चक दे INDIA राहुल, मोदी को NDA पर भरोसा

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-रितेश सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक)
2024 के आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच सीधे और कड़े मुकाबले की तरफ सियासती खेमा गोलबंद हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में खड़गे को ही सियासी झटका देते हुए जहां इंडिया की नुमांइदगी के तौर पर ममता के शब्दों में फेवरेट राहुल गांधी हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए पर पूरा भरोसा कर रहे हैं। कर्नाटक के बेंगलुरू शहर में 26 विपक्षी दलों के नेताओं ने गोलबंदी की, वहीं दिल्ली के अशोक होटल में एनडीए के बैनर तले 38 पार्टियां नरेंद्र मोदी के पीछे लामबंद दिखी। ये तो चुनाव में ही तय हो पाएगा कि कौन किस पर भारी है, लेकिन हौसले दोनों ही सियासी खेमों में बुलंद दिखाई दे रहे हैं। एनडीए का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने इंडिया यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलाइंस की अगुवाई अब राहुल गांधी करेंगे जिसकी घोषणा बकायदा टीएमसी सुप्रीमो व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की।
बहरहाल भाजपा ने कांग्रेस के नेतृत्व में बने महागठबंधन की बैठक पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ये पास-पास आने की कोशिशों में जुटे ये दल साथ-साथ चल नहीं पाएंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में 15 पार्टियां शामिल हुई थीं, ये सभी पार्टियांं के अलावा भी बेंगुलुरू में कुछ नए दल भी अपनी दाल गलाने कही गरज से शामिल हुए। कांग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, सीपीआई, सीपीआईएम, राजद, जेएमएम, एनसीपी, शिवसेना उद्धव ठाकरे, सपा और जदयू के अलावा डीएमके, केडीएमके, वीसीके, आरएसपी, सीपीआई माले, फारवर्ड ब्लॉक, आईयूएमएल केरल, कांग्रेस का जोसेफ गु्रप, केरल कांग्रेस का मणि गु्रप, अपना दल का कामेरावादी, एमएमके आदि दल शामिल हुए। वहीं जेडीएस के प्रमुख पूर्व प्रधानमंत्री एसडी देवगौड़ा को किसी ने न्यौता नहीं दिया। उन्हें भाजपा से उम्मीद थी, लेकिन किन कारणों से उन तक न्यौता नहीं पहुंचा, इस पर कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं एनडीए में कुछ नए दल शामिल हुए जिसमें चिराग पासवान की एलजेपी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। वहीं ओमप्रकाश राजभर की सुहेल दल, जीतन राम मांझी की हम सेकुलर भी अब एनडीए का हिस्सा बनकर भाजपा सरकार की वापसी में अपनी हिस्सेदारी तलाशने पहुंचे हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एनडीए की बैठक में 38 दलों की सूची का ऐलान किया। एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना, अजित पवार की एनसीपी, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकजनता दल, पवन कल्याण की जनसेना भी इन 38 दलों के बने एनडीए खेमे में शामिल हो चुके हैं। एनडीए की ताकत बने ये दल भाजपा की अगुवाई में लोकसभा में 350 से अधिक सांसदों के साथ मौजूद हैं, वहीं विपक्षी दलों के एकजुट हुए इंडिया में 150 से करीब सांसद हैं। मजे की बात है कि इनमें आधों के पास एक भी सांसद नहीं हैं।
ये दल चक दे इंडिया के नारे के साथ कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की सजा के बाद छीनी सांसदी के बाद उनके प्रति उभरी सहानुभूति के रास्ते संसद में पहुंचने का रास्ता देख रहे हैं। वहीं एनडीए में 65 प्रतिशत ऐसी पार्टियां शामिल हुई जिनका एक भी सांसद लोकसभा में नहीं हैं, लेकिन पार्टी के संख्या बल से जनता का भ्रमित करने की होड़ में देश की इन सियासी दलों में लूटापाटी हो रही है। आंकड़ों की खेल से बता दें कि बिहार और यूपी की सीटों को मिलाकर 22 प्रतिशत सीटें लोकसभा का हिस्सा इन्हीं दोनों प्रदेशों से बनता है। एनडीए में शामिल कुछ दल तो जाति पर आधारित हैं, उनका खासा प्रभाव इन प्रदेशों में हैं। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया में जुड़े दलों को लगता है कि राहुल की भारत जोड़ों यात्रा के बाद से और सांसदी छीनने के बाद उभरी सहानुभूति गेम चेंजर साबित हो सकती है।
इन सियासी दलों की खेमा बंदी से अलग कुछ दल ऐसे भी हैं, जो अभी हवा का रूख समझने की कोशिशों में जुटे हैं। इनमें ओडिसा का बीजद, आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस, यूपी की बहुजन समाज पार्टी और पंजाब की अकाली दल, तेलांगना में तेलुगूदेशम पार्टी और बीआरएस जैसे क्षेत्रीय दल किसी गठबंधन में जाने से पहले थोड़ा और इंतजार करना चाहते हैं। राजनीति की इस सियासती खेल को समझने के लिए आपको बता दें कि बीआरएस को छोड़कर सभी दलों ने नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा का खुलकर साथ दिया था। इन दलों के पास भी लोकसभा के करीब 50 सांसद हैं जो दोनों खेमों की बजाए रूको और इंतजार करो की रणनीति पर टिके हैं। ये सियासी दल कहीं न कहीं भाजपा की जाल में उलझे हैं लेकिन ऐन चुनाव के मौके पर अपने पत्ते फेंकते हुए किंग मेकर की भूमिका में सामने आ सकते हैं।
एनडीए के मुकाबले इंडिया बनकर उभरे विपक्षी गठबंधन की बंधी गांठे एक नई पहचान, एक नए नाम के साथ सामने उभरी हैं। विपरीत विचारधारा वाले ये दल राज्य और क्षेत्रीय राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं और एक-दूसरे के सामने चुनाव लड़कर एक-दूसरे का पस्त करते रहे हैं। मगर 2024 के आते-आते चुनाव में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए एक साथ नए नाम INDIA के साथ खड़े हुए हैं। वहीं 20 साल पहले बना यूपीए का सियासी युग का अब अंत हो गया है। आपको बता दें कि गठबंधन का ये इतिहास 1977 और 1989 में अपना कमाल दिखा चुका है। अब विपक्ष के इस गठबंधन से चमत्कार की उम्मीद लगाकर एकजुट हो रहे हैं। इनमें वो दल भी जिन्होंने मोदी के चमत्कार को अपने राज्यों रोका है। इनमें दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी, झारखंड में हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड मुक्ति मोर्चा, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी, बिहार में नीतीश और लालू की जदयू और राजद भी इंडिया में शामिल हैं।
गठबंधन की पहली मीटिंग में सभी दलों को पटना बुलाने वाले नीतीश कुमार खुद को ही संयोजक बताकर कर्ताधर्ता और नेता समझ रहे थे, लेकिन बेंगलुरू पहुंचते ही उन्हें अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लग गया। मीटिंग खत्म होते ही प्रेस कांफ्रेंस का बहिष्कार करते हुए चार्टर प्लेन से नीतीश कब वहां से खिसक लिए किसी को पता नहीं चला। पटना पहुंच कर नीतीश ने चुप्पी साध ली। उनका खेल ममता ने बिगाड़ दिया। इस बैठक की अध्यक्षता कर रही सोनिया गांधी के बगल में बैठी ममता बनर्जी ने राहुल को गठबंधन का फेवरेट नेता कहकर सबको चौकाया ही नहीं, नीतीश के मंसूबे पर भी पानी फेर दिया। महज 24 घंटे के भीतर नीतीश के जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह ने सफाई पेश करते हुए उनका बचाव किया। अभी गठबंधन की ये दूसरी बैठक थी, सियासत का खेल अभी बाकी है। लोकसभा चुनाव में 8 महीने का समय अभी बाकी है और कम से कम 8 मीटिंग होना तय है।
एनडीए और इंडिया के बीच एक-दूसरे को शह और मात देने का खेल जारी रहेगा। कौन कब पाला बदलकर इधर से उधर जाएगा, इस पर जनता की नजरें बनी रहेगी। अंतिम स्वरूप मार्च तक तय हो पाएगा, तब तक दलों के सियासी दांवपेंच चलते रहेंगे। 2024 के चुनाव में विपक्षी दलों की घबराहट राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव को लेकर है। ये क्षेत्रीय जो कांग्रेस के वोटबैंक पर कब्जा किए बैठे थे, अब वो छिटकता दिखाई दे रहा है। मोदी के ये घोर विरोधी नेताओं को अपना अस्तित्व बचाए रखने और समेटने के लिए राहुल गांधी जिंदाबाद का नारा लगाना पड़ेगा। वहीं एनडीए से जुड़े दल इस चुनावी वर्ष में मोदी मैजिक के अलावा जनता के लिए सरकार की लोकलुभावन घोषणाओं का भरोसा कर रहे हैं। इनमें पुरानी पेंशन की बहाली और निजी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की भविष्य निधि पेंशन योजना का अमल का भी मामला सामने है जिस पर जल्द ही मोदी सरकार आम जनता को राहत देने का फैसला कभी भी कर सकती है। सियासत की शतरंज पर शह और मात का खेल जारी है। देखना है कि जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधता है।

