चार गुजराती देश का गौरव-अमित शाह

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 नईदिल्ली-

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि चार गुजरातियों ने भारत के आधुनिक इतिहास में अहम योगदान दिया है। वे पूरे देश का गौरव है। इनमें महात्मा गांधी, सरदार बल्लभभाई पटेल, मोरारजी देसाई ओर नरेंद्र मोदी शामिल हैं।

दिल्ली गुजराती समाज के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण भारत की  ख्याति दुनिया भर में फैल रही है। गृह मंत्री ने आधुनिक भारत में गुजरातियों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के प्रयासों से देश को आजादी मिली, सरदार पटेल के कारण देश एकजुट हुआ, मोरारजी देसाई कारण देश का लोकतंत्र पुनर्जीवित हुआ ओर मोदी के कारण दुनिया भर में भारत का जश्न मनाया जा रहा है। उन्होंने गुजराती में दिए अपने भाषण में कहा कि इन चार गुजरातियों ने महान उपलब्धियां हासिल की हैं। शाह ने कहा कि गुजराती समुदाय देश ओर दुनिया भर में मौजूद हैं। यह समुदाय समाज में सेवा करते हुए अच्छी तरह से घुलमिल जाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में रह रहे गुजरातियों को उनकी संस्कृति ओर सभ्यता से जोड़े रखने के साथ ही इस संस्था ने उन्हें देश ओर समाज की सेवा के लिए प्रेरित करने का काम किया है।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने को मुंगेर में टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम शुरू

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– विगत 12 मई को पटना में उपमुख्यमंत्री ने टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम का किया था शुभारंभ
– इस कार्यक्रम के तहत पंचायती राज संस्थाओं के द्वारा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ‘ स्वस्थ्य गांव ‘की कल्पना की गई है

मुंगेर-
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए मुंगेर में “टीबी मुक्त पंचायत पहल ” कार्यक्रम शुरू किया गया है। विगत 12 मई को पटना स्थित ऊर्जा स्टेडियम में उप मुख्यमंत्री ने “टीबी मुक्त पंचायत पहल” कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम के तहत मुंगेर में टीबी उन्मूलन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास के लक्ष्यों को 2025 तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के द्वारा सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘स्वस्थ्य गांव ‘ की परिकल्पना की गई है। उन्होंने बताया कि जिला भर में स्वास्थ्य उपकेंद्र एवं ग्रामीण स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सहयोग से टीबी उन्मूलन की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। अब इन प्रयासों को प्रति वर्ष मान्य संकेतकों (इंडिकेटर्स) पर मापने और सत्यापन कर टीबी मुक्त पंचायत घोषित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत पहल के क्रियान्वयन से राज्य के सभी जिलों/प्रखंडों एवम पंचायतों के बीच एक स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा और ज्यादा से पंचायत, प्रखंड और जिला टीबी मुक्त होने का दावा प्रस्तुत कर सकेंगे ।
पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए कुछ आवश्यक कदम :
जिला टीबी/एचआईवी समन्वयक शलेंदु कुमार ने बताया कि जिला एवं पंचायत स्तर पर बैठक कर समुदाय को टीबी के लक्षणों, जांच एवम उपचार की निः शुल्क व्यवस्था, सरकार के द्वारा टीबी रोगियों और ट्रीटमेंट स्पोर्टर को दिए जाने वाले लाभों की जानकारी देना, जन आरोग्य समिति, ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति की मासिक/त्रैमासिक बैठकों में टीबी मुक्त पंचायत घोषित करने की शर्तों, संकेतकों (इंडिकेटर्स) पर प्रगति की समीक्षा एवम कठिनाइयों के समाधान के लिए प्रयास करने और समाज के सक्षम लोगों के द्वारा टीबी रोगियों को फूड बास्केट प्रदान करने के लिए प्रेरित कर निक्षय मित्रों की संख्या बढ़ाने का कार्य करना है।
इसके बाद प्रखंड और पंचायत के माध्यम से जिला स्वास्थ्य समिति (यक्ष्मा) को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए जरूरी दस्तावेज के साथ दावा प्रस्तुत करना होगा । इसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ष जनवरी महीने के पहले पखवाड़े में ग्राम प्रधान मुखिया की अध्यक्षता में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति के सदस्य, एएनएम, सीएचओ तथा प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी टीबी मुक्त पंचायत के लिए संकेतकों के आधार पर आकलन कर अपना दावा प्रस्तुत करेंगे।
– जिला टीबी टीम के द्वारा प्रखंडों से प्राप्त टीबी मुक्त पंचायत दावा का सत्यापन :
उन्होंने बताया कि जिला स्तरीय टीम जिसमें राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी या उनके प्रतिनिधि, सिविल सर्जन, जिला संचारी रोग पदाधिकारी, जिला परिषद के प्रतिनिधि, आईएमए के प्रतिनिधि सहित कई अन्य लोगों के द्वारा प्राप्त दावों का संकेतकों के आधार पर सत्यापन किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष जिला टीम के द्वारा साल के पहली तिमाही में सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर मार्च के प्रथम सप्ताह तक पूरी कर ली जाएगी । इसके बाद सत्यापित पाए गए पंचायतों की सूची जो टीबी मुक्त पंचायत की शर्तों को पूरा करते हों, को जिला टीम के द्वारा जिलाधिकारी को समर्पित किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को वर्ल्ड टीबी डे के अवसर पर जिलाधिकारी के द्वारा योग्य टीबी मुक्त पंचायत की घोषणा करते हुए एक वर्ष की वैधता के साथ प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्र के साथ महात्मा गांधी की एक प्रतिमा से टीबी मुक्त पंचायत को सम्मानित किया जाएगा। प्रतिमा का रंग पहले साल कांस्य, दो साल की उपलब्धि पर रजत और लगातार तीन वर्षों तक मानदंडों को बनाए रखने पर स्वर्ण रंग का होगा ।

