टीबी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर लोगों को किया गया जागरूक 

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– मायागंज अस्पताल क्षेत्र स्थित महादलित टोले में स्वास्थ्य विभाग एवं केएचपीटी द्वारा चलाया जागरूकता अभियान
– 168 व्यक्तियों की हुई स्क्रीनिंग, 06 को जाँच के लिए किया गया रेफर
भागलपुर-
मायागंज अस्पताल क्षेत्र स्थित महादलित टोले में सोमवार को टीबी से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा केएचपीटी के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान टीबी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी देकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया गया। साथ ही इस बीमारी से स्थाई निजात के लिए समय समय पर जाँच कराने एवं जाँच के पश्चात आवश्यक चिकित्सा परामर्श का पालन तथा दवाई का सेवन करने के लिए प्रेरित किया गया। उक्त अभियान में रेडियो 90.4 एफएम के मो. मेहताब, आशा कार्यकर्ता लीला देवी, मोबिलाइजर सीता देवी, केएचपीटी के शानू प्रताप सिंह आदि ने लोगों को टीबी से संबंधित विस्तृत जानकारी दी। जिसमें  टीबी संक्रमण कैसे होता है, कैसे इस बीमारी के प्रभाव से दूर रहा जा सकता है, टीबी मुक्त समाज का निर्माण कैसे होगा समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी दी गई ।
– टीबी मुक्त भारत निर्माण के लिए सामुदायिक स्तर पर हर व्यक्ति का  सहयोग जरूरी :
सीडीओ डाॅ दीनानाथ ने बताया, सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक पूर्ण रूप से टीबी मुक्त भारत निर्माण का लक्ष्य रखा गया  है। इसे सार्थक रूप देने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति का  सहयोग जरूरी है। इसलिए, इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ना केवल खुद जागरूक होने की जरूरत है, बल्कि, पूरे समुदाय को भी जागरूक करने की जरूरत है। इसलिए, ना सिर्फ खुद बल्कि आपको अन्य कोई भी टीबी लक्षण वाले लोग दिखे तो उन्हें तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य जाँच और इलाज कराने के लिए प्रेरित करें। साथ ही आवश्यकतानुसार अपने स्तर से जाँच व इलाज कराने में सहयोग भी करें। आपकी यही पहल टीबी मुक्त भारत निर्माण और राष्ट्रहित में सबसे बेहतर और सराहनीय कदम होगा।
– 168 व्यक्तियों की  हुई  स्क्रीनिंग, 06  को जाँच के लिए किया गया रेफर :
केएचपीटी की  जिला टीम लीडर आरती झा ने बताया, उक्त अभियान के दौरान 168 लोगों की  स्क्रीनिंग की  गयी । जिसमें छः  व्यक्तियों को समुचित जाँच के लिए स्थानीय अस्पताल रेफर किया गया। वहीं, उन्होंने बताया, जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जाँच के लिए सरकार द्वारा मुफ्त जाँच की सुविधा बहाल की गई है । जहाँ कोई भी टीबी के लक्षण वाले  व्यक्ति निःशुल्क जाँच करा सकते हैं। जाँच के साथ निःशुल्क दवाई भी दी जाती है, जो जाँच सेंटर पर ही उपलब्ध है। इतना ही नहीं, इसके अलावा मरीजों को उचित खान-पान के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है। वहीं, उन्होंने बताया कि टीबी उन्मूलन को सफल बनाने के लिए टीबी रोगी खोज अभियान के तहत भी मरीजों को चिह्नित  कर उन्हें सरकारी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ताकि शत-प्रतिशत मरीजों को सरकार की सुविधा का लाभ मिल सके ।
– टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर जाँच के साथ इलाज शुरू कराना जरूरी :
टीबी लाइलाज नहीं है। किन्तु, समय पर जाँच और जाँच के पश्चात चिकित्सकों के सलाहानुसार इलाज शुरू कराना जरूरी है। क्योंकि, शुरुआती दौर में ही इलाज शुरू कराने  से इस बीमारी को आसानी के साथ मात दी जा सकती  है और अनावश्यक परेशानियों  का भी सामना नहीं पड़ेगा। इसके लिए सरकार द्वारा स्थानीय स्तर पर समुचित जाँच और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है । इसलिए, टीबी के लक्षण महसूस होने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में जाकर जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के अनुसार अपना इलाज भी शुरू कराएं।

सीईजीआर का 11 वां वार्षिक स्थापना दिवस का भव्य आयोजन 18 अप्रैल को ली मेरीडियन होटल नईदिल्ली में