दिल्ली के अंतराष्ट्रीय युवा केंद्र में आयोजित कलाम जयंती महोत्सव पर पर कोटा के युवा गाँधी होंगे डॉ. एपीजे  कलाम युवा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरुस्कार से होंगे सम्मानित एवं कलाम लीडरशिप ट्रेट्स पर देंगे व्याख्यान/

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२८ राज्यों एवं  एवं विभिन्न देशो के प्रतिनिधि करेंगे सहभागिता -चेयरमैन कलाम फॉउंडेशन मुन्ना कुमार 
 
गणमान्य अतिथियों में  डॉ. एपीजे अब्दुल  कलाम इंटरनेशनल  फाउंडेशन के  सह संस्थापक और वर्तमान मुख्य ट्रस्टी  मिसाइलमैन डॉ. एपीजे  कलाम के सुपौत्र शेख सलीम ,कलाम यूथ लीडरशिप कांफ्रेंस के चेयरमेन अंतराष्ट्रीय युवा ब्रिगेडियर  मुन्ना कुमार ,कलाम  फॉउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक एवं
 गाँधीवादी विचारक शुभ्रो रॉय ,अर्चना भट्ट्चार्जी
होंगे विशेष रूप से शामिल
हाल ही में एक छोटे से कस्बे बकानी झालावाड़ मूल के कोटा निवासी डॉ. नयन प्रकाश गाँधी सुपुत्र रामदयाल गाँधी को  मिसाइलमैन डॉ. एपीजे  कलाम की पुण्य तिथि पर भारत में राजधानी नई दिल्ली मे आयोजित कलाम यूथ लीडरशिप कांफ्रेंस २०२३ मे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा जायेगा. प्रेस कांफ्रेंस में  डॉ. नयन प्रकाश गाँधी ने बताया की इस वर्ष अंतराष्ट्रीय युवा केंद्र दिल्ली में भारत के सभी राज्यों एवं अन्य देशो से इस तीन दिवसीय कलाम यूथ लीडरशिप कांफ्रेंस में सस्टेनेबल डेवलपमेंट क्षेत्र में कार्यरत देश के टॉप प्रतिष्ठित सामाजिक वैकासिक क्षेत्र में कार्य कर रहे युवाओ का चयन  कलाम फॉउंडेशन की बोर्ड ज्यूरी टीम द्वारा किया गया .साथ ही गाँधी ने बताया की इस बार कांफ्रेंस में युवाओ  का सम्मान कई गणमान्य अतिथि  डॉ एपीजे अब्दुल  कलाम इंटरनेशनल  फाउंडेशन के  सह संस्थापक और वर्तमान मुख्य ट्रस्टी  मिसाइलमैन डॉ. एपीजे  कलाम के सुपौत्र शेख सलीम ,कलाम यूथ लीडरशिप कांफ्रेंस के चेयरमेन अंतराष्ट्रीय युवा ब्रिगेडियर  मुन्ना कुमार ,कलाम  फॉउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक एवं गाँधीवादी विचारक शुभ्रो रॉय ,अर्चना भट्ट्चार्जी की गरीमामय उपस्थिति में किया जायेगा .
कांफ्रेंस चेयरमेन ने बताया की  गाँधी को पूर्व में भी डॉ.एपीजे कलाम युवा सम्मान से नवाजा जा चूका है ,गाँधी सामाजिक वैकासिक कार्यो की विभिन्न सरकारी गैर सरकारी आम जनकल्याणकारी  प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग इवैल्यूएशन ,युवा क्षमता संवर्धन ,डिजिटल नवोन्मेष , सतत  विकास हेतु विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय लेखन ,रिसर्च नवोन्मेष ,युवा लाइफ कोच ,करियर मार्गदर्शक आदि में उच्च विशेषज्ञता के साथ सतत रूप से सक्रिय है .उनकी लगातार सामाजिक युवा सशक्तिकरण क्षमता संवर्धन कार्यक्रम एवं सामाजिक प्रोजेक्ट में उल्लेखनीय कार्यो हेतु इस बार कलाम फॉउंडेशन लीडरशिप कांफ्रेंस की अंतराष्ट्रीय बोर्ड जूरी  मेंबर्स ने गाँधी का चयन कलाम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए चयन किया है जो की आगामी डॉ.एपीजे कलाम  की पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित अंतराष्ट्रीय कलाम युवा लीडरशिप कांफ्रेंस में दिया जायेगा .गाँधी कई सामाजिक संघठनो से संलग्न है और सक्रिय रूप से एपीजे कलाम के आदर्शो पर चलकर सामाजिक  सेवा के लिए सदैव सक्रीय रहते है

