पोषण पखवाड़ा के तहत जिले भर में हुए जागरूकता कार्यक्रम

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-आंगनबाड़ी केंद्रों और उसके आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई की गई
-जिले के लोगों को उचित पोषण को लेकर जागरूक भी किया गया

बांका-

जिले में पोषण पखवाड़ा का आगाज 20 मार्च को हो चुका है। इसके तहत जिलेभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सही पोषण से लेकर साफ-सफाई तक के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसी सिलसिले में बुधवार को जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। बुधवार को बिहार दिवस भी था। इस वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों और उसके आसपास की जगहों की साफ-सफाई भी की गई। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और एलएस ने घर-घर जाकर लोगों को पोषण को लेकर जागरूक किया। तीन साल तक के बच्चों के लिए सही पोषण क्या है और उसकी खुराक कैसे देनी है, इसकी जानकारी दी। इसके अलावा हाथों की सफाई और उसके महत्व के बारे में भी लोगों को बताया गया। लोगों को जानकारी दी गई कि हाथों की सफाई रखने से कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। अगर हम हाथों की सफाई करेंगे तो हमारा उन बीमारियों से बचाव होगा। इसलिए उचित पोषण के साथ-साथ हाथों की सफाई पर भी ध्यान रखें।
कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की हुई पहचानः दूसरी तरफ आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह साल तक के बच्चों का वजन किया गया और उसकी लंबाई को मापा गया। इस दौरान जो बच्चा मानक से कम पाया गया, उसे उचित परामर्श दिया गया। साथ ही इस दौरान कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की पहचान भी की गई। पहचान के बाद बच्चे के परिजनों को इससे उबरने के तरीके बताए गए। इसके लिए पोषण पर जोर देने के लिए कहा गया। सही पोषण क्या हो, इसके बारे में भी परिजनों को बताया गया।
आज भी होंगे कई कार्यक्रमः आईसीडीएस की डीपीओ स्वाति कुमारी ने बताया कि पोषण पखवाड़ा के तहत जिले भर में कार्यक्रम हो रहे हैं। 3 अप्रैल तक जिले भर अलग-अलग गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को सही पोषण और स्वच्छता के बारे में जागरूक किया जाएगा। बुधवार को आंगनबाड़ी केंद्रों की साफ-सफाई से लेकर बच्चों का वजन, उसे सही पोषण के लिए उचित परामर्श दिया गया। अब गुरुवार को आपदा प्रबंधन के तहत वार्ड स्तर पर गर्मी एवं लू से बचाव की जानकारी दी जाएगी। इसके इलाज को लेकर बैठक आयोजित कर और गृह भ्रमण कर जानकारी दी जाएगी। इसके साथ-साथ हाथ की सफाई, बच्चों के उचित खानपान और वृद्धि निगरानी के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

बांका जिले में कुष्ठ निवारण अभियान को किया जाएगा तेज

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-आज से दो दिनों तक जिले के 30 चिकित्सा पदाधिकारियों का किया जाएगा उन्मुखीकरण
-सोमवार और मंगलवार को जिले के 30 स्वास्थ्यकर्मियों का किया जा चुका है उन्मुखीकरण

बांका-

जिले को कुष्ठ से मुक्त करने के लिए गुरुवार और शुक्रवार को अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय के मीटिंग हाल में 30 चिकित्सा पदाधिकारियों का उन्मुखीकरण किया जाएगा। उन्मुखीकरण के बाद ये चिकित्सा पदाधिकारी जिले में कुष्ठ निवारण में सहयोग करेंगे। जिले के सरकारी अस्पतालों में जो भी कुष्ठ के मरीज आएंगे, उन्हें मदद करेंगे। ये लोग सदर अस्पताल से लेकर रेफरल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में कुष्ठ निवारण में सहयोग करेंगे। इससे पहले सोमवार और मंगलवार को भी जिले के 30 स्वास्थ्यकर्मियों का उन्मुखीकरण किया गया। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ एएनएम और फामार्सिस्ट भी शामिल थे। इनलोगों को भी कुष्ठ के बारे में जानकारी दी गई। ये लोग भी जिले के सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ निवारण में अपना योगदान देंगे। उन्मुखीकरण में प्रशिक्षक के रूप में जिला पर्यवेक्षक, कुष्ठ कार्यक्रम मृत्युंजय कुमार सिंह, अचिकित्सा सहायक हरेकान्त झा और फिजियोथेरेपिस्ट स़ंजीत कुमार शामिल थे।
दो तरह के होते हैं कुष्ठः कुष्ठ कार्यक्रम के जिला पर्यवेक्षक मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया कि आमतौर पर कुष्ठ के मरीजों की दो तरह से पहचान की जाती है। इसमें एक पीबी कटेगरी होता है और दूसरा एमबी कटेगरी। पीबी कटेगरी में वैसे मरीज आते , जिनमें कुष्ठ के कम लक्षण होते हैं। वहीं एमबी कटेगरी में वैसे मरीज आते , जिनमें कुष्ठ के अधिक लक्षण पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिले में कुष्ठ निवारण अभियान को तेज किया जाएगा। इसी मकसद से सोमवार और मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मियों का उन्मुखीकरण किया गया और गुरुवार और शुक्रवार को चिकित्सा पदाधिकारियों का उन्मुखीकरण किया जाएगा। यहां पर इनलोगों को जो जानकारी प्रशिक्षण के दौरान दी गई है औऱ दी जाएगी, इसका लाभ जिले के सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को देंगे। इससे जिला जल्द से जल्द कुष्ठ से मुक्त हो जाएगा।
जिले के सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ के इलाज की मुफ्त व्यवस्थाः मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और अनुमंडल अस्पताल के साथ सदर अस्पताल व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुष्ठ रोगियों के इलाज की व्यवस्था है। इलाज में मरीज को किसी भी तरह का खर्च नहीं आता है। साथ ही इलाज के दौरान उन्हें जो आर्थिक नुकसान होता है, उसकी भरपाई के लिए आठ हजार रुपये सहायता राशि भी दी जाती है। मृत्युंजय सिंह ने बताया कि पुनर्शल्य चिकित्सा में जाने वाले मरीजों को वेज लास के लिए क्षतिपूर्ति के तौर पर आठ हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। ग्रेड 2 के प्रभावित कुष्ठ मरीजों को 1500 रुपये मासिक पेंशन और उनके आश्रित जिनकी उम्र शून्य से 18 वर्ष के हों को परवरिश योजना के तहत एक हजार रुपये मासिक भुगतान बाल संरक्षण ईकाई के माध्यम से दिया जाता है। अभी जिले में 251 बच्चों को परवरिश योजना का लाभ दिया जा रहा है।