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-देश भर के विद्वजन भाग लेंगे

ऩईदिल्ली-

सेंटर फॉर एजुकेशन गोथ एंड रिसर्च, सीईजीआर का 11 वां वार्षिक स्थापना 18 अप्रैल को ली मेरीडियन होटल नईदिल्ली में मनाया जा रहा है। इस खास आयोजन में विजन 2047 इन एजुकेशन विषय पर दूसरा सम्मिट का आयोजन किया गया है। इस खास आयोजन में 50 प्रमोटर्स, 50 वाइस चांसलर, 100 से अधिक एकेडमी लीडर्स एवं 300 से अधिक डेलीगेट्स भाग लेंगे।

सीईजीआर के डायरेक्टर रविश रोशन ने कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सीईजीआर के इस दिन भर के कार्यक्रमें चार सत्र का आयोजन किया जा रहा है जिसमें उद्घाटन सत्र, टेक्नीकल सत्र, सेकेंड टेक्नीकल सत्र एवं समापन सत्र होगा। इस खास आयोजन में देश भर के करीब पचास वीसी कार्यक्रम में भाग लेने की सहमती दे चुके हैं।

रविश रोशन ने बताया कि देश में नए एजुकेशन पॉलिसी को लागू होने पर  लगातार चर्चा हो रही है जिसे लागू करने के प्रावधानों पर खास चर्चा हो रही है। आज छात्रों को प्रायोगिक कार्यों पर जोर देने की बात कही जा रही है जिसका तारीफादरी लगातार सीईजीआर लगातार करता रहा है। विजन 2047 पर फोकस होगा।

गौरतलब है कि सीईजीआर को देश एजुकेशन का सबसे बड़ा एजुकेशन थिंक टैंक है. जिसके पास चार एनोवेशन का क्रेडिट प्राप्त है।

 

 

टीबी की घटती दर के लिए राज्य के 5 जिले हुए पुरस्कृत  

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• मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में आयी टीबी के मामलों में 60% की कमी
• 2015 के आंकड़ों के सापेक्ष में किया गया जिलों का मुल्यांकन
पटना-  राज्य सरकार 2025 तक राज्य से टीबी उन्मूलन को लेकर प्रयासरत है. इसके लिए राज्य यक्ष्मा विभाग द्वारा नित नए कदम उठाये जा रहे हैं. विदित हो कि विश्व यक्ष्मा दिवस के अवसर पर यानी 24 मार्च को जनजागरूकता के लिए पूरे राज्य में कई कार्यक्रम आयोजित किये गए. टीबी उन्मूलन अभियान के तहत राज्य के 5 जिलों को सब नेशनल सर्टिफिकेशन पुरस्कार से नवाजा गया है. जिसमें मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सिवान, सारण एवं पुर्णिया जिला शामिल है.
मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर को मिला गोल्ड मैडल: डॉ. बीके मिश्र
टीबी के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. बीके मिश्र ने बताया कि टीबी मुक्त राज्य के लिए किये जा रहे प्रयासों के तहत बेहतर कार्य करने वाले जिलों को सब नेशनल सर्टिफिकेशन पुरस्कार से नवाजा गया. टीबी उन्मूलन अभियान में जिन जिलों में 2015 के सापेक्ष में टीबी मरीजों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी आई है उन्हें पुरस्कृत किया गया है. राज्य से 12 जिले चयनित किये गए थे जिसमें बेगुसराय, भागलपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, गोपालगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पुर्णिया, समस्तीपुर, सारण एवं सिवान जिले शामिल थे.डॉ. मिश्र ने बताया कि 2015 के सापेक्ष में 60 % कमी के साथ मुजफ्फरपुर एवं समस्तीपुर जिले को गोल्ड मैडल प्रदान कर पुरस्कृत किया गया. वहीं 40 % कमी के साथ सिवान को सिल्वर मैडल एवं 20 % कमी के साथ सारण एवं पुर्णिया जिले को ब्रोंज मैडल से पुरस्कृत किया गया.
काशी में हुआ पुरस्कार वितरण समारोह:
उत्तर प्रदेश के काशी नगर में आयोजित वन वर्ल्ड टीबी समिट में पुरस्कार समारोह में जिलों को पुरस्कृत किया गया. समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सभी राज्य के कार्यक्रम पदाधिकारी, यक्ष्मा ने अपनी उपस्थिति दर्ज की

सीपीजे कॉलेज नरेला में “नौवां राष्ट्रीय प्रबंधन एवं आईटी फेस्ट-मार्केटटेक-2023” हुआ संपन्न

