नवजात की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारियों से करें उसका बचाव

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-जन्म के बाद छह माह तक नवजात को सिर्फ स्तनपान कराएं, विकसित होगी रोग-प्रतिरोधक क्षमता
-मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए संपूर्ण टीकाकरण भी जरूरी, संक्रामक बीमारी से होगा बचाव

बांका, 10 मार्च-

नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए उचित देखभाल बेहद जरूरी है। इसे सुनिश्चित करने में सबसे बड़ा योगदान नवजात की मां का ही होता है। इसमें थोड़ी सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन जाती और नवजात बार-बार बीमार होने लगता है। इससे वह शारीरिक रूप से भी बेहद कमजोर होने लगता है। बार-बार बीमार होना कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता की पहचान है। इसलिए, जन्म के बाद नवजात की रोग-प्रतिरोधक क्षमता समेत अन्य देखभाल को लेकर पूरी तरह सजग रहें। इसके लिए नवजात को जन्म के छह माह तक सिर्फ मां का ही स्तनपान कराएं। इस दौरान पानी भी नहीं दें। इससे ना सिर्फ बच्चे स्वस्थ रहते बल्कि उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार चौधरी कहते हैं कि उचित पोषण से ही बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास होगा और बच्चे स्वस्थ भी रहेंगे। इसलिए, शिशु को जन्म के पश्चात छह माह तक सिर्फ और सिर्फ मां के ही दूध का सेवन कराएं। इस दौरान बच्चों को किसी भी प्रकार का कोई ऊपरी आहार नहीं दें। यहाँ तक कि पानी भी नहीं दें। मां का दूध बच्चों के लिए अमृत के समान होता और स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। मां के दूध में मौजूद पोषक तत्व जैसे पानी, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट मिनरल्स, वसा, कैलोरी शिशु को न सिर्फ बीमारियों से बचाते बल्कि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। साथ ही बच्चे की पाचन क्रिया भी मजबूत होती है। इसलिए, मां के दूध को शिशु का प्रथम टीका कहा गया है, जो छह माह तक के बच्चे के लिए बेहद जरूरी है। छह माह के बाद बच्चों के सतत विकास के लिए ऊपरी आहार की जरूरत पड़ती है। इस दौरान यह ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है कि उसे कैसा आहार दें। मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता संक्रामक बीमारी से भी दूर रखता है। इसलिए, बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को लेकर शुरुआती दौर से ही सजग रहें। दरअसल, अगर शुरुआती दौर में ही बच्चे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी तो नवजात के स्वस्थ शरीर का निर्माण होगा और वह आगे भी शारीरिक रूप से मजबूत होगा।
जन्म के बाद आधे घंटे के अंदर नवजात को पिलाएं मां का दूध: डॉ. चौधरी कहते हैं कि नवजात के स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए जन्म के बाद आधे घंटे के अंदर नवजात को मां का दूध पिलाएं। इसके सेवन से नवजात की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। किन्तु, जानकारी के अभाव में कुछ लोग इसे गंदा या बेकार दूध समझ नवजात को नहीं पिलाते हैं। जबकि, सच यह है कि मां का पहला गाढ़ा-पीला दूध को प्रथम टीका कहा गया है और नवजात के लिए काफी फायदेमंद होता है।
छह माह के बाद ही नवजात को दें ऊपरी आहार: डॉ. चौधरी कहते हैं कि नवजात को छह माह के बाद ही किसी प्रकार का बाहरी या ऊपरी आहार दें। छह माह तक सिर्फ और सिर्फ मां का ही स्तनपान कराएं और कम-से-कम से कम दो वर्षों तक ऊपरी आहार के साथ मां का स्तनपान भी जारी रखें। साथ ही नवजात के लालन-पालन के दौरान साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखें। बच्चों को गोद लेने के पहले खुद अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें, बच्चों को हमेशा साफ कपड़ा पहनाएं, गीला व गंदा कपड़ा से बच्चे को हमेशा दूर रखें। इससे वह संक्रामक बीमारी से बचा रहेगा।

टीबी अब लाइलाज नहीं, पर पूरी सतर्कता और सावधानी जरूरी

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–लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं जांच, सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है निःशुल्क जांच और इलाज की सुविधा
–सरकारी अस्पतालों में सही समय पर जांच और इलाज के बाद टीबी मरीजों को सरकार देती है सहायता राशि

बांका, 09 मार्च-

टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन अब यह लाइलाज नहीं । इससे बचाव के लिए पूरी सतर्कता और सावधानी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सही समय पर यानी शुरुआती दौर में ही लक्षण दिखने के बाद इसकी सही जांच और समुचित इलाज कराना भी जरूरी है। प्रारम्भिक दिनों में ही इस बीमारी का सही इलाज शुरू कराने से बीमारी से स्थाई निजात तो मिलती ही है, साथ ही आप आसानी से इस बीमारी को मात भी दे सकते हैं। शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं और रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद तत्काल चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार अपना इलाज कराएं। इस दौरान इस बात का भी विशेष ख्याल रखें कि बीमारी के ठीक होने तक दवाई का क्रम छूटने न पाए।
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. सोहेल अंजुम ने बताया कि टीबी के लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत स्थानीय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जांच करानी चाहिए और जांच के पश्चात चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार इलाज कराना चाहिए। ताकि समय रहते आसानी के साथ इस बीमारी को मात दी जा सके और अन्य लोगों को भी सुरक्षित रखा जा सके। बीमारी से स्थाई निजात के लिए शुरुआती दौर में ही जांच और इलाज कराना बेहद जरूरी है। जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क जांच एवं दवाई की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही ऐसे मरीजों को उचित पोषक आहार लेने के लिए आर्थिक सहायता राशि भी दी जाती है।
सही समय और सही जांच और समुचित इलाज जरूरीः टीबी से स्थाई निजात पाने को सही समय पर सही जांच और समुचित इलाज जरूरी है। सभी सरकारी अस्पतालों में सही जांच के साथ छह महीने तक निःशुल्क इलाज के साथ ही दवाई की भी सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही टीबी मरीज को आवश्यक पोषक तत्व की पूर्ति के लिए पोषक तत्वों से युक्त भोजन करने के लिए प्रति महीने पांच सौ रुपये की दर से पूरी अवधि तक उचित खान-पान के लिए सहायता राशि दी जाती है।
टीबी होने पर ये करें—
1. लगातार दो हफ्तों से ज्यादा खांसी रहने पर बलगम की जांच कराएं और जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार टीबी की दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें।

2. हमेशा मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को रुमाल या पेपर नैपकिन से कवर करें।
3. टीबी मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद करने के बाद डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां थूकने से परहेज करें।
4. टीबी मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में ही रहें ।
5. हमेशा पौष्टिक खाना खाएं व योग और व्यायाम करें ।
6. बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7. भीड़भाड़ वाली जगहों और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
ये हैं टीबी के लक्षण…
1. भूख न लगना या कम लगना तथा वजन का अचानक से कम हो जाना।
2. बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
3. हल्का बुखार का रहना।
4. खांसी , खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
5. गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना।
6. गहरी सांस लेने में सीने में दर्द होना, कमर की हड्डी पर सूजन, घुटने में दर्द, घुटने मोड़ने में परेशानी आदि।
7. महिलाओं को बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
8. पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।
9. टीबी न्यूमोनिया के लक्षण में तेज बुखार, खांसी व छाती में दर्द होता है।

*चैतन्यचंद्र निज नाम के दान हेतु अवतरित हुए: चंचलापति दास*

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*फूलों की होली, छप्पन भोग, हरिनाम संकीर्तन एवं महाभिषेक रहा आकर्षण का केन्द्र*
*चंद्रोदय मंदिर में महाभिषेक के दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब।*

विश्व प्रसिद्ध ब्रजमंडल की होली उत्सव के मध्य फाल्गुन की पूर्णिमा को प्रेमावतार श्री चैतन्य चंद्र का अवतरण हुआ। भक्ति वेदांत स्वामी मार्ग स्थित वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर में श्री गौरांग महाप्रभु की जयंती पर मंदिर प्रांगण में फूल बंगला, छप्पन भोग, पालकी उत्सव, महाभिषेक, हरिनाम संकीर्तन एवं फूलों की होली का आयोजन हुआ।
भक्तों को सम्बोधित करते हुए चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष श्री चंचलापति दास ने कहा गौड़ीया वैष्णव आचार्य भक्ति विनोद ठाकुर गौर तत्व कि व्यख्या में कहते है चैतन्य महाप्रभु स्वयं नंद सुता हैं। प्रेमावतार चैतन्य महाप्रभु निज नाम का दान करने के लिए अवतरित हुए। वो कलियुग में अधम प्राणियों के उद्धार के लिए, महाप्रभु ने नाम प्रभु के रूप में अवतरण लिया और उन्होंने हरे कृष्ण मंत्र को जन सामान्य के लिए प्रकाशित किया। इनका पूरा शरीर संकीर्तन शरीर है। अतः इनके शरीर से सदैव हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे का प्रवाह होता है। श्री चैतन्य महाप्रभु को प्रेमावतार करूणावतार कहा गया है। श्री राधा जी को श्रीकृष्ण से प्रेम करके कैसा रसास्वाद मिलता है। स्वयं श्रीकृष्ण ने राधा भाव लेकर चैतन्य महाप्रभु के रूप में नदिया नामक ग्राम में जन्म लिया। श्री महाप्रभु ने उस प्रेम का आश्रय बनकर तो सुख लिया, अधिकारी अनाधिकारी सभी को अधिकारी बनाकर प्रेम प्रदान किया। श्रीराम ने राक्षसों का मारा, श्रीकृष्ण ने रति प्रदान कीए चैतन्य महाप्रभु ने उनका उद्धार किया। महाप्रभु ने उनकी दुष्टता का हरण कर करूणा के योग्य बनाया।
मथुरा, आगरा, लखनऊ, दिल्ली, गुरूग्राम, जयपुर, हरियाणा एवं मध्यप्रदेश के अन्य जिलों भक्तगण परिकर उपस्थित हुए।

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस को ले स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले स्वास्थ्यकर्मी सम्मानित

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– क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई सभागार में सिविल सर्जन, डीपीएम और एनसीडीओ ने संयुक्त रूप से किया सम्मानित

– केयर इंडिया से दीपिका बा और पीएसआई से तस्नीम दक्षा को भी किया गया सम्मानित

मुंगेर-

आगामी 8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पूर्व सोमवार को स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाली डॉक्टर, सीएचओ, स्टाफ नर्स सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को सिविल सर्जन, डीपीएम और एनसीडीओ ने संयुक्त रूप से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (डीसीएम) निखिल राज, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम ( आरबीएसके ) की जिला समन्वयक डॉ, बिंदू सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी के अलावा विभिन्न प्रखंडों से आई सीएचओ, एएनएम, आशा फैसिलिटेटर और आशा कार्यकर्ता उपस्थित थीं।

जिला मुख्यालय स्थित क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (आरपीएमयू) सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और होली से पूर्व आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में प्रारंभ से महिलाएं सशक्त भूमिका में काम कर रहीं है। स्वास्थ्य विभाग के लगभग सभी कार्यक्रम को सफल बनाने में आप सभी महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आप लोग इस विभाग में ग्राउंड लेवल पर फ्रंटलाइन वर्कर से लेकर मेडिकल ऑफिसर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाओं का लगातार निर्वाहन करके सरकार की सभी योजनाओं को पूर्णता प्रदान कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग से अलग अन्य जगहों पर यदि आपलोगों के योगदान की यदि बात की जाय तो आज के समय में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां आप लोगों ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से देश का नाम रौशन नहीं किया है।

सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए जिला सामुदायिक उत्प्रेरक निखिल राज ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पूर्व सोमवार को जिला मुख्यालय सहित जिला भर के विभिन्न प्रखंडों में स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत नोडल अधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, सीएचओ, आशा फैसिलिटेटर और आशा कार्यकर्ता को सिविल सर्जन डॉ पीएम सहाय, डीपीएम मो. फैजान आलम अशर्फी, जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ के. रंजन ने संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सम्मानित होने वालों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जिला समन्वयक डॉ, बिंदू, हवेली खड़गपुर की मेडिकल ऑफिसर डॉ फिरोजा तब्बसुम, तारापुर की मेडिकल ऑफिसर डॉ बिंदू कुमारी, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल मुंगेर की मेडिकल ऑफिसर डॉ निर्मला गुप्ता, संग्रामपुर की सीएचओ मानवी गुप्ता, सदर प्रखंड की सीएचओ दिव्यांका और आरती गुप्ता, जमालपुर की सीएचओ अर्चना को सम्मानित किया गया। इसके अलावा असरगंज की आशा फैसिलिटेटर इंदू कुमारी, सदर प्रखंड की आशा फैसिलिटेटर लक्ष्मी कुमारी, संग्रामपुर की आशा कार्यकर्ता सुशीला कुमारी, धरहरा की आशा कार्यकर्ता मुनेश्वरी कुमारी, जमालपुर की आशा कार्यकर्ता राजलक्ष्मी को सम्मानित किया गया।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर केयर इंडिया से दीपिका बा और पीएसआई से तस्नीम दक्षा को भी फैमिली प्लानिंग सहित अन्य कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए सम्मानित किया गया ।

सघन दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा- परिवार नियोजन अपनाने से होने वाले फायदे की जानकारी दी जा रही है

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– 12 मार्च तक चलेगा दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा और 13 से शुरू होगा परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा
– मिशन परिवार विकास अभियान के तहत घर-घर जाकर लोगों को किया जा रहा है जागरूक

लखीसराय-

मिशन परिवार विकास अभियान के तहत जिले में शुरू होने वाले परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा की सफलता को लेकर सघन दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा चल रहा है। जिसके माध्यम से एएनएम, आशा, ऑंगनबाड़ी सेविका समेत अन्य कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके दौरान परिवार नियोजन से होने वाले फायदे की जानकारी दी जा रही है। जिसमें लोगों को बताया जा रहा है कि परिवार नियोजन की सुविधा अपनाने से बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी, छोटा परिवार ही खुशहाल परिवार की बुनियाद है। माँ के साथ बच्चे भी शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे। इस दौरान योग्य दंम्पत्तियों एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी तमाम जानकारियाँ देकर परिवार नियोजन की सुविधा अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

– मिशन परिवार विकास अभियान के तहत आयोजित होगा पखवाड़ा :
सिविल सर्जन डाॅ बीपी सिन्हा ने बताया, मिशन परिवार विकास अभियान के तहत जिले में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का आयोजन होगा। जिसकी सफलता को लेकर रविवार से जिले के सभी प्रखंडों में दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा का शुभारंभ हो चुका है। , जिसका समापन 12 मार्च को होगा। इस दौरान गठित टीम द्वारा घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा। जबकि, 13 से 25 मार्च तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का आयोजन होगा। जिसके दौरान योग्य और इच्छुक लाभार्थियों को स्थाई एवं अस्थाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

– वैकल्पिक उपायों की भी दी जा रही है जानकारी :
एसीएमओ सह डीआईओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, दंपत्ति संपर्क पखवाड़ा के दौरान वैकल्पिक उपायों की भी जानकारी दी जा रही है। ताकि अगर कोई महिला परिवार नियोजन ऑपरेशन को अपनाने के लिए इच्छुक है किन्तु, उनका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं है तो ऐसी महिला वैकल्पिक व्यवस्था में शामिल कंडोम, काॅपर-टी, छाया, अंतरा समेत अन्य उपायों को अपना सकती हैं । वहीं, उन्होंने बताया, वैकल्पिक उपाय भी पूरी तरह सुरक्षित है। पखवाड़ा के दौरान योग्य और इच्छुक लाभार्थियों को चिह्नित कर सूची भी तैयार की जा रही है।

मान्या फाउंडेशन द्वारा नॉएडा में मुफ्त सिलाई सेंटर की शुरुआत की गयी

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मान्या फाउंडेशन के द्वारा महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को पूरा करने के लिए गौतम बुद्ध नगर जनपद के सेक्टर 71 में मुफ्त सिलाई सेंटर की शुरुआत की गई। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि श्री पवन कपूर, श्रीमती नीरू कपूर और आन्या कपूर मौजूद थे। इस दौरान महिलाओ के साथ उनके स्वास्थ को लेकर आन्या कपूर के द्वारा चर्चा की गयी और लाभार्थी महिलाओं के बीच गुलाल, मिठाई, जूस और सैनेटरी नैपकिन वितरण कर अंतरष्ट्रीय महिला दिवस और होली की शुभकामनाएं दी गई।
ज्ञात हो की मान्या फाउंडेशन विगत वर्षो से महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यरत है और संस्था की सचिव नीलम झा ने बताया की देश की सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का आत्मनिर्भर होना जरुरी है और एक आदर्श समाज की परिकल्पना तभी संभव है जब महिलाओं का विकास कार्य में बराबर की भागीदारी हो।
इसके अतिरिक्त आई-वालंटियर संस्था के वालंटियर के द्वारा ‘बैंक में होता क्या है ?’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया और इसमें समूह बना कर महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं और साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में मनीष झा, आकांक्षा कुमारी, कनक रुस्तगी, गिरीश सिंह शर्मा, निखिल, प्रेरणा, आनंद, हर्ष, प्रणव, ऋषिता, राजा, समर्थ आदि मौजूद थे।

हाड़ौती गौरव सम्मान से गाँधी हुए सम्मानित

 

सामाजिक नवोन्मेष एवं युवा सशक्तिकरण मे गाँधी हुए सम्मानित

हाल ही मे कोटा शिक्षा नगरी के झालावाड़ रोड स्थित सामुदायिक भवन में पंचम हाड़ौती गौरव सम्मान का आयोजन किया गया .कार्यक्रम मे बकानी झालावाड़ मूल के कोटा निवासी युवा मेनेजमेंट विश्लेषक डॉ.नयन प्रकाश गाँधी सुपुत्र रामदयाल गाँधी को सामाजिक क्षेत्र नवोन्मेष एवं युवा सशक्तिकरण मे उल्लेखनीय कार्य करने पर एव पिछले कई वर्षो से झालावाड़ एवं कोटा हाड़ौती का नाम राज्य,राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर अंकित करने पर व्यक्तिगत श्रेणी में हाड़ौती गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया.गाँधी को यह सम्मान
विभिन्न गणमान्य अतिथियों विधायक संदीप शर्मा,वरिष्ठ समाज सेवी,श्री राजेश कृष्ण बिरला ,अमित धारीवाल,वी.के. जेटली,डॉ.राज कुमार
उपाध्याय रजिस्ट्रार कोटा विश्विद्यालय ,न्यु कोटा इंटरनेशनल सोसाइटी अध्यक्ष श्रीमती अंजू शर्मा,कार्यक्रम संयोजक के.के.शर्मा ,हर्षित गौतम एडवोकेट ,स्पर्धा आईएएस एकेडमी श्रीमती कामिनी शर्मा ,झालावाड़ संयोजक पुखराज जेन आदि की उपस्थिति मे दिया गया. युवा मेनेजमेंट विश्लेषक कोच डॉ.गाँधी सामाजिक ,डेवलपमेंट क्षेत्र की विभिन्न विधाओ मे आप गत कई वर्षो से निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे है.आप भारत सरकार के परिवार स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय के अधीन अंतरराष्ट्रीय जनसँख्या विज्ञान संस्थान मुंबई विश्विद्यालय से कोटा डिविजन से एक मात्र जनसँख्या विज्ञान ( क्षेत्रीय प्रबंधन) मे मास्टर्स है और राजस्थान ही नहीं देश विदेश मे प्रबंधन ,सोशल वर्क के क्षेत्र मे विभिन्न राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस में सम्मानित होकर और पूरे कोटा डिविजन से कई बार सोशल मेनेजमेंट डेवलपमेंट क्षेत्र मे विभिन्न सरकारी गैर सरकारी प्रोजेक्ट पर कार्य करते हुए एव एकेडमिक रिसर्च कांफ्रेंस मे लगातार युवा केटेगरी मे अनेकों बार राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त कर चुके है.आपको मेनेजमेंट प्रबंधन सामाजिक कार्य आदि मे बेहतर एकेडमिक रिसर्च ,सरकारी प्रोजेक्ट के दोरान तकनीकी सोशल नवोन्मेष ,बेहतर कार्य शैली के चलते युवा सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. आपको विभिन्न स्तर पर सोशल मेनेजमेंट,मानवाधिकार क्षेत्र मे बेहतर कार्य करने हेतु मानद डाक्टरेट उपाधि से राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस मे सम्मानित किया जा चुका है.गांधी सामाजिक सरोकार के तहत अपने रक्त दान क्रांति अभियान में लगातार कोटा वासियों के लिए समाज के विकास कार्यक्रमों द्वारा ज़रूरतमंद मरीजों हेतु रक्त संग्रहण मे अपनी भूमिका अदा कर रहे है .कोरोना काल में जन जागरुकता अभियान वर्चुअल जागरुकता कैम्पेन मे भी ग्लोबल लेवल पर जूम सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार सक्रिय रहे है और अपनी सकारात्मक निर्भीक लेखन शैली से पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से सामाजिक क्षेत्र मे लेखन सतत रखते है. आपको पूर्व मे विभिन्न संस्थाओं संघठन सरकारी एवं अर्धसरकारी संस्थाओं द्वारा डॉ. कलाम यूथ सम्मान,कोटा रत्न सम्मान,कर्म वीर रत्न सम्मान,राष्ट्रीय युवा एक्सीलेंस सम्मान ,राष्ट्रीय डिजिटल नवोन्मेष सम्मान नई दिल्ली-2023,डिजिटल सीनेट- 2023 स्पीकर फोरम सम्मान ,विभिन्न जिला राज्य स्तर पर उच्चाधिकारियों द्वारा उच्चतम कोटि कार्य प्रशंसा पत्र आदि सम्मान प्राप्त हो चुके है. वर्तमान मे स्वतंत्र रूप से मेनेजमेंट विश्लेषक युवा डेवलपमेंट सोशल एक्टिविस्ट एकेडमिक कोच के रूप मे सक्रिय है और विश्व युवा संघठन भारत के मानद संयुक्त निदेशक है एवं मेडतवाल वैश्य सेवा समिति कोटा के मेंबर ,नवयुवक सघ कोटा के उपाध्यक्ष भी है एवं वैश्य फेडरेशन कोटा के जिला उपाध्यक्ष भी है ,राष्ट्रीय मानवाधिकार संघठन के मानद युवा अध्यक्ष भी है एवं विभिन्न राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय संघठन के सक्रिय सदस्य है.

रॉक लेडीज रॉक! : ‘एच 3 फाउंडेशन’ के सहयोग से एस्प्लेनेड मॉल में धूमधाम से मनाया गया ‘विश्व महिला दिवस’

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*बिग बॉस 16 फेम शबीना कुंडलियाल द्वारा जुंबा और फिटनेस वर्कशॉप तथा महिला उद्यमियों को किया गया सम्मानित*

*गुरुग्राम-

वो कहते थे जहां औरत होती है वहां जादू होता है! इसलिए, द एस्प्लेनेड मॉल ने ‘द होप हसल हैप्पीनेस फाउंडेशन’ (H3) के सहयोग से समाज के प्रति महिलाओं के योगदान को पुरस्कृत करने और मान्यता देने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। यह महिला दिवस समारोह द एस्प्लेनेड मॉल, गुरुग्राम में हुआ। इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं मणिपाल हॉस्पिटल्स के एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ एक पैनल चर्चा, बिग बॉस फेम 16 शबीना कुंडलियाल द्वारा जुंबा और फिटनेस वर्कशॉप और महिला उद्यमियों के लिए एक पुरस्कार समारोह था।
महिला स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर डॉक्टर के सुझाव लेने के लिए दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र भर से महिलाएं आईं। उनके सभी प्रश्नों का मणिपाल अस्पताल के विद्वान चिकित्सक द्वारा अच्छी तरह से उत्तर दिया गया था और वहां उपस्थित महिलाओं को अपने शरीर और दिमाग की देखभाल करने के लिए कुछ प्रो टिप्स भी मिले!
बिग बॉस फेम 16 शबीना कुंडलियाल के वर्कशॉप ने तब सुर्खियां बटोरी जब उनके बहुत सारे उत्साही प्रशंसक इसमें हिस्सा लेने के लिए वहां पहुंचे। शबीना ने कहा कि “जहाँ औरत है वहाँ जादू है !! एक महिला के रूप में, हमारे पास हमेशा लोग हमें बताते हैं कि हमें क्या करना है या हमें एक निश्चित तरीके से बनना है; लेकिन वही करो जो तुम्हें सही लगे! फोटो में फिल्टर हो सकते हैं लेकिन अच्छे दिल को फोटोशॉप नहीं किया जा सकता! एक अच्छा दिल और एक सकारात्मक आत्मा रखें, जो आपके पास पहले से है लेकिन हमेशा जमीन से जुड़े रहें! दिन के अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि आप जो प्यार करते हैं उसे करते रहें और बेहतर अपने आप शुरू हो जाएगा! मेरी सभी महिलाओं के लिए, आप एक दिन वह हासिल करेंगी जो आप चाहती हैं!
अपना सर्वश्रेष्ठ देना कभी बंद न करें और हमेशा आभारी रहें!”
महिला दिवस समारोह का सफल समापन उन महिला उद्यमियों के लिए पुरस्कार समारोह के साथ हुआ, जिन्होंने अपने स्टार्ट-अप और प्रभावित करने वाले कौशल से अपने व्यक्तित्व और विशिष्टता की प्रशंसा की है। धूत ग्रुप के निदेशक पीयूष धूत ने कहा कि महिलाएं समाज की रीढ़ होती हैं। आधुनिक महिलाएं अपने करियर के साथ-साथ बच्चों की परवरिश और परिवार की देखभाल करने में बहुत प्रयास कर रही हैं! एस्प्लेनेड मॉल हमारे देश की सभी बहादुर और साहसी महिलाओं को सलाम करता है।” इस पर सभी दर्शकों के साथ-साथ अतिथियों ने भी तालियां बजाईं।

बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार है जरूरी

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– संतुलित आहार से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता होगी विकसित
– बच्चों के भोजन में दूध और अनाज की मात्रा बढ़ाएं
– पानी और जूस भी अधिक से अधिक देने की करें कोशिश

मुंगेर, 4 मार्च-

बच्चों के सर्वांगीण शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। इससे ना सिर्फ बच्चे का सर्वांगीण शारीरिक और मानसिक विकास होता बल्कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। इन दिनों बदल रहे मौसम में तो बच्चों के देखभाल की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। ऐसे में खुद के साथ-साथ बच्चों की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। छोटे- छोटे बच्चों का उसके स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए कौन सा आहार हो, इसको लेकर बेहद सावधान रहने की आवश्यकता है । संतुलित आहार से ही बच्चों की रोग – प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। बच्चों को यदि विटामिन और मिनरल्स नहीं मिलते हैं तो उसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती ।

– बच्चों के आहार का रखें विशेष ख्याल :-
जिला के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ) डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि बच्चों के आहार के प्रति थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। दरअसल,अभी उनमें तेजी से रोग- प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है। अभी यदि थोड़ा सावधान रहें तो आगे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। इसके लिए जरूरी है कि उनके भोजन में दूध, अनाज की मात्रा बढ़ाएं। इसके साथ ही पानी और जूस भी अधिक से अधिक दें।

– शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन जरूरी :- बच्चों के शारीरिक विकास के लिए कैलोरी बहुत जरूरी है। अधिक कैलोरी के लिए दूध और साबुत अनाज अधिक देने पर ध्यान दें। बच्चों को कॉर्नफ्लैक्स व ओट्स दे सकते हैं। वहीं, प्रोटीन की कमी से शारीरिक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता और मस्तिष्क संबंधी भी कई तरह के विकार पैदा हो जाते हैं । इसके अलावा मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती के लिए भी प्रोटीन बहुत जरूरी है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए बच्चों को पूरी मात्रा में विटामिन और मिनरल दें। थोड़ी- थोड़ी मात्रा में बच्चों को पानी पिलाते रहें ।

इन बातों का रखें ध्यान:——
– उन्होंने बताया कि जन्म के शुरुआती 1 घण्टे में नवजात को कराएं स्तनपान।
– 6 माह तक सिर्फ शिशु को कराएं स्तनपान(ऊपर से कुछ भी न दें। (पानी भी नहीं)। स्तनपान को कम से कम 2 साल तक जारी रखें।
– 6 माह पूर्ण होने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ संपूरक आहार देना शुरू करें।

– शुरुआत में प्रतिदिन बच्चे को अलग-अलग आहार खिलाएं। इस बात का ध्यान रखें कि इनमें पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल हों।

– बच्चे को प्यार से समझाएं। उसे खेल-खेल में खाना खिलाएं।

– कलरफुल चीजें बच्चे को बहुत पसंद होती हैं। यह बात आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। उन्हें सलाद, फल और सब्जियां काट कर दें।

– बच्चों को खेलने दें, वह जितना ज्यादा थकेंगे उन्हें उतनी ही भूख लगनी शुरू हो जाएगी। वह खुद खाना मांगेगा ।

– बच्चे को पौष्टिक खाना खाने की आदत डालें और बाहरी खाना से बचाएं।

बदल रहे मौसम में है डायरिया का खतरा

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-प्रदूषित भोजन व संक्रमित जल से डायरिया का खतरा
-बच्चों को डायरिया से बचाने पर दें ध्यान
-पेट मरोड़ व दर्द के साथ दस्त व उल्टी है डायरिया की पहचान

लखीसराय, 03 मार्च-

इस समय मौसम में तेजी से उतार -चढ़ाव हो रहा है. दिन में धूप से गर्मी एवं शाम होते ही ठंड का प्रकोप. जिसके कारण मौसमी बीमारी का खतरा बना रहता है . इस मौसम में अपने साथ अपने बच्चों का का भी खास ख्याल रखना महत्वपूर्ण हो जाता है . इनमें डायरिया एक गंभीर बीमारी है. छोटी सी लापरवाही डायरिया की समस्या को गंभीर बना देती है. ऐसे में जरूरी है कि आवश्यक सावधानी बरती जाये ताकि अनावश्यक रूप से परेशान होने से बचा जा सके. डायरिया के मामले अधिकांशत: गर्मियों में बढ़ जाते हैं. यह किसी भी आयुवर्ग व्यक्ति को हो सकता है. थोड़ी सी भी लापरवाही बरतने पर यह समस्या विशेष तौर पर शारीरिक रूप से कमजोर लोगों जैसे बुजुर्ग व बच्चों में अधिक गंभीर हो जाता है.

डायरिया होने का कारण—
डायरिया , बैक्ट्रीरिया और वायरस से होने वाला संक्रमण है. प्रदूषित खानपान, बासी भोजन, साबुन से हाथ नहीं धोना, साफ पेयजल का इस्तेमाल नहीं करना आदि डायरिया की वजह हैं. डायरिया होने पर पेट मरोड़ व दर्द के साथ दस्त व उल्टी होती है. कभी कभी मल में खून या म्यूकस भी आने की शिकायत हो सकती है. डायरिया पीड़ित को इस दौरान तेज बुखार, सिरदर्द और हाथ व पैरों में दर्द होता है. चूंकि दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है इसलिए मरीज को तरल पदार्थ जरूर दिया जाना चाहिए.

शरीर में पानी की कमी के लक्षणों की ऐसे करें पहचान:
• गला सूखना व मुंह में सूखापन.
• कमजोरी और सुस्ती का एहसास.
• गाढ़े रंग का पेशाब होना.
• बहुत कम पेशाब होना.
• प्यास लगना.

जब शरीर में पानी की कमी हो निम्न तरीका अपनायें:
• पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें.
• नारियल पानी पीना लाभप्रद है.
• ओआरएस का इस्तेमाल करें.
• चिकित्सक की सलाह से आवश्यक दवाई लें.
• पानी को उबाल कर ठंडा कर लें और पीयें.
• अधपके खाद्य पदार्थों, कटे और खुले फलों से परहेज.
• फलों व सब्जियों को अच्छी तरह धो कर इस्तेमाल.

नवजात व छोटे बच्चों का इस तरह रखें ध्यान:
नवजात व दूध पीते छोटे बच्चों में डायरिया की रोकथाम के लिए उनका नियमित स्तनपान कराया जाना जरूरी है. इसके अलावा इसका भी पालन अवश्य रूप से करें.
• ओआरएस का घोल बना कर छोटे छोटे घूंट में पिलायें.
• वॉशरूम के इस्तेमाल के बाद मां साबुन से हाथ धोए • बच्चे के नियमित स्तनपान व संतुलित आहार का ध्यान रखें.
• आवश्यक होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जायें.

आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं से लें मदद:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि डायरिया की रोकथाम के लिए आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद ली जा सकती है. उनके पास ओआरएस व जिंक की गोली मौजूद होती है. इसका सेवन डायरिया को रोकता है. साथ ही आशा व आंगनबाड़ी सहित नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक का फोन नंबर अवश्य रखें. ताकि फोन पर भी सलाह ली जा सके.