नियमित टीकाकरण • जिले के  आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती महिलाएं और बच्चों को लगाया गया टीका 

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– सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत प्रसव को लेकर किया गया जागरूक
– गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी, इसलिए जरूर कराएं टीकाकरण
खगड़िया, 03 जून-
शुक्रवार के जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित आंगन बाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण (आर आई) शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें गर्भवती महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण किया गया। यह टीकाकरण संबंधित आंगन बाड़ी केंद्र की सेविका और स्थानीय आशा कार्यकर्ता के सहयोग से संबंधित क्षेत्र की एएनएम द्वारा किया गया। इस दौरान टीकाकरण के लिए आई गर्भवती महिलाओं को जरूरी सलाह दी गई और गर्भावस्था के दौरान खानपान, रहन-सहन, व्यक्तिगत  साफ-सफाई समेत गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता सहित अन्य आवश्यक जानकारी भी दी गई। साथ ही धातृ महिलाओं को बच्चों के स्वास्थ्य और मजबूत शरीर निर्माण के लिए नियमित टीकाकरण कितना जरूरी है, नियमित टीकाकरण कराने से होने वाले फायदे समेत अन्य आवश्यक जानकारियाँ दी गई।
– विभिन्न प्रकार के गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ देवनंदन पासवान ने बताया, विभिन्न प्रकार की  गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। इसलिए, मैं जिले की  तमाम गर्भवती महिलाओं  से  और 0 से 02 आयु वर्ग के बच्चों के अभिभावकों से अपील करता हूँ कि अपने बच्चों का निश्चित रूप से बेहिचक टीकाकरण कराएं। इससे ना केवल गंभीर बीमारी से बचाव होगा, बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलेगा तथा बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होगा। वहीं, उन्होंने बताया, शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी, मिजल्स, विटामिन ए, डीपीटी बूस्टर डोज, मिजल्स बूस्टर डोज और बूस्टर ओपीवी के अलावा जेएई (जापानी बुखार) के  टीके लगाए जाते हैं। जबकि, गर्भवती महिलाओं को टेटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका भी लगाया जाता है। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारी से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है।
– स्वच्छता पर दिया गया बल :
आईसीडीएस के जिला समन्वयक अंबुज कुमार ने बताया, नियमित टीकाकरण के दौरान स्वच्छता पर भी बल दिया गया। इसको लेकर गर्भवती महिलाओं को व्यक्तिगत साफ-सफाई समेत आसपास के परिसर में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखने को कहा गया। ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं हों। वहीं, उन्होंने बताया, नियमित टीकाकरण का सप्ताह में दो दिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजन किया जाता है। प्रत्येक सप्ताह के बुधवार और शुक्रवार को टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
– संस्थागत प्रसव को लेकर किया गया जागरूक :
टीकाकरण के दौरान मौजूद गर्भवती महिलाओं को सामान्य और सुरक्षित प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के उपलब्ध समुचित व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। जिसके दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा केंद्र पर मौजूद गर्भवती महिलाओं को बताया गया कि सुरक्षित प्रसव के प्रसव पूर्व जाँच कराना जरूरी है। सरकार द्वारा जाँच के लिए पीएचसी स्तर पर मुफ्त व्यवस्था की गई। ताकि हर गर्भवती महिला आसानी से जाँच करा सके । हर माह 09 तारीख को पीएचसी में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती की जाँच की जाती है और चिकित्सकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया जाता है।

