सिसरो द्वारा चार दिवसीय फुट एण्ड एंकल फ़्री सर्जिकल कैम्प की शुरुआत

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– चार दिवसीय फ़्री कैप की शुरुआत
– देसी विदेशी चिकित्सा दे रहे हैं अपनी सेवा
– सिसरो हॉस्पिटल सगुना मोड़, दानापुर में दी जा रही है सेवा

पटना-

सिसरो (सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पाइन, रिहेबिलिटेशन एंड आर्थोपेडिक) हॉस्पिटल दानापुर पटना में फुट एण्ड एंकल फ़्री सर्जिकल कैम्प की शुरुआत हुई। यह कैम्प मंगलवार तक चलेगा। इस दौरान 18 वर्ष या उससे कम आयु वाले जन्मजात विकलांग एवम् पैर की विकृति वाले रोगी को सर्जरी एवं प्रोस्थेटिक अंग एवं कैलीपर की सेवाएँ दी जा रही है।मरीज़ को सारी सुविधाएँ मुफ़्त मुहैया कराई जा रही है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर में विभा कुमारी सिंह, निदेशक, राज्य स्वास्थ्य परिवार कल्याण संस्थान, पटना एवं मदन साहनी, मानव संसाधन विकास मंत्री, बिहार सरकार उपस्थित थे। डॉ एस एन सर्राफ़ ने बताया कि यह चार दिवसीय सर्जिकल कैंप एक तारीख़ से शुरू होकर चार तारीख़ तक चलेगी। कैंप ईश्वर फ़ाउंडेशन, नई दिल्ली एवं के. बी. एच., ऑस्ट्रिया के सहयोग से सिसरो हॉस्पिटल पटना में आयोजित हो रहा है। जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्वदेशी और विदेशी डॉक्टरों का सहयोग प्राप्त है। इस कार्यक्रम में डॉ. महेश कुमार, डॉ. अभिषेक अन्नू सर्राफ़, डॉ. वेरोनिका आदि ने सहयोग दिया।

पूर्व में कोरोना पीड़ित रहे लोग रहें सावधान,आ सकते हैं टीबी की चपेट में

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-लगातार खाँसी रहने पर तुरंत कराएं जाँच, अस्पताल में मुफ्त होती है जाँच
-मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि

लखीसराय, 1 अप्रैल-

कोरोना से ठीक हुए लोगों में टीबी के संक्रामक होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ हीं दोनों बीमारियाँ के लक्षण भी करीब-करीब एक जैसे ही मिलते-जुलते होते हैं। जिसके कारण बीमारी का सही पता लगाने में भी परेशानी होती है। ऐसे में पूर्व से कोरोना से पीड़ित मरीजों के लिए यह दौर विशेष सतर्कता बरतने का है। क्योंकि इन मरीजों का इम्युन सिस्टम बहुत कमजोर होता है। जिसके उनमें टीबी संक्रमण का खतरा अन्य मरीजों से अधिक हो जाता है। सबसे जरूरी है कि मरीज की दवा का क्रम न टूटे। कोरोना में लगातार तेज बुखार और खांसी आती है। टीबी का लक्षण थकावट, आम बुखार, वजन गिरना, भूख न लगना, रात में पसीना आना आदि है।

लक्षण महसूस होते ही कराएं जाँच–

टीबी के नोडल पदाधिकारी डॉ श्री निवास शर्मा ने बताया कि लक्षण महसूस होते ही ऐसे मरीजों को बिना देर किए अपनी जाँच करवानी चाहिए। पीएचसी से जिले के अन्य अस्पतालों में मुफ्त जाँच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषण आहार के लिए सहायता राशि भी दी जाती है।

अनावश्यक यात्रा ना करें–

टीबी पीड़ित मरीज अनावश्यक यात्रा से बचें। भीड़-भीड़ वाली जगह पर बिलकुल नहीं जाएं। धूलकण से बचाव के लिए हर आवश्यक पहल करें।

बचाव के उपाय:—-
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा की पूरी कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
-मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
-मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
-मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहें । साथ ही एसी से परहेज करें ।
-पौष्टिक खाना खाएं , व्यायाम व योग करें ।
-बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
-भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।

