स्वास्थ्य कर्मियों ने लिया संकल्प-ना तम्बाकू का सेवन करेंगे और दूसरों को भी नहीं करने के लिए करेंगे प्रेरित

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– विश्व तम्बाकू निषेध दिवस • वी नीड फूड नाॅट टोबेको है इस वर्ष की थीम, -पूरे सप्ताह लोगों को किया जाएगा जागरूक
– तम्बाकू ना सिर्फ वर्तमान के लिए, बल्कि भविष्य के लिए भी खतरनाक

शेखपुरा-

बुधवार को सदर अस्पताल में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर सिविल सर्जन डाॅ अशोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक शपथ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के सभी पदाधिकारी एवं कर्मियों ने भाग लिया। इस दौरान नशा मुक्त समाज का संदेश देने के लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने शपथ ली कि ना किसी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करेंगे और अपने परिवार के सदस्यों समेत अन्य लोगों को भी नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। अस्पताल के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी ने जीवन में तम्बाकू का सेवन नहीं करने की शपथ ली। उक्त कार्यक्रम के साथ जिले में तम्बाकू निषेध दिवस सप्ताह का शुभारंभ हो गया।

– सप्ताह भर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
सिविल सर्जन डाॅ अशोक कुमार सिंह ने बताया, पूरे सप्ताह जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को तम्बाकू का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही सामुदायिक स्तर पर पर भी लोगों को तम्बाकू का सेवन नहीं करने के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा आशा कार्यकर्ता भी अपने पोषक क्षेत्र में गृह भ्रमण एवं शिविर के माध्यम से पूरे सप्ताह लोगों को धूम्रपान का सेवन नहीं करने के लिए जागरूक करेंगी।

– तम्बाकू ना सिर्फ वर्तमान के लिए, बल्कि भविष्य के लिए भी खतरनाक :
इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा, किसी भी प्रकार का नशा ना सिर्फ वर्तमान के लिए हानिकारक है बल्कि, भविष्य के लिए भी खतरनाक है। इतना ही नहीं, इससे आने वाले पीढ़ी पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए, हमलोग तमाम जिले वासियों से अपील करते हैं कि नशा से बिलकुल दूर रहें और स्वस्थ जीवन की जिंदगी जीऐं। नशा जीवन के लिए सबसे खतरनाक है। इसलिए, स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए नशे से दूर रहें और ना ही नशा करें और दूसरों को भी नहीं करने के लिए प्रेरित करें।

– जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक :
नशा मुक्त समाज निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरे सप्ताह जिले भर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जिसके माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा और तम्बाकू का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। ताकि नशा मुक्त समाज का निर्माण हो सके। इस दौरान नशा से स्वास्थ्य को होने वाली परेशानियाँ को भी बताया जाएगा। ताकि लोगों को नशा से नफरत हो सके। इसके अलावा जगह-जगह पोस्टर-बैनर भी लगाया जाएगा।

किसी से मिलने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण

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– टीबी है एक संक्रामक रोग लेकिन मरीजों की कतई न करें उपेक्षा
– संक्रमित होने की स्थिति में सही समय पर कराएं सही इलाज
– सभी सरकारी अस्पतालों पर निःशुल्क उपलब्ध है टीबी जांच और समुचित इलाज की सुविधा

मुंगेर, 29 मई-

किसी से मिलने और हाथ मिलाने से नहीं फैलता है टीबी का संक्रमण। इसलिये टीबी मरीजों की उपेक्षा कतई नहीं करें । उनसे अपनत्व की भावना रखते हुए उन्हें टीबी की सही जांच और सही जगह पर इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। उक्त बातें मुंगेर के जिला संचारी पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने कही है । उन्होंने बताया कि श्वसन संबंधित संक्रामक बीमारियों में टीबी भी एक महत्वपूर्ण बीमारी है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता । उन्होंने सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के हवाले से बताया कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने व बोलने से निकले बूंद में मौजूद टीबी बैक्टीरिया हवा के माध्यम से स्वस्थ्य व्यक्ति तक पहुंचता है।

मिथ्याओं से बचें ताकि उपेक्षित नहीं हो संक्रमित :
उन्होंने बताया कि सीडीसी के मुताबिक टीबी संक्रमण को ले कुछ मिथ्याएं भी हैं । इन मिथ्याओं की वजह से लोग टीबी ग्रसित लोगों की उपेक्षा करने लगते हैं। टीबी ग्रसित लोगों के प्रति इस तरह से उपेक्षा किया जाना उसके इलाज में भी असुविधा ही पैदा करती है। आम लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे टीबी संक्रमण होने के सही कारणों की जानकारी लें। सीडीसी के अनुसार यह रोग हाथ मिलाने, किसी को खानपान की सामग्री देने या लेने, बिस्तर पर बैठने व एक ही शौचालय के इस्तेमाल करने से बिल्कुल भी नहीं फैलता है।

