भारतीय पॉवरलिफ्टिंग टीम ने जीते छह स्वर्ण

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द्रोणाचार्य अवॉर्डी भूपेन्द्र धवन के प्रशिक्षण में भारतीय टीम ने जर्मनी में आयोजित यूरोपियन पॉवरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करतेहुए छह स्वर्ण और एक रजत पदक जीता।

सुरेन्द्र सिंह सभी को चौंकाते हुए दो स्वर्ण जीतने पर सर्वश्रेष्ठ पॉवरलिफ्टर घोषित किए गए। क्लासिक रॉ वर्ग में दो खिलाड़ियों ने नए रिकॉर्ड भी बनाए। ओलंपिया चैंपियन मुकेश सिंह ने पिछला रिकॉड सुधारते हुए दो स्वर्ण पदक जीते। रजत गोयल ने भी नए रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए मुकेश सिंह के बेटे विनय गहलोत ने रजत पदक जीता। इनके प्रदर्शन पर कोच द्रोणाचार्य अवॉर्डी भूपेन्द्र धवन ने संतोष जताते हुए कहा कि ‘हमारे खिलाड़ियों में और बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता है। जिससे ये सभी पॉवरलिफ्टर भविष्य में चमक बिखेरेंगे।’

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की जंग

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दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मुद्दा एक बार फिर उभर कर सामने आया है। भारत की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की स्थिति पेचीदा है। यह एक केन्द्र शासित क्षेत्र है लेकिन इसकी अपनी विधानसभा भी है। इसलिए निर्वाचित मुख्यमंत्री इसका शासन चलाता है, जबकि राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उप-राज्यपाल राज्य का प्रमुख होता है। पर विडंबना यह है कि राज्य की 3 प्रमुख शक्तियां केन्द्र सरकार के पास हैं: 1. सुरक्षा (पुलिस), 2. प्रशासनिक अधिकारी (नौकरशाही) और 3. भूमि पर नियंत्रण। इसकी वजह से दिल्ली पुलिस केन्द्रीय गृहमंत्री के प्रति जवाबदेह है न कि राज्य के मुख्यमंत्री के प्रति। कानून व्यवस्था पर अस्पष्ट नियंत्रण होते ऐसे विरोधाभासी प्रावधान का खुलासा करने हेतु दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपनी ही पुलिस के खिलाफ गत वर्ष धरने पर बैठे थे।

इस बार जहां राज्यपाल के यहां धरने पर बैठे अरविंद केजरीवाल, वहीं फिर इस मुद्दे को भुनाने के लिए इंदिरागांधी स्टेडियम में रैली तक कर डाली और अपनी मांग फिर से केंद्र सरकार के समक्ष रखी और कांग्रेस और भाजपा को अपने वादे पूरे करने की तरफ याद दिलाया। केजरीवाल ने इस बार दिल्ली के पूर्ण राज्य के मुद्दे को बड़ी ही संजीदगी से उठाया है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का मुद्दा दशकों से भाजपा भी उठाती रही है। गौरतलब है कि केन्द्र में मोदी की सरकार आने के बाद से इस संबंध में मन बना चुकने के बावजूद भी भाजपा चुनाव पूर्व कोई ऐलान करने से हिचकती रही है। लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी को यह डर है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिये तो दिल्ली राज्य पर से‘विशिष्ट’ नियंत्रण उनके हाथ से निकल जाएगा।

आइए देखते हैं दुनिया के दूसरे हिस्सों में इस संबंध में क्या परम्परा है? अमरीका के वाशिंगटन डी.सी. का उदाहरण प्रासंगिक होगा। दिल्ली की तरह यह भी एक राजधानी नगर है और इसे एक राज्य के तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। वाशिंगटन संघ सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इस पर नियंत्रण कांग्रेस (अमरीकी संसद) का है। साथ ही साथ यहां लोकल मेयर तथा नगरपालिका का भी प्रावधान है। राज्य का दर्जा मिलने से डी.सी. को कांग्रेस में प्रतिनिधित्व मिल जाएगा जो अभी उनके पास नहीं है (कम से कम दिल्ली को संसद में 7 सांसदों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है)।

200 साल पहले जब अमरीका का संविधान बन कर तैयार हुआ तो उन्होंने एक डिस्ट्रिक्ट (राजधानी) बनाई, जिस पर संघीय व्यवस्था (जो कि अमरीका में बेहद मजबूत है) के अन्तर्गत यदि राष्ट्रीय राजधानी किसी राज्य के अधिकार क्षेत्र में होगी तो राज्य मुश्किलें खड़ी कर सकता है। बड़े अचरज की बात है कि बेहद शक्तिशाली कांग्रेस को वाशिंगटन डी.सी. के स्थानीय मुद्दों पर भी फैसले लेने पड़ते हैं जिसे आसानी से स्थानीय मेयर व प्रशासन के हवाले किया जा सकता है। वाशिंगटन के लोग भी इसे पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की चाह रखते हैं लेकिन वाशिंगटन डी.सी. की पुलिस स्थानीय प्रशासन के प्रति जवाबदेह है। अर्थात् स्थानीय पुलिस मेयर और नगरपालिका के नियंत्रण में है। हालांकि वाशिंगटन का कुछ हिस्सा संघीय सुरक्षा एजैंसियों (उदाहरण यूनाइटेड स्टेट कैपिटोल पुलिस) के अधिकार क्षेत्र में आता है।

