जज्बा ओ जूनुन से मिला ताज
किसानों का सवाल उठने से बौखलाई सरकार : डॉ. रणजीत कुमार
पटना। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव के परिवार के साथ हुई घटना को स्वराज इंडिया पार्टी बिहार की एक आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में कहा गया कि स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव अब किसान-विरोधी मोदी सरकार के निशाने पर हैं। रेवाड़ी जिले में संपन्न हुई नौ दिवसीय स्वराज पदयात्रा के एक ही दिन बाद सरकार ने योगेंद्र यादव के परिवार वालों को निशाना बनाकर धमकाने की कोशिश की है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को ही योगेंद्र यादव की रेवाड़ी में पदयात्रा पूरी हुई। परसों ही स्वराज इंडिया ने किसानों को एमएसपी दिलाने और शराब का ठेका बंदी के आंदोलन का भी ऐलान किया था। कल जब हरियाणा के कृषि मंत्री से पत्रकारों ने स्वराज यात्रा के बारे में पूछा तो वे बौखलाए थे। ज्ञात हो कि एक दिन बाद ही देश भर के किसान आंदोलन ंपोबब की बैठक में मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति तय कर रहे हैं। कल सुबह 11 बजे के करीब रेवाड़ी में दो हस्पतालों, कलावती हस्पताल और कमला नर्सिंग होम पर एक साथ इनकम टैक्स और पुलिस के करीब सौ कर्मचारियों ने रेड की। ये दोनों हस्पताल योगेंद्र यादव की दो बहन, जीजा और भांजे चलाते हैं। इन दोनों हस्पतालों ने कानून सम्मत तरीके से स्वराज इंडिया को चंदा दिया है।
ख़बर है कि कार्यवाई के दौरान डॉक्टरों को केबिन में बंद कर दिया गया। हस्पताल (जिसमें नवजात बच्चों का आईसीयू भी है) सील कर दिया और बच्चों के मां बाप को भी अंदर जाने नहीं दिया गया। यह बयान भेजे जाने तक रेड जारी थी और उसके रात को भी चलते रहने की संभावना है। बैठक को संबोधित करते हुए स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सोमनाथ त्रिपाठी ने बताया कि योगेन्द्र यादव ने कहा है कि उन्हें छुपाने को कुछ भी नहीं है, सरकार जो जांच चाहे कर ले। प्रधानमंत्री मोदी से सवाल करते हुए उन्होंने पूछा, “मोदी जी, मेरी जांच करो, मेरे घर रेड करो, मेरे परिवार को क्यों तंग करते हो? डराने धमकाने की ऐसी कोशिशों से आप मुझे चुप नहीं कर सकते। आगे भी देश के किसान और नौजवान की आवाज़ बुलंद करता रहूंगा।“ ’
स्वराज इंडिया के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ रणजीत कुमार ने सरकार के इस कार्यवाई को कायराना बताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने किसानों की आँख में धूल झोंकने के हरसम्भव प्रयास किये। साथ ही युवाओं के रोज़गार के नाम पर आंकड़ों से खेलकर भ्रम फैलाने की कोशिश करते रहे। लेकिन हर बार योगेंद्र यादव ने सरकारी झूठ और तिकड़मबाजीयों की पोल खोली और देश के किसानों और नौजवानों की ईमानदार आवाज़ बने रहे। एक तरफ जहाँ मोदी-शाह की जोड़ी देश को हिन्दू मुसलमान के नाम पर बांटना चाहती है, तो दूसरी तरफ स्वराज इंडिया और योगेंद्र यादव किसान नौजवान को सकारात्मक राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश करते रहे हैं। इसी कारण से शायद सरकार को योगेंद्र जी से इतनी ज़्यादा दिक्कत और घबराहट हो गयी है कि सरकारी तंत्र के जरिये उनके परिवार वालों को डराने धमकाने की घटिया कोशिश हो रही है।“
पार्टी के महासचिव शिवजी सिंह ने कहा कि योगेन्द्र जी के माध्यम से सभी किसान नेताओं को अपना मुंह बंद रखने की चेतावनी दी जा रही है। लेकिन अब किसान चुप रहने वाले नहीं हैं।“ बैठक को यूथ फार स्वराज के बिहार के संयोजक सुनील एवं कई अन्य युवा नेताओं ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने इस पूरी घटना की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया।