शाह के नेतृत्व में 1 लाख 44 हजार किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थों को किया गया नष्ट

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को ‘ड्रग्स तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा’ पर क्षेत्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। शाह की अध्यक्षता में सम्मेलन के दौरान सभी राज्यों के एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के समन्वय से एनसीबी द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में 1 लाख 44 हजार किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थों को नष्ट किया गया, जो एक दिन में अब तक का सर्वाधिक ड्रग्स नष्ट करने का रिकॉर्ड है। पिछले एक साल में 10 लाख किलोग्राम मादक पदार्थों को नष्ट किया गया है, जिसका मूल्य लगभग 12,000 करोड़ रुपये है।
वैश्विक स्तर पर भारत को नई पहचान दिलाने वाले शाह का स्पष्ट मानना है कि नशे का कारोबार राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, जिससे निपटने के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र नरेंद्र मोदी के नशा मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में जुटे अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने नशे के कारोबार पर लगाम कसने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसके परिणामस्वरूप 2013 के बाद से दोगुने से अधिक मात्रा में ड्रग्स को जब्त किया जा चुका है। पिछले 9 साल में जहाँ एनसीबी द्वारा जब्त की गई ड्रग्स की संख्या में लगभग 100% की वृद्धि हुई है, वहीं ड्रग तस्करों के खिलाफ 181% अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और तस्करों की गिरफ्तारी में 296% की बढ़ोतरी हुई है। नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय ने जहाँ एक तरफ राष्ट्रीय नार्को समन्वय पोर्टल (एनकॉर्ड) की स्थापना की, वहीं दूसरी तरफ हर राज्य के पुलिस विभाग में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाया।
भारतीय राजनीति को नए सिरे से परिभाषित करने वाले शाह के कुशल मार्गदर्शन में खुफिया एजेंसियों द्वारा सभी वित्तीय दस्तावेजों का अलग-अलग विश्लेषण करने के बाद वित्तीय जाँच और तस्करों के संपत्ति की जब्ती में बढ़ोतरी आई है। साल 2022 में एनसीबी ने 27 ऐसे मामलों में वित्तीय जाँच की जिसमें 15,98,37,784 रुपये की संपत्ति जब्त की गई। डीईए, एएफपी, एनसीए, आरसीएमपी आदि अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर अंतर्राष्ट्रीय ड्रग माफिया को नियंत्रित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। साथ ही, 44 देशों के साथ इस मुद्दे पर द्विपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किया गया है। देश के 372 जिलों में नशा मुक्ति अभियान के तहत 8000 से अधिक युवा स्वयंसेवकों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है, जिसमें अब तक 3 करोड़ से अधिक युवाओं और 2 करोड़ से अधिक महिलाओं तक पहुँच बनाई जा चुकी है।
शाह का स्पष्ट मत है कि नशा व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और पूरी दुनिया के लिए हानिकारक है। अगर एक निश्चित समय के अंदर इस पर काबू नहीं पाया गया तो इस पर काबू पाना नामुमकिन हो जाता है। इसकी लत युवाओं को समाज पर बोझ बनाती है और इसके व्यवसाय से होने वाली आय आतंकवाद जैसी समस्याओं को मजबूत करती है। अमृतकाल में मोदी-शाह की जोड़ी द्वारा शून्य-सहिष्णुता की नीति अपनाकर त्रि-स्तरीय रणनीति के तहत ‘नशा मुक्त भारत’ के आह्वान का संकल्प साकार हो रहा है।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर लोगों का बढ़ा विश्वास-  जिले में संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने में हुई बढ़ोत्तरी 