1990 में गठबंधन की राजनीति शुरू होने के बाद से भारत में भी संघवाद की व्यवस्था लोक बहस का विषय बनने लगी। इससे पहले केन्द्र सरकार का रवैया बेहद केन्द्रीयकृत होता था और लोग इसे सहजता से लेते थे। देश में सत्ता के केन्द्रीयकरण और संघीय ढांचे को नजरअंदाज करने वालों में इंदिरा गांधी सबसे आगे थीं। 70 के दशक में पूरे देश पर आपातकाल लागू करना, उनकी इस प्रवृत्ति की बेमिसाल उदाहरण है। चुनी हुई राज्य सरकार को मनमाने तरीके से बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करना जैसे केन्द्र की मनमानी के कई उदाहरण भारत में देखने को मिलते हैं। राज्यों द्वारा जिला कलैक्टरों की नियुक्ति भी सत्ता के केन्द्रीयकरण की प्रवृत्ति को ही दिखलाता है। यह सत्ता के विकेन्द्रीयकरण के सिद्धांत के खिलाफ तो है ही, ऐसे प्रावधानों के चलते स्थानीय सरकारों (लोकल गवर्नैंस) के विकास को भी बढ़ावा नहीं मिल पाता।

प्रशासनिक दृष्टिकोण से दिल्ली भी केन्द्र सरकार की अनिश्चितताओं का शिकार रही है। 1951 में इसे राज्य का दर्जा दिया गया और चौधरी ब्रह्म प्रकाश दिल्ली के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने। लेकिन 1955 में इसे केन्द्र शासित प्रदेश में तबदील कर दिया गया और विधानसभा भंग कर दी गई। 38 बरस के इंतजार के बाद 1993 में एक बार फिर विधानसभा का गठन हुआ और मदन लाल खुराना भाजपा निर्वाचित मुख्यमंत्री बने।

पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करने की चाहत में हालांकि दिल्ली की यात्रा अभी तक अधूरी है।

लेकिन दिल्ली को जरूरत है एक स्वतंत्र रूप से काम करने वाले मुख्यमंत्री की न कि केन्द्रीय सरकार के हाथों की कठपुतली मुख्यमंत्री की। पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से दिल्ली को एक ऐसी विधानसभा मिलेगी जिसके नियंत्रण में पुलिस व कानून और व्यवस्था होगी, उसे नौकरशाही की नियुक्ति और तबादले के निर्णय का अधिकार होगा।

दिल्ली में सच्चा स्वराज तभी आ सकता है जब सत्ता निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास हो। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में विलंब कर संघवाद के सिद्धांत का गला नहीं घोटना चाहिए। जैसे आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को दुल्हनिया (पूर्ण राज्य का दर्जा) बनाने के वायदे पर कोई असमंजस नहीं दिखाया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को पूर्ण राज्य की जंग छेड़ी दी है। केजरीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से इस मसले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की अपील करते हुए कहा कि अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता तो लोक सभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिलेगी। केजरीवाल ने आम दिल्लीवालों से सियासी जंग में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि अनिल बैजल दिल्ली के अंतिम उपराज्यपाल होंगे।

केजरीवाल ने सवाल कर रहे हैं कि दिल्ली में किसकी चलेगी, उपराज्यपाल की या दिल्लीवालों की। राशन डिलिवरी स्कीम, मोहल्ला क्लीनिक, सीसीटीवी कैमरा, ठेकेदारी प्रथा खत्म करने जैसी दिल्ली सरकार की दूसरी योजनाओं को गिनाते हुए केजरीवाल ने कहा कि चुनी हुई सरकार दिल्लीवालों के लिये काम करना चाहती है, लेकिन उपराज्यपाल उसे रोक देते हैं।

यहां तक कि इस मसले पर जब वह अपने मंत्रियों के साथ बात करने राजनिवास गये तो वह उनसे मिलने तक नहीं आये। नौ दिनों तक अनिल बैजल ने मिलने का वक्त नहीं दिया। दिल्ली की जनता उन्हें 2019 में इसका जवाब देगी। अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि उपराज्यपाल ने दिल्ली के 2 करोड़ लोगों का अपमान है।

हर दिन, हर मिनट दिल्लीवालों को बेइज्जत किया जा रहा है। उपराज्यपाल व भाजपा ने दिल्ली के लोगों का मजाक बनाकर रख दिया है। उन्होंने सवाल किया कि लोगों ने वोट किसे दिया था, केजरीवाल को या उपराज्यपाल को? जब दिल्लीवालों ने केजरीवाल को वोट दिया था तो बीच में उपराज्यपाल कहां से आ गए?