ये हैं टीबी के लक्षण:—-
-भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
-बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट रहना व रात में पसीना आना।
-हलका बुखार रहना, हरारत रहना।
-खांसी आते रहना, खांसी में बलगम आना तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
-गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
-गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
-महिलाओं को टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
-पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
-टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

समाज में नया अलख जगाकर महिलाओं के प्रति सम्मान एवं समानता करें स्थापित: डीएम

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– खान पान में मोटे अनाज को शामिल करने पर दें जोर
– गांव -गांव तक मोटे अनाज के सेवन के प्रति चलाएं जागरुकता अभियान
पटना-

समाज में महिलाओं को उचित सम्मान और समानता मिले। इसके लिए हम सभी को मिलजुलकर समाज में एक नया अलख जगाने की जरूरत है। महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं के प्रति होने वाले हर प्रकार के शोषण और भेदभाव समाप्त करने की जरूरत है। तभी महिलाओं के लिए ऐसा वातावरण तैयार होगा। जिसमें वह खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी। इसके लिए हम सभी को मिलकर सकारात्मक के रूप से काम करना होगा।‌उक्त बातें शुक्रवार को समाहरणालय परिसर स्थित हिन्दी भवन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में डीम डा. चंद्रशेखर सिंह ने कही। वहीं डीएम ने आईसीडीएस पटना के द्वारा चलाया जा रहा श्री अन्ना पोषण पखवाड़ा के दौरान आयोजित कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पोषण पखवाड़ा के दौरान सबसे प्रमुख है कि हम अधिक से अधिक लोगों और उनके परिवारों को पोषण को बढ़ाने वाली बातों, विशेषकर दो वर्ष तक के बच्चों के लिए बताएं,‌ताकि वह खुद ही जागरूक बनें। उन्होंने बताया कि हमारे देश में परंपरागत रूप से उगाये जा रहे मोटे अनाजों को खाने के लिए प्रेरित करना आज की सबसे महत्वपूर्ण मांग है। इनमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज एवं फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं। जो समाज को कुपोषण मुक्त बनाने के साथ मधुमेह, रक्तचाप एवं मोटापे जैसे रोगों से भी बचाएगा।

वर्ष 1955 -1965 के बीच भारत में उगाए जाते थे मोटे अनाज
इस दौरान डीडीसी तनय सुल्तानिया ने कहा कि मोटे अनाज के उपयोग के लिए सभी लोगों को जागरूक होना होगा। तभी यह अभियान सफल हो पाएगा। उन्होंने कहा कि भारत में वर्ष 1955 से लेकर 1965 तक मोटे अनाज की उपज होती थी। लेकिन अन्न की उपलब्धता की कमी होने के कारण खाद्य सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर कृषि क्षेत्र में हरित क्रांति की शुरुआत की गई। जिसमें चावल,‌गेहूं के उत्पादन पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम सभी को अपने-अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की जरूरत है। साथ ही पोषण पखवाड़ा के दौरान गांव-गांव तक मोटे अनाज के सेवन के प्रति लोगों को जागरूक करने की सभी से अपील की। इसमें खासकर आंगनबाड़ी सेविकाओं को बढ़-चढ़कर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटे अनाज की महत्ता को समझते हुए देश के अंदर तथा विश्व के की देशों में इसके उपयोग एवं उत्पादकता पर बल दिया है। जिसका नतीजा है कि विश्व के 70 से अधिक देशों ने मोटे अनाज के उत्पादन पर जोर दिया है।
मिलेट के फायदा के लिए चलाया जा रहा है जन जागरुकता कार्यक्रम

आईसीडीएस पटना के डीपीओ आभा प्रसाद ने बताया कि पोषण पखवाड़ा के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों, पंचायत भवन और स्कूलों में सुपोषण के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा मिलेट को आहार में शामिल करने के लिए प्रदर्शनी और जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह के माध्यम से तिरंगा थाली के प्रदर्शन से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा मोटे अनाज के सेवन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रतियोगिता और जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं कार्यक्रम के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले आईसीडीएस के कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं कार्यक्रम में मौजूद वरीय उपसमाहर्ता मिंटी हर्सिता और बलिंदर सिंह सलाहकार आईसीडीएस ने भी मोटे अनाज से होने वाले फायदा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने जिले के प्रखंडों में जाकर लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए पोषण जागरुकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किए। साथ ही समाहरणालय परिसर में लगे मोटे अनाज के स्टाॅल का भी जायजा लिए। इस मौके पर डीडीसी, वरीय उप समाहर्ता,‌डीपीओ और राज्य सलाहकार समेत कई लोग मौजूद थे।