परिवार नियोजन के स्थाई और अस्थाई दोनों साधन सुरक्षित और कारगर 

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– जिले के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्र समेत सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में उपलब्ध है अस्थाई साधन की व्यवस्था
– गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना  बेहद जरूरी
लखीसराय, 03 जून-
परिवार नियोजन योजना में शामिल दोनों साधन (स्थाई और अस्थाई) पूरी तरह सुरक्षित, काफी कारगर व प्रभावी है। इसलिए, सुविधानुसार दोनों में से कोई भी साधन को बेहिचक अपना सकते हैं। खासकर ऐसे महिला, जो परिवार नियोजन के स्थाई साधन को अपनाने के लिए तैयार और इच्छुक है। किन्तु, उसका शरीर ऑपरेशन के लिए सक्षम नहीं है, वह बेहिचक अस्थाई साधन अपना सकती  हैं। अस्थाई साधन भी स्थाई साधन की तरह ना केवल कारगर है बल्कि, काफी सुरक्षित और प्रभावी भी है। इसलिए, परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए इच्छुक और योग्य महिलाएँ दोनों में से कोई भी साधन को अपना सकती  हैं।
– उप स्वास्थ्य  केंद्र समेत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है अस्थाई साधन की व्यवस्था :
सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया, परिवार नियोजन के दोनों साधन पूरी तरह सुरक्षित और काफी प्रभावी हैं । इसलिए, इच्छुक और योग्य महिलाएँ बेहिचक कोई भी साधन को अपना सकती  हैं। वहीं, उन्होंने कहा, जिले के सभी स्वास्थ्य उप केंद्र से लेकर सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में अस्थाई साधन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। जबकि, पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल में दोनों (स्थाई और अस्थाई) साधन उपलब्ध हैं ।  इसलिए, जो भी योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थी अस्थाई साधन को अपनाना चाहते हैं, वह अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान जाकर उपलब्ध सुविधा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने बताया, इसको लेकर संबंधित क्षेत्र की एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा योग्य और इच्छुक लाभार्थियों को जागरूक भी किया जाता और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधा की जानकारी देकर लाभ लेने के लिए प्रेरित भी किया जाता है।
– गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन साधन को अपनाना बेहद जरूरी :
डीसीएम पारस मणि ने बताया, समाज के हर तबके के सभी परिवार को गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना बेहद जरूरी है। क्योंकि, हम तभी गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जी सकते  और बच्चे को उचित परवरिश व अच्छी शिक्षा दे सकते हैं, जब हमारा परिवार छोटा और सीमित होगा। छोटा और सीमित परिवार के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना सबसे पहली नींव है। वहीं, उन्होंने बताया, इसको लेकर सरकार द्वारा तमाम गतिविधियों का आयोजन कर लोगों को जागरूक भी किया जाता है।
– परिवार नियोजन की स्थाई साधन अपनाने वाली लाभार्थियों को सरकार द्वारा दी जाती है प्रोत्साहन राशि :
परिवार नियोजन की स्थाई साधन अपनाने वाली लाभार्थियों को सरकार द्वारा ना सिर्फ सभी प्रकार की मुफ्त सुविधा की  व्यवस्था की गईबल्कि, प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। जिसमें प्रसव के उपरांत एक सप्ताह के अंदर इस साधन को अपनाने पर तीन हजार एवं इसके बाद अपनाने पर दो हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जबकि, पुरुष नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ दिया जाता है।
– जानें, क्या है स्थाई और अस्थाई साधन के उपाय :
परिवार नियोजन के दो साधन हैं। पहला स्थाई और दूसरा अस्थाई। स्थाई साधन में महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी की सुविधा पीएचसी स्तर से लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों  में उपलब्ध है। जबकि, अस्थाई साधन के रूप में छाया, अंतरा, काॅपर-टी एवं कंडोम की सुविधा उपलब्ध है। इस सुविधा की स्वास्थ्य उप केंद्र स्तर पर भी पर व्यवस्था की गई है। जहाँ योग्य और इच्छुक लाभार्थी जाकर सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

घर-घर दस्तक अभियान से कोरोना टीकाकरण में आएगी तेजी

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-छूटे ना कोई अबकी बार थीम पर किया जा रहा काम
-स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर लोगों को कर रहे चिह्नित
भागलपुर, 3 जून.-
जिले में कोरोना टीकाकरण को लेकर घर-घर दस्तक अभियान चल रहा है। इसे लेकर छूटे ना कोई अबकी बार थीम पर काम किया जा रहा है। बुधवार को शुरू हुआ यह अभियान 31 जुलाई तक चलेगा। इन दो महीनों के दौरान अधिक से अधिक लोगों को कोरोना का टीका देने के लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है। हालांकि जिले में बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है, इसके बावजूद कुछ ऐसे लोग बचे हैं जिन्होंने अभी तक कोरोना का टीका नहीं लिया है। इस अभियान के तहत टीका से वंचित लोगों को चिह्नित कर उनके गांव में ही टीकाकरण की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के एक-एक घर जाकर 12 वर्ष से अधिक उम्र के कोरोना टीका से वंचित लोगों की सूची तैयार करेंगे और उस गांव में किस दिन टीकाकरण की व्यवस्था होगी, इसकी जानकारी देंगे। साथ ही टीकाकरण वाले दिन चिह्नित लोगों को टीकाकरण केंद्रों तक लाने के लिए प्रेरित भी करेंगे।
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि इस अभियान से कोरोना टीकाकरण में तेजी आएगी। जिले के शत प्रतिशत लोगों को कोरोना का टीका लग जाए, इसे लेकर लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसी सिलसिले में यह अभियान शुरू किया गया है। जिले के वैसे लोग जिनलोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, उनसे मेरी अपील है कि इस अभियान के तहत टीका जरूर ले लें। जिले में शत प्रतिशत टीकाकरण हो जाने से सभी लोग काफी हद तक कोरोना से सुरक्षित हो जाएंगे। इसलिए इसे सामाजिक जिम्मेदारी समझकर इसमें अपना योगदान दें। साथ ही जिन लोगों ने कोरोना टीकाकरण को लेकर अभी तक प्रीकॉशन डोज नहीं ली है, वे लोग भी जल्द से जल्द ले लें। प्रीकॉशन डोज लेने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। इसलिए अगर समय पूरा हो गया हो तो प्रीकॉशन डोज जरूर ले लें।
एक दिन, एक पंचायत के तहत हो रहा कामः इस अभियान के तहत एक दिन में एक पंचायत में टीकाकरण की व्यवस्था होगी। इस दौरान पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। साथ ही सहयोगी संस्था के कर्मी भी इसमें अपना योगदान करेंगे। साथ ही टीकाकरण सत्र पर शुगर, बीपी और हीमोग्लोबिन जांच की व्यवस्था भी रहेगी। ताकि लाभुक सत्र तक पहुंचकर टीका लेने में अपनी दिलचस्पी दिखाएं। इसके अलावा भी अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं, ताकि अधिक-से-अधिक लोग कोरोना का टीका लेने में रुचि दिखाएं।
‘मेरा वार्ड प्रतिरक्षित” की होगी घोषणाः इस अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी और आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका भी सहयोग कर रही हैं। इस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता टीकाकरण सत्र के एक दिन पहले अपने क्षेत्र के लोगों को जाकर इसकी जानकारी देंगी। साथ ही सूची में दर्ज लाभुकों को टीकाकरण सत्र तक लाने का काम भी सुनिश्चित करेंगी। इनलोगों में प्रतिस्पर्धा कायम हो सके, इसे लेकर मेरा वार्ड या फिर मेरी पंचायत प्रतिरक्षित की घोषणा भी की जाएगी। इससे एक-दूसरे में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे टीका लेने वालों की संख्या भी बढ़ेगी।

