गर्भवती महिलाएं धूप में घर से बाहर निकलने में करें परहेज :डॉ. सिन्हा

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– 6 माह तक के नवजात के लिए सिर्फ स्तनपान ही काफी, नहीं दें अन्य तरल पदार्थ
– भोजन में विविधिता से बेहतर पोषण संभव

लखीसराय-

गर्मी के साथ ही गर्म हवाओं का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। लू से बचने के लिए सही खानपान जरूरी है। ऐसे में विशेषकर नवजात शिशुओं व गर्भवती महिलाओं के पोषण का ख्याल रखा जाना जरूरी है। प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की जरूरत भी है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को भोजन में हरी साग सब्जी की मात्रा बढ़ाने के साथ भरपूर मात्रा में पानी लेना चाहिए। इसके अलावा मौसमी फल व दही व छाछ जैसे खाद्य पदार्थ का सेवन भी काफी उपयोगी है।

– धूप में नहीं निकलें गर्भवती महिलाएं :
सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा ने बताया, लू के मद्देनजर गर्भवती महिलाएं गर्मी के मौसम में घर से निकलने में परहेज करें। अर्थात अति आवश्यकता पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि खाली पेट घर से बाहर न जाएं। लू से बचने के लिए बहुत अधिक देर तक खाली पेट बिल्कुल नहीं रहें। लू लगने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। प्राथमिक उपचार के तौर पर ओआरएस का घोल दिया जाना चाहिए ताकि उल्टी व दस्त की समस्या को दूर किया जा सके। उन्होंने बताया, तेज धूप व गर्म हवा के बीच गर्भवती महिलाओं का निकलना घातक होता है। गर्भवती महिला को लू लगना उनके गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। घर से बाहर निकलने से पहले पूरी सावधानी बरतें। छाता व तौलिये आदि का इस्तेमाल जरूर करें। बहुत ही आवश्यक होने पर ही पूरी सुरक्षा के साथ घर से बाहर निकलें। बाहर निकलने से पहले प्रचुर मात्रा में नीबू पानी या सत्तु आदि पी कर निकलना लू के असर को रोकता है। इसके साथ ही घर में इलेक्ट्रॉल व ओआरएस आदि भी रखें ताकि समय पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सके। इनके नहीं रहने पर नींबू पानी, चीनी और थोड़ा नमक का शरबत बना कर दिया जा सकता है।

– 6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान :
6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान ही पर्याप्त है। उन्हें कोई भी तरल पदार्थ अलग से नहीं दिया जाना चाहिए। यहां तक की पानी भी नहीं दिया जाये। शिशु को पूरी तरह अधिक से अधिक स्तनपान कराने से डायरिया एवं निमोनिया जैसे रोगों से बचाव संभव है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी भरपुर पौष्टिक आहार जैसे दाल व हरी सब्जी सहित तरल पदार्थ के सेवन को बढ़ाना चाहिए। इससे स्तनपान के माध्यम से बच्चे को आवश्यक पोषण मिल पाता है। वहीं शिशु को गर्म हवा से बचाने के लिए उसे ठंडे व हवादार कमरे में रखें। कमरा उमस भरा नहीं होना चाहिए। शिशु को सूती कपड़ा ही पहनायें ताकि पसीना आसानी से सोख जाये। नायलॉन या टेरीकॉट कपड़े बच्चे को बिल्कुल नहीं पहनाया जाना चाहिए। .

– ऐसे पहचाने लू के लक्षण :
– तेज सिर दर्द का होना
– उल्टी या जी मचलाना
– बुखार का होना
– त्वचा का लाल, गर्म एवं सूखा होना( पसीना नहीं चलना)
– बेहोशी या चक्कर आना
– घबराहट या संशय का बढ़ जाना
– अत्यधिक आलस्य या सुस्ती का होना

– इन बातों का रखें पूरा ध्यान :
– खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलें
– सुपाच्य एवं हल्के भोजन का करें सेवन
– अत्यधिक शीतल पेय पदार्थों के सेवन करने से बचें
– रात में कम से कम 8 घन्टे की नींद जरूर लें।

ऊषा केबल इंडस्ट्रीज ने अपने ब्रांड उषा एवं माला केबल को मध्य प्रदेश के बाजार में उतारा