फेफड़ों व अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है टीबी :
डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कॉर्डिनेटर शैलेंदू कुमार ने बताया कि जब एक व्यक्ति सांस लेता है तो बैक्टीरिया फेफड़ों में जाकर बैठ जाता और वहीं बढ़ने लगता है। इस तरह से वो रक्त की मदद से शरीर के दूसरे अंगों यथा किडनी, स्पाइन व ब्रेन तक पहुंच जाता है । आमतौर पर ये टीबी फैलने वाले नहीं होते हैं | वहीं फेफड़ों व गले का टीबी संक्रामक होता है जो दूसरों को भी संक्रमित कर देता ।

कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को संक्रमण की संभावना अधिक :
उन्होंने बताया कि ट्रयूबरक्लोसिस दो प्रकार के होते हैं। इनमें एक लेंटेंट टीबी होता है जिसमें टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद होते लेकिन उनमें लक्षण स्पष्ट रूप से नहीं दिखते हैं। लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर इसका असर उभर कर देखने को मिल सकता है। वहीं कुछ स्पष्ट दिखने वाले लक्षणों से टीबी रोगियों का पता चल पाता है।

ये लक्षण दिखें तो करायें टीबी जांच :
तीन माह या इससे अधिक समय से खांसी रहना, छाती में दर्द, कफ में खून आना

कमजोरी व थका हुआ महसूस करना।
वजन का तेजी से कम होना,
भूख नहीं लगना, ठंड लगना, बुखार का रहना,
रात को पसीना आना इत्यादि।

घर में मौजूद खाद्य पदार्थों से एनीमिया पर करें वार

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• विटामिन एनीमिया से लड़ने में कारगर
• हरी साग-सब्जी का नियमित सेवन काफ़ी जरूरी
• पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग एनीमिया का प्रमुख कारण

लखीसराय / 29 मई –

एनीमिया यानी खून की कमी एक ऐसी स्थिति है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या उनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम जाती है। ऑक्सीजन ले जाने के लिए हीमोग्लोबिन की आवश्यकता होती है। यदि शरीर में बहुत कम या असामान्य लाल रक्त कोशिकाएं हैं, या पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं है, तो शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन ले जाने के लिए रक्त की क्षमता कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। एनीमिया के कारण बच्चों में उम्र के मुतबिक वजन एवं लंबाई भी कम जाती एवं वे दुबलापन व नाटापन के शिकार हो जाते हैं। जिससे बच्चों में शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाती है।

पोषक तत्वों की कमी के साथ संक्रामक रोग ज़िम्मेदार:
एनीमिया के सबसे आम कारणों में पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से आयरन की कमी शामिल होती है। साथ ही विटामिन की कमी भी एनीमिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। शरीर में विटामिन सी, ए, डी, बी12 एवं ई की भूमिका अधिक होती है। विटामिन सी शरीर में आयरन के चयापचय को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है। विशेष रूप से यह आयरन के अवशोषण एवं इसकी गतिशीलता को भी बढ़ाता है। इसलिए विटामिन सी युक्त आहार जैसे आँवला, नींबू एवं अमरुद जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन जरुर करना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ आसानी से घरों में उपलब्ध हो जाते हैं। एनीमिया के प्रमुख कारणों में पोषक तत्वों की कमी के साथ कई संक्रामक रोग भी शामिल होते हैं। जिसमें मलेरिया, टीबी, एचआईवी और अन्य परजीवी संक्रमण शामिल हैं। इन रोगों से ग्रसित होने के बाद अमूमन शरीर में खून की कमी हो जाती है।

2 साल से कम उम्र के बच्चों के आहार पर दें ध्यान:
एनीमिया किसी भी आयुवर्ग के लोगों को हो सकता है लेकिन 2 साल से कम उम्र के बच्चों में खून की जरूरत अधिक होती है। 2 साल से कम उम्र के बच्चों की वृद्धि दर बहुत अधिक होती है। 6 से 24 महीने की उम्र के बीच, शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम आयरन की आवश्यकता जीवन के अन्य चरणों की तुलना में अधिक होती है। जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को अधिक जोखिम होता है। 2 साल की उम्र के बाद विकास की दर धीमी हो जाती एवं हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है। इस लिहाज से इस दौरान शिशु के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। जन्म से 6 माह तक केवल स्तनपान जरूरी होता है। इस दौरान ऊपर से पानी भी शिशु को नहीं देना चाहिए। वहीं, 6 माह के बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार जरूरी होता है। जिसमें बच्चे को अर्ध ठोस आहार देना चाहिए। साथ ही यह ध्यान भी देना चाहिए कि उनके आहार में अनाज, विटामिन एवं वसा की मात्रा शामिल हो।
एनीमिया को दूर करने के लिए सरल खाद्य पदार्थ:

• हरी साग-सब्जी
• चना एवं गुड़
• मौसमी फ़ल
• मीट, मछली एवं चिकन

दवा से अधिक जागरूकता की जरूरत :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया एनीमिया से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग कई प्रयास कर रहा है। पाँच से 59 महीने के बालक और बालिकाओं को आईएफए की सिरप एवं 5 से 9 साल के लड़के और लड़कियाँ, 10 से 19 साल के किशोर और किशोरियां, 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएँ( जो गर्भवती या धात्री न हो), गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को आईएफए की गोली निशुल्क दी जा रही है। ताकि एनीमिया के दंश से उन्हें बचाया जा सके। साथ ही यह जरूरी भी है कि सभी आयुवर्ग के लोग अपने खाद्य पदार्थों पर ध्यान भी दें एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। दवा से अधिक एनीमिया को लेकर जागरूकता की जरूरत है।