समुदाय के लोगों को टीबी के प्रति किया जागरूक

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-टीबी के लक्षण और बचाव की दी गई जानकारी
-6 समुदायों के 30 लोगों ने प्रशिक्षण में लिया भाग
भागलपुर, 3 जून.-
नाथनगर प्रखंड स्थित चंपानगर के वार्ड नंबर दो के सामुदायिक भवन में कर्नाटका हेल्थ प्रमोशनल ट्रस्ट (केएचपीटी) ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से टीबी को लेकर प्रशिक्षण का आयोजन किया। इसमें चंपानगर के 6 समुदाय के 30 लोगों ने भाग लिया। इसमें बुनकर एसोसिएशन से 8, मोमिन लाइब्रेरी से 4,  बुनकर कामगार सेवा समिति से 4, श्री मनसा देवी मंदिर समिति से 5, श्वेतांबर जैन मंदिर समिति से 4 और अंग मदद फाउंडेशन से 5 लोगों ने भाग लेकर प्रशिक्षण लिया। मौके पर केएचपीटी की डिस्ट्रिक्ट लीड आरती झा, कृष्णा कुमारी, सुमित कुमार और फैयाज खान समेत कई लोग उपस्थित थे।
इस मौके पर आरती झा ने   लोगों को बताया कि लगातार दो हफ्ते खांसी होना, बलगम के साथ खून आना, वजन कम होना, शाम के वक्त अधिक पसीना आना आदि लक्षण टीबी के हैं। इस तरह की परेशानी होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में जाएं और जांच करवाएं। जांच में अगर टीबी की पुष्टि हो जाती है तो तत्काल इलाज करवाएं। टीबी के इलाज की व्यवस्था सरकार की तरफ से मुफ्त में होता है। साथ टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए 500 रुपये प्रतिमाह सहायता राशि भी मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण में समुदाय के लोग शामिल रहे। इनकी बातों को लोग ज्यादा गौर से सुनेंगे औऱ इसका असर पड़ेगा। लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
टीबी मरीजों से नहीं करें भेदभावः सीडीओ डॉ. दीनानाथ ने कहा कि पहले टीबी बीमारी के प्रति छुआछूत अधिक थी, लेकिन जागरूकता बढ़ने से इसमें कमी आई है। टीबी एक संक्रामक  बीमारी जरूर है, लेकिन इसका इलाज संभव है। अगर कोई टीबी के लक्षण वाले लोग दिखते हैं तो उससे घृणा करने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करें। ऐसा करने से मरीज का इलाज समय पर हो जाएगा और वह ठीक हो जाएगा। उसके ठीक होने से इसका संक्रमण दूसरों में भी नहीं होगा। साथ ही टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़ें। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने की आशंका रहती है। एमडीआर टीबी होने पर ठीक होने में ज्यादा समय लग जाता है। इसलिए बीच में दवा नहीं छोड़ें।
टीबी को हल्के में नहीं लेना चाहिएः डॉ  दीनानाथ ने कहा कि टीबी की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक टीबी का मरीज साल में 10 से अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है और फिर आगे वह कई और लोगों को भी संक्रमित कर सकता है, इसलिए लक्षण दिखे तो तत्काल इलाज कराएं। एक के जरिए कई लोगों में इसका प्रसार हो सकता है। अगर एक मरीज 10 लोगों को संक्रमित कर सकता है तो फिर वह भी कई और लोगों को संक्रमित कर देगा। इसलिए हल्का सा लक्षण दिखे तो तत्काल जांच कराएं और जांच में पुष्टि हो जाती है तो इलाज कराएं। डॉ  दीनानाथ ने कहा कि टीबी अब छुआछूत की बीमारी नहीं रही। इसे लेकर लोगों को अपना भ्रम तोड़ना होगा। टीबी का मरीज दिखे तो उससे दूरी बनाने के बजाय उसे इलाज के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और जागरूकता बढ़ने से इस बीमारी पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। ऐसा करने से कई और लोग भी इस अभियान में जुड़ेंगे और धीरे-धीरे टीबी  समाप्त हो जाएगा।

