जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल का किया निरीक्षण,दिए कई जरूरी निर्देश

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– निरीक्षण के दौरान अस्पताल में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की ली जानकारी
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के दिए निर्देश

बाँका, 15 मार्च-

जिलाधिकारी अंशुल कुमार बुधवार को सदर अस्पताल पहुँचे। जहाँ उन्होंने बारीकी के साथ पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया और मौजूद चिकित्सकों एवं कर्मियों को कई आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए। साथ ही अस्पताल में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की भी विस्तृत जानकारी ली। इसके बाद जिलाधिकारी ने अस्पताल की साफ-सफाई को भी देखा और लेबर रूम, इमरजेंसी, ओपीडी, एसएनसीयू, पैथोलॉजिकल लैब, दवा काउंटर, डिजिटल एक्स-रे कक्ष समेत अन्य कक्षों का बारीकी के साथ निरीक्षण किया। जिसके बाद सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को कहा। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ रविन्द्र नारायण, अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ लक्ष्मण पंडित, डीपीएम (हेल्थ) ब्रजेश कुमार सिंह, केयर इंडिया के डीटीएल तौसिफ कमर आदि मौजूद थे।

– हीटवेव से निपटने के लिए तैयार रहने समेत अन्य कई आवश्यक और जरूरी दिए निर्देश :
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मौजूद अस्पताल के पदाधिकारियों, चिकित्सकों एवं कर्मियों को हीटवेव से निपटने के लिए तैयारी करने, अस्पताल में उपलब्ध दवाई की रिपोर्ट प्रतिदिन ओपीडी में उपस्थित चिकित्सकों को देने, वार्ड की व्यवस्था सुदृढ़ रखने, लैब की सुविधा 24×7 चालू रखने, गैर हाजिर कर्मियों की सैलरी काटने, अस्पताल की चाहरदीवारी का काम जल्द से जल्द पूरा कराने, लैबर रूम में नया बेड लगाने, ओटी में उपलब्ध सामग्री को दुरूस्त कराने समेत अन्य आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए ।

– आईसीडीएस डीपीओ से संपर्क स्थापित कर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में कराएं भर्ती :
अस्पताल निरीक्षण के पश्चात जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल परिसर में ही संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र का भी निरीक्षण किया। जिसके दौरान मौजूद पदाधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आईसीडीएस डीपीओ से संपर्क स्थापित कर कुपोषित बच्चों की भर्ती कराएं। क्योंकि, जिले में कुपोषित बच्चों के आकड़े के मुताबिक केंद्र में काफी कम बच्चे भर्ती हैं ।। इसलिए, शीघ्र इस दिशा में आवश्यक पहल कर बच्चों की संख्या बढ़ाएं।

टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता को ले सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन

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– प्रत्येक महीने की 14 तारीख को जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर विभिन्न थीम पर अलग- अलग गतिविधियों का होता है आयोजन
– अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) के निर्देशानुसार टीबी स्क्रीनिंग पर फोकस करते हुए आयोजित किया गया स्वास्थ्य मेला

मुंगेर-

टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता की थीम पर मंगलवार को जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला आयोजित किया गया । मालूम हो प्रत्येक महीने की 14 तारीख को जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर विभिन्न थीम पर अलग – गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से योगाभ्यास, साइक्लिंग , ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, टीबी की स्क्रीनिंग, टेलीकंसलटेंसी सर्विस, गर्भवती महिलाओं, कुपोषित बच्चों की जांच सहित कई प्रकार की जांच एवम इलाज के साथ- साथ निःशुल्क दवाओं का वितरण भी किया जाता है।
सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर विगत नवंबर 2022 से आगामी अक्टूबर 2023 तक जिला भर के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर प्रत्येक महीने की 14 तारीख को विभिन्न थीम पर आधारित अलग- अलग गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में इस महीने 14 मार्च को अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) के निर्देशानुसार टीबी स्क्रीनिंग पर फोकस करते हुए स्वास्थ्य मेला आयोजित किया गया । उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर पर स्वास्थ्य मेला के आयोजन का टैग लाइन ” स्वस्थ्य मन, स्वस्थ्य घर” है।

