बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनो जगह अपनी अलग मुकाम बनाने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इन दिनों कुछ खासे चर्चा में है. प्रियंक चोपड़ा ने जब से सलमान खान और डायरेक्टर अली अब्बास की फिल्म “भारत” को न कहा है इस बात की भी चर्चा चारों ओर खूब हुई. अब एक नई जानकारी सामने आ रही है कि प्रियंका चोपड़ा ने संजय लीला भंसाली की फिल्म को मी न कह दिया है.
जानकारी के अनुसार संजय लीला भंसाली एक गैंगस्टर ड्रामा बनाने जा रहै है जिसमें वो प्रियंका चोपड़ा को साइन करना चाहते थे लेकिन बताया जा रहा है कि प्रियंका चोपड़ा ने संजय लीला भंसाली की इस मूवी का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है जिसकी चर्चा चारों और हो रही है. प्रियंका चोपड़ा के संजय लीला भंसाली की फिल्म को न कहने के बाद बताया जा रहा है कि इस फिल्म को फिलहाल रोक दिया गया है.
सूत्रों की अगर माने तो संजय लीला भंसाली सिर्फ प्रियंका चोपड़ा को ही इस मूवी के लिए साइन करना चाहते थे. वहीं यह भी बात सामने आ रही है कि प्रियंका चोपड़ा ने जब से संजय लीला भंसाली की फिल्म को न कहा है तब से किसी को भी संजय लीला भंसाली की इस मूवि के लिए कास्ट नहीं किया जा रहा है. बात अगर प्रियंका चोपड़ा की करे तो इससे पहले प्रियंका ने सलमान की फिल्म भारत को न कहा था जिसके बाद फिल्म भारत में प्रियंका की जगह केट्रीना कैफ को साइन किया गया है.
फिल्म भारत में प्रियंका की जगह अब सलमान के साथ फिल्म भारत में नजर आएगी. इसके अलावा खबर इस बात की भी है कि प्रियंका ने फिल्म भारत को न कहने के बाद एक हॉलीवुड प्रोजेक्ट को हां कर दिया है. वहीं बात अगर बॉलीवुड की करे तो प्रियंका ने एक बॉलीवुड फिल्म में भी दिखेंगी जिसमें वो स्काइ इज पिंक में एक्टर फरहान अख्तर के साथ नजर आएगी.
खैर प्रियंका चोपड़ा द्वारा दो फिल्में को लगातार ना करने के बाद चर्चाएं तो होनी है. अब देखना होगा कि क्या संजय लीला भंसाली अपनी आने वाली फिल्म में प्रियंका चौपड़ा के जगह किसी और को कास्ट करते है या नहीं.
एनडीए ने राज्यसभा उपसभापति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में जेडीयू के सांसद हरिवंश को चुना है. बात अगर जेडीयू सांसद हरिवंश की करे तो उनके नाम की धोषणा एनडीए द्वारा अधिकारिक तौर पर नहीं की गई है. वहीं जेडीयू सांसद हरिवंश का नाम राज्यसभा उपसभापति चुनाव में उम्मीदवार के रुप में सामने आने के बाद एनडीए की सहयोगी पार्टी शिरोमणी अकाली दल ने इस बात पर एतराज जताया है.
शिरोमणी अकाली दल राज्यसभा उपसभापति चुनाव में उम्मीदवार के रुप में अपने पार्टी के उम्मीदवार का नाम चाहती है. . इसके अलावा सूत्रों से ये भी जानकारी मिल रही है कि राज्यसभा उपसभापति चुनाव में उम्मीदवार के रुप में जेडीयू सांसद हरिवंश के नाम को लेकर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने खुद पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष प्रकाश सिंह बादल से इस मामलें में बात की थी. लेकिन फिलहाल मामला थोड़ा मामला अलग नजर आ रहा है.
सूत्रों से जानकारी ये भी मिल रही है कि इस बात से नाराज शिरोमणी अकाली दल राज्यसभा में उपसभापति चुनाव के दौरान वौटिंग के समय अनुपस्थित रही सकती है. अगर ऐसा होता है तो यह पहली दफा ऐसा होगा कि शिरोमणी अकाली दल एनडीए के साथ वोट नहीं करेगी. बात अगर भाजपा के सहयोगी दलों की करे तो भाजपा से शिवसेना भी फिलहाल नाराज चल रही है. शिवसेना ने अपनी नाराजगी अविश्वास प्रस्ताव में वोटिंग के समय अनुपस्थित रहकर दिखाई थी. राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है.