जिला के चार प्रखंडों में चले सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान 89% लोगों को खिलाई गई फाइलेरिया रोधी दवा

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– जिला के 13.50, लोगों को एमडीए राउंड के दौरान खिलाई गई फाइलेरिया की दवा

– सबसे अधिक खगड़िया सदर प्रखंड में 84% लोगों को खिलाई गई फाइलेरिया की दवा के रूप में डीईसी और अल्बेंडाजोल

खगड़िया-

जिला के चार प्रखंडों खगड़िया सदर, चौथम, गोगरी और परबत्ता में विगत 10 फरवरी से 03 मार्च तक चले सर्वजन दवा सेवन (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान के दौरान 89 % लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई गई । इस आशय की जानकारी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि जिला भर कि कुल जनसंख्या 15,20,945 लोगों में से जिला के चार प्रखंडों खगड़िया सदर, गोगरी, चौथम और परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रहने वाले कुल 13,50,406 को फाइलेरिया की दवा के रूप में डीईसी और अल्बेंडाजोल की टैबलेट खिलाई गई जो निर्धारित का लक्ष्य का 89% है।
उन्होंने बताया कि जिला भर के लिए आवंटित 35,51,750 डीईसी टेबलेट्स में से लोगों को 32,07,377 टेबलेट्स खिलाई गई। वहीं अल्बेंडाजोल की आवंटित की गई 14,52,000 टेबलेट्स में लोगों को 13,50,406 टेबलेट्स खिलाई गई।

खगड़िया जिला के वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. शाहनवाज आलम ने बताया कि जिला के चौथम प्रखंड की कुल आबादी 2,26,392 में से 2,14,882 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई जो निर्धारित लक्ष्य का 95% है। इसी तरह गोगरी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रहने वाले 4,41,341 लोगों में से 4,17,190 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई जो निर्धारित लक्ष्य का 95% है। इसके अलावा खगड़िया सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत क्षेत्र में रहने वाले सर्वाधिक 5,24,920 लोगों में 4,42,950 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई जो निर्धारित लक्ष्य का 84% है। इसी तरह जिला के परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रहने वाले 3,28,292 लोगों में से 2,75,384 लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा फाइलेरिया की दवा के रूप में डीईसी और अल्बेंडाजोल दवा का सेवन करवाया गया। यहां निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 84% लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाई गई।
जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार बब्लू साहनी ने बताया कि चौथम प्रखंड के लिए आवंटित 550000 डीईसी टैबलेट में से लोगों को 5,30,367 टेबलेट्स खिलाई गई। वहीं अल्बेंडाजोल की 2,20,000 टेबलेट्स में से लोगों को 2,14,882 टेबलेट्स खिलाई गई। इसी प्रकार से गोगरी में आवंटित की गई 10,26,750 डीईसी और 4,32,000 अल्बेंडाजोल टेबलेट्स में से लोगों को डीईसी की 9,98,437 और अल्बेंडाजोल 4,17,190 टेबलेट्स खिलाई गई।
उन्होंने बताया कि खगड़िया सदर प्रखंड में आवंटित की गई डीईसी की 12,75,000 और अल्बेंडाजोल की 5,00,000 टेबलेट्स में से लोगों को डीईसी की 10,91,609 और अल्बेंडाजोल कि 4,42,950 टेबलेट्स खिलाई गई। इसी प्रकार से परबत्ता प्रखंड में आवंटित डीईसी की 7,00,000 और अल्बेंडाजोल की 3,06,000 टेबलेट्स में से लोगों को डीईसी की 5,8,6,964 और अल्बेंडाजोल की 2,75,384 टेबलेट्स खिलाई गई।

कमजोर नवजात को कंगारू मदर केयर से बनाएं स्वस्थ्य

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–इस प्रक्रिया से बच्चों के स्वस्थ शरीर का होता है निर्माण