नीतीश अब नहीं करेंगे लालू को फोन
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने को महागठबंधन में उनकी वापसी से जोड़ कर देखे जाने और तेजप्रताप यादव द्वारा उनके लिए ‘नो इंट्री’ का बोर्ड लगाए जाने के बयान को हास्यास्पद करार देते हुए आज कहा कि उन्होंने चार बार लालू के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त की थी। नीतीश ने कहा कि अब वह लालू यादव का हालचाल फोन से नहीं लेंगे और घोषणा की कि अखबारों में उनके हाल चाल के बारे में पढ़ लेंगे।नीतीश ने लालू को फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी हासिल करने के विषय पर कहा कि राजनीति में एक दूसरे से मतभेद हो सकता है लेकिन व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं होती है। उन्होंने यहां ‘लोक संवाद’ कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक सवाल के जवाब में यह कहा। नीतीश ने कहा, ‘‘लालू जी की तबीयत खराब होने के दौरान अभी तक चार बार हम हालचाल पूछ चुके हैं, लेकिन जिस तरह का मर्यादाहीन आचरण प्रस्तुत किया गया है, इससे समाज के वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है।’’
लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप द्वारा अपनी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबडी देवी के आवास पर नीतीश कुमार के लिए नो इंट्री का बोर्ड लगाए जाने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि यह हास्यास्पद है। गौरतलब है कि नीतीश ने हाल ही में लालू का मुंबई में ऑपरेशन के दौरान उन्हें फोनकर कुशलक्षेम पूछा था, जिसके बाद उनके महागठबंधन में वापसी को लेकर अटकलें लगाई जाने लगी थी। वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कहा था कि महागठबंधन में अब उनकी वापसी संभव नहीं।
उल्लेखनीय है कि जदयू ने 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव महागठबंधन में शामिल होकर राजद और कांग्रेस के साथ लड़ा था और राज्य में सरकार बनाई थी। लेकिन गत वर्ष नीतीश ने राजद और कांग्रेस से नाता तोड़कर भाजपा नीत राजग के साथ बिहार में नई सरकार बना ली। हाल में अपनी तबीयत खराब होने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि उन्हें वायरल बुखार हो गया था, जिसके लिए डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी।
अभिनय के क्षेत्र में अभिषेक दमदार
अभिनय के क्षेत्र में अभिषेक अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है। मासूमियत से लवरेज भाव भंगिमा में छोटे संवाद से ही अपनी फिल्मों में छाप छोड़ा है। वह किसी को संवेदित करती है। कहते हैं कला सीखने से कम और कुदरती नेमत के तौर पर ज्यादा मिलती है, वहीं कहावत अभिषेक के साथ है। उन्होंने अभिनय पहले रंगमंच पर आरंभ किया और प्रशिक्षण के बाद लघु फिल्म उसके बाद फिल्म की ओर झुकाव। उनकी पहली फिल्म विकी डोनर में ही काफी सराहना मिली। दरअसल अब तक जो फिल्में इन्होंने की है वह सामाजिक संदेश देने वाली रही है। इसके अलावा इन्होंने कई नाटक व लघु फिल्म के रूप में अपनी प्रतिभा सामने लाई है। उम्मीद जगाई है कि अभिनय के क्षेत्र में एक नया सितारा चमकने के लिए बेताव है।
