जेएनयू में कृष्णभक्त संत श्रील प्रभुपाद की जीवनी पर केंद्रित पुस्तक का लोकार्पण

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नई दिल्ली-

दिल्ली के जवाहर लाल विश्वविद्यालय (जेएनयू)के कन्वेंशन सेंटर में इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद की अधिकृत आत्मकथा ‘सिंग, डांस एंड प्रे: द इंस्पिरेशनल स्टोरी ऑफ श्रील प्रभुपाद’ नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक डॉ. हिंडोल सेनगुप्ता द्वारा लिखी गई है और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित की गई है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री चंचलपति दास, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, इस्कॉन बैंगलोर, उपाध्यक्ष, अक्षय पात्र फाउंडेशन ने की।
दिल्ली के जवाहर लाल विश्वविद्यालय के कंवेशन सेंटर में इस्कॉन के संस्थापक संत श्रील प्रभुपाद की जीवनी पर आधारित पुस्तक ‘सिंग, डांस एंड प्रे’ के लोकार्पण में छात्रों का अच्छा खासा जमावड़ा दिखा। डॉ. हिंडोल सेनगुप्ता द्वारा लिखित इस पुस्तक का लोकार्पण जेएनयू के वाइस चांसलर प्रो. शांतिश्री धूलिपुड़ी के कर कमलों से किया गया। इस्कॉन अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभक्ति आंदोलन की वाहक संस्था है। इसके संस्थापक संत श्रील प्रभुपाद ने विश्व के विभिन्न देशों सहित भारत में भव्य मंदिरों की श्रृंखला तैयार की जिसे इस्कॉन के वर्तमान संचालक आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। श्रील प्रभुपाद के जीवन से संबंधित एक वृत चित्र का भी प्रदर्शन किया गया। उनकी जीवनी प्राचीन भारत से लेकर 20वीं सदी के अमेरिका तक की कालातीत आध्यात्मिक संस्कृति को दर्शाती है। उस जमाने में तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बीसवीं शताब्दी के 60 और 70 के दशक में जिस आध्यात्मिक-सांस्कृतिक जागरण की शुरूआत की उसका प्रभाव यूरोप और अमेरिका में गहराता ही जा रहा है। उनकी जीवनी से संबंधित इस पुस्तक को दुनिया भर के विद्वानों, विचारकों और नेताओं से सर्वसम्मति से प्रशंसा मिली है।
वे श्रील भक्तिविनोद ठाकुर और श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती गोस्वामी महाराज जैसे महान आचार्यों के गौड़ीय-वैष्णव सम्प्रदाय में आते हैं। उन्होंने पश्चिम में भगवान कृष्ण और श्री चैतन्य महाप्रभु के संदेश को फैलाने के लिए कलकत्ता से न्यूयॉर्क शहर तक एक स्टीमशिप पर एक कठिन यात्रा की। बारह छोटे वर्षों में, श्रील प्रभुपाद ने सौ से अधिक कृष्ण मंदिरों, एक प्रकाशन गृह, शैक्षणिक संस्थानों और कृषि समुदायों का एक अंतर्राष्ट्रीय संघ स्थापित किया। मानव जाति के लिए उनके योगदान के लिए प्रसिद्ध नेताओं द्वारा उनकी अत्यधिक सराहना और सम्मान किया गया है। यह श्रील प्रभुपाद की एक प्रेरणाजनक कहानी है जो पश्चिमी प्रतिसंस्कृति के एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे और उन्होंने 20वीं सदी के मध्य में मुख्यधारा के अमेरिकियों के सामने वैदिक भारत की प्राचीन शिक्षाओं को रखा जिसने लेखक-कवि एलन गिन्सबर्ग से लेकर बीटल्स के प्रमुख गिटारवादक जॉर्ज हैरिसन तक को आकर्षित किया और उनके 100 से ज्यादा देशों में लाखों अनुयायी हैं।
इस अवसर पर बोलते हुए इस अवसर पर बोलते हुए, वाइस चांसलर प्रो. शांतिश्री धूलिपुड़ी ने कहा कि श्रील प्रभुपाद ने हमें 21वीं सदी में आध्यात्मिकता की प्रासंगिकता सिखाई है। भारत को एक आध्यात्मिक लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है। यह पुस्तक भारत के उस आंदोलन में एक महान तरीके से योगदान देगी। हम एक राष्ट्रवादी विश्वविद्यालय हैं। हम एक ऐसी संस्था हैं जो इस्कॉन के कई सिद्धांतों में विश्वास करती है – समानता के साथ उत्कृष्टता, समानता के साथ सहानुभूति, और अंतज्र्ञान के साथ अखंडता। यह पुस्तक बहुत ही स्पष्ट रूप से बड़ी स्पष्टता के साथ लिखी गई है, जिससे लोगों को समझने में आसानी होती है। यह पुस्तक बताती है कि कैसे श्रील प्रभुपाद ने 69 वर्ष की आयु में अमेरिका की यात्रा की, यह संदेश देते हुए कि कुछ भी नया शुरू करने में कभी देर नहीं होती। उन्होंने भगवद-गीता के महत्व के बारे में बताया।
श्री चंचलपति दास, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, इस्कॉन बैंगलोर, उपाध्यक्ष, अक्षय पात्र फाउंडेशन ने कहा कि मैं वाइस चांसलर को धन्यवाद देता हूं। इस प्रतिष्ठित संस्थान में आज श्रील प्रभुपाद की जीवनी का विमोचन करने के लिए। यह आयोजन हमारे देश के युवाओं तक श्रील प्रभुपाद के संदेश को पहुँचाने में मदद करेगा।
डॉ. ए.एस. हिंडोल सेनगुप्ता ने इस पुस्तक में श्रील प्रभुपाद के जीवन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शानदार ढंग से अंकित किया है। यह पुस्तक युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा और उन्हें जीवन की चुनौतियों से पार पाने के लिए प्रेरित करेगा।

