रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से विभिन्न वर्गों के 13487 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित

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रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से विभिन्न वर्गों के 13487 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किया गया है इच्छुक उम्मीदवार 31 जनवरी तक आरआरबी की आधिकारिक वेबसाईट www.rrb.gov.in के जरिये आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2019 है।

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) में जूनियर इंजीनियर (Junior Engineer) के पदों पर आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जूनियर इंजीनियर, सूचना प्रौद्योगिकी में जूनियर इंजीनियर, डिपो सामग्री अधीक्षक और रासायनिक और धातुकर्म सहायक के 13,487 पदों पर आप आज से आवेदन कर सकते हैं. आवेदन (RRB JE Application) की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2019 है. ऑफलाइन पेमेंट जमा करने की आखिरी तारीख 2 फरवरी 2019 है, जबकि ऑनलाइन पेमेंट जमा करने की आखिरी तारीख 5 फरवरी 2019 है. इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को कम्प्यूटर बेस्ड परीक्षा देनी होगी. कम्प्यूटर बेस्ड परीक्षा (सीबीटी) अप्रैल या मई 2019 में आयोजित की जाएगी.

पदों के नाम और संख्या
जूनियर इंजीनियर- 13034
जूनियर इंजीनियर (सूचना प्रौद्योगिकी)- 49
डिपो सामग्री अधीक्षक- 456
केमिकल और मेटलर्जिकल असिस्टेंट- 494
कुल- 13,487 पद

योग्यता
इन पदों पर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री कर चुके लोग आवेदन कर सकते हैं. अलग-अलग पदों पर के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है.

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उम्र सीमा
आवेदन करने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 33 साल होनी चाहिए.

सैलरी
35,400 रुपये

ऐसे होगा चयन
उम्मीदवारों के चयन के लिए 2 स्टेज में कम्प्यूटर बेस्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी. जिसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल एग्जाम होगा.

एग्जाम फीस
जनरल और ओबीसी- 500 रुपये
SC/ST, महिला, Pwbds- 250 रुपये

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उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलों कर आवेदन कर सकते हैं.

RRB JE Recruitment के लिए ऐसे करें आवेदन

स्टेप 1: उम्मीदवार आवेदन करने के लिए अपने रीजन या किसी भी आरआरबी वेबसाइट पर जाएं.
स्टेप 2: वेबसाइट पर दिए गए CEN-03/2018 – Click here for Application Link for recruitment of JE, JE (IT), DMS and CMA के लिंक पर क्लिक करें.
स्टेप 3: अब आपको जिस भी आरआरबी के लिए अप्लाई करना है उस पर क्लिक करें.
स्टेप 4: अगर आप रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं, तो Already Registered पर क्लिक करें, अगर आपने अभी रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो New Registration पर क्लिक करें.
स्टेप 5: नए रजिस्ट्रेशन वाले मांगी गई जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, पिता का नाम, मोबाइल नंबर और बाकी अन्य जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर लें.
स्टेप 6: अब आपको मोबाइल और मेल पर आपकी लॉग इन डिटेल दे दी जाएगी.
स्टेप 7: लॉग इन करने के बाद आप Eligibility criteria Form भरकर सबमिट करें.
स्टेप 8: इसके बाद आपको exam group चुनना होगा.
स्टेप 9: अब Payment के लिए ऑप्शन चुने.
स्टेप 10: Payment पूरी करने के बाद आप अन्य जानकारी जैसे आपकी फोटो और साइन अपलोड करें.
स्टेप 11: अब Final submit पर क्लिक कर अपना सभी जानकारी सबमिट कर दें.

आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षक ‘सावित्रीबाई फुले’ (जन्मदिन पर विशेष)

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सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के एक सम्रग क्रांतिकारी सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षिक आंदोलन के शैक्षिक आंदोलन के निर्माण का ऐतिहासिक काम किया है, जिसके लिए आज पूरा समाज ऋणी है।
सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 को सतना जिले के नायगाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। वह मां लक्ष्मी और पिता खंडोजी नेवशे पाटिल की सबसे बड़ी बेटी थीं। 1840 में जब वह 9 वर्ष की की थी, उनकी शादी 13 वर्षीय ज्योतिराव से हुई। शादी के बाद सावित्रीबाई और जोतिबा पुणे में बस गईं।