बांका-

हर किसी की चाहत होती है कि उसका बच्चा स्वस्थ रहे। इसके लिए प्रसव पूर्व ध्यान रखना आवश्यक है। हालांकि कभी-कभी सतर्कता के बावजूद समय से पहले प्रसव हो जाता है। समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का न सिर्फ वजन कम होता, बल्कि ऐसे शिशु जन्म लेने के बाद कई तरह की समस्याओं से घिर जाता है। इस स्थिति में लापरवाही करने से परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे शिशु और भी कई समस्याओं से घिर जाता है। ऐसे में इस तरह के शिशु के स्वस्थ शरीर के निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इस तरह के बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है। इससे शिशु के स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी ने बताया कि कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास का निर्माण करने में काफी सहायक साबित होता है। साथ ही बच्चे को काफी सुकून भी मिलता है इस प्रक्रिया से। बच्चा जब अपनी मां के नजदीक रहता है तो वह खुद तनावमुक्त महसूस करता है। इससे बच्चे के स्वस्थ शरीर का निर्माण होता है। यह बिना खर्च सबसे अच्छा उपाय है।
बेहतर तरीके से होता है स्तनपानः डॉ. चौधरी कहते हैं कि कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है, जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। स्तनपान बेहतर तरीके से होता है। बच्चे का तापमान सही रहता और वह इन्फेक्शन से दूर रहता है। बच्चे और मां के बीच रिश्ता मजबूत होता है। इस विधि में मां के सीने पर सीधी अवस्था में शिशु को चिपकाकर रखा जाता है। इस स्थिति में मां की छाती पूरी तरह खुली होनी चाहिए। इससे मां के शरीर की गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सके। इससे शिशु का तापमान सही रहता है। इस विधि का मां के अलावा शिशु के परिवार के अन्य महिला व पुरुष भी उपयोग कर सकते हैं। सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर की सुविधा देने वाले स्वस्थ रहें।
बीमार हों तो कंगारू मदर केयर प्रदान नहीं करें- डॉ. चौधरी कहते हैं कि कंगारू मदर केयर एक बात का ख्याल रखना बहुत ही जरूरी है। अगर बच्चे की मां बीमार हो तो उसे यह प्रक्रिया बच्चे के साथ नहीं अपनानी चाहिए। ऐसी परिस्थिति में घर के दूसरे सदस्य भी कंगारू मदर केयर प्रदान कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में बच्चे को साफ हाथों से ही छूना चाहिए। यदि मां बुखार, सर्दी या खांसी से पीड़ित हों तो शिशु को कंगारू मदर केयर नहीं देना चाहिए। घर के कोई भी स्वस्थ व्यक्ति नवजात को कंगारू मदर केयर प्रदान कर सकते हैं।

लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए साफ- सफाई और योगाभ्यास के लिए प्रेरित कर रहे हैं पीएसजी मेंबर हरे राम कुमार

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– खगड़िया जिला के सदर प्रखंड के संसारपुर पंचायत में चल रहे जय बजरंग पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के शुरुआती तीन सदस्यों में से एक हैं हरे राम कुमार
– सन 2022 के जुलाई महीने में शुरू हुआ था जय बजरंग पेशेंट सपोर्ट ग्रुप