जिला के संचारी रोग पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने बताया कि राज्य के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) के निर्देशानुसार जिला भर के सभी क्रियाशील हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर प्रत्येक महीने आयोजित होने वाले स्वास्थ्य मेला में इस महीने टीबी अवेयरनेस और सर्विसेज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई गतिविधियों का आयोजन किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से उच्च जोखिम वाले कई समूहों की टीबी स्क्रीनिंग की गई जैसे –
1. पिछले पांच वर्षों में टीबी से पीड़ित मरीज ।
2. वर्तमान में टीबी का इलाज करवा रहे मरीज के सम्पर्क में रहने वाले परिवार के सदस्य ।
3. कोरोना पॉजिटिव पाए गए लोगों ।
4. डायबिटीज के रोगियों ।
5. डायलिसिस अथवा इम्यूनो स्पेसेंट ट्रीटमेंट ले रहे रोगियों ।
6. खांसी, दमा और श्वसन तंत्र के पुराने मरीज ।
7. कुपोषित बच्चों और 8. गर्भवती महिलाओं की विशेष रूप से टीबी स्क्रीनिंग की गई।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा समाज में टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए भी विभिन्न स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मियों के द्वारा लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है।

जिला के टीबी/एचआईवी कॉर्डिनेटर शलेंदु कुमार ने बताया कि प्राप्त निर्देश के अनुसार समुदाय के नजदीक टीबी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण की सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत जन आरोग्य समिति के सहयोग से महीने में किसी एक दिन (तिथि अभी तय नहीं) निक्षय दिवस का आयोजन किया जाना है। इसके अलावा राष्ट्रीय टीबी दिवस 24 मार्च से अगले 21 दिनों ( 24 मार्च से 13 अप्रैल 2023) तक प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान चलेगा । इस दौरान हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत जन आरोग्य समिति के सहयोग से संभावित लोगों में एक्टिव केस फाइंडिंग और प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत टीबी मुक्त पंचायत बनाने के लिए सामुदायिक प्रयास किया जाएगा।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर में कार्यरत सतीश कुमार ने बताया कि जिला के जमालपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर इटहरी, बरियारपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कल्याणपुर, संग्रामपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चंडूकी के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सुजावलपुर, गालिमपुर, हसनपुर सहित लगभग सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर टीबी जागरूकता की थीम के साथ- साथ टेली कंसलटेंसी सर्विस, एनसीडी स्क्रीनिंग सहित अन्य गतिविधियों का आयोजन किया गया।

लखीसराय जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंड के चार गाँवों में चलेगा छिड़काव अभियान

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– अभियान की सफलता को लेकर कर्मियों को दिया गया एक दिवसीय प्रशिक्षण
– लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया प्रखंड के कालाजार प्रभावित गाँव में चलेगा अभियान

लखीसराय-

पूरे प्रदेश में कालाजार उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है । इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों लखीसराय, सूर्यगढ़ा, पिपरिया एवं बड़हिया में शुरू होने वाले डीडीटी छिड़काव की सफलता को लेकर कर्मियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण जिला भीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार के द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद छिड़काव कर्मियों को घर-घर जाकर कैसे छिड़काव करनी है, छिड़काव के दौरान किन-किन बातों का ख्याल रखना आदि तमाम जानकारियाँ विस्तार पूर्वक दी गई। इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ .अशोक कुमार भारती ,जिला भी..वी डी . नियंत्रण पदाधिकारी डॉ .धीरेन्द्र कुमार ,भीडीसीओ भगवान दास, गौतम प्रसाद, भीवी डीएस विनोद कुमार चौबे, दिलीप कुमार मालाकार , शंकर कुमार केयर इंडिया के डीपी ओ के साथ केबीसी ललिता कुमारी आदि मौजूद थी ।