सर ने कभी वेल प्लेड नहीं कहा- सचिन
गौरतलब है कि शादी से पहले, जब सावित्रीबाई ने एक अंग्रेजी पुस्तक को पढ़ा यानी स्क्रॉल किया, तो उसके पिता नाराज हो गए और किताब को खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन दिनों शिक्षा केवल शहरी उच्च वर्ग के पुरुषों के लिए थी। हालाँकि,उसने एक दिन सीखने के लिए एक दृढ़ संकल्प किया। शादी के बाद वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए ठानी। ज्योतिराव ने अपनी पत्नी को घर पर शिक्षित किया और उन्हें शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षित किया। सावित्रीबाई की आगे की शिक्षा की जिम्मेदारी ज्योतिराव के दोस्तों सखाराम यशवंत परांजपे और केशव शिवराम भावलकर (जोशी) ने संभाली। सावित्रीबाई ने सुश्री फरार के संस्थान अहमदनगर में और पुणे में सुश्री मिशेल के सामान्य स्कूल में शिक्षक प्रशिक्षण भी लिया था।

सावित्रीबाई फुले पहली महिला शिक्षक और भारत में पहली महिला स्कूल की हेड मिस्ट्रेस हैं। वह सभी बाधाओं के खिलाफ अथक रूप से लड़ीं, चाहे वह प्रमुख जाति व्यवस्था हो या शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह, सामाजिक मुक्ति, महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ विद्रोह हो। उन्होंने उनके उत्थान के लिए काफी कार्य किया। यह उनकी संघर्ष और कहानी है जो भारत में आधुनिक भारतीय महिलाओं के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।
उन्होंने अपना पहला स्कूल 1 जनवरी 1848 को पुणे के भिदेवाड़ा और ‘मूल पुस्तकालय’ में शुरू किया। इसमें उनके पति का पूरा सहयोग मिला।
उन्होंने महिलाओं के लिए सम्मान की बात की। मानवता, समानता, स्वतंत्रता और न्याय उनके लिए अत्यधिक महत्व के थे। उस समय जब महिलाएं मात्र वस्तुएं थीं, उन्होंने समाज को जागरूक किया, जिससे शिक्षा में समानता आए। जो उस समय संभव नहीं था।
1852 में सावित्रीबाई ने महिला अधिकारों के संगठन की शुरुआत की, जिसे माहिला सेवल मंडल कहा जाता था और विधवाओं के सिर मुंडवाने की प्रथा के विरोध किया। 1863 में, उन्होंने गर्भवती और शोषित विधवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने स्वयं के घर में ‘शिशु हत्या की रोकथाम के लिए’ घर शुरू किया। उन्होंने महिलाओं और विशेषाधिकार प्राप्त लोगों जैसे दबे-कुचले समूहों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सितंबर, 1873 को सत्यशोधक समाज का गठन किया। इस संगठन (सोसाइटी फॉर ट्रुथ सीकिंग) ने दहेज या बिना खर्च के शादी की प्रथा शुरू की। वे बाल विवाह के खिलाफ थे और विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करते थे। उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी, लेकिन एक ब्राह्मण विधवा के बच्चे को गोद लिया, उनका नाम यशवंतराव रखा, उन्हें शिक्षित किया और उन्हें डॉक्टर बनाया और उनके लिए अंतरजातीय विवाह की व्यवस्था की।
उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा को सही और गलत के बीच और जीवन में सच्चाई और असत्य के बीच चयन करने की क्षमता प्रदान करनी चाहिए।
सावित्रीबाई का संघर्ष कई कठिनाइयों से भरा था और इसके बावजूद उन्होंने शांति से अपना काम जारी रखा। उन्हें सड़कों पर काफी संघर्ष करना पड़ा। उनपर पथराव किया गया और गाय के गोबर या मिट्टी को फेंक दिया गया। सावित्रीबाई स्कूल जाते समय दो साड़ियों को ले जाती थीं, एक बार स्कूल जाने के बाद गंदी हुई साड़ी को बदल देती थीं, जो फिर से वापस जाते समय उन्हें गुनगुना देती थी, और फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी। गार्ड, जिसे तब उसके लिए नियुक्त किया गया था, ने अपने संस्मरणों में लिखा था कि वह उन पुरुषों से क्या कहेगी, “जैसा कि मैं अपनी साथी बहनों को सिखाने का पवित्र कार्य करती हूं, आप जो पत्थर या गोबर फेंकते हैं वह मुझे फूलों जैसा लगता है। भगवान आपका भला करे!”
जब 28 नवंबर, 1890 को जोतीराव का निधन हो गया, जब उन्होंने अंतिम संस्कार की चिता जलाई तो सावित्रीबाई ने सभी मानदंडों को तोड़ दिया। सावित्रीबाई ने साहसपूर्वक आगे आकर मिट्टी के बर्तन को धारण किया (इसे मृतक के उत्तराधिकारी द्वारा चलाया जाना चाहिए)। उन्होंने जोतिराव की अंतिम यात्रा का नेतृत्व किया और दाह संस्कारा किया। भारत के इतिहास में, यह संभवतः पहली बार था जब किसी महिला ने मृत्यु संस्कार किया था। उसने अपनी जगह पर एक ‘तुलसी वृंदावन’ बनवाया, जहाँ ज्योतिराव को दफनाया जाना था। ज्योतिराव के निधन के बाद, सावित्रीबाई ने बहुत अंत तक सत्यशोधक आंदोलन का नेतृत्व किया। वह 1893 में पुणे के सासवाड़ में आयोजित सत्यशोधक सम्मेलन की चेयरपर्सन थीं।
सावित्रीबाई, महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ, महिलाओं, किसानों और जातियों के सामाजिक समानता के अधिकारों के लिए लड़ीं। सावित्रीबाई ने जाति व्यवस्था के अधिनायकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अन्य सामाजिक बुराइयां उनके जीवन भर रहीं। वह लैंगिक समानता के लिए एक मजबूत आवाज थी।