निक्षय पोषण योजना-टीबी मरीजों को पोषक आहार के लिए हर माह मिलती है 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि

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– डायरेक्ट बेनिफिसरी ट्रांसफर का लाभ लेने को टीबी का इलाज करा रहे मरीजों को निक्षय पोषण वेबपोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद जारी करवाना पड़ता है नोटिफिकेशन
– इस योजना के तहत टीबी मरीज के साथ- साथ प्राइवेट डॉक्टर और ट्रीटमेंट सपोर्टर को भी मिलती है प्रोत्साहन राशि

लखीसराय-

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ” निक्षय पोषण योजना ” के तहत टीबी मरीजों को पोषक आहार के लिए 500 रुपये प्रति माह की दर से इलाज शुरू होने के छह महीने तक आर्थिक प्रोत्साहन राशि दी जाती है। डायरेक्ट बेनिफिसरी ट्रांसफ़र (डीबीटी) स्कीम के तहत आर्थिक सहायता राशि के लिए टीबी मरीजों को सबसे पहले जहां वो टीबी का इलाज करवा रहे प्राइवेट डॉक्टर या अपने नजदीकी टीबी पर्यवेक्षक से मिलकर अपना सारा डिटेल्स (अकाउंट्स) ” निक्षय पोषण” वेब पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद नोटिफिकेशन जारी करवा लेना आवश्यक है।

” निक्षय पोषण योजना ” का लाभ लेने के लिए टीबी मरीजों के लिए क्या है आवश्यक :
इस योजना का लाभ सभी प्रकार के मरीजों को मिल सकता है जिनका इलाज सरकारी अस्पताल या प्राइवेट डॉक्टर के यहां चल रहा हो। उन्हें इलाज की अवधि तक 500 रुपए प्रति महीने पौष्टिक आहार के लिए दिया जाता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए टीबी मरीज के पास डॉक्टर का पुर्जा, आधार कार्ड या कोई भी सरकारी पहचान पत्र एवं बैंक पासबुक की छाया प्रति अपने अस्पताल या प्राइवेट डॉक्टर के यहां जहां टीबी मरीज का इलाज चल रहा हो वहां जमा करना होता है| ताकि मरीज के नाम का नोटिफिकेशन जारी हो सके और उसे डीबीटी का लाभ मिल सके। डीबीटी के जरिये प्रोत्साहन राशि सिर्फ बचत (सेविंग) बैंक या पोस्ट ऑफिस ही मान्य है। बैंक एफडी,आरडी, पीएफ, चालू खाता मान्य नहीं है। इसके साथ ही वैसा बैंक खाता ही मान्य है जिसमें पिछले तीन महीने के दौरान लेन देन की गई हो या फिर जिस खाता में विदेश से किसी तरह के पैसा का लेन देन नहीं किया गया हो। इसके विपरीत जिस बैंक खाते में पिछ्ले तीन महीने से कोई लेन देन नहीं किया गया हो या फिर जो बैंक एकाउंट बंद हो उसमें डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि ट्रांसफर नहीं हो सकती है।

“निक्षय पोषण योजना” के तहत बेनिफिसरी के अलावा प्राइवेट डॉक्टर और ट्रीटमेंट सपोर्टर को भी दी जाती है आर्थिक प्रोत्साहन राशि :
जिला संचारी रोग पदाधिकारी ( सीडीओ) डॉ. श्री निवास शर्मा बताते हैं कि “निक्षय पोषण योजना” के तहत टीबी मरीजों के अलावा प्राइवेट डॉक्टर को टीबी मरीज का नोटिफिकेशन कराने पर 500 रुपये और इलाज पूरा होने या आउटकम मिलने पर 500 रुपये यानि कुल 1000 रुपये की आर्थिक प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से सरकार द्वारा दी जाती है। इसके साथ ही ट्रीटमेंट सपोर्टर के रूप में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका के साथ ही एनओआईसी से प्रशिक्षित वोलेंटियर को ड्रग सेंसेटिव फर्स्ट लाइन मरीज की पहचान कर नोटिफिकेशन करवाने पर 1000 रुपये और ड्रग रेस्टेन्ट सेकेंड लाइन मरीज की पहचान कर नोटिफिकेशन करवाने पर 5000 रुपये तक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सरकार के द्वारा दी जाती है।
सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीबी मरीजों की जांच और इलाज की सुविधा शुरू है-
जिला के सभी टीबी मरीज जिनका इलाज सरकारी या प्राइवेट डॉक्टर के यहां चल रहा और जो इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे से अपील करते हुए जिला संचारी रोग पदाधिकारी ने बताया जिला के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीबी मरीजों की जांच और इलाज की सुविधा है। इसके साथ ही प्राइवेट डॉक्टरों के क्लीनिक में भी टीबी की जांच और इलाज शुरू हो गया है। वैसे सभी मरीज जो टीबी की दवा खा रहे हैं और उन्हें ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत डीबीटी के माध्यम से प्रोत्साहन राशि नहीं मिल पा रही वो सभी लोग तत्काल अपने प्राइवेट डॉक्टर जहां से वो टीबी की दवा खा रहे हैं या नजदीकी यक्ष्मा पर्यवेक्षक से मिलकर अपना नाम और पूरा डिटेल्स ( बैंक डिटेल्स) सहित निक्षय पोषण ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर्ड करवाने के साथ नोटिफिकेशन जारी करवा लें। ताकि उन्हें डीबीटी के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा दी जारी आर्थिक प्रोत्साहन राशि मिल सके ।