– प्रथम चक्र के तहत 60 दिनों तक चलेगा छिड़काव अभियान :
जिला भीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया, जिले के चार कालाजार प्रभावित प्रखंडों के चार गाँवों में शुरू होने वाले प्रथम चक्र का छिड़काव अभियान 60 दिनों तक चलेगा। ये अभियान 15 मार्च से शुरू हो रहा है। छिड़काव करने वाली स्वास्थ्य टीम, लखीसराय के वार्ड न. 1 ,वार्ड न. 10 एवं महिसोना , सूर्यगढ़ा के रामपुर, पिपरिया के रामचंद्रपुर एवं बड़हिया के आदर्श लक्ष्मीपुर गाँव में घर-घर जाकर छिड़काव करेगी। इस दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि एक भी घर छिड़काव से छूटे नहीं और हर हाल में शत-प्रतिशत घरों में छिड़काव सुनिश्चित रूप से हो।

– सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध :
कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जिसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने का प्रावधान है । साथ ही पाॅजिटिव मरीजों का सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये संबंधित आशा कार्यकर्ता को दी जाती है। 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना, शरीर का काला पड़ना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वैसे व्यक्ति जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं।

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।

– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल :
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरूनी दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरूनी दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं। छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री , बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिससे कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

पोषण के लिए आहार मिलने से टीबी के गरीब मरीजों को मिल रही राहत

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-भागलपुर समेत कई जिलों के टीबी के मरीजों को मिल रही आर्थिक मदद

-केएचपीटी की केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक में निक्षय मित्र कर रहे मदद

भागलपुर, 14 मार्च-

कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर लगातार टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित कर रहा है। बैठक में टीबी के मरीज, उनकी देखभाल करने वाले होते हैं। इसके साथ-साथ जब से निक्षय मित्र योजना शुरू हुई है, तब से निक्षय मित्र इसमें शामिल हो रहे हैं। बैठक के दौरान टीबी के मरीजों और उनकी देखभाल करने वालों को दवा और इलाज से संबंधित सलाह तो दी ही जाती है। अब इस दौरान टीबी के गरीब मरीजों को निक्षय़ मित्र पोषण के लिए आहार भी उपलब्ध कराते हैं। भागलपुर जिले में अभी सात लोगों को हर महीने पोषण के लिए सामग्री दी जाती है। इसी तरह सूबे के अन्य जिलों में भी इस तरह से मदद की जा रही है। टीबी के गरीब मरीजों को इलाज औऱ दवा तो मुफ्त में मिल ही रही थी अब राशन सामग्री मिल जाने से उन्हों दोतरफा मदद मिल रही है।

केएचपीटी की डिस्ट्रक्ट टीम लीडर आरती झा कहती हैं कि हमलोग स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लगातार क्षेत्र में काम कर रहे हैं। मरीजों को चिह्नित करने से लेकर लोगों को टीबी के बारे में जागरूक करने के काम से लेकर अब तो उन्हें राशन सामग्री भी उपलब्ध करवाने में मदद कर रहे हैं। खासकर सामुदायिक स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ने से टीबी मरीजों को और भी राहत मिल रही है। व्यवसाय के क्षेत्र हो या गैरसरकारी सेवा में कार्यरत, सरकारी सेवा में कार्यरत हो या फिर राजनीति में सक्रिय लोग ये सभी टीबी मरीजों को मदद करने में आगे आ रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज मुफ्तः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि केएचपीटी जिले में टीबी उन्मूलन में अच्छा काम कर रहा है। इस तरह के आयोजन से टीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी। लोगों में टीबी के प्रति जानकारी बढ़नी बहुत जरूरी है। टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त में होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते तक खांसी हो, शाम को पसीना आए, लगातार बुखार रहे, बलगम के साथ खून हो इत्यादि लक्षण महसूस हो तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल चले जाना चाहिए। वहां जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो तत्काल इलाज शुरू कर देना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इलाज तो मुफ्त में होता ही है, साथ में दवा भी बिल्कुल मुफ्त दी जाती। इसके अलाना जब तक इलाज चलता है, तब तक पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी मरीजों को दी जाती है।

मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर की सही समय पर करें रिपोर्टिंग, तभी लगेगा लगाम

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-क्षेत्र में कारणों को जानने की करें कोशिश, उसका किया जाएगा समाधान
-मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर को लेकर प्रमंडल स्तरीय प्रशिक्षण का आगाज

भागलपुर, 14 मार्च-

मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण को लेकर मंगलवार को शहर के एक होटल में दो दिवसीय प्रमंडल स्तरीय प्रशिक्षण का आगाज हुआ। प्रशिक्षण में भागलपुर और बांका जिले के एसीएमओ, एमएनई, स्वास्थ्य प्रबंधक समेत तमाम स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हुए। प्रशिक्षण देने का काम केयर इंडिया की निलोफर बेगम, जय कृष्णा और सुनील गुप्ता ने किया। प्रशिक्षण के पहले दिन आरपीएम रूपनारायण शर्मा, रैम आरिफ हुसैन, आरएमईओ राहुल सिंह, डीएसी राजीव सिंह और जिला गुणवत्ता सलाहकार डॉ. प्रशांत कुमार ने भी महत्वपूर्ण सलाह दी।
आरपीएम रूपनारायण शर्मा ने कहा कि दो दिनों तक चलने वाले प्रशिक्षण के पहले दिन भागलपुर और बांका के स्वास्थ्य अधिकारियों को मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर पर लगाम लगाने को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। मुझे उम्मीद है कि वे लोग इसका लाभ उठाएंगे और क्षेत्र में जाकर इस पर अमल करेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि भागलपुर और बांका, दोनों ही जिलों में मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर पर लगाम लगाने के लिए इसकी समय पर रिपोर्टिंग बहुत जरूरी है। साथ ही क्षेत्र में जाकर इसके कारण की तलाश भी करना आवश्यक है। कारणों का पता चलने पर ही उसका समाधान किया जा सकता है। अगर कारणों का पता नहीं चलेगा तो फिर उसका समाधान कैसे होगा। इसलिए क्षेत्र में जाकर कारणों की तलाश करने की सलाह दी गई। पोर्टल पर समय से इंट्री करने के लिए भी सभी लोगों को कहा गया।
परिवार नियोजन के बारे में भी दी गई जानकारीः आरपीएम ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान परिवार नियोजन के लेकर भी बात की गई। छोटा और सुखी परिवार के साथ बच्चे दो ही अच्छे के बारे में भी जानकारी दी गई। भागलपुर और बांका के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बताया गया कि मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर के साथ क्षेत्र में परिवार नियोजन के बारे में भी लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। मातृत्व एवं शिशु मृत्यु दर के साथ-साथ परिवार नियोजन के बारे में भी लोगों में जागरूकता जरूरी है। इससे क्षेत्र के लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी जिसका लोगों को फायदा पहुंचेगा। इसके अलावा परिवार नियोजन में अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल को लेकर लोगों को जागरूक करने की भी बात कही गई। इसका फायदा क्षेत्र के लोगों को मिलेगा।

सभी को एक समान ख़ुशी का है हक़- रजनी

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सभी को एक समान ख़ुशी का है हक़- रजनी

• अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर रघुरामपुर पंचायत में सहयोगी संस्था द्वारा कार्यक्रम का हुआ आयोजन
• नाच गाने एवं खेल खेल में प्रतिभागियों ने रखी अपनी बात