खगड़िया-

खगड़िया जिला अंतर्गत फाइलेरिया के मरीजों सहित अन्य लोगों को फाइलेरिया से बचाव के लिए साफ- सफाई और योगाभ्यास के लिए जय बजरंग पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के मेंबर हरे राम कुमार लगातार प्रेरित कर रहे हैं। मालूम हो कि जुलाई 2022 में सदर प्रखंड के संसारपुर पंचायत में जय बजरंग के नाम से रोगी सहायता समूह (पेशेंट सपोर्ट ग्रुप) पीएसजी का गठन किया गया था। शुरुआत में फाइलेरिया के तीन मरीज हरे राम कुमार, कारी साव और क्रांति देवी ग्रुप के सक्रिय सदस्य बने । पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सहयोग से मरीजों को सदर पीएचसी खगड़िया से एमएमडीपी किट उपलब्ध करवायी गयी । जिसमें साफ- सफाई के लिए टब, मग, तौलिया, डिटॉल, लाइफबॉय साबुन, मलहम सहित कई आवश्यक सामग्री उपलब्ध थी। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के फाइलेरिया विभाग में कार्यरत डॉक्टर और कर्मियों के द्वारा नियमित योगाभ्यास और व्यायाम करने की सलाह दी गई। हरे राम कुमार सहित दो अन्य फाइलेरिया रोगियों के द्वारा 4 से 5 महीने तक नियमित योगाभ्यास करने के बाद काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिला । इसके बाद पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के सक्रिय सदस्य हरे राम कुमार संसारपुर पंचायत क्षेत्र में घर- घर जाकर फाइलेरिया के रोगी के साथ- साथ अन्य लोगों को भी फाइलेरिया कि बीमारी नहीं हो इसके लिए जागरूक कर रहे हैं। इसके अलावा वो एमडीए अभियान के दौरान साल में कम से कम एक बार फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा के सेवन के लिए भी जागरूक करते हैं। इसके अलावा फाइलेरिया का कोई नया मरीज मिलने के बाद उनके साथ चलकर खगड़िया पीएचसी से एमएमडीपी किट दिलवाने के साथ फाइलेरिया की दवा भी दिलवाते हैं। इसके अलावा वो सभी लोगों को नियमित योगाभ्यास के लिए भी प्रेरित करते हैं। हरे राम कुमार के सक्रिय सहयोग से जय बजरंग पेशेंट सपोर्ट ग्रुप में सदस्यों की संख्या 3 से बढ़कर 7और फिर आज के समय में कुल 16 लोग लोग ग्रुप के सदस्य हैं।

उन्होंने बताया कि बताया कि उनके साथ अभी रामदेव मालाकार, क्रांति देवी, कुंडल राय, माधव जी, सुबोध राय, जामुन जी, राजेश साव ग्रुप के मेंबर के साथ- साथ फाइलेरिया के भी पेशेंट हैं। इनके अलावा दीपक जी और नीलम देवी फाइलेरिया के पेशेंट नहीं होते भी फाइलेरिया के रोगियों को जागरूक करने के लिए ग्रुप के मेंबर के रूप में कार्य कर रहे हैं।
फाइलेरिया से पीड़ित होने के बाद से लगातार योगाभ्यास कर रहे हैं–
उन्होंने बताया कि आज से लगभग पांच साल पहले वो खुद भी फाइलेरिया से पीड़ित हुए थे। उसके बाद से लगातार योगाभ्यास कर रहे हैं। इसके साथ ही वो शुरू से किसी भी तरह की परेशानी होने पर होमियोपैथी मेडिसिन का ही सेवन करते रहे हैं। बावजूद इसके वो सभी एमडीए अभियान के दौरान पूरे परिवार के साथ फाइलेरिया की दवा के रूप में अल्बेंडाजोल और डीईसी दवा का सेवन करते हैं और अपने आसपास रहने वाले सभी लोगों को इसके लिए प्रेरित भी करते हैं।
उन्होंने बताया कि हमारी इच्छा है कि ग्रुप के सभी 16 सदस्यों को एक साथ सदर अस्पताल ले जाकर ट्रीटमेंट करवाया जाए ताकि सभी मरीजों का एक साथ ट्रीटमेंट संभव हो सके ।

बुधिया यूपीएचसी में टीबी मरीजों के स्वास्थ्य अवलोकन को लेकर केयर एण्ड सपोर्ट ग्रुप मीटिंग आयोजित

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– टीबी मरीज भी बैठक में हुए शामिल, स्वास्थ्य अवलोकन के बाद आवश्यक चिकित्सा परामर्श
– टीबी अब लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच और इलाज जरूरी

भागलपुर-

बुधवार को बुधिया यूपीएचसी में केएचपीटी के सहयोग से टीबी मरीजों के स्वास्थ्य अवलोकन को लेकर केयर एण्ड सपोर्ट ग्रुप मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता यूपीएचस के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ जफर अंसारी ने की। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों और 11 टीबी मरीज एवं 09 केयर गिभर ने भी भाग लिया। वहीं, बैठक के दौरान मौजूद सभी मरीजों का बारी-बारी से स्वास्थ्य अवलोकन किया गया और आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया गया। साथ ही किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने को कहा गया। साथ दवाई नियमित तौर पर समय से दवाई का सेवन करने समेत अन्य आवश्यक और जरूरी सलाह दी गई।