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में उल्लेखनीय योगदान के लिए खगड़िया जिला सम्मानित 

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–  पटना में आयोजित कार्यक्रम में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी और वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी को मोमेंटो देकर किया गया सम्मानित
– जिला के चार प्रखंडों में 10 फरवरी से 03 मार्च तक चले एमडीए कार्यक्रम में जिलाभर के 89% लोगों को खिलाई गई फाइलेरिया की दवा
खगड़िया-
राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में उल्लेखनीय योगदान के लिए खगड़िया जिला को  मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। मंगलवार को पटना में आयोजित कार्यक्रम में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार और वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. शहनवाज आलम को स्वास्थ्य सचिव सह कार्यपालक निदेशक राज्य स्वास्थ्य समिति संजय कुमार सिंह, फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ परमेश्वर प्रसाद सहित स्वास्थ्य  विभाग के बड़े अधिकारियों ने मोमेंटो देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ अशोक कुमार, फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ अनुज सिंह रावत सहित सभी डेवलपमेंट पार्टनर के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया कि सरकार के द्वारा चलाए जा रहे राष्टीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के दो भाग हैं –
1. मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) : इसमें फाइलेरिया से बचाव के लिए साल में एक बार सभी लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की  दवा खिलाई जाती है। इस दौरान सिर्फ दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवा नहीं खिलाई जाती है।
2. मोर्बीडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) : इसमें फाइलेरिया के रोगियों को एमएमडीपी क्लिनिक और एमएमडीपी किट के माध्यम से पर्सनल हाइजीन, स्किन एंड वुंड केयर, एक्सरसाइज एलिवेशन और सूटेबल शूज पहनने के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है ताकि फाइलेरिया के रोगियों को काफी हद तक अपनी परेशानियों से छुटकारा मिल सके।
जिला के चार प्रखंडों में 10 फरवरी से 03 मार्च तक चले एमडीए कार्यक्रम में जिला भर के 89% लोगों को खिलाई गई फाइलेरिया की  दवा :
खगड़िया के वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. शहनवाज आलम ने बताया कि जिला के चार प्रखंडों खगड़िया सदर, चौथम, गोगरी और परबत्ता में विगत 10 फरवरी से 03 मार्च तक चले सर्वजन दवा सेवन (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) एमडीए अभियान के दौरान जिला भर में 89% लोगों को फाइलेरिया की  दवा खिलाई गई। उन्होंने बताया कि जिला की  कुल जनसंख्या 15,20,945  में से जिला के चार प्रखंडों में रहने वाले कुल 13,50,945 को फाइलेरिया की  दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी की  टेबलेट्स खिलाई गई।
जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी ने बताया कि जिला के विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मोर्बीडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) क्लिनिक संचालित है। जहां निश्चित दिन विशेषज्ञ चिकित्सक फाइलेरिया के रोगियों को साफ- सफाई, नियमित देखभाल और एक्सरसाइज के बारे में विस्तृत जानकारी देते हैं।
उन्होंने बताया कि जिला के 882 फाइलेरिया के रोगियों के बीच एमएमडीपी किट वितरण किया गया है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला के तीन प्रखंड सदर प्रखंड खगड़िया, गोगरी और परबत्ता में फाइलेरिया  रोगियों की  सुविधा के लिए पेशेंट  सपोर्ट ग्रुप कार्यरत है। यह ग्रुप फाइलेरिया के रोगियों की  पहचान कर उन्हें पीएचसी/सीएचसी तक लाते हैं।  उन्हें एमएमडीपी क्लिनिक में उपस्थित चिकित्सक से परामर्श दिलाते और उन्हें एमएमडीपी किट भी दिलाने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह ग्रुप आम लोगों को फाइलेरिया से बचने और फाइलेरिया के रोगियों को बेहतर देखभाल, साफ – सफाई और नियमित व्यायाम के लिए जागरूक करते हैं।

हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर को परफार्मेंस रैंकिंग में लखीसराय को मिला पहला स्थान 

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– उपलब्धि • स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की कड़ी मेहनत से मिली सफलता
– जिलेवासियों का भी रहा सकारात्मक सहयोग और जिले को सूबे में मिला प्रथम स्थान
लखीसराय-
हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के राज्य स्तरीय परफार्मेंस  रैंकिंग में लखीसराय ने ओवर ऑल पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। जो जिले के स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की  कड़ी मेहनत और जिले वासियों के   सकारात्मक सहयोग का परिणाम है। उक्त उपलब्धि की जानकारी सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 का जारी हुए राज्य स्तरीय रैंकिंग में जिले को पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त हुआ है । जो सभी पदाधिकारियों और कर्मियों के साथ-साथ जिले वासियों के लिए बेहद अच्छी और सुखद खबर है। आगे भी इसी तरह जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहे। इसके लिए हमलोग प्रयासरत हैं।  हमेशा मरीजों-मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सजग हैं।
– पाँच अलग-अलग इंडिकेटर के आधार पर हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के परफार्मेंस की जाती है गणना :
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया, पाँच अलग-अलग इंडिकेटर के आधार पर हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के परफार्मेंस की गणना की जाती है। हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर की परफार्मेंस रैंकिंग का पहला इंडिकेटर हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर, एपीएचसी और अर्बन पीएचसी को हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने पर निर्भर करता है। इसका ओवर ऑल परफार्मेंस 40 % वेटेज है। इसके अलावा हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर उपलब्ध अन्य सुविधाओं को देखा जाता है।
– स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों की कड़ी मेहनत व  जिले वासियों के   सकारात्मक सहयोग से  मिली सफलता :
सिविल सर्जन ने बताया, यह उपलब्धि जिले के स्वास्थ्य विभाग के सभी पदाधिकारियों और कर्मियों की कड़ी मेहनत और जिले वासियों के   सकारात्मक सहयोग से मिली है। इसलिए, इस उपलब्धि का श्रेय सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ आमजनों को जाता है। मैं आगे भी उम्मीद करता हूँ कि इसी तरह सभी पदाधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेदारी पर डटे रहे और जिले वासियों का  सकारात्मक सहयोग मिलता रहे। वहीं, उन्होंने कहा, लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने के लिए लगातार तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन कर जिले वासियों को जागरूक किया जाता है। जिसका परिणाम यह है कि सामुदायिक स्तर पर लोगों में जागरूकता आई है ।  लोग स्वास्थ्य संस्थान पहुँच कर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर रहे  हैं।

