भारत कौशल-आधारित सीखने की संरचना स्थापित कर रहा है :- धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा मंत्री

0

कौशल पारिस्थितिकी तंत्र में डिजिटल पाठ्यक्रम के जरिए 2.5 मिलियन छात्र नौकरी के लिए तैयार हो रहे हैं।

नई दिल्ली, 11 अप्रैल, 2023: केंद्रीय शिक्षा मंत्री और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री (MSDE) श्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को नई दिल्ली में फ्यूचर स्किल्स फोरम में भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नामांकित छात्रों के लिए रोजगार कौशल पाठ्यक्रम के डिजिटल संस्करण का अनावरण किया।

असल में, द फ्यूचर स्किल्स फोरम – फ्यूचर राइट स्किल्स नेटवर्क (FRSN) की एक पहल है, जो QUEST एलायंस, एक्सेंचर, सिस्को और जेपी मॉर्गन का एक सहयोगी प्रयास है। यह युवाओं को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कौशल हासिल करने में मदद करने के लिए सरकारी कौशल प्रशिक्षण संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों, उद्योग और कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी भागीदारों को एक साथ लाता है। डिजिटल पाठ में वित्तीय और डिजिटल साक्षरता, विविधता और समावेश, करियर विकास, लक्ष्य निर्धारण और उद्यमिता पर मॉड्यूल शामिल हैं। ये उन्नत ES पाठ्यक्रम से तैयार किए गए हैं,जिसे सितंबर 2022 में MSDE द्वारा लॉन्च किया गया था।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “भारत एक कौशल-आधारित सीखने की संरचना स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो छात्रों के बीच ज्ञान-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देता है। यह बेहद महत्वपूर्ण है कि हम चल रहे परिवर्तनों के संदर्भ में आजीवन सीखने पर पुनर्विचार करें और एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे का निर्माण करें, जो भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने में योगदान देगा।

वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समय, कहीं भी सीखने की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से, ये मॉड्यूल भारत सरकार के भारत कौशल पोर्टल के साथ-साथ अन्य प्लेटफार्मों के माध्यम से 2.5 मिलियन शिक्षार्थियों के लिए सुलभ होंगे। सक्रिय उद्योग योगदान के साथ विकसित, पाठ्यक्रम में बाइट-साइज़, गेमिफाइड प्रारूप में 12 मॉड्यूल शामिल हैं और प्रत्येक पाठ के बाद मूल्यांकन किया जाता है। इससे शिक्षार्थियों को उनके सीखने की गहराई का आकलन करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। मॉड्यूल में कहानी सुनाने का तरीका शिक्षार्थियों को संबंधित परिदृश्य प्रदान करता है, जिसे वे वास्तविक दुनिया की स्थितियों में लागू कर सकते हैं।

क्वेस्ट एलायंस के सीईओ आकाश सेठी ने बताया कि डिजिटल पाठ शिक्षार्थियों के लिए बेहद उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि युवा प्रौद्योगिकी की ओर आकर्षित होते हैं, जो उन्हें कौशल सीखने और फिर से सीखने का स्थान प्रदान करती है। इसकी उन्हें भविष्य के लिए जरूरत होगी। इसलिए यह जरूरी है कि युवा आजीविका के साथ काम करने वाला कोई भी हितधारक इस बदलते परिदृश्य को समझे।

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में मिश्रित शिक्षण जैसे नवीन शैक्षणिक मॉडल पेश करने में डिजिटल पाठ सहायक होंगे, जो शिक्षकों को 21 वीं सदी की कक्षाओं का निर्माण करने और उनका नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाएंगे।

रोजगारपरक स्किल्स की जरूरत के बारे में बताते हुए जे.पी. मॉर्गन में एशिया पैसिफिक के लिए परोपकार की प्रमुख मनीषा चड्ढा ने कहा, “हम भारत में कार्यबल की तैयारी के समर्थन में इस उन्नत स्किलिंग प्रोग्राम पर काम करके बहुत खुश हैं। हमारा मानना है कि सकारात्मक नई चीजों को अपनाना महत्वपूर्ण है। शिक्षण रणनीतियों और उपकरणों को कक्षा में यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारे तकनीकी प्रशिक्षण और शैक्षिक संस्थानों में रोजगार कौशल प्रभावी ढंग से प्रदान किए जाते हैं। संचार, टीम वर्क, स्व-शिक्षण, महत्वपूर्ण सोच और समस्या-समाधान जैसे कौशल लाखों वंचित युवाओं को दुनिया में संक्रमण में मदद करेंगे। हम आत्मविश्वास के साथ काम करें।