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दिल्ली –

ऊषा केबल इंडस्ट्रीज ने अपने ब्राण्ड ऊषा एवं माला केबल की श्रृंखला को इंट्रडुज किया। इस अवसर पर कम्पनी निदेशक अमन गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार की सस्था आई एस आई के अधिकारियों ने देश के सभी बड़ी केबल निर्माता कम्पनियों को दिल्ली के ली मेरिडियन में बुलाकर 2022 में एक सभा का आयोजन किया थाए जिसमें सभी केबल निर्माता कम्पनियों से अच्छी गुणवत्ता वाले केबल बनाने के लिए कहा गया था जिसमें अधिकारियों ने कहा कि भारत के पावर सेक्टर मे हाई क्वालिटी केबल की भारतीय बाजार में भारी कमी है, जिसकी आपूर्ती करना अति आवस्यक है, इन्ही बातों ध्यान मे रखते हुए हमने ऊषा केबल ब्राण्ड नेम से भारतीय बाजार में अपना प्रोडक्ट भेजना शुरू कर दिया जिसका हमें बहुत अच्छा रेजल्ट देखने को मिला।

उन्होंने बताया की हमारी कम्पनी ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के प्रोडक्ट ऊषा केबल एवं माला केबल के ब्राण्ड नेम से मध्य प्रदेश के सभी बड़े बाजारों मे उपलब्ध हैं । उन्होंने कहा की मध्य प्रदेश मे पिछले साल काफी अच्छा रिस्पॉस रहा जिसके चलते कम्पनी ने अपने ब्राण्ड ऊषा केबल एवं माला केबल के स्मॉक फाग केबल, रबराइज केबल, हाउस वाइरिंग केबल, कम्यूनिकेशन केबल, फायर सरबाइबल केबल, लो स्मॉक फाग में एफ आर एल एस, एच आर एफ आर तथा फायर सरबाइबल, समर सेबल केबल, पॉली एलुमिनियम वायर फॉर एग्रीकल्चर यूज टेंट डेकोरेशन वायर, हाउस वायरिंग एवं इंडस्ट्रियल वायरिंग की श्रंखला को मध्य प्रदेश और ज्यादी क्वालिटी में सुधार करते हुए उतारा है। उन्होंने कहा कि ऊषा केबल के प्रोडक्ट अभी तक भारत के कई राज्यों में उलब्ध हैए और डिमांड भी काफी अछी देखी जा रही है। और हमें उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में भी हमें अछा रिस्पांस मिलेगा। इस मौके पर कम्पनी के संस्थापक श्री सुनील गुप्ता ऑल इंडिया के डिस्ट्रीब्यूटर अभिशेक गुप्ता मौजूद रहे।

गर्भवती महिला के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के लिए भी जरूरी है आयोडिन

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– उचित आयोडिन से बच्चों का होगा शारीरिक और मानसिक विकास

– आयोडिन की कमी से गर्भस्थ शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास में हो सकती है परेशानी

लखीसराय-

गर्भधारण के साथ ही महिलाओं में सुरक्षित प्रसव व स्वस्थ बच्चे के जन्म की पहली चाहत होती है। किन्तु, इसके लिए हर गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। तभी सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ बच्चे का जन्म होगा। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। इसके लिए शरीर में उचित आयोडिन की मात्रा हो इसको लेकर सजग रहने की जरूरत है। दरअसल, आयोडिन की कमी से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए, स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए शरीर में पर्याप्त आयोडिन होना जरूरी है।

– गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडिन जरूरी :-
लखीसराय के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए गर्भवती के शरीर में उचित मात्रा में आयोडिन होना जरूरी है। दरअसल, आयोडिन की कमी के कारण कम वजन वाला शिशु जन्म लेता है। इतना ही नहीं ऐसे में मृत शिशु का भी जन्म हो सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान हर गर्भवती को आयोडिन को लेकर सजग रहना चाहिए। इसके लिए चिकित्सकों से सलाह लेनी चाहिए।

– आयोडिन युक्त नमक का करें उपयोग :-
आयोडिन मिट्टी एवं पानी में पाए जाने वाला सूक्ष्म तत्व है। आयोडिन कमी की समस्याओं को दूर करने के लिए आयोडिन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए। यह हर आयु वर्ग के लोगों के लिए जरूरी है। क्योंकि, आयोडिन का शरीर में उचित मात्रा में होना हर किसी के लिए जरूरी है। हालाँकि, अल्पमात्रा में ही आयोडिन हमारे शरीर के लिए जरूरी है।

– आयोडिन की कमी महसूस होते ही चिकित्सकों से कराएं जाँच :-
शरीर में आयोडिन की कमी महसूस होते ही तुरंत चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। इसका शुरुआती लक्षण है शुष्क त्वचा, बालों का झड़ना, बोली में भारीपन समेत शरीर में अन्य परेशानी महसूस होना। इसलिए, आहार के साथ उचित आयोडिन का सेवन करना जरूरी है।