आगामी एमडीए अभियान के लिए रणनीति बनाने के लिए राज्य स्तरीय टीओटी का हुआ आयोजन       

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• 10 अगस्त से 14 जिलों में फ़ाइलेरिया की दवाएं खिलाई जाएगी
• अन्तर्विभागीय सहयोग पर दिया गया जोर
पटना:
“जहाँ भी फ़ाइलेरिया के मरीज पाए जाते हैं वहां पर सघन निगरानी एवं नियमित अनुश्रवण की जरुरत है. हाइड्रोसिल के मरीजों की लाइन लिस्टिंग जरुरी है ताकि हमलोग मिशन मोड में हाइड्रोसिल के मरीजों की सर्जरी कर सकें. लाइन लिस्टिंग जिला एवं प्रखंड स्तर पर हो ताकि ऐसे मरीजों को चिन्हित कर उनकी सर्जरी की जा सके. पिछली बार के मुकाबले इस बार फ़रवरी के राउंड में हमारा एमडीए कवरेज बेहतर हुआ है. जहाँ मरीज ज्यादा पाए जाते हैं वहां अधिक मानव बल की व्यवस्था की जाये”, उक्त बातें सचिव स्वास्थ्य सह कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार संजय कुमार सिंह ने कही. कार्यपालक निदेशक आगामी एमडीए कार्यक्रम के लिए रणनीति तैयार करने के लिए राज्यस्तरीय टीओटी का उद्घाटन करते समय कही.
एमडीए की सफलता के लिए अन्तर्विभागीय सहयोग जरुरी:
सचिव स्वास्थ्य सह कार्यपालक निदेशक ने बताया कि एमडीए राउंड में दवा सेवन सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड स्तर तक मजबूत मॉनिटरिंग की जरुरत है. उन्होंने बताया कि एमडीए-राउंड की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जाएगा. उन्होंने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है. फाइलेरिया के उपचार की तुलना में इसकी रोकथाम पर ध्यान देने की जरूरत है. एमडीए के जरिए ही फाइलेरिया की रोकथाम एवं उन्मूलन संभव है.
दवा सेवन सुनिश्चित कराने के लिए विशेष रणनीति पर जोर:
बैठक के दौरान फाइलेरिया के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. परमेश्वर प्रसाद ने बताया कि एमडीए की सफलता के लिए सूक्ष्म कार्य-योजना एवं मॉनिटरिंग एवं सपोर्टिव सुपरविजन पर विशेष बल दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य के 14 जिलों अररिया, भोजपुर, बक्सर, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, पटना, पुर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, लखीसराय, दरभंगा, नालंदा एवं नवादा में 10 अगस्त से एमडीए अभियान चलाया जायेगा.
फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए 2027 तक का है लक्ष्य:
डॉ. वाई .पाठक, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, आशा सेल ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार ने वर्ष 2027 तक लक्ष्य निर्धारित किया है. प्रखंड स्तरीय नीति के अंतर्गत सभी प्रखंडों में आशा कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण, उनके साथ नियमित बैठक एवं प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्यकर्मियों का आशाकर्मियों में सामंजस्य होना आवश्यक है.
हर प्रखंड से लिए जायेंगे 300 स्लाइड:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनटीडी स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने बताया कि प्रखंड स्तरीय नीति बनाने से ज्यादा से ज्यादा लक्षित आबादी को दवा खिलाने में सफलता मिलेगी. इसके लिए आवश्यक है कि पिछले एमडीए अभियान एवं नाईट ब्लड सर्वे का आंकलन कर रणनीति बनायीं जाये और सभी एकजुट होकर उसपर काम करें. नाईट ब्लड सर्वे के दौरान हर प्रखंड में दो साईट होंगे, एक सेंटिनल एवं एक रैंडम साईट. हर प्रखंड से 300 सैंपल इकठ्ठा किये जायेंगे.
इस दौरान राज्य द्वारा सभी जिलों के एनसीडी पदाधिकारीयों तथा सभी सहयोगी विभागों के प्रतिनिधियों को पिछले एमडीए अभियान के दौरान बेहतर काम करने ले लिए मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया.
सभी सहयोगी संस्थानों ने रखी अपनी बात:
एमडीए राउंड में सहयोग कर रहे सभी विभागों की भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा हुयी. साथ ही सहयोगी संस्थाओं में शामिल विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर इण्डिया, पीसीआई, जीएचएस एवं सीफ़ार ने एमडीए में अपने योगदान पर विस्तार से जानकारी दिया.
इस दौरान अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ अशोक कुमार, फाइलेरिया के राज्य सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत एवं स्टेट फाइलेरिया ऑफिस से प्रभात, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से अमोल पाटिल, एनवीबीडीसीपी के पूर्व पदाधिकारी वी.के.रैना, पीसीआई के रणपाल, केयर इण्डिया से टीम लीड विकास सिन्हा एवं स्टेट प्रोग्राम मेनेजर बासब रूज, जी एच एस से अनुज घोष, सीफ़ार से रणविजय कुमार सहित सभी जिलों के अधिकारी उपस्थित थे.