कोविड संक्रमण -सदर अस्पताल में मॉक-ड्रिल का आयोजन, उपलब्ध सुविधाओं की ली गई जानकारी

0

– सिविल सर्जन एवं डीआईओ के नेतृत्व में माॅक-ड्रिल का आयोजन, दिए जरूरी निर्देश
– कोविड के खतरे से बचाव के लिए सतर्कता और सावधानी जरूरी

लखीसराय-

एकबार फिर से कोविड के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर स्थानीय जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। ताकि किसी भी प्रकार का कोई खतरा उत्पन्न नहीं हो सके और संपूर्ण जिला कोविड के खतरे से दूर रह सके। सोमवार को सदर अस्पताल परिसर में स्थित कोविड केयर सेंटर में सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा के साथ जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती एवं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डाॅ राकेश कुमार के नेतृत्व में माॅक-ड्रिल का आयोजन हुआ। जिसके दौरान दोनों पदाधिकारियों ने कोविड से निपटने के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों का बारीकी के साथ निरीक्षण किया। जिसके पश्चात् मौजूद पदाधिकारियों एवं कर्मियों को कई आवश्यक और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ बीपी सिन्हा ने मौजूद पदाधिकारियों एवं कर्मियों से आवश्यक और जरूरी जानकारी भी ली । वहीं, डाॅ भारती ने कहा, कोविड के खतरे से सुरक्षित रहने के लिए सर्तकता और सावधानी बेहद जरूरी है। क्योंकि, इससे पूर्व भी इसी दोनों उपायों का पालन कर कोविड के प्रभाव को खत्म करने में सफलता मिली थी। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि सतर्क और सावधान रहें तथा कोविड गाइडलाइन का पालन करें।

– कोविड के खतरे से निपटने के लिए उपलब्ध है समुचित संसाधन :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार कोविड संक्रमण की शिकायत मिल रही है। इसलिए, बचाव के लिए लोगों को सावधान और सतर्क रहने की आवयश्कता है। वहीं, उन्होंने बताया, कोविड के खतरे से निपटने के लिए समुचित संसाधन की व्यवस्था उपलब्ध है, जिसे और मजबूत व दुरुस्त बनाने के लिए माॅक-ड्रिल का आयोजन किया गया। ताकि संसाधनों में कोई कमी नहीं रहे और हर स्थिति से निपटा जा सके। वहीं, उन्होंने बताया, कोविड के खतरे से निपटने के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य स्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को भी आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए हैं।

– मास्क का उपयोग और साफ-सफाई का रखें ख्याल :
कोविड के खतरे से बचाव के लिए मास्क का उपयोग और साफ-सफाई का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। क्योंकि, कोविड से बचाव के लिए यह दोनों उपाय सबसे बेहतर और कारगर है। इसलिए, सामुदायिक स्तर पर सभी लोगों को मास्क का उपयोग और साफ-सफाई का ख्याल रखने समेत अन्य गाइडलाइन का पालन करना जरूरी है। ताकि सभी लोग कोविड के खतरे से दूर और सुरक्षित रह सकें ।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सेनेटाइजर का उपयोग करें।

गर्भकाल में माँ का तनावग्रस्त होने गर्भस्थ शिशु के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए घातक- डॉ. अरुण कुमार सिंह

0

 

• जीवन के पहले 1000 दिन की महत्ता पर वेबिनार का हुआ आयोजन
• आईसीडीएस एवं पाथ के तत्वावधान में वेबिनार का हुआ आयोजन