आईजीआईसी ,पटना में आयोजित हृदय रोग जांच शिविर में मुंगेर से भेजे गए 7 हृदय रोग से पीड़ित बच्चे

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– आरबीएसके और मुख्यमंत्री बाल हृदय रोग योजना के अंतर्गत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साई हृदय रोग अस्पताल में निः शुल्क होता है ऑपरेशन
– एक अभिभावक के साथ हृदय रोगी बच्चा को पटना और उसके बाद अहमदाबाद जाने और वापस आने की व्यवस्था की जाती है निःशुल्क

मुंगेर-

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के अंतर्गत अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साईं हृदय रोग अस्पताल के सहयोग से पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में आयोजित दो दिवसीय निः शुल्क हृदय रोग जांच शिविर में मुंगेर से 7 हृदय रोग से पीड़ित बच्चे भेजे गए हैं । इस आशय की जानकारी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके ) की नोडल अधिकारी डॉ बिंदू ने दी। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय हृदय रोग जांच शिविर में मंगलवार को मुंगेर जिला से भेजे गए 7 बाल हृदय रोगियों की जांच की जाएगी। इनमें 3 बच्चे और 4 बच्चियां हैं। हृदय रोग की जांच के लिए पटना भेजे गए कुल सात बच्चों में से जमालपुर से प्रखंड 3, सदर प्रखंड से 2 और बरियारपुर और धरहरा प्रखंड से एक – एक हैं । जांच पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में की जा रही है । उन्होंने बताया कि सोमवार की देर शाम को ही सभी बच्चों को उनके अभिभावक के साथ दो एंबुलेंस से पटना भेजा गया है। उनके साथ धरहरा सीएचसी में कार्यरत फार्मासिस्ट संतोष कुमार को भी भेजा है जो वहां डॉक्टर से समन्वय स्थापित कर सभी बच्चों की जांच सुनिश्चित करवाएंगे।

सदर अस्पताल परिसर स्थित डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी ) मुंगेर में कार्यरत निशांत कुमार ने बताया कि पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में आयोजित जांच शिविर में जमालपुर प्रखंड निवासी राजेश कुमार की 10 वर्षीय बेटी सोनाक्षी कुमारी, जितेंद्र कुमार का 6 साल का बेटा नक्ष राज और अनिल कुमार का 3 वर्षीय बेटा आरुष रॉय को भेजा गया है। इसके अलावा सदर प्रखंड निवासी मिथिलेश कुमार का ढाई साल का बेटा अभय रंजन और सरफराज आलम की 11 महीने की बेटी अरफा राज को हृदय रोग की जांच के लिए पटना भेजा गया है। इसके साथ- साथ बरियारपुर निवासी कन्हैया पासवान की 3 वर्षीय बेटी करीना कुमारी और धरहरा प्रखंड के रहने वाले संतोष कुमार झा की 10 वर्षीय बेटी तनु कुमारी को भी जांच के लिए पटना भेजा गया है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) और मुख्यमंत्री बाल हृदय रोग योजना के अंतर्गत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साई हृदय रोग अस्पताल में निः शुल्क होता है ऑपरेशन । पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में आयोजित दो दिवसीय हृदय रोग जांच शिविर में ऑपरेशन के लिए चिह्नित किए जाने वाले बच्चों को उनके अभिभावक के साथ इस योजना के तहत हृदय रोग के ऑपरेशन के लिए राज्य सरकार के द्वारा एंबुलेंस से पटना और उसके बाद ट्रेन या प्लेन से अहमदाबाद जाने और सफल ऑपरेशन के बाद वहां से वापस आने की व्यवस्था बिलकुल निः शुल्क होती है।

टीबी के मरीज समय पर दवा का करें सेवन

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-किसी दूसरे लोगों में टीबी के लक्षण दिखे तो उसे जांच के लिए सरकारी अस्पताल लेकर जाएं
-केएचपीटी और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ममलखा में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की हुई बैठक