– आयोडिन की कमी से कई तरह की होती है परेशानी :-
आयोडिन एक पोषक तत्व है। जिसकी कमी से लोगों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जैसे नींद अधिक आना, श्वास व हृदय से संबंधित परेशानी, डिप्रेशन, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द आदि परेशानी आयोडिन की कमी से ही होती है। इसलिए, भले ही शरीर में आयोडिन अल्पमात्रा में ही जरूरी है किन्तु, कमी होने पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वयस्कों के लिए सामान्यतः प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम (एमसीजी)आयोडिन की आवश्यकता होती है। जबकि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रति दिन 200 एमसीजी जरूरी है।

मातृत्व स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं आयुष्मान भारत पर कार्यशाला का आयोजन

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– जिले के निजी अस्पतालों के संचालक, चिकित्सक एवं प्रतिनिधि हुए शामिल
– सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में कार्यशाला का आयोजन

बेगूसराय, 04 जून-

मातृत्व स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं आयुष्मान भारत विषय पर सिविल सर्जन कार्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डाॅ प्रमोद कुमार सिंह ने की। कार्यशाला में जिले में संचालित सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों (अस्पताल व क्लीनिक) के संचालक, चिकित्सक एवं प्रतिनिधि शामिल हुए। जिसमें मौजूद सभी प्रतिभागियों को मातृत्व स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं आयुष्मान भारत योजना को बढ़ावा देने के लिए जरूरी जानकारी दी गई। साथ ही मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए विस्तृत चर्चा एवं रूप-रेखा तैयार की गई। इस मौके पर डीपीएम (हेल्थ) नसीम रजी, जिला शहरी स्वास्थ्य सलाहकार अभिषेक रंजन, आयुष्मान भारत के प्रभात कुमार, आईडीएसपी के के सिंह, कुणाल कुमार, डीएम&ईओ रचना कुमारी, पीसीआई से शालिनी प्रिया, केयर इंडिया के डीटीएल राकेश कुमार आदि मौजूद थे।
– प्रतिमाह समय पर जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय को उपलब्ध कराएं डेटा :
कार्यशाला के दौरान सिविल सर्जन डाॅ प्रमोद कुमार सिंह ने मौजूद सभी प्रतिभागियों से मातृत्व स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन से संबंधित सभी प्रकार के डेटा एवं रिपोर्ट हर माह समय पर जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा। ताकि संबंधित रिपोर्ट को राज्य स्वास्थ्य समिति समय पर भेजा जा सके और सरकार आवश्यकतानुसार जरूरी कदम ले सके । जिससे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा को बढ़ावा मिल सके। साथ ही कहा कि अस्पताल या क्लीनिक आने वाले सभी मरीजों को बेहतर और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराएं। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सभी मरीज सुविधाजनक तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें।

– मातृत्व स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं आयुष्मान भारत योजना के उद्देश्य की दी हुई जानकारी :
डीपीएम (हेल्थ) नसीम रजी ने बताया, कार्यशाला के दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों को मातृत्व स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं आयुष्मान भारत योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें मातृत्व स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन सेवा तथा आयुष्मान भारत योजना के उद्देश्य और औचित्य की जानकारी दी गई तथा मरीजों को सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने पर बल दिया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य से संबंधित अन्य बिंदुओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

शाह की कड़ी चेतावनी का नतीजा, मणिपुर में बरामद हुए 144 हथियार

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जादुई शक्ति वाले व्यक्ति हैं। उनके पास चीजों को पलटने और हर समस्या का समाधान निकालने की अलौकिक क्षमता है। मणिपुर में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी को युद्धरत समुदायों के साथ मध्यस्थता करने और हिंसा प्रभावित राज्य में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी। उन्होंने यह काम किया, संभवतः केवल वही कर सकते हैं। इन कठिन परिस्थितियों में शाह उम्मीद की एक किरण हैं।

शाह ने  संकटग्रस्त राज्य के चार दिवसीय दौरे की शुरुआत की और बाद के दिनों में उन्होंने युद्धरत समूहों, नागरिक समाज, प्रशासन और सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोगों के साथ विचार-विमर्श किया। मामले को नियंत्रण में लाने के लिए शाह ने हथियार रखने वाले उग्रवादियों को चेतावनी दी, जिसमें उन्हें बिना देरी के पुलिस के सामने हथियार सरेंडर करने या कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए कहा गया।

अपने दौरे के अंतिम दिन यानि गुरुवार को शाह ने कहा, ‘हथियार रखने वालों को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहिए।  तलाशी अभियान कल से शुरू होगा और अगर किसी के पास हथियार पाए जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’

 