पटना-
जीवन के प्रथम हजार दिन में सही व पर्याप्त पोषण स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कुंजी है. शिशु के विकास, प्रतिरोधक क्षमता एवं स्वस्थ जीवन की नीव प्रथम हजार दिनों में ही तय हो जाती है. प्रथम हजार दिनों में ही शिशु के मस्तिष्क का विकास प्रारंभ हो जाता है और इसी समय उसके जीवन भर के स्वास्थ्य की नीव पड़ती है. प्रथम हजार दिनों की महत्ता को उजागर करने एवं मातृ एवं शिशु पोषण की जरुरत को उजागर करने के लिए आईसीडीएस एवं पाथ संस्था के तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन किया गया. वेबिनार में निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं, डॉ. कौशल किशोर, पाथ के राज्य प्रमुख अजीत कुमार सिंह, एम्स जोधपुर के नियोनेटोलोजी विभाग के प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह, सभी जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सहित कई स्वयंसेवी संस्था के सदस्य तथा विशेषग्य शामिल रहे. कार्यक्रम का संचालन पाथ के राज्य प्रमुख अजीत कुमार सिंह ने किया.
गर्भवती माता का तनावग्रस्त रहना उसके गर्भस्थ शिशु के लिए घातक:
वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एम्स जोधपुर के नियोनेटोलोजी विभाग के प्रोफेसर अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गर्भस्थ शिशु का अपने माँ के साथ मानसिक और शारीरिक दोनों जुड़ाव होता है. गर्भकाल में माता का तनावग्रस्त होना उसके गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास में अवरोधक साबित होता है. डॉ. सिंह ने बताया कि 30 प्रतिशत समय से पहले जन्मे शिशु के पीछे नवजात की माँ का तनाव में रहना होता है. एक तनावग्रस्त माता का नवजात अल्पवजनी एवं मानसिक रूप से कमजोर होता है.
40 माह तक विकसित होता है गर्भस्थ शिशु के दिमाग:
डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि अक्सर आज के समय में चिकित्सक माता के गर्भधारण के 9 माह पूरे होते ही प्रसव कराने का प्रयास करते हैं. यह सही नहीं है क्यूंकि एक बच्चा अपने जन्म का समय और दिन खुद तय करता है. गर्भस्थ शिशु का मानसिक विकास माँ के गर्भ में 40 हफ़्तों तक होता है. उन्होंने बताया कि सभी चिकिसकों को बच्चे के जन्म के लिए 40 हफ़्तों तक इंतजार करना चाहिए अगर माता के साथ कोई गम्भित स्थिति नहीं हो.
माँ के भोजन से तय होता बच्चे के भविष्य में खानपान में रूचि:
डॉ. सिंह ने बताया कि गर्भकाल में एक महिला क्या भोजन करती है इसका सीधा असर उसके होने वाले बच्चे के खानपान की ओर झुकाव पर पड़ता है. गर्भकाल के तीसरी तिमाही से गर्भस्थ शिशु के मष्तिष्क का जुड़ाव सीधा उसकी माँ से होता है. डॉ. सिंह ने बताया कि इस समय माँ का तनाव में होना अथवा उससे रुखा व्यवहार शिशु के मष्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डालता है जिसे हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि घर में उपलब्ध वस्तुओं से पोषण पाया जा सकता है. उन्होंने प्रतिभागियों को भोजन में पोषण को बरक़रार रखने के टिप्स भी बताये

मिशन परिवार विकास अभियान-महिला बंध्याकरण,पुरुष नसबंदी सहित परिवार नियोजन के चार इंडिकेटर्स में मुंगेर राज्यभर में पहले स्थान पर

0

– पिछले महीने 05 से 25 मार्च तक चला यह अभियान
– आईयूसीडी में मुंगेर जिला राज्यभर में दूसरे पायदान पर, पहले स्थान पर खगड़िया
– मिशन परिवार विकास अभियान में मुंगेर जिला में निर्धारित लक्ष्य से अधिक महिलाओं का हुआ बंध्याकरण