वहीं विपक्षी खेमें में एनडीए के मुकाबले संख्या बल अधिक है. राज्यसभा का उपसभापति चुनाव कड़ा होने वाला है इस बात के कयास इसी बात से लगाया जा सकता है. वहीं बात अगर शिरोमणी अकाली दल और शिवसेना की करे तो शिरोमणी अकाली दल के राज्यसभा में तीन सांसद है और शिवसेना के भी राज्यसभा में तीन सांसद है जिनका वोट एनडीए को मिलना जरूरी है.
अब राज्यसभा उपसभापति चुनाव इन सब के बीच होने जा रहा है लेकिन भाजपा अब शिरोमणि अकाली दल और शिवसेना को मनाते हुए किस प्रकार इस मसले को सुलझाती है ये तो समय ही बताएगा. बात ये भी सही है कि राजनीति में क्ब क्य हो जाए ये कहना मुशकिल है.
नेशनल एजुकेशन एक्सलेंस कॉन्कलेब का भव्य आयोजन इंटेग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) के तत्वाधान में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मल्टी परपस हॉल में किया जा रहा है। इस कॉन्कलेब में देश भर के शिक्षा के तमाम दिग्गज संबोधित करेंगे।
इंटेग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि 11 अगस्त को इंटेग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के तत्वाधान में नेशनल एजुकेशन एक्सीलेंस कॉन्कलेब का आयोजन किया गया है। इसमें देश भर के दिग्गज शिक्षाविद् भाग लेंगे। इस खास आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में सांसद राम कुमार शर्मा और सांसद जय प्रकाश यादव उपस्थित रहेंगे। सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इस कॉन्कलेब में एआईसीटीई के मेम्बर सेक्रेटरी एपी मित्तल, एकेएस यूनिवर्सिटी के चांसलर अनन्त सोनी, संस्कृत यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अजय राणा, एनडीआईएम के चेयरमैन वीएम बंसल, हिमालयन यूनिवर्सिटी व सीईजीआर के प्रेसिडेंट एनके सिन्हा, न्यू वन इंडिया के मैनेजिंग एडिटर अशीत कुणाल, वोल्टास के सीओओ और आईसीसीआई के वाइस प्रेसिंडेट सलील कपूर सहित कई अन्य वरिष्ठ विद्वजन संबोधित करेंगे। इस खास आयोजन में आज हायर एजुकेशन के दशा दिशा पर खास चर्चा होगी।
इंटेग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) के बारे में-
इंटेग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) उद्योग का विभिन्न क्षेत्रों के उद्यमियों, कारपोरेट, नीति, निर्माताओं, मीडिया, अकादमिक और शोधकर्ता का एक मजबूत नेटवर्क है। आईसीसीआई नियमित विचार-विमर्श, सर्वेक्षण, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच पुल का कार्य करता है। आईसीसीआई का विजन भारत की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने में भारत सरकार का सहयोग देना है।
बिते सप्ताह आधार हेल्पलाइन नंबर अचानक लोगों के फोन में अपने आप सेव होने की खबर सामने आई थी जिसके बाद लोगों को ये आशंका होने लगी कि कही उनका फोन हैक तो नहीं हो रहा और लोगों को अपनी प्राइवेसी की चिंता होने लगी. लेकिन इसके बाद गूगल ने इस बात की जिम्मेदारी ली की गूगल की और से कहा गया कि साल 2014 में ही यूआईडीएआई (UIDAI) और इसके अलावा 112 हेल्पलाइन नंबरों को एंड्रायड के सेटअप विजार्ट में कोड कर दिए गए थे.
वहीं गूगल ने ये भी कहा कि ये नंबर अगर एक बार अगर यूजर के कॉन्टेक्ट लिस्ट में आ जाए तो ये नंबर डिवाइस बदलने के बाद भी अपने आप नए डिवाइस में भी आ जाते है. वहीं गूगल ने इस पूरे मामलें को लेकर लोगों को हुई परेशानी के लिए खेद जताया और लोगो को आश्वस्त किया की एंड्रॉयड फोन में किसी भी प्रकार का अन ऑथराइज्ड एक्सेस नहीं हे और साथ में ये भी कहा की इस प्रकार कोई भी डिवाइस हैक नहीं हुआ है.