चेतावनी ने एक चमत्कार के रूप में काम किया और तुरंत परिणाम देना शुरू कर दिया। शाह की चेतावनी के कुछ ही घंटों के भीतर करीब 150 हथियार सरेंडर कर दिए गए। अतीत में शाह के इस तरह के कृत्यों के उदाहरण प्रचुर मात्रा में हैं।

 

पूरे प्रकरण में शाह की नेतृत्व क्षमता और उनके प्रशासनिक कौशल की छाप साफ तौर पर दिखाई पड़ती है। शायद ही कोई ऐसा नेता या व्यक्ति हो जो उनकी तरह अतीत में ऐसी किसी समस्या का हल निकाला हो। वे कठिन-से-कठिन समस्याओं का सरल समाधान खोज लेते हैं। हथियारों की बरामदगी भी उस विश्वास को दर्शाती है जो युद्धरत समूह मास्टरमाइंड पर रखते हैं। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने अपने विचारों को बदल कर शाह पर भरोसा दिखाया।

 

इस पूरे प्रकरण में शाह ने न केवल एक सख्त प्रशासक के रूप में कार्य किया, बल्कि उनका नरम पक्ष भी सामने आया। शाह ने आजीविका और सुरक्षा के बारे में भी चिंता जताई। छात्रों की मदद के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। विशेष चिकित्सा अधिकारी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएँ सुनिश्चित करेंगे।

शाह पहले ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जाँच समिति के गठन की घोषणा कर चुके हैं। मणिपुर में हिंसा के मामलों की जाँच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष टीम को सौंपा जाएगा। राज्यपाल की अध्यक्षता में एक शांति समिति का भी गठन किया जाएगा। जाँच बिना किसी पूर्वाग्रह और भेदभाव के की जाएगी। दोषियों को सजा दी जाएगी। किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मणिपुर जल्द ही फिर से शांति और समृद्धि के पथ पर अग्रसर होगा।

 

लखीसराय जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान पर साइकिल रैली का हुआ आयोजन  

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इसके द्वारा बीमारी के प्रति जागरूकता लाना है मकसद : सिविल सर्जन
नियमित साइकिल चलाने से कई गंभीर बीमारी से रहेंगे दूर
लखीसराय-
शनिवार को जिला सदर अस्पताल में सिविल सर्जन, जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी ने मिलकर साइकिल रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया. इसके साथ ही जिले के सभी सरकारी संस्थान में इसका उद्घाटन भी हो गया. इस आयोजन को जिला स्तरीय गैर संचारी रोग विभाग द्वारा किया गया. इसका सफल संचालन एफएलसी पूजा कुमारी ने किया.
आयोजन के मुख्य उदेश्य
मानव-शरीर को कई गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना एवं रोगों में कमी लाना इसका मुख्य उद्देश्य है-ये बातें उद्घाटन के मौके पर सिविल सर्जन डॉ बी पी सिन्हा ने कही. सिविल सर्जन ने बताया कि सुबह या शाम में रोज आधा घंटा साइकिल चलाने से हम मधुमेह,  उच्च रक्तचाप जैसी बीमारी से दूर रह सकते हैं. उक्त बीमारी के रहने पर भी हम इसके होने वाले खतरे को टाल सकते हैं. इस कारण साइकिल नियमित रूप से चलाकर हम शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते है.
रोजाना साइकिल चलाने की आदत करें नियमित
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि रोजाना एक घंटा साइकिल चलाने से एक सप्ताह में 1200 कैलोरी बर्न हो सकती है। वहीँ रोजाना आधा घंटा साइकिल चलाने से एक साल में 5 किलो वजन कम हो सकता है। इसके लिए आप बढ़ते वजन को कंट्रोल करने के लिए साइकिलिंग का सहारा ले सकते हैं। इससे मेटाबॉलिज़्म लेवल में भी सुधार होता है। आसान शब्दों में कहें तो मेटाबॉलिज़्म फ़ास्ट होता है। साथ ही साइकिलिंग करने से मानसिक तनाव, डिप्रेशन और चिंता से भी निजात मिलती है।
इस मौके पर सदर अस्पताल में गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ एके सत्यम ने आम लोगों से कहा कि आज भौतिक ज़माने में एक संतुलित जीवन जीना मुश्किल सा हो गया है. इसका कारण है; उल्टे-सीधे खानपान और गलत लाइफ स्टाइल के चलते कई बार लोग मोटापे के शिकार हो जाते हैं. पेट और कमर के आसपास फैट जितनी तेजी से बढ़ जाता है उसे घटाना उतना ही मुश्किल होता है. वजन और पेट की चर्बी घटाने के लिए साइकिल चलाने से भी उतना ही फायदा होता है, जितना जिम में घंटों पसीना बहाते हुए और वर्कआउट करने से. क्योंकि साइकिल चलाने से मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और बॉडी फैट कम होता है.
साइकिल चलाने से शरीर को मिलने वाले लाभ
  – ताकत बढ़ाए
– मोटापे को कम करे
– फेफड़ों को स्वस्थ बनाए
– मानसिक स्वास्थ्य को प्रोमोट करे
– कैंसर रिस्क को कम करे
– बेहतर नींद
– इम्यूनिटी को बढ़ाए