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– एनएफएचएस – 4  रिपोर्ट में  64.1 % और एनएफएचएस – 5 रिपोर्ट में  75.8 % हुआ संस्थागत प्रसव
– मजबूत और सुदृढ़ स्वास्थ्य सुविधाओं की बदौलत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों  पर लोगों का बढ़ा विश्वास और संस्थागत प्रसव में हुई वृद्धि
लखीसराय-
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाली सभी प्रसूति महिलाओं को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग काफी सजग दिख रहा  है। जिसका सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगा है। जिले में संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने में बढ़ोत्तरी हुई है। हर तबके के लोग संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए आगे आने लगे हैं। जो सामुदायिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव का बड़ा प्रमाण है। एनएफएचएस – 4 की जारी रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 64.1 % संस्थागत प्रसव हुआ। जबकि, एनएफएचएस – 5 की जारी रिपोर्ट के मुताबिक 75.8 % संस्थागत प्रसव हुआ। यानी संस्थागत प्रसव में 11.7 % की वृद्धि हुई है। जो मजबूत और सुदृढ़ स्वास्थ्य सुविधाओं की बदौलत संभव हुआ है। लोगों में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति व्याप्त नकारात्मकता को मात मिली तथा हर तबके के लोगों का विश्वास बढ़ा।
– सामुदायिक स्तर पर लोगों में जागरूकता और स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग से हुई वृद्धि:
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया यह वृद्धि स्वास्थ्यकर्मियों की कड़ी मेहनत और सकारात्मक सहयोग के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर लोगों में जागरूकता का नतीजा है। प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान आने वाली सभी प्रसूति महिलाओं को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा सके। इसको लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों का स्वास्थ्य प्रबंधन हमेशा सजग और संकल्पित रहता है। ऑन ड्यूटी कर्मी भी प्रसूति महिलाओं को सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर हमेशा दृढ़ संकल्पित रहते हैं। प्रसव के दौरान प्रसूति को किसी भी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इसका विशेष ख्याल रखा जाता है। साथ ही प्रसव के उपरांत भी प्रसूति का 24 घंटे तक विशेष ख्याल रखा जाता है।  प्रसव के पश्चात जच्चा-बच्चा के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए स्वास्थ्य संबंधित  सतर्कता और सावधानी की जानकारी देकर जागरूक किया जाता है।
– गृहभेंट के तहत आशा कार्यकर्ताओं द्वारा संस्थागत प्रसव को लेकर किया जाता है जागरूक :
गर्भधारण के साथ ही संबंधित क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता द्वारा गृह भेंट के तहत संबंधित लाभार्थी का फॉलोअप किया जाता है। जिसके दौरान सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए समय-समय पर जाँच कराने समेत स्वास्थ्य से संबंधित अन्य जानकारियां देकर जागरूक किया जाता है। साथ ही संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए भी जागरूक किया जाता है। प्रसव के दौरान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की भी जानकारी दी जाती है। ताकि लोगों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिल सके और लोग  संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए आगे आ सकें।

प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत की तैयारी में जुटे अमित शाह

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नईदिल्ली-
भारतीय जनता पार्टी के चुनावी रणनीतिकार और स्टार प्रचारक अमित शाह दिन-रात संगठन को मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत रहते हैं। मोदी-शाह की जादूगरी का ही कमाल है कि भाजपा आज शून्य से शिखर तक का सफर तय कर पाई है। चुनावी रणक्षेत्र में शाह को मात देना असंभव है। इसी दिशा में शाह की कोशिशों का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेता दारा सिंह चौहान एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं।
उत्तर प्रदेश में सरकार या संगठन से नाखुश लोगों को मानने का जिम्मा अब अमित शाह ने अपने हाथों में लिया है इसके चलते पूर्व में दारा सिंह चौहान जो भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। अब भारतीय राजनीति के चाणक्य शाह की रणनीतियों से प्रेरित होकर शनिवार को समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका दे दिया। उन्होंने सपा के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है और वापस भाजपा का दामन थाम लिया है।
इस घटना क्रम को अमित शाह की 2024 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है, अब देखना यह है कि हर बार की तरह इस बार भी शाह का यह कदम सफल साबित होगा या नहीं ये देखने वाली बात होगी।
भाजपा के दिग्गज नेता अमित शाह ने हमेशा पार्टी की नींव को मजबूत करने का काम किया है। किसी भी चुनाव में कमल को खिलाने के लिए तत्पर अमित शाह के प्रयासों का नतीजा है कि लोग भाजपा को छोड़ते नहीं हैं, बल्कि शामिल होते हैं। पिछले 9 साल के भारतीय राजनीति का सफर देखा जाए तो शाह की रणनीतियों की वजह से दूसरे पार्टियों के सांसद और विधायकों ने भाजपा का दामन ही थामा है। पिछड़े वर्गों, गरीबों और किसानों के कल्याण में जुटे मोदी-शाह की जोड़ी का असर है कि बड़े-से-बड़े दिग्गज नेता अपनी पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में दारा सिंह चौहान कैबिनेट मंत्री रह चुके थे। राजनीतिक गलियारों के जानकारों की मानें तो दारा सिंह, चौहान समाज के बड़े नेता है। उनका असर मऊ समेत 20 जिलों में है। ऐसे में भाजपा में उनका आना, लोकसभा चुनाव के मद्देनजर फायदेमंद साबित हो सकता है। भारतीय राजनीति की दशा और दिशा को बदल कर रख देने वाले शाह की रणनीतियों के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत और मोदी जी का तीसरी बार प्रधानमंत्री बनना सुनिश्चित है।