UIDAI ने कहा चिंता की कोई बात नहीं
अब जाकर यूआईडीएआई (UIDAI) ने भी यूजर्स को भरोसा दिलाया है कि उनके फोन में आधार हेल्पलाइन नंबर सेव होने के बाद भी उनके डेटा की चोरी नहीं की जा सकती है। इसके अलावा यूआईडीएआई (UIDAI) द्वारा ट्वीट कर इस बात को साफ किया गया कि पुराना नंबर सेव होने के बाद भी लोगों को घबराने की जरुरत नहीं है. इससे किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा.
वहीं यूआईडीएआई (UIDAI) ने लोगो से इस बात को भी कहा कि वे चाहे तो पुराना आधार हेल्पलाइन नंबर डिलीट कर सकते है और नया आधार हेल्पलाइन नंबर सेव कर सकते है जि कि 1947 है। इसके साथ ही यूआईडीएआई (UIDAI) ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने के लिए कहा है तथा ये भी कहा कि लोगों को तुरंत आधार की जानकारी चोरी होने की झूठी खबरों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देना चाहिए.
अपना वक्त जाया न करने को कहा
इसके अलावा यूआईडीएआई (UIDAI) ने लोगों से ऐसी अफवाहों को फार्वड करने में अपना वक्त जाया न करने की सलाह दी है। अब गूगल और यूआईडीएआई (UIDAI) दोनों ने ही लोगों को आधार हेल्पलाइन नंबर के उनके फोन अपने आप सेव होने और इससे आधार का डेटा चोरी होने और फोन हैक होने जैसी अफवाहों को खारिज कर लोगों को भरोसा दिलाया है चिंता करने की कोई बात नहीं है. इस तरह की अफवाहों पर ध्यान न दे . वहीं गूगल ने भी आधार हेल्पलाइन नंबर के लोगों के फोन के कान्टेक्ट लिस्ट में अपने आप सेव होने को लेकर बयान जारी किया था.
असम सरकार द्वारा जारी एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट में चालीस लाख लोगों के नाम शामिल नहीं होने को लेकर देश में बहस चल रही है. एकतरफ सरकार इसे राष्ट्र की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए इस मुद्दे पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का पक्ष रख रही है तो वहीँ विपक्ष, खासकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी इस मुद्दे को राजनीति रंग देने और तुष्टिकरण की सियासत करने में लगी हुई हैं. आज जब असम सरकार ने अवैध ढंग से रह रहे गैर-नागरिकों की पहचान करने की पहल की है, ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा पर एकजुटता दिखाने की बजाय विपक्ष द्वारा भ्रम और भय का वातावरण तैयार करने की कोशिश भी देखने को मिल रही है.
इस बहस को समझने के लिए हमें इतिहास में जाकर इसकी पड़ताल करनी होगी.दरअसल असम राज्य से जुड़ा यह मामला लगभग देश की आजादी के कालखंड जितना पुराना है. गौरतलब है कि 12 अगस्त1949 को संविधान सभा में रोहिणी कुमार चौधरी द्वारा सबसे पहले असम में पड़ोसी मुल्क से हो रहे घुसपैठ का मुद्दा उठाया गया था. अखबारों के हवाले से उन्होंने कहा था कि लगभग 3 लाख लोग (मुस्लिम) अवैध ढंग से असम में घुसपैठ किये हुए हैं, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उचित नहीं है. इस पर उस दौरान 1950 अंतरिम संसद द्वारा एक कानून भी लाया गया था.
आगे चलकर1951 भी एक एनआरसी बना था, लेकिन गोवाहाटी उच्च न्यायलय द्वारा वह खारिज कर दिया गया.इस मामले में एक नई प्रगति 1971 में हुई जब बांग्लादेश अस्त्तित्व में आया. हालांकि इससे पहले काफी संख्या में शरणार्थी भारत के असम और बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में प्रवेश कर चुके थे. शरणार्थियों की बढती संख्या और स्थानीय हितों पर चिंता जताते हुए तब वहां के छात्रों के संगठन ‘आसू’ ने 1978 से बड़ा आन्दोलन भी किया. यह आन्दोलन वहां के स्थानीय हितों की रक्षा और अवैध शरणार्थियों से होने वाले खतरे को लेकर था. इस आन्दोलन में कई छात्रों की जान भी गई थी.