अभिषेक बचपन से ही अभिनय में रूचि लेते रहे हैं। टीवी पर वह विभिन्न कार्यक्रमों में अभिनय कर कलाकरों की नकल खासकर अपने आदर्श अमिताभ की नकल करते थे। उसकी इस दिशा में लगातार बढ़ती रूचि को देखते हुए इसे अभिनय के क्षेत्र में हाथ आजमाने के लिए परिवार का पूरा साथ मिला। अभिषेक जयपुर में रवींद्र मंच में रंगकर्मी के रूप में अपना योगदान देने की शुरुआत की। इसी समय चलो दिल्ली जिसमें लारा दत्ता और विनय पाठक में मंचन किया। इसके बाद कॉलेज खत्म होते ही दिल्ली चले आए और मास कॉम में कोर्स करते वक्त ही विक्की डॉनर जिसमें आयुष्मान खुराना, अन्नू कपूर और यामीन गौतम थे रोल मिला। इस फिल्म में अभिषेक ने अपने आप को साबित किया। उसके बाद रनिंग शादी और जिया जैसी मूवी काम करने का मौका मिला है। गौरतलब है कि जिया रिलीज होने को तैयार है। इनके पसंदीदा अभिनेता अमिताभ बच्चन हैं। जिन्हें देखकर ही अभिनय को सीखा है। अभिषेक ने जो छोटी मूवी की है वह है जीने के इशारे जिसे दादा साहेब फाल्के अवार्ड में नोमीनेशन भी किया गया है। अभिषेक को जिनसे लगातार सहयोग मिला वे नाम हैं आदित्य गोयल, पीयूष पांडे, अभिलाष चंद्रन, गीता दास, लोकेश वर्मा, श्रष्ठी कुमार, सचिन पपनेजा।
कौशल विकास के तहत एनबीटी का रोज़गारपरक पाठ्यक्रम शुरू
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा युवाओं में कौशल विकास योजना के अंतर्गत 10 जुलाई से 06 अगस्त, 2018 तक ’पुस्तक प्रकाशन में सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम’ शुरू किया गया। पाठ्यक्रम का उद्घाटन कार्यक्रम आज, 10 जुलाई, 2018 को प्रातः 10.00 बजे न्यास के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में संपन्न हुआ। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के सदस्य सचिव, डाॅ. सच्चिदानंद जोशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस पाठ्यक्रम में देशभर से आए 30 प्रशिक्षार्थी भाग ले रहे हैं। इनमें कई प्रतिभागी पी.एच.डी., एम.टेक, बी.टेक की उपाधियाँ प्राप्त भी हैं।
इस अवसर पर डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि ई-बुक्स की तरह पुस्तकों की चाहे कितनी भी तकनीकें क्यों न विकसित हो जाएँ परंतु मुद्रित पुस्तकों का रोमांच सदा कायम रहेगा। उन्होंने अभ्यर्थियों को यह भी कहा कि जीवन एवं समाज में सकारात्मक बदलाव लाने हेतु प्रकाशन एक आदर्श क्षेत्र व व्यवसाय है।
कार्यक्रम के दौरान एनबीटी के अध्यक्ष, प्रो. बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि एनबीटी द्वारा देशभर में आयोजित किए जाने वाला पुस्तक प्रकाशन पाठ्यक्रम, प्रकाशन के क्षेत्र में रोज़गार के द्वार खोलता है। न्यास के इस कोर्स को करने के बाद आज कई युवा बड़े प्रकाशन संस्थानों में ऊँचे पदों पर कार्य कर रहे हंै। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर सहित देश के सुदूर क्षेत्रों में भी इस पाठ्यक्रम के लिए आकर्षण देखा जा सकता है।
एनबीटी की निदेशक, डॉ. रीता चैधरी ने कहा कि एनबीटी का उद्देश्य पठन-प्रवृत्ति का प्रोन्नयन करना है तथा इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रकाशन क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों का होना भी आवश्यक है। एनबीटी की मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक, श्रीमती नीरा जैन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
जियो फोन पर मिलेगी फेसबुक, वॉट्सऐप और यूट्यूब की सुविधा
रिलायंस ने अब जियो 2 फोन लॉन्च किया है। इस फोन में यू-ट्यूब, वॉट्सऐप, फेसबुक आदि स्मार्ट फीचर मिलेंगे। इसके साथ खास जियो ऐप और फाइबर ब्रॉडबैंड भी लॉन्च किए गए हैं।
जियो ने सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। जियो गीगा फाइबर का भी ऐलान हुआ है। जियो गीगा राउटर और गीगा टीवी सेटटॉप बॉक्स, गीगा टीवी कॉलिंग का भी ऐलान हुआ है। जियो स्मार्ट होम से संबंधित भी कई ऐलान किए गए हैं। जियो गीगा फाइबर में कई शानदार फीचर्स दिए जाएंगे। 15 अगस्त से जियो फोन पर मिलेगी फेसबुक, वॉट्सऐप और यूट्यूब की सुविधा।