खगड़िया जिला को फाइलेरिया मुक्त बनाने को घर- घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं कुंदन झा

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– गोगरी प्रखंड के गौछारी में कार्यरत शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के ग्रुप लीडर कुंदन पेशे हैं शिक्षक
– गौछारी स्थित शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से अभी जुड़े हुए हैं 12 फाइलेरिया रोगी सहित अन्य लोग

खगड़िया-

खगड़िया जिला को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए गोगरी प्रखंड के गौछारी में रहने वाले कुंदन कुमार झा घर- घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं । पेशे से शिक्षक कुंदन कुमार झा गौछारी में जिला को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए काम कर रहे शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के ग्रुप लीडर भी हैं। कुंदन कुमार झा ने बताया कि वो गौछारी के ही गोपालपुर में स्थित एक निजी स्कूल में शिक्षक । वो वहां भी बच्चों, शिक्षक सहित अन्य लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में कम से कम एक बार एमडीए राउंड के दौरान फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी का सेवन करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा घर- घर जाकर फाइलेरिया के रोगियों को पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की मासिक बैठक में आने के लिए आमंत्रित करते हैं । बैठक में आने पर उन्हें फाइलेरिया से ग्रसित पैर के उचित देखभाल, नियमित रूप से साफ – सफाई और एक्सरसाइज करने के लिए बताते हैं।

उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर 2022 को यहां शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की स्थापना की गई थी। जिसमें उनके अलावा 10 अन्य सदस्य बने ।अभी इस ग्रुप में कुल 12 सदस्य जुड़े हुए हैं। पिछले अक्टूबर महीने से ही प्रत्येक महीने ग्रुप की मासिक बैठक आयोजित कर लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए विभिन्न उपायों की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से अभी विलास मंडल, राजेंद्र चौरसिया, सुनीता देवी, वीणा देवी, गिरिजा देवी, रिंकू देवी, रघु मंडल, निरंजन चौरसिया, नूतन देवी, अजय कुमार, जय चंद्र चौरसिया, रितेश कुमार जुड़े हुए हैं।
घर- घर जाकर किया सर्वे की एमडीए राउंड में कितने घर फाइलेरिया की दवा खाने से रह गए वंचित :
उन्होंने बताया कि शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सदस्यों के साथ गौछारी के कुल 242 घरों जाकर यह जानने की कोशिश की गई कि एमडीए राउंड के दौरान कुल कितने घरों में रहने वाले लोग फाइलेरिया की दवा खाने से वंचित रह गए। इस सर्वे रिपोर्ट में यह सामने आया कि कुल 242 घरों में से कुल 222 घरों में रहने वाले लोगों ने फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा का सेवन किया था । मात्र 20 घरों में रहने वाले लोग किसी कारणवश दवा खाने से वंचित रह गए थे ।

कुंदन कुमार झा ने फाइलेरिया उन्मूलन के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार की है नाटक की स्क्रिप्ट :
शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के लीडर कुंदन कुमार झा पेशे से शिक्षक होने के साथ- साथ एक अच्छे स्क्रिप्ट राइटर भी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से फाइलेरिया बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक नाटक की स्क्रिप्ट भी तैयार कर रखी है। उनकी योजना है गांव में दुर्गा पूजा सहित अन्य अवसर पर होने वाले नाटक के मंचन में फाइलेरिया जागरूकता पर आधारित एक नाटक का भी मंचन किया जाए, ताकि लोग फाइलेरिया बीमारी से खुद को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूक हो सकें।