बदलते मौसम में रखें खुद का ख्याल 

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-दूषित पानी एवं संक्रमित खाद्य पदार्थ मियादी बुखार के लिए हैं ज़िम्मेदार
-बच्चों में दस्त की शिकायत एवं बुखार के साथ बड़ों में कब्ज की शिकायत                                   -मियादी बुखार के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना है जरूरी
-साफ पानी और पौष्टिक आहार है फायदेमंद
लखीसराय-
बरसात  के मौसम  की शुरुआत होते ही कई प्रकार के रोगों में बढ़ोतरी हो जाती है। इन महीनों में मियादी बुखार यानि टायफायड के मरीजों की भी संख्या में इजाफ़ा हो जाता है। अन्य बुखारों की अपेक्षा मियादी बुखार अधिक गंभीर रोग की श्रेणी में आता है।  सही समय पर बेहतर प्रबंधन के  अभाव में इससे जान जाने का भी ख़तरा बढ़ जाता है।
क्या है मियादी बुखार :
मियादी बुखार यानि टायफायड फीवर सालमोनेला टायफ़ी नामक बैक्टीरिया से फैलता है। यह बैक्टीरिया सामान्यता दूषित पानी एवं संक्रमित खाद्य पदार्थों में ही पनपता है । साथ ही यह बैक्टीरिया पानी में लम्बे समय तक जीवित रहने में समर्थ भी होता  है । जिसके कारण दूषित पानी या संक्रमित भोजन सेवन करने से व्यक्ति मियादी बुखार से ग्रसित हो जाता है।
जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि मियादी बुखार के लिए दूषित पानी एवं संक्रमित आहार का सेवन मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है। साफ़ पानी एवं ताज़ा भोजन सेवन कर से इस रोग से बचा जा सकता है। मियादी बुखार को लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है। नियमित बढने वाले  तेज बुखार के साथ दस्त एवं उल्टी , बदन दर्द , कमजोरी, सिर दर्द, पेट दर्द ,भूख न लगना, बच्चों में दस्त की शिकायत एवं बुखार के साथ बड़ों में कब्ज की शिकायत मियादी बुखार के लक्षण होते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।  इलाज के तौर पर ऐसे मरीजों को एंटीबायोटिक की डोज दी जाती है।  मरीज को लगभग 2 हफ़्तों तक यह दवा खानी होती है।  मरीज घर पर ही रहकर संतुलित एवं सुपाच्य भोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में नारियल का पानी एवं फलों के जूस के सेवन के साथ दवा का सेवन कर सकता है।
बचाव के लिए यह करें–
दूषित पानी एवं संक्रमित या बासी भोजन खाने से बचें
बाहर का खाना खाने से बचें
ठेले पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों एवं पेय पदार्थों का सेवन नहीं करें
फ़ल या सब्जी को हमेशा साफ़ पानी से धोएं
बाहर मिलने वाले बर्फ का इस्तेमाल ना करें
खाना खाने से पहले साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं
नियमित बुखार के साथ उल्टी या दस्त होने पर डॉक्टर से जरूर  मिलें
बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा नहीं खाएं ।
इनका विशेष रखें ध्यान :
जीवाणुओं की वृद्धि तेज हो जाती है। यदि कुक्ड फ़ूड को घंटे से अधिक रूम तापमान में रखा जाता है। . खाद्य पदार्थों को 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे या 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रखने पर जीवणुओं के संक्रमण से खाद्य पदार्थों को सुरक्षित किया जा सकता है। कच्चे फ़ल, मीट, मछली या अन्य कच्चे खाद्य पदार्थों को खाने से दूर रखना चाहिए क्योंकि इनमें जीवाणुओं की संख्या अधिक होती है। खाने के साथ रखने से जीवाणुओं का खाने में संक्रमण फैलने की पूरी संभावना होती है। सभी कच्चे फ़ल ,सब्जी, मीट या मछली को अच्छी तरह साफ़ पानी में धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।

महिला सशक्तिकरण के लिए हब फॉर एमपावरमेंट ऑफ़ विमेन  का उन्मुखीकरण कार्यशाला, अनुग्रह अनुदान पोर्टल का शुभारंभ एवं ‘चटकारे जिंदगी के’ वीडियो सीरिज का किया गया विमोचन 

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• मंत्री, समाज कल्याण विभाग ने कार्यशाला का दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ |
• सेवाकाल में मृत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के आश्रितों को अनुदान राशि ससमय होगी प्राप्त|
पटना-
13 जुलाई “मिशन शक्ति” के तहत महिला सशक्तिकरण के लिए हब के बारे में उन्मुखीकरण, आई.सी.डी.एस के अंतर्गत कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं की सेवा काल के दौरान मृत्यु उपरांत आश्रितों को मिलने वाले अनुदान राशि के लिए अनुग्रह अनुदान पोर्टल का शुभारंभ, साथ ही समुदाय में पोषण व् स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए “चटकारे जिंदगी के”  विडियो श्रृंखला का आज विमोचन किया जा रहा है”, उक्त बातें मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार ने एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहीं. कार्यक्रम में सचिव, समाज कल्याण विभाग, प्रेम सिंह मीणा, प्रबंध निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम,श्रीमती वंदना प्रेयसी,निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं, बिहार डॉ. कौशल किशोर, , निदेशक पी.सी.आई, महिला विकास नगर निगम की टीम, आई.सी.डी.एस टीम सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे|
हब है महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पहल:
समाज कल्याण मंत्री ने कहा कि मिशन शक्ति के तहत “सामर्थ्य” उप योजना के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण हेतु  राज्य स्तर पर “हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वीमेन” की स्थापना की जानी है. माननीय मंत्री ने बताया कि “सामर्थ्य” उप योजना के घटकों में शक्ति सदन, सखी निवास, कामकाजी महिला छात्रावास के साथ राष्ट्रीय क्रेच योजना (पालना घर) एवं प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना योजना की मौजूदा योजनाओं को अब “सामर्थ्य” में शामिल किया गया है| उन्होंने बताया कि अनुग्रह अनुदान पोर्टल में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं के सेवाकाल में मृत्यु के उपरांत उनके आश्रितों को 4 लाख अनुदान देने का प्रावधान है| इस पोर्टल के माध्यम से अनुग्रह अनुदान की राशि प्राप्त करने के लिए आश्रितों के द्वारा ऑनलाइन आवेदन एवं उसकी स्थिति की जानकारी सरलता से उपलब्ध हो पायेगी, इससे निर्धारित समय एक माह  में अनुदान मिलने की प्रक्रिया पूर्ण हो पायेगी|
“चटकारे जिंदगी के” समुदाय में स्वास्थ्य एवं पोषण के संदेशों को पहुंचाने की एक अलग पहल:
माननीय मंत्री ने बताया कि समुदाय में स्वास्थ्य एवं पोषण के संदेशों को पहुचाने हेतु नाटकीय अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए “चटकारे जिंदगी के” एक एडूटेनमेंट ड्रामा सिरीज तैयार की गयी है| यह सीरीज गर्भवती, धात्री महिलाओं एवं बच्चों को ध्यान में रखकर परिवार नियोजन, जेंडर समानता, पोषण शिक्षा, पोषण बगीचा, संस्थागत प्रसव, ससमय ऊपरी आहार आदि पर बनाया गया है |
उन्मुखीकरण कार्यशाला से सबका मिलेगा लाभ:
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सचिव, समाज कल्याण विभाग, प्रेम सिंह मीणा  ने कहा कि उन्मुखीकरण कार्यशाला एवं अन्य योजनाओं के विमोचन से महिला सशक्तिकरण, समुदाय में स्वास्थ्य एवं पोषण के संदेशों को प्रसारित करने एवं अनुग्रह अनुदान पोर्टल के माध्यम से शीघ्र अनुदान प्राप्त करने के पहल को एक नयी गति मिलेगी. उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम के सफल आयोजन  के लिए आई.सी.डी.एस निदेशालय, पीसीआई, एनआईसी, डब्लूडीसी  एवं  समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मियों को धन्यवाद देता हूँ |
डॉ. कौशल किशोर, निदेशक, आईसीडीएस ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की और इसके महत्त्व के बारे में प्रकाश डाला |  निदेशक पीसीआई ने “चटकारे जिंदगी के” वीडियो सीरिज के प्रत्येक विषय पर प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण किया | साथ ही पोषण ट्रैकर डैशबोर्ड के माध्यम से अनुश्रवण हेतु  विभिन्न इंडिकेटर को  बिन्दुवार  प्रतिभागियों को बारीकी से बताया गया| तदोपरांत कार्यक्रम का समापन किया गया |

