चानन सीएचसी में अब प्रतिदिन उपलब्ध होगी नियमित और कोविड टीकाकरण की सुविधा 

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– आमलोगों को होगी सहूलियत, टीकाकरण की रफ्तार को मिलेगी गति
लखीसराय, 06 जून
लखीसराय सदर पीएचसी के अधीनस्थ संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चानन में अब प्रतिदिन नियमित (आर. आई) के साथ  कोविड टीकाकरण की सुविधा   उपलब्ध रहेगी। ताकि नियमित  और कोविड दोनों टीके के योग्य लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण करा सके और टीका लेने के लिए लोगों को बाहर नहीं जाना पड़े। इस सुविधा की शुरुआत सोमवार से कर दी गई है। जिसका शुभारंभ डीआईओ सह एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार भारती, लखीसराय सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रौशेक कुमार, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक निशांत राज, आर आई नोडल डॉ. विजेंद्र कुमार, यूनिसेफ के एसएमसी नैय्यर उल आजम समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में हुई ।  वहीं, उक्त सुविधा से जहाँ लोगों को टीकाकरण कराने में सहूलियत होगी। वहीं, निर्धारित समय पर लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित होगा। साथ ही चल रहे टीकाकरण की रफ्तार को भी गति मिलेगी। इस मौके पर लखीसराय पीएचसी के स्वास्थ्य  कर्मी मौजूद थे।
– सुविधाजनक तरीके से लाभार्थी करा सकेंगे टीकाकरण:
डीआईओ सह एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया, जिले के सुदूर वर्ती इलाके में स्थित चानन सीएचसी में पहली बार प्रतिदिन नियमित और कोविड टीकाकरण की सुविधा बहाल कर दी गई है। इससे ना सिर्फ योग्य लाभार्थी सुविधाजनक तरीके से टीकाकरण करा सकेंगे। बल्कि, अब उक्त सुदूर वर्ती इलाके के लोगों को टीकाकरण की सुविधा मिल सके एवं  इस सुविधा से टीकाकरण की रफ्तार को भी गति मिलेगी। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित और कोविड टीकाकरण कराने वाले सभी लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकृत किया जाएगा।
– घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत भी लोगों को दी जा रही कोविड वैक्सीन:
लखीसराय सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.  रौशेक कुमार ने बताया, लोगों को टीकाकरण कराने में किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो, इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है और इसे सुनिश्चित करने को लेकर हर जरूरी निर्णय भी लिए जा रहे हैं। ताकि सभी लोग सुविधाजनक तरीके से वैक्सीनेशन करा सके। वहीं, उन्होंने बताया, लोगों की सुविधा को देखते हुए चानन सीएचसी में प्रतिदिन नियमित और कोविड टीकाकरण सुविधा शुरुआत कर दी गई है। इसके अलावा हमारी स्वास्थ्य टीम द्वारा घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान के तहत घर-घर जाकर भी योग्य लाभार्थियों का टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही नियमित टीकाकरण के लिए लाभार्थियों को जागरूक कर टीकाकृत किया जा रहा है। ड्यूटी में लगे सभी स्वास्थ्य टीम पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी का बेहतर तरीके से  निर्वहन कर रही  है ।