टीबी मुक्त पंचायत बनाने का निक्षय मित्र बनकर लिया संकल्प 

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– कहलगांव के मथुरापुर पंचायत में टीबी मरीजों के साथ हुई बैठक
– टीबी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर लोगों का जागरूक करने का भी लिया निर्णय
भागलपुर, 25 मई-
कहलगांव के मथुरापुर पंचायत में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। इसमें 05 मरीज और उनके सहयोगियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में मुखिया मंतोष कुमार शामिल हुए। बैठक के दौरान मौजूद सभी लोगों को टीबी मुक्त पंचायत बनाने के लिए जागरूक किया गया। जिसके बाद सभी लोगों ने निक्षय मित्र बनकर अपने पंचायत को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प और टीबी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। मौके पर मौजूद एसटीएफ किशोर केवट ने टीबी के सभी मरीजों से बात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। साथ ही टीबी मरीजों को समय पर दवा खाने और किसी अन्य लोगों में इस तरह के लक्षण दिखते हैं तो, उन्हें जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेजने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर लोगों में टीबी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें डरना नहीं चाहिए, बल्कि जागरूक होकर समय पर इलाज कराना चाहिए। इससे टीबी से वे जल्द उबर जाएंगे और बीमारी का प्रसार भी नहीं हो सकेगा।
– टीबी मुक्त पंचायत बनाने में हरसंभव करेंगे सहयोग :
मुखिया मंतोष कुमार ने कहा, टीबी मुक्त समाज निर्माण के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। जो बेहद सराहनीय है। मैं अपने स्तर से भी टीबी मुक्त पंचायत बनाने में हर संभव सहयोग करूँगा। पंचायत स्तर से मरीजों की जो भी मदद संभव होगा वह किया जाएगा। इसके अलावा लोगों को इस बीमारी से भी बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। वहीं, उन्होंने कहा, मैं मुखिया होने के नाते मैं अपने पंचायत क्षेत्र में घूमता रहता हूँ। इसी दौरान मुझे स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के लोग मिले। ये लोग लगातार गाँव में घूमते मिले। मैंने इनसे बात की तो पता चला कि  टीबी को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसी के सिलसिले में हमलोग लगातार आ रहे हैं। इसके बाद मुझे अहसास हुआ कि जब ये लोग कर्मचारी होकर इतना काम कर रहे हैं तो मैं तो इस पंचायत का मुखिया हूं। मेरी जिम्मेदारी और भी ज्यादा है। इसके बाद मैं टीबी मुक्त अभियान से जुड़ा और निक्षय मित्र बन गया। अब मैं भी लोगों को टीबी के प्रति जागरूर करने का काम कर रहा हूँ।
– जनप्रतिनिधियों के जुड़ने से अभियान को मिलेगी तेजी :  केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा कहती हैं कि टीबी को लेकर हमलोग लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। इसके साथ-साथ टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक भी कर रहे हैं। शिविर का आय़ोजन करवा रहे हैं, जिसमें मरीजों को चिह्नित करने का काम हो रहा  और अब निक्षय मित्र बनने की अपील भी लोगों से कर रहे हैं। इन सब काम में जनप्रतिनिधियों के समर्थन से बहुत सहयोग मिलता है। अगर पंचायत का मुखिया आपके अभियान से जुड़ जाता है तो बाकी लोग भी बहुत आसानी से जुड़ जाते और आपको सहयोग करते हैं। अच्छी बात यह है कि मंतोष कुमार न सिर्फ हमारे अभियान से जुड़े, बल्कि ये निक्षय मित्र भी बनकर अपनी जिम्मेदारी को निभाने के साथ-साथ हमारे अन्य कार्यक्रमों का भी समर्थन कर रहे हैं।
– सरकारी अस्पतालों में इलाज की बेहतर व्यवस्था :
एसटीएस किशोर केवट ने बताया, जिले में निक्षय मित्र बनने का सिलसिला चल पड़ा है। निक्षय मित्र बनाने का अभियान और तेज किया जाएगा। इसमें केएचपीटी का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। आमलोगों और जनप्रतिनिधियों के इस अभियान से जुड़ने से अधिक से अधिक लोगों में जागरूकता आती है। टीबी के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है। वहीं, उन्होंने कहा टीबी से बचाव के लिए लोगों को पौष्टिक आहार पर जोर देना चाहिए। सरकारी अस्पताल में इलाजरत टीबी के मरीजों में पौष्टिक आहार के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रतिमाह की राशि भी दी जाती है। यह राशि टीबी मरीजों को इलाज होने तक दी जाती है। इसलिए टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार के सेवन जरूर करना चाहिए। टीबी होने का बड़ा कारण पौष्टिक आहार का नहीं लेना भी है। इसलिए टीबी के मरीज तो पौष्टिक आहार ले हीं। साथ में दूसरे लोगों को भी पौष्टिक आहार लेने के लिए जागरूक करें।

सदर प्रखंड के आवास बोर्ड में फाइलेरिया रोगियों के बीच एमएमडीपी किट वितरित

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– जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की मासिक बैठक में हुआ वितरण
– डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट और वेक्टर बोर्न डिजीज सुपरवाइजर ने फाइलेरिया रोगियों को नियमित साफ – सफाई और एक्सरसाइज के प्रति किया जागरूक
– जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़े हुए हैं कुल 14 फाइलेरिया रोगी सहित अन्य लोग