मुंगेर, 07 अप्रैल-

पिछले महीने 05 से 25 मार्च तक चले मिशन परिवार विकास अभियान के दौरान महिला बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी सहित परिवार नियोजन के कुल चार इंडिकेटर्स में मुंगेर जिला राज्य भर में पहले स्थान पर आया है। इस आशय की जानकारी जिला के सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने दी। उन्होंने बताया कि जिला स्वास्थ्य समिति के पदेन अध्यक्ष सह जिलाधिकारी नवीन कुमार के कुशल नेतृत्व में परिवार नियोजन के क्षेत्र में मुंगेर जिला ने राज्य भर में एक बार फिर से कीर्तिमान स्थापित किया है। परिवार नियोजन के कुल चार इंडिकेटर्स में मुंगेर जिला ने राज्य भर में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा आईयूसीडी में भी मुंगेर जिला ने राज्य भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि महिला बंध्याकरण में मुंगेर जिला ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक महिलाओं का बंध्याकरण करवाकर राज्य भर में पहला स्थान प्राप्त किया है। परिवार नियोजन के क्षेत्र में मुंगेर जिला की यह उपलब्धि जिला भर में कार्यरत सभी स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंट लाइन वर्कर के अथक मेहनत का परिणाम है । मैं सभी स्वास्थ्य कर्मी और फ्रंट लाइन वर्कर को उनकी इस सफलता पर हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) मो. फैजान आलम अशरफी ने बताया कि महिला बंध्याकरण में मुंगेर जिला को राज्य से 1140 का लक्ष्य मिला था । निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध मुंगेर जिला ने लक्ष्य से अधिक 1820 महिलाओं का बंध्याकरण करवाकर 159.6% सफलता के साथ पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं पुरुष नसबंदी में भी मुंगेर जिला ने निर्धारित लक्ष्य 105 के विरुद्ध 64 पुरुषों की नसबंदी करवाकर 61.0% सफलता के साथ राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया है।
इसके अलावा परिवार नियोजन के आईयूसीडी इंडिकेटर्स में मुंगेर जिला ने निर्धारित लक्ष्य 1630 के विरुद्ध 868 का लक्ष्य हासिल किया है। जो निर्धारित लक्ष्य का 53.3% है। इस मामले में खगड़िया जिला ने निर्धारित लक्ष्य 1625 के विरुद्ध 937 का लक्ष्य हासिल कर 57.7% सफलता के साथ पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है।

जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि जिला पदाधिकारी नवीन कुमार के द्वारा किए गए कुशल नेतृत्व और लगातार अनुश्रवण का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2022- 23 के दौरान परिवार नियोजन के लिए चलाए गए सभी विशेष अभियान में मुंगेर जिला ने राज्य भर में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है। मार्च में चले परिवार नियोजन के विशेष अभियान के दौरान अंतरा गर्भ निरोधक इंजेक्शन के मामले में मुंगेर जिला ने निर्धारित लक्ष्य 2580 के विरुद्ध 1022 का लक्ष्य हासिल कर राज्य भर में तीसरा स्थान प्राप्त किया है जो निर्धारित लक्ष्य का 39.6% है। इस मामले में 75.5% के साथ सारण जिला राज्य भर में पहले वहीं 55.3% सफलता के साथ किशनगंज राज्य भर में दूसरे स्थान पर आया है। इसके अलावा कंडोम (निरोध) और माला एन के वितरण के मामले में भी क्रमशः 90% और 36% के साथ मुंगेर जिला ने राज्य भर में पहला स्थान प्राप्त किया है।

टेली कंस्लटेशन के लिए अब हर महीने के पहले और तीसरे बुधवार को संचालित होगा विशेष अभियान

0

–राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिलों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
– अब ई. संजीवनी ओपीडी की सेवाएं स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रत्येक दिन लोगों हो रही है उपलब्ध

मुंगेर-
टेली कंस्लटेशन के लिए अब प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे बुधवार को विशेष अभियान संचालित होगा । उक्त आशय की जानकारी जिला के सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सात निश्चय पार्ट टू कार्यक्रम के तहत सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को टेली मेडिसिन सेवा के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। पहले ये सेवाएं सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही मिल पाती थी लेकिन अब जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से प्रतिदिन ई. संजीवनी ओपीडी की सेवाएं लोगों को मिल पा रही है। इसके साथ ही टेली मेडिसिन सेवाओं को और ज्यादा प्रभावी बनाने और इसका लाभ अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे बुधवार को टेली कंसलटेंशन से संबंधित विशेष अभियान संचालित करने का निर्देश जारी किया है। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर सभी जिलों के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सभी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किया है।

जिला भर में टेली मेडिसिन सेवाओं को प्रभावी बनाने का हो रहा है प्रयास :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. फैजान आलम अशर्फी ने बताया कि विभागीय स्तर पर प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे बुधवार को इसे लेकर विशेष अभियान संचालित करने का निर्देश राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त हुआ है। प्राप्त निर्देश के आलोक में इस अभियान के सफल संचालन एवं इसका प्रभावी क्रियान्वयन कराने के उद्देश्य से हर स्तर पर जरूरी प्रयास किया जा रहा है। इसको लेकर संबंधित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि ई. संजीवनी एक वेब आधारित व्यापक टेली मेडिसिन सेवा है। यह ग्रामीण क्षेत्र के वंचित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कराता है। उपलब्ध चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार,बुनियादी ढांचे एवम मानव संसाधन में कमी की समस्या से निपटने में यह विशेष रूप से कारगर है। टेली मेडिसिन सेवा में विशेषज्ञ चिकित्सक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं।