अमित शाह ने मणिपुर में हिंसा को स्थायी रूप से समाप्त करने की बनाई रणनीति

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मणिपुर में हिंसा को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा अपनाई गई रणनीतियाँ सर्वव्यापी हैं जो साबित करती हैं कि वे एक सक्षम प्रशासक हैं। एक जाँच पैनल और एक शांति समिति का गठन करना, अपराधियों को कड़ी चेतावनी देना और वसूली योग्य नुकसान के लिए एक उदार हाथ बढ़ाना, ये सभी कदम पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति व समृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में मास्टरमाइंड के दिमाग की उपज हैं।

जातीय हिंसा से जूझ रहे संकटग्रस्त मणिपुर के लिए सोमवार को शाह चार दिवसीय यात्रा पर निकले थे। बिना देर किए उन्होंने सभी वरिष्ठ विधायी और राज्य के प्रशासनिक प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात की तथा हिंसा का दंश झेलने वालों से बातचीत की। अपने प्रवास के दौरान, शाह ने मैतेई समुदाय के 22 नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों और कुकी समुदाय के लगभग 25 सीएसओ, 11 राजनीतिक दलों, सुरक्षा समूहों, खिलाड़ियों, समुदायों, छात्रों, बुद्धिजीवियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और महिलाओं के साथ विस्तृत चर्चा की।

शाह पर भरोसा करते हुए केंद्र सरकार ने गृह मंत्री को युद्धरत समुदायों के साथ मध्यस्थता करने का नाजुक काम सौंपा। इन कठिन परिस्थितियों में शाह को उम्मीद की किरण के रूप में देखा जा रहा है। अतीत में शाह के इस तरह के कृत्यों के कई उदाहरण हैं। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने भी शाह पर भरोसा दिखाया, जिन्होंने वर्तमान स्थिति पर अपने दृष्टिकोण और विचारों को सफलतापूर्वक बदल दिया। शाह ने अपने संबोधन में आजीविका और सुरक्षा पर भी चिंता जताई। इन परिस्थितियों में भी शिक्षा, अदालत आदि जैसे बारीक मुद्दों ने शाह के जनोन्मुख प्रशासनिक कौशल को कम नहीं किया।

युद्धरत समुदायों से हिंसा छोड़ने और चर्चा की मेज पर बैठने का आग्रह करते हुए, उन्होंने राज्य में शांति बहाल करने के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराया। अतीत के विपरीत, मणिपुर पिछले छह-सात वर्षों से व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए अनुकूल शांतिपूर्ण वातावरण पर सवार होकर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। अदालत के एक अप्रिय फैसले का प्रगति से समझौता नहीं किया जाना चाहिए जो एक समुदाय को राज्य में रहने वाले दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा कर दे।

शाह ने गुरुवार को मणिपुर के अपने उपलब्धिपूर्ण दौरे के समापन के दिन एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, ‘दोनों तरफ से शांति बनाए रखें। मणिपुर में शांति के कारण पिछले छह साल से विकास का एक नया युग चल रहा है। कोर्ट के एक फैसले की वजह से थोड़ी गलतफहमी हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप यह अशांति पैदा हुई है। मुझे विश्वास है कि मणिपुर के लोग आपसी समझ से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और इसका त्वरित समाधान निकालेंगे।’

उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश सहित एक और सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में मणिपुर हिंसा की जाँच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाएगा। मणिपुर के राज्यपाल की अध्यक्षता में एक शांति समिति का भी गठन किया जाएगा, जिसमें सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

22 अगस्त, 2008 को कुकी उग्रवादी समूहों, केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार के बीच हुए त्रिपक्षीय युद्धविराम समझौते, सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन एग्रीमेंट, के किसी भी प्रकार के उल्लंघन से सख्ती से निपटा जाएगा और इसे समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। शाह ने साफ शब्दों में कहा कि जिनके पास हथियार हैं, वे उन्हें पुलिस को सौंप दें, पुलिस द्वारा तलाशी अभियान के दौरान हथियार रखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक संवाद शुरू करने और उग्रवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए समझौते के प्राथमिक उद्देश्य के साथ किए गए समझौतों का संबंधित पक्षों द्वारा सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। सभी दर्ज मामलों में से पाँच चिन्हित मामलों और सामान्य साजिश के एक मामले सहित छह मामलों की जाँच सीबीआई की विशेष टीम द्वारा की जाएगी। शाह ने अपने एक ट्वीट में कहा कि, ‘मणिपुर हिंसा की गहन और निष्पक्ष जाँच की जाएगी। हिंसा के अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह कभी नहीं हो।’