भागलपुर-

ममलखा में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। इसमें 11 मरीज और उनके सहयोगियों ने भाग लिया। मौके पर मौजूद डॉ. महमूद अलमा ने टीबी के सभी मरीजों से बातकर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। साथ ही टीबी मरीजों को समय पर दवा खाने और किसी अन्य लोगों में इस तरह के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेजने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर लोगों में टीबी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें डरना नहीं चाहिए, बल्कि जागरूक होकर समय पर इलाज कराना चाहिए। इससे टीबी से वे जल्द उबर जाएंगे और बीमारी का प्रसार भी नहीं हो सकेगा।
टीबी से बचाव के लिए पौष्टिक आहार जरूरीः केएचपीटी की जिला टीम लीडर आरती झा ने कहा कि टीबी से बचाव के लिए लोगों को पौष्टिक आहार पर जोर देना चाहिए। सरकारी अस्पताल में इलाजरत टीबी के मरीजों में पौष्टिक आहार के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रतिमाह की राशि भी दी जाती है। यह राशि टीबी मरीजों को इलाज होने तक दी जाती है। इसलिए टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार का सेवन जरूर करना चाहिए। टीबी होने का बड़ा कारण पौष्टिक आहार का नहीं लेना भी है। इसलिए टीबी के मरीज तो पौष्टिक आहार ले हीं। साथ में दूसरे लोगों को भी पौष्टिक आहार लेने के लिए जागरूक करें।
इलाज जल्द शुरू होने से जल्द होंगे ठीकः सरकारी अस्पताल में टीबी मरीजों की जांच और इलाज की व्यवस्था मुफ्त है। इसलिए अगर लोगों को टीबी के लक्षण पता चले तो हिचक नहीं करना चाहिए। तत्काल जांच के लिए सरकारी अस्पताल आना चाहिए। जांच में पुष्टि हो जाने के बाद तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। जल्द इलाज शुरू होने से जल्द ठीक भी हो जाते हैं। इसलिए अगर किसी को लगातार दो हफ्ते तक खांसी आए, बलगम के साथ खून आए, लगातार बुखार रहे या फिर शाम के वक्त ज्यादा पसीना आए तों जांच कराने के लिए तत्काल सरकारी अस्पताल जाएं।

अन्नप्राशन कार्यक्रम के साथ जिले में पोषण पखवाड़ा की हुई शुरुआत

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– उचित पोषण की दी गई जानकारी, एनीमिया मुक्त भारत अभियान को लेकर किया गया जागरूक
– आंगनबाड़ी केंद्रों पर छः माह के बच्चों का कराया गया अन्नप्राशन, पौष्टिक आहार के महत्व की दी गई जानकारी

खगड़िया, 20 मार्च-

अन्नप्राशन कार्यक्रम के साथ सोमवार में जिले में पोषण पखवाड़ा की शुरुआत हो गई। जिसका समापन 03 अप्रैल को होगा। इस दौरान जिले भर में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया जाएगा। इसी कड़ी में सोमवार को जिले के सभी प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर उत्सवी माहौल में अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें जिले की सभी सेविका-सहायिका अपने-अपने आंगनबाड़ी केंद्रों पर छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को पहलीबार अन्नप्राशन कराया और बच्चे की माँ को बच्चे के 6 माह के बाद ऊपरी आहार की विशेषता बताते हुए अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। ताकि बच्चे का शारीरिक विकास और स्वस्थ शरीर निर्माण हो सके। वहीं, बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उचित पोषण की जानकारी दी गई और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। जिसमें बताया गया कि कुपोषण को मिटाने के लिए उचित पोषण बेहद जरूरी है। इसलिए, सरकार द्वारा इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर उचित पोषण के लिए जागरूक किया जा रहा है। दरअसल, कुपोषण मुक्त समाज निर्माण की दिशा में सरकार पूरी तरह सजग और कटिबद्ध है।

– छः माह के बाद अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी :
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया गया कि बच्चों को छः माह की उम्र सीमा पार करने के बाद अन्नप्राशन (ऊपरी आहार) के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं। तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण संभव है। इसके अलावा बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों की पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।

– पौष्टिक आहार की महत्ता की भी दी गई जानकारी :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, शिशु के जन्म के बाद आधे घंटे के भीतर माँ का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।

– एनीमिया मुक्त भारत अभियान को लेकर को भी किया गया जागरूक :
पिरामल फाउंडेशन के डीपीएल प्रफूल्ल झा ने बताया, अन्नप्राशन कार्यक्रम के दौरान मौजूद बच्चे की माँ समेत अन्य महिलाओं को एनीमिया मुक्त भारत अभियान को लेकर भी जागरूक किया गया। जिसके दौरान एनीमिया से बचाव के लिए एनीमिया के कारण, लक्षण एवं उपचार की जानकारी दी गई और नियमित तौर पर हीमोग्लोबिन जाँच कराने को लेकर भी जागरूक किया गया। इस मौके पर गाँधी फेलो के मो. जुनैद, राकेश कुमार आदि मौजूद थे।

– इन बातों का रखें ख्याल :
– 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
– स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
– शिशु को माल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
– माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
– शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।

