ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के ब्रांड ऊषा केबल की मांग दिल्ली हरियाणा और पंजाब जैसे शहरों में बढ़ी 

0
नईदिल्ली-
ऊषा केबल इंडस्ट्रीज ने अपने ब्राण्ड ऊषा केबल की श्रृंखला को प्रदर्शित किया। इस अवसर पर कम्पनी निदेशक अमन गुप्ता ने बताया कि पिछले तिमाही से कई बड़े शहरों मे ऊषा केबल और माला केबल की मांग में बढ़ोत्तरी हुई है साथ ही इंजीनियर और आर्किटैक्ट अन्य कम्पनियों के मुकाबले ऊषा और माला केबल ज्यादा पंसद कर रहे हैैं। उन्होंने बताया की कम्पनी लगातार कई वर्षों से मार्केट से फीडबैक लेकर अपने शभी उत्पादों की क्वलिटी में सुधार करती आ रही है। यही वजह है कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, युपी और विहार जैसे शहरों में पिछले कई महीनो में कम्पनी की सेल में कई गुना इजाफा हुआ है।
उन्होंने बताया की हमारी कम्पनी ऊषा केबल और माला केबल यूपी और बिहार में समर सेबल केबल की सेल अन्य केबल के मुकाबले कई गुना बढ़ी है साथ ही उन्होंने कहा की ऊषा केबल में कन्ट्रोल केबल और स्क्रीन्ड केबल की तरफ कम्पनी खास ध्यान दे रही है। जिसके चलते कम्पनी ने अपने ब्राण्ड ऊषा केबल और माला केबल के कई उत्पादों  स्मॉक फाग केबल, रबराइज केबल, हाउस वाइरिंग केबल, कम्यूनिकेशन केबल, फायर सरबाइबल केबल, लो स्मॉक फाग, में -(एफ आर एल एस, एच आर एफ आर तथा फायर सरबाइबल) समर सेबल केबल, पॉली एलुमिनियम वायर फॉर एग्रीकल्चर यूज टेंट डेकोरेशन वायर, हाउस वायरिंग एवं इंडस्ट्रियल वायरिंग की श्रंखला को देश भर में उतारा। उन्होंने कहा कि ऊषा केबल के प्रोडक्ट अभी तक भारत के कई राज्यों में उपलब्ध हैं, और डिमांड भी काफी अच्छी देखी जा रही है और अब माला केबल की भी आपूर्ति पूरे देश में जल्द से जल्द की जाएगी।

फाइलेरिया उन्मूलन-  सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के लिए समन्वय समिति की हुई बैठक 

0
-फाइलेरिया की दवा है सभी तबके के लिए है जरूरी : जिलाधिकारी
-समन्वय समिति की बैठक में स्वास्थ्य के साथ सभी विभाग के लोग हुए शामिल
लखीसराय-
जिलाधिकारी मंत्रणा कक्ष में शुक्रवार को जिलाधिकारी अमरेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में आगामी दस अगस्त से शुरू होने वाले  फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (आई डी ए ) हेतु समन्वय समिति   की बैठक आयोजित की गयी। इस बैठक का मकसद  सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम को पूरी तरह से सफल सिद्ध करना है।
जिलाधिकारी अमरेन्द्र कुमार  ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि लखीसराय जिला में  इस अभियान से  पहले एमडीए अभियान चलाया जाता रहा है, पर इस बार आईडीए अभियान चलाया जाएगा। मतलब अब सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम में  दो दवा के स्थान पर तीन दवा  खिलायी जाएगी। इसलिए जिला के सभी विभाग  के लोगों से उम्मीद करता हूँ की  जिला में आगामी दस अगस्त से शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (आई डी ए ) को हर संभव तरीके से सफल बनाने का प्रयास करेंगे।
अभियान के बारे में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ बी पी सिन्हा ने कहा कि जिला में अभी तक कुल 1937 केस फाइलेरिया के मिले हैं।  नाइट ब्लड सर्वे 2023 के अनुसार कुल 74 लोग माइक्रो फाइलेरिया से ग्रसित पाए गए  हैं। डॉ सिन्हा ने कहा कि फाइलेरिया जैसे विकृत बीमारी से निजात पाने के लिए ही सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जाता है। जिसमें जिला के सभी घरों के साथ चिह्नित स्कूलों में टीम के द्वारा सभी को सामने में दवा खिलायी जाएगी।
– घर-घर जाकर दो वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा –
जिला वेक्टर जनित-रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि  जिले के सभी प्रखंडों में आई डी ए अभियान चलाया जाएगा । आईडीए में  गठित टीम  घर-घर जाकर लोगों को खुद के सामने आईवरमेक्टीन, अल्बेंडाजोल एवं डीईसी की दवाएं खिलाएंगी। ताकि एक भी व्यक्ति दवाई खाने से वंचित नहीं रहे और अभियान सफल हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, 2 से 5 साल तक के बच्चों को  100 मिलीग्राम की डीईसी एवं 400 मिलीग्राम की अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली, जबकि, 6 से 14 साल तक के किशोरों को आईवरमेक्टीन की दवा के साथ  डीईसी की दो एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली एवं 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन गोलियां एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलायी जानी है।
बैठक में  जिला डीडीसी  सुधीर कुमार , अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ,डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ,  वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद ,पीसीआई के स्टेट सहायक प्रोग्राम मैनेजर अमरेश कुमार ,पिरामल के डीपीओ भी/ एल मो आरिफ के साथ पीआरआई , शिक्षा ,जीविका के साथ सभी विभाग के प्रतिनधि मौजूद थे।

नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम- शिशु मृत्यु दर को डबल से सिंगल डिजिट में लाने को  स्टाफ नर्स को दिया जा रहा प्रशिक्षण : डॉ राजीव गुप्ता 

0
: आईएपी, जिला स्वास्थ्य समिति और पाथ के संयुक्त तत्वावधान में  हुआ प्रशिक्षण
:  प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रही हैं सदर अस्पताल सहित जिलाभर के सभी सीएचसी और पीएचसी की स्टाफ नर्स
खगड़िया-
नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत शिशु मृत्यु दर को डबल से सिंगल डिजिट में लाने के उद्देश्य से स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उक्त बातें बुधवार को खगड़िया सदर अस्पताल परिसर स्थित नवनिर्मित फेब्रिकेटेड हॉस्पिटल में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडियन एसोसियेशन ऑफ पीडियाट्रिक के प्रतिनिधि डॉ राजीव गुप्ता ने कही । उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव के पश्चात करीब 10% नवजात शिशुओं को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेंशन (सीपीआर) की आश्यकता पडती है। दो दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने वाली स्टाफ नर्स को प्रसव के पहले और पश्चात आने वाली जटिलताओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस दौरान उन्हें बताया जा रहा है कि प्रसव के पश्चात तत्काल नवजात शिशु की धड़कन की गति, सांस लेने की गति के  साथ यह देखना आवश्यक होता है कि जन्म के बाद शिशु रोया या नहीं। उन्होंने बताया कि प्रसव के पश्चात नवजात शिशु की धड़कन 100 से ऊपर और सांस लेने की गति 30- 40 के करीब होना चाहिए । प्रसव के बाद शिशु यदि देर से रोता है तो चमकी सहित अन्य परेशानी होने का खतरा रहता है।
इंडियन एसोसियेशन ऑफ पीडियाट्रिक (आईएपी), जिला स्वास्थ्य समिति और डेवलपमेंट पार्टनर प्रोग्राम फॉर अप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी इन हेल्थ (पाथ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण-
जिला स्वास्थ्य समिति खगड़िया के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) प्रभात कुमार राजू ने बताया कि पीडियाट्रिक (आईएपी), जिला स्वास्थ्य समिति और डेवलपमेंट पार्टनर प्रोग्राम फॉर अप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी इन हेल्थ (पाथ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन बुधवार को जिलाभर से आई कुल 32 स्टाफ नर्स ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से जिलाभर के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव का कार्य करवाने वाली स्टाफ नर्स को प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं और बाधाओं से निपटने के लिए दक्ष बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि रेफरल मामलों में कमी आए और जिला मुख्यालय में कार्यरत एसएनसीयू में भर्ती होने वाले कमजोर नवजात शिशुओं की संख्या में कमी हो । इसके साथ ही नवजात शिशु मृत्यु दर को कम से कम किया जा सके । उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने सन 2009 में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया ताकि प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा का सही तरीके से देखभाल करने वाले डॉक्टर और नर्सों की क्षमता वर्धन किया जा सके ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पाथ संस्था के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद डॉ चंदन और सिद्धांत कुमार ने बताया कि आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में आईएपी से डॉ राजीव कुमार गुप्ता, सदर अस्पताल खगड़िया में कार्यरत डॉ संजू कुमारी, डॉ शशिबाला और डॉ नरेंद्र कुमार ने उपस्थित सभी स्टाफ नर्स को तीन अलग- अलग ग्रुप में बांट कर सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के सभी 38 जिलों में तीन चरणों में दिया जाना है। प्रशिक्षण के पहले चरण में मेडिकल ऑफिसर, दूसरे चरण में स्टाफ नर्स और तीसरे चरण में एएनएम को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में मेडिकल ऑफिसर के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने वाले सदर अस्पताल खगड़िया के मेडिकल ऑफिसर डॉ संजू, डॉ शशिबाला और डॉ नरेंद्र कुमार आज के प्रशिक्षण में प्रशिक्षक के रूप में स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण दे रहे हैं। यही लोग अगले चरण में एएनएम को भी प्रशिक्षण देंगे।

परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई दोनों साधन सुरक्षित और कारगर 

0
– जिले के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्र समेत सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में उपलब्ध हैं अस्थाई साधन की व्यवस्था
– गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना  बेहद जरूरी
लखीसराय-
परिवार नियोजन योजना में शामिल दोनों साधन (स्थाई और अस्थाई) पूरी तरह सुरक्षित, काफी कारगर व प्रभावी है। इसलिए, सुविधानुसार दोनों में से कोई भी साधन को बेहिचक अपना सकते हैं। खासकर ऐसी महिला, जो परिवार नियोजन के स्थाई साधन को अपनाने के लिए तैयार और इच्छुक है। किन्तु, उसका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं वह बेहिचक अस्थाई साधन अपना सकती  हैं। अस्थाई साधन भी स्थाई साधन की तरह ना केवल कारगर है बल्कि, काफी सुरक्षित और प्रभावी भी है। इसलिए, परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए इच्छुक और योग्य महिलाएँ दोनों में से कोई भी साधन को अपना सकती  हैं।
– उप स्वास्थ्य  केंद्र समेत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध हैं अस्थाई साधन की व्यवस्था :
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, परिवार नियोजन के दोनों साधन पूरी तरह सुरक्षित और काफी प्रभावी हैं । इसलिए, इच्छुक और योग्य महिलाएँ बेहिचक कोई भी साधन को अपना सकती  हैं। वहीं, उन्होंने कहा, जिले के सभी स्वास्थ्य उप केंद्र से लेकर सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में अस्थाई साधन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। जबकि, पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल में दोनों (स्थाई और अस्थाई) साधन उपलब्ध हैं ।  इसलिए, जो भी योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थी अस्थाई साधन को अपनाना चाहते वह अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान जाकर उपलब्ध सुविधा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, इसको लेकर संबंधित क्षेत्र की एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा योग्य और इच्छुक लाभार्थियों को जागरूक भी किया जाता और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधा की जानकारी देकर लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया जाता है।
– गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन साधन को अपनाना बेहद जरूरी :
समाज के हर तबके के सभी परिवार को गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना बेहद जरूरी है। क्योंकि, हम तभी गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जी सकते  और बच्चे को उचित परवरिश व अच्छी शिक्षा दे सकते हैं, जब हमारा परिवार छोटा और सीमित होगा। छोटा और सीमित परिवार के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना सबसे पहली नींव है। वहीं, उन्होंने बताया, इसको लेकर सरकार द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक भी किया जाता है।
– परिवार नियोजन की स्थाई साधन अपनाने वाले लाभार्थियों को सरकार द्वारा दी जाती है प्रोत्साहन राशि :
परिवार नियोजन के स्थाई साधन अपनाने वाली लाभार्थियों को सरकार द्वारा ना सिर्फ सभी प्रकार की मुफ्त सुविधा की  व्यवस्था की गई बल्कि, प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। जिसमें प्रसव के उपरांत एक सप्ताह के अंदर इस साधन को अपनाने पर तीन हजार एवं इसके बाद अपनाने पर दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जबकि, पुरुष नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ दिया जाता है।
– जानें, क्या है स्थाई और अस्थाई साधन के उपाय :
परिवार नियोजन के दो साधन हैं। पहला स्थाई और दूसरा अस्थाई। स्थाई साधन में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा पीएचसी स्तर से लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में उपलब्ध है। जबकि, अस्थाई साधन के रूप में छाया, अंतरा, काॅपर-टी एवं कंडोम की सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा की स्वास्थ्य उप केंद्र स्तर पर भी पर व्यवस्था की गई है। जहाँ योग्य और इच्छुक लाभार्थी जाकर सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