एक लेखक और एक कवि

सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा की आवश्यकता और हाशिए पर पड़ी जातियों के उत्पीड़न पर कविता लिखी। उनकी कविताएँ और अन्य लेखन कई लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उसने भारत की जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष को कम किया है। उनके प्रेरणादायक लेखन में कविफुले- 1854 की कविता संग्रह, ज्योतिराव के भाषण, सावित्रीबाई फुले द्वारा संपादित, सावित्रीबाई के पत्र जोतिराव, बावनकाशी सुबोध रत्नाकर को 1892 में शामिल किया गया।

वर्ष 1897 में प्लेग फैल चुका था। पुणे में रोजाना सैकड़ों लोग मर रहे थे। सरकार ने ब्रिटिश अधिकारी रैंड के नेतृत्व में महामारी को नियंत्रित करने का प्रयास किया। यशवंत के साथ सावित्रीबाई ने रोगियों की देखभाल के लिए एक अस्पताल की स्थापना की। वह खुद बीमार लोगों को उठाकर अस्पताल ले आती और उनका इलाज करती। भले ही वह जानती थी कि यह बीमारी संक्रामक है, लेकिन वह तब तक उनकी सेवा करती रही जब तक प्लेग ने उसकी जान नहीं ले ली।

मुंधवा गांव के बाहर एक युवा लड़का प्लेग से पीड़ित था। उसने बीमार बच्चे को अपनी पीठ पर लाद लिया और वापस अस्पताल ले गई। उसने इस छूत की बीमारी को पकड़ लिया और 10 मार्च, 1897 को उसने दम तोड़ दिया। और महान क्रांतिकारी का युग समाप्त हो गया। भारत में महिलाओं की शिक्षा सावित्रीबाई फुले के अथक कार्यों की ऋणी है।

सर ने कभी वेल प्लेड नहीं कहा- सचिन

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-क्रिकेट के भगवान के कोच रमाकांत आचरेकर का निधन
मुंबई-
महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर का निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। रमाकांत आचरेकर ने भारतीय क्रिकेट टीम को कई खिलाड़ी दिए। जिनमें सचिन तेंदुलकर, विनोद कांबली, प्रवीण आमरे, समीर दीघे, बलविंदर सिंह सिद्दू प्रसिद्ध है। जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को ऊंचाईयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाई है। आचरेकर सचिन तेंदुलकर के बचपन के कोच थे। उन्होंने अपने कैरियर में उनकी भूमिका को हमेशा से उल्लेख किया है। आचरेकर शिवाजी पार्क में उन्हें क्रिकेट सिखाते थे।