जीविका दीदी क्षेत्र के लोगों को टीबी के प्रति करेंगी जागरूक

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-जगदीशपुर के सोनूचक पुरानी पंचायत में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग ट्रेनिंग का आयोजन
-स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से केएचपीटी ने जीविका के लिए ट्रेनिंग का किया आयोजन
भागलपुर, 20 मार्च।
जगदीशपुर प्रखंड की सोनूचक पुरानी पंचायत में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने पर्सपेक्टिव बिल्डिंग ट्रेनिंग का आयोजन किया। इसमें क्षेत्र की 26 जीविका दीदी शामिल हुईं। ट्रेनिंग देने का काम शानू और संदीप ने किया। सत्र की शुरुआत केएचपीटी के परिचय से हुई। इसके बाद सभी को लोगों को एक साथ जोड़ने, एकता बनाने और ट्रेनिंग के दौरान सुनी गई बातों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा गया। इसके बाद कहानी के जरिये टीबी से लड़ने के बारे में बताया गया। सभी को टीबी के लक्षण, बचाव और उसके इलाज की जानकारी दी गई। साथ ही इस बीमारी से बचाव को लेकर समाज में क्या किया जा सकता है, इसकी भी जानकारी दी गई। इसके अलावा यह भी बताया गया कि टीबी रोगियों के प्रति संवेदनशील होकर उनकी जरूरत को पूरा करने में मदद करनी चाहिए। ट्रेनिंग के दौरान जीविका दीदियों को बताया गया कि यहां पर जो भी बातें आपने सुनीं, उसके बारे में क्षेत्र के लोगों को जागरूक करें। इससे टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और समाज से टीबी का प्रकोप खत्म होगा। मौके पर एसटीएस रितिका भी मौजूद थी।
जागरूकता के लिए जीविका दीदी हो सकती हैं बेहतर माध्यमः केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि टीबी को समाप्त करने के लिए इलाज के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर जागरूकता भी बहुत जरूरी है। लोगों में जितनी तेजी से जागरूकता बढ़ेगी उतनी ही तेजी से टीबी बीमारी समाज से खत्म होगी। जीविका दीदियों की समाज पर अच्छी पकड़ है। अधिकतर घरों में उनका आना-जाना है। इसलिए टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जीविका एक बेहतर माध्यम हो सकती है। इसी उद्देश्य से अंतीचक पंचायत में गुरुवार को जीविका दीदियों की ट्रेनिंग आयोजित की गई। उम्मीद है कि इसका व्यापक असर पड़ेगा। लोग टीबी के प्रति जागरूक होंगे।
टीबी के लक्षण दिखे तो जाएं सरकारी अस्पतालः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि केएचपीटी जिले में टीबी उन्मूलन में अच्छा काम कर रही है। इस तरह के आयोजन से टीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी। लोगों में टीबी के प्रति जानकारी बढ़नी बहुत जरूरी है। टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त में होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते तक खांसी हो, शाम को पसीना आए, लगातार बुखार रहे, बलगम के साथ खून हो इत्यादि लक्षण महसूस हो तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल चले जाना चाहिए। वहां जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो तत्काल इलाज शुरू कर देना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इलाज तो मुफ्त में होता ही है, साथ में दवा भी बिल्कुल मुफ्त दी जाती है। इसके अलाना जब तक इलाज चलता है, तब तक पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी मरीजों को दी जाती है।

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने श्री आदिश जैन, श्रीमती आशा जैन और श्री शचि रतन, श्रीमती नीलम रतन के सहयोग से गाजिय़ाबाद, उत्तर प्रदेश में अपने केंद्रीकृत मध्याह्न भोजन रसोईघर की आधारशिला रखी

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-अक्षय पात्र फाउंडेशन ने उत्तर प्रदेश के गाजिय़ाबाद में अपने आगामी सेंट्रलाइज्ड मिड-डे मील किचन की आधारशिला रखी, जिसे श्री आदिश जैन, श्रीमती आशा जैन और श्री शचि रतन, श्रीमती नीलम रतन का सहयोग प्राप्त है

-फाउंडेशन इस रसोईघर के द्वारा प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण पहल (पीएम-पोषण) (पूर्व में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना) के माध्यम से 524 सरकारी और सरकार से सहायता-प्राप्त स्कूलों के 1 लाख से ज्यादा बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसेगा

गाजिय़ाबाद:

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने गाजिय़ाबाद, उत्तर प्रदेश में समाजसेवी श्री आदिश जैन, श्रीमती आशा जैन और श्री शचि रतन, श्रीमती नीलम रतन के सहयोग से अपने आगामी केन्द्रीकृत मध्याह्न भोजन रसोईघर की आधारशिला रखी है। इस अवसर पर भारत सरकार के माननीय नागरिक उड्डयन एवं सडक़ परिवहन राजमार्ग राज्यमंत्री, सेवानिवृत्त जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह उपस्थित थे।
यह नया रसोईघर 2.5 एकड़ भूमि पर बन रहा है और चालू होने के बाद क्षेत्र के 524 सरकारी एवं सरकार से सहायता-प्राप्त स्कूलों के 1 लाख से ज्यादा बच्चों को स्वास्थ्यकर, पौष्टिक और स्वादिष्ट मध्याह्न भोजन परोसेगा। यह केन्द्रीकृत इकाई दिसंबर 2024 तक चालू होने की उम्मीद है। यह अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित होगी और आरोग्य तथा सुरक्षा के उच्चतम मानकों का पालन करेगी। गाजिय़ाबाद का रसोईघर उत्तर प्रदेश में फाउंडेशन का पाँचवा रसोईघर होगा।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय आधारभूत शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संदीप सिंह; उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरूण; उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नरेन्द्र कश्यप; राज्यसभा सांसद श्रीमती कांता कर्दम; उत्तर प्रदेश की बागपत से लोकसभा सांसद श्री सत्यपाल सिंह; मोदीनगर, गाजिय़ाबाद की विधायक डॉ. मंजू शिवाच; लोनी, गाजिय़ाबाद के विधायक श्री नंद किशोर गुर्जर; मुरादनगर, गाजिय़ाबाद के विधायक श्री अजीत पाल त्यागी; साहिबाबाद, गाजिय़ाबाद के विधायक श्री सुनील शर्मा; गाजिय़ाबाद के विधायक श्री अतुल गर्ग; मेरठ ग्रेजुएशन सीट के एमएलसी श्री दिनेश गोयल और गाजिय़ाबाद के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट श्री राकेश कुमार सिंह (आईएएस) भी उपस्थित थे। समारोह की अध्यक्षता अक्षय पात्र फाउंडेशन के वाइस-चेयरमैन श्री चंचलापति दासा ने की।
भारत सरकार के माननीय नागरिक उड्डयन एवं सडक़ परिवहन राजमार्ग राज्यमंत्री, सेवानिवृत्त जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने कहा कि, अक्षय पात्र संस्थान को निवेदन किया गया था कि यहां पर वह एक रसोई खोले ताकि मिड डे मिल योजना के तहत बच्चों को जो खाना मिलता है,वह यहां से जा सके। कई जगह चिन्ह्ति करने के बाद मोदी नगर का यह जगह फाइनल किया गया। इसके लिए मैं सतपाल जी का आभार प्रकट करता हूं। यहां से एमएल मंजू शिवाच जी का आभार प्रकट करना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने इस स्थान की व्यवस्था कराई है। आज भूमि पूजन हुआ है,जल्द ही यहां रसोई बनेगी। आने वाले दिनों में अच्छा खाना बच्चों को उपलब्ध होगा।’
उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय आधारभूत शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संदीप सिंह ने कहा, ‘हमारी सरकार अक्षय पात्र संस्थान के माध्यम से बच्चों को पौष्टिïक आहार देने की व्यवस्था लगातार कर रही है। दानकर्ताओं के सहयोग से प्रदेश में एक और रसोईघर के लिए भूमि पूजन किया गया। उन्होंने कहा,‘ मैं सभी को ह्दय से धन्यवाद देना चाहता हूं कि उनके प्रयासों से गाजियाबाद में एक लाख से भी अधिक बच्चों को संस्था के रसोईघर के माध्यम से पौष्टिïक भोजन मिलेगा।’
उत्तर प्रदेश की बागपत से लोकसभा सांसद श्री सत्यपाल सिंह ने कहा, ‘देश-दुनिया की प्रसिद्ध संस्था अक्षय पात्रा के नए रसोई घर का आज भूमि पूजन हुआ है। आने वाले दिनों में स्कूली बच्चों को पौष्टिïक,पवित्र और गरम-गरम खाना उपलब्ध होगा,इसके लिए मैं अक्षय पात्रा संस्थान और उनके संचालकों का धन्यवाद देता हूं।’
अक्षय पात्र फाउंडेशन के वाइस-चेयरमैन श्री चंचलापति दासा ने कहा, ‘’मैं इस अवसर पर उपस्थित होने के लिये अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालने के लिये माननीय नागरिक उड्डयन एवं सडक़ परिवहन राजमार्ग राज्यमंत्री सेवानिवृत्?त जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। इस रसोईघर को बनाने में बहुमूल्य सहयोग के लिये मैं श्री आदिश जैन, श्रीमती आशा जैन और श्री शचि रतन, श्रीमती नीलम रतन का भी धन्यवाद करता हूँ। गाजिय़ाबाद के बच्चों की सेवा का यह अवसर देने के लिये हम उत्तर प्रदेश सरकार के आभारी हैं और इस अवसर पर प्रशासन के विभिन्न विकासपरक कार्यक्रमों तथा पहलों के लिये अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। हमने अपने रसोईघरों के लिये अनुकूलता सुनिश्चित करते हुए हमेशा ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक पहुँचने का प्रयास किया है। खाद्य सुरक्षा हमारे देश की प्रमुख चिंताओं में से एक है और मुझे खुशी है कि हम इस बाधा से उबरने के लिये एकजुट हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम चेतनशील लोगों के तौर पर बच्चों, समुदाय और समाज के लिये जो कुछ भी जरूरी हो, वह करें। सभी साझीदारों के सहकार्य वाले ऐसे प्रयास हमें ऐसी दुनिया सुनिश्चित करने के अपने मिशन में यकीनन आगे ले जाएंगे, जहाँ बच्चों को शिक्षा और भोजन में से किसी एक को न चुनना पड़े। मैं अंत में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (एमओई) का धन्यवाद करता हूँ, जो पिछले 22 वर्षों से बच्चों और समुदायों की सेवा के हमारे प्रयासों को लगातार सहयोग दे रहे हैं।’
अक्षय पात्र के राष्टï्रीय अध्यक्ष भरतर्षभे दास ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक भूमि उपलब्ध कराया गया था,उसका आज भूमि पूजन हुआ। तीन एक के भूमि में एक लाख बच्चों के लिए एक रसोई घर बनाया जाएगा। पूरे जनपद में यहां से खाना सप्लाई किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार की साझेदारी में यह रसोईघर तैयार हो रहा है।
बता दें, बता दें, 2000 में बेंगलुरु से इस किचन की शुरुआत हुई। जब पंद्रह सौ बच्चों को यह भोजन उपलब्ध किया जाना सुनिश्चित किया गया था। तब से भारत के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस किचन के माध्यम से बच्चों को भोजन मिलता है। उन्होंने कहा कि फांउडेशन की मंशा है कि भोजन के बिना किसी भी बच्चे की शिक्षा में रूकावट नहीं आए। अनलिमिटेड फूड फॉर एजुकेशन इसी उद्देश्य के साथ अक्षय पात्र फाउंडेशन काम करता है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के समय पूरे भारतवर्ष में 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को भोजन उपलब्ध करवाया गया था। दिल्ली एनसीआर में भी लाखों लोग इससे लाभान्वित हुए। अभी भी विश्व में होने वाले आपदा में अक्षय पात्र फाउंडेशन भोजन उपलब्ध करवाने में सर्वप्रथम उपस्थित रहता है। संस्था राजधानी दिल्ली में चार किचन संचालित करता है। आने वाले दिनों में इस लिस्ट में दो और किचन जुड़ जाएंगे। अक्षय पात्र 2003 से स्कूल लंच प्रोग्राम के लिये उत्तर प्रदेश सरकार का कार्यान्वयन सहयोगी है।