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ दिल्ली की नहीं, पूरे देश की है। उन्होंने कहा कि वह सभी दलों से भी अपील करते हैं कि इस हक में आवाज बुलायें। केजरीवाल ने जल्द ही राजनीतिक दलों की बैठक भी बलाने की बात कही। साथ ही राहुल गांधी से सवाल किया कि वह इस मसले पर अपना पक्ष स्पष्ट करें। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी याद दिलाया कि लोक सभा चुनावों के दौरान किये गये अपने वायदे को पूरा करें।

उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का चुनावी वायदा किया, लेकिन सत्ता संभालते ही उन्होंने दिल्ली को पहले से मिले अधिकार भी खत्म कर दिये। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया तो ठीक वरना 7 सीट में से कुछ नहीं मिलेगा।

केजरीवाल का पूर्ण राज्य फार्मूला

अरविंद केजरीवाल ने पूर्ण राज्य का जो फार्मूला दिया है वह है कि पूरे एनडीएमसी को केंद्र अपने अधीन रखे। इसी इलाके में केंद्र के सारी इमारतें, दूतावास आदि हैं। बाकी पूरी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाये। साथ ही जब तक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता, उपराज्यपाल की नियुक्ति दिल्ली सरकार की सलाह पर की जाये।

दिल्ली सदियों से गुलाम रहा है, पहले यह मुगलों के अधीन रही, फिर वायसराय और आज उपराज्पाल की अधीन गुलाम है।
– सरकारी नौकरी में दिल्ली के मतदाताओं के बच्चों का 85 फीसदी आरक्षण होना चाहिए। दिल्ली पूर्ण राज्य बन गया तो हजारों बच्चों को नौकरी मिलेगी।
– चारों तरफ चोरी, डकैती, बलात्कार दिल्ली में बढ़ रहा है। दिल्ली पुलिस एलजी और देश के गृहमंत्री को रिपोर्ट करती है। गृहमंत्री जम्मू की समस्या हल करेंगे या मंडावली की। उन्हें पता भी है कि मंडावली कहां है।
– जैसे दिल्ली सरकार ने पानी मुफ्त किया और बिजली सस्ती की, उसी तरह अगर दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार को मिल जाये तो राजधानी को वह अपराध मुक्त कर देंगे।
– दिल्ली की सरकार द्वारा केंद्र सरकार को 1 लाख 30 हजार करोड़ टैक्स दिया जाता है। बदले में केंद्र सरकार दिल्ली को 325 करोड़ देती है। क्या यूनियन टेरेटरी सिर्फ गुंडागर्दी या हमें लूटने के लिए हैं। अगर केंद्र दिल्ली सरकार को टैक्स का सिर्फ 30फीसदी हिस्सा लौटा दे तो हर झुग्गी वालों को पक्का घर मिलेगा।
– पीएम मोदी ने एंटी करप्शन ब्रांच छीन ली, अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग छीन ली।

बहरहाल आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया है कि इस बार की लोकसभा चुनाव दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मुख्य मुद्दा होगा। जिसे भुनाने की पूर्ण कोशिश करेगी आम आदमी पार्टी इसके लिए प्लाट तैयार किया जा चुका है। और धीरे धीरे इसे और गरमाने दिया जा रहा है। कांग्रेस के पास पुख्ता जवाब नहीं है तो भाजपा इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ कर नहीं पा रही है। अब देखना है कि तीनों पार्टियां इस मुददे को किस प्रकार चुनाव में भुना पाती हैं।

 

 

पुरस्‍कृत नाटक ‘’गर्भ’’ का राजधानी में हुआ मंचन 

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सनसप्‍तक निर्मित बहुचर्चित नाटक ‘’गर्भ’’ को राजधानी दिल्‍ली के दर्शकों की अपार सराहना मिली। मूल रूप से बांग्‍ला में ‘’गर्भोज’’ के नाम से लिखित इस नाटक का पहला मंचन तोरित मित्रा के निर्देशन में 1994 में हुआ था। उसके बाद से अब तक इसके दिल्‍ली और कोलकाता में दर्जनों मंचन हो चुके हैं। 2010 में ‘’गर्भ’’ के नाम से इसका हिंदी रूपांतरण हुआ। हिंदी रूपांतरण के बाद साल 2011 के दिल्ली के भारतेंदु नाट्य उत्‍सव में इसका प्रदर्शन किया गयाजहां साहित्‍य कला परिषद् ने इसके निदेशक और लेखक तोरित मित्रा को सर्वश्रेष्‍ठ निदेशक के सम्‍मान से सम्‍मानित भी किया।

