टीबी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर लोगों को किया गया जागरूक
सीईजीआर का 11 वां वार्षिक स्थापना दिवस का भव्य आयोजन 18 अप्रैल को ली मेरीडियन होटल नईदिल्ली में
-देश भर के विद्वजन भाग लेंगे
ऩईदिल्ली-
सेंटर फॉर एजुकेशन गोथ एंड रिसर्च, सीईजीआर का 11 वां वार्षिक स्थापना 18 अप्रैल को ली मेरीडियन होटल नईदिल्ली में मनाया जा रहा है। इस खास आयोजन में विजन 2047 इन एजुकेशन विषय पर दूसरा सम्मिट का आयोजन किया गया है। इस खास आयोजन में 50 प्रमोटर्स, 50 वाइस चांसलर, 100 से अधिक एकेडमी लीडर्स एवं 300 से अधिक डेलीगेट्स भाग लेंगे।
सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सीईजीआर के इस दिन भर के कार्यक्रमें चार सत्र का आयोजन किया जा रहा है जिसमें उद्घाटन सत्र, टेक्नीकल सत्र, सेकेंड टेक्नीकल सत्र एवं समापन सत्र होगा। इस खास आयोजन में देश भर के करीब पचास वीसी कार्यक्रम में भाग लेने की सहमती दे चुके हैं।
रविश रोशन ने बताया कि देश में नए एजुकेशन पॉलिसी को लागू होने पर लगातार चर्चा हो रही है जिसे लागू करने के प्रावधानों पर खास चर्चा हो रही है। आज छात्रों को प्रायोगिक कार्यों पर जोर देने की बात कही जा रही है जिसका तारीफादरी लगातार सीईजीआर लगातार करता रहा है। विजन 2047 पर फोकस होगा।
गौरतलब है कि सीईजीआर को देश एजुकेशन का सबसे बड़ा एजुकेशन थिंक टैंक है. जिसके पास चार एनोवेशन का क्रेडिट प्राप्त है।
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सीपीजे कॉलेज नरेला में “नौवां राष्ट्रीय प्रबंधन एवं आईटी फेस्ट-मार्केटटेक-2023” हुआ संपन्न
सीपीजे कॉलेज नरेला (जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय से संबद्ध) ने कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया, दिल्ली मैनेजमेंट एसोसिएशन और एजुकेशन प्रमोशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से 23 से 25 मार्च, 2023 तक “सतत गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का अनुकूलन” विषय पर सीपीजे कॉलेज परिसर में “मार्केटटेक-2023: 9वें राष्ट्रीय प्रबंधन और आईटी फेस्ट” का आयोजन किया। । श्री युगांक चतुर्वेदी, महानिदेशक, डॉ. ज्योत्सना सिन्हा, निदेशक और डॉ. नेहा मित्तल भास्कर, डीन ने मिलकर मुख्य अतिथियों डॉ. नितिन मलिक, रजिस्ट्रार, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय एवं प्रो. (डॉ.) ए.के. सैनी, डीन – यूएसएमएस, जीजीएसआईपीयू, दिल्ली का हार्दिक स्वागत किया, जिन्होंने क्रमशः पहले दिन, उद्घाटन समारोह और तीसरे दिन समापन समारोह में अपनी उपस्थिति और बहुमूल्य मार्गदर्शन से इस अवसर की शोभा बढ़ाई। मार्केटेक-2023 के कार्यक्रम के दौरान भारत भर के विश्वविद्यालयों/संस्थानों के लगभग 200 छात्रों ने राष्ट्रीय सम्मेलन और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। पहला दिन राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए समर्पित था, जिसमें तकनीकी सत्र, रचनात्मकता और मुख्य भाषण ने यह भी सुझाव दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवीनतम तकनीक टिकाऊ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में किस हद तक भूमिका निभा सकती है। दूसरे दिन प्रबंधन और आईटी की प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम हुआ, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं में निम्नलिखित कार्यक्रम शामिल थे: गेमर डेन, जस्ट वेट एंड वॉच, वॉल पेंटिंग, डिजाइन लाइक ए प्रो, मार्केट क्षेत्र, मिस्टर एंड मिस कोडर, हसल 2.0, मोबाइल फोटोग्राफी। तीसरे दिन बाकी प्रतियोगिताओं जैसे प्लान डी नेगोशियो (स्टार्ट-अप बिजनेस प्लान), आईटी क्विज, डेविल फॉलो, स्टैंड अप कॉमेडियन, फन टसल मेमे-प्रतियोगिता, एडजेप, और टैप ऑन द बीट-डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न कार्यक्रमों और माननीय अतिथियों के मुख्य भाषण के माध्यम से साहसी, जिज्ञासु और उत्सुक छात्रों को उनकी रचनात्मकता, संचार कौशल और पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बहुत लाभ हुआ। कार्यक्रम का प्रमुख निष्कर्ष यह था कि सूचना प्रौद्योगिकी की उन्नति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इनोवेटिव डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सतत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम का समापन गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पुरस्कार वितरण और सुश्री धारणा चौधरी, अकादमिक समन्वयक और मार्केटटेक-2023 के कार्यक्रम की एंकर द्वारा प्रस्तावित धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
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संतुलित और पौष्टिक आहार को देशव्यापी अभियान बनाएं
• “पोषण पखवाड़ा” के क्रम में स्वैच्छिक संस्था “पाथ” ने आयोजित किया वेबिनार
• न कम खाएँ न ज्यादा, संतुलित और पौष्टिक आहार खाएँ : डॉ. हिमांशु भूषण
• जलवायु के अनुकूल मिलने वाले स्थानीय चीजें जरूर खाएँ : डॉ. कौशल किशोर
पटना, 24 मार्च
संतुलित और पौष्टिक भोजन केवल शरीर की जरूरत नहीं, सबल राष्ट्र के निर्माण के लिए भी जरूरी है। अपने जलवायु क्षेत्र में उपलब्ध स्थानीय और मोटे अनाज, फल और सब्जियों को कमतर नहीं आंकें। यही आपके लिए पौष्टिक आहार बनेंगे। इस विषय को देशव्यापी अभियान बनाना होगा तथा दैनिक आधार पर लोगों को जागरूक करना होगा। “पोषण पखवाड़ा” के क्रम में यहाँ स्वैच्छिक संस्था “पाथ” द्वारा आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने ये विचार व्यक्त किये। स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व आयुक्त डॉ. हिमांशु भूषण और आई.सी.डी.एस. के निदेशक डॉ. कौशल किशोर इस वेबिनार के मुख्य वक्ता थे। इसमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत पूरे राज्य के 62 स्वयंसेवी सस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व आयुक्त और वर्तमान में नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर के सलाहकार डॉ. हिमांशु भूषण ने कहा कि न कम खाएँ न ज्यादा। संतुलित और पौष्टिक आहार थोड़े-थोड़े समय पर खाएँ। स्वस्थ शरीर, संतुलित शारीरिक विकास और शारीरिक अंगों के ठीक से काम करने के लिए ये जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक ही खाद्य-पदार्थ में शरीर के लिए जरूरी सभी पौष्टिक तत्व नहीं मिलते हैं, लेकिन अलग-अलग तरह के भोज्य पदार्थों के मिश्रण से ऐसा संभव है। इसलिए मिश्रित आहार लें, जिसमें मोटे अनाज, हरी सब्जियाँ, स्थानीय फल, दूध और दूध उत्पाद, नमक-पानी आदि सभी चीजें हों। ऐसा करने से हम अस्पताल के खर्च और दवाई से काफी समय तक बचे रह सकते हैं।
डॉ. हिमांशु भूषण ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को विशेष रूप से समझाने की जरूरत है। वे संतुलित और पौष्टिक आहार पर केवल पुरुषों का अधिकार मानती हैं। जबकि ये चीजें उनके लिए ज्यादा जरूरी हैं। गर्भवती महिलाओं को इसकी ख़ास दरकार होती है। स्वस्थ गर्भवती ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। ऐसी महिलायें तात्कालिक कमियों को रोग ही नहीं मानतीं हैं, जबकि उसी समय सावधान हो जाएँ तो डॉक्टर के पास जाने की नौबत नहीं आयेगी। उन्होंने रोगों का उदाहरण देकर समझाया कि इसे संतुलित और पौष्टिक आहार से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलायें समय से और अधिक भोजन लें। इसी तरह बच्चों को अन्नप्रासन के समय केवल मीठा खिलाने का चलन है। यह गलत है। उसे थोड़ा नमकीन भी दें। बचपन से ही जब बच्चा सभी चीजों का स्वाद समझने लगेगा तो बड़ा होकर किसी भी चीज को खाने में आनाकानी नहीं करेगा।
आई.सी.डी.एस. के निदेशक डॉ. कौशल किशोर ने कहा कि लोगों में और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी चीजों को कमतर आंकने की प्रवृति है। उन्हें महंगा सेब ही मुफीद लगता है जबकि अपने घर में उपजने वाला केला और अमरुद खराब लगता है। इस भ्रान्ति को हमलोगों को मिलकर दूर करना होगा। उन्होंने जीवन शैली ठीक करने, आचार-व्यवहार जलवायु के अनुकूल बनाने और पोषण संबंधी भ्रांतियों को दूर करने की बात कही। उन्होंने लोगों से मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी का उपयोग बढाने और अपने मुख्य भोजन का हिस्सा बनाने की अपील की।
वेबिनार का संचालन पाथ के कुमार सौरभ ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष ने किया। पाथ के राज्य प्रमुख अजीत कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन किया।