यह आन्दोलन इतना प्रभावी और असम के लोगों की भावना से जुड़ा रहा अंतत: 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा असम एकॉर्ड पर दस्तखत कर, इन अवैध घुसपैठियों की पहचान और इन्हें बाहर करने के लिए नागरिकता क़ानून में एक नया बदलाव करना पड़ा. इस कानून (संशोधन) की आत्मा भी यह थी कि 1966 तक असम में आकर रहने वाले शरणार्थियों को सीधे नागरिकता सूचि में जगह दी जायेगी एवं इसके बाद और 25 मार्च1971 की आधी रात से पहले आये शरणार्थियों की पहचान करने के दस साल बाद उन्हें नागरिकता देने का प्रावधान था.अत: राजीव गांधी द्वारा किये गए उस असम एकॉर्ड के मुताबिक़ 25 मार्च1971 के बाद आये किसी भी अवैध ढंग से आये बांग्लादेशी को असम में रहने का और भारत की नागरिकता मिलने का प्रावधान नहीं था.
इसके बाद आने वाले जो भी बांग्लादेशी थे, वे घुसपैठी के रूप में असम में रह रहे हैं और उन्हें 1983 के IMDT कानून के अंतर्गत निकाल दिया जा सकता था. लेकिन IMDT को लेकर भी कांग्रेस ने अपने राजनीतिक स्वार्थ का खेल खेल दिया. इस कानून के अंतर्गत अपनी नागरिकता और असम में रहने की वैधता का प्रमाण उस व्यक्ति को नहीं देना था, जो अवैध ढंग से रह रहा हो. यह प्रमाण उस शिकायतकर्ता को देने का प्रावधान था, जो इस संबंध में शिकायत दर्ज कराता हो. जबकि 1946 के‘फोरेनार्स एक्ट’ के तहत यह दायित्व जिसके खिलाफ़ शिकायत आई है, उसका होना चाहिए. गौरतलब है कि 1983 का IMDT कानून सिर्फ असम राज्य में लागू किया गया था.
इस मामले अगला विषय एकबार फिर 2005 में तब सामने आया जब असम के वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की याचिका पर उच्चतम न्यायलय ने यह साफ़ कर दिया कि 1983 का IMDT कानून असंवैधानिक है. साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून की आड़ में बढ़ रही अवैध घुसपैठ की समस्या के कारण असम में जनसांख्यिक बदलाव हो रहे हैं और इसे उन्होंने अन्तराष्ट्रीय इस्लामिक कट्टरपन्थ से जोड़ा. गौरतलब है कि असम की भौगोलिक स्थिति का सामरिक स्तर पर भी और सुरक्षा के स्तर पर अत्यंत संवेदनशील महत्त्व है, लिहाजा, अवैध घुसपैठ की घटनाएँ एक बड़े खतरे के रूप में देखी जानी स्वाभाविक हैं.
जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार केंद्र में थी, तब 2003 में इस सरकार असम एकॉर्ड की मूल भावना को, जिसे कांग्रेस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था, सही रूप में लागू कराने हेतु नागरिकता नियम 2003 केसेक्शन-4 के तहत एनआरसी का प्रावधान किया. लेकिन ऐसा होने के महज कुछ समय बाद जब दुबारा कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आई , तब उसने इसे एकबार हीला-हवाली करते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया.एक सामाजिक संस्था द्वारा 2009 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायलय ने 2014 में कहा कि एनआरसी को समयबद्ध तरीके से तैयार किया जाए.