पटना-

सहयोगी संस्था द्वारा रघुरामपुर पंचायत भवन में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजन किया गया. कार्यक्रम में रघुरामपुर पंचायत के नूरपुर गांव की वार्ड न० – 7 की वार्ड सदस्य सरोज देवी, चांदमारी गांव की वार्ड न० – 2 की वार्ड सदस्य पूनम देवी, स्कूल की शिक्षक, महिला कैडर तथा किशोरी सहित 175 लोग शामिल थे.
नाच गाने एवं खेल खेल में प्रतिभागियों ने रखी अपनी बात:
कार्यक्रम में महिलाओं के लिए खेल, नाच – गाना तथा अपनी बात को रखने के लिए मंच प्रदान करना था. कार्यक्रम का उद्देश्य सभी प्रकार की खुशियों पर बालिकाओं एवं महिलाओं का एक समान हक़ होने का संदेश प्रसारित करना था. सहयोगी संस्था की रजनी ने कहा कि अक्सर हमने सबको कहते हुए सुना है कि यह हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन जब बात आती है महिलाओं की भी अधिकार की और उनके मनोरंजन की तो सभी चुप हो जाते है. जैसे उम्र होने के साथ उनके सारे शौख, पसंद ना पसंद सब खत्म हो जाती है. महिलाओं से उम्मीद की जाती है की अब उनकी खुश परिवार तथा बच्चों में ही हैं. रजनी ने कहा कार्यक्रम में खेल के माध्यम से हमारी एक कोशिश भी थी कि लिंग आधारित भेदभाव को कम किया जा सके.
समुदाय को अपनी सोच बदलने की जरुरत:
कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए रजनी ने बताया कि प्रशिक्षण में हम बात करते हैं कि लिंग आधारित हिंसा तथा व्यवहार परिवर्तन की लोग मान तो लेते हैं लेकिन सोचते है कि बेटी से काम करवाएंगे तो लोग हसेंगे. उसी तरह लड़कियां हूला-हूप के साथ खेलने में शर्माती है. उनकी सोच होती है कि हम करेंगे तो बाकी लोग हम पर हँसेंगे. रजनी ने बताया कि वहीं जो महिलाएं ये नहीं सोचती कि मेरे कुछ भी करने से वे हंसी की पात्र बनेंगी, वो कोशिश करती हैं और दूसरों को प्रेरणा देती हैं. महिलाओं से जब भी बात करो खेल की तो कहती हैं अब उम्र कहां है ये सब करने की, अब बच्चा खेलेगा. रजनी ने बताया कि खेलने के बाद वही महिलाएं कहती हैं बड़ा मजा आया और लगा की बचपन में चले गए. कहीं न कहीं उनका भी मन होता है लेकिन एक दूसरे से शर्म के कारण वो अपनी मन की बात नहीं कर पाती हैं.

लखीसराय जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर आज होगा मासिक स्वास्थ्य मेला का आयोजन

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जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर आज होगा मासिक स्वास्थ्य मेला का आयोजन

– टीबी से बचाव को लेकर किया जाएगा जागरूक और दिया जाएगा जरूरी चिकित्सा परामर्श
– यक्ष्मा के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने पत्र जारी कर प्रदेश के सिविल सर्जन को दिए निर्देश

लखीसराय-
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए सरकार एवं राज्य स्वास्थ्य समिति पूरी तरह कटिबद्ध है। ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके और प्रत्येक व्यक्ति आसानी के साथ स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त कर सके। इसी कड़ी में हर माह की तरह इस माह भी मंगलवार को जिले में संचालित सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर मासिक स्वास्थ्य मेला का आयोजन होगा। जिसमें मरीजों को समुचित स्वास्थ्य जाँच के साथ-साथ स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक और जरूरी चिकित्सकीय परामर्श भी दिया जाएगा । साथ ही इसबार मेला के दौरान टीबी से बचाव के लिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा और संक्रमित मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसको लेकर अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी (यक्ष्मा) ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन और अपर उपाधीक्षक सह अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए हैं।

– जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर हर माह मेला का होता है आयोजन :
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया, हर माह 14 तारीख को जिले के सभी हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर पर स्वास्थ्य मेला का आयोजन होता है। जिसके माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों की स्वास्थ्य जाँच की जाती है। इस मेला का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है । इस बार मेला के दौरान टीबी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने एवं संक्रमित मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक और जरूरी निर्देश दिए गए हैं। हर हाल में निर्देश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