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सीपीजे कॉलेज नरेला (जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय से संबद्ध) ने कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया, दिल्ली मैनेजमेंट एसोसिएशन और एजुकेशन प्रमोशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहयोग से 23 से 25 मार्च, 2023 तक “सतत गुणवत्ता शिक्षा के लिए प्रौद्योगिकी का अनुकूलन” विषय पर सीपीजे कॉलेज परिसर में “मार्केटटेक-2023: 9वें राष्ट्रीय प्रबंधन और आईटी फेस्ट” का आयोजन किया। । श्री युगांक चतुर्वेदी, महानिदेशक, डॉ. ज्योत्सना सिन्हा, निदेशक और डॉ. नेहा मित्तल भास्कर, डीन ने मिलकर मुख्य अतिथियों डॉ. नितिन मलिक, रजिस्ट्रार, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय एवं प्रो. (डॉ.) ए.के. सैनी, डीन – यूएसएमएस, जीजीएसआईपीयू, दिल्ली का हार्दिक स्वागत किया, जिन्होंने क्रमशः पहले दिन, उद्घाटन समारोह और तीसरे दिन समापन समारोह में अपनी उपस्थिति और बहुमूल्य मार्गदर्शन से इस अवसर की शोभा बढ़ाई। मार्केटेक-2023 के कार्यक्रम के दौरान भारत भर के विश्वविद्यालयों/संस्थानों के लगभग 200 छात्रों ने राष्ट्रीय सम्मेलन और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया। पहला दिन राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए समर्पित था, जिसमें तकनीकी सत्र, रचनात्मकता और मुख्य भाषण ने यह भी सुझाव दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवीनतम तकनीक टिकाऊ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में किस हद तक भूमिका निभा सकती है। दूसरे दिन प्रबंधन और आईटी की प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम हुआ, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं में निम्नलिखित कार्यक्रम शामिल थे: गेमर डेन, जस्ट वेट एंड वॉच, वॉल पेंटिंग, डिजाइन लाइक ए प्रो, मार्केट क्षेत्र, मिस्टर एंड मिस कोडर, हसल 2.0, मोबाइल फोटोग्राफी। तीसरे दिन बाकी प्रतियोगिताओं जैसे प्लान डी नेगोशियो (स्टार्ट-अप बिजनेस प्लान), आईटी क्विज, डेविल फॉलो, स्टैंड अप कॉमेडियन, फन टसल मेमे-प्रतियोगिता, एडजेप, और टैप ऑन द बीट-डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विभिन्न कार्यक्रमों और माननीय अतिथियों के मुख्य भाषण के माध्यम से साहसी, जिज्ञासु और उत्सुक छात्रों को उनकी रचनात्मकता, संचार कौशल और पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बहुत लाभ हुआ। कार्यक्रम का प्रमुख निष्कर्ष यह था कि सूचना प्रौद्योगिकी की उन्नति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इनोवेटिव डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सतत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कार्यक्रम का समापन गणमान्य व्यक्तियों द्वारा पुरस्कार वितरण और सुश्री धारणा चौधरी, अकादमिक समन्वयक और मार्केटटेक-2023 के कार्यक्रम की एंकर द्वारा प्रस्तावित धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

परिवार नियोजन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को किया गया सम्मानित 