आम लोगों के बेहद उपयोगी है ई. संजीवनी टेली मेडिसिन सेवा :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) सुजीत कुमार ने बताया कि ई. संजीवनी सेवाओं के माध्यम से मरीज इलाज के लिए अस्पताल आने की झंझट से मुक्ति प्राप्त कर लेता है। लोग घर बैठे ही विशेषज्ञ चिकित्सक से अपने रोग के बारे में जरूरी परामर्श ले सकते हैं। इससे आम लोगों को भीड़भाड़ र सहित अन्य वजहों से संक्रमण के खतरों का भी सामना नहीं करना पड़ता है। टेली मेडिसिन सर्विस के माध्यम से मरीज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी समस्या हब में बैठे चिकित्सकों के पास रख सकते हैं। चिकित्सकों से उन्हें उचित परामर्श एवं दवा का सुझाव दिया जाता है। इसके बाद वो नजदीकी किसी भी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर निः शुल्क दवा प्राप्त कर सकते हैं।

हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के पदाधिकारियों ने जिला पार्षद के साथ किया निरीक्षण

0

 

– रामगढ़ प्रखंड स्थित तेतरहट सेंटर का किया गया निरीक्षण, ली गई उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी

– निरीक्षण के दौरान गर्भवती जिला पार्षद ने खुद भी करवाई जाँच

 

लखीसराय-

 

सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा के निर्देशानुसार गुरुवार को गठित स्वास्थ्य टीम स्थानीय जिला पार्षद खुशबू कुमारी व मुखिया पिंकी देवी के साथ निरीक्षण के लिए रामगढ़ प्रखंड स्थित तेतरहट हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पहुँची । जहाँ गठित स्वास्थ्य टीम में शामिल डीपीसी सुनील कुमार एवं केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान ने सेंटर पर उपलब्ध सभी स्वास्थ्य सुविधाओं की  बारिकी के साथ मौजूद अफसरों से जानकारी ली। साथ ही सेंटर पर मौजूद मरीजों से भी मिल रही स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जाना। जिसके बाद सेंटर के मौजूद पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को कई जरूरी और आवश्यक निर्देश दिए। इस  दौरान मरीजों को और बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने, सेंटर पर आने वाले लोगों का हर स्तर पर ख्याल रखने, सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही स्वास्थ्य से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने समेत अन्य आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए।

 

– सेंटर पर बेहतर  स्वास्थ्य सुविधाएं कराई जाती हैं  मुहैया :

निरीक्षण टीम में शामिल केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान ने बताया, निरीक्षण के दौरान दिखा कि सेंटर पर मरीजों को अच्छी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाती है। निरीक्षण टीम में शामिल जिला पार्षद खुशबू कुमारी खुद भी गर्भवती हैं। जिसके कारण उन्होंने भी अपनी स्वास्थ्य से संबंधित जरूरी और आवश्यक जाँच करवाई। जिसके पश्चात् वह स्वास्थ्य सुविधा से संतुष्ट दिखी और सेंटर की  पूरी टीम की  सराहना भी की। वहीं, उन्होंने बताया, सेंटर पर जो भी मरीज आते हैं, सभी को अच्छी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाती है।

 

– बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी किया जाता है :

डीपीसी सुनील कुमार ने बताया, सेंटर पर आने वाले मरीजों को तो बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई ही जाती है। इसके साथ सरकार द्वारा जनहित में चलाई जा रही स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सभी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को जागरूक भी किया जाता है। ताकि एक भी व्यक्ति  सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं रहे और क्षेत्र के अधिकाधिक जरूरतमंद लोग लाभ प्राप्त कर सकें । वहीं, उन्होंने बताया, सेंटर पर पीएचसी  की  तरह सभी दिन दिन लोगों को स्वास्थ्य सुविधा कराई जाती है। ताकि लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े और सामुदायिक स्तर पर सभी लोग सुविधाजनक तरीके से अपना इलाज करवा सकें ।

कोरोना संक्रमण से उबर चुके लोगों को टीबी से संक्रमित होने का खतरा अधिक, रहें सावधान