राहुल के चेहरे पर दांव लगाएंगी कांग्रेस, खड़गे के साथ प्रियंका संभालेगी चुनाव प्रचार

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रितेश सिन्हा
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी में आज किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं लेकिन भारत जोड़ो यात्रा के बाद देश की राजनीति की धुरी बने हुए हैं। भारत का मौजूदा राजनीतिक माहौल ऐसे बनता जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की टक्कर में सिर्फ राहुल गांधी ही संसद से सड़क तक दिख रहे है। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने के बाद कांग्रेस के हौसले बुलंद है। कांग्रेस के केंद्रीय मुख्यालय में अब 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर में मंथन का दौर जारी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में राहुल गांधी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलांगना, राजस्थान, उत्तराखंड और महाराष्ट्र के नेताओं के साथ बैठकें कर चुके हैं। इन बैठकों में कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, प्रदेश के प्रभारी, प्रदेश के बड़े नेताओं शामिल रहे हैं। महागठबंधन की ढीली पड़ती गांठें और क्षेत्रीय दलों के अपने-अपने प्रदेशों में दवाब में लेने की रणनीति की वजह से कांग्रेस ने अकेले चुनावी मैदान में उतरने का मन बना लिया हैं। इसकी घोषणा महाराष्ट्र के नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद सामने खुल कर आई जब राहुल गांधी और खड़गे की मीटिंग के बाद प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने अंदर की बात सार्वजनिक करते हुए कहा कि पार्टी सभी 48 सीटों पर लोकसभा चुनाव के लिए तैयार है।
लोकसभा चुनाव मिशन 2024 के लिए प्रियंका गांधी को संगठन से अलग रखा जा रहा है। इसके पीछे उनके नाम से संगठन में हो रही लूटपाट से कांग्रेस को बचाना है। उनके साथ जुड़े संदीप सिंह और उनकी जेएनयू मंडली जिस प्रकार यूपी को राजनीतिक तौर पर बर्बाद कर चुकी है और छत्तीसगढ़ में अपना कारोबार फैलाने में फिराक में थे, उन पर लगाम लग चुकी है। कांग्रेस मुख्यालय के सभी बैठकों में प्रियंका गांधी और उनके चंपू नदारद हैं, लेकिन ये खेमा शांत नहीं है। राहुल के खिलाफ मोर्चाबंदी और प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवार बनाने की वकालत करने वालों की कमान एआईसीसी में तारिक अनवर ने संभाली हुई है। वहीं मीडिया में प्रमोद त्यागी उर्फ प्रमोद कृष्णन स्वयंभू आचार्य ने बकायदा मोर्चा खोला हुआ है। कर्नाटक चुनाव में प्रियंका गांधी ने कुछ चुनावी रैलियों को संबोधित किया था। प्रियंका के घर में बैठा ये ग्रुप कर्नाटक की जीत का श्रेय उनकी चुनावी रैलियों को दे रहा है, लेकिन यूपी में पूरी तरह से कांग्रेस को संभालने वाला ये ग्रुप प्रदेश के मामले में बात पलट देता है।
2024 का लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे विपक्षी एकता के नाम पर क्षेत्रीय दल राहुल गांधी से अलग-अलग शर्तों पर नजदीक आने की कोशिशों में जुटे हैं। देश का वोटर पूरे तौर पर नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पर बंटा दिख रहा है। इस रूझान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए विपक्षी दलों के साथ-साथ प्रियंका गांधी का खेमा बेचैन है। प्रियंका गांधी के नाम पर ये खेमा अच्छी-खासी वसूली का खेल खेलता रहा है, जिस पर लगाम लगने से बेचैनी साफ नजर आने लगी है। अब तक प्रियंका गांधी का झोला ढोने और रायपुर अधिवेशन के दौरान काली सड़कों को गुलाब की पंखुड़ियों से ढक देने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पाला बदल लिया है। अब तक उनके एक ओएसडी रवि तिवारी, प्रियंका के निवास से ही सत्ता चला रहे थे। दिल्ली के बदले रूख को देखते हुए  और पार्टी के एक उच्चस्तरीय फैसले के बाद यह तय माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी किसी भी प्रदेश की प्रभारी नहीं बनायी जाएंगी।
भाजपा की एक टीम कांग्रेस के उन असंतुष्ट नेताओं को साधने का प्रयास करती रही है जो मीडिया में राहुल गांधी की मुखालफत कर सकें। ऐसे नेताओं को कांग्रेस में तारिक अनवर और स्वयंभू खलीफा प्रमोद कृष्णन जोड़ने में लगे हैं लेकिन ये गिनती एक-दो के बाद तीन को ढूंढने में अब तक कामयाब नहीं हो सकी है। तारिक भी प्रियंका के लिए समर्थन जुटाने में केरल के अलावा अन्य प्रदेशों का बकायदा दौरा करते रहे हैं। इसी कड़ी में यही खेमा गु्रप 23 के हाथ मिलाते हुए मुमताज पटेल को सक्रिय कर सीडब्लूसी में लाने का दवाब बनाए हुए है। मोदी 2014 में कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री बने। भारत का चुनाव दुनिया में सबसे बड़ा है, रहता है, इसलिए कोई भी राजनीतिक भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है। राजनीतिक विश्लेषक और सर्वेक्षणकर्ताओं के इस बात से सभी आश्चर्यजनक रूप से सहमत हैं कि पीएम मोदी की लोकप्रियता उनके शुरुआती दिनों के मुकाबले कम हुई है। 2023 तक आते-आते केंद्र सरकार की लचर अर्थव्यवस्था, नौकरियां में कमी, देश में अपने चुनावी वायदों पर खरा नहीं उतरना भी लोकसभा चुनावों को खासा प्रभावित कर सकता है।
कंग्रेस अपने संगठन को भी चुस्त-दुरस्त करने में जुटी हैं जिसके परिणाम दिखने लगे हैं। छत्तीसगढ़ में नया प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री बनाकर प्रदेश के सभी गुटों को एकजुट करने की कवायद की गई है। कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा पिछले प्रभारी पीएल पुनिया, मुख्यमंत्री बघेल व प्रदेश अध्यक्ष मरकाम के रवैये के प्रति मोर्चा खोले हुए था जिसे आलाकमान ने बेहद होशियारी से संभालने की कोशिश की है। प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश प्रभारी को बदलने का सकारात्मक संदेश प्रदेश की राजनीति में गया। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के साथ प्रदेश संगठन में भी बदलाव किया गया। वहीं राजस्थान में भी सचिन पायलट के अलावा प्रदेश प्रभारी और नेताओं के साथ हुए मैराथन बैठक के परिणाम भी प्रदेश  कमिटी की घोषणा के साथ सबके सामने हैं। तेलांगना में माणिक राव ठाकरे की जगह किसी अन्य नेता को ये जिम्मेदारी दी जाएगी। खड़गे के साथ राजनीतिक साठगांठ से माणिक राव ठाकरे लंबे समय तक महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष बने रहे थे, अब उनकी प्रदेश की राजनीति में वापसी हो सकती है।
मोदी वर्सेज राहुल गांधी की लड़ाई सड़कों पर है। राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता खत्म करने के खिलाफ देश भर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कांग्रसियों ने पूरे दिन का मौन सत्याग्रह किया। कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। देश भर के कांग्रसियों का मानना है कि यह समय एकजुट होने और बताने का है कि न्याय की लड़ाई में राहुल गांधी अकेले नहीं है, बल्कि उनके साथ लाखों कार्यकर्ता और देश के नागरिक खड़े हुए हैं। आने वाले चुनाव में राहुल और मोदी के बीच राजनीतिक लड़ाई तेज होगी और देश की जनता की चुनावी अदालत में तय होगा कि किसके नेतृत्व में देश आगे बढ़ेगा। आपको बता दें कि सूरत की एक अदालत ने आपराधिक मानहानि के मामले में राहुल गांधी को 2 साल की सजा सुनाई गई थी जिसके बाद उन्हें अपनी सांसदी से हाथ धोना पड़ा था। मामला जिला अदालत से हाईकोर्ट होता हुआ अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। चुनाव से पूर्व इसमें एक बड़ा चौकाने वाला फैसला आ सकता है जो देश की दशा और दिशा दोनों तय करेगा। इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

