कुपोषित बच्चों में टीबी का जोखिम अधिक

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-शिशु का बीसीजी टीकाकरण जरूरी, टीबी संक्रमण से रखता है सुरक्षित
-लक्षणों की पहचान कर करायें जरूरी इलाज, नियमित दवा सेवन है जरूरी
पटना-
टीबी एक संक्रामक रोग है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है। बच्चों में भी टीबी यानि ट्यूबरक्लोसिस संक्रमण की संभावना होती है। स्वस्थ्य बच्चे टीबी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो उनके भी टीबी संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। टीबी आनुवांशिक भी हो सकता है। ऐसे घर में जहां टीबी के मरीज हो वहां बच्चों में संक्रमण की संभावना होती है। टीबी की उच्च दर वाले क्षेत्र में रहने वाले बच्चों में टीबी की संभावना बढ़ जाती है। टीबी की रोकथाम के लिए समुदाय में जागरूकता जरूरी है। इसके लिए टीबी के लक्षणों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कुमारी गायत्री सिंह ने बताया टीबी माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु के कारण होता है। सामान्य तौर पर टीबी से फेफड़ा प्रभावित होता है। बच्चों में टीबी के साठ फीसदी मामले फेफड़ों के मिलते हैं। कम उम्र के बच्चों में बलगम नहीं बनता है। ऐसे में टीबी जांच नहीं हो पाती है। इसके लिए बच्चों के बीमार रहने संबंधी जरूरी जानकारी प्राप्त कर उनका इलाज किया जाता है। साथ ही टीबी स्किन टेस्ट किया जाता है।  स्वस्थ्य बच्चों की तुलना में कुपोषित बच्चों में टीबी संक्रमण की संभावना बहुत अधिक होती है।
टीबी के लक्षणों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण:
बच्चों में टीबी के लक्षणों में हमेशा खांसी रहना, कमजोरी तथा शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेना, वजन कम होना, भूख की कमी, बुखार और रात में पसीना चलना आदि है। बच्चों को दो हफ्तों से अधिक खांसी रहने पर उनकी जांच कराना आवश्यक हो जाता है। बच्चों में ऐसे लक्षणों के दिखने पर तुरंत चिकित्सीय परामर्श लेना जरूरी है।  कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चे तथा गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर या एचआईवी से ग्रसित बच्चों को टीबी का सबसे अधिक जोखिम होता है। टीबी की पहचान होने पर उन्हें चार, छह तथा नौ माह तक एंटी टीबी दवाइयां दी जाती हैं, जिसका नियमित सेवन करना जरूरी है। टीबी की दवा का नियमित सेवन नहीं करने पर यह रोग बच्चे पर पुन’ हावी हो जाता है।
टीबी की रोकथाम के लिए बीसीजी टीकाकरण:
टीबी संक्रमण से बचाव के लिए बच्चों को बीसीजी का टीका दिया जाता है।  यह टीबी रोकने के लिए कारगर है। यह टीका बच्चों में टीबी और मैनिनजाइटिस से सुरक्षित रखने के लिए लगाया जाता है। वैक्सीनेशन शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता और टीबी रोगाणु से लड़ने में सक्षम बनाता है।  छह साल से कम उम्र के बच्चों को बीसीजी का टीका लगाया जाता है। इस टीके की सुई बच्चे को उसकी बांह के ऊपरी हिस्से में दी जाती है। शिशु के जन्म के छह माह तक बीसीजी का टीका लगाया जाना जरूरी है। टीकाकरण शिशु रोग विशेषज्ञ की निगरानी में ही कराना चाहिए। बच्चा छह साल की उम्र से कम है तो शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह से बीसीजी का टीकाकरण अवश्य करायें।

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से इलाज करा दृष्टि जी रही स्वस्थ जीवन

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-बाराहाट के बरौना की रहने वाली दृष्टि बचपन से दिल की बीमारी से थी पीड़ित
-जांच औऱ इलाज के साथ अहमदाबाद आने-जाने का खर्च सरकार की ओर से मिला
बांका-
बाराहाट प्रखंड के बरौना गांव के रहने वाले दिवाकर कापरी अपनी बेटी दृष्टि को लेकर चिंतित रहते थे। छोटी सी बच्ची को दिल में छेद और होठ कटे हुए थे। दृष्टि को यह समस्या जन्म के समय से ही थी। निजी अस्पतालों में इलाज कराकर थक गए, लेकिन इस समस्या से निजात नहीं मिली। इलाज के लिए बाहर ले जाना पड़ता। उसके लिए काफी पैसे की जरूरत थी। आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं कि बच्ची का इलाज करा सके। इस चिंता से वे काफी परेशान थे। इसी दौरान छह महीने पहले गांव के एक मास्टर जी से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने दृष्टि के बारे में पूछा और मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के बारे में बताया। इसके बाद दिवाकर कापरी बांका सदर अस्पताल आए और वहां पर आरबीएसके जिला कंसल्टेंट डॉ. अमित से मिले। डॉ. अमित ने पहले उनकी परेशानी को सुना और फिर एक-एक कर उसका समाधान बताया। फिर दृष्टि का इलाज शुरू हुआ। पहले पटना ले जाया गया। वहां से जांच के बाद इलाज के लिए अहमदाबाद भेजा गया। अहमदाबाद में दिल की सर्जरी कर दृष्टि का इलाज किया गया। दृष्टि आज स्वस्थ है। एक साल के बाद उसके कटे होठ का सफलतापूर्वक इलाज कर दिया जाएगा।
दिवाकर कापरी के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना किसी वरदान से कम नहीं है। तभी तो वे कहते हैं, राज्य सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से मेरी बच्ची को नया जीवन मिला है। इस बीमारी का इलाज तो था, लेकिन मैं आर्थिक तौर पर उतना संपन्न नहीं था कि इलाज करा सकूं। गांव के मास्टर जी ने जैसे ही मुझे इस योजना के बारे में बताया मैं तत्काल सदर अस्पताल गया। वहां डॉ. अमित से मिला। डॉ. अमित और पूरी आरबीएसके की टीम ने मेरा भरपूर सहयोग किया। इसके लिए मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं।
क्या है मुख्यमंत्री बाल हृदय योजनाः इस योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकार की इस योजना को अमलीजामा पहना रही है जिले की आरबीएसके टीम। पीड़ित बच्चों को जिले की आरबीएसके टीम स्क्रीनिंग कर चिह्नित करती है और आवश्यकता के अनुसार समुचित इलाज के लिए पटना या अहमदाबाद भेजा जाता है। आरबीएसके टीम के जिला कंसल्टेंट डॉ. अमित ने बताया, हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को स्थाई निजात के लिए समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी होता है। जिन बच्चों के होठ कटे हैं, उसका तीन सप्ताह से तीन माह के अंदर, जिसके तालु में छेद (सुराग) है, उसका छह से 18 माह एवं जिसके पैर टेढ़े-मेढ़े हैं, उसका दो सप्ताह से दो माह के अंदर शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। इसलिए, जो उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चे हैं, उसका अभिभावक अपने बच्चों का आरबीएसके टीम के सहयोग से समय पर मुफ्त इलाज शुरू करा सकते हैं। जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को सांस लेने में परेशानी होती है। हमेशा सर्दी-खांसी रहती है। चेहरे, हाथ, होंठ नीला पड़ने लगता है। इस कारण गंभीर होने पर बच्चों के दिल में छेद हो जाता है।
इलाज से लेकर आवागमन का भी खर्च उठाती है सरकार: डॉ. अमित कहते हैं कि बाल हृदय योजना के माध्यम से अब तक कई बच्चों का इलाज कराया गया है। इसमें हृदय में छेद के आलावा भी अन्य बीमारियां शामिल हैं। योजना के माध्यम से बच्चों का इलाज पूरी तरह से निःशुल्क कराया जाता है, जिसका वहन सरकार करती है। वहीं, आवागमन का खर्च भी सरकार ही उठाती है। इससे मध्यम और गरीब परिवार के लोगों को आर्थिक मदद मिलती है। इसलिए इस योजना का लाभ सभी को उठाना चाहिए।

मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना • हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को मिल रही है निःशुल्क बेहतर स्वास्थ्य सुविधा 

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– पहल • इलाज के साथ आने-जाने का भी खर्चा बिहार सरकार ही करती वहन
– सरकार की पहल और स्थानीय आरबीएसके टीम की तत्परता से जिले के 09 बच्चे हृदय रोग को दे चुके हैं मात
खगड़िया-
राज्य सरकार की मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना जिले में हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आरबीएसके टीम द्वारा हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को चिह्नित कर उक्त योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं । सरकार की पहल और स्थानीय आरबीएसके टीम की तत्परता का सकारात्मक परिणाम यह है कि समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के साथ इलाज शुरू होने से उक्त बीमारी को पीड़ित बच्चे  मात भी दे रहे हैं। हाल में जिले के 09 बच्चों ने बेहतर और समुचित स्वास्थ्य सुविधा की बदौलत हृदय रोग को मात दे दी है। यह सबकुछ सरकार की मजबूत और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के बदौलत ही संभव हुआ। यहीं नहीं, सरकार द्वारा लाई गई उक्त योजना को सार्थक रूप देने के लिए जिले की आरबीएसके टीम पूरी तरह अग्रसर है जिससे पीड़ित बच्चों का पूरी तरह निःशुल्क इलाज कराया जा रहा । जिसका सार्थक परिणाम यह है कि समुचित इलाज और स्वस्थ होने की उम्मीद छोड़ चुके पीड़ित बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो रहे और बच्चों को नई स्वस्थ जिंदगी जीने का अवसर मिल रहा है । ऐसे पीड़ित बच्चों का जिले के आरबीएसके टीम द्वारा स्क्रीनिंग कर चिह्नित  किया जा रहा और आवश्यकता के अनुसार समुचित इलाज के लिए पटना या अहमदाबाद भेजा जा रहा है। जहाँ बच्चों का सरकारी स्तर से निःशुल्क समुचित इलाज हो रहा है।
– जिले के नौ बच्चों ने हृदय रोग को दी मात और पूरी तरह हुआ स्वस्थ :
आरबीएसके टीम के जिला कंसल्टेंट डाॅ प्रशांत कुमार ने बताया, समय पर इलाज शुरू होने से जिले के 09 बच्चे हृदय रोग को मात देकर पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों के बच्चे शामिल हैं । वहीं, उन्होंने बताया, जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात हमारी टीम लगातार ऐसे बच्चों को चिह्नित कर रही एवं चिह्नित होने के पश्चात आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि बच्चों का समय पर इलाज शुरू हो सके और वह आसानी के साथ उक्त परेशानी से उबर कर पूरी तरह स्वस्थ हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की स्क्रीनिंग से लेकर समुचित इलाज के अलावा आने-जाने का खर्च भी राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जाता है। इसके अलावा अन्य सुविधाओं का भी ख्याल रखा जाता है।
– हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की बीमारी से स्थाई निजात के लिए समय पर इलाज जरूरी :
जिला कंसल्टेंट डाॅ प्रशांत कुमार ने बताया, हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की स्थाई निजात के लिए समय पर इलाज शुरू कराना जरूरी है। अन्यथा, परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, उन्होंने बताया, जिन बच्चों के होठ कटे हैं, उसका 03 सप्ताह से 03 माह के अंदर, जिसके तालु में छेद (सुराग) है, उसका 06 से 18 माह एवं जिसके  पैर टेढ़े-मेढ़े हैं , उसका 02 सप्ताह से 02 माह के अंदर शत-प्रतिशत सफल इलाज संभव है। इसलिए, जो उक्त बीमारी से पीड़ित बच्चे हैं, उनके  अभिभावक अपने बच्चों का आरबीएसके टीम के सहयोग से समय पर मुफ्त इलाज शुरू करा सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित बच्चे को साँस लेने में परेशानी होती है। हमेशा सर्दी-खांसी रहती है। चेहरे, हाथ, होंठ नीला पड़ने लगता है। जिसके कारण गंभीर होने पर बच्चों के दिल में छेद हो जाता है।
– छोड़ चुके थे इलाज की उम्मीद, आरबीएसके टीम के सहयोग से मेरे बच्चों को मिली नई जिंदगी :
हृदय रोग को मात दे चुके खगड़िया जिले के बेलदौर प्रखंड अंतर्गत पनसलवा गाँव निवासी प्रियंका कुमारी के पिता अनिल सिंह ने बताया, मैं तो अपनी  बच्ची के  समुचित और स्थाई इलाज की उम्मीद ही छोड़ चुका था ।  ना ही बाहर में इलाज कराने के लिए पर्याप्त पैसा था। किन्तु, इसी बीच जब आरबीएसके टीम द्वारा समुचित इलाज, वो भी पूरी तरह मुफ्त होने की जानकारी मिली तो पूरे परिवार में उम्मीद की नई किरण जग गई। आरबीएसके टीम की देखरेख में मेरे बच्ची का पूरी तरह निःशुल्क समुचित इलाज हुआ और आज मेरी बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। इलाज के दौरान काफी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। इसके लिए मैं स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ सरकार का ताउम्र ऋणी रहूँगा। साथ ऐसी व्यवस्था के लिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग एवं सरकार धन्यवाद के पात्र हैं।

मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से जरूरतमंद गरीब परिवार के मरीजों को मिल रही है मदद

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– इस योजना से ढाई लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले मरीजों को ही मिलता है लाभ
– मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने पर ही मरीजों को इस योजना का मिलता है लाभ
मुंगेर-
समाज में सभी वर्ग के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज में आर्थिक समस्या बाधक नहीं बने, इसके लिए राज्य सरकार बहुत ही गंभीर और सजग है। इसको सार्थक रूप देने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष का गठन किया है। इस कोष के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के लिए राज्य सरकार के द्वारा सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना के माध्यम से राज्य के सभी जरूरतमंद और असाध्य रोग से पीड़ित मरीजों को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है। उक्त योजना का लाभ लेने के लिए सरकार के द्वारा कुछ शर्त और नियम-प्रावधान भी लागू  किए गए हैं। जैसे, इस योजना का लाभ लेने वाले मरीजों की वार्षिक आय ढाई लाख रुपये से कम हो सहित कई अन्य नियम-प्रावधान भी लागू किया गया । ऐसे नियम-प्रावधान के अंतर्गत आने वाले मरीजों को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है ।
– इन बीमारी से पीड़ित मरीजों को दी जाती है सरकार द्वारा सहायता राशि :
मुंगेर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनन्द शंकर शरण सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा कैंसर, हृदय रोग, किडनी की बीमारी, ब्रेन ट्यूमर, एड्स, कूल्हा एवं घुटना प्रत्यारोपण, स्पाइनल सर्जरी, मेजर वैस्कुलर सर्जरी और बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए अलग- अलग सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा भी कई अन्य रोगों को मान्य करने के लिए निदेशक प्रमुख की अध्यक्षता में गठित अधिकृत समिति द्वारा निर्णय लिया जाता है। उन्होंने बताया कि असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति को दी जानेवाली सहायता राशि संबंधित चिकित्सा संस्थान को क्रास चेक के माध्यम से दी जाती है।
– जरूरतमंद मरीजों को कैसे मिलेगा योजना का लाभ-
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित मरीजों (आवेदक) को इलाज कराने वाले स्वास्थ्य सस्थानों के सभी कागजातों के साथ निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार को अनुदान के लिए आवेदन देना  होगा। निदेशक प्रमुख की अध्यक्षता में गठित कमेटी के द्वारा आवेदक को निर्धारित तिथि पर बुलाया जायेगा। मरीजों के द्वारा आवेदन के साथ प्रस्तुत किए गए कागजातों और साक्ष्यों की जांच के बाद अनुदान की राशि जारी की जायेगी। राज्य के अंदर इलाज कराने वाले मरीजों के लिए अलग राशि निर्धारित है, जबकि राज्य के बाहर इलाज कराने वालों के लिए अलग दर निर्धारित है। एक प्रकार के रोग में अलग- अलग इलाज के लिए भी भिन्न भिन्न राशि निर्धारित की गयी है।
– मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने पर ही मिलेगा योजना का लाभ :
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबन्धक नसीम रजि बताया कि उक्त योजना के तहत मिलने वाली अनुदान राशि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों या फिर सीजीएचएस से मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने पर ही संबंधित मरीजों को दी जाती है। उक्त राशि संबंधित संस्थान को चेक के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।
– योजना का लाभ लेने के लिए यह है जरूरी :
– मरीज बिहार का नागरिक हो
– मरीजों की वार्षिक आय ढाई लाख रुपये के अंदर हो
– रोगों से संबंधित इलाज राज्य सरकार के अस्पताल एवं सीजीएचएस से मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थानों में ही हो
– आवेदन के साथ देना होगा यह कागजात :
– सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत आवास प्रमाण पत्र
– डीएम, एसडीओ या अंचलाधिकारी द्वारा ही निर्गत आय प्रमाणपत्र
– राज्य सरकार के अस्पताल या सीजीएचएस (सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) से मान्यता प्राप्त अस्पताल के इलाज का स्लीप (पुर्जा) और मूल अनुमानित राशि।
– निर्धारित की गई सहायता राशि :
– कैंसर – 20 हजार- 60 हजार तक
– हृदय रोग – 25 हजार – एक लाख 30 हजार तक
– किड़नी रोग – डेढ़ लाख
– ब्रेन ट्यूमर – 15 हजार -25 हजार
– एड्स – 50 हजार
– कूल्हा व घुटना प्रत्यारोपण – 15 हजार-20 हजार
– स्पाइनल सर्जरी – 10 हजार -15 हजार
– मेजर वैस्कुलर सर्जरी – 20-25 हजार
– बोनमैरो ट्रांसप्लांट – 25 हजार

बाल हृदय योजना से राहुल को मिला नया जीवन, अब पूरी करेगा अपनी पढ़ाई

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– दिल में छेद के कारण अक्सर बीमार रहता था राहुल, 9 साल की उम्र में बीमारी का पता चला
– निःशुल्क इलाज के कारण परिवार पर नहीं पड़ा आर्थिक बोझ, परिजनों ने दिया सरकार को धन्यवाद
आरा-
परिवार की खुशियां बच्चों से ही होती है। अक्सर माता पिता बच्चों की खुशी के लिए अपने सामर्थ्य से अधिक कर गुजरते हैं। लेकिन, जब बच्चों पर मुसीबत होती है या उनको कोई गंभीर बीमारी होती, तब उनकी नींद उड़ जाती है। ऐसा ही हाल जिला मुख्यालय स्थित धरहरा निवासी  विष्णु शंकर सिंह का हुआ था। जब पांच साल पहले उन्हें पता चला था कि उनके छोटे बेटे राहुल कुमार के दिल में छेद है। जिसके कारण वो अक्सर बीमार रहता था। दिल की बीमारी की खबर को सुनकर विष्णु शंकर सिंह समेत उनके परिवार के सदस्यों की नींद ही उड़ गई। मध्यम परिवार से होने के कारण इस गंभीर बीमारी का वो अब तक इलाज नहीं करा पाए थे। लेकिन उन्हें बाल हृदय योजना की जानकारी मिली, तब उन्होंने अपने बेटे का इलाज कराने की ठानी।
बीमारी के कारण छूट गई थी राहुल की पढ़ाई :
विष्णु शंकर सिंह बताते हैं कि अभी उनका बेटा 14 साल का है। वो बचपन से ही बीमार रहता था। सर्दी, खांसी, निमोनिया, बुखार आदि से हमेशा ग्रसित रहता था। 9 साल की उम्र में पटना समेत कई संस्थानों में इलाज के बाद भी बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी। तब चिकित्सकों ने उन्हें इको कराने की सलाह दी। जिसके बाद रिपोर्ट में दिल में छेद होने की बात सामने आई। इस बीच उसकी पढ़ाई भी छूट गई। वहीं, परिजन लगातार चिंतित रहने लगे। लेकिन, जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना (आरबीएसके) की टीम ने उनसे संपर्क कर उन्हें दिल की बीमारी से जुड़े इलाज के संबंध में जानकारी दी, तो उनको उम्मीद की किरण दिखी और वे राहुल के इलाज के लिए मान गए।
ऑपरेशन के बाद राहुल का बढ़ा आत्मबल :
‘दिल में छेद का ऑपरेशन जून माह में ही हुआ था। ऑपरेशन कराकर लौटने के बाद अब मेरा आत्मबल भी बढ़ा है। इस बीमारी के कारण  परिजन काफी दिनों से चिंतित रहने लगे थे। लेकिन, अब हालात सुधरने लगे हैं। साथ पढ़ने वाले बच्चे अब सीनियर हो गए हैं। लेकिन, फिर से नया जीवन मिलने के बाद, अब मैं फिर से अपनी पढाई पूरी करूंगा और परिवार का नाम रौशन करूंगा।’ – राहुल कुमार, इलाजरत किशोर
इलाज से लेकर आवागमन का भी खर्च उठाती है सरकार :
‘बाल हृदय योजना के माध्यम से अब तक कई बच्चों का इलाज कराया गया है। जिसमें हृदय में छेद के आलावा भी अन्य बीमारियां शामिल हैं। योजना के माध्यम से बच्चों का इलाज पूरी तरह से निशुल्क कराया जाता है। जिसका वहन सरकार करती है। वहीं, आवागमन का खर्च भी सरकार ही उठाती है। जिससे मध्यम और गरीब परिवार के लोगों को आर्थिक मदद मिलती है। इसलिए इस योजना का लाभ सभी को उठाना चाहिए।’ – डॉ. केएन सिन्हा, एसीएमओ, भोजपुर

राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम- अब मिस्ड कॉल पर टीबी मरीजों को मिलेगी पूरी जानकारी 

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– केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने जारी किया 1800 – 116666 टॉल फ्री नंबर
– इस नंबर पर मिस्ड कॉल करते ही टीबी मरीजों को उपलब्ध कराई जाएगी पूरी आवश्यक जानकारी
मुंगेर, 30 जून-
  राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम 2025 के तहत अब  मिस्ड कॉल पर टीबी मरीजों को  पूरी जानकारी मिलेगी । इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने 1800 – 116666 टॉल फ्री नंबर जारी किया है। इस नंबर पर मिस्ड कॉल करते ही टीबी मरीजों को पूरी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इस साथ ही इस टॉल फ्री नंबर पर कॉल करके टीबी के मरीज अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति मुंगेर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि सन 2025 तक देश को टीबी के संक्रमण से मुक्त कर दिया जाए। लेकिन यह तभी संभव है जब सभी लोग मिलजुल कर टीबी को जड़ से खत्म करने में अपना सहयोग दें। भारत सरकार के द्वारा टीबी की अधिक से अधिक जानकारी लोगों को उपलब्ध कराने के लिए एक टॉल फ्री नंबर भी जारी किया है जिस पर कॉल न करके सिर्फ मिस्ड कॉल पर ही टीबी से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय देश की  सबसे गंभीर बीमारी समझी जाने वाली टीबी के उन्मूलन के लिए अब मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए टॉल फ्री नंबर जारी किया है।
इस तरह से कारगर हो सकती है मिस्ड कॉल सेवा :
उन्होंने बताया कि टीबी के ज्यादातर मरीज गरीब तबके से आते हैं। सही जानकारी नहीं होने पर साधारण टीबी के मामले भी गंभीर रूप ले लेते हैं। मिस्ड कॉल सेवा की मदद से इन्ही मरीजों की  पहचान करने और समुचित चिकित्सा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नई सेवा स्वास्थ्य मंत्रालय को टीबी के कारण हो रहे दुष्प्रभावों के मामलों की शिनाख्त करने में भी सहायता करेगा।
जिला के टीबी/ एचआईवी समन्वयक शलेन्दु कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत विभिन्न चरणों में व्यापक स्तर पर टीबी मरीजों की खोज को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में अनाथालय, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, रैन बसेरा, पोषण एवं पुनर्वास केंद्र, ईट भट्ठा के मजदूर, ग्रामीण दूरस्थ और कठिन क्षेत्र, महादलित टोला और अन्य लक्षित समूह जैसे उच्च जोखिम युक्त समूह पर विशेष नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही टीबी की निःशुल्क जांच और इलाज पर विभाग विशेष ध्यान दे रहा है।
उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों के इलाज  के दौरान पोषण के लिए 500 रुपये प्रति माह दिए जाने वाली निक्षय पोषण योजना बहुत ही मददगार साबित हो रही है।

पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों की माताओं को किया जा रहा है जागरूक 

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– कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को लेकर दी जा रही है जरूरी जानकारी
– शिशु में कुपोषण के लक्षण दिखते ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के लिए किया  जा रहा  है प्रेरित
लखीसराय, 30 जून-
जिले में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में  कुपोषित बच्चे की माँ को कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को  लेकर जागरूक किया रहा है। जिसके दौरान एएनएम द्वारा मौजूद धातृ महिलाओं को कुपोषण के कारण, लक्षण, बचाव एवं इसके उपचार की विस्तृत जानकारी दी  जा रही है। जिसमें महिलाओं को कुपोषण से पीड़ित बच्चों की पहचान करने, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, कुपोषण से बचाव के किन-किन बातों का ख्याल रखना चाहिए तमाम जानकारियाँ दी जा रही हैं । साथ ही बच्चे में कुपोषण का लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सकों से जाँच कराने एवं चिकित्सकों के सलाहानुसार पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि पीड़ित बच्चे के शुरुआती दौर में ही पहचान की जा सके और ससमय जरूरी पहल की जा सके। वहीं, पोषण पुनर्वास केंद्र में जागरूकता के अलावा बच्चों का ना सिर्फ आवश्यकतानुसार समुचित इलाज हो रहा है, बल्कि इलाज के दौरान दी जाने वाली अन्य सुविधाएं भी बेहतर तरीके से उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि भर्ती बच्चे जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकें  और कुपोषण मुक्त समाज निर्माण को बढ़ावा मिल सके। वर्तमान में जिले के एनआरसी में 10 बच्चे भर्ती हैं। सभी भर्ती बच्चों को एनआरसी में सुविधाजनक तरीके से बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं प्रदान कराई जा रही है और अन्य जरूरी बातों का उचित ख्याल रखा जा रहा है।
– कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी है पोषण पुनर्वास  केंद्र :
सिविल सर्जन डॉ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में बच्चों के पोषण की कमी से निपटने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है, जो कुपोषण की समस्या से पीड़ित बच्चों के लिए  संजीवनी साबित हो रही   है। वहीँ उन्होंने बताया कि   कुपोषण की समस्या से जूझ रहे बच्चों को 14 दिनों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखा जाता है। जहाँ कुपोषित बच्चों को डाक्टर्स की सलाह के अनुसार ही उनका खानपान का विशेष ख्याल रखा जाता है। यहां रखे गए बच्चे यदि 14 दिनों के अंदर कुपोषण से मुक्त नहीं हो पाते हैं तो वैसे बच्चों को एक माह तक विशेष रूप से देखभाल की जाती है। पोषण पुनर्वास  केंद्र में मिलने वाली सभी सुविधाएं नि:शुल्क होती है। यहां भर्ती हुए बच्चों के वजन में न्यूनतम 15 प्रतिशत की वृद्धि के बाद ही उसे यहां से डिस्चार्ज किया जाता है। वहीं, उन्होंने कहा, मैं जिले वासियों से अपील करता हूँ कि जिनका भी बच्चा कुपोषण की समस्या से पीड़ित है, वह स्थानीय ऑगनबाड़ी सेविकाओं से संपर्क कर अपने बच्चों को लखीसराय सदर अस्पताल परिसर स्थित एनआरसी में भर्ती कराएं। अगर इस दौरान उन्हें किसी प्रकार की कोई असुविधा होती हो तो वह अपने स्थानीय स्वास्थ्य संस्थान या फिर स्वास्थ्य विभाग के जिला मुख्यालय और एनआरसी जाकर भी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
– पोषण पुनर्वास  केंद्र में भर्ती होने के लिए तय किए गए हैं  ये मानक :
डीपीसी सुनील कुमार ने बताया, कुपोषण के शिकार बच्चे को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती करने के लिए कुछ मानक निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत बच्चों की  विशेष जांच, जैसे उनका वजन व बांह आदि का माप किया जाता है। इसके साथ ही छह माह से अधिक एवं 59 माह तक के ऐसे बच्चे जिनकी बांई भुजा 11.5 सेमी हो और उम्र के हिसाब से लंबाई व वजन न बढ़ता हो वो कुपोषित माने जाते हैं । वैसे बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती किया जाता है। इसके साथ ही दोनों पैरों में पिटिंग एडीमा हो तो ऐसे बच्चों को भी यहां पर भर्ती किया जाता है।

समय से पूर्व प्रसव होने पर कराएं इलाज

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– जच्चा-बच्चा दोनों को परेशानियों का करना पड़ सकता है सामना
– समय से पूर्व प्रसव होने पर शिशु रहता है बेहद कमजोर, इसलिए उचित इलाज जरूरी
खगड़िया, 30 जून-
गर्भधारण के साथ ही हर महिला में ससमय सामान्य एवं सुरक्षित प्रसव होने की पहली चाहत होती  और गर्भावस्था के दौरान मन में तरह-तरह के सवाल के साथ  खुशियाँ भी रहती हैं । हालाँकि, इस दौरान थोड़ी सी अनदेखी और लापरवाही बड़ी मुश्किल बन जाती  और महिलाओं को तरह-तरह की परेशानियाँ का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी  ही एक परेशानी समय पूर्व प्रसव होना है, जो जच्चा-बच्चा दोनों के लिए परेशानी बन जाती है। हालाँकि, समय पूर्व प्रसव होने के  कई कारण हैं। किन्तु सामान्यतः कमजोर महिलाएं खासकर इस दायरे में आ ही जाती  और समय पूर्व प्रसव में जन्म लेने वाले शिशु भी बेहद कमजोर होते हैं। क्योंकि, समय पूर्व प्रसव होने के कारण शिशु गर्भ के दौरान मानसिक और शारीरिक रूप से संबल नहीं हो पाता है। इसलिए, ऐसी स्थिति में जच्चा-बच्चा की  योग्य चिकित्सकों से तुरंत जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श के अनुसार ही इलाज कराएं। क्योंकि, ऐसे शिशु जन्म लेने के साथ कई तरह की  समस्याओं से घिर जाते हैं। इसलिए, ऐसे शिशु के  स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए उचित और समुचित इलाज जरूरी है।
– कम उम्र में गर्भधारण  से भी होता है समय पूर्व प्रसव :
सिविल सर्जन डाॅ अमरनाथ झा ने बताया, समय पूर्व प्रसव होने के कई कारण हैं। जैसे कि, माता का 40 किलोग्राम से कम वजन होना, शरीर में खून की कमी, गर्भावस्था के दौरान या प्रसव पूर्व ब्लीडिंग  होना, गर्भाशय मुख का बेहद कमजोर होना आदि। इसलिए गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर चिकित्सकों से जाँच करानी  चाहिए एवं उनके चिकित्सा परामर्श के अनुसार आवश्यक इलाज भी कराना चाहिए। हालाँकि, इसमें कम उम्र में गर्भधारण करना और गर्भावस्था के दौरान उचित खान-पान का सेवन नहीं करना आदि मुख्य कारण हैं। क्योंकि, ऐसी स्थिति में महिलाएँ काफी कमजोर हो जाती है। जिसके कारण सुरक्षित प्रसव नहीं हो पाता है।
– गर्भधारण के लिए सही उम्र होना जरूरी :
गर्भधारण के लिए महिलाओं का सही उम्र होना भी बेहद जरूरी है। क्योंकि, कम उम्र में गर्भधारण होने से हमेशा समय पूर्व प्रसव होने की संभावना बनी रहती है। जिससे महिलाओं को कई प्रकार की जटिल परेशानियों से जूझना पड़ जाता है। इसलिए, गर्भधारण के लिए महिलाओं का कम से कम 20 वर्ष का होना जरूरी है। इसलिए, इस उम्र में ही गर्भधारण कराना चाहिए। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी उत्पन्न नहीं हो।
– प्रसव पूर्व समय-समय पर कराते रहें जाँच :
सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर जाँच कराते रहना चाहिए। प्रसव पूर्व जाँच के लिए सरकार द्वारा पीएचसी स्तर पर भी मुफ्त जाँच की व्यवस्था की गई है। जहाँ हर माह नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जाँच होती और जाँचोपरांत आवश्यक चिकित्सा परामर्श दी जाती है।
 – गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम युक्त खाने का सेवन ज्यादा करना चाहिए :
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रोटीन, आयरन  और कैल्सियम युक्त खाने का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। इस दौरान दाल, पनीर, अंडा, पालक, सोयाबीन, नॉनवेज, गुड़, अनार, नारियल, चना, हरी सब्जी आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही व्यक्तिगत साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए।
– क्या है समय से पूर्व प्रसव :
37 हफ्ते के बाद होने वाले प्रसव को सामान्य एवं परिपक्व प्रसव कहा जाता है। किन्तु, इससे पूर्व प्रसव होने पर समय पूर्व प्रसव कहा जाता है। इस स्थिति माँ के साथ-साथ जन्म लेने वाले शिशु काफी कमजोर होते हैं और दोनों को कई तरह की परेशानियाँ का सामना करना पड़ जाता है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे मानसिक एवं शारीरिक रूप से तो बेहद कमजोर होते ही हैं। इसके अलावा  ऐसे शिशु में स्तनपान के लिए माँ की छाती को चूसने एवं साँस लेने की क्षमता भी नहीं होती है। जिसके कारण बच्चे कई तरह की  समस्याओं से घिर जाते हैं।

“Me and My right, training organised by Bharat Scout Guide, Madhya Pradesh

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Under the ongoing training “Me and My right, as a leader” at Bharat Scout Guide, State Training Center Bhopal, young women and girls from 12 states visited the State Women’s Commission and Mahila Thana and got an in-depth study of their work. On this occasion, all the officers of State Commission for Women and Women Police Station gave training with full enthusiasm.

 

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Five-day workshop was launched by Bharat Scouts and Guides Under the project Her world Her Voice

International Yoga Day 2022 : PM Modi leads mass yoga camp in Mysuru

The Ministry of Ayush and the Government of Karnataka organized the main event of 8th edition of the International Day of Yoga (IDY) 2022 at Mysuru Palace, Mysuru. Prime Minister led the mass yoga demonstration at Mysuru Palace along with over 15,000 participants, which also included over 200 special physically challenged children, 100 orphaned child, 15 transgenders, HIV-positive people, and ASHA workers.

PM on the occasion of the 8th International Day of Yoga 2022, at Mysore Palace Ground, in Mysuru, Karnataka on June 21, 2022.

Shri Thaawarchand Gehlot, Governor of Karnataka, Shri Basavaraj S Bommai, Chief Minister of Karnataka, Union Minister for Ayush, Ports, Shipping & Waterways Shri Sarbananda Sonowal official of Ministry of Ayush and Government of Karnataka and other dignitaries also took part in the mass yoga demonstration.

PM on the occasion of the 8th International Day of Yoga 2022, at Mysore Palace Ground, in Mysuru, Karnataka on June 21, 2022.

On this occasion, Prime Minister Shri Narendra Modi emphasized that this year’s theme aptly portrays how Yoga served humanity in alleviating suffering during COVID-19 pandemic. Today yoga is becoming a basis for global cooperation and is providing a belief of a healthy life to mankind. He added that we see that Yoga has come out of the households and has spread all over the world and this is a picture of spiritual realization, and that of natural and shared  human consciousness, especially in the last two years of an unprecedented pandemic.

The Prime Minister said that today is the time to realize the infinite possibilities associated with yoga. Today our youth are coming in large numbers with new ideas in the field of yoga. Ministry of Ayush’s Startup Yoga Challenge is bringing together new ideas and innovation which is inspiring this generation.

The Union Minister for Petroleum & Natural Gas, Housing and Urban Affairs, Shri Hardeep Singh Puri on the occasion of the 8th International Day of Yoga 2022, at Red Fort, in Delhi on June 21, 2022.

Addressing the gathering, Union Minister for Ayush, Ports, Shipping & Waterways Shri Sarbananda Sonowal said that It is Prime Minister’s vision to bring world peace and harmony by focusing on the health and well-being of individuals, communities, nations, and the world as a whole. He said that Yoga has brought the world together, reshaping the global values, and is bringing different healthcare systems closer.

The Minister further said that Ministry of Ayush has designed unique programs to include various sections of the society to celebrate health and heterogeneity. Shri Sonowal further informed that the Ministry have taken various initiatives to ensure advancement in the health and well-being of the people through Yoga.

This year International Day of Yoga 2022 saw many new initiatives, the ‘Guardian Ring’ program, which is collaborative exercise between 79 countries and United Nations organisations along with Indian Missions abroad to illustrate Yoga’s unifying power that surpasses national boundaries. Integrating the Azadi Ka Amrit Mahotsav with celebrations of 8th IDY, Mass Yoga demonstrations were organised at 75 iconic locations across the country under the leadership of 75 Union Ministers.

Prime Minister also inaugurated the Digital yoga exhibition, which is showcasing the latest technologies like Virtual Reality to project the history and wisdom of Yoga. Prime Minister also visited the static Ayush exhibition, which consists of 146 stalls were yoga institutions, Ayush institutions under the ambit of the Government of Karnataka and the Government of India are participating.