0

– लगातार कई दिनों तक खाँसी रहने पर तत्काल कराएं जाँच
– जिलाभर के सभी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है टीबी जांच की सुविधा
– टीबी के मरीजों को सरकार द्वारा दी जाती है सहायता राशि

मुंगेर-

कोरोना संक्रमण से उबर चुके लोगों को टीबी से संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। मालूम हो कि दोनों बीमारियों के लक्षण भी करीब- करीब एक जैसे ही मिलते-जुलते होते हैं। जिसके कारण बीमारी का सही पता लगाने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कोरोना से उबर चुके मरीजों के लिए यह दौर विशेष सतर्कता बरतने का है। क्योंकि इन मरीजों का इम्युन सिस्टम बहुत ही कमजोर होता है जिसके ऐसे लोगों में टीबी संक्रमण का खतरा अन्य मरीजों कि तुलना में अधिक हो जाता । ऐसे में सबसे जरूरी है कि मरीजों की दवा का क्रम कभी नहीं टूटे। मालूम हो कि कोरोना में लगातार तेज बुखार और खांसी आती है, जबकि टीबी का मुख्य लक्षण थकावट, आम बुखार, वजन गिरना, भूख न लगना, रात में पसीना आना आदि है।

टीबी का लक्षण महसूस होते ही तत्काल कराएं जांच –
मुंगेर जिला के टीबी/एचआईवी कॉर्डिनेटर शलेंदु कुमार ने बताया कि टीबी का लक्षण महसूस होते ही ऐसे मरीजों को बिना देर किए अपनी टीबी की जाँच करवानी चाहिए। जिला के सदर अस्पताल से लेकर प्रखंड स्तर पर कार्यरत सीएचसी/पीएचसी स्तर पर टीबी की निःशुल्क जांच, उपचार और दवाई की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ टीबी के मरीजों को सही पोषण के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से 500 रुपए प्रति माह के अनुसार सहायता राशि भी दी जाती है।

अनावश्यक यात्रा से करें परहेज –
उन्होंने बताया कि टीबी से संक्रमित मरीजों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। इसके अलावा भीड़-भीड़ वाली जगहों पर भी जाने से परहेज बरतते हुए धूलकण से बचाव के लिए हर आवश्यक पहल करनी चाहिए।

टीबी से बचाव के उपाय:-
: 1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाकर टीबी की जांच करवानी चाहिए और दवा की पूरी कोर्स लेते हुए डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
– भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने पर हमेशा मास्क का प्रयोग करें और हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।

– टीबी के मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां- वहां बिलकुल भी नहीं थूकें।
– टीबी के मरीज हमेशा हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहें। इसके साथ ही एसी के प्रयोग से परहेज करें ।
– हमेशा पौष्टिक खाना खाएं और नियमित व्यायाम और योगाभ्यास करें ।
– हमेशा बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– हमेशा भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।

ये हैं टीबी के लक्षण:-
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती , सीने में दर्द का एहसास , थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार रहना, हरारत ।
– खांसी आते रहना, खांसी में बलगम तथा बलगम में खून का आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– महिलाओं को टेम्प्रेचर के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
– टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

हेल्दी बेबी शो प्रतियोगिता • सभी अभिभावकों को बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए-जिलाधिकारी

0

-प्रतियोगिता में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी ली गई
-अभिभावकों को दी गई जरूरी सलाह व आवश्यक जानकारी

– जिला समहरणालय परिसर में हुई प्रतियोगिता
– स्तनपान को लेकर भी किया गया जागरूक और इससे होने वाले फायदे की दी गई जानकारी

लखीसराय-

सामुदायिक स्तर पर बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए जिले में लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। साथ हीं सामुदायिक स्तर पर गर्भवती एवं धातृ माताओं को लगातार विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर जागरूक भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार को जिला समाहरणालय परिसर स्थित मन्त्रणाकक्ष में एक हेल्दी बेबी शो प्रतियोगिता सह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने की। इस कार्यक्रम में ऑंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों के बीच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साथ ही स्वस्थ बच्चे की पहचान करने के लिए प्रत्येक बच्चे का वजन एवं लंबाई की माप, उम्र के अनुसार बच्चों को लगने वाले जरूरी टीका लगा है या नहीं, बच्चे का जन्म कहाँ हुआ समेत अन्य आवश्यक जानकारी ली गई। जिसके पश्चात् स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए आवश्यक सलाह दी गई । इस मौके पर जिलाधिकारी ने कहा, बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित देखभाल जरूरी है। इसलिए, सभी अभिभावकों को बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए। इस मौके पर डीडीसी सुधीर कुमार, डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती, आईसीडीएस डीपीओ रश्मि चौधरी, जिला समन्वयक मधुबाला कुमारी, केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान समेत विभिन्न प्रखंडों की महिला पर्यवेक्षिका एवं जीविका के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