खगड़िया जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन की सुविधा शुरू 

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– विश्व जनसंख्या दिवस • सदर अस्पताल से निकाली गई साइकिल रैली, परिवार नियोजन का दिया गया संदेश
– सिविल सर्जन ने हरी झंडी दिखा रैली को रवाना कर पखवाड़े का किया शुभारंभ, 31 जुलाई को होगा समापन
खगड़िया-
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर मंगलवार से जिले भर में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन की सुविधा शुरू हो गई। जिसका समापन 31 जुलाई को होगा। इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित तौर पर परिवार नियोजन शिविर का आयोजन कर योग्य लाभार्थियों को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा प्रदान की जाएगी। उक्त पखवाड़े का सिविल सर्जन डाॅ अमिताभ कुमार सिन्हा ने सदर अस्पताल परिसर में साइकिल रैली को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इसके बाद जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। जहाँ संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के पीएचसी प्रभारी ने पखवाड़े का उदघाटन किया। इस अवसर पर जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक समेत अन्य गतिविधियों का आयोजन कर परिवार नियोजन का संदेश दिया गया और योग्य व इच्छुक लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं, सदर अस्पताल परिसर से निकाली गई रैली का पूरे शहर का भ्रमण कर पुनः अस्पताल पहुँच कर समापन हुआ। इस दौरान छोटा और खुशहाल परिवार के लिए परिवार नियोजन कितना जरूरी है समेत अन्य संदेश देकर लोगों को प्रेरित किया गया। साथ अस्पताल परिसर में परिवार नियोजन मेला का भी आयोजन किया गया। जिसमें फैमिली प्लानिंग कार्नर का भी स्थापना किया गया। जहाँ तैनात एएनएम द्वारा महिलाओं को स्थाई और अस्थाई संसाधनों की जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र सिंह प्रायसी, डीपीएम (हेल्थ) प्रभात कुमार राजू, डीसीएम सुब्रत कुमार दास, यूएनएफपीए के राजेश कुमार पांडेय समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
– परिवार नियोजन योजना को अपनाने के लिए घर के पुरुषों की सहभागिता जरूरी :
इस अवसर पर सिविल सर्जन डाॅ अमिताभ कुमार सिन्हा ने कहा, परिवार नियोजन के साधन को अपनाने में इच्छुक महिलाएं भी अक्सर पुरुषवादी सोच का शिकार हो जाती हैं। जिसके कारण वह इन साधन को अपनाने से वंचित रह जाती हैं। इसलिए, इस योजना को अपनाने के लिए खासकर घर के पुरुष सदस्यों की सहभागिता भी बेहद जरूरी है।  जब पुरुष सहभागिता बढ़ेगी तो इच्छुक महिलाओं को इस योजना को अपनाने से कोई नहीं रोक सकता है। मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि परिवार नियोजन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, आपलोग पुराने ख्यालात एवं मन में पल रही अवधारणा से बाहर आकर अपने घर की महिलाओं को कम से कम इसे अपनाने के लिए प्रेरित करें। इसे अपनाने से ही खुशहाल, शिक्षित और छोटा परिवार का निर्माण संभव है।
– योग्य दंम्पत्तियों को चिह्नित कर घर-घर जाकर किया जा रहा है जागरूक :
डीपीएम प्रभात कुमार राजू ने बताया, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की सफलता को लेकर को संबंधित क्षेत्र की एएनएम, आशा, ऑगनबाड़ी सेविका समेत स्वास्थ्य टीम में शामिल अन्य कर्मियों द्वारा योग्य दंम्पत्तियों को चिह्नित कर घर-घर जाकर जागरूक किया जा रहा है। साथ ही इस मुहिम को सफल बनाने के लिए परिवार नियोजन की सुविधा अपनाने से होने वाले फायदे की योग्य लाभार्थियों एवं उनके परिजनों को विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ताकि लोग पुरानी प्रथा से बाहर आकर इस मुहिम को सफल बनाने के लिए बेहिचक आगे आएं और लोगों के मन में किसी प्रकार की भ्रम या अफवाह उत्पन्न नहीं हो।
– स्थाई और अस्थाई उपायों की भी  दी जा रही है जानकारी :
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र सिंह प्रायसी ने बताया, इच्छुक और योग्य लाभार्थी को स्थाई और अस्थाई दोनों उपायों की जानकारी दी जा रही है। ताकि अगर कोई महिला परिवार नियोजन ऑपरेशन को अपनाने के लिए तैयार है किन्तु, उनका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं है तो ऐसी महिला अस्थाई उपायों को अपना सकती है। उन्होंने बताया, अस्थाई उपाय भी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। इसलिए, ऐसी महिला कंडोम, काॅपर-टी, अंतरा, छाया समेत अन्य वैकल्पिक व्यवस्था को अस्थाई उपायों के रूप अपना सकती हैं।
– यूएनएफपीए संस्था की ओर से वितरित किया गया टोपी और टी-शर्ट
रैली के दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों के बीच यूएनएफपीए संस्था की ओर टोपी और टी-शर्ट का वितरण किया गया। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए एक वैन भी दिया गया है। जिसके माध्यम से गाँव-गाँव जाकर लोगों को ऑडियो एवं वीडियो दिखाकर जागरूक किया जाएगा। इस वैन को भी सदर अस्पताल परिसर से ही सिविल सर्जन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