टीबी मरीजों को समुदाय की मुख्यधारा से जोड़ने में टीबी चैंपियंस की भूमिका अहम् 

0
• टीबी चैंपियंस के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ शुभारंभ
• 7 जिले से 35 टीबी चैंपियंस को दिया जायेगा प्रशिक्षण
• रीच संस्था एवं स्टेट टीबी सेल के तत्वावधान में हुआ कार्यशाला का आयोजन
पटना-
“टीबी चैंपियंस सिर्फ टीबी मरीजों की पहचान, उन्हें उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में ही नहीं अपितु मरीजों को समुदाय की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम् भूमिका निभा रहे हैं. समुदाय द्वारा टीबी से ग्रसित व्यक्तियों को समुदाय कलंकित किया जाना और उनके प्रति भेदभाव का नजरिया रखना खेदजनक है. टीबी से ग्रसित व्यक्ति से संपर्क में आने से बचें और यदि संपर्क में आते हैं तो सावधानी बरतें, लेकिन मरीजों से भेदभाव कर लोग सिर्फ मरीजों का मनोबल तोड़ते हैं ”, उक्त बातें अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा डॉ. बाल कृष्ण मिश्र ने टीबी चैंपियंस के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कही. रीच संस्था एवं राज्य टीबी सेल के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का मंगलवार को पटना स्थित एक निजी होटल में किया गया. कार्यशाला में अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा डॉ. बाल कृष्ण मिश्र, राज्य आईईसी पदाधिकारी, यक्ष्मा, बुशरा अज़ीम, रीच संस्था के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मोहम्मद मुदस्सिर के साथ राज्य एवं जिलों से रीच के अनेक अधिकारीयों ने भाग लिया.
टीबी को मात दे चुके मरीजों का नियमित अंतराल पर फॉलोअप जरुरी:
कार्यशाला में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा डॉ. बाल कृष्ण मिश्र ने बताया कि टीबी से ठीक हो चुके व्यक्तियों का नियमित फॉलोअप करना जरुरी है. इससे मरीजों में रोग के रिलैप्स होने का पता चलता है. डॉ. मिश्र ने बताया कि टीबी को मात दे चुके व्यक्तियों का 6 माह, 12 माह, 18 माह एवं 24 माह पर जांच की जानी चाहिए. साथ ही यक्ष्मा मरीजों का ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट उपचार शुरू करते समय, दवा सेवन के 2 महीने के बाद एवं दवा का कोर्स पूरे होने यानी 6 महीने बाद करना चाहिए. इससे पता चलेगा कि मरीज को दी जा रही दवाओं में से किसी दवा से टीबी का बैक्टीरिया रेसिस्टेंट तो नहीं है.
7 जिले के 35 टीबी चैंपियंस को दिया जा रहा प्रशिक्षण:
रीच संस्था के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मोहम्मद मुदस्सिर ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला में राज्य के 7 जिलों यथा पटना, गया, सारण, मुजफ्फरपुर, पुर्णिया, सीतामढ़ी एवं दरभंगा से 35 टीबी चैंपियंस हिस्सा ले रहे हैं. प्रतिभागियों का उपचार साक्षरता, जोखिम मुल्यांकन, लिंग आधारित एवं सहकर्मी/ परिवार समर्थन, मानसिक स्वास्थ्य काउंसिलिंग, कांटेक्ट ट्रेसिंग, यक्ष्मा के साथ अन्य गंभीर रोगों का प्रबंधन, सामुदायिक बैठक आदि पर उन्मुखीकरण किया जायेगा. उन्होंने बताया कि “यूनाइट टू एक्ट” प्रोजेक्ट के तहत राज्य के उक्त सातों जिलों में टीबी चैंपियंस द्वारा सराहनीय काम किया जा रहा है.
स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण मोडयूल पर किया गया उन्मुखीकरण:
राज्य आईईसी पदाधिकारी, यक्ष्मा, बुशरा अज़ीम द्वारा शामिल प्रतिभागियों का स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण मोडयूल पर उन्मुखीकरण किया गया. उन्होंने प्रतिभागियों को मोडयूल के सभी पहलुओं से अवगत कराया और अपने कार्य को बेहतर तरीके से संपादित करने की जानकारी दी. कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने अपने कार्यक्षेत्र के अनुभव को सभी से साझा किया.

