आज वैल्यू वेस्ड एजुकेशन की जरूरत है- जयवीर शेरगिल, प्रवक्ता, भाजपा

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-आज एजुकेशन को ग्रामीण भारत से जोड़ने की जरूरत है- राजमणि पटेल, सासंद

-एकेडमिशियन को जिम्मेदारी लेनी होगी- अनुपम हाजरा, नेशनल सेक्रेटरी, भाजपा

-आईसीसीआई का पांचवां नेशनल एजुकेशन एक्सलेंस कॉन्कलेव का भव्य आयोजन में एजुकेशनिस्ट ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया

नईदिल्ली-

 

आज वैल्यू वेस्ड एजुकेशन की जरूरत है। लेकिन इससे ज्यादा एजुकेशन में मूल्यों को भी जोड़ने की आवश्यकता है। यह बात इंटीग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए भाजपा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा।

इंटीग्रेटड चैबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, आईसीसीआई का पांचवां नेशनल एजुकेशन एक्सलेंस कॉन्कलेव का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मल्टीपरपस हॉल में किया गया। इस एजुकेशन समिट में देश भर के शिक्षा के तमाम दिग्गजों ने संबोधित किया। इंटिग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) द्वारा आयोजन इस नेशनल समिट में अति मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल, नेशनल सेक्रेटरी अनूपम हजारा, नेशनल सेक्रेटरी अलका गुजर, सांसद राजमणि पटेल ने संबोधित किया।

इस मौके पर भाजपा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि आज देश में स्ट्रक्चर बदलने की जरूरत है। केवल बजट बढ़ाने से कार्य नहीं चलेगा। आज देश में वैल्यू वेस्ड एजुकेशन की जरूरत है। जिसके लिए एकेडमिशियन को कार्य करना होगा।

जयवीर शेरगिल ने एजुकेशन दस-बीस वर्ष का प्लान नहीं है। जीवन भर एजुकेशन खाका खिंचने की जरूरत है।

इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद राजमणि पटेल ने कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए कहा कि आज एजुकेशन को ग्रामीण भारत से जोड़ने की जरूरत है। एजुकेशन में मूलभूत कमियां हैं जिसकी सुधारकरने की जरूरत है। जिसके लिए सरकार को भी कदम उठाने की जरूरत है।

आईसीसीआई के एजुकेशन कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी डॉ अनुपम हाजरा ने कहा कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर से एजुकेशन को नहीं सुधारा जा सकता। इसके लिए आज सबसे ज्यादा एकेडमिशियनों को जिम्मेदारी लेनी होगी। तभी एजुकेशन में तेजी से सुधार होगा। केंद्र सरकार ने नए एजुकेशन पॉलिसी में कई सुधार किए हैं जिसे लागू किया जा रहा है।

कान्कलेव को संबोधित करते हुए नेशनल सेक्रेटरी अलका गुर्जर ने कहा कि आज पीएम नरेंद्र मोदी ने नई एजुकेशन पॉलिसी लाकर देश में जड़ो से जोड़ने के लिए कार्यक्रम किया है। जिसकी आज चर्चा भी है।

इस मौके पर नेशनल वीमेंस कमीशन की सदस्य ममता कुमारी ने कहा कि आज देश के एजुकेशन में माता-पिता के मूल्यों को भी जोड़ने की जरूरत है।

 

आईसीसीआई के इस कार्यक्रम में चार सत्र में एकेडमिशियनों ने संबोधित किया। मुख्य वक्ता के रूप में एआईसीटीई की एडवायजर डॉ ममता रानी अग्रवाल ने ने एजुकेशन संस्थाओं के मूलभूत सुधार पर खास जोर दिया। खासतौर पर एजुकेशन के इंटिग्रेशन की बात कही। उद्घाटन सत्र में

एआईसीटीई के चीफ कॉर्डिनेटर ऑफिसर डॉ बुद्धा चंद्रशेखर ने कहा कि आज नई एजुकेशन पॉलिसी में कई बदलाव हुए हैं। जिसमें प्रैक्टिकल पर ज्यादा जोर है जिससे छात्र अब स्वरोजगार की ओर बढ़ने लगे हैं। आज स्किल पर कार्य करने की जरूरत है जो आपको इस नई एजुकेशन पॉलिसी में साफ दिखेगा।

 

एएसएम ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के चेयरमैन डॉ संदीप पचपांडे, हॉस्पिटिलीटी स्कील काउंसिल व टूरिज्म के सीईओ राजन बहादुर,वाटर मैनेजमेंट व प्लम्बींग स्कील काउंसिल के सीईओ योगेशन कपूर,डोमेस्टिक वर्कर्स सेक्टर स्कील काउंसिल की सीईओ मोना गुप्ता, राऊरकेला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के सेक्रेटरी आर्य पटनायक, प्रेस्टिज ग्रुप के प्रेसिडेंट डेविस जैन,मेधावी स्कील यूनिवर्सिटी के कुलदीप शर्मा, निर्वाण यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरविंद कुमार अग्रवाल,इंदिरा गांधी टेक्नोलोजी एंड मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ मार्केंण्डेय राय,आटोमोटिव स्कील डेवलपमेंट काउंसिल के सीईओ अरविंदम लाहिरी, सुंशात फार्मा के प्रीसिंपल ज्योति सिन्हा, यंग चेंजर आदित्य पचपांडे ने संबोधित किया।

 

आईसीसीआई के इस खास कॉन्कलेव में देश भर के एजुकेशन संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया। समापन सत्र को राउर केला राऊरकेला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के सेक्रेटरी आर्य पटनायक ने संबोधित किया। एजुकेशन एक्सलेंस कानक्लेव में सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

गौरतलब है कि आईसीसीआई देश के बड़े आर्थिक थिंक टैंक है जो सभी सेक्टरों के उद्यमियों को एक मंच देता है।

एमएमडीपी को ले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण

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– सदर प्रखंड खगड़िया अंतर्गत रहने वाले फाइलेरिया के रोगियों के बीच किया गया एमएमडीपी किट का वितरण
– कार्यशाला में जिला के विभिन्न प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, बीएचएम, वीबीडीएस सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और डेवलपमेंट पार्टनर के प्रतिनिधि थे मौजूद

खगड़िया-

रुग्णता प्रबंधन और विकलांगता रोकथाम, मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) को ले शुक्रवार को सदर पीएचसी के सभागार में जिला के सभी प्रखंडों से आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया । प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉविजय कुमार ने किया । एमएमडीपी को ले प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला के सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, बीएचएम, वीबीडीएस के अलावा जिला के वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. शहनवाज आलम, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और डेवलपमेंट पार्टनर के रूप में केयर इंडिया, सीफार और पिरामल के प्रतिनिधि मौजूद थे।
प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के दो भाग हैं, 1. मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम, इसमें सभी लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा खिलाई जाती है। इस दौरान सिर्फ दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवा नहीं खिलाई जाती है।
2 मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी), इसमें फाइलेरिया के रोगियों को एमएमडीपी क्लिनिक और एमएमडीपी किट के माध्यम से पर्सनल हाइजीन, स्किन एंड वूंड केयर, एक्सरसाइज, इलिवेशन और सूटेबल जूते पहनने के बारे में जानकारी दी जाती है ताकि फाइलेरिया के रोगी काफी हद तक अपनी परेशानियों से छुटकारा पा सकें ।

सदर प्रखंड खगड़िया अंतर्गत रहने वाले फाइलेरिया के रोगियों के बीच किया गया एमएमडीपी किट का वितरण : जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी ने बताया कि शुक्रवार को एमएमडीपी प्रशिक्षण के दौरान सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न गांवों में रहने वाले फाइलेरिया के रोगियों के बीच एमएमडीपी किट का वितरण किया गया । फाइलेरिया के रोगियों के बीच एमएमडीपी किट में प्लास्टिक का टब, मग, तौलिया, साबुन, ग्ल्ब्स, एंटी सेप्टिक, एंटी फंगल और एंटी बैक्टेरियल क्रीम वितरित किया गया। उन्होंने बताया कि सदानंदपुर के कठौरा गांव के रहने वाले संजय कुमार,उम्र 49 साल और रोहित साव की 40 वर्षीय पत्नी सुनीता देवी, हरदासचक खगड़िया के रहने वाले 40 वर्षीय नवीन कुमार वर्मा, खगड़िया सदर के भदास गांव के रहने वाले गणेश शाह की 60 वर्षीय पत्नी मीना देवी, 45 वर्षीय रेणु कुमारी और पंचवटी चौक भदास के प्रकाश साह की 45 वर्षीय पत्नी अनीता देवी को किट वितरण किया गया।

एमएमडीपी किट मिलने से साफ- सफाई में मिलेगी काफी सहूलियत :
एमएमडीपी किट प्राप्त करने वाली मीना देवी, रेणु कुमारी और अनीता देवी ने बताया कि हमलोग पहले से अपने स्तर से साबुन और पानी से पैर की सफाई करती थी। इसके अलावा नियमित रूप से एक्सरसाइज भी करती थी। लेकिन आज प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिस प्रकार से साफ – सफाई और नियमित व्यायाम के लिए बताया गया है उसका नियमित अभ्यास करूंगी। किट मिलने के बाद अब साफ सफाई में काफी सहूलियत मिलेगी। इस अवसर पर सीफार के राज्य प्रतिनिधि अरूणेंदु झा भी मौजूद थे ।

उप मुख्यमंत्री 12 मई को करेंगे टीबी मुक्त पंचायत पहल का शुभारंभ

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– फलोरेन्स नाइटिंगल दिवस के अवसर पर चयनित नर्सों को किया जाएगा सम्मानित
– एनटीईपी के स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण मॉड्यूल (द्वितीय संस्करण) का भी होगा विमोचन
पटना-

सरकार वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। टीबी से निजात पाने के लिए पंचायती राज संस्थानों की सहभागिता एवं क्षमतावर्द्धन आवश्यक है। इस क्रम में राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम अन्तर्गत सूबे में टीबी मुक्त पंचायत अभियान को गति देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए 12 मई को ऊर्जा ऑडिटोरियम, न्यू पुनाईचक, पटना में राज्य के उप मुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव टीबी मुक्त पंचायत पहल का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा के लिए पांच जिलों- समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सिवान, सारण एवं पूर्णियां को द वर्ल्ड टीवी सम्मिट (वाराणसी) में प्राप्त पदक तथा टीबी इंसिडेन्स रेट में परिलक्षित कर्मी हेतु निर्गत प्रमाण-पत्र भी वितरित करेंगे।
इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव सह कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों को पत्र निर्गत किया है। जिसमें उन्होंने कार्यक्रम से संबंधित जानकारी साझा की है। पत्र में उन्होंने बताया है कि इस अवसर पर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण मॉड्यूल (द्वितीय संस्करण) का विमोचन, फलोरेन्स नाइटिंगल दिवस के अवसर पर चयनित नर्सों, राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम अन्तर्गत 5 संकेतकों पर उच्चतम उपलब्धि हासिल करने वाले प्रथम तीन जिलों, गैर संचारी रोग नियंत्रण तथा बिहार नेत्र ज्योति अभियान में उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने पाले संस्थानों के प्रमुख चिकित्सकों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र एवं मोमेन्टो द्वारा सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, कार्यपालक निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जन, सीडीओ, डीपीएम तथा तीन-तीन कुशल सीएचओ को बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित भी किया है।

अहमदनगर के सीए शंकर घनशामदास अंदानी को ‘ब्रांड ऑफ महाराष्ट्र जीवन गौरव अवार्ड’ से सम्मानित किया

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अहमदनगर:

 कोल्हापुर स्थित धम्म चैरिटेबल ट्रस्ट सेक्युलर प्रोग्रेसिव फ्रंट संस्था द्वारा ब्राण्ड ऑफ महाराष्ट्र जीवन गौरव अवार्ड हर साल ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जिसने स्वयं को सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित किया हो और धम्म विचार के प्रचार-प्रसार में निःस्वार्थ योगदान दिया हो।

अहमदनगर के सीए शंकर घनशामदास अंदानी को इस वर्ष का प्रतिष्ठित ब्रांड ऑफ महाराष्ट्र जीवन गौरव पुरस्कार प्रदान किया गया। इस समारोह में सीए शंकर अंदानी ने जरूरतमंद और अनाथ बच्चों की पढ़ाई के लिए लाखों रुपए की किताबें दान कीं। कोल्हापुर के राजश्री शाहू स्मारक भवन में धाम चिंतक पूर्व खासदार जोगेंद्र कवाडे, मराठी फिल्म अभिनेता मिलिंद शिंदे, वरिष्ठ विचारक सुरेश वाघमारे, प्रो. किसनराव कुरहाडे, बच्चाराम कांबले, करुणा विमल, अनिल महमाने की उपस्थिति में सीए शंकर अंदानी को पुरस्कार से सम्मानित किया गया। भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के अवसर पर एक दिवसीय सत्यशोधक धम्म परिषद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर धम्म बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

पुरस्कार के रूप में प्रमाण-पत्र, दस हजार रुपये नकद, पंद्रह हजार रुपये मूल्य की साहित्यिक पुस्तकें प्रदान की गयीं । इस कार्यक्रम में सीए शंकर अंदानी की किताब भी प्रकाशित हुई। सीए शंकर अंदानी ने जरूरतमंद व अनाथ बच्चों की शिक्षा के लिए ग्रंथ तुला से लगभग एक लाख रुपए की विभिन्न पुस्तकें भेंट कीं। पुरस्कार की राशि फिल्म क्लब सामाजिक संस्था के सामाजिक कार्यों को दी गई।

उपस्थित अतिथियों ने सीए शंकर अंदानी के सामाजिक कार्यों और उदारता की सराहना की और कहा कि चंद लोगों ने निःस्वार्थ योगदान देकर समाज को बचाया। उन्होंने बताया कि अंडानी का व्यक्तित्व समाज के लिए रोल मॉडल और प्रेरणा बनेगा।

सीए शंकर अंदानी कई सालों से सामाजिक कार्य कर रहे हैं। वह पिछले पंद्रह वर्षों से लगभग 364 मंदिरों, धार्मिक विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं, गिरजाघरों, मस्जिदों आदि सामाजिक संस्थाओं का ऑडिट कार्य कर रहे हैं। वह विभिन्न सामाजिक संगठनों का मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। वह वित्तीय रिकॉर्ड को ठीक से बनाए रखना और सरकारी कार्यालयों में दस्तावेजों के काम को करने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

अंदानी एक सीए हैं और पिछले पंद्रह वर्षों से श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट (शिर्डी) और अहमदनगर नगर निगम के कर सलाहकार हैं। वह कई सरकारों और बैंकों के लिए एक लेखा परीक्षक और कर सलाहकार के रूप में भी काम कर रहे हैं। उन्हें पहले संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय से सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार, उत्कृष्टता का पदक भी मिला है। साथ ही इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स समेत कुल 41 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज है। उन्हें डेढ़ हजार से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

सांसद सदाशिव लोखंडे, विधायक अरुण जगताप, विधायक संग्राम जगताप, विधायक निलेश लंका, विधायक रोहित पवार, पूर्व विधायक विजय औती, मेयर रोहिणी शेंडगे, नगर आयुक्त पंकज जावले, पूर्व मेयर भगवान फूलसाउंडर, बाबासाहेब वाकले, शिवसेना के सुरेखा कदम. नगर अध्यक्ष संभाजी कदम, हमाल पंचायत अध्यक्ष अविनाश घुले, पार्षद बालासाहेब बोराटे, दत्ता कावरे, परेश लोखंडे, संजय चोपड़ा, अहमदनगर सिंधी समाज के अध्यक्ष महेश मध्यन आदि ने सीए शंकर अंदानी को बधाई दी।

रवींद्रनाथ टैगोर के नक्शे-कदम पर चलने वाले नेता हैं अमित शाह

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विश्वगुरु रवींद्रनाथ की विचारधाराओं को मानने वाले तो बहुत हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही सही मायने में उनका पालन करते हैं। रवींद्रनाथ टैगोर के सच्चे शिष्य और शिक्षा तथा राजनीति सहित विभिन्न पहलुओं पर गुरुदेव के दर्शन में दृढ़ विश्वास रखने वाले गृह मंत्री अमित शाह रवींद्रनाथ को अपने मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं।

रवींद्रनाथ के अनन्य पाठक, शाह विशेष रूप से राजनीति, सामाजिक जीवन, कला और देशभक्ति के लिए गुरुदेव के मुक्त विचारों से प्रभावित हैं, जो वर्तमान में पाए जाने वाले संकीर्णता के विपरीत है। गुरुदेव के विचार शाह का मार्गदर्शन करते हैं और उन्हें उनके विचारों से प्रेरणा मिलती है।

महान कवि और दार्शनिक रवींद्रनाथ की रचनाओं व उनके विचारों के लिए शाह का सम्मान इतना अधिक है कि उन्होंने पाया कि ‘महामानव’ शब्द महान व्यक्तित्व का वर्णन करने के लिए पर्याप्त नहीं था।

रवींद्रनाथ के विचारों में मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने पर जोर दिया गया था, यह शाह ही थे जिन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को टैगोर के उस दर्शन पर आधारित किया जाना चाहिए, जो अनिवार्य रूप से एक बच्चे की सोचने, शोध करने और अपने आंतरिक स्व का पता लगाने की क्षमता को प्रज्वलित करने में मदद करता है।

शाह ने कहा, ‘गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने हमेशा मातृभाषा में शिक्षा पर बहुत जोर दिया। एक बच्चे की सोचने और अनुसंधान करने की क्षमता गंभीर रूप से प्रतिबंधित हो जाती है यदि वह अपनी मातृभाषा में बात नहीं कर सकता/सकती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में बनाई गई नई शिक्षा नीति में गुरुदेव के विचारों से प्रेरणा ली गई है और मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया गया है।’

गुरुदेव का मानना था कि विदेशी शिक्षा और विश्वविद्यालयों का महिमामंडन करना हमारी शिक्षा प्रणाली का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने शिक्षा के इस नए विचार को रटने वाली शिक्षा के विपरीत प्रस्तुत किया। ये नई शिक्षा नीति में प्रतिध्वनित होते हैं।

शांतिनिकेतन में टैगोर ने प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षण तकनीकों के साथ मिलाने का काम किया। टैगोर ने मातृभाषा में शिक्षा को सर्वाधिक प्रोत्साहन दिया। वह जानते थे कि कोई भी अपनी मातृभाषा के उपयोग के बिना अपने भीतर की खोज नहीं कर सकता। मातृभाषा में शिक्षा पर शाह का जोर टैगोर की शिक्षा नीति पर आधारित है। शाह यह जानकर आश्चर्यचकित हैं कि बंगाल के एक जमींदार परिवार के पुत्र होने के बावजूद, रवींद्रनाथ आम लोगों के विचारों को इतनी खूबसूरती से कैसे व्यक्त कर सकते हैं। शाह का मानना है कि रवींद्रनाथ सही मायने में एक वैश्विक व्यक्तित्व थे, जिन्होंने न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर विभिन्न विषयों और कला में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

 

उप मुख्यमंत्री 12 मई को करेंगे टीबी मुक्त पंचायत पहल का शुभारंभ

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– फलोरेन्स नाइटिंगल दिवस के अवसर पर चयनित नर्सों को किया जाएगा सम्मानित
– एनटीईपी के स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण मॉड्यूल (द्वितीय संस्करण) का भी होगा विमोचन
पटना-
सरकार वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। टीबी से निजात पाने के लिए पंचायती राज संस्थानों की सहभागिता एवं क्षमतावर्द्धन आवश्यक है। इस क्रम में राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम अन्तर्गत सूबे में टीबी मुक्त पंचायत अभियान को गति देने का काम किया जा रहा है। इसके लिए 12 मई को ऊर्जा ऑडिटोरियम, न्यू पुनाईचक, पटना में राज्य के उप मुख्यमंत्री सह स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव टीबी मुक्त पंचायत पहल का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा के लिए पांच जिलों- समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सिवान, सारण एवं पूर्णियां को द वर्ल्ड टीवी सम्मिट (वाराणसी) में प्राप्त पदक तथा टीबी इंसिडेन्स रेट में परिलक्षित कर्मी हेतु निर्गत प्रमाण-पत्र भी वितरित करेंगे।
इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव सह कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों को पत्र निर्गत किया है। जिसमें उन्होंने कार्यक्रम से संबंधित जानकारी साझा की है। पत्र में उन्होंने बताया है कि इस अवसर पर राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रशिक्षण मॉड्यूल (द्वितीय संस्करण) का विमोचन, फलोरेन्स नाइटिंगल दिवस के अवसर पर चयनित नर्सों, राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम अन्तर्गत 5 संकेतकों पर उच्चतम उपलब्धि हासिल करने वाले प्रथम तीन जिलों, गैर संचारी रोग नियंत्रण तथा बिहार नेत्र ज्योति अभियान में उत्कृष्ट सेवा प्रदान करने पाले संस्थानों के प्रमुख चिकित्सकों एवं कर्मियों को प्रशस्ति पत्र एवं मोमेन्टो द्वारा सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, कार्यपालक निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जन, सीडीओ, डीपीएम तथा तीन-तीन कुशल सीएचओ को बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित भी किया है।

सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के सफल संचालन को ले अधिकारियों का किया गया ऑनलाइन उन्मुखीकरण 

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– मुंगेर जिला में 16 से 30 जून तक चलेगा सघन दस्त नियंत्रण अभियान
मुंगेर-
  सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के सफल संचालन को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा गुरुवार को स्वास्थ्य शिक्षा सहित अन्य संबद्ध विभाग के अधिकारियों का ऑनलाइन उन्मुखीकरण किया गया। इस आशय की  जानकारी जिला के सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने दी। उन्होंने बताया कि सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का सफल आयोजन विभिन्न विभागों के समन्वय और सहभागिता से किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग की  महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह के द्वारा जारी पत्र के आलोक में आगामी जून  महीने में सघन दस्त पखवाड़ा का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है।
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि मुंगेर  जिला में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दूसरे चरण में 16  से 30 जून तक अभियान चलेगा । इस दौरान आशा कार्यकर्ता पांच साल तक के बच्चों वाले घरों में जाकर ओआरएस शैशे का निः शुल्क वितरण करेंगी  । इसके अलावा दस्त से ग्रसित बच्चों के समुचित उपचार के लिए जिंक टैबलेट (10 एमजी/20 एमजी) का भी वितरण करेंगी ।
उन्होंने बताया कि  जून के महीने में राज्य भर में सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के सफल आयोजन को लेकर गुरुवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य संबद्ध विभाग के अधिकारियों का ऑनलाइन उन्मुखीकरण किया गया। उन्होंने बताया इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई एवम प्रमंडलीय आशा समन्वयक, (आईडीसीएफ) के नोडल अधिकारी सह जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक ( डीपीएम), जिला अनुश्रवण और मूल्यांकन पदाधिकारी और जिला सामुदायिक उत्प्रेरक डीसीएम के रूप में मैं उपस्थित था ।

राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम- जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थान में उपलब्ध है कुष्ठ का इलाज 

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– कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम में होती है आशा की महत्वपूर्ण भूमिका
-कुष्ठ रोग अन्य बीमारी से है कम संक्रामक
लखीसराय-
कुष्ठ रोग का नाम सुनते ही में जेहन में एक विकृत सा आकार उभर कर सामने आता है।   ये रोग बहुत ही कम संक्रामक होता है जो मायकोबैक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु के कारण होता। .यह मुख्य रूप से त्वचा एवं तंत्रिकाओं को  प्रभावित करता है।  . यह रोग धीरे -धीरे बढ़ता  और लगभग तीन वर्ष के बाद संक्रमण का लक्षण प्रत्यक्ष  रूप से दिखने लगता है।  . कुष्ठ रोग किसी भी आयु के स्त्री ,पुरुष या फिर बच्चों को हो सकता है।  .
राष्ट्रीय कुष्ठ रोग नियंत्रण कार्यक्रम वर्ष 1955 में ही बनाया गया था।  वर्ष 1983  में इस कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय  कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम कर दिया गया।  इस कार्यक्रम का मुख्य उदेश्य कुष्ठ रोग के आरंभिक लक्षण को चिह्नित  करने के साथ जन -जागरूकता बढ़ाना और इस रोग के बारे में भ्रम को दूर करना।  .
जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक  कुमार भारती ने बताया कि  कुष्ठ रोग दो प्रकार का होता है। जिसे एमबी और पीबी कहा जाता है।  , इस  रोग का  बहुऔषधीय  इलाज  होता है।  .एमबी कुष्ठ के इलाज  के लिए  एमबी एमडीटी 12 महीने तक खाना होता है।  . 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एमबी चाइल्ड एमडीटी  और 14 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए  एमबी एडल्ट एमडीटी दी जाती है।  साथ ही पहली खुराक के रूप में
[सुपरवाइजड  डोज़ } दिया जाता है।  . उसके बाद  दिए दिशा -निर्देश के अनुसार खाना  होता है। उन्होंने  बताया कि  जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थान में कुष्ठ का इलाज . उपलब्ध है।
पीबी कुष्ठ के लिए पीबी एमडीटी  जो 6 महीने की अवधि तक खाना होता है।  इसमें भी 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए पीबी चाइल्ड एमडीटी  और 14 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए  पीबी एडल्ट एमडीटी दी जाती है । साथ ही पहली खुराक के रूप में , [सुपरवाइजड  डोज़ } दिया जाता है।  . उसके बाद  दिए दिशा -निर्देश  के अनुसार  खाना होता है।  .
राष्ट्रीय  कुष्ठ उन्मूलन  कार्यक्रम में आशा की भूमिका :
• अपने क्षेत्र के सभी लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक करना एवं इसके लक्षण  के विषय में बताना .
• अपने नियमित कार्यों के दौरान या किसी विशेष अभियानों के समय `अपने क्षेत्र में कुष्ठ रोग के लक्षण वाले लोगों की   पहचान करना .
• अगर किसी  व्यक्ति  या बच्चे में इस रोग के लक्षण  दिखने पर पास के सरकारी स्वास्थ्य संस्थान  में रोग की पुष्टि हेतु , रोगी को अस्पताल तक  ले जाना।  .
• जिस रोगी का इलाज  हो रहा है उसे दवाई दिलवाने में सहायता  करना व  साथ ही दवा खाने के लिए प्रेरित करना । .
• कुष्ठ रोग की  जटिलताओं के बारे में अवगत करना एवं उसकी  देखभाल के लिए उचित सलाह देना।  .
कुष्ठ रोग के लक्षण को इस प्रकार पहचानें :
• त्वचा के रंग से हल्के रंग के लाल अथवा तांबे के रंग के दाग .
• त्वचा पर लाल रंग के उभरे हुए ,सूजन  वाले धब्बे .
• बाँह , कोहनी ,हाथ ,घुटने एवं पंजे की  तंत्रिकाओं में सूजन  ,मोटापन ,झनझनाहट के साथ दर्द होना .
• हथेली या पैर के तलवे में सुन्नता .गर्म ,ठंडा ,दर्द या दबाव  का आभास  नहीं होना .
• आँख में लालपन ,पानी आना
• दृष्टि  धुंधला  होना ,पलक बंद न होना
• नाक की हड्डी गलने से नाक का दब जाना।

मिथिला स्टार्टअप तंत्र की नई शुरुआत करेंगे उद्योग मंत्री श्री समीर महासेठ

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दरभंगा से युवा उद्यमियों को मिल रहा है नया मंच,  उद्योग मंत्री श्री समीर महासेठ देंगे मंत्र
मिथिला के पहले स्टार्टअaप इंक्युबेटर से दरभंगा को मिलेगी नई पहचान
दरभंगा। कभी द्वार बंग कहा जाने वाले दरभंगा अब विकास के लिए नए रास्ते तैयार कर रहा है। युवा उद्यमियों को स्टार्टअप के क्षेत्र में नई संभावनाओं और कार्ययोजनाओं के बारे में एक नया मंच मिल रहा है। इस मंच को संबोधित करते हुए बिहार सरकार के उद्योग मंत्री श्री समीर महासेठ नया मंत्र देंगे। उनके साथ ही तमाम क्षेत्र के विशेषज्ञ यह बताने के लिए लोगों के बीच हैं कि आखिर किस रास्ते पर चलकर अपने लक्ष्य को हासिल किया जाए। मिथिला के लिए यह विशेष अवसर है। लोगों को पटना के साथ ही दरंभगा में समेकित सूचना और अवसर की उपलब्धता होगी।
दरअसल, हाल के वर्षों में भारत में स्टार्टअप की लहर देखी जा रही है। आलम यह है कि टीवी शोज के बाद स्टार्टअप हर घर में चर्चा का नया विषय है। रोजगार सृजन के प्रभाव, धन सृजन क्षमता और युवाओं को नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी देने वालों में बदलने की संस्कृति में बदलाव को देखते हुए सरकारें भी स्टार्टअप्स का समर्थन कर रही हैं। उसी कड़ी में बिहार सरकार के उद्योग मंत्री श्री समीर महासेठ दरभंगा आ रहे हैं।
आयोजकों की ओर से कहा जा रहा है कि स्टार्टअप्स को शुरुआती दौर में काफी पोषण की जरूरत होती है। उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, कम लागत वाली ऑफिस स्पेस, मीटिंग और कॉन्फ्रेंस रूम, सलाहकारों, विशेषज्ञों और सेवा प्रदाताओं जैसे वकीलों, सीए, सुविधा और धन संकलन  की आवश्यकता है। इसके लिए बिहार सरकार ने राज्य भर में कई स्टार्टअप इनक्यूबेटर बनाए हैं। हालांकि, मिथिला क्षेत्र में स्टार्टअप इनक्यूबेटर नहीं हैं और मिथिला स्टार्टअप को आवश्यक सेवाएं प्राप्त करने के लिए पटना जाना पड़ता है।
इस अंतर को पहचानते हुए, मिथिला एंजल नेटवर्क  (एमएएन ) एक प्रमुख गैर-लाभकारी संस्था, सेंटर फॉर स्टडीज ऑफ ट्रेडिशन एंड सिस्टम्स (सीएसटीएस) के साथ मिलकर, मिथिला स्टार्टअप तंत्र को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी में मिथिला का पहला स्टार्टअप इनक्यूबेटर बनाने की पहल शुरू कर रहा है। मिथिला ऐन्जल नेटवर्क एमएएन के श्री अरविंद झा ने कहा कि अपने 700$ सदस्यों की विशेषज्ञता दूरस्थ सलाह, परामर्श, इन-पर्सन सत्रों के लिए लाएगा जब इसके सदस्य अपने मूल स्थान पर जाएंगे और मिथिला में स्टार्टअप के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण और मजबूती से करेंगे।
मिथिला ऐन्जल नेटवर्क, (एमएएन) सीएसटीएस के साथ मिलकर 10 मई, 2023 को 4-7 बजे शाम  राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा में एक कार्यशाला/थिंक टैंक/चर्चा का आयोजन कर रहा है। मिथिला तकनीकी शिक्षा के दिग्गज बड़ी संख्या में स्थानीय स्टार्टअप के साथ एमएएन और सीएसटीएस टीम के साथ चर्चा करेंगे। बैठक को बिहार सरकार के माननीय उद्योग मंत्री श्री समीर महासेठ,  डॉ० (प्रो०) समरेन्द्र प्रताप सिंह पूर्व कुलपति, ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी सह आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी,  प्रो० डॉली सिन्हा उप कुलपति, ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी प्रोफ बी.एस.झा निदेशक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, प्रो. संदीप तिवारी प्राचार्य, दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज,बिहार सरकार प्रो मनोज कुमार,वरिष्ठ वैज्ञानिक मखाना अनुसंधान केंद्र,दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण विद्वानों  द्वारा आशीर्वाद दिया जा रहा है।
बैठक में दरभंगा में एक स्टार्टअप इनक्यूबेटर के निर्माण के लिए एक खाका तैयार होने की उम्मीद है, जो स्थानीय स्टार्टअप को प्रेरित करेगा और क्षेत्र में स्टार्टअप के विकास को गति देगा। मिथिला स्टार्टअप स्थानीय चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं – कृषि सुधार, किसानों के लिए अभिनव वित्तपोषण, ग्रामीण लोगों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएं, शिक्षा सहायता, ईकामर्स, यात्रा और पर्यटन, स्थानीय ऑनलाइन बाजारों को मजबूत करना आदि। एसटीपी परिचालन के साथ, मिथिला में आईटी/आईटीईएस स्टार्टअप्स और निर्यातोन्मुखी इकाइयों का भी उदय होगा। इन सभी को परिकल्पित स्टार्टअप इनक्यूबेटर से लाभ मिल सकता है।