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–  सम्मान समारोह में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सीएचओ सहित स्वास्थ्य कर्मियों को सिविल सर्जन, डीपीएम ने किया सम्मानित
– परिवार नियोजन में जनवरी- दिसंबर 2022 के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने पर राज्य स्तर पर तीन कैटेगरी में मुंगेर को मिला अवार्ड
मुंगेर-
जनवरी से दिसंबर 2022 के दौरान परिवार नियोजन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया है। सदर अस्पताल परिसर स्थित क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (आरपीएमयू) सभागार में शुक्रवार को आयोजित सम्मान समारोह में जिला के विभिन्न प्रखंड से आए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, हॉस्पिटल मैनेजर, बीसीएम, बीएचएम, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ, परिवार नियोजन परामर्श दाता, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित अन्य कर्मियों को सिविल सर्जन, डीपीएम, डीसीएम सहित कई पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय, डीपीएम मो. फैजान आलम अशर्फी, डीसीएम निखिल राज, डीपीसी सुजीत कुमार, डिस्ट्रिक्ट एम & ई, आरबीएसके की डिस्ट्रिक्ट नोडल अधिकारी डॉ बिंदू, पीएसआई की डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर तस्नीम दक्षा,  सहित अर्बन पीएचसी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसाइटी के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
परिवार नियोजन में जनवरी- दिसंबर 2022 के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने पर राज्यस्तर पर तीन कैटेगरी में मुंगेर को मिला अवार्ड :
सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने बताया कि जनवरी 2022 से दिसंबर 2022 के दौरान परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मुंगेर जिला को तीन कैटेगरी में राज्य स्तरीय अवार्ड मिला है। मुंगेर जिला ने राज्य स्तर पर पीपीआईयूसीडी में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा ओरल पिल डिस्ट्रीब्यूशन में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नागलोग ने राज्य स्तर पर अवार्ड प्राप्त किया है। इसी तरह महिला बंध्याकरण कार्यक्रम में बेटर एक्सपेंडिचर में भी मुंगेर जिला को राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया है। पिछले दिनों पटना में आयोजित सम्मान समारोह में मुंगेर जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ) डॉ आनंद शंकर शरण सिंह और जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज को सम्मानित किया गया है।
जनवरी से दिसंबर 2022 के दौरान परिवार नियोजन में बेहतर काम करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को किया गया सम्मानित :
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) मो.फैजान आलम अशर्फी ने बताया कि महिला बंध्याकरण में संग्रामपुर की टीम, पुरुष नसबंदी में हवेली खड़गपुर की टीम, प्रसव उपरांत बंध्याकरण में तारापुर की टीम, पीपीआईयूसीडी में बरियारपुर की टीम और एमपीए फर्स्ट डोस में असरगंज की टीम को जनवरी  से दिसंबर 2022 के दौरान परिवार नियोजन में बेहतर काम काम करने के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा चिकित्सक के तौर पर महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी दोनो के लिए डॉ बीएन सिंह, प्रसव उपरांत बंध्याकरण के लिए डॉ बिंदू और पीएएस के लिए डॉ निर्मला कुमारी को सम्मानित किया गया।
जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि अर्बन पीएचसी कैटेगरी में आईयूसीडी के लिए प्रिया भारती, एमपीए के लिए राखी कुमारी और आशा के रूप में शीला कुमारी और माला देवी को पुरस्कार मिला है।
इसके अलावा परिवार नियोजन में एएनएम के रूप में बेहतर काम करने वाली पुष्पलता को एसीसटिन्ग स्टरलाइजेशन, पुष्पा को पीपीआईयूसीडी इंसर्शन, रश्मिलता को आईयूसीडी, गुड़िया रानी को एमपीए और रंजू कुमारी को कंट्रासेप्टिव कैटेगरी में सम्मानित किया गया है। परिवार नियोजन में सम्मानित होने वाली सीएचओ के रूप में आईयूसीडी में आरती कुमारी और एमपीए में दिव्यांका कुमारी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सम्मानित होने वाली आशा फैसिलिटेटर के रूप में रूमिला देवी और आशा कार्यकर्ता के रूप में महिला बंध्याकरण के लिए प्रेरित करने वाली किरण कुमारी, पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरित करने वाली रीता कुमारी, पीपीआईयूसीडी के लिए प्रेरित करने वाली अफसारी खातून, आईयूसीडी के लिए सलिता कुमारी, एमपीए के लिए पूनम और कंट्रासेप्टिव के लिए टेटिया बंबर को सम्मानित किया गया। इसके अलावा इस अवसर पर परिवार नियोजन के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए दो आंगनबाड़ी सेविका को भी सम्मानित किया गया।

