे छात्रों तक उनकी बात सही ढ़ंग से पहुंच नहीं पा रही है।

शोभित यूनिवर्सिटी के चांसलर कुंवर शेखर विजेंद्र ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में कई ऐसे पोजिटिव प्वाइँट हैं जहां अन्य क्षेत्रों में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली एनसीआर एक सुरक्षित जगह है एवं छात्रों के लिए बहुत उत्तम जगह हैं जहां उन्हें उच्चस्तरीय पढ़ाई के साथ साथ रिसर्च का भी माहौल मिल रहा है। इस मौके पर एएएफटी यूनिवर्सिटी के चासंलर संदीप मारवाह ने कहा कि ऐसे कॉलेजों पर भी नकेल कसने की जरूरत है जो छात्रों को वेबकूफ बना रहे हैं। अरुणाचल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ अश्विनी गौतम ने कहा कि दिल्ली एनसीआर शिक्षा का आकर्षण का केंद्र व एक बेहतरीन सुरक्षित जगह हैं जहां छात्रों को कई तरह की सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध है।

सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एवं रिसर्च द्वारा आयोजित इस कॉन्कलेव में खास तौर पर आए वीसी हिमालय गढ़वाल यूनिवर्सिटी के वाइस चासंलर एनके सिन्हा ने कहा कि सरकार ने भी दिल्ली एनसीआर के क्षेत्रों में कई तरह की सुविधाएं प्रदान की है।

स्पिंगर नेचर के एमडी संजीव गोस्वामी ने कहा कि आज शिक्षा में कई तरह के शोध की जरूरत है जिसकी पूर्ति दिल्ली एनसीआर के कॉलेजों में हो रही है। इसके लिए अब छात्रों को अन्य जगह पर जाने की जरूरत नहीं है। यहीं कारण है कि अब छात्रों का रुझान इस ओर बढ़ा है। अंत में कॉन्कलेव में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में कई ऐसे शोध कार्य हो रहे हैं जिसकी मिसाल दी जा रही है। सीईजीआर यूनिवर्सिटी में कई ऐसे कार्यक्रम किए हैं जिससे छात्रों का रुझान भी अब इस ओर आया है।

जेएनयू नारे बाजी पर केस दर्ज

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नई दिल्ली

बार-बार यह कहा जा रहा था कि अगर कन्हैया दोषी है तो उसके ऊपर चार्ज शीट क्यों नहीं दाखिल हो रही है। आखिर कर चार्जशीट दाखिल हो गया है ऐसा कहा जा रहा है कि उन्होंने देशद्रोही के कई तरह के नारे लगाए थे।

पुलिस द्वारा चार्जशीट में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों का नाम शामिल है। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कन्हैया ने कहा कि तीन साल बाद चार्जशीट फाइल करने के लिए पुलिस का धन्यवाद।

गौरतलब है कि पुलिस ने तीन साल तक चली जांच के बाद कोर्ट में एक ट्रंक में चार्जशीट फाइल की है। 1200 पेज की इस चार्जशीट को पुलिस ने अदालत में पेश किया है। चार्जशीट में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, सैयद उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत 10 लोगों के नाम शामिल है। जांच एजेंसी ने इस केस में पूरी तैयारी के साथ चार्जशीट तैयार की है। इस मामले के गवाहों के बयान सीआरपीसी की ऐसी धारा के तहत दर्ज किए गए हैं कि बयान से पलटने पर उन्हें सजा मिल सकती है। पुलिस ने इसके साथ ही फरेंसिक और फेसबुक डेटा के जरिए भी साक्ष्य जुटाए हैं।

सुनवाई शुरू होने से पहले दिल्ली पुलिस चार्जशीट को एक बक्से में लेकर पटियाला हाई कोर्ट में पहुंची। रिपोर्ट्स के मुताबिक चार्जशीट करीब 1200 पेजों की है, जिसके सपॉर्ट में कुछ दूसरे दस्तावेज भी हैं। कन्हैया और अन्य 9 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने अभी तक की तफ्तीश में पुख्ता सबूत जुटाए हैं। इन्हीं सभी दस्तावेजों को लेकर लोहे के एक बक्से में लेकर पुलिस अदालत पहुंची।