अक्षय पात्र फाउंडेशन ने सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढाई को सहयोग देने के लिए डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम लांच किया

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गाजियाबाद-
अक्षय पात्र फाउंडेशन और आदिश एंड आशा जैन फाउंडेशन ने डिजिटल शिक्षा पहल के लांच के उपलक्ष्य में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, विजयनगर, गाजियाबाद के 70 स्टूडेंट्स को एंड्राएड टैबलेट प्रदान करने के लिए साझेदारी की है। अक्षय पात्र कॉर्पोरेट दानकर्ताओं और वायजूस के साथ मिलकर इस पहल को लागू कर रहा है ताकि समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से ताल्लुक रखने वाले स्टूडेंस को मुफ्त में अच्छी और आधुनिक शिक्षा प्रदान कर डिजिटल अंतर को कम किया जा सके और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
आदिश जैन और आशा जैन इस लांच कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। यह कार्यक्रम अक्षय पात्र फाउडेंशन के नेशनल प्रेसिडेंट एवं ट्रस्टी भरतारशाभा दासा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
अपनी सीएसआर पहल के अंतर्गत आदिश जैन और आशा जैन मुख्य रूप से शिक्षा,स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। अपने सीएसआर प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, आदिश जैन और आशा जैन अब यह अक्षय पात्र के डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम में भी योगदान दे रहे हैं। यह कार्यक्रम समावेशन पर फोकस करते हुए प्रतिस्पर्धा-आधारित पढ़ाई को बढ़ावा दे रहा है और डिजिटल भारत के सरकार के सपने में योगदान कर रहा है।
हर टैबलेट में बायजूस का लर्निंग एप्लीकेशन पहले से इंस्टॉल है जिससे बच्चों को अच्छी गुणवत्ता के तकनीक द्वारा संचालित प्रोग्राम्स को एक्सेस कर सकते हैं। यह डिजिटल टैबलेट 11 वीं कक्षा के स्टूडेंट्स को दिए गए जिससे उन्हें जेईई तथा नीट संबंधी सामग्री तक पहुंच दी गई है। आदिश जैन ने कहा हमें अच्छी शिक्षा के लाभ पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जिसके कारण हम अपना पेशेवर करियर बना सके और हमें एक अच्छा जीवन जीने का मौका मिला। अब हम अपने होमटाउन गाजियाबाद की मेधावी और निपुण लड़कियों की सहायता करना चाहते हैं। हम आशा करते हैं कि यह पहले अनेक लड़कियों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने में सशक्त बनाएगी।
भऱतारशाभा दासा, नेशनल प्रेसिडेंट एवं ट्रस्टी, अक्षय पात्र फाउंडेशन का कहना है, हमारा लक्ष्य भारत का कोई भी बच्चा भूख के कारण, शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए हमारी इस धारणा के अऩुरूप है कि शिक्षा उन प्रमुख भागों में से एक है जो इस देश के खुशहाल भविष्य को निखार सकती है। हमारा मानना है कि इंटरनेट और उचित टेक्नोलॉजी तक पहुंच के अभाव के कारण किसी भी बच्चे को अशिक्षित नहीं रहना चाहिए। हम आदिश जैन और आशा जैने के बहुत आभारी हैं कि उन्होंने हमारे इस डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम में अपना योगदान दिया। इन दोनों के सहयोग से हम बहुत कुछ करने और बच्चों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाने में सक्षम हुए हैं। हमें पक्का भरोसा है कि आने वाले सालों में दोनों संस्थानों के बीच होने वाले कई सहयोगों में अभी यह सिर्फ पहला सहयोग है।
अक्षय पात्र उन सीनियर सेकेंडरी विद्यार्थियों की सहायता करना चाहता है जो इंजीनियरिंग और मेडिकल के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में बैठना चाहते हैं। अक्षय पात्र इन स्टूडेंट्स को सपोर्ट करने के लिए शिक्षकों के साथ मिलकर काम कर रहा है। ताकि उन्हें अच्छी तरह से अनुसंधानित शैक्षणिक सामग्री मुहैया कराई जा सके। इस पहल के तहत चुने हुए स्टूडेंट्स को उनकी पढ़ाई के लिए दो वर्षों की इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
कक्षा 9 से कक्षा 12 के विद्यार्थियों की सहायता के लिए बायजूस उन्हें डिजिटल शैक्षणिक सामग्री प्रदान करेगा। स्टूडेंट्स को गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, समाज शास्त्र और कॉमर्स जैसे विषयों के लिए अध्ययन सामग्री तक पहुंच देगा। स्टूडेंट्स् को नीट, जेईई और सीईटी जैसी प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी अध्ययन सामग्री दी जाएगी।
यह शिक्षण सामग्री सभी स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होगी जिसमें आईसीएसई बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड के साथ साथ दूसरे राज्यों के शिक्षा बोर्ड जैसे गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, तेलगांना और पश्चिम बंगाल पर फोकस किया जाएगा।