इस दौरान डाॅ जफर अंसारी ने बताया, किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हो सकते हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः डाॅ जफर अंसारी ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।

पौष्टिक भोजन का करें सेवन, बढ़ेगी रोग – प्रतिरोधक क्षमता 

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– विटामिन, कैल्सियम और आयरनयुक्त आहार का सेवन जरूरी
– रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने पर संक्रमण से रहेंगे दूर
लखीसराय, 28 मार्च –
आज की भाग-दौड में हम सभी अपने पोषण के प्रति जागरूक नहीं रह पाते  हैं।  अगर हम स्वस्थ्य नहीं रहेंगे तो हम किसी भी संक्रमण की  चपेट में आ सकते हैं  ।  दरअसल सही पोषण रहने से रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है। सही पोषण के लिए हमें अधिक से अधिक पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार का सेवन करना चाहिए। इसलिए पोषण और रोग – प्रतिरोधक क्षमता को लेकर हर व्यक्ति को सजग रहने की जरूरत है। पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार से रोग – प्रतिरोधक क्षमता में तेजी से वृद्धि होती है। यह हमें कई बीमारियों से दूर रखता है।
विटामिन, कैल्सियम  और आयरनयुक्त आहार का सेवन जरूरी : –
जिला के  सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा  ने बताया कि रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए विटामिन, कैल्सियम  और आयरनयुक्त आहार का सेवन जरूरी है। समय पर खाना खाना चाहिए। खाना खाने के करीब 30 मिनट बाद भरपूर मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे हमारी रोग – प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है।
रोग – प्रतिरोधक क्षमता की मजबूती को इन सब्जियां का करें सेवन : –
 पालक, पनीर, सोयाबीन, कद्दू, गाजर, चुकंदर  समेत अन्य हरी सब्जी व साग का भरपूर मात्रा में सेवन करें।
– इन फलों का करें सेवन : –
रोग – प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए केला, पपीता, संतरा, अनार, अनानास आदि मौसमी फलों का सेवन करना चाहिए।
– नियमित रूप से करें व्यायाम : –
रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने एवं बढ़ाने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें और साथ ही भरपूर नींद लें।
क्या है रोग – प्रतिरोधक क्षमता : –
प्रतिरक्षा प्रणाली में अंग, कोशिकाएं, टिशू और प्रोटीन आदि शामिल होते हैं। ये सभी तत्व मिलकर मानव – शरीर को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं। इसके साथ में प्रतिरक्षा प्रणाली मानव – शरीर को बीमारियों, संक्रमण, वायरस इत्यादि से लड़ने में सहायता प्रदान करती है। रोग – प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों से लड़ने की शक्ति है, जो व्यक्ति को सेहतमंद रहने में सहायता करती है।
प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने से होने वाले फायदे : –
रोग – प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहने से लोग शारीरिक, मानसिक रूप से भी मजबूत रहते और संक्रामक बीमारियों से दूर रहते हैं। साथ ही स्वस्थ और मजबूत शरीर का निर्माण होता है।
रोग – प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के लक्षण :
– तनाव महसूस होना।
–  अधिक सर्दी लगना।
–  पेट संबंधी परेशानियाँ होना।
–  चोट को ठीक होने में समय लगना।
– संक्रमण होना।
– कमजोरी महसूस होना
– रोग – प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का कारण : –
–  नशीले पदार्थों का सेवन करना।
– पर्याप्त नींद नहीं लेना।
– वजन का अधिक होना।
–  व्यायाम नहीं करना।

बेहतर कार्य करने वाले स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को किया गया पुरस्कृत