‘’गर्भ’’ मानसिक ऊहापोह और द्वंद की स्थिति से गुजरने वाले झारखंड के एक किसान परिवार की कथा है। बांग्‍ला में तोरित मित्रा द्वारा लिखित और हिंदी में अंजन बोस द्वारा निर्देशित यह नाटक झारखंड के एक किसान सुखदेव पुस्‍वा के नितांत निजी जीवन की कथा का बयान करता है। दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय में मानव विज्ञान की पढ़ाई करने वाले विश्‍वेश्‍वर और उनकी मित्र स्‍वर्णरेखा के फ्लैशबैक में इसकी कथा चलती है। इस नाटक का ताना-बाना जिस तरह से बुना गया है वह रहस्‍य की दुनिया में भी दर्शकों को ले जाने के लिए विवश करता है। शोधार्थी का जीवन जीने वाले विश्‍वेश्‍वर को जब अपने परिवार के अतीत की याद आती है तो नाटक में एक कंट्रास्‍ट की रचना होती है। और कुल मिलाकर यही नाटक की जान भी है।

अतीत में किए गए एक भयानक पाप ने पूरे परिवार में अंधेरे को जन्म दिया है। इससे यह परिवार सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक पतन की तरफ बढ़ता है। सुखदेव अपने बड़े बेटे अघन के लिए असहाय और आक्रामक हो जाता है। वह माओवादी विद्रोही होकर लगभग पागल हो जाता है और उनका छोटा बेटा बुद्धुवा गैरकानूनी काम में लिप्त हो जाता है। अपने और अपने परिवार के दुख के लिए वह बाहर से आकर बसे गैर-आदिवासियों पर आरोप लगाता है। सुखदेव की पत्‍नी सुमरी देवी परिवार की एकमात्र ऐसी सदस्‍य हैं जो सबको एक दूसरे से जोड़े हुए है।

हालात तब और अधिक रहस्यमय हो जाते हैं जब एक उपजाऊ भूमिजिसे सालों तक बंजर माना गया, वह अचानक उपजाऊ हो जाती है। इस तरह के हालात कई सवाल पैदा करते हैं। इससे कामख्या और मूल निवासी और विदेशियों के बीच ऐतिहासिक मतभेद और अधिक चरम पर पहुंच जाते हैं और हकीकत खुलकर सामने आ जाती है। सभी पारंपरिक मूल्यों और नैतिकता को चूर-चूर करने के लिए आमादा हो जाते हैं। मानव निर्मित समाज और प्रकृति के नियमों के बीच अस्तित्व के लिए लड़ने के लिए केवल परालौकिक शक्ति ही प्रेरणा है।

दिनांक 23 और 24 जून को नई दिल्‍ली के चित्‍तरंजन पार्क स्थित वीसी पॉल आडोटोरियम में मंचित इस नाटक को दर्शकों की अपार सराहना मिली। नाटक के सभी पात्रों ने अपने-अपने किरदारों के साथ पूरी ईमानदारी के साथ न्‍याय किया। कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध लेखकपत्रकार और रंग समीक्षक जयदेव तनेजा और आलोचक-संपादक ज्‍योतिष जोशी की गरिमामयी मौजूदगी देखी गई।  दोनों  अतिथियों ने नाटक की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह नाटक उनके न केवल दिलों को छू गया बल्कि ग्रामीण समस्या और वर्तमान किसानों की दुर्दशा को मंच पर सजीव कर दिया।  

पात्र परिचय

सुखदेव पुस्‍वा  : सुकृत गुलाटी

सुमरी देवी :    परोमा भट्टाचार्य

अघान पुस्‍वा :    सौरभ सैनी

बुद्धूवा पुस्‍वा :    सचिन बिष्‍ट

विश्‍वेश्‍वर पुस्‍वा : स्‍वागत नंदा

सुवर्णरेखा चक्रवर्ती : सिमरन

कामाख्‍या प्रसाद सिंह : साहेब जेना

टिकेंदर  : रोहन तोगडि़या

 

11 शव 11 सवाल

नाटक में योगदान-

क्रिएटिव सलाहकार   :  तोरित मित्रा और रुमा बोस

म्‍यूजिक डिजाइन     :  अंजन बोस और श्रीमोयी दासगुप्‍ता

म्‍यूजिक ऑपरेशन     :  श्रीमयी दासगुप्‍ता

मंच और प्रकाश व्‍यवस्‍था : अंजन बोस

अनुवाद और सहायक निदेशक : श्रीमोयी दासगुप्‍ता

पटकथा : तोरित मित्रा

डिजाइन और निदेशन : अंजन बोस

बालिका सुरक्षा आयोग एवं स्वर्ण आयोग का नहीं किया गठन तो होंगे उग्र आंदोलन : ज्ञानेश कुमार चौहान

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राजधानी दिल्ली में हिंदुस्तान उत्थान पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं द्वारा देश में लगातार बढ़ रही जातीय हिंसा एवं स्वर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया, जिसमें हिंदुस्तान उत्थान पार्टी द्वारा 6 सूत्रीय मांग पत्र पीएम व राष्ट्रपति कार्यालय में िदये गये।
ये हैं मांगे
मांग 1– स्वर्ण आयोग का गठन कराने  की मांग – जिससे स्वर्ण भी बिना डरे अपने अधिकारों के हनन कि मांग को स्वर्ण आयोग में उठा सके !
मांग 2- जातिगत आरक्षण को तत्काल समाप्त कर आर्थिक आधार पर लागु हो आरक्षण – जिससे देश में अन्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को भी मिल सके आरक्षण का लाभ और देश में फैली जातीय हिंसा पर काबू पाया जा सके !
मांग 3- बालिका सुरक्षा आयोग का गठन – महिला आयोग की तरह हो बालिका सुरक्षा आयोग का गठन जिससे बालिकाओ पर होने वाले अत्याचारों में कमी होगी और बालिकाओ के यौन सोसण में लिप्त पाए जाने पर पुरे देश में हो तत्काल फांसी की सजा का प्रावधान !
मांग 4- किसानो के किसी भी तरह के बकाया भुगतान को तत्काल किया जाये – जिससे किसान भी खुशहाल जीवन जी सके साथ ही साथ प्राकृतिक आपदा के समय किसानो के नुकसान का तत्काल आंकलन करके उन्हें उचित सहायता दी जाये जिससे किसानो द्वारा आत्महत्या के मामलो में कमी आएगी और किसान का परिवार भी सम्मान से जीवन यापन कर सकेगा !
मांग 5 – मध्यप्रदेश कि तरह उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग में हो हाईकोर्ट बेंच का निर्माण – जिससे आम नागरिक न्याय पाने में सफल हो देखा गया है की उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग से हाईकोर्ट की दुरी लगभग 750 किलोमीटर होने की वजह से आमजन को न्याय पाने में अश्मर्थ रहना पड़ता है !
मांग 6- पूरे देश में शिक्षा एवं चिकित्सा सरकारी खर्चे पर मुहैया कराये सरकार – जिससे शिक्षा एवं चिकित्सा के छेत्र में हो रही लूट बंद हो सके क्यूंकि शिक्षा एवं चिकित्सा हर भारतीय का मौलिक अधिकार है और प्राइवेट सेक्टर द्वारा मोटी रकम लेकर मुहैया कराई जा रही शिक्षा एवं चिकित्सा भारतीय के अधिकारों का हनन है !
प्रदर्शन में मुख्य रूप से हिंदुस्तान उत्थान पार्टी के संस्थापक राष्ट्रीय अध्क्षय ज्ञानेश कुमार चौहान राष्ट्रीय महासचिव ओमप्रकाश सिंह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट संतोष प्रताप सिंह राष्ट्रीय सचिव कमल चौहान राष्ट्रीय महिला अध्क्षय अमृता राजपूत राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्णा पांडेय प्रदेश अध्क्षय युवा मोर्चा मुकुल चौहान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश शांडिल्य प्रदेश युवा अध्क्षय दिल्ली अंकुर दिवान सचिव हीरा नरूखा प्रदेश महिला उपाध्यक्ष प्रशन्ना सिंह, दिल्ली प्रदेश महासचिव गणेश कुमार, राष्ट्रीय सचिव अिनल कुमार झा, पि्रया गुजराल एवं अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
श्री चौहान ने सरकार को कहा िक आगामी 19 अगस्त को हिंदुस्तान उत्थान पार्टी एवं उसके सहयोगी किसान / महिला / जातिगत आरक्षण विरोधी / स्वर्ण संघठन मिलकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हजारों कार्यकर्ताओं के साथ विधान सभा के सामने अपनी इन्ही माँगो के साथ बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
उन्होंने सरकार से आपसे अनुरोध किया कि जल्द से जल्द एक कमेटी का गठन कर मुख्य मांगों पर विचार विमर्श करे और हमे भी अवगत कराने का कष्ट करें। हम आपसे आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि आप आमजन के लिए हमारे द्वारा दिए गए सुझावों (मांगों) पर जल्द कोई बड़ा एवं साहसिक कदम उठाएंगे और कुछ नेताओं व राजनैतिक पार्टियों द्वारा की जा रही जाति आधारित राजनीती का अंत करेंगे।

हाईकोर्ट ने फर्जी मुठभेड़ पर उत्तर प्रदेश से जवाब मांगा

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नईदिल्ली-

हाईकोर्ट ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) की फर्जी मुठभेड़ पर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट के मुख्य जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने जनहित पर सुनवाई के बाद उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। गौरतलब है पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी की ओर से वकील संजय पारिख ने आरोप लगाया कि हाल में उत्तर प्रदेश में पांच सौ  मुठभेड़ हुई है जिनमें कुल 58 लोग मारे गए। हाईकोर्ट की बेंच ने इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने भी इस मुद्दे पर पहले राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

 

डॉक्टर्स डे पर फिट इंडिया कॉन्क्लेव दिल्ली में भव्य लांच

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डॉक्टर्स डे के मौके पर दिल्ली के ली मेरीडियन होटल में मेडस्केप इंडिया द्वारा ’फिट इंडिया कॉन्क्लेव’का भव्य आयोजन एवं दिल्ली चैप्टर का लांच किया गया। जिसमें देश भर प्रतिष्ठित डॉक्टर शामिल हुए और इस कम्पैन की सफलता और भविष्य को लेकर अपने अपने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर फिट इंडिया की को¬-फाउण्डर डॉ सुनीता दुबे, जो कि प्रसिद्ध रेडियोलाॅजिस्ट, समाज सेविका हैं, ने फिट इंडिया का मोबाइल एप्लीकेशन भी लांच किया गया। साथ ही स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाओं, तकनीकी, शोध कार्य पर भी अहम् चर्चा की गई तथा  स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से देश का भविष्य कैसा हो इस बात पर भी गहनता से विचार विमर्श किया गया।
देश भर से आये डॉक्टरों ने शपथ लिया कि वह लोगों तक बेहतरीन और सबसे अच्छी सेवाएं मुहैया कराने में अपना योगदान देंगे। राज्यसभा के मेंबर आफ पार्लियामेंट आर के सिन्हा, निति आयोग के सीईओ अमिताभ कान्त और डब्ल्यूडी के चेयरमैन प्रभात सिंह ने फिट इंडिया अभियान की प्रशंसा की और इसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक सफल पहल बताया।
मुख्य अतिथि के रूप में आये हरियाणा प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा ने कॉन्क्लेव को अपना पूरा पूरा सहयोग देने की बात कही। उन्होंने इस तरह के सामाजिक मुहीम के लिए बधाई देते हुए कहा की डॉ सुनीता लोगों को जागरूक करने तथा लोगों को होश में लाने का काम कर रही हैं। वह काम कर रही हैं जिसको सचमुच देश और समाज की जरुरत है। स्वास्थ्य और शिक्षा से ही देश का भविष्य तय होता है। एक स्वास्थ्य और शिक्षित नागरिक ही देश को समृद्ध बनाता और आगे ले जाने का कार्य करता है। एक शिक्षा मंत्री के तौर पर मैंने अपने प्रदेश में बहुत सारा काम किया है। हरियाणा में हम इस मुहीम का स्वागत करते हैं।
दिल्ली के कई सरकारी अस्पताल, स्वास्थ्य मंत्रालय के डायरेक्टर, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार, काॅर्पोरेट और प्राइवेट अस्पताल, मेडिकल एसोसिएशन के हेड ने अपना योगदान फिट इंडिया को देने की शपथ ली और इसके मेम्बर भी बने।