यह कोर्ट द्वारा कहा गया था. इसी निर्णय के आधार पर 31 दिसंबर 2017 को एनआरसी का पहला प्रारूप जारी किया गया और 30 जुलाई 2018 को दूसरा और अंतिम प्रारूप जारी किया गया. अगर किसी भारतीय नागरिक का नाम इस प्रारूप से छूट गया हो, तो उन्हें 7 अगस्त से 28 सितंबर तक इस गलती ठीक करने के लिए आवेदन का समय दिया गया है. इसके उपरान्त भी अगर कोई शिकायत हो, तो पहले ट्रिब्यूनल और फिर कोर्ट जाने का अधिकार है. सरकार द्वारा भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि केवल इस प्रारूप के आधार पर किसी को देश से बाहर नहीं निकाला जायेगा.
सवाल उठता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक ऐसे विषय जिसपर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लगातार चिंता व्यक्त की गई है और समय-समय पर उच्चतम न्यायलय ने भी इस मामले में टिप्पणी की है, को कांग्रेस द्वारा किन कारणों से ठंडे बस्ते में डालकर राष्ट्र की सुरक्षा और असम के मूल निवासियों के हितों को दरकिनार किया गया. आज जब केंद्र की सरकार और असम की सरकार ने कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप इसपर कार्यवाही की है तो आखिर कांग्रेस सहित पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार के विरोध की क्या वजह है.
जिस ढंग से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने इस पूरे मामले में असंवेदनशील रुख का परिचय दिया है, वह इस बात का प्रमाण है कि उन्हें राष्ट्र के हितों की कोई चिंता नहीं है बल्कि वे सिर्फ वोटबैंक और तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं. इस मामले में यह भ्रम प्रसारित करना भी विपक्ष की असंवेदनशीलता का परिचय देता है कि सरकार उन सभी लोगों को बाहर निकाल रही जिनके नाम इस प्रारूप में नहीं है. सही तथ्यों से जनता को गुमराह करके विरोधी दलों का इस राष्ट्र सुरक्षा से जुड़े विषय पर रुख कतई उचित नहीं है.
मशहूर गायक दिलेर मेंहदी का कहना है कि उनके गाने से कोई मोटिवेट होता है तो काफी उन्हें काफी अच्छा महसूस होता है। इसेक साथी ही उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि लोगों को मोटिवेशनल मिले। हमने हॉकी पर तीन फिल्में बनी है उसके सारे टाइटल सॉन्ग हमने गाए हैं।
दिलेर मेंहदी से Beyondindialive के संवाददाता मानवेंद्र कुमार ने खास बातचीत की ।
–आपने कई बेहतरीन गाने गाए हैं। पॉप संगीत में आपका कोई जोर नहीं है। आपको संगीत में बेहतरीन योगदान के लिए डायरेक्टेक की उपाधि दी जा रही है। कैसा महसूस हो रहा है।
जब हम गाते हैं तो निश्चिततौर पर सफल होना चाहते हैं। आज कई बेहतरीन गाने गाए हैं। ऐसे अवार्ड उपाधि से हौसला आफजाई होता है। यह लगता है कि जो हमने संगीत दिया या गाने गाये हैं वह बेहतरीन हुआ है। जिसके लिए सम्मान दिया जा रहा है। हमें जिस प्रकार से डायरेक्टेरेट की उपाधि दी जा रही है तय है कि हम और बेहतरीन कार्य करने की ओर अग्रसर होंगे।
-आपके कौन से गाने अभी आने वाले हैं। क्या कोई मोटिवेशनल गाना भी आ रहा है।
बिल्कुल कई गाने आ रहे हैं। इसमें अभी अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड में हमारे गाने आ रहे हैं। जिसमें टाइटल गाने हमारे ही है। हैप्पी भाग जाएगी पार्ट 2 में भी गाने गाये हैं। हॉकी पर तीन मूवी बनी उसके सभी टाइटल सॉग हमने गाये हैं।
–आपके टाइटल सॉंग के बाद हॉकी की टीम मैदान पर काफी अच्छा खेली है। कैसा महसूस होता है आपको।
इससे ज्यादा खुशी नहीं हो सकती। मोटिवेशनल मिलता है। हॉकी की टीम ने देश का नाम रोशन किया है। बहुत अच्छा लगता है। आने वाली मूवी गोल्ड , हॉकी के ऊपर ही है जिसको लोग सदियों तक याद रखेंगे। जैसे रंग दे बसंती को याद रखे हुए हैं।
-आपके गाने से मोटिवेशनल भी लोगों को मिलता रहा है।
निश्चिततौर पर हम आपको बता दें कि दंगल फिल्म का गाना मोटिवेशन के लिए हर सोमवार स्कूलों में गाया जाता है। ऐसे गाने को जब रिस्पांस मिलता है तो अच्छा लगता है।
-आपने संगीत कहां से सीखा। हमारा मतलब शुरुआत से है।
हमारी शुरुआती शिक्षा दीक्षा पटना साहिब में हुई। जहां हमारे पिताजी किरतनिया में थे। वहां ही हमारे गुरुजी भी थे। उसके बाद बस सिलसिला चल उठा।
भारत और अमेरिका के मजबूत रिश्ते किसी से छुपे हुए नहीं है. वर्तमान समय में भारत और अमेरिका हर मुद्दे पर एक दुसरे की मदद के लिए तैयार भी रहते है जो इन दोनों देशों के लिए जरूरी भी है. बात अगर ताजा खबर की करे तो अमेरिका ने भारत को एसटीए- 1 ( स्ट्रेटिजिक ट्रेड ऑर्थराइजेशन) का दर्जा दिया है. वहीं यह दर्जा अमेरिका द्वारा दो अन्य देशों को भी पहले दिया जा चुका है जिसमें दक्षिण कोरिया और जापान शामिल है.