कालाजार से बचाव को लेकर जिले में सिंथेटिक पायरोथायराइड का छिड़काव हुआ शुरू

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-छिड़काव से पहले सदर अस्पताल व कहलगांव और नवगछिया में छिड़कावकर्मियों को दी गई है ट्रेनिंग
-जिले के 11 प्रखंडों के 33 गांवों में 60 दिनों में पूरा करना है सिंथेटिक पायरोथायराड के छिड़काव का काम

भागलपुर, 17 मार्च-

कालाजार उन्मूलन को लेकर जिले में सिंथेटिक पायरोथायराइड के छिड़काव का काम शुक्रवार से शुरू हो गया। छिड़काव से पहले बुधवार और गुरुवार को दो दिनों तक सदर अस्पताल भागलपुर और अनुमंडल अस्पताल नवगछिया और कहलगांव में छिड़कावकर्मियों को ट्रेनिंग भी दी गई है। ट्रेनिंग के दौरान छिड़कावकर्मियों को जानकारी दी गई है कि गांव के सभी घरों में छिड़काव करना है। घरों की दीवारों की छह फुट की ऊंचाई तक सिंथेटिक पायरो थाइराइड का छिड़काव करना है। पहले घर के सभी सामान को एक जगह रखकर छिड़काव का काम शुरू करना है। जिले के 11 प्रखंडों के 33 गांवों में 60 दिनों में सिंथेटिक पायरोथायराड के छिड़काव का काम पूरा करना है। केयर इंडिया के डीपीओ मानस नायक ने बताया कि जिले के 11 प्रखंडों में सिंथेटिक पायरोथायराइड का छिड़काव होना है। पीरपैंती के 8, कहलगांव के 11, गोपालपुर के 1, खरीक के दो, रंगरा के 1, शाहकुंड के 1, सन्हौला के 4, गोराडीह के 1, सबौर के 1, जगदीशपुर के 1 और बिहपुर के दो गांवों में छिड़काव होना है। नवगछिया, नारायणपुर, इस्माइलपुर, सुल्तानगंज और नाथनगर प्रखंड में छिड़काव का काम नहीं होगा।
छिड़काव के दौरान कालाजार से बचाव की भी दी जाएगी जानकारी: मानस नायक ने बताया कि छिड़काव के दौरान एक भी घर छूटे नहीं, इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा। इसको लेकर छिड़काव टीम को भी आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा छिड़काव अभियान के दौरान सामुदायिक स्तर पर लोगों को कालाजार से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। इस दौरान कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं इसके उपचार की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की है सुविधा: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि कालाजार मरीजों की जांच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इस कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने के प्रावधान की जानकारी उन्हें दी जायेगी। साथ ही पॉजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।

कालाजार से बचाव के लिए जिले के छह प्रखंड में सिंथेटिक पायरोथाइराइड का किया जा रहा है छिड़काव

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-15 मार्च से 08 मई तक चलेगा अभियान
– जिलाभर में सदर अस्पताल खगड़िया, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अलौली, बेलदौर और गोगरी में मौजूद है कालाजार ट्रीटमेंट सेंटर