थोड़ी सावधानी, साफ- सफाई और मच्छरदानी के नियमित प्रयोग से खुद को रखें डेंगू से सुरक्षित : सिविल सर्जन 

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–  घरों के आसपास साफ – सफाई का रखें विशेष ख्याल
– स्थिर साफ पानी में  पनपता है एडीस मच्छर इसलिए कहीं भी नहीं होने दें जलजमाव
खगड़िया-
थोड़ी सी सावधानी, घरों के आसपास साफ- सफाई और मच्छरदानी के नियमित प्रयोग से खुद को डेंगू और चिकनगुनिया के संक्रमण से सुरक्षित रख सकते हैं। उक्त बात  मंगलवार को राष्ट्रीय  डेंगू दिवस पर सदर अस्पताल  स्थित जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय से निकली जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाते हुए सिविल सर्जन डॉ. अमिताभ सिन्हा ने कही। उन्होंने बताया कि मौसम में उतार – चढ़ाव होने और खासकर बरसात के दिनों में डेंगू और चिकनगुनिया का संक्रमण फैलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसको लेकर प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति बहुत ही सचेत और सावधान रहने की जरूरत है। इसके लिए रहन- सहन में सकारात्मक बदलाव के साथ- साथ साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके अलावा डेंगू और चिकनगुनिया का लक्षण महसूस होने पर तुरंत ही जाँच करवाने  की भी जरूरत है ताकि शुरुआती दिनों में ही बीमारी की पहचान होने के बाद आसानी से बीमारी को भी मात दी जा सके। इस बीमारी से बचाव के लिए जन – जागरूकता भी बेहद जरूरी है। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) प्रभात कुमार राजू, जिला के संचारी रोग पदाधिकारी (सीडीओ) राम नारायण चौधरी, एपिडिमियोलोजिस्ट डॉ शशि कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी, जिला लेखा पदाधिकारी (डीएएम), जिला अनुश्रवण और मूल्यांकन पदाधिकारी डीएम & ई  सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे ।
संक्रमित एडिस मच्छर के काटने से होती  है डेंगू और चिकनगुनिया की बीमारी :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) प्रभात कुमार राजू ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया की  बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर के काटने से ही होती  है।  इसलिए यदि आप दिन में भी सोते हैं तो अनिवार्य रूप से मच्छरदानी लगाएं।  पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर के सभी कमरों को साफ- सुथरा एवं हवादार बनाएं रखें। इसके साथ ही अपने घरों के आसपास भी साफ -सफाई का विशेष ख्याल रखें ।  इसके लिए अपने पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को भी जागरूक करें। ताकि इस बीमारी के दायरे से सामुदायिक स्तर पर सभी लोग दूर रह सकें।  उन्होंने बताया कि इस बीमारी से बचाव के लिए रहन- सहन में बदलाव के साथ- साथ साफ- सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। दरअसल, डेंगू व चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षण बुखार से ही शुरू होते हैं। इसके कारण लोगों को बीमारी की पहचान करने में भी काफी परेशानी होती है। इसलिए तनिक भी बीमारी का लक्षण दिखते ही तुरंत जाँच कराने के लिए नजदीकी अस्पताल जाएं।
लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं इलाज, अस्पतालों में है समुचित इलाज की  व्यवस्था उपलब्ध :
जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया का लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत इसकी जाँच करानी चाहिए और जाँच रिपोर्ट के अनुसार ही इस बीमारी का इलाज करानी चाहिए।  ताकि उन्हें बाद में बड़ी से बड़ी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े और समय पर इलाज भी संभव हो सके।
उन्होंने बताया कि इन बीमारियों के बेहतर इलाज के लिए जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में समुचित इलाज की व्यवस्था उपलब्ध है। यह बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर के काटने से होता है, जो स्थिर साफ पानी में पनपता है। इसलिए घर सहित अपने आसपास में जलजमाव की स्थिति पैदा नहीं होने दें। जलजमाव होने पर उसे यथाशीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था कर हटायें और पानी जमा होने वाले जगहों पर किरासन तेल या कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करें।
– डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण :
उन्होंने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया के कई लक्षण हो सकते हैं जैसे :
– तेज बुखार, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द तथा ऑखों के पीछे दर्द होना ।
– त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान ।
– नाक, मसूढ़े से या उल्टी के साथ रक्तस्राव  होना ।
– काला पैखाना होना ।
– इससे बचाव के उपाय :
– दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें ।
– पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें अथवा मच्छर भगाने वाली दवा/क्रीम का उपयोग करें।
– टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी/फ्रिज के पानी निकासी ट्रे, पानी टंकी, गमला, फूलदान, घर के अंदर एवं आसपास पानी नहीं जमने दें ।
– जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें अथवा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें ।