– टीबी से स्थाई निजात के लिए समय पर जाँच और इलाज जरूरी :
सीडीओ डाॅ श्रीनिवास शर्मा ने बताया, टीबी अब लाइलाज नहीं है। किन्तु, इस बीमारी से स्थाई निजात के लिए समय पर जाँच और इलाज जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि लक्षण दिखते ही तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के पालन के साथ इलाज कराकर बीमारी से स्थाई निजात पाएं। यही इस बीमारी से बचाव का सबसे बेहतर और कारगर उपाय है। वहीं, उन्होंने बताया, टीबी किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। इसलिए, हर आयु वर्ग के लोगों को जाँच कराना जरूरी है।

– ये हैं टीबी के प्रारंभिक लक्षण :
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– हलका बुखार रहना।
– खांसी एवं खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– लगातार पन्द्रह दिनों तक खाँसी रहना
– गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
– बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।

जनसंख्या वृद्धि से होने वाली परेशानियों और परिवार नियोजन से मिलने वाली खुशियों के प्रति दंपतियों को करें जागरूक : सिविल सर्जन

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– मिशन परिवार विकास अभियान के अंतर्गत परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा 13 से 25 मार्च तक चलेगा
-सिविल सर्जन, डीपीएम सहित कई अधिकारियों ने किया पखवाड़ा का उद्घाटन
: एएनएम स्कूल की छात्राओं के द्वारा निकाली गई जागरूकता रैली,सिविल सर्जन और डीपीएम ने दिखाई हरी झंडी

मुंगेर-
जनसंख्या वृद्धि से होने वाली परेशानियों और परिवार नियोजन से मिलने वाली खुशियों के प्रति दंपतियों को जागरूक करें । उक्त बात सोमवार को सदर अस्पताल परिसर में 5 से 25 मार्च तक चल रहे मिशन परिवार विकास अभियान के अंतर्गत सोमवार से 25 मार्च तक चलने वाले परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते हुए सिविल सर्जन डॉ.पीएम सहाय ने कही। उन्होंने बताया कि जिस तरह से देश में जनसंख्या का विस्फोट होता रहा है, इस स्थिति में आने वाले दिनों में लोगों को रहने के लिए जमीन की काफी किल्लत होने वाली है। बावजूद इसके परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधन को अपनाकर जनसंख्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। इसमें आप सभी लोग अपने परिवार और समाज में उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हुए जनसंख्या वृद्धि से होने वाली परेशानियों और परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधनों के इस्तेमाल से मिलने वाली खुशियों के प्रति दंपतियों को जागरूक कर सकते हैं।
इस अवसर पर डीपीएम फैजान आलम अशर्फी, डीसीएम निखिल राज, डीडीए सुशील कुमार, एएनएम स्कूल की प्रभारी प्राचार्य रागिनी कुमारी, फैमिली प्लानिंग काउंसलर योगेश कुमार, जिला स्वास्थ्य समिति से डॉ सामंत मनीष देव, सुजीत कुमार, पीएसआई से कौशल किशोर, मुंगेर अर्बन हेल्थ कंसल्टेंट संदीप कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।
परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के दौरान महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के लिए मिला है 1000 का लक्ष्य :
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम ) फैजान आलम अशर्फी ने बताया कि परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के दौरान महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के लिए 1000 का लक्ष्य मिला है। उन्होंने बताया कि निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के लिए चिह्नित लोगों तक पहुंच कर उन्हें परिवार नियोजन के साधन अपनाने से होने वाले आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में होने वाले सभी सकारात्मक परिवर्तन के बारे में समझाते हुए परिवार नियोजन के साधन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधन अपनाने पर सरकार के द्वारा लाभार्थी और उसके उत्प्रेरक को मिलती है सहायता राशि :
जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज ने बताया कि परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधन अपनाने पर सरकार के द्वारा लाभार्थी और उसके उत्प्रेरक को सहायता राशि मिलती है। उन्होंने बताया कि महिला बंध्याकरण कराने पर लाभार्थी को 2000 और उसके उत्प्रेरक को 300 रुपया मिलता है। वहीं प्रसव के बाद सात दिनों के अंदर महिला बंध्याकरण करवाने पर लाभार्थी को 3000 और उसके उत्प्रेरक को 400 रुपया मिलता है। इसके अलावा पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को 3000 और उसके उत्प्रेरक को 400 रुपया मिलता है। परिवार नियोजन के अस्थाई साधन के रूप में कॉपर टी लगवाने पर लाभार्थी को 300 रुपया और एमपीए (अंतरा) इंजेक्शन लगवाने पर 100 रुपया की सहायता राशि मिलती है।