– स्तनपान को लेकर भी किया गया जागरूक, दी गई जरूरी जानकारी :
आईसीडीएस डीपीओ रश्मि चौधरी ने बताया, हेल्दी बेबी शो प्रतियोगिता सह कार्यक्रम के दौरान सभी बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी ली गई और जरूरी सलाह भी दी गयी । इसके अलावा जिले में लगातार विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिसमें बच्चों के जन्म से लेकर छः माह तक सिर्फ माँ के दूध का सेवन कराने और इसके बाद ही ऊपरी आहार शुरू करने की बात बतायी जा रही है । यह भी बताया जा रहा है कि इसके बाद दो वर्षों तक ऊपरी आहार के साथ स्तनपान भी जारी रखें। साथ ही स्तनपान से होने वाले फायदे, इसके महत्व समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी गई।

– शिशु के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए स्तनपान जरूरी :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक ने बताया, प्रतियोगिता के दौरान सभी बच्चों के अभिभावकों को स्वास्थ्य से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई और स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। साथ ही बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए स्तनपान (माँ का दूध) कितना जरूरी है, इससे क्या है फायदा, समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी गई स्तनपान से ना सिर्फ शिशु का सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक होता बल्कि, माँ एवं शिशु दोनों कई गंभीर शारीरिक परेशानी से भी दूर रहते हैं । इसलिए, हर माँ को जन्म के एक घंटे के अंदर अपने शिशु को स्तनपान शुरू कराना चाहिए और छः माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान ही कराना चाहिए। इसके बाद भी ऊपरी आहार के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जारी रखनी चाहिए। इसके अलावा जन्म के बाद शिशु के पड़ने वाले विभिन्न टीका से टीकाकृत कराना भी जरूरी है समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गई।

– जिले के विभिन्न प्रखंडों के 18 बच्चों को किया गया पुरस्कृत :
कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों के कुल 18 बच्चों को पुरस्कृत किया गया। जिसमें रामगढ़ चौक के आनंद कृष्ण को प्रथम, लखीसराय के आरव कुमार को द्वितीय एवं सूर्यगढ़ा की सिद्धी कुमारी को तृतीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।

टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिलाभर में चल रहा है सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

0

– विश्व टीबी दिवस पर 24 मार्च से शुरू हुआ अभियान 13 अप्रैल तक चलेगा
– अभियान में स्वास्थ्य कर्मी घर -घर जाकर सक्रिय टीबी रोगियों की कर रहे हैं खोज
– प्रत्येक महीने की 16 तारीख को जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर मनाया जाएगा निक्षय दिवस

मुंगेर-

विश्व टीबी दिवस पर 24 मार्च से 13 अप्रैल (21 दिनों) तक चलने वाले टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला भर में सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान चल रहा है। इस आशय की जानकारी जिला संचारी रोग पदाधिकारी (सीडीओ) डॉ.ध्रुव कुमार शाह ने दी। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत जिला भर में स्वास्थ्य कर्मी घर- घर जाकर टीबी के सक्रिय मरीजों की खोज कर रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीनियर टीबी सुपरवाइजर सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी इस अभियान में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक महीने की 16 तारीख को जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर निक्षय दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी के संभावित रोगियों के लक्षणों की जांच की जाएगी और टीबी के लक्षण से युक्त व्यक्तियों का नजदीक के प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से एक्स रे तथा बलगम की जांच करवाई जाएगी। इस दौरान जांच में टीबी रोगी संपुष्टहोने पर एक सप्ताह के अंदर टीबी की दवा प्रारंभ करने के साथ- साथ निक्षय पोर्टल पर टीबी रोगियों का नोटिफिकेशन किया जाएगा । इसके बाद आशा एवम सामुदायिक कार्यकर्ता के माध्यम से बैंक डिटेल प्राप्त कर डायरेक्ट टू बेनिफिसियरी (डीबीटी) के माध्यम से निक्षय पोषण की राशि 500 रुपए प्रति माह के दर से भुगतान सुनिश्चित करवायी जाएगी । इसके साथ- साथ समय – समय पर फॉलोअप जांच, टीबी मरीजों के सम्पर्क में रहने वाले बच्चों एवम व्यस्कों में टीबी निवारक उपचार भी शुरू किया जाएगा।