दिगंबर अखाड़े में लगी आग,कुंभ मेला में हंडकंप

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प्रयागराज-

दिगंबर अखाड़े के टेंट में अचानक आग लग गई, जिससे वहां मौजूद साधु-संतों में हड़कंप मच गया। यह कुंभ मेला स्थल सेक्टर-16 में हुआ है। इस दौरान करीब एक दर्जन टेंट आग की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि सिलिंडर में लीकेज की वजह से धमाका हुआ जिसके बाद आग भड़क उठी जो जल्द ही दिगंबर अखाड़े के कई टेंटों तक फैल गई। एक साधु ने बताया कि आग से पूरा पंडाल जलकर खाक हो गया। उन्होंने कहा कि हमारा बहुत नुकसान हुआ है।

दिगंबर अखाड़े में लगी आग पर अब काबू पा लिया गया है। अखाड़े के टेंट में लगी आग को बुझाने के साथ ही इलाके को खाली कराया गया है। आग की वजह से किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि मंगलवार से कुंभ-2019 के आयोजन की शुरुआत हो रही है। इस पर पूरे देश के साथ ही दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं। कुंभ के भव्य आयोजन के लिए यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़े पैमाने पर तैयारियां की हैं। इसके लिए विशेष फंड की भी व्यवस्था है यहां तक कि इस बार के कुंभ के लिए बड़े बजट की व्यवस्था की गई है। देश भर से लाखों साधु संयासी प्रयागराज पहुंच रहे हैं। यहां सभी अखाड़ों के लिए अलग अलग टेंट लगाए गए हैं जिसे विशेष रूप से सजाया गया है।

आस्था के इस सबसे बड़े कुंभ में शामिल होने के लिए लाखों साधु-संन्यासी प्रयागराज पहुंच रहे हैं। संगम तट पर चारों ओर देशभर से आए अलग-अलग अखाड़ों के टेंट सजे हुए हैं।

अनुभवी हाथों में दिल्ली की कमान, शीला बनी डीपीसीसी प्रेसिडेंट

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नई दिल्ली
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हाथ में फिर से प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष बन गई हैं। अजय माकन के इस्तीफे के बाद से ही इस बात की उम्मीद की जा रही थी कि अनुभवी दीक्षित को ही पार्टी की कमान सौंपी जाएगी। कांग्रेस नेता पीसी चाको ने शीला दीक्षित को दिल्ली कांग्रेस का चीफ बनाए जाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि हारून यूसुफ, राजेश लिलोठिया, देवेंद्र यादव को वर्किंग प्रेजिडेंट बनाया गया है।

ऐसा कहा जा रहा है कि अजय माकन ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना को देखते हुए इस्तीफा दिया। मध्य प्रदेश और राजस्थान में अनुभवी पुराने कांग्रेसियों को कमान देने की तर्ज पर ही राहुल गांधी ने दिल्ली की कमान शीला दीक्षित को सौंपी है। वहीं, अजय माकन ने ट्वीट कर शीला दीक्षित को फिर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर बधाई और शुभकामनाएं दीं। गौरतलब है कि बीस वर्ष बाद फिर से शीला दीक्षित को दिल्ली का चीफ बनेंगी। शीला का कद और अनुभव दिल्ली के सभी नेताओँ पर भारी पड़ा। जिस प्रकार से राजस्थान और मध्यप्रदेश में अनुभवी और पुराने वफादरों को कमान सौंपी गई है उसी तर्ज पर दिल्ली को दिया गया है। शीला दीक्षित ने 15 वर्षों के कार्यकाल में बेहतर प्रदर्शन किया था और कई विकास के कार्य किए हैं जिसकी मिसाल दी जाती है।

जीएसटी पर सरकार का निर्णय स्वागत योग्य- आईसीसीआई

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नईदिल्ली-

इंटीग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने जीएसटी पर किए गए सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि छोटे व्यापारियों का इसका लाभ मिलेगा। जो अब तक कई तरह की समस्या से जुझ रहे हैं।