राष्ट्रीय डेंगू दिवस : डेंगू से बचाव को लेकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को किया जाएगा जागरूक 

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-जिले में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर डेंगू की रोकथाम को लेकर की गई चर्चा
-दिन में भी सोते हैं तो अनिवार्य रूप से मच्छरदानी लगाएं-सिविल सर्जन
– डेंगू के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार पर की गई चर्चा
लखीसराय-
राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर मंगलवार को सिविल -सर्जन  कार्यालय में सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा  की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें डेंगू की रोकथाम पर विस्तृत चर्चा की गई और इसे सार्थक रूप देने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक करने का निर्णय लिया गया। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को डेंगू के कारण, लक्षण, उपचार एवं इससे बचाव के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने पर बल दिया गया। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा  ने कहा, डेंगू बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर काटने से होता है। इसलिए, अगर आप दिन में भी सोते हैं तो अनिवार्य रूप से मच्छरदानी लगाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर एवं सभी कमरे को साफ-सुथरा एवं हवादार बनाएं रखें। साथ ही आसपास भी साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। इसके लिए अपने पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को भी जागरूक करें। ताकि इस बीमारी के दायरे से सामुदायिक स्तर पर लोग दूर रहें। इस बीमारी से बचाव के लिए रहन-सहन में बदलाव के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की दरकार है। दरअसल, डेंगू के शुरुआती लक्षण बुखार से ही शुरू होते हैं। जिसके कारण लोगों को बीमारी की पहचान करने में भी काफी परेशानी होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाँच कराने की जरूरत है। इस अवसर पर अपर मुख्य -चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती , नरेंद्र कुमार जिला भीवीडी सलाहकार एवं भगवान दास वीडीसीओ अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद  थे . ।
– लक्षण दिखते ही तुरंत करायें इलाज, अस्पतालों में समुचित व्यवस्था है उपलब्ध :
सिविल सर्जन ने कहा कि डेंगू के लक्षण दिखते ही  तुरंत जाँच करानी चाहिए। जाँच रिपोर्ट के अनुसार इलाज करानी चाहिए। ताकि बड़ी परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़े और समय पर इलाज शुरू हो सके। इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। यह बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर के काटने से होता है, जो स्थिर साफ पानी में पनपता है। इसलिए, घर समेत आसपास में जलजमाव नहीं होने दें। जलजमाव होने पर उसे यथाशीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था कर हटायें और पानी जमा होने वाले जगहों पर किरासन तेल या कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें।
– डेंगू के लक्षण :
– तेज बुखार, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द तथा ऑखों के पीछे दर्द होना
– त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान
– नाक, मसूढ़े से या उल्टी के साथ रक्तस्राव  होना
– काला पैखाना होना
– बचाव के उपाय :
– दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
– पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें अथवा मच्छर भगाने वाली दवा/क्रीम का उपयोग करें।
– टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी/फ्रिज के पानी निकासी ट्रे, पानी टंकी, गमला, फूलदान, घर के अंदर एवं आसपास पानी नहीं जमने दें।
– जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें अथवा कीटनाशक दवा।