खगड़िया, 17 मार्च-

कालाजार से बचाव के लिए जिला भर के छह प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 29,194 घरों में रहने वाले 1,54,707 की आबादी के बीच 15 मार्च से 08 मई के दौरान कालाजार की दवा सिंथेटिक पायरोथाइराइड (एसपी) का छिड़काव किया जा रहा है । इस आशय की जानकारी शुक्रवार को जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ विजय कुमार ने दी । उन्होंने बताया कि जिला के चौथम प्रखंड को छोड़कर शेष सभी छह प्रखंडों, सदर प्रखंड, मानसी, अलौली, बेलदौर, गोगरी और परबत्ता में पाए गए कालाजार मरीजों के घरों के आसपास के रेवेन्यू गांवों में 15 मार्च से 08 मई तक कालाजार की सिंथेटिक पायरोथाइराइड दवा का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला भर में वर्ष 2020 में 24, 2021 में 27, 2022 में 20 और 2023 में अभी तक 3 सहित कुल 74 कालाजार के मरीज मिले हैं। 2023 में गोगरी में दो केस और परबत्ता प्रखंड में एक कालाजार का मरीज मिला, जिसका इलाज सदर अस्पताल खगड़िया में चल रहा है।

जिला के वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी मो. शाहनवाज आलम ने बताया कि अलौली प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 12 राजस्व गांव के 6310 घरों में रहने वाले 33,511 लोगों के बीच 15 मार्च से 26 अप्रैल कुल 40 दिनों के दौरान एसपी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। यहां 2020 में 13, 2021 में 18 और 2022 में 7 कालाजार के मरीज मिले थे ।
बेलदौर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 8 रेवेन्यू गांव के 5726 घरों में रहने वाले 29610 लोगों के बीच 15 मार्च से 14 अप्रैल तक कुल 30 दिनों के दौरान एसपी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। यहां 2020 में 4, 2021 में 4 और 2022 में कालाजार के 2 मरीज मिले थे ।
गोगरी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 7 रेवेन्यू गांव के 5997 घरों में रहने वाले 31312 लोगों के बीच 15 मार्च से 19 अप्रैल तक कुल 35 दिनों के दौरान एसपी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। यहां 2020 में 2, 2021 में 2, 2022 में 4 और 2023 में अभी तक 2 कालाज़ार के मरीज मिले हैं। इसी तरह खगड़िया सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 5 रेवेन्यू गांव के 3597 घरों में रहने वाले 19,151 लोगों के बीच 15 मार्च से 4 मई तक कुल 47 दिनों के दौरान एसपी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। यहां 2020 में 4, 2021 में 0 और 2022 में कालाजार के 1 मरीज मिला था ।
मानसी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 3 रेवेन्यू गांव के 4664 घरों में रहने वाले 24,123 लोगों के बीच 15 मार्च से 8 मई तक कुल 50 दिनों के दौरान एसपी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। यहां 2020 में 1, 2021 में भी 1 और 2022 में 4 कालाजार का मरीज मिला था।
इसके अलावा परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत 2 रेवेन्यू गांव के 2900 घरों में रहने वाले 17000 लोगों के बीच 15 मार्च से 2 मई तक कुल 45 दिनों के दौरान एसपी दवा का छिड़काव किया जा रहा है। यहां 2020 में 0, 2021 में 0, 2022 में 2 और 2023 में अभी तक 1 कालाजार का मरीज का मरीज मिला चुका है।

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार बबलू सहनी ने बताया कि जिला भर में चार जगहों सदर अस्पताल खगड़िया, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अलौली, बेलदौर और गोगरी में कालाजार का ट्रीटमेंट सेंटर कार्यरत है। अभी तत्काल सदर अस्पताल खगड़िया में परबत्ता से मिले एक कालाजार मरीज का उपचार हुआ है।

कालाजार उन्मूलन • जिले में कालाजार उन्मूलन को ले एसपी पाउडर का छिड़काव शुरू

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– प्रभारी सिविल सर्जन ने हरी झंडी दिखाकर की अभियान की शुरुआत
– घर-घर जाकर गठित टीम द्वारा किया जाएगा छिड़काव और बचाव के लिए किया जाएगा जागरूक

शेखपुरा, 16 मार्च-

कालाजार उन्मूलन को लेकर गुरुवार से जिले में सिंथेटिक पायरोथाइराइड ( एसपी पाउडर) छिड़काव अभियान का शुभारंभ हो गया। प्रभारी सिविल सर्जन डाॅ अशोक कुमार सिंह ने कालाजार रथ को हरी झंडी दिखाते हुए रवाना कर अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर सिविल सर्जन ने मौजूद सभी कर्मियों को अभियान के सफल संचालन सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए। अभियान के दौरान गठित टीम द्वारा घर-घर जाकर छिड़काव किया जाएगा और एक भी घर छूटे नहीं, इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा। साथ ही इस बीमारी के शुरुआती लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की भी जानकारी दी जाएगी। ताकि लोग शुरुआती दौर में बीमारी की पहचान कर समय रहते आवश्यक उपाय कर सकें । इस मौके पर वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार, भीबीडीएस मनोज कुमार, केबीसी अभिषेक कुमार आदि मौजूद थे।