कभी वेल प्लेड नहीं कहा

सचिन ने एक कार्यक्रम में अपने कोच के बारे में कहा था कि उन्होंने कभी वेल प्लेड नहीं कहा, जब मैं मैदान पर अच्छा खेलता था तो सर मुझे भेलपुरी या पानीपुरी खिलाते थे।
थप्पड़ ने बदल दिया सचिन को
सचिन ने अपने कोच के बारे में बताया कि शुरुआत के चार पांच साल उनके साथ काफी अहम रहे जब उन्होंने क्रिकेट की बारिकियां के बारे में बताया। स्कूल से आने के बाद कोच उन लोगों के लिए मैच रखते थे यह भी बता देते थे कि मैं चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करूंगा। ऐसे ही एक दिन मैच खेलने के बजाए सचिन वानखेड़े स्टेडियम में शारदाश्रम इंग्लिश मीडियम और शारदाश्रम मराठी मीडियम के बीच हैरिस शील्ड का फाइनल देखने चले गए। जहां उन्होंने अपने कोच आचरेकर से मुलाकात करने चले गए। सचिन से उन्होंने पूछा कि तुमने कैसा प्रदर्शन किया। तो उन्होंने कहा कि मैं मैच छोड़कर अपनी टीम का हौसला बढ़ाने के लिए यहां आ गया हूं। यह सुनकर आचरेकर ने जोरदार थप्पड़ ज़ड़ दिया। यहीं सचिन की जिंदगी बदल गई और वे अपना सारा ध्य़ान क्रिकेट खेलने पर लगाने लगे और यहीं लगन उनमें आई। जिसका परिणाम है कि सर डॉन ब्रेडमैन के करीब वे खड़े हो गए और क्रिकेट के भगवान भी कहलाए। सचिन के द्वारा बनाए गए हर रन से लगता है जैसे संगीत निकल रहा हो। आचरेकर को दोणाचार्य अवार्ड एवं पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है

टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत, सीरीज में 2-1 की बढ़त

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नई दिल्ली

इंडिया ने बॉक्सिंग डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 399 रनों का लक्ष्य दिया, जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम सभी विकेट खोकर 261 रन बना सकी, यह भारत की टेस्ट में 150वीं जीत है इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 की अजेय बढ़त बना ली है भारतीय टीम ने पहली पारी 443 रनों पर घोषित की थी, जवाब में ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 151 रन बना सका था टीम इंडिया ने बॉक्सिंग डे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को 137 रन से हराते हुए इतिहास रच दिया। यह पहला मौका है, जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया को बॉक्सिंग डे टेस्ट में शिकास्त दी है। मैच में भारतीय टीम से मिले 399 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मेजबान टीम 89.3 ओवर में सभी विकेट खोकर 261 रन ही बना सकी। उसके लिए पैट कमिंस ने सबसे अधिक 63 रनों की पारी खेली। भारत के लिए दूसरी पारी में जसप्रीत बुमराह और रविंद्र जडेजा ने 3-3 विकेट झटके, जबकि इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी के नाम दो-दो विकेट रहे। बता दें कि बारिश की वजह से 5वें दिन लगभग ढाई घंटे देरी से मैच शुरू हो सका था।

सलमान खान का जन्मदिन, मुबारक देने पहुंचे सितारे

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सलमान खान आज अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने अपना जन्मदिन अपने पनवेल फार्महाउस में परिवार तथा करीबी दोस्तों के साथ मनाया।

चीन की कंपनियां भारत में निवेश को उत्सुक

इस मौके पर कटरीना कैफ, सोनाक्षी सिन्हा, सुनील ग्रोवर, जैकलीन फर्नांडिस, अनिल कपूर, मौनी रॉय, अमीशा पटेल, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, जिम्मी शेरगिल, महेश मांजरेकर, सतीश कौशिक, बॉबी देओल, अमृता अरोड़ा, निर्देशक संजय लीला भंसाली और अनीस बज़्मी, प्रड्यूसर रमेश तौरानी और संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद जैसे सितारे भी मौजूद थे।