मोदी सरकार में करीब 2000 अप्रासंगिक कानूनों को किया गया है निरस्त

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में विधिक प्रारूपण (लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग) पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान जोर देते हुए कहा कि, ‘धारा 370 मूल संविधान के इंडेक्स में अस्थायी हिस्सा था, जिसका सीधा मतलब है कि यह एक अप्रासंगिक कानून था, जिसे निरस्त कर दिया गया।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देश पर 2015 से लेकर अब तक कई अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त कर कानून के क्षेत्र में ढ़ेर सारी पहल की गई है।
विधिक मसौदा (लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग) प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य संसद, राज्य विधानसभाओं, मंत्रालयों, वैधानिक निकायों व संबंधित अधिकारियों के बीच विधिक मसौदा के सिद्धांतों और प्रथाओं की स्पष्ट समझ पैदा करना है। कार्यक्रम का आयोजन संवैधानिक और संसदीय अध्ययन संस्थान द्वारा लोकतंत्र के लिए संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) के सहयोग से किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान शाह ने कहा कि ‘भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक और पारंपरिक व्यवस्था के साथ आधुनिक व्यवस्था को समाहित किए हुए लोकतंत्र की जननी भारत का संविधान भी अपने-आप में परिपूर्ण है। न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया – संविधान के चारों खंभे भी अपनी भूमिका का अच्छे से निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन तेजी से बदल रही दुनिया में समय के अनुकूल और आवश्यकताओं के अनुसार कानून में संशोधन या बदलाव बेहद जरूरी है।
देश के लोकतंत्र को समझने के लिए संविधान सभा की चर्चाओं के अध्ययन पर जोर देने वाले नेता अमित शाह का स्पष्ट मानना है कि सतत प्रक्रिया के तहत विधिक मसौदा तैयार करना एक कौशल है, जिसे सही भावना से कार्यान्वित किया जाना चाहिए। अदालती कार्यवाहियों और किसी भी बिंदु पर टकराव की स्थिति से बचने के लिए कानून का मसौदा स्पीष्टं व सरल होना चाहिए। राजनीतिक इच्छाशक्ति को कानून के साँचे में ढालने वाले विधिक को अनुवाद नहीं बल्कि भावानुवाद की सलाह देते हुए शाह ने कहा कि, ‘हर भाषा की अपनी मर्यादा होती है। इसलिए मसौदा जितना स्पष्ट होगा, कार्यान्वयन उतना ही सरल होगा।’

 

बहस और न्यायिक व्याख्या से बचने के लिए कानूनों के स्पष्ट मसौदे पर जोर देने वाले नेता हैं शाह

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देश के लोकतंत्र को समझने के लिए संविधान सभा की चर्चाओं के अध्ययन पर जोर देने वाले नेता अमित शाह का स्पष्ट मानना है कि सतत प्रक्रिया के तहत विधिक मसौदा तैयार करना एक कौशल है, जिसे सही भावना से कार्यान्वित किया जाना चाहिए। अदालती कार्यवाहियों और किसी भी बिंदु पर टकराव की स्थिति से बचने के लिए कानून का मसौदा स्पाष्टा व सरल होना चाहिए। राजनीतिक इच्छाशक्ति को कानून के साँचे में ढालने वाले विधिक को अनुवाद नहीं बल्कि भावानुवाद की सलाह देते हुए शाह ने कहा कि, ‘हर भाषा की अपनी मर्यादा होती है। इसलिए मसौदा जितना स्पष्ट होगा, कार्यान्वयन उतना ही सरल होगा।’
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में विधिक प्रारूपण (लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग) पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान जोर देते हुए कहा कि, ‘धारा 370 मूल संविधान के इंडेक्स में अस्थायी हिस्सा था, जिसका सीधा मतलब है कि यह एक अप्रासंगिक कानून था, जिसे निरस्त कर दिया गया।’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देश पर 2015 से लेकर अब तक कई अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त कर कानून के क्षेत्र में ढ़ेर सारी पहल की गई है।
विधिक मसौदा (लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग) प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य संसद, राज्य विधानसभाओं, मंत्रालयों, वैधानिक निकायों व संबंधित अधिकारियों के बीच विधिक मसौदा के सिद्धांतों और प्रथाओं की स्पष्ट समझ पैदा करना है। कार्यक्रम का आयोजन संवैधानिक और संसदीय अध्ययन संस्थान द्वारा लोकतंत्र के लिए संसदीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) के सहयोग से किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान शाह ने कहा कि ‘भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक और पारंपरिक व्यवस्था के साथ आधुनिक व्यवस्था को समाहित किए हुए लोकतंत्र की जननी भारत का संविधान भी अपने-आप में परिपूर्ण है। न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया – संविधान के चारों खंभे भी अपनी भूमिका का अच्छे से निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन तेजी से बदल रही दुनिया में समय के अनुकूल और आवश्यकताओं के अनुसार कानून में संशोधन या बदलाव बेहद जरूरी है।