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने कहा देश में प्रदूषण बढ़ रहा है ऐसे में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना और फिट रहना बहुत बड़ी चुनौती है परन्तु फिट इंडिया कॉन्क्लेव इसे लोगों तक पहुंचाने में अहम् भूमिका निभा रहा है। सुनीता जी की इस मुहीम का हम स्वागत करते हैं और अपना सहयोग देने का वादा करते हैं। इस बार फिट इंडिया अवार्ड से सम्मानित फ्रीडम फाइटर बंशीलाल मेहता, जिन्होंने देश की आजादी में बड़ा योगदान दिया, ने सम्मान मिलने की ख़ुशी जाहिर की और इस मुहीम को देश और समाज के लिए जरुरी बताया। उन्होंने मेडस्केप इंडिया के साथ आजीवन जुड़े रहने का प्रण भी लिया। स्वास्थ्य मंत्रालय के सीनियर डायरेक्टर डाॅ गड़पले ने अपने योगदान की पहल की।
’फिट इंडिया कॉन्क्लेव’ पिछले दो सालों से चिकित्सा और स्वास्थ्य से जुड़े क्षेत्र में नित्य नए आयाम स्थापित कर रहा है तथा उन विषयों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है जो अभी भी आमजन की पहुंच से दूर है। इस कॉन्क्लेव का उदेश्य स्वास्थ्य से जुड़े देश भर के विशेषज्ञों को एक साथ जोड़कर लोगों तक अच्छी से अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। मेडस्केप इंडिया की फाउंडर चेयरपर्सन तथा ’फिट इंडिया कॉन्क्लेव’ फाउंडर डॉक्टर सुनीता दुबे ने इस मुहीम को लेकर बताया कि इस फिट इंडिया का मिशन देश को भौतिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से स्वास्थ्य बनाना है जिसके लिए तरह तरह की गतिविधियां की जा रही हैं। जिसमें लोगों को शिक्षित करना तथा हेल्थ और फिजिकल फिटनेस को सुनिश्चित करना है।
सुनीता दुबे ने बताया कि हमारा उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है। जिसके लिए फिट इंडिया ऐसी कमेटी का निर्माण कर रहा है जिसमें देश भर के डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट जुड़ सकें। फिट इंडिया स्टार्टअप मिशन से स्टार्टअप से होने वाली मानसिक और प्रेसर से होने वाले मेडिकल इश्यू को सपोर्ट व गाइड करेगी, अपने ऐप्प व काउंसलर के माध्यम से। हम मेडिकल से जुड़े क्षेत्र में जहां हम स्टार्टअप को स्थापित और बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं वहीं फिट इंडिया हैल्थ कार्ड पर भी काम कर रहे हैं। साथ ही साथ स्वास्थ्य से जुड़ी नई तकनीकी को सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल एप्लीकेशन का सहारा लिया जा रहा है।
देश के विभिन्न क्षेत्रों से कई पद्मश्री पुरस्कार सम्मानित डॉक्टर्स ने इस कॉन्क्लेव में अपना योगदान दिया। साथ ही फिट इंडिया कमिटी के सदस्य जिन्होंने मेडिकल के क्षेत्र में महारत हासिल की। मेडस्केप इंडिया डॉ.नीरज दुबे पुरस्कृत, डॉ. अनिल कोहली  (फिट इंडिया कमिटी दिल्ली से ) डॉ. मोहसिन वाली, डॉ. यश गुलाटी, एच एन शर्मा, पवन कुमार आदि ने मिलकर कार्यक्रम की सफलता में अपना पूर्ण सहयोग दिया।
कार्यक्रम के दौरान सभी लोगों ने सीपीआर डेमोस्ट्रेट किया, जो कि फस्र्ट ऐड है। एजुकेशन मिनिस्टर, हेल्थ मंत्रालय के लोगों ने भी इसे किया। फिट इंडिया, स्क्रीन इंडिया जो मेडिकल कैम्प के द्वारा किया जा रहा है। ट्रीट इंडिया जो बीमारी निकलने पर इलाज करेगी, प्रीवेंट इंडिया जो बीमारी से बचने के तरीकों पर काम करती है, जैसे योगा, प्रीमेडिकल तरीकों से। ट्रेन इंडिया जो लाइफ सेविंग फस्र्टएड सिखाती है।
मेडस्केप इंडिया 14 साल से अपना योगदान स्वास्थ्य के क्षेत्र में दे रही है। सेव गर्ल चाइल्ड, अनोखी पहल, मेडस्केप इंडिया नेशनल अवाॅर्ड, एचआईवी, एड्स, कैंसर अवेयरनेस, मिलियन स्माइल, वुमन एम्पाॅवरमेंट, डाॅक्टर्स एंथम कई सफल कैंपेन के लिए भारत में जाना जाता है।