सही जानकारी ही है डेंगू से बचाव का रास्ता

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     -साफ़-सफ़ाई के प्रति रहें सतर्क, डेंगू होने का ख़तरा होगा कम
 -सही प्रबंधन के अभाव में डेंगू हो सकता है जानलेवा
 -बुखार होने पर चिकित्सकीय सलाह है जरुरी
लखीसराय,2 जून-
मच्छर जनित रोगों में डेंगू अति गंभीर रोगों की श्रेणी में आता है। बरसात के मौसम में इस बीमारी का प्रकोप बढ़ जाता है । गर्मी के बाद बारिश के मौसम में डेंगू के मरीजों में बढ़ोतरी होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए डेंगू से बचाव के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है ।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ.  अश्वनी  कुमार ने बताया कि आम लोगों के बीच सटीक जानकारी नहीं होने के कारण उनके लिए डेंगू ख़तरनाक साबित हो सकता है। यदि इसके विषय में आम लोगों को पूरी जानकारी दी जाए तो लोगों के मन से डेंगू का भय ख़त्म हो सकता ह।.
डॉ. कुमार  ने बताया कि एडीज नामक मच्छर के काटने से डेंगू बुखार होता है। यह मच्छर साफ़ पानी में पनपता है जो ज़्यादातर दिन में ही काटता है। डेंगू को हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है। 3 से 7 दिन तक लगातार बुखार, तेज सर में दर्द,पैरों के जोड़ों मे तेज दर्द, आँख के पीछे तेज दर्द, चक्कर एवं उल्टी, शरीर पर लाल धब्बे आना एवं कुछ मामलों में आंतरिक एवं बाह्य रक्तस्राव होना डेंगू के लक्ष्ण में शामिल है। डेंगू का कोई सटीक इलाज तो उपलब्ध नहीं है पर कुशल प्रबंधन एवं चिकित्सकों की निगरानी से डेंगू को जानलेवा होने से बचाया जा सकत है। इसलिए जरूरी है कि डेंगू के लक्ष्ण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह ली जाए। डेंगू के लक्ष्ण दिखाई देने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा खाना ख़तरनाक हो सकता है।
केवल 1 प्रतिशत डेंगू ही जानलेवा : डेंगू मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं. साधारण डेंगू, डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम। ज़्यादातर लोगों को साधारण डेंगू ही होता है जो कुछ परहेज करने से ठीक हो जाता है। डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम गंभीर श्रेणी मे आते हैं.। यदि इनका शीघ्र इलाज शुरू नहीं किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।. डेंगू हैमरेजिक बुखार एवं डेंगू शॉक सिंड्रोम में मरीजों के उपचार के लिए  रक्तचाप एवं शरीर में खून के स्राव का निरीक्षण करना जरूरी होता है। राष्ट्रीय वेक्टर बोर्न रोग नियंत्रण विभाग के अनुसार 1 प्रतिशत डेंगू ही जानलेवा है, लेकिन बेहतर प्रबंधन के अभाव में डेंगू 50 प्रतिशत तक ख़तरनाक हो सकता है।
ऐसे करें डेंगू से बचाव;
§  आस-पास साफ़-सफाई रखें एवं घर में पानी जमा होने ना दें
§  सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें
§  बच्चों को फुल आस्तीन की कमीज एवं फुल पैंट पहनाएं
§  वाटर कूलर या नल के पास पानी जमा नहीं होने दें

समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन जरूरी

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– शिशु को माँ के सीने से चिपकाने से स्थानांतरित होती है ऊर्जा
– धड़कन सुनकर शिशु को राहत का होता है एहसास, मिलता है आराम
खगड़िया, 02 जून।
समय के पूर्व जन्म लेने वाले शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कंगारू मदर केयर का पालन करना बहुत जरूरी है। दरअसल, समय से पूर्व जन्म लेने वाले शिशु का ना सिर्फ वजन कम होता  बल्कि, ऐसे शिशु जन्म लेने के बाद भी कई तरह की  समस्याओं से घिर जाते हैं। ऐसे शिशु के  स्वस्थ शरीर निर्माण के लिए विशेष ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए कंगारू मदर केयर  को अपनाना सबसे आसान एवं बेहतर उपाय है। इस उपाय को अपनाने से ना सिर्फ शिशु स्वस्थ्य होता बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होता है।
– बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का होता है निर्माण :
खगड़िया सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ योगेन्द्र नारायण प्रेयसी ने बताया कंगारू मदर केयर बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास के निर्माण में काफी सहयोग करता है। बच्चा जब अपनी माँ के नजदीक रहता तो माँ और बच्चे के बीच भावनात्मक रिश्ता मजबूत होता है। यह बिना खर्च का सबसे बेहतर और आसान उपाय है।
– क्या है कंगारू मदर केयर, इसका उपयोग किस तरह होता है :
कंगारू मदर केयर एक ऐसा उपाय है जो कम वजन के साथ जन्म लेने वाले शिशु के स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अपनाया जाता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। स्तनपान बेहतर होता है। बच्चे का तापमान सही रहता  और वह संक्रमण (इन्फेक्शन) से दूर रहता है। बच्चे और माँ के बीच रिश्ता मजबूत होता है। इसमें माँ अपने सीने पर सीधे पोजिशन में शिशु को चिपकाकर रखती हैं। इस स्थिति में माँ की  छाती पूरी तरह खुली होनी चाहिए। जिससे माँ के शरीर की गर्माहट आसानी से और जल्दी शिशु में स्थानांतरित हो सके। इससे शिशु का तापमान सही रहता है। कंगारू मदर केयर माँ के अलावा पिता व परिवार के अन्य सदस्य भी दे सकते हैं। सिर्फ इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि शिशु को कंगारू मदर केयर की सुविधा देने वाले स्वस्थ्य हों।
– कंगारू मदर केयर अपनाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा भी किया जाता है जागरूक :
समय पूर्व जन्म लेने वाले शिशु और जन्म के पश्चात शारीरिक पीड़ा से ग्रसित शिशु के परिजनों को एएनएम, आशा, केयर इंडिया के कर्मियों एवं स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य कर्मियों द्वारा भी कंगारू मदर केयर तकनीक को अपनाने के लिए जागरूक किया जाता है। दरअसल, यह तकनीक बिना खर्च का सबसे आसान और बेहतर उपाय है। इसके अलावा ऐसे शिशु का गृह भ्रमण कर भी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा देखभाल एवं आवश्यक मॉनिटरिंग की जाती है। ताकि शिशु को किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी होने पर उनका समय पर उचित उपचार हो सकें और बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके।
– इन बातों का रखें ख्याल :-
– बच्चे को साफ हाथों से ही छुएं।
– यदि माँ बुखार, सर्दी या खाँसी से पीड़ित हो तो शिशु को कंगारू मदर केयर नहीं दें।
– घर का कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति नवजात को कंगारू मदर केयर प्रदान कर सकते हैं।

