Five-day workshop was launched by Bharat Scouts and Guides Under the project Her world Her Voice

#beyondindiaRajeev Jain
state commissioner

Bharat Scouts & Guides, MP

A five-day workshop was started today by Bharat Scouts and Guides under the “Her world Her Voice” project. The objective of this workshop is to mobilize 9000 young girls and women in the country as a master trainer through the campaign “Me and My rights, as Leader”. Training will be given to them and then the same trainer will spread awareness among young women on this subject all over the country.

This program will play a tremendous role for the empowerment of young women. Bharat Scouts’ guide girls, rangers and Governor and President’s Award recipients, young girls and women of 17 to 30 years are getting this training and 132 participants from 12 states are participating in this workshop at State Training Center Gandhi Nagar, Bhopal. The training is being given by the project in-charge Himanshi Tomar and her team, coming from National Headquarters Bharat Scout Delhi.
Today, on the occasion of the inaugural session of this dignified program, State Secretary of Bharat Scout Guide Rajesh Prasad Mishra, State Commissioner Rajiv Jain, Bhagwati Sharma and Chandrakanta Upadhya, BL Sharma were present and told everyone the importance and purpose of the program.


On this occasion, Camp Director Board Usha Yadav, Anita Sonawane, Rajesh Mewade, Rameshwar Sen are taking over the reins of the camp.

 

unknown facts about SSR (Sushant Singh Rajput) that you aren’t aware

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Sushant Singh Rajput was highly ambitious and wanted to check all the things on his bucket list. In the memory of Sushant, let’s take a look at these 6 lesser known facts about him that you probably aren’t aware till date.

Yash Raj Films submit copies of contract signed by Sushant Singh Rajput to  the police : Bollywood News - Bollywood Hungama

Sushant Singh Rajput was not just an ordinary Bollywood actor who could just act, dance or perform on stage. He was fragile, intelligent and yet a complicated guy as described by Kedarnath director Abhishek Kapoor. It is also perhaps the reason why he couldn’t be stereotyped. He was highly ambitious and wanted to check all the things on his bucket list. Sadly, the actor left this mortal world at the age of 34 last year. He continues to live in people’s hearts. In the memory of Sushant, let’s take a look at these 6 lesser known facts about him that you probably aren’t aware till date.

National level Olympiad winner in Physics

Is it true that Sushant Singh Rajput got 7th rank in AIEEE and a gold medal  in physics Olympiad? - Quora

Sushant was a National level Olympiad winner in Physics. He had cleared as many as 11 engineering entrance exams. After completing 3 years in Delhi School of Engineering, he dropped out to chase his dream of becoming an actor. He also stood at 7th Rank AIEEE in 2003.

Nadira Babbar and Shiamak Davar’s group

Sushant Singh Rajput at the opening ceremony of Rang Parwaaz Mahotsav by  Nadira Babbar / Sushant Singh Rajput - Bollywood Photos

Sushant was a part of Nadira Babbar’s Ekjute theatre group and Shiamak Davar’s dance group when he was in Delhi.

Sushant name has his mother’s name

Sushant Singh's Sister Meetu Shares Artwork Of Mother and Brother -  SheThePeople TV

Sushant shared a close bond with his mother whom he lost when he was in the 12th standard. He often took to social media to pen poetry in memory of his late mother Usha Singh. But did you know the late actor’s name also had his mother first name in it? In a social media conversation with a fan, the ‘Chhichhore’ actor had revealed that fact which left everyone surprised.

Pavitra Rishta didn’t mark Sushant’s TV debut

10 Best Pavitra Rishta Moments That Make Us Miss Sushant Singh  Rajput-Ankita Lokhande - Zee5 News

Sushant became an overnight star with his stint in Pavitra Rishta. But this Ekta Kapoor’s TV show didn’t mark his debut. He started acting career with the role of Preet Juneja in Kis Desh Mein Hai Dil Mera.

An ambidextrous

This video of Sushant Singh Rajput writing with both hands will blow your  mind! | Hindi Movie News - Bollywood - Times of India

Sushant was an ambidextrous person who could write with both hands.