 

बिहार में 20 मार्च से पोषण पखवाड़े की होगी शुरुआत: कौशल किशोर

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-20 मार्च से 3 अप्रैल तक सभी जिलों में होगा पखवाड़ा का आयोजन

-मिलेट्स यानी मोटे अनाजों के इस्तेमाल पर दिया जाएगा विशेष ध्यान

-आंगनबाड़ी से परियोजना और जिलास्तर पर आयोजित की जाएंगी विभिन्न गतिविधियां

-पखवाड़े में 9 मोबाइल वैन से किया जाएगा प्रदर्शन

पटना-

राज्य में 20 मार्च से 3 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा चलाया जाएगा . इस दौरान व्यापक एवं समग्र रूप से व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, किशोरियों एवं 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के पोषण स्तर में आपेक्षित सुधार लाने के लिए जन भागीदारी से गतिविधियों का आयोजन कर जन आन्दोलन का रूप देने का प्रयास किया जायेगा. उक्त बातें शनिवार को आईसीडीएस के निदेशक कौशल किशोर ने पोषण पखवाड़े पर आयोजित बैठक के दौरान कही.

मोटे अनाजों यानी मिलेट्स पर विशेष ध्यान:

कौशल किशोर ने कहा कि पोषण पखवाड़े में मिलेट्स यानी मोटे अनाजों के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा. अभी भी समाज में मोटे अनाज को गरीबों के आहार से जोड़ा जाता है. जबकि मोटे अनाजों में प्रचूर मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं और यह आहार में पोषक तत्वों की कमी को पूरा भी करता है.

तीन विषयों पर आधारित गतिविधियों का होगा आयोजन:

पोषण अभियान की राज्य नोडल रीफत अंसारी ने कहा कि पोषण पखवाड़े के दौरान तीन विषयों पर बल होगा. जिसमें पोषण के लिए मिलेट्स यानी मोटे अनाज की उपयोगिता के लिए प्रचार – प्रसार, स्वस्थ बाल बालिका स्पर्धा का आयोजन एवं
सक्षम आंगनवाड़ी का प्रचार – प्रसार शामिल होगा.

आंगनवाड़ी केंद्र एवं परियोजना स्तर पर आयोजित होंगी गतिविधियाँ:

पोषण के संदेश के प्रचार – प्रसार के लिए आंगनवाड़ी केंद्र एवं परियोजना स्तर पर तिथिवार गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी. आंगनवाड़ी केंद्र पर पोषण रैली, प्रभात फेरी, माता समूह के साथ बैठक, गृह भ्रमण, हैंड वाशिंग, वृद्धि निगरानी, आपदा प्रबंधन, पोषण वाटिका की स्थापना, संध्या बैठक का आयोजन, दिवाल लेखन, किशोरी समूह की बैठक, प्रश्नोतरी, चित्रकारी, निबंध/रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन, योग एवं आयुष गतिविधि, जीविका समूह के साथ बैठक एनीमिया कैंप एवं वीएचएसएनडी स्तर का आयोजन किया जाना है. इसके अलावा बिहार दिवस के अवसर पर आंगनवाड़ी केंद्र एवं उसके आसपास के जगहों की सफाई की जानी है.

परियोजना स्तर पर आयोजित होनेवाली गतिविधियाँ:

पोषण पखवाड़ा के दौरान परियोजना स्तर पर पोषण रैली, प्रभात फेरी, साईकिल रैली तथा प्रखंड स्तरीय सीएपी बैठक का आयोजन किया जायेगा. साथ ही पोषण परामर्श केंद्र की स्थापना, स्वस्थ बालक बालिका पारितोष वितरण एवं बाजरा संबंधित रेसिपी प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा.

जिला स्तर पर पखवाड़े के दौरान पोषण रैली, प्रभात फेरी, साईकिल रैली, जागरूकता रथ द्वारा प्रचार – प्रसार, जिला स्तरीय पोषण सेमिनार/कार्यशाला का आयोजन जिला स्तरीय सीएपी बैठक का आयोजन, पोषण मेला, स्वस्थ बालक बालिका पारितोष वितरण एवं बाजरा संबंधित रेसिपी प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा.
सभी गतिविधियों के अलावा समुदाय रेडियो से जागरूकता, जीविका समूह की बैठक, स्थानीय जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक, नुक्कड़ नाटक, किशोर समूह के साथ बैठक, टीकाकरण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल शिक्षा, फूड फोर्टीफीकेशन, किशोरोयों की शिक्षा आदि विषयों पर जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित करने करने का निर्देश दिया गया है.