शाह इतने पर नहीं रुके। शाह का मानवीय पक्ष भी स्पष्ट था क्योंकि उन्होंने घोषणा की कि भारत सरकार और मणिपुर सरकार द्वारा राहत और पुनर्वास पैकेज के तहत, हिंसा में अपनी जान गंवाने वालों के परिजनों को डीबीटी के माध्यम से 10 लाख रुपये की राशि दी जाएगी।

मणिपुर को आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने निर्धारित कोटे के अतिरिक्त 30,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है, गैस सिलेंडर, पेट्रोल और सब्जियों की आपूर्ति की भी व्यवस्था की गई है।

अंजुम चोपड़ा स्कॉलरशिप के विजेताओं की घोषणा

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नई दिल्ली-

दिल्ली स्थित खेल स्टार्ट-अप पुश स्पोर्ट्स ने आज भारत में विविध पृष्ठभूमि की चार प्रतिभाशाली युवा महिला क्रिकेटरों को पहली ‘अंजुम चोपड़ा स्कॉलरशिप’ देने की घोषणा की। भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व कप्तान सुश्री अंजुम चोपड़ा के संरक्षण में स्थापित इस स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) का उद्देश्य अनुभवी पेशेवरों से प्रशिक्षण और परामर्श प्राप्त करते हुए इन नवोदित एथलीटों के क्रिकेट के प्रति जुनून को आगे बढ़ाने के लिए सशक्त और प्रोत्साहित करना है।

प्रतिष्ठित अंजुम चोपड़ा छात्रवृत्ति की प्राप्तकर्ता ये हैं:

· दिल्ली के जीटीबी नगर इशिका कुमारी: 21 वर्षीय विकेटकीपर और दाएं हाथ की बल्लेबाज। इशिका के पिता ड्राइवर का काम करते हैं और मां स्कूल में चपरासी का काम करती हैं।

· गुजरात के बड़ौदा से श्रद्धा एचएस मोतीपारस: 13 वर्षीय आकांक्षी ऑलराउंडर, दाएं हाथ की बल्लेबाज और गेंदबाज। उसके पिता पहले जहाज की मरम्मत का काम करते थे, लेकिन अब अपनी बेटी के प्रशिक्षण में सहयोग करने के लिए एक जूस की दुकान चलाते हैं।

· हरियाणा के महेंद्रगढ़ की गौरिका यादव: 16 साल की दाएं हाथ की बल्लेबाज और गेंदबाज। गौरिका के पिता बीएमएस प्रोफेशनल हैं, जो एक निजी क्लीनिक चलाते हैं।

· उत्तर प्रदेश के बरेली की 19 वर्षीय सलामी बल्लेबाज़ शुभी शर्मा। उनके पिता शहर में एक कॉस्मेटिक की दुकान चलाते हैं और वर्तमान में गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहते हैं।

महिला क्रिकेट की जानी-मानी हस्ती अंजुम चोपड़ा ने इन होनहार प्रतिभाओं को मेंटर करने को लेकर उत्साह जताते हुए कहा, “मैं जमीनी स्तर पर क्रिकेट में लड़कियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में इस पहल की सराहना करती हूं और मैं उनकी प्रगति और उपलब्धियां देखने का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं। स्कॉलशिप के लिए कई उम्मीदवारों के बीच उनका चयन उनकी असाधारण क्षमता का प्रमाण है। मैं तहे दिल से आशा करती हूं कि ये प्रतिभाशाली लड़कियां सभी बड़े मंचों पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लक्ष्य के साथ प्रशिक्षण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता बनाए रखेंगी। हमें उम्मीद है कि लोग इन खिलाड़ियों का समर्थन करना जारी रखेंगे क्योंकि वे खेल की परिवर्तनकारी शक्ति के माध्यम से सामाजिक सीमाओं को बहादुरी से चुनौती दे रही हैं।

पुश स्पोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और दिल्ली के एक पूर्व खिलाड़ी पुरु सिंह ने कहा, “हम इन योग्य युवाओं को खेल के प्रति उनके जुनून को आगे बढ़ाने के लिए पोषण और सशक्त बनाने के सपने को साकार करने में बहुत गर्व महसूस करते हैं। हम न केवल इन लड़कियों को एक मूल्यवान अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं बल्कि उन्हें उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुकूल सर्वोत्तम प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए भी समर्पित हैं। पुश स्पोर्ट्स, जिसे पैशनेट अंडरडॉग स्पोर्ट्स हाउस के रूप में भी जाना जाता है, इन महत्वाकांक्षी एथलीटों के साथ दृढ़ता से खड़ा है क्योंकि वे सामाजिक बाधाओं को चुनौती देती हैं।”