लखीसराय की जन्मजात हृदयरोग से ग्रसित दो बच्ची को इलाज के लिए भेजा गया अहमदाबाद 

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– दोनों बच्ची का निःशुल्क होगा समुचित इलाज और मुफ्त ही मिलेगी सभी सुविधाएं
– आरबीएसके की टीम की पहल पर अभिभावक संग दोनों बच्चे को भेजा गया अस्पताल
लखीसराय, 24 मार्च-
लोगों को बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने को लेकर जहाँ सरकार पूरी तरह गंभीर है वहीं, स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है। जिसे सार्थक बनाने के लिए आरबीएसके टीम की पहल पर जिले के हलसी एवं सूर्यगढ़ा में ऐसे दो बच्ची की खोज की गई, जो जन्मजात यानी जन्म से ही हृदय रोग से ग्रसित हैं। इसमें हलसी प्रखंड के कैंदी निवासी नंदकिशोर पासवान की पुत्री शिवानी कुमारी एवं सूर्यगढ़ा प्रखंड के पहाड़पुर निवासी सुकुमार गुप्ता की पुत्री सुम्ची कुमारी शामिल हैं । दोनों बच्ची के अभिभावक अपने – अपने बच्ची का समुचित इलाज और स्वस्थ होने की उम्मीद छोड़ चुके थे। किन्तु, अब दोनों बच्चे का सरकार के सहयोग एवं स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की पहल पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना से समुचित इलाज होगा। वहीं, दोनों बच्चे को शनिवार को फ्लाइट के माध्यम से समुचित इलाज के लिए अभिभावक संग अहमदाबाद भेजा गया।
– दोनों बच्ची को सभी सुविधाएं मिलेगी मुफ्त, परिजनों को नहीं उठाना पड़ेगा खर्च :
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया, दोनों बच्ची को आने-जाने समेत सभी सुविधाएं यानी समुचित इलाज की सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त मिलेगी। इस दौरान दोनों के अभिभावकों को किसी प्रकार का खर्च उठाना नहीं पड़ेगा। वहीं, उन्होंने बताया, दोनों बच्चे को शुक्रवार को यहाँ से 102 एम्बुलेंस के माध्यम से नि:शुल्क राज्य स्वास्थ्य समिति शेखपुरा पटना भेजा गया। वहाँ सेनिःशुल्क  समुचित इलाज के लिए फ्लाइट के माध्यम से दोनों बच्चों को अभिभावक संग श्री सत्य साईं अस्पताल अहमदाबाद भेजा जाएगा।
– दोनों बच्ची का निःशुल्क होगा समुचित इलाज :
आरबीएसके जिला समन्वयक  डाॅ शिव शंकर कुमार ने बताया, जन्मजात हृदय रोगों से पीड़ित दोनों बच्ची का निःशुल्क समुचित इलाज होगा। साथ ही दोनों बच्ची के साथ-साथ दोनों के अभिभावकों का भी खर्च सरकार द्वारा ही वहन किया जाएगा। जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को साँस लेने में परेशानी होती है। हमेशा सर्दी-खांसी रहती है। चेहरे, हाथ, होंठ नीला पड़ने लगता है। जिसके कारण गंभीर होने पर बच्चों के दिल में छेद हो जाता है। ऐसे बच्चों का आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) द्वारा इलाज कराया जाता है।
– छोड़ चुके थे इलाज की उम्मीद, अब जगी उम्मीद की नई किरण :
दोनों बच्ची के अभिभावकों ने बताया, हमलोग तो अपने बच्चे के समुचित और स्थाई इलाज की उम्मीद ही छोड़ चुके थे। क्योंकि, ना ही स्थानीय स्तर पर समुचित इलाज की व्यवस्था उपलब्ध थी और ना ही बाहर में इलाज कराने के लिए पर्याप्त पैसा था। किन्तु, इसी बीच जब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा समुचित इलाज, वो भी पूरी तरह मुफ्त होने की जानकारी मिली कि पूरे परिवार में उम्मीद की नई किरण जग गई। इसके लिए मैं स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सरकार का ताउम्र ऋणी रहूँगा। वहीं, दोनों बच्ची के अभिभावक ने इलाज की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग एवं सरकार का आभार जताते हुए धन्यवाद दिया है।