सदर अस्पताल में कार्यरत परिवार नियोजन परामर्शदाता योगेश कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल मुंगेर सहित जिला के सभी सरकारी अस्पताल में परिवार नियोजन के स्थाई साधन के रूप में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी के साथ- साथ महिलाओं को कॉपर टी लगाने की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा गर्भ निरोधक सुई अंतरा, गर्भ निरोधक गोलियां, कंडोम(निरोध) सहित दैनिक गर्भ निरोधक गोली निरोधक गोली(माला एन) , आपातकालीन गर्भनिरोधक गोली (ईजी पिल )और साप्ताहित गर्भ निरोधक गोली (छाया) निःशुल्क उपलब्ध हैं । ये गोलियां और कंडोम आरोग्य दिवस और आशा कार्यकर्ता के पास भी उपलब्ध रहता है।

भागलपुर जिले में एनीमिया मुक्त भारत अभियान किया जाएगा तेज, बच्चों-युवाओं को खिलाई जाएगी दवा

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-सदर अस्पताल सभागार में शिक्षा, स्वास्थ्य़ और आईसीडीएस के कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
-प्रशिक्षण में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने कर्मियों को दिया प्रशिक्षण

भागलपुर-

जिले में एनीमिया मुक्त भारत अभियान को तेज किया जाएगा। जिले में यह अभियान 2019 में शुरू हुआ है। बीच में कोरोना के कारण इसकी गति पर असर पड़ गया था, लेकिन अब जब कोरोना के मामले नियंत्रण में आ गए हैं तो इस अभियान को जिले में एक बार फिर से तेज किया जा रहा । इसे लेकर सोमवार को सदर अस्पताल में स्वास्थ्य, शिक्षा और आईसीडीएस के कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी, डीसीएम भरत जी और डीडीए जफरूल इस्लाम समेत तमाम स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे। सोमवार को नवगछिया, पीरपैंती, नाथनगर और सन्हौला के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, लेडी सुपरवाइजर, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण देने का काम जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्णः मौके पर मौजूद जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि बच्चों में एनीमिया एक गंभीर समस्या है। आमतौर पर लंबे समय तक बहुत कम आयरन के सेवन और तेजी से शारीरिक विकास के कारण बच्चे एनीमिया की चपेट में आ जाते हैं। इस कारण बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं तार्किक क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धता और कौशल भी एनीमिया के कारण प्रभावित होते हैं। इसलिए एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम को जिले में तेज करना बहुत जरूरी है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगी। इसलिए इसमें आपलोग बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाएं।
सुनिश्चित करें कि कोई बच्चा नहीं छूटेः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. चौधरी ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत छह माह के बच्चे से लेकर 19 साल के युवाओं तक को दवा खिलानी है। इस कार्यक्रम के तहत सबसे अधिक लाभार्थी स्कूलों में ही है। लाभुकों की बड़ी संख्या स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे या फिर बच्चियां हैं। इसलिए आपलोगों से आग्रह है कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। स्कूल आने वाले एक-एक बच्चे के बारे में सुनिश्चित करें कि कोई भी दवा लेने से छूट नहीं जाए।
स्कूलों में प्रत्येक बुधवार को होगा संचालनः जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि इस कार्य़क्रम के तहत छह से नौ आयुवर्ग के बच्चों को सप्ताह में एक बार प्रत्येक बुधवार को एक गुलाबी गोली का सेवन एमडीएम के बाद कराने का प्रावधान है। इसी तरह 10 से 19 आयुवर्ग के किशोरों एवं युवाओं को प्रत्येक बुधवार को एक नीली गोली टिफिन के बाद दी जाएगी। बुधवार को अगर कोई बच्चा छूट जाता है तो उसे गुरुवार को स्कूलों में दवा दी जाएगी।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम- नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन को ले आगामी 12 मार्च को सीएमई का होगा आयोजन