– कालाजार मुक्त जिला निर्माण को लेकर किए जा रहे हैं हर जरूरी प्रयास :
प्रभारी सिविल सर्जन डाॅ अशोक कुमार सिंह ने कहा, कालाजार मुक्त जिला निर्माण को लेकर हर जरूरी और आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि कालाजार का पूरी तरह जड़ से खात्मा हो सके और जिले में मरीजों की संख्या शून्य हो सके। इसके लिए छिड़काव दल में शामिल कर्मियों को गौशाला, पूजा घर, पाठशाला, सोने वाला कमरे में अनिवार्य रूप से 06 फीट की ऊँचाई तक छिड़काव करने का निर्देश दिया गया। वहीं, उन्होंने बताया, अभियान को हर हाल में सफल बनाने के लिए हर दिन चिकित्सा पदाधिकारी एवं सुपरवाइजर द्वारा संध्याकालीन समीक्षा की जाएगी। जिसमें दिन भर में कितने घरों में छिड़काव हुआ समेत अन्य चर्चा की जाएगी। वहीं, उन्होंने बताया, 16 मार्च से 31 मई तक जिले के शेखपुरा एवं बरबीघा प्रखंड में छिड़काव अभियान चलेगा। इस दौरान शेखपुरा प्रखंड के कोसरा, जयनविगहा, प्रभुविगहा, घखड़ा, दानीविगहा एवं बरबीघा प्रखंड के पिजंडी व पिजंडीबिगहा के कुल 3501 घरों में छिड़काव किया जाएगा।

– कालाजार से बचाव के लिए एसपी पाउडर का छिड़काव ही सबसे बेहतर उपाय :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार ने बताया, कालाजार से बचाव के लिए लगातार कालाजार प्रभावित गाँव और क्षेत्रों में एसपी पाउडर से छिड़काव कराया जा रहा है। इस बीमारी से बचाव के लिए छिड़काव तो सबसे बेहतर उपाय है ही, पर इसके अलावा लोगों को सावधान और सतर्क रहने की भी जरूरत है। इसलिए, इस बीमारी से बचाव के लिए सभी लोग खुद भी सतर्क और सावधान रहें और लक्षण महसूस होने के साथ तुरंत जाँच करानी चाहिए। यही सबसे बेहतर और कारगर उपाय है। छिड़काव के दौरान भी लोगों को सतर्क रहने एवं साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने समेत अन्य जानकारियाँ दी जाएगी।

– बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार :
कालाजार बालू मक्खी के काटने से फैलता है। एसपी पाउडर के छिड़काव से ही बालू मक्खी के प्रभाव को पूर्णत: खत्म किया जा सकता है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार छिड़काव कराया जा रहा है। जिससे बालू मक्खी को समाप्त किया जा सके। कालाजार का लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पतालों में जाँच कराएं और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार इलाज कराएं। सरकारी अस्पतालों में जाँच एवं इलाज की मुफ्त समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही इन बीमारियों से बचने के जमीन पर नहीं सोएं । मच्छरदानी का नियमित रूप से उपयोग करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें ।

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।

– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं। छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री , बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

कालाजार से बचाव को लेकर जल्द शुरू होगा सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव

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–जिले के तीन प्रखंडों के चार गांवों में किया जाएगा सिंथेटिक पायराथायराड का छिड़काव
-छिड़काव से पहले स्वास्थ्यकर्मियों और वॉलेंटियर को इसे लेकर दिया जाएगा प्रशिक्षण

बांका, 16 मार्च –

जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव जल्द शुरू किया जाएगा। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारी की जा रही है। वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि जिले में कालाजार काफी नियंत्रण में है। तीन प्रखंडों के चार गांवों में ही इस बार सिंथेटिक पायराथायराइ का छिड़काव होना है। इसमें अधिकतम 15 दिनों का समय लगेगा। अन्य जिलों में 60 दिनों तक चलने वाला छिड़काव का काम आज ही शुरू हो रहा है। लेकिन बांका में बहुत ही कम क्षेत्र कालाजार से प्रभावित हैं, इसलिए हमलोग 15 मई से पहले ही छिड़काव का काम पूरा कर लेंगे। आरिफ इकबाल ने बताया कि छिड़काव से पहले स्वास्थ्यकर्मियों और वॉलेंटियर को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में छिड़कावकर्मियों को बताया जाएगा कि किस तरह से सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव करना है। गांव के सभी घरों में छिड़काव करना है। कोई भी घर छूटे नहीं, इसका ध्यान रखा जाना है। घरों की दीवारों की छह फुट की ऊंचाई तक सिंथेटिक पायराथाइराइड का छिड़काव करना है। पहले घर के सभी सामान को एक जगह रखकर छिड़काव का काम शुरू करना है।
जल्द बनाया जाएगा माइक्रो प्लानः आरिफ इकबाल ने बताया कि इस बार जिले के तीन प्रखंडों के चार गांवों में सिंथेटिक पायराथायराइड का छिड़काव करना है। बौंसी प्रखंड के नयाडीह गांव में एक दिन में ही छिड़काव का काम पूरा हो जाएगा। उस गांव की आबादी बहुत कम है। इसलिए घरों की संख्या भी काफी कम है। इसलिए छिड़काव में ज्यादा समय नहीं लगेगा। इसी तरह अमरपुर प्रखंड के गदाल गांव में छिड़काव होना है। वहां पर तीन से चार दिनों में छिड़काव का काम पूरा किया जाना है। वहीं धोरैया प्रखंड के काठ बनगांव और तेलीवर गांव में छिड़काव होना है। इन दोनों गांवों में भी आठ दिनों में छिड़काव का काम होना है। कुल मिलाकर 15 दिनों में हर हाल में छिड़काव का काम पूरा हो जाएगा। इसे लेकर जल्द ही माइक्रो प्लान बना लिया जाएगा।
सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की है सुविधा: आरिफ इकबाल ने बताया कि कालाजार मरीजों की जांच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इस कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने का प्रावधान है । साथ ही पॉजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।