11 शव 11 सवाल

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दिल्ली का बुराड़ी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार यहां पहले की तरह कोई गैंगवार तो नहीं हुआ है लेकिन जो कुछ हुआ उसको देखकर यहां के लोग दहशत में जरूर हैं। लोगों के लिए रविवार का दिन हमेशा की ही तरह था, लेकिन अचानक से उनके लिए इसके मायने बदल गए। वजह थी एक घर में मिले ग्यारह लोगों के शव। जिन लोगों के शवों को पुलिस ने बरामद किया है उनमें 7 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं। एक साथ इतने शव मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। लोगों के जुबान पर सिर्फ यही सवाल था कि ऐसा क्यों और कैसे हुआ। लेकिन फिलहाल इस सवाल का जवाब पुलिस के पास भी नहीं है।
रहस्यमयी मौत पर पुलिस का सबसे पहले माथा तब ठंका जब उसने पाया कि बुजुर्ग महिला की मौत गला दबाने से हुई है। हालांकि, अब भी वो किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है और वो पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है.

लेकिन उनके सामने कम से कम ये 11 सवाल उठ रहे हैं।

1. बुजुर्ग महिला का कत्ल किसने किया और क्यों किया?
2. घर का मुख्य दरबाजा क्यों खुला था या किसने खोला?
3. घर में कोई लूटपाट नहीं हुई तो फिर क्या बुजुर्ग महिला को किसी घर के जानकर या करीबी ने मारा? घर में काफी कैश रखा था पर उसको किसी ने क्यों नहीं चुराया?
4. अगर बाकी 10 लोगों ने आत्महत्या की तो किस वजह से?
5. इतने लोगों के आत्महत्या की तो घर से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला?
6. घर के हालत और गले में लटकी चुन्नी इशारा कर रही है ये परिवार काफी धार्मिक प्रवृत्ति का था?
7. अगर घर में एक कत्ल हुआ या कोई बाहरी आया तो कुत्ते ने भोंका क्यों नहीं?
8. जबकि कुत्ता छत पर ठीक उसी जगह चेन से बंधा था जिस छत के नीचे जाले से लटके हुए शव मिले?
9. कुछ बच्चों के पैर जमीन से टच भी हो रहे हैं तो क्या उनको भी मार कर लटकाता गया ताकी वो भी आत्महत्या लगे?
10. सभी ने एक जगह ही खुदकुशी की आसपास लटक कर। मतलब किसी को पहले वाले को मरता देख बिल्कुल डर नहीं लगा?
11 . मैन गेट और पहली मंजिल का गेट खुला हुआ था। दरवाजा क्यों खुला था? किसी बाहरी की साजिश तो नहीं?

रुपया सबसे निचले स्तर पर, विपक्ष के निशाने पर सरकार

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मुंबई

डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। गुरुवार को भारतीय करंसी अब तक के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। सुबह रुपया 28 पैसे की गिरावट के साथ डॉलर के मुकाबले 68.89 रुपए के स्तर पर खुला। यह रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। यह 68.82 के स्तर पर है।

गौरतलब है कि बुधवार को रुपया 68.61 के स्तर पर बंद हुआ था। इस कमजोरी के साथ ही रुपया 69 के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के करीब है। इससे पहले रुपया कभी भी डॉलर के मुकाबले 69 के पार नहीं पहुंचा है। सरकार की काफी रुपए गिरने की काफी आलोचना होती रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले सरकार को रुपए के स्तर गिरने पर खूब आलोचना करते रहे हैं। अब विपक्ष के निशाने पर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

मुंबई में भीड़भाड़ वाले इलाके में गिरा प्लेन, 5 की मौत

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मुंबई के घाटकोपर इलाके में एक प्लेन क्रैश हो गया। यह चार्टर्ड प्लेन था। भीड़भाड़ वाले इलाके में हुए हादसे से हड़कंप मच गया। अब तक पांच लोगों की मौत की खबर आई है। मरने वालों में सड़क पर चल रहा एक व्‍यक्ति भी शामिल है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर हैं और बचाव अभियान जारी है। मुंबई पुलिस ने घटना की जांच कर रही है

गौरतलब है कि घाटकोपर में जागृति बिल्डिंग के पास एक निर्माणाधीन इमारत पर दिन के वक्त एक चार्टर्ड प्लेन आ गिरा। जैसा की बताया जा रहा है कि VT-UPZ प्लेन वर्ष 2014 तक यूपी सरकार का था। बाद में यूपी सरकार ने इसे यूवाई एविएशन बांबे को बेच दिया। इस प्‍लेन में कितने लोग सवार थे, इसकी जानकारी अभी पूर्ण रूप से नहीं मिल पाई है। नागर विमानन महानिदेशालय के मुताबिक हादसे में विमान में सवार दो पायलट, दो इंजिनियर और सड़क पर चल रहे एक व्‍यक्ति की मौत हो गई है।

 

रमल वर्कशॉप दिल्ली में, दिग्गज ज्योतिषचार्यों का जमावड़ा

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नईदिल्ली-

पिकाडली होटल नईदिल्ली में एक दिवसीय रमल वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। इस मौके पर देश भर के नामी ज्योतिष इस वर्कशॉप में भाग लेने आ रहे हैं। इस वर्कशॉप को अनुपम जॉली खास तौर पर प्रशिक्षण देंगे। रमल वर्कशॉप के आयोजक रेखा अरोड़ा ने बताया कि रमल वर्कशॉप प्रश्नकुंडली होती है जिसमें पूछे गए प्रश्नों के आधार पर प्रश्नों का जवाव दिया जाता है। खास बात यह है कि आज भी बहुत सारे प्रश्नकर्ता को अपने जन्मतिथि मालूम नहीं होता है। ऐसे में ज्योतिषाचार्य प्रश्नकुंडली का सहारा लेते है। रेखा अरोड़ा ने बताया कि रमल में विशेष रूप से 16 घर होते हैं जबकि किसी अन्य विधि में 12 घर होते हैं।

रेखा अरोड़ा ने बताया कि जब किसी वस्तु की चोरी या किसी का भूल जाने पर उसका जवाब प्रश्नकुंडली से सटिक रूप से दिया जाता है। आज ऐसे प्रश्न ज्योतिषचार्यों के पास आ रहे हैं जिसका जवाब वे सटिक रूप से देते हैं। रेखा अरोड़ा समय समय पर ऐसे वर्कशॉप का आयोजन करती रहती है जिससे जहां ज्योतिषाचार्यों के प्रश्नों का जवाब भी मिलता है वहीं ज्योतिष की अद्यतन जानकारी भी हासिल होती है।