पैक्स को सीएससी से जोड़ने से लोगों को मिलने वाली जनसुविधाओं की राह होगी आसान, पैक्स भी होंगे मजबूत व बढ़ेंगे रोजगार के अवसर: शाह

0
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) द्वारा सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) की सेवाएँ शुरू करने पर एक राष्ट्रीय महासंगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा कि, ‘पैक्स और सीएससी के एक होने से जहाँ गरीबों की सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी, वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा और ताक़त मिलेगी तथा नए भारत के निर्माण में अधिकतम क्षमता का उपयोग भी संभव हो पाएगा। अब तक सीएससी में 17,176 पैक्स अपना पंजीकरण करवा चुके हैं, जिसमें से 6,670 ने अपना कार्य शुरू कर दिया है और अगले 15 दिनों में बाक़ी के पैक्स भी काम करना शुरू कर देंगे। इस कार्य से करीब 14,000 ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और गाँव की सुविधाओं को सुदृढ़ करने का काम करेंगे।’
मोदी जी ने सहकारिता मंत्रालय का गठन किया और उसकी कमान अपने सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और भाजपा के दिग्गज नेता अमित शाह के हाथों में सौंप दी। शाह के मार्गदर्शन में इसके बाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सिलसिला शुरू हुआ। आज पैक्स और सीएससी को एक करके शाह ने मोदी जी के सहकारिता को मजबूत करने व डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने – दोनों संकल्पों का समन्वय कर उसे पूरा करने के मुहिम की शुरुआत कर दी है। अंत्योदय की विचारधारा से प्रेरित नेता शाह का स्पष्ट मानना है कि सीएससी की पहुँच को गाँव के गरीब-से-गरीब लोगों, भूमिहीन खेत मज़दूरों और दलित व आदिवासी समुदायों तक पहुँचाने के लिए पैक्स से बड़ा जरिया और कोई नहीं हो सकता।
मोदी जी के नेतृत्व और अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में भारत सरकार और राज्य सरकारों की 300 से अधिक योजनाओं को सीएससी से जोड़ा गया है। शाह का स्पष्ट मानना है कि सीएससी की पहुँच को गाँव के गरीब-से-गरीब लोगों तक पहुँचाने के लिए पैक्स से बड़ा कोई माध्यम नहीं हो सकता और अगर सहकारिता आंदोलन को मज़बूत बनाना है तो इसकी सबसे छोटी इकाई पैक्स को को मज़बूत बनाना होगा।
न्यूनतम गवर्नमेंट,अधिकतम गवर्नेंस के साथ अंतिम व्यक्ति तक भ्रष्टाचार रहित वितरण के सूत्रधार शाह के दिशा-निर्देश पर पैक्स का कंप्यूटरीकरण कर उन्हें पारदर्शी बनाया जा रहा है। साथ ही, उनका आधुनिकीकरण कर सरकार की डिजिटाइज़्ड योजनाओं को पैक्स के साथ जोड़ने की कवायद जोड़ों पर है।
गरीबों के संरक्षक शाह ने सीएससी के माध्यम से डिजिटल इंडिया मिशन के ज़रिए व्यवस्था से भ्रष्टाचार को समाप्त कर सभी सुविधाओं को ग़रीब के दरवाज़े तक पहुँचाने का बीड़ा उठा लिया है। पैक्स से लेकर अपेक्स तक की पूरी सहकारी व्यवस्था को मज़बूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में जुटे शाह का स्पष्ट मानना है कि सहकारिता से जुड़ी योजनाओं और निरंतर हो रहे सुधार जमीनी स्तर पर गाँव-गाँव तक पहुँचेंगे तो सहकारिता आंदोलन को मजबूत होने से कोई नहीं रोक सकता। इसी दिशा में शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय ने सालों से लंबित सहारा के निवेशकों का फँसा हुआ पैसा वापस दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शाह ने सहारा रिफ़ंड पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसके बाद वैध जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस मिलने की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। इतिहास का यह पहला उदाहरण है जब किसी गरीब के फँसे हुए पैसे को वापस देने का निर्णय लिया गया। यह साबित करता है कि शाह बेसहारों के सहारा हैं।

शाह की बैठकों से नक्सलियों में मचा हड़कंप

0
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में हरियाणा के सूरजकुंड में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसका उद्देश्य अधिकांश नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से नक्सलवादियों का खात्मा करना था। शाह की बैठक के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र एंटी नक्सल टीम को नक्सलवादियों द्वारा जारी किया गया एक पत्र मिला है। इस पत्र में जिक्र किया गया है कि सरकार ने जिस तरीके से एलटीटी को खत्म किया था, उसी तर्ज पर नक्सल गतिविधियों को भी खत्म करना चाहती है।
नक्सलवाद और आतंकवाद मुक्त भारत के निर्माण में जुटे शाह की रणनीतियों के तहत पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में यह तय किया गया कि अमृतकाल में यह देश किसी भी नक्सली और आतंकी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगा। भाजपा के दिग्गज नेता और मोदी जी के भरोसेमंद सिपहसालार शाह के मार्गदर्शन में झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना जैसी तमाम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलवाद से निपटने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। आतंकवाद से मुक्त भारत के निर्माण के लिए एलटीटी को एक कोने में एकत्र करके उनकी गतिविधियों सहित पूरे एलटीटी को खत्म कर दिया गया था। ठीक उसी प्रकार शाह के दिशा-निर्देश पर नक्सल गतिविधियों को भी कॉर्नर करके खत्म करने की योजना तैयार हो चुकी है। भारत को नई पहचान दिलाने वाले कद्दावर नेता देश के उन हिस्सों के लिए नक्सली घटनाओं को रोकने का खाका तैयार कर रहे हैं, जहाँ नक्सली गतिविधियाँ ज्यादा हैं।
दरअसल 28 जुलाई से 3 अगस्त के बीच नक्सलवादी शहीद सप्ताह मनाते हैं। इसी दौरान एंटी नक्सल टीम को यह खत प्राप्त हुआ है। शाह की बैठक के परिणामस्वरूप नक्सलवादियों के बीच एक हड़कंप सा मच गया है और उनमें काफी दहशत दिख रही है। आने वाले दिनों में नक्सल क्षेत्र से नक्सलियों का खात्मा करने के लिए शाह ने कमान संभाल ली है। नक्सलवाद हो या आतंकवाद, खौफ पैदा करने के लिए शाह का नाम ही काफी है। शाह ने यदि ठान लिया है तो यह तय है कि जल्द ही भारत नक्सलवाद से मुक्त होगा और देश को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी।

आज के युवा स्टार्टअप में देश का नाम रोशन कर रहे हैं- डॉ.शंकर घनशामदास अंदानी

0

नईदिल्ली-

द फेम फाइंडर्स ने बिजनेस 2023 कॉन्कलेव का आयोजन नईदिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया। जिसमें देशभर के बिजनेस मैन, कॉरपोरेटर, बैंकर्स एवं मार्केट एक्सपर्ट ने अपने विचार व्यक्त किए। इस खास आयोजन में चार सत्रों में व्यापारियों ने अपनी बढ़ चढ़कर भागीदारी की। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत में आयोजित होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन को बढ़ावा देना और व्यापारिक समुदाय के योगदान पर चर्चा करना था।

सीए डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी ने अपनी उपस्थिति और भाषण से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने डिजिटल शिक्षा के महत्व को समझाया जो छात्रों के एकाग्रता को बढ़ाकर एक प्रभावी सीखने की प्रक्रिया को सक्षम बनाता है। डिजिटल शिक्षा ने विश्वव्यापी महामारी के बावजूद शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद की है। डॉ. अंदानी ने साझा किया कि कैसे उन्होंने डिजिटल शिक्षा के महत्व को देखा, विशेष रूप से कोविड युग में, और महसूस किया कि यह देश की प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कुंजी है।

डॉ. घनश्याम अंदानी ने इस मौके पर कहा कि आज स्टार्ट अप में भारत दुनिया का नंवर वन बन गया है। लेकिन कई कंपनियां बंद हो गई है इसका कारण उनके पास अऩुभव की कमी है इस तरह के कॉन्कलेव से उन्हें अनुभव बांटने का मौका मिलता है। स्टार्ट अप कंपनियों को पहले प्रशिक्षण लेने की भी जरूरत है।  मैं आयोजक मंडल को धन्यवाद देना चाहूंगा की इस तरह के आयोजन किए जाने चाहिए।

गौरतलब है कि सीए (डॉ.) शंकर घनश्यामदास अंदानी को चार्टर्ड अकाउंटेंसी में 16 साल का अनुभव है और वह पिछले कई सालों से सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समाज सेवा भी कर रहे हैं। डॉ. अंदानी की सामाजिक कार्यों में रुचि के कारण वह पिछले 15 वर्षों से हर साल 200 से अधिक ट्रस्टों, गैर सरकारी संगठनों,मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों आदि के लिए मुफ्त कर और लेखा परामर्श कार्य कर रहे हैं।

आज सीए (डॉ.) शंकर घनश्यामदास अंदानी के नाम 40 से अधिक विश्व रिकॉर्ड हैं और उन्हें सामाजिक कार्यों के लिए 1480 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। डॉ. अंदानी देश में अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ के रूप में काम करते हैं और आर्थिक व्यवस्था की परंपरा को सुनिश्चित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। अमेरिका इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने कराधान, लेखांकन, व्यवसाय प्रशासन, परोपकार और उद्यमिता के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए सीए डॉ. शंकर घनश्यामदास अंदानी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है।

राजनीति और व्यापार में समावेशन कर चलने की आज आवश्यकता- राजमनी पटेल, सांसद

0

 

 

फेम फाइंडर्स बिजनेस 2023 में 10 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।

स्टार्ट अप कंपनियों ने अपने बारे में विस्तार से चर्चा की।

देश भर के कॉरपोरेटर, बाजार एक्सपर्ट व बैंकर्स ने भाग लिया

-सांसद राजमनी पटेल एजुकेशन थिंक टैंक ईडीआरएफ की शुरुआत करने की घोषणा की।

 

नईदिल्ली-

द फेम फाइंडर्स ने बिजनेस 2023 कॉन्कलेव का आयोजन नईदिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया। जिसमें देशभर के बिजनेस मैन, कॉरपोरेटर, बैंकर्स एवं मार्केट एक्सपर्ट ने अपने विचार व्यक्त किए। इस खास आयोजन में चार सत्र में व्यापारियों ने अपनी बढ़ चढ़कर भागीदारी की।

इस मौके पर सांसद राजमनी पटेल ने कहा कि आज देश में व्यापार और राजनीति में सामंजस्य बनाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। गांव में कई ऐसे व्यापार है जिसे वैश्विक स्तर पर ले जाने की जरूरत है जिसकी कमी आज दिख रही है। आज देश में कई तरह की योजनाएं चल रही है लेकिन इसकी जानकारी आम व्यापारी के पास नहीं है जिसे इस तरह के आयोजन से ही पूर्ति की जा सकती है।

राजमनी पटेल ने कहा कि बिजनेस में सबसे ज्यादा समस्या बैंकर्स से मिलती है। जिसे हल करने की आवश्यकता है। सरकार एमएसएमई पर कई तरह की पॉलिसी ले आई है लेकिन कैसे साल्व किया जाए कैसे आम व्यापारी को पैसा मिलेगा इसकी कमी आपको साफ दिखेगा। इस तरह के आयोजन से समस्या का हल निकलेगा इसके लिए आयोजक मंडल को हम बधाई देते हैं। हम तो यही कहेंगे जो भी दिन भर के मंथन से निकलेगा उसे सरकार के सामने व्योरा अवश्य भेजवाएं।

इस मौके पर गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में मौजूद दीन दयाल अग्रवाल ने कहा कि आज बैंकर्स कई तरह की योजनाओं के साथ सामजंस्य बना रहे हैं। कई समस्याएं हैं जैसे व्यापारी को कैसे समझा जाए। क्या उनके पास पुराने अनुभव हैं। आज एमएसएमई में भारत कई उपलब्धियां हासिल किया है जिसमें कई उद्योग आगे बढ़ें हैं।

डिलाइट ओटोमेशन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी मनोज दूबे ने कहा कि आज बैंकर्स हमारी समस्या को नहीं समझते जिससे समस्या बढ़ जाती है। लोन की सुविधाएं हैं लेकिन उसे कैसे व्यापारी उठाए यह समस्या है। एक बार लोन ले लीजिए फिर उसके बाद दबाब बढ़ता जाता है जिससे समस्या उत्पन्न होता है। इस मौके पर अल्विडो विजन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ प्रज्ञायत द्विवेदी ने कहा कि आज युवा उद्यमियों के पास संयम की कमी है जिसे बनाकर रखने की आवश्यकता है। जितनी जल्दी हो कमाना चाहते हैं जबकि कुछ ठहरकर व्यापार को विस्तार देने की जरूरत है। जिसकी कमी दिखती है। बैंकर्स को भी व्यापारी से तालमेल बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है।

कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए सीए तरुण कुमार ने कहा कि आज स्टार्ट अप में भारत दुनिया का नंवर वन बन गया है। लेकिन कई कंपनियां बंद हो गई है इसका कारण उनके पास अऩुभव की कमी है इस तरह के कॉन्कलेव से उन्हें अनुभव बांटने का मौका मिलता है। मैं आयोजक मंडल को धन्यवाद देना चाहूंगा की इस तरह के आयोजन किए जाने चाहिए।