इस दौरान पोषण सलाहकार डॉ. मनोज, विश्व बैंक के पोषण सालाहकर मंत्रेश्वर झा, क्षमतावर्धन एवम व्यवहार परिवर्तन संवाद सलाहकार डॉ कुमारी चंदा, पिरामल फाउंडेशन, यूनिसेफ़, केयर इण्डिया, अलाइव एन्ड थराइव, पीसीआई, सीथ्री, पाथ, प्रथम एडुकेशन फाउंडेशन एवं सीफार के प्रतिनिधि शामिल थे.

पोषण एवम पुनर्वास केंद्र में अभी भर्ती हैं एक जुड़वा सहित 16 अतिकुपोषित बच्चे

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– फरवरी महीने में पोषण एवम पुनर्वास केंद्र मुंगेर में भर्ती कराए गए कुल 36 अतिकुपोषित बच्चे
– सदर प्रखंड के कुतलुपुर निवासी दिनेश मंडल के चार महीने के बेटे लकी कुमार को वजन में सकारात्मक सुधार के बाद 15 मार्च को किया गया डिस्चार्ज

मुंगेर-

पोषण एवम पुनर्वास केंद्र मुंगेर में अभी एक जुड़वा सहित 16 अति कुपोषित बच्चे भर्ती हैं । उक्त आशय की जानकारी जिला स्वास्थ्य समिति के जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) और पोषण एवं पुनर्वास केंद्र (एनआरसी ) मुंगेर के नोडल अधिकारी सुजीत कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि बंगलवा धरहरा के रहने वाले जितेंद्र तूरी और नीलू देवी का दो महीने का अति कुपोषित जुड़वा बच्चा यहां भर्ती है। इसके अलावा मुंगेर सदर के कर्बला के रहने वाले बीसो महतो और रीता देवी की अति कुपोषित बेटी गौरी कुमारी यहां विगत 25 फरवरी से भर्ती है। मुंगेर शहरी क्षेत्र के लाल दरवाजा की रहने वाली सावित्री देवी की एक साल की नतीनी प्रियंका कुमारी पिछले एक मार्च से यहां भर्ती है। इस अतिकुपोषित बच्ची के साथ विडंबना यह है कि बच्ची की माँ की मृत्यु हो चुकी और उसका पिता मानसिक रूप से बीमार है।
36 अति कुपोषित बच्चों को फरवरी में एनआरसी में भर्ती कराया गया है-
उन्होंने बताया कि विगत फरवरी के महीने में पोषण एवम पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) मुंगेर में जिला भर से कुल 36 अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया गया है। इसमें 21 बच्चों को स्वास्थ्य विभाग और 13 बच्चों को आईसीडीएस के द्वारा भर्ती कराया गया है। इसके अलावा 2 अति कुपोषित बच्चों को संयुक्त रूप से स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस के द्वारा भर्ती कराया गया है।
जिला के असरगंज प्रखंड से सर्वाधिक 8 और सबसे कम तारापुर और टेटिया बंबर प्रखंड से मात्र एक- एक अति कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा सदर प्रखंड मुंगेर, बरियारपुर और जमालपुर प्रखंड से 6 – 6, संग्रामपुर से 4 के साथ- साथ धरहरा और हवेली खड़गपुर से 2-2 अति कुपोषित बच्चों को सदर अस्पताल परिसर स्थित एनआरसी में भर्ती कराया गया है।

सदर प्रखंड के कुतलुपुर निवासी दिनेश मंडल के चार महीने के बेटे लकी कुमार को उसके वजन में सकारात्मक सुधार के बाद विगत 15 मार्च को किया गया
डिस्चार्ज :

एनआरसी मुंगेर में कार्यरत सतीश कुमार ने बताया कि सदर प्रखंड के कुतलुपुर निवासी दिनेश मंडल के चार महीने के बेटे लकी कुमार को उसके वजन में सकारात्मक सुधार के बाद विगत 15 मार्च को डिस्चार्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि विगत 20 फरवरी को एनआरसी में भर्ती के समय लकी कुमार का वजन 3.655 किलो, लंबाई 56 सीएम था । वहीं 15 मार्च को एनआरसी से डिस्चार्ज किए जाने वक्त उसका वजन सकारात्मक सुधार के साथ 4.412 किलो था। इस अति कुपोषित बच्चे को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत काम करने वाले वोलेंटियर और आशा कार्यकर्ता के द्वारा भर्ती कराया गया था। इस बच्चे की मां ज्योति देवी का भी स्वर्गवास हो चुका है। बच्चे की दादी मीरा देवी ही उसका लालन पालन कर रही हैं ।

नारंग आई इंस्टीट्यूट ने दिया दिल्ली प्रदेश को सौगात, नारंग आई इंस्टीट्यूट में कॉन्टूरा विजन लेजर मशीन की सुविधा शुरू

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नारंग आई इंस्टीट्यूट ने दिया दिल्ली प्रदेश को सौगात, नारंग आई इंस्टीट्यूट में कॉन्टूरा विजन लेजर मशीन की सुविधा शुरू

डाक्टर एस के नारंग ने दिल्ली मे इस तकनीक को प्रारंभ कराने मे निभाई सक्रिय भुमिका

नई दिल्ली, 18 मार्च,2023 :