कालाजार उन्मूलन अभियान को सफल बनाने को दवाओं का कोर्स पूरा करना है जरूरी

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– लक्षण को पहचानने के बाद इलाज होगा आसान, सदर अस्पताल में उपलब्ध है बेहतर इलाज की सुविधा
– कालाजार से बचाव का सबसे बेहतर और सरल उपाय है स्वच्छता और सावधानी
मुंगेर, 2 जून-
कालाजार उन्मूलन अभियान को सफल बनाने के लिए दवाओं का कोर्स पूरा करना है जरूरी । उक्त बात पत्रकारों से बातचीत करते हुए डिस्ट्रिक्ट वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि भारत में कम-से-कम 20 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग मौजूद हैं। जिससे देशभर में लाखों लोग प्रभावित होते हैं। इनमें प्रायः अधिकतर लोग गरीब एवं संवेदनशील वर्ग से होते हैं। आज विश्व में हर पांच में से एक व्यक्ति एनटीडी रोगों से पीड़ित है। दुनिया में इन 11 बीमारियों का भारी बोझ भारत पर भी है। इन रोगों से रोगी में दुर्बलता तो आती ही है, कई स्थितियों में ये पीड़ित व्यक्ति की मौत का कारण भी बनती हैं। उन्होंने बताया कि उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग में कालाजार भी एक प्रमुख रोग है जिसके कारण जिले में हर साल इसके मरीज पाए जाते ।
बालू मक्खी के काटने से होता है कालाजार :
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ.अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि कालाजार धीरे-धीरे विकसित होने वाली एक बीमारी है जो मादा फ्लैबोटामस अर्जेंटाइप्स (बालू मक्खी) के काटने से होता है। बालू मक्खी कम रोशनी और नमी वाले स्थानों जैसे मिट्टी की दीवारों की दरारों, चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है इसलिए इसको ले विशेष सावधानी बरतनी जरूरी है। मक्खी के काटने के 15 से 20 दिन बाद व्यक्ति में कालाजार के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पोस्ट कालाजार डर्मल लिसमिनिएसीस (पीकेडीएल) यानि त्वचा का कालाजार एक ऐसी स्थिति है, जब एलडी बॉडी नामक परजीवी त्वचा कोशिकाओं पर आक्रमण कर उन्हें संक्रमित कर देता  और वहीं रहते हुए विकसित होकर त्वचा पर घाव के रूप में उभरने लगता है। इसकी वजह से रोगी को बार- बार बुखार आने के साथ- साथ भूख में कमी, वजन का घटना, थकान महसूस होना, पेट का बढ़ जाना आदि इसके लक्षण के रूप में दिखाई देने लगते हैं। ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीक के अस्पताल में जाकर अपनी जांच करवानी चाहिए। बीमारी के ठीक होने के बाद भी कुछ व्यक्ति के शरीर पर चकता या दाग होने लगता है। ऐसे व्यक्तियों को भी अस्पताल जाकर अपनी जांच करानी चाहिए।
जिला में 29 मई तक कालाजार का कोई केस नहीं है जबकि पीकेडीएल का सिर्फ एक केस सदर प्रखंड में है :
उन्होंने बताया कि जिला में अभी कालाजार का एक भी एक्टिव केस नहीं है। जबकि पिछले वर्ष 2021 में जिला के बरियारपुर प्रखण्ड में 4 केस चिह्नित हुए थे। वहीं 29 मई 2022 तक जिला के सदर प्रखंड में पीकेडीएल का सिर्फ एक केस मिला है।  पिछले वर्ष जिला भर में पीकेडीएल का कोई केस नहीं मिला था। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जिला के बरियारपुर प्रखण्ड में कालाजार से एक ब्यक्ति की मौत रिपोर्ट की गई थी।
कालाजार को जड़ से खत्म करने के लिए दवाओं का कोर्स पूरा करना जरूरी :
उन्होंने बताया कि कालाजार का इलाज पूर्णरूपेण संभव है। लेकिन इसके लिए 12 सप्ताह तक दवा का नियमित सेवन जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिला के सदर अस्पताल में कालाजार रोगियों के सही इलाज की ब्यवस्था है। इस बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस )के लिए  आर.के. 39 आरडीटी किट, बोन मैरो, स्प्लेनिक एस्पिरेशन का इस्तेमाल करते हैं।
मरीजों को आर्थिक सहायता का मिलेगा लाभ :
वेक्टर डिजीज कंट्रोल ऑफिसर संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि कालाजार से पीड़ित रोगी को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में बीमार व्यक्ति को राज्य सरकार द्वारा 6600 रुपए और केंद्र सरकार द्वारा 500 रुपए दिए जाते हैं। यह राशि कालाजार संक्रमित व्यक्ति को संक्रमण के समय में दिया जाता है। वहीं पीकेडीएल चमड़ी से जुड़े कालाजार संक्रमित रोगी को केंद्र सरकार की तरफ से 4000 रुपए दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि जिला भर में कालाजार के 115 की इन्फॉर्मर मौजूद हैं जिनमें से 25 प्राइवेट डॉक्टर्स, 3 पीआरआई मेंबर्स, 11 कम्युनिटी मेम्बर, 38 प्राइवेट लैब सहित अन्य लोग हैं।