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– सीएमई कार्यक्रम में शामिल होंगे जिलाभर के सरकारी और निजी चिकित्सक
– नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन पर निजी चिकित्सकों और टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में दी जाएगी विस्तृत जानकारी

मुंगेर, 10 मार्च-

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन को ले रविवार 12 मार्च को जिला मुख्यालय स्थित इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सभागार में कंटीन्यू मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) का आयोजन किया जाएगा। इस आशय की जानकारी शुक्रवार को जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने दी। उन्होंने बताया कि विगत 28 फरवरी को आयोजित डिस्ट्रिक्ट टीबी फोरम की मीटिंग में जिलाधिकारी नवीन कुमार के द्वारा प्राइवेट सेक्टर में नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन को बढ़ाने को ले दिए गए निर्देश के अनुसार रविवार को सीएमआई कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में जिला भर के सभी सरकारी और निजी चिकित्सकों को आमंत्रित किया गया है। इसको ले सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने आईएमए मुंगेर के अध्यक्ष और सचिव को पत्र जारी कर उक्त कार्यक्रम के आयोजन और सरकारी और निजी चिकित्सकों की अहम भागीदारी सुनिश्चित कराने को जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि उक्त कार्यक्रम में डब्ल्यूएचओ के स्टेट कंसल्टेंट डॉ मेजर अवकाश सिन्हा मौजूद रहेंगे। वे मुंगेर, बांका,भागलपुर सहित कई अन्य जिलों में चल रहे टीबी कार्यक्रम की मानिट रिंग देख रहे हैं।

नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन पर निजी चिकित्सकों और टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में दी जाएगी विस्तृत जानकारी :
डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कोऑर्डिनेटर शलेंदु कुमार ने बताया कि सीएमई कार्यक्रम में नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन पर निजी चिकित्सकों और टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी । उन्होंने बताया कि नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन पर निजी चिकित्सकों को सरकार के द्वारा प्रत्येक नोटिफिकेशन पर 500 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस कार्य में मुंगेर जिला में वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर (डब्ल्यूएचपी) नामक संस्था के वोलेंटियर निजी चिकित्सकों के संस्थान में जाकर उन्हें नए टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन से जुड़े तमाम तकनीकी पहलुओं से अवगत कराते हैं। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में नए नोटिफाइड मरीजों को सरकार के द्वारा मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं के बारे में भी विस्तृत रूप से जानकारी दी जाएगी।
निक्षय पोर्टल पर नोटिफाइड नए टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं :
उन्होंने बताया कि नए नोटिफाइड टीबी मरीजों को टीबी के साथ – साथ एचआईवी और डायबिटीज की भी जांच कराई जाती है। इसके साथ ही जांच के बाद यह पता किया जाता है कि नए टीबी नोटिफाइड मरीज टीबी की किस दवा से सेंसेटिव और किस दवा से रेजिस्टेंट हैं । इसके बाद टीबी मरीज के पूरी तरह ठीक होने तक लगातार ट्रीटमेंट जारी रहता है। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिशियेरी ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से नकद मदद (कैश एसिस्टेंस) दी जाती है। इसके अलावा निक्षय पोषण योजना के तहत पोषक आहार ग्रहण करने के लिए प्रत्येक महीने 500 रुपए की सहायता राशि सरकार के द्वारा दी जाती है। उन्होंने बताया कि सरकार के द्वारा टीबी मरीजों को निःशुल्क दवा, निःशुल्क इलाज के साथ- साथ यात्रा के लिए भी सहायता दी जाती है। भारत सरकार की नई निक्षय मित्र योजना के तहत स्वयं सेवी संस्थाओं के द्वारा टीबी मरीजों को गोद लेकर जब तक टीबी मरीज का ट्रीटमेंट जारी रहता उस समय तक पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है।