समाज कल्याण मंत्री ने वृद्धि निगरानी प्रचार रथ को झंडी दिखाकर किया रवाना

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• 25 मार्च से 1 अप्रैल तक पोषण एवं स्वास्थ्य संदेशों को फैलाएगा प्रचार रथ
• पोषण संबंधी आदतों में साकारात्मक परिवर्तन लाना है पोषण पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य- मदन साहनी
पटना-
राज्य में 20 मार्च से 3 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान राज्य के प्रत्येक जिले में 25 मार्च से 1 अप्रैल तक वृद्धि निगरानी प्रचार रथ का परिचालन किया जायेगा. इसी संदर्भ में आज शुक्रवार को समाज कल्याण मंत्री, बिहार सरकार, श्री मदन साहनी द्वारा प्रतीक स्वरूप 5 वृद्धि निगरानी प्रचार रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया गया।  इस अवसर पर मंत्री, समाज कल्याण विभाग ने बताया कि समाज कल्याण विभाग राज्य के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हाशिये पर रहने वाली आबादी को स्वस्थ आदतों और व्यवहार परिवर्तन करने के लिए प्रतिबद्ध है.
माँ का पहला दूध नवजात शिशु के लिए जरुरी:
इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री ने कहा कि पोषण पखवाड़ा में समुदाय के बीच पोषण के महत्त्व का संदेश प्रसारित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है. गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के पोषण के बारे में समुदाय को जागरूक किया जायेगा. विभाग के प्रयासों का परिणाम है कि नवजात शिशु को अब माताएं अपना पहला दूध पिला रहीं हैं और 6 महीने तक सिर्फ स्तनपान के महत्त्व को समझ रहीं हैं. मोटे अनाजों का सेवन जो आसानी से घर में उपलब्ध होते हैं उनका उपयोग करने के बारे में जागरूक किया जायेगा. उन्होंने बताया कि वृद्धि निगरानी प्रचार रथ के माध्यम से विभाग द्वारा संचालित सभी कार्यक्रमों के लाभ के बारे में भी लोगों को बताया जायेगा.
पोषण मानकों में हो रहा सुधार:
समाज कल्याण मंत्री, मदन साहनी ने बताया कि राज्य में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर करने एवं कुपोषण को दूर करने की दिशा में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में समाज कल्याण विभाग के साथ कई अन्य सहयोगी संस्थाओं और विभागों के द्वारा सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं और आंकड़ों में निरंतर सुधार भी परिलिक्षित होते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 10 वर्षों में राज्य की शिशु मृत्यु दर 42 से घटकर 27 पर आ गयी है. पांच वर्ष तक के बच्चों में व्याप्त कुपोषण का मुख्य संकेत यानि नाटापन में पिछले 7 वर्षों में लगभग 6 प्रतिशत और उम्र के अनुसार कम वजन के बच्चों की संख्या 3 प्रतिशत तक घटी है.
मोटे अनाजों और उनके सेवन के उपयोग पर दिया जा रहा बल:
समाज कल्याण मंत्री ने बताया कि विभाग की प्राथमिकताओं में सबसे प्रमुख है कि हम अधिक से अधिक लोगों और उनके परिवारों को पोषण को बढ़ाने वाली बातों, विशेषकर दो वर्ष तक के बच्चों के लिए बताएं ताकि वह खुद ही जागरूक बनें और पोषण की आदतों को अपने व्यवहार  में शामिल कर बिमारियों से बचें. उन्होंने बताया कि हमारे देश में परंपरागत रूप से उगाये जा रहे मोटे अनाजों को खाने के लिए प्रेरित करना आज की सबसे महत्वपूर्ण मांग है. इनमे प्रोटीन, विटामिन, खनिज एवं फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं जो समाज को कुपोषण मुक्त बनाने के साथ मधुमेह, रक्तचाप एवं मोटापे जैसे रोगों से भी बचाएगा.
वृद्धि निगरानी प्रचार रथ के द्वारा प्रसारित किया जायेगा पोषण का संदेश:
समाज कल्याण मंत्री ने बताया कि पोषण पखवाड़ा में समुदाय के बीच पोषण का संदेश प्रसारित करने के लिए विभाग द्वारा सभी जिलों में पोषण एवं स्वास्थ्य संदेशों से युक्त वृद्धि निगरानी प्रचार रथ को  भेजा जा रहा है ताकि जनसमुदाय को पोषण और स्वास्थ्य से जुडी सही बातें उनके द्वार तक पहुंचे. उन्होंने बताया कि ऐसे समय में पोषण जागरूकता के कार्य के लिए सभी सहयोगी विभागों, संस्थानों, जनप्रतिनिधियों एवं समुदाय के लोगों को आगे आने की जरुरत है।
इस अवसर पर निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं डॉ. कौशल किशोर, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

संतुलित और पौष्टिक आहार को देशव्यापी अभियान बनाएं

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• “पोषण पखवाड़ा” के क्रम में स्वैच्छिक संस्था “पाथ” ने आयोजित किया वेबिनार
• न कम खाएँ न ज्यादा, संतुलित और पौष्टिक आहार खाएँ : डॉ. हिमांशु भूषण
• जलवायु के अनुकूल मिलने वाले स्थानीय चीजें जरूर खाएँ : डॉ. कौशल किशोर

पटना, 24 मार्च

संतुलित और पौष्टिक भोजन केवल शरीर की जरूरत नहीं, सबल राष्ट्र के निर्माण के लिए भी जरूरी है। अपने जलवायु क्षेत्र में उपलब्ध स्थानीय और मोटे अनाज, फल और सब्जियों को कमतर नहीं आंकें। यही आपके लिए पौष्टिक आहार बनेंगे। इस विषय को देशव्यापी अभियान बनाना होगा तथा दैनिक आधार पर लोगों को जागरूक करना होगा। “पोषण पखवाड़ा” के क्रम में यहाँ स्वैच्छिक संस्था “पाथ” द्वारा आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने ये विचार व्यक्त किये। स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व आयुक्त डॉ. हिमांशु भूषण और आई.सी.डी.एस. के निदेशक डॉ. कौशल किशोर इस वेबिनार के मुख्य वक्ता थे। इसमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत पूरे राज्य के 62 स्वयंसेवी सस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

