104 टोल फ्री नंबर पर कॉल कर स्वास्थ्य सेवाओं का उठाएं लाभ

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-जांच, इलाज, दवा समेत स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी तरह की मिलेगी जानकारी
-इस टोल फ्री नंबर पर कॉल कर सुझाव और शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं आप
बांका, 8 जुलाई-
स्वास्थ्य विभाग ने जब से 104 टोल फ्री नंबर सेवा शुरू की है, लोगों को इससे काफी फायदा पहुंच रहा। 104 नंबर पर डायल करते ही जांच, इलाज, दवा से लेकर स्वास्थ्य से संबंधित हर तरह की जानकारी लोगों को मिल जा रही है। दरअसल, सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और लोगों तक इसकी आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ही इस सेवा की शुरुआत की है। इसलिए यदि आपको सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा, दवा या स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी किसी भी तरह के सवाल का जवाब जानना हो तो आप 104 नंबर टोल फ्री नंबर पर कॉल कर जानकारी हासिल कर सकते हैं।
सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण कहते हैं कि 104 टोल फ्री नंबर का लाभ जिले के सभी लोगों को उठाना चाहिए। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी से लेकर शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान की जा रही है। वहीं मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रिपोर्टिंग बढ़ाने के लिए भी आप 104 टोल फ्री नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं। मातृ एवं शिशु मृत्यु की सही जानकारी इससे जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने में सहयोग करता है। इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि 104 टोल फ्री नंबर का उपयोग जरूर करें।
शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं आपः सबसे अच्छी बात यह है कि 104 नंबर पर डायल कर आप किसी भी तरह की शिकायत एवं सुझाव भी दे सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतकर्ता को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाता है। इस नंबर के जरिये आप अपनी शिकायत की स्थिति के बारे में जान सकते हैं। स्थिति की जानकारी मिल जाने के बाद आप सुविधा का इस्तेमाल अपने हक में कर सकते हैं।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की करें रिपोर्टिंगः महत्वपूर्ण बात यह है कि 104 टोल फ्री नंबर के जरिये आप मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रिपोर्टिंग भी कर सकते हैं। दरअसल, सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम संचालित कर रही है। साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु की सही रिपोर्टिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसे लेकर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। यही कारण है कि सरकार 104 नंबर पर मातृ एवं शिशु मृत्यु की जानकारी देने की अपील भी कर रही है। मातृ-मृत्यु की अवधि प्रसव के बाद 42 दिनों तक रखी गई है। अगर किसी भी व्यक्ति को इस संबंध में  जानकारी मिलती है तो वह 104 नंबर पर डायल कर सकते हैं।
इन सुविधाओं का मिल रहा लाभः विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा सामान्य रोगों की जानकारी देना, कोरोना संबंधित जानकारी, आयुष्मान भारत से संबंधित जानकारी, चिकित्सकीय सेवा संबंधित सलाह, सुझाव एवं शिकायत, मनोरोग संबंधित चिकित्सकीय परामर्श और मातृ एवं शिशु मृत्यु की जानकारी देना।

फाइलेरिया एक संक्रमित बीमारी है, इससे बचाव के लिए दवा खाना जरूरी

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-घर के आसपास गंदे पानी को जमा नहीं होने दें, मच्छरों से करें बचाव
-यह आर्थिक, शारीरिक और मानसिक तौर पर करता है लोगों को परेशान
भागलपुर-
बारिश का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे मौसम में पानी जमा होने से मच्छरजनित बीमारी होने का खतरा रहता है। मच्छरजनित बीमारियों में से एक है फाइलेरिया। इस बीमारी से पीड़ित होने के बाद लोगों को जीवनभर परेशानी झेलनी पड़ती है। इसलिए इससे बचाव जरूरी है। बचाव के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि साफ-सफाई रखें और घर के आसपास पानी नहीं जमने दें। फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो न सिर्फ आर्थिक और शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक तौर पर भी परेशान
करती है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितनी खतरनाक बीमारी है। ऐसे में लोगों को खुद को और अपने परिजनों को मच्छरों से बचाना होगा। प्रभारी जिला मलेरिया पदाधिकारी (डीएमओ) डॉ. दीनानाथ कहते हैं कि फाइलेरिया एक खतरनाक बीमारी है और इससे इंसान की मृत्यु नहीं होती है पर जीवनभर के लिए वह दिव्यांग जरूर हो जाता है। यह बीमारी संक्रमित होती है और यह गंदे पानी में बैठने वाले मच्छरों के काटने से होती है। फाइलेरिया से बचाव के लिए फाइलेरिया की दवा खानी जरूरी है।
क्यूलेक्स मच्छर काटने से होता है फाइलेरियाः डॉ. दीनानाथ ने बताया कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। क्यूलेक्स मच्छर घरों के दूषित स्थलों, छतों और आसपास लगे हुए पानी में पाया जाता है। इससे बचाव के लिए लोग घरों के आसपास गंदगी और पानी नहीं जमने दें। घर के आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए। बुखार आना, शरीर में लाल धब्बे या दाग होना, शरीर के किसी भी अंग में सूजन होना इसके लक्षण हैं। ज्यादातर इस बीमारी से ग्रसित लोगों के पांव या हाइड्रोसिल में सूजन हो जाती है। लोग इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें, इसके लिए सरकार साल में एक बार
एमडीए अभियान चलाती है। इससे लोगों को जरूरी दवा उपलब्ध होती है, जो इस बीमारी को रोकने में सहायक होती है।
गंभीर रूप से बीमार लोगों को नहीं खिलाई जाती है दवाः डॉ. दीनानाथ ने बताया कि फाइलेरिया को लेकर अभियान चलते रहता है। अभियान के दौरान दो से पांच तक वर्ष के बच्चों को डीईसी और अल्बेंडाजोल की एक गोली, छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो और अल्बेंडाजोल की एक गोली और 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डीईसी की तीन और अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलाई जाती है। अल्बेंडाजोल की गोली लोगों को चबाकर खानी होती है। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कोई दवा नहीं खिलायी जाती है। साथ ही गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी दवा नहीं खिलाई जाती है। जो लोग अभियान के दौरान दवा नहीं खा सके हैं या फिर छूट गए हैं, वह अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर दवा ले सकते हैं। दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफ़ेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफ़ेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफ़ेक्ट सामान्य होते हैं, जो
प्राथमिक उपचार से ठीक भी हो जाते हैं।

कोविड – चयनित स्थानों में वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर सभी लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर दी गई वैक्सीन 

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– जरूरतमंदों के घरों तक पहुँची वैक्सीनेशन टीम, लगाया गया सुरक्षा का टीका
खगड़िया-
सामुदायिक स्तर पर कोविड के प्रभाव से लोगों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से जल्द से शत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने वैक्सीनेशन अभियान तेज कर दिया  है और लगातार  मेगा ड्राइव चलाया जा रहा । इसी कड़ी में गुरुवार को पुनः जिलेभर में कोविड मेगा ड्राइव चलाया गया। जिसके माध्यम से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित कर अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन से वंचित लोगों को वैक्सीनेट किया गया। साथ ही सेकेंड और प्रीकाॅशनरी डोज लेने की निर्धारित समयावधि पूरी  करने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी गई। इधर, विशेष अभियान के  सफल संचालन के लिए सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान, डीपीएम (हेल्थ) पवन कुमार, केयर इंडिया के डीटीएल अभिनंदन आनंद, परवत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राजीव रंजन समेत अन्य पदाधिकारी विभिन्न सेशन साइटों का भ्रमण कर आवश्यक निर्देश देते दिखे।
– कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी और कारगर उपाय :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, कोविड से बचाव के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी और कारगर उपाय है और इसी के बदौलत में इस घातक महामारी से सुरक्षा संभव है।इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि खुद एवं परिवार और समाज को इस घातक महामारी से सुरक्षित करने के लिए सभी लोग निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। वहीं, उन्होंने बताया, सभी सेशन साइटों पर तीनों डोज के लाभार्थियों को वैक्सीन दी गई। विशेष अभियान के  सफल  संचालन के लिए सभी सेशन साइटों पर पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती एवं वैक्सीन वाइल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी। ताकि एक भी व्यक्ति  को वैक्सीन के अभाव में लौटना नहीं पड़े। वहीं, उन्होंने बताया, जिले में चल रहे वैक्सीनेशन अभियान को और तेज गति देने के लिए वैक्सीनेशन टीम को आवश्यक निर्देश दिए गए।
– जरूरतमंदों के घरों तक पहुँची वैक्सीनेशन टीम :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, मेगा वैक्सीनेशन ड्राइव के तहत जिले के सभी प्रखंडों में चयनित जगहों पर तो विशेष कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित किया गया । किन्तु, जो लोग शिविर स्थल तक आने में असमर्थ थे, उन्हें होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई, यानी उनके घर पर जाकर वैक्सीनेशन टीम द्वारा वैक्सीन दी गई। ताकि ऐसे लाभार्थी भी वैक्सीन से वंचित नहीं रहें और जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके तथा सामुदायिक स्तर पर लोग इस घातक महामारी के खतरे से सुरक्षित हो।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड संक्रमण से रहें दूर :
– मास्क का उपयोग और शारीरिक दूरी का पालन जारी रखें।
– विटामिन-सी युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें और सेनेटाइजर का उपयोग करें।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
मेगा ड्राइव • जिले के सभी प्रखंडों में चलाया गया विशेष कोविड वैक्सीनेशन अभियान

फाइलेरिया उन्मूलन • जिले में एमडीए अभियान का हुआ शुभारंभ 

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– जिलाधिकारी ने खुद दवा खाकर अभियान की शुरुआत
– घर-घर जाकर दो वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा
लखीसराय-
जिले में गुरुवार  को फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) अभियान का शुभारंभ हुआ। इस अभियान का शुभारंभ जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने खुद अपने कार्यालय में दवा खाकर किया। इसके बाद डीडीसी, सिविल सर्जन, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, डीसीएलआर समेत अन्य पदाधिकारियों ने भी जिलाधिकारी के कार्यालय में दवा का सेवन किया। जिसके बाद जिले में गुरुवार से अभियान की विधिवत शुरुआत हुई। वहीं, इस दौरान जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा, फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल व डीईसी की दवा का सेवन बहुत जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि निश्चित रूप से पूरी तरह निःसंकोच होकर दवा खिलाने वाली टीम के सामने दवा का सेवन करें। मुझे जिले वासियों से विश्वास ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास है कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए तमाम जिले वासी निश्चित रूप से  सकारात्मक सहयोग करेंगे। इस मौके पर जिला स्वास्थ्य समिति डीपीएम, डीभीबीडीसीओ, भीडीसीओ, भीबीडीसी, लखीसराय सदर पीएचसी प्रभारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, बीसीएम, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ, पीसीआई, केयर इंडिया के डीटीएल, डीपीओ समेत अन्य सहयोगी स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि मौजूद थे।
– घर-घर जाकर दो वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा –
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने कहा, जिले के सभी प्रखंडों में एमडीए अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत गृह भेंट की तर्ज पर आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को खुद के सामने अल्बेंडाजोल एवं डीईसी की दवाएं खिलाएंगी। ताकि एक भी व्यक्ति दवाई खाने से वंचित नहीं रहे और अभियान सफल हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, 2 से 5 साल तक के बच्चों को 100 मिलीग्राम की डीईसी एवं 400 मिलीग्राम की अल्बेंडाजोल की एक-एक गोली, 6 से 14 साल तक के किशोरों को डीईसी की दो एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली एवं 15 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डीईसी की तीन गोलियां एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली खिलायी जानी है।
– गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को नहीं खिलाई जाएगी दवा :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया, अभियान के दौरान घर-घर जाकर लोगों को अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवाएं पात्र व्यक्तियों को खिलाई जाएगी। उक्त दवा गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को छोड़कर शेष सभी लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा खिलाई जाएगी। साथ ही इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए जागरूक भी किया जाएगा । ताकि उक्त अभियान का सफलतापूर्वक समापन एवं बीमारी पर रोकथाम संभव हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, इस बीमारी से बचाव के लिए दवाई के साथ-साथ एहतियात भी जरूरी है। इसलिए, अभियान के दौरान योग्य व्यक्तियों को दवाई तो खिलाई ही जाएगी। इसके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। जैसे कि, घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें एवं घरों में सोने से पहले मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही अन्य लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक भी करें, ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी जड़ से समाप्त हो सके। इस बीमारी को पूरी तरह से मिटाने के लिए जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
– साइड इफेक्ट से  घबराएं नहीं :
दवा सेवन के बाद किसी तरह के सामान्य साइड इफेक्ट से घबराने की जरूरत नहीं है। अमूमन जिनके अंदर फाइलेरिया के परजीवी होते हैं, उनमें ही साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। साइड इफेक्ट सामान्य होते हैं, जो प्राथमिक उपचार से ठीक हो जाते हैं।
– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।
– इन बातों का रखें ख्याल :
– भूखे पेट दवा नहीं खिलानी  है।
– किसी के बदले किसी अन्य को दवा ना दें और स्वास्थ्य कर्मी के सामने दवा खाएं।
– गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलानी  है।
– 02 वर्ष छोटे बच्चे को दवा नहीं खिलानी  है।
– गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को भी दवा नहीं खिलानी  है।
– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
– अल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।

फाइलेरिया के मरीज सरकारी अस्पताल जाकर लें मेडिकल किट

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-जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में बांटी  जा रही  हैं  मेडिकल किट
-किट में मौजूद साबुन, एंटी सेप्टिक क्रीम व अन्य सामान के इस्तेमाल से मिलेगी राहत
बांका-
फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो न सिर्फ आर्थिक और शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक तौर पर भी परेशान करती है। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितनी खतरनाक बीमारी है। ऐसे में लोगों को खुद को और अपने परिजनों को मच्छरों से बचाना होगा। साथ ही जो लोग फाइलेरिया की चपेट में आ गए हैं, वह पूरी तरह तो ठीक नहीं हो सकते, लेकिन उन्हें राहत पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। इसी सिलसिले में अभी जिले में फाइलेरिया के मरीजों के लिए एक मेडिकल किट बांटी  जा रही  हैं। इस किट में एक छोटा टब, मग, साबुन, एंटीसैप्टिक क्रीम, पट्टी इत्यादि सामान हैं। इसके सहयोग से फाइलेरिया मरीज होने वाले जख्म को ठीक कर सकते हैं, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी।
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी आरिफ इकबाल ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी से तो मरीजों को पूरी तरह आजादी नहीं मिलती है, लेकिन बेहतर मोर्बिडिटी प्रबंधन के जरिये थोड़ी राहत जरूर मिलती है। इसी को लेकर मरीजों में किट बांटी  जा रही  है। जिलेभर में 500 किट बांटी  जानी  है। जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और सदर अस्पताल में यह किट उपलब्ध है। फाइलेरिया के मरीज इन जगहों पर जाकर यह किट ले सकते हैं। आरिफ इकबाल कहते हैं, दरअसल फाइलेरिया के मरीजों की चमड़ी थोड़ी मोटी हो जाती है। जिस जगह पर फाइलेरिया होता है, वहां पर जख्म का खतरा भी रहता है। जख्म होने के बाद मरीजों को ज्यादा परेशानी नहीं हो, इसके लिए किट में मौजूद दवा और सफाई से फाइलेरिया रोगियों को राहत मिलेगी।
क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरियाः जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डी भी बी डी सी ओ) डॉ. बीरेंद्र कुमार यादव कहते हैं कि फाइलेरिया क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। क्यूलेक्स मच्छर घरों के दूषित स्थलों, छतों और आसपास लगे हुए पानी में पाया जाता है। इससे बचाव के लिए लोग घरों के आसपास गंदगी और पानी नहीं जमने दें। घर के आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए। बुखार आना, शरीर में लाल धब्बे या दाग होना, शरीर के किसी भी अंग में सूजन होना इसके लक्षण हैं। ज्यादातर इस बीमारी से ग्रसित लोगों के पांव या हाइड्रोसिल में सूजन हो जाती है। लोग इस बीमारी से सुरक्षित रह सकें, इसके लिए सरकार साल में एक बार एमडीए अभियान चलाती है। इससे लोगों को जरूरी दवा उपलब्ध होती है, जो इस बीमारी को रोकने में सहायक होती है।

निजी अस्पताल के कर्मी ने टीबी मरीज को इलाज के लिए भेजा सरकारी अस्पताल

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-सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बाद मिथुन कुमार गोस्वामी आज जी रहे स्वस्थ जीवन
-धोरैया के कचराती के मिथुन को जांच-इलाज में नहीं लगा पैसा, पोषण के लिए राशि भी मिली
बांका-
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज को लेकर कितनी बेहतर सुविधाएं हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निजी अस्पताल के कर्मी भी अब मरीज को बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दे रहे हैं। जी हां, आप बिल्कुल सही पढ़ रहे हैं। जिले के धोरैया प्रखंड के कचराती गांव के रहने वाले मिथुन कुमार गोस्वामी दो साल पहले टीबी की चपेट में आ गए थे। इसके इलाज के लिए वह पड़ोस के झारखंड के गोड्डा जिले गए। वहां पर निजी अस्पताल में कुछ दिनों तक इलाज करवाया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। इससे वह काफी चिंतित रहने लगे। एक दिन इलाज के क्रम में ही उनकी बातचीत निजी अस्पताल के एक कर्मी से हुई। उस ईमानदार कर्मी ने मिथुन को सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराने की सलाह दी।
इसके बाद मिथुन इलाज कराने के लिए बांका जिला यक्ष्मा केंद्र आ गए। यहां पर उनकी मुलाकात जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय से हुई। उन्होंने मिथुन की मुलाकात डीपीएस गणेश झा से कराई। इसके बाद दोनों ने मिलकर पहले उसे मानसिक तौर पर समझाया। उसे भरोसा दिलाया कि नियमित तौर पर दवा का सेवन करने के बाद आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएंगे। इसके बाद मिथुन का इलाज शुरू हुआ। तकरीबन एक वर्ष तक इलाज चला, जिसके बाद मिथुन पूरी तरह से स्वस्थ हो गया। आज मिथुन न सिर्फ स्वस्थ जीवन जी रहा है, बल्कि लोगों को टीबी के प्रति जागरूक भी कर रहा है।
टीबी मरीजों को सरकारी अस्पताल जाने की दे रहा सलाहः मिथुन कहते हैं कि टीबी होने के बाद पहले तो मैं डर गया था, लेकिन धन्यवाद उस निजी अस्पताल के कर्मी को जिसने मुझे सरकारी अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद राजदेव राय जी और गणेश झा ने तो मेरे जीवन में खुशियां ही ला दी। एक साल तक  मेरा इलाज चला। इस दौरान मुझसे जांच, इलाज और दवा का कोई पैसा नहीं लिया गया। साथ ही जब तक इलाज चला, पोषण के लिए पांच सौ रुपये प्रतिमाह मुझे मिला भी। अब मैं पूरी तरह से स्वस्थ्य हूं। साथ ही आसपास के लोगों को टीबी के प्रति जागरूक भी कर रहा हूं। अगर कोई टीबी का मरीज मिल जाता है तो उसे सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज कराने की सलाह देता हूं।
सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज को लेकर बेहतर सुविधाः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज को लेकर बेहतर सुविधा है, अब इस बात की तस्दीक निजी अस्पताल वाले भी कर रहे हैं तो यह बहुत ही अच्छी बात है। इससे मरीज को बेहतर इलाज तो मिलेगा ही, साथ में उनका आर्थिक नुकसान भी कम होगा। मिथुन को इसका फायदा मिला। मुझे खुशी है कि जिला यक्ष्मा केंद्र में आकर मरीज इलाज कराने के बाद स्वस्थ्य हो रहे हैं।

एचआईवी पीड़ित लोगों में टीबी का ख़तरा 18 गुना अधिक

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– एचआईवी के साथ जी रहे लीगों में टीबी के कारण 3 गुना अधिक मृत्यु का ख़तरा
– एचआईवी सर्वाइवर में टीबी की पूर्व पहचान पर दिया जा रहा बल
पटना:
ग्लोबल टीबी रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी के साथ जी रहे लोगों में एक सामान्य व्यक्ति की तुलना में टीबी का ख़तरा 18 गुना अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार एचआईवी सर्वाइवर को टीबी से बचाव पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। एचआईवी के साथ जी रहे लोगों में टीबी के कारण मौत का ख़तरा तीन गुना तक बढ़ जाता है। इस दिशा में राज्य सरकार सतर्क एवं सजग होकर कार्य कर रही है। एचआईवी सर्वाइवर में टीबी की सही समय पर जाँच एवं टीबी से पीड़ित होने पर समुचित ईलाज की सुविधा उपलब्ध कराने पर बल दिया जा रहा है।
एचआईवी सर्वाइवर रहें सतर्क, टीबी का खतरा अधिक
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2019 में विश्व भर में 1 करोड़ टीबी रोगियों में 8.2 फ़ीसदी एचआईवी सर्वाइवर शामिल हैं। वहीं, यदि एचआईवी सर्वाइवर में सही समय से टीबी की पहचान एवं ससमय प्रबंधन किया जाए तो संपूर्ण उपचार संभव है। साथ ही टीबी से होने वाली मौत की संभावना को भी कम किया जा सकता है।
राज्य सरकार दे रही ध्यान:
टीबी पर बेहतर रोजथाम के लिए टीबी की पूर्व पहचान पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए सक्रिय टीबी मरीज खोजी अभियान निश्चित अंतराल पर चलाया जा रहा है। टीबी की कम से कम समय में पहचान के लिए सीबी नेट एवं ट्रू नेट मशीन सरकार द्वारा राज्य से लेकर जिला स्तर पर स्थापित किये गए हैं। इससे कम समय में टीबी जाँच रिपोर्ट मिल रही है। इसके अलावा मल्टीप्ल ड्रग रिजिस्टेंस टीबी यानी एमडीआर टीबी के ईलाज के लिए जिला स्तर पर डी आर टीबी सेंटर एवं पटना में नोडल डी आर टीबी सेंटर बनाया गया है।

डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी : सिविल सर्जन 

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– सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार हाॅल में एंटी डेंगू दिवस के अवसर पर बैठक
– सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने पर दिया गया बल
शेखपुरा, 06 जुलाई-
बुधवार को एंटी डेंगू दिवस के अवसर पर सिविल सर्जन कार्यालय परिसर स्थित सभागार हाॅल में एक कार्यशाला सह बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डाॅ पृथ्वीराज ने की। वहीं, कार्यशाला के दौरान डेंगू से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक करने पर बल दिया गया। इस मौके पर सिविल सर्जन ने कहा, इस बीमारी से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर जन जागरूकता बेहद जरूरी है। इसलिए, अभियान चलाकर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूक करें और बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी दें। ताकि लोग शुरुआती दौर में ही बीमारी की पहचान कर  ससमय अपनी  जाँच व इलाज करवा सकें । दरअसल, किसी भी बीमारी की शुरुआती दौर में पहचान होने से संबंधित बीमारी को आसानी के साथ मात दी जा सकती है। इस मौके पर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह, वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार आदि मौजूद थे।
– संक्रमित एडिस मच्छर काटने से होता है डेंगू और चिकनगुनिया :
जिला वेक्टर जनित-रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया, डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर काटने से होता है। इसलिए, अगर आप दिन में भी सोते हैं तो अनिवार्य रूप से मच्छरदानी लगाएं। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। घर एवं सभी कमरे को साफ-सुथरा एवं हवादार बनाएं रखें। साथ ही आसपास भी साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। इसके लिए अपने पड़ोस में रहने वाले अन्य लोगों को भी जागरूक करें। ताकि इस बीमारी के दायरे से सामुदायिक स्तर पर लोग दूर रहें। वहीं, उन्होंने बताया, इस बीमारी से बचाव के लिए रहन-सहन में बदलाव के साथ-साथ साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने की दरकार है। दरअसल, डेंगू  व चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षण बुखार से ही शुरू होते हैं। जिसके कारण लोगों को बीमारी की पहचान करने में भी काफी परेशानी होती है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी अस्पताल में जाँच कराने की जरूरत है।
– लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं इलाज, अस्पतालों में समुचित व्यवस्था है उपलब्ध :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार ने बताया, लक्षण दिखते ही ऐसे मरीजों को तुरंत जाँच करानी चाहिए। जाँच रिपोर्ट के अनुसार इलाज करानी चाहिए। ताकि बड़ी परेशानियाँ का सामना नहीं करना पड़े और समय पर इलाज शुरू हो सके। इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। वहीं, उन्होंने बताया, यह बीमारी संक्रमित एडिस मच्छर के काटने से होता है, जो स्थिर साफ पानी में पनपता है। इसलिए, घर समेत आसपास में जलजमाव नहीं होने दें। जलजमाव होने पर उसे यथाशीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था कर हटायें और पानी जमा होने वाले जगहों पर किरासन तेल या कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें।
– डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण :
– तेज बुखार, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द तथा ऑखों के पीछे दर्द होना
– त्वचा पर लाल धब्बे या चकते का निशान
– नाक, मसूढ़े से या उल्टी के साथ रक्तस्राव होना
– काला पैखाना होना
– बचाव के उपाय :
– दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
– पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें अथवा मच्छर भगाने वाली दवा/क्रीम का उपयोग करें।
– टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी/फ्रिज के पानी निकासी ट्रे, पानी टंकी, गमला, फूलदान, घर के अंदर एवं आसपास पानी नहीं जमने दें।
– जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें अथवा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है टीबी बीमारी की जाँच और समुचित इलाज 

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– पीएचसी से लेकर जिला स्तर पर उपलब्ध है समुचित जाँच और इलाज की सुविधा
– लक्षण दिखते ही तुरंत कराएं जाँच…क्योंकि, अब टीबी लाइलाज नहीं, पर समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी
खगड़िया, 06 जुलाई-
टीबी एक संक्रामक बीमारी जरूर है, पर अब यह लाइलाज नहीं है। किन्तु, इससे बचाव एवं स्थाई निजात के लिए समय पर जाँच एवं समुचित इलाज कराना जरूरी है। इसलिए, लक्षण दिखते ही तुरंत स्वास्थ्य संस्थान में जाएँ और वहाँ जाँच कराएं। जाँचोपरांत चिकित्सा परामर्श का पालन करें। यही इस बीमारी से स्थाई निजात और बचाव का सबसे कारगर उपाय है। वहीं, लोगों को जाँच कराने में किसी प्रकार की असुविधा और अनावश्यक परेशानी नहीं हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग भी काफी सजग और गंभीर है। साथ ही लोगों की  सुविधा के मद्देनजर स्थानीय स्तर पर भी समुचित जाँच एवं इलाज की व्यवस्था की गई। ताकि लोगों को जाँच कराने में ना ही किसी प्रकार की असुविधा हो और नहीं लंबी दूरी का सफर करने की परेशानी उठानी पड़े। मसलन, सभी लोग सुविधाजनक तरीके से अपना जाँच करवा सकें  और आसानी के साथ बीमारी को मात दे सकें । इसके अलावा जाँच में पीड़ित पाए जाने पर समुचित इलाज की भी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जाँच से लेकर इलाज तक की सभी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क है।
– टीबी संक्रमित मरीजों को प्रोत्साहन राशि का भी दिया जाता है लाभ :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, टीबी संक्रमित मरीजों को निःशुल्क जाँच और इलाज के साथ-साथ सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि भी देने का व्यवस्था की गई है। प्रोत्साहन राशि संबंधित मरीजों को उनके खाते के माध्यम से दिया जाता है। ताकि मरीजों को उचित एवं प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करने में मदद मिल सके। वहीं, उन्होंने बताया, किसी भी व्यक्ति को लक्षण महसूस होने पर तुरंत जाँच करानी  चाहिए। क्योंकि, किसी भी बीमारी की  शुरुआती दौर में जानकारी मिलती  तो उससे आसानी के साथ जल्द ही निजात भी मिल सकती है।
– बचाव के उपाय :
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करें ।
– मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
– मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
– पौष्टिक खाना खाएं, व्यायाम व योग करें ।
– बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें।
– भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें।
– ये हैं टीबी के लक्षण :
– भूख न लगना, कम लगना तथा वजन अचानक कम हो जाना।
– बेचैनी एवं सुस्ती रहना, सीने में दर्द का एहसास होना, थकावट व रात में पसीना आना।
– खांसी एवं खांसी में बलगम तथा बलगम में खून आना। कभी-कभी जोर से अचानक खांसी में खून आ जाना।
– लगातार पन्द्रह दिन तक खाँसी एवं हल्का बुखार रहना ।
– बुखार के साथ गर्दन जकड़ना, आंखें ऊपर को चढ़ना या बेहोशी आना ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस के लक्षण हैं।
– पेट की टीबी में पेट दर्द, अतिसार या दस्त, पेट फूलना आदि होते हैं।

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025- अब देश के किसी भी राज्य या जिलों में निःशुल्क इलाज करवा सकेंगे टीबी के मरीज 

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– ” टीबी हारेगा, देश जीतेगा ” के संकल्प के तहत टीबी उन्मूलन के लिए काम कर रहा है स्वास्थ्य विभाग
– इलाजरत अस्पताल से नए चयनित राज्य के अस्पताल में भेजना होता है सारा डिटेल
मुंगेर, 6 जुलाई
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025 के तहत अब देश के किसी भी राज्य या दूसरे जिलों में टीबी के मरीजों का इलाज निः शुल्क होगा। मालूम हो कि प्रधानमंत्री ने सन 2025 तक टीबी को मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रधानमंत्री के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिला भर में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जोरशोर से चल रहा है। ऐसे में देश के सभी राज्यों में स्थित सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क टीबी की जांच और दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं । देश भर के किसी भी जिला में रजिस्टर्ड टीबी के मरीज किसी अन्य राज्य के सरकारी अस्पताल में भी टीबी की  जांच और इलाज की सुविधा ले सकता है। केंद्र और राज्य सरकार की यह सुविधा टीबी के माइग्रेंट मरीजों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो रहा है।
जिला के संचारी रोग पदाधिकारी (सीडीओ) डॉ. ध्रुव कुमार शाह ने बताया कि टीबी को जड़ से मिटाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों को जागरूक करके टीबी की बीमारी से संबंधित जानकारी और इलाज को लेकर उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही टीबी उन्मूलन अभियान के तहत टीबी संक्रमित मरीजों को सरकार के द्वारा मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है।
देश के किसी भी राज्य में टीबी के निःशुल्क जांच और बेहतर इलाज के लिए टीबी मरीजों का रजिस्ट्रेशन सरकारी अस्पताल में होना जरूरी :
मुंगेर के डिस्ट्रिक्ट टीबी/एचआईवी कोऑर्डिनेटर शैलेन्दु कुमार ने बताया कि यदि कोई मुंगेर जिला का निवासी है और टीबी से संक्रमित है और वो पढ़ाई या काम करने के सिलसिले में दूसरे राज्य में जाना चाहता है तो उसे दूसरे राज्य के सरकारी अस्पताल में निःशुल्क इलाज कराने के लिए उसे अपना जिला के सरकारी अस्पताल को सूचित करना होता है जहां से उसका इलाज चल रहा है। यदि किसी टीबी के मरीज का सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है और वह किसी कारण से किसी दूसरे राज्य या अन्य जिला में जाना चाहता है तो ऐसी स्थिति में उसे वर्तमान अस्पताल में पूरी जानकारी देनी होगी।
टीबी मरीजों को मिलती है सारी सुविधाएं :
उन्होंने बताया कि उक्त मरीज को जो सुविधाएं वर्तमान के अस्पताल में प्रदान की जा रही थी वही सुविधाएं उसे वहां भी प्रदान की जाएगी। मरीज को दवा के साथ- साथ जांच की भी सुविधा निःशुल्क उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि यदि दूसरे राज्य या जिला का मरीज हमारे जिला में आता है तो वहां के जिला की  वही  प्रकिया अपनाकर उन्हें यहां भेजा जाता है और उस व्यक्ति का इलाज यहां शुरू कर दिया जाता है।
ट्रांसफर करना पड़ता है टीबी मरीज का सारा डिटेल :
उन्होंने बताया कि जब टीबी संक्रमित मरीज दूसरे राज्य या जिला में जाना चाहता है तो ऐसे में उक्त मरीज की सारी जानकारी अगले राज्य या जिला में स्थित सरकारी अस्पताल को भेजी जाती है।  जिसमें टीबी मरीज के जांच के साथ-साथ टीबी का स्टेज  और वर्तमान में चल रहे टीबी की दवा की जानकारी के साथ-साथ पंजीकरण संख्या भी भेजी जाती है। जब वह व्यक्ति उक्त अस्पताल में जाता है और पंजीकरण संख्या बताता है तो फिर वहां से उसका इलाज उसी आधार पर शुरू होता है जहां तक पहले मरीज का इलाज किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्तर भी टीबी मरीजों के बलगम की  जांच, सैंपलिंग शुरू कर दी गई है ताकि संबंधित मरीज सुविधाजनक तरीके से अपनी  जांच करवा सके और इसमें उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर सैम्पल लेकर जांच के लिए स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान को भेज दिया जाता है। वहां से जांच की रिपोर्ट आने के बाद मरीजों को टीबी दवा उपलब्ध करवा दी जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों मुंगेर सदर अस्पताल परिसर में जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से आई सीएचओ को टीबी उन्मूलन अभियान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को लेकर उन्मुखीकरण किया गया है।