बाराहाट सीएचसी में आशा कार्यकर्ताओं को गर्भ समापन के बारे में दी गई जानकारी

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-एमपीटी एक्ट के बारे में बताया, 2021 में संशोधित कानून की दी गई जानकारी
-गर्भ समापन के दौरान कड़ाई से गोपनीयता का पालन करने के बारे में दी जानकारी

बांका, 16 मार्च-

सांझा प्रयास नेटवर्क ने सुरक्षित गर्भ समापन कार्यक्रम के तहत गुरुवार को बाराहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में 36 आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया । प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि विशेष श्रेणी की महिलाओं के गर्भ समापन की अवधि 20 से 24 सप्ताह तक बढ़ा दी गई। इस संशोधित कानून की जानकारी सेवा भारती सेवापुरी संस्था के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर रितेश रंजन ने प्रशिक्षण के दौरान दी।

आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि 1971 से पूर्व किसी भी प्रकार के गर्भ समापन को अवैध माना जाता था। उस समय गर्भ समापन के लिए बड़ी कठिनाइयों का सामना करना होता था। अनेक तरह के घरेलू उपायों से गर्भ समापन करने की प्रक्रिया में महिलाओं की मृत्यु तक हो जाती थी। उसे रोकने के लिए 1971 में एमटीपी एक्ट बना। इसके बाद से सुरक्षित गर्भ समापन की प्रक्रिया शुरू हुई। अज्ञानता के कारण गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कुछ खास कमी नहीं हो रही थी। उन्होंने बताया कि 1971 के प्रावधानों के अनुसार गर्भ समापन कई शर्तों के साथ वैध माना गया। 2021 में एमटीपी एक्ट में संशोधन किया गया। इससे विशेष श्रेणी की महिलाओं के लिए 24 सप्ताह तक के गर्भ को शर्तों के अनुसार समापन कराया जा सकता है।

विशेष परिस्थिति में अविवाहित महिलाएं भी करा सकती हैं गर्भ समापन: रितेश रंजन ने बताया कि पर्याप्त भ्रूण विकृति के मामलों में गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भ समापन को मान्य किया गया है। किसी भी महिला या उसके साथी के द्वारा प्रयोग किए गए गर्भनिरोधक तरीके की विफलता की स्थिति में अविवाहित महिलाओं को भी गर्भ समापन सेवाएं दी जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि 20 सप्ताह तक के गर्भ समापन के लिए एक आरएमपी और 20 से 24 सप्ताह के गर्भ समापन के लिए दो आरएमपी की
राय चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा गर्भ समापन के लिए गोपनीयता को कड़ाई से बनाए रखा जाना आवश्यक है। इस मौके पर हेल्थ मैनेजर मनोज कुमार और बीसीएम सोनिका राय भी उपस्थित थीं।

स्वास्थ्य मेला के दौरान हुई टीबी रोगियों की जाँच एवं काउंसिलिंग

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• टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में सहयोग कर रहे हैं सीएचओ
• जागरूकता को हथियान बनाकर करें टीबी पर वार- डॉ. कुमारी गायत्री सिंह