खगड़िया-

बुधवार को खगड़िया स्थित सदर पीएचसी परिसर में सदर प्रखंड के आवास बोर्ड में कार्यरत जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की मासिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़े फाइलेरिया रोगियों के बीच एमएमडीपी किट वितरित की गई। इस बैठक में जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़ी प्रेमलता देवी पति स्वर्गीय महेंद्र यादव, मीरा देवी पति गुलाब साव, वार्ड नंबर 3 आवास बोर्ड, देवकी देवी पति राम सेवक कुमार वार्ड नंबर 29 आवास बोर्ड, 75 वर्षीय नारायण पंडित पिता राम सेवक कुमार वार्ड नंबर 29 आवास बोर्ड खगड़िया, गुलाब साव पिता विशुनदेव साव सहित ग्रुप के लीडर के रूप में राजेंद्र प्रसाद शाह उपस्थित थे । इस मासिक मीटिंग में फाइलेरिया पेशेंट बेबी देवी पति आनंदी यादव, हीरा देवी पति अशोक यादव और 20 वर्षीय अनुषा कुमारी पिता अशोक यादव पहली बार आई थी।

– डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट और वेक्टर बोर्न डिजीज सुपरवाइजर ने फाइलेरिया रोगियों को नियमित साफ – सफाई और एक्सरसाइज के प्रति किया जागरूक : इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट बब्लू साहनी और सदर पीएचसी में वेक्टर बोर्न डिजीज सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत विनोद कुमार ने फाइलेरिया के रोगियों के बीच एमएमडीपी किट वितरित करते हुए फाइलेरिया से संक्रमित पैर का सही तरीके से रख- रखाव, नियमित रूप से साफ – सफाई और एक्सरसाइज करने के प्रति जागरूक किया । उन्होंने एक्यूट अटैक की स्थिति में बरती जाने वाली विशेष सावधानियों के पति भी जागरूक किया ।

जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के द्वारा फाइलेरिया रोगियों सहित अन्य लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति किया जाता है जागरूक :
जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के लीडर राजेंद्र प्रसाद शाह ने बताया कि इस ग्रुप का निर्माण पिछले वर्ष अक्टूबर के महीने में ही किया गया है। इस ग्रुप में अभी तक कुल 14 लोग जुड़े हुए हैं। प्रत्येक महीने ग्रुप की मासिक बैठक में फाइलेरिया के रोगियों को संक्रमित पैर के सही तरीके से देखभाल, नियमित साफ- सफाई और एक्सरसाइज के बारे में बताया जाता है। इन तरीकों के नियमित अभ्यास से कई फाइलेरिया के रोगियों को काफी सुधार भी देखने को मिला है। इसके अलावा मीटिंग में आने वाले सभी लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में कम से कम एक बार एमडीए राउंड के दौरान फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा का सेवन करने के लिए जागरूक किया जाता है।

कालाजार उन्मूलन • जिले में सघन एसपी पाउडर छिड़काव अभियान का किया गया निरीक्षण

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– बरबीघा प्रखंड के पिंजरी गाँव में निरीक्षण, छिड़काव टीम को दिए गए जरूरी निर्देश
– घर-घर जाकर गठित टीम कर रहा छिड़काव और बचाव के लिए किया जा रहा है जागरूक

शेखपुरा-

कालाजार उन्मूलन को लेकर जिले में एसपी पाउडर (सिंथेटिक पायरोथाइड) का सघन छिड़काव अभियान चल रहा है। जिसका वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्यामसुंदर कुमार एवं वेक्टर जनित रोग पर्यवेक्षक मनोज कुमार साह ने बरबीघा प्रखंड के पिंजरी गाँव में निरीक्षण किया। इस दौरान छिड़काव टीम का कार्य देखकर निरीक्षण टीम संतुष्ट दिखी और अभियान के हर हाल में सफल संचालन सुनिश्चित कराने को लेकर टीम को कई आवश्यक और जरूरी निर्देश भी दिए। वहीं, निरीक्षण टीम ने बताया कि अभियान के दौरान गठित टीम द्वारा घर-घर जाकर छिड़काव किया जा रहा और एक भी घर छूटे नहीं, इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। साथ ही इस बीमारी के शुरुआती लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की भी जानकारी दी जा रही है। ताकि लोग शुरुआती दौर में बीमारी की पहचान कर समय रहते आवश्यक उपाय कर सकें ।

– कालाजार मुक्त जिला निर्माण को लेकर किए जा रहे हैं हर जरूरी प्रयास :
सिविल सर्जन डाॅ अशोक कुमार सिंह ने कहा, कालाजार मुक्त जिला निर्माण को लेकर हर जरूरी और आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि कालाजार का जड़ से खात्मा हो सके और जिले में मरीजों की संख्या शून्य हो सके। इसके लिए छिड़काव दल में शामिल कर्मियों को गौशाला, पूजा घर, पाठशाला, सोने वाला कमरे में अनिवार्य रूप से 06 फीट की ऊँचाई तक छिड़काव करने का निर्देश दिया गया। वहीं, उन्होंने बताया, अभियान को हर हाल में सफल बनाने के लिए हर दिन चिकित्सा पदाधिकारी एवं सुपरवाइजर द्वारा संध्याकालीन समीक्षा की जाती है। जिसमें दिन भर में कितने घरों में छिड़काव हुई समेत अन्य चर्चा की जाती है।