 इस मौके पर स्टार्टअप में देश के योगदान पर खास चर्चा की गई। जिसमें कई स्टार्ट अप कंपनियों ने अपने व्यापार के बारे में विस्तार से बताया।

इस कान्कलेव में वक्ता के रूप में भाजपा नेता व उद्योगपति गौरी शंकर साहू, विद्य फाउंडेशन के डॉ दिया तनवर, आर के ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन एनसी बंसल,सीए संजय लाभ, रवि आर कुमार,नीशीथ सिन्हा, प्रो. राम सिंह, नवेंदु भारद्वाज,निशांत कृष्णा, शिव कुमार, पूर्वा गुप्ता,संदीप गुप्ता, डॉ राम वीर सिंह और भोला नाथ दास ने व्यापार को तेजी से बढाने पर अपने विचार रखें। चार सत्रों में व्यापारियों की हुजूम बनी हुई थी। जिसमें कई युवा उद्यमियों ने भाग लिया।  इस खास आयोजन में उद्योगपतियों ने विस्तार से अपनी बात रखी। इस खास कान्कलेव में कई कॉरपोरेटर ने व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए कई तरह के सुझाव भी दिए। कार्यक्रम के अंत में फेम फाइंडर्स की डायरेक्टर रीना ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध हैं टीबी बीमारी की जाँच और समुचित इलाज 

0
– जिले के सदर अस्पताल, बड़हिया रेफरल अस्पताल एवं सूर्यगढ़ा सीएचसी में ट्रूनेट मशीन से हो रही है जाँच
– लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं जाँच… अब टीबी लाइलाज नहीं, समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी
लखीसराय-
टीबी एक संक्रामक बीमारी जरूर है, पर अब यह लाइलाज नहीं है।  इससे बचाव एवं स्थाई निजात के लिए समय पर जाँच एवं समुचित इलाज कराना जरूरी है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत स्वास्थ्य संस्थान  जाएँ और जाँच कराएं। जाँच के बाद चिकित्सा परामर्श का पालन करें। यही इस बीमारी से स्थाई निजात और बचाव का सबसे कारगर उपाय है। वहीं, लोगों को जाँच कराने में किसी प्रकार की असुविधा और अनावश्यक परेशानी नहीं हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग भी काफी सजग और गंभीर है। साथ ही लोगों की  सुविधा के मद्देनजर स्थानीय स्तर पर भी समुचित जाँच एवं इलाज की व्यवस्था की गई। ताकि लोगों को जाँच कराने में ना ही किसी प्रकार की असुविधा हो और नहीं लंबी दूरी का सफर करने की परेशानी उठानी पड़े। मसलन, सभी लोग सुविधाजनक तरीके से अपनी  जाँच करवा सकें । वहीं, संचारी रोग पदाधिकारी डॉ श्री निवास शर्मा ने बताया, जिले के सदर अस्पताल, बड़हिया रेफरल अस्पताल एवं सूर्यगढ़ा सीएचसी में संभावित मरीजों की ट्रूनेट मशीन से जाँच की जा रही है। साथ ही जाँच में पीड़ित पाए जाने पर समुचित इलाज की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जाँच से लेकर इलाज तक की सभी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क हैं ।
– टीबी संक्रमित मरीजों को प्रोत्साहन राशि का भी दिया जाता है लाभ :
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ  श्री निवास शर्मा ने बताया, टीबी संक्रमित मरीजों को निःशुल्क जाँच और इलाज के साथ-साथ सरकार द्वारा पोषण राशि भी देने की व्यवस्था की गई है। प्रोत्साहन राशि संबंधित मरीजों को उनके खाते के माध्यम से दी जाती है। ताकि मरीजों को उचित एवं प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करने में मदद मिल सके। उन्होंने बताया, किसी भी व्यक्ति को लक्षण महसूस होने पर तुरंत जाँच करानी चाहिए। क्योंकि, किसी भी बीमारी की शुरुआती दौर में जानकारी मिलती है तो उससे आसानी के साथ जल्द ही निजात भी मिलती है।
– बचाव के उपाय :
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
– मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
– पौष्टिक खाना खाएं, व्यायाम व योग करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
– ये हैं टीबी के लक्षण :
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार रहना।
– खांसी एवं खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।