जानकारी मिल रही है कि भारत को एसटीए- 1 का दर्जा अमेरिका से प्राप्त होने के बाद भारत को अमेरिका से हाईटेक्ऩोलॉजी प्रोडक्शन यानि अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मदद मिलेगी. वहीं जानकार, अमेरिका द्वारा भारत को एसटीए- 1 का दर्जा देने को चीन को जवाब देना माना जा रहा है.
बात अगर चीन की कि जाए तो चीन एनएसजी समूह का मेंम्बर है और बीते दो साल से चीन भारत को एनएसजी समूह में शामिल होने की राह में बाधा पैदा करता रहा है. बात अगर एसटीए- 1 के दर्जे की करे तो ये दर्जी उसी देश को दिया जा सकता है जब वो चार प्रमुख संगठन एनएसजी, मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम, अरेंजमेंट और अस्ट्रेलिया ग्रुप
(एजी) और वासेनार अरेंजमेंट का सदस्य हो.
अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मदद मिलेगी मदद
वहीं बात अगर भारत की करे तो ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले में भारत को एसटीए- 1 का दर्जा देने के लिए पूर्व के नियमों में थोड़ी ढील दी है. अब जब भारतॆ को एसटीए- 1 का दर्जा प्राप्त हो चुका है तो इससे भारत को अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मदद मिलेगी. वहीं बात करे तो भारत सिर्फ एनएसजी का समूह नहीं है, इसके अलावा मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम, अस्ट्रेलिया ग्रुप ( एजी ) और वासेनार अरेंजमेंट का सद्स्य है.
वहीं बात अगर इस भारत को मिले एसटीए- 1 दर्जे की करे तो इससे पूरे दुनिया में भारत का कद उंचा होगा है और इससे भारत को हाईटेक्ऩोलॉजी प्रोडक्शन यानि अंतरिक्ष और रक्षा के क्षेत्र में मदद मिलेगी. इसके साथ ही भारत का विकाश इन क्षेत्रों में और ज्यादा होगा.
बॉलीवुड के सदाबहार गायक किशोर कुमार की आज 89वीं बर्थ एनीवर्सरी है. इस सदाबहार गायक का जन्म 4 अगस्त 1929 को एक बंगाली परिवार में देश की आजाद पहले हुआ था. किशोर कुमार की आवाज में वो जादू था जो हर किसी को मदहोश कर देता था। किशोर कुमार ने सिंगिंग के साथ- साथ एक्टिंग में भी अपना जादू बिखेरा जिसे लोगो ने खूब पसंद किया. वे एक खुशमिजाज इंसान थे.
उनके द्वारा गाए गए गाने आज भी लोग बहुत सोख से सुनते है. किशोर कुमार उस दौर के गायत थे जिस समय मोहम्मद रफी की आवाज का जादू पूरी दुनिया में छाया हुआ था लेकिन उस समय किशोर कुमार के गानों ने खूब धूम मचाई और उनके द्वारा गाए गए गाने सदा के लिए अमर हो गए. किशोर कुमार ने एक से बढ़कर एक बॉलीवुड सुपरस्टार के लिए गाना गाया. किशोर कुमार एक ऐसे गायक थे जिनकी आवाज को हर कोई पसंद करता है.
जब किशोर दा के गानों का आकाशवानी से प्रसारण हुआ बंद
किशोर कुमार ने अपने जीवन में 1500 से अधिक गाने गाए जिसमें एक से बढ़कर एक गाने है. उन्होने चार शादियां की थी. बात अगर किशोर कुमार की करे तो उनके गानों में वो जादू अभी भी बरकरार है जिसेसे पूरी महफिल में चार चांद लग जाया करता है. एक समय उनके जीवन में ऐसा भी आया जब उनके गानों को आकाशवानी से प्रशारित करना बंद कर दिया गया. ऐसा इसलिए किया गया था क्योकि किशोर कुमार ने एक सरकारी समारोह में आने से मना कर दिया था। ये आपातकाल का समय था.
किशोर कुमार ने मायानगरी मुंबई में ली अंतिम सांस
किशोर कभी भी हार न मानने वाले इंसान थे. उनके गाए हुए गानों में आज भी वो झलक दिखती है. बात अगर किशोर कुमार की फिल्मों की करे तो उन्होंने कई फिल्मों में अपनी जादू बिखेरा जिसमें ह़ॉफ टिकट, पड़ोसन, प्यार दीवाना, एक राज , लड़का लड़की जैसी कई फिल्में है. इस सदाबहार गायक ने बहुत जल्द ही दुनिया को अलविदा कह दिया और 13 अक्टूबर 1987 को अपनी अंतिम सांस मायानगरी मुंबई में ली. किशोर दा तो चले गए लेकिन अपने पिछे अपने सदाबहार गाने को छोड़ गए जिसे हर उम्र के लोग बहुत पसंद करते है. आज किशोर दा के 89वीं हर कोई उन्हें याद कर रहा है.
एक कहावत है कि अगर आपको सच्चा मित्र मिले जाए तो वो किसी खजाने से भी बढ़कर होता है. जी हां हम बात कर रहे है दोस्ती और एक सच्चे दोस्त की जो कि सभी के जीवन में बहुत जरूरी होता है. एक सच्चा दोस्त ही होता है जो मुशकिल समस में हमारा साथ देता है. दोस्ती का पर्व इस बार भी धूमधाम से मनाया जाएगा.
इस बार फ्रैंडशीप डे 5 जुलाई को फेंडशीप डे मनाया जा जाएगा. फेंडशीप डे दोस्तों के बीच खास होता है. फेंडशीप डे के दिन लोग अपने दोस्तों को याद करते है. इस बार का फ्रैंडशीप डे 60वां फ्रैंडशीप डे होगा. लगातार 59 वर्षों से फ्रेंडशीप डे पूरी दुनिया भर में मनाया जा रहा है. फ्रेंडशीप डे को 1958 से आधारिक रूप से मनाया जा रहा है। इस दिन पूरी दुनिया में लोग अपने दोस्तों को याद कर फ्रैंडशीप डे की शुभकामनाएं देतो है.
इस दिन हो सके तो लोग अपने दोस्तों से मिलते है और कुछ समय अपने दोस्तों के संग कुछ समय बिताते है. इस दिन एक दोसत् दुसरे दोस्तों को फ्रैंडशीप बैंड बांधते है. बात अगर फ्रैंडशीप डे की करे तो इसकी शुरूआत सबसे पहले अमेरिका में हुई थी. इस दिन लोग अपने दोस्तों को मैसेज , शायरी, और कार्ड भेजकर भी फ्रेंडशिप डे विश करते है. आजकल तो whatsapp और facebook का जमाना है जहां लोग इस दिन अपने दोस्तों को डिजिटल मैसेज भेजकर फ्रैंडशीप डे विश करते है.
बात अगर दोस्ती की करे तो आजकल दोस्तो से बाते करना और उनसे टच में रहना आसान हो गया है क्योकि अब सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये अकसर अपने दोसेतों से टच में रहते है. इस दिन लोग अपने दोस्तों और बेस्ट फ्रेंड के साथ फोटो भी पोस्ट करके अपने दोस्तो को याद करते है. पूरी दुनिया में फ्रैंडशीप डे काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है. फ्रैंडशीप डे वैसे तो पहले पश्चिमी देशों में शुरू हुआ लेकिन भारत में इसकी लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है.
इस दिन लोग अपने दोस्तों की कलाई पर फेंडशीप बैंड बांधकर अपनी दोस्ती को और पक्का करते है. फ्रैंडशीप डे के कुछ दिन पहले से ही बाजारों में आपको फ्रैंडशीप बैंड बिकते नजर आ जाएंगे. युवाओं में फ्रैंडशीप बैंड का खूब क्रेज है. इस दिन युवा तरह- तरह के फ्रैंडशीप बैंड खरीदते है. ये दिन दोस्ती का होता है और इस दिन दोस्ती की फिजा चारों और बिखरी दिखाई देती है. इस बार भी फ्रैंडशीप डे भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा.
बीते दिन लोगों को एक नई परेशानी का सामना करना पड़ा. लोगों के मोबाइल फोन में आधार हेल्पलाइन नंबर अपने आप से सेव होने लगा जिसको लेकर सोशल मीडिया से लेकर चारों ओर इस बात पर चर्ची होने लगी और लोगों को प्राइवेशी का खतरा सताने लगा.
लोगों को लगने लगा की कहीं उनका फोन हैक तो नहीं हो गया. फोन में आधार हेल्पलाइन नंबर अपने आप सेव होने की जानकारी तब सामने आई जब ट्विटर पर कई लोगों ने आधार हेल्पलाइन नंबर के उनके फोन के कान्टेक्ट लिस्ट में अपने आप सेव हो जाने की बात सोशल मीडिया ट्विटर और फेसबुक के जरिए शेयर की. इसके बाद चारों और इस बात की चर्चा शूरू हो गई की कहीं उनका फोन हैक तो नहीं हो गया. इस बात की चर्ची दिन भर होती रही. वहीं अब इस विवाद के बीच एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनी गूगल ने माफी मांगी है. गूगल के द्वारा कहा गया कि अनजाने में नंबर जरूर सेव हुआ है लेकिन एंड्रायड सिस्टम हैक नहीं हुआ है.
इसके अलावा आधार की संस्था यूआईडीएआई (UIDAI) और टेलकॉम एसोसिएशन सीओएआई ने इस विवाद में साफ किया की उनके द्वारा लोगों के फोन में नंबर सेव नहीं किया गया है. इसेक बाद एक अलग बहस छिड़ गई की क्या फोन यूजर्स के उपर किसी तरह का साइबर अटैक किया जा रहा है. लोगों को लगने लगा की कहीं उनकी प्राइवेसी खतरे में तो नहीं. लेकिन अब गूगल ने इन सब चिजों पर जानकारी देते हुए इसकी जिम्मेदारी ली है. गूगल की और से कहा गया कि साल 2014 में ही यूआईडीएआई (UIDAI) और इसके अलावा 112 हेल्पलाइन नंबरों को एंड्रायड के सेटअप विजार्ट में कोड कर दिए गए थे.
वहीं गूगल ने ये भी कहा कि ये नंबर अगर एक बार अगर यूजर के कॉन्टेक्ट लिस्ट में आ जाए तो ये नंबर डिवाइस बदलने के बाद भी अपने आप नए डिवाइस में भी आ जाते है. वहीं गूगल ने इस पूरे मामलें को लेकर लोगों को हुई परेशानी के लिए खेद जताया और लोगो को आश्वस्त किया की एंड्रॉयड फोन में किसी भी प्रकार का अन ऑथराइज्ड एक्सेस नहीं हे और साथ में ये भी कहा की इस प्रकार कोई भी डिवाइस हैक नहीं हुआ है.
वहीं गूगल ने जानकारी दी की लोग मैनुअली इस नंबर को डिलीट कर सकते है. वहीं गूगल ने ये भी जानकारी दी की वे आने वाले एंड्रॉयड सेटएप विजार्ट से इसे हटाने पर काम करेंगे. अब जैसा की गूगल ने बीते दिन आधार हेल्पलाइन नंबर के अपने आप सेव हो जाने को लेकर सबकुछ साफ कर दिया है तो लोग भी अब आश्वस्त नजर आ रहे है.