दस महिला एथलीटों का समर्थन करने की दृष्टि से, अंजुम चोपड़ा छात्रवृत्ति भारतीय क्रिकेट में लैंगिक समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर दर्शाती है। स्कॉलरशिप कार्यक्रम खेलों के माध्यम से फिटनेस को उत्प्रेरित करने के लिए पुश स्पोर्ट्स के व्यापक मिशन का एक हिस्सा है, जिसमें विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों पर ध्यान केंद्रित करने, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को कम करने और शारीरिक गतिविधि के लिए गुणवत्ता के अवसर प्रदान करना शामिल है।

अंजुम चोपड़ा स्कॉलरशिप न केवल वित्तीय सहायता प्रदान करती है बल्कि भारत और विदेश में विशेष पर्यटन के द्वार भी खोलती है, जिससे इन प्रतिभाशाली व्यक्तियों को अपने क्षितिज को व्यापक बनाने और अपनी क्षमता को पूरा करने में मदद मिलती है। अंजुम चोपड़ा स्कॉलरशिप में प्रति वर्ष एक लाख की उदार वित्तीय सहायता शामिल है, जिसका उपयोग पुश स्पोर्ट्स एरेनास में प्राप्तकर्ताओं के प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। स्कॉलरशिप इच्छुक एथलीटों को 12 महीने की अवधि में भारत और विदेश के विशेष दौरों में भाग लेने का एक अविश्वसनीय अवसर भी प्रदान करती है। इन दौरों पर खिलाड़ियों को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने और विभिन्न क्रिकेटिंग वातावरण से सीखने में मदद मिलेगी।

यह घोषणा अन्य युवा महिला क्रिकेटरों की उपलब्धियों के साथ एक उपयुक्त समय पर की गई है। शुभी शर्मा को उत्तर प्रदेश की अंडर-19 टीम और अयती सदोत्रा को जम्मू-कश्मीर की अंडर-15 टीम के लिए चुना गया है। इसके अतिरिक्त, इशिका को 2022-23 घरेलू सत्र के दौरान सीनियर महिला वनडे ट्रॉफी के लिए दिल्ली महिला सीनियर टीम के लिए चुना गया है।

पुश स्पोर्ट्स और अंजुम चोपड़ा का अंजुम चोपड़ा स्कॉलरशिप प्रदान करने का संयुक्त प्रयास भारत में महिला क्रिकेटरों की अगली पीढ़ी को पोषित करने की उनकी प्रतिबद्धता दर्शाता है। वित्तीय सहायता, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और विशेषज्ञ सलाह देकर, इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक परिवारों को लड़कियों और महिलाओं को क्रिकेट को एक पेशे के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पौष्टिक भोजन का करें सेवन, बढ़ेगी रोग-प्रतिरोधक क्षमता

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– विटामिन, कैल्सियम और आयरनयुक्त आहार का सेवन जरूरी
– रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने पर संक्रमण से रहेंगे दूर

लखीसराय-
आज की भाग – दौड़ में हम सभी अपने पोषण के प्रति जागरूक नहीं रह पाते हैं। अगर हम स्वस्थ्य नहीं रहेंगे तो हम किसी भी संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। दरअसल सही पोषण रहने से हीं रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है। सही पोषण के लिए हमें अधिक से अधिक पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए। इसलिए पोषण और रोग – प्रतिरोधक क्षमता को लेकर हर व्यक्ति को सजग रहने की जरूरत है। पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार से रोग – प्रतिरोधक क्षमता में तेजी से वृद्धि होती है। यह हमें कई बीमारियों से दूर रखता है।

विटामिन, कैल्सियम और आयरनयुक्त आहार का सेवन जरूरी : –
जिला सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा ने बताया कि रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए विटामिन, कैल्सियम और आयरनयुक्त आहार का सेवन जरूरी है। समय पर खाना खाना चाहिए। खाना खाने के करीब 30 मिनट बाद भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे हमारी रोग – प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है।

रोग – प्रतिरोधक क्षमता की मजबूती को इन सब्जियां का करें सेवन : –
पालक, पनीर, सोयाबीन, कद्दू, गाजर, चुकंदर समेत अन्य हरी सब्जी व साग का भरपूर मात्रा में सेवन करें।