विश्व जनसंख्या दिवस • जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन की सुविधा शुरू 

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– सूर्यगढ़ा एवं हलसी में जीविका दीदियों के सहयोग से लाभार्थियों को किया जा रहा चिह्नित एवं जागरूक।
– सिविल सर्जन ने जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का किया उदघाटन, 31 जुलाई तक चलेगा पखवाड़ा
– विद्यालय के छात्रों द्वारा जनजागरूकता  के लिए निकाली गई साइकिल रैली।
लखीसराय –
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर मंगलवार से जिलेभर में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के तहत परिवार नियोजन की सुविधा शुरू हो गई है। जिसका समापन 31 जुलाई को होगा। इस दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित तौर पर परिवार नियोजन शिविर का आयोजन कर योग्य लाभार्थियों को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा प्रदान की जाएगी। उक्त पखवाड़े का सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा  ने सदर अस्पताल परिसर में  उद्घाटन  किया। इसके बाद जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पखवाड़े का शुभारंभ हुआ। जहाँ संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के पीएचसी प्रभारी ने पखवाड़े का उदघाटन किया। इस अवसर पर उपाधीक्षक सदर अस्पताल डॉ .राकेश कुमार , डीपीएम सुधांशु नारायण लाल , केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान , डीसीएम आशुतोष सिंह के साथ पीसीआई के मुकेश कुमार झा मौजूद थे।
– परिवार नियोजन  को अपनाने के लिए घर के पुरुषों की सहभागिता जरूरी :
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा  ने कहा, परिवार नियोजन के साधन को अपनाने में इच्छुक महिलाएं भी अक्सर पुरुषवादी सोच का शिकार हो जाती हैं। जिसके कारण वह इन साधन को अपनाने से वंचित रह जाती हैं। इसलिए, इस योजना को अपनाने के लिए खासकर घर के पुरुष सदस्यों की सहभागिता बेहद जरूरी है ।  जब पुरुष सहभागिता बढ़ेगी तो इच्छुक महिलाओं को इस योजना को अपनाने से कोई नहीं रोक सकता है। मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि परिवार नियोजन पूरी तरह सुरक्षित है। इसलिए, आपलोग पुराने ख्यालात एवं मन में पल रही अवधारणा से बाहर आकर अपने घर की महिलाओं को कम से कम इसे अपनाने के लिए प्रेरित करें। इसे अपनाने से ही खुशहाल, शिक्षित और छोटे परिवार का निर्माण संभव है।
– योग्य दंम्पत्तियों को चिह्नित कर घर-घर जाकर किया जा रहा है जागरूक :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती  ने बताया, जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की सफलता को लेकर  संबंधित क्षेत्र की एएनएम, आशा, ऑगनबाड़ी सेविका एवं जीविका दीदियों समेत स्वास्थ्य टीम में शामिल अन्य कर्मियों द्वारा योग्य दंम्पत्तियों को चिह्नित कर घर-घर जाकर जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सूर्यगढ़ा एवं हलसी प्रखंड में जीविका दीदियों के सहयोग से परिवार नियोजन अभिसरण कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को जागरूक किया जा रहा  तथा परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही इस मुहिम को सफल बनाने के लिए परिवार नियोजन की सुविधा अपनाने से होने वाले फायदे की योग्य लाभार्थियों एवं उनके परिजनों को विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ताकि लोग पुरानी प्रथा से बाहर आकर इस मुहिम को सफल बनाने के लिए बेहिचक आगे आएं और लोगों के मन में किसी प्रकार का भ्रम या अफवाह उत्पन्न नहीं हो।
– स्थाई और अस्थाई उपायों की भी जानकारी दी जा रही है  :
इच्छुक और योग्य लाभार्थी को स्थाई और अस्थाई दोनों उपायों की जानकारी दी जा रही है। ताकि अगर कोई महिला परिवार नियोजन ऑपरेशन को अपनाने के लिए तैयार है किन्तु, उनका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं तो ऐसी महिला अस्थाई उपायों को अपना सकती है। उन्होंने बताया, अस्थाई उपाय भी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। इसलिए, ऐसी महिला कंडोम, काॅपर-टी, अंतरा, छाया समेत अन्य वैकल्पिक व्यवस्था को अस्थाई उपायों के रूप अपना सकती हैं।