रिलायंस ने जियो फोन 2 भी लॉन्च किया है। इसमें हॉरिजेंटल स्क्रीन बोर्ड के साथ कई फीचर्स दिए गए हैं। 15 अगस्त से जियो फोन-2 कीमत मात्र 2,999 रुपये में मिलेगी।
-जियो 2 के लिए मॉनसून हंगामा ऑफर का भी ऐलान किया गया है। 21 जुलाई से 501 रुपये में पुराने जियो फोन के बदले नया फोन मिलेगा। जियो फोन 2 कई सुविधाओं से लैस होगा, इसमें यूट्यूब, फेसबुक, वॉट्सऐप की भी सुविधा मिलेगी। जियो ने 22 महीनों में अपना कस्टमर बेस दोगुना बढ़ा लिया है।
ड्रेस कोड के फरमान पर हंगामा
पुणे-
ड्रेस कोड पर अक्सर स्कूलों में हंगामा होता है उसी फेहरिस्त में एक और स्कूल के नाम सामने आ गया है। जहां अभिभावकों ने अपना रोष जाहिर किया है और स्कूल के खिलाफ एक्शन लेने के लिए सरकार को कहा है। यह स्कूल है माईर्स एमआईटी जहां छात्राओं को व्हाइट और स्किन रंग के अंतर्वस्त्र पहनने की अनिवार्यता की है। यही नहीं इस स्कूल ने छात्राओं के लिए 20 से 22 जटिल नियम भी अनिवार्य किए है, जिसके उल्लंघन पर सीधे फौजदारी की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इससे अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है। प्रबंधन ने कैलेंडर (डायरी) के जरिए ये नियमावली जारी की है। प्रबंधन ने अपनी 20 से 22 जटिल शर्तों की पूर्तता करने को लेकर शपथ पत्र लिखकर लाने की अनिवार्यता की है। इससे आक्रोशित अभिभावकों ने प्राथमिक शिक्षा विभाग के सह निदेशक दिनकर टेमकर से मुलाकात कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जटिल नियमावली से छात्रों और अभिभावकों में रोष
स्कूल ने जो नियम बनाए हैं वह अजीबोगरीब हैं। स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को व्हाइट और स्कीन रंग के अंतर्वस्त्र पहनने होंगे। दूसरा कोई भी रंग स्वीकार नहीं होंगे। उनकी स्कर्ट की लंबाई घुटनों तक ही होनी चाहिए और वह प्रबंधन द्वारा अधिकृत टेलर से ही कपड़े सिलवाने होगे। छात्राएं किसी भी तरह का मेकअप नहीं करेंगी और छात्र-छात्रा कोई टैटू नहीं बनवाएंगे। बाल एकदम छोटे रहेंगे।
अभिभावकों के लिए भी बनी नियमावली स्कूलों ने छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों के लिए भी नियमावली बनाई है। इसमें वे आपस में बात नहीं करेंगे, स्कूल के खिलाफ कोई आंदोलन नहीं करेंगे, प्रबंधन और मीडिया से संवाद नहीं करेंगे। साइकिल पार्किंग के नाम देना होगा शुल्क स्कूल प्रबंधन ने गुरुकुल में साइकिल पार्किंग के लिए भारी शुल्क निर्धारित किया है। इस सालाना शुल्क के लिए 1500 रुपए एडवांस में चुकाने होंगे। इस तरह के फरमान जारी होने पर अभिभावकों सरकार से शिकायत की है और कार्रवाई की मांग की है।
सरकार की एमएसपी बढ़ाने से किसान सशक्त और समृद्ध होगा- अरुण जेटली
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि 14 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने से सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा। चूंकि, चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में खाद्य सब्सिडी के लिए पहले ही बड़े प्रावधान किये जा चुके हैं। आम चुनावों से पहले खेती किसानी के संकट को दूर करने के लिए सरकार ने धान का एमएसपी में 200 रुपये प्रति क्विन्टल की रिकॉर्ड वृद्धि की है, जबकि अन्य खरीफ फसलों के एमएसपी में 52 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक के बाद निर्णय की घोषणा करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस फैसले से खजाने पर 15,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार ने 2018-19 के बजट में खाद्य सब्सिडी के मद में 1.7 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। जेटली ने ट्वीट में कहा कि बजट में खाद्य सब्सिडी के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पार किए बिना अतिरिक्त खर्च का वहन कर लेगी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे को कम करके जीडीपी का 3.3 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की इस पहल से किसान सशक्त और समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश को जोड़कर देखा जाए तो संशोधित एमएसपी ग्रामीण भारत में जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लंबा रास्ता तय करेगा।