चीन की कंपनियां भारत में निवेश को उत्सुक

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-तीसरा इंडो चाइना टेक्नोलॉजी ट्रांस्फर में चीन की कंपनियों ने अपने प्रेजेंटेशन दिए।
-इंडो चाइना सहयोग को बढ़ाने पर उत्सुक
-सोलर एनर्जी में निवेश की कई संभावनाएं है चीन से।
-चीन की 50 कंपनियों ने भाग लिया। जिसमें कई बी2बी हस्ताक्षर किए गए।
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तीसरा इंडो-चाइना टेक्नोलॉजी ट्रांस्फर कांफ्रेंस दो दिनों तक नईदिल्ली में कई महत्वपूर्ण निवेश हस्ताक्षर के साथ संपन्न हुआ । इस खास कांफ्रेंस में चीन और भारत के उद्योगपतियों ने सहाभागिता पर खास चर्चा की। इस खास कार्यक्रम में 50 चाइनिंग कंपनियों ने भाग लिया। कांफ्रेंस के पहले दिन चीन और भारत के कंपनियों ने अपने प्रेजेंटेशन दिए एवं दूसरे दिन बी-2बी मींटिग किए एवं तकनीकी और निवेश पर हस्ताक्षर किए।
आईसीटीसी के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने कहा कि चाइना की कई कंपनियां भारत में निवेश के लिए आई हैं। जिसे सरकार की ओर से सहायता की जरूरत है। आईसीटीसी का यह कांफ्रेंस है जिसमें चीन की कई कंपनियों ने शिरकत की है।
इस मौके पर  इंडो चाइना टेक्नोलॉजी ट्रांस्फ्रर के वाइस चेयरमैन वीके मिश्रा ने कहा कि चीन भारत में निवेश की कई संभावनाएं को तलाशा है। खास तौर से ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत में चीन के निवेश करने से रोजगार बढ़ेगी वहीं सस्ते सोलर उत्पन्न भी होंगे। उन्होंने कहा कि चीन भारत में निवेश को उत्सुक है जिसके लिए कई हस्ताक्षर भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि छोटे व मध्यम उद्योग में चीन के तकनीक से बेहतर उत्पादन एवं रोजगार उत्पन्न होंगे। इस कांफ्रेस में खास तौर पर चीन के शोध को बेहतर रूप से उपयोग करने के लिए रखा गया है। कार्यक्रम का थीम ही है केलोबेरेशन इनोवेशन एवं निवेश।
 इस कार्यक्रम में एसएमई इंटरप्राइजेज के सचिव डॉ अरुण कुमार पांडा ने कहा कि आज भारत-चीन को मिलकर कार्य करने की जरूरत है। आई सी कांसेप्ट विश्व में एक नया ट्रेंड  लाया है। यह आईसी इंडो चाइना है जो विश्व में उद्योग को लीड करने की क्षमता रखता है।
एंबेसी ऑफ पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के मंत्री ली बिजान ने कहा कि चीन भारत के साथ सहयोग कर रहा है और बेहतर निवेश की यहां संभावना है। भारत चीन मिल जाए तो विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर लीड करेगा।
 यूनान एकेडमी ऑफ सांयटिफिक एंड टेक्नीकल इंफोरमेशन के डायरेक्टर जेनरल मा मिक्सिइयांग ने कहा कि यह समिट बिजनेस को बढ़ाने के लिए जरूरत थी। हम तो चाहेंगे कि ऐसे आयोजन चीन में हो जिससे की बेहतर संबंध और व्यापार बढ़ सके। आज निश्चित तौर पर कई समस्या है लेकिन मिलकर बात कर इसका हल निकाला जा सकता है। चीन भारत को सहयोगी देश की तरह देखता है।
इस खास कांफ्रेन्स में दो एमओयू भी हस्ताक्षर किए गए। चीन भारत में एफएमसीजी, मीडिया, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश को तैयार है। शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश को तैयार है इसके लिए विश्वविद्यालय को चीन आमंत्रित किया है। ताकि एक दूसरे को बेहतरीन रूप से समझ सके।
चीन की कई कंपनियों ने इस मौके पर अपने स्टॉल पर उत्पादों का प्रदर्शन किया जिसमें लोगों ने उत्सुकता पूर्वक उत्पादों के बारे में जाना।
गौरतलब है कि भारत में चीन के निवेश को बढ़ाने एवं शोध एवं उसके तकनीक को बेहतरीन उपयोग के लिए इंडो चाइना टेक्नोलॉजी ट्रांस्फर कांफ्रेस का आयोजन करती रही है। देश में यह  आईसीटीटीसी का तीसराआयोजन किया।