– कालाजार से बचाव के लिए एसपी पाउडर का छिड़काव ही सबसे बेहतर उपाय :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार ने बताया, कालाजार से बचाव के लिए लगातार कालाजार प्रभावित गाँव और क्षेत्रों में एसपी पाउडर से छिड़काव कराया जा रहा है। इस बीमारी से बचाव के लिए छिड़काव तो सबसे बेहतर उपाय है ही, पर इसके अलावा लोगों को सावधान और सतर्क रहने की भी जरूरत है। इसलिए, इस बीमारी से बचाव के लिए सभी लोगों को खुद भी सतर्क और सावधान रहें और लक्षण महसूस होने के साथ तुरंत जाँच करानी चाहिए। यही आपके लिए सबसे बेहतर और कारगर उपाय है। छिड़काव के दौरान भी लोगों को सतर्क रहने एवं साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने समेत अन्य जानकारियाँ दी जाएगी।

– बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार :
कालाजार बालू मक्खी के काटने से फैलता है। एसपी पाउडर का छिड़काव से ही बालू मक्खी के प्रभाव को पूर्णत: खत्म किया जा सकता है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे बालू मक्खी को समाप्त किया जा सके। कालाजार का लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाँच कराएं और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार इलाज कराएं। सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही इन बीमारियों से बचने के जमीन (सतह) पर नहीं सोएं । मच्छरदानी का नियमित रूप से उपयोग करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें ।

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।

– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन समाग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने को आपदा प्रबंधन की तरह किया जाए हरसंभव प्रयास : फूचो सिंह

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– खगड़िया के सन्होली में कार्यरत जय भोले पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़े हैं कुल 7 फाइलेरिया रोगियों सहित अन्य लोग
– सन्होली स्थित राजेंद्र सरोवर शिव मंदिर पर नियमित रूप से होती है पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की बैठक

खगड़िया-

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आपदा प्रबंधन की तरह हर संभव प्रयास किया जाए । यह मानना है सदर प्रखंड खगड़िया के सन्होली में कार्यरत पेशेंट सपोर्ट ग्रुप (पीएसजी ) के ग्रुप लीडर और जिला में आपदा मित्र के रूप में सेवा देने वाले प्रहलाद सिंह के 50 वर्षीय पुत्र फूचो सिंह का । उन्होंने बताया कि मैं बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन इकाई के अंतर्गत खगड़िया जिला में आपदा मित्र के रूप में बाढ़ सहित अन्य आपदा के समय अपनी सेवा दे रहा हूं। इसके लिए मैंने पटना सिटी में 12 दिवसीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। मेरा मानना है कि अन्य प्राकृतिक आपदा की तरह फाइलेरिया बीमारी भी आम लोगों कि लिए किसी आपदा से कम नहीं है। यह बीमारी होने के बाद व्यक्ति स्थाई रूप से दिव्यांग हो जाता और ताउम्र उसे इसी स्थिति में जीवन व्यतीत करना पड़ता है। राज्य सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मेरी अपील है कि खगड़िया को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए आपदा प्रबंधन की तरह ही युद्ध स्तर पर हर संभव कार्य किए जाएँ ।

खगड़िया के सन्होली के जय भोले पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़े हैं 7 फाइलेरिया रोगियों सहित अन्य लोग :
उन्होंने बताया कि सन्होली में जय भोले के नाम से 07 जनवरी 2023 को पेशेंट सपोर्ट ग्रुप का निर्माण किया गया है। इस ग्रुप से मेरे अलावा कुल छह फाइलेरिया के रोगी सहित अन्य लोग जुड़े हुए हैं। इस ग्रुप मेरे अलावा राधा देवी, द्रौपदी देवी, मंगला देवी, राम विलास यादव, रविन्द्र सिंह व पवन कुमार जुड़े हुए हैं। जय भोले पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की मासिक बैठक सन्हौली के ही राजेंद्र सरोवर के निकट शिव मंदिर पर आयोजित की जाती है। इस बैठक में लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में एक बार स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चलाए जाने वाले सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के दौरान अनिवार्य रूप से फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी टेबलेट्स खाने के लिए जागरूक किया जाता है। इस दौरान उन्हें इस बात की भी जानकारी दी जाती है कि एमडीए राउंड के दौरान दो वर्ष से कम के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमारी से पीड़ित लोगों को फाइलेरिया की दवा का सेवन नहीं करना है। मीटिंग के दौरान उपस्थित सभी फाइलेरिया के रोगियों को पैर की नियमित साफ – सफाई, सही तरीके से पैर का रख- रखाव और नियमित रूप से व्यायाम करने के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के व्यायाम का अभ्यास भी कराया जाता है।
उन्होंने बताया पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सहयोग से फाइलेरिया के रोगियों को सदर पीएचसी में कार्यरत एमएमडीपी क्लिनिक में ले जाकर डॉक्टर से परामर्श करवाते हैं । डॉक्टर रोगियों को साफ- सफाई और नियमित व्यायाम के लिए डिमोंस्ट्रेशन के साथ जागरूक करते हैं । इसके अलावा ग्रुप के माध्यम से कई फाइलेरिया के कई मरीजों को एमएमडीपी किट दिलायी गई है । ग्रुप के द्वारा लगातार नए फाइलेरिया रोगियों को चिह्नित कर स्वास्थ्य विभाग को इससे अवगत कराया जा रहा है।