इंटीग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के नेशनल सेक्रेटरी चिरंजीत शर्मा ने वित्त मंत्री द्वारा लिए गए फैसलेका स्वागत करते हुए कहा कि इन निर्णयों से निश्चित रूप से देश में बड़ी संख्या में छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी और उनके सर से टैक्स की जटिलताओं का बोझ कम होगा। चिरंजीत शर्मा ने कहा कि जीएसटी में छूट की सीमा को 20 लाख रुपए से बढ़ाकर 40 लाख रुपए करने से लगभग 10 लाख छोटे व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत है। आईसीसीआई के सचिव ने कहा कि कम्पोजीशन स्कीम की सीमा को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए करने का निर्णय काफी समय से लंबित था और इस निर्णय से देश भर में लगभग 20 लाख से अधिक व्यापारियों को फायदा होगा वहीं दूसरी और अब ऐसे व्यापारियों को केवल वर्ष भर में एक ही रिटर्न भरनी होगी। इससे इनको कर पालना के जंजाल से मुक्ति मिलेगी। यद्पि कर की अदायगी हर तिमाही में करनी होगी जो की तर्क संगत है। गौरतलब है कि सरकार ने कॉम्पोजिशन स्कीम की सीमा 50 लाख रखने का निर्णय किया है जिसमें 6 प्रतिशत के कर स्लैब में रखा गया है।

लालू को फिर मिला झटका

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रांची-

देवघर-दुमका चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में राजद सुप्रीमो लालू यादव को बड़ा झटका देते हुए झारखंड उच्च न्यायालय से सभी तीनों मामले में उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। लालू प्रसाद ने देवघर-दुमका चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में जमानत की गुहार लगाई थी। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। इस फैसले से 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार की तैयारी कर रहे राजद को बड़ा झटका लगने की आशंका है क्योंकि पार्टी के स्टार प्रचारक लालू प्रसाद के अब बिरसा मुंडा जेल में रहने की संभावना बढ़ गयी है। मामले में अब उच्चतम न्यायालय से कोई राहत मिलने पर ही वह जेल से बाहर आ सकेंगे।

अयोध्या विवाद पर अब 29 जनवरी को फिर होगी सुनवाई, जस्टिस ललित ने बेंच से खुद को अलग किया

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नई दिल्ली
अयोध्या मामले पर आज जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, सीजेआई ने स्पष्ट किया कि आज सुनवाई के शेड्यूल पर फैसला होगा न कि मामले की सुनवाई होगी। जल्द ही मामले में तब बड़ा मोड़ आ गया, जब 5 सदस्यीय संविधान पीठ में शामिल जस्टिस यू. यू. ललित ने बेंच से खुद को अलग कर लिया। आखिरकार, बेंच ने बिना किसी सुनवाई के इस मामले में 29 जनवरी को अगली तारीख तय कर दी।

बस अब एक कदम दूर सवर्णों का आरक्षण

दरअसल, मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने जस्टिस ललित के बेंच में होने पर यह कहकर सवाल उठाया कि वह एक समय अयोध्या केस से जुड़े एक मामले में वकील के तौर पर पेश हो चुके हैं। सुनवाई शुरू होते ही मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस यू. यू. ललित 1997 में कल्याण सिंह की तरफ से बतौर वकील पेश हुए थे। इस पर वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि जिस मामले में जस्टिस ललित पेश हुए थे, वह इस मामले से बिल्कुल अलग था। वह एक आपराधिक मामला था। इस पर धवन ने कहा कि वह यह मांग नहीं कर रहे हैं कि जस्टिस ललित बेंच से अलग हो जाएं, वह बस जानकारी के लिए यह बता रहे थे। इसके बाद, खुद जस्टिस ललित ने केस की सुनवाई से हटने की इच्छा जताई।
जस्टिस ललित द्वारा बेंच से खुद को अलग करने की इच्छा जताने के बाद सीजेआई ने कहा कि जस्टिस ललित अब इस बेंच में नहीं रहेंगे, लिहाजा सुनवाई को स्थगित करनी पड़ेगी। अब अयोध्या मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच गठित होगी और जस्टिस ललित की जगह पर किसी और जज को बेंच में शामिल किया जाएगा।