कांग्रेस को समर्थन देंगे, राजस्थान में भी साथ: मायावती

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लखनऊ
मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए बीएसपी प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में बीएसपी के दो विधायक जीते हैं और वहां सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को 2 विधायक की ही जरूरत है। ऐसे में अब कांग्रेस की सरकार बनती दिख रही है। गौरतलबू है कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बीएसपी ने कांग्रेस के संभावित गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ा था।

मायावती ने कहा है कि कांग्रेस से विचारधारा मेल न खाने के बावजूद वह बीजेपी को रोकने के लिए समर्थन दे सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राजस्थान में भी जरूरत हुई तो वह अपने विधायकों को कांग्रेस को समर्थन देने के लिए कहेंगी। उधर कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने मायावती को समर्थन देने के लिए आभार जताया है।

एशिया पोस्ट सर्वे के श्रेष्ठ सांसद सर्वे में टॉप पर डॉ. उदित राज

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नई दिल्ली, –
उत्तर-पश्चिम दिल्ली से सांसद डॉ. उदित राज ने एक बार फिर हुए सर्वे में बेजोड़ सांसद की कैटेगरी में सर्वश्रेष्ठ सांसद का खिताब अपने नाम किया। लोकसभा में चुनाव जीत कर आये कुल 543 सांसदों के मध्य फेम इंडिया-एशिया पोस्‍ट सर्वे ने संयुक्‍त रुप से एक सर्वे कर वर्ष 2018 के 25 श्रेष्‍ठ सांसदों का चयन किया। श्रेष्‍ठ सांसदों के चयन में सर्वे के कई पैरामीटर थे। फेम इंडिया के सम्पादकीय प्रमुख यू एस सांथालिया और एशिया पोस्ट के प्रमुख राजीव मिश्रा बताते है कि फेम इंडिया और एशिया पोस्ट ने श्रेष्ठ सांसदों का चयन करने के लिए 25 कैटेगरी बनाई थी, जिससे पता चल सके कि उनमें जनता के द्वारा दिए गए दायित्व के प्रति कितनी निष्ठा है। इसके बाद एशिया पोस्ट के एनालिस्ट ने 10 प्रमुख बिन्दुओं पर कार्य किया, जिनमें लोकप्रियता, जनता से जुड़ाव, छवि, कार्यशैली सहित सदन में उपस्थिति और बहस में भागीदारी, जनता के हित में प्रश्न उठाने, लोकतंत्र की मजबूती के लिए निजी विधेयक लाने, क्षेत्र की जनता के लिए सुलभता व मददगार को प्रमुख माना गया

सर्वेक्षण में आम जनता सहित जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों से भी स्टेक होल्ड तरीके से सवाल पूछे गए और उनकी राय को आधार बनाया गया। लोकसभा द्वारा उपलब्ध डाटा को भी सर्वे के आधार में शामिल किया गया। ध्यान रहे इस सर्वे में भारत सरकार के किसी भी मंत्री को शामिल नहीं किया गया।

ये हैं श्रेष्ठ 25 सांसद- बेजोड़ सांसद की केटेगरी में टॉप पर दिल्ली के सांसद डॉ उदित राज हैं वहीं प्रभावशाली सांसद की केटेगरी में गुजरात के भाजपा सांसद डॉ. किरिट प्रेम जी भाई सोलंकी रहे। उत्कृष्ट श्रेणी में कांग्रेस के दिग्गज मल्लिकार्जुन खड़गे है तो उर्जावान कैटगरी में महाराष्ट्र की सांसद सुप्रिया सुले, वहीं केरल के सांसद एन के प्रेमचंद्रन असरदार श्रेणी में प्रमुख स्थान पर है। सतना मध्यप्रदेश से तीन बार सांसद गणेश सिंह लोकप्रिय तो सरोकार कैटगरी में भदोही सांसद विरेन्द्र सिंह मस्त प्रमुख स्थान बनाने में कामयाब रहे। कर्मयोद्धा श्रेणी में महाराष्ट्र अहमदनगर के सांसद दिलीप गाँधी, लगनशील कैटगरी में मध्यप्रदेश से प्रह्लाद पटेल, मुम्बई से भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी क्षमतावान और प्रतिभावान कैटगरी में असाम के सिलचर से कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने टॉप किया।