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– भागलपुर एवं बाँका के प्रतिभागियों को प्रमंडलीय स्तर पर सम्मान समारोह आयोजित कर किया गया पुरस्कृत
– बेहतर कार्य करने वालों का हौसला बढ़ाने के लिए पुरस्कृत करना जरूरी, जारी रखें अपनी मेहनत
भागलपुर, 28 मार्च-
स्वास्थ्य विभाग से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाले पदाधिकारियों एवं कर्मियों का हौसला बढ़ाने और मेहनत जारी रखने के लिए मंगलवार को शहर के एक निजी होटल में प्रमंडलीय स्तर पर एक सम्मान सह पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें परिवार नियोजन, प्रसव, कायाकल्प समेत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वाले भागलपुर एवं बाँका के स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों को पुरस्कृत किया गया।  उदघाटन आरएडी डाॅ.रामप्रीत सिंह एवं आरपीएम रूपनारायण शर्मा ने संयुक्त रूप से विधिवत किया। इस मौके पर आरपीएम ने मौजूद प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, बेहतर कार्य करने वाले प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाने के लिए पुरस्कृत करना जरूरी है। किन्तु, इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आपलोग अपनी मेहनत को भी जारी रखें और अपने सहकर्मियों को प्रेरित करें। ताकि बेहतर से बेहतर कार्य सुनिश्चित हो सके और सामुदायिक स्तर पर लोग सरकारी योजनाओं से लाभान्वित हो सके। इसलिए, मैं लोगों से अपील करता हूँ कि इस उत्साह और मेहनत को बरकरार रखने के लिए पुरस्कार पाकर संतुष्ट नहीं होना है, बल्कि क्षेत्र में जाकर और बेहतर कार्य करना है। साथ ही अपने सहयोगियों को भी प्रोत्साहित करें। उन्हें अपनी सफलता का मूलमंत्र बताएं। ऐसा करने से स्वास्थ्य सेवा और बेहतर होगी। क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों तक सुविधाएं पहुंचेंगी। इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। इसके बाद परिवार नियोजन के विकल्प अधिक से अधिक लोग अपनाएंगे। इस मौके पर भागलपुर के डीपीएम (हेल्थ) मणिभूषण झा, आरिफ हुसैन,राहुल कुमार सिंह ,राजीव कुमार  आदि मौजूद थे।
– रंगरा के डाॅ. पिंकेश कुमार को मिला प्रथम पुरस्कार :
आयोजित शिविर के दौरान रंगरा सीएचसी के डाॅ पिंकेश कुमार को परिवार नियोजन में बेहतर कार्य करने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। जबकि, नारायणपुर पीएचसी प्रभारी डाॅ. बीके विद्यार्थी को नसबंदी और एपीएचसी नारायणपुर के डाॅ. श्याम सुंदर दास को परिवार नियोजन, बाँका के बेलहर सीएचसी डाॅ. अबु सुफ्यान आजाद को परिवार नियोजन से संबंधित सुविधाओं का अधिकाधिक लाभार्थी को उपलब्ध कराने के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। वहीं, सीएचसी धौरैया (बाँका) की एएनएम अन्नु कुमारी, रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज की एएनएम प्रियलाता कुमारी, गोराडीह पीएचसी की रूपम भारती, शाहकुंड सीएचसी की वीणा कुमारी, पुरैनी (जगदीशपुर) की कुमारी रूबी देव, पीरपैंती के खवासपुर के सीएचओ करण कुमार, सन्हौला के मदारगंज के सीएचओ सुरेन्द्र सिंह, रेफरल अस्पताल सुल्तानगंज के एफपीसी सुनीति सिन्हा, मदारगंज की आशा फेसीलीटेटर मीरा सिन्हा, बेलहर की आशा श्यामा देवी, धौरैया की प्यारी खातुन, नाथनगर की रीता कुमारी, नवगछिया की डेजी कुमारी, बाँका की मंजू कुमारी, बिहपुर की मीणा देवी व सितारा खातुन को भी स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने के लिए प्रथम पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
– कायाकल्प में बेहतर कार्य करने के लिए डाॅ. प्रशांत को किया गया पुरस्कृत :
कायाकल्प में बेहतर कार्य करने के लिए भागलपुर जिला गुणवत्ता सलाहकार डाॅ. प्रशांत को भी पुरस्कृत किया गया। वहीं, डाॅ. प्रशांत ने कहा, अच्छे कार्य करने वालों का हौसला बढ़ाने के लिए पुरस्कृत करना विभाग अच्छी और सराहनीय पहल है। इससे अन्य लोगों में कार्य करने जज्बा और दायरा में इजाफा होता है। मैं पुरस्कार पाकर खुश हूँ एवं मुझे एहसास हुआ मैं कुछ कर पाया हूँ। साथ ही आगे भी अपनी मेहनत जारी रखने की प्रेरणा मिली। मैं इस पहल के लिए अपनी टीम का आभारी हूँ। क्योंकि, यह सभी के सहयोग से ही संभव हुआ है।

एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की सूची तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराना सुनिश्चित करें-जिलाधिकारी 

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-एड्स एवं सामाजिक सुरक्षा पर एक दिवसीय जिलास्तरीय बैठक आयोजित
-एड्स से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने को कहा
– स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस समेत अन्य विभागों के पदाधिकारी हुए शामिल
लखीसराय-
जिला समाहरणालय  परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्ययालय  में सोमवार को जिलाधिकारी  की अध्यक्षता में मुख्यधारा कार्यक्रम के अंतर्गत एचआईवी/एड्स एवं सामाजिक सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय बैठक का आयोजन हुआ। जिसमें स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस समेत जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में एड्स संक्रमित/प्रभावित व्यक्ति के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं से  संबंधित लाभ दिलाना सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। इस मौके पर जिलाधिकारी ने  सभी पदाधिकारियों से कहा, जिले के सभी संक्रमित व्यक्तियों की सूची तैयार कर उन्हें सरकारी योजनाओं से लाभान्वित कराना सुनिश्चित करें। ताकि शत-प्रतिशत लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके और एक भी व्यक्ति वंचित नहीं रहें। साथ ही जागरूकता कार्यक्रम चलाकर एड्स से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक और एड्स को लेकर लोगों में चल रही  भ्रांतियों को भी दूर करें। ताकि लोग पीड़ित व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का अनावश्यक भेदभाव नहीं करे। इसको लेकर लोगों को एड्स से बचाव, यह कैसे फैलता है , इसका लक्षण, कारण, उपचार समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारियाँ से सामुदायिक स्तर पर लोगों को अवगत कराएं। जिससे कि लोग इस लाइलाज बीमारी से दूर रह सकें। इसके अलावा जिलाधिकारी ने अन्य कई आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए।
– छुआछूत नहीं है  एड्स , इसलिए पीड़ित के साथ नहीं करें भेदभाव :
सिविल सर्जन डाॅ. बीपी सिन्हा ने बताया, एड्स छुआछूत बीमारी नहीं है। इसलिए, पीड़ित व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का अनावश्यक भेदभाव नहीं करें। यह हाथ मिलाने, साथ उठने-बैठने, कपड़े आदान-प्रदान करने से नहीं होता है। बल्कि, शारीरिक संबंध, खून के आदान-प्रदान समेत अन्य प्रकार के संपर्क होने से होता है। वहीं, उन्होंने कहा, किसी भी व्यक्ति को एड्स का लक्षण दिखे या महसूस हो तो तुरंत उन्हें चिकित्सकों से जाँच कराकर इलाज शुरू करना चाहिए। इसके अलावा  चिकित्सा परामर्श का पालन करना  जरूरी है। ताकि परिवार के अन्य लोग इन बीमारियों के दायरे से दूर रह सकें और पीड़ित व्यक्ति का भी समय पर इलाज शुरू हो सके ।
जिला एड्स बचाव एवं नियंत्रण इकाई, लखीसराय के जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने सभी संबंधित विभागों से आये प्रतिनिधि पदाधिकारी से  केंद्र /राज्य सरकार द्वारा सभी देय सामाजिक सुरक्षा योजना से जिला के सभी एचआईवी  संक्रमित परिवार को आच्छादित कर उन्हें समाज की  मुख्य धारा में जोड़े जाने की अपील की । उन्होंने   बताया कि जिले में अभी कुल 774 एचआईवी  संक्रमित व्यक्ति हैं ।
जबकि परवरिश योजना के अंतर्गत कुल 233 आवेदन दिये गए हैं,।   इनमें से 185 लाभुकों को लाभान्वित कराया जा रहा है। इसके तहत सभी लाभार्थियों को ₹1000/- (एक हजार रुपये मात्र) प्रति माह अनुदान  दिया जा रहा है।
बिहार शताब्दी एड्स पीड़ित कल्याण योजना के अंतर्गत अब तक कुल 225 व्यक्ति लाभान्वित हो रहें है।
– ये हैं एड्स का शुरुआती लक्षण :
एड्स का शुरुआती लक्षण है, मरीज का शारीरिक वजन कम होना, लंबे समय तक बुखार रहना, काफी दिनों तक डायरिया होना, शरीर में गिल्टी होना। इस तरह के परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराएँ।