जीविका दीदी, टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति को जांच के लिए भेजती हैं अस्पताल

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–सबौर के सुल्तानपुर भिट्ठी में जीविका दीदियों के साथ टीबी पर हुई चर्चा
-स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से केएचपीटी ने बैठक का कराया आय़ोजन

भागलपुर, 3 मार्च-

सबौर प्रखंड के सुल्तानपुर भिट्ठी में स्वास्थ्य विभाग और कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से टीबी को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र की 50 जीविका दीदियां शामिल हुईं। बैठक में केएचपीटी के कर्मियों के साथ जीविका दीदियों ने टीबी को लेकर चर्चा की। जीविका दीदियों के साथ चर्चा के दौरान उनसे जाना गया कि समाज से टीबी को ख़त्म करने के लिए किस तरह के प्रयास करने चाहिए। जीविका दीदियों ने भी बताया कि वे लोग आसपास के लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करती हैं। यदि किन्हीं में टीबी के कोई लक्षण दिखते हैं तो उनको जांच के लिए वे अस्पताल भेजती हैं। कभी साथ लेकर भी जाती तो कभी किसी और के जरिये उन्हें अस्पताल भेजती हैं। बैठक के दौरान केएचपीटी की टीम ने जीविका दीदियों को बताया कि टीबी के लक्षण क्या हैं। ऐसे में हम सबको मिलकर समय से इसकी जांच और इलाज सुनिश्चित करना चाहिए। इससे समाज से टीबी को जल्द से जल्द खत्म किया जा सकेगा और अपने गांव, क्षेत्र और देश को टीबी मुक्त बना सकेंगे।
टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए जागरूकता जरूरीः केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि टीबी को समाप्त करने के लिए इलाज के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर जागरूकता भी बहुत जरूरी है। लोगों में जितनी तेजी से जागरूकता बढ़ेगी उतनी ही तेजी से टीबी बीमारी समाज से खत्म होगी। जीविका दीदियों की समाज पर अच्छी पकड़ है। अधिकतर घरों में उनका आना-जाना है। इसलिए टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जीविका दीदी एक बेहतर माध्यम हो सकती हैं । इसी उद्देश्य से सुल्तानपुर भिट्ठी में जीविका दीदियों के साथ बैठक आयोजित की गई। उम्मीद है कि इसका व्यापक असर पड़ेगा। लोग टीबी के प्रति जागरूक होंगे।
सरकारी अस्पतालों में टीबी का इलाज मुफ्तः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि केएचपीटी जिले में टीबी उन्मूलन में अच्छा काम कर रहा है। इस तरह के आयोजन से टीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी। लोगों में टीबी के प्रति जानकारी बढ़नी बहुत जरूरी है। टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त में होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते तक खांसी हो, शाम को पसीना आए, लगातार बुखार रहे, बलगम के साथ खून हो इत्यादि लक्षण महसूस हो तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल चले जाना चाहिए। वहां जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो तत्काल इलाज शुरू कर देना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इलाज तो मुफ्त में होता ही है, साथ में दवा भी बिल्कुल मुफ्त दी जाती है। इसके अलावा जब तक इलाज चलता है, तब तक पांच सौ रुपये की राशि प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी मरीजों को दी जाती है।

देवेश गाँधी एलआईसी के अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाण पत्र से सम्मानित

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सामाजिक जुड़ाव के साथ सतत बेहतरीन पॉलिसी से ग्राहक से रखते है आत्मीय जुड़ाव

नियमित बिजनैस बारीकियों को तकनीकी नवोन्मेष से कस्टमर्स से रखते है जुड़ाव

जीवन बीमा की प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च कंपनी ली मरा द्वारा अजमेर के एक निजी होटल में गुरुवार शाम को नॉर्थ ज़ोन के टॉप 186 एजेंट ने भाग लिया. इस दोरान अजमेर मंडल ज़ोन में दूसरे स्थान पर रहा इसके तहत 20 टॉप एजेंट को सम्मानित किया. इस दोरान झालावाड़ ब्रांच के सीनियर ब्रांच मैनेजर धनराज मीना ने बताया कि झालावाड़ ब्रांच से बकानी निवासी देवेश कुमार गांधी सुपुत्र रामदयाल शकुंतला गाँधी को इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाण पत्र के लिए चयनित किया गया. उक्त रैंकिंग संस्थान द्वारा 90 पर्सेंट बीमे की अस्तित्व पर बेहतर क्वालिटी सेवा के लिए ये प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया. ब्रांच मैनेजर ने बताया कि देश के 13 लाख एजेंट में भारत के चुनिंदा 1241 एजेंट इस पुरस्कार के योग्य पाए गए है जिसमें झालावाड़ ब्रांच के 2019 में मुख्य जीवन बीमा सलाहकार प्रिया गांधी के नेतृत्व मे बकानी निवासी देवेश गांधी विगत 3 वर्षो से लगातार मिलियन डालर राउन्ड टेबल का खिताब हासिल कर ब्रांच के टॉप मोस्ट अभिकर्ता बने है. उनकी इस उपलब्धि पर शाखा परिवार झालावाड़ और उनके शुभ चिंतक परिवारजनों माता पिता,बहन हेमलता गाँधी ,भैया भाभी नयन प्रीति गाँधी ने शुभकामनाये प्रेषित की

मुंगेर जिलाभर में 05 से 25 मार्च तक दो चरणों में चलेगा मिशन परिवार विकास अभियान

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– 05 से 12 मार्च तक दंपति संपर्क सप्ताह और 13 से 25 मार्च तक होगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा
– जिला के सभी प्रखंडों में ई. रिक्शा के जरिए लोगों को किया जाएगा जागरूक

मुंगेर-

आगामी 05 से 25 मार्च तक जिला भर में दो चरणों में मिशन परिवार विकास अभियान चलेगा। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने मुंगेर सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को पत्र जारी किया है।
05 से 12 मार्च तक जिला भर में चलेगा दंपति संपर्क सप्ताह–
सिविल सर्जन डॉ पीएम सहाय ने बताया कि मिशन परिवार विकास अभियान के पहले चरण में 05 से 12 मार्च तक जिला भर में दंपति संपर्क सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जीविका दीदी, विकास मित्र योग्य दंपतियों से मिलकर उन्हें परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधनों को अपनाने के लिए जागरूक करेंगे। इसके साथ ही अभियान के दूसरे चरण में 13 से 25 मार्च तक परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। इस दौरान जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थाई साधन के रूप में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सेवा उपलब्ध कराते हुए अस्थाई साधन के रूप में कॉपर टी लगवाने और गर्भनिरोधक गोली और इंजेक्शन के साथ – साथ कंडोम भी उपलब्ध कराया जाएगा।
ई.रिक्शा (सारथी रथ) से जिला के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में प्रचार – प्रसार होगा —
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम उत्प्रेरक निखिल राज ने बताया कि परिवार नियोजन के प्रति आम जनों को जागरूक करने के उद्देश्य से ई.रिक्शा (सारथी रथ) के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य समिति के दिशा निर्देश के अनुसार एवम स्थानीय स्तर पर तैयार रूट चार्ट के अनुसार जिला के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में प्रचार – प्रसार किया जाएगा। ई. रिक्शा पर संबंधित क्षेत्र की आशा फैसिलिटेटर को प्रतिनियुक्त करते हुए उन्हें प्रचार प्रसार का दायित्व सौंपा गया है ताकि उनके द्वारा स्थानीय आशा कार्यकर्ता से समन्वय स्थापित करने के साथ – साथ आम लोगों के द्वारा गर्भ निरोधक का अस्थाई उपाय जैसे गर्भ निरोधक गोली, कंडोम की मांग करने पर उन्हें उक्त स्थल पर ही उपलब्ध करायी जा सके। इसके लिए संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के द्वारा ई.रिक्शा पर कॉन्ट्रासेप्टिक डिस्प्ले ट्रे एवं कंडोम बॉक्स में सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी ।
एपीएचसी और एचएससी में परिवार नियोजन दिवस का आयोजन किया जा रहा है–
उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दिशा- निर्देश के अनुसार प्रत्येक महीने की 21 तारीख को जिला के सभी प्राथमिक/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और क्रियाशील हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एपीएचसी और एचएससी ) में परिवार नियोजन दिवस का लगातार आयोजन किया जा रहा है। जहां योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई उपायों की विस्तार पूर्वक जानकारी देते इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है।
जिलाभर में 05 से 25 मार्च तक दो चरणों में चलेगा मिशन परिवार विकास अभियान

– 05 से 12 मार्च तक दंपति संपर्क सप्ताह और 13 से 25 मार्च तक होगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा
– जिला के सभी प्रखंडों में ई. रिक्शा के जरिए लोगों को किया जाएगा जागरूक

मुंगेर, 2 मार्च। आगामी 05 से 25 मार्च तक जिला भर में दो चरणों में मिशन परिवार विकास अभियान चलेगा। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने मुंगेर सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को पत्र जारी किया है।
05 से 12 मार्च तक जिला भर में चलेगा दंपति संपर्क सप्ताह–
सिविल सर्जन डॉ पीएम सहाय ने बताया कि मिशन परिवार विकास अभियान के पहले चरण में 05 से 12 मार्च तक जिला भर में दंपति संपर्क सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जीविका दीदी, विकास मित्र योग्य दंपतियों से मिलकर उन्हें परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई साधनों को अपनाने के लिए जागरूक करेंगे। इसके साथ ही अभियान के दूसरे चरण में 13 से 25 मार्च तक परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। इस दौरान जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थाई साधन के रूप में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सेवा उपलब्ध कराते हुए अस्थाई साधन के रूप में कॉपर टी लगवाने और गर्भनिरोधक गोली और इंजेक्शन के साथ – साथ कंडोम भी उपलब्ध कराया जाएगा।
ई.रिक्शा (सारथी रथ) से जिला के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में प्रचार – प्रसार होगा —
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम उत्प्रेरक निखिल राज ने बताया कि परिवार नियोजन के प्रति आम जनों को जागरूक करने के उद्देश्य से ई.रिक्शा (सारथी रथ) के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य समिति के दिशा निर्देश के अनुसार एवम स्थानीय स्तर पर तैयार रूट चार्ट के अनुसार जिला के सभी प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों में प्रचार – प्रसार किया जाएगा। ई. रिक्शा पर संबंधित क्षेत्र की आशा फैसिलिटेटर को प्रतिनियुक्त करते हुए उन्हें प्रचार प्रसार का दायित्व सौंपा गया है ताकि उनके द्वारा स्थानीय आशा कार्यकर्ता से समन्वय स्थापित करने के साथ – साथ आम लोगों के द्वारा गर्भ निरोधक का अस्थाई उपाय जैसे गर्भ निरोधक गोली, कंडोम की मांग करने पर उन्हें उक्त स्थल पर ही उपलब्ध करायी जा सके। इसके लिए संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के द्वारा ई.रिक्शा पर कॉन्ट्रासेप्टिक डिस्प्ले ट्रे एवं कंडोम बॉक्स में सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी ।
एपीएचसी और एचएससी में परिवार नियोजन दिवस का आयोजन किया जा रहा है–
उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दिशा- निर्देश के अनुसार प्रत्येक महीने की 21 तारीख को जिला के सभी प्राथमिक/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और क्रियाशील हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एपीएचसी और एचएससी ) में परिवार नियोजन दिवस का लगातार आयोजन किया जा रहा है। जहां योग्य दंपतियों को परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई उपायों की विस्तार पूर्वक जानकारी देते इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है।

लखीसराय जिलेभर में 16 मार्च को मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

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– राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत 20 मार्च को मनाया जाएगा मॉपअप दिवस
– सभी विद्यालयों, आँगनबाड़ी केंद्रों पर 1 से 19 वर्ष के बच्चों को खिलाया जाएगा अल्बेंडाजोल का टेबलेट

लखीसराय-

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के तहत जिला भर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 16 मार्च को मनाया जा रहा है। इससे बाद 20 मार्च को मॉप अप राउंड होगा। जिसमें जिले के सभी प्रखण्डों में 1 से 19 साल के बच्चों को कृमि मुक्ति को ले अल्बेंडाजोल की गोली खिलायी जाएगी। इस दौरान जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविका रजिस्टर्ड सभी बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलानी है। इसके साथ ही सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में क्लास टीचर पहले खुद बच्चों के सामने अल्बेंडाजोल का टैबलेट खाकर बच्चों के सामने कृमि मुक्ति का विश्वास दिलाने के बाद बच्चों को टैबलेट खिलाएंगे।

जिला के सिविल सर्जन डॉ.बीपी सिन्हा ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति एवं जिलाधिकारी से प्राप्त निर्देश के अनुसार जिला भर में कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी गयी है । 16 मार्च को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस है। इस दिन 1 से 19 साल के बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। साथ ही जो बच्चे इस अभियान के तहत दवा खाने से चूक जाएंगे, उन्हें फिर 20 मार्च को दवा का सेवन कराया जाएगा। जिसे हम मॉप-ऑप राउंड के रूप में मनायेंगें । उन्होंने बताया कि जिले के सभी प्रखण्डों में आशा कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी सेविका के सहयोग से बच्चों को अल्बेंडाजोल का टैबलेट खिलानी है । बताया कि 1 से 19 वर्ष के सभी बच्चों को यह गोली खिलायी जानी है। इसके तहत 1 से 2 साल के बच्चों को आधा और 2 से 19 साल के बच्चों को एक – एक टैबलेट खिलायी जानी है।

रास्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस क्या है :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का लक्ष्य 1 से 19 साल के सभी बच्चों को सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से अल्बेंडाजोल का टेबलेट खिलाकर कृमि मुक्त करना है। इससे उनमें, पोषण की स्थिति, के साथ शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके । उन्होंने बताया कि कृमि को सामान्य बोलचाल में पेट का कीड़ा कहते हैं। बच्चों में आमतौर पर तीन तरह के कृमि पाए जाते हैं। व्हिप कृमि, राउंड कृमि और हुक कृमि , होता है , जिसका इलाज न किया जाए तो यह रोग कई जटिलताएं जैसे कुपोषण, आंतों में रुकावट, एलर्जी इत्यादि रोग पैदा कर रोगी की मौत का कारण भी बन सकता है। यह एक संक्रामक रोग है, जो खाद्य पदार्थों की साफ-सफाई न होने या दूषित जल से फैलता है। इस लिए राष्ट्रीय कृमि दिवस के साथ 20 मार्च को मॉप -ऑप राउंड को जब दवा दी जाएगी तो सभी बच्चे इसे जरूर खाएं ।

बांका में अब चलेगा तंबाकू के खिलाफ सघन अभियान

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–सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते पकड़े जाने पर भरना पड़ेगा जुर्माना
–समाहरणालय में तंबाकू निषेध को लेकर कार्यशाला का आयोजन

बांका-

जिला पदाधिकारी सह जिला तंबाकू नियंत्रण समन्वय समिति के अध्यक्ष अंशुल कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को समाहरणालय में तंबाकू निषेध को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी अधिकारियों के आलावा स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग के भी अधिकारी शामिल हुए। अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि तंबाकू के सेवन से न सिर्फ सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता बल्कि आर्थिक नुकसान भी होता है। इसलिए तंबाकू का सेवन नहीं करने से जिंदगी के साथ-साथ आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है। इस मौके पर जिलाधिकारी ने तंबाकू को लेकर छापेमार दस्ते के गठन का निर्देश दिया। साथ ही छापेमारी दस्ते के सभी सदस्यों को शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में स्थित तंबाकू उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों को हटवाने को लेकर नियमित तौर पर छापेमारी करने का निर्देश दिया। सभी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने कार्यलयों में तंबाकू मुक्त क्षेत्र का बोर्ड लगाने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए हमें मिलकर प्रयास करना चाहिए। इससे हम अपने आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बचा सकते हैं। साथ ही समाज के आमलोगों के बीच जाकर लोगों को तंबाकू का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित और जागरूक करना होगा। इससे तंबाकू के सेवन पर नियंत्रण लगाने में सफलता मिलेगी।
तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी का सहयोग जरूरीः तंबाकू नियंत्रण को लेकर राज्य सरकार की तकनीकी सहयोगी संस्था सोशियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीड्स) के वरीय राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सोमिल रस्तोगी ने राज्य सरकार एवं सीड्स के द्वारा संयुक्त रूप से राज्य के सभी 38 जिलों में चलाए जा रहे तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत कोटपा 2003 की भी विभिन्न धाराओं के बारे में विस्तार से बताया। रस्तोगी ने बताया कि तंबाकू का सेवन करना कितना खतरनाक है। जहां छोटे-छोटे बच्चे हैं वहां तो स्थिति और भी नाजुक बन जाती है। तंबाकू नियंत्रण अभियान के रूप में चलाये जाने के काफी अच्छे परिणाम हो सकते हैं। सभी स्तर पर तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोविड-19 से लड़ कर विजय प्राप्त किया, उसी तरह हमें तंबाकू को समाप्त करने के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए।
सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू के सेवन दंडनीय अपराधः मालूम हो कि सार्वजनिक स्थानों, सिनेमा ह़ॉल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सड़क, शिक्षण संस्थान, कार्यलयों सहित अन्य स्थानों पर धूम्रपान करना दंडनीय अपराध है। कार्यशाला में सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम से संबंधित जिले में की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। कार्य़शाला में उपविकास आयुक्त, डीपीआरओ, पुलिस उपाधीक्षक, एनसीडीसेल के वित्तीय सह लॉजिस्ट्रिक सलाहकार राजेश कुमार, सीड्स के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनोज कुमार झा, डीपीएम ब्रजेश कुमार सिंह सहित कई लोगों ने सहयोग किया।

पीएचसी/सीएचसी स्तर पर फूड बास्केट उपलब्ध करवाएं टीबी मरीजों को गोद लेने वाली संस्थाएं : डीएम

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– टीबी मरीजों को फूड बास्केट में पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थ करवाएं उपलब्ध
– टीबी मरीजों की पहचान, जांच और सही उपचार के साथ सही पोषण उपलब्ध करवाने पर करें फोकस

मुंगेर, 01 मार्च-

प्रखंडों में कार्यरत पीएचसी/सीएचसी स्तर पर फूड बास्केट उपलब्ध करवाएं टीबी मरीजों को गोद लेने वाली संस्थाएं । उक्त बात मंगलवार को संग्रहालय सभागार में आयोजित जिला टीबी फोरम मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी नवीन कुमार ने कही। उन्होंने बताया कि जिला यक्ष्मा केंद्र पर टीबी मरीजों को गोद लेने वाली संस्थाओं के द्वारा फूड बास्केट उपलब्ध करवाने के बाद वहां फूड बास्केट लेने के लिए टीबी मरीजों की अनावश्यक भीड़ जुटेगी और उन्हें फूड बास्केट उपलब्ध करवाने में जिला यक्ष्मा केंद्र में कार्यरत स्वास्थ्य अधिकारियों को अनावश्यक समय बर्बाद होगा। इसकी वजह से टीबी मरीजों की जांच और उपचार प्रभावित होगी। प्रखंड स्तर पर फूड बास्केट उपलब्ध करवाने के बाद टीबी मरीजों के बीच आसानी से उसका वितरण संभव हो पाएगा। उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों को गोद लेने वाली संस्थाएं अपने फूड बास्केट में आटा – चावल की जगह अन्य पौष्टिक तत्वों से युक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाएं । क्योंकि सरकार की अन्य योजनाओं से लोगों के बीच गेहूं और चावल उपलब्ध करवाया जा रहा है। मालूम हो कि डिस्ट्रिक्ट टीबी फोरम में जिलाधिकारी चेयरमैन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी को – चेयरमैन, डिस्ट्रिक्ट टीबी ऑफिसर मेंबर सेक्रेटरी सहित कई सदस्य होते हैं, जिसमें पत्रकार, अधिवक्ता, कॉरपोरेट सेक्टर के प्रतिनिधि, पांच टीबी मरीज, पीआरआई मेंबर सहित कई लोग शामिल हैं। यह फोरम टीबी मरीजों के लिए समुदाय की सामूहिक सहभागिता के लक्ष्य को लेकर कार्य करता है।

नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम अन्य छह नेशनल हेल्थ प्रोग्राम से है जुड़ा हुआ :
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ ध्रुव कुमार शाह ने बताया कि नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम (एनटीईपी) छह अन्य नेशनल हेल्थ प्रोग्राम से जुड़ा हुआ है ।
1. नेशनल एड्स कंट्रोल प्रोग्राम (एनएसीपी)
2. न्यूट्रीशनल रिहेबिलिटेशन सेंटर्स (एनआरसी )
3. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके )
4. आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स
5. नेशनल टोबेको कंट्रोल प्रोग्राम (एनटीसीपी )
6. नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल of कैंसर, डायबिटीज, कार्डियोवास्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक।

टीबी एक सामाजिक समस्या, इसके लिए समुदाय आधारित एप्रोच की आवश्यकता :
उन्होंने बताया कि टीबी एक सामाजिक समस्या है जो सात स्टेप्स पर सर्कुलर से बना है।
1. पुअर हाउसिंग 2. इंडोर एयर पॉल्यूशन 3. ट्राइबल पॉपुलेशन 4. माइग्रेशन 5. डायबिटीज 6. एचआईवी इन्फेक्शन 7. ओवर क्राउडिंग ।

जिला यक्ष्मा केंद्र में कार्यरत जिला टीबी/ एचआईवी कोऑर्डिनेटर शैलेंदू कुमार ने बताया कि जनवरी से दिसंबर 2022 तक आंकड़ों के अनुसार मुंगेर जिला में निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 99.9% टीबी नोटिफिकेशन हुआ है। जिला का ट्रीटमेंट सक्सेस रेट 90.4% है। जिला में 29% मरीजों का माइक्रोबायोलोजिकल कन्फर्मेशन मिला है। जिला का एचआईवी स्टेटस 96% है। निक्षय पोषण योजना के तहत डायरेक्ट बेनिफिशरी ट्रांसफर (डीबीटी) का आंकड़ा 70% और जिला में प्रिज्मस्टिव एग्जामिनिशन रेट (1500/ लाख/वर्ष ) 144 है।
उन्होंने बताया कि जिला भर में सिर्फ एक जगह डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर मुंगेर में सीबी नेट मशीन से कुल 954 टेस्ट किए गए जिसमें से 291 केस पॉजिटिव पाया गया। वहीं जिला भर के चार स्थानों,डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर मुंगेर में ट्रुनेट मशीन से किए गए कुल 1697 में से 336, सब डिविजनल हॉस्पिटल तारापुर में ट्रूनेट मशीन से किए गए कुल 1562 में से 207, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हवेली खड़गपुर में ट्रूनेट मशीन से किए गए कुल 336 में से 49 और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र संग्रामपुर में ट्रूनेट मशीन से किए गए कुल 46 में से 7 टीबी पॉजिटिव केस मिले हैं। इसके अलावा जिला के सभी नौ प्रखंडों में कार्यरत डीएमसी साइट पर किए गए कुल 6724 में से 502 टीबी पॉजिटिव केस पाए गए हैं।

जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित जिलास्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन

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– प्रशिक्षण में कचरा निस्तारण से संबंधित दी गई विस्तृत जानकारी
– जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड गुणवत्ता नोडल पदाधिकारी हुए शामिल

भागलपुर, 01 मार्च-

शहर के एक निजी होटल में बुधवार को जैव चिकित्सा अपशिष्ट (कचरा) प्रबंधन से संबंधित एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। जिसका उदघाटन सिविल सर्जन डाॅ अंजना कुमारी एवं डॉ प्रशांत कुमार ने संयुक्त रूप से किया। प्रशिक्षण में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और प्रखंड गुणवत्ता नोडल पदाधिकारी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान जिला गुणवत्ता नोडल पदाधिकारी डाॅ प्रशांत कुमार द्वारा मौजूद सभी प्रतिभागियों को कचरा निस्तारण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। जिसमें कचरा निस्तारण को लेकर सरकारी गाइडलाइन, कचरा का सही जगह पर निस्तारण करने समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी दी गई। इस मौके पर डीपीएम (हेल्थ) मणिभूषण झा, रैम मो आरीफ, डैम विकास कुमार आदि मौजूद थे।

– कचरा निस्तारण के मानकों की दी गई जानकारी :
डॉ प्रशांत कुमार ने बताया, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद प्रतिभागियों को मेडिकल कचरा की पहचान के साथ-साथ कचरा निस्तारण के मानकों की भी जानकारी विस्तारपूर्वक दी गई। जिसमें बताया गया कि कचरा की पहचान कैसे करनी , कचरा निस्तारण मानक क्या है। कचरा का कैसे और कहाँ निस्तारण करना है, समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गई। ताकि कचरा से निस्तारण से किसी प्रकार का प्रदूषण और संक्रमण को बढ़ावा नहीं मिले और मरीजों को कोई असुविधा नहीं हो।

– पर्यावरण को बचाने के लिए सही जगह पर कचरा का निस्तारण करना जरूरी :
डॉ प्रशांत कुमार ने बताया, पर्यावरण को बचाने और मरीजों को सुरक्षित व साफ माहौल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए सही जगह पर मानकों के अनुसार कचरे का निस्तारण करना जरूरी है। इसलिए, प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सभी प्रतिभागियों को कचरा निस्तारण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई और मानकों के अनुसार ही कचरा निस्तारण कराने को कहा गया।

आशा फैसिलिटेटर को जिला में बुलाकर दिया गया स्मार्ट फोन

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– पेपरलेस कार्य को मिलेगी गति, अब मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्टिंग करेंगी आशा फैसिलिटेटर
– जिले के विभिन्न प्रखंडों की 83 फैसिलिटेटर को मिला मोबाइल

बांका, 28 फरवरी-

आशा फैसिलिटेटर को मंगलवार को जिला बुलाकर स्मार्ट फोन दिया गया। इस मौके कर डीआईओ सह प्रभारी सिविल सर्जन डाॅ योगेन्द्र मंडल, डीपीएम (हेल्थ) ब्रजेश कुमार सिंह, डेम अमरेंद्र कुमार आर्या, डीसीएम मनीष कुमार, डीसीक्यूए डॉ जावेद अली और केयर इंडिया के डीटीएल तौसीफ कमर मौजूद थे। वहीं, मोबाइल देने के पश्चात मौजूद पदाधिकारियों द्वारा सभी आशा फैसिलिटेटर को मोबाइल का उपयोग कैसे करना, मोबाइल देने का क्या उद्देश्य है समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गयी। इस मौके पर डीआईओ सह प्रभारी सिविल सर्जन ने कहा, अब आशा फैसिलिटेटर को कार्य करने में सहूलियत होगी और सभी प्रकार की रिपोर्ट मोबाइल फोन के माध्यम से पीएचसी मुख्यालय को उपलब्ध कराएंगी। जिससे पेपरलेस कार्य को भी गति मिलेगी और आशा फैसिलिटेटर का वर्क भी स्मार्ट होगा। इसी उद्देश्य से सरकार द्वारा आशा फैसिलिटेटर को स्मार्ट फोन दिया गया।

– राज्य से लेकर प्रखंड स्तर तक मोबाइल को किया जाएगा ट्रेस, इसलिए फोन का खुद उपयोग करें आशा फैसिलिटेटर :
डीसीएम मनीष कुमार ने कहा, मोबाइल को राज्य मुख्यालय के साथ-साथ जिला और प्रखंड मुख्यालय से भी ट्रेस किया जाएगा। इसलिए, मैं सभी आशा फैसिलिटेटर से अपील करता हूँ कि खुद मोबाइल का उपयोग करें। अन्यथा, पति, बेटा, बेटी या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा उपयोग करने की बात सामने आने या फिर शिकायत मिलने पर निश्चित रूप से संबंधित आशा फैसिलिटेटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यहाँ तक कि अगर फोन भी किसी दूसरे व्यक्ति ने रिसीव किया तो मोबाइल वापस ले ली जाएगी।

– जिले के विभिन्न प्रखंडों के 83 आशा फैसिलिटेटर को मिला मोबाइल :
डीपीएम (हेल्थ) ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया, मंगलवार को आयोजित शिविर में जिले के विभिन्न प्रखंडों के कुल 83 आशा फैसिलिटेटर को मोबाइल दिया गया। वहीं, उन्होंने बताया, सरकार की इस पहल से आशा फैसिलिटेटर को रजिस्टर ढोने और भरने से राहत मिलेगी तथा सभी प्रकार के डेटा और रिकार्ड ऑनलाइन सुरक्षित रहेगा। इसी उद्देश्य से आशा फैसिलिटेटरको मोबाइल फोन दिया गया है।

कोविड जैसी भंयकर महामारी और मंदी के बावजूद भी मार्केट में अच्छा रिस्पांस मिला – अमन गुप्ता

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नई दिल्लीः-

ऊषा केबल ग्रुप के निदेशक अमन गुप्ता ने बताया कि हमारी कम्पनी अच्छी गुणवत्ता वाले केबल जैसे-(एफ आर एल एस, एच आर एफ आर तथा फायर सरबाइबल) का निर्माण शुरू कर दिया है, उन्होंने कहा कि अक्टुबर माह की 6 तारीख 2021 को दिल्ली के ली मेरिडियन होटल मे भारत सरकार की सस्था आई. एस. आई के अधिकारियों ने देश के सभी बड़ी केबल निर्माता कम्पनियों को बुलाकर एक सभा का आयोजन किया था, जिसमें सभी केबल निर्माता कम्पनियों से अच्छी गुणवत्ता वाले केबल बनाने के लिए कहा गया था उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने कहा कि भारत के पावर सेक्टर मे हाई स्मॉक फॉग एक जटिल समस्या है, अग्नि दुर्गघटना के बाद पता चलता था की ज्यादा तर लोगों की मौतें दम घुटने से होती थी, सरकारी तथा गैरसरकारी दोनो संस्थाओं, पब्लिक सेक्टर के लोगों को भी इसकी वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ता है। इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए कम्पनी ने लो स्माॅक फाग केबल, हाउस वाइरिंग केबल, रबराइज केबल, हाउस वाइरिंग केबल, कम्यूनिकेशन केबल, फायर सरबाइबल केबल, मार्केट में उतार चुकी है। उन्होंने ने कहा नार्मल टेम्प्रेचर वाले प्रदेश मे ऊषा केबल के लो स्माॅक फाग, हाउस वाइरिंग केबल जहाॅं माइनस 40 डिग्री वाले टेम्परेचर होते हैं वहाॅं रबराइज केबल्स की डिमांड अच्छी रही साथ ही एग्री कल्चर केबल को भी अक्ष्छा रिस्पाॅंस मिला।

ऊषा केबल ग्रुप के निदेशक अमन गुप्ता ने कहा कि लगातार देश में कोविड जैसी भंयकर महामारी और मंदी जैसे कठिन दौर से गुजर रहा था ऐसे में लोगों को सर्बाइब करना बहुत ही मुस्किल था उसके बावजूद भी कम्पनी ने इतने सारे क्वालिटी केबल्स को मार्केट में उतारा जिसका रिस्पाॅंस 2022 के अन्त तक बहुत ही अच्छा रहा तथा उन्होंने कहा कि हमारी कम्पनी 2023 मे भी बेस्ट क्वालिटी केबल का निर्माण करती रहेगी।

जीविका दीदी क्षेत्र के लोगों को टीबी के प्रति करेंगी जागरूक

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-जगदीशपुर के बैजानी में पर्सपेक्टिव बिल्डिंग ट्रेनिंग का आयोजन
-स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से केएचपीटी ने किया ट्रेनिंग का आयोजन

भागलपुर, 27 फरवरी-

जगदीशपुर प्रखंड के बैजानी में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने पर्सपेक्टिव बिल्डिंग ट्रेनिंग का आयोजन किया। इसमें क्षेत्र की जीविका दीदी शामिल हुईं। ट्रेनिंग देने का काम शानू और संदीप ने किया। सत्र की शुरुआत केएचपीटी के परिचय से हुई। इसके बाद सभी को लोगों को एक साथ जोड़ने, एकता बनाने और ट्रेनिंग के दौरान सुनी गई बातों को लोगों तक पहुंचाने के लिए कहा गया। इसके बाद कहानी के जरिये टीबी से लड़ने के बारे में बताया गया। सभी को टीबी के लक्षण, बचाव और उसके इलाज की जानकारी दी गई। साथ ही इस बीमारी से बचाव को लेकर समाज में क्या किया जा सकता है, इसकी भी जानकारी दी गई। इसके अलावा यह भी बताया गया कि टीबी रोगियों के प्रति संवेदनशील होकर उनकी जरूरत को पूरा करने में मदद करनी चाहिए। ट्रेनिंग के दौरान जीविका दीदियों को बताया गया कि यहां पर जो भी बातें आपने सुनीं, उसके बारे में क्षेत्र के लोगों को जागरूक करें। इससे टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और समाज से टीबी का प्रकोप खत्म होगा।
जागरूकता के लिए जीविका दीदी हो सकती हैं बेहतर माध्यमः केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने बताया कि टीबी को समाप्त करने के लिए इलाज के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर जागरूकता भी बहुत जरूरी है। लोगों में जितनी तेजी से जागरूकता बढ़ेगी उतनी ही तेजी से टीबी बीमारी समाज से खत्म होगी। जीविका दीदियों की समाज पर अच्छी पकड़ है। अधिकतर घरों में उनका आना-जाना है। इसलिए टीबी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए जीविका एक बेहतर माध्यम हो सकती है। इसी उद्देश्य से अंतीचक पंचायत में गुरुवार को जीविका दीदियों की ट्रेनिंग आयोजित की गई। उम्मीद है कि इसका व्यापक असर पड़ेगा। लोग टीबी के प्रति जागरूक होंगे।
टीबी के लक्षण दिखे तो जाएं सरकारी अस्पतालः जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि केएचपीटी जिले में टीबी उन्मूलन में अच्छा काम कर रही है। इस तरह के आयोजन से टीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी। लोगों में टीबी के प्रति जानकारी बढ़नी बहुत जरूरी है। टीबी का इलाज सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त में होता है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते तक खांसी हो, शाम को पसीना आए, लगातार बुखार रहे, बलगम के साथ खून हो इत्यादि लक्षण महसूस हो तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल चले जाना चाहिए। वहां जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो तत्काल इलाज शुरू कर देना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में इलाज तो मुफ्त में होता ही है, साथ में दवा भी बिल्कुल मुफ्त दी जाती । इसके अलाना जब तक इलाज चलता है, तब तक पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए भी मरीजों को दी जाती ।