गर्भवती एवं गर्भस्थ शिशु के  शारीरिक और मानसिक विकास के लिए  आयोडीन जरूरी 

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– उचित आयोडीन से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास मजबूत होगा
– आयोडीन की कमी से गर्भस्थ शिशु के  शारीरिक व मानसिक विकास में हो सकती  है परेशानी
खगड़िया, 06 जून-
गर्भधारण के साथ ही हर महिला  में सुरक्षित प्रसव व स्वस्थ बच्चे के  जन्म की  पहली चाहत होती है। किन्तु, इसके लिए  गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत है। तभी सुरक्षित प्रसव और स्वस्थ बच्चे का जन्म संभव हो सकता है। अन्यथा थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती  है। इसके लिए शरीर में उचित आयोडीन की मात्रा हो, इसको लेकर सजग रहने की जरूरत है। दरअसल, आयोडीन की कमी से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसलिए, स्वस्थ बच्चे के  जन्म के लिए शरीर में पर्याप्त आयोडीन होना बेहद जरूरी है।
– गर्भस्थ शिशु के  शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडीन जरूरी :
खगड़िया सदर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी ने बताया, गर्भस्थ शिशु के  शारीरिक और मानसिक विकास के लिए गर्भवती के शरीर में उचित मात्रा में आयोडीन होना जरूरी है। दरअसल, आयोडीन की कमी के कारण कम वजन वाला शिशु जन्म लेता है। इतना ही नहीं ऐस में मृत शिशु का भी जन्म हो सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान हर गर्भवती को आयोडीन को लेकर सजग रहना चाहिए। इसके लिए चिकित्सकों से सलाह लेनी चाहिए।
– आयोडीन युक्त नमक का करें उपयोग :
आयोडीन मिट्टी एवं पानी में पाया  जाने वाला  सूक्ष्म तत्व है। आयोडीन की  कमी की समस्याओं को दूर करने के लिए आयोडीन युक्त नमक का सेवन करना चाहिए। यह हर आयु वर्ग के लोगों के लिए जरूरी है। क्योंकि, आयोडीन का शरीर में उचित मात्रा होना हर किसी के लिए जरूरी है। हालाँकि, अल्पमात्रा में ही आयोडीन हमारे शरीर के लिए जरूरी है।
– आयोडीन की कमी  महसूस होते ही चिकित्सकों से कराएं जाँच :
शरीर में आयोडीन की कमी  महसूस होते ही तुरंत चिकित्सकों से जाँच करानी  चाहिए और चिकित्सा परामर्श के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। इसका शुरुआती लक्षण है शुष्क त्वचा, बालों का झड़ना, बोली में भारीपन समेत शरीर में अन्य परेशानी महसूस होना। इसलिए, आहार के साथ उचित आयोडीन का सेवन करना जरूरी है।
– आयोडीन की कमी से कई तरह की होती है परेशानी :
आयोडीन एक पोषक तत्व है। जिसकी  कमी से लोगों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। जैसे कि, नींद अधिक आना, श्वास व हृदय से संबंधित परेशानी, डिप्रेशन, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द, गर्भपात, विकलांगता आदि।    वयस्कों के लिए सामान्यतः प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम (एमसीजी)आयोडीन की आवश्यकता होती है। जबकि, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रति दिन 200 एमसीजी जरूरी है।

जीविका दीदियों को टीबी से बचाव की दी गई जानकारी

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-सबौर के खानकित्ता में ट्रेनिंग का किया गया आयोजन
-जीविका के 10 ग्राम संगठनों ने ट्रेनिंग में लिया भाग
भागलपुर, 6 जून-
स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से कर्नाटका हेल्थ प्रमोशनल ट्रस्ट (केएचपीटी) ने सोमवार को सबौर प्रखंड के खानकित्ता में सामुदायिक स्तर पर टीबी को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जीविका दीदियों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत की। ट्रेनिंग दो दिनों तक चलेगी। पहले दिन सोमवार को जीविका के कुल 10 ग्राम संगठनों को ट्रेनिंग दी गई। इसमें इंग्लिश, चंधेरी और फरका गांव के 26 सदस्यों ने भाग लिया। ट्रेनिंग देने का काम श्वेता कुमारी और संदीप कुमार ने किया। मौके पर प्रदीप कुमार, मिथिलेश कुमार, अनिता भारती, रिंकु कुमारी और सावित्री देवी उपस्थित थीं।
ट्रेनिंग के दौरान जीविक दीदियों को बताया गया कि सामुदायिक स्तर पर आपलोग लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करें। टीबी के प्रति समाज में जो भ्रम है, उसे दूर करना बहुत जरूरी है। इसमें आपलोग बहुत कारगर साबित हो सकती हैं। लगातार दो हफ्ते तक खांसी, खांसी के दौरान बलगम के साथ खून आना, शाम को बुखार के साथ पसीना आने के लक्षण अगर किसी में दिखे तो उसे तत्काल टीबी जांच कराने की सलाह दें। समाज के लोगों को समझाएं कि टीबी के प्रति भेदभाव करने के बजाय उसका इलाज करवाएं। सरकारी स्तर पर टीबी का मुफ्त में इलाज होता है। साथ ही पोषण के लिए टीबी मरीजों को एक निश्चित राशि भी दी जाती है।
 केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट टीम लीडर आरती झा ने   लोगों को बताया कि लगातार दो हफ्ते खांसी होना, बलगम के साथ खून आना, वजन कम होना, शाम के वक्त अधिक पसीना आना आदि लक्षण टीबी के हैं। इस तरह की परेशानी होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में जाएं और जांच करवाएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल इलाज करवाएं। टीबी के इलाज की व्यवस्था सरकार की तरफ से मुफ्त में होता है। साथ टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए 500 रुपये प्रतिमाह सहायता राशि भी मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण में समुदाय के लोग शामिल रहे। इनकी बातों को लोग ज्यादा गौर से सुनेंगे औऱ इसका असर पड़ेगा। लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
टीबी मरीजों से नहीं करें भेदभावः सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने कहा कि पहले टीबी बीमारी के प्रति छुआछूत अधिक थी, लेकिन जागरूकता बढ़ने से इसमें कमी आई है। टीबी एक संक्रामक  बीमारी जरूर है, लेकिन इसका इलाज संभव है। अगर कोई टीबी के लक्षण वाले लोग दिखते हैं तो उससे घृणा करने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करें। ऐसा करने से मरीज का इलाज समय पर हो जाएगा और वह ठीक हो जाएगा। उसके ठीक होने से इसका संक्रमण दूसरों में भी नहीं होगा। साथ ही टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने की आशंका रहती है। एमडीआर टीबी होने पर ठीक होने में ज्यादा समय लग जाता है। इसलिए बीच में दवा नहीं छोड़ें।
टीबी को हल्के में नहीं लेना चाहिएः डॉ  दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं। डॉ  दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी  समाप्त हो जाएगा।

आशा कार्यकर्ता अंबिका कुमारी ने अपनी मेहनत से क्षेत्र में बनाई है पहचान

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-बाराहाट प्रखंड के हैवतपुर-लखपुरा क्षेत्र में लोगों को पहुंचा रहीं सुविधाएं
-एएनसी जांच कराने से लेकर संस्थागत प्रसव कराने में महारथ  हासिल
बांका,  6 जून।
जिले की कई आशा कार्यकर्ता बेहतर काम कर रही है। रूटीन काम से लेकर कोरोना काल में शानदार योगदान दिया है। बाराहाट प्रखंड के हैवतपुरj-लखपुरा गांव की आशा कार्यकर्ता अंबिका कुमारी भी बेहतर काम करने वाली आशा में गिनी जाती हैं। प्रसव से जुड़े कार्य कराने में तो इन्हें महारथ  हासिल है। एएनसी जांच से लेकर संस्थागत प्रसव कराने में भी इनकी कोई सानी नहीं  है। इसी का परिणाम है कि गांव के लोग से लेकर अस्पताल प्रभारी के गुडबुक में इनका नाम दर्ज है।
12 साल से अधिक का है बेमिसाल करियरः 25 नवंबर 2009 से काम कर रही हैं। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। 12 साल से अधिक समय से काम कर रही हैं, इसके बावजूद इनपर निश्चिंतता का भाव नहीं है। ग्रामीण बनारसी मंडल कहते हैं कि अंबिका दीदी लगातार क्षेत्र में आती हैं। सभी से हालचाल पूछती हैं। अगर किसी के घर में प्रसूता है तो उसे सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता के बारे में बताती हैं, जिसका फायदा आमलोग ले पाते हैं। ग्रामीण रीता देवी कहती हैं कि सरकार की तरफ से जो भी सुविधाएं मिलती हैं, उसकी जानकारी सभी लोगों को नहीं रहती है, लेकिन अंबिका की वजह से हमलोग उससे अवगत होकर लाभ उठा पाते हैं। वरना गरीबी के कारण तो लोग अस्पताल और डॉक्टर के पास जाने से भी कतराते हैं।
अमीर लोग जैसे इलाज कराते हैं, उसी तरह से हमलोग भी करा रहेः पूरन मंडल कहते हैं कि सरकार आमलोगों को इतनी सुविधाएं देती है। अंबिका के प्रयास से हमलोग उसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। प्रसव पूर्व जांच से लेकर प्रसव कराने तक में एक भी पैसा खर्च नहीं होता है। अमीर लोग जैसे अपना इलाज कराते हैं, उसी तरह हमलोग भी हर तरह का लाभ उठा रहे हैं। वह भी मुफ्त में। मुरारी राउत कहते हैं, अंबिका के प्रयास से लोगों में जागरूकता बढ़ी है। आज हमलोग इस बात की जानकारी रखने लगे हैं कि किस बीमारी का इलाज कहां कराना है और सरकार की तरफ से उसके लिए क्या सहायता मिलती है। यह सब अंबिका के प्रयास से ही सफल हो पाया है।
क्षेत्र के लोगों पर अंबिका की बेहतर पकड़ः बाराहाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. रश्मि कुमारी कहती हैं कि अंबिका का काम सराहनीय है। क्षेत्र के लोगों पर उसकी पकड़ है। संस्थागत प्रसव से लेकर एएनसी जांच में उसका योगदान  काबिलेतारीफ है। यहां तक कि कोरोना काल में भी उसने बेहतर काम किया है। आशा अंबिका कहती हैं कि मैं सिर्फ अपना काम करती हूं। क्षेत्र में लगातार रहती हूं। लोगों से बात करती रहती हूं। इस वजह से मुझे हर चीज की जानकारी रहती है। इसी का परिणाम है कि मैं अपना काम बेहतर तरीके से कर पाती हूं। साथ ही घरवाले का भी सहयोग रहता है, जिस वजह से मैं अपना काम बेहतर तरीके से कर पाती हूं।

ऑल म्यूचुअल फंड ड्रिस्ट्रिब्यूटर वेलफेयर एसोसिएशन के वर्कशॉप में देश भर दिग्गज फंड मैनेजर शिरकत किए

-2030 में देश की अर्थव्यवस्था 6 ट्रिलियन डॉलर होगा- अखिल चतुर्वेदी, सीबीओ, मोतीलाल ओसवाल

नईदिल्ली-

ऑल म्यूचुअल फंड ड्रिस्ट्रिब्यूटर वेलफेयर एसोसिएशन ने एक दिवसीय फंड मैनेजर के साथ कार्यशाला का आयोजन किया। यह वर्कशॉप दिग्गज इनवेस्टमेंट सर्विसेज मोतीलाल ओसवाल के सहयोग से किया गया। इस वर्कशॉप में देशभर के म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट ने भाग लिया।

इस मौके पर मोतीलाल ओसवाल के चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी ने अपने प्रजेंटेंशन दिए। जिसमें उन्होंने बाजार के उतार-चढ़ाव पर विस्तृत चर्चा की।

अखिल चतुर्वेदी ने आज के बाजार को बेहतर बताया। भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और आने वाला सय भारतीय बाजार का ही है इस आशय का उन्होंने प्रजेंटेशन साफ तौर पर दिखाया।

अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि 10 साल देश में उच्च मध्यवर्ग बढ़ा है जो निवेश करने में हिचक नहीं रहे हैं। अखिल चतुर्वेदी ने इस वर्कशॉप का आयोजन करने के लिए आमदवा को धन्यवाद दिया। अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि आज देश में कई तरह के प्रयोग किए गए जो सफल हो रहे हैं। अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि देश के छोटे छोटे शहर से तेजी से निवेश हो रहा है। दो तीन बड़े डिजिटल कंपनी रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों को टक्कर देने वाली है इसका परिदृश्य साफ दिख रहा है। अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि देश में कई छोटी कंपनियों का भविष्य है। आज भारत की अर्थव्यवस्था 3 ट्रिलियन डॉलर का है जो हम जल्द ही 6 ट्रिलियन डॉलर का होगा। जो आपको 2030 में दिखेगा।

अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि सायलेंट विकास हो रहा है देश में। इस खास मौके पर कनक जैन ने फंड मैनेजर ने इनवेस्टर एक्सपर्ट को मोटिवेट किया।

इस मौके पर फंड मैनेजर संजीव गर्ग ने कहा कि इस आयोजन में देश भर के दिग्गज इनवेस्टर प्लानर ने भाग लिया और अपनी प्रश्नों का उत्तर भी जाना। इस कार्यशाला के कई विशेषता थी उसमें इनवेस्टर प्लानर ने अपने अपने मिशन भी तय किए।

कार्यक्रम के अंत में अमदवा के अध्यक्ष संजय भान ने सभी का धन्यवाद किया एवं आगे के कार्यक्रमों का विवरण देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन अभी और किए जाने हैं जिसमें देश भर के दिग्गज एक्सपर्ट अपने विचार आपके सामने रखेंगे। संजय भान ने कहा कि अमदवा कई भविष्य की विशेष योजनाओं पर कार्य कर रहा है जिसका फायदा आने वाले दिनों में दिखेगा।

गौरतलब है कि अमदवा लगातार ऐसे वर्कशॉप समय समय पर करता है ताकि इनवेस्टर की समस्या का समाधान हो सके।

विश्व पर्यावरण दिवस  पर जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के खाली जगह पर लगाए जाएंगे औषधीय पौधे 

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–  जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर आयोजित की जाएगी साइकिलिंग, योगाभ्यास सि सहित अन्य शारीरिक गतिविधियां
– इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति और जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा जिला और प्रखण्ड स्तर के स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को जारी की गई चिट्ठी
मुंगेर, 4 जून।  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रविवार को जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के खाली जगह पर लगाए जाएंगे औषधीय पौधे । इसके साथ ही फलदार और फूलदार पौधे भी लगाए जाएंगे । इसके साथ ही विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला के सभी हेल्थ एंड सेंटर पर साइकिलिंग, योगाभ्यास सहित अन्य शारीरिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएगी ।  विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन विभाग, कृषि विभाग और मनरेगा के सहयोग से पौधरोपण करने को ले राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सभी जिलों के सिविल सर्जन सि सहित अन्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
मुंगेर के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष जिला के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के खाली जगहों पर वन विभाग के सहयोग से औषधीय, फलदार और फूलदार पौधों को पौधरोपण करवाने का निर्देष प्राप्त हुआ है। इनमें यथासंभव स्थानीय प्रजातियों को प्रमुखता दी जाएगी और फलदार पौधे भी वैसे लगवाए जाएंगे  जिनका उपयोग रसोई घर में किया जा सके, जैसे आंवला , सहजन, करीपत्ता इत्यादि। इसके साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में इंडोर प्लांटेशन पर भी जोर दिया जाएगा।
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबन्धक (डीपीएम) नसीम रजि ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल से लेकर प्रखण्ड स्तर पर पीएचसी/ सीएचसी और  स्वास्थ्य उपकेंद्र स्तर पर पौधरोपण को ले सदर अस्पताल और अनुमंडल अस्पताल के अस्पताल उपाधीक्षक और प्रखण्ड स्तर पर पीएचसी और सीएचसी के एमओआईसी को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दे दिए गए। उन्होंने बताया कि पौधारोपन के लिए वैसी जगहों को चिह्नित  किया जाना है जहां कोई भवन का निर्माण नहीं किया गया हो। उन्होंने बताया कि वर्तमान में नीम, जामुन, बेल, आंवला , हरा इमली, अश्वगन्धा, हरा बढहर, अशोक, शरीफा, सागवान, बोन, यूकेलिप्टस एवं पेंगोफ़ोन का पौधा जिलास्तर पर उपलब्ध है।
जिला स्वास्थ्य समिति के जिला योजना समन्वयक (डीपीसी) विकास कुमार ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रविवार को जिला के सभी हेल्थ और वेलनेस सेंटर ओर औषधीय, फलदार और फूलदार पौधों का पौधरोपण के साथ- साथ साइकिलिंग, योगाभ्यास के साथ-साथ अन्य शारीरिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएगी।

बच्चे के क्रियाकलाप बताते हैं उनका विकास

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– जन्म के बाद से लगातार बदलते रहते हैं भाव, होता है मानसिक व शारीरिक विकास
– बच्चे के हाव-भाव से पता चलता है कि वह किस गति से आगे बढ़ रहा है
– दो, चार, छह, नौ और 12वें माह में दिखता है अलग-अलग बदलाव
स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डाॅ रूपा सिंह  ने दी विस्तृत रूप से जानकारी
लखीसराय, 4जून ।  नवजात के जन्म से उसके एक वर्ष के होने तक उचित पोषण के अलावा उसकी शारीरिक क्रियाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत होती है। उसके शारीरिक व्यवहार से उसके विकास का अंदाजा लगाया  जा सकता है। भूख लगने पर रोने, खुश रहने पर खेलने-हंसने से उसके  स्वस्थ रहने का अंदाजा लगाया जा सकता है। उसकी अन्य शारीरिक क्रियाओं से भी उसके विकास की गति की परख की जा सकती है। लखीसराय सदर अस्पताल में तैनात स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डाॅ रूपा कुमारी बताती हैं कि यह काल (जन्म से एक वर्ष) उसके पूर्ण मानसिक और शारीरिक विकास की रूपरेखा तय करती है। इस दौरान शिशु के क्रियाकलापों से उसकी विकास की गति की परख की जा सकती है।
जन्म के बाद दो माह के होने पर शिशु का विकास:
स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डाॅ रूपा सिंह  बताती हैं कि शुरुआत के दिनों में नवजात शिशु के सिर का विशेष ख्याल रखना होता है। इस वक्त शिशु को सिर्फ एक ही तरह  से सुलाना चाहिए ताकि उनके सिर पर खास दबाव न पड़े। आमतौर पर शिशु के सिर का मूवमेंट चार से पांच महीने के बाद अच्छे से घूमने लगता है। वहीं जन्म के दूसरे माह की सबसे बड़ी  घटना शिशु की मुस्कान होती है। वह लोगों की बातों की ओर ध्यान भी देने लगता है। पहले माह में लगभग 20 घंटे और उसके बाद एक बार में थोड़े लंबे समय के लिए शिशु सोएगा।
चार माह के होने पर शिशु में आता  बदलाव:
चार माह के होने पर शिशु की दृष्टि लगातार बढ़ती रहती है। स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डाॅ रूपा सिंह  बताती हैं कि इस महीने वह एक जैसे दिखने वाले रंगों में अंतर करना और आकर्षित होना शुरू कर सकता है। हाथ पैर मारने के अलावा खिलौनों से खेलना और दोनों हाथों से पकड़ बनाना शुरू करेगा। वहीं जब वह इन्हें पकड़ लेगा तो मुंह में डालने का प्रयास करेगा। रोने के अलावा व गुस्से का भी प्रदर्शन करना इस उम्र में शुरू कर देगा।
छह माह होने पर शिशु की बदली प्रवृति:
वह अब अपनी आखों और व्यवहार से गुस्से और प्रतिक्रिया को व्यक्त करेगा। इस उम्र में वह रोने के साथ-साथ संचार के अन्य तरीके भी सीखेगा। अब वह कुलबुलाकर, बड़बड़ाकर और अलग-अलग मुखाकृतियों व भावों के जरिये अपनी बातें बताने  के लिए मेहनत करेगा। शिशु इस महीने में अपने दोनों दिशाओं में पलटना सीख जाता है।
नौवां माह और शिशु का विकास:
नौ महीने के बच्चा कुछेक कदम चलने लगेगा। हालांकि  इस दौरान उसे  सहारे की जरूरत होगी। वहीं अब शिशु घुटनों को मोड़ना और खड़े होने के बाद बैठना भी सीखने लगेगा।  शिशु अब अपनी जरूरतों जैसे खिलौने और इच्छाओं जैसे खाने को भी जाहिर करने लगेगा। इशारे जैसे टाटा, बाय बाय वह करना सीख जाएगा।
एक साल का होते ही शिशु में आता है  बदलाव:
डाॅ रूपा सिंह  कहती हैं कि 12वें माह यानी एक साल का होते ही शिशु के खेलने के तरीके में बदलाव आ जाता है। अब शिशु चीजों को उठाने और छोटी वस्तुओं को हाथ में लेकर घुमाना फिराना शुरू कर देगा। अब वह अपने पसंदीदा खेल पहले से ज्यादा शोर करके  खेलेगा। चीजों को धकेलने, फेंकने और नीचे गिरा देना उसके लिए मजेदार होगा है। दूसरों को अपने खेल में शामिल करेगा। अकेले रहने पर रोने लगेगा। अब ज्यादा कदमों के साथ चलना शुरू कर देगा। यह सब क्रिया स्वस्थ रहते हुए बच्चा कर रहा है तो समझें की वह सामान्य और सही रूप से बड़ा हो रहा है। हालांकि इसके  साथ  कई  जांच और चिकित्सीय जांच सलाह शामिल हैं जो आप लेकर उसके विकास की गति को परख सकते हैं।

समय पर कोविड वैक्सीन की दूसरी और प्रीकाॅशनरी डोज सुनिश्चित कराने को लगातार चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान 

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– तीनों डोज लेने वाले लाभार्थियों को सुविधाजनक तरीके से दी जा रही है वैक्सीन
– संभावित चौथी लहर से बचाव को जरूर कराएं वैक्सीनेशन और रहें सुरक्षित
खगड़िया, 04 जून-
जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का कोविड वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले भर में लगातार वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। जिसके तहत चयनित और चिह्नित  जगहों पर नियमित तौर पर शिविर आयोजित कर लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। इस दौरान तीनों (पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी) डोज लेने वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेट किया जा रहा है। ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लाभार्थियों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और दूसरा व प्रीकाॅशनरी डोज लेने की समयावधि पूरी  करने वाले लाभार्थियों को निर्धारित समय पर वैक्सीन दी जा सके। इसके अलावा एएनएम, आशा कार्यकर्ता समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा वैक्सीनेशन कराने को लेकर योग्य लाभार्थियों को जागरूक भी किया जा रहा है।
– ऑंगनबाड़ी केंद्रों पर भी चल रहा है वैक्सीनेशन अभियान :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, जिले में लगातार नियमित तौर पर कोविड वैक्सीनेशन अभियान जारी है। लाभार्थियों को वैक्सीनेशन कराने में कोई असुविधा नहीं हो, इसके मद्देनजर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी शिविर आयोजित कर योग्य लाभार्थियों को टीकाकृत किया जा रहा है। गर्मी छुट्टी के कारण वर्तमान में सभी स्कूल बंद हैं । जिसके कारण स्कूली बच्चों को आंगन बाड़ी केंद्रों पर ही टीकाकृत किया जा रहा है। इसके अलावा जो लोग शिविर स्थल पर आने में असमर्थ हैं, उन्हें घर जाकर वैक्सीन दी जा रही है।  ताकि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित हो सके और इस घातक महामारी से सामुदायिक स्तर पर लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें । वहीं, उन्होंने कहा, मैं सभी योग्य लाभार्थियों से अपील करता हूँ कि चौथी लहर आए या नहीं आए पर सभी लोग जरूर वैक्सीनेशन कराएं।
– संभावित चौथी लहर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन कराना जरूरी :
स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और लोगों की सावधानी और  सकारात्मक सहयोग से तीसरी लहर करीब-करीब खत्म हो चुकी  है। किन्तु, अभी और सावधानी एवं सतर्कता जारी रखने की जरूरत है। क्योंकि, एकबार फिर चौथे लहर आने की आशंका जताई जा रही है। इसलिए, संभावित चौथे लहर से बचाव के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को वैक्सीनेशन कराना बेहद जरूरी है। साथ ही कोविड गाइडलाइन का पालन समेत अन्य सावधानी और सतर्कता भी जारी रखने की जरूरत है। इसलिए, जो भी लोग किसी भी कारणवश अबतक वैक्सीन नहीं ले पाएं और जो पहली  या दूसरी  डोज लेने के पश्चात अगली  डोज लेने की समयावधि पूरी  कर चुके हैं, वह जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराएं और चौथे लहर के प्रभाव से खुद को सुरक्षित रखें।
– इन मानकों का करें पालन और कोविड संक्रमण से रहें दूर रहें :
– बारी आने पर निश्चित रूप से वैक्सीनेशन कराएं।
– नियमित तौर पर लगातार साबुन या अल्कोहल युक्त पदार्थों से अच्छी तरह हाथ धोएं।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
– लक्षण महसूस होने पर तुरंत जाँच कराएं।

कोरोना काल में फरिश्ता बनकर आई आशा कुमारी मीनाक्षी

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-कुमारी मीनाक्षी के काम की ग्रामीण भी कर रहे हैं तारीफ
-मास्क पहनने से लेकर हाथ धोने के तरीके लोगों को बताया
बांका, 4 जून-
पिछले दो साल में कोरोना जहां एक चुनौती के रूप में सामने आया तो उससे निपटने में भी कुछ लोगों ने एक योद्धा की तरह अपनी जीवटता दिखाई। जिले के बाराहाट प्रखंड के पंजवारा लहेरी टोला की आशा कार्यकर्ता कुमारी मीनाक्षी की भी गिनती ऐसे ही योद्धाओं में होती है। स्वास्थ्य से जुड़ा काम करने के नाते उनकी एक जिम्मेदारी भी थी, लेकिन जब आप अपनी ड्यूटी से एक कदम आगे निकल जाती हैं तो उसकी तारीफ फिर सभी लोग करने लगते हैं। खासकर वैसे लोग जो आपकी सेवा का लाभ उठा रहे हैं। ग्रामीण तो मीनाक्षी के कोरोना काल के योगदान की तुलना किसी फरिश्ते से करते हैं।
मुखिया भोला पासवान कहते हैं कि कोरोना जब शुरू हुआ था तो हमलोग डरे-सहमे थे। हमेशा इस फिराक में रहते थे कि इससे बचने के लिए क्या करें। ऐसी विषम परिस्थिति में आशा कुमारी मीनाक्षी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रही थीं। उस समय लोग घर से निकलने से भी कतराते थे, लेकिन मीनाक्षी न सिर्फ निकलती थी, बल्कि लोगों को समय देकर कोरोना से बचाव को लेकर समझाती भी थी। पूरी पंचायत के लोग उसके योगदान की तारीफ करते हैं।
ग्रामीण हुए जागरूकः लहेरी टोला के ही शंभू साह कहते हैं कि हाथ धोने से लेकर मास्क पहनने तक की जानकारी हमलोगों को कुमारी मीनाक्षी से ही मिली। वैसे तो टीवी  देखते और रेडियो में सुनते थे, लेकिन उसे ठीक से समझ नहीं पाते थे, लेकिन जब मीनाक्षी ने बताया कि ये कोरोना से बचने के उपाय हैं तब हमलोगों को बात समझ में आई। हमलोगों ने जाना कि घर से बाहर निकलते समय  मास्क लगाना है और बाहर से घर आने पर 20 सेकेंड तक हाथ की धुलाई करनी है। गांव के ही विजय किशोर सिंह कहते हैं कि गांव में हमलोग एक साथ बैठते थे, लेकिन मीनाक्षी ने ही समझाया कि आपस में दूरी बनाकर रहें। एक-दूसरे के बीच दो गज की दूरी जरूरी है। सामाजिक दूरी का पालन करें। दिनेश सेन गुप्ता कहते हैं कि शुरुआत में गांव के लोग उसकी बात को दरकिनार कर देते थे, लेकिन धीरे-धीरे उसकी बातों को सभी लोग मानने लगे। इसका लोगों को फायदा भी मिला।
प्रभारी बोलीं, मीनाक्षी का योगदान सराहनीयः बाराहाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. रश्मि कुमारी कहती हैं कि कोरोना काल में वैसे तो सभी लोगों ने बढ़-चढ़कर काम किया, लेकिन कुमारी मीनाक्षी का योगदान महत्वपूर्ण है। गांव के लोग भी उसके योगदान को सराहते हैं। मुझे खुशी है कि ऐसी आशा कार्यकर्ता मेरे क्षेत्र में हैं। कुमारी मीनाक्षी कहती हैं कि 2010 से बतौर आशा मैं काम कर रही हूं। मुझे खुशी है कि गांव के लोगों के साथ-साथ प्रभारी भी मेरे काम को बेहतर मानती हूं। कोरोना काल में भी मैं  प्रसव से जुड़े काम को भूली नहीं। एक साथ मैंने दोनों  काम किया। वह समय चुनौतीपूर्ण भले ही था, लेकिन मेरे लिए यादगार बन गया।

कोरोना टीकाकरण के साथ साथ हो  रहा है गर्भवती  और नवजात शिशुओं का नियमित टीकाकरण

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– नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी है  नियमित टीकाकरण
–  संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को किया जाता है जागरूक
मुंगेर, 3 जून-
  जिला में नियमित रूप से कोरोना टीकाकरण अभियान चल रहा है। इस दौरान 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन की  प्रीकॉशन डोज़ दी  जा रही  है। इसके साथ- साथ गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं का भी लगातार नियमित टीकाकरण कराया जा रहा है,  ताकि गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं का ससमय नियमित टीकाकरण सुनिश्चित हो सके और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवा का लाभ मिल सके। इसे सार्थक रूप देने के लिए जिला के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर वीएचएसएंडएन दिवस पर प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा जिला के प्रत्येक पीएचसी, सीएचसी  सहित सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित टीकाकरण की व्यवस्था  है। इन सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा सेविका एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. आनंद शंकर शरण सिंह ने बताया कि नवजात शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाने के लिए नियमित तौर पर टीके दिए जाते हैं । मुख्य रूप से तपेदिक (टी.बी), डिप्थीरिया, परटूसिस (काली खांसी), टेटनस, खसरा (मिजल्स) तथा पोलियो (पोलियोमाइटिस) जैसी बीमारियों से बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं का नियमित टीकाकरण किया जाता है ताकि भविष्य में इन बीमारियों से इन्हें बचाया जा सके । विभिन्न प्रकार के टीका के नियमित रूप से दिए गए पर्याप्त खुराक के बाद नवजात शिशुओं एवं गर्भवती महिलाओं को प्रतिरक्षित किया जा सकता है ताकि आने वाले दिनों में वो इन घातक या अपंग करने वाली बीमारियों से काफी हद तक बच सके।
– गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशु के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि  सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने एवं शिशु के स्वस्थ्य शरीर के निर्माण के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। इसलिए जिला में कोविड के साथ-साथ नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का भी आयोजन कर योग्य लाभार्थी का नियमित टीकाकरण किया जा रहा है ताकि ससमय नियमित टीकाकरण भी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण के दौरान शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए जाते हैं। गर्भवती को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। इसके साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– संस्थागत प्रसव को लेकर भी किया जाता है जागरूक :
उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके परिवार वालों को संस्थागत प्रसव को लेकर भी जागरूक किया जाता है। इस दौरान यह बताया जाता है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। यहां योग्य एवं प्रशिक्षित एएनएम द्वारा चिकित्सकों की मौजूदगी में प्रसव कराया जाता है। इसलिए, सुरक्षित और सामान्य प्रसव को अपनाने के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है।
नियमित टीकाकरण की शत प्रतिशत सफ़लता के लिए समय- समय पर किया जाता है प्रचार प्रसार :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार रौशन ने बताया कि बच्चों को नियमित रूप से दिए जाने वाले टीकाकरण की शत प्रतिशत सफलता के लिए राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ (एआईएच) के द्वारा प्रचार- प्रसार किया जाता है। इसके अलावा सीफार के माध्यम  से भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के बीच  जागरूकता लाने में सीफार का  महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके साथ ही ज़िले में यूनिसेफ, केयर इंडिया, यूएनडीपी, डब्ल्यूएचओ के सहयोग से चलाये जा रहे नियमित टीकाकरण जैसे- जन्म के तुरंत बाद बीसीजी, हेपेटाइटिस, पोलियो, रोटा, पीसीवी, खसरा के साथ ही विटामिन ए की खुराक भी नियमित रूप से लेना आवश्यक होता है।