दिल्ली में उपराज्यपाल की नहीं, केजरीवाल की चलेगी
नईदिल्ली-
दिल्ली में केजरीवाल सरकार और एलजी के बीच चल रही अधिकारों की जंग मामले में उच्चतम न्यायालय एक महत्वपूर्ण फैसले में उपराज्यपाल को झटका दिया है। पांच जजों के बेंच ने सर्वसम्मति से कहा कि असली ताकत मंत्रिपरिषद के पास है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मंत्रिपरिषद के सभी फैसलों से उप-राज्यपाल को निश्चित रूप से अवगत कराया जाना चाहिए, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि इसमें उप-राज्यपाल की सहमति आवश्यक है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उप-राज्यपाल को स्वतंत्र अधिकार नहीं सौंपे गए हैं। कोर्ट ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार और एलजी को आपसी तालमेल से काम करने की सलाह भी दी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना मुमकिन नहीं है क्योकि दिल्ली की स्थिति अन्य राज्यों से अलग है। अदालत ने कहा कि चुनी हुई सरकार से ही दिल्ली चलेगी। अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली में पुलिस और जमीन का अधिकार केंद्र सरकार के पास ही रहेगा। फैसले आने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है और कहा है कि आज का दिन ऐतिहासिक है। गौरतलब है कि न्यायालय दिल्ली के उपराज्यपाल को राष्ट्रीय राजधानी का प्रशासनिक मुखिया घोषित करने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के अगस्त 2016 के फैसले के खिलाफ अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की अपील पर महत्वपूर्ण फैसला सुना रहा था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राज्यों को संविधान में मिले अधिकारों के उपयोग का अधिकार है लेकिन उपराज्यपाल को फैसलों की जानकारी देनी चाहिए। अदालत ने कहा कि दिल्ली की स्थिति बाकी राज्यों से अलग है और केंद्र तथा राज्य के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्ते होने चाहिए ताकि कार्य सही ढ़ंग से चल सके। साफ है कि पीठ के तीनों जजों की यही राय दी की उपराज्यपाल राज्य मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करें। गौरतलब है कि पिछले दिनों अरविंद केजरीवाल उपराज्यपाल के ओफिस में धरने पर बैठे थे जिसके कारण दिल्ली का कामकाज रूकी हुई थी।
लोकतंत्र की जीत- अरविंद केजरीवाल
नई दिल्ली –
दि्ल्ली में मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों के जंग को लेकर उच्चतम न्यायालय ने फैसला दे दिया है। काफी दिनों से चल रही किचकिच को अब भाजपा अपनी जीत तो आम आदमी पार्टी अपनी जीत बता रही है। पांच सदस्यीय संविधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से माना कि चुनी हुई सरकार और मंत्रिमंडल के पास असली शक्ति है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुमकिन नहीं है। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी और भाजपा अपने-अपने तरीके से व्याख्या कर रहे हैं और दोनों ही दल अपनी जीत बता रहे हैं। आप सरकार ने इसे लोकतंत्र और अपने सरकार की जीत बताया।
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल लगातार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।