गर्भवती महिलाओं और बच्चों का जरूर कराएं नियमित टीकाकरण

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-रोग प्रतिरोधक क्षमता होगी मजबूत, बीमारियों से होगा बचाव
=नियमित टीकाकरण नहीं कराने से बीमार होने का रहेगा खतरा
भागलपुर, 11 जुलाई।
बच्चों की अच्छी सेहत के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण बहुत ही जरूरी है। जिन गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को नियमित टीकाकरण की सभी खुराक लग जाती है तो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती  और वह जल्द बीमारी की चपेट में नहीं आता है। अगर बीमारी की चपेट में आ भी जाता है तो वह उससे जल्द उबर जाता । लेकिन जिन गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हो पाता  तो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी मजबूत नहीं होती है। वह किसी भी बीमारी की चपेट में जल्द आ जाता  और उससे उबरने में भी उसे परेशानी होती है। इसलिए बच्चों का नियमित टीकाकरण जरूर करवाएं। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी कहते हैं कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को भी बढ़ावा मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों से कहना चाहता हूं कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों या फिर अस्पतालों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। नियमित टीकाकरण पर जोर देते हुए डॉ. चौधरी कहते हैं कि नियमित टीकाकरण एक स्वस्थ राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कायर्क्रम है जो गर्भवती महिलाओं से आरंभ होकर शिशु को पांच साल तक नियमित रूप से दिये जाते हैं। ये टीके शिशुओं को कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं। शिशुओं को दिया जाने वाला टीका शिशुओं के शरीर में जानलेवा संबंधित बीमारियों से बचने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित और मजबूती प्रदान करते हैं। इस प्रकार कई तरह की  जानलेवा बीमारियों से शिशुओं को बचने के खास टीके विकसित किये गये हैं, जिनका टीकाकरण करवाना आवश्यक है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है।
ये हैं जरूरी टीके:
जन्म होते ही – ओरल पोलियो, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी
डेढ़ महीने बाद – ओरल पोलियो-1, पेंटावेलेंट-1, एफआईपीवी-1, पीसीवी-1, रोटा-1
ढाई महीने बाद – ओरल पोलियो-2, पेंटावेलेंट-2, रोटा-2
साढ़े तीन महीने बाद – ओरल पोलियो-3, पेंटावेलेंट-3, एफआईपीवी-2, रोटा-3, पीसीवी-2
नौ से 12 माह में – मीजल्स-रुबेला 1, जेई 1, पीसीवी-बूस्टर, विटामिन ए
16 से 24 माह में:
मीजल्स-रुबेला 2, जेई 2, बूस्टर डीपीटी, पोलियो बूस्टर, जेई 2
ये भी हैं जरूरी:
5 से 6 साल में – डीपीटी बूस्टर 2
10 साल में – टेटनेस
15 साल में – टेटनेस
गर्भवती महिला को – टेटनेस 1 या टेटनेस बूस्टर।

नियमित टीकाकरण से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है मजबूत

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-टीका नहीं लेने वाले बच्चे जल्द आ जाते हैं बीमारियों की चपेट में
-टीका लेने वाले बच्चे कम ही आते हैं गंभीर बीमारियों की चपटे में
बांका, 11 जुलाई।
अभी कोरोना काल चल रहा है। इस समय टीकाकरण का महत्व लोग बेहतर तरीके से समझ रहे हैं। जो लोग कोरोना का टीका ले चुके हैं, वे इससे बचे हुए हैं। लेकिन जिनलोगों ने कोरोना का टीका नहीं लिया है, उन्हें कोरोना की चपेट में आने का खतरा अधिक है। टीका लेने वाले अगर कोरोना की चपेट में आ भी जाते  तो वह इससे आसानी से उबर जा रहे हैं। इसी तरह नियमित टीकाकरण जरूरी है। जिन गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को नियमित टीकाकरण की सभी खुराक लग जाती है तो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है। वह जल्दी बीमारी की चपेट में नहीं आता है। अगर बीमारी की चपेट में आ भी जाता है तो वह उससे जल्द उबर जाता है। लेकिन जिन गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण नहीं हो पाता है तो  बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी मजबूत नहीं होती है। वह किसी भी बीमारी की चपेट में जल्द आ जाताऔर उससे उबरने में भी उसे परेशानी होती है। इसलिए बच्चों का नियमित टीकाकरण जरूर करवाएं। एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को भी बढ़ावा मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों से कहना चाहता हूं कि जो नियमित टीकाकरण नहीं करा पाएं हैं, वह अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों या फिर अस्पतालों पर जाकर निश्चित रूप से टीकाकरण कराएं। नियमित टीकाकरण पर जोर देते हुए डॉ. चौधरी कहते हैं कि नियमित टीकाकरण एक स्वस्थ राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कायर्क्रम है जो गर्भवती महिलाओं से आरंभ होकर शिशु को पांच साल तक नियमित रूप से दिये जाते हैं। ये टीके शिशुओं को कई प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाते हैं। शिशुओं को दिया जाने वाला टीका शिशुओं के शरीर में जानलेवा संबंधित बीमारियों से बचने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित और मजबूती प्रदान करते हैं। इस प्रकार कई तरह की  जानलेवा बीमारियों से शिशुओं को बचने के खास टीके विकसित किये गये हैं, जिनका टीकाकरण करवाना आवश्यक है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर होता है नियमित टीकाकरणः नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से दो वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है।
ये हैं जरूरी टीके:
जन्म होते ही – ओरल पोलियो, हेपेटाइटिस बी, बीसीजी
डेढ़ महीने बाद – ओरल पोलियो-1, पेंटावेलेंट-1, एफआईपीवी-1, पीसीवी-1, रोटा-1
ढाई महीने बाद – ओरल पोलियो-2, पेंटावेलेंट-2, रोटा-2
साढ़े तीन महीने बाद – ओरल पोलियो-3, पेंटावेलेंट-3, एफआईपीवी-2, रोटा-3, पीसीवी-2
नौ से 12 माह में – मीजल्स रुबेला 1, जेई 1, पीसीवी-बूस्टर, विटामिन ए
16 से 24 माह में:
मीजल्स रुबेला 2, जेई 2, बूस्टर डीपीटी, पोलियो बूस्टर, जेई 2
ये भी हैं जरूरी:
5 से 6 साल में – डीपीटी बूस्टर 2
10 साल में – टिटनेस
15 साल में – टिटनेस
गर्भवती महिला को – टेटनेस 1 या टेटनेस बूस्टर

ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के ब्राण्ड ऊषा केबल ने एग्रीकल्चर वॉटरप्रूफ हीट प्रोजेक्ट एक्स.एल.पी.ई सबमरसेबल केबल को भारतीय बाजार में उतारा

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नईदिल्ली–

भारत की आईएसआई और बीआईएस प्रमाणित कम्पनी ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के ब्राण्ड ऊषा केबल ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कम्पनी ने एग्रीकल्चर वॉटरप्रूफ हीट प्रोजेक्ट एक्स.एल.पी.ई सबमरसेबल केबल को भारतीय बाजार में उतारा है।

ऊषा केबल इंडस्ट्रीज कम्पनी के निदेषक अमन गुप्ता ने कहा कि हमारी कम्पनी ने किसानो के लिए एक्स.एल.पी.ई सबमरसेबल केबल को खास तरह से डिजाइन किया गया है इस केबल के माध्यम से अधिक लोड होने पर मोटर जलने की समास्या को खत्म किया जा सकता है। यह केबल मोटर पर अधिक लोड होने पर केबल फ्यूज की तरह उड़ जायेगा और मोटर  जलने से बच जायेगी।

उन्होंने कहा कि कुछलोग मिलते जुलते नामों से घटिया प्रोडक्ट बेच रहे हैं इससे ग्रांहकों को सावधान रहने की जरूरत है और अच्छी क्वालिटी के केबल जॉंच परख कर ही खरीदें।

कोरोना समझकर गया था जांच कराने, निकला टीबी

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-नौ महीने तक दवा का सेवन के बाद हो गए स्वस्थ
-सदर प्रखंड के समुखिया के भूपेंद्र ने दी टीबी को मात
बांका-
स्वास्थ्य विभाग की सुविधाओं का  लोग भरपूर लाभ उठा रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण हैं बांका सदर प्रखंड के समुखिया के रहने वाले भूपेंद्र कुमार मांझी। भूपेंद्र कुमार मांझी को एक साल पहले सूखी खांसी हो रही थी। कई दिनों तक जब ठीक नहीं हुए तो बांका सदर अस्पताल चले गए जांच कराने के लिए। उस समय कोरोना की दूसरी लहर चल रही थी, इसलिए अंदेशा था कि कोरोना की चपेट में तो नहीं आ गए। सूखी खांसी होना भी कोरोना के प्रमुख लक्षणों में से एक था, लेकिन जांच में कुछ नहीं निकला। सदर अस्पताल में घर जाकर आराम करने की सलाह दी गई। कुछ दिन आराम किए, लेकिन इसके बाद भी ठीक नहीं हुए तो दोबारा सदर अस्पताल गए। वहां पर जिला यक्ष्मा केंद्र में उनकी मुलाकात जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय और डीपीएस गणेश झा से हुई। इन लोगों ने भूपेंद्र को कुछ घरेलू नुस्खे बताए, जिसके बाद खांसी के बाद बलगम निकलना शुरू हुआ। बलगम की जांच की गई तो टीबी होने की पुष्टि हुई। टीबी होने की पुष्टि के बाद तो भूपेंद्र डर गए, लेकिन गणेश झा और राजदेव राय ने उन्हें समझाया कि टीबी से डरिये मत। इसका इलाज बहुत ही आसान है। इसके बाद भूपेंद्र कुमार मांझी का इलाज शुरू हुआ। नौ महीने तक दवा चली और भूपेंद्र स्वस्थ हो गए। अब भूपेंद्र पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं। हालांकि इसके बावजूद जिला यक्ष्मा केंद्र ने  उन्हें कुछ दिनों तक जांच कराने की सलाह दी है।
इलाज से लेकर दवा तक मुफ्त में मिलीः भूपेंद्र कुमार मांझी कहते हैं कि मैं तो कोरोना जांच कराने के लिए गया था, लेकिन टीबी निकल गया। टीबी के बारे में जो कुछ सुना था, मुझे डर लगने लगा। लेकिन राजदेव राय जी और गणेश झा जी ने मुझे समझाया कि टीबी को लेकर डरने की बात नहीं है। इसका इलाज बहुत ही आसान है। साथ ही सभी सरकारी अस्पतालों में इसके इलाज की मुफ्त सुविधा है। इसके बाद मेरा इलाज शुरू हुआ। नौ महीने दवा चली। अब जाकर मैं स्वस्थ हो गया हूं। इस दौरान जांच से लेकर दवा तक का कोई पैसा मुझसे नहीं लिया गया। साथ ही जब तक इलाज चला, मुझे 500 रुपये प्रतिमाह पोषण के लिए भी मिला। अब तो मैं दूसरे लोगों को भी समझाता हूं कि टीबी से डरने का नहीं है, बल्कि लड़ने का है।
लोगों में बढ़ रही जागरूकताः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि भूपेंद्र जैसे कई लोग आए हैं, जिन्हें शंका किसी और बीमारी की थी और निकला कोई और बीमारी। खुशी की बात यह है कि सभी लोग ठीक होकर जा रहे हैं। जिला यक्ष्मा केंद्र में टीबी का इलाज तो होता ही है, साथ में मरीजों की बेहतर काउंसिलिंग भी की जाती है। इसके  सुखद परिणाम भी मिल रहे हैं। लोगों में टीबी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। इससे बांका जिला को टीबी से मुक्त कराने में काफी मदद मिलेगी।

टीबी बीमारी होने की जानकारी मिलने पर पहले घबराई, फिर इलाज कराने पर हुई स्वस्थ 

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– टीबी बीमारी को मात दे चुकी संसारपुर की संजू देवी ने कहा – समय पर इलाज शुरू कराने से आसानी के साथ मिला स्थाई निजात
– लक्षण दिखते ही कराएं जाँच, अस्पतालों में मुफ्त है जाँच व समुचित इलाज की सुविधा
खगड़िया-
टीबी बीमारी को मात दे चुकी खगड़िया के संसारपुर निवासी करीब 25 वर्षीया संजू देवी ने कहा कि मुझे अचानक खांसी हुई। जिसका गाँव के ग्रामीण चिकित्सकों से इलाज कराना शुरू किया। किन्तु, परेशानी कम होने के बदले और बढ़ती गई। साथ ही खांसी के दौरान बलगम में खून भी आने लगा। जिसे देख मैं खुद काफी घबरा गई। जिसके कारण अपने परिवार वालों को बताने की भी मुझे हिम्मत नहीं हो रही थी। क्योंकि, मेरी शादी हाल में ही हुई थी और एक ही बच्चा  हुआ था । जिसके कारण बीमारी के साथ रिश्ते की भी चिंता होने लगी। इस बीच दिनों दिन मेरी परेशानी बढ़ती ही रही है। जिसके बाद मैं अपने दिल पर पत्थर रखकर अपने पति को बताई। जिसके बाद उन्होंने पड़ोस के ही स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ता आशा कुमारी को उक्त बीमारी की जानकारी दी। जिसके बाद आशा की  पहल से मेरा इलाज शुरू हुआ।
– इलाज के दौरान आशा कार्यकर्ता का मिला भरपूर सहयोग, सदर अस्पताल में हुआ इलाज :
वहीं, संजू देवी ने बताया कि आशा को बताने के बाद उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समुचित इलाज की व्यवस्था उपलब्ध होने की बात बताई। जिसपर मैं इलाज कराने को राजी हुई। जिसके बाद आशा  मुझे इलाज के लिए सदर अस्पताल खगड़िया ले गई। जहाँ मेरी  जाँच की  गयी ।  जाँच रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि हुई। जिसकी जानकारी मिलते ही मैं एकबार फिर घबरा गई। किन्तु, आशा व अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने  सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि आप घबराएं नहीं, बल्कि नियमित इलाज कराएं। आप पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएंगी । जिसके बाद अस्पताल कर्मियों ने हमसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति ली  एवं पूरा नाम पता पूछा गया । साथ ही मुझे दवाई भी दी ।
– दो माह में लगने लगा कि मैं हो गई स्वस्थ पर दवाई की ली पूरी डोज :-
वहीं, संजू देवी ने बताया, सदर अस्पताल में दवाई मिलने के साथ वह  नियमित रूप से चिकित्सा परामर्श के अनुसार दवाई का सेवन करने लगी। जिसके दौरान उन्हें  दो माह में ही लगने लगा कि वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी हैं ।  किन्तु,उनके  मन को संतुष्टि नहीं हो रही थी। इसके बाद पुनः वह  आशा के साथ सदर अस्पताल गई। जहाँ फिर जाँच करवाई तो अस्पताल कर्मियों ने बताया कि आप अब ठीक हैं । किन्तु, दवाई की डोज पूरी कर लें। इसके बाद उन्होंने छः माह तक दवाई की पूरी डोज ली और अब वह  पूरी तरह स्वस्थ हैं ।
– इलाज के दौरान आर्थिक सहायता भी मिली :
वहीं, संजू देवी ने बताया कि इलाज के दौरान मुझे छः माह तक पाँच सौ रूपये हर  माह के हिसाब से सहायता राशि भी मिली। यह सहायता राशि मुझे बैंक खाते के माध्यम से दी गई। साथ ही अस्पताल से सभी दवाई भी मुफ्त मिली और आशा से लेकर सभी स्वास्थ्य कर्मियों का भी काफी सहयोग मिला।
– टीबी होने पर घबराएं नहीं, अस्पतालों में उपलब्ध है समुचित जाँच और इलाज की मुफ्त सुविधा :
वहीं, संजू देवी ने कहा, मैं अन्य लोगों से भी अपील करती हूँ कि टीबी बीमारी होने पर घबराना नहीं चाहिए। बल्कि, लक्षण दिखते ही स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान में जाँच कराना चाहिए। दरअसल, यह एक सामान्य बीमारी है और समय पर जाँच कराने से आसानी के साथ बीमारी से स्थाई निजात मिल सकती है। इसके लिए अस्पतालों में मुफ्त समुचित जाँच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। इसलिए, किसी भी  को  इलाज के लिए खर्च की भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।  सरकार द्वारा सहायता राशि भी दी जाती है।

पूर्वी दिल्ली की सबसे बड़ा हॉस्पिटल के रूप में कैलाश दीपक हॉस्पिटल का उद्घाटन

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-ईस्ट दिल्ली का वरदान साबित होगा कैलाश दीपक हॉस्पिटल

नईदिल्ली-

पूर्वी दिल्ली में कैलाश दीपक हॉस्पिटल का उद्घाटन किया गया। कैलाश दीपक हॉस्पिटल के उद्घाटन के मौके सांसद डॉ महेश शर्मा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्छ राम निवास गोयल, सांसद मनोज तिवारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कैलाश दीपक हॉस्पिटल की विशेषता बताते हुए सांसद डॉ महेश शर्मा ने कहा कि पूर्वी दिल्ली के लोगों को अति सुज्जजित आधुनिक उपक्रमों से लैस हॉस्पिटल का आज उद्घाटन हो रहा है। जो पूर्वी दिल्ली के लोगों की सेवा में सदा आगे रहेगा। उन्होंने कहा कि इस हॉस्पिटल में कई तरह की विशेषताएं हैं उसमें एक यह भी है कि यहां अंटेडेंट को ठहरने के लिए कई तरह आवश्यक कदम उठाए गए हैं। डॉ महेश शर्मा ने कहा कि कैंसर के मरिजों को देखते हुए उनके लिए विशेष ओकोलोजी डिपार्टमेंट में अतिआधुनिक उपक्रम के साथ डॉक्टर को जोड़ा गया है। डॉ महेश शर्मा ने कहा कि पूर्वी दिल्ली का यह सबसे बड़ा हॉस्पटिल है जहां पर कई तरह की सुविधा दी गई है। जिसमें कोरोना के मामले को देखते हुए भी विशेष उपकरण लगाए गए हैं। जिसमें एलजी का भी विशेष योगदान है।

इस मौके पर डॉ महेश शर्मा ने कहा कि आज जब कोई एक्सीडेंट होता है तो लोग मरीज को हॉस्पिटल में लाने में घबराते हैं। अब लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है हॉस्पिटल ऐसे मरीजों को लाने वाले से कोई उनकी जानकारी नहीं लेगा। खासबात यह है कि ऐसे मरीजों को निःशुल्क सेवा की जा जाएगी।

डॉ महेश शर्मा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी कई तरह की सुविधा को जोड़ा गया है। उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए एक विंग भी कार्य करेगा।

डॉ महेश शर्मा ने कहा कि कैलाश-दीपक हॉस्पिटल में एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था है जिससे की मरीजों को कहीं से भी लाया जा सके। यह चौबिसों घंटें सदा तैयार है।

कैलाश दीपक हॉस्पिटल 150 बेडों के साथ शुरुआत कर रहा है जो आगे 500 बेड़ों तक ले जाने की योजना है। जहां अनुभवी पारा मेडिकल स्टाफ अपने सेवा दे रहे हैं।

इस मौके पर एसएम गर्ग ने कहा कि अब यह हॉस्पिटल डबल इंजन का हॉस्पिटल हो गया है जिसे कैलाश हॉस्पिटल के एक्सीपिरियंस का फायदा मिलेगा जिससे अब जनता की सेवा विशेष रूप से की जा सकेगी।

कैलाश दीपक हॉस्पिटल के उद्घाटन के अवसर पर सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि पूर्वी दिल्ली में ऐसे सुज्जजित उपकरणों से आधुनिक हॉस्पिटल की कमी थी जिसे यह हॉस्पिटल पूरा करेगा। डॉ महेश शर्मा के एक्सपीरियंस का फायदा पूर्वी दिल्ली के मरीजों को मिलेगा।

दिल्ली विधानसभा अद्य़क्छ राम निवास गोयल ने कहा कि पूर्वी दिल्ली में कैलाश दीपक हॉस्पिटल वैश्विक विशेषता के साथ आया है। यह ईस्ट दिल्ली के लिए वरदान साबित होगा।

गौरतलब है कि दीपक हॉस्पिटल पहले से पूर्वी दिल्ली में संचालित है जिसे अब कैलाश हॉस्पिटल का साथ मिल गया है यह इस तरह से अब यह पूर्वी दिल्ली का सबसे बड़ा हॉस्पिटल के रूप में स्थापित हो गया है।

जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा की सफलता को लेकर निकाला गया सारथी रथ, हर व्यक्ति तक पहुँचाई जाएगी परिवार नियोजन की जानकारी 

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– सिविल सर्जन ने रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना, गाँव-गाँव जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक
– 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में चलेगा जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा
बेगूसराय, 08 जुलाई-
विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जिले में 11 जुलाई से शुरू होने वाले परिवार नियोजन पखवाड़े की सफलता को लेकर सामुदायिक स्तर पर लोगों तक  जानकारी पहुँचाने के लिए सारथी रथ निकाला गया। जिसे सिविल सर्जन डाॅ प्रमोद कुमार सिंह ने हरी  झंडी दिखाकर रवाना किया। रथ के माध्यम से जिले भर में प्रचार-प्रसार कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जाएगा और परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस मौके पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ गोपाल मिश्रा, डीपीएम (हेल्थ) शैलेश चन्द्रा, जिला लेखापाल प्रबंधक चतुर्भुज प्रसाद, केयर इंडिया के डीटीएल गुंजन गौरव, प्रभारी डीसीएम कुणाल कुमार, स्वास्थ्य प्रशिक्षक विश्वजीत वर्मा, संतोष संत, कृष्ण कुमार सिंह आदि मौजूद थे।
– सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर पहुँचाई जाएगी परिवार नियोजन की जानकारी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ गोपाल मिश्रा ने बताया, सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति तक परिवार नियोजन की जानकारी पहुँचाई जाएगी। रथ द्वारा गाँव से लेकर टोले-मोहल्ले तक जाकर माइकिंग के माध्यम से परिवार नियोजन को अपनाने से होने वाले फायदे समेत सरकारी स्तर उपलब्ध सुविधाओं की लोगों को जानकारी दी जाएगी। जिससे  प्रचार- प्रसार तेज हो सके  और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक परिवार नियोजन की जानकारी पहुँच सके ।
– 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में आयोजित होगा परिवार नियोजन शिविर :
डीपीएम (हेल्थ) शैलेश चन्द्रा ने बताया, उक्त पखवाड़ा के दौरान 11 से 31 जुलाई तक जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन शिविर का आयोजन किया जाएगा। जिसमें योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थियों को महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। निर्धारित तिथि के अंदर इच्छुक और योग्य लाभार्थी अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
– सारथी रथ पर अस्थाई साधन की सुविधाएं रहेगी  उपलब्ध :
केयर इंडिया के डीटीएल गुंजन गौरव ने बताया, जिले के सभी प्रखंडों में संचालित सारथी रथ पर परिवार नियोजन के अस्थाई साधन की समुचित सुविधाएं उपलब्ध रहेगी । इसलिए, जो लाभार्थी अस्थाई साधन को अपनाना चाहते हैं, वह अपने स्थानीय आशा कार्यकर्ता के सहयोग प्राप्त कर सारथी रथ के माध्यम से सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। अस्थाई साधन के रूप में काॅपर-टी, छाया, अंतरा, कंडोम समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था रथ पर सुनिश्चित की गई है।
– अस्थाई व स्थाई उपायों की दी जाएगी जानकारी :
प्रभारी डीसीएम कुणाल कुमार ने बताया, सारथी रथ के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर लोगों को परिवार नियोजन के दोनों साधन (स्थाई और अस्थाई) की जानकारी दी जाएगी। साथ ही परिवार नियोजन के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाएँ एवं सेवाओं की भी जानकारी दी जाएगी। ताकि लोगों को  स्वास्थ्य सुरक्षा के मद्देनजर  किसी प्रकार की  हिचकिचाहट नहीं रहे  और लोग उत्साह के साथ इस अभियान को सफल बनाने के लिए आगे आ सकें।

डायरिया में शरीर में पानी की न होने दें कमी

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-बरसात में पानी साफ कर करें इस्तेमाल
-बच्चों के शरीर की सफाई का रखें पूरा ख्याल
-आंत को प्रभावित करता है क्रोनिक डायरिया
लखीसराय 8 जुलाई-
बरसात के मौसम में डायरिया का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है।  .इस मौसम में अपने साथ पूरे  परिवार का रखें ख्याल, क्योंकि किसी  भी बीमारी से निजात पाने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी होती  है।  .ये बीमारी तो कभी भी  हो सकती  है पर बरसात के मौसम में इसका खतरा सबसे अधिक होता है।  .बरसात के इस मौसम में विशेषकर डायरिया जैसे रोगों से बचने के लिए एवं उसकी पहचान करने  के साथ बचाव हेतु उपाय बताया जा रहा है।  .
डायरिया से हो सकती है आंत की बीमारी
बार बार दस्त की हालत से ग्रसित होने को ही डायरिया कहा जाता है। . यदि दिन में पांच या इससे भी अधिक बार मल त्याग करने के लिए जाना पड़े तो यह स्थिति चिंताजनक हो जाती है। . डायरिया दो तरह के होते हैं। . इनमें एक्यूट डायरिया व क्रॉनिक डायरिया है। . एक्यूट डायरिया सप्ताह भर में ठीक हो जाता है., जबकि क्रॉनिक डायरिया आंत की कई तरह की बीमारी का कारण बन जाता है। .
बासी खाना व खराब पानी से होता है संक्रमण-
खराब या बासी खाना खाना व प्रदूषित पानी पीना डायरिया होने का सबसे बड़ा कारण माना गया है। . इससे वायरल संक्रमण होता  और आंतों में बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है। . ऐसी स्थिति में भोजन पचाने की ताकत कम हो जाती है। , साथ ही शरीर में पानी की कमी हो जाती है। .
डीहाइड्रेशन से होती है पानी की कमी
डायरिया के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते सही इलाज कराया जा सके। . जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती  ने बताया कि यदि दिन भर में चार से पांच बार या इससे भी अधिक दस्त हो जाता है तो यह डायरिया का लक्षण है। . दस्त पतला होता  और उसमें पानी की मात्रा अधिक होती है। . बीमारी के बढ़ने के साथ ही आंतों में मरोड़ व पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द  भी होने लगता है। . उन्होंने बताया कि डायरिया को यदि जल्द काबू में नहीं लाया गया तो डीहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी व अन्य आवश्यक खनिज तत्वों की कमी हो जाती  और मरीज बेहोश भी हो सकता है.।  यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। . उन्होंने बताया कि पांच साल तक के बच्चे डायरिया से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। . बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों की तुलना में अधिक संवेदनशील होती है। . इसलिए बच्चों की साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। . बच्चों द्वारा गंदी चीजों को छूने और शरीर के अंग जैसे मुंह, नाक व आंख आदि से भी संक्रमण हो सकता है। . इन सबके अलावा बुजुर्ग ढ़े लोगों को डायरिया आसानी से संक्रमित करता है। .
ओआरएस का घोल है कारगर –
बरसात के मौसम में पीने का पानी भी आसानी से प्रदूषित हो जाता है.।  पानी में भीगने और मिट्टी में खेलने के कारण भी बच्चों में संक्रमण होता है। . इस मौसम में खाने-पीने की चीजों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें.।
डायरिया से प्रभावित व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए उसे ओआरएस का घोल देते रहें। . साफ सुथरे तरीके से फलों के लिए निकाले जूस पीयें । . पानी उबाल कर  पीने के इस्तेमाल में लायें। . डायरिया से बचाव का एक सफल तरीका यह है कि ठीक तरह से हाथ धोयें। . खास कर बच्चों के हाथ धोने, शरीर साफ रखने आदि पर पूरा ध्यान दें.।

फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सरकार द्वारा चलाया जाते हैं विभिन्न  कार्यक्रम 

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– बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को किया जाता है जागरूक
खगड़िया, 08 जुलाई-
सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर काफी गंभीर और सजग है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए  फाइलेरिया के खिलाफ सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाए  जाते  हैं । इन कार्यक्रमों के   माध्यम से लोगों को इस बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की जानकारी दी जाती है। ताकि सामुदायिक स्तर पर लोग जागरूक हो  शुरुआती दौर में ही बीमारी की पहचान कर  अपना इलाज शुरू करवा स । दरअसल, इस बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता के साथ-साथ सतर्कता  भी बेहद जरूरी है। इसलिए, जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित तौर पर लगातार विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया जाता है। साथ ही फाइलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को  सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं की भी जानकारी दी जाती है। ताकि संबंधित मरीज  अपना सुविधाजनक तरीके से आसानी के साथ इलाज करवा सकें  और बीमारी पर रोकथाम सुनिश्चित हो सके।
– फाइलेरिया से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन जरूरी :
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विजय कुमार ने बताया, फाइलेरिया से बचाव के लिए अल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा का सेवन भी बेहद जरूरी है। इसलिए, सरकार द्वारा समय-समय पर एमडीए अभियान का आयोजन कराया जाता है। जिसके माध्यम से जिले भर में पखवाड़ा चलाकर लोगों को दवाई का सेवन कराया जाता है। जबकि, फाइलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों में शिविर आयोजित कर एमएमडीपी किट उपलब्ध करायी  जाती  है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा एएनएम, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य कर्मियों के सहयोग से अभियान चलाकर लोगों को जागरूक भी किया जाता है।
– क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है फाइलेरिया : फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसका कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। लेकिन, इसे शुरुआती दौर में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह स्वच्छ पानी से साफ करना चाहिए। साथ ही सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही डीईसी व अल्बेंडाजोल की दवा का नियमित सेवन करना चाहिए।
– फाइलेरिया मुख्यतः शरीर के चार अंगों  को करता है प्रभावित :
फाइलेरिया मुख्यतः मनुष्य के शरीर के चार अंगों को प्रभावित करता है। जिसमें पैर, हाथ, हाइड्रोसील एवं महिलाओं का स्तन शामिल हैं । हाइड्रोसील के अलावा फाइलेरिया संक्रमित अन्य अंगों को ऑपरेशन द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति को समान्य उपचार के लिए किट उपलब्ध कराई जाती है, जबकि हाइड्रोसील फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को मुफ्त ऑपरेशन की सुविधा मुहैया कराई जाती है।
– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र का  व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।
– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
– अल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
 से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी

104 टोल फ्री नंबर पर डायल कर लोग स्वास्थ्य सेवाओं का उठा रहे लाभ

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-जांच, इलाज, दवा समेत स्वास्थ्य से संबंधित हर तरह की मिल रही जानकारी
-इस टोल फ्री नंबर पर कॉल कर सुझाव और शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं आप
भागलपुर, 8 जुलाई-
जिले में 104 टोल फ्री नंबर पर डायल कर काफी संख्या में लोग इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने जब से 104 टोल फ्री नंबर सेवा शुरू की है, लोगों को इससे काफी फायदा पहुंच रहा । 104 नंबर पर डायल करते ही जांच, इलाज, दवा से लेकर स्वास्थ्य से संबंधित हर तरह की जानकारी लोगों को मिल जा रही है। दरअसल, सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और लोगों तक इसकी आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ही इस सेवा की शुरुआत की है। इसलिए यदि आपको सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा, दवा या स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी किसी भी तरह के सवाल का जवाब जानना हो तो आप 104 नंबर टोल फ्री नंबर पर कॉल कर जानकारी हासिल कर सकते हैं।
सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा कहते हैं कि 104 टोल फ्री नंबर का लाभ जिले के सभी लोगों को उठाना चाहिए। इसके तहत स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी से लेकर शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान की जा रही है। वहीं मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रिपोर्टिंग बढ़ाने के लिए भी आप 104 टोल फ्री नंबर का इस्तेमाल कर सकते हैं। मातृ एवं शिशु मृत्यु की सही जानकारी इससे जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने में सहयोग करता है। इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि 104 टोल फ्री नंबर का उपयोग जरूर करें।
शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं आपः सबसे अच्छी बात यह है कि 104 नंबर पर डायल कर आप किसी भी तरह की शिकायत एवं सुझाव भी दे सकते हैं। शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतकर्ता को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाता है। इस नंबर के जरिये आप अपनी शिकायत की स्थिति के बारे में जान सकते हैं। स्थिति की जानकारी मिल जाने के बाद आप सुविधा का इस्तेमाल अपने हक में कर सकते हैं।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की करें रिपोर्टिंगः महत्वपूर्ण बात यह है कि 104 टोल फ्री नंबर के जरिये आप मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की रिपोर्टिंग भी कर सकते हैं। दरअसल, सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम संचालित कर रही है। साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु की सही रिपोर्टिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसे लेकर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। यही कारण है कि सरकार 104 नंबर पर मातृ एवं शिशु मृत्यु की जानकारी देने की अपील भी कर रही है। मातृ-मृत्यु की अवधि प्रसव के बाद 42 दिनों तक रखी गई है। अगर किसी भी व्यक्ति को इस संबंध में  जानकारी मिलती है तो वह 104 नंबर पर डायल कर सकते हैं।
इन सुविधाओं का मिल रहा लाभः विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा सामान्य रोगों की जानकारी देना, कोरोना संबंधित जानकारी, आयुष्मान भारत से संबंधित जानकारी, चिकित्सकीय सेवा संबंधित सलाह, सुझाव एवं शिकायत, मनोरोग संबंधित चिकित्सकीय परामर्श और मातृ एवं शिशु मृत्यु की जानकारी देना।