पोषण ट्रैकर एप : जिले की महिला पर्यवेक्षिका और प्रखंड समन्वयक को दिया गया प्रशिक्षण

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– पोषण ट्रैकर एप से जिला के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी में भी मिलेगी मदद
– एप से कुपोषण से संबंधित मामलों को सूचीबद्ध करना होगा आसान

खगड़िया-

राज्य सरकार द्वारा आईसीडीएस के माध्यम से संचालित किए जा रहे सभी कार्यक्रमों की शत-प्रतिशत निगरानी के साथ ही मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया को अपग्रेड किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने पोषण ट्रैकर के नाम से एक ऑनलाइन एप विकसित किया है। इसके माध्यम से जिला के सभी आँगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और मूल्यांकन में आसानी होगी। जिसे गति देने के लिए शनिवार को जिला परियोजना कार्यालय में आईसीडीएस डीपीओ सुनीता कुमारी के नेतृत्व में जिला समन्वयक अंबुज कुमार एवं परियोजना सहायक चंदन कुमार द्वारा जिले की एल एस (महिला पर्यवेक्षिका) एवं प्रखंड समन्वयक को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें एप का संचालन समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी विस्तारपूर्वक दी गई।

– आंगनबाड़ी केंद्रों की महत्ता को देखते हुए इसे पूरी तरीके से हाईटेक करने की तैयारी :
आईसीडीएस डीपीओ सुनीता कुमारी ने बताया, आँगनबाड़ी केंद्रों की महत्ता को देखते हुए अब इसे पूरी तरीके से हाईटेक करने की तैयारी की जा रही है। ताकि आईसीडीएस के स्तर पर दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता व संचालन को और अधिक सुविधाजनक और सरल बनाया जा सके। इसके लिए राज्य सरकार ने पोषण ट्रैकर एप की शुरुआत की है। इस एप के सफल संचालन के बारे में प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागी अपने – अपने प्रखंड में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर प्रखंड की सेविका समेत अन्य कर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे। जिला के सभी आँगनबाड़ी सेविकाओं को पहले ही स्मार्ट फोन उपलब्ध कराया जा चुका है। प्रशिक्षकों के द्वारा सेविकाओं के स्मार्ट फोन में पोषण ट्रैकर एप डाऊनलोड करने और उसका उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी।

– एप के माध्यम से कुपोषण से संबंधित मामलों को सूचीबद्ध करना होगा आसान :
जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, एप के माध्यम से कुपोषण से संबंधित मामलों को सूचीबद्ध करने के साथ ही आँगनबाड़ी क्षेत्रों में गर्भवती-धातृ महिलाओं, शून्य से तीन वर्ष के बच्चे, 3 से 6 वर्ष के बच्चे, किशोर-किशोरियों के साथ ही आंगनबाड़ी पोषक क्षेत्र के अनाथ बच्चों व उन सभी के स्वास्थ्य की जानकारी नियमित रूप से सेविकाओं के द्वारा अपलोड किया जाएगा। इससे विभाग के द्वारा कुपोषण से संबंधित मामलों को सूचीबद्ध करने के साथ ही नियमित निगरानी भी आसान हो जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, सेविकाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता को लेकर विभाग ने सभी पंचायत में निगरानी का जिम्मा उस प्रखंड की सीडीपीओ को दिया है। ताकि वो प्रशिक्षण स्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन कर सके कि सेविकाओं ने अपने स्मार्ट फोन में एप को डाउनलोड किया या नहीं। एप के प्रशिक्षण के बाद स्थानीय स्तर पर सेविकाओं के द्वारा दी जा रही सभी पोषण गतिविधियों की जानकारी पोषण ट्रैकर एप पर नियमित रूप से अपलोड की जाएगी। इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। एप के द्वारा सेविकाएं क्षेत्र में उपस्थित नवजात शिशुओं, गर्भवती-धातृ महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य की जानकारी , टीएचआर का वितरण, बच्चों के ग्रोथ की मॉनिटरिंग आदि तमाम जानकारी दर्ज करेंगी।