Trained at NASA

Chanda Mama Door Ke: Sushant Singh Rajput to train at NASA's Space and  Rocket Center for the upcoming release | The Financial Express

Sushant, who loved astronomy, had even bought land on the moon, in the blind region which is popularly known as the Sea of Muscovy. Well, that was not all as the ‘Raabta’ actor had also purchased a highly advanced telescope with which he would use to look at his land and also observed the Saturn rings in the space for hours. He even read a lot about space and kept himself updated with the technologies which are being invented. Sushant had even gone to NASA to prep for his role of an astronaut.

पंचायतवार लक्ष्य निर्धारित कर कोविड वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन कर लाभार्थियों को किया जाएगा टीकाकृत 

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– सभी चयनित सत्र स्थलों पर वैक्सीनेशन के साथ सुगर, बीपी, हीमोग्लोबिन समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच की सुविधा भी रहेगी उपलब्ध
– राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन और डीआईओ को दिए निर्देश
लखीसराय, 13 जून.-
जिले में जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में चल रहे हर घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान 2.0 की रफ्तार को और तेज गति देने के लिए सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है और इसे सुनिश्चित करने को लेकर नित्य नये-नये निर्णय भी लिए जा रहे हैं। ताकि वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार को और तेज गति मिल सके एवं  जल्द से जल्दशत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके। इसी कड़ी में प्रतिदिन
एक पंचायत का लक्ष्य निर्धारित कर पंचायतवार कोविड वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन कर लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने का निर्णय लिया गया है। ताकि सभी योग्य लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन करा सकें। जिससे जिले में वैक्सीन से वंचित लोगों की संख्या शून्य हो सके। इसे सुनिश्चित करने को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी सिविल सर्जन और डीआईओ (जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी) को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
– जिले में सुविधाजनक तरीके से लाभार्थियों का किया जा रहा है टीकाकरण :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले में संचालित वैक्सीनेशन अभियान की रफ्तार को और तेज गति देने के लिए आवश्यक निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और अपने स्तर पर  एक्शन प्लान तैयार कर शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। वहीं, उन्होंने ने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों
का टीकाकरण सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसके तहत लाभार्थियों को सुविधाजनक तरीके से वैक्सीन दी जा रही है। वहीं, उन्होंने बताया, सभी सत्र स्थलों पर वैक्सीनेशन के अलावा शुगर, बीपी, हीमोग्लोबिन समेत अन्य स्वास्थ्य जाँच की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। ताकि जरूरतमंद व्यक्ति अपना स्वास्थ्य जाँच भी करा सके।
– लाभार्थियों के सुविधानुसार के अनुसार शिविर स्थलों का होगा चयन :
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह द्वारा जारी पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि लाभार्थियों के सुविधानुसार सत्र स्थलों का चयन कर कोविड वैक्सीनेशन शिविर आयोजित करने की जरूरत है। ताकि सभी आयु वर्ग के लाभार्थी सुगमता के साथ सत्र स्थल तक पहुँच सके और सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन करा सके। वहीं, पत्र में यह भी कहा गया है कि 12 से 14 आयु वर्ग के छूटे लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने को लेकर जिला और प्रखंड स्तर के शिक्षा पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर विद्यालयों में भी वैक्सीनेशन शिविर का आयोजन किया जा सकता है।
– पीआरआई मेंबर, जीविका, आईसीडीएस समेत अन्य सहयोगी संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग :
पत्र में यह कहा गया है कि वैक्सीनेशन अभियान को गति देने के लिए पीआरआई मेंबर (पंचायत राज के जनप्रतिनिधि) के साथ बैठक कर लोगों को जागरूक करें। इसके अलावा जीविका, आईसीडीएस समेत अन्य सहयोगी संस्थाओं का भी सहयोग लेकर सामुदायिक स्तर पर लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित कराएं। ताकि सामुदायिक स्तर लोगों को वैक्सीनेशन शिविर की जानकारी मिल सके और लाभार्थियों का दुविधा दूर सके।

आज रक्तदान कर दूसरे का जीवन बचाने में करें अपना योगदान

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-बौंसी, अमरपुर और कटोरिया में लगाया गया है शिविर
-सदर अस्पताल की टीम तीनों ही जगह पर रहेगी मौजूद
बांका, 13 जून-
आज विश्व रक्तदान दिवस है। हर वर्ष इस दिन तमाह तरह के जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। उद्देश्य यही रहता है कि स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर दूसरे का जीवन बचाने में अपना योगदान करें। रक्तदान करने से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है। हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे लेकर एक थीम निर्धारित करता है। इस बार का थीम है रक्तदान एकजुटता का काम है। प्रयास में शामिल हों और जीवन बचाएं। यानी की सामूहिक प्रयास के जरिये अधिक से अधिक लोगों से रक्तदान करवाएं और इसमें खुद का भी योगदान दें।
इस साल जिला स्वास्थ्य समिति की तरफ से तीन जगहों पर रक्तदान शिविर की व्यवस्था की गई है। बौंसी, अमरपुर और कटोरिया रेफरल अस्पताल में रक्तदान शिविर लगाया गया है। जहां पर कि लोग आकर रक्तदान कर सकते हैं। तीनों ही जगहों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम रहेगी। डॉक्टर और टेक्निकल स्टाफ मौजूद रहेंगे। रक्तदान करने वालों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दिया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण का कहते हैं कि रक्तदान जीवनदान करने जैसा है। हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान करना चाहिए। इसलिए अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर दूसरों का जीवन बचाने में भागीदार बनें। थैलेसीमिया समेत कई ऐसी बीमारी है, जिसके मरीजों को लगातार रक्त की आवश्यकता होती है। अगर सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध रहेगा तो उन्हें आसानी होगी। साथ ही सिजेरियन के दौरान भी काफी लोगों को रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे लोगों का जीवन बचाने में अपना योगदान करें।
स्वस्थ व्यक्ति कर सकते हैं रक्तदान, कोई नुकसान नहीं होगाः सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र नारायण ने कहा कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। इससे उन्हें किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। रक्तदान शिविर के दौरान डॉक्टर तैनात रहेंगे, जो रक्तदान करने के लिए आने वाले व्यक्ति की जांच करेंगे। जांच में पूरी तरह से फिट रहेंगे, तभी उनसे रक्तदान करवाया जाएगा। इसलिए मन में किसी तरह का कोई संकोच नहीं रखें। आज मंगलवार को बौंसी, अमरपुर और कटोरिया रेफरल अस्पताल पहुंचे। अगर आप रक्तदान करने के योग्य होंगे, तभी आपसे रक्तदान करवाया जाएगा। रक्तदान करने के बाद रक्तदान करने वाले के लिए स्नैक्स भी उपलब्ध रहेगा, जो उन्हें रक्त  देने के तत्काल बाद दिया जाएगा। इसके बाद वहां पर मौजूद डॉक्टर से वह पूछकर घर जा सकते हैं।

सदर अस्पताल में मेगा रक्तदान शिविर आज

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-अधिक से अधिक लोग पहुंचकर करें रक्तदान
-दूसरों का जीवन बचाने में करें अपना योगदान
भागलपुर, 13 जून
आज विश्व रक्तदान दिवस है। इसे लेकर हर साल जागरूकता कार्यक्रम से लेकर रक्तदान शिविर तक का आयोजन किया जाता है। उद्देश्य यही रहता है कि अधिक से अधिक लोग रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचाकर अपनी भागीदारी निभाएं। इसे लेकर आज सदर अस्पताल में भी मेगा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया है। इसके लिए व्यापक तैयारी की गई है। सुबह 10 बजे से लेकर शाम छह बजे तक रक्तदान का समय निर्धारित किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया लोगों से मेरी यही अपील है कि आज अधिक से अधिक लोग सदर अस्पताल आकर रक्दान करें और दूसरों का जीवन बचाने में अपना योगदान करें। इस पुण्य काम में सामाजिक संस्था के लोग भी अपनी भागीदारी निभाएं।
सिविल सर्जन ने बताया कि इसे लेकर सारी तैयारी कर ली गई है। सदर अस्पताल में रक्तदान शिविर को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। रक्तदान शिविर के दौरान आवश्यकतानुसार डॉक्टर और एएनएम तैनात रहेंगी। इसके अलावा रक्तदान करने वाले व्यक्ति के लिए नाश्ते में स्नेक्स की व्यवस्था की गई है। साथ ही सिक्योरिटी गार्ड, पार्किंग, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था भी है। रक्तदान करने के लिए आने वाले व्यक्तियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा गया है। रक्तदान शिविर में रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर रक्तदान करने के लिए बेड की व्यवस्था बेहतर तरीके से किया गया है।
100 से अधिक लोगों ने कराया प्री रजिस्ट्रेशनः सदर अस्पताल में आज लगने वाले रक्तदान शिविर को लेकर पहले से ही तैयारी चल रही है। इसे लेकर प्री रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई थी। सोमवार शाम तक 100 से अधिक लोगों ने प्री रजिस्ट्रेशन करवा लिया था। हालांकि आज भी लोग सीधा रजिस्ट्रेशन कराने के बाद रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान करने वाले व्यक्ति को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। रक्तदान करने के बाद नाश्ता कर सीधा अपना घर जा सकेंगे। मालूम हो कि रक्तदान शिविर में 300 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य रखा गया है।
रक्तदान करने से पहले डॉक्टर करेंगे जांचः सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। इससे उन्हें किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। रक्तदान शिविर के दौरान  डॉक्टर तैनात रहेंगे, जो रक्तदान करने के लिए आने वाले व्यक्ति की जांच करेंगे। जांच में पूरी तरह से फिट रहेंगे, तभी उनसे रक्तदान करवाया जाएगा। इसलिए मन में किसी तरह का कोई संकोच नहीं रखें। 14 जून को सदर अस्पताल आ जाएं। अगर आप रक्तदान करने के योग्य होंगे, तभी आपसे रक्तदान करवाया जाएगा।

सीपीजे कॉलेज नरेला में वार्षिक दीक्षांत समारोह हुआ संपन्न

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सीपीजे कॉलेज ऑफ हायर स्टडीज एंड स्कूल ऑफ लॉ, नरेला (गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से संबद्ध) ने सीपीजे कैंपस में 12 जून 2022 को अपना वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित किया। अतिथियों एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद महानिदेशक श्री युगांक चतुर्वेदी ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रोफेसर (डॉ.) महेश वर्मा, कुलपति, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय ने मुख्य अतिथि के रूप में दीक्षांत भाषण दिया, जिन्होंने स्नातकों को अपने-अपने क्षेत्र में बहुत सफल होने का आशीर्वाद दिया और कहा, एक तरह से छात्रों का भविष्य देश के भविष्य के साथ जुड़ा हुआ है। युवा आदर्शवाद, उत्साह और महत्वाकांक्षा से प्रेरित होते हैं। इस भूमिका को सीपीजे कॉलेज ने बखूबी निभाया है। प्रो. (डॉ.) अमिता देव, कुलपति, इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय ने भी स्नातक छात्रों को सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधित किया और उन्हें विकासशील देश की विविध आवश्यकताएँ पूरा करने के लिए परिचालन और नियामक प्रणालियों में नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए साहस और प्रतिबद्धता के लिए प्रेरित किया। महासचिव डॉ. अभिषेक जैन और महानिदेशक श्री युगांक चतुर्वेदी ने समारोह में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, छात्रों और समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया। माननीय अतिथियों ने सभी विषयों यानी बीबीए, बीबीए (सीएएम), बीकॉम (ऑनर्स।) बीसीए और बीएएलएलबी/बीबीएएलबी में 2018 और 2019 के उत्तीर्ण बैचों को डिग्री प्रदान की। यूनिवर्सिटी टॉपर्स को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। कुल मिलाकर, दीक्षांत समारोह एक शानदार सफलता रही और सभी ने इसका स्वागत किया।

संतुलित विकास के लिए महिला-पुरुष में समानता आवश्यक शर्त

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• ‘सहयोगी’ संस्था द्वारा दिया गया सम्मान
• संतुलित विकास के लिए महिला-पुरुष में समानता आवश्यक शर्त

पटना/11,जून : शनिवार को सहयोगी संस्था द्वारा सरकारी पंचायत भवन, सिमरी, बिहटा में सकारात्मक पहलकर्त्ताओं का सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिसमें लगभग 160 प्रतिभागियों ने भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान समाज में प्रचलित कुरीति के रूप में व्याप्त जेंडर आधारित भेदभाव और हिंसा को समाप्त करने हेतु किये जाने वाले प्रयासों को सराहा गया. साथ ही उपस्थित जन प्रतिनिधियों एवं अन्य प्रतिभागियों को जागरूक एवं संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया.

पाँच लोगों को किया गया सम्मानित :

कार्यक्रम में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ़ आवाज बुलंद करने वाले पाँच लोगों को सम्मानित किया गया. इन्होंने जेंडर भेदभाव एवं हिंसा को नकारते हुए अपने परिवार में सभी को समान अधिकार देने की पहल की. सम्मानित लोगों ने कहा कि जब वे ऐसे प्रयास कर रहे थे, तब उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इन कार्यों के लिए कभी सम्मानित किया जायेगा. यद्यपि उन्हें अपने घर में उनके प्रयासों के लिए विरोध भी सहना पड़ा. अब वे दुगुने उत्साह के इस दिशा में कार्य करेंगे.

समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लिंग आधारित भेद-भाव को खत्म करना जरुरी:

इस अवसर पर सहयोगी की कार्यक्रम निदेशिका रजनी ने बताया कि जिन्होंने परिवार, समाज की परवाह किये बिना जेंडर आधारित भेदभाव एवं हिंसा को नकारते हुए अपने घर एवं परिवार से सकारात्मक शुरुआत की उन्हें सम्मनित किया गया है. लड़कियों-महिलाओं के क्षमतावर्द्धन करने में परिवार के अभिभावकों-पुरुषों का योगदान आवश्यक है. समाज में महिलाओं के बढ़ते कदम में घर-परिवार के पुरुषों की भागीदारी को देखकर अन्य लोगों का भी मनोबल बढ़ेगा एवं उनमें एक सोच बनेगी कि उनके घर की लडकियों-महिलाओं की प्रगति में योगदान करना उनकी जिम्मेवारी है.
रजनी ने बताया कि घर-समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लड़कियों-महिलाओं का विकसित होना अत्यन्त अनिवार्य है. उनके समुचित पोषण, शिक्षण, स्वास्थ्य को सुनिश्चित करके ही हम सही मायने में विकास कर सकेंगे. उनकी उपेक्षा करने से हमारे विकास का सपना अधूरा ही रहेगा. हमें अपने घर-परिवार से ही समान अवसर एवं अधिकार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करने होंगे. इसके लिए समाज के पुरुषों के सहयोग की भी आवश्यकता है. उन्होंने आगे कहा कि यह देखा गया है कि जिस घर में लड़कियों-महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार-अवसर मिलते हैं, उन घरों में लड़के-लड़कियों का व्यक्तित्व विकास बेहतर होता है. वे भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक रूप से अधिक संतुलित एवं सफल होते हैं.

महिला एवं पुरुष की समान भागीदारी जरुरी:

कार्यक्रम में पंचायत के मुखिया श्री ओम प्रकाश ने कहा कि हमारी यह कोशिश रहती है कि लडकियाँ तथा महिलाएँ जागरूक हों एवं अपने अधिकार को समझें. उन्होंने सहयोगी के द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से महिलाओं-पुरुषों में जागरूकता आएगी.
सरपंच श्री ज्योतिष कुमार ने कहा कि घर-परिवार सँभालने में महिला-पुरुष दोनों की भागीदारी होगी तो बच्चे सही तरीके से सीखेंगे, लेकिन हमारे यहाँ बच्चों की जिम्मेवारी महिलाओं पर छोड़ दी जाती है. हमें यह सोच बदलनी होगी. इस अवसर पर ग्राम सचिव फौजिया नफीश, वार्ड सदस्या रूपा देवी भी शामिल थीं.

सिमरी के सरकारी पंचायत भवन में ऐसे लोगों को चिन्हित कर सम्मानित करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया सहयोगी से इस अवसर पर कार्यक्रम निदेशिका रजनी, उन्नति, उषा, रिंकी, बिंदु, निर्मला, लाजवंती, रूबी, प्रियंका, रितु, मनोज, धर्मेन्द्र, सुरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे

आशा कुसुमबाला सिन्हा घर-घर पहुंचा रहीं स्वास्थ्य सुविधाएं

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-संस्थागत प्रसव से लेकर जागरूकता तक में निभा रहीं अपनी भूमिका
-क्षेत्र के लोगों में हैं लोकप्रिय, स्वास्थ्य विभाग में भी है अलग पहचान
बांका, 10 जून-
बौंसी प्रखंड के पंडाटोली में आप किसी से भी आशा कुसुमबाला सिन्हा के बारे में पूछ लेंगे तो वह उनके बारे में पूरी जानकारी आपको दे देगा। कुसुमबाला ने क्षेत्र में यह पहचान अपनी मेहनत से बनाई है। पिछले 17 सालों से बतौर आशा कार्यकर्ता वह क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रही हैं। इस कारण क्षेत्र के एक-एक लोग उनसे मुखातिब हैं। हर किसी को पता है कि वे क्या करती हैं और कब उनकी जरूरत है। संस्थागत प्रसव से लेकर एएनसी जांच करवाने तक में कुसुमबाला सिन्हा आगे रहती हैं। हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं को एएनसी जांच करवाने के लिए बौंसी रेफरल अस्पताल भेजती हैं।
क्षेत्र के लोगों को मिल रही स्वास्थ्य सुविधाः क्षेत्र के अर्जुन भंडारी कहते हैं कि कुसुमबाला सिन्हा सभी लोगों का ख्याल रखती हैं। उन्हें एक-एक घर के बारे में जानकारी रहती है, इसलिए किसे कब किस तरह की जरूरत है, उसके अनुसार सलाह देती हैं। कब अस्पताल जाना है, यह बात वह बता देती हैं। खासकर प्रसव वाले मामले में तो उनका योगदान सराहनीय है। वहीं  मिनटुन दत्ता कहते हैं कि सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाना बहुत बड़ी बात है। हर कोई तो शिक्षित नहीं रहता , इसलिए उसे हर तरह की जानकारी भी नहीं रहती है। लेकिन कुसुमबाला के सहयोग से लोगों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में हर तरह की सुविधाएं मिल रही हैं। यह कम बात नहीं है।
लोगों को बहुत फायदा पहुंच रहाः क्षेत्र के ही अंजनी झा कहते हैं कि वह लगातार क्षेत्र के लोगों को जागरूक करती रहती हैं। कब किस चीज का छिड़काव होगा या फिर कहां मेडिकल कैंप लगेगा। टीकाकरण के लिए कहां पर जाना है। यह बताती रहती हैं। इसका लोगों को बहुत फायदा पहुंचता है। जानकारी रहने से लोग समय से हर जगह पहुंच जाते हैं। इससे समय भी बचता और लोगों का इलाज भी हो जाता है। अभिमन्यु झा कहते हैं कि कुसुमबाला ने क्षेत्र में काबिलेतारीफ काम किया है। हमलोगों को जितनी भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाएं मिल रही, वह उपलब्ध करवा रही हैं। इससे हमलोगों को आर्थिक बचत भी हो रही है । अगर वह न बताए तो आमलोगों को निजी अस्पताल में पैसा खर्च करना पड़ेगा।
सभी लोग मेरी सलाह को मानतेः कोरोना काल में भी किया बेहतर कामः कुसुमबाला कहती हैं कि पहले हमलोग प्रसव और सामान्य स्वास्थ्य से जुड़े काम करती थी। अब कोरोना आ जाने काम बढ़ गया है। चुनौती दोहरी हो गई है। सामान्य काम के साथ-साथ कोरोना को लेकर भी लोगों को जागरूक करने और टीकाकरण का काम करती हूं। अच्छी बात यह है कि लोग भी मेरी बात को मानते हैं। किसी तरह की  जिरह नहीं करते। इसका फायदा उन्हें मिल रहा है। 2005 से काम कर रही हूं। शुरुआत में थोड़ी परेशानी होती थी, लेकिन अब तो इतने दिनों का रिश्ता बन गया है। अब कोई समस्या नहीं होती। सभी लोग मेरी सलाह को मानते हैं।

टीबी के इलाज के दौरान तंबाकू और शराब का सेवन नहीं करें

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-कहलगांव एनटीपीसी अस्पताल में टीबी केयर और सपोर्ट ग्रुप की बैठक
-टीबी के मरीजों और देखभाल करने वालों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
भागलपुर, 10 जून-
कहलगांव स्थित एनटीपी अस्पताल में शुक्रवार को टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप बैठक हुई। बैठक का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने अस्पताल प्रबंधन के सहयोग से किया, जिसमें 13 मरीज और 11 देखभाल करने वाले और एक टीबी चैंपियन सम्मिलित हुए। इस दौरान टीबी मरीज को सही समय और नियमित दवाई का सेवन करने की सलाह दी गई। दवाई सेवन के दौरान होने वाली परेशानी, निक्षय पोषण के तहत मिलने वाली राशि और पौष्टिक भोजन करने के लिए भी मरीजों को बताया गया। इलाज के दौरान शराब और  तम्बाकू का सेवन नहीं करने की सलाह भी गई। बैठक में चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुष्मिता सिंह, एलटी राकेश कुमार मिश्रा और केएचपीटी से धीरज कुमार मिश्रा सम्मलित हुए।
डॉ. सुष्मिता सिंह ने बैठक के दौरान बताया कि किसी व्यक्ति को लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खांसी, बलगम के साथ खून का आना, शाम को बुखार आना या वजन कम होना की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीक के सरकारी अस्पताल में ले जाकर जांच कराने की सलाह दें। ये टीबी के लक्षण हैं। साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच और इलाज पूरी तरह मुफ्त है। लोगों को जागरूक कर ही टीबी बीमारी को समाज से मुक्त कर सकते हैं। टीबी के अधिकतर मामले घनी आबादी वाले इलाके में पाए जाते हैं। वहां पर गरीबी रहती है। लोगों को सही आहार नहीं मिल पाता और वह टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए हमलोग घनी आबादी वाले इलाके में लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोगों को बचाव की जानकारी दे रहे हैं और साथ में सही पोषण लेने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं।
बीच में दवा नहीं छोड़ेः डॉ. सुष्मिता सिंह ने बताया कि टीबी की दवा आमतौर पर छह महीने तक चलती है। कुछ पहले भी ठीक हो जाते और कुछ लोगों को थोड़ा अधिक समय भी लगता है। इसलिए जब तक टीबी की बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो जाए, तब तक दवा का सेवन छोड़ना नहीं चाहिए। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर कोई एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है तो उसे ठीक होने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। जब तक आप पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें।
भोजन के लिए मरीजों के मिलते हैं पैसेः दरअसल, टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार गंभीर है। इसीलिए टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की सुविधा मुफ्त है। साथ ही पौष्टिक भोजन करने के लिए टीबी मरीज को पांच सौ रुपये महीने छह महीने तक मिलता भी है। इसलिए अगर कोई आर्थिक तौर पर कमजोर भी है और उसमें टीबी के लक्षण दिखे तो उसे घबराना नहीं चाहिए। नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करानी चाहिए। दो सप्ताह तक लगातार खांसी होना या खांसी में खून निकलने जैसे लक्षण दिखे तो तत्काल सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।