सारथी रथ से प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाई जाएगी परिवार नियोजन की जानकारी 

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– जिले के सभी प्रखंडों में सारथी के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम शुरू, सिविल सर्जन ने रथ को हरि झंडी दिखा किया रवाना
– परिवार नियोजन के साधन को अपनाने से होने वाले फायदे की भी दी जाएगी जानकारी
लखीसराय, 06 जुलाई-
जिले में  परिवार नियोजन पखवाड़े की सफलता को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से  सतर्क है ।  इसे सफल बनाने के लिए  विभिन्न तरह की  गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है । ताकि सरकार की  इस योजना की जानकारी एवं इस योजना का लाभ लेने वाले लाभार्थियों के लिए सरकारी स्तर पर की गई व्यवस्था की जानकारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक आसानी से पहुँच सके। जिसे सार्थक रूप देने के लिए बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति कार्यालय परिसर से जिले के सभी प्रखंडों से  सारथी रथ (ई – रिक्शा) निकाला गया। जिसे सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने हरी  झंडी दिखाकर सभी प्रखंडों  के लिए रवाना किया। इस मौके पर डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती, डीपीएम (हेल्थ) मो. खालिद, केयर इंडिया के डीटीएल नावेद उर रहमान, लखीसराय सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ रौशेक कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज, बीसीएम नुसरत प्रवीण समेत जिले सभी प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक मौजूद थे।
– सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर पहुँचाई जाएगी परिवार नियोजन की जानकारी :
इस मौके पर सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने कहा, सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति तक परिवार नियोजन की जानकारी पहुँचाई जाएगी। रथ द्वारा गाँव से लेकर टोले-मोहल्ले तक जाकर माइकिंग के माध्यम से परिवार नियोजन को अपनाने से होने वाले फायदे की समेत सरकारी स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं की लोगों को जानकारी दी जाएगी। जिससे  प्रचार- प्रसार तेज हो सके  और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक परिवार नियोजन की जानकारी पहुँच सके । यह जागरूकता अभियान 10 जुलाई तक चलेगा।
– 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित होगा परिवार नियोजन शिविर :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, उक्त पखवाड़ा के दौरान 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में परिवार नियोजन शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिसमें योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थियों को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निर्धारित तिथि के अंदर इच्छुक और योग्य लाभार्थी अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
– सारथी रथ पर अस्थाई साधन की सुविधाएं रहेंगी उपलब्ध :
जिले के सभी प्रखंडों में संचालित सारथी रथ   पर परिवार नियोजन के अस्थाई साधन की समुचित सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी  । इसलिए, जो लाभार्थी अस्थाई साधन को अपनाना चाहते हैं, वह अपने स्थानीय आशा कार्यकर्ता के सहयोग से  सारथी रथ के माध्यम से सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अस्थाई साधन के रूप में काॅपर-टी, छाया, अंतरा, कंडोम समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था रथ पर सुनिश्चित की गई है।
– अस्थाई व स्थाई उपायों की दी जाएगी जानकारी :
सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को परिवार नियोजन के दोनों साधन (स्थाई और अस्थाई) की जानकारी दी जाएगी। साथ ही परिवार नियोजन के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाएँ एवं सेवाओं की भी जानकारी दी जाएगी। ताकि लोग् स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर  किसी प्रकार की  हिचकिचाहट नहीं  करें  और  उत्साह के साथ इस अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आ सकें।

परिवार नियोजन को लेकर सारथी रथ को सिविल सर्जन ने किया रवाना

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-रथ के जरिये लोगों को परिवार नियोजन के प्रति किया जाएगा जागरूक
-11 से 31 जुलाई तक जिले में चलेगा जनसंख्या स्थिरिकरण पखवाड़ा
भागलपुर, 6 जुलाई-
11 जुलाई से जिले में जनसंख्या स्थिरिकरण पखवाड़ा शुरू हो रहा है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तैयारी में जुटा है। इसी सिलसिले में बुधवार को सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने सदर अस्पताल से सारथी रथ को रवाना किया। इस दौरान एसीएमओ डॉ. अंजना, डीपीएम मो. फैजान आलम अशर्फी, डीसीएम जफरूल इस्लाम, केयर इंडिया के डीटीएल डॉ. निनकुश अग्रवाल और आलोक कुमार मौजूद थे। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया कि सदर अस्पताल से सबौर, नाथनगर, गोराडीह और जगदीशपुर के लिए सारथी रथ को रवाना किया गया। बुधवार को ही जिले के अन्य प्रखंडों से भी सारथी रथ को रवाना किया गया। रथ के जरिये 10 जुलाई तक क्षेत्र के लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जाएगा। परिवार नियोजन को लेकर अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल के लिए लोगों को समझाया जाएगा। साथ ही जिनलोगों के दो बच्चे हो गए हैं, उन्हें बंध्याकरण के लिए तैयार किया जाएगा।
अभी चल रहा दंपति संपर्क पखवाड़ाः मौके पर मौजूद डीसीएम जफरूल इस्लाम ने बताया कि जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा से पहले अभी दंपति संपर्क पखवाड़ा चल रहा है। यह  10 जुलाई तक चलेगा। इसके तहत आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में जाकर लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक कर रही हैं। साथ ही योग्य दंपति को ढूंढ़ रही हैं । लोगों को दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए आशा कार्यकर्ता जागरूक कर रही हैं। साथ ही एक से दूसरे बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए भी कहा जा रहा है। जिनलोगों के दो बच्चे हो गए हैं, उन्हें बंध्याकरण के तैयार किया जा रहा है। एक योग्य दंपति को सीएनएफ फॉरमेट के तहत ढूंढ़कर सूचीबद्ध करने के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सूची जमा करने पर आशा कार्यकर्ता को 300 रुपये मिलेंगे। साथ ही अगर योग्य दंपति का बंध्याकरण को लेकर आशा कार्यकर्ता प्री रजिस्ट्रेशन करवा लेती हैं तो उन्हें 100 रुपये अतिरिक्त दिया जाएगा।
दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूरीः मौके पर मौजूद एसीएमओ डॉ. अंजना ने कहा कि दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल जरूरी है। इससे जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ रहता है। साथ ही बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इससे बच्चा आगे जाकर बीमारी की चपेट में कम आता है। अगर आ भी गया तो वह उससे जल्द उबर जाता है। डॉ. अंजना ने बताया कि लोगों को परिवार नियोजन के लिए अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिन लोगों के मन में शंकाएं हैं, उसे दूर किया जा रहा है। उन्हें समझाया जा रहा है कि अस्थायी सामग्री के इस्तेमाल से किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है, इसलिए कंडोम, अंतरा और छाया का इस्तेमाल बेझिझक करें। इससे आप सही तरीके से अपना परिवार नियोजन कर सकेंगे। परिवार नियोजन के कई फायदे हैं। हां, अगर दो बच्चे हो जाए तो बंध्याकरण जरूर करा लें।

सरकारी अस्पताल में सहायता मिली तो टीबी को मात देकर हो गए स्वस्थ

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-जांच और इलाज से लेकर दवा भी मुफ्त में मिली, पोषण के लिए राशि भी दी गई
-रजौन के मड़री के उदय पासवान का सरकारी अस्पताल के प्रति नजरिया ही बदल गया
बांका, 6 जुलाई-
आमलोगों में यह धारणा है कि पैसा भले ही अधिक लगे, लेकिन निजी अस्पतालों में बेहतर इलाज होता है। यही सोचकर लोग निजी अस्पताल का दरवाजा खटखटाते हैं। पिछले कुछ सालों में सरकारी अस्पतालों में बढ़ी सुविधाओं और सरकार का बीमारियों के प्रति अभियान से अभी भी बहुत सारे लोग अनजान हैं। इसका कुछ लोगों को खामियाजा भी उठाना पड़ता है। रजौन प्रखंड के मड़री गांव के रहने वाले उदय पासवान भी शुरुआत में इसी भ्रम का शिकार हो गए और इसका खामियाजा उन्हें आर्थिक नुकसान के तौर पर उठाना पड़ा। हालांकि समय रहते वह चेत गए और सरकारी अस्पताल में इलाज करवाकर आज पूरी तरह से स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
दरअसल, उदय 2018 में टीबी की चपेट में आ गए थे। शुरुआत में वह इलाज कराने के लिए निजी अस्पताल गए। काफी दिनों तक उदय ने निजी अस्पताल में इलाज करवाया। वहां पर उन्हें काफी आर्थिक दंड भी लगा और वह ठीक नहीं हो पाए। जब पानी सिर से ऊपर जाने लगा तो वह हारकर जिला यक्ष्मा केंद्र पहुंचे। वहां पर उनकी मुलाकात जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय से हुई। राजदेव राय उदय की परेशानी समझ गए। इसके बाद उन्होंने वरीय यक्ष्मा पर्यवेक्षक शिवरंजन कुमार से उदय की मुलाकात करवाई। इसके बाद जिला यक्ष्मा केंद्र में जांच के बाद उदय का इलाज शुरू हुआ और फिर गांव के पास ही स्थित रजौन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उदय का इलाज चलने लगा। दरअसल, मड़री गांव से जिला आने और इलाज करवाने में काफी समय लगता और साथ में पैसा भी खर्च होता। इसलिए शिवरंजन कुमार ने रजौन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बोलकर उदय का इलाज शुरू करवाया। जहां से उसे जांच-इलाज से लेकर दवा तक मुफ्त में मिल रही थी। टीबी के इलाज का कोर्स पूरा हुआ और आज वह स्वस्थ है।
निजी अस्पताल जाकर मैंने गलती की थीः उदय कहते हैं कि निजी अस्पताल में जाकर मैंने बड़ी गलती कर दी थी। मुझे मालूम नहीं था कि सरकारी अस्पतालों में टीबी के इलाज को लेकर इतनी बेहतर व्यवस्था है। जानकारी मिलने पर जब मैं जिला यक्ष्मा केंद्र गया तो वहां मेरी मुलाकात राजदेव राय और शिवरंजन कुमार से हुई। इन दोनों लोगों ने मेरी बहुत मदद की। आज मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान मुझसे कोई पैसा नहीं लिया गया। साथ ही जांच, इलाज और दवा की सुविधा मुफ्त में मिली। साथ में जब तक इलाज चला, तब तक 500 रुपये प्रतिमाह सही पोषण लेने के लिए भी मिला।
कई लोग इस तरह की करते हैं भूलः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि यह कहानी सिर्फ उदय की ही नहीं है। उदय जैसे कई लोग हमलोगों के पास आते हैं जो पहले निजी अस्पतालों में जाकर इलाज करवा चुके होते हैं। सही तरीके से इलाज नहीं होने और आर्थिक नुकसान के बाद आखिर में हमलोगों के पास आते हैं। जब हमारे पास आते हैं तो वैसे टीबी मरीजों का ठीक से इलाज शुरू करवाते हैं और एक निश्चित समय में उसे स्वस्थ भी कर देते हैं। इसलिए लोगों से हमलोग यही अपील करते हैं कि एक बार सरकारी अस्पताल जरूर आएं और यहां कि सुविधाओं को देख लें। निजी अस्पतालों से भी बेहतर सुविधा आपको यहां मिलेगी।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है पर्याप्त दवाई, मरीजों को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

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– पीएचसी से लेकर जिला स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही है बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवा
– मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर
खगड़िया, 05 जुलाई-
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर और सजग है। इसे सुनिश्चित करने को स्वास्थ्य सुविधा के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवाई की भी पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।ताकि मरीजों को सुविधाजनक तरीके से समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा सके और सभी मरीजों आसानी के साथ अपना इलाज करवा सकें । जिसे सार्थक रूप देने के लिए जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों को समुचित बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग भी अग्रसर है और लगातार स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का आवश्यकतानुसार विस्तार भी किया जा रहा है। ताकि मरीजों को इलाज कराने में आर्थिक समस्या बाधक नहीं बन सके और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का सुविधाजनक तरीके से निःशुल्क लाभ मिल सके।
– मरीजों को बेहतर से बेहतर समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का किया जा रहा है प्रयास :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर संचालित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर से बेहतर समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर स्वास्थ्य प्रबंधन प्रयासरत है। मरीजों को अस्पताल में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात को ले  सभी स्वास्थ्य संस्थानों  का  स्वास्थ्य प्रबंधन हमेशा गंभीर और सजग रहता  है । मरीजों को इलाज की सुविधा के साथ-साथ मुफ्त दवाई की सुविधा भी मिले, इसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में पर्याप्त दवाई की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए लगातार समीक्षात्मक बैठक की जाती है और आवश्यकतानुसार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को दवाई भी उपलब्ध कराई जाती है।
– मौसमी बीमारियों के साथ-साथ अन्य बीमारियों की  भी उपलब्ध है दवा :
जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मौसमी बीमारियों (सर्दी-खांसी, बुखार आदि) की तो पर्याप्त दवाई उपलब्ध है ही। इसके अलावा कोविड, टीबी, मलेरिया समेत अन्य बीमारियों की  भी पर्याप्त दवाई उपलब्ध है। ताकि ऐसा नहीं हो कि मरीजों को अस्पताल में दवाई नहीं मिल सके और इलाज कराने में कोई असुविधा हो।
– जानें किस स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में कितने प्रकार की दवाई उपलब्ध रहने का है मानक :
– चिकित्सा महाविद्यालय के वाह्य रोगी कक्ष में 76, अंतर्वासी कक्ष में 113, ऑपरेशन थियेटर में 36, जिला अस्पताल के वाह्य रोगी कक्ष में 71, अंतर्वासी कक्ष में 96, अनुमंडलीय अस्पताल के वाह्य रोगी कक्ष में 58, अंतर्वासी कक्ष में 65, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रेफरल अस्पताल के वाह्य रोगी कक्ष में 55, अंतर्वासी कक्ष में 59, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के वाह्य रोगी कक्ष में 50, अंतर्वासी कक्ष में 34, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के वाह्य रोगी कक्ष में 50 एवं अंतर्वासी कक्ष में 34 प्रकार के दवाई उपलब्ध रहने का सरकारी मानक है।

समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन जरूरी

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– शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से शिशु में होती है गर्माहट
– धड़कन सुनकर शिशु को राहत का होता है एहसास, मिलता है आराम
लखीसराय, 05 जुलाई-
समय के पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन करना बहुत जरूरी है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का ना सिर्फ वजन कम होता बल्कि, ऐसे शिशु जन्म लेने के बाद भी कई तरह की समस्याओं से घिर जाते हैं। ऐसे शिशु के  स्वस्थ्य शरीर निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए कंगारू मदर केयर तरीके को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है। इस उपाय को अपनाने से ना सिर्फ शिशु स्वस्थ्य होता बल्कि, शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होता है।
– बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण :
 सिविल सर्जन  डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास के निर्माण करने में काफी सहयोग करता है। बच्चा जब अपने माँ के नजदीक रहता तो माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है।
– क्या है कंगारू मदर केयर, इसका उपयोग किस तरह होता है :
कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। स्तनपान बेहतर होता है। बच्चे का तापमान सही रहता और वह संक्रमण से दूर रहता है। बच्चे और माँ के बीच रिश्ता मजबूत होता है। इसमें माँ अपने सीने पर सीधे पोजिशन में शिशु को चिपकाकर रखती हैं। इस स्थिति में माँ की छाती पूरी तरह खुली होनी चाहिए। जिससे माँ की शरीर की गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सके। इससे शिशु का तापमान सही रहता है। कंगारू मदर केयर माँ के अलावा पिता व परिवार के अन्य सदस्य भी दे सकते हैं। सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर की सुविधा देने वाले स्वस्थ्य हों।
– कंगारू मदर केयर अपनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा भी किया जाता है जागरूक :
समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु और जन्म के पश्चात कमजोर नवजात  के परिजनों को एएनएम, आशा, केयर इंडिया के कर्मियों एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मियों द्वारा भी कंगारू मदर केयर तकनीक को अपनाने के लिए जागरूक किया जाता है। दरअसल, यह तकनीक बिना खर्च का सबसे आसान और बेहतर उपाय है। इसके अलावा ऐसे शिशु का गृह भ्रमण कर भी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा देखभाल एवं आवश्यक मॉनिटरिंग की जाती है। ताकि शिशु को किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर उनका समय पर उचित उपचार हो सके और बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
– इन बातों का रखें ख्याल :-
– बच्चे को साफ हाथों से ही छूएं।
– यदि माँ बुखार, सर्दी या खाँसी से पीड़ित हो तो शिशु को कंगारू मदर केयर नहीं दें।
– घर के कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति नवजात को कंगारू मदर केयर प्रदान कर सकते हैं।

परिवार नियोजन पखवाड़ा – आज से 10 जुलाई तक ई. रिक्शा से लोगों को किया जाएगा जागरूक

– विश्व जनसंख्या दिवस पर 11 से 31 जुलाई तक जिला भर में मनाया जाएगा परिवार नियोजन पखवाड़ा
– इस वर्ष ” परिवार नियोजन का अपनाओ उपाय, लिखो तरक्की का नया अध्याय ” थीम पर मनाया जाएगा पखवाड़ा
मुंगेर, 5 जुलाई-
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा या परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के प्रति  6  से 10 जुलाई तक ई. रिक्शा (सारथी रथ ) के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने और परिवार नियोजन कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध सेवाओं की  जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के साथ ही योग्य दम्पतियों को इच्छित सेवा प्रदान किया जाना है।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि पखवाड़ा के दौरान सामुदायिक स्तर पर आमजनों को परिवार नियोजन के लिए उत्प्रेरित करने करने में आशा कार्यकर्ता, आशा फैसिलिटेटर, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, जीविका दीदी , विकास मित्र सहित अन्य लोगों की भी सहायता ली जाएगी। इनके द्वारा आमजनों के बीच जनसंख्या स्थिरीकरण की  आवश्यकता, सही उम्र में शादी, पहले बच्चे में देरी, बच्चों के बीच सही अंतराल और छोटा परिवार के लाभ के बारे में आम लोगों के बीच चर्चा कर मां और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर करने तथा गर्भ निरोधक उपायों को अपनाने के लिए परामर्श दिया जाएगा। इसके साथ ही परिवार नियोजन सेवाओं के तहत प्रदान की  जाने वाली सेवाओं जैसे कॉपर टी, गर्भ निरोधक सुई( एमपीए), बंध्याकरण एवम नसबंदी की सेवा प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया केंद्रित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आमजनों  में जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही ई. रिक्शा  के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दिशा-निर्देश एवं रूट चार्ट के अनुसार जिला भर के सभी प्रखंडों में आज से 10 जुलाई तक  प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रत्येक प्रखण्ड में कार्यरत पीएचसी और सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने-अपने प्रखण्ड में ई. रिक्शा जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। जिलास्तर पर जिलाधिकारी, सिविल सर्जन और अन्य अधिकारियों के द्वारा हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रथ को रवाना किया जाएगा।

7 जुलाई से सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम की होगी शुरुआत 

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-मीडिया कार्यशाला द्वारा जिले मे फाइलेरिया उन्मूलन् अभियान को सफल् बनाने को लेकर हुई चर्चा
-14 दिनों के अभियान के दौरान जिले के  33.64 लाख लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य
बिहारशरीफ, 5 जुलाई-
सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च , पटना  के सहयोग से जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण विभाग द्वारा मंगलवार  को सदर अस्पताल स्थित सिविल सर्जन सभागार  में फाइलेरिया नियंत्रण के लिए मीडिया कार्यशाला आयोजित की गयी. सिविल् सर्जन् डॉ  अविनाश् कुमार सिंह की अध्यक्षता में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए चलाए जाने वाले सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम की सूक्ष्म कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गयी.
कार्यशाला मे उपस्थित मीडियाकर्मियों को संबोंधित करते हुए सिविल  सर्जन   ने  कहा कि फाइलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में  7 जुलाई से 14  दिनों  तक सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जाएगा। उन्होंने  कहा कि लोगों  को जागरूक कर अभियान  को सफल् बनाने मे मीडियाकर्मियों का योगदान अहम है. उन्होंने बताया कि 2 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को फाइलेरिया की दोनों दवा खिलाई जाएगी. 2 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर रूप से पीड़ित लोगों को यह दवा नहीं खिलाई जाएगी. अभियान को सफल बनाने हेतु आशा एवं आँगनबाड़ी घर-घर जाकर लक्षित समुदाय को फाइलेरिया की दवा खिलाएगी. साथ ही आशा एवं आंगनबाड़ी यह सुनिश्चित करेंगी  कि उनके सामने ही लोग दवा का सेवन करें।
जिला संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. राम कुमार प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जिसे फाइलेरिया की दवा सेवन से ही बचा जा सकता है. कभी-कभी फाइलेरिया के परजीवी शरीर में होने के बाद भी इसके लक्षण  सामने आने में वर्षों लग जाता है.इसलिए फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए लाभप्रद है. उन्होंने बताया कि आम लोग खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें. कभी-कभी खाली पेट दवा खाने से भी कुछ समस्याएं होती हैं . आम लोगों में फाइलेरिया की दवा सेवन के साइड इफ़ेक्ट के बारे में कुछ भ्रांतियाँ है जिसे दूर करने की सख्त जरूरत है. फाइलेरिया की दवा सेवन से जी मतलाना, हल्का सिर दर्द एवं हल्का बुखार हो सकता है जो शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी के मरने के ही कारण होता है. इसलिए दवा सेवन से किसी भी प्रकार का साइड इफ़ेक्ट मरीज के हित में ही है. दवा खाने से किसी भी प्रकार के साइड इफ़ेक्ट होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क किया जा सकता है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उन्होंने मीडिया से अपील भी की.
इस अभियान में डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की गोलियाँ लोगों की दी जाएगी.2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं अल्बेंडाजोल  की एक गोली दी जाएगी. अल्बेंडाजोल  का सेवन चबाकर किया जाना है.
केयर इंडिया के डीपीओ वीएल प्रमोद ने बताया इस पूरे अभियान के दौरान जिले की 33,64922 आबादी  को दवा खिलाई जाएगी। जिसके लिए 35,70000 अल्बेंडाजोल  की खुराक जिले में उपलब्ध  है। विदित हो कि  पिछले दिनों चलने वाले नाइट ब्लड सर्वे के दौरान 3965 सैंपल संग्रह किये गये थे।
क्या है फाइलेरिया: इसे हाथीपाँव  रोग के नाम से भी जाना जाता है. बुखार का आना, शरीर पर लाल धब्बे या दाग का होना एवं शरीर के अंगों में सूजन का आना फाइलेरिया के  शुरुरूआती लक्ष्ण होते हैं. यह क्यूलेक्स नामक  मच्छर के काटने से फैलता है. आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है. फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे प्लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को  इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है

बांका जिले के सभी 813 टीबी मरीजों पर रखी जा रही निगरानी

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-जांच-इलाज से लेकर मुफ्त में मिल रही दवा, साथ में राशि भी
-बीच में दवा नहीं छोड़े, पर्यवेक्षक मरीजों का लेते रहते हैं हालचाल
बांका, 5 जुलाई-
जिले को 2025 तक टीबी से मुक्त बनाना है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भरपूर प्रयास कर रहा है। टीबी मरीजों को चिह्नित करने और उसका इलाज करने का काम लगातार चल रहा है। 30 जून तक के आंकड़े के मुताबिक जिले में 813 टीबी मरीज हैं। 31 मई तक जिले में 707 टीबी मरीज थे। यानी सिर्फ जून महीने में ही 106 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। यह इस बात का प्रमाण है कि टीबी उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना गंभीर है और अभियान कितना तेज गति से चल रहा है। साथ ही इससे यह भी पता चलता है कि जिले में टीबी मरीज तेजी से ठीक भी हो रहे हैं। एक महीने में एक सौ से ज्यादा टीबी मरीज मिल रहे हैं, इसके बावजूद कुल मरीजों की संख्या 813 है। ये आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि जिले में टीबी के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं।
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि जिले में टीबी को लेकर अभियान काफी तेजी से चल रहा है। प्रखंड स्तर पर तो मरीजों का ध्यान रखा ही जा रहा है। साथ ही जिला स्तर से भी मरीजों की निगरानी हो रही है। यहां से पर्यवेक्षक लगातार मरीजों का हालचाल पूछते रहते हैं। कोई भी मरीज बीच में दवा नहीं छोड़ दे, इसे लेकर गाइड भी करते हैं। इसी का परिणाम है कि जिले में तेजी से टीबी के मरीज ठीक हो रहे हैं। मरीजों को जांच-इलाज से लेकर दवा तक मुफ्त में मिल रही है। साथ में पौष्टिक आहार के लिए 500 रुपये प्रतिमाह की राशि भी मिल रही है।
लक्षण दिखे तो जाएं सरकारी अस्पतालः डॉ. सिन्हा कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में जांच करानी चाहिए। ये टीबी के लक्षण हैं। सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए घनी आबादी वाले इलाके में लगातार टीबी मरीजों को चिह्नित किया जा रहा है। लोगों को बचाव की जानकारी दी जा रही है। साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
बीच में नहीं छोड़ें दवाः डॉ. सिन्हा कहते हैं कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते हैं और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन नहीं छोड़ना चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।

सबसे अधिक आयुष्मान कार्डधारियों की आंखों का ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर सम्मानित

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-डॉ. विकास पाण्डेय को पटना में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने किया सम्मानित
-दो साल के अंदर साढ़े सात हजार से अधिक लाभुकों की आंखों का किया ऑपरेशन
भागलपुर, 5 जुलाई-
आयुष्मान कार्ड सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े  लोगों को लिए वरदान साबित हो रहा है।  ऐसे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके, इसे लेकर डॉक्टर भी भरपूर प्रयास कर रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि ऐसे लोगों को सरकार चिह्नित भी कर रही  और पुरस्कार भी दे रही है। इसका सबसे बेहतर प्रमाण है हरिशखा दृष्टि के डॉ. विकास पाण्डेय को सम्मान मिलना। आपको बता दें कि हरिशखा दृष्टि शहर के उन छह निजी अस्पतालों में है जो आयुष्मान कार्ड के तहत सूचीबद्ध है। कोई आयुष्मान कार्डधारक पांच लाख रुपये तक का इलाज इस निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड दिखाकर करवा सकते हैं। भागलपुर के अस्पतालों में आसपास के जिले के आयुष्मान कार्डधारी भी इस योजना का लाभ ले रहे हैं। बांका, जमुई, मुंगेर समेत कई दूसरे जिलों के लोग यहां आकर इस योजना का लाभ ले रहे हैं।
डॉ. विकास पाण्डेय ने पिछले दो सालों में ही साढ़े सात हजार से अधिक आयुष्मान कार्डधारियों की आंखों का सफल ऑपरेशन किया है। ये इस बात का प्रमाण है कि आयुष्मान कार्डधारियों को न सिर्फ सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधा मिल रही है, बल्कि निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में लाभुक इसका लाभ उठा रहे हैं। डॉ. विकास पांडेय कहते हैं कि सम्मान मिलने से मुझे खुशी हो रही है। जब आपको कोई सम्मान मिलता है तो यह इस बात का प्रमाण होता है कि आप सही दिशा में जा रहे हो। सही काम कर रहे हो और आगे भी बेहतर करने के लिए प्रेरणा मिलती है। आयुष्मान योजना के जिला समन्वयक सौरभ मुखर्जी कहते हैं कि भागलपुर जिले में भी इस योजना का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है। जिले में कुल 14 लाख लोगों को इस योजना का लाभ मिलना है। इनमें से एक लाख 80 हजार लोगों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। इनमें से हजारों लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। डॉ. पाण्डेय को स्वास्थ्य मंत्री से पुरस्कार मिलना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी लोग इस योजना का लाभ ले रहे हैं। इसलिए जिले के बचे हुए लोगों को भी इस योजना का लाभ मिले, इसे लेकर आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
जिले के छह निजी अस्पताल सूचीबद्धः जिले के सभी सरकारी और छह निजी अस्पतालों में इस योजना का लाभ कार्डधारक ले सकते हैं। सदर अस्पताल और जिले के सभी अनुमंडल, रेफरल, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान कार्डधारक इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (मायागंज अस्पताल) में भी इस योजना का लाभ कार्डधारकों को मिल रहा है। साथ ही ग्लोकल अस्पताल, हरिशखा दृष्टि, कौशल्या आई रिसर्च इंस्टीट्यूट, किडनी स्टोन एंड यूरोलॉजी क्लीनिक, प्राइड अस्पताल और हिंदाल अस्पताल जैसे निजी क्लीनिकों में भी कार्डधारक आयुष्मान योजना का लाभ ले सकते हैं।
पांच लाख रुपये तक का मिलता है मुफ्त इलाजः सौरभ मुखर्जी ने बताया कि जिनलोगों के पास पीएम लेटर आया है, उनका बहुत ही आसानी से कार्ड बन जा रहा है। साथ ही जिनलोगों को पीएम लेटर नहीं भी आया है, और वे योजना के योग्य हैं तो उनका भी कार्ड बनने में कोई परेशानी नहीं होगी। इसके लिए आपके पास 2014 के पहले का राशन कार्ड होना जरूरी है। साथ में अपना आधार कार्ड लेकर अपने नजदीकी  सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) में जाएं। वहां पर अपना राशन कार्ड दिखाएं। अगर आप इस योजना के योग्य होंगे तो तत्काल आपका आयुष्मान कार्ड बन जाएगा, जिसके बाद आप गंभीर तौर पर बीमार पड़ने पर पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में करवा सकते हैं।

सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम-7 से 21 जुलाई तक  2 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को खिलाई जाएगी डीईसी और अल्बेंडाजोल की दवा : जिलाधिकारी 

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– स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका
-सहायिका के द्वारा लोगों को खिलाई जाएगी फाइलेरिया की दवा
– लखीसराय जिला में 14 दिनों तक चलेगा एमडीए कार्यक्रम
लखीसराय, 4 जुलाई-
सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम (एमडीए) के तहत 7 से 21 जुलाई तक जिला भर के 2 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को खिलाई जाएगी डीईसी और  अल्बेंडाजोल की दवा । उक्त बात  सोमवार को समाहरणालय सभागर में आगामी 7 जुलाई से शुरू हो रहे सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम को लेकर सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आयोजित मीडिया कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने कही। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र कुमार चौधरी, एसीएमओ सह डीआईओ डॉ. अशोक कुमार भारती, डीपीएम खालिद हुसैन, डीपीसी सुनील कुमार, वीबीडीसीओ अश्विनी कुमार के साथ-साथ एमडीए कार्यक्रम को टेक्निकल सपोर्ट दे रहे डब्ल्यूएचओ, केयर इंडिया के जोनल, रिजिनल और डिस्ट्रिक्ट लेवल के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह  ने कहा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। इसी के तहत लखीसराय जिला में  आगामी 7 से 21 जुलाई तक लगातार 14 दिनों तक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के तहत 2 वर्ष से अधिक उम्र के किशोर, युवा सहित सभी वृद्ध जनों को डीईसी और अ ल्बेंडाजोल की  दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी लोगों को फाइलेरिया की  दवा खिलाने की  जिम्मेदारी राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को दी गई है। जिला के सभी प्रखंडों में कार्यरत पीएचसी और सीएचसी के तहत काम करने वाली आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर के द्वारा घर-घर जाकर अपने सामने लोगों को फाइलेरिया की  दवा खिलाई जाएगी। वहीं लखीसराय के शहरी क्षेत्र जहां आशा कार्यकर्ता कार्यरत नहीं है वहां आईसीडीएस के अंतर्गत काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से लोगों को फाइलेरिया की  दवा खिलाई जाएगी। इसके लिए 77 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का चयन किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिला के विभिन्न प्रखंडों में काम करने वाली आशा कार्यकर्ता और लखीसराय शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिदिन दवा खिलाने का अपडेट रिपोर्ट अपने-अपने क्षेत्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को देंगी और एमओआईसी उसी दिन सिविल सर्जन को डाटा से अपडेट  करेंगे और सिविल सर्जन उसी दिन अपडेट डाटा से मुझे अवगत कराएंगे।  पूरे कार्यक्रम की  प्रतिदिन सही तरीके से मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने बताया कि 7 जुलाई से लगातार 6 दिनों तक सभी आयु वर्ग के लोगों को माइक्रो प्लान के अनुसार फाइलेरिया की  दवा खिलाई जाएगी और सातवें दिन प्लान के अनुसार छूटे  हुए लोगों  को चिह्नित  कर उन्हें दवा खिलाई जाएगी । इसके बाद पुनः 6 दिनों तक नए लोगों को दवा खिलायी जाएगी और आखरी दिन माँप अप राउंड चलाकर छूटे हुए सभी लोगों को चिह्नित  करते हुए फाइलेरिया की  दवा खिलाई जाएगी।
मीडिया कार्यशाला में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत जिला में 27 जून से 10 जुलाई तक चल रहे दम्पति सम्पर्क पखवाड़ा  और 11 से 31 जुलाई तक चलने वाले परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा  के साथ-साथ 15 से 30 जुलाई तक चलने वाले इंटेंसिफाइड डायरिया पखवाड़ा के बारे में मीडियाकर्मियों   को आवश्यक जानकारी दी गई ताकि उनके माध्यम से इन कार्यक्रम के बारे में  लोगों को जागरूक किया जा सके।