जिला टीबी/एचआईवी समन्वयक शैलेंदु कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से टीबी रोगियों की सघन खोज अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान पिछले पांच वर्षों में अधिसूचित टीबी रोगियों एवं उनके संपर्क में रहने वाले बच्चों, व्यस्कों, गर्भवती महिलाओं, कुपोषित बच्चों, एचआईवी के संग जीवन जी रहे लोग, डायबिटीज के मरीज, कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोग, डायलिसिस करवा रहे किडनी के पुराने मरीजों, खांसी दमा और श्वसन तंत्र के पुराने मरीजों में टीबी के लक्षणों के आधार पर स्क्रीनिंग की जा रही है। इस दौरान टीबी के लक्षण से युक्त व्यक्तियों का एक्स रे और बलगम की जांच निकटतम पीएचसी/सीएचसी पर की जा रही है। इस दौरान टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग करवाने की पूरी जिम्मेदारी सबंधित आशा कार्यकर्ता और एएनएम निभा रही हैं । इसके साथ ही हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) के द्वारा अपने अपने क्षेत्र की एएनएम एवं आशा कार्यकर्ता के कार्यों का अनुश्रवण किया जा रहा है।

ऊषा केबल इंडस्ट्रीज ने फगवाड़ा डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर एवं इलेक्ट्रीशियन्स मीटिंग में किया सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयेजन

0

 

पंजाब के फगवाड़ा में के.जी. रिजार्ट में ऊषा केबल इंडस्ट्रीज ने डिस्ट्री ब्यूटर मीटिंग एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयेजन किया जिसमें कम्पनी ने अपने ब्राण्ड ऊषा केबल की श्रृंखला को भी इंट्रडुज किया।

इस अवसर पर कम्पनी निदेशक अमन गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार की सस्था आई. एस. आई के अधिकारियों ने देश के सभी बड़ी केबल निर्माता कम्पनियों को दिल्ली के ली मेरिडियन में बुलाकर 2022 में एक सभा का आयोजन किया था, जिसमें सभी केबल निर्माता कम्पनियों से अच्छी गुणवत्ता वाले केबल बनाने के लिए कहा गया था जिसमें अधिकारियों ने कहा कि भारत के पावर सेक्टर मे हाई क्वालिटी केबल की भारतीय बाजार में भारी कमी है, जिसकी आपूर्ती करना अति आवस्यक है, इन्ही बातों ध्यान मे रखते हुए हमने ऊषा केबल ब्राण्ड नेम से भारतीय बाजार में अपना प्रोडक्ट भेजना शुरू कर दिया जिसका हमें बहुत अच्छा रेजल्ट देखने को मिला।

उन्होंने बताया की हमारी कम्पनी ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के प्रोडक्ट माला केबल के ब्राण्ड नेम से पंजाब के सभी बड़े बाजारों उपलब्ध थे, और माला केबल का डिमांड पूरे पंजाब मे काफी अच्छा रहा जिसके चलते कम्पनी ने अपने एक और ब्राण्ड ऊषा केबल स्मॉक फाग केबल, रबराइज केबल, हाउस वाइरिंग केबल, कम्यूनिकेशन केबल, फायर सरबाइबल केबल, लो स्मॉक फाग, में -(एफ आर एल एस, एच आर एफ आर तथा फायर सरबाइबल) की श्रंखला को पंजाब में उतारा। उन्होंने कहा कि ऊषा केबल के प्रोडक्ट अभी तक भारत के कई राज्यों में उलब्ध है, और डिमांड भी काफी अछी देखी जा रही है। और हमें उम्मीद है कि पंजाब में भी हमें अछा रिस्पांस मिलेगा। इस मौके पर कम्पनी के संस्थापक श्री सुनील गुप्ता, ऑल इंडिया के डिस्ट्रीब्यूटर अभिशेक गुप्ता एंव पंजाब के डिस्ट्री ब्यूटर संजय गुप्ता मौजूद रहे।