– इन फलों का करें सेवन : –
रोग – प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए केला, पपीता, संतरा, अनार, अनानास आदि मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए।

– नियमित रूप से करें व्यायाम : –
रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने एवं बढ़ाने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें और साथ ही भरपूर नींद लें।

क्या है रोग – प्रतिरोधक क्षमता : –
प्रतिरक्षा प्रणाली में अंग, कोशिकाएं, टिशू और प्रोटीन आदि शामिल होते हैं। ये सभी तत्व मिलकर मानव – शरीर को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं। इसके साथ में प्रतिरक्षा प्रणाली मानव – शरीर को बीमारियों, संक्रमण, वायरस इत्यादि से लड़ने में सहायता प्रदान करती है। रोग – प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों से लड़ने की शक्ति है, जो व्यक्ति को सेहतमंद रहने में सहायता करती है।

प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने से होने वाले फायदे : –
रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने से लोग शारीरिक, मानसिक रूप से भी मजबूत रहते और संक्रामक बीमारियों से दूर रहते हैं। साथ ही स्वस्थ और मजबूत शरीर का निर्माण होता है।

रोग – प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के लक्षण :
– तनाव महसूस होना।
– अधिक सर्दी लगना।
– पेट संबंधी परेशानियाँ होना।
– चोट को ठीक होने में समय लगना।
– संक्रमण होना।
– कमजोरी महसूस होना

– रोग – प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का कारण : –
– नशीले पदार्थों का सेवन करना।
– पर्याप्त नींद नहीं लेना।
– वजन का अधिक होना।
– व्यायाम नहीं करना।

टीबीडीसी के पदाधिकारी, स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट विशेषज्ञ एवं डब्ल्यूचओ के कंसल्टेंट करेंगे राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम का सपोर्टिव सुपर विजन एवं मॉनिटरिंग

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– राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों को जारी किया पत्र

– टीबी उन्मूलन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्यों के निर्धारित समय सीमा वर्ष 2030 से पांच वर्ष पूर्व 2025 तक प्राप्त करने के लिए निर्धारित किया गया है लक्ष्य

मुंगेर-

टीबीडीसी के चिकित्सा पदाधिकारी, स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के विशेषज्ञ एवं डब्ल्यूचओ के कंसल्टेंट के माध्यम से राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम का निरंतर सपोर्टिव सुपर विजन एवं मॉनिटरिंग कराया जाएगा । इस आशय की जानकारी जिला के संचारी रोग पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने दी। उन्होंने बताया कि टीबीडीसी पटना एवम दरभंगा में पदस्थापित 10 चिकित्सा पदाधिकारियों, स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के 10 विशेषज्ञों एवम विश्व स्वास्थ्य संगठन के 6 परामर्शियों के माध्यम से राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का निरंतर सपोर्टिव सुपर विजन एवम मॉनिटरिंग करवाने का निर्णय लिया गया है। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों को पत्र पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि मुंगेर जिला में टीबीडीसी पटना के मेडिकल ऑफिसर डॉ रविशंकर, स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के विशेषज्ञ डॉ. सरोज कांत चौधरी और डब्ल्यूएचओ के एनटीईपी कंसल्टेंट अवकाश सिन्हा सपोर्टिव सुपर विजन और मॉनिटरिंग का कार्य देखेंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक महीने की 25 तारीख तक अगले माह का एटीपी तथा पिछले महीने का संक्षिप्त प्रतिवेदन एवम दल के द्वारा जिला विशेष के लिए चयनित संकेतकों पर प्रगति रिपोर्ट राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी को ई-मेल से भेजा जाएगा।

डिस्ट्रिक्ट टीबी/ एचआईवी कॉर्डिनेटर शलेंदु कुमार ने बताया कि टीबी उन्मूलन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्यों के निर्धारित समय सीमा वर्ष 2030 से पांच वर्ष पूर्व 2025 तक प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन के आवश्यक प्रयासों के कारण टीबी नोटिफिकेशन, ड्रग रेजिस्टेंट की पहचान, समय से उपचार प्रारंभ करने की क्षमता, टीबी के मरीजों में एचआईवी एवम डायबिटीज की पहचान नियमित पूरा करने के लिए नियमित काउंसलिंग के साथ- साथ टीबी मरीजों के खाते में डीबीटी के माध्यम से निक्षय पोषण राशि के भुगतान आदि मानकों में लगातार प्रगति देखने को मिल रही है।बावजूद इसके प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्टतम उपयोग नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के लिए वित्तीय वर्ष 2023 -24 के लिए निर्धारित भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों की शत – प्रतिशत प्राप्ति के लिए जिला, प्रखंड और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर निरंतर पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण किया जाना आवश्यक है।