बस अब एक कदम दूर सवर्णों का आरक्षण

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नई दिल्ली
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 फीसदी आरक्षण का बिल राज्यसभा से भी पास हो गया। इसके पक्ष में 165 और विरोध में 7 वोट पड़े। लोकसभा से ये एक दिन पहले ही पास हो चुका है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी से इसे लागू किया जा सकेगा। सरकार की योजना इससे जुड़ी गजट अधिसूचना जल्द जारी करने की है।

केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि संविधान संशोधन बिल होने के बावजूद इसे देश के आधे राज्यों की विधानसभाओं से पास कराने की जरूरत नहीं है। कुछ विपक्षी सदस्यों ने इस पर सवाल उठाए। लेकिन संविधान विशेषज्ञ बताते हैं कि संविधान में ऐसी व्यवस्था है कि इस तरह के बिल, जिसमें राज्यों के अधिकार क्षेत्र का हनन नहीं होता या उनके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं होता, उन्हें राज्यों की विधानसभाओं से पास कराने की जरूरत नहीं होती।
बिल पर बहस के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आदि दलों ने इस विधेयक को पेश करने के समय पर सवाल उठाया और इसे राजनीति से प्रेरित कदम करार दिया। सरकार के मंत्रियों ने सभी आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया।

केंद्र ही नहीं, राज्यों की भी सरकारी नौकरियों में कोटा
राज्यसभा में बिल पर बहस के दौरान कुछ विपक्षी दलों के विरोध पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनरल कैटिगरी के गरीबों को 10 पर्सेंट आरक्षण केंद्र और राज्य दोनों तरह की सरकारी नौकरियों पर लागू होगा। राज्यों को अधिकार होगा कि वे इस आरक्षण के लिए अपना आर्थिक क्राइटेरिया तय कर सकें। इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए प्रसाद ने कहा कि यह मोदी सरकार का मैच जिताने वाला छक्का है।

लोकसभा में पारित हुआ सामान्य वर्ग के आरक्षण का विधेयक

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नई दिल्ली
सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण के प्रस्ताव वाले बिल को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है। आरक्षण के लिए लाए गए 124वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा ने बहुमत के साथ पारित किया। बिल में सभी संशोधनों को बहुमत से मंजूरी दे दी गई। इस विधेयक के समर्थन में 323 वोट पड़े, जबकि महज 3 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। कुल 326 सांसदों ने मतदान किया था।

इस विधेयक को लेकर करीब 5 घंटे तक चली बहस में लगभग सभी दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया। हालांकि कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए और कानूनी एवं संवैधानिक तौर पर इसके टिकने को लेकर अपनी बात कही।
इसके जवाब में थावरचंद गहलोत ने कहा कि सरकार की नीयत साफ है और अगर कोई उच्चतम न्यायालय भी जाता है तो इसके लिए हम पहले ही प्रावधान कर रहे हैं। ताकि न्यायालय भी संसद की बात को मान लें। यानि वहा भी खारिज नहीं होगा।


इससे पहले विधेयक का किसी भी दल ने सीधे तौर पर विरोध तो नहीं किया, लेकिन सरकार की नीति और नीयत को लेकर सवाल जरूर खड़े किए। राजद के सांसद जयप्रकाश नारायण यादव और एसपी के धर्मेंद्र यादव ने इस बिल को धोखा करार देते हुए आबादी के अनुपात में आरक्षण की बात की।

मील का पत्थर साबित होगा यह बिल- मोदी

सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 पर्सेंट आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित होने का पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया है। 323 वोटों से विधेयक के पारित होने पर ट्वीट करते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘124वां संविधान संशोधन बिल, 2019 का लोकशभा से पारित होना देश के इतिहास में मील का पत्थर है।’
पीएम मोदी ने कहा कि इसे मंजूरी मिलने से समाज के सभी वर्गों को न्याय मिलने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का समर्थन करने के लिए भी मैं सभी दलों के सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं। यही नहीं इस विधेयक को लेकर लोकसभा में रचनात्मक डिबेट करने वाले सभी सांसदों की भी मैं प्रशंसा करता हूं।