कोविड के मुश्किल भरे दौर में 40 हजार से अधिक लोगों की ट्रूनेट मशीन से की कोरोना जाँच

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– सदर अस्पताल बाँका के लैब टेक्नीशियन अवधेश कुमार ज्योति ने की जाँच
– तमाम चुनौतियों के बाबजूद पूरी मुस्तैदी के साथ अपने कर्तव्य पथ पर डटा रहा अवधेश
बांका , 08 जून-
सामुदायिक स्तर पर समुचित और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाना तो पहले से ही स्वास्थ्य कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। किन्तु,  वर्ष 2020 में एकाएक आए कोविड संक्रमण की लहर ने तो स्वास्थ्य कर्मियों की चुनौती को और दुगुनी कर दी। हालाँकि, तमाम चुनौतियों के बावजूद जिले के तमाम स्वास्थ्य कर्मी पूरी ताकत के साथ अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहे । इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को तरह-तरह की चुनौती और परेशानी का भी सामना करना पड़ा। किन्तु, चुनौती और परेशानी को जीवन का सबसे बेहतर अवसर समझकर तमाम जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाते रहे। कोविड संक्रमण का दौर शुरू होने के बाद जब पूरी दुनिया  विपरित दौर से गुजर रहा था। लोग अपनों से भी दूरी बनाने लगे थे, घर से बाहर निकलना तो दूर, झाँकना भी मुनासिब नहीं समझ रहे थे। ऐसे मुश्किल भरे दौर में भी जिले के तमाम स्वास्थ्य कर्मी अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहे और लोगों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने में अग्रसर रहे। ऐसे ही स्वास्थ्य कर्मियों में सदर अस्पताल बाँका के लैब टेक्नीशियन अवधेश कुमार ज्योति का नाम पूरे जिले में शुमार है। अवधेश खुद की  परवाह किए  ब गैर अपनी जिम्मेदारी पर पूरी ताकत से डटे रहे और कोविड के मुश्किल भरे दौर में 40 हजार से अधिक लोगों की  ट्रूनेट मशीन से कोरोना जाँच करने में सफल रहे।
– जाँच के साथ कोविड से बचाव के लिए भी लोगों को करते रहे जागरूक :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया, सदर अस्पताल के लैब टेक्नीशियन अवधेश कुमार ज्योति हमेशा अपने कार्य के प्रति संकल्पित रहते हैं। वह कोविड के मुश्किल भरे दौर में ना केवल 40 हजार से अधिक लोगों की  कोरोना जाँच करने में सफल रहे। बल्कि,  लोगों को कोविड से बचाव के लिए जागरूक भी करते रहे। इस दौरान उन्होंने लोगों को मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन, साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने, नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोने समेत विभाग द्वारा जारी अन्य गाइडलाइन का पालन करने के लिए प्रेरित करते रहे। साथ जाँच कराने के लिए अस्पताल आने वाले लोगों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात का भी विशेष ख्याल रखा।
– वक्त जरूर मुश्किल से भरा था, पर मेरी जिम्मेदारी उससे भी बड़ी थी :
लैब टेक्नीशियन अवधेश कुमार ज्योति ने बताया, निश्चित रूप से पूरे समाज के लिए वह वक्त और दौर मुश्किल भरा था । उसी तरह मेरे लिए भी मुश्किल से भरा था। किन्तु, उससे भी बड़ी जिम्मेदारी थी। इसलिए, मैं  सकारात्मक सोच और उम्मीद के साथ अपने कर्तव्य पथ पर कभी खुद की  परवाह नहीं की  और मानव सेवा ही सर्वोच्च धर्म है, इसे हथियार बनाकर अपनी जिम्मेदारी पर पूरी मुस्तैदी के साथ डटा रहा।

कालाजार और एचआईवी संक्रमित लोगों के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने जारी किया गाइडलाइन 

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• विसरल लीशमैनियासिस के रोगियों को बेहतर, सुरक्षित और प्रभावकारी उपचार की आवश्यकता
• वीएल के 6 प्रतिशत मामले एचआईवी से संक्रमित
• रोगियों का इलाज साक्ष्य-आधारित तरीके से किया जाएगा
भागलपुर/ 8, जून। कालाजार उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग कृतसंकल्पित है। इस दिशा में विभिन्न स्तर पर प्रयास किया जा रहा है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने विसरल लीशमैनियासिस (वीएल) और एचआईवी के सह संक्रमण से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए अपने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये नए दिशानिर्देश मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर (एमएसएफ) और भागीदारों द्वारा भारत में किए गए एक अध्ययन के परिणामों और दूसरा इथियोपिया में ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिज़ीज़ इनीशिएटिव (डीएनडीआई) और भागीदारों द्वारा किए गए एक अध्ययन के परिणामों पर आधारित है। कालाज़ार के नाम से भी ज्ञात विसरल लीशमैनियासिस नामक रोग गर्म देशों में परजीवी से होने वाला एक उपेक्षित रोग है, जो सैंडफ्लाइज़ द्वारा फैलता है।    रोग के कारण बुखार आता है, वज़न कम होता है और यदि इलाज किए बिना छोड़ दिया जाए तो यह घातक भी होता है। स्थानिक क्षेत्रों में रहने वाले विसरल लीशमैनियासिस के साथ एचआईवी से प्रभावित लोगों में एचआईवी से अप्रभावित लोगों की तुलना में विसरल लीशमैनियासिस विकसित होने की संभावना 100 से 2,300 गुना अधिक होती है।
विसरल लीशमैनियासिस-एचआईवी सह-संक्रमण के लिए पिछले बताए गए उपचार में 38 दिनों तक की अवधि में नियत समय के अंतर पर लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी (एमबिसोम) के इंजेक्शन हर दिन लगाना शामिल था। नए तरीके में एम्बिसोम और ओरल मिल्टेफोसिन के संयोजन का उपयोग किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप काफी बेहतर प्रभावकारिता दर हासिल हुई है।
वीएल के 6 प्रतिशत मामले एचआईवी से संक्रमित:
बिहार राज्य में कालाजार के सबसे अधिक मामले पाए जाते हैं। अनुमानित रूप से विसरल लीशमैनियासिस के 6 प्रतिशत मामले एचआईवी से सह-संक्रमित हैं। ये सह-संक्रमित रोगी उपेक्षित हैं और कलंकित हैं, उन्हें इलाज के अच्छे परिणाम नहीं मिलते हैं और विसरल लीशमैनियासिस के लिए एक रिजरवायर के रूप में भी काम करते हैं, जो देश में स्थायी उन्मूलन प्रयासों में बाधा बन रहा है।
रोगियों का इलाज साक्ष्य-आधारित तरीके से किया जाएगा:
चिकित्सा सलाहकार और एमएसएफ में अध्ययन समन्वयक, डॉ साकिब बुर्जा ने कहा कि भारत में पहली बार विसरल लीशमैनियासिस-एचआईवी सह-संक्रमण वाले रोगियों का इलाज साक्ष्य-आधारित तरीके से किया जाएगा। नैदानिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टिकोणों से इन रोगियों को अत्यधिक कमजोर के रूप में पहचानने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।   इनके प्रबंधन में सुधार से रोगियों और विसरल लीशमैनियासिस  उन्मूलन कार्यक्रम दोनों को लाभ होगा। वैसे तो अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।   फिर भी इन रोगियों को कई जटिल चिकित्सा मुद्दों का होते हैं जिन्हें समग्र रूप से संबोधित करने की आवश्यकता होती है।   जिसमें टीबी का एक बहुत अधिक प्रसार भी शामिल है ।  भारत में किए गए अध्ययन में छह महीने की अवधि में इस नए बताए गए इलाज के तरीके को पिछले उपचार के तरीके में 88 प्रतिशत की तुलना में 96 प्रतिशत प्रभावकारी पाया गया, इलाज की अवधि महत्वपूर्ण रूप से पांच से दो सप्ताह तक कम हो गई। इथियोपिया में इस नए बताए गए इलाज के तरीके से चिकित्सा के अंत में (58 दिनों के बाद) 88 प्रतिशत प्रभावकारिता दर दिखाई गई थी, जबकि इस समय किए जा रहे मानक उपचार की प्रभावकारिता इस परीक्षण में 55 प्रतिशत थी।
नया गाइडलाइन से रोगियों के जीवन में आयेगा सुधार:
डीएनडीआई में लीशमैनियासिस और माइसेटोमा एनटीडी (नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिज़ीज़) की निदेशक डॉ।   फैबियाना अल्वेस ने कहा कि  नए डब्ल्यूएचओ दिशानिर्देश एक महत्वपूर्ण कदम हैं जिनसे उन रोगियों के जीवन में काफी सुधार आएगा जो दोनों बीमारियों से प्रभावित हैं और जो कलंक, बहिष्कार, आय की कमी और बार-बार होने वाले नुकसान से पीड़ित हैं।
एमएसएफ साउथ एशिया, महानिदेशक, डॉ फरहत मंटू कहती हैं कि एमएसएफ द्वारा हमारे सामाजिक मिशन के भाग के रूप में सबसे कमजोर आबादी और उपेक्षित बीमारियों में अनुसंधान में निवेश किया जाता है। इन सफलताओं का अर्थ यह भी है कि हमें क्षेत्र स्तर से कार्रवाई योग्य जानकारी पाने में और निवेश करना चाहिए जिससे हमारे रोगियों को नवीन, संगत, बेहतर गुणवत्ता और इलाज की सरल व्यवस्था के साथ उनका समर्थन किया जा सके।
 भारत, इथियोपिया और अन्य देश जहां ये दोनों रोग स्थानिक हैं, वहां अब डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गए नए उपचारों को अपनाने के लिए अपने स्वयं के उपचार दिशानिर्देशों को तत्काल अनुकूलित किया जाना चाहिए।
निदेशक, राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट और अध्ययन में प्रधान अन्वेषक, डॉ कृष्णा पांडे ने कहा  कि इलाज का यह नया तरीका एक बहुत अच्छी खबर है क्योंकि इससे इंजेक्शन योग्य दवाओं के उपयोग में कमी आती है और रोगियों के ठीक होने की संभावना को काफी बढ़ जाती है। इसमें 14 दिनों में तय समय पर इसे देने की सिफारिश की जाती है, जो पहले 38 दिन था। हमें इस उपलब्धि पर गर्व है।
विसरल लीशमैनियासिस के रोगियों को अभी भी बेहतर, सुरक्षित और प्रभावकारी उपचार की आवश्यकता:
डीएनडीआई में भारत और दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय निदेशक, डॉ।   कविता सिंह ने कहा कि विसरल लीशमैनियासिस के रोगियों को अभी भी बेहतर, सुरक्षित और प्रभावकारी उपचार की आवश्यकता है। यही कारण है कि डीएनडीआई और उसके सहयोगी एक सुरक्षित और प्रभावी मौखिक रूप से दी जाने वाली दवा से उपचार विकसित करने के अपने प्रयासों को जारी रख रहे हैं, जो विसरल लीशमैनियासिस से प्रभावित सभी लोगों तक पहुंच योग्य होगा।
 एमएसएफ-स्पेन के चिकित्सा निदेशक, डॉ क्रिस्टियन कैसाडेमोंट ने कहा कि  हमने एक बार फिर साबित किया है कि कई संस्थागत भागीदारों के साथ जटिल वातावरण में उच्च गुणवत्ता वाले शोध विकसित करना व्यवहार्य है और इसका एक बड़ा परिवर्तनकारी प्रभाव है।   इन नए दिशानिर्देशों से हजारों सबसे उपेक्षित लोगों के जीवन और उनकी देखभाल की गुणवत्ता में  पर्याप्त वृद्धि होगी।
भारत में इस अध्ययन को एमएसएफ-स्पेन द्वारा वित्तीय समर्थन दिया गया था, जिसमें डीएनडीआई और नेशनल वेक्टर बॉर्न डिज़ीज़ कंट्रोल कार्यक्रम द्वारा दिया गया समर्थन शामिल था। इथियोपिया में किए गए अध्ययन को यूरोपीय संघ, जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन (बीएमबीएफ) द्वारा केएफडब्ल्यू, एमएसएफ इंटरनेशनल, मेडिकोर फाउंडेशन, लिकटेंस्टीन, स्पेनिश एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट कोऑपरेशन और स्विस डेवलपमेंट कोऑपरेशन (एसडीसी) के माध्यम से आर्थिक रूप से समर्थन प्रदान किया गया था।

ऊषा केबल ने ट्रांसपरेंट केबल को मार्केट मे उतारा

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भारत की आइएसआई और बीआईएस प्रमाणित कम्पनी ऊषा केबल इंडस्ट्रीज के ब्राण्ड ऊषा केबल ने लोगों की जरूरतों को ध्यान मे रखते हुए ट्रांसपरेन्ट केबल को मार्केट में उतारा।
कम्पनी निदेशक अमन गुप्ता ने कहा की ट्रांसपरेन्ट केबल पहले भारत मे चाइना से इम्पोर्ट किया जाता था जिसकी भारत मे काफी डिमाण्ड थी यह केबल होटेल्स, रेस्टोरेंट तथा मैरिज हाल जैसी जगह पर हैंगिंग लाइट्स, सेण्डलेयर आदि में उपयोग मे लाया जाता है।
उन्होने कहा कि मानीय प्रधानमंत्री जी के मेक इन इण्डिया प्लान के तहत  इसका निर्माण भारत में अभी तक ऊषा केबल इंडस्ट्रीज ही कर रही है जिसमे अच्छी क्वालिटी मैटीरियल्स का प्रयोग किया गया हैै और यह केबल भारत के सभी सहरांे  में कम्पनी के ब्राण्ड नेम ऊषा केबल के नाम से उपलब्ध है।

किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा-अश्विनी कुमार चौबे

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नईदिल्ली-
 पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के अनुसार, किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा क्योंकि भारत ने नौ महीने तय समय से पहले ही 10% इथेनॉल  पेट्रोल और डीजल में मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।
 “भारत ने तय समय से पहले ही 10% इथेनॉल पेट्रोल और डीजल में मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।  लक्ष्य को प्राप्त करने की समयसीमा 2022 के नवंबर-दिसंबर तक था लेकिन हमने इसे 9 महीने पहले हासिल कर लिया है।  यह हमारे लिए गौरव का क्षण है।  इससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 27 लाख टन की कमी आएगी और देश के लिए लगभग 41,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।  विश्व पर्यावरण दिवस पर आईआईटी दिल्ली में ग्रीन ऊर्जा कॉन्क्लेव 2022 को संबोधित करते हुए अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि इससे किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
 “2025 तक 20% इथेनॉल  पेट्रोल और डीजल में मिलाने प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, हम इसको निर्धारित समय से पहले प्राप्त कर लेंगे और वही जीवाश्म ईंधन से हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने की योजना बना रहे हैं।  हमें इसके लिए सभी देश के नागरिकों के सहयोग की जरूरत है, ”।
 “दुनिया भर में प्रति व्यक्ति कार्बन पदचिह्न प्रति वर्ष 4 टन है, लेकिन भारत में यह केवल 0.5 टन है।  यह हमारी ताकत है।  आने वाले दिनों में हमें इस कार्बन फुटप्रिंट को शून्य पर लाना है और आज हमें यह संकल्प लेना है और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ना है।  भारत का 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करने का लक्ष्य है और हम इसे हासिल कर लेंगे।  भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत का 50% नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करेगा, ”।
 भारत के नेट-जीरो मिशन के बारे में बात करते हुए मंत्री चौबे ने कहा कि भारत 2030 तक अपने कार्बन फुटप्रिंट को भी 1 बिलियन टन कम कर देगा और हम 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल कर लेंगे। इस लक्ष्य की ओर, हमारा आदर्श संदेश है ‘स्वच्छ पवन, नील गगन’ ।  (स्वच्छ हवा, नीला आकाश)।
 ग्रीन ऊर्जा कॉन्क्लेव 2022 का आयोजन कन्फेडरेशन ऑफ रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस प्रोफेशनल्स एंड इंडस्ट्रीज (CRESPAI) ने IIT दिल्ली और IIM लखनऊ के सहयोग से किया।
 मैरी कॉम और द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाने वाले बॉलीवुड अभिनेता दर्शन कुमार ने भी इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं  ग्रीन ग्लोब अवार्ड 2022 को 14 श्रेणियों में व्यक्तियों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों पर्यावरण की सुरक्षा और हरित ऊर्जा में नवाचारों के लिए उनके अथक प्रयास के लिए प्रदान किया जाता है।  ग्रीन ऊर्जा कॉन्क्लेव में देश भर के कई हरित नायकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संरक्षणवादियों ने भाग लिया।
 “हम सभी जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन एक वास्तविकता है और यह स्थानीय से लेकर केंद्र सरकार के निकायों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों तक सभी हित के लिए से मिलजुलकर काम करने की जरुरत है।  सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के संस्थानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने की जिम्मेदारी साझा करनी होगी।  सतत विकास के लिए नीति निर्माताओं, उद्योगों और नागरिक समाज संगठनों को एक साथ आना होगा।  CRESPAI सभी हितधारकों के लिए एक मंच प्रदान करके स्वच्छ ऊर्जा और हरित पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है, ”CA सुधीर कुमार दास, CRESPAI ने बोलते हुए यह अपील भी की।

डेंगू व चिकनगुनिया के प्रति लोगों को जागरूक करने को जिला भर में चल रहा अभियान

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–  अभियान की सफलता के लिए सभी पीएचसी और सीएचसी के एमओआईसी को भेजे  गए   हैंडबिल /पम्पलेट
मुंगेर, 7 जून-
डेंगू एवं चिकनगुनिया बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जिला भर में जागरूकता अभियान चल रहा है। इस संबंध में सिविल सर्जन के निर्देशानुसार जिला के सभी सीएचसी और पीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर जागरूकता अभियान को सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों को हैंड बिल/ पम्पलेट उपलब्ध करायी गयी ताकि लोगों को इसके लिए जागरूक किया जा सके।
वेक्टर डिजीज कंट्रोल ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया किसी न किसी मच्छर के काटने से होता है। वर्षा का मौसम शुरू होने के साथ ही डेंगू और चिकनगुनिया का संक्रमण काल भी शुरू हो जाता है। इसके लिए डेंगू एवं चिकनगुनिया बीमारी पर नियंत्रण के लिए गतिविधियों में और गतिशीलता लाने का कार्य किया जा है। इसके तहत लार्विसाइडल स्प्रे, रैपिड रिस्पांस टीम का गठन करने के साथ ही टेक्नीकल मालाइथिल का छिड़काव के साथ ही डेंगू केस की  रिपोर्टिंग और जनजागरूकता अभियान चलाया  जाता है। उन्होंने बताया कि डेंगू एवं चिकनगुनिया से बचाव को लिए राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए हैंड बिल/पम्पलेट को जिला के सभी सीएचसी और पीएचसी के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को उपलब्ध करा दी गई है। ये पदाधिकारी अपने क्षेत्र में कार्यरत आशा कार्यकर्ता को ये हैंड बिल /पम्पलेट देंगे जो घर-घर जाकर लोगों को इस पम्पलेट के माध्यम से डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी से बचने के लिए जागरूक करेंगी। उन्होने बताया कि जिला में कहीं भी यदि डेंगू एवं चिकनगुनिया का संक्रमित मरीज पाया जाता है तो उस व्यक्ति के घर से 500 मीटर की परिधि में टेक्नीकल मालाइथिल की  फॉगिंग करायी जाती है। उन्होंने बताया कि डेंगू एवं चिकनगुनिया की बीमारी एडिस मच्छर के काटने से होती है। यह मच्छर दिन में काटता है एवं स्थिर साफ पानी में पनपता है।
डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण :
मुंगेर के वेक्टर डिजीज कंट्रोल ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि लोगों में डेंगू और चिकनगुनिया के ये लक्षण हो सकते हैं –
– तेज बुखार, बदन,सर एवं जोरों में दर्द तथा आंख के पीछे दर्द
– त्वचा पर लाल धब्बे/चकते का निशान
– नाक, मसूड़ों से उलटी के साथ रक्तस्राव होना सराव
बचने के उपाय :
– दिन में भी मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का करें इस्तेमाल ।
– अपने आसपास  रखें साफ-सुथरा एवम जमा पानी में करें कीटनाशक दवाओं का छिड़काव ।
– गमला, फूलदानी का पानी हर दूसरे दिन बदलें, जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें।

गोदभराई उत्सव • आंगनबाड़ी केंद्रों पर उचित पोषण की दी गई जानकारी 

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– नियमित और कोविड टीकाकरण को लेकर लाभार्थियों को किया गया जागरूक
– जिले के सभी प्रखंडों में उत्सवी माहौल में मनायी  गयी  गोदभराई, स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर किया गया जागरूक
खगड़िया, 07 जून-
मंगलवार को पूर्व से निर्धारित तिथि के अनुसार जिले के सभी प्रखंडों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर उत्सवी माहौल में गोदभराई उत्सव मनाया गया। जिसके दौरान लाभार्थियों को पोषण से संबंधित विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई एवं स्वस्थ समाज निर्माण को लेकर जागरूक किया गया। मंगल गीतों से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया और गर्भवती महिला को उपहार स्वरूप पोषण की पोटली दी गई है। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली, पोषाहार व फल आदि शामिल थे। महिलाओं को उपहार स्वरुप पोषण की थाली भी भेंट की गयी। जिसमें सतरंगी व अनेक प्रकार के पौष्टिक भोज्य पदार्थ शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर और टीका लगाकर गोदभराई रस्म पूरी की गई। वहीं, सभी महिलाओं को अच्छी  सेहत के लिए पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
– सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए उचित पोषण की बेहद जरूरी :
आईसीडीएस की  जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सुनीता कुमारी ने बताया, गोदभराई रस्म में सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ाकर और तिलक लगा कर उनके गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य की कामना की गई। साथ ही गर्भवतियों की गोद में पोषण संबंधी पौष्टिक आहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध, अंडा, दाल सेवन करने का तरीका बताया गया। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी गई। जिसमें बताया गया कि गर्भवती महिला कुछ सावधानी और समय से पौष्टिक आहार का सेवन करें तो बिना किसी अड़चन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। वहीं, उन्होंने बताया, सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए उचित पोषण  बेहद जरूरी है।
– नियमित और कोविड टीकाकरण को लेकर लाभार्थियों को किया गया जागरूक :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, गोदभराई उत्सव कार्यक्रम के दौरान मौजूद लाभार्थियों को नियमित टीकाकरण कराने को लेकर भी जागरूक किया गया और नियमित टीकाकरण के महत्व एवं होने वाले फायदे की जानकारी भी दी गई। साथ ही कोविड के संभावित चौथे लहर से सुरक्षा के मद्देनजर वैक्सीनेशन कराने को लेकर भी जागरूक किया गया। इसके अलावा मौजूद लाभार्थियों को बताया गया कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल माँ का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है। सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण होने के साथ ही महिलाओं को चिकित्सकों से जाँच करानी  चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए आदि जानकारी दी गई।
– पोषण ट्रैकर एप की सेविकाओं को दी गई जानकारी :
पोषण ट्रैकर एप संचालन सुनिश्चित करने को लेकर खगड़िया सदर प्रखंड के कोठिया पंचायत की सेविकाओं के साथ-साथ एक सेक्टर मीटिंग की गई। जिसमें जिला समन्वयक अंबुज कुमार द्वारा मौजूद सभी सेविकाओं को पोषण ट्रैकर एप से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। जिसके दौरान उन्होंने मौजूद सेविकाओं को बताया, राज्य सरकार द्वारा आईसीडीएस के माध्यम से संचालित किए जा रहे सभी कार्यक्रमों की शत-प्रतिशत निगरानी के साथ ही मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया को अपग्रेड किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने पोषण ट्रैकर के नाम से एक ऑनलाइन एप  विकसित किया है। इसके माध्यम से जिला के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी और मूल्यांकन में आसानी होगी। ऑगनबाड़ी केंद्रों की महत्ता को देखते हुए अब इसे पूरी तरीके से हाईटेक करने की तैयारी की जा रही है ताकि आईसीडीएस के स्तर पर दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता व संचालन को और अधिक सुविधाजनक और सरल बनाया जा सके।

फाइलेरिया उन्मूलन • जिले में 07 जुलाई से चलेगा एमडीए अभियान 

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– घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को दवाई का कराया जाएगा सेवन
– आशा कार्यकर्ता द्वारा पात्र व्यक्ति को सामने में खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल और डीईसी की दवा
लखीसराय, 07 जून।
जिले में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए अगले माह 07 जुलाई से एमडीए अभियान चलेगा। जिसके माध्यम से गठित स्वास्थ्य टीम द्वारा घर-घर जाकर सभी पात्र (योग्य) व्यक्तियों को दवाई का सेवन कराया जाएगा। साथ ही इस दौरान फाइलेरिया से बचाव के लिए लोगों को जरूरी और आवश्यक सलाह दी जाएगी तथा जागरूक भी किया जाएगा। इसे सुनिश्चित करने को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिसमें अभियान का शुभारंभ होने के पूर्व सारी जरूरी तैयारियाँ पूरी कर लेने को कहा है। ताकि हर हाल में निर्धारित समय पर अभियान का शुभारंभ हो सके और सफलतापूर्वक समापन सुनिश्चित हो सके।
– गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को नहीं खिलाई जाएगी दवा :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, अभियान के दौरान घर-घर जाकर लोगों को एलबेंडाजोल और डीईसी की दवाएं पात्र व्यक्तियों को खिलाई जाएगी। उक्त दवा गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के अलावा दो वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों को छोड़कर शेष सभी लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा खिलाई जाएगी। साथ ही इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए जागरूक किया जाएगा । ताकि उक्त अभियान का सफलतापूर्वक समापन एवं बीमारी पर रोकथाम संभव हो सके। वहीं, उन्होंने बताया, इस बीमारी से बचाव के लिए दवाई के साथ-साथ एहतियात भी जरूरी है। इसलिए, अभियान के दौरान योग्य व्यक्तियों को दवाई तो खिलाई ही जाएगी। इसके अलावा इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को आवश्यक जानकारी भी दी जाएगी। जैसे कि, घर के आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें एवं घरों में सोने से पहले मच्छरदानी का उपयोग करें। साथ ही अन्य लोगों को दवा सेवन के प्रति जागरूक भी करें, ताकि फाइलेरिया जैसी बीमारी जड़ से समाप्त हो सके। इस बीमारी को पूरी तरह से मिटाने के लिए जागरूकता भी बेहद जरूरी है।
– अभियान के दौरान परिवार के सदस्यों के विवरण की भी ली जाएगी जानकारी :
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी गौतम प्रसाद ने बताया, अभियान के दौरान प्रत्येक परिवार के सदस्यों के  विवरण की भी जानकारी ली जाएगी। जैसे, परिवार में कुल कितने सदस्य हैं। सभी का नाम, उम्र समेत अन्य जानकारी प्राप्त पंजी में पूरा डिटेल दर्ज किया जाएगा। साथ ही दो वर्ष से छोटे बच्चे, गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति एवं गर्भवती व एक सप्ताह पूर्व माँ बनी महिलाओं का भी विवरण लेकर अलग पंजी में दर्ज किया जाएगा। ताकि हमें इस रिकॉर्ड बुक से आगे के अभियान में सहयता मिल सके ।
– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोसील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।
– इन बातों का रखें ख्याल :
– भूखे पेट दवा नहीं खिलानी  है।
– किसी के बदले किसी अन्य को दवा ना दें और स्वास्थ्य कर्मी के सामने दवा खाएं।
– गर्भवती महिलाओं को दवा नहीं खिलानी  है।
– 02 वर्षछोटे बच्चे को दवा नहीं खिलानी  है।
– गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को भी दवा नहीं खिलानी  है।

फुलवारीशरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 8 फ़ाइलेरिया मरीजों को मिली एमएमडीपी किट

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• प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी ने किये मरीजों के बीच किट का वितरण
• प्रखंड को हुआ है 25 एमएमडीपी किट का आवंटन
• दानापुर एवं फुलवारीशरीफ प्रखंड के मरीजों को मिली किट
पटना/ 7 जून-
फ़ाइलेरिया से ग्रसित हाथीपांव के मरीजों के लिए जिले में रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता रोकथाम किट ( एमएमडीपी किट ) सेल्फ केयर का वितरण शुरू हो चुका है. इसी क्रम में मंगलवार को फुलवारीशरीफ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 8 फ़ाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का वितरण किया गया. मरीजों में 2 दानापुर प्रखंड एवं 6 फुलवारीशरीफ प्रखंड के निवासी हैं.
प्रखंड चिकित्सा प्रभारी ने किया मरीजों के बीच किट का वितरण:
फ़ाइलेरिया मरीजों के बीच किट का वितरण फुलवारीशरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजकिशोर चौधरी द्वारा किया गया. डॉ. चौधरी ने मरीजों को विस्तारपूर्वक किट के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी. किट पाने वाले मरीजों में भुसौला दानापुर के मोती राम एवं मुन्नी देवी तथा फुलवारीशरीफ प्रखंड के लाल बाबु राय, लक्ष्मी पासवान, चिंता देवी, सरस्वती देवी, पटेल पंडित तथा काशी राय शामिल थे. फुलवारीशरीफ प्रखंड को 25 एमएमडीपी किट का आवंटन किया गया है.
सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान सभी खाएं फ़ाइलेरिया की दवा:
मरीजों को संबोधित करते हुए डॉ. चौधरी ने बताया फ़ाइलेरिया से सुरक्षा का सबसे प्रमुख माध्यम हर साल सर्वजन दवा सेवन अभियान के दौरान डीईसी व अल्बेंडाजोल की गोली का सेवन जरुर करें तथा अपने परिवार के लोगों को भी खाने के लिए कहें. साल में एक बार तथा पांच साल तक लगातार इस दवा के सेवन से इंसान आजीवन फ़ाइलेरिया के संक्रमण से सुरक्षित रह सकता है. इसके अलावा स्वच्छता का पालन करना और जागरूक रहकर संक्रमण से बचा जा सकता है.
सीफार द्वारा गठित पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के 15 फ़ाइलेरिया मरीजों को मिलेगी किट:
प्रखंड को 25 किट का आवंटन किया गया है जिसमे सीफार द्वारा गठित पेशेंट सपोर्ट ग्रुप के 15 फ़ाइलेरिया मरीजों को किट का वितरण किया जायेगा. इसी क्रम में आज 8 मरीजों को किट वितरित किया गया. फ़ाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत सीफार द्वारा गठित पेशेंट सपोर्ट ग्रुप का मुख्य उद्देश्य लोगों में फ़ाइलेरिया संबंधी जागरूकता फैलाना एवं नेटवर्क तैयार कर मरीजों तक उचित उपचार एवं चिकित्सकों से संवाद स्थापित करना है.
इस अवसर पर प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक अम्बिका कुमार, सीफार की तरफ से नवनीत, अर्पिता एवं विकास सहित अन्य अधिकारी एवं आशाकर्मी उपस्थित थे

जगदीशपुर सीएचसी में टीबी मरीजों ने साझा की अपनी परेशानी

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मरीजों को इस तरह की परेशानी नहीं होने देने का किया वादा
सीएचसी में केएचपीटी ने केयर और सपोर्ट ग्रुप की बैठक की
भागलपुर, 7 जून-
जगदीशपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मंगलवार को कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से टीबी केयर और सपोर्ट ग्रुप की एक बैठक की। बैठक में 10 टीबी मरीज, एक टीबी चैंपियन और 8 केयर गिवर उपस्थित थे। बैठक में टीबी के मरीजों ने अपनी परेशानी को साझा किया। वहीं केएचपीटी के को-ऑर्डिनेटर फैयाज खान ने इस तरह की परेशानी नहीं होने देने का वादा किया। साथ में चिकित्सकीय सलाह भी दी गयी।
केएचपीटी की जिला टीम लीडर आरती झा कहती हैं कि टीबी मरीजों से समाज के लोगों को किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। लोगों को टीबी मरीजों के इलाज में सहयोग करना चाहिए। अगर हमलोग इलाज में सहयोग करेंगे तो जल्द से जल्द समाज टीबी से मुक्त होगा। इसलिए मरीजों के इलाज के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। जागरूक लोगों को टीबी मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बात करनी चाहिए। मानसिक तौर पर मरीजों का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने टीबी मरीजों से कहा कि यह एक संचारी रोग है, जो एक से दूसरे व्यक्ति में ड्रॉपलेट के जरिये आसानी से फैलता है। इसलिए टीबी के लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं। जांच में अगर पुष्टि हो जाती है तो दवा का सेवन शुरू कर दें। टीबी का इलाज सरकार की तरफ से बिल्कुल ही मुफ्त है और यह सभी तरह के सरकारी अस्पताल में होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसके समुचित इलाज की व्यवस्था है। यदि किसी को तीन सप्ताह तक लगातार खांसी हो या फिर खांसी में खून आने लगे, बुखार और कफ आने की शिकायत हो तो तत्काल जांच कराएं।
जिनके घर में मधुमेह के मरीज, वे रहें सावधानः सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने कहा कि आजकल अधिकतर घरों में मधुमेह के मरीज देखे जा रहे हैं। इस वजह से लोग संतुलित आहार लेते हैं। लोग पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं। इससे भी लोग टीबी की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसलिए अगर किसी के घर में मधुमेह के मरीज हों तो डॉक्टर से पूछकर अपना आहार तालिका बनाएं, ताकि कुपोषण का शिकार होने से बचें और टीबी जैसी बीमारी से बचाव हो सके।
बच्चों के पोषण पर दें ध्यानः डॉ. दीनानाथ ने बताया कि टीबी को लेकर बच्चों को काफी सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चे के पोषण में अगर कमी हो जाए तो उसे आसानी से टीबी अपनी चपेट में ले लेता है। इसलिए कम बच्चे ही अच्छे होते हैं। अगर आपके कम बच्चे होंगे तो उसका सही से ध्यान रख पाएंगे। उसके पोषण के प्रति जागरूक रहेंगे और वह टीबी समेत दूसरी बीमारियों से बचा रहेगा।
टीबी के लक्षण
1. दो हफ़्ते या अधिक खांसी आना- पहले सूखी खांसी तथा बाद में बलगम के साथ खून का आना।
2. रात में पसीना आना-चाहे मौसम ठंढे का क्यों न हो।
3. लगातार बुखार रहना
4.थकावट होना
5.वजन घटना
6.सांस लेने में परेशानी होना
बचाव के तरीके
1. जांच के बाद टीबी रोग की पुष्टि होने पर दवा का पूरा कोर्स लें।
2. मास्क पहनें तथा खांसने या छींकने पर मुंह को पेपर नैपकीन से कवर करें।
3.मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें।
4.मरीज हवादार और अच्छी रौशनी वाले कमरे में रहें। एसी से परहेज करें।
5. पौष्टिक खाना खाएं। योगाभ्यास करें।
6. बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तम्बाकू, शराब आदि से परहेज करें।
7.  भीड़भाड़ वाली गंदी जगहों पर जानें से बचें।

14 जून को सदर अस्पताल में लगेगा मेगा रक्तदान शिविर

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-300 यूनिट रक्त संग्रह करने का रखा गया है लक्ष्य
-इच्छुक व्यक्ति सदर अस्पताल में कर सकते हैं रक्तदान
भागलपुर, 7 जून-
14 जून को विश्व रक्तदान दिवस है। जिला स्वास्थ्य समिति ने इस दिन सदर अस्पताल में मेगा रक्तदान शिविर लगाने का फैसला किया है। शिविर में 300 यूनिट तक रक्त संग्रह करने का लक्ष्य रखा गया है। इसे लेकर तैयारी शुरू हो गई है। सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल के प्रभारी को इसे लेकर चिट्ठी भी जारी कर दी है। साथ ही तैयारी में जुट जाने के लिए कहा है। सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने बताया है कि छह जून को जिलाधिकारी के साथ बैठक में इस तरह के आयोजन करने का फैसला लिया गया था, जिस पर अमल किया गया है। उन्होंने कहा कि रक्तदान जीवनदान जैसा है, इसलिए इच्छुक लोग उस दिन सदर अस्पताल में आकर रक्तदान करें और दूसरों के जीवन को बचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को अदा करें। साथ ही लोगों से मैं यह भी अपील करना चाहता हूं कि इस बात की जानकारी अधिक-से-अधिक लोगों को दें, ताकि वे भी 14 जून को सदर अस्पताल में आकर रक्दान कर सकें।
शिविर के दौरान रहेगी विशेष व्यवस्थाः सिविल सर्जन ने पत्र के जरिये सदर अस्पताल के प्रभारी को 14 को रक्तदान शिविर के दिन विशेष व्यवस्था करने के लिए कहा है। जैसे कि रक्तदान शिविर के दौरान हमेशा चार डॉक्टर और चार एएनएम तैनात रहेंगी। इसके अलावा रक्तदान करने वाले व्यक्ति के लिए नाश्ते में स्नेक्स की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। साथ ही सिक्योरिटी गार्ड, पार्किंग, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है, ताकि रक्तदान करने के लिए आने वाले व्यक्ति को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। रक्तदान शिविर में रजिस्ट्रेशन काउंटर से लेकर रक्तदान करने के लिए बेड की व्यवस्था बेहतर तरीके से करने के लिए कहा गया है।
आज से शुरू हो जाएगा रजिस्ट्रेशनः मेगा रक्तदान शिविर को लेकर आज से रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा। इच्छुक व्यक्ति सदर अस्पताल आकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इससे उन्हें सहूलियत मिलेगी। रजिस्ट्रेशन हो जाने से रक्तदान वाले दिन उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति सीधा 14 जून को निर्धारित समय पर आकर रक्तदान करेंगे। रक्तदान करने के बाद नाश्ता कर सीधे अपने घर जा सकेंगे।
स्वस्थ व्यक्ति कर सकते हैं रक्तदान, कोई नुकसान नहीं होगाः सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने कहा कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। इससे उन्हें किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा। रक्तदान शिविर के दौरान चार डॉक्टर तैनात रहेंगे, जो रक्तदान करने के लिए आने वाले व्यक्ति की जांच करेंगे। जांच में पूरी तरह से फिट रहेंगे, तभी उनसे रक्तदान करवाया जाएगा। इसलिए मन में किसी तरह का कोई संकोच नहीं रखें। 14 जून को सदर अस्पताल आ जाएं। अगर आप रक्तदान करने के योग्य होंगे, तभी आपसे रक्तदान करवाया जाएगा। इच्छुक व्यक्ति उससे पहले आकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इससे उन्हें सहूलियत होगी।