स्वास्थ्य मंत्रालय के पूर्व आयुक्त और वर्तमान में नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर के सलाहकार डॉ. हिमांशु भूषण ने कहा कि न कम खाएँ न ज्यादा। संतुलित और पौष्टिक आहार थोड़े-थोड़े समय पर खाएँ। स्वस्थ शरीर, संतुलित शारीरिक विकास और शारीरिक अंगों के ठीक से काम करने के लिए ये जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक ही खाद्य-पदार्थ में शरीर के लिए जरूरी सभी पौष्टिक तत्व नहीं मिलते हैं, लेकिन अलग-अलग तरह के भोज्य पदार्थों के मिश्रण से ऐसा संभव है। इसलिए मिश्रित आहार लें, जिसमें मोटे अनाज, हरी सब्जियाँ, स्थानीय फल, दूध और दूध उत्पाद, नमक-पानी आदि सभी चीजें हों। ऐसा करने से हम अस्पताल के खर्च और दवाई से काफी समय तक बचे रह सकते हैं।

डॉ. हिमांशु भूषण ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को विशेष रूप से समझाने की जरूरत है। वे संतुलित और पौष्टिक आहार पर केवल पुरुषों का अधिकार मानती हैं। जबकि ये चीजें उनके लिए ज्यादा जरूरी हैं। गर्भवती महिलाओं को इसकी ख़ास दरकार होती है। स्वस्थ गर्भवती ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। ऐसी महिलायें तात्कालिक कमियों को रोग ही नहीं मानतीं हैं, जबकि उसी समय सावधान हो जाएँ तो डॉक्टर के पास जाने की नौबत नहीं आयेगी। उन्होंने रोगों का उदाहरण देकर समझाया कि इसे संतुलित और पौष्टिक आहार से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलायें समय से और अधिक भोजन लें। इसी तरह बच्चों को अन्नप्रासन के समय केवल मीठा खिलाने का चलन है। यह गलत है। उसे थोड़ा नमकीन भी दें। बचपन से ही जब बच्चा सभी चीजों का स्वाद समझने लगेगा तो बड़ा होकर किसी भी चीज को खाने में आनाकानी नहीं करेगा।

आई.सी.डी.एस. के निदेशक डॉ. कौशल किशोर ने कहा कि लोगों में और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी चीजों को कमतर आंकने की प्रवृति है। उन्हें महंगा सेब ही मुफीद लगता है जबकि अपने घर में उपजने वाला केला और अमरुद खराब लगता है। इस भ्रान्ति को हमलोगों को मिलकर दूर करना होगा। उन्होंने जीवन शैली ठीक करने, आचार-व्यवहार जलवायु के अनुकूल बनाने और पोषण संबंधी भ्रांतियों को दूर करने की बात कही। उन्होंने लोगों से मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी का उपयोग बढाने और अपने मुख्य भोजन का हिस्सा बनाने की अपील की।

वेबिनार का संचालन पाथ के कुमार सौरभ ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष ने किया। पाथ के राज्य प्रमुख अजीत कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन किया।