ई.संजीवनी -मुंगेर सहित सभी जिलों में टेली कंसल्टेशन के लक्ष्य को किया गया पुनर्निर्धारित  

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– मुंगेर जिला के 154 हेल्थ सब सेंटर पर प्रति दिन 770 और महीने में 19,250 टेली कंसल्टेशन का लक्ष्य निर्धारित
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जन सहित अन्य अधिकारियों को पत्र जारी कर दिए आवश्यक निर्देश
– अब ई. संजीवनी ओपीडी की सेवाएं विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रत्येक दिन लोगों हो रही है उपलब्ध
मुंगेर, 10 मई।
ई.संजीवनी के माध्यम से मुंगेर सहित सभी जिलों में टेली कंसल्टेशन के लक्ष्य (टारगेट) को पुनर्निर्धारित  किया गया है। पुनर्निर्धारित लक्ष्य  के अनुसार मुंगेर जिला के कुल 154 हेल्थ सब सेंटर पर प्रति दिन 770 और महीने में 19250 टेली कंसल्टेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस आशय की  जानकारी जिला के सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सात निश्चय पार्ट टू कार्यक्रम के तहत सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को टेली मेडिसिन सेवा के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। पहले ये सेवाएं सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही मिल पाती थी लेकिन अब  जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से प्रतिदिन ई. संजीवनी ओपीडी की  सेवाएं  लोगों को मिल पा रही हैं ।
उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा जारी पुनर्निर्धारित लक्ष्य  के अनुसार आरएचएस 2021- 22 के मुताबिक  मुंगेर जिला में कुल 154 हेल्थ सब सेंटर कार्यरत हैं । जहां प्रति दिन 5 कंसल्टेशन की  दर  से कुल 770 टेली कंसल्टेशन प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी तरह महीने में कम से कम 25 कार्य दिवस के अनुसार कुल 19250 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर सभी जिलों के सिविल सर्जन सहित अन्य अधिकारियों को  आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
जिला भर में टेली मेडिसिन सेवाओं को प्रभावी बनाने का हो रहा है प्रयास :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. फैजान आलम अशरफी ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा ई. संजीवनी के माध्यम से टेली कंसल्टेशन को लेकर पुनर्निर्धारित किए लक्ष्य के अनुसार उपलब्धि को प्राप्त करने का निर्देश ग्रामीण स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों को दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला के 154 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर टेली कंसल्टेशन के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श की  सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि ई. संजीवनी के माध्यम से जिला भर में डेली कंसल्टेशन का लक्ष्य 770 और मासिक कंसल्टेशन का लक्ष्य 19250 निर्धारित किया गया है। इसको लेकर संबंधित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि ई. संजीवनी एक वेब आधारित व्यापक टेली मेडिसिन सेवा है। यह ग्रामीण क्षेत्र  के वंचित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं कि पहुंच सुनिश्चित कराता है। उपलब्ध चिकित्सकीय सेवाओं की  गुणवत्ता में सुधार,बुनियादी ढांचे एवम मानव संसाधन में कमी की  समस्या से निपटने में यह विशेष रूप से कारगर है। टेली मेडिसिन सेवा में विशेषज्ञ चिकित्सक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं।
आम लोगों के लिए बेहद उपयोगी है ई. संजीवनी टेली मेडिसिन सेवा :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) सुजीत कुमार ने बताया कि ई. संजीवनी सेवाओं के माध्यम से मरीज इलाज के लिए अस्पताल आने की  झंझट से मुक्ति प्राप्त कर लेता है। लोग घर बैठे ही विशेषज्ञ चिकित्सक से अपने रोग के बारे में जरूरी परामर्श ले सकते हैं। इससे आम लोगों को भीड़भाड़  सहित अन्य वजहों से संक्रमण के खतरों का भी सामना नहीं करना पड़ता है। टेली मेडिसिन सर्विस के माध्यम से मरीज वीडियो कांफ्रेंसिंग  से अपनी समस्या हब में बैठे चिकित्सकों के पास रख सकते हैं। चिकित्सकों  से  उन्हें उचित परामर्श एवं दवा का सुझाव दिया जाता है। इसके बाद वो नजदीकी किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर निः शुल्क दवा प्राप्त कर सकते हैं।