नारंग आई इंस्टीट्यूट, माडल टाउन मे आज नई कॉन्टूरा विजन लेजर मशीन का उद्घाटन किया गया। इससे मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। कॉन्ट्रा विजन लेजर दृष्टि सुधार प्रौद्योगिकी में सर्वाधिक नवीनतम उपलब्धी है। अन्य लेजर तकनीकें केवल अपवर्तन शक्ति को संबोधित करती हैं, जबकी कॉन्टूरा विजन उससे आगे जाता है और दृश्य अक्ष पर कॉर्नियल अनियमितताओं को भी ठीक करता है।

इसी प्रकार यह लेसिक या स्माइल जैसी अन्य लोकप्रिय तकनीकों की तुलना में तेज और बेहतर दृश्य परिणाम प्रदान करता है।

मॉडल टाउन स्थित नारंग आई इंस्टीट्यूट में मीडिया से बात करते हुए नारंग आई इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ एस के नारंग ने बताया कि कॉन्ट्रा न्यू विज़न ‘लेज़र विज़न करेक्शन’ द्वारा चश्मा हटाने के लिए एक प्रकार की सर्जरी है। कॉन्ट्रा विज़न किसी के चश्मे की पावर में सुधार के अलावा कॉर्नियल इरेग्यूलेरिटी को भी ठीक करता है। विजुअल एक्सिस पर काम करते हुए यह एक तीक्ष्ण और बेहतर विजुअल रिजल्ट देता है, जो लेसिक और स्माइल से अलग है। कॉन्ट्रा विजन ब्लेड रहित, दर्द रहित और टांके रहित प्रक्रिया है, जो कॉर्निया का 3डी नक्शा बनाकर और इसे 22,000 अद्वितीय ऊंचाई बिंदुओं में विभाजित करके काम करती है। फिर इनमें से प्रत्येक बिंदु को रोगी की दृश्य तीक्ष्णता और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सटीक रूप से ठीक किया जाता है।

एक सवाल के जवाब में डॉ एस के नारंग ने बताया कि हमारी ऑप्थामोलोजिस्ट टीम हर मरीज़ की आंखों की यूनिक कंडिशन जज करके एक ट्रीटमेन्ट प्लान बनाती हैं, जो एक्सीलेंट और हाई ग्रेड विज़ुअल रिज़ल्ट प्रदान करने के लिए उस मरीज को सर्वाधिक उपयुक्त हो। डॉ नारंग ने कहा कि यह नेत्र शल्य चिकित्सा की दुनिया मे एक नये दौर की शुरुआत है और इसका लाभ दिल्ली के लोगों को मिलेगा।

लेसिक – इस प्रक्रिया में कॉर्निया में माइक्रोकरेटोम (ब्लेड) या फेम्टोसेकन्ड द्वारा फ्लेप बनाया जाता है और उसके बाद एक्साईमर लेसर द्वारा चश्मे के नंबर को हटाया जाता है। तदुपरांत फ्लेप को अपनी जगह पर वापस रख दिया जाता है। ज्यादातर पेशेंट को अगले दिन से ही साफ दिखाई देने लगता है। लेकिन यह सिर्फ नंबर को हटाता है एब्रेजन (छोटी त्रुटि) को नहीं। इस प्रक्रिया से स्फीयर वह सिलेंडर दोनों तरह के नंबरों को हटाया जा सकता है।

स्माइल में फ्लेप की जरूरत नहीं होती। इसमें एक छोटे से इंसीजन द्वारा लेंटीक्यूल को कॉर्निया से निकाला जाता है एवं इसमें फेम्टोसेकन्ड लेजर का इस्तेमाल होता है। इस प्रक्रिया में स्फीयर को हटाया जा सकता है पर सिलेंडर को बहुत अच्छी तरह से नहीं निकाला जा सकता। इस प्रक्रिया में रिफाईनमेंट की और जरूरत है।

सबसे नई प्रक्रिया कॉन्टूरा लेसिक है इस प्रक्रिया में टोपोलाइज़र द्वारा आंखों का कस्टमाइज्ड मैप बनाया जाता है इस कस्टमाइज मैप में 22,000 पॉइंट्स को कंप्यूटर द्वारा ठीक किया जाता है। यह केवल नंबर को ही नहीं एब्रेजंस (बारिक त्रुटियों) को भी हटाने में सहायता देता है, जिससे कलर कंट्रास्ट व क्लेरिटी बेहतर होती है।

इस प्रक्रिया से 10 से 12 स्फीयर एवम 4 से 5 सिलेंडर तक का नंबर हटाया जा सकता है। जिन पेशेंट्स में लेसिक या स्माइल नहीं हो सकता उन पेशेंट्स में आईसीएल सर्जरी के लिए एडवाइज किया जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे कस्टमाइज़्ड लेंस मरीज के नेचुरल लेंस के ऊपर प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया से हम बड़े से बड़े नंबर को सफलतापूर्वक हटा सकते है।

इन सभी प्रक्रियाओं के बाद आंखों में एक से डेढ़ महीने तक दवाइयों को डालने की जरूरत होती है ,आंखों में पानी 2 हफ्ते तक नहीं लगाना होता है, आंखों को मलना वह मसलना नहीं होता है। आंखों में ड्राइनेस 2 महीने तक रह सकती है, आंखों के लिए कन्वर्जंस एक्सरसाइज बताया जाता है। पेशेंट अपना काम 3 दिन बाद वापस से शुरू कर सकते हैं। मरीजों की संतुष्टी मे लेजर तकनीक की सफलता का दर 99•5 % तक है।

यह प्रक्रिया 18 से 40 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के लिए चश्मा रहित काम करने व जीवन व्यतीत करने में अति लाभदायक सिद्ध हुआ है।