टीबी मरीजों की परेशानियों को किया गया दूर

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-नवगछिया में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की हुई बैठक
-केएचपीटी के सहयोग से बैठक का किया गया आयोजन
भागलपुर, 2 जून-
नवगछिया के अतिरिक्त यक्ष्मा केंद्र में गुरुवार को कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) के सहयोग से टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. भारती सिन्हा ने की। इस दौरान बताया गया कि टीबी उन्मूलन को लेकर केएचपीटी स्वास्थ विभाग को कई तरह से सहयोग कर रहा है। इसमें से एक है केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक को नियमित तौर पर प्रत्येक माह आयोजित करवाना। इसी कड़ी में यह बैठक आयोजित की जा रही है। इस दौरान विभिन्न तबकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
बैठक में 19 इलाजरत मरीज, दो टीबी से ठीक हो चुके मरीज, 18 उनकी देखभाल करने वाले और  सामुदायिक संरचना के 3 प्रतिनिधि उपस्थित हुए थे। टीबी के वर्तमान मरीजों को इलाज के दौरान होने वाली परेशानियों का समाधान डॉक्टर भारती सिन्हा के द्वारा किया गया। इस समाधान में न सिर्फ दवा, बल्कि उसके अलावा शारीरिक गतिविधियां और योग के द्वारा भी उन समस्याओं को समाधान करने के उपाय बताए गए। मरीजों को निश्चय पोषण योजना की राशि मिलने में होने वाली कठिनाइयों का समाधान वरीय यक्ष्मा  पर्यवेक्षक मनीष माधव के द्वारा किया गया। इस बैठक में केयर गिवर के द्वारा मरीजों की देखभाल में हो रही परेशानियों पर भी चर्चा की गई। उन समस्या का समाधान डॉ. भारती सिन्हा द्वारा किया गया।
टीबी मुक्त सर्टिफिकेट का वितरणः बैठक में केएचपीटी के बिहैवियर चेंज सॉल्यूशन मॉडल के तहत टीबी के वर्तमान इलाजरत मरीजों को टीबी स्टार्टर किट के रूप में डायरी प्रदान की गयी। टीबी का इलाज पूरा कर चुके मरीज को टीबी मुक्त सर्टिफिकेट दिया गया। इस डायरी का कैसे उपयोग करना है, इसके बारे में सीसी संदीप कुमार के द्वारा सभी मरीजों को विस्तारपूर्वक बताया गया। इसके साथ ही संदीप कुमार द्वारा टीबी मरीजों को दवा खाने के महत्व को कहानी के माध्यम से समझाया गया। बैठक में आई हुई सामुदायिक संरचना के सदस्यों के द्वारा टीबी मरीजों को दी जा रही मदद के बारे में भी बताया गया। बैठक का समापन करते हुए केएचपीटी के कोऑर्डिनेटर संदीप कुमार ने बताया कि उन्हें अगले माह फिर इस बैठक में आना है।
ऐसे कार्यक्रम से टीबी मरीजों को फायदाः डॉ भारती सिन्हा ने कहा कि जागरूकता के माध्यम से ही टीबी को हमलोग खत्म करेंगे। इस तरह के कार्यक्रम लगातार हो रहे हैं। इससे टीबी के मरीजों को काफी फायदा हो रहा है। खासकर इलाजरत मरीजों को होने वाली परेशानियों का समाधान किया जा रहा है। यह बहुत ही उत्साहजनक है। इस तरह के कार्यक्रम से टीबी बीमारी के इलाज को लेकर संकोच करने वाले लोग भी सामने आएंगे। समाज के लोगों में टीबी के प्रति छुआछूत कम होगा। टीबी को समाप्त करने के लिए सामाजिक चेतना बहुत ही जरूरी है।

कोरोना टीकाकरण को लेकर हर घर दस्तक अभियान शुरू

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-छूटे ना कोई अबकी बार थीम पर किया जा रहा काम
-घर-घर जाकर लोगों को चिह्नित करने का चल रहा काम
बांका, 2 जून-
जिले के एक-एक व्यक्ति को कोरोना का टीका लग जाए, इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। हालांकि जिले में बड़ी संख्या में लोगों ने कोरोना का टीका ले लिया है, इसके बावजूद कुछ ऐसे लोग बचे हैं जिन्होंने अभी तक कोरोना का टीका नहीं लिया है। इसे लेकर बुधवार से जिले में हर घर दस्तक अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 31 जुलाई तक चलेगा। इसले तहत टीका से वंचित लोगों को चिह्नित कर उनके गांव में ही टीकाकरण की व्यवस्था उपलब्ध करवाई जा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के एक-एक घर जाकर 12 वर्ष से अधिक उम्र के कोरोना टीका से वंचित लोगों की सूची तैयार करेंगे और उस गांव में किस दिन टीकाकरण की व्यवस्था होगी, इसकी जानकारी देंगे। साथ ही टीकाकरण वाले दिन चिह्नित लोगों को टीकाकरण केंद्रों तक लाने के लिए प्रेरित भी करेंगे।
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि जिले के शत प्रतिशत लोगों को कोरोना का टीका लग जाए, इसे लेकर लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसी सिलसिले में यह अभियान शुरू किया गया है। जिले के वैसे लोग जिनलोगों ने अभी तक टीका नहीं लिया है, उनसे मेरी अपील है कि इस अभियान के तहत टीका जरूर ले लें। जिले में शत प्रतिशत टीकाकरण हो जाने से सभी लोग काफी हद तक कोरोना से सुरक्षित हो जाएंगे। इसलिए इसे सामाजिक जिम्मेदारी समझकर इसमें अपना योगदान दें। साथ ही जिन लोगों ने कोरोना टीकाकरण को लेकर अभी तक प्रीकॉशन डोज नहीं ली है, वे लोग भी जल्द से जल्द ले लें। प्रीकॉशन डोज लेने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी होगी। इसलिए अगर समय पूरा हो गया हो तो प्रीकॉशन डोज जरूर ले लें।
एक दिन, एक पंचायत के तहत हो रहा कामः इस अभियान के तहत एक दिन में एक पंचायत में टीकाकरण की व्यवस्था होगी। इस दौरान पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। साथ ही सहयोगी संस्था के कर्मी भी इसमें अपना योगदान करेंगे। साथ ही टीकाकरण सत्र पर शुगर, बीपी और हीमोग्लोबिन जांच की व्यवस्था भी रहेगी। ताकि लाभुक सत्र तक पहुंचकर टीका लेने में अपनी दिलचस्पी दिखाएं। इसके अलावा भी अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं, ताकि अधिक-से-अधिक लोग कोरोना का टीका लेने में रुचि दिखाएं।
‘मेरा वार्ड प्रतिरक्षित” की होगी घोषणाः इस अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी और आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका और सहायिका भी सहयोग कर रही हैं। इस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता टीकाकरण सत्र के एक दिन पहले अपने क्षेत्र के लोगों को जाकर इसकी जानकारी देंगी। साथ ही सूची में दर्ज लाभुकों को टीकाकरण सत्र तक लाने का काम भी सुनिश्चित करेंगी। इनलोगों में प्रतिस्पर्धा कायम हो सके, इसे लेकर मेरा वार्ड या फिर मेरी पंचायत प्रतिरक्षित की घोषणा भी की जाएगी। इससे एक-दूसरे में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे टीका लेने वालों की संख्या भी बढ़ेगी।

कोविड संक्रमण की चौथी लहर आए या नहीं, पर सुरक्षा के मद्देनजर वैक्सीनेशन कराना जरूरी

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– कोविड से बचाव को वैक्सीन ही सबसे बेहतर और कारगर उपाय, इसलिए जरूर कराएं वैक्सीनेशन
– शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन जरूरी, इसलिए हर व्यक्ति समझें अपनी जिम्मेदारी
लखीसराय, 01 जून-
कोविड संक्रमण की तीसरी लहर का दौर खत्म हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग की बेहतर व्यवस्था, मजबूत प्रशासनिक सिस्टम और लोगों के सकारात्मक सहयोग की बदौलत तीनों लहरों को मात मिली। किन्तु, एकबार फिर से कोविड संक्रमण की चौथी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। देश के अलग-अलग राज्यों में संक्रमण के केस मिलने के कारण लोगों की चिंता बढ़ गई। किन्तु, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि, इस घातक महामारी से बचाव के लिए हर आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीनेशन कराने की जरूरत है। क्योंकि, इस घातक महामारी से बचाव के लिए वैक्सीन सबसे आसान, बेहतर और कारगर उपाय है। इसलिए, जो भी लोग अबतक किसी भी कारणवश वैक्सीन नहीं ले पाए हैं, या फिर जो दूसरी या तीसरी (प्रीकाॅशनरी) डोज लेने की समयावधि पूरी कर चुके हैं, ऐसे लोग यथाशीघ्र अपने नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर वैक्सीन जरूर लें और चौथी लहर के प्रभाव से खुद को सुरक्षित करें।
– वैक्सीनेशन के साथ सतर्कता और सावधानी भी जरूरी :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, कोविड जैसी घातक महामारी से सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीन तो सबसे बेहतर और कारगर उपाय है ही। इसके अलावा इस महामारी के प्रभाव से दूर रहने के सतर्कता और सावधानी भी बेहद जरूरी है। इसलिए, मैं तमाम जिले वासियों से अपील करता हूँ कि वैक्सीनेशन जरूर कराएं और बचाव के लिए कोविड गाइडलाइन का पालन भी जारी रखें। हम इसी की बदौलत तीन लहरों को मात देने में सफल हुए हैं। वहीं, उन्होंने बताया कि जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर जिले में लगातार वैक्सीनेशन अभियान जारी है।
– कोविड गाइडलाइन का पालन कर कई संक्रामक बीमारी से रहेंगे दूर :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, कोविड गाइडलाइन का पालन, जैसे – मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी का पालन, नियमित तौर पर हाथों की सफाई समेत जारी अन्य गाइडलाइन के पालन से लोग ना सिर्फ कोविड संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे बल्कि, कई तरह संक्रामक बीमारी के प्रभाव से भी दूर रहेंगे। इसलिए, सामुदायिक स्तर पर सभी लोगों को गाइडलाइन का पालन करना चाहिए।
– 07 जून तक जिले में चलेगा घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान :
डीआईओ सह एसीएमओ डाॅ अशोक कुमार भारती ने बताया, जल्द से जल्द शत-प्रतिशत लोगों का वैक्सीनेशन सुनिश्चित कराने को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। जिसे सार्थक रूप देने के लिए मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य समिति के अपर कार्यपालक निदेशक ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रदेश के सभी जिलों के डीआईओ समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। जिसमें 01 से 07 जून तक जिले के सभी प्रखंडों में घर-घर दस्तक वैक्सीनेशन अभियान चलाने का निर्देश प्राप्त हुआ था। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं स्वास्थ्य प्रबंधक को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। वहीं, उन्होंने बताया, उक्त साप्ताहिक अभियान के दौरान एक-एक व्यक्ति से संपर्क कर वैक्सीनेट किया जाएगा और इस दौरान प्राथमिकता के आधार पर तीनों डोज (पहला, दूसरा और प्रीकाॅशनरी) के लाभार्थियों का वैक्सीनेशन किया जाएगा। जिले में बुधवार से अभियान की शुरुआत कर दी गई है।