मिस्टर इंडिया मैनहंट 2018: 25 वर्षीय अंकुर गौतम ने मारी बाजी

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मॉडलिंग एक ऐसा करियर है जिसमे हर साल हजारों युवा अपनी किस्मत आजमाते है लेकिन सही मंच न मिलने की वजह से बहुतों को असफलता का सामना करना पड़ता है। इसीक्षेत्र में साल 2009 से दिल्ली स्थित स्काईवॉक इंटरटेंमेंट नए-नए प्रतिभाओं की तलाश कर फिल्म इंडस्ट्री को दे रहा है जो अपना लोहा मनवा रहे हैं।  इसी सिलसिले में स्काईवॉक ने’मिस्टर इंडिया मैनहंट’ का दसवां संस्करण रविवार को आयोजित कराया जिसे जज करने बॉलीवुड अभिनेता अरबाज खान आये थे।

कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित ‘द उमराव’ में हुआ। ‘मिस्टर इंडिया मैनहंट 2018’ का खिताब 25 वर्षीय अंकुर गौतम ने अपने नाम किय। गौतम मूलतः उत्तर प्रदेश के मथुरा के रहने वाले है लेकिन पिछले 4 सालों से मुंबई में रह कर मॉडलिंग की दुनिया में अपनी छाप छोड़ रहे हैं ।

कांटेस्ट को जज करने ‘जैक एंड दिल’ के अभिनेता अरबाज खान, मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर को ग्रूम कर चुकीं रीता गंगवानी, बिग बॉयज टॉयज के मैनेजिंग डायरेक्टर जतिन आहूजा समेत कई अन्य प्रसिद्द लोग मौजूद थे।

सभी प्रतियोगियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया जिसके बाद विजेता, फर्स्ट एंड सेकंड रनर-अप का नाम अनाउंस किया गया। प्रतियोगिता में कुल 3 राउंड हुए जिसमें प्रतिभगियों ने बखूबी अपने टैलेंट को दर्शाया। फर्स्ट रनर-अप का खिताब गुरिंदरजीत सिंह को मिला, वहीं सेकंड रनर-अप का खिताब मोहित सिंह ने अपने नाम किया।

अरबाज ने कहा कि सभी कंटेस्टेंट्स टैलेंटेड हैं और उनमें से किसी एक को विजेता कहना काफी कठिन काम है। “सभी लोगों ने जमकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और काफीअच्छे से सभी सवालों का जवाब दिया। हर इंसान के अंदर कुछ न कुछ कला होती है और इन प्रतिभाओं को निखारने के लिए ऐसे मंच की जरुरत हमारी इंडस्ट्री को है। ये सभीविजेता हैं… हार-जीत तो किसी भी कांटेस्ट का हिस्सा होता है। मैं इन सभी को कहना चाहता हूँ की वे अपने प्रयास को कभी न छोड़े, सफलता जरूर मिलेगी।”उन्होंने स्काईवॉक इंटरटेंमेंट के फाउंडिंग मेंबर्स मनीष सहदेव और अंकिता अगरवाल के बारे में कहा दोनों युवाओं को आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं और उम्मीद जतायाकी यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। कांटेस्ट के बारे में बताते हुआ मनीष ने कहा कि यह देश का एकमात्र ऐसा प्लेटफार्म है जो युवाओं को बॉलीवुड में लांच करने के लिए ऐसे प्रतियोगितओं का आयोजन करता है |

संघ को अप्रवासी हिंदू संगठन का मिला समर्थन

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नईदिल्ली-

राम मंदिर पर आरएसएस का अबतक का सबसे बड़ा बयान आया है। बयान आने के बाद देश से बाहर रह रहे अप्रवासी हिंदू संगठन ने जोरदार तरीके से आरएसएस का समर्थन किया है। संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा है कि जरूरत पड़ी तो राम मंदिर के लिए 1992 जैसा आंदोलन करेंगे। मंदिर बनना ही चाहिए। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से हिंदू अपमानित महसूस कर रहे हैं कि अयोध्या का मुद्दा प्राथमिकता वाला नहीं है। राम मंदिर के मुद्दे पर कोई विकल्प नहीं रहा तो अध्यादेश लाना जरूरी होगा।

भैयाजी जोशी बयान आने के बाद अप्रवासी हिंदू संगठन ने कहा है कि मंदिर जितनी जल्दी हो सके बनना ही चाहिए। अमेरिका में रह रहे अप्रवासी हिंदू संगठन के संयोजक गगन बत्रा ने भैयाजी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मंदिर बनना ही चाहिए। इसके लिए हमलोग हर तरीके से सहयोग करने को तैयार हैं। गगन बत्रा ने कहा कि हर भारतीय तीस सालों से इस बात का इंतजार कर रहा है कि कब मंदिर का निर्माण शुरू होगा। गौरतलब है कि 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने जनवरी 2019 के पहले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी। एक उचित पीठ सुनवाई का कार्यक्रम तय करेगी।

ज्यूडिशियरी में भी आल इंडिया एग्जाम की जरूरत-  कानून मंत्री

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नई दिल्ली। नई दिल्ली स्थिति कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि देश को ज्यूडिशियरी में भी आल इंडिया एग्जाम की जरूरत है।

आईएएसआईपीएस और आईआरएसके तर्ज पर एआईजेएस की भी परीक्षा आल इंडिया स्तर पर होनी चाहिए। इससे प्रतिभावान छात्र-छात्राएं न्यायायिक क्षेत्र में बढ़चढ़कर अपनी भाग ले सके और अपनी सेवाओं को दे सके। मौजूदा समय में आल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज की आवश्यकता काफी बढ़ गई है। ये बातें मंगलवार को फोरम फॉर आल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेजद्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कही। इस दौरान बोलते हुए उन्होंने आगे कहा कि जब देश में आईपीएसआईआरएस और आईएएस हो सकता है तो एआईजेएस क्यों नहीं हो सकता है और ऐसा करने से ज्यादा से ज्यादा एडिशनल जजों की नियुक्तियां होंगी। इसमें सफल हुए अभ्यर्थियों का भविष्य में एक पूल तैयार हो सकेगाजिससे हायर ज्यूडिशियरी के जजों की नियुक्तियां करना आसान हो जाएगा। इन सबके लिए कानून मंत्रालय सभी सुझावों के लिए तैयार है। सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के साथ मिल-जुलकर काम करने को तैयार है। गौरतलब है कि लंबे समय से लंबित पड़े अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की परीक्षा की मांग ने फोरम फॉर आल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज के प्रयासों के बाद एक बार फिर से जोर पकड़ लिया है। हालांकि कार्यक्रम के दौरान रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल इस मामले पर जल्द ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना आसान बात नहीं है और इसकी राह में अभी कई तरह के रोड़े है। समाज के अलग-अलग वर्गोसुप्रीम कोर्टहाईकोर्ट और सरकारइन सभी की सहमति के बिना इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

कानून मंत्री ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि निजी तौर पर वो इस मामले का समर्थन करते हैंताकि न्याय प्रक्रिया में और ज्यादा पारदर्शिता आ सकेसाथ ही समाज के हर वर्ग का व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया में भाग ले सके और इसका हिस्सा बन सके। उन्होंने 5000 सब ज्यूडिशियरी के पदों को भरने के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगई की सराहना करते हुए कहा कि यदि ज्यूडिशियरी को प्रभावी और तत्काल उत्तरदायी बनाना है तो हमें रिक्रूटमेंट सिस्टम को पारदर्शी और बेहतर बनाने की सख्त जरूरत है ताकि न्याय व्यवस्था को गति मिल सके। वहीं पूर्व मानव संसाधन राज्य मंत्री संजय पासवान ने लोगों की भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि हाशिये वर्गां को ज्यूडिशियरी में भागीदारी मिलनी चाहिए चाहे वो अनुसूचित जाति/जनजाति से हो या फिर महिला हो या फिर दिव्यांग होसबों का सभी क्षेत्र में हिस्सेदारी होनी चाहिए। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरियापूर्व न्यायाधीश शोभा दीक्षितसुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री विकास सिंहफोरम के अध्यक्ष डॉ. सुब्बा राव समेत कई जानी-मानी हस्तियों ने हिस्सा लिया। कानून विज्ञविधि छा़त्र-छात्राओं ने हजारों की मौजूदगी रही।

अभी सीटों को लेकर अंतिम फैसला नहीं- कुशवाहा

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नईदिल्ली-

बिहार में बीजेपी और जेडीयू के कुछ दिन पहले 50-50 सीट बंटवारे का ऐलान के बाद बिहार में एनडीए की सहयोगी रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाला  ने बड़ा बयान दिया है। कुशवाहा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया है कि सीट बंटवारे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और इसपर अभी बातचीत चल रही है। इस बीच कुशवाहा ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत मध्य प्रदेश चुनाव के लिए अपनी पार्टी के 66 उम्मीदवारों के नामों की भी घोषणा की है।

कांग्रेस #MeToo वाली पार्टी- राजनाथ सिंह

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नईदिल्ली-

अब राजनीति में भी मीटू प्रवेश कर गया है। इसका प्रयोग केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने युवा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने वाली पार्टियों को आगाह किया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा जो पार्टियां राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए लालायित हैं, उन्हें बाद में धोखा मिलेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जो पार्टियां कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगी वह खत्म हो जाएंगी। उम्मीद करते हैं कि विपक्षी पार्टियां कांग्रेस के साथ बाद में धोखा खाने के लिए गठबंधन नहीं करेंगी। आगे चलकर उन्हें अपना #MeToo कैंपेन चलाने को मजबूर होना पड़ सकता है।

गौरतलब है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं ने #MeToo कैंपेन चलाया है। इस कैंपेन के तहत महिलाएं उनके साथ उत्पीड़न करने वाले शख्स का नाम उजागर कर रही हैं। पिछले कुछ ही दिनों ने कई बॉलीवुड हस्तियों और राजनेताओं के नाम भी इसके तहत सामने आ चुके हैं। अब यह राजनीति में इसका प्रयोग होने लगा है। विपक्ष पर हमले करते हुए सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

 

स्मार्ट टीम लीडर ही दे सकता है बेहतर आउटपुट- प्रो.पीयूष रंजन

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नई दिल्ली।

किसी भी राजनीतिक व आर्थिक व्यवस्था में एक कुशल लीडर की मांग सबसे अधिक होती है। लीडरशिप स्किल का तात्पर्य सिर्फ राजनीति से ही नहीं है बल्कि बिजनेसव्यापारनौकरी और इंडस्ट्रीज में भी उतना ही है।

एसोसिएशन ऑफ लीडर्स एण्ड इंडस्ट्रीज (एली) के डायरेक्टर जनरल प्रो. पीयूष रंजन का कहना है कि किसी भी इंडस्ट्रीज या कंपनी को उसके खास मुकाम तक पहुंचाने में एक कुशल लीडर का ही हाथ होता है। उदाहरण के तौर पर एप्पल इंक के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्सफेसबुक संस्थापक मार्क झुकरबर्गरिलायंस इंडस्ट्रीज के सीएमडी मुकेश अंबानीटाटा समूह के रतन टाटा और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स जैसे हस्तियों का नाम है जिन्होंने अपनी शानदार लीडरशिप स्किल की बदौलत सफलता की बुलंदियों को पाने में सफल रहे हैं। प्रो. रंजन कहते हैं कि इसे यूँ समझिए किसी से काम निकलवाना सबसे मुश्किल काम है और इसे वहीं काम वही कर सकता है जिसमें लीडरशीप के खास गुण हो। एक टीम लीडर में कुछ खास गुण होने चाहिए जो औरो से अलग बनाए। आपकी टीम अगर सिर्फ आपके पद के लिए आपको सम्मान देती है तो फिर आप कभी भी बदले जा सकते हैं लेकिन अगर आपकी टीम अपकी व्यक्तित्व का सम्मान करती है तो हर कोई आपसे जुड़ कर आपके साथ काम करना चाहेगा। एक अच्छा टीम लीडर बनने के लिए यह भी जरूरी है कि अगर कभी आपकी टीम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाई हो तो केवल टीम को दोष न दें बल्कि गलती कहां और किस स्तर पर हुई है इसस पर आप टीम के साथ खुलकर बात करें। टीम लीडर के पास भले ही जिम्मेदारी सबसे अधिक हो लेकिन क्रेडिट हमेशा पूरी टीम को मिलना चाहिए। प्रो. रंजन बताते हैं कि आमतौर पर ज्यादातर टीम लीडर अपनी कंपनी में काम करने वाले इंप्लाइज के विचारों या फीडबैक को सुनते तक नहीं है। ऐसा करना कहीं से भी एक अच्छे टीम लीडर के गुण नहीं है। एक अच्छे टीम लीडर के अंदर दूसरे के विचारों और फीडबैक के लिए जगह होना चाहिए। बदलते वैश्विकसामाजिक और आर्थिक परिवेश में एसोसिएशन ऑफ लीडर एंड इंडस्ट्रीज देश भर में लीडरशिप स्किल पर काम कर रहा है। यह राजनीतिप्रशासनकॉर्पोरेटअकैडमिक और शोध सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शख्सियतों का एक नेटवर्क हैजो सर्वेक्षणअनुसंधानविचार-विमर्श के आधार पर एक दूसरे के विचारों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

 

‘विकलांगता अध्ययन का पाठ्यक्रम विकास’’ पुस्तक का विमोचन

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जेएनयू के कुलपति ने किया डॉ. जी.एन. कर्ण की पुस्तक का लोकार्पण
न्यूज डेस्क
नई दिल्ली।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (नई दिल्ली) के मानव अधिकार तथा विकलांगता अध्ययन कार्यक्रम के तत्वावधान में अन्तर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के अप्पादोराई सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एम. जगदीश कुमार ने जे.एन.यू. के विकलांगता अध्ययन विशेषज्ञ डॉ. जी.एन. कर्ण द्वारा रचित ‘‘विकलांगता अध्ययन का पाठ्यक्रम विकास’’ पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक का विमोचन करते हुए प्रो. कुमार ने विकलांगता अध्ययन के शिक्षण तथा शोध को बढ़ावा देने तथा विश्वविद्यालय परिसर को विकलांगों के उच्च शिक्षा हेतु बाधा मुक्त बनाये जाने की दिशा में जे.एन.यू. के द्वारा उठाए गए कदमों का विशेषतः जिक्र किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अन्तर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के डीन प्रो. अजय कुमार पटनायक तथा स्वागत व्याख्यान मानव अधिकार तथा विकलांगता अध्ययन कार्यक्रम के निदेशक   प्रो. राजेश राजगोपालन ने की। इस मौके पर जे.एन.यू के विभिन्न केन्द्रों/विभागों के प्रोफेसरों तथा अधिकारियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। पुस्तक विमोचन के मौके पर प्रो. एस. एन. मालाकार, डॉ. सत्य नारायण प्रसाद तथा डॉ. के. सुकुमार (संगठन सचिव, सक्षम, नागपुर) ने भी अपने उदगार व्यक्त किए।
विकलांगता अध्ययन के पाठ्यक्रम/विकास पर लिखी गयी इस पुस्तक में डॉ. जी.एन. कर्ण ने एम.ए./एम. एस-सी., एम. फिल., पी-एच. डी. तथा स्नात्तकोत्तर डिप्लोमा के स्तर पर विकलांगता अध्ययन के पाठ्यक्रमों के विकास की कोशिश की है। जाहिर हो कि देश के सत्रह से अधिक विश्वविद्यालयों में विकलांगता अध्ययन की पढ़ाई विभिन्न स्तरों पर हो रही है। इसके बावजूद विकलांगता अध्ययन का मॉडल पाठ्यक्रम आजतक विकसित नहीं किया जा सका है। लेखक ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को इस दिशा में आवश्यक पहल करने का आह्वान किया तथा जे.एन.यू. के विकलांगता अध्ययन कार्यक्रम को कालान्तर में ‘विकलांगता अध्ययन संस्थान’ के रूप में उत्प्रेरित करने की जोरदार वकालत की।      डॉ. कर्ण ने विकलांगता अध्ययन को मानवाधिकार का हिस्सा बनाये जाने के विश्वविद्यालय के प्रयास की सराहना की।

भाजपा विधायक पर टुटा गुंडों का कहर

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विजय कुमार गौतम (दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, बजरंग दाल हिंदुस्तान ) की रिपोर्ट

आज 23/10/2018 को बीजेपी बिठूर विधायक अभिजीत सिंह सांग के गुर्गो की गुंडागर्दी बिठूर निवासी अभय पूरी की सफारी कर पर किया हमला
भ्रष्ट सरकार के गुंडे खुलेआम पुलिस की जीप में घूम रहे हैं पुलिस प्रशासन सत्ता के दबाव में बीजेपी गुर्गों को पनाह दे रही है और पीड़ित अभय पुरी ,राजेश सिंह ,पर गंभीर मुकदमे भी दर्ज हो गए और जब पीड़ित समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री राघवेंद्र सिंह यादव के पास पहुंचा और अपनी समस्या बताइए तो राघवेंद्र सिंह यादव अपनी पूरी कानपुर ग्रामीण टीम के साथ बिठूर थाना पहुंचे बिठूर थाने पर मौजूद सत्ता के नशे में चूर एस ओ शैलेंद्र सिंह अभद्रता से पेश आए जब राघवेंद्र सिंह यादव ने पीड़ित अभय पुरी की रिपोर्ट लिखने को कहा तो एसओ साहब बोले विवेचना होगी फिर रिपोर्ट दर्ज होगी और यह कहकर एस ओ साहब निकल गए..

ललिता ऑफ्टर शास्त्री जी पुस्तक का लोकार्पण

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-केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह के हाथों संपन्न हुआ।

– पुस्तक के लेखक संजय पति तिवारी

-इस पुस्तक में 200 से अधिक कहानियां का संकलन है

ऩईदिल्ली-

ललिता ऑफ्टर शास्त्रीजी पुस्तक का लाकार्पण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप मौजूद केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह के हाथों संपन्न हुआ। इस पुस्तक में खास तौर पर ललिताजी जो पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी पत्नी हैं पर केंद्रिंत है। पुस्तक के लेखक संजय पति तिवारी ने ललिताजी के जीवनशैली मूल्य और संघर्षों की कहानी का जिक्र किया है। लेखक ने परिवार के सभी सदस्यों के रिश्तेदारों व मित्रों के हवाले से विस्तृत चर्चा की है।

पुस्तक का लोकार्पण करते हुए डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि ललिता शास्त्री हमारे इतिहास के पन्नों की बड़ी धरोहर हैं जिन्हें सहेजकर अगली पीढ़ी के लिए रखा जाना चाहिए। संजय पति तिवारी ने बेहतरीन कार्य किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय ने लाल बहादुर शास्त्री की जीवन के संघर्षों की कहानी को विशेष तौर पर चर्चा की।

इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील देवधर ने अपने संदेश में पुस्तक के लेखक संजय पति तिवारी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के संदर्भ में यह पुस्तक प्रासंगिक है। जब हम जीवन के मूल्यों को खोते जा रहे हैं। इस पुस्तक का प्रकाशन नवजागरण प्रकाशन से हुआ है। पुस्तक में ललिता शास्त्री के संघर्षों की कहानी को दर्शाया गया है। जो 1965 में शुरु होती है। पुस्तक के बारे विस्तृत चर्चा करते हुए लेखक संजय पति तिवारी ने कहा कि ललिता जी लाल बहादुर शास्त्री के अंदाज में अपने जीवन के अंतिम सांस तक जीती रही। ललिता जी के अपने छह बच्चों के भरेपूरे परिवार को बांध कर चलने में कामयाब रही जिसकी मिसाल दी जाती है। पुस्तक में कई संदर्भों की चर्चा है जिसकी अब तक खुलासा नहीं हुआ था। उनपर विस्तार से चर्चा 200 से अधिक कहानियां का संकल्प उभरकर आया है। जो अब तक पूरी तरह से अप्रसारित व अप्रकाशित रही है। इस पुस्तक को पढ़ने के साथ ही आंखों के सामने गांवों के परिदृश्य घुमने लगता है साथ ही ललिता जी के जीवन के दर्द की कहानी भी। लोकार्पण समारोह में विभिन्न पत्रिकाओं और अखबारों के वरिष्ठ संपादक और संवाददाता उपस्थित थे।

दिल्ली में रहना है तो चंदा देना ही होगा

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी चुनावी मोड में आ चुकी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लगता है कि अगर उन्हें दिल्ली में लोकसभा सीटों पर कब्जा करना है तो इसके लिए अभी से कैंपन की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए 21 अक्टूबर को कैंपन की शुरुआत की गई है। खास बात यह है कि यह कैंपन डोर टू डोर है।

लोकतंत्र में राजनीतिक दल को कैंपन चलाने का पूर्ण अधिकार है। लेकिन इस कैंपन में खुलकर चंदा मांगा जा रहा है जिसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आम आदमी पार्टी कहती है कि आज राजनीतिक दल जिसके पैसे पर चलती है काम उसी के लिए करती है। भाजपा और कांग्रेस कारपोरेट घरानों के पैसे से चलती है। इसलिए काम भी उन्हीं के लिए करती है। आम आदमी पार्टी आम लोगों के पैसे से चलती है और इसलिए काम आम लोगों के लिए करती है। लेकिन यहां सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि आखिर जनता को फोर्स तो नहीं किया जा सकता कि वह चंदा दे ही। लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने भाषण में साफ तौर पर जनता को कह रहे हैं कि आपको चंदा देना ही है। जो सरासर गलत नजर आता है।

बहरहाल दिल्ली लोकसभा चुनाव के मोड में आ चुकी है। जहां कांग्रेस और भाजपा अभी पांच राज्यों के चुनाव में ऐडी चोटी एक किए हुए है। आम आदमी पार्टी इसका लाभ लेते हुए अपने प्रतिद्वंदी पार्टी को पछाड़ने के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत कर दी है। दिल्ली से विजय कुमार गौतम की रिपोर्ट। बजरंग दल हिंदुस्तान पार्टी।