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम-पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से फाइलेरिया के रोगियों को साफ- सफाई, बेहतर देखभाल व व्यायाम करने के प्रति जागरूक करने में काफी मदद मिल रही

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–जिला के तीन प्रखंडों में कार्यरत हैं 14 पेशेंट सपोर्ट ग्रुप

– खगड़िया सदर, गोगरी और परबत्ता प्रखंड में 14 पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़े हैं कुल 138 फाइलेरिया के मरीज सहित अन्य लोग
– सदर प्रखंड खगड़िया, परबत्ता और गोगरी में पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से जुड़े हैं कुल 44 पुरुष और 94 महिला फाइलेरिया रोगी

खगड़िया-

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला के तीन प्रखंडों में कार्यरत हैं कुल 14 पेशेंट सपोर्ट ग्रुप । इस आशय की जानकारी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि खगड़िया सदर, गोगरी और परबत्ता प्रखंड में कार्यरत 14 पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से कुल 138 फाइलेरिया मरीज सहित अन्य लोग जुड़े हैं । इनमें कुल 44 पुरुष और 94 महिला शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सदर प्रखंड खगड़िया में कुल 6, परबत्ता प्रखंड में 5 और गोगरी प्रखंड में कुल 3 पेशेंट सपोर्ट ग्रुप कार्यरत हैं ।

जिला के वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. शाहनवाज आलम ने बताया कि सदर प्रखंड खगड़िया के आवास बोर्ड में कार्यरत जागृति पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 6 पुरुष और 5 महिला सहित कुल 11 लोग जुड़े हुए हैं। सदर प्रखंड के हरदासपुर गांव में कार्यरत वर्मा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 6 पुरुष और 1 महिला सहित कुल 7 लोग जुड़े हुए हैं। इसी प्रखंड के संसारपुर गांव में कार्यरत जय बजरंग पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 8 पुरुष और 4 महिला सहित कुल 12 लोग जुड़े हैं। यहां हरे राम कुमार सहित अन्य लोग लगातार कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सदर प्रखंड के ही बछौता गांव में कार्यरत जय भवानी पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 2 पुरुष और 5 महिलाओं सहित कुल 7 लोग जुड़े हुए हैं। इसी प्रखंड के संहौली गांव में कार्यरत जय भोले पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 3 पुरुष और 3 महिलाओं सहित कुल 6 लोग जुड़े हैं। सदर प्रखंड के ही जहांगीरा शोभनी गांव में कार्यरत जहांगीरा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 2 पुरुष और 4 महिला सहित कुल 6 लोग जुड़े हुए हैं।

जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी ने बताया कि परबत्ता प्रखंड के टेमथा राका गांव में खुशी पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से कुल 14, इंदिरा नगर रूपौली गांव में कार्यरत जागरूक पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से कुल 13, करना गांव में कार्यरत अभिमन्यु पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से कुल 9, रूपौली नौरंगा गांव में कार्यरत साई राम पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से कुल 7 और टेम्था राका गांव में ही कार्यरत गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से कुल 7 फाइलेरिया रोगियों सहित अन्य लोग जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि गोगरी प्रखंड के गोगरी गांव में कार्यरत मां दुर्गा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 4 पुरुष और 10 महिला सहित कुल 14 लोग, गौछारी गांव में कार्यरत शिव गंगा पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 9 पुरुष और 7 महिला सहित कुल 16 लोग और रतन गांव में कार्यरत मां भगवती पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से 1 पुरुष और 8 महिलाओं सहित कुल 9 फाइलेरिया के रोगी सहित अन्य लोग जुड़े हुए हैं।
पेशेंट सपोर्ट ग्रुप से फाइलेरिया के रोगियों को नियमित साफ- सफाई, बेहतर देखभाल व व्यायाम करने के प्रति जागरूक करने में काफी मदद मिल रही-
उन्होंने बताया कि तीन प्रखंडों में कार्यरत पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की मदद से ग्रामीण स्तर पर फाइलेरिया के रोगियों की पहचान कर उन्हें नियमित रूप से साफ- सफाई, खुद की बेहतर तरीके से देखभाल , नियमित रूप से व्यायाम करने के प्रति जागरूक करने में काफी मदद मिल रही है। पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की मदद से नए फाइलेरिया के रोगियों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत एमएमडीपी क्लिनिक से उचित परामर्श के साथ पर्सनल केयर के लिए दिए जाने वाले एमएमडीपी किट के वितरण में भी काफी सहूलियत मिलती है। इस ग्रुप के द्वारा नियमित रूप से स्थानीय स्तर पर बैठक आयोजित कर विशेषज्ञ फाइलेरिया के रोगियों सहित अन्य लोगों को भी पर्सनल हाइजीन, नियमित एक्सरसाइज के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा सभी लोगों को साल में कम से कम एक बार एमडीए राउंड के दौरान फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा के सेवन के लिए जागरूक कर रहे हैं।