पटना/ 16 मार्च-

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य मेला आयोजित किया गया। ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुमारी गायत्री सिंह ने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर महिलाओं, युवाओं व बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जाँच की जा रही एवं मुफ्त दवाएं भी दी गयीं। इस दौरान सीएचओ के साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा टीबी रोगियों की जाँच, उपचार के साथ उनकी काउंसिलिंग भी की गयी।
समय पर जाँच, दवा सेवन के साथ जागरूकता है जरूरी- डॉ. कुमारी गायत्री सिंह
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। किन्तु, इस बीमारी से स्थाई निजात के लिए समय पर जाँच और इलाज के साथ ही लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है। टीबी के लक्षणों की ससमय पहचान कर अविलंब जांच कराया जाना चाहिये| उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने जिलावासियों से अपील की है कि लक्षण दिखते ही तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के पालन के साथ इलाज कराकर बीमारी से स्थाई निजात पाएं।
हवा से फैलता है टीबी का रोगाणु :
जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया, टीबी के रोगाणु वायु द्वारा फैलते हैं। जब फेफड़े का यक्ष्मा रोगी खांसता या छींकता है तो लाखों-करोड़ों की संख्या में टीबी के रोगाणु थूक के छोटे कणों (ड्राप्लेट्स) के रूप में वातावरण में फेंकता है। बलगम के छोटे-छोटे कण जब सांस के साथ स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता और वह व्यक्ति टीबी रोग से ग्रसित हो जाता है। चिकित्सा कर्मी की देखरेख में रोगी को अल्पावधि वाली क्षय निरोधक औषधियों के सेवन कराने वाली विधि को डॉट्स (डायरेक्टली ऑब्जर्वड ट्रिटमेंट शॉर्ट कोर्स) कहते हैं। इसके तहत किया गया इलाज काफी प्रभावी हो जाता है। पूरा कोर्स कर लेने पर यक्ष्मा बीमारी से मरीजों को मुक्ति भी मिल जाती है।
कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर ने किया सहयोग:
जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर टीबी रोगियों की सुविधा के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर ने सहयोग किया। डॉ सिंह ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के साथ लोगों को टीबी को लेकर मनोवैज्ञानिक, सहयोग भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) पर बड़ी जिम्मेवारी है कि वह केंद्र पर आ रहे लोगों को बेहतर ढंग से टीबी की जांच और इलाज के साथ-साथ इससे बचने के लिए टीबी के लक्षण और सावधानियों के बारे में अच्छी तरह से जागरूक करें।

कालाजार उन्मूलन • दवा छिड़काव को लेकर कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण 

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– मलेरिया कार्यालय में प्रशिक्षण का हुआ आयोजन, दी गई जरूरी और आवश्यक जानकारी
– छिड़काव अभियान के दौरान कालाजार से बचाव के लिए लोगों को जागरूक भी करेंगे कर्मी
शेखपुरा, 15 मार्च-
कालाजार उन्मूलन अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए बुधवार को मलेरिया कार्यालय में छिड़काव अभियान की सफलता को लेकर कर्मियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें जिले के सभी प्रखंडों के कर्मी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद कर्मियों को छिड़काव कैसे करना है, छिड़काव के दौरान किन-किन बातों का ख्याल रखना है समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी दी गई। इस दौरान मौजूद कर्मियों को यह भी बताया गया कि कालाजार उन्मूलन को प्रत्येक छः माह पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एसपी पाउडर का  छिड़काव कराया जाता है। ताकि जिले में कालाजार का प्रभाव खत्म हो सके और लोग सुरक्षित रह सकें । उक्त प्रशिक्षण जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ अशोक कुमार सिंह एवं वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार द्वारा दिया गया । प्रशिक्षण के दौरान कर्मियों को कालाजार के लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की भी विस्तृत जानकारी दी गई । इस प्रशिक्षण में भीबीडीएस मनोज कुमार, केबीसी अभिषेक कुमार, विनोद कुमार आदि मौजूद थे।
– जिले में मरीजों की संख्या में लगातार आ रही गिरावट :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया, सभी के सहयोग से जिले में कालाजार मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है और हमारा जिला पूर्ण रूप कालाजार मुक्त होने के निकट पहुँच चुका है। इसलिए, संपूर्ण जिला को कालाजार मुक्त बनाने में सभी लोगों का  सकारात्मक सहयोग जरूरी है। वहीं, उन्होंने बताया, वर्ष 2019 में जिले में जहाँ मरीजों की संख्या 05 थी।  वर्ष 2020 में 01 हो गई। वर्ष 2021 में भी 05 एक्टिव केस थे। वर्ष 2022 में 02 एक्टिव केस मिले थे। वहीं, उन्होंने बताया, 10 हजार की आबादी पर एक मरीज मिलने पर, वह क्षेत्र कालाजार मुक्त माना जाता है। इसलिए, हमारा जिला कालाजार के प्रभाव से नियंत्रण में है। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में 56 दिनों तक छिड़काव अभियान चलेगा। जिसमें शेखपुरा प्रखंड में 39 दिन और बरबीघा प्रखंड में 17 दिनों तक छिड़काव होगा।
– कालाजार से बचाव के लिए सतर्कता और सावधानी जरूरी :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार ने बताया, अभी भी कालाजार के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। क्योंकि, इस बीमारी से बचाव के लिए हमेशा सतर्क  और सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, हमारे यहाँ की  बड़ी संख्या में लोग बाहर रहकर मजदूरी कर जीवन-यापन करते  और छः माह-साल भर में घर आते हैं। इस कारण भी कालाजार का  प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए, सभी लोगों को हमेशा बीमारी से बचाव के लिए सजग रहना चाहिए और जिस व्यक्ति में लक्षण दिखे, उन्हें तुरंत जाँच कराने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।
– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं।  छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री , बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक  छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना- मुंगेर से भेजे जाएंगे 10 बाल हृदय रोगी पटना में आयोजित होने वाले निःशुल्क हृदय रोग जांच शिविर में 