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने दिया इस्तीफा

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता सहित कुछ मुद्दों को लेकर सरकार के साथ मतभेद की खबरों के बाद यह अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि वह पद छोड़ सकते हैं। माना जा रहा है कि गवर्नर के इस्तीफे के बाद अब डेप्युटी गवर्नर भी पद छोड़ सकते हैं।

उर्जित पटेल ने कहा है, ‘व्यक्तिगत कारणों की वजह से मैंने मौजूदा पद तत्काल प्रभाव से छोड़ने का फैसला किया है। वर्षों तक रिजर्व बैंक में विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ मुझे रिजर्व बैंक में सेवा का मौका मिला, यह मेरे लिए सम्मान की बात है।’ गौरतलब है कि उर्जित पटेल का कार्यकाल सितंबर 2019 में खत्म होने वाला था।

उन्होंने आगे लिखा, ‘आरबीआई स्टाफ, ऑफिसर्स और मैनेजमेंट के समर्थन और कड़ी मेहनत से बैंक ने हाल के वर्षों में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। मैं इस मौके पर अपने साथियों और आरबीआई के डायरेक्टर्स के प्रति कृतज्ञता जाहिर करता हूं और उन्हें भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।’

फिल्म मरूस्थल को निर्देशित करेंगे ‘संतोष ओझा’

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अगर इरादे मजबूत हो तो क्या नहीं किया जा सकता है। अटूट विश्वास और मेहनत के बल पर अपने को साबित करने वाले 36 वर्षीय अभिनेता व निर्देशक संतोष ओझा की फिल्म और टीवी जगत में अपनी एक अलग पहचान है। इन्होंने कई धारावाहिक, विज्ञापन और कॉरपोरेट फिल्मों में काम किया है।

यूपी के गाजियाबाद में जन्में संतोष ओझा रांची, पटना, बलिया और इलाहाबाद में पले-बढ़े। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से 2004 में एम. ए. इन थियेटर की डिग्री ली। इसके बाद वे दिल्ली आ गए और आर्टिस्ट के रूप में उनका चयन श्री राम सेंटर रेपेटरी में हो गया। 2007 तक वो दिल्ली में स्टेज एक्टर एवं थियेटर टीचर के रूप में काम करते रहे। इस बीच इन्होंने अग्नि बरखा, कॉमेडी ऑफ एरर्स, मटी-गाड़ी, काली बर्क और एक गधे की आत्म कथा आदि नाटकों में अपने अभिनय से एक अमिट छाप छोड़ी। इसी बीच तीसरे प्रयास में संतोष ओझा का चयन एफटीआईआई में एक्टिंग कोर्स हेतु 2007 में हो गया।
2010 में एफटीआईआई से ग्रेजुएट होने के बाद संतोश ओझा ने मुम्बई की ओर रूख किया। निर्देशक गोल्डी बहल के सीरियल रिपोटर्स में इन्हें इंसपेक्टर अरूण खुराना के रूप में पहला मौका मिला।
आग्नेय सिंह द्वारा निर्देषित फिल्म एम क्रीम इनकी पहली फिल्म थी जिसमें इन्होंने सोशल एक्टिविस्ट राम हरिहरन रेहर का किरदार निभाया। ये फिल्म 40 इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई। सन् 2016 में इन्होंने पुर्णमासी की रात और टेल्स ऑफ सोलमेट को निर्देशित किया।
एन.एस.डी. और एफ.टी.आई.आई पास आउट एक्टर्स के साथ बनने वाली फिचर फिल्म ‘मरूस्थल’ भविष्य के मुख्य प्रोजेक्ट में से एक है। लक्की कमांडो फिल्मस द्वारा प्रोडयूस्ड फिल्म मरूस्थल को संतोष ओझा निर्देशित करने जा रहे हैं। उन्होंने कई स्थापित एवं उभरते अभिनेताओं को अब तक प्रशिक्षित किया है। हाल ही में उन्होंने जी-5 के नए कार्यक्रम के लिए अभिनेता साकिब सलीम के साथ डायलेक्ट कोच के रूप में काम किया।

हरफनमौला संतोश ओझा हर काम को बड़ी शिद्दत और ईमानदारी से करते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये हर उम्र के युवा की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनके मिलनसार व्यवहार से इनके साथ काम करने वाले कलाकार काफी खुश रहते हैं।