जागरूकता कार्यक्रम कर लोगों को टीबी की दी गई जानकारी

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-सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता के बारे में भी लोगों को बताया गया
-टीबी दिवस पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर केएचपीटी ने किया कार्यक्रम
भागलपुर, 24 मार्च-
विश्व टीबी दिवस के अवसर पर शुक्रवार को घोघा के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस दौरान सीएचओ राहुल कुमार, एएनएम सीमा कुमारी, जीविका की सीएम नूतन देवी, आंगनबाड़ी सेविका स्वीटी कुमारी, आशा अनुषा कुमारी, बेबी कुमारी और अन्य कई आशा उपस्थित हुईं। जागरूकता कार्य़क्रम के दौरान लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी गई। केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि विश्व टीबी दिवस पर इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम पर ज्यादा जोर दिया गया। इस बार की थीम यस, वी कैन इंड टीबी है। यानी कि हमलोग मिलकर टीबी को खत्म कर सकते हैं। इसके लिए लोगों में भरोसा पैदा करना ज्यादा जरूरी है। इसी मकसद से जागरूकता कार्यक्रम पर जोर दिया गया। ऐसा देखा जाता है कि टीबी के मामले ज्यादा घनी आबादी वाले क्षेत्रों या ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाता है, जहां कि शिक्षा की दर कम हो। इसलिए उन जगहों पर जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने का काम किया गया।
टीबी को लेकर जागरूकता अभियान तेज: आरती झा ने बताया कि जिले में टीबी को लेकर जागरूकता अभियान को तेज कर दिया गया  है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त बनाने के लिए हर तरफ से प्रयास हो रहा है। इसी सिलसिले में विश्व टीबी दिवस के अवसर पर लोगों को सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी गई। उन्हें यह बताया गया कि अगर इलाज के दौरान कोई परेशानी हो तो आपलोग हमसे संपर्क कर सकते हैं। वैसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी टीबी मरीजों पर नजर रखी जाती है। उन्हें होने वाली परेशानियों को दूर किया जाता है।
सरकारी अस्पतालों में टीबी का नि:शुल्क और बेहतर इलाज: जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि टीबी को लेकर आने वाले दिनों में जागरूकता अभियान और तेज किया जाएगा। लोगों से मैं यही अपील करना चाहूंगा कि अगर लगातार दो हफ्ते तक खांसी हो या फिर बलगम के साथ खून निकले, शाम के वक्त लगातार पसीना निकले या फिर लगातार बुखार रहे तो अपने नजदीकि सरकारी अस्पताल जांच कराएं जाएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो आपका नि:शुल्क और बेहतर इलाज होगा। डॉ. दीनानाथ ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्था है। जांच, इलाज से लेकर दवा तक की व्यवस्था मुफ्त है। इसलिए लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। अगर जरा सा भी टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए।

टीबी दिवस पर लोगों को किया गया जागरूक

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–टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की दी गई जानकारी
–जिले के अस्पतालों में कार्यक्रम का किया गया आयोजन
बांका, 24 मार्च-
विश्व टीबी दिवस पर शुक्रवार को जिले में जागरूकता कार्यक्रम किए गए। जिले के सभी पीएचसी, सीएचसी और हेल्थ एंड वेलनस सेंटर में कार्यक्रम का आयोजन कर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया गया। जागरूकता कार्य़क्रम के दौरान लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी गई। सीडीओ डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि विश्व टीबी दिवस पर इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम पर ज्यादा जोर दिया गया। इस बार की थीम यस, वी कैन इंड टीबी है। यानी कि हमलोग मिलकर टीबी को खत्म कर सकते हैं। इसके लिए लोगों में भरोसा पैदा करना ज्यादा जरूरी है। इसी मकसद से जागरूकता कार्यक्रम पर जोर दिया गया। ऐसा देखा जाता है कि टीबी के मामले ज्यादा घनी आबादी वाले क्षेत्रों या ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाता है, जहां कि शिक्षा की दर कम हो। इसलिए उन जगहों पर जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने का काम किया गया।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की व्यवस्था मुफ्तः डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज की मुफ्त व्यवस्था है। जांच, इलाज से लेकर दवा तक की व्यवस्था मुफ्त है। इसलिए लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। अगर जरा सा भी टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए। जल्द इलाज शुरू होने से टीबी जल्द ठीक हो जाता है और दूसरे लोगों में भी इसका प्रसार नहीं होता है।
सरकारी सुविधाओं की भी दी गई जानकारीः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय ने बताया कि विश्व टीबी दिवस पर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक तो किया ही गया। साथ में सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। लोगों को यह बताया गया कि न सिर्फ इलाज और दवा मुफ्त है, बल्कि जब तक इलाज चलता है तब तक सरकार की तरफ से पांच सौ रुपये प्रतिमाह मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए राशि भी निक्षय पोषण योजना के तहत दी जाती है। इसलिए अगर आर्थिक तौर पर भी कोई सक्षम नहीं है तो उसके इलाज की भी व्यवस्था है। उन्हें कोई चिंता नहीं करनी चाहिए।
मंडल कारा में लगाया गया जागरूकता शिविरः टीबी दिवस पर बांका मंडल कारा में सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान यहां चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोहित कुमार और डीपीएस गणेश झा ने कैदियों को टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी । इसके अलावा कुछ लोगों की जांच के लिए सैंपल भी लिए गए। इस मौके पर जेल सुप्रिटेंडेंट सुजीत कुमार, एसटीएस शिवरंजन कुमार, एसटीएलएस संजय कुमार सिंह, एलटी अवधेश कुमार ज्योति, एएनएम इंदु चौधरी और एमडब्ल्यूए नंदलाल साह भी मौजूद थे।