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– आगामी 20 व 21 मार्च को पटना के आईजीआईसी में आयोजित होगा जांच शिविर
– 21 मार्च को मुंगेर के चार प्रखंड से चिह्नित किए गए हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को उनके अभिभावक के साथ 102 एंबुलेंस से पटना भेजा और जांच के बाद वापस लाया जायेगा
– अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साई हृदय रोग अस्पताल के सहयोग से आयोजित किया गया है निः शुल्क जांच शिविर
मुंगेर, 15 मार्च-
  मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना अंतर्गत बाल हृदय रोगियों के लिए पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में आगामी 20 – 21 मार्च को आयोजित निःशुल्क हृदय रोग जांच शिविर में मुंगेर जिले से भेजे जाएंगे 10 हृदय रोगी बच्चे । इस आशय की  जानकारी बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने दी। उन्होंने बताया कि आगामी 21 मार्च  की  अहले सुबह मुंगेर के चार प्रखंड से चिह्नित  हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को उनके अभिभावक के साथ 102 एंबुलेंस से पटना भेजा और जांच के बाद वापस लाया जायेगा । 21  मार्च की  सुबह आठ बजे से अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साई हृदय रोग अस्पताल के सहयोग से पटना के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान में निः शुल्क जांच शिविर आयोजित  है। दो दिवसीय इस निःशुल्क जांच शिविर में पहले दिन 20 मार्च  को 19 जिला और दूसरे दिन 21 मार्च  को मुंगेर सहित 19 जिला से भेजे गए बाल हृदय रोगियों की  विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा निःशुल्क जांच की  जाएगी । इस जांच में ऑपरेशन के लिए चिह्नित  बच्चों को बाद में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत राज्य सरकार के द्वारा निः शुल्क ऑपरेशन के लिए अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साईं हृदय रोग अस्पताल भेजा जाएगा और ऑपरेशन के बाद वापस उनके घर तक पहुंचाया जाएगा।
मुंगेर में कार्यरत राष्टीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) समन्वयक डॉ. बिंदू ने बताया कि मुंगेर से 21 मार्च को  सुबह में जिला के चार प्रखंड से चिह्नित  बाल हृदय रोगियों को 102 एंबुलेस से पटना भेजा जाएगा। उनके साथ एक आयुष चिकित्सक या फार्मासिस्ट को भी भेजा जाएगा।  जो इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान पटना में आयोजित निः शुल्क जांच शिविर में समन्वय स्थापित कर मुंगेर के  बाल हृदय रोगियों की  जांच सुनिश्चित करवाएंगे। उन्होंने बताया कि मुंगेर के जमालपुर प्रखंड से सर्वाधिक चार, सदर प्रखंड से तीन, बरियारपुर से दो और धरहरा से एक चिह्नित बाल हृदय रोगी को जांच के लिए पटना भेजा जा रहा है।
डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) में कार्यरत निशांत कुमार ने बताया कि सदर प्रखंड निवासी मो. इरशाद अंसारी का सात महीने का बेटा मो. माहिर, मिथिलेश कुमार का दो साल छह महीने का बेटा अभय रंजन, कुंदन कुमार का तीन वर्षीय बेटा विराट कुमार, जमालपुर प्रखंड निवासी राजेश कुमार की  10 वर्षीय पुत्री सोनाक्षी कुमारी, जितेंद्र कुमार का 6 वर्षीय पुत्र नक्ष कुमार, अनिल कुमार का 3 वर्षीय पुत्र आरुष रॉय, मो.नौराज का 8 वर्षीय पुत्र मो.आदिल, बरियारपुर प्रखंड निवासी रामाशीष कुमार का 5 वर्षीय पुत्र अजीत कुमार सिंह, कन्हैया पासवान की  3 वर्ष 1 महीने की  बेटी करीना कुमारी और धरहरा प्रखंड निवासी संटू कुमार झा की  10 वर्षीय पुत्री तनु कुमारी को निः शुल्क हृदय रोग  जांच के लिए  एंबुलेंस से पटना के  इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान भेजा जाएगा।