डॉ० भारती कश्यप राष्ट्रीय आई.एम.ए. द्वारा तीसरी बार पुरस्कृत

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झारखण्ड की सुविख्यात नेत्र चिकित्सक डॉ० भारती कश्यप को आज नई दिल्ली के आई.एम.ए. हाऊस में ‘वुमन एम्पावरमेण्ट अवार्ड’ से नवाजा गया। उन्हें यह सम्मान डॉ. जयश्रीबेन मेहता, अध्यक्ष, एम.सी.आई. और डॉ. रवि वानखेडकर, राष्ट्रिय अध्यक्ष, आई.एम.ए. के द्वारा प्रदान किया गया। डॉ० भारती कश्यप को यह सम्मान झारखण्ड में नारियों के उत्थान के लिए किये गये उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया। उन्होंने झारखण्ड की जनजातीय तथा आदिम जनजातीय महिलाओं तथा बच्चों के लिए न सिर्फ नेत्र चिकित्सा के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए निरन्तर कार्य किया है, बल्कि उन्हें चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में नेतृत्वकर्ता की भूमिका भी निभायी है। यही नहीं, उनके द्वारा झारखण्ड में चलाये गये सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान को व्यापक सराहना और समर्थन मिला है। उनकी इन्ही सामाजिक सरोकारों से जुड़ कर किए गये कार्यों के फलस्वरूप नेशनल आई.एम.ए. वर्ष 2017 में “डॉक्टर ऑफ़ द ईयर” एवं वर्ष 2014 में “मेड एचीवर” अवार्ड से उन्हें सम्मानित कर चुका है। इस समारोह में डॉ. एरिका पटेल, डॉ. जैस्मीन कौर दहिया, डॉ. नीलम मिश्रा, डॉ. नीलम मोहन, डॉ. राजेश्वरी अम्मा एस.के. और डॉ. स्वाती भवे को भी सम्मानित किया गया।

राष्ट्रीय आई.एम.ए. के महिला सशक्तिकरण सम्मानसे सम्मानित हुई डॉ० भारती कश्यप

डॉ. रवि वानखेडकर, राष्ट्रिय अध्यक्ष, आई.एम.ए. ने समारोह में बताया की उनका मुख्य फोकस यंग मेडिकल स्टूडेंट्स और महिला डॉक्टर्स को सशक्त करने पर है। वीमेन डॉक्टर्स विंग को सशक्त बनाये विना हम सशक्त आई.एम.ए. की परिकल्पना नहीं कर सकते।

बताते चलें कि डॉ० भारती कश्यप को विगत मार्च 2018 में भारत के राष्ट्रपति महोदय द्वारा वर्ष 2017 का ‘नारी शक्ति सम्मान’ प्रदान किया गया है।

वर्ष 2014 अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर डॉ. भारती कश्यप को माननीय मोदी जी के कार्यक्रम “चाय पर चर्चा” में सम्मिलित किया था। इस कार्यक्रम में पूरे देश से 6 महिलाओं को आमंत्रित किया गया था।

इसके अलावा उन्हें कई अंतराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। 22 से 26 सितम्बर, 2018  तक आयोजित यूरोपियन सोसाइटी ऑफ़ कैटरेक्ट एंड रेफ्राक्टिव सर्जरी (ESCRS) की वार्षिक कांफ्रेंस के दौरान 24 सितम्बर, 2018 को वियना, आस्ट्रिया में आयोजित समारोह में प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ० भारती कश्यप को “ब्रिटिश ओफ्थाल्मिक एक्सीलेंस अवार्ड” के द्वारा सम्मानित किया गया। वर्ष 2017 में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ कैटरेक्ट एंड रेफेरेक्टिव सर्जरी फाउंडेशन के द्वारा डॉ. भारती कश्यप को सम्मानित किया गया। यह दोनों अंतराष्ट्रीय सम्मान उन्हें झारखण्ड के दूरदराज एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय, आदिवासी, गरीब लोगों एवं बच्चों के लिए निःशुल्क नेत्र चिकित्सा एवं ऑपरेशन शिविरों के आयोजनों के फलस्वरूप उन्हें इस सम्मान से समानित किया गया। विगत 18 अप्रैल, 2018 को अमेरिकी संस्था सर्विस बियॉन्ड बॉर्डर के द्वारा डॉ. भारती कश्यप को महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर एवं एनीमिया की रोकथाम के लिए पूरे झारखण्ड में खास करके जनजातिय क्षेत्रों में उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों के फलस्वरूप अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी. में अंतराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया था।

इसके पूर्व वर्ष 2017 में डॉक्टर ऑफ़ द ईयरएवं वर्ष 2014 में मेड एचीवरअवार्ड से नेशनल आई.एम.ए. के द्वारा हो चुकी हैं सम्मानित

डॉ० भारती कश्यप ने कहा कि यह मेरे लिए बेहद गौरव का क्षण है। यूँ तो मेरे कार्य को देश-विदेश मे काफी सराहना मिली है लेकिन जब भी अपने देश में आपके काम को पहचाना जाता है तो लगता है कि आपके प्रयासों को सार्थकता मिल रही है! एक अनूठा आत्मबल मिलता है जो मुझे और ऊर्जा, और उत्साह दे जाता है। ऐसा लगता है जैसे उन तमाम आदिवासी, जनजाति और आदिम जनजाति के साथ साथ कमजोर वर्ग की महिलाओं और बच्चों के दुआ में उठे हाथ, एक साथ मुझे आशीष दे रहे हैं।  मैं बहुत विनम्रतापूर्वक कहना चाहती हूँ कि मैंने तो अपने कर्तव्य का एक बेहद छोटा सा अंश पूरा किया है। आगे मुझे इसी प्रकार लोगों का प्यार और ईश्वर की प्रेरणा मिलती रही तो मैं अपनी क्षमता के अनुरूप कुछ और बेहतर करने का प्रयास करुँगी।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि झारखण्ड से आयीं डॉ० भारती कश्यप ने संयुक्त झारखण्ड-बिहार में कश्यप मेमोरियल आई हास्पिटल तथा कश्यप मेमोरियल आई बैंक के बैनर तले अपने चिकित्सीय जीवन की शुरुआत की थी।  अस्पताल में आनेवाले मरीजों के हालात और उनकी मजबूरियों को करीब से देखने के बाद उनके अन्दर अपने काम को सामाजिक सरोकार से जोड़ने की ईच्छा जगी। खास कर सुदूर बसने वाले आदिम जाति और आदिवासी जातियों को अंधत्व का शिकार होते देखकर इनके हृदय में संवेदना प्रबल होती गयी और इन्होंने निःशुल्क आई कैम्पों का शुभारम्भ किया। फिर तो कैम्पों में नेत्रों की जाँच और कश्यप मेमोरियल आई हास्पिटल में लाकर बच्चों एवं बुजुर्गों का ऑपरेशन, चश्मे का वितरण आदि का एक सिलसिला सा चल निकला जो वर्षों से आज भी जारी है। सारण्डा, पलामू, खूंटी, लातेहार, गढ़वा, संथालपरगना, राँची आदि कई जिलों के सैकड़ों गांवों के लाखों लोगों को दृष्टि का अमूल्य उपहार देने में डॉ० भारती कश्यप अग्रणी रही हैं। मोतियाबिंद से ग्रसित बच्चों, चश्में की जरुरत वाले स्चूली छात्र एवं ट्रक ड्राईवर जैसे नेत्र के उपयोग से जीवन-यापन करनेवाले लोगों के लिए आपने जो काम किया है वह निश्चय ही पुरस्कार के योग्य रहा है। नेत्रदान के प्रति जागरूकता लाने के लिए वर्ष 2005 से प्रति वर्ष लगातार राष्ट्रिय नेत्रदान पखवाड़ा में “रन फॉर विज़न” जैसे कार्यक्रम का आयोजन करते आ रही हैं। संयुक्त बिहार–झारखण्ड का पहला नेत्र प्रत्यारोपण करने का श्रेय भी उन्हें ही प्राप्त है।

डॉ. भारती कश्यप के नेत्रित्व में वीमेन डॉक्टर्स विंग आई.एम.ए. झारखण्ड के द्वारा झारखण्ड के दूरदराज के आदिवासी एवं जनजातीय बहुल क्षेत्रों में महिलाओं के लिए लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाया जा रहे हैं। इन स्वास्थ्य शिविरों में सर्वाइकल प्री-कैंसर से ग्रसित महिलाओं का कॉल्पोस्कोपी गाइडेड क्रायो ट्रीटमेंट कर उन्हें कैंसर मुक्त किया जा रहा है तथा उन्हें एक नया जीवन दिया जा रहा है। ज्ञातव्य हो सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में प्री-कैंसर के स्टेज में वर्षों तक रहता है और इसी स्टेज में इलाज करने पर यह पूरी तरह ठीक हो जाता है। इसके अलावा शिविरों में ही जननांग संबंधित इन्फेक्शन के उपचार के लिए किट-2 और किट-6 की गोलियाँ मुफ्त बांटी जा रही है। महिलाओं को आयरन फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियाँ भी मुफ्त बांटी जा रही है। इन शिविरों में निरंतर उनके द्वारा चितरंजन कैंसर इंस्टिट्यूट, कोलकाता, राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट एंड रिसर्च सेंटर, दिल्ली एवं अमेरिका के वरीय स्त्री कैंसर रोग विशेषज्ञों की टीम को लाकर झारखण्ड के सभी सरकारी स्त्री रोग विशेषज्ञों के प्रशिक्षण भी प्रदान कराया जा रहा है।

मर्दों में मुह के कैंसर का जो प्रतिशत है उस से कही ज्यादा प्रतिशत महिलाओं में सर्वाइकल एवं ब्रेस्ट कैंसर का है। भारत में महिलाओं में होने वाले कैंसर का 44.2% ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर का है। भारत में प्रति घंटे 6.8 महिलाओं की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर से होती है।

 

इन बहुआयामी दायित्वों के निर्वहण के साथ साथ आपने शोध और अध्ययन में भी अपनी दक्षता को साबित किया है। आपके शोध पत्र देश-विदेश के शोध पत्रों में न सिर्फ प्रकाशित हुए बल्कि इनके लिए आपको सराहना और सम्मान भी मिलता रहा है।

डॉ० भारती कश्यप के सामाजिक सरोकार, सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन अभियान, विजन फॉर यंग झारखण्ड अभियान एवं नेत्रदान जागरूकता अभियान और अंधत्व के खिलाफ उनके जंग की प्रतिबद्धता न सिर्फ प्रणम्य है वरन् झारखण्ड के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह कहना उचित होगा कि आज जिस नारी सशक्तिकरण सम्मान से उन्हें नवाजा जा रहा है, वो उसकी न सिर्फ एक योग्य पात्रा हैं, वरन् उनकी कीर्ति से इस सम्मान का गौरव भी बढ़ा है।

आडवाणी ने किया ‘अटलनामा’ का लोकार्पण

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पुस्तक में 57 नामचीन लोगों के विचार संकलित

नई दिल्ली। ‘भारत रत्न’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर केंद्रित पुस्तक ‘अटलनामा’ की पहली प्रति नवरात्र के दौरान भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को भेंट की गई। इस पुस्तक में भारत के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, पूर्व उप-प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक, भाजपा अध्यक्ष, कई केंद्रीय मंत्री, कई मुख्यमंत्रियों, सांसद व कई नेताओं, पत्रकारों के विचारों को संजोया गया है। पुस्तक का संपादन और संयोजन पत्रकार अनंत अमित ने किया है।

नई दिल्ली के पृथ्वीराज रोड स्थित उनके सरकारी आवास पर पत्रकार अनंत अमित ने उन्हें यह पुस्तक भेंट की। इस दौरान पत्रकार सुभाष चंद्र और गुड़िया सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने पुस्तक के अधिकतम विचारों को देखा और पढ़ा। उन्हांने इस कार्य की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक हमारे साथी और देश के प्रधानमंत्री को समझने में काफी सहायक होगा। इसके लिए उन्होंने साधुवाद दिया।

बता दें कि इस पुस्तक का प्रकाशन सरोजिनी पब्लिकेशंस ने किया है। 200 से अधिक पृष्ठों वाली इस पुस्तक में 57 नामचीन लोगों के विचार संकलित किए गए हैं। पत्रकार अनंत अमित कहते हैं कि आज हमारे विचारों में ‘भारत रत्न’ अटल विराजते हैं और हमेशा मौजूद रहेंगे। साल 2007 में उनसे चंद मिनटों की मुलाकात को आत्मसात कर लूं, तो लक्ष्य हासिल कर लूंगा। पत्रकारीय जीवन में कई नेताओं से मिलने का मौका मिला। बिहार से झारखंड होते हुए देश की राजधानी दिल्ली आया। कई नेताओं से मुलाकात हुई। साक्षात्कार किया। उनकी राजनीति और सामाजिक प्रतिबद्धता को करीब से जानने को मौका मिला। लेकिन, अटल जी जैसा व्यक्तित्व विरले रहा। न भूतो न भविष्यति। इसलिए मैंने इस पुस्तक पर काम करने का निर्णय लिया।

मेडिकल रूम से रैंप का रंगबिरंगा सफर

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नई दिल्ली। कुछ विरले ही होते हैं, जो वर्षों बाद भूली-बिसरी ख्वाहिश, शौक और तमन्नाओं को अमलीजामा पहना पाते हैं। कुछ ऐसी शखस्यित हैं ट्रिची, तमिलनाडू की रहने वालीं 46 वर्षीया डॉ. दीपा मुक्खुनधम। जी हां, इन्हें शखस्यित कहना लाजिमी है। कारण ये पेशे से डॉक्टर, गाइनोकॉलिजिस्ट हैं। पिछले बीस वर्षों से डॉ. दीपा व्यासायिक गाइनोकॉलिजिस्ट हैं। महिलाओं की सेवा कर रही हैं। ऐसे में इन्हें इज्जत देने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
 इनका सफर बेहद रोमांचक है। कारण पिछले सप्ताह इन्होंने द उमराओ होटल, नई दिल्ली में आयोजित ब्यूटि प्रतियोगिता में सेकेंड रनरअप डेजल मिसेज इंडिया व्लर्ड क्वीन और मिसेज साउथ इंडिया क्वीन 2018 का खिताब जीता है। बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि एमबीबीएस की तैयारी से पहले वे शौकिया मॉडलिंग करती थीं। फिर एमबीबीए की पढ़ाई और मेडिकल करियर में इतना मशगूल हो गईं कि अपने मॉडलिंग के शौक को दबाना पढ़ा। मेडिकल करियर में गहरी पकड़ बनाने के बाद बीस साल पुराने शौक को उजागर किया। इसका पूरा श्रेय डॉ. दीपा अपने पति डॉ. मुक्खुनधम को देती हैं। बता दें कि इनके पति पेशेवर एनथिजियोलोजिस्ट और क्रिटिकल केयर फिजिशन हैं। गर्व से डॉ दीपा कहती हैं कि जब मेरे पास मिसेज इंडिया का ऑफर आया, तब मेरे पति ने मेरा साथ दिया और कहा कि तुम मेडिकल क्षेत्र में स्थापित डॉक्टर हो। अब थोड़ा समय अपने पुराने, भूले-बिसरे शौक को दो।
आगे डॉ दीपा बताती हैं कि पति के स्पोर्ट और बच्चों का साथ और अपनी लगन के बाद ही मैं यह कॉम्पिटिशन जीत पाई हूं। इस पूरे सफर में इनके साथ इनकी 17 वर्षीय बेटी साथ रही। जिसे भी मां की तरह मॉडलिंग से लगाव है। सेकेंड रनरअप डेजल मिसेज इंडिया का खिताब जीतने के बाद डॉ दीपा देश की महिलाओं को संदेश देती हैं कि वे अपने स्वास्थ के प्रति सजग रहें। वे स्वस्थ होंगी तो परिवार स्वस्थ होगा। शौक को दबाएं नहीं, पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ शौक को निखारेंगी। इससे सिर्फ शौक की पूर्ति नहीं होगी, बल्कि पॉजिटिव एनर्जी का आपमें इजाफा होगा। यही पॉजिटिव एनर्जी आपसे अनकों अच्छे काम करवाएगी।

विशेष लगन से कार्य करने को प्रोत्साहित करता नवरात्रि पर्व- कुलनीत सुरी, नेशनल सेक्रेटरी, आईसीसीआई

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नईदिल्ली- इंटीग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के नेशनल सेक्रेटरी कुलनीत सुरी ने कहा कि दुर्गा पूजा का पर्व हमें एक साथ कई संदेश देता है। नवरात्रि आराधान तन मन और इंद्रीय संयम साधना की उपासना है, उपवास से तन संतुलित होता है। कुलनीत सुरी ने कहा तन के संतुलित होने पर योग साधना से इंद्रियां संयमित होती है। इंद्रियों के संयमित होने पर मन अपनी आराध्या मां के चरणों में स्थिर हो जाता है।

कुलनीत सुरी ने शक्ति उपासना के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि जिसने अपने मन को स्थिर कर लिया वह संसार चक्र से छूट जाता है। संसार में रहते हुए उसके सामने कोई भी सांसारिक विध्न-बाधाएं टिक नहीं सकती। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के हर त्योहार के पीछे सामाजिक कारण होता है। दुर्गा पूजा भी मनाने के पीछे भी सामाजिक कारण है। दुर्गा पूजा अनीति, अत्याचार तथा बुरी शक्तियों के नाश के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है। दुर्गा पूजा अनीति, अत्याचार तथा तामसिक प्रवृत्तियों के नाश के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है।

कुलनीत सुरी ने कहा कि दुर्गा पूजा खास तौर पर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। जो नौ दिनों तक मनाया जाता है। यह पर्व विशेष संदेश देता है जहां उसे सदैव सद्विचार लाने और विशेष कार्यों को विशेष लगन से करने को प्रोत्साहित करता है। इंटीग्रेटेड चैंबर्स कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के नेशनल सेक्रेटरी कुनलीत सुरी ने कहा कि दुर्गा मां भक्ति का आधार है इस खास पर्व पर देशवासियों को शुभकामनाएं।

 

 

अपने पैसे को सुरक्षित रखे हमारे साथ- संजीव गर्ग, फाइनेंसियल एडवाइजर

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संजीव गर्ग। निवेशक सलाहकार। इनकी सलाह है कि अगर आपका कोई ऐसा निवेश जो फिजिकल संदर्भ में है और किसी कारण वंश पैसा नहीं मिल पा रहा है तो संपर्क कर सकते हैं। हर तरह के समस्या का समाधान देने को तैयार है। निवेशक को ऐसे निवेश के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। संजीव गर्ग से संवाददाता मानवेंद्र की खास बातचीत।

-सेबी के नियम के अनुसार अब फिजिकल शेयर ट्रांसफ्रर नहीं होंगे। ऐसे में क्या है उपाय।

सेबी ने कहा है कि जिनके पास भी फिजिकल शेयर हैं उसको डिमेट में ट्रांसफ्रर कर लें। उससे समस्या का समाधान होगा। निवेश का पैसा अब डिमेट अकाउंट में होगा। हम आपको जानकारी दे दें कि कई तरह के निवेश है जिसमें लाखों करोड़ों रुपए आज भी जमा है जिसका कोई क्लेम नहीं है।

-केवल शेयर ही नहीं निवेश के अन्य तरीके में भी बहुत सारे पैसा अटका हुआ है जिसके कोई दावेदार नहीं है।

आपको जानकार हैरानी होगी कि केवल शेयर में जो पैसा अटका हुआ है वह 5 लाख करोड़ से ज्यादा है। वहीं एलआईसी में करीब 15 हजार करोड़ रुपए हैं। तो पीपीएफ में 40 हजार करोड़ रुपया है जो अनक्लेम है। कॉरपोरेट डिविडेंट में करीब 4 हजार करोड़ पड़ा है जिसपर कोई क्लेम नहीं है। ऐसे ही बैंकों में 5 हजार करोड़ है तो पोस्ट ऑफिस में हजारों करोड़ से ज्यादा है। इसका मतलब है कि बहुत सारा पैसा निवेशक का ब्लॉक है जिसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

-वजह क्या रही होगी। आखिर क्यों नहीं क्लेम कर पा रहे हैं निवेशक।

इसकी वजह यह होती है कि कुछ के कागज खो गए। कोई आपदा में कागज गुम हो गए। आग लग गई। अभी कुछ वर्ष पहले उत्तराखंड में जलजला आया था ऐसे आपदा में कागज गायब हो जाते हैं। कोई अता पता नहीं होता है। इसमें और वजह होती है कि निवेशक की मृत्यु हो गई उनके पैसे निवेश है जिसका वारिश को मालूम ही नहीं। कई बार ऐसा भी होता है कि निवेशक अपना हस्ताक्षर को मैच नहीं करा पाता है। पहले कोई और हस्ताक्षर किया हो और अब कोई और हस्ताक्षर चला रहा हो ऐसे में समस्याएं आती हैं। कुछ निवेशकों के पासे ऐसे निवेश होंगे जब कंपनियों के नाम बदल गए। पहले कुछ नाम थे अब कुछ और हो गए। कोई भी ऐसा निवेश हो कोई कागज हो हम मदद कर सकते हैं। आपके एस्टेट को ठीक तरीके से ट्रांस्फ्रर करने में।

-आप कैसे समाधान देंगे। आपसे कैसे कोई संपर्क कर सकता है। विस्तृत जानकारी दें.

अलग अलग समस्या का अलग अलग समाधान है। आप समस्या बताए उसमें हम अवश्य मदद करेंगे। आप अपने खोए हुए रुपए का अपने काम में इस्तेमाल कर सकते हैं। आपने पिछले दिनों सुना होगा कि बुजुर्ग के द्वारा किए गए निवेश आज वह 30-40 करोड़ का हो गया। ऐसे हो सकता है। किसी भी तरह समस्या का हम समाधान देंगे। हमारा ईमेल आईडी है recoveryourwealth@gmail.com और हमारा मोबाइल नंबर 9310521519.

-आप कैसे समाधान देंगे जबकि अलग अलग तरह के निवेश हैं।

हमारे पास पूरी टीम है। अलग अलग कार्यों को लोग देखते हैं। हम आपकी मदद करते हैं। जिसकी जैसी जरूरत होगी उसकी मदद करने के लिए हमारी टीम पूरी तरह से तैयार है।

रैम्प वाॅक करना अलग अनुभूति देती है: प्रियदर्शिनी

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नई दिल्ली। आमतौर पर जो एक बार छूट जाता है, वह छूट ही जाता है। महिलाओं के जीवन की अमूमन यही कहानी होती है। लेकिन, कुछ खास महिलाएं होती हैं, जो अपनी जीवटता के बूते नया मुकाम गढती चली जाती है। ऐसी ही बेहद खास हैं प्रियदर्शिनी राजकुमार। राजधानी दिल्ली में इसी महीने पहली तारीख यानी एक अक्टूबर को डेजल मिसेज इंडिया वल्र्ड क्लासिक 2018 का ताज मिला है।
कोई भी मुकाम एक दिन में नहीं मिलती है। इसके लिए मेहनत करना होता है। लगन से काम करना होता हैं। मूल रूप से कश्मीर से ताल्लुक रखने वाली प्रियदर्शिनी चेन्नई में रहती हैं। उन्हें जम्मू-कश्मीर के संग तमिलनाडु की कला-संस्कृति की बेहतर समझ है। तमिल सिनेमा में अपनी कला का जौहर दिखा चुकी हैं। तमिल फिल्म कवण में सपोर्टिंग रोल को काफी सराहा गया। परिवार और संगी-साथियों ने हमेशा से हौसला अफजाई की है। इसके साथ ही साल 2015 में रेमो, अक्षम येनबाडू मदामाई अडा में काम करने का अनुभव बेहतर रहा है। वो कहती हैं कि जल्द ही एक-दो प्रोजेक्ट फाइनल होने वाले हैं, उसकी जानकारी जल्द ही लोगों से शेयर करूंगी।
मन में कोई इच्छा दबी हो, तो उसे समय पर पूरा कर लेना चाहिए। मगर उसके लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पडती है। 43 वर्षीय प्रियदर्शिनी बताती हैं कि तमिल सिनेमा का अनुभव बेहतर रहा। कला-संस्कृति के क्षेत्र में लगातार काम करती रही। काॅलेज के दिनों में अंग्रेजी नाटक में काम करने का अनुभव रहा है। बतौर नाटक कलाकार पुरस्कार भी मिला। वो बताती हैं कि भारत नाटयम की प्रशिक्षित कलाकार के रूप् में कई जगह प्रसिद्धि मिली, लेकिन मन में कसक थी कि कभी रैंप पर वाॅक नहीं किया। मानो यह अधूरा रह गया हो।
कहते हैं न कि मन में ईच्छा हो और सही मार्ग दिखाने वाले मिल जाएं, तो हर मुकाम हासिल हो जाती है। ऐसा ही कुछ हुआ जब पारिसा कम्युनिकेशन्स की डायरेक्टर तबस्स्मुम हक से बात हुई। मुलाकात हुई। प्रियदर्शिनी बताती है कि तबस्सुम जिस प्रकार से हम जैसे लोगों को मोटिवेट करती हैं। कंफिडेंस जगाती है, वह काबिलेतारीफ है। उनकी पूरी टीम हर प्रतिभागी को बारीक से बारीक बात बताती है। यही कारण है कि राजधानी दिल्ली मेंएक अक्टूबर को मुझे डेजल मिसेज इंडिया वल्र्ड क्लासिक 2018 का ताज मिला।
चेन्नई में समाजसेवा कर रही है अदाकारा को दिल्ली आकर मुकाम हासिल करना कैसा लगा ? प्रियदर्शिनी कहती हैं कि पहले मन में कई तरह की घबराहट थी। लेनिक, जब एक बार डेजल के लोगों से मिली। देश के कई भागों से आए हुई प्रतिभागियों से मिली, तो आत्मविश्वास आता गया। क्लासिक कैटेगरी में कई दूसरे लोग भी थे, लेकिन मुझे खुद पर भरोसा था। मेरे परिवार ने भी मुझे बूस्ट किया। नतीजा, आप सबके सामने है। जिस प्रकार से उमरांव में रैम्प पर चली, खूब फोटोशूट किया। सबसे अधिक खुशी इस बात को लेकर भी है कि इसके साथ ही ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेंस को लेकर हमने अपनी भागीदारी दी।
इस दौरान कोई बेहद खास अनुभव ? प्रियदर्शिनी कहती हैं कि फाइनल राउंड में मेरे साथ मिसेज मध्य प्रदेश, मिसेज तेलंागाना थी। जजेज ने पूछा कि महिला का सबसे बेहतर रूप कौन-सा है ? मैंने कहा, मां का। मातृत्व से बढकर कोई सुख नहीं है। मां है तो हम हैं। किसी बच्चे के लिए मां जितना सुखद होती हैं, मां बनना उससे कई अधिक स्वर्गिक अनुभूति कराता है। मुझे लगता है शायद यही जवाब उन्हें पसंद आया और मुझे डेजल मिसेज इंडिया वल्र्ड क्लासिक 2018 का ताज मिला। वो कहती हंै कि जल्द ही मैं अंतर्राष्ट्ीय मंचों पर रैम्प वाॅक करना चाहती हूं। जिस प्रकार से तबस्सुम मैम और मेरे परिवार का सपोर्ट है, मुझे पूरा भरोसा है कि मंजिल हासिल कर लूंगी।

सीईजीआर का रिसर्च मैथोदोलॉजी पर बुक

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नईदिल्ली-

सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च (सीईजीआर) ने रिसर्च मैथोदोलॉजी पर विशेष बुक तैयार किया है। जिसमें विशेषज्ञों की टीम ने विशेष रूप से अपना योगदान दिया है। इस बुक को खास तौर पर पांच एडिटर की टीम ने एडिट किया है जिसमें डॉ केके अग्रवाल, प्रो डॉ के पी ईसाक, प्रो डॉ केकेएस भाटिया, प्रो. डॉ केके रैना, प्रो. डॉ भरत राज सिंह शामिल हैं। सीईजीआर के डायरेंक्टर रविश रोशन ने कविता की विशेषता बताते हुए कहा कि इस बुक में खास तौर पर सरकार द्वारा चलाया जा रहा मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया कैंपेन का ध्यान रखा गया है। आज भी रिसर्च और डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च नहीं किया जा रहा है। विगत बीस वर्षों से देखे तो मात्र 0.6 फीसदी ही इसपर बजट खर्च होता है जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। सीईजीआर रिसर्च और ग्रोथ पर खास ध्यान रखता है।

रविश रोशन के कहा कि निश्चित तौर पर रिसर्च के फिल्ड में यह बुक मील का पत्थर साबित होगा जिसमें 40 से अधिक सीनियर एकेडमिशियन और कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स खास तौर पर योगदान दिए हैं। गौरतलब है कि सीईजीआर ने अभी तक 13 बुक पब्लिकेशन किए हैं जिसकी खास तौर पर एकेडमीक खास मांग है।

दुनिया को अपने तरीके से चला सकते हैं दिव्यांग : मनोज तिवारी

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नई दिल्ली। सांसद व दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि कई ऐसी मिसालें हैं और मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि दिव्यांग की इच्छाशक्ति काफी प्रबल होती है। वो आपके साथ आगे बढ सकते हैं। हां, कुछ विधि का विधान है, जिससे वो विकलांगता के शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की सहायता करके मुझे अपार खुशी की अनुभूति होती है। मेरा अनुभव रहा है कि दिव्यांग अपने हिसाब से दुनिया को चला सकते हैं। इसलिए समाज को इन्हें कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए।
असल में, मनोज तिवारी एसडीआरएस द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नेशनल कांग्रेस को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन वसंत कुंज के इंडिया स्पाइनल इंजुरी सेंटर हॉस्पिटल के सभागार में किया गया था। इस अवसर पर सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि साल 2011 की जनगणना के अनुसार, 2.68 करोड लोग देश में विकलांग हैं, जिसमें 45 प्रतिशत लोग शिक्षा से दूर हैं। सांसद ने एसडीआरएस संस्था का जिक्र करते हुए कहा कि यह संस्था और इसके अध्यक्ष डॉ जीएन कर्ण बेहतर कार्य कर रहे हैं कि दिव्यांगों को शिक्षित करने और जागरूक करने के लिए इस तरह का आयोजन कर रहा है।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मीडिया सह प्रभारी संजय मयूख ने कहा कि स्वयंसेवी संस्था एसडीआरएस बेहतर कार्य कर रही है। हम जैसे सामाजिक लोगों से जब जो सहायता होगी, हम लोग दिव्यांगों के लिए तैयार हैं। हमें इस आयोजन में अपने अनुज मनीष सिंह के साथ आकर बेहद खुशी हो रही है। दिल्ली प्रदेश भाजपा पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष मनीष सिंह ने भी दिव्यांगों के प्रति संवेदना प्रकट की। इस दौरान विकलांगों को स्वचालित व्हील चेयर भी प्रदान किया गया।
बता दें कि सोसाइटी फॉर डिसेबिलीटी एण्ड रिहेबिलिटेशन स्टडीज, नई दिल्ली  तत्वावधान में ‘‘भारतीय विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा हेतु विकलांगता अध्ययन के पाठ्यक्रम का विकास’’ विषय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान पाँच सूत्रीय मांग-पत्र पारित किया गया। पारित मांग पत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालय तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रमों में विभिन्न स्तरों पर विकलांगता अध्ययन के पाठ्यक्रमों का समावेश किया जाना, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विकलांगता अध्ययन के शिक्षण तथा शोध को बढ़ावा देने के लिए अनुदान/वित्तीय सहायता का प्रावधान किया जाना तथा भारत सरकार तथा राज्य सरकारों के महत्वपूर्ण पदों पर विकलांग व्यक्तियों को प्रतिष्ठित किया जाना शामिल है।
इस कार्यक्रम में एक स्मारिका के विमोचन के साथ-साथ दिल्ली विश्वविद्यालय तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के 10 विकलांग मेधावी छात्रों को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ई.सी.जी.सी. लिमिटेड द्वारा प्रायोजित मोटरचालित तीन पहिये वाली स्कूटी तथा बैटरीचालित ह्वील चेयर प्रदान किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए जे.एन.यू. के विकलांगता अध्ययन विशेषज्ञ तथा संस्था के मानद अध्यक्ष डॉ. जी. एन. कर्ण ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में विकलांगता अध्ययन को ज्ञान की एक शाखा के रूप में विकसित करने तथा भारत सरकार से मान्यता दिलवाने की दिशा में संस्था की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए पाठ्यक्रम विकास की महत्ता को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इग्नू के प्रो. पी.आर. रामानुजम ने किया तथा इस मौके पर कई गणमान्य लोगों ने विचार व्यक्त किए, जिनमें  एस. के झा, भा. प्र. से. ;उप-महानिदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, भारत सरकार, डॉ. एस. के. प्रसाद उप-मुख्य विकलांगता आयुक्त, भारत सरकार, डॉ. ज्ञानतोष झा ;प्राचार्य, ए.आर.एस.डी. कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, सृष्टिराज अम्बष्ट उप-महाप्रबन्धक, ई.सी.जी.सी. लिमिटेड तथा डॉ. पी.एन. लाभ के नाम विशेषतः उल्लेखनीय है। सम्मेलन में देश के विभिन्न भागों से विकलांगता अध्ययन के विशेषज्ञ भागीदारी कर विकलांगता अध्ययन में बी.ए./बी. एस-सी., एम.ए./एम. एस-सी., एम.फिल, पी-एच. डी. तथा स्नातकोत्तर डिप्लोमा की रूप रेखा तय करेंगे।

जीवन देती ही नहीं, निखारती है डॉ जुबस्मिता सैकिया

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नई दिल्ली। असम की भूमि शक्ति उपासकों के लिए एक पवित्र भूमि है। इसी भूमि से एक स्त्री लोगों को जीवन देने के लिए आती हैं और स्वयं भी अपने जीवन को निखारती है। अपने जीवन में कार्यों के माध्यम से वह संदेश देती है कि जीवन रूकने के नाम नहीं है। किसी मोड़ पर यदि परिस्थितियां अनुकूल नहीं भी हो, तो समय आने पर उसे नया रूप दिया जा सकता है।
हम बात कर रहे हैं डॉ जुबस्मिता सैकिया की। डेजल मिसेज इंडिया वर्ल्ड 2018, मिसेज इंडिया कलैण्डर हंट 2018, डेजल मिसेज नॉर्थ इस्ट इंडिया 2018, ग्लैम मिसेज फोटोजेनिक नॉर्थ इस्ट 2018 जैसे अवार्डस आज इनकी झोली में है। खुद को ग्लोबली प्रूव करना है। वो कहती हैं कि कोशिश करेंगे, तो कामयाबी यकीनन मिलती ही है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है।
वो पेशे से डॉक्टर है। पिता और पति डॉक्टर हैं। सास भी डॉक्टर हैं। अमूमन लोग डॉक्टर जैसे पेशे में आने के बाद जीवन को सफल मान लेते हैं। लेकिन, जुबस्मिता सैकिया ने अपने शौक को पूरा किया। जोशो-जुनून को परवाज दिए। नतीजा, आज वो महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बनी हैं।
असम के एनसी हिल्स जो अब दीमा हसाउ जिला कहलाता है, में जन्मी जुबस्मिता ने अपनी शुरुआती शिक्षा यहीं से की। पढाई में अव्वल रही। पिता डॉ प्रदीप सैकिया को जब से व्हाइट गाउन में देखती, खुद भी तभी से डॉक्टर बनने का शौक आया। इस शौक को पूरा किया। मां नीरू सैकिया ने बचपन से लेकर पूरी पढाई में खूब हौसलाअफजाई की। गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। इसी दौरान शादी हुई। खुशकिस्मत रही कि पति भी डॉक्टर मिले। डॉक्टर अरण्य राजन पाठक। शादी के बाद पढाई जारी रही। अभी पीजी कर रही है।
बचपन से एक शौक था मॉडल बनने का। रैंप पर चलने का। खुद को पब्लिकली प्रूव करने का। इंटरनेट की दुनिया हमारे कई सपने को सच कर देता है। सोशल साइटस फेसबुक के माध्यम से डेजल का नाम सुना। पारिसा कम्युनिकेशंस की मुख्यि तबस्सुम से संपर्क हुआ। मानो रास्ता मिल गया हो। उसी दरम्यां पारिसा कम्युनिकेशंस की एक इवेंट नॉर्थ इस्ट में होने वाली थी डेजल।
जुबस्मिता बताती है कि पहले फेसबुक और बाद में फोन कॉल पर जिस प्रकार से तबस्सुम मैडम ने सपनों की उड़ान को परवाज दिए, वह किसी सफल मेंटर के बूते की बात है। आज जिस मुकाम पर हूं, जिन मंचों से अवार्ड हासिल किया है, उसमें तबस्सुम मैडम का काफी सपोर्ट रहा है। ऐसा कोई अपना ही किसी के लिए करता है।
जुबस्मिता कहती हैं कि किसी भी शादी-शुदा महिला की सफलता में उसके पति और सास-ससुर का बेहद अहम रोल होता है। यदि यहां से अनुमति न मिले, तो आपके सपनों का कत्ल होता है। वो खुशकिस्मत है कि उसे डॉक्टर अरण्य राजन पाठक जैसे पति मिले, जो हर निर्णय में साथ निभाते हैं। असम से दिल्ली तक साथ आते हैं। हर एक गतिविधि को गति प्रदान करते हैं। सास डॉ रूपाली बरूआ और ससुर श्री तारिणी कांत पाठक का साथ नहीं होता, तो आज कुछ भी शायद नहीं होता। इसलिए जरूरी है कि आपका परिवार आपने सपने को पूरा करने में आपका साथ दें।
डॉ जुबस्मिता बताती हैं कि पेशे से बेशक मैंने डॉक्टरी को चुना, लेकिन सपना मॉडलिंग का है। इंटरनेशल रैंप पर जिस दिन चलकर अपने सपने को साकार करूंगी, वह दिन मेरे जीवन का सबसे खास दिन होगा।

चेन्नई की अनु कल्याणाराघवन चुनी गई डेजल मिस इण्डिया वर्ल्ड

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नई दिल्ली। खुले आसमान के  नीचे मध्यम संगीत की धुन पर थिरकती सुन्दरियों ने अपनी छठा बिखेरी तो हर किसी की सांसे थम सी गई। मौका था सौन्दर्य प्रतियोगिता डेजल मिस एण्ड मिसेज इण्डिया वर्ल्ड के आयोजन का। परीसा कम्यूनिकेशन द्वारा उमराव रिजार्ट में आयोजित इस प्रतियोगिता में चेन्नई की अनु कल्याणाराघवन मिस इण्डिया वर्ल्ड चुनी गई। फर्स्ट रनर-अप का ताज चेन्नई की प्रांशु तिवारी के नाम रहा तो सेकेण्ड रनर-अप के रूप मे आंध्र प्रदेश की पल्लवी चुनी गई।
बता दें कि ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य के  साथ आयोजित इस प्रतियोगिता के  पंजाब की काम्या चौहान मिसेज इण्डिया वर्ल्ड का खिताब जीतने में सफल रही। फर्स्ट रनर-अप के रूप में गुजरात की जेनी मेहता तथा आसाम की जुबिशमिता सैकिया चुनी गई। वहीं, कर्नाटक की विदया रावल और तेलांगाना की दिपशिखा राठौर सेकेण्ड रनर-अप चुनी गई। क्लासिक श्रेणी में तमिलनाडु की प्रियदर्शिनी राजकुमार विनर चुनी गई। प्रियदर्शिनी तमिल सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। इस श्रेणी में मध्यप्रदेश की अनिमा कुजूर फर्स्ट रनर-अप तथा तेलांगना की प्रिया वर्मा सेकेण्ड रनर-अप चुनी गई।
इसके अलावा क्वीन श्रेणी मे यूक्रेन रशिया से प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आई सीमा वशिष्ठ विनर चुनी गई। फर्स्ट रनर-अप का ताज तमिलनाडु की डा. अनिता तथा सेकेण्ड रनर-अप का ताज डा दीपा मुखुनधान के नाम रहा। परीसा कम्यूनिकेशन की निदेशक तबस्सुम हक ने बताया कि प्रतियोगिता से पूर्व तीन दिन तक सभी प्रतियोगियों का विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण भी दिया गया। क्योंकि प्रतियोगिता का मकसद केवल रैम्प -वॉक नहीं है, बल्कि हमारा वास्तविक उद्देश्य महिलाओं का जागरूक करना है। प्रशिक्षकां में शहर के जानेमाने डायटिशन डॉ वरूण कात्याल, हिन्दी सिनेमा जगत में स्टाईल का प्रशिक्षण देने वाली शाईनी सोनी, पूर्व सिविल सर्विस अधिकारी संजीव पाण्डे, धर्मशिला नारायणी कैंसर
अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कनिका शर्मा सूद, ग्रूमर एवं मोटीवेटर डॉ लथा ए. कृष्णा, फिटनेस ट्रेनर मीनाक्षी तथा कोरियोग